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शाकिर, हसन अली, नासिर ढिल्लो… पाकिस्तान के इन एजेंटों से ज्योति मल्होत्रा की होती थी बात: SIT को जासूसी के मिले सबूत, 2500 पन्नों की चार्जशीट दायर

पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में गिरफ्तार यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा के खिलाफ SIT ने 14 अगस्त 2025 को चार्जशीट दाखिल कर दी है। चार्जशीट लगभग 2,500 पन्नों की है। पुलिस ने बताया कि ज्योति पाकिस्तानी एजेंट्स के साथ लगातार संपर्क में थी और उनके लिए जानकारी इकट्ठा करती थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पुलिस की SIT टीन ने अपनी चार्जशीट में बताया है कि यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा लंबे समय से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के जासूसों के संपर्क में थी। वह पाकिस्तान उच्चायोग में तैनात एहसान-उर-रहीम के अलावा हसन अली, शाकिर और नासिर ढिल्लों से भी लगातार बातचीत करती थी।

जाँच में यह भी सामने आया है कि ज्योति पिछले साल 2024 पाकिस्तान, चीन और नेपाल भी गई थी। पुलिस को शक है कि इन यात्राओं के दौरान ज्योति ने कई जरूरी जानकारी पाकिस्तान को दी।

पुलिस ने ज्योति के मोबाइल और लैपटॉप से डिलीट की गई कुछ फाइलों और चैट्स को भी वापस निकाला है, जिनसे यह साबित होता है कि वह जासूसी कर रही थी।

जाँच अभी बाकी- SIT

पुलिस ने यह चार्जशीट 14 अगस्त 2025 को इसलिए दाखिल की, ताकि ज्योति को जमानत न मिल सके। अगर वे 90 दिन की समय सीमा में चार्जशीट दाखिल नहीं करते तो ज्योति को जमानत मिल जाती।

फिलहाल, पुलिस का कहना है कि कुछ मामलों में जाँच अभी बाकी है और वे बाद में एक और पूरक चार्जशीट दाखिल करेंगे। 18 अगस्त 2025 को इस मामले की अदालत में सुनवाई होगी।

चार्जशीट दाखिल मामले में ज्योति मल्होत्रा के वकील का भी बयान सामने आया है। वकील ने कहा, “हो सकता है कि ज्योति को पुलिस रिमांड पर लिया जाए और नियमों के मुताबिक उन्हें चार्जशीट की कॉपी दी जाएगी।”

मामला क्या है?

यूट्यूबर ज्योति मल्होत्रा को मई 2025 में हरियाणा के हिसार से गिरफ्तार किया गया था। ज्योति मल्होत्रा पर पाकिस्तान के लिए जासूसी करने का आरोप लगा था।

पुलिस को ज्योति पर तब शक हुआ, जब उन्होंने देखा कि ज्योति मल्होत्रा की कमाई और खर्च में बहुत ज़्यादा अंतर है। ज्योति के पिता एक बढ़ई हैं और उनका परिवार आमदनी के हिसाब से साधारण है, लेकिन ज्योति अचानक बहुत महंगी-महंगी यात्राएँ करने लगी थीं।

ज्योति मल्होत्रा ने पाकिस्तान में कई बड़े और प्रभावशाली लोगों से मुलाकात की, जिससे पुलिस का शक और बढ़ गया। पुलिस का कहना है कि ज्योति पाकिस्तानी एजेंटों के लिए एक ‘टूल किट’ यानी एक हथियार या साधन के तौर पर काम कर रही थीं।

‘हम जिंदा हैं तब भी हमें मार दिया, हमारा वोट चोरी कर लिया’: AI वीडियो से SIR पर प्रोपेगेंडा फैला रही थी कॉन्ग्रेस, चुनाव आयोग ने कहा- बिहार के लोगों को न करें गुमराह

चुनाव आयोग ने AI की मदद से तैयार की गई कॉन्ग्रेस की वीडियो की मंशा पर सवाल उठाया है। इस वीडियो में एक बुजुर्ग महिला समेत कुछ लोग ‘वोट चोरी’ की बातें करते हुए अपना गुस्सा दिखा रहे हैं।

कॉन्ग्रेस ने यह वीडियो अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर साझा किया था। वीडियो में दिखाया गया कि एक बुजर्ग महिला कह रही है- “हम जिंदा है तब भी हमें मार दिया। हमारा वोट चोरी कर लिया गया। हमारा अधिकार चोरी कर लिया।”

ऐसे ही एक बुज़ुर्ग व्यक्ति ने दावा किया कि उसके घर पर 80 फर्जी मतदाता पंजीकृत हैं। इसके अलावा, कई अन्य लोगों की आवाजों के जरिए भी मतदाता सूची में गड़बड़ी और वोटिंग प्रक्रिया में धांधली का आरोप लगाया गया।

बता दें कि ये वीडियो राहुल गाँधी की बिहार सासाराम में यात्रा शुरू होने से पहले जारी की गई थी। कैप्शन में लिखा था- “17 अगस्त से हमारे साथ आना है, वोट चोरों को गद्दी से हटाना है।”

कॉन्ग्रेस द्वारा साझा की गई इस वीडियो का मकसद स्पष्ट तौर पर बिहार की जनता को भ्रमित करने का है, क्योंकि अगर ऐसा नहीं होता तो चालाकी से छोटे फॉन्ट में एआई जनरेटेड नहीं लिखते। चुनाव आयोग ने भी इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि ये वीडियो सिर्फ एआई से बनाई गई है जिसमें कोई सच्चाई नहीं है। ये सिर्फ और सिर्फ बिहार के लोगों को भ्रमित करने के लिहाज से बनाई गई है।

सोशल मीडिया पर भी लोग इसे देख बोल रहे हैं कि कॉन्ग्रेसियों को अब झूठ बोलने से बाज आ जाना चाहिए। कुछ बोल रहे हैं कि कॉन्ग्रेस को आरोप सिद्ध करने के लिए वास्तविक लोग नहीं मिल रहे इसलिए वो AI वीडियो को जनरेट कर रही है।

विपक्ष के आरोप और चुनाव आयोग

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस और विपक्षी दलों का गठबंधन इंडी ब्लॉक लंबे समय से चुनाव आयोग पर पक्षपात और केंद्र सरकार के साथ मिलकर चुनाव प्रक्रिया में हेराफेरी करने के आरोप लगाता रहा है। हाल ही में राहुल गाँधी ने भी एक विरोध मार्च के दौरान वोट चोरी का मुद्दा उठाया था, जिसे चुनाव आयोग ने तथ्यात्मक रूप से गलत बताया था।

चुनाव आयोग ने इस मामले पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रही है। आयोग ने इसके सबूत भी सार्वजनिक किए हैं। इनमें विभिन्न राजनीतिक दलों राजद, कॉन्ग्रेस और भाकपा के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठकों के रिकॉर्ड, मसौदा मतदाता सूची पर उनकी प्रतिक्रियाएँ और प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं।

