भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार (27 जुलाई 2026) को घोषणा की कि वह 15वीं-16वीं शताब्दी के रहस्यवादी कवि-संत गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती (प्रकाश पर्व) मनाने के लिए एक राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम शुरू करने जा रही है। ‘समरसता संकल्प अभियान’ (सामाजिक समरसता और संकल्प के लिए अभियान) 29 जुलाई 2026 से 20 फरवरी 2027 तक लगभग सात महीनों तक चलेगा।
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर स्थित उनकी जन्मस्थली पर इसका आधिकारिक उद्घाटन होगा। उत्तर प्रदेश के समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने जानकारी दी कि 28 और 29 जुलाई को विशेष कार्यक्रमों के बीच इसकी शुरुआत की जाएगी। 28 जुलाई को सीर गोवर्धनपुर में पवित्र माटी का पूजन किया जाएगा।
गुरु रविदास स्मारक परिसर से 131 कलशों को एक भव्य जुलूस में औपचारिक पूजा के लिए उनके जन्मभूमि मंदिर ले जाया जाएगा। इसके लिए उत्तर प्रदेश के विभिन्न राज्यों और जिलों से कलश लेकर टीमें वाराणसी में एकत्र होंगी। प्रत्येक गाँव को इस मिट्टी से भरे 104 कलश सौंपे जाएँगे और अन्य 27 कलश दूसरे राज्यों में भेजे जाएँगे।
उत्तर प्रदेश के 98 संगठनात्मक जिला इकाइयों और छह क्षेत्रीय प्रभागों तथा 27 अन्य राज्यों के भाजपा प्रतिनिधि कलश प्राप्त करेंगे और फिर उन्हें विभिन्न मंदिरों और संत सम्मेलनों में ले जाएँगे। माघ पूर्णिमा और गुरु रविदास जयंती के अवसरों पर भारत के विभिन्न हिस्सों में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएँगे।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और डेरा सचखंड बल्लां के प्रमुख व गुरु रविदास जन्म स्थान मंदिर के प्रमुख संत निरंजन दास सभी इस औपचारिक शुरुआत के अवसर पर मौजूद रहेंगे।
दीपोत्सव से लेकर महीने भर की यात्रा तक, भाजपा ने बनाई कई कार्यक्रमों की योजना
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और दुष्यंत कुमार गौतम ने जानकारी देते हुए बताया कि वाराणसी से पूरे भारत में 131 कलश भेजे जाएँगे। 21,000 स्थानों पर सामाजिक समरसता की पहल की जाएगी और 51,000 मंदिरों में दीपोत्सव मनाया जाएगा। एक ‘गुरु रविदास महाराज समरसता दीप अभियान’ आयोजित किया जाएगा, जिसके तहत रविदास घाट और उनके स्मारक स्थल पर 11,000 दीपक जलाए जाएँगे। 29 जुलाई को भाजपा के सभी मंडल और संत को समर्पित मंदिर दीपोत्सव मनाएँगे।
पार्टी पदाधिकारियों ने रेखांकित किया कि मोदी सरकार ने गुरु रविदास की विरासत को सहेजने के लिए उनके मूल स्थान, तीर्थ मार्गों, हवाई अड्डों, विशेष ट्रेनों का विकास किया है और उनसे जुड़े कई स्थलों का जीर्णोद्धार किया है। चुघ के अनुसार, इस हालिया प्रयास का उद्देश्य समानता, सामाजिक शांति और जन जागरूकता पर उनके उपदेशों का प्रसार करना है।
उन्होंने ध्यान दिलाया कि उस दौर में सिकंदर खान लोदी, तुगलक और तैमूर या तमेरलेन देश भर में “धर्मांतरण कराने और मंदिरों को ध्वस्त करने में लगे हुए थे।” गौतम ने कहा, “उस समय उनका एक ही नारा था ‘तलवार या कुरान’। उस मध्यकालीन काल में लोगों के पास अपने विचार व्यक्त करने का कोई साधन नहीं था और हर तरफ व्यापक संकट का माहौल था।”
उन्होंने आगे कहा कि “गोस्वामी तुलसीदास, कबीर दास, संत तुकाराम, गुरु नानक और चैतन्य महाप्रभु सहित भक्ति आंदोलन के कई महान संत उभरे,” जिन्होंने “संस्कृत में संरक्षित ज्ञान और मूल्यों को अपनी-अपनी क्षेत्रीय भाषाओं के माध्यम से जनता तक पहुँचाया, जिससे सार्वजनिक जागरूकता पैदा हुई और पूरे देश में समाज को नई दिशा मिली।”
