Home Blog Page 262

महात्मा गाँधी की मूर्ति को अपमानित करना अनैतिक, पर अपराध नहीं: केरल हाई कोर्ट, छात्र के खिलाफ केस रद्द; जानिए क्या है मामला

केरल हाई कोर्ट ने महात्मा गाँधी की प्रतिमा के साथ अभद्रता करने वाले शख्स के खिलाफ कार्रवाई रद्द कर दी। हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसा करना कोई अपराध नहीं था। ऐसा करने वाला एक छात्र था, जिसने महात्मा गाँधी के ऊपर एक क्रिसमस वाला श्रद्धांजलि माला भी रख दिया था।

केरल हाई कोर्ट ने कहा कि छात्र का कृत्य भले ही निंदनीय है, लेकिन उसे कानूनन अपराध नहीं माना जा सकता। हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसे कृत्य को दंडित करने के लिए कोई स्पष्ट कानूनी प्रावधान मौजूद नहीं है।

कोर्ट का क्या कहना था?

यह मामला केरल हाई कोर्ट की जस्टिस वी जी अरुण की बेंच ने सुना। उन्होंने यह कहते हुए मामला रद्द कर दिया कि याचिकाकर्ता का आचरण भले ही सामाजिक रूप से अस्वीकार्य और निंदनीय हो लेकिन कानून के अनुसार उसे गैर-कानूनी नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने साफ किया कि हर अनैतिक कार्य, अवैध कार्य नहीं होता।

कोर्ट ने ‘nullum crimen sine lege’ यानी ‘बिना कानून के कोई अपराध नहीं’ के सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि जब तक किसी कृत्य को किसी कानून में अपराध के रूप में परिभाषित नहीं किया गया हो, तब तक उसे अपराध नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में भी राष्ट्रीय नेताओं की प्रतिमाओं को अपवित्र करने के खिलाफ कोई प्रावधान नहीं है।

वकीलों की दलीलें और कोर्ट की टिप्पणी

छात्र के वकील एडवोकेट एस राजीव ने दलील दी कि भले ही छात्र का तरीका गलत था, लेकिन उसे अपराध नहीं कहा जा सकता। वकील ने दलील दी कि न तो कोई कानून टूटा है और न ही किसी की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया गया है।

वहीं, सरकारी पक्ष की ओर से एडवोकेट हाशिम के एम ने तर्क दिया कि यह कृत्य समाज में असंतोष फैलाने वाला था। कोर्ट ने यह भी कहा कि भारत के नागरिकों को संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों के साथ-साथ अपने मौलिक कर्तव्यों का भी पालन करना चाहिए।

कोर्ट ने माना कि स्वतंत्रता सेनानियों का सम्मान करना भी एक नैतिक कर्तव्य है, भले ही संविधान में उसका स्पष्ट रूप से जिक्र नहीं किया गया हो।

क्या था मामला?

यह मामला एक लॉ छात्र से जुड़ा है, जिस पर आरोप था कि उसने महात्मा गाँधी की प्रतिमा पर चशमा और क्रिसमस की माला रखी और फिर कहा कि गाँधी जी का निधन बहुत पहले हो चुका है।

इस पूरे कृत्य की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई और उसे छात्रों के व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर किया गया। इससे कॉलेज में तनाव फैल गया और प्रिंसिपल ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद छात्र को पाँच दिन के लिए कॉलेज से निलंबित कर दिया गया और उसे ₹5000 का जुर्माना भी भरना पड़ा।

छात्र के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 153 (दंगा भड़काने के इरादे से जानबूझकर उकसाना) और धारा 426 (शरारत के लिए दंड) के तहत केस दर्ज किया गया था। अब यह केस रद्द हो गया है।

ब्रह्मोस की ताकत से बदला ‘एशिया पैसिफिक’, फिलीपींस के राष्ट्रपति ने बताया ‘इंडो पैसिफिक’: भारतीयों के लिए वीजा फ्री एक्सेस, जानिए कैसे बदली रिश्तों की धुरी

चीन के लगातार बढ़ते खतरे के बीच भारत ने एक बड़ी कूटनीतिक बढ़त हासिल की है। भारत की यात्रा पर आए फिलिपींस के राष्ट्रपति फ़र्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने भारत के आसपास के समुद्री क्षेत्र को एशिया पैसिफिक के बजाय इंडो पैसिफिक कह कर संबोधित किया है। उनके कहने का सीधा अर्थ है कि एशिया पैसिफिक का अभिभावक और रक्षक भारत है। उनकी यह यात्रा भारत और फिलिपींस सम्बन्धों में एक नया अध्याय है। इस दौरान रक्षा सहयोग मजबूत करने की बात भी हुई है।

भारत की यात्रा पर आए फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर मार्कोस जूनियर का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (5 अगस्त 2025) को राष्ट्रपति भवन में स्वागत किया। राष्ट्रपति मार्कोस भारत की 5 दिवसीय राजकीय यात्रा पर आए हैं।

यह दौरा भारत और फिलीपींस के बीच कूटनीतिक संबंधों के 75 साल पूरे होने के अवसर पर हो रहा है। इसे दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

स्वागत समारोह के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मार्कोस ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की बदलती स्थिति पर बात की। उन्होंने कहा कि अब इसे एशिया-प्रशांत क्षेत्र की बजाय इंडो-पैसिफिक क्षेत्र कहा जा रहा है और यह आज की वैश्विक राजनीति, व्यापार और अर्थव्यवस्था को बेहतर तरीके से दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि नई तकनीकों और बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था और भू-राजनीति के कारण दोनों देशों के लिए कई नए अवसर उभरे हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “यह यात्रा नई संभावनाओं की खोज और हमारे मौजूदा संबंधों को मजबूत करने के लिए है।”

मार्कोस ने याद दिलाए अपने पारिवारिक संबंध

फिलीपींस के राष्ट्रपति मार्कोस ने भारत में होने पर खुशी जताई और हाल के वर्षों में भारत के तेज विकास की सराहना की। उन्होंने अपने पिता और पूर्व राष्ट्रपति फर्डिनैंड मार्कोस सीनियर को याद करते हुए कहा कि वे 1976 में भारत की यात्रा करने वाले पहले फिलीपीनी राष्ट्रपति थे।

राष्ट्रपति मार्कोस ने कहा, “यह मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है कि मैं अपने चार पूर्ववर्ती राष्ट्रपतियों के नक्शेकदम पर चलते हुए भारत आया हूँ। मैं भारत की आपकी अगुवाई में हुई शानदार उपलब्धियों के लिए बधाई देता हूँ। जब मैंने दिल्ली में कदम रखा, तो भारत के तेज बदलाव और दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की ऊर्जा मुझे साफ महसूस हुई।”

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आतिथ्य और सहयोग के लिए भी धन्यवाद किया और हाल ही में भारत द्वारा फिलीपींस को चावल के निर्यात प्रतिबंध से छूट देने पर आभार जताया। गौरतलब है कि चावल फिलीपींस के खाने का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। फिलीपींस ने 2024 में भारत से 20 हजार+ टन चावल का निर्यात किया था।

राष्ट्रपति मार्कोस ने कहा, “हाल के वर्षों में हमारे बीच सहयोग काफी बढ़ा है। मुझे खुशी है कि अब हम इस मित्रता को एक पूर्ण रणनीतिक साझेदारी में बदल रहे हैं।”

फिलिपींस के लिए भारतीयों को नहीं लेना पड़ेगा वीजा

राष्ट्रपति मार्कोस ने लोगों के बीच बेहतर संबंधों को बढ़ावा देने के लिए उठाए गए कदमों पर एक भाषण दिया। उन्होंने इस दौरान ऐलान किया कि भारतीय पर्यटकों के लिए फिलीपींस में वीजा-फ्री प्रवेश की सुविधा होगी। उन्होंने और अधिक संख्या में भारतीयों को फिलीपींस घूमने का निमंत्रण दिया।

