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क्या होता है माथा खा जाने वाला अमीबा, जिसके कारण केरल में चली गई 9 साल की बच्ची की जान: कैसे इंसानी दिमाग में करता है प्रवेश, क्या हैं लक्षण-बचाव के उपाय

केरल के कोझीकोड में 9 साल की बच्ची की दिमागी संक्रमण से मौत हो गई। ये मौत Naegleria fowleri amoeba (नेग्लेरिया फोलेरी अमीबा) के नाक से घुसने और ब्रेन में संक्रमण फैलाने के कारण हुई है। जिले में अब तक 4 लोगों की मौत इस बीमारी से हो चुकी है।

क्या है ब्रेन इटिंग अमीबा

अमीबा एक कोशिकीय जीव होता है जिसके शरीर में प्रवेश करने पर संक्रमण पैदा होता है। ये ताजा पानी, हल्के गर्म पानी और गीली मिट्टी में पाया जाता है। झील, नदी, तालाब, स्वीमिंग पूल जैसे जलीय स्थानों पर ये रहते हैं। ब्रेन इटिंग अमीबा यानी नेग्लेरिया फोलेरी अमीबा नाक के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है। इस दौरान नाक से होकर ये ब्रेन तक जाता है और उसे नष्ट करना शुरू कर देता है।

ये ज्यादातर गर्मी के दिनों में तेजी से बढ़ते हैं क्योंकि उस वक्त कोशिका-विभाजन तेजी से होता है। ये जब दिमाग तक पहुँचता है तो उसके टिश्यू को खाना शुरू कर देता है। इससे बाद तेजी से विभाजित होने लगता है। तेज गति से नए अमीबा के बनने और ब्रेन टिश्यू के नष्ट होने के कारण दिमाग में सूजन आ जाता है। इससे रेयर और खतरनाक ब्रेन संक्रमण पैदा होता है।

दो तरह का होता है अमीबा

अमीबिक एन्सेफलाइटिस दो तरह का होता है। पहला प्राथमिक अमैबिक मेनिन्जोएन्सेफलाइटिस (primary amoebic meningoencephalitis) या PAM। दूसरा ग्रैनुलोमैटस अमाइबिक एन्सेफलाइटिस (granulomatous amoebic encephalitis) यानी GAE। विशेषज्ञों के अनुसार, PAM को आमतौर पर Naegleria fowleri भी कहते हैं, जिसके कारण दिमाग में सूजन आ जाती है। ये काफी तेजी से फैलता है। दूसरी ओर GAE धीमी गति से फैलता है।

कैसे आप अमीबा से संक्रमित होते हैं

डॉक्टरों के मुताबिक, आम तौर पर दोनों तरह के अमीबा की शरीर में एंट्री नाक के द्वारा ही होती है। ज्यादातर तैरने के दौरान स्वीमिंग पूल, नदियों, तालाबों या दूसरे जलस्रोतों का ऐसा पानी, जिसमें अमीबा मौजूद हों, वह नाक के अंदर चला जाए और ब्रेन तक पहुँच जाए। आम तौर पर गर्मियों में यह तेजी से बढ़ता है। अमीबा मस्तिष्क के टिश्यू को खा जाता है और पचा लेता है। इससे संक्रमण फैलता है।

ब्रेन इटिंग अमीबा के लक्षण

ये बीमारी बहुत तेजी से फैलती है। जब नाक से होकर अमीबा शरीर में प्रवेश करता है तो इसके 12 दिनों के अंदर लक्षण दिखने लगते हैं।

  • तेज बुखार
  • तेज सिर दर्द
  • साँस लेने में दिक्कत
  • कपकपाना
  • गले को घुमाने में तकलीफ होना
  • लाइट से दूर भागना
  • मानसिक दिक्कत आना

बीमारी से बचने के उपाय लक्षण

  1. तैरते वक्त हमेशा नोज क्लिप का इस्तेमाल करना चाहिए।
  2. स्विमिंग पूल की सफाई बेहद जरूरी है।
  3. तैरते वक्त नाक में पानी जाने से बचाना जरूरी है।
  4. स्वीमिंग पूल की सफाई में क्लोरीन का इस्तेमाल करना चाहिए।
  5. पीने के पानी को फिल्टर करने ही इस्तेमाल करना चाहिए।
  6. अगर तेज बुखार के साथ दूसरे लक्षण दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर से जरूर मिलें।

पहली बार ब्रेन इटिंग अमीबा साल 1965 में आस्ट्रेलिया में पाया गया था। यह 46 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी एक्टिव रहता है। अमीबा खुद से आकार बदलने में सक्षम है। यह पृथ्वी पर पाए जाने वाले प्राचीन जीवों में से एक है।

अमीबा में एक कोशिका होता है इसलिए मेल-फीमेल जैसा कुछ नहीं होता। कोशिका विभाजन से इसकी संख्या बढ़ती है। ये टूटकर चार हो जाते हैं और इस तरह इनकी आबादी बढ़ती है। इसका आकार तय नहीं होता। बीते 50 साल में अब तक दुनिया भर में 382 मामले सामने आ चुके हैं. इनमें से अकेले अमेरिका में 154 मामले सामने आ चुके हैं। पहली बार ब्रेन इटिंग अमीबा साल 1965 में आस्ट्रेलिया में पाया गया था। यह 46 डिग्री सेल्सियस तापमान में भी एक्टिव रहता है।

उत्तराखंड में खत्म होगी मदरसा व्यवस्था, CM धामी की कैबिनेट ने लिया अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण बनाने का फैसला : सिख, जैन, ईसाई, बौद्ध और पारसी समुदायों भी मिलेगी सुविधा