भाजपा प्रवक्ता ने बताया कि गुरु रविदास ने उस समय बहुत महत्वपूर्ण योगदान दिया था और इसलिए कबीर द्वारा उन्हें ‘संत शिरोमणि गुरु रविदास जी’ की उपाधि दी गई थी। गौतम के अनुसार, समतावादी समाज की उनकी 650 साल पुरानी अवधारणा अपने समय से काफी आगे थी। साल 1837 में अब्राहम लिंकन ने गुलामी के खिलाफ एक अभियान शुरू किया था और डॉ. बी.आर. आंबेडकर ने संविधान बनाते समय समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के मूल्यों को स्थापित किया था।
उन्होंने कहा उन लोगों से बहुत पहले गुरु रविदास पहले ही ‘छोटे-बड़े सब बसे’ का संदेश दे चुके थे। उन्होंने एक जातिविहीन समाज और ‘बेगमपुरा’ की कल्पना की थी, एक ऐसी जगह जहाँ न दुख है और न ही कोई कष्ट।
भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य ने जोर देकर कहा कि इसका उद्देश्य सभी समूहों के बीच सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना और यह सुनिश्चित करना है कि विकसित भारत के निर्माण में हर समुदाय शामिल हो। उन्होंने कहा कि संत का मार्ग ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ की आधारशिला के रूप में कार्य करता है और यह मिशन सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता के लिए एक व्यापक आंदोलन बन जाएगा।
आर्य ने जोर देकर कहा, “गुरु रविदास ने मानव कल्याण, समानता और सामाजिक समरसता के लिए काम किया। वे धर्मांतरण के खिलाफ थे। उनके संदेश और विचारों को 650 जयंती कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों तक पहुँचाया जाएगा।” उन्होंने खुलासा किया कि इस उद्देश्य के लिए 20 से 23 जुलाई तक राज्य स्तरीय कार्यशालाएँ, 25 से 27 जुलाई तक जिला स्तरीय कार्यशालाएँ और 19 जुलाई को दिल्ली में एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया था। ये तैयारियाँ 18 राज्यों में हुईं।
अभियान के मुख्य रूप से पाँच चरण निर्धारित हैं। राष्ट्रीय, राज्य, जिला और मंडल स्तर पर 29 जुलाई से 10 सितंबर तक ‘श्री गुरु रविदास महाराज कलश वंदन अभियान’ चलाया जाएगा।
उत्तर प्रदेश के 98 संगठनात्मक जिला इकाइयों और छह क्षेत्रीय प्रभागों तथा 27 अन्य राज्यों के भाजपा प्रतिनिधि इन कलशों को प्राप्त करेंगे और फिर उन्हें विभिन्न मंदिरों और संत सम्मेलनों में ले जाएँगे। 29 जुलाई से 31 अगस्त तक एक ‘संत संपर्क अभियान’ भी चलाया जाएगा, जिसमें संतों, महात्माओं, गुरुओं और महंतों से आशीर्वाद देने का अनुरोध किया जाएगा।
5 अक्टूबर से 5 नवंबर तक श्री गुरु रविदास महाराज समरसता यात्रा’ जालंधर से वाराणसी के लिए रवाना होगी, जो जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, चंडीगढ़, हरियाणा, दिल्ली और मध्य प्रदेश से होकर गुजरेगी। 26 नवंबर से 15 जनवरी तक ‘श्री गुरु रविदास महाराज छात्रवास संपर्क अभियान’ प्रस्तावित है।
इसके अलावा, छात्र, छात्रावास और धार्मिक संगठन संपर्क अभियान और जुलूसों में भाग लेंगे। भाजपा गुरबाणी पाठ और भजन संध्या का आयोजन करने के लिए भी तैयार है। इसके शीर्ष नेता समरसता संकल्प सभा को संबोधित करेंगे और पार्टी को कम से कम 25,000 लोगों की उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
महत्वपूर्ण मोड़ पर लिया गया अहम निर्णय
साल 2027 की शुरुआत में उत्तर प्रदेश और पंजाब सहित पाँच राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। हालाँकि भाजपा नेताओं ने इस यात्रा का इन चुनावों से किसी भी तरह के संबंध का कड़ाई से खंडन किया है। पार्टी ने अतीत में भी बड़े पैमाने पर गुरु रविदास जयंती मनाई है।
द इंडियन एक्सप्रेस ने अंदरूनी सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी है कि यह पहली बार है जब उनके अनुयायी दलित समुदाय, जिन्हें रविदासिया कहा जाता है और जो पंजाब तथा उत्तर प्रदेश में भारी संख्या में केंद्रित हैं, से जुड़ने के लिए इतना लंबा अभियान तैयार किया गया है।
