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भोपाल का ‘मछली गैंग’ जिम में परोसता था ड्रग्स, संचालक मोनिस खान नशे का सबसे बड़ा खरीदार: टारगेट थी हिंदू लड़कियाँ, मलेशिया भागा

ड्रग तस्करी रैकेट चलाने वाले भोपाल के यासीन मछली और उसके चाचा शाहवर मछली ने पूरी पीढ़ी को बर्बाद किया हुआ था। इनका सबसे बड़ा खरीदार जिम संचालक मोनिस खान था। इन ड्रग्सत को जिम में आने वाले युवक और युवतियों को दवा बताकर दिया जाता था।

यह खुलासा 18 अगस्त 2025 को ड्रग तस्करी के आरोप में सबसे पहले गिरफ्तार किए गए सैफुद्दीन ने पुलिस पूछताछ में किया था। उसने बताया कि मोनिस जिस जिम का चलाता है, उसकी भोपाल में तीन ब्रांच हैं। जिम में शहर के हाई प्रोफाइल लोग आते थे और उन्हें ड्रग्स की लत लगवाई जाती थी।

इस मामले में नाम आने के बाद से मोनिस मलेशिया फरार हो गया है। पुलिस ने उसे मेमोरेंडम के आधार पर आरोपित बनाया है। फरारी के बाद अब पुलिस उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी करने की तैयारी कर रही है। पुलिस ने बताया कि जिम संचालक से पहले मोनिस खान फिटनेस ट्रेन भी रह चुका है।

नाइनजीरियन से खरीदते थे ड्रग्स

यासीन मछली को ड्रग्स बेचने वाले अंशुल सिंह उर्फ भूरी को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। ये बेन नाम के नाइजीरियन व्यक्ति से ड्रग्स खरीदते थे और भोपाल में बेचते थे। खास पार्टियों में ड्रग्स को बेचा जाता था। यासीन मछली और शाहवर मछली भी इनके ग्राहक थे।

देनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, यासीन और शाहवर मछली ने ही पुलिस पूछताछ में इसका नाम उगला थी, जिसके बाद निशानदेही पर पुलिस ने अंशुल को दबोच लिया।

यासीन मछली पर हिंदू युवती के रेप में FIR दर्ज

भोपाल में ड्रग तस्करी के आरोप में पकड़े गए यासीन मछली और चाचा सारिक मछली ने सालों से लोगों पर अत्याचार किए। युवाओं को नशे में धखेलने का काम करते थे। इससे पहले एक हिंदू युवती ने भी यासीन मछली पर रेप का मुकदमा दर्ज करवाया था।

युवती ने शिकायत में बताया था कि करीब एक साल पहले एक पब में यासीन से मुलाकात हुई थी। यासीन ने युवती से दोस्ती की। दोनों के बीच बातचीत बढ़ने लग गईं। यासीन ने युवती को शादी का झाँसा देकर फाइव स्टार में बुलाया और रेप किया।

युवाओं को रेव पार्टी में बुलाकर नशे की लत डालते

यासीन मछली भोपाल में युवाओं को टारगेट कर रेव पार्टी में बुलाता था। इस काम के लिए कई पब और लॉन्ज अड्डा बने हुए थे। पार्टी में आने वाली हिन्दू लड़कियों को ड्रग्स की डिलीवरी के लिए इस्तेमाल करता था। इन लड़कियों को प्रेम जाल में फँसा कर उनका रेप करता और फिर ब्लैकमेल करता था। रेव पार्टियों से जुड़े कई वीडियो भी पुलिस के हाथ लगे थे।

वह शहर के बाहरी इलाकों में रेव पार्टी आयोजित करता था। इन पार्टियों में एंट्री के लिए 10 से 25 हजार रुपए वसूले जाते थे। पार्टी में ड्रग्स के लिए अलग से रकम ऐंठी जाती थी। इस पूरे काले कारोबार में यासीन  मछली और उसका परिवार शामिल था।

यासीन के परिवार ने 55 साल में अवैध काम कर खड़ा किया ‘साम्राज्य’

ड्रग तस्कर यासीन मछली के परिवार ने 55 साल में अवैध कारोबार के जरिए बड़ा साम्राज्य खड़ा किया। यासीन का परिवार 1970 से पहले बुधवारा में रहता था और मछलियों की दलाली करता था। इसके बाद हथाईखेड़ा आया और यहाँ मछली पालने का ठेका लिया।

1980 में राजनीतिक पार्टियों की मदद कर इलाके में दबदबा बनाया। राजनीतिक मदद से ही मुस्लिमों की बस्ती बसा ली और पत्थर खदानों ने अवैध खनन शुरू किया।

जानें पूरा मामला

18 जुलाई 2025 को भोपाल के गोविंदपुरा से सैफुद्दीन और आशू उर्फ शाहरुख को गिरफ्तार किया गया था। इनके पास से ₹3 लाख और बड़ी मात्रा में ड्रग्स बरामद की गई। इन्हीं की निशानदेही पर ड्रग तस्करी का सरगना शाहवर मछली और उसका भतीजा यासीन मछली को क्राइम ब्रांच ने दबोचा। दोनों के पास से 3 ग्राम एमडी ड्रग और एक देशी पिस्टल बरामद की गई थी।

जाँच में सामने आया कि यासीन और उसके चाचा शाहवर ड्रग्स तस्करी का धंधा करते थे। मुंबई, राजस्थान और पंजाब से चरस और अन्य ड्रग्स लाते थे। फिर इन्हें शहर के पब, लाउंज और क्लब में पार्टियों में बेचा करते थे। ड्रग्स की डिलीवरी के लिए हिंदू लड़कियों को इस्तेमाल किया जाता था।

युवाओं के लिए रेव पार्टी आयोजित कर उन्हें नशे की लत लगाते थे। ये दोनों हिंदू लड़कियों का शारीरिक शोषण करते थे और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव भी बनाते थे।

भूकंप से अफगानिस्तान में भारी तबाही: 800+ लोगों की मौत, 2500+ घायल, पहाड़ी इलाकों तक मदद पहुँचाने में आ रही दिक्कत

पूर्वी अफगानिस्तान में रविवार (31 अगस्त 2025) देर रात आए भयानक भूकंप में 800 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है, जबकि 2500 से ज्यादा लोग घायल हैं। अधिकारियों ने भूकंप से हुए जान-माल ही हानि की जानकारी देते हुए कहा कि हेलीकॉप्टरों से घायलों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया है। लापता लोगों की तलाश की जा रही है।

यूएस जियोलोजिकल सर्वे के मुताबिक, भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6 थी। भूकंप का केन्द्र जमीन से 8 किलोमीटर अंदर अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा से लगे कुनर और नंगरहर में था।

