Homeराजनीतिचंपावत विधानसभा उपचुनाव में उत्तराखंड के CM पुष्कर सिंह धामी 55000 वोटों से जीते,...

चंपावत विधानसभा उपचुनाव में उत्तराखंड के CM पुष्कर सिंह धामी 55000 वोटों से जीते, कॉन्ग्रेस उम्मीदवार को मिले सिर्फ 3233 मत

इस साल उत्तराखंड में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 70 में से 47 सीटें जीतकर नया रिकॉर्ड बनाया था, लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने विधानसभा क्षेत्र खटीमा से हार गए थे। इस हार के बावजूद पार्टी आलाकमान ने उन पर भरोसा जताते हुए, उन्हें दोबारा मुख्यमंत्री के रूप में चुना।

उत्तराखंड (Uttarakhand) के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (CM Pushkar Singh Dhami) ने चंपावत विधानसभा उपचुनाव में बड़ी जीत हासिल की है। उन्होंने शुक्रवार (3 जून 202) को कॉन्ग्रेस के निर्मल गहतोड़ी को 55,000 वोटों करारी शिकस्त दी। वहीं, कॉन्ग्रेस उम्मीदवार को 3,233 वोटों के साथ शर्मनाक हार का सामना करना है।

सीएम धामी ने चंपावत उपचुनाव की मतगणना में शुरुआती रुझान अपने पक्ष में आने पर उत्तराखंड की जनता को धन्यवाद दिया। उसके बाद उपचुनाव के नतीजे घोषित होने पर सीएम धामी ने कहा, “मैं चंपावत की जनता का आभारी हूँ, जिन्होंने मुझे अपना समर्थन किया। विकास कार्यों के जरिए मैं लोगों का दिल जीतने की पूरी कोशिश करूँगा।”

सीएम धामी की जीत से बीजेपी में खुशी का माहौल है। पार्टी के कार्यकर्ता ढोल-नगाड़ों के साथ मुख्यमंत्री की जीत का जश्न मना रहे हैं और एक-दूसरे का मुँह मीठा करा रहे हैं।

बता दें कि चंपावत विधानसभा में उपचुनाव के लिए 31 मई को मतदान हुआ था। इस उपचुनाव में लगभग 64 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री- स्मृति ईरानी एवं अनुराग ठाकुर और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों एवं धामी मंत्रिमंडल के वरिष्ठ मंत्रियों सहित पार्टी के दिग्गज नेताओं ने सीएम के​ लिए चुनावी प्रचार किया था।

गौरतलब है कि इस साल उत्तराखंड में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 70 में से 47 सीटें जीतकर नया रिकॉर्ड बनाया था, लेकिन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी अपने विधानसभा क्षेत्र खटीमा से हार गए थे। इस हार के बावजूद पार्टी आलाकमान ने उन पर भरोसा जताते हुए, उन्हें दोबारा मुख्यमंत्री के रूप में चुना। वहीं, कॉन्ग्रेस को सिर्फ 19 सीटें मिली थीं।

सीएम धामी ने 23 मार्च को लगातार दूसरी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। हालाँकि, संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार मुख्यमंत्री बने रहने के लिए 6 महीने के अंदर विधायक बनना जरूरी होता है, इसलिए चंपावत विधानसभा का उपचुनाव जीतकर उन्होंने पार्टी में अपने भरोसे को कायम रखा।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

नदी जोड़ो मेगा प्रोजेक्ट Part II: बुंदेलखंड को केन-बेतवा रिवर लिंक परियोजना की सबसे ज्यादा जरूरत क्यों?

भारत सरकार ने राज्यसभा में कहा कि भारत के अतिमहत्वाकांक्षी नदी जोड़ो परियोजना में शीर्ष पर केन-बेतवा नदी लिंक प्रोजेक्ट है।

उमर खालिद की ‘कुर्बानी’ का जश्न मनातीं आरफा खानम, ताहिर हुसैन के लिए भी बहाए थे आँसू: अपने ‘पोस्टर बॉय’ के लिए अदालत पर...

उमर खालिद से ताहिर हुसैन तक, ‘पोस्टर बॉय’ पॉलिटिक्स कैसे काम करती है? आरफा खानम के बयान, अदालतों पर सवाल और सुनवाई में देरी के दावों की पड़ताल।
- विज्ञापन -