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताया कि भारत ने फिलीपींस के पर्यटकों के लिए वीजा की फीस माफ़ कर दी है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा, “हम इस साल अक्टूबर से सीधी उड़ानों की दोबारा शुरुआत का स्वागत करते हैं और इस तरह की सीधी हवाई कनेक्टिविटी को आगे भी बनाए रखने और बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

रक्षा और समुद्री सहयोग पर फोकस

भारत और फिलीपींस के नेताओं के बीच बातचीत में रक्षा और समुद्री सहयोग पर खास जोर दिया गया। राष्ट्रपति मार्कोस ने भारत को रक्षा उद्योग में सहयोग खासकर भारत से ब्रह्मोस मिसाइल जैसे रक्षा प्लेटफॉर्म के निर्यात के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने इस क्षेत्र में और अधिक सहयोग की बात भी कही।

बातचीत में संयुक्त सैन्य अभ्यास, समुद्री गतिविधियों में सहयोग, अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आदान-प्रदान और अन्य रक्षा सहयोग के पहलुओं पर भी चर्चा हुई।

भारत ने यह भी कहा कि वह कई देशों को रक्षा प्लेटफॉर्म निर्यात कर रहा है और फिलीपींस भी इन प्लेटफॉर्म्स में रुचि दिखा रहा है। दोनों देशों के बीच जहाजों के दौरे और बहुपक्षीय मंचों के तहत सहयोग पर भी चर्चा हुई।

यह सहयोग आपसी समझ, समुद्री क्षेत्र की निगरानी बढ़ाने, इंटरऑपरेबिलिटी बेहतर बनाने और आपदा प्रबंधन में तैयारियों को मजबूत करने पर केंद्रित है।

इसके अलावा, भारत ने अपनी अंतरिक्ष क्षमताओं और कम लागत वाले स्पेस प्रोग्राम के बारे में भी बताया। राष्ट्रपति मार्कोस ने माना कि उन्होंने भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की लागत प्रभावशीलता का अध्ययन किया है और वे भारत की तकनीक का उपयोग मौसम की सटीक भविष्यवाणी, कृषि सुधार और आपदा राहत जैसे सामाजिक क्षेत्रों में करना चाहते हैं।

भारत-फिलीपींस रक्षा संबंध: ब्रह्मोस समझौता

भारत और फिलीपींस ने रक्षा क्षेत्र में एक अहम कदम उठाया है। अप्रैल 2024 में भारत ने फिलीपींस को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें डिलीवर की थी। यह मिसाइलें 2022 में हुए 375 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹3100 करोड़) के समझौते के तहत दी गई हैं।

इन मिसाइलों को भारतीय वायुसेना के C-17 ग्लोबमास्टर विमान के जरिए भेजा गया था। यह भारत की ओर से दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश फिलीपींस को किया गया पहला बड़ा रक्षा निर्यात है।

इधर जमीनों को ‘मुक्त’ करा रही असम की BJP सरकार, उधर सत्ता में आने पर ‘अवैध’ कब्जों वाली जमीनों को फिर से बाँटने का वादा कर रहे गौरव गोगोई

असम में हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली BJP सरकार लगातार अवैध कब्जों के खिलाफ अभियान चला रही है। इससे बड़ी संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठिए प्रभावित हुए हैं। इससे चिढ़ी कॉन्ग्रेस ने सत्ता में लौटने पर उन जमीनों को बाँटने का वादा किया है जो कथित तौर पर गलत तरीके से मौजूदा सरकार से जुड़े लोगों ने हड़पी है।

असम प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने 3 अगस्त को मुख्यमंत्री सरमा पर एक हमला करते हुए घोषणा की, “अगर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों में विपक्षी पार्टी राज्य में सत्ता पर काबिज होती है तो मुख्यमंत्री और उनके मंत्रिमंडल द्वारा ‘अवैध रूप से’ कब्जा की गई भूमि को वंचित लोगों को आवंटित किया जाएगा।”

जोरहाट से लोकसभा सांसद गोगोई ने कहा, “मुख्यमंत्री और उनके मंत्रियों द्वारा भूमि सुधार के नाम पर अवैध रूप से अर्जित की गई जमीनों को नई कॉन्ग्रेस सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में ही गरीबों में बाँटने का फैसला लिया जाएगा।” उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी जनता की मदद के लिए भूमि और आर्थिक नीति दोनों में बदलाव लाएगी।

जेल जाने को लेकर सीएम हिमंत ने दिया मुँहतोड़ जवाब

कॉन्ग्रेस नेता ने आगे कहा, “हिमंत बिस्वा सरमा के शासनकाल में हुई लूट और अन्याय पर रोक लगाई जाएगी। कांग्रेस प्रगतिशील भूमि नीतियों और आर्थिक विकास पर आधारित एक नई सरकार बनाएगी।” उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गाँधी के इस वादे को पूरा करना उनकी जिम्मेदारी है कि असम के लोग मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा को जेल में देखेंगे।

इसका जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, ” क्या गारंटी है कि मुझसे पहले राहुल गाँधी जेल नहीं जाएँगे।” उन्होंने कहा कि एक राष्ट्रीय नेता का इस तरह का बयान देना काफी अपमानजनक है और तब जब नेता अपनी माँ सोनिया गाँधी के साथ नेशनल हेराल्ड केस में पहले ही जमानत पर है।

असम के भूमि सुधार अभियान का सच

कॉन्ग्रेस असम में अतिक्रमण हटाने के अभियान का शुरू से विरोध कर रही है और इसे कोर्ट के आदेशों की अवमानना बता रही है। जबकि तथ्य ये है कि गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड और मिजोरम जैसे 4 पूर्वोत्तर राज्यों की सीमाओं पर मौजूद वन क्षेत्रों में अतिक्रमण से निपटने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन करने का आदेश दिया है।

एनजीटी को केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने एक रिपोर्ट सौंपी है जिसमें बताया गया है कि मार्च 2024 तक राज्य में कुल अतिक्रमणग्रस्त वन क्षेत्र 3,620.9 वर्ग किलोमीटर (3,62,090 हेक्टेयर) था, जो देश में मध्य प्रदेश के बाद दूसरे स्थान पर आता है।

अतिक्रमण के खिलाफ दायर याचिका में ये भी बताया गया था कि इसका वन्यजीवों और वन संरक्षण पर काफी बुरा असर पड़ा है। इस पर गुवाहाटी हाईकोर्ट ने असम सरकार को वन संरक्षित क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। इससे पहले भी गुवाहाटी हाईकोर्ट वन क्षेत्रों को अतिक्रमण से मुक्त कराने का आदेश कई बार दे चुका है।

अतिक्रमण ने जानवरों को बेदखल किया

गौरतलब है कि राज्य में दशकों से चल रहे वन क्षेत्र में अतिक्रमण का असर जीव-जन्तुओं पर पड़ा है। ये लोग अक्सर गाँवों की ओर भागने के लिए विवश होते हैं। खास कर हाथियों के गाँव के खेतों में घुसने और लोगों पर हमला करने की कई घटनाएँ सामने आई है।

असम के विशेष रूप से ग्वालपाड़ा जैसे जिलों में आम लोगों और हाथियों के बीच संघर्ष की खबरें आती रहती हैं। अतिक्रमण से जैव विविधता पर भी असर पड़ा है। लेकिन कॉन्ग्रेस राजनीतिक फायदे के लिए इसका इस्तेमाल कर रही है। यहाँ तक कि पिछले साल सोनापुर के कोसुटोली इलाके में अवैध रूप से घुसे बांग्लादेशी घुसपैठियों को उकसाने के आरोप भी कॉन्ग्रेस पर सीएम सरमा ने लगाया था।