टूटी सड़कें, लोगों तक राहत पहुँचाना हुआ मुश्किल

अफगानिस्तान के हेल्थ विभाग के प्रवक्ता सरफराज जमीन के मुताबिक, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। भूकंप में कई गाँव पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं। अफगानिस्तान के रक्षा विभाग ने 30 डॉक्टरों और 800 किलो मेडिसिन भेजी है। लेकिन सड़कों की खस्ता हालत के कारण कुनार और नंगरहार प्रांत के ग्रामीणों तक मदद पहुँचाना बेहद चुनौतीपूर्ण काम है।

इस इलाके में सड़कें पक्की नहीं हैं। भूकंप के कारण ज़्यादातर सड़कें चट्टानों से ढकी हुई हैं, जिससे आवागमन में काफी मुश्किलें आ रही हैं। इन इलाकों में ज्यादातर घर मिट्टी के बने हैं, इसलिए वे आसानी से ढह गए।

कर्टिन विश्वविद्यालय में पेट्रोलियम भूविज्ञान के प्रोफेसर क्रिस एल्डर्स के मुताबिक, पूर्वी अफगानिस्तान का भूकंप प्रभावित ये इलाका पहाड़ी है और यहाँ लोगों की अच्छी खासी तादाद है, इसलिए मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। पहाड़ी इलाकों में सिर्फ मकानें ध्वस्त नहीं हुई हैं, बल्कि पहाड़ियाँ के हिलने से आगे भूस्खलन का खतरा भी बना हुआ है।

सुबह तक 5 बार धरती डोली

राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की वेबसाइट के मुताबिक, अफगानिस्तान के अलग- अलग इलाकों में रविवार (31 अगस्त 2025) देर रात से सुबह तक 5 बड़े भूकंप आए थे। पहला भूकंप देर रात 12 बजकर 47 मिनट पर आया। इसकी तीव्रता 6.3 थी। दूसरा भूकंप कुछ देर बाद रात 1 बजकर 8 मिनट पर आया। इसकी तीव्रता 4.7 थी। तीसरा भूकंप रात 1 बजकर 59 मिनट पर आया, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.3 थी। चौथा भूकंप तड़के 3 बजकर 3 मिनट 25 सेकंड पर आया। इस वक्त तीव्रता 5 थी। इसी तरह सुबह 5 बजकर 16 मिनट 30 सेकंड पर पाँचवी बार 5 तीव्रता वाले भूकंप के झटके महसूस किए गए।

यह आपदा पहले से ही संकटों से जूझ रहे अफगानिस्तान के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला है। एक और अफगानिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मदद में भारी कमी आई है। साथ ही पड़ोसी देश उसके नागरिकों को वापस भेज रहे हैं। इससे संसाधनों पर पहले से ही भारी दबाव है।

यूएन ने जताया दुख

संयुक्त राष्ट्र ने भूकंप में मारे गए लोगों के प्रति दुख जताते हुए कहा है कि ‘विनाशकारी’ भूकंप ने सैकड़ों लोगों की जान ले ली। अफगानिस्तान स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय ने एक पोस्ट साझा करते हुए कहा है कि उसकी टीमें प्रभावित लोगों तक आपातकालीन सहायता प्रदान कर रही हैं। यूएन ने X पर एक पोस्ट में कहा, “अफगानिस्तान के पूर्वी क्षेत्र में आए विनाशकारी भूकंप से बेहद दुखी है, इसमें सैकड़ों लोगों की जान चली गई और कई अन्य घायल हो गए।”

जुलाई में रूस में आया था भूकंप

हाल के दिनों में रूस का कुरिल द्वीप समूह भूकंप से काँपा था। उस वक्त भी रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 6 मापी गई थी। 30 जुलाई को रूस के कामचटका द्वीपों पर 8.8 की तीव्रता वाला भूकंप आया था। हालाँकि यहाँ जनसंख्या काफी कम होने की वजह से हताहतों की संख्या अपेक्षाकृत कम थी।

ट्रंप के ‘तोते’ पीटर नवारो ने फिर उगला जहर, कहा- रूसी तेल खरीद का फायदा उठाते हैं ‘ब्राह्मण’: PM मोदी-पुतिन-जिनपिंग की मुलाकात पर किया भद्दा कमेंट, खुद जा चुका है जेल

व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ को उचित ठहराया। नवारो ने भारतीय ब्राह्मणों पर रूस से तेल खरीदकर मुनाफा कमाने की बात कही। इसके अलावा भारत को सबसे बड़ा लोकतंत्र बताते हुए चीन और रूस से दोस्ती पर सवाल खड़े किए।

FOX News के साथ इंटरव्यू के दौरान पीटर नवारो ने भारत को ‘टैरिफ का महाराजा’ बताते हुए कहा कि नई दिल्ली पर दुनिया में सबसे ज्यादा टैरिफ हैं। नवारो ने पीएम मोदी को बड़ा नेता बताया और कहा, “वह(पीएम मोदी) पुतिन और शी जिनपिंग के साथ बिस्तर पर जा रहे हैं, जबकि वे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र है।”

नवारो ने आगे कहा, “मैं बस इतना कहना चाहूँगा कि भारतीय लोग कृपया समझें कि यहाँ क्या हो रहा है। ब्राह्मण, भारतीय लोगों की कीमत पर मुनाफ़ा कमा रहे हैं। हमें इसे रोकना होगा।”

यह बातें नवारों ने तब कहीं जब उनसे पूछा गया, “क्या भारत पर लगाए गए अतिरिक्त शुल्क व्लादिमीर पुतिन को रोकने के लिए काफी हैं?” नवारो ने जवाब दिया कि फिलहाल भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लागू है, इससे सिर्फ थोड़ी सी ज्यादा चीन पर भी है। नवारो ने कहा कि सवाल यह भी है कि अमेरिका खुद को नुकसान पहुँचाए बिना कितनी ऊपर जाना चाहता है।

बात को आगे बढ़ाते हुए ट्रंप के सलाहकार तुरंत भारत पर वार शुरू कर देते हैं। वे कहते हैं, “फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले से पहले भारत रूसी तेल काफी कम मात्रा में खरीदता था। अब उसी कच्चे तेल पर पीएम मोदी को पुतिन छूट देते हैं। वे इसे रिफाइन कर यूरोप, अफ्रीका और एशिया में बेचकर पैसा कमाते हैं।”

नवारो कहते हैं, “देखिए? भारत सिर्फ क्रेमलिन के लिए लॉन्ड्रोमैट के अलावा कुछ नहीं है। ये (रूस) यूक्रेनियों को मारता है और करदाताओं के तौर पर हम उन्हें पैसा भेजते हैं, जिससे यूक्रेन अपनी रक्षा कर सके।”

यह पहली बार नहीं है जब अमेरिकी राष्ट्रपति के व्यापार सलाहकार ने भारत के खिलाफ ऐसी टिप्पणी की है। इससे पहली भी उन्होंने भारत को ‘तेल का लॉन्ड्रोमैट’ कहा था। उन्होंने नई दिल्ली द्वारा रूसी तेल की लगातार खरीद पर निशाना भी साधा और रूस-यूक्रेन युद्ध को ‘मोदी का युद्ध‘ करार दिया था, जिससे भारत और अमेरिका के बीच शुरू हुआ व्यापारिक विवाद और गहरा गया था।

