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जिस बाटला हाउस एनकाउंटर पर ‘रोईं’ सोनिया गाँधी, अमित शाह ने उसी से कॉन्ग्रेस को घेरा:पूछा-वीडियो सदन में लगा दूं, ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल उठा रही थी ग्रैंड ओल्ड पार्टी

लोकसभा में पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर की चर्चा में मंगलवार (29 जुलाई 2025) को अमित शाह ने बाटला हाउस एनकाउंटर का जिक्र किया है। उन्होंने कहा कि सोनिया गाँधी बाटला हाउस एनकाउंटर पर रो रही थीं, लेकिन शहीद पुलिस इंस्पेक्टर मोहन शर्मा की शहादत पर चुप रहीं।

लोकसभा में वाकया सुनाते हुए अमित शाह ने कहा, “मैं सलमान खुर्शीद को याद करना चाहूँगा। एक दिन, मैं सुबह ब्रेकफास्ट कर रहा था, तब मैंने टीवी पर सलमान खुर्शीद को सोनिया गाँधी के घर से बाहर निकलते देखा। वो रो रहे थे। मैंने सोचा कुछ बड़ा हो गया है। लेकिन खुर्शीद ने कहा कि सोनिया गाँधी बाटला हाउस एनकाउंटर पर रो रही हैं।”

अमित शाह ने आगे कहा कि इसका वीडियो उनके मोबाइल में सेव है और वे इसे सुबह से रिपीट पर देख रहे हैं। अगर स्पीकर चाहें तो इस वीडियो को सदन में लगे टीवी पर दिखाने को भी तैयार हैं। अमित शाह की सोनिया गाँधी पर टिप्पणी करते ही विपक्ष ने सदन में हंगामा शुरू कर दिया।

जानिए सलमान खुर्शीद ने क्या कहा था ?

सलमान खुर्शीद के जिस बयान का जिक्र अमित शाह ने लोकसभा में किया, वह बयान सलमान खुर्शीद ने साल 2012 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के तहत आजमगढ़ में आयोजित एक जनसभा के दौरान दिया था। इसका वीडियो क्लिप एक बार फिर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में सलमान खुर्शीद बताते हैं कि बाटला हाउस एनकाउंटर की तस्वीरें देख सोनिया गाँधी रोने लग गईं।

असल में सलमान खुर्शीद ने कहा था, “हमने सोनिया गाँधी से बात की, उन्हें बाटला हाउस एनकाउंटर की तस्वीर दिखाई तो उनके आँसू फूट पड़े और उन्होंने हाथ जोड़कर कहा कि ये तस्वीर मुझे मत दिखाओ। फौरन जाओ वजीर-ए-आजम (प्रधानमंत्री) से बात करो।”

हालाँकि, बाद में कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने ऐसी किसी भी मुलाक़ात से इनकार कर दिया। सोनिया गाँधी से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में शामिल कॉन्ग्रेस नेता परवेज़ हाशमी ने भी सोनिया गाँधी को रोते हुए देखने से इनकार किया। उन्होंने तब स्पष्ट किया था, “वह चिंतित थीं।” इसके 7 साल बाद खुर्शीद ने भी कहा कि वह कभी रोई ही नहीं।

कॉन्ग्रेस नेता कपिल सिब्बल के सामने हुई थी पुलिस की पेशी

बाटला हाउस एनकाउंटर के बाद पुलिसकर्मियों को जहाँ-तहाँ इस बारे में अपनी बेगुनाही का सबूत देना पड़ा था। यहाँ तक कि उनको साल 2008 में तत्कालीन UPA सरकार में केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने भी लंबी पूछताछ के लिए तलब कर लिया था। इसकी जानकारी दिल्ली पुलिस के पूर्व IPS अधिकारी करनाल सिंह ने अपनी एक किताब में दी है।

करनाल सिंह दिल्ली पुलिस के ज्वॉइंट पुलिस कमिश्नर थे और वो बाटला हाउस एनकाउंटर मामले में भी जुड़े थे। करनाल सिंह ने अपनी किताब ‘बाटला हाउस: एन एनकाउंटर दैट शुक द नेशन’ में बताया था कि एक दिन दिल्ली के तत्कालीन लेफ्टिनेन्ट गवर्नर तेजेंद्र खन्ना का फोन उन्हें आया था।