उन्होंने कहा, “कांग्रेस और अन्य कट्टरपंथी ताकतों ने अतिक्रमणकारियों को उकसाया। उन्होंने पुलिस पर हमला किया। बांग्लादेश में जो नारा लगाया जा रहा था, वही नारा अब यहाँ भी लगाया जा रहा है। असम पुलिस की कार्रवाई के बाद इलाका फिर से शांत हो गया है और बेदखली का काम जारी है।”

ग्वालपाड़ा में सरकार की कार्रवाई के दौरान हिंसा भड़क गई थी, जिसमें 21 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इसके बाद सरमा ने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने चायगाँव में पार्टी कार्यकर्ताओं को ‘अतिक्रमणकारियों’ और ‘भूमि जिहादियों’ को सरकारी जमीन पर कब्जा करने के लिए उकसाया।

सरमा ने गोगोई पर लगाए आरोप

सीएम सरमा ने कॉन्ग्रेस नेता गौरव गोगोई पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी से संबंध होने के आरोप लगाते रहे हैं। गोगोई की ब्रिटिश पत्नी एलिजाबेथ कूलबर्न जब दिल्ली के क्लाइमेट एंड डेवलपमेंट नॉलेज नेटवर्क में प्रोजेक्ट मैनेजर थी, उस वक्त उनके एक पाकिस्तानी से संबंध थे। पाकिस्तानी मूल के अली तौकीर शेख और एलिजाबेथ एक ही ऑफिस में काम करते थे। शेख एशिया क्षेत्रीय निदेशक थे। उनपर भारत के खिलाफ सोशल मीडिया में गलत जानकारी देने का रिकॉर्ड रहा है। उन्होंने दिल्ली दंगों को लेकर संसद में दिए गोगोई के बयान का समर्थन किया था।

फरवरी में सीएम सरमा ने आरोप लगाया था, “आईएसआई से संबंध, युवाओं का ब्रेनवॉश और पिछले 12 सालों से भारतीय नागरिकता लेने से इनकार करने के आरोपों से जुड़े गंभीर सवालों के जवाब दिए जाने की जरूरत है। इसके अलावा, धर्मांतरण गिरोह में शामिल होना और राष्ट्रीय सुरक्षा को अस्थिर करने के लिए जॉर्ज सोरोस समेत बाहरी लोगों से धन लेना गंभीर चिंता का विषय है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।”

गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में यही बात कही थी। उन्होंने गोगोई की ओर मुखातिब होते हुए कहा था, “आप कई बार पाकिस्तान गए हैं, लेकिन क्या कभी बॉर्डर वाले इलाकों में गए हैं। क्या आप समझते हैं कि हमारे सैनिक किस परिस्थितियों में काम करते हैं।”

असम सरकार ने कई अवैध मदरसों पर भी कार्रवाई की। इन मदरसों को शिक्षा देने के नाम पर कट्टरपंथी धार्मिक प्रशिक्षण दिया जा रहा था। यहाँ तक कि ये भी पता चला कि कई मदरसे के कनेक्शन पाकिस्तान के आतंकवादियों से हैं। इन मदरसों को ध्वस्त करने का कॉन्ग्रेस ने विरोध किया था।

गौर करने की बात ये भी है कि गोगोई जब असम कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष चुने गए, तो बराक घाटी जाकर कट्टरपंथी मौलाना अहमद सईद गोविंदपुरी से मुलाकात की थी। ये कार्यक्रम गुप्त था और इसे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के बहाने रात में अंजाम दिया गया।

अतिक्रमण के खिलाफ एक्शन जारी

विपक्ष और कट्टरपंथियों के तमाम विरोध के बावजूद असम में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई जारी है। प्रशासन ने पिछले 5 दिनों में गोलाघाट जिले के रेंगा रिजर्व वन से करीब 8900 बीघा भूमि खाली कराई और 4000 से अधिक अवैध ढाँचों को ध्वस्त किया।

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, “पिछले 5 दिनों के दौरान वन भूमि अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की गई और उसपर अवैध कब्जा हटाया गया। ये अभियान बिद्यापुर, पीठाघाट,सोनारीबील, दोयालपुर, डोलोनीपाथर, खेरबारी, आनंदपुर और मधुपुर जैसे सघन आबादी वाले क्षेत्रों में चलाया गया। “

गोलाघाट जिले के दोयांग रिजर्व फॉरेस्ट के मेरापानी में 205 घरों को भी 8 अगस्त को खाली करने का नोटिस दिया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया, ‘बांग्लादेशी घुसपैठिए और संदिग्ध नागरिक’ कथित तौर पर असम के 29 लाख बीघा अर्थात 10 लाख एकड़ जमीन पर कब्जा किए हुए हैं। उन्होंने 21 जुलाई को दारंग ज़िले के गरुखुटी में बहुउद्देशीय कृषि परियोजना की चौथी वर्षगांठ के अवसर पर ये चौंकाने वाले खुलासे किए। 2021 में परियोजना की शुरुआत के बाद से 77,420 बीघा (25,500 एकड़) ज़मीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका है।

उन्होंने बताया, “दारंग जिले में बेदखल अभियान के सफल होने के बाद इसे बोरसोला, लुमडिंग, बुरहापहाड़, पाभा, बटाद्रवा, चापर और पैकान तक बढ़ाया गया है। पिछले चार वर्षों सरकार ने 1.29 लाख बीघा (करीब 43,000 एकड़) जमीन से अवैध कब्जा हटाया गया है। इसका एक बड़ा हिस्सा अब वन विकास और राज्य के नागरिकों के लिए आवंटित किया जा रहा है।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “असम सरकार ने अतिक्रमणकारियों से 182 वर्ग किलोमीटर जमीन वापस ले ली है। अब यही घुसपैठिए एक अलग ‘मिया लैंड’ राज्य की माँग कर रहे हैं। उनका सपना जरूर पूरा होगा। लेकिन भारत में नहीं, बल्कि बांग्लादेश या अफगानिस्तान में। मैं उन्हें वहाँ पहुँचने में जरूर मदद करूँगा।”

यहाँ तक कि हिंदू स्थलों पर भी कब्जा कर लिया गया है। राज्य के वैष्णव मठों के 15,288.52 बीघा क्षेत्र पर अभी भी अवैध अतिक्रमण है। हालाँकि वर्तमान सरकार इस भूमि को मुक्त कराने के लिए एक अभियान चला रही है।

मुख्यमंत्री के अनुसार , “सभी प्रशासनिक अधिकारियों को वन क्षेत्रों से अवैध कब्जा हटाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि मूल निवासी माने जाने वाले जनजातीय समुदायों के लिए वन अधिकार अधिनियम के तहत सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।” सीएम के मुताबिक इस अभियान को पूरा होने में कम से कम 10 साल लगेंगे

10 साल में हट जाएगा अतिक्रमण- सीएम

कॉन्ग्रेस पार्टी सरमा और उनके मंत्रियों पर हमला करने में व्यस्त है, जबकि असम सरकार राज्य और उसके निवासियों के लाभ के लिए अवैध अतिक्रमण हटाने में लगी हुई है। कॉन्ग्रेस का नजरिया ऐसा है जिसमें वह भारतीय और बांग्लादेशी मुस्लिमों के बीच भी अंतर करना भूल गई है। साथ ही हाईकोर्ट के आदेश को नजरअंदाज कर चुनावी फायदे के लिए भूमि सुधार अभियान का विरोध कर रही है।

( मूल रूप से ये लेख अंग्रेजी में लिखी गई है। इसे देखने के लिए यहाँ क्लिक करें)