देवभूमि उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी राज्य से मदरसा शिक्षा व्यवस्था हटाने की तैयारी कर रहें हैं। इसके लिए कैबिनेट ने उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना करने का फैसला लिया है।

जानकारी के मुताबिक, उत्तराखंड में 452 पंजीकृत मदरसे है इसके अलावा 500 से अधिक मदरसे गैर कानूनी रूप से चल रहे थे जिनमें से 237 को धामी सरकार ने बंद करा दिया है। गौरतलब है कि पिछले दिनों उत्तराखंड के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने मदरसों के छात्रों को मिलने वाली केंद्रीय छात्रवृति में भी भारी अनियमितताएँ सामने लाईं थी। इसके आलावा मिड डे मील को लेकर भी गड़बड़ियाँ पाई थी।

अब धामी सरकार ने मदरसा व्यवस्था को अपने अधीन रखने के लिए कैबिनेट से प्रस्ताव पारित कराया है। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले समय में राज्य में मदरसा शिक्षा व्यवस्था समाप्त हो जाएगी।

फिलहाल धामी सरकार द्वारा उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा विधेयक पर गंभीर मंथन किया जा रहा है। इस विधेयक का उद्देश्य उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण (USAME) की स्थापना करना है।

यह प्राधिकरण अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा स्थापित और प्रशासित शैक्षणिक संस्थानों को मान्यता देने, शैक्षिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने और उनसे संबंधित सभी मामलों का प्रबंधन करने के लिए जिम्मेदार होगा।

राज्य सरकार के मुताबिक, अब तक राज्य में अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान का दर्जा केवल मुस्लिम समुदाय को दिया जाता था, लेकिन प्रस्तावित अधिनियम के लागू होने के बाद सिख, जैन, ईसाई, बौद्ध और पारसी समुदायों को भी यह सुविधा मिलेगी। सरकार का दावा है कि इस कदम के साथ उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन जाएगा जिसने सभी अल्पसंख्यक समुदायों के शैक्षिक संस्थानों को मान्यता देने के लिए एकाकीकृत और पारदर्शी प्रक्रिया तैयार की है।

क्या हैं मुख्य प्रावधान:

रिपोर्ट के अनुसार, विधेयक के तहत USAME का गठन किया जाएगा। इसमें अध्यक्ष के अलावा कुल 11 सदस्य होंगे। इन्हें राज्य सरकार द्वारा नामित किया जाएगा। अध्यक्ष अल्पसंख्यक समुदाय का एक शिक्षाविद् होगा। उसे कम से कम 15 साल का शिक्षण अनुभव होना जरुरी है।

अधिनियम के तहत  पूर्व में उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त मदरसों को शैक्षणिक सत्र 2026-27 से मजहबी शिक्षा प्रदान करने के लिए प्राधिकरण से पुनः मान्यता प्राप्त करना आवश्यक होगा। वहीं 1 जुलाई, 2026 से उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड अधिनियम, 2016 और उत्तराखंड अशासकीय अरबी एवं फारसी मदरसा मान्यता विनियमावली, 2019 को निरस्त माना जाएगा।

इसके आलावा अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान के रूप में मान्यता प्राप्त करने के लिए, संस्थानों को कुछ शर्तें पूरी करना भी अनिवार्य होगा। इसके तहत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि संस्थान किसी अल्पसंख्यक समुदाय द्वारा स्थापित और संचालित हो, परिषद से संबद्ध हो, और इसका प्रबंधन एक पंजीकृत निकाय (सोसायटी, न्यास, या कंपनी) द्वारा किया जा रहा हो।

वहीं अतिरिक्त, गैर-अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों का नामांकन 15% से अधिक नहीं होना चाहिए। प्राधिकरण अल्पसंख्यक समुदाय के धर्मों और भाषाओं से संबंधित विषयों के लिए पाठ्यक्रम विकसित करेगा और अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को अतिरिक्त विषयों से संबंधित परीक्षाएँ आयोजित करने, छात्रों का मूल्यांकन करने और प्रमाण-पत्र जारी करने के लिए मार्गदर्शन देगा।

इस विधेयक को राज्य के भीतर अल्पसंख्यक शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह पहली बार है कि उत्तराखंड में इस तरह की व्यवस्था बनाई गई है, जिसमें सभी अल्पसंख्यक समुदायों के संविधानिक अधिकारों की रक्षा करते हुए सभी अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थानों को मान्यता प्रदान करने का प्रावधान किया गया है।

द्रौपदी मुर्मू, जगदीप धनखड़ और अब CP राधाकृष्णन…हर बात में तमिल राग अलापने वाले स्टालिन कर पाएँगे विरोध? BJP के मास्टरस्ट्रोक से उपराष्ट्रपति चुनाव में भी बैकफुट पर INDI गठबंधन

NDA के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन के नाम पर BJP ने आम सहमति बनाने की शुरुआत कर दी है। BJP की कोशिश है कि उपराष्ट्रपति के चुनाव की नौबत ना आए और सर्वसम्मति से ही राधाकृष्णन को अगला उपराष्ट्रपति चुन लिया जाए। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसके लिए कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से बातचीत की है।

BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा भी यह स्पष्ट कर चुके हैं कि BJP उपराष्ट्रपति पद के लिए निर्विरोध चुनाव सुनिश्चित करने के लिए विपक्ष से बात करेगी। BJP सभी विपक्षी दलों का समर्थन जुटाने की कोशिश में पूरी तरह से जुटी हुई है। हालाँकि, कॉन्ग्रेस ने इस पर अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