आयोग का कहना है कि मतदाता सूची के प्रकाशन से पहले और बाद में सभी स्तरों पर राजनीतिक दलों से परामर्श किया गया और किसी भी गड़बड़ी की शिकायत का निवारण किया गया। तथ्य-जाँच से यह साफ हो गया कि कॉन्ग्रेस  का साझा किया गया ‘वोट चोरी’ का वीडियो वास्तविक नहीं है।

बिहार SIR पर 17 दिन में एक भी आपत्ति नहीं दे पाया INDI गठबंधन, पर ‘चारा चोर’ परिवार के साथ ‘वोट चोरी’ रोकने निकल पड़ा राहुल गाँधी का गैंग: 16 दिन चलेगी सासाराम से शुरू हुई यात्रा

बिहार के सासाराम से कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने 17 अगस्त 2025 को अपनी 16 दिन की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ शुरू की। यह यात्रा लगभग 1,300 किलोमीटर लंबी होगी और 1 सितंबर 2025 को पटना में एक रैली के साथ खत्म होगी।

इस रैली की शुरुआत में ही चारा चोरी के मामले में सजा याफ्ता और मेडिकल ग्राउंड पर जमानत पर चल रहे लालू प्रसाद यादव, लैंड फॉर जॉब स्कैम के सह-आरोपित तेजस्वी यादव जैसे नेता मंच पर नजर आए और राहुल गाँधी के साथ ‘संविधान बचाने’ के नाम पर अपनी पारिवारिक पार्टी के लिए वोट माँगे।

विपक्षी INDI गठबंधन इसे आगामी बिहार विधानसभा चुनाव से पहले ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के सिद्धांत को बचाने का बड़ा अभियान बता रहा है। राहुल गाँधी ने इस मौके पर बीजेपी और आरएसएस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि ये दोनों संगठन पूरे देश में संविधान को खत्म करने की साजिश रच रहे हैं।

हैरानी की बात नहीं है कि राहुल गाँधी समेत तमाम नेताओं ने रैली में उन्हीं पुराने आरोपों को दोहराया, जिनके खुद वो जवाब नहीं दे रहे हैं। यहाँ तक कि चुनाव आयोग भी बता चुका है कि बिहार SIR को लेकर कॉन्ग्रेस हो या आरजेडी, किसी ने भी एक भी औपचारिक शिकायत दर्ज कराई ही नहीं है।

राहुल ने सासाराम की रैली में कहा कि जहाँ भी चुनाव होते हैं, वहाँ बीजेपी गड़बड़ी करके जीत हासिल करती है। उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच वोटरों की संख्या में अंतर का हवाला दिया। राहुल ने दावा किया कि जाँच में पता चला कि एक करोड़ नए वोटर जोड़े गए, जिससे बीजेपी को फायदा हुआ।

राहुल ने कर्नाटक का उदाहरण देते हुए कहा कि एक विधानसभा में एक लाख वोटों की चोरी हुई, जिसके चलते बीजेपी ने वहाँ जीत हासिल की। यहाँ भी चुनाव आयोग ने राहुल गाँधी से शिकायत दर्ज कराने को कहा, लेकिन कॉन्ग्रेस ने इसकी जहमत नहीं उठाई। यही नहीं, चुनाव आयोग ने साफ कहा था कि मतदाता सूची 2 बार कॉन्ग्रेस के साथ साझा की गई थी, लेकिन कॉन्ग्रेस ने एक बार भी शिकायत दर्ज नहीं कराई।

सासाराम में राहुल गाँधी (फोटो साभार : INC Bihar)

राहुल ने चुनाव आयोग पर भी निशाना साधा और कहा कि जब उन्होंने इस मुद्दे को उठाया, तो आयोग ने उनसे एफिडेविट माँगा, लेकिन बीजेपी से कोई सवाल नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने वोटिंग की वीडियोग्राफी देने से भी इनकार कर दिया। राहुल ने बिहार की जनता को भरोसा दिलाया कि वे बिहार का चुनाव चोरी नहीं होने देंगे।

रैली में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव ने भी भाषण दिया। उन्होंने कहा कि बिहार में वोट का अधिकार छोटे लोगों का राज है, जैसा कि लोहिया और लालू यादव कहते थे। तेजस्वी ने बीजेपी और चुनाव आयोग पर मिलीभगत का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में गड़बड़ी करके लोगों के वोट छीने जा रहे हैं।

तेजस्वी ने तंज कसते हुए कहा कि जिन लोगों को मृत घोषित किया गया, उनके साथ राहुल गाँधी ने चाय पी, जो चुनाव आयोग की नाकामी को दिखाता है। उन्होंने इसे ‘लोकतंत्र पर डकैती’ करार दिया और कहा कि बिहार की जनता धोखा नहीं सहेगी।

चारा-चोरी के दोषी ने भी वोट चोरी पर रखी बात

चारा-चोरी के मामले में सजायाफ्ता और मौजूदा समय में मेडिकल ग्राउंड पर चल रहे लालू यादव ने भी रैली को संबोधित किया। खुद सरकारी खजाने से फंड चोरी के दोषी ने कहा- “चोरों को हटाइए, बीजेपी को भगाइए, हमारी पार्टी को जिताइए।” आखिर में उन्होंने कहा- “लागल-लागल झुलनिया में धक्का, बलम कलकता चले. राहुल गाँधी जिंदाबाद, खड़गे जी जिंदाबाद, तेजस्वी यादव जिंदाबाद।” और बेटे के जिंदाबाद का नारा लगाकर मंच पर बैठ गए।

उधर, बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने राहुल गाँधी पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि बिहार में जननायक सिर्फ कर्पूरी ठाकुर हैं, और राहुल गाँधी को ‘तिरंगे का खलनायक’ करार दिया। मालवीय ने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस ने अपने पोस्टर से तिरंगे का भगवा रंग हटाकर ‘घुसपैठिया बचाओ यात्रा’ शुरू की है, जो सिर्फ वोट बैंक की राजनीति है। उन्होंने दावा किया कि बिहार की जनता इसका जवाब देगी।

‘वोटर अधिकार यात्रा’ बिहार में विपक्ष की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है। यह यात्रा न सिर्फ मतदाता जागरूकता बढ़ाने की कोशिश है, बल्कि विपक्ष जनता को एकजुट करना चाहता है। इस अभियान से बिहार विधानसभा चुनाव में नया माहौल बन सकता है। हालाँकि इंडी गठबंधन इसमें कितना सफल हो पाएगा, ये देखने वाली बात होगी।

न माथ से बिंदी हटी, न हिली कटार: धराली में मलबे से निकली 400 साल पुरानी राजराजेश्वरी माता की प्रतिमा देख ग्रामीण हैरान, बताया- 2 अग्निकांड भी नहीं पहुँचा पाए थे मूर्ति को नुकसान