जब एलन मस्क ने पीटर नवारो का कहा था ‘मूर्ख’

पीटर नवारो को उनके विवादित बयानों और झूठे दावों के चलते लताड़ लगती रहती है। हाल ही में एलन मस्क ने नवारो को ‘मूर्ख’ बताया था। जब नवारो ने दावा किया था कि टेस्ला एक कार निर्माता नहीं बल्कि कार असेंबलर कंपनी है।

नवारो ने दावा किया था कि एलन मस्क की कार EV के इंजन जापान और चीन से मँगाए जाते हैं जबकि अमेरिका के कई शहरों में भी ऐसे इंजन बनते हैं। इस दावे पर एलन मस्क ने नवारो को लताड़ लगाई थी, उन्होंने नवारो के दावे को नकारते हुए कहा कि नवारो सच में ‘मूर्ख’ हैं।

जेल जा चुका है ट्रंप का सलाहकार पीटर नवारो

डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार पीटर नवारो जेल की सजा काट चुके हैं। नवारो को साल 2021 में US कैपिटल पर हुए हमले के मामले में 4 महीने जेल की सजा सुनाई गई थी।

मार्च 2024 में अमेरिका की तत्कालीन सरकार (कॉन्ग्रेस) की अवमानना के आरोप में जेल जाने वाले व्हाइट हाउस के पहले अधिकारी बने थे। अमेरिका इस सजा को इतिहास के पन्नों में संजोकर रखता है।

15 साल की नाबालिग को ग्राम पंचायत अध्यक्ष ने किया प्रेग्नेंट, मंत्री लक्ष्मी हेब्बालकर का बेतुका बयान, कहा- इसका कारण ‘सोशल मीडिया-लव अफेयर्स’: कर्नाटक में पिछले तीन सालों में 80000+ मामले

कर्नाटक में एक बार फिर नाबालिग लड़की से शादी और गर्भवती करने का गंभीर मामला सामने आया है। आरोपित कोई आम व्यक्ति नहीं, बल्कि एक ग्राम पंचायत अध्यक्ष है। इससे पहले बुधवार (27 अगस्त 2025) को भी एक 9वी कक्षा की 17 वर्षीय छात्रा ने शौचालय में एक बच्चे को जन्म दिया था। इस घटना ने राज्य में लगातार बढ़ रही नाबालिग गर्भावस्था की समस्या को फिर उजागर कर दिया है।

आँकड़े बताते हैं कि पिछले तीन वर्षों में 80,000 से अधिक किशोरियाँ गर्भवती हुई हैं। बावजूद इसके कॉन्ग्रेस सरकार के पास केवल बहाने हैं, न कोई ठोस कार्रवाई, न कोई असरदार नीति। वहीं, महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी हेब्बालकर ने बेतुका बयान देते हुए कहा कि इसका कारण ‘सोशल मीडिया’ और ‘लव अफेयर्स’ है।

बेलगावी में पंचायत अध्यक्ष की करतूत

बेलगावी जिले में एक नाबालिग लड़की की डिलीवरी के बाद जो सच्चाई सामने आई, वह किसी को भी चौंका सकती है। जिस लड़की को अस्पताल में भर्ती किया गया, उसकी उम्र महज 15 साल थी। वह पिछले साल ग्राम पंचायत अध्यक्ष से शादी कर चुकी थी। यह बाल विवाह न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि एक जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा किया गया जघन्य अपराध है।

जब मामला सामने आया, तब जिला बाल संरक्षण इकाई ने शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने पॉक्सो एक्ट, बाल विवाह निषेध कानून और भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज किया। यह घटना कोई पहली नहीं है। यह इस हफ्ते की दूसरी घटना है। इससे साफ है कि बाल विवाह और नाबालिग लड़कियों का शोषण अब आम होता जा रहा है और कॉन्ग्रेस सरकार इस पर लगाम लगाने में नाकाम साबित हो रही है।

सरकार के आँकड़े खुद बना रहे चार्जशीट

कर्नाटक सरकार के अपने आँकड़े ही सरकार के खिलाफ चार्जशीट की तरह हैं। पिछले तीन वर्षों में राज्य में 80,813 किशोर गर्भावस्था के मामले सामने आए हैं। इनमें से 3,459 लड़कियाँ 14 से 17 साल की उम्र की थीं। अकेले बेंगलुरु शहरी जिले में 8,891 मामले दर्ज हुए। इसके बाद विजयपुरा जिले में 7,143 मामले आए।

सरकार ने खुद स्वीकार किया है कि किशोर गर्भावस्था के मामलों में 54% की बढ़ोतरी हुई है। लेकिन इसके बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस नीति, कड़ी कार्रवाई या जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया नजर नहीं आती।

मंत्री का गैरज़िम्मेदाराना बयान– जमीनी सच्चाई से मुँह मोड़ती सरकार

राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी हेब्बालकर ने इस संकट की वजह ‘सोशल मीडिया’ और ‘लव अफेयर्स’ को बताया। उन्होंने इसे ‘डरावनी और खतरनाक स्थिति’ कहा, लेकिन इसके समाधान के नाम पर कोई गंभीर पहल नहीं की।

जब एक मंत्री खुद यह स्वीकार करती हैं कि लड़कियाँ सोशल मीडिया और रिश्तों के जाल में फँस रही हैं, तो सवाल उठता है कि फिर सरकार क्या कर रही है? सोशल मीडिया पर निगरानी कहाँ है? स्कूलों और कॉलेजों में जागरूकता अभियान कहाँ चल रहे हैं? ऐसे बयानों से साफ है कि कॉन्ग्रेस सरकार केवल जिम्मेदारी टालने में लगी है। असली अपराधियों के खिलाफ सख्ती करने के बजाय, सरकार समस्या को ही सामान्य बताने में जुटी है।

‘अक्का फोर्स’– प्रचार ज्यादा, असर कम

सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए एक नई योजना ‘अक्का फोर्स’ की घोषणा की। इसके तहत महिला पुलिस अधिकारी और एनसीसी कैडेट कॉलेजों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर निगरानी रखेंगे। यह योजना 15 अगस्त 2025 से शुरू हो चुकी है।

लेकिन यह पहल केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित है। गाँवों में, जहाँ इंटरनेट और मोबाइल का दुरुपयोग सबसे ज्यादा हो रहा है, वहाँ ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। जिस बेलगावी जिले में पंचायत अध्यक्ष ने नाबालिग से शादी की, वहीं की लड़कियाँ सरकार की नजरों से कैसे बच रहीं हैं? इससे साफ है कि यह योजना केवल एक दिखावा है, जो जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं लाएगी।