चुनाव आयोग द्वारा जारी शेड्यूल के मुताबिक, 21 अगस्त 2025 उपराष्ट्रपति के उम्मीदवारों द्वारा नामांकन दाखिल किए जाने की आखिरी तारीख है। ऐसे में अगर आम सहमति नहीं बनती है तो विपक्षी गठबंधन INDI को अगले 1-2 दिन में ही अपने उम्मदीवार के नाम का ऐलान करना होगा। 9 सितंबर को उपराष्ट्रपति पद के लिए चुनाव कराया जाना है।

बीजेपी ने अपने उम्मीदवार के नाम का ऐलान कर विपक्ष का सिर दर्द बढ़ा दिया है। मूल रूप से तमिलनाडु से आने वाले और वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन का नाम बीजेपी द्वारा मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। तमिलनाडु में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और बीजेपी लगातार दक्षिण भारत में विस्तार की कोशिश में लगी है। ऐसे में राधाकृष्णन का नाम बीजेपी की सोची समझी चाल के तौर पर देखा जा रहा है। इसकी एक नहीं बल्कि कई वजहें हैं।

स्टालिन की बढ़ेगी दुविधा

राधाकृष्णन की उम्मीदवारी के बाद सबसे अधिक दुविधा में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और DMK के प्रमुख एमके स्टालिन हैं। स्टालिन अब तक केंद्र के फैसलों का तमिल अस्मिता के नाम पर विरोध करते रहे हैं। अब अगर INDI गठबंधन अपने उम्मीदवार का ऐलान करता है और वो तमिलनाडु से नहीं होता है तो तमिल अस्मिता का प्रश्न फिर स्टालिन को ही घेरेगा।

अगर स्टालिन इस निर्णय पर NDA के साथ खड़े हो जाते हैं तो यह INDI गठबंधन में टूट का स्पष्ट संकेत होगा। स्टालिन ने अपने पत्ते नहीं खोले हैं लेकिन उनकी पार्टी ने अपना नरम रुख दिखाना शुरू कर दिया है।

DMK के प्रवक्ता टीकेएस इलानगोवन ने राधाकृष्णन की उम्मीदवारी को अच्छा कदम बताया है। उन्होंने एक चैनल से बातचीत में कहा, “यह एक स्वागत योग्य कदम है। राधाकृष्णन तमिल हैं और लंबे समय के बाद कोई तमिल व्यक्ति भारत का उपराष्ट्रपति बन सकता है।” हालाँकि, उन्होंने राधाकृष्णन के समर्थन की बात नहीं कही है लेकिन दबी जबान ही सही DMK का असमंजस साफ नजर आने लगा है।

राधाकृष्णन ने तमिलनाडु में लंबे वक्त तक राजनीति की है। वे दो बार के सांसद रहे हैं और तमिलनाडु बीजेपी के अध्यक्ष भी रहे हैं। ऐसे में उनके स्टालिन परिवार से संबंध भी बहुत पुराने हैं। करीब एक हफ्ते पहले (11 अगस्त 2025) ही स्टालिन से मिलने के लिए राधाकृष्णन चेन्नई पहुँचे थे।

यह मुलाकात स्टालिन का उद्देश्य स्टालिन के स्वास्थ्य का हाल-चाल लेना था लेकिन इस दौरान दोनों के बीच गर्मजोशी साफ दिखाई दी थी। अब राधाकृष्णन का विरोध करना स्टालिन के सामने एक बड़ी चुनौती है। अगर वो विरोध करते हैं तो तमिल अस्मिता का प्रश्न उठेगा और अगर समर्थन में आते हैं तो INDI गठबंधन की टूट साफ दिखाई देगी।

चेन्नई में स्टालिन से मिले थे राधाकृष्णन

शिवसेना (UBT) भी देगी INDI को दगा?

राधाकृष्णन महाराष्ट्र के राज्यपाल हैं। वहाँ के सभी राजनीतिक दलों से उनका मेलजोल बढ़िया है। बीजेपी के खिलाफ मुखर रहने वाले शिवसेना (UBT) के नेता संजय राउत ने भी राधाकृष्णन की तारीफ की है। उद्धव ठाकरे की पार्टी द्वारा राधाकृष्णन की तारीफ किए जाने से INDI गठबंधन की टेंशन बढ़ गई है।

राउत ने कहा है, “मैं मानता हूँ कि राधाकृष्णन का व्यक्तित्व बहुत अच्छा है। वे गैर-विवादास्पद हैं और उनके पास राजनीति और संगठन का लंबा अनुभव है। मैं उन्हें शुभकामनाएँ देता हूँ।” राउत की बातों से लग रहा है कि INDI गठबंधन के लिए मामला इतना आसान भी नहीं होने वाला है।

पहले भी राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनावों में विपक्षी गठबंधन में आई थी दरार

यह पहली बार नहीं है कि विपक्षी गठबंधन की एकता में दरार आने की अटकलें लग रही हैं। इससे पहले भी ऐसे हालात बन चुके हैं, जब राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों में विपक्षी एकता छिन्न भिन्न हो गई हो। जिन जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के चलते उपराष्ट्रपति की कुर्सी खाली हुई है उनके चुनाव में भी विपक्षी एकता में दरार साफ दिखी थी। जगदीप धनखड़ उपराष्ट्रपति बनने से पहले पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी उनसे तल्ख रिश्तों के बाद भी धनखड़ का विरोध नहीं कर पाई थी।

