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कर्नाटक चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस ने रोया था EVM का रोना, मतगणना में बढ़त पाते ही पार्टी भूल गई अपने आरोप: महासचिव प्रियंका गाँधी सीधे मंदिर पहुँचीं

आयोग ने बताया था कि न केवल प्रतिनिधियों को बुलाकर दिखाया जाता है कि ईवीएम आई कहाँ से, बल्कि उन्हें ईवीएम की यूनिक आई़डी की लिस्ट भी दी जाती है। इतना ही नहीं उसे असेंबल करने से पहले उसे रैंडम चेक किया जाता है। उसे चालू किए जाने के बाद फिर उसे पार्टी के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में चेक किया जाता है।

कर्नाटक विधानसभा चुनावों की मतगणना में बढ़त मिलने के बाद दिल्ली से लेकर बंगलुरु तक कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है। कहीं लड्डू बाँटे जा रहे हैं तो कहीं ढोल-नगाड़े के साथ नृत्य किया जा रहा है। बढ़त हासिल होते ही कॉन्ग्रेस अपने उन आरोपों पर चुप्पी साध ली है, जो उसने मतगणना से पहले लगाए थे।

उधर पार्टी की महासचिव प्रियंका गाँधी हिमाचल प्रदेश के पौराणिक जाखू मंदिर में जाकर भगवान हनुमान की पूजा-अर्चना की। इसके बाद वे अपने आवास पर वापस लौट गईं। बताते चलें कि कर्नाटक चुनाव में बजरंग बली का मद्दा भाजपा ने जमकर उठाया था।

दरअसल, कर्नाटक में चुनाव से दो दिन पहले 8 मई 2023 को कॉन्ग्रेस ने चुनाव आयोग को पत्र लिखा था। अपने पत्र में पार्टी में चिंता जाहिर की थी कि साउथ अफ्रीका में इस्तेमाल की गई ईवीएम का प्रयोग कर्नाटक चुनाव में होने वाला है। पार्टी ने यह आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण माँगा था।

कॉन्ग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए चुनाव आयोग ने कहा था कि कि कर्नाटक चुनाव में इस्तेमाल होने वाली सारी ईवीएम नई हैं। ये बात कॉन्ग्रेस भी जानती है। आयोग ने कहा कि जब भी ईवीएम आती है तो उस पूरे प्रक्रिया का वीडियोग्राफी होती है और हर पॉलिटिकल पार्टी के लोगों को वहाँ चश्मदीद बनने के लिए बुलाया जाता है।

कॉन्ग्रेस को फटकार लगाते हुए ईसीआई ने कहा कि कॉन्ग्रेस बहुत अच्छे से जानती है कि ईवीएम कहाँ से आई हैं। कॉन्ग्रेस इतने समय से राष्ट्रीय पार्टी है और विभिन्न चुनावों में भाग लिया है। उससे तो उम्मीद की जाती है कि उसे निर्वाचन आयोग के प्रोटोकॉल्स के बारे में पता होगा।

आयोग ने बताया था कि न केवल प्रतिनिधियों को बुलाकर दिखाया जाता है कि ईवीएम आई कहाँ से, बल्कि उन्हें ईवीएम की यूनिक आई़डी की लिस्ट भी दी जाती है। इतना ही नहीं उसे असेंबल करने से पहले उसे रैंडम चेक किया जाता है। उसे चालू किए जाने के बाद फिर उसे पार्टी के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में चेक किया जाता है।

बताते चलें कि साल 2014 में केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद और भाजपा के बढ़ते कदम पर विपक्षी दल हमेशा ईवीएम का रोना रोते हैं। कभी वे ईवीएम हैक करने का आरोप लगाते हैं, तो कभी ईवीएम टैंपर करने का तो कभी ईवीएम में हेरफेर करने का।

इसी के तहत चुनाव से पहले ही कॉन्ग्रेस ने ईवीएम का रोना रोना शुरू कर दिया था। अगर कर्नाटक चुनाव में भाजपा को बढ़त मिली होती तो कॉन्ग्रेस इस मुद्दे को लेकर चिल्लाती रहती। हालाँकि, राज्य में कॉन्ग्रेस को बढ़त हासिल है और वह भी बहुमत के आँकड़े के पार तक। ऐसे में उसने ईवीएम के अपने आरोपों को भूला दिया।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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