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आज़मगढ़ और आज़म का गढ़ – दोनों सीटों पर लहराया भगवा: निरहुआ ने अखिलेश यादव के भाई को हराया, और मजबूत हुआ ‘ब्रांड योगी’

जहाँ तक धर्मेंद्र यादव का सवाल है, वो इससे पहले लगातार तीन बार सांसद रह चुके हैं। 2004 में जहाँ उन्होंने मैनपुरी से जीत दर्ज की थी, 2009 और 2014 के लोकसभा चुनावों में सपा ने उन्हें बदायूँ से उतारा था और उन्हें जीत भी मिली थी।

आज़म खान के गढ़ कहे जाने वाले रामपुर की जनता ने वहाँ भगवा लहरा दिया है। वहीं सपा के संस्थापक परिवार के गढ़ से दिनेश लाल यादव निरहुआ ने बाजी मार ली है। दिनेश लाल यादव निरहुआ 2019 लोकसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से हार गए थे, लेकिन इस बार उन्होंने अखिलेश के भाई धर्मेंद्र को हरा कर अपना बदला पूरा किया है। वहीं रामपुर से भाजपा के घनश्याम सिंह ने जीत दर्ज की है। इससे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि और मजबूत हुई है।

सीए योगी ने उप-चुनाव के दौरान दोनों ही सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों के लिए प्रचार किया था। जहाँ तक धर्मेंद्र यादव का सवाल है, वो इससे पहले लगातार तीन बार सांसद रह चुके हैं। 2004 में जहाँ उन्होंने मैनपुरी से जीत दर्ज की थी, 2009 और 2014 के लोकसभा चुनावों में सपा ने उन्हें बदायूँ से उतारा था और उन्हें जीत भी मिली थी। इन दोनों चुनाव परिणामों से न सिर्फ समाजवादी पार्टी, बल्कि मुलायम सिंह यादव के परिवार को बड़ा झटका लगा है।

इस उपचुनाव के नतीजे इसीलिए भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि अखिलेश यादव और आज़म खान, दोनों ने अपनी-अपनी सीटें खाली कर दी थीं। अखिलेश यादव ने करहल से और आज़म खान ने रामपुर से ही विधानसभा चुनाव जीतने के बाद विधायक रह कर राज्य की राजनीति को समय देने का फैसला लिया था। सपा दोनों सीटों पर जीत को लेकर आश्वस्त थी। आज़मगढ़ मुलायम परिवार का पुराना गढ़ रहा है और रामपुर में आज़म खान के परिवार की गुंडई चलती रही है।

वहीं मायावती ने बसपा की तरफ से गुड्डू जमाली को आजमगढ़ से उतारा था, जो तीसरे नंबर पर रहे। अब बात तो ये भी चल रही है कि मुलायम सिंह यादव गुट के धर्मेंद्र यादव को प्रत्याशी बनाने का फैसला अखिलेश यादव ने दबाव में लिया था और इसीलिए उन्होंने उपचुनावों में रुचि नहीं दिखाई। आज़म खान से भी उनका टकराव चलता रहा। वोटिंग प्रतिशत भले ही कम रहा हो, लेकिन उपचुनावों में ये भी मायने रखता है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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