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली में बीते 5 अगस्त को आए सैलाब के बाद लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इस बीच आपदा के 12वें दिन रेस्क्यू टीम को करीब 400 साल पुरानी माँ राजराजेश्वरी की चाँदी की मूर्ति पूरी तरह सुरक्षित मिली है। यह मूर्ति मलबे में करीब 25 फीट नीचे दबी थी। हैरानी की बात यह है कि इस मूर्ति को लगाई गई बिंदी भी जस की तस थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मूर्ति एक पेड़ के नीचे दबी मिली है। साथ ही, गलाणथोक की कुलदेवी माँ राजराजेश्वरी के साथ रखी कटार और 5 पांडवों व भगवान शिव की पंचमुखी मूर्तियाँ भी सुरक्षित मिली हैं।

धराली गाँव के प्रवेश द्वार के पास राजराजेश्वरी माता का देवदार से बना प्राचीन मंदिर था। इसी मंदिर में हिमाचल प्रदेश से लाई गई यह मूर्ति भी रखी थी। सैलाब में यह मंदिर ध्वस्त हो गया और मूर्ति मलबे में दब गई थी।

शनिवार (16 अगस्त) को एक ग्रामीण को माता की चुनरी दिखाई दी जिसके बाद उन्होंने बीआरओ से उस स्थान पर खुदाई करने की माँग की थी। इस खुदाई के दौरान प्राचीन मंदिर से कुछ ही फीट की दूरी पर करीब 25 फीट नीचे माँ राजराजेश्वरी की व अन्य मूर्तियाँ सुरक्षित मिलीं।

ग्रामीणों ने मूर्ति को सुरक्षित निकालकर माँ राजराजेश्वरी की पूजा अर्चना की है। फिलहाल माता की मूर्ति को एक होटल के कमरे में विराजित किया गया है। ग्रामीणों ने इस घटना को चमत्कार बताते हुए कहा है कि आपदा का दौर बीतने के बाद भव्य मंदिर तैयार कर उसमें माता की मूर्ति को स्थापित किया जाएगा।

ग्रामीणों का कहना है कि यह तीसरी बार है जब आपदा की स्थिति में माँ की मूर्ति सुरक्षित मिली है। बताया जा रहा है कि इस गाँव में 1971 व 1982-83 में दो बार भीषण अग्निकांड हुआ था और तब भी माता की मूर्ति वाला भवन आग की चपेट में आने से बचा रहा था।

धराली में आए सैलाब के बाद से ही रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। रेस्क्यू टीमें लगातार लापता लोगों को तलाशने में जुटी हुई हैं। सर्च टीमें लापता लोगों को ढूंढने के लिए तकनीक का बडे़ स्तर पर इस्तेमाल कर रही है। साथ ही, धराली के लोगों के पुनर्वास की प्रक्रिया भी तेजी से चल रही है।

15 जगह दिखाकर कहा- महिलाएँ-बच्चे यहीं दफन, कर्नाटक SIT ने 17 जगहों पर की खुदाई पर कोई सबूत नहीं मिला: क्या धर्मस्थल को बदनाम करने की थी साजिश?

कर्नाटक के धर्मस्थल में सामूहिक दफन का मामला अब कमजोर पड़ता दिख रहा है। SIT की खुदाई में अब तक कोई बड़ा सबूत नहीं मिला है। एक सफाईकर्मी ने आरोप लगाया था कि धर्मस्थल में महिलाओं और बच्चियों के शवों को दफनाया गया और उनके शरीर पर यौन उत्पीड़न के निशान भी थे। उसने 15 जगहों का भी जिक्र किया था। SIT ने 17 जगहों की छानबीन कर खुदाई की, लेकिन अभी तक कुछ हाथ नहीं लगा है।

इस मामले में राजनीति गरमा गई है। बीजेपी ने आरोप लगाया है कि मंदिर को बदनाम किया जा रहा है और साजिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। वहीं, कॉन्ग्रेस ने बीजेपी पर आरोप मढ़ते हुए इसे राजनीति का नाम दिया है और कहा कि अगर आरोप झूठे साबित हुए तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कैसे शुरू हुआ मामला

यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब धर्मस्थल मंदिर के एक पूर्व सफाईकर्मी ने आरोप लगाया था कि उसे 1995 से 2014 के बीच महिलाओं और लड़कियों के शवों को दफनाने के लिए मजबूर किया गया था।

सफाईकर्मी ने 3 जून को अपनी शिकायत के साथ कुछ ‘सबूत’ भी दिखाए थे। एक हफ्ते बाद, वह अपनी पहचान छिपाकर और नाकाब के साथ चेहरा ढके कोर्ट में पेश हुआ था। उसने कुछ हड्डियाँ भी दिखाईं और कहा कि ये कब्र से निकाली गई हैं। मामले में एक महिला ने भी शिकायत दर्ज कर बताया था कि उसकी बेटी धर्मस्थल यात्रा के दौरान लापता हो गई थी।

SIT की जाँच

यह पूरा मामला बहुत गंभीर था। इसलिए, कर्नाटक सरकार ने इसकी जाँच के लिए 19 जुलाई 2025 को एक SIT गठित की। शिकायत करने वाले ‘सफाईकर्मी’ ने टीम को 15 जगहों के बारे में बताया, जहाँ शव दफनाने का आरोप था। SIT ने 17 जगहों की खुदाई शुरू कर दी।

खोदे गए 17 स्थानों में से कुछ भी नहीं मिला। यहाँ तक कि उस व्यक्ति ने कोर्ट में जो खोपड़ी दी थी, वह भी एक आदमी की निकली। जाँच से पता चला कि वह खोपड़ी करीब 30 साल पहले मरे हुए एक शख्स की थी। खुदाई के समय एक जगह पर कुछ पहचान पत्र भी मिले, जो एक ऐसे व्यक्ति के थे जिसकी बीमारी से मौत हो चुकी थी।

सफाईकर्मी ने दावा किया था कि एक जगह पर 16 फीट की गहराई में 60 से 100 शवों को दफन किया गया था। SIT ने रडार से वहाँ की भी जाँच की, लेकिन कुछ नहीं मिला। जाँच के दौरान सफाईकर्मी का बर्ताव भी थोड़ा अजीब था।

एक जगह की खुदाई करते समय, उसे अचानक याद आया कि असली जगह तो वहाँ से 150 मीटर दूर है। जब टीम वहाँ गई तो उन्हें जमीन पर 81 हड्डियाँ मिलीं, जो दफन नहीं थीं।

जो हड्डियाँ मिली थीं, उन्हें डॉक्टरों ने देखा। पहली नजर में ये हड्डियाँ किसी आदमी की लग रही थीं। वहाँ एक पेड़ से लटकी हुई लाल साड़ी भी मिली। पास में मर्दों के कपड़े भी पड़े थे। डॉक्टरों का कहना है कि यह आत्महत्या का मामला लग रहा है। जब उस जगह की खुदाई की गई तो वहाँ और कुछ नहीं मिला।

SIT अब एक और जगह की जाँच करेगी। यह वह जगह है जहाँ एक दूसरे गवाह ने कहा था कि उसने एक 13 साल की बच्ची को दफनाते देखा था।

SIT ने पहले ही दो जगहों से मिले कंकालों के मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है। वे इसकी जाँच कर रहे हैं। साथ ही, वे लापता हुई अनन्या भट्ट के मामले की भी जाँच कर रहे हैं। अनन्या की माँ ने उसकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी।