’24 घंटे में बढ़ा देंगे टैरिफ’: रूस के साथ तेल कारोबार रोकने के लिए ट्रंप की नई गीदड़भभकी, भारत ने कहा- राष्ट्रीय हित के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएँगे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार (5 अगस्त 2025) को कहा कि अगले 24 घंटे में ही भारत पर टैरिफ की दरों में बढ़ोतरी की जाएगी। इस दौरान ट्रंप ने यह भी दावा किया कि भारत ने अमेरिका को शून्य टैरिफ का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया क्योंकि भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखे हुए है।

इस दौरान ट्रंप भारत के लिए ये कहने से भी नहीं चूके कि भारत एक अच्छा व्यापारिक साझेदार नहीं है और भारत के टैरिफ दुनिया में सबसे अधिक हैं। ट्रंप असल में मंगलवार को CNBC के शो स्क्वॉक बॉक्स के लिए इंटरव्यू दे रहे थे।

भारत के लेकर ट्रंप का ये बयान तब आया है जब महज एक दिन पहले ही वह भारत को रूस से तेल खरीदने के एवज में टैरिफ की दर बढ़ाने की धमकी दे चुके हैं। उनका कहना था कि भारत रूस से किफायती दरों पर तेल लेकर वैश्विक बाजार में महँगे दामों पर बेचता है और मुनाफा कमाता है। इसके साथ ट्रंप ने भारत-रूस के व्यापार को यूक्रेन युद्ध से भी जोड़ दिया था और कहा था कि भारत के कारण यूक्रेन में लोग मारे जा रहे हैं।

इसके जवाब में भारत के विदेश मंत्रालय ने ट्रंप और यूरोपियन यूनियन के लिए आँकड़ों के साथ जवाब दिया था। विदेश मंत्रालय ने कहा कि अमेरिका खुद भी रीस के साथ कई क्षेत्रों में व्यापार करता है। ऐसे में भारत के लिए ट्रंप का तंज कसना न केवल अनैतिक है बल्कि अकारण भी है।

विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “अमेरिका भी रूस से परमाणु उद्योग के लिए यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, ईवी उद्योग के लिएपैलेडियम के साथ उर्वरक और रसायन आयात करता है। ऐसे में भारत को निशाना बनाना न केवल अनुचित है, बल्कि गलत भी है। भारत हर बड़ी अर्थव्यवस्था की तरह अपने राष्ट्रीय हित और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।”

विदेश मंत्रालय की ओर से इस जानकारी के साझा करने के बाद व्हाइट हाउस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप से रूस- अमेरिका के मुद्दे पर सवाल किया गया तो ट्रंप ने इस बारे में कोई जानकारी न होने की बात कह डाली। ट्रंप ने कहा कि रूस के साथ किन किन चीजों का व्यापार और आयात किया जाता है, उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है।

खीझे तो बोले ट्रंप- बढ़ाएँगे शुल्क

ट्रंप ने कहा कि अगले 24 घंटों में भारत से आने वाले सामानों पर लगने वाले टैरिफ को 25% की दर से बढ़ा दी जाएगी। बताते चलें कि 30 जुलाई 2025 को भारत के सामान पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। साथ ही भारत पर रूस के साथ व्यापार करने पर अतिरिक्त कर लगाने की बात कही थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने फार्मास्यूटिकल्स के आयात पर 250% तक करने के संकेत भी दिए हैं। इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि हम चाहते हैं कि फार्मास्यूटिकल्स अमेरिका में बने इसलिए जो टैरिफ 150% था वह 250% तक भी जा सकता है।

ट्रंप पहले भी ब्रिक्स देशों पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दे चुके हैं। अगर ऐसा होता है, तो भारतीय सामानों के आयात पर प्रभावी टैरिफ 35% होगा। अमेरिका में एक विधेयक भी पारित होने वाला है। इसके तहत रूस के साथ भारत, चीन और ब्राजील के लेन-देन पर 500% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जा सकता है।

कनाडा में SFJ ने बनाया ‘दूतावास’, टैक्स पेयर के पैसे से बने गुरूद्वारे का हिस्सा कब्जाया: ‘डिप्लोमेटिक पोस्ट’ पर ‘रिपब्लिक ऑफ़ खालिस्तान’ लिखा

कनाडा के सरे में प्रतिबंधित आतंकी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) ने ‘एंबेसी ऑफ द रिपब्लिक खालिस्तान’ के नाम से कथित ‘दूतावास’ स्थापित कर दिया है। सुरक्षा एजेंसियों की इस पर कड़ी नजर है क्योंकि प्रतिबंधित संगठन एसएफजे वहाँ सिख जनमत संग्रह यानी सिख रेफेरेंडम से पहले एक बार फिर इस रूप में सामने आया है।

गुरुद्वारे में खोला गया कथित खालिस्तानी दूतावास

‘सिख फॉर जस्टिस’ ने गुरु नानक सिख गुरुद्वारे के साथ मिलकर कथित ‘खालिस्तान दूतावास’ खोला है। गुरुद्वारा परिसर में मौजूद एक इमारत में ‘खालिस्तान गणराज्य’ के बोर्ड के साथ यह अस्थायी डिप्लोमेटिक पोस्ट भी स्थापित की गई है।

गौर करने वाली बात यह है कि जिस इमारत में कथित दूतावास खोला गया है, वह टैक्स पेयर्स के पैसे से बना था। स्थानीय लोगों ने CNN-News18 को बताया गया है कि ब्रिटिश कोलंबिया सरकार ने हाल ही में उसी इमारत में एक लिफ्ट लगाने के लिए 150,000 डॉलर यानी 1,31,73,225 रुपए आवंटित किए।

खालिस्तानियों का घर बना कनाडा

इससे पहले कनाडा की खुफिया एजेंसी कैनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस ने सार्वजनिक तौर पर ये माना था कि खालिस्तानी कनाडा की धरती का इस्तेमाल हिंसा को बढ़ावा देने, धन जुटाने और योजना बनाने के लिए कर रहे हैं। ये लोग भारत को निशाना बनाना चाहते हैं। यह पहली बार हुआ है जब कनाडा की खुफिया एजेंसी ने अपनी सालाना रिपोर्ट में खास तौर पर कहा है कि खालिस्तानी संगठन हिंसा फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।

भारत लगातार जताता रहा है विरोध

भारत पहले से कहता आ रहा है कि कनाडा खालिस्तानियों की शरणस्थली बन गया है। 1980 से कनाडा में मौजूद खालिस्तानी चरमपंथी भारत में पंजाब को ‘एक स्वतंत्र खालिस्तान’ बनाने की माँग करते रहे हैं। अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए हिंसा का सहारा लिया गया। पंजाब सालों तक हिंसा की आग में जलता रहा।

भारत ने खालिस्तानी उग्रवादियों के प्रति ढिलाई बरतने पर बार-बार कनाडा से आपत्ति दर्ज कराई है। लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की आड़ में कनाडा में आतंकवाद को पनपने दिया गया और अब कनाडा की धरती पर टैक्सपेयर के पैसे से कथित “खालिस्तानी दूतावास” का निर्माण भारत के साथ में और खटास पैदा करेगा।

जहाँ प्रकट हुईं जानकी, उसे भव्य बनाएँगे ‘लव (नीतीश कुमार)-कुश (अमित शाह)’: घर-घर पहुँच रहा आमंत्रण का अक्षत, जानिए कैसे ‘पुनौरा धाम’ का होगा कायाकल्प

