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अरविंद केजरीवाल को अपने ट्वीट से ‘चोट पहुँचाने’ के लिए तेजिंदर पाल सिंह बग्गा के खिलाफ SIT का गठन: पंजाब की AAP सरकार ने किया खुलासा

पंजाब सरकार ने यह भी दावा किया कि बग्गा के खिलाफ FIR इसलिए दर्ज की गई, क्योंकि उन्होंने इस तरह का बयान देकर सुनियोजित अपराधों को अंजाम देने की कोशिश की।

पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) के नेतृत्व वाली सरकार ने खुलासा किया है कि भाजपा (BJP) नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा द्वारा दिए गए ‘भड़काऊ’ बयानों की जाँच के लिए एक विशेष जाँच दल (Special Investigation Team) का गठन किया गया था।

तजिंदर पाल सिंह बग्गा के खिलाफ एफआईआर रद्द करने की याचिका के संबंध में अदालत द्वारा जारी नोटिस पर पंजाब पुलिस ने बुधवार (20 अप्रैल 2022) को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में अपना जवाब दाखिल किया। AAP के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार ने खुलासा किया है कि AAP सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल के खिलाफ भाजपा नेता द्वारा दिए गए ‘भड़काऊ’ बयानों की जाँच के लिए एक विशेष जाँच दल का गठन किया गया था।

बता दें कि 6 अप्रैल को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने बग्गा के खिलाफ जाँच पर रोक लगा दी थी और पंजाब पुलिस को नोटिस जारी किया था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पंजाब सरकार ने कहा था कि बग्गा के खिलाफ FIR केवल दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को निशाना बनाने वाले उनके एक बयान पर दर्ज नहीं की गई थी, बल्कि ऐसे कई ट्विट्स को लेकर दर्ज की गई थी, जो कथित तौर पर उत्तेजक, झूठे, भड़काऊ, सांप्रदायिक रूप से विभाजनकारी और नुकसान पहुँचाने वाले थे।

पंजाब सरकार ने यह भी दावा किया कि बग्गा के खिलाफ FIR इसलिए दर्ज की गई, क्योंकि उन्होंने इस तरह का बयान देकर सुनियोजित अपराधों को अंजाम देने की कोशिश की। AAP के नेतृत्व वाली सरकार ने उच्च न्यायालय के समक्ष यह भी कहा कि उन्हें तेजिंदर पाल बग्गा द्वारा की गई और अधिक आपत्तिजनक टिप्पणियाँ मिली है।

पंजाब सरकार के वकील ने यह भी तर्क दिया कि बग्गा के खिलाफ मुस्लिम बहुल मलेरकोटला जिले और सनेता में कश्मीरी हिंदुओं का समर्थन करने वाले पोस्टर पोस्ट करने के लिए दो और शिकायतें दर्ज की गई थीं, इस पोस्टर पर लिखा था, “हिंदू, जिनका खून उबला नहीं है, वह खून नहीं है।” पंजाब सरकार ने तर्क दिया कि पोस्टर 1990 के दशक में कश्मीर घाटी में कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार के जवाब में थे। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि इस तरह के पोस्टर विभाजनकारी थे और क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव पैदा कर सकते थे।

बता दें कि याचिका में बग्गा ने भड़काऊ बयान देने, आपराधिक धमकी देने और विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने के आरोप में एक अप्रैल को मोहाली पुलिस द्वारा अपने खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की माँग की थी। जस्टिस एचएस सिद्धू की अदालत में बग्गा की ओर से वरिष्ठ वकील आरएस राय और चेतन मित्तल ने याचिका दायर की थी।

तजिंदर पाल बग्गा के खिलाफ शिकायत दर्ज

गौरतलब है कि 2 अप्रैल को, भारतीय जनता पार्टी के नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने एक बयान में कहा कि जब वह लखनऊ में थे, पंजाब पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने के लिए दिल्ली में उनके घर पहुँची। भाजपा नेता ने आरोप लगाया था कि पंजाब पुलिस दिल्ली पुलिस को उनके राज्य में आने की सूचना देने में विफल रही, जो कानून के खिलाफ है। बग्गा ने आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को उनके खिलाफ 100 FIR दर्ज करने की चुनौती देते हुए कहा था कि वह तब तक नहीं रुकेंगे जब तक केजरीवाल कश्मीरी हिंदुओं के खिलाफ अपने बयान के लिए माफी नहीं माँगते।

पंजाब पुलिस ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, मोहाली में दर्ज शिकायत के आधार पर बग्गा के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी। यह शिकायत आम आदमी पार्टी के लोकसभा प्रभारी और प्रवक्ता डॉ सनी सिंह अहलूवालिया ने दर्ज कराई थी। अपनी शिकायत में, अहलूवालिया ने आरोप लगाया कि बग्गा और अन्य अज्ञात व्यक्तियों ने 30 मार्च को एक बयान दिया जिसमें उन्होंने अपने फॉलोवर्स को हिंसा करने, बल प्रयोग करने और दिल्ली के सीएम केजरीवाल और अन्य AAP नेताओं को चोट पहुँचाने के लिए उकसाया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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