राजनीति और परिणाम

धर्मस्थल में जो कुछ हो रहा था, उसे लेकर वहाँ के पुजारी और भक्तों ने ‘सफाईकर्मी’ और उसका समर्थन करने वालों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। ये लोग धर्मस्थल पुजारियों पर झूठे आरोप लगा रहे थे।

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने शुक्रवार (15 अगस्त 2025) को कहा कि धर्मस्थल की छवि खराब करने की जो कोशिश की जा रही है, उसकी जाँच से सच्चाई सामने आ जाएगी। डीके शिवकुमार ने यह भी चेतावनी दी कि अगर धर्मस्थल में ‘सामूहिक दफन’ की बात झूठी निकली तो सख्त कदम उठाए जाएँगे।

वहीं, बीजेपी ने शनिवार (16 अगस्त 2025) को धर्मस्थल मंदिर तक एक बड़ी रैली निकाली। इस रैली में उन्होंने उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की, जो मंदिर की छवि को बदनाम करने की साजिश रच रहे।

बीजेपी नेता एसआर विश्वनाथ ने बताया कि पार्टी पहले चुप थी क्योंकि उन्हें लगा था कि आरोपों में कुछ सच्चाई हो सकती है। लेकिन, अब जब खुदाई में कोई शव नहीं मिल पाया है तो पार्टी ने मंदिर के पक्ष में खड़े होने का फैसला किया है। वे इस झूठे प्रचार के खिलाफ हैं। फिल्हाल सफाईकर्मी राज्य सरकार की सुरक्षा में है।

प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली को दी ₹11 हजार करोड़ की सौगात: द्वारका एक्सप्रेसवे और UER-II का उद्घाटन भी किया, अब 20 मिनट में पूरा होगा दिल्ली से गुरुग्राम का सफर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (17 अगस्त 2025) को दिल्ली-NCR के दो बड़े सड़क प्रोजेक्ट्स ‘अर्बन एक्सटेंशन रोड-II’ (UER-II) और ‘द्वारका एक्सप्रेसवे’ के दिल्ली सेक्शन का उद्घाटन कर दिया। इन नई सड़कों के शुरू होने से अब गुरुग्राम से दिल्ली के इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI एयरपोर्ट) तक का सफर सिर्फ 20 मिनट में पूरा हो सकेगा। इससे लाखों यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी और दिल्ली-NCR के ट्रैफिक की समस्या भी काफी हद तक कम होगी। इसकी लागत ₹11000 करोड़ से भी अधिक है।

इन सड़कों के चालू होने से दिल्ली-NCR के पश्चिमी इलाकों से आने-जाने वाले लोगों का सफर अब पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। अभी तक इन इलाकों से आने वाले लोगों को दिल्ली की व्यस्त रिंग रोड से होकर गुजरना पड़ता था, जहाँ ट्रैफिक जाम की वजह से घंटों लग जाते थे। लेकिन अब UER-II और द्वारका एक्सप्रेसवे के खुलने से रिंग रोड पर गाड़ियों का बोझ कम होगा। इसका फायदा न सिर्फ रिंग रोड, बल्कि NH-48, NH-44 और बारापुला जैसे बड़े रास्तों पर भी दिखेगा, जहाँ अब जाम में फंसने की परेशानी कम होगी।

उद्घाटन समारोह में प्रधानमंत्री मोदी के साथ केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और कई बड़े भाजपा नेता मौजूद रहे। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि ये सड़कें न सिर्फ यात्रा को आसान बनाएँगी, बल्कि दिल्ली-NCR के विकास को भी नई गति देंगी।

UER-II: दिल्ली की नई आउटर रिंग रोड

ER-II दिल्ली की एक नई सड़क है, जो अलीपुर से शुरू होकर महिपालपुर तक जाती है। यह सड़क 76 किलोमीटर लंबी है और इसे बनाने में करीब 6,445 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। यह पाँच हिस्सों में बनकर तैयार हुई है। इस सड़क की खास बात यह है कि यह गुरुग्राम, वेस्ट दिल्ली और साउथ दिल्ली के लोगों के लिए सफर को बहुत आसान बना देगी। अब लोगों को ट्रैफिक से भरे पुराने रास्तों से नहीं गुजरना पड़ेगा।

यह सड़क NH-44 से सीधे जुड़ती है, जिससे चंडीगढ़, पंजाब और जम्मू-कश्मीर की यात्रा भी आसान हो जाएगी। धौला-कुआँ और रिंग रोड जैसे इलाकों में अब ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी। UER-II में आठ लेन हैं, साथ ही सर्विस रोड, चार बड़े इंटरचेंज और कई अंडरपास भी बनाए गए हैं, जिससे यातायात सुगम रहेगा।

UER-II को दिल्ली मास्टर प्लान 2021 के हिसाब से बनाया गया है। यह सड़क दिल्ली में 54 किलोमीटर और हरियाणा में 21 किलोमीटर लंबी है। इसे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से भी जोड़ा जा रहा है। साथ ही, एक नई 65 किलोमीटर लंबी सड़क बन रही है, जो ट्रॉनिका सिटी से FNG एक्सप्रेसवे तक जाएगी। इससे नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद जैसे इलाकों के हाईवे भी आपस में जुड़ जाएंगे।

खास बात यह है कि UER-II बनाने में 10 लाख मीट्रिक टन पुराने मलबे का इस्तेमाल किया गया, जो दिल्ली के कूड़ेदानों से निकाला गया था। इससे न सिर्फ सड़क बनी, बल्कि पर्यावरण को भी फायदा हुआ।

द्वारका एक्सप्रेसवे से IGI एयरपोर्ट तक तेज रास्ता

द्वारका एक्सप्रेसवे का दिल्ली वाला हिस्सा 10 किलोमीटर लंबा है। इसमें 5 किलोमीटर से ज्यादा लंबी एक सुरंग भी शामिल है, जो सीधे IGI एयरपोर्ट तक जाती है। इस सुरंग की वजह से एयरपोर्ट तक पहुँचना अब बहुत आसान और तेज हो गया है। इस एक्सप्रेसवे का हरियाणा वाला हिस्सा मार्च 2024 में पहले ही शुरू हो चुका था। अब दिल्ली वाला हिस्सा भी चालू होने से गुरुग्राम और दिल्ली के बीच का सफर और भी आरामदायक हो गया है।

इन दोनों सड़कों की वजह से दिल्ली के अंदर के रास्तों पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा। लोग अब बाहर से आने-जाने के लिए इन नए रास्तों का इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे दिल्ली-NCR में रहने वाले लोगों का समय बचेगा और उनकी रोजमर्रा की जिंदगी आसान होगी।

‘वोट चोरी’ के आरोपों पर चुनाव आयोग ने कॉन्ग्रेस को दिया करारा जवाब: पूछा- जब राजनैतिक दलों को पहले ही मिल जाती है वोटर लिस्ट, तब गलती क्यों नहीं बताई

चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट पर उठे सवालों का जवाब दिया है। आयोग ने कहा कि कुछ विपक्षी दल (कॉन्ग्रेस) अब गलतियों का आरोप लगा रहे हैं। ये गलतियाँ पहले क्यों नहीं बताई गईं? राजनीतिक दलों को वोटर लिस्ट की जाँच के लिए काफी समय दिया गया था। उन्हें लिस्ट की कॉपी भी मिलती थी। अगर कोई गलती थी तो उन्हें समय रहते शिकायत करनी चाहिए थी।

चुनाव आयोग का कहना है कि वोटर लिस्ट बनाने की प्रक्रिया पारदर्शी होती है। इसमें सभी दल शामिल होते हैं। चुनाव आयोग रविवार (17 अगस्त 2025) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी करेगा, जिसमें वह इस मुद्दे पर और जानकारी देगा।

सही समय पर उठानी थी आपत्तियाँ

ECI का कहना है कि वोटर लिस्ट से जुड़ी आपत्तियाँ ड्राफ्ट प्रकाशन के समय उठानी चाहिए थी। उस समय दावों और आपत्तियों के लिए एक महीना दिया गया था। वोटर लिस्ट का ड्राफ्ट प्रकाशित होने के बाद, इसकी डिजिटल और फिजिकल कॉपी सभी राजनीतिक दलों को दी जाती है।

साथ ही, इसे आयोग की वेबसाइट पर भी डाला जाता है ताकि कोई भी इसे देख सके। ड्राफ्ट प्रकाशित होने के बाद, मतदाताओं और राजनीतिक दलों को आपत्ति और सुधार के लिए एक महीने का पूरा समय मिलता है। इस दौरान, वे किसी भी गलती को सुधारने के लिए आवेदन कर सकते थे।

वोटर लिस्ट बनाने की प्रक्रिया

भारत में चुनाव के लिए वोटर लिस्ट बनाना एक तय प्रक्रिया है। यह काम कई स्तरों पर किया जाता है। वोटर लिस्ट बनाने की जिम्मेदारी SDM स्तर के अधिकारियों की होती है। इन्हें ERO यानी इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर कहा जाता है। ये अधिकारी बूथ-लेवल ऑफिसर (BLO) की मदद लेते हैं।

इनका काम होता है कि वोटर लिस्ट सही और पूरी हो। हर योग्य वोटर का नाम उसमें हो। चुनाव आयोग इन अधिकारियों को साफ निर्देश देता है। इन्हीं निर्देशों के आधार पर लिस्ट तैयार की जाती है।

गलती होने पर की जाती है अपील

अगर किसी को अंतिम वोटर लिस्ट में भी कोई गलती लगती है, तो वह शिकायत कर सकता है। पहली अपील जिला मजिस्ट्रेट (DM) के पास की जा सकती है। अगर बात नहीं बनती, तो दूसरी अपील राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) के पास की जा सकती है।

चुनाव आयोग ने कहा कि आपत्ति दर्ज करने का सही समय ड्राफ्ट लिस्ट के बाद था। उस समय सभी को एक महीना दिया गया था। अब कुछ पार्टियाँ और लोग पुरानी लिस्ट की गलतियों पर सवाल उठा रहे हैं। अगर ये बातें सही समय पर कही जातीं, तो SDM या ERO उन्हें ठीक कर सकते थे।

साफ-सुथरी वोटर लिस्ट जरूरी- चुनाव आयोग

चुनाव आयोग ने कहा है कि वह वोटर लिस्ट की जाँच का स्वागत करता है। आयोग ने कहा कि हर पार्टी और हर मतदाता को वोटर लिस्ट देखनी चाहिए। अगर कोई गलती दिखे तो समय पर बतानी चाहिए। इससे SDM और ERO को गलती ठीक करने में मदद मिलेगी।

इस कार्य से वोटर लिस्ट और सही और साफ बन सकेगी। आयोग का मानना है कि साफ-सुथरी वोटर लिस्ट बहुत जरूरी है। सही लिस्ट ही लोकतंत्र को मजबूत बनाती है।

पूजा की इजाजत नहीं, नमाज के लिए जगह भरपूर: केरल में CPIM के हिंदुओं और मुस्लिमों के लिए अलग-अलग नियम, कम्युनिस्टों का सनातन विरोधी चेहरा फिर आया सामने

केरल की सत्ताधारी पार्टी सीपीआई(एम) का धर्म को लेकर जो रुख है, वो बार-बार सवालों के घेरे में आता है। ऐसा लगता है कि पार्टी हिंदुओं और मुस्लिमों के साथ एक जैसा व्यवहार नहीं करती। वह एक तरफ तो धर्मनिरपेक्षता की बात करती है, लेकिन जब बात हिंदू या इस्लाम की आती है, तो उसका रवैया अलग-अलग दिखता है।

हाल ही में केरल के पूर्व गृह मंत्री कोडियारी बालकृष्णन के बेटे और सीपीआई(एम) के सदस्य बिनीश कोडियारी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया। इस वीडियो में एक टोपी पहने हुआ व्यक्ति, जिसने टोपी पहनी हुई थी, सीपीआई(एम) के पार्टी ऑफिस के अंदर नमाज़ अदा कर रहा था।

आनंद नाम के एक्स यूजर के मुताबिक, वीडियो में दिखने वाला शख्स कोल्लम का एक फेरीवाला है, जो चादर बेचकर अपनी आजीविका चलाता है। इस मुस्लिम शख्स ने बारिश की वजह से स्थानीय सीपीआई(एम) कार्यकर्ताओं से नमाज पढ़ने के लिए जगह माँगी थी। पार्टी ने तुरंत उसकी बात मान ली और उसे अपने ऑफिस में नमाज पढ़ने की इजाजत दे दी।

बिनीश ने अपने पोस्ट में सीपीआई(एम) की तारीफ की और कहा कि पार्टी ने उस शख्स को नमाज़ पढ़ने की जगह देकर उसकी धार्मिक भावनाओं का ख्याल रखा। उन्होंने इसे प्यार और भाईचारे का उदाहरण बताया और कहा कि यह केरल की ताकत है। यह पोस्ट सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में रहा, क्योंकि इससे पार्टी का एक खास रवैया सामने आया।

सीपीआई(एम) ने नमाज़ की घटना को बहुत सकारात्मक तरीके से पेश किया और इसे भाईचारे का प्रतीक बताया। लेकिन संयोग से हिंदुओं के मामले में ऐसी उदारता, सहनशीलता और समायोजन का रवैया अक्सर दिखाई नहीं देता। क्योंकि जब बात हिंदुओं की आती है, तो पार्टी का रवैया अक्सर अलग होता है। यह अंतर लोगों के बीच चर्चा का विषय बनता है। कुछ उदाहरण हम आपके सामने रख रहे हैं।

CPIM ने रोक दिया था गणपति हवन

बता दें कि फरवरी 2024 में केरल के कोझिकोड जिले के नेदुमन्नूर एलपी स्कूल में आयोजित गणपति हवन पर CPIM ने आपत्ति जताई थी। जानकारी के अनुसार, CPIM से जुड़े लोगों को जब इस पूजा के बारे में पता चला तो उन्होंने वहाँ पहुँचकर अनुष्ठान रुकवा दिया और आयोजकों के साथ मारपीट भी की। इसके बाद पुलिस ने मामले को अपने हाथ में लिया और आयोजकों को गिरफ्तार कर लिया।