इस्लामी आक्रांताओं ने राम जन्मभूमि पर ढाँचा खड़ा कर दिया, भारत माता गुलाम रहीं, स्वतंत्र भारत में मामला न्यायालय में चला गया, इसलिए हिंदुओं को अपने ही अराध्य को भव्य मंदिर में देखने के लिए 5 सदी की प्रतीक्षा करनी पड़ी। पर हिंदुओं का उससे भी बड़ा दुर्भाग्य यह रहा कि ऐसा कोई संकट नहीं होने के बाद भी मिथिला की वह पवित्र भूमि दशकों उपेक्षित रही, जहाँ से जगत जननी जानकी सीता प्रकट हुईं। अब इस प्राकट्य स्थल को नव जीवन देने का बीड़ा उनके ‘लव (नीतीश कुमार)-कुश (अमित शाह)’ ने उठाया है।

अक्षत-तुलसीदल से लोगों को किया जा रहा आमंत्रित

जानकी मंदिर और कॉरिडोर के शिलान्यास को भव्य बनाने के लिए पुनौरा धाम में तैयारियाँ जोर-शोर से चल रही हैं। अमित शाह और नीतीश कुमार समेत कई बड़े नेता और साधु-संत व आम लोग इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। इस कार्यक्रम में लाखों लोगों को पहुँचने का अनुमान लगाया जा रहा है।

इस शिलान्यास समारोह के लिए घर-घर आमंत्रण का अभियान भी चलाया जा रहा है। घर-घर जाकर लोगों को पीले अक्षत और तुलसी दल देकर कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। साथ ही, नगर से गुजरने वाले राहगीरों को भी कार्यक्रम में बुलाने के लिए न्योता दिया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, इस शिलान्यास कार्यक्रम को तीन दिवसीय भव्य उत्सव के तौर पर मनाया जाएगा। माता जानकी के दिव्य मंदिर की नींव के लिए 11 नदियों का पवित्र जल लाया जाएगा। इनमें गंगा, यमुना, भागीरथी, अलकनंदा, मंदाकिनी, पिंडर, धौलीगंगा, लक्ष्मणा गंगा, सरस्वती, कमला और सरयू नदियाँ शामिल हैं।

मंदिर प्रबंधन ने शिलान्यास कार्यक्रम की शाम मंदिर पर दीपोत्सव का आयोजन करने करने का फैसला भी लिया है। इसे लेकर शिलान्यास के दिन लोगों से एक दीपक के साथ आने की अपील की जा रही है। उस दिन मंदिर के साथ-साथ सीताकुंड परिसर को 51,000 दीपों से सजाने की योजना है।

क्या है पुनौरा धाम के विकास की योजना?

बीते 1 जुलाई को बिहार कैबिनेट ने पुनौरा धाम में मंदिर निर्माण के लिए 882.87 करोड़ रुपए के बजट को मंजूरी दी थी। इस राशि में से 137 करोड़ रुपए से जानकी मंदिर का निर्माण किया जाएगा, 728 करोड़ रुपए से पर्यटन से जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास होना है। 10 वर्षों तक इसके रख-रखाव पर 16.62 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रावधान किया गया है।

इस तीर्थ के विकास के लिए 50 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाना है। विकास परियोजना में पारंपरिक वास्तुकला के अनुरूप एक विशाल मंदिर का निर्माण और इसका संरक्षण व सौंदर्यीकरण शामिल है। साथ ही, मंदिर परिसर के चारों तरफ प्रवेश द्वार, विश्राम गृह, यज्ञशाला, भोजनालय, मेडिटेशन सेंटर और प्रवचन हॉल का निर्माण भी किया जाएगा।

पर्यटन सुविधाओं के विकास के तहत परिसर में होटल, रेस्टहाउस, संग्रहालय, स्मृति द्वार और स्मारक भवन का निर्माण किया जाएगा। मंदिर के आस-पास के क्षेत्र में हरियाली बनाए रखने के लिए सुंदर जलाशय और फव्वारे लगाए जाएँगे और बगीचों का निर्माण भी किया जाएगा। साथ ही, ‘सीता-वाटिका’ और ‘लव-कुश वाटिका’ का भी विकास किया जाएगा।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बस टर्मिनल का निर्माण किया जाएगा और मंदिर तक पहुँचने और ठहरने के लिए भी इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा। साथ ही, आधुनिक पार्किंग स्थल, चौड़ी सड़कें और स्ट्रीट लाइट्स के साथ फुटपाथ बनाए जाएँगे। इसके अलावा क्षेत्र में डिजिटल सूचना केंद्र और सुरक्षा के लिए कैमरे लगाए जाएँगे।

दशकों से उपेक्षित रहे जानकी जन्मस्थान की नीतीश कुमार ने ली सुध

अयोध्या की राम जन्मभूमि की तरह ही माता सीता का जन्मस्थान भी वर्षों तक उपेक्षा और अनदेखी का शिकार रहा है। अयोध्या में तो विवाद का बहाना बनाकर दशकों तक मंदिर निर्माण को टाल दिया गया लेकिन मिथिला की इस पवित्र पर किसी तरह का विवाद भी नहीं था फिर भी यह पावन स्थल अनदेखी के अँधेरे में डूबा रहा। ना भव्य मंदिर बनाया गया और ना ही किसी तरह के बड़े स्तर के विकास कार्य किए गए।

वर्षों तक ना केवल स्थानीय लोग बल्कि दूर-दराज के श्रद्धालु यहाँ एक भव्य मंदिर का इंतजार करते रहे लेकिन अब इन हालातों को बदलने की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उठाई है। उनके प्रयासों के बाद माता जानकी का भव्य मंदिर आकार लेने जा रहा है। यह भव्य मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र तो बनेगा है, साथ ही साथ बिहार के धार्मिक-सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक भी होगा।

अयोध्या में श्रीराम मंदिर के निर्माण के बाद माता सीता के जन्मस्थान को भी संजीवनी मिली है। सीएम नीतीश कुमार कहते हैं कि यहाँ भव्य मंदिर बनने से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ माँ जानकी की पूजा-अर्चना करने आएँगे। साथ ही, वे कहते हैं कि पर्यटकों के आगमन से रोजगार का भी सृजन भी किया होगा।

नीतीश कुमार लगातार पुनौरा धाम जाकर तैयारियों को जायजा ले रहे हैं। बीते 26 जुलाई को सीएम नीतीश और उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पुनौरा धाम पहुँचे थे और वहाँ उन्होंने पूजा-अर्चना करने के अलावा तैयारियों की समीक्षा की भी की थी। कुछ दिनों पहले केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने भी इस पवित्र स्थल का दौरा किया था।

पुनौरा धाम में तैयारियों का जायजा लेते सीएम नीतीश कुमार

कैसा होगा माता जानकी का मंदिर?

इस तीर्थ स्थल के विकास के लिए डिजाइन सलाहकार के तौर पर उसकी कंपनी को नियुक्त किया गया है जो अयोध्या में राम मंदिर की मास्टर प्लानिंग और वास्तुकला सेवाओं के लिए नियुक्त की गई थी। पिछले 22 जून को नीतीश कुमार ने सीएम नीतीश ने मंदिर सहित अन्य संरचनाओं का डिजाइन शेयर किया था।

राम मंदिर के वास्तुकार रहे आशीष सोमपुरा ही इस मंदिर के आर्किटेक्ट हैं। उनका कहना है कि माँ जानकी के मंदिर का आर्किटेक्चर राम मंदिर के जैसा ही भव्य हो इसका पूरी कोशिश रहेगी। माता जानकी का यह मंदिर दशकों-सदियों तक मजबूती से टिका रहे इसके लिए खास तैयारियाँ की गई हैं।

इस मंदिर का निर्माण राजस्थान के बंसी पहाड़पुर के लाल बलुआपत्थरों (रेड सैंडस्टोन) से किया जाएगा जिसके चलते पूरे मंदिर का स्वरूप एक तरह से दिखेगा। यह पत्थर सदियों तक बिना टूटे या क्षतिग्रस्त हुए संरचना को मजबूती देता है। इस मंदिर की ऊँचाई 151 फीट होगी।

