Homeराजनीतिकेजरीवाल के आने से पहले संगरूर में काली माता मंदिर की दीवार पर लिखे...

केजरीवाल के आने से पहले संगरूर में काली माता मंदिर की दीवार पर लिखे मिले ‘खालिस्तान ज़िंदाबाद’ के नारे, 23 जून को होना है उपचुनाव

पंजाब में खालिस्तान समर्थक नारे लगना और उसकी माँग नया नहीं है लेकिन आम आदमी पार्टी की भगवंत मान सरकार बनने से पंजाब में खालिस्तान की माँग तेज हो गई है।

पंजाब के संगरूर में लोकसभा उपचुनाव के बीच केजरीवाल के पहुँचने से पहले काली माता मंदिर की दीवार पर ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लिखे मिले हैं। इसका पता चलते ही जहाँ पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। वहीं पंजाब में खालिस्तानी ताकतों के लगातार मुखर होकर सामने आने की घटनाएँ तेजी से बढ़ती जा रही हैं। हालाँकि, प्रशासन ने केजरीवाल और भगवंत मान के रोड शो से पहले आनन-फानन में पेंट कर नारे मिटवा दिए।

बता दें कि संगरूर में चुनाव आचार संहिता लागू हैं और 23 जून, 2022 को मतदान होना है। संगरूर शहर के काली माता मंदिर के गेट और दीवारों पर “पंजाब हल खालिस्तान एस.एफ.जे” और “रेफरेंडम 26 जनवरी 2023” के नारे लिखे गए है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना बीती रात बताई जा रही है और अब संगरूर प्रशासन की तरफ से यह सभी नारे मिटा दिए गए हैं। जिन जगहों पर नारे लिखे गए थे वहाँ पर पेंट कर दिया गया है और पंजाब पुलिस इस मामले में कुछ भी बोलने से इनकार कर रहा है।

हालाँकि, पंजाब में खालिस्तान समर्थक नारे लगना और उसकी माँग नया नहीं है लेकिन आम आदमी पार्टी की भगवंत मान सरकार बनने से पंजाब में खालिस्तान की माँग तेज हो गई है। ऐसा विभिन्न रिपोर्टों में दावा किया जाता रहा है। ऐसे में पंजाब में खालिस्तानी तत्वों की इस तरह हरकतों से कानून व्यवस्था को लेकर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, काली माता मंदिर की दीवार पपर जिस जगह नारे लिखे गए थे, उसके सामने कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा हुआ है। इस वजह से नारे किसने लिखे, इसके बारे में फ़िलहाल खुलासा नहीं हो सका है।

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह फरीदकोट और फिरोजपुर में भी खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लिखे जा चुके हैं। फरीदकोट में पहले बाजीगर बस्ती के पार्क और फिर जज की कोठी की दीवार पर यह नारे लिखे गए थे। इसके बाद फिरोजपुर में डिविजनल रेलवे मैनेजर (DRM) की कोठी के बाहर यह नारे लिखे गए थे।

बता दें कि पिछली बार भी केजरीवाल और सीएम भगवंत मान के जालंधर में होने वाले कार्यक्रम से पहले ही खालिस्तान समर्थकों ने लिखे थे। वहीं पंजाब में आए दिन खालिस्तान समर्थकों की ओर से अलगाववाद के माहौल बनाए जा रहे हैं। कभी भारत के विरुद्ध नारेबाजी होती है तो कभी दीवारों पर आपत्तिनजक नारे लिखे जाते हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।

संभल की डेमोग्राफी: हिंदू 13 हजार से हुए 47 हजार, मुस्लिम 23 हजार से हो गए 1 लाख 71 हजार – मुस्लिम भीड़ की...

2011 की जनगणना के अनुसार संभल शहर की डेमोग्राफी 77.67% मुस्लिम आबादी जबकि हिंदू आबादी सिर्फ 22% वाली बताई गई है। वर्तमान में मुस्लिम 80% तक।
- विज्ञापन -