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‘पश्चिम बंगाल को इस्लामिक स्टेट बनाकर बांग्लादेश से जोड़ना चाहती हैं ममता बनर्जी’ – BJP और TMC मंत्री में भिड़ंत

"जिस तरह से बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के घर और मंदिर जलाए जाते हैं, उसी तरह से आज ममता दीदी के शासनकाल में पश्चिम बंगाल में बहुसंख्यकों के घर और दुकानें जलाईं जा रहीं। पुलिस मूकदर्शक बनी है। क्योंकि पुलिस को चुपचाप तमाशा देखने के लिए कहा गया है। पश्चिम बंगाल में दमन कर हिंदुओं को अल्पसंख्यक बनाने की कोशिश हो रही है।"

मोदी सरकार में राज्य मंत्री देबाश्री चौधरी ने बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर बयान दिया है कि वो पश्चिम बंगाल को बांग्लादेश से जोड़ना चाहती हैं। देबाश्री चौधरी ने तो यहाँ तक कह दिया कि यही वो कारण है जिसके लिए ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल को इस्लामिक स्टेट बनाने में जुटीं हैं।

ममता के मंत्री गुलाम रब्बानी को आया गुस्सा

पश्चिम बंगाल की रायगंज सीट से सांसद देबाश्री चौधरी इसके बाद TMC नेताओं के निशाने पर आ गई हैं। ममता बनर्जी सरकार में श्रम राज्य मंत्री गुलाम रब्बानी ने कई ट्वीट किए। एक ट्वीट में उन्होंने लिखा:

“विपक्ष की आलोचना मुद्दों पर आधारित होनी चाहिए, कल्पनाओं पर नहीं। कल तक उनके सहकर्मी गृहमंत्री भी ममता बनर्जी से बांग्लादेशी लोगों की मदद के लिए सीमाओं को खोलना चाहते थे। आखिर दिल्ली में बैठकर कौन ‘तथाकथित जिहादियों’ की मदद करना चाहता है?”

ममता बनर्जी के मंत्री गुलाम रब्बानी ने कटाक्ष कसते हुए कहा, “मैं और क्या कह सकता हूँ, समय पर दवाएँ लें और सुरक्षित रहें। लॉकडाउन आपको प्रभावित कर रहा है।”

ज्ञात हो कि देबाश्री चौधरी ने एक इंटरव्यू में यह भी कहा था कि ममता बनर्जी सरकार रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को पाल-पोस रही हैं। उन्होंने कहा कि देश-विरोधी तत्वों को बंगाल में सरकारी संरक्षण मिल रहा है।

पश्चिम बंगाल के हुगली जि़ले के तेलिनीपाड़ा इलाके में फैली हिंसा को लेकर केंद्रीय राज्य मंत्री देबाश्री चौधरी ने ममता बनर्जी सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा:

“जिस तरह से बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के घर और मंदिर जलाए जाते हैं, उसी तरह से आज ममता दीदी के शासनकाल में पश्चिम बंगाल में बहुसंख्यकों के घर और दुकानें जलाईं जा रहीं। पुलिस मूकदर्शक बनी है। क्योंकि पुलिस को चुपचाप तमाशा देखने के लिए कहा गया है। पश्चिम बंगाल में दमन कर हिंदुओं को अल्पसंख्यक बनाने की कोशिश हो रही है।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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