ब्लैकमेलिंग, पोर्न और इंटरनेट का आतंक– जड़ में गहरी बीमारी

विशेषज्ञ बताते हैं कि अब नाबालिग लड़कियों को अश्लील फोटो भेजने को मजबूर किया जाता है। उन्हें ब्लैकमेल कर यौन शोषण किया जाता है। यह समस्या अब सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं रही, गाँवों में भी इंटरनेट का गलत इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है।

पिछले दो दशकों में अश्लीलता का स्तर बहुत बढ़ गया है। पहले जहाँ टीवी और सिनेमा को दोष दिया जाता था। वहीं, अब सोशल मीडिया, रील्स और ऑनलाइन पोर्न ने हालात और बिगाड़ दिए हैं। बच्चियाँ कम उम्र में ही यौन संबंधों की ओर आकर्षित की जा रही हैं। सरकार ने इस दिशा में न तो कोई शिक्षा कार्यक्रम शुरू किया, न कोई साइबर निगरानी तंत्र मजबूत किया। ये लापरवाही कई मासूम जिंदगियों को तबाह कर रही है।

बिल तो आया, लेकिन कानून से ज्यादा जरूरत है नीयत की

कॉन्ग्रेस सरकार ने हाल ही में बाल विवाह निषेध (कर्नाटक संशोधन) विधेयक 2025 विधानसभा में पेश किया है। इस बिल के तहत बाल विवाह की योजना या तैयारी को भी अपराध माना जाएगा। दोषियों को दो साल की सजा या ₹1 लाख जुर्माना हो सकता है।

यह कानून दिखने में सख्त जरूर है, लेकिन इसके असर तब तक नहीं होंगे जब तक जमीनी अमल सख्त न हो। आज भी बाल विवाह अक्सर त्योहारों या सामूहिक विवाह आयोजनों में हो जाते हैं। इनमें से कई घटनाएँ कभी सामने ही नहीं आतीं।

अगर पंचायत अध्यक्ष जैसे लोग खुलेआम बाल विवाह कर सकते हैं, तो कानून केवल किताबों में रह जाएगा। जरूरत है कि गाँव से लेकर शहर तक निगरानी तंत्र मजबूत हो और अपराधियों को सार्वजनिक रूप से सजा दी जाए।

कॉन्ग्रेस सरकार की ढुलमुल नीति से बिगड़ रहे हालात

कर्नाटक में नाबालिग गर्भावस्था और बाल विवाह की घटनाएँ अब अपवाद नहीं, बल्कि एक भयावह नियमितता बन चुकी हैं। कॉन्ग्रेस सरकार के बयान, योजनाएँ और आँकड़े एक-दूसरे से मेल नहीं खाते। जहाँ एक ओर मंत्री सोशल मीडिया को दोष देती हैं, वहीं सरकार इंटरनेट के दुरुपयोग पर कोई ठोस कदम नहीं उठाती। जहाँ एक तरफ कानून लाया जा रहा है, वहीं पंचायत अध्यक्ष जैसे जनप्रतिनिधि खुद कानून तोड़ते हैं।

यह सब दिखाता है कि कॉन्ग्रेस सरकार इस समस्या को लेकर न तो ईमानदार है, न गंभीर। जब तक सरकार सख्ती से कार्रवाई नहीं करती और जमीनी स्तर पर जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक मासूम बेटियाँ इसी तरह शिकार बनती रहेंगी। यह सिर्फ सामाजिक नहीं, राजनीतिक अपराध है और इसका जिम्मेदार सत्ता में बैठा हर व्यक्ति है।

हिंदू लड़कों को फँसाने के लिए बरेली धर्मांतरण गिरोह करता था ‘हनीट्रैप’ इस्तेमाल, मदरसे में लड़कियाँ करती थीं ब्रेनवॉश: जाँच में मिले 20+ व्हॉट्सएप ग्रुप, भीतर अश्लील तस्वीरों का अंबार

बरेली में हिन्दू युवकों को हनी ट्रैप में फँसाकर इस्लाम कबूल करवाने वाले बड़े गिरोह का पर्दाफाश होने के बाद हर दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं। युवकों को 4 बार निकाह करने और ऐशो आराम की जिंदगी जीने का सपना दिखाया जाता था। युवकों का ब्रेशवॉश कर इस्लाम कबूल करवाया जाता था। यहाँ तक कि दिव्यांग लोगों को भी फँसा कर उनका धर्मपरिवर्तन कराया जाता था और निकाह कराए जाते थे।

पुलिस ने कुछ दिन पहले नेत्रहीन प्रोफेसर प्रभात उपाध्याय को मदरसे से बरामद किया था। उन्हें बंधक बनाकर धर्मपरिवर्तन कराया जा रहा था। मदरसे में खतने की प्रक्रिया चल रही थी, उसी दौरान पुलिस ने दबिश देकर उन्हें मुक्त कराया। गिरोह ने उनका नाम ‘हामिद’ रखा था। इस मामले में मदरसे का मौलवी अब्दुल मजीद, सलमान, मोहम्मद आरिफ समेत 4 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया था। आरोपितों के पास से ज़ाकिर नाइक की सीडी, धर्मांतरण प्रमाणपत्र, 22 बैंक खातों में संदिग्ध ट्रांजैक्शन और विदेशी फंडिंग से जुड़े सुराग मिले थे।

दैनिक भास्कर के रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार (31अगस्त 2025) को जब उनकी टीम सुभाषनगर के करेली गाँव और फैजनगर पहुँची। आरोपित सलमान और मोहम्मद आरिफ इस गाँव के रहने वाले हैं। इनलोगों ने गाँव के बृजपाल, उसकी माँ और बहन को इस्लाम कबूल करवाया था। इनलोगों ने ही फैजनगर के पीयूष और एक नाबालिग का धर्मांतरण करवाया था। गाँव के लोगों में इस गैंग को लेकर दहशत है। इन्हें डर है कि कहीं उनके बच्चों को ये शिकार न बना लें।

व्हाट्सएप ग्रुप बना ‘हनी ट्रैप’ किया जाता था

गिरोह के 20 से अधिक व्हाट्सएप ग्रुप थे। इसमें हर दिन फोटो और वीडियोज डाले जाते थे। धीरे-धीरे अश्लील फोटो और वीडियोज डालकर हिन्दू युवकों को फँसाया जाता था। अगर युवक दिलचस्पी दिखाए, तो उसे मदरसे में बुलाया जाता था।वहाँ लड़कियाँ होती थी, जो उसका ब्रेनवॉश करती थी। मौलाना उसे समझाता था कि अगर चार लड़कियाँ चाहिए, जन्नत चाहिए और ऐशो-आराम से रहना है, तो मुस्लिम बन जाओ।

