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श्रीधरन के भाजपा में शामिल होने पर शुरू लिबरल्स का विलाप: लोकतंत्र विरोधी बता कर खारिज किया मेट्रो का योगदान

“श्रीधरन जैसे लोग भारत को ऐसा क्षेत्र समझते हैं जिसे सिर्फ सड़कों और ट्रेन की ज़रूरत है। बल्कि ये नहीं देखते हैं कि इस देश के लाखों करोड़ों लोगों के कितने सपने और आकांक्षाएँ हैं।”

जब से मेट्रो मैन ई श्रीधरन ने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली है, तभी से ‘लिबरल’ जमात का प्रलाप चालू है। जैसे वह भूल ही चुके हैं कि मेट्रो रेल नेटवर्क के लिए उन्होंने कितनी अहम भूमिका निभाई थी। ऐसा करने वालों में ही शामिल है कोचि के अस्पताल का एक कार्डियोलोजिस्ट (हृदय रोग विशेषज्ञ)। कोचि स्थित मेडिकल ट्रस्ट हॉस्पिटल के डॉक्टर वरुण ने दावा किया कि श्रीधरन एक औसत ‘कट्टर ऊँची जाति’ वाले हिन्दू अंकल का प्रतिरूप हैं, जिसे तमाम विशेषाधिकार प्राप्त हैं। 

डॉक्टर वरुण का डिलीट किया गया ट्वीट

इसके बाद डॉक्टर ने ट्वीट में लिखा, “श्रीधरन जैसे लोग भारत को ऐसा क्षेत्र समझते हैं जिसे सिर्फ सड़कों और ट्रेन की ज़रूरत है। बल्कि ये नहीं देखते हैं कि इस देश के लाखों करोड़ों लोगों के कितने सपने और आकांक्षाएँ हैं।” पता नहीं ये दो बेहद अलग बातें आपस में कैसे जुड़ी हुई हैं क्योंकि लाखों लोग जिनके सपने हैं वो उन सड़कों और ट्रेनों से होकर ही जाते हैं और अपने सपने पूरे करते हैं। 

इसके बाद तमाम इंटरनेट यूज़र्स ने इस मुद्दे पर दी गई दलील में कमियाँ बताई। 

कुछ नेटिज़न्स ने तो डॉक्टर से पूछा कि क्या वो अपने मरीजों को देखने से पहले या उन्हें दवा बताने से पहले उनकी जाति पूछता है। क्योंकि उसके ट्वीट में मेट्रो ट्रेन पर दिए गए जाति के संदर्भ का कोई मतलब नहीं बनता है। 

इस तरह की तमाम आलोचनाओं के बाद डॉक्टर ने अपना ट्वीट डिलीट करके अपना अकाउंट सुरक्षित कर लिया। लेकिन डॉक्टर वरुण इकलौते ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जो श्रीधरन के भाजपा में शामिल होने पर वैचारिक विलाप कर रहे हैं। 

सम्राट नाम के ट्विटर यूज़र ने तो दिल्ली मेट्रो के लिए श्रीधरन का योगदान ही खारिज कर दिया। क्योंकि बतौर दिल्ली मेट्रो रेलवे कॉरपोरेशन के मुखिया, अलग-अलग सेक्शन समय से पूरे किए गए थे या निर्धारित अवधि से पहले। इस दौरान निर्धारित बजट का भी विशेष ध्यान रखा गया था लेकिन ‘लिबरल्स’ इसकी तरफ शायद ही ध्यान दें। 

ऐसे ही फिल्म अभिनेता सिद्धार्थ ने श्रीधरन की उम्र पर टिप्पणी करके उनके भाजपा में शामिल होने का मज़ाक बनाया। 

निखिल वागले नाम के मीडिया पर्सन ने तो उनकी तुलना जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर से कर दी। 

कुछ ने तो यहाँ तक कह दिया कि भाजपा की सदस्यता लेकर श्रीधरन ने लोकतंत्र का विरोध किया है। 

भाजपा में आधिकारिक रूप से शामिल होने के बाद मेट्रो मैन श्रीधरन ने बताया था कि वह पिछले काफी समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हुए थे। उन्होंने बताया कि वो अपने स्कूल के दिनों से ही एक स्वयंसेवक थे और संघ ने ही उनके जीवन के मूल्यों को तय करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।         

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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