करनाल सिंह ने बताया है कि तेजेंद्र खन्ना ने उन्हें केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल के सामने बाटला हाउस एनकाउंट की जानकारी रखने के लिए बुलाया था। करनाल सिंह ने किताब में लिखा है कि तेजेंद्र खन्ना ने सिंह को ‘तैयार होकर आने’ की सलाह दी थी।

करनाल सिंह लिखते हैं कि सिब्बल ने उन्हें मीडिया सहित कई विभिन्न मुद्दों के बारे में बताने के लिए कहा और उन्होंने हर मुद्दे पर जवाब दिया और पुलिस के पास उपलब्ध सभी सूचनाओं को सिब्बल से शेयर किया।

करनाल सिंह के अनुसार, दिल्ली के तत्कालीन उपराज्यपाल के घर पर कैबिनेट मंत्री कपिल सिब्बल को एनकाउंटर के सारे तथ्य दिखाए गए थे। इन तथ्यों से तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह को भी अवगत कराया गया था। बाद में एक मुलाकात में मनमोहन सिंह ने खुद उन्हें बेहतरीन जाँच के लिए बधाई भी दी थी।

आखिर बाटला हाउस एनकाउंटर में क्या हुआ था?

13 सितंबर, 2008 को दिल्ली में पाँच बम धमाके हुए। एक धमाका गफ्फार मार्केट में शाम 6 बजकर 7 मिनट पर हुआ। यह धमाका कार के पास विस्फोट रखकर किया गया था। कुछ देर बाद कनॉट प्लेस में दो बम धमाके हुए। प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि दो व्यक्तियों ने कचरे के डब्बे में विस्फोटक रखे थे। इसके कुछ मिनट बाद ही ग्रेटर कैलाश-1 के एम-ब्लॉक मार्केट में दो और ब्लास्ट हुए। बम ब्लास्ट में 26 लोगों की मौत हुई थी और 133 लोग घायल हुए थे।

इन बम धमाकों के 5 दिन बाद 19 सितंबर 2008 एनकाउंटर स्पेशलिस्ट मोहन चंद शर्मा की लीडरशिप में दिल्ली पुलिस की टीम बाटला हाउस पहुँची। पुलिस को बाटला हाउस में बम धमाके से जुड़े एक आतंकी के छिपे होने की खुफिया जानकारी मिली थी। पुलिस उसे खोजते हुए बिल्डिंग की दूसरी मंजिल के फ्लैट में घुसी।

तभी दोनों तरफ से गोलीबारी शुरू हो गई। इस गोलीबारी में आतंकी आतिफ अमीन और मोहम्मद साजिद मारे गए। वहीं, मोहम्मद सैफ को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि शहजाद और जुनैद भागने में कामयाब हो गए। माना जा रहा है कि भागने वालों में एक आतंकी ISIS का रिक्रूटर बन गया।

एनकाउंटर में पुलिस इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा घायल हुए, इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। साथ ही हेड कॉन्सटेबल बलविंदर घायल हुए थे। इस पुलिस और आतंकियों के बीच मुठभेड़ को बाटला हाउस एनकाउंटर का नाम दिया गया।

सत्ताधारी कॉन्ग्रेस ने बाटला हाउस एनकाउंटर को हमेशा फर्जी बताया है। कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने भी एनकाउंटर को फर्जी करार दिया था। उन्होंने मई 2016 टाइम्स नाउ को दिए एक इंटरव्यू में कहा था, मैंने हमेशा कहा है कि यह एनकाउंटर फर्जी है और आज भी इस पर अडिग हूँ।

यह जाँच एजेंसी की जिम्मेदारी है कि इसकी पुष्टि करे हमने न्यायिक जाँच की माँग की थी। अगर इसे मान लिया जाता तो सही तथ्य सामने आ जाते। बाद में यह पूरा मामला खुला और सामने आया कि बाटला हाउस एनकाउंटर फर्जी नहीं था बल्कि यहाँ देश पर हमले की फैक्ट्री चल रही थी।