हिन्दू देवी-देवताओं को लेकर अपशब्द बोले जाते थे। गिरोह के सदस्य इस्लाम की अच्छाई बताते हुए ये जानकारी भी देते थे कि कैसे आसानी से इस्लाम कबूल किया जा सकता है। इसके फायदे क्या हैं। चार बीवियाँ, घर, नौकर, पैसे और दूसरी चीजें आसानी से मिल सकती हैं। युवकों को उर्दू सिखाया जाता, कुरान-हदीस पढ़ाया जाता। अगर युवक सीख जाता, तो उसे मौलाना और मौलवी बनने का मौका मिलने की बात भी कही जाती।

फैजपुर के पीयूष को बनाया मोहम्मद अली

प्रभात मामले में गिरफ्तार अब्दुल माजिद ने अपनी बहन आयशा की फोटो और वीडियो भेज कर पीयूष को चंगुल में फँसाया था। उसे पहले मदरसा बुलाया गया और आयशा से निकाह करने मौका मिलने की बात कही गई। लेकिन पहले इस्लाम कबूल करने को कहा गया। पीयूष के ब्रेनवॉश के बाद उसका खतना किया गया। नया नाम दिया गया- मोहम्मद अली। धीरे-धीरे पीयूष खुद ही गिरोह का हिस्सा बन गया और 5 वक्त नमाज अदा करने लगा।

बरेली का ये मदरसा 2014 में अस्तित्व में आया है। पुलिस की जाँच में बरेली में 6 लोगों के धर्मांतरण की बात अब तक सामने आई है। लेकिन ये आँकड़ा और भी बढ़ सकता है।

गिरोह के सदस्यों को अलग-अलग काम दिए गए

गिरोह का मास्टमाइंड अब्दुल माजिद था। उसने गिरोह के सदस्यों को काम बाँट दिया था। सलमान दर्जी का काम करता था। लेकिन उसका असली काम इस्लाम से जुड़े किताब, सीडी और दूसरी सामग्री उपलब्ध करना था। आरिफ उसकी मदद करता था। जबकि फहीम नाई की दुकान चलाता था। उसे आने-जाने वालों की सारी जानकारी होती थी। वह इसे माजिद से शेयर करता था।

मदरसा संचालक अब्दुल माजिद के 27 जिलों से जुड़े तार

पुलिस का मानना है कि ये लोग अलग-अलग राज्यों से चंदा इकट्ठा करते थे और इसी पैसे से धर्मांतरण का धंधा चलाते थे। इस बड़े लेन-देन को देखते हुए एजेंसियाँ पाकिस्तान समेत अन्य देशों से फंडिंग की संभावना की जाँच कर रही हैं।

एसपी साउथ अंशिका वर्मा ने बताया कि इस गिरोह का नेटवर्क सिर्फ बरेली तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई राज्यों में फैला हुआ है। अब्दुल माजिद के ट्रेवल की हिस्ट्री 27 से अधिक जिलों से जुड़ी हुई है। उसके अकाउंट से 13 लाख रुपए बरामद हुए हैं। साथ ही कई बैंकों के चेकबुक और 21 बैकखाते मिले हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस इस मामले में और भी लोगों को गिरफ्तार करेगी। इस घटना ने एक बार फिर से धर्मांतरण गिरोहों की गंभीरता को उजागर कर दिया है, जो हमारे समाज के लिए एक बड़ा खतरा हैं।

SCO में भारत की कूटनीतिक जीत, साझा घोषणापत्र में सभी देशों ने की पहलगाम हमले की कड़ी निंदा: PM मोदी की कई पहलों की सराहना

चीन के तियानजिन में हुए शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के बाद सभी देशों ने संयुक्त रूप से घोषणा पत्र जारी किया। इसमें पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई और हमले में जान गवाए लोगों को सहानुभूति दी।

पत्र में कहा गया कि हमले के दोषियों, योजनाकारों और मददगारों को न्याय के कटघरे में लाया जाना चाहिए। इसके साथ सभी देशों ने आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता दिखाई और इस लड़ाई में दोहरे रवैये को अस्वीकार्य किया।

घोषणापत्र के बयान में कहा गया, “सदस्य देशों ने 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने मृतकों और घायलों के परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना और सहानुभूति व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसे हमलों के अपराधियों, आयोजकों और प्रायोजकों को कटघरे के सामने लाया जाना चाहिए।”

घोषणापत्र में यह भी कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संयुक्त राष्ट्र के नियमों और अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार, सुरक्षा परिषद के फैसलों और वैश्विक आतंकवाद-रोधी रणनीति को लागू करते हुए सभी आतंकी संगठनों के खिलाफ मिलकर लड़ना होगा। साथ ही कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर एक व्यापक समझौते को सभी देशों की सहमति से अपनाना बहुत जरूरी है।

SCO शिखर सम्मेलन में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी आतंकवाद को दुनिया के लिए खतरा बताया था। पीएम ने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए आतंकवाद की फंडिंग करने वाले देशों पर नकेल कसने की बात कही थी। साथ ही पीएम ने आतंकवाद के खिलाफ दोहरे रवैये पर भी सवाल उठाया था और जीरो टोलरेंस नीति अपनाने का आग्रह किया था।

SCO घोषणापत्र में भारत की पहलों की सराहना

SCO शिखर सम्मेलन के घोषणापत्र में भारत की पहलों की सराहना की गई। घोषणापत्र में ‘एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य’ थीम का जिक्र किया गया

सदस्य देशों ने 3 से 5 अप्रैल 2025 को नई दिल्ली में आयोजित 5वें SCO स्टार्टअप फोरम के परिणामों का स्वागत किया, जिसने विज्ञान, तकनीकी उपलब्धियों और इनोवेशन के क्षेत्र में सहयोग को गहरा किया।

साथ ही 21 से 22 मई 2025 को नई दिल्ली में आयोजित 20वें SCO थिंक टैंक फोरम का भी जिक्र किया। सदस्य देशों ने भारतीय विश्व मामलों की परिषद (ICWA) के SCO अध्ययन केंद्र की सांस्कृतिक और मानवीय आदान-प्रदान को मजबूत करने में योगदान की भी सराहना की।

11 साल का बच्चा खेल रहा था ‘डिंग डोंग डिचिंग’ प्रैंक, शख्स ने मार दी गोली: अमेरिका के टेक्सास की घटना, जाँच में जुटी पुलिस

अमेरिका के टेक्सास राज्य में ह्यूस्टन में शनिवार (30 अगस्त 2025) की रात ‘डिंग डोंग डिचिंग’ प्रैंक खेलते समय 11 साल के बच्चे को गोली मार दी, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, बच्चा अपने दोस्तों के साथ घर-घर की घंटी बजाकर भागने की शरारत कर रहा था। तभी घर के अंदर मौजूद शख्स ने गोली चला दी। बच्चे को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रविवार (31 अगस्त 2025) को उसने दम तोड़ दिया।