उत्तर प्रदेश में दलितों की आबादी 21% है और राज्य की 403 विधानसभा सीटों में से 84 सीटें उनके लिए आरक्षित हैं। 2022 के विधानसभा चुनावों में भाजपा और उसकी सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) ने मिलकर 63 अनुसूचित जाति (एससी) सीटें जीती थीं, जबकि तत्कालीन समाजवादी पार्टी के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 20 सीटें मिली थीं।
पंजाब की 117 सदस्यीय विधानसभा में जहाँ दलितों की आबादी 32% है, इस समुदाय के लिए 34 सीटें आरक्षित हैं। 2022 के विधानसभा चुनावों में भगवा पार्टी इनमें से एक भी सीट हासिल नहीं कर पाई थी। पंजाब के दोआबा क्षेत्र में 12 लाख से अधिक रविदासिया रहते हैं, जिसमें कपूरथला, होशियारपुर, नवांशहर और जालंधर जिले शामिल हैं। इस क्षेत्र में दलितों की आबादी लगभग 45% है, जो राज्य के औसत से कहीं अधिक है।
दिलचस्प बात यह है कि 2022 के विधानसभा चुनावों की तारीख को 14 फरवरी से बदलकर 20 फरवरी कर दिया गया था, जब पार्टियों ने आपत्ति जताई थी कि तारीखों का गुरु रविदास जयंती से टकराव होगा, जिसके कारण बड़ी संख्या में रविदासिया वाराणसी जाते हैं। उत्तर प्रदेश और पंजाब की राजनीति में दलितों की प्रमुखता ने आगामी चुनावों से पहले समुदाय पर भाजपा का विशेष ध्यान आकर्षित किया है।
विशेष रूप से जालंधर और वाराणसी के बीच यह यात्रा पंजाब और उत्तर प्रदेश के बीच के शहरों और गांवों, विशेष रूप से बड़ी दलित आबादी वाले क्षेत्रों में रुकेगी।
मोदी सरकार ने गुरु रविदास का ऐतिहासिक सम्मान कैसे किया
बता दें कि 1 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरु रविदास की 649वीं जयंती मनाने के लिए पंजाब पहुँचे थे। वे जालंधर में वैश्विक रविदासिया समुदाय के एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र अत्यधिक प्रभावशाली डेरा सचखंड बल्लां गए, जहाँ उन्होंने माथा टेका और सार्वजनिक समारोहों में भाग लिया।
20वीं शताब्दी की शुरुआत में स्थापित डेरा सचखंड बल्लां धीरे-धीरे दलित सशक्तिकरण का एक केंद्र बन गया, विशेष रूप से SC समुदाय की उस जाति के बीच जो ऐतिहासिक रूप से छुआछूत का शिकार रहे हैं और आमतौर पर चमड़ा उद्योग से जुड़े हैं। इसके प्रमुख संत निरंजन दास को इस वर्ष पद्म श्री से सम्मानित किया गया है।
इसी तरह सरकार की ओर से इस महीने अमृतसर और वाराणसी के बीच पहली सीधी एसी ट्रेन ‘संत रविदास एक्सप्रेस’ शुरू की गई है, जिससे पीएम मोदी के संत निरंजन दास से मिलने के कुछ महीनों बाद रविदासिया समुदाय की एक पुरानी इच्छा पूरी हुई है। हर साल अनगिनत श्रद्धालु मुख्य रूप से दोआब क्षेत्र से गुरु रविदास की जयंती मनाने के लिए सीर गोवर्धनपुर जाते हैं।
बरसों से श्रद्धालु इस मार्ग पर सीधी ट्रेन का इंतजार कर रहे थे, खासकर डिब्बों में वातानुकूलन (एसी) की सुविधा के साथ। संत रविदास एक्सप्रेस यात्रा के आराम में सुधार करेगी और वार्षिक उत्सवों के दौरान भारी भीड़ के दबाव को कम करेगी। उनकी 650वीं जयंती के लिए एक विशेष टेंट सिटी की भी योजना बनाई जा रही है, जिसके एक बड़े समागम होने का अनुमान है।
पीएम मोदी 23 फरवरी 2024 को वाराणसी में पूज्य संत की 647वीं जयंती के अवसर पर शामिल हुए और उन्होंने इस अवसर पर भाषण दिया। उन्होंने संत रविदास संग्रहालय की आधारशिला भी रखी और सीर गोवर्धनपुर में उनके मंदिर के पास एक पार्क में उनकी मूर्ति का अनावरण किया।
साल 2022 में रविदास जयंती पर पीएम मोदी ने दिल्ली के करोल बाग स्थित श्री गुरु रविदास विश्राम धाम मंदिर का भी दौरा किया था। उन्होंने ‘शब्द कीर्तन’ में भाग लिया और संत को समर्पित भजनों की धुन पर उत्साहपूर्वक ‘झीका’ बजाया था।
(मूल रूप से ये रिपोर्ट अंग्रेजी में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)