कॉन्ग्रेस ने तब इस एनकाउंटर के तथ्य जानते हुए भी फर्जी इसलिए बताया क्योंकि उसे मुस्लिम वोटों की चिंता थी। बाटला हॉउस एनकाउंटर मुस्लिम इलाके में हुआ था, यहाँ मारे जाने वाले आतंकी मुस्लिम थे। कॉन्ग्रेस को लगता था कि अगर वह बाटला हाउस पर मुस्लिमों का पक्ष लेगी तो उसे लगातार मुस्लिम वोट मिलते रहेंगे।

हैरानी वाली बात यह है कि स्पष्ट सबूत सामने होते हुए भी कॉन्ग्रेस ने तब बाटला हाउस एनकाउंटर को फर्जी बताया लेकिन हिन्दू आतंकवाद के नैरेटिव को लगातार हवा देती रही। 26/11 हमले तक को हिन्दुओं पर मढ़ने का प्रयास हुआ। अब अमित शाह ने फिर उस साजिश की याद दिलाकर कॉन्ग्रेस को बैकफुट पर धकेल दिया है।

वाराणसी में काँवड़ियों को इस्लामी कट्टरपंथियों ने घेरा, जबरन बुलवाया अल्लाह-हू-अकबर… इस्लाम कबूलने को भी कहा: 6 गिरफ्तार, पुलिस ने बताया दुकानदार-ग्राहक का झगड़ा

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मुस्लिम भीड़ ने काँवड़ियों को जान से मारने की कोशिश की। काँवड़िए हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारे लगा रहे थे, यह इस्लामी कट्टरपंथियों को नागवारा हुआ। काँवड़ियों को अल्लाह हू अकबर बोलने और इस्लाम कबूलने का दबाव डालने लगे। ऐसा न करने पर धारदार हथियार से सिर पर हमला किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 28 जुलाई 2025 की शाम 5 बजे राजातालाब थाना इलाके में मुख्य बाजार से शुभम यादव और पलटू राम यादव काँवड़ लेकर जा रहे थे। यहाँ 10-12 मुस्लिम युवकों ने उन्हें घेरा और जबरन लड़की को छेड़ने का आरोप लगा दिया। फिर हर-हर महादेव और बोल बम जयकारे बोलने से रोकने लगे।

एक मुस्लिम युवक बोला, “ये सब तुम्हें नहीं बोलना चाहिए। तुम लोग अल्लाह-हू-अकबर के नारे लगाओ।” इसे नजरअंदाज कर काँवड़िए शुभम और पलटू आगे बढ़ गए। इतने में पीछे से मुस्लिम युवक हिंदू देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी करने लगे। काँवड़ियों ने इसका विरोध किया, तो मुस्लिम युवकों ने मिलकर हमला कर दिया।

काशी के बडैनीकला निवासी पीड़ित काँवड़िए पलटू यादव ने कहा, “हम अपने दोस्त शुभम के साथ अदलपुरा से जल लेकर जंसा शिव मंदिर जा रहे थे। हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारे लगा रहे थे। राजातालाब के रेलवे फाटक के पास 10-12 युवकों ने रोककर बोल बम और हर-हर महादेव के जयकारे लगाने से रोका।”

पीड़ित ने बताया कि मुस्लिम युवकों ने हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम कबूलने के लिए भी बोला और अल्लाह-हू-अकबर बोलने पर मजबूर किया। उन्होंने बताया कि विरोध करने पर धारदार हथियार के सिर पर हमला कर दिया। इससे पलटू का सिर फट गया। पलटू के दोस्त शुभम जान बचाते हुए भागा तो उसे भी सड़क पर दौड़ा-दौड़ाकर पीटा।

सड़क पर मौजूद बाकी काँवड़ियों ने शुभम और पलटू को बचाया। दोनों घायलों को ऑटो से अस्पताल ले जाया गया। इस घटना के बाद गुस्साए काँवड़ियों और हिंदू संगठन ने सड़क जाम कर हंगामा भी किया। इसकी सूचना पर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुँची, लेकिन काँवड़िए कार्रवाई की माँग कर धरने पर डटे रहे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, देर रात 12 बजे हंगामे के बीच पलटू यादव की तहरीर पर 12 आरोपितों के खिलाफ मारपीट, लूट, धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने और लालच देने का केस दर्ज किया गया।