ह्यूस्टन पुलिस विभाग ने बताया कि यह घटना शहर के पूर्वी इलाके में रात 11 बजे से ठीक पहले हुई। मृतक बच्चा अपने कई दोस्तों के साथ पड़ोस में गया और एक घर की घंटी बजाई। पुलिस के मुताबिक, ‘डिंग डोंग डिचिंग’ या ‘डोरबेल डिच’ नाम की इस शरारत में कोई व्यक्ति दरवाजे की घंटी बजाकर दरवाजा खुलने से पहले ही भागने की कोशिश करता है। इसी दौरान घर के अंदर मौजूद व्यक्ति बाहर आया और बच्चे पर गोली चला दी।

ह्यूस्टन पुलिस ने स्थानीय मीडिया को बताया कि बच्चे को दो गोलियाँ लगीं। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बच नहीं सका। पुलिस ने कहा कि गोलीबारी के बाद एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया है, हालाँकि उसकी पहचान या उस पर लगे आरोपों के बारे में फिलहाल जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

अधिकारियों ने बताया कि जाँच अभी जारी है और जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। अमेरिका में पहले भी इस तरह की घटनाएँ हो चुकी हैं। मई 2023 में वर्जीनिया में एक किशोर की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी,

क्या है ‘डिंग डोंग डिचिंग’ प्रैंक

यह विदेश का फेमस और आम तौर पर कोई हानि न पहुँचाने वाला शरारत से भरा खेल है, जिसे बच्चे और बड़े अक्सर करते हैं। इस प्रैंक में किसी घर या अपार्टमेंट के दरवाजे पर जाकर दरवाजे की घंटी बजाता है (डिंग-डोंग), और फिर तुरंत भागकर छिप जाता है, ताकि घर के लोग दरवाजा खोलें और उसे देख न पाएँ।

लेकिन इस खेल के चक्कर में वर्जीनिया में एक व्यक्ति ने 18 साल के लड़के को गोली मार दी, जो TikTok वीडियो के लिए यह प्रैंक कर रहा था। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे TikTok पर एक वक्त पर यह प्रैंक ट्रेंड बन गया था, जब वह अपने दोस्तों के साथ ‘डिंग डोंग’ प्रैंक का वीडियो बना रहा था।

इसी तरह कैलिफ़ोर्निया में 2023 में एक व्यक्ति ने गुस्से में किशोरों की कार को टक्कर मार दी थी, जिसमें तीन बच्चों की मौत हो गई थी। जिससे बच्चे इसे मजे के लिए करने लगे थे। लेकिन यह शरारत अब खतरनाक साबित हो रही है। घर के मालिकों की प्रतिक्रिया कभी-कभी हिंसक हो जाती है, जिससे अनहोनी हो जाती है।

₹2500 का पार्सल, टैक्स ₹17000 का … भारत ने इसलिए बंद कर दी अमेरिका के लिए डाक सेवा: 25 अन्य देशों का भी यही फैसला, जानिए किन लोगों पर पड़ेगा असर

भारतीय डाक सेवा ने अमेरिका के लिए सभी श्रेणियों की डाक सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। इसके तहत पत्र, दस्तावेज, पार्सल और उपहार शामिल हैं। असल में यह फैसला अमेरिका के हाल ही में लागू किए गए नए सीमा शुल्क नियमों में अस्पष्टता के कारण लिया गया है।

अमेरिकी प्रशासन ने 30 जुलाई 2025 को एक कार्यकारी आदेश जारी किया। इसके तहत 29 अगस्त 2025 से $100 (लगभग ₹8,820) से अधिक मूल्य के किसी भी अंतरराष्ट्रीय पार्सल पर सीमा शुल्क लागू किया गया है।

इससे पहले तक अमेरिका में $800 (लगभग ₹70,569) तक के सामान पर कोई शुल्क नहीं लगता था। इसे ‘डि मिनिमिस छूट’ कहा जाता था। यह छूट अब पूरी तरह से समाप्त कर दी गई है।

भारत समेत कई देशों के लिए परेशानी ये है कि अमेरिका के सीमा शुल्क लागू करने के इस नियम में अमेरिकी कस्टम्स और बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) की ओर से यह साफ नहीं किया गया है कि शुल्क कैसे वसूला जाएगा, किस एजेंसी के माध्यम से यह प्रक्रिया चलेगी? इसी के चलते भारत समेत 25 अन्य देशों ने भी अमेरिका की डाक सेवाओं पर रोक लगा दी है।

नियम की अस्पष्टता के कारण एयरलाइंस ने अमेरिका के लिए डाक सामग्री ले जाने से इनकार कर दिया है। चूंकि भारत पोस्ट मुख्य रूप से इन्हीं एयरलाइंस के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय डाक भेजता है, इसलिए उनके पास कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बची है। इसी वजह से भारत पोस्ट को अमेरिका के लिए सभी डाक सेवाओं को रोकना पड़ा।

भारत की ओर से यह निलंबन विशेष रूप से उन लोगों को प्रभावित कर सकता है जो अमेरिका में अपने परिवारजनों को उपहार या जरूरी सामान भेजते हैं।

कई लोग त्योहारों या विशेष अवसरों पर उपहार भेजते हैं। इनमें छात्र, प्रवासी भारतीय और छोटे व्यापारी मुख्य तौर पर शामिल हैं। यह निर्णय उनके लिए असुविधाजनक साबित हो सकता है।

निलंबन के साथ भारत पोस्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन ग्राहकों ने पहले से बुकिंग की है लेकिन उनका सामान भेजा नहीं जा सका है, वे पोस्टेज शुल्क का रिफंडले सकते हैं। हालाँकि अब जब तक अमेरिका की ओर से नियमों की पूरी स्पष्टता नहीं आती, तब तक इस सेवा के बंद रहने के ही आसार हैं।

इन देशों ने लगाया बैन

अमेरिका में 1930 के दशक में ‘डि मिनिमिस छूट’ लागू किया गया था। इसका उद्देश्य था कि छोटे मूल्य के आयातित सामानों पर सीमा शुल्क न लगाया जाए ताकि व्यापार सरल और बेरोक-टोक बना रहे। इससे सीमा शुल्क अधिकारियों को ऐसे मामूली शुल्क वसूलने में समय और संसाधन की बचत करना भी एक मकसद था।

2016 में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस सीमा को $200 से बढ़कार $800 कर दिया था। इसके बाद अब जुलाई 2025 में अमेरिकी राषट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस छूट को पूरी तरह से खत्म कर दिया है।

भारत के साथ साथ जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, बेल्जियम, मेक्सिको, स्पेन, यूनाईटेड किंगडम, इटली, नीदरलैंड्स, पुर्तगाल, स्वीडन, नॉर्वे, डेनमार्क, फिनलैंड, स्विट्जरलैंड, जापान, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, कनाडा, आयरलैंड, ऑस्ट्रिया, पोलैंड, चेक रिपब्लिक, साउथ कोरिया, ताइवान और न्यूजीलैंड आदि देश शामिल हैं।