2022 में जब राष्ट्रपति पद का चुनाव हुआ था तो भी विपक्षी एकता टूट गई थी। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विपक्षी खेमे में रहते हुए ही द्रौपदी मुर्मू के समर्थन का ऐलान किया था। अब फिर वैसी ही स्थिति विपक्ष के लिए बनती दिख रही हैं। इस बार मुश्किलें DMK के लिए बढ़ी हुई हैं। बीजेपी ने अपने मास्टर स्ट्रोक से एक साथ कई निशाने साधने की कोशिश की है जिसका असर आने वाले दिनों में साफ नजर आ सकता है।

रामनाथ कोविंद को 2017 के राष्ट्रपति चुनाव में NDA का उम्मीदवार बनाया गया था। कोविंद उससे पहले बिहार के राज्यपाल रहे थे। तब नीतीश कुमार की पार्टी JDU ने विपक्ष में रहते हुए भी कोविंद के नाम का समर्थन किया था।

पत्रकार ने घुसपैठ-इस्लामी कट्टरपंथ को बताया असम के लिए खतरा, मुस्लिम नेता ने कर दिया केस: हाई कोर्ट ने रद्द की FIR, कहा- यह सांप्रदायिक नहीं, यही पत्रकारिता का मूल धर्म

घुसपैठ के जरिए भारत की डेमोग्राफी चेंज करने की कोशिश की बात सबके सामने है। कट्टरपंथी चाहते हैं कि इस पर भी लोगों का मुँह सिला रहे। असम के पत्रकार ने घुसपैठ पर रिपोर्ट लिख दी तो एक मुस्लिम संगठन के नेता ने पत्रकार के खिलाफ FIR कर दी। अब गुवाहाटी हाईकोर्ट ने पत्रकार के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने का आदेश दिया है।

क्या था मामला?

8 नवंबर 2016 को पत्रकार कोंगकोन बोर्थाकुर ने ‘दैनिक जन्मभूमि’ अखबार में अवैध घुसपैठियों को लेकर एक लेख लिखा था। इस लेख में पड़ोसी देशों से आए अवैध प्रवासियों से बने डेमोग्राफी बदलने के खतरे, मजहबी कट्टरवाद और कट्टरवाद की आड़ में होने वाली ‘आतंकी गतिविधयों’ का जिक्र किया गया था।

इस लेख के प्रकाशित होने के बाद शिवसागर के ऑल असम मुस्लिम स्टूडेंट्स यूनियन (AAMSU) के अध्यक्ष फरीद इस्लाम हजारिका ने पत्रकार के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी। इस FIR में दावा किया गया कि इस रिपोर्ट से सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ गया है। साथ ही, फरीद इस्लाम ने दावा किया कि रिपोर्ट से पत्रकार विभिन्न समुदायों के बीच शांति भंग करे की कोशिश कर रहे हैं।

इस FIR के खिलाफ पत्रकार ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी और दावा किया था कि उनका लेख जमीनी स्तर के शोघ पर आधारित था।

गुवाहाटी हाई कोर्ट ने क्या कहा?

गुवाहाटी हाई कोर्ट की जस्टिस प्रांजल दास की बेंच ने पत्रकार के खिलाफ दर्ज FIR को खारिज करने का आदेश दिया है। हाई कोर्ट ने कहा कि पत्रकारिता का मूल धर्म ही समाज से जुड़े ज्वलंत मुद्दों को उठाना है।

हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है, “अवैध प्रवासियों, धार्मिक कट्टरवाद, आतंकी गतिविधियों और मूल निवासियों के लिए डेमोग्राफी के खतरों के बारे में चिंता व्यक्त करना समुदायों के बीच दुश्मनी पैदा करने या हिंसा भड़काने का प्रयास नहीं माना जा सकता है।”

हाई कोर्ट ने पत्रकार द्वारा दी गईं दलीलों को सही माना है और इस मामले में की जा रही कानूनी कार्रवाई को पूरी तरह रद्द कर दिया है।

गुवाहाटी हाई कोर्ट के आदेश का अंश

हाई कोर्ट ने कहा, “अखबार की जिस रिपोर्ट के आधार पर FIR दर्ज की गई थी, उसकी जाँच करने पर पता चला कि आरोपी पत्रकार ने किसी भी जातीय या धार्मिक समूह पर आक्षेप नहीं लगाया है।”

हाई कोर्ट ने पत्रकार द्वारा दी गईं दलीलों को सही माना है और इस मामले में की जा रही कानूनी कार्रवाई को पूरी तरह रद्द कर दिया है।

‘विकसित भारत 2047’ का विजन लेकर न्यूयॉर्क में निकली ‘इंडिया परेड डे’, रश्मिका मंदाना-विजय देवरकोंडा को ‘ग्रैंड मार्शल’ सम्मान

भारत के 79वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर न्यूयॉर्क में ‘इंडिया डे परेड’ का आयोजन किया गया। यह भारत के बाहर किसी देश में होने वाला सबसे बड़ा परेड समारोह था। समारोह में अभिनेत्री रश्मिका मंदाना और अभिनेता विजय देवरकोंडा को 2025 के ‘ग्रैंड मार्शल’ के रूप में सम्मानित किया गया।

भारत के वाणिज्य दूतावास (Consulate General of India) द्वारा इस वर्ष की झाँकी ‘विकसित भारत 2047’ थीम पर आधारित थी। इसमें यह दिखाया गया कि भारत कैसे अपने 100वें स्वतंत्रता दिवस तक एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस समारोह में बुनियादी ढाँचे, प्रौद्योगिकी और डिजिटल परिवर्तन में भारत की प्रगति पर प्रकाश डाला गया। समारोह में बड़ी संख्या में लोग केसरिया, हरे और सफेद रंग के परिधान में पहने नजर आए।