सीपीएम के गुंडों ने गणपति हवन रोका, आयोजकों को पुलिस ने गिरफ्तार किया

घटना यहीं नहीं रुकी। सीपीआईएम कार्यकर्ताओं ने बाद में स्कूल तक विरोध मार्च भी निकाला। जबकि यह पूजा स्कूल प्रशासन की पूर्व अनुमति से हो रही थी और हर साल महानवमी के अवसर पर परंपरा के तौर पर आयोजित की जाती रही है।

इस बार, जब नियमित कार्यक्रम रद्द हो गया था, तब स्कूल ने गणपति हवन का आयोजन किया। लेकिन इसके बावजूद CPI M ने इस धार्मिक आयोजन को सहन नहीं किया और विरोध जताया।

CPIM ने मंदिर में प्रार्थना करने पर पार्टी नेता को फटकार लगाई

सितंबर 2017 में CPIM ने अपने ही मंत्री कडकम्पल्ली सुरेंद्रन को फटकार लगाई। वे त्रिशूर के प्राचीन श्री गुरुवायुर मंदिर गए थे और वहाँ परिवार के आग्रह पर पुष्पांजलि अर्पित की थी। सोशल मीडिया पर उनकी तस्वीरें वायरल हुईं, जिनमें वे पारंपरिक मुंडू और मेलमुंडू पहने हुए दिखे।

उनके माथे पर चंदनकुरी भी थी और उनके बच्चे भगवान कृष्ण की वेशभूषा में नजर आए। उस समय सुरेंद्रन केरल के देवस्वओम मंत्री के पद पर कार्यरत थे। इस घटना के बाद CPIM की आंतरिक समिति ने कहा कि उनका आचरण पार्टी के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।

मामले पर एक जाँच रिपोर्ट भी तैयार की गई। पार्टी ने साफ किया कि श्री गुरुवायुर मंदिर में पूजा-अर्चना करना माकपा के सिद्धांतों के खिलाफ है और सुरेंद्रन को पार्टी नेताओं की परंपरा का पालन करने की हिदायत दी गई।

ज्योतिषी से मुलाकात के लिए CPIM नेता जाँच के घेरे में

अगस्त 2024 में CPIM के राज्य सचिव एम वी गोविंदन विवाद में आ गए। उन पर आरोप लगा कि वे महावा पोडुवल नामक एक हिंदू ज्योतिषी से ज्योतिष पर चर्चा करने गए थे। इस वजह से उन्हें पार्टी की नाराज़गी झेलनी पड़ी।

बाद में ज्योतिषी महावा पोडुवल ने सफाई दी कि गोविंदन सिर्फ उनके परिवार से मिलने और चाय पीने आए थे। उन्होंने कहा कि मुलाकात के दौरान ज्योतिष पर कोई चर्चा नहीं हुई। पोडुवल ने स्पष्ट किया, “व्यक्तिगत संबंधों को ज्योतिष से जोड़ना गलत है।

अगर कोई कहे कि गोविंदन गुरु ने ज्योतिष जाँच करवाई, तो यह असहनीय है।” उन्होंने यह भी बताया कि CPIM नेता एम वी गोविंदन और केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन दोनों से उनके व्यक्तिगत रिश्ते हैं।

हर ‘हिंदू’ चीज पर आपत्ति

जुलाई 2022 में CPIM ने राष्ट्रीय प्रतीक के अनावरण कार्यक्रम के दौरान किए गए पूजन-विधि पर आपत्ति जताई थी। पार्टी का मानना था कि ऐसे सरकारी कार्यक्रम धर्मनिरपेक्ष होने चाहिए।

इसके अलावा, CPIM नेपाल की राजनीति में भी सक्रिय रही है और उसने वहाँ की दुनिया की एकमात्र हिंदू राजशाही को खत्म करने में बड़ी भूमिका निभाई थी।

CPIM का हिंदू विरोधी प्रचार

फरवरी 2025 में ऑपइंडिया ने खुलासा किया कि CPIM ने अपने 64 पन्नों के राजनीतिक मसौदे में हिंदू-विरोधी एजेंडा साफ तौर पर सामने रखा। मसौदे में नेपाल के हिंदू राष्ट्र और वहाँ की राजशाही समर्थक ताकतों के खिलाफ बयानबाजी की गई और दावा किया गया कि हिंदुत्व समर्थक और आरएसएस इन ताकतों का समर्थन कर रहे हैं।

पार्टी ने अयोध्या में राम मंदिर के उद्घाटन को हिंदुत्व अभियान की निरंतरता बताया और काशी-मथुरा विवादों पर भी आपत्ति जताई। उसने धार्मिक जुलूसों को अल्पसंख्यक इलाकों में हिंसा फैलाने का साधन करार दिया और हिंदू समुदाय को दोषी ठहराने की कोशिश की।

पार्टी ने ग्रूमिंग जिहाद विरोधी कानूनों और आदिवासियों के धर्मांतरण पर लगाम लगाने की कोशिशों का भी विरोध किया। नए संसद भवन के उद्घाटन को हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों से जोड़ने पर भी पार्टी ने आपत्ति जताई और सेंगोल रखने का मजाक उड़ाया।

CPIM ने हिंदू इतिहास को पौराणिक कथा कहकर खारिज करने की कोशिश की और मीडिया, फिल्म और ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म पर हिंदुओं की सकारात्मक छवि दिखाए जाने को भी नकारात्मक बताया। मसौदे में RSS पर इतिहास को सांप्रदायिक नजरिए से फिर से लिखने का आरोप लगाया गया।

सीपीआई(एम) के ड्राफ्ट रिज़ॉल्यूशन का पेज 54 पर लिखा था, “इस्लामी कट्टरवादी और उग्रवादी संगठन जैसे जमात-ए-इस्लामी और एसडीपीआई (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का राजनीतिक विंग) मुस्लिम जनता के बीच अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। वे अल्पसंख्यक समुदाय के बीच अलगाव और डर का फायदा उठाते हैं, जो हिंदुत्व ताकतों के लगातार हमलों का शिकार हैं… हालाँकि अल्पसंख्यक सांप्रदायिकता को सत्ता में मौजूद हिंदुत्व सांप्रदायिक ताकतों के बराबर नहीं माना जा सकता, यह समझना ज़रूरी है कि अल्पसंख्यक उग्रवादी गतिविधियाँ केवल बहुसंख्यक सांप्रदायिकता को और मजबूत करती हैं।”

सीपीआई(एम) की बातों को सरल तरीके से समझें, तो उसका कहना है कि इस्लामी कट्टरवादी संगठन अपनी ताकत बढ़ा रहे हैं, क्योंकि हिंदुत्व की ताकतें मुस्लिम समुदाय को परेशान कर रही हैं। उसका ये भी कहना है कि मुस्लिम कट्टरता को हिंदुत्व जितना बड़ा खतरा नहीं माना जा सकता। उसका साफ मानना है कि मुस्लिम कट्टरता दरअसल हिंदुत्व की वजह से बढ़ रही है। यह उनकी सोच को दिखाता है कि हिंदुत्व हर समस्या की जड़ है।