अपर पुलिस आयुक्त ने शिवहरी मीणा ने बताया कि काँवड़ यात्री और स्थानीय दुकानदार के बीच विवाद हुआ था। काँवड़ियों की तहरीर पर मुनव्वर समेत 6 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। शांति व्यवस्था कायम है। वहीं, बाजार के हालत को देखते हुए बैरिकेडिंग करके जंसा और राजातालाब के रास्ते को बंद कर दिया है।

जिस भारतीय तेल कम्पनी में रूस की हिस्सेदारी, उसके अकाउंट माइक्रोसॉफ्ट ने बिन बताए किए ब्लॉक: एक्सेल का डाटा भी रोका, नायरा एनर्जी ने हाई कोर्ट से माँगा न्याय

मार्केटिंग कंपनी नायरा एनर्जी ने माइक्रोसॉफ्ट के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। यह रूस की भागीदारी वाली भारत की एक प्रमुख तेल रिफाइनिंग और मार्केटिंग कंपनी है। कंपनी का कहना है कि माइक्रोसॉफ्ट ने बिना किसी पूर्व सूचना के उसके ईमेल एक्सेस जैसी जरूरी डिजिटल सेवाएँ अचानक बंद कर दी।

नायरा एनर्जी का कहना है कि माइक्रोसॉफ्ट के इस कदम से पूरे भारत भर के संचालन पर बुरा असर पड़ा है और कंपनी की रोजमर्रा की गतिविधियाँ बाधित हो गई हैं।

प्रतिबंधों का परिणाम और परिचालन पर प्रभाव

हाल ही में यूरोपीय संघ (EU) ने नायरा एनर्जी पर प्रतिबंध लगाए हैं क्योंकि उसका संबंध रूसी तेल कंपनी रोजनेफ्ट (Rosneft) से है। इस फैसले के बाद कई असर दिखाई दिए। हालाँकि माइक्रोसॉफ्ट का मुख्यालय अमेरिका में है और नायरा का तर्क है कि माइक्रोसॉप्ट कंपनी अमेरिकी या भारतीय कानूनों के तहत किसी भी तरह से यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों को लागू नहीं कर सकती।

EU के प्रतिबंधों के बाद कम से कम दो जहाजों ने नायरा की वडिनार रिफाइनरी से रिफाइंड प्रोडक्ट्स की लोडिंग टाल दी। साथ ही एक टैंकर जो रूसी Urals क्रूड लेकर आ रहा था, उसे रास्ते में ही मोड़ दिया गया। इस पूरे संकट के बीच नायरा के CEO ने इस्तीफा दे दिया है और उनकी जगह अब सर्गेई डेनिसोव (Sergey Denisov) को नया CEO नियुक्त किया गया है।

नायरा ने की कोर्ट से तत्काल राहत की माँग

याचिका में अंतरिम आदेश और सेवाओं की तुरंत बहाली की माँग की गई है। नायरा का कहना है कि माइक्रोसॉफ्ट ने यह कदम ‘एकतरफा, बिना किसी पूर्व सूचना, सलाह या बातचीत के’ उठाया और इसे ‘कानूनी अनुपालन (compliance)’ के नाम पर किया गया।

खास बात यह है कि नायरा ने जिन सेवाओं का उपयोग किया, वे ‘पूरी तरह से भुगतान की गई लाइसेंस (fully paid-up licences)’ के तहत ली गई थीं। यही वजह है कि यह कार्रवाई और भी अनुचित लगती है।

नायरा का कहना है कि माइक्रोसॉफ्ट की इस कार्रवाई की वजह से उन्हें अपने ही डाटा और खुद के बनाए टूल्स और प्रोडक्ट्स तक पहुँच नहीं मिल पा रही है। मंगलवार (29 जुलाई 2025) को लगाई गई इस रोक से उनके रोजमर्रा के कामकाज पर सीधा असर पड़ा है।

भारत की ईंधन अर्थव्यवस्था में रणनीतिक महत्व

अपनी याचिका में कंपनी ने भारत के ऊर्जा बुनियादी ढाँचे में अपने महत्वपूर्ण योगदान को रेखांकित किया है। कंपनी देश की कुल रिफाइनिंग क्षमता के लगभग 8% हिस्से के लिए जिम्मेदार है और 7% पेट्रोल पंप का संचालन करती है। इसके अलावा कंपनी भारत की 8% पॉलीप्रोपाइलीन उत्पादन क्षमता भी विकसित कर रही है।