रिपोर्ट के अनुसार, परेड में शामिल हुए राज्यसभा सांसद सतनाम सिंह संधू ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीयों का आना गर्व की बात है। संधू ने कहा, “यह बेहद खुशी की बात है कि इतनी बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय न्यूयॉर्क शहर में एकत्रित हुए हैं। भारत की आजादी का जश्न मनाया जा रहा है। न्यूयॉर्क के मेयर भी यहाँ मौजूद हैं।”

परेड का आयोजन फेडरेशन ऑफ इंडियन एसोसिएशन (FIA) ने किया था। इसके अध्यक्ष अंकुर वैद्य ने कहा कि यह आयोजन गर्व और जिम्मेदारी दोनों को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “अपने साथी समुदाय के सदस्यों के साथ यहाँ उपस्थित होना गर्व का क्षण है। इस समारोह में बड़ी संख्या में प्रवासी समुदाय शामिल हुआ है। भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने वाला है, इसलिए प्रत्येक प्रवासी सदस्य की जिम्मेदारी है कि वह दोनों देशों के बीच एक सेतु का काम करे।”

बता दें कि इसके अलावा श्री कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर न्यूयॉर्क के इस्कॉन द्वारा एक रथ यात्रा का भी आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

अलास्का से लौटकर रूस का ‘तोता’ बने ट्रंप, कहा- यूक्रेन को न क्रीमिया मिलेगा, न नाटो में जगह: नोबेल पुरस्कार के उतावलेपन में बैठक से पहले जेलेंस्की को हड़काया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ मुलाकात से पहले यूक्रेन-रूस युद्ध को लेकर उन्हें ही हड़का दिया है। ट्रंप ने कहा है कि जेलेंस्की, रूस के साथ इस युद्ध को तुरंत रोक सकते हैं। हाल ही में ट्रंप ने अलास्का में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ लंबी बैठक की थी।

ट्रंप-पुतिन की इस बैठक का कोई ठोस नतीजा तो नहीं निकला लेकिन ट्रंप ने बैठक के बाद यह लगभग साफ कर दिया था कि अब शांति स्थापित करने का जिम्मा जेलेंस्की का है। अब ट्रंप ने अपनी बात को और मुखरता के साथ दोहराया है। पुतिन के साथ बैठक को ट्रंप ने सार्थक बताया था।

ट्रंप ने क्या कहा?

ट्रंप ने जेंलेंस्की को हड़काते हुए अपने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर एक पोस्ट किया है। ट्रंप ने लिखा है, “यूक्रेन के राष्ट्रपति जेंलेंस्की चाहें तो रूस के साथ युद्ध तुरंत खत्म कर सकते हैं, या फिर वह लड़ाई जारी रख सकते हैं। याद कीजिए कि इसकी शुरुआत कैसे हुई थी।”

हालाँकि, ट्रंप ने अपने पोस्ट में साफ किया कि ना तो यूक्रेन को क्रीमिया वापस नहीं मिलेगा, जिसे 12 साल पहले बराक ओबामा के दौर में बिना गोली चले रूस ने हथिया लिया था और ना ही यूक्रेन को NATO में शामिल होने दिया जाएगा। ट्रंप ने लिखा कि कुछ चीजें कभी नहीं बदलती हैं।

रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने लगातार यूक्रेन के NATO में शामिल होने का विरोध किया है और मौजूदा रूस-यूक्रेन संघर्ष की बड़ी वजह भी यूक्रेन का NATO की सदस्यता लेने की पहल करना माना जाता है। जनवरी में ट्रंप के दोबारा अमेेरिकी राष्ट्रपति बनने से पहले NATO देशों ने यूक्रेन को सदस्यता दिए जाने पर सहमित व्यक्त कर दी थी।

वहीं, ट्रंप के साथ मुलाकात के लिए जेलेंस्की अमेरिका पहुँच गए हैं। उनका कहना है कि यूक्रेन अपनी अखंडता और संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा। जेलेंस्की का कहना है कि वह युद्ध रोकने के लिए अपनी शर्तों पर ही तैयार होंगे।

इसके अलावा जेलेंस्की ने शांति समझौते के लिए ट्रंप की सुरक्षा की गारंटी देने की पेशकश की सराहना की है। वहीं, एक अमेरिकी प्रतिनिधि ने दावा किया कि पुतिन यूक्रेन के लिए संभावित नाटो जैसे सुरक्षा समझौते पर सहमत हो गए हैं।

जेलेंस्की समेत कई यूरोपीय नेताओं से मिलेंगे ट्रंप

रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के लिए ट्रंप जेलेंस्की समेत कई यूरोपीय नेताओं से मुलाकात करेंगे। ट्रंप ने इस मुलाकात को लेकर कहा, “व्हाइट हाउस में एक बड़ा दिन होगा। इतने सारे यूरोपीय नेता एक साथ कभी नहीं आए। उनकी मेजबानी करना मेरे लिए सम्मान की बात है।”

NATO के महासचिव मार्क रूटे, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री सर कीर स्टारमर भी ट्रंप के साथ मुलाकात करेंगे। दावा किया गया है कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज, फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब और यूरोपीय यूनियन की अध्यक्षा उर्सुला वॉन डेर लेयन भी बातचीत में शामिल होंगे।

इससे पहले जब व्हाइट हाउस में मुलाकात के दौरान ट्रंप, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और जेलेंस्की के बीच खूब बहसबाजी हुई थी।