मंदिर परिसर निर्माण की परियोजना

क्या है सीतामढ़ी का ऐतिहासिक महत्व?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राजा जनक को भूमि में हल चलाते समय सोने के घड़े में सीता मिली थीं। भूमि से मिलने के कारण माता सीता को भूमिपुत्री या भूसुता भी कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाराजा जनक के राज्य जनकपुर में भयंकर अकाल पड़ने के बाद एक ऋषि ने उन्हें यज्ञ करने की सलाह दी थी और बंजर जमीन जोतने को कहा था।

जिले की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, भगवान इंद्र को वर्षा करने हेतु मनाने के लिए जब राजा जनक सीतामढ़ी के पास कहीं हल चला रहे थे। ऐसा कहा जाता है कि राजा जनक ने उस स्थान पर एक कुंड खुदवाया था जहाँ सीता प्रकट हुई थीं और उनके विवाह के बाद उस स्थान को चिह्नित करने के लिए राम, सीता और लक्ष्मण की पत्थर की मूर्तियाँ स्थापित की थीं।

इस कुंड को अब जानकी कुंड के नाम से जाना जाता है और जानकी मंदिर के दक्षिण में स्थित है। वेबसाइट के मुताबिक, समय के साथ-साथ यह स्थान जंगल में तब्दील हो गया और करीब 500 वर्ष पहले बीरबल दास नामक एक हिंदू तपस्वी को ईश्वरीय प्रेरणा से उस स्थान का पता चला था।

वे जब अयोध्या से आए तो उन्होंने जंगल साफ किया और उन्हें राजा जनक द्वारा स्थापित मूर्तियाँ मिलीं और उन्हें वहाँ मंदिर बनवाकर माता जानकी की पूजा शुरू कर दी। इस स्थान पर मौजूदा मंदिर को करीब 100 वर्ष पुराना माना गया है।

वृन्दावन के बाँके बिहारी मंदिर के प्रबन्धन के लिए बनेगी समिति, रिटायर्ड जज होंगे मुखिया: सुप्रीम कोर्ट में UP सरकार बोली- भक्तों के भले के लिए बनाया है कानून

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने स्पष्ट किया है कि वृंदावन में बाँके बिहारी मंदिर ट्रस्ट के लिए बनाया जा रहा कानून भक्तों के भले के लिए है। योगी सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह मंदिर में आने वाले भक्तों के लिए सुविधाएँ बढ़ाना चाहती है। योगी सरकार ने यह बातें सुप्रीम कोर्ट में कहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस बीच मंदिर के प्रबन्धन के लिए एक अंतरिम समिति बनाने की बात कही है। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों से अब समिति के लिए नाम माँगे हैं। यह पूरा मामला बाँके बिहारी कॉरिडोर से जुड़ा हुआ है।

मंगलवार (5 अगस्त, 2025) को बाँके बिहारी कॉरिडोर पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई है। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जब तक राज्य सरकार और गोस्वामियों के बीच का विवाद नहीं सुलझता, तब तक मंदिर के प्रबन्धन के लिए एक समिति का गठन किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसके मुखिया कोई हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने अब इस मामले को 8 अगस्त, 2025 को सुनने को कहा है। तब तक दोनों पक्षों को जज का नाम देना होगा।

इस सुनवाई में उत्तर प्रदेश सरकार ने बताया कि मंदिर में प्रबन्धन के लिए ट्रस्ट बनाया जाना है, और इसके लिए एक अध्यादेश लाया गया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि वह मंदिर के कामकाज में कोई दखल नहीं देने वाली है और अध्यादेश का उद्देश्य श्रद्धालुओं की भलाई है। राज्य ने बताया, “उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गई थी और कुछ निर्देश जारी किए गए थे। राज्य का धार्मिक गतिविधियों में हस्तक्षेप करने का कभी इरादा नहीं था, न ही है।”

इस मामले में 4 अगस्त को भी सुनवाई हुई थी। 4 अगस्त, 2025 को उत्तर प्रदेश ने सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट तौर पर बताया था कि मंदिर के खातों में जमा ₹500 करोड़ का इस्तेमाल केवल मंदिर के ही कामों के लिए किया जाएगा। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार के खिलाफ पहुँचे याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार का अध्यादेश मंदिर के प्रबन्धन से गोस्वामियों को हटा देता है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मंदिर में अभी तक कोई प्रबन्धन समिति ही नहीं है।

यह पूरा मामला उत्तर प्रदेश सरकार के वृंदावन में बाँके बिहारी मंदिर का कॉरिडोर बनाने से जुड़ा हुआ है। राज्य सरकार यहाँ कॉरिडोर बना कर भीड़ का प्रबन्धन ठीक करना चाहती है। इसका विरोध कुछ परिवार कर रहे हैं। विरोध का एक पॉइंट यह भी है कि मंदिर ट्रस्ट का पैसा, यहाँ कॉरिडोर की जमीन खरीदने में क्यों लगाया जाए। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को इस पैसे के इस्तेमाल की अनुमति दे दी थी। हालाँकि, अब फिर से इसमें कानूनी लड़ाई चालू हो गई है।

MP का यासीन मछली करवाता था रेव पार्टी, ₹25 हजार में देता था एंट्री… हिन्दू लड़कियाँ होती थीं टारगेट पर: शहर से बाहर होते थे वेन्यू, पीड़िता ने करवाई रेप की FIR

भोपाल में हाई प्रोफाइल ड्रग तस्करी मामले में गिरफ्तार यासीन मछली को लेकर कई खुलासे हुए हैं। यासीन मछली हिन्दू लड़कियों को टारगेट करता था। यासीन पार्टी में आने वाली हिन्दू लड़कियों को ड्रग्स की डिलीवरी के लिए इस्तेमाल करता था। इन लड़कियों को प्रेम जाल में फँसा कर उनका रेप करता और फिर ब्लैकमेल करता था। रेव पार्टियों से जुड़े कई वीडियो भी पुलिस के हाथ लगे हैं।

वह शहर के बाहरी इलाकों में रेव पार्टी आयोजित करता था। इन पार्टियों में एंट्री के लिए 10 से 25 हजार रुपए वसूले जाते थे। पार्टी में ड्रग्स के लिए अलग से रकम ऐंठी जाती थी। इस पूरे काले कारोबार में यासीन मछली और उसका परिवार शामिल था।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, ड्रग तस्करी मामले में पकड़े गए यासीन मछली और उसके चाचा शाहवर मछली ने क्राइम ब्रांच की पूछताछ में कई खुलासे किए हैं। क्राइम ब्रांच के एडिशनल DCP शैलेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि रेव पार्टी में शामिल होने से पहले सभी लोग यासीन के बताए पब में इकट्ठा होते थे। यहाँ से पार्टी के लिए तय जगह पर रवाना होते थे।

रेव पार्टियों में नाच गाना, भारी शोर शराबा और ड्रग्स के नशे के बीच युवाओं को ‘एंजॉय’ करवाया जाता था। रात भर लाउड म्यूजिक होने के बाद भी शिकायत नहीं की जाती थी, क्योंकि पार्टी के लिए ऐसे फार्म हाउस चुने जाते थे, जो शहर की भीड़-भाड़ वाले इलाकों से काफी दूर हुआ करते थे।

क्राइम ब्रांच ने शहर के उन सभी पब, क्लब और लाउंज को नोटिस जारी किया है, जिसमें यासीन और उसके गिरोह के लोगों का आना-जाना लगा रहता था। अधिकारियों को शक है कि गिरोह में पब, क्लब और लाउंज के मालिक या स्टाफ भी शामिल हो सकते हैं। इसलिए क्राइम ब्रांच ने उन सभी पब क्लब और लाउंज मालिकों को नोटिस जारी कर दिया है।