नए नियमों में क्या हैं मुख्य बातें

डि मिनिमस छूट को खत्म करने के साथ साथ इस नियम में कई बदलाव किए गए हैं। 29 अगस्त 2025 से लागू हुए नए नियमों के अनुसार, यदि किसी पार्सल का मूल्य $100 से अधिक है, तो उस पर सीमा शुल्क लगाया जाएगा। यह नियम उपहारों, व्यक्तिगत सामानों और व्यापारिक वस्तुओं सभी पर लागू होता है।

अमेरिका ने अलग-अलग देशों पर अलग-अलग टैरिफ दरें लागू की हैं। 15% तक टैरिफ वाले देशों के पार्सल पर $80 अतिरिक्त शुल्क, 16%- 25% टैरिफ वाले देशों पर $160 शुल्क, 25% से अधिक टैरिफ वाले देशों पर $200 तक का शुल्क जैसी दरें तय की गई हैं।

उदाहरण के लिए, भारत पर अमेरिका ने 25% से अधिक टैरिफ लगाया है, जिससे भारत से भेजे गए $30 (लगभग ₹2500) के पार्सल पर ₹17,000 तक का शुल्क लग सकता है।

किन लोगों पर पड़ेगा इसका असर

डाक निलंबन का असर कई वर्गों पर पड़ेगा, खासकर उन लोगों पर जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छोटे पैमाने पर व्यापार या व्यक्तिगत वस्तुओं का आदान-प्रदान करते हैं। यह डाक निलंबन केवल एक लॉजिस्टिक मुद्दा नहीं है बल्कि वैश्विक व्यापार, व्यक्तिगत संबंधों और कस्टमर सर्विस पर भी असर डालेगा।

इसका असर छोटे व्यापारी और ई-कॉमर्स विक्रेताओं पर सबसे ज्यादा पड़ने वाला है। जो विक्रेता कम मूल्य के उत्पाद अमेरिका भेजते थे, वे अब डि मिनिमिस छूट न होने के चलते और डाक निलंबन के कारण भारी शुल्क और जटिल कस्टम प्रक्रियाओं का सामना करेंगे।

पहले जहाँ $800 तक के सामान पर कोई शुल्क नहीं लगता था, अब हर पार्सल पर टैरिफ लागू होगा। इससे उनकी लागत बढ़ेगी, प्रतिस्पर्धा में पिछड़ने का खतरा रहेगा और अमेरिका में ग्राहकों तक पहुँचना कठिन हो जाएगा। छोटे व्यवसायों के लिए यह एक बड़ा झटका है, क्योंकि उनकी मार्जिन पहले ही सीमित होती है।

इसके अलावा प्रवासी भारतीय और छात्र भी प्रभावित होंगे। अमेरिका में रहने वाले भारतीय प्रवासी और छात्र अक्सर अपने परिवार से जरूरी सामान, जैसे घरेलू खाद्य पदार्थ, कपड़े, किताबें या उपहार मँगवाते हैं।

डाक निलंबन के चलते न सिर्फ इन वस्तुओं की डिलीवरी में देरी होगी बल्कि उन्हें अब अतिरिक्त शुल्क भी देना पड़ेगा। त्योहारों या खास मौकों पर भेजे गए उपहार भी समय पर नहीं पहुँच पाएँगे। छात्रों के लिए यह विशेष रूप से कठिन होगा, क्योंकि वे सीमित बजट में रहते हैं।

इन नए नियमों की जद में केवल भारतीय ही नहीं पर साथ ही अमेरिकी उपभोक्ता भी आ रहे हैं। अमेरिकी नागरिक पहले अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से सस्ते दामों पर सामान मँगवा सकते थे, लेकिन अब वही सामान महँगे दामों पर मिलेगा।

इससे उनकी खरीदारी पर असर पड़ेगा और उन्हें स्थानीय विकल्पों की ओर मुड़ना पड़ सकता है, जो अक्सर अधिक महँगे होते हैं। कुल मिलाकर उपभोक्ता की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और विकल्प सीमित हो जाएँगे।

अब भारत समेत प्रतिबंध लगाने वाले सभी देशों के डाक विभागों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जब तक अमेरिका अपने नए नियमों की प्रक्रिया और शुल्क वसूली की व्यवस्था को साफ तौर पर सामने नहीं लाता तब तक कोई भी देश डाक सेवाएँ बहाल करने के पक्ष में नहीं होगा। अब देखना होगा कि ट्रंप इसे लेकर अपने रुख में बदलाव करते हैं या फिर इसके नतीजे को लेकर बेफिक्र रहेंगे।

‘कुछ देशों द्वारा आतंकवाद का खुला समर्थन…’: PM मोदी ने SCO समिट से पहलगाम हमले पर पाकिस्तान को सुनाई खरी-खरी, शहबाज की मौजूदगी में बोले- दोहरा रवैया स्वीकार नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन के तियानजिन में शंगाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन को संबोधित किया। संबोधन में पीएम ने कहा कि आतंकवाद दुनिया के लिए खतरा है। इस दौरान पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र भी किया और हमले को आतंकवाद का ‘सबसे बुरा रूप’ बताया। यह बातें पीएम मोदी ने पाकिस्तान की पीएम शहबाज शरीफ की मौजूदगी में कहीं।

पीएम मोदी ने कहा, “पहलगाम में आतंकी हमला न केवल भारत पर हमला था बल्कि मानवता में विश्वास करने वाले सभी देशों के लिए एक चुनौती थी। यह एक बड़ा सवाल उठाता है- क्या कोई देश जो आतंकवाद का खुलेआम समर्थन करता है, हमें स्वीकार करना चाहिए?”

प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “हमें स्पष्ट कहना होगा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कोई दोहरा रवैया नहीं चलेगा।” इस दौरान पीएम ने आतंकवाद के लिए फंडिंग को सबसे बड़ी चिंता बताते हुए SCO समूह से जुड़े सभी देशों से आतंकवाद पर जीरो टोलरेंस नीति अपनाने का भी आग्रह किया।

आतंकवाद पर सभी देशों को आगाह करते हुए पीएम ने कहा, “आतंकवाद और उग्रवाद मानवता के लिए एक साझा चुनौती है। जब तक ये खतरे हैं, कोई भी देश या समाज सुरक्षित महसूस नहीं कर सकता।” पीएम ने जोर देकर कहा कि सुरक्षा हर देश का अधिकार है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “भारत ने अल-कायदा जैसे आतंकवादी संगठनों के खिलाफ लड़ाई में आगे बढ़कर काम किया है और हम आतंकवाद के लिए किसी भी तरह के फंडिंग का विरोध करते हैं।”

पहलगाम आतंकी हमले पर आगे बोलते हुए पीएम ने कहा, “पहलगाम में आतंकवाद का बहुत ही बुरा रूप देखा। मैं उन सभी मित्र देशों का धन्यवाद करता हूँ जो हमारे साथ खड़े रहे।” पीएम ने आगे कहा, “हमने अपने बच्चों को खोया है और कई बच्चे अनाथ हो गए हैं। भारत पिछले चार दशकों से आतंकवाद की समस्या का सामना कर रहा है।”