हालाँकि, अब इस चर्चा को लेकर उम्मीद जताई जा रही है कि इससे रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर कोई ठोस नतीजा सामने आ सकता है। नोबेल शांति पुरस्कार के लिए उतावले ट्रंप अब इस संघर्ष को खत्म करने के लिए किसी भी हद तक जाते दिख रहे हैं।

सैमसंग अब नोएडा में करेगा लैपटॉप मैनुफैक्चरिंग का काम, हर साल 60-70 हजार प्रोडक्ट होंगे तैयार: ‘मेक इन इंडिया’ को मिलेगी धार, इंजीनियर्स को रोजगार

दक्षिण कोरिया की इलेक्ट्रॉनिक्स दिग्गज कंपनी Samsung ने भारत में अपने मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशन्स का विस्तार करते हुए नोएडा स्थित प्लांट में लैपटॉप बनाना शुरू कर दिया है। यह कदम भारत सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ योजना के तहत देश को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, “सैमसंग ने अपने मैन्युफैक्चरिंग पोर्टफोलियो का विस्तार किया है और नोएडा फैक्ट्री में लैपटॉप बनाने जा रहा है। कंपनी भविष्य में और डिवाइसेज भी भारत में बनाने की योजना बना रही है।”

नोएडा में यह फैक्ट्री 1996 में स्थापित हुई थी और तभी से भारत में सैमसंग की बड़ी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के रूप में काम कर रही है। यहाँ पहले से ही फीचर फोन, स्मार्टफोन, वियरेबल्स और टैबलेट्स बनाए जाते हैं। अब लैपटॉप निर्माण की शुरुआत से कंपनी का फोकस भारत में अपने प्रोडक्ट्स की रेंज बढ़ाने पर है।

यह प्लांट हर साल 120 मिलियन स्मार्टफोन बनाने की क्षमता रखता है और दुनियाभर में सैमसंग का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माण केंद्र है (पहला दक्षिण कोरिया में है)। सैमसंग, भारत से स्मार्टफोन एक्सपोर्ट करने वाली दूसरी सबसे बड़ी कंपनी भी है, वहीं पहले नंबर पर Apple है।

जनवरी 2024 में सैमसंग के मोबाइल एक्सपीरियंस (MX) बिजनेस के प्रमुख टीएम रोह ने कहा था कि नोएडा प्लांट में लैपटॉप बनाने की तैयारी चल रही है। अब यह निर्माण शुरू होने जा रहा है और इस लाइन में हर साल करीब 60,000 से 70,000 लैपटॉप बनाए जा सकेंगे।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सैमसंग की इस पहल का स्वागत करते हुए कहा, “सैमसंग भारत में उन्नत तकनीकी डिवाइसेज का निर्माण बढ़ा रहा है। यह भारत की प्रतिभा और नवाचार से प्रेरित है।”

हाल ही में उन्होंने Samsung Southwest Asia के CEO जेबी पार्क और कॉर्पोरेट वाइस प्रेसिडेंट एसपी चुन से भी मुलाकात की थी और कंपनी की भारत में भूमिका को सराहा।

भारत में सैमसंग का रिसर्च यूनिट 7,000 से ज्यादा इंजीनियरों को रोजगार देता है, जिससे यह साफ होता है कि कंपनी भारत के टेक इकोसिस्टम में लंबे समय तक निवेश करना चाहती है।

भारत सरकार ने अगस्त 2023 में लैपटॉप इंपोर्ट पर रोक लगाई थी, जिसे बाद में रजिस्ट्रेशन सिस्टम में बदला गया, ताकि देश में ही लैपटॉप निर्माण को बढ़ावा दिया जा सके।

हालाँकि Acer, HP, Lenovo और Asus जैसी कंपनियाँ सरकार की Production Linked Incentive (PLI) योजना का फायदा उठा रही हैं, लेकिन Samsung ने इस योजना में भाग नहीं लिया है। इसके बजाय, कंपनी अपने दम पर भारत में निर्माण क्षमता बढ़ा रही है।

भारत में लैपटॉप बनाकर, सैमसंग अब चीन और वियतनाम से होने वाले आयात पर निर्भरता घटाएगा, जिससे आयात शुल्क में बचत के माध्यम से उपभोक्ताओं के लिए लागत कम होने की संभावना है। 

वर्तमान में सैमसंग भारत के स्मार्टफोन मार्केट में दूसरा सबसे बड़ा ब्रांड है (मूल्य और वॉल्यूम दोनों में)। साथ ही यह टैबलेट पीसी मार्केट में 15% शेयर रखता है। हालाँकि अब तक लैपटॉप मार्केट में इसकी खास मौजूदगी नहीं रही है। यह कदम उस खाली जगह को भरने की दिशा में है।

सैमसंग अब MSI जैसी कंपनियों की कतार में शामिल हो गया है, जिसने हाल ही में चेन्नई में लैपटॉप बनाना शुरू किया है।

बिहार से इंजीनियर बनने शारदा यूनिवर्सिटी आया 24 साल का शिवम, कर्ज लेकर पैसा भेज रहे थे पिता; फाँसी लगाने से पहले लिखा- मैं इस शिक्षा के लायक नहीं: इस सुसाइड का दोषी कौन?

उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा की शारदा यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग के एक छात्र ने अपने हॉस्टल के कमरे में आत्महत्या कर ली है। बिहार के पूर्णिया के रहने वाले 24 वर्षीय शिवम डे नामक छात्र ने बीते 15 अगस्त की रात अपने कमरे में चादर का फँदा बनाकर फाँसी लगा ली। साथी उसे अस्पताल भी लेकर गए लेकिन तब तक उसकी साँसें रुक गई थीं।

शिवम ने 2022 में B.Tech में एडमिशन लिया था लेकिन वो पिछले लंबे वक्त से कॉलेज नहीं जा रहा था। छात्र के परिजन ने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर आरोप लगाए हैं कि उन्होंने यह जानकारी देना भी उचित नहीं समझा कि उनका बच्चा इतने समय से पढ़ने नहीं आ रहा था। छात्र के कमरे से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है जिसमें उसने तनाव और दबाव को ना झेल पाने की बात कही है।

छात्र ने सुसाइड नोट में क्या लिखा?

शिवम डे ने सुसाइड नोट में खुद को अपनी मृत्यु का जिम्मेदार बताया है और माता-पिता से माफी माँगी है। छात्र ने लिखा, “अगर आप यह पढ़ रहे हैं तो मैं मर चुका हूँ। मेरी मौत का यह निर्णय मेरा है, इसमें कोई और शामिल नहीं है। मैं पिछले एक वर्ष से इसकी तैयारी कर रहा था।”

छात्र ने आगे लिखा, “यह दुनिया मेरे लिए नहीं है या शायद में इसके लिए नहीं हूँ। मैं किसी काम का नहीं हूँ।” शिवम ने सुसाइड नोट में पुलिस से माँग की है कि उनकी मौत के लिए किसी और को जिम्मेदार न ठहराया जाए।

छात्र ने अपने सुसाइड नोट में शारदा यूनिवर्सिटी से माँग कि है कि उनकी बकाया फीस को उनके परिजन को लौटा दिया जाए क्योंकि वह सेकेंड ईयर के बाद से कॉलेज नहीं गया था। छात्र ने लिखा, “मैं अच्छा छात्र नहीं हूँ। शायद मैं इस शिक्षा प्रणाली के लिए नहीं बना था। मैं अपने अंग दान करना चाहता हूँ। मैं उन सभी से माफी माँगता हूँ जो मुझे प्यार करते हैं।”

छात्र ने अपनी पिता और माँ को ‘सॉरी’ भी लिखा है। शिवम ने लिखा, “मैं बुढ़ापे में आपका सहारा नहीं बन सका।” छात्र ने आगे लिखा, “मैं इस तनाव और दबाव को और नहीं झेल पा रहा हूँ। लोगों को डरने की जरूरत नहीं है, मैं अपनी मौत के बाद किसी का पीछा नहीं करूँगा।”

छात्र का सुसाइड नोट

लोन लेकर फीस भर रहे थे पिता

इस घटना के बाद से छात्र के पिता कार्तिक चंद डे सदमे में हैं। कार्तिक चंद डे ने बताया है कि वह लोन लेकर शिवम की फीस जमा कर रहे थे लेकिन यूनिवर्सिटी प्रशासन ने उसके कॉलेज ना पहुँचने की कोई जानकारी नहीं दी। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने कभी नहीं बताया था कि शिवम ने पढ़ाई छोड़ दी है। कार्तिक का कहना है कि इस बीच यूनिवर्सिटी प्रशासन से फीस व अन्य चीजों को लेकर मेसेज और मेल आते रहते थे।

उनका कहना है कि जब शिवम 2023 के बाद कॉलेज नहीं गया था तो फीस क्यों ली गई थी। साथ ही, उन्होंने बताया है कि शिवम के साथ फर्स्ट ईयर में रैगिंग भी हुई थी, जिसका जानकारी छात्र ने ही अपने परिजन को दी थी। कार्तिक ने कहा कि बेटे को इंजीनियर बनाने के लिए भेजा था और अगर उन्हें उसकी समस्याओं को पता होता तो वह कभी उसे दुनिया से जाने नहीं देते।

छात्र के परिजन ने लापरवाही को लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी है और पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है। यह एक महीने के भीतर शारदा यूनिवर्सिटी में आत्महत्या का दूसरा मामला है। बीते 18 जुलाई को ज्योति जांगड़ा नामक एक छात्रा ने भी खुदकुशी कर ली थी। जिसके बाद दो प्रोफेसरों को गिरफ्तार किया गया था।

यूनिवर्सिटी ने क्या कहा?

शारदा यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर पीआर डॉ. अजित कुमार ने बताया है कि मेंटर ने छात्र से संपर्क बनाया हुआ था। कुमार ने बताया कि मई 2024 में चौथे सेमेस्टर की परीक्षाओं के बाद छात्र का CGPA तृतीय वर्ष में प्रमोशन के लिए जरूरी 5.0 के मानदंड तक नहीं पहुंचा था। जिसके बाद अगस्त 2024 में उसे विशेष परीक्षा का अतिरिक्त अवसर प्रदान दिया गया था।

कुमार ने बताया कि 2024-25 के सत्र के लिए शिवम ने खुद की रजिस्टर नहीं कराया और ना ही किसी क्लास में शामिल हुआ। हालाँकि, मेंटर ने छात्र से संपर्क बनाए रखा था। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्र की फीस को वापस उसके परिवार को लौटाने की बात कही है।

16 साल की उम्र में RSS से जुड़े, तमिलनाडु़ बीजेपी अध्यक्ष रहते हुए निकाली 19000 किलोमीटर लंबी ‘रथ यात्रा’: जानें- कौन हैं CP राधाकृष्णन, जिन्हें NDA ने बनाया उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने उपराष्ट्रपति पद के लिए महाराष्ट्र के राज्यपाल चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन (सी.पी. राधाकृष्णन) को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई एक बैठक के बाद किया बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने उनके नाम का एलान किया है।