यासीन ने पब में मिली युवती का किया रेप

भोपाल के एमपी नगर थाने में यासीन मछली के खिलाफ रेप का मुकदमा दर्ज हुआ है। यासीन पर 29 वर्षीय युवती के रेप का आरोप है। थाने की सब इंस्पेक्टर अर्चना तिवारी ने बताया कि प्राइवेट कंपनी में काम करने वाली युवती ने रेप की शिकायत दर्ज कराई है।

युवती ने शिकायत में बताया कि करीब एक साल पहले एक पब में यासीन से मुलाकात हुई थी। यासीन ने युवती से दोस्ती की। दोनों के बीच बातचीत बढ़ने लग गईं। यासीन ने युवती को शादी का झाँसा देकर फाइव स्टार में बुलाया और रेप किया।

यासीन के परिवार ने 55 साल में अवैध काम कर खड़ा किया ‘साम्राज्य’

ड्रग तस्कर यासीन मछली के परिवार ने 55 साल में अवैध कारोबार के जरिए बड़ा साम्राज्य खड़ा किया। यासीन का परिवार 1970 से पहले बुधवारा में रहता था और मछलियों की दलाली करता था। इसके बाद हथाईखेड़ा आया और यहाँ मछली पालने का ठेका लिया। 1980 में राजनीतिक पार्टियों की मदद कर इलाके में दबदबा बनाया। राजनीतिक मदद से ही मुस्लिमों की बस्ती बसा ली और पत्थर खदानों ने अवैध खनन शुरू किया।

साल 2000 में दुर्गा पंडाल के लिए चंदा और देवी जागरण के आयोजन के जरिए हिंदुओं का भरोसा जीतना शुरू किया। इसके बाद 2005 से 2010 के बीच हथाईखेड़ा के आसपास कई इंजीनियरिंग और फार्मेसी कॉलेजों का निर्माण हुआ। इन्हीं कॉलेजों के छात्रों के लिए फ्रेशर्स पार्टियाँ और क्रिकेट टीम बनाकर टूर्नामेंट कराए।

2015 के बाद इन पार्टियों में नशे का कारोबार चालू किया। छात्रों को नशे की लत लगा दी। मछली परिवार अवैध हथियारों की सप्लाई, ड्रग्स के अवैध कारोबार में पूरी तरह शामिल था। इस दौरान लड़कियों से रेप और ब्लैकमेलिंग का सिलसिला भी शुरू हुआ।

यासीन का गुर्गा अंशुल सिंह कॉन्ग्रेस नेत्री का बेटा निकला

यासीन के गुर्गे अंशुल सिंह उर्फ भूरी को 31 जुलाई 2025 को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। सोमवार (04 अगस्त 2025) को कोर्ट में पेशी के बाद अंशुल की रिमांड 07 अगस्त 2025 तक बढ़ा दी गई। पूछताछ में अंशुल ने खुद को कॉन्ग्रेस की महिला नेता का बेटा बताया।

अंशुल पर शहर के अलग-अलग थानों में 20 से अधिक हत्या के प्रयास, मारपीट, आर्म्स एक्ट, शराब और तस्करी के केस दर्ज हैं। टीटी नगर थाने में उसको हिस्ट्रीशीटर घोषित किया गया है।

पुलिस ने अंशुल के बयान के आधार पर 32 वर्षीय तौफीक निजामी को गिरफ्तार किया है। उसके पास से एक पिस्टल और कारतूस जब्त किया गया है। तौफीक ने ही अंशुल को अवैध पिस्टल दी थी।

पुलिस की गिरफ्त में आया शाहवर मछली

18 जुलाई 2025 को भोपाल के गोविंदपुरा से सैफुद्दीन और आशू उर्फ शाहरुख को गिरफ्तार किया गया था। इनके पास से ₹3 लाख और बड़ी मात्रा में ड्रग्स बरामद की गई। इन्हीं की निशानदेही पर ड्रग तस्करी का सरगना शाहवर मछली और उसका भतीजा यासीन मछली को क्राइम ब्रांच ने दबोचा। दोनों के पास से 3 ग्राम एमडी ड्रग और एक देशी पिस्टल बरामद की गई थी।

जाँच में सामने आया कि यासीन और उसके चाचा शाहवर ड्रग्स तस्करी का धंधा करते थे। मुंबई, राजस्थान और पंजाब से चरस और अन्य ड्रग्स लाते थे। फिर इन्हें शहर के पब, लाउंज और क्लब में पार्टियों में बेचा करते थे। ड्रग्स की डिलीवरी के लिए हिंदू लड़कियों को इस्तेमाल किया जाता था। युवाओं के लिए रेव पार्टी आयोजित कर उन्हें नशे की लत लगाते थे। ये दोनों हिंदू लड़कियों का शारीरिक शोषण करते थे और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव भी बनाते थे।

सेना के अपमान पर सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गाँधी को लताड़ा, न्यायपालिका पर झुंड बना कर INDI गठबंधन टूटा: प्रियंका बोलीं- जज नहीं करेंगे तय

सेना पर आपत्तिजनक बयान मामले में राहुल गाँधी को सुप्रीम कोर्ट ने फटकारा है। इसके बाद कॉन्ग्रेस अब सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ ही खड़ी हो गई है। कॉन्ग्रेस सांसद प्रियंका गाँधी ने न्यायपालिका को घेरने का प्रयास किया है। उन्होंने एक तरह से यह इशारा कर दिया है कि जज राहुल गाँधी पर टिप्पणी नहीं कर सकते हैं। कॉन्ग्रेस के साथ ही बाक़ी विपक्षी दल भी सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ लामबंद हैं।

प्रियंका गाँधी ने क्या कहा?

प्रियंका गाँधी ने मंगलवार (5 अगस्त,2025) को संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, “सुप्रीम कोर्ट के जजों का पूरा सम्मान रखते हुए मैं ये कहना चाहती हूँ कि वे यह तय नहीं करेंगे कि सच्चा भारतीय कौन है।”

उन्होंने आगे कहा, “विपक्ष के नेता के नाते सरकार से सवाल पूछना उनका (राहुल गाँधी) कर्तव्य है। मेरे भाई कभी भी सेना के खिलाफ नहीं बोलेंगे, वह उनके प्रति बहुत सम्मान रखते हैं। उनकी बातों का गलत मतलब निकाला गया।”

INDI ब्लॉक ने भी सुप्रीम कोर्ट का किया अपमान

कॉन्ग्रेस की सोशल मीडिया प्रमुख सुप्रिया श्रीनेत ने एक X पोस्ट में लिखा, “आज सुबह इंडी गठबंधन के नेताओं की बैठक में सर्वोच्च न्यायालय के एक वर्तमान न्यायाधीश द्वारा राहुल गाँधी जी पर की गई टिप्पणी पर चर्चा हुई।”

श्रीनेत ने आगे लिखा, “इंडी गठबंधन के सभी घटक दल इस बात से सहमत हैं कि वर्तमान न्यायाधीश ने एक ऐसी टिप्पणी की है जो राजनीतिक दलों के लोकतांत्रिक अधिकारों के विरुद्ध है। राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर टिप्पणी करना राजनीतिक दलों, विशेषकर नेता प्रतिपक्ष का दायित्व है।”

वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता अजय माकन ने भी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर सवाल उठाए हैं। माकन ने एक X पोस्ट में लिखा, “राहुल गाँधी जी और कॉन्ग्रेस पार्टी लगातार चीन के मुद्दे पर सरकार से सवाल पूछ रही है, यह हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है… राहुल गाँधी की आवाज़ दबाने की हर कोशिश, सरकार की विफलताओं और उनके डर को उजागर करती है। ओ माई लार्ड।”

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार (4 अगस्त) को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की बेंच ने राहुल गाँधी की याचिका पर सुनवाई की थी। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान राहुल गाँधी के वकील अभिषेक मनु सिंघवी से कहा था, “आपको कैसे पता चला कि चीन ने 2000 वर्ग किलोमीटर भारतीय ज़मीन पर कब्ज़ा कर लिया है? क्या आप वहाँ थे?