कंपनी ने मौजूदा चुनौतियों के बावजूद यह भरोसा दिलाया है कि वह पूरे देश में ईंधन की आपूर्ति बिना किसी रुकावट के जारी रखेगी और भारतीय नियमों का पूरी तरह से पालन करते हुए काम करती रहेगी।

इस महीने की शुरुआत में यूरोपीय संघ ने रूस के खिलाफ प्रतिबंधों के 18वें पैकेज के तहत नायरा की वाडिनार रिफाइनरी पर प्रतिबंध लगा दिए। इन प्रतिबंधों में संपत्तियों को फ्रीज करना, शिपिंग और बीमा पर रोक, और रूसी कच्चे तेल की कीमत की सीमा में कटौती शामिल हैं। हालाँकि, भारत सरकार ने एकतरफा अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को मानने से स्पष्ट इनकार किया है।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए नायरा एनर्जी ने यूरोपीय संघ के इस कदम को ‘अनुचित और गैरकानूनी’ बताया। कंपनी ने कहा, “नायरा एनर्जी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक दबाव और यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है, जिनका कोई कानूनी आधार भी नहीं है। यह एकतरफा कदम बिल्कुल निराधार आरोपों पर आधारित है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून और भारत की संप्रभुता का उल्लंघन है।

नायरा ने कहा, “ध्यान देने योग्य बात यह है कि कई यूरोपीय देश आज भी रूसी ऊर्जा का आयात कर रहे हैं, लेकिन एक ऊँचे नैतिक स्तर का दिखावा करते हुए एक भारतीय रिफाइनरी पर सवाल उठा रहे हैं, जो कि रूसी कच्चे तेल को परिशोधित करके भारत की 1.4 अरब आबादी और व्यवसायों के लिए उपयोग करती है।”

इस मामले की सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट में जल्दी ही होने की उम्मीद है। वहीं माइक्रोसॉफ्ट ने इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।

पश्चिमी प्रतिबंधों की रणनीति में भू-राजनीतिक हथियार के रूप में बिग टेक

2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद कई बड़ी पश्चिमी कंपनियों ने रूस में अपने कामकाज को निलंबित कर दिया था। इन कंपनियों ने इसका कारण अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का पालन करना और बदलती राजनीतिक परिस्थितियों को बताया।

वीजा और मास्टरकार्ड जैसी बड़ी वित्तीय कंपनियों ने रूसी बैंकों से जुड़ी सेवाएँ बंद कर दीं, जिससे रूस के बाहर लेन-देन (cross-border payments) पर बड़ा असर पड़ा।

गूगल जैसी टेक कंपनियों ने भी कई सेवाएँ, विज्ञापन और कमाई के रास्ते (monetisation channels) रूस में सीमित कर दिए। मैकडॉनल्ड्स जैसी कंपनियों ने भी रूस से पूरी तरह कारोबार समेट लिया, लेकिन बाद में उनकी जगह स्थानीय ब्रांडों ने ले ली।

ये सभी कदम उस समय उठाए गए जब कंपनियाँ युद्ध और पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को देखते हुए कानूनी, नैतिक और अपनी छवि से जुड़ी जोखिमों का फिर से मूल्यांकन कर रही थीं। इस तरह रूस से कंपनियों का एक बड़ा पलायन देखने को मिला।

ऑपरेशन सिंदूर गेमचेंजर, भारतीय सेना के सामने फुस्स हुए पाकिस्तान के इलेक्ट्रॉनिक हथियार भी: राज्यसभा में बोले राजनाथ सिंह, विपक्ष पर कसा ‘लाइटहाउस’ वाला तंज

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया है कि ऑपरेशन सिंदूर में 100 से अधिक पाकिस्तानी आतंकी मारे गए हैं। उन्होंने यह भी बताया है कि ऑपरेशन के दौरान कोई भी नुकसान भारतीय सैन्य ठिकानों को नहीं पहुँचा है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर राज्यसभा में मंगलवार (29 जुलाई, 2025) को अपना वक्तव्य दिया। उन्होंने बताया कि भारत ने 7-8 मई की रात ऑपरेशन सिंदूर किया था, लेकिन इसका उद्देश्य आतंकी ठिकानों को नष्ट करना ही था। उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन में लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मुहम्मद के आतंकी मारे गए।