मूल रूप से तमिलनाडु से आने वाले राधाकृष्णन वर्तमान में महाराष्ट्र के 24वें राज्यपाल हैं। इससे पहले वे लगभग डेढ़ वर्ष तक झारखंड के राज्यपाल रहे। झारखंड के राज्यपाल रहते हुए उन्होंने तेलंगाना के राज्यपाल और पुडुचेरी के उपराज्यपाल का अतिरिक्त कार्यभार भी संभाला था।

शिक्षा और राजनीतिक जीवन की शुरुआत

20 अक्टूबर 1957 को तमिलनाडु के तिरुप्पुर में जन्मे राधाकृष्णन ने बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में स्नातक की डिग्री हासिल की है। सिर्फ 16 साल की उम्र वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ गए थे। 1974 में भारतीय जनसंघ के राज्य कार्यकारी समिति के सदस्य बने थे।

1996 में उन्हें BJP का तमिलनाडु सचिव नियुक्त किया गया। 2004 से 2007 तक राधाकृष्णन ने BJP तमिलनाडु के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कार्य किया था। इसके अलावा वे 1998 में वे पहली बार कोयंबटूर से लोकसभा सांसद चुने गए और 1999 में फिर से लोकसभा पहुँचे थे।

राधाकृष्णन ने तमिलनाडु बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए 19,000 किलोमीटर लंबी ‘रथ यात्रा’ निकाली जो 93 दिनों तक चली थी। इस यात्रा का उद्देश्य नदियों को जोड़ना, आतंकवाद खत्म करना, समान नागरिक संहिता लागू करना, अस्पृश्यता मिटाना और मादक पदार्थों की समस्या से निपटना था। इसके अलावा राधाकृष्णन ने अलग-अलग मुद्दों पर दो पदयात्राएँ भी निकालीं थीं।

सांसद रहते हुए उन्होंने वस्त्र मंत्रालय से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। साथ ही, वे शेयर बाजार घोटाले की जांच करने वाली संसदीय विशेष समिति के सदस्य भी थे। 2004 में वे संसदीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करने गए थे।

18 फरवरी 2023 को उन्हें झारखंड का राज्यपाल बनाया गया। पद सँभालने के शुरुआती चार महीनों में ही उन्होंने झारखंड के सभी 24 जिलों का दौरा किया और नागरिकों व जिला अधिकारियों से सीधे संवाद किया।

9 सितंबर को उपराष्ट्रपति पद के लिए मतदान

उपराष्ट्रपति पद के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 21 अगस्त है। यदि विपक्ष भी अपने उम्मीदवार की घोषणा करता है तो चुनाव 9 सितंबर को आयोजित होगा। एनडीए को निर्वाचक मंडल में पूर्ण बहुमत प्राप्त है, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के सभी सदस्य शामिल हैं। ऐसे में मुकाबले की स्थिति में सत्तारूढ़ गठबंधन के उम्मीदवार की जीत लगभग तय मानी जा रही है। गौरतलब है कि जगदीप धनखड़ के स्वास्थ्य कारणों के चलते इस्तीफा देने के बाद यह पद खाली हुआ है।

एमपी में मोहसिन ने राहुल बनकर की हैवानियत, हिंदू समाज ने इछावर कस्बे को बंद कर किया प्रदर्शन: आरोपित के खिलाफ बुलडोजर एक्शन की माँग, सीहोर में लव जिहाद को लेकर बवाल

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के इछावर में लव जिहाद की घटना ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया। 23 साल की एक हिंदू युवती ने मोहसिन नाम के शख्स पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उसने पुलिस को बताया कि मोहसिन ने खुद को राहुल शर्मा बताकर सोशल मीडिया पर उससे दोस्ती की।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, धीरे-धीरे उसने युवती का भरोसा जीता और शादी का झाँसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। बाद में उसकी असलियत सामने आई कि वह राहुल नहीं, बल्कि इछावर का रहने वाला मोहसिन है। उसने युवती पर धर्म परिवर्तन का दबाव डाला और शादी के लिए मजबूर किया।

युवती ने हिम्मत दिखाते हुए 14 जुलाई को सीहोर कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और मामला भोपाल के निशातपुरा थाने में ट्रांसफर कर दिया। निशातपुरा पुलिस ने मोहसिन को गिरफ्तार कर लिया और उससे पूछताछ शुरू कर दी। पुलिस अब उसके मोबाइल और सोशल मीडिया चैट की जाँच कर रही है ताकि पूरी सच्चाई सामने आए।

इस घटना ने इछावर में तनाव पैदा कर दिया। हिंदू संगठनों ने रविवार (17 अगस्त 2025) को पूरे नगर में बंद का ऐलान किया, जिसे लोगों का भारी समर्थन मिला। हजारों लोग आजाद चौक से तहसील कार्यालय तक पैदल मार्च करते हुए पहुँचे। वहाँ नारेबाजी, हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ हुआ।

लोगों ने मोहसिन की संपत्ति पर बुलडोजर चलाने की माँग की और सख्त कार्रवाई की अपील की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि ऐसी घटनाएँ समाज की बेटियों की सुरक्षा पर सवाल उठाती हैं।

इछावर एसडीएम जमील खान ने बताया कि मोहसिन की संपत्तियों की जाँच की जा रही है। अगर कोई निर्माण अवैध पाया गया तो उसे तोड़ा जाएगा। तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।

कोतवाली प्रभारी रविंद्र यादव ने कहा कि युवती के आरोप गंभीर हैं और जाँच में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। यह मामला मध्य प्रदेश में लव जिहाद के खिलाफ बने सख्त कानूनों के बावजूद सामने आया है।