कोर्ट ने आगे कहा, “आपके पास कोई विश्वसनीय जानकारी है? आप बिना किसी सबूत के ये बयान क्यों दे रहे हैं…अगर आप सच्चे भारतीय होते, तो ये सब नहीं कहते।”

सिंघवी ने कोर्ट में कहा कि अगर वह प्रेस में छपी ये बातें नहीं कह सकते तो वह विपक्ष के नेता नहीं हो सकते। तो इस पर जस्टिस दत्ता ने पूछा, “आपको जो कुछ भी कहना है, संसद में क्यों नहीं कहते? आपको सोशल मीडिया पोस्ट में ऐसा क्यों कहना पड़ता है?”

क्या था मामला?

यह मामला लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी की चीन पर भारत के कब्जे और भारतीय सैनिकों के चीनी सैनिकों द्वारा ‘पीटे जाने’ की टिप्पणी से जुड़ा था। उन्होंने कहा था, “लोग भारत जोड़ो यात्रा, अशोक गहलोत और सचिन पायलट वगैरह के बारे में तो पूछेंगे ही। लेकिन चीन द्वारा 2000 वर्ग किलोमीटर भारतीय ज़मीन पर कब्ज़ा करने, 20 भारतीय सैनिकों को पीटने और अरुणाचल प्रदेश में हमारे सैनिकों की पिटाई के बारे में एक भी सवाल नहीं पूछेंगे।”

राहुल के इस बयान के बाद सीमा सड़क संगठन के एक अधिकारी ने उनके खिलाफ केस दर्ज कराया था। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले में केस दर्ज करने से मना कर दिया था जिसके बाद राहुल गाँधी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था

पीएम मोदी ने भी किया SC की टिप्पणी का जिक्र

रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनडीए की संसदीय दल की बैठक को संबोधित करते हुए सुप्रीम कोर्ट की राहुल गाँधी पर की गई टिप्पणी की जिक्र किया है। पीएम मोदी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा कल लगाई गई फटकार से बड़ी कोई फटकार नहीं हो सकती है।

उन्होंने कहा, “हम क्या कहें, जब सुप्रीम कोर्ट ने ही कह दिया… ये तो पत्थर मारना ही नहीं, ये ‘आ बैल मुझे मार’ वाली स्थिति है।”

‘न्यूक्लियर पर बयानबाजी में रखो सावधानी’: रूस ने अमेरिका को चेताया, मेदवेदेव के बयान के बाद ट्रंप ने भेजी थी परमाणु हथियार वाली 2 पनडुब्बी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से रूस के पास दो परमाणु पनडुब्बियों को तैनात करने के आदेश दिए जाने के बाद अब रूस ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने अमेरिकी राष्ट्रपति को उनके बयानों को लेकर चेतावनी दी है।

एक प्रेस ब्रीफ्ंग में पेसकोव ने कहा, “रूस परमाणु अप्रसार के विषय पर बहुत सतर्क है और हमारा मानना है कि सभी लोगों को परमाणु से जुड़ी कोई भी बयानबाजी करने में बहुत सावधानी बरतनी चाहिए।”

वाकयुद्ध से परमाणु हथियार तक पहुँचे अमेरिका-रूस के हालात?

अमेरिका और रूस के बीच हालिया विवाद की शुरुआत ट्रंप और रूस के पूर्व राष्ट्रपति और रूस की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष दिमित्री मेदवेदेव के बीच हुए वाकयुद्ध के बाद हुई थी। दरअसल, ट्रंप ने रूस को 10 दिनों के भीतर रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को रोकने पर सहमति देने का अल्टीमेटम दिया था। ट्रंप ने कहा था कि अगर ऐसा नहीं होता है तो वह रूस और उसके तेल खरीदने वाले देशों पर टैरिफ लगाएँगे।

इस पर मेदवेदेव ने कड़ा पलटवार किया था। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बेहद खास मेदवेदेव ने 28 जुलाई को एक X पोस्ट में कहा था कि ट्रंप का हर नया अल्टीमेटम ‘युद्ध की ओर एक कदम’ माना जाएगा और ये युद्ध यूक्रेन-रूस के बीच नहीं बल्कि अमेरिका के साथ होगा।

उन्होंने लिखा था, “रूस के साथ ट्रंप अल्टीमेटम का खेल खेल रहे हैं: 50 दिन या 10… उन्हें दो बातें याद रखनी चाहिए। एक तो रूस इज़रायल या ईरान नहीं है। दूसरा हर नया अल्टीमेटम एक खतरा और युद्ध की ओर एक कदम है। रूस और यूक्रेन के बीच नहीं बल्कि उनके अपने देश के साथ होगा।”

मेदवेदेव के इस बयान के बाद ट्रंप भड़क गए और दो परमाणु पनडुब्बियों को रूस के पास तैनात कर दिया। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा, “मेदवेदेव के भड़काऊ बयानों के आधार पर मैंने दो परमाणु पनडुब्बियों को उपयुक्त क्षेत्रों में तैनात करने का आदेश दिया है- इस आशंका के तहत कि कहीं ये मूर्खतापूर्ण और उकसाने वाले बयान केवल शब्दों तक सीमित न रह जाएँ।”

फोटो साभार- ट्रुथ सोशल

ट्रंप ने आगे लिखा, “शब्द बहुत महत्वपूर्ण होते हैं, और अक्सर अनजाने में गंभीर परिणामों की ओर ले जाते हैं। मैं आशा करता हूँ कि यह मामला ऐसा न हो।” इसके अलावा मेदवेदेव ने रूस के डेड इकोनॉमी वाले बयान को लेकर ट्रंप के बयान पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी थी।

अमेरिका का दूत जाएगा रूस

ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही रूस-यूक्रेन के बीच युद्ध विराम करने को लेकर कदम उठाने की बात कही है। वो पुतिन को अपना दोस्त भी बताते रहे हैं। हालाँकि, दोनों देशों के बीच बीते कुछ दिनों से संबंध लगातार बिगड़े हैं ऐसे में ट्रंप अपने विशेष दूत को रूस भेज रहे हैं।

ट्रंप ने कहा कि वह विशेष दूत स्टीव विटकॉफ को मास्को भेजेंगे क्योंकि अमेरिकी प्रशासन रूस और यूक्रेन के बीच युद्धविराम सुनिश्चित करने के अपने प्रयासों में लगा हुआ है। ट्रंप ने कहा कि वह ऐसा समझौता चाहते हैं जिसके बाद लोगों की हत्याएँ बंद हो जाएँ।

क्या है परमाणु अप्रसार संधि?

परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) का उद्देश्य परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना, परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग और निरस्त्रीकरण को बढ़ावा देना है। इस अंतरराष्ट्रीय संधि के तहत 1968 में देशों के हस्ताक्षर के लिए खोली गई और 1970 में लागू हुई। 1995 में इस संधि को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया गया था और अब इस पर 191 हस्ताक्षरकर्ता हैं।

इस संधि के तहत परमाणु हथियार वाले देश दूसरों को परमाणु हथियार पाने में मदद न करने का भरोसा देते हैं और परमाणु हथियार न रखने वाले देश परमाणु हथियार नहीं बनाने का वादा करते हैं।