यह रिपोर्ट मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में लिखी गई है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

‘रूस-अमेरिका में 20% बढ़ा व्यापार…’: डोनाल्ड ट्रंप के सामने ही व्लादिमीर पुतिन ने दोहराई भारत की बात, दुनिया के आगे बेनकाब कर दिया USA का पाखंड

अमेरिका के अलास्का में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लंबी बैठक हुई। इस बैठक में रूस-यूक्रेन विवाद का तो समाधान नहीं निकला लेकिन पुतिन ने एक ऐसी बात कह दी जिससे अमेरिका का दोहरा चरित्र दुनिया के सामने बेनकाब हो गया।

ट्रंप दुनिया के तमाम देशों को धमकाते रहते हैं कि वे रूस से व्यापार बंद कर दें। उनका तर्क होता है कि इससे यूक्रेन युद्ध की फंडिंग हो रही है। अब पुतिन ने ट्रंप की मौजूदगी में ही कह दिया है कि उनका अमेरिका के साथ व्यापार ट्रंप सरकार में बढ़ा है।

पुतिन ने क्या कहा?

अलास्का में ट्रंप और पुतिन ने बैठक के बाद एक साझा न्यूज कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। अपने बयान में पुतिन ने कहा, “नया अमेरिकी प्रशासन आने के बाद हमारे आपसी व्यापार में बढ़ोतरी हुई है। अभी यह आँकड़ा प्रतीकात्मक ही है लेकिन फिर भी व्यापार 20% ज्यादा है। हमारे पास सहयोग के लिए कई महत्वपूर्ण क्षेत्र मौजूद हैं।”

पुतिन ने आगे कहा कि रूस और अमेरिका के बीच व्यापार और निवेश की साझेदारी में बहुत बड़ी संभावनाएँ हैं। व्यापार, ऊर्जा, डिजिटल और उच्च तकनीक और अंतरिक्ष विकास जैसे क्षेत्रों में दोनों देश एक-दूसरे को बहुत कुछ दे सकते हैं।

पुतिन ने कहा कि अमेरिका और रूस को पुराने पन्ने पलटते और फिर से सहयोग की राह पर लौटने की आवश्यकता है।

भारत ने अमेरिका को दिखाया था आईना

हालाँकि, भारत पहले ही रूस से व्यापार को लेकर अमेरिका को आईना दिखा चुका है। ट्रंप ने बीते 4 अगस्त को भारत के रूसी तेल खरीदने पर सवाल उठाए थे। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में लिखा था, “भारत ना केवल भारी मात्रा में रूसी तेल खरीद रहा है बल्कि उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊँचे दामों पर बेचकर भारी मुनाफा कमा रहा है।”

ट्रंप ने लिखा था, “भारत को इस बात की कोई परवाह नहीं है कि रूस के कारण यूक्रेन में कितने लोगों की जान जा रही है। इस वजह से मैं भारत से आने वाले सामानों पर अधिक टैरिफ लगाऊँगा।”

भारत ने ट्रंप की पोस्ट के कुछ समय बाद ही अमेरिका को आईना दिखा दिया था। भारत के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया था कि अमेरिका भी रूस से परमाणु उद्योग के लिए यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, ईवी उद्योग के लिएपैलेडियम के साथ उर्वरक और रसायन आयात करता है।

विदेश मंत्रालय ने कहा, “ऐसे में भारत को निशाना बनाना न केवल अनुचित है, बल्कि गलत भी है। भारत हर बड़ी अर्थव्यवस्था की तरह अपने राष्ट्रीय हित और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा।” भारत ने यूरोप और रूस के बीच हो रहे व्यापार की भी पोल खोल दी थी।

ट्रंप ने कहा था- रूस से खरीद की जानकारी नहीं

भारत के इस बयान के बाद ट्रंप से जब यह पूछा गया कि क्या अमेरिका, रूस से रसायन और उर्वरक आयात करता है तो उन्होंने इसकी जानकारी होने से ही इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा था, “मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता। हमें इसकी जाँच करनी होगी।”

इसके कुछ समय बाद ही आईना दिखाए जाने के बाद भन्नाए ट्रंप ने भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी थी। इससे पहले 30 जुलाई को वह 25% टैरिफ लगाने का ऐलान कर चुके थे। यानी भारत पर कुल टैरिफ 50% हो गया था। हालाँकि, ट्रंप ने 25% अतिरिक्त टैरिफ पर बातचीत के लिए 21 दिनों का समय दिया था।

अमेरिकी सरकार के एक कार्यकारी आदेश में इस अतिरिक्त टैरिफ की वजह को लेकर बताया गया कि भारत, रूस से सीधे या परोक्ष रूप से तेल खरीद रहा है। अब पुतिन ने जो अमेरिकी नकाब दुनिया के सामने उतारा है उसने ट्रंप की सारी हकीकत उजागर कर दी है। उम्मीद है अब जब ट्रंप से व्यापार बढ़ने को लेकर सवाल पूछा जाएगा तो वो यह नहीं कह पाएँगे कि ‘उन्हें जानकारी नहीं है’।

पाकिस्तान में सेक्युलरों को मिला दर्दनाक अंजाम, बँटवारे के बाद प्रोग्रेसिव लोग मारे गए या वापस भारत भाग आए: आज भी खतरे में सेक्युलर विचार

जब भारत और पाकिस्तान का बँटवारा हो रहा था, तब भी कई सेक्युलरों को ठीक वैसे ही डर लग रहा था, जैसे आज कुछ लोगों को भारत में हिंदुओं से डर लगता है। उन्हें लगता था, कि वे विभाजन के बाद पाकिस्तान चले जाएँगे, तो वहाँ उनकी तथाकथित सेकुलर और प्रोग्रेसिव भावनाओं का सम्मान किया जाएगा।

लेकिन 14 अगस्त 1947 से लेकर आज की तारीख तक पाकिस्तान की जमीन में किसी भी सेकुलर और प्रोग्रेसिव इंसान या विचार को जिंदा नहीं रहने दिया गया। जिस हिंदू ने पाकिस्तान को चुना, उसे उसके घर के सामने काफिर कहकर मार दिया गया। और जिस मुसलमान ने प्रोग्रेसिव होने की कोशिश की, उसे या तो मुल्क छोड़ने पर मजबूर कर दिया गया – या फिर अवसाद में धकेल कर मरने के लिए छोड़ दिया गया। मुल्क छोड़ने के बाद ये सारे मोमिन हजरात हिंदुस्तान में आए और उनकी ही पुश्तें आज तक इकबाल की नज़्म के वो शेर अपनी इस्लामिक करतूतों के साथ गा रही हैं कि…

ऐ आबरुए गंगा – अब तक है याद हमको – उतरा तेरे किनारे – जब काफिला हमारा

पाकिस्तान के पहले कानून मंत्री से लेकर पाकिस्तान का पहला कौमी तराना लिखने वाले तक की कहानी हम आपको बताएँगे – कि कैसे उन्हें जलालत झेलनी पड़ी, कैसे मॉब लिंचिंग की गई, और कैसे उन्हें कथित अच्छे पाकिस्तान से भागकर – बताए गए बुरे हिंदुस्तान में आकर – जान बचानी पड़ी?