SCO समिट से भारत की डिप्लोमेसी को मिली नई धार, पीएम मोदी ने कई वैश्विक नेताओं से की मुलाकात: व्यापार से लेकर सांस्कृतिक संबंधों तक पर हुई चर्चा

प्रधानमंत्री मोदी ने SCO समिट से अलग नेपाल, मालदीव, मिस्र, बेलारूस, ताजिकिस्तान, कजाकिस्तान, वियतनाम, म्यांमार, लाओस, तुर्कमेनिस्तान और आर्मेनिया के राष्ट्राध्यक्षों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की। इस दौरान व्यापार से लेकर सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।

रविवार (31 अगस्त 2025) को तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के राष्ट्राध्यक्षों के आधिकारिक स्वागत समारोह में पीएम मोदी पहुँचे, तो चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और उनकी पत्नी ने पूरे जोश ने उनका स्वागत किया।

चीनी राष्ट्रपति ने शिखर सम्मेलन में आए सभी राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों का भी आधिकारिक रूप से स्वागत किया। प्रधानमंत्री मोदी ने भव्य रात्रिभोज से पहले विश्व नेताओं से मुलाकात की। शी जिनपिंग के साथ स्वागत समारोह के बाद सभी नेताओं की पारंपरिक सामूहिक तस्वीर ली गई।

इसके बाद, प्रधानमंत्री मोदी ने कार्यक्रम स्थल पर कई राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों से बातचीत की। उन्होंने सबसे पहले नेपाली प्रधानमंत्री केपी ओली से मुलाकात की। उन्होंने एक्स पर एक तस्वीर पोस्ट करते हुए कहा, “नेपाल के साथ भारत के संबंध गहरे और बेहद खास हैं।”

इसके बाद उन्होंने मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू से मुलाकात की। करीब एक महीने पहले पीएम मोदी ने मालदीव का दौरा किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने एक्स पर पोस्ट किया, “तियानजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान मालदीव के राष्ट्रपति मुइज्जू से बातचीत की। मालदीव के साथ भारत का विकासात्मक सहयोग दोनों देशों के लोगों के लिए बेहद फायदेमंद है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने एससीओ शिखर सम्मेलन में मिस्र के प्रधानमंत्री मुस्तफा मदबौली से भी मुलाकात की। बातचीत के दौरान उन्होंने कुछ साल पहले की अपनी मिस्र यात्रा को याद किया। उन्होंने कहा कि भारत-मिस्र मित्रता प्रगति की नई ऊँचाइयों को छू रही है।

इसके बाद, उन्होंने बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको से मुलाकात की। मोदी ने एक्स पर लिखा, “जहाँ तक हमारे देशों का सवाल है, हम दोनों ही भविष्य में मिलने वाले अवसरों को लेकर बेहद आशान्वित हैं।” गौरतलब है कि यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में बेलारूस रूस का एक अहम सहयोगी रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने ताजिकिस्तान के राष्ट्रपति इमोमाली रहमान से भी बात की। उन्होंने कहा कि मध्य एशियाई देश ताजिकिस्तान के साथ भारत के व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध बढ़ रहे हैं।

मध्य एशिया के देश, कजाकिस्तान के राष्ट्रपति तोकायेव से भी प्रधानमंत्री मोदी ने मुलाकात की। उन्होंने एक्स पर ट्वीट किया, “हमारे देश ऊर्जा, सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवा और फार्मा सहित कई प्रमुख क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं।”

SCO शिखर सम्मेलन में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वियतनाम के प्रधानमंत्री फाम मिन्ह चिन के साथ संक्षिप्त चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत रक्षा, व्यापार, हरित ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में वियतनाम के साथ संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए उत्सुक है।

म्यांमार के कार्यवाहक राष्ट्रपति, वरिष्ठ जनरल मिन आंग ह्लाइंग से भी पीएम मोदी ने मुलाकात की। प्रधानमंत्री मोदी ने ? पर एक पोस्ट में कहा, “म्यांमार भारत की एक्ट ईस्ट और नेबरहुड फर्स्ट नीतियों का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। हम दोनों इस बात पर सहमत हुए कि व्यापार, संपर्क, ऊर्जा, रेयर मिनरल्स और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में संबंधों को बढ़ावा देने की अपार संभावनाएँ हैं।”

इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दक्षिण पूर्व एशियाई देश लाओ पीपुल्स डेमोक्रेटिक रिपब्लिक के प्रधानमंत्री थोंगलाउन सिसोउलिथ से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि “हमारे देशों के बीच घनिष्ठ मित्रता, विशेष रूप से व्यापार और संस्कृति के क्षेत्र में, अत्यंत लाभकारी है।”

प्रधानमंत्री मोदी ने तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रपति सरदार बर्दीमुहामेदोव से भी बातचीत की। उन्होंने अलग-अलग मुद्दों पर अपने विचार साझा किए।

अर्मेनिया के राष्ट्रपति निकोल पाशिनयान से मुलाकात और वार्ता को प्रधानमंत्री मोदी ने एक ‘बहुत अच्छी बातचीत’ कहा। उन्होंने ट्वीट किया, “भारत और आर्मेनिया के बीच मधुर और प्रगाढ़ संबंध हैं, जो मित्रता और आपसी सहयोग पर आधारित हैं।” अमेरिका की मध्यस्थता से आर्मेनिया और अज़रबैजान के बीच हुए समझौते के बाद, यह भारत और अर्मेनियाई राष्ट्रपति के बीच पहली सीधी बातचीत थी।

प्रधानमंत्री मोदी ने उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोयेव से मुलाकात के बारे में भी एक्स पर पोस्ट किया। उन्होंने कहा, “भारत और उज्बेकिस्तान एक अहम साझेदार हैं। ये संस्कृति, अर्थव्यवस्था और लोगों के बीच संबंधों के माध्यम से निरंतर आगे बढ़ रहा है।”

इसके अलावा, उन्होंने किर्गिज़स्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव से भी बातचीत की। इसके बारे में एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने कहा, “तिआनजिन में किर्गिज राष्ट्रपति सदिर जापारोव के साथ बहुत ही अहम बातचीत हुई। हमारे देशों के बीच एक मजबूत साझेदारी है और हम अपने विकास के इस सहयोग को और मज़बूत बनाने के लिए मिलकर काम करते रहेंगे।” दरअसल पीएम मोदी ने व्यक्तिगत रूप से सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों से मुलाकात कर आपसी रिश्तों को मजबूत करने पर जोर दिया है। इस मुलाकात से व्यापार, रक्षा, संपर्क, सांस्कृतिक संबंध समेत कई क्षेत्रों में दूरगामी परिणाम सामने आएँगे।