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मूडीज ने सुधारी भारत की रेटिंग, नेगेटिव से हुई स्टेबल: राहुल गाँधी के अनुमान हुए फेल, लिबरल गिरोह ने साधी चुप्पी

मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने आज भारत सरकार की रेटिंग को लेकर आउटलुक को नेगेटिव से स्टेबल कर दिया है। साथ ही देश की विदेशी मुद्रा तथा स्थानीय मुद्रा दीर्घकालीन निर्गमकर्ता रेटिंग और स्थानीय मुद्रा रेटिंग बीएए3 पर बरकरार रखी गई है।

कोरोना संक्रमण के दस्तक देने के बाद भारत की बिगड़ती अर्थव्यवस्था ने मोदी सरकार को विपक्ष के निशाने पर ला दिया था। हालाँकि, अब स्थिति सुधर रही है। मंगलवार (अक्टूबर 5, 2021) को मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने भारत की सॉवरेन रेटिंग की पुष्टि करते हुए इसे नेगेटिव से बदलकर स्थिर यानी कि स्टेबल कर दिया। ये भारत की अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर अच्छी खबर है।

मूडीज ने बयान में कहा, “मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने आज भारत सरकार की रेटिंग को लेकर आउटलुक को नेगेटिव से स्टेबल कर दिया है। साथ ही देश की विदेशी मुद्रा तथा स्थानीय मुद्रा दीर्घकालीन निर्गमकर्ता रेटिंग और स्थानीय मुद्रा रेटिंग (सीनियर अनसिक्योर्ड) बीएए3 पर बरकरार रखी गई है।”

हालातों में सुधार को लेकर मूडीज ने अर्थव्यवस्था और वित्तीय प्रणाली में गिरावट के जोखिम में कमी का हवाला दिया। रेटिंग एजेंसी ने कहा, “बेहतर पूंजी और नकदी की अच्छी स्थिति से बैंक तथा गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों के स्तर पर जोखिम पूर्व के अनुमान के मुकाबले कम हुए हैं।”

मूडीज ने कहा, “अधिक कर्ज बोझ और ऋण वहन को लेकर कमजोर स्थिति के चलते जोखिम बना हुआ है। लेकिन मूडीज को उम्मीद है कि आर्थिक परिवेश अगले कुछ वर्षों में केंद्र एवं राज्यों सरकारों के राजकोषीय घाटे को धीरे-धीरे कम करने में मददगार होगा। इससे सरकारी साख में और गिरावट को रोका जा सकेगा।”

उल्लेखनीय है कि मूडीज इनवेस्टर्स ने पिछले वर्ष भारत के स्तर को ‘बीएए2’ से कम कर ‘बीएए3’ कर दिया था। उस दौरान कॉन्ग्रेस नेता ने ट्वीट किया था, “मूडीज ने मोदी द्वारा भारत की अर्थव्यवस्था को संभालने को कबाड़ (जंक) वाली रेटिंग से एक कदम ऊपर रखा है। गरीबों और एमएसएमई क्षेत्र को समर्थन की कमी का मतलब है कि अभी और अधिक खराब स्थिति आने वाली है।” इसके अलावा लिबरल गिरोह ने भी इस मुद्दे को जमकर उछाला था।

हालाँकि, राहुल गाँधी के अनुमानों से उलट अब भारत की अर्थव्यवस्था में सुधार होता दिख रहा है। लेकिन विपक्षी दल, लिबरल गिरोह या कॉन्ग्रेस नेता की ओर से इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आ रही है। अपने एजेंडे के हिसाब राहुल इस साल लखीमपुर खीरी मामले में बात कर रहे हैं। वहीं कॉन्ग्रेस पार्टी भी इस विषय पर चुप है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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