इनमें सबसे पहला नाम अर्थशास्त्री प्रोफेसर बृज नारायण का है। इन्होंने खुलकर जिन्ना की ‘टू नेशन थ्योरी’ का समर्थन किया। पाकिस्तान को भारत से बेहतर आर्थिक मॉडल और अधिक बेहतर भविष्य की संभावनाओं वाला देश करार दिया। और इसका नतीजा ये था, कि अपनी आजादी के ही दिन, 14 अगस्त 1947 को इस्लामी भीड़ ने काफिर कहकर लाहौर में बृज नारायण के घर के सामने ही उन्हें मार डाला।

उनके ही एक और दोस्त थे जोगेंद्र नाथ मंडल। इनका नाम तो आपने सुना ही होगा। जिन्ना के साथ मिलकर इन्होंने भी एक थ्योरी दी। कहा, कि भारत में दलित और मुसलमान दोनों ही अल्पसंख्यक हैं। और पाकिस्तान बनेगा तो मुसलमान बहुसंख्यक होने के बावजूद भी दलितों के अधिकारों की रक्षा करेंगे। आजकल असदुद्दीन ओवैसी जो ‘जय भीम’ और ‘जय मीम’ की बात करते हैं ना? ये कुछ वैसा ही था।

मोहम्मद अली जिन्ना ने जोगेंद्र नाथ मंडल को पाकिस्तान का पहला कानून मंत्री बनाया। और जिन्ना की मौत के साथ इनका मंत्रालय भी गया और कानून भी। 1950 में मण्डल ने जब वहाँ की इस्लामी सत्ता के द्वारा हिंदुओं को दी जा रही यातनाओं को देखा, तो डरकर ऐसे भागे कि सीधे भारत आ लौटे।

इस्लाम के नाम पर बन रहे मुल्क के तराने में उस समय की प्रोग्रेसिव आवाजों ने जमकर अपना कौमी कोरस दिया था। शायर साहिर लुधियानवी, मौसिकी के उस्ताद बड़े गुलाम अली खान और उर्दू अदब के बेअदब सरताज सआदत हसन मंटो ये सब पहले तो कायद-ए-आज़म के पाकिस्तान में ही रुक गए। लेकिन वहाँ रहते हुए उन्हें ये समझ आया कि उन्होंने किस स्वर्ग को छोड़कर कौन सा नर्क चुन लिया है। बड़े गुलाम अली खान ने तो सीधे कहा कि वहाँ सिर्फ मुसलमान रह सकते हैं, और भारत आ गए।

साहिर लुधियानवी को सवेरा नामक उर्दू पत्रिका में कम्युनिस्ट विचारधारा को बढ़ावा देने वाले और सरकार के खिलाफ अवाम को उकसाते उत्तेजक लेख लिखने के लिए गिरफ्तारी और उसके बाद मौत का डर सताने लगा। लाहौर की रौशन-ए-दीन सड़कों पर सरे बाजार घूमते हुए उनको लगता था कि कोई आएगा और उनका सर तन से जुदा कर देगा। उन्हें अचानक से हिंदोस्तान ही सारे जहाँ से अच्छा लगने लगा। उन्हें रातों रात भेस बदलकर अपनी पहचान पर बुरखा डालकर भारत आना पड़ा। और भारत आकर उन्हें प्रकाश पंडित नामक एक हिंदू के ही संरक्षण में पूरा जीवन गुजारना पड़ा।

सआदत हसन मंटो भारत से पाकिस्तान गए। उनकी ठंडा गोश्त जैसी रचनाओं के लिए उनपर मुकदमे हुए। उन्हें इस्लामिक शासन व्यवस्था द्वारा प्रताड़ना झेलनी पड़ी। उनके इनकम सोर्स को खत्म किया गया और वो अवसाद में चले गए। मजहब की आग ने ठंडे गोश्त को सिर्फ भूना ही नहीं, बल्कि लेखक की जिजीविषा तक को जला दिया। और पाकिस्तान बनने के कुछ वर्षों के भीतर ही शराब पी-पी कर लीवर सड़ने से वो अल्लाह को प्यारे हो गए।

सज्जाद जहीर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया के संस्थापक सदस्य थे। उन्होंने भी मजहब के नाम पर बने पाकिस्तान को चुना। वहाँ जाकर कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ पाकिस्तान बनाई। लेकिन उन्हें रावलपिंडी षडयंत्र मामले में गिरफ्तार किए गया, जेल में यातनाएँ दी गईं और 1955 में जेल से छूटते ही वे ऐसे भागे ऐसे भागे कि सीधे भारत आ गए।

इनके अलावा जावेद अख्तर के ससुर कैफ़ी आजमी, कुर्रतुल ऐन हैदर इन जैसे दर्जनों नाम थे, जिन्हें बँटवारे के वक्त पाकिस्तान अच्छा लगता था। और पाकिस्तान बनते ही इनको वहां से भागने के लिए मजबूर किया गया।

ऐसे भी कई नाम हैं जो पार्टीशन के वक़्त मुस्लिम लीग में थे, जिन्होंने भरभर के मुस्लिम लीग को वोट दिलवाए। लेकिन बँटवारे के बाद भारत में ही रुक गए – अधूरे मकसद को पूरा करने के लिए। और अपने महान सामाजिक कार्य को बौद्धिक जामा पहनाने के लिए रातोंरात कम्युनिस्ट विचारधारा के कार्ड होल्डर सदस्य भी बन गए।

आज भी इस सरज़मीन-ए-हिंद में ऐसे किरदार मौजूद हैं जिनकी नज़रें सरहद पार के उस मुल्क में कोई मसीहा तलाशती हैं। किसी के दिल में औलाद के मुस्तक़बिल की फ़िक्र जलती है, तो किसी को लगता है कि हिंदुवादी हुकूमत के साए में भारत, हिंदुओं का पाकिस्तान या तालिबान बन चुका है।

मगर ऐ अहल-ए-सकूनत-ए-सैकुलर! ज़रा उन पुराने दौर के नामचीन सैकुलर हुलियों को पढ़ लो, उनके चेहरे अपनी आँखों में बसा लो और ता-क़यामत याद रखो कि पाकिस्तान में उनका क्या अंजाम हुआ।

ये याद रखो कि पाकिस्तान नाम की सोच कोई फ़िक्र नहीं, कोई रूहानी तसव्वुर नहीं। वो तो बस एक आसमानी किताब के पन्नों की आड़ में बहकाकर, बरगलाकर जमा की गई मज़हबी जुनूनियत का वहशी हुजूम है। और याद रखो कि जिसने भी उस हुजूम से इश्क़ किया, अंजाम में वही हुजूम उसे नोच-नोच कर खा जाएगी।