उन्होंने बताया कि भारत के आत्मसुरक्षा में कार्रवाई करने के बावजूद 10 मई की रात पाकिस्तान ने कई मिसाइलों और ड्रोन से भारत पर हमला करने का प्रयास किया और साथ ही इलेक्ट्रॉनिक हथियार भी उपयोग किए। रक्षा मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान के निशाने पर भारतीय वायु सेना और सेना के अड्डे थे।

रक्षा मंत्री ने बताया कि इस हमले को भारतीय सेनाओं ने नाकाम कर दिया। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया है कि पाकिस्तान के हमले में कोई भारतीय एसेट को नुकसान नहीं हुआ है। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत ने पकिस्तान के बड़े एयरबेस तबाह किए, उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन को पूरी दुनिया ने देखा।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 10 मई, 2025 को जब भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान में कहर मचाया तो वह घुटनों पर आ गया और सीजफायर की पेशकश की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया कि यह भी स्पष्ट किया गया था कि किसी भी आतंकी घटना पर ऑपरेशन वापस चालू हो जाएगा।

रक्षा मंत्री ने बताया कि 800 वर्षों की गुलामी के चलते भारतीय जनता को आक्रामक ना मानने की भ्रान्ति पैदा हो गई थी। उन्होंने कहा कि भारतीयों को कमतर दिखाने का प्रयास हुआ। राजनाथ सिंह ने यह भी बताया कि आजादी के आंदोलन में जब क्रांतिकारियों ने साहस दिखाया तो वह रीडिस्कवरी ऑफ़ इंडिया थी।

उन्होंने कहा कि हिन्दू देवी देवताओं श्रीराम और शिव कृष्ण ने शस्त्र धारण किया है, उन्होंने हमें कायरता का पाठ नहीं पढ़ाया है। रक्षा मंत्री ने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर भारतीय पहचान को वापस जानने की प्रक्रिया है। रक्षा मंत्री ने कहा कि पहले के समय में आतंकी भारत में घुस कर लोगों का कत्लेआम करते थे और सरकारें देखती थी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि अब यह नहीं चलेगा। उन्होंने पाकिस्तान और आतंकियों ने सोचा था भारत में हमले करना एक लो कॉस्ट हाई रिटर्न काम है लेकिन नरेन्द्र मोदी सरकार ने इस इक्वेशन को बदल दिया है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर गेम चेंजर साबित हुआ है।

रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि अभी ऑपरेशन सिंदूर पर सिर्फ स्टॉप है, फुल स्टॉप नहीं। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अगर नहीं किया जाता तो क्या विकल्प था, क्या भारत को डोजियर सौंपना था। रक्षा मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान की न्यूक्लियर धमकी के चलते बड़ी संख्या में नागरिकों को खोया गया है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विपक्ष पर प्रहार भी किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष की नीतिगत गड़बड़ी नुकसान पहुंचा रही है। उन्होंने इसके लिए ‘बाप मरे अँधेरे में, बेटा पॉवर हाउस’ वाली कहावत सुनाई। उन्होंने कहा कि जल्द ही वह दिन आएगा जब POK के लोग भारतीय प्रशासन व्यवस्था का हिस्सा होंगे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कॉन्ग्रेस पर हमला करने के लिए एक गजल भी सुनाई।

राज्यसभा में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया कि दुश्मन का इस ऑपरेशन में बड़ा नुकसान हुआ है और विपक्ष को उससे जुड़े प्रश्न पूछने चाहिए। उन्होंने कहा कि हमने 1962 के बाद जो प्रश्न पूछे थे उनमें था कि देश की जमीन क्यों गई, यह नहीं कि मशीन का क्या नुकसान हुआ।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पाकिस्तान पर संयुक्त राष्ट्र की हीलाहवाली पर भी प्रश्न उठाए। उन्होंने पाकिस्तान के ट्रैक रिकॉर्ड पर भी प्रश्न उठाए। उन्होए UPA सरकार के पहले एक्शन ना लेने को भी इस दौरान घेरा। इससे पहले लोकसभा में भी उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर पर बयान दिया था।

ST महिला से रेप में गिरफ्तार आफताब अंसारी पुलिस की गिरफ्त से भागा, बाद में नदी में मिली लाश: झारखंड पुलिस ने शिकायत करने वाले हिंदू कार्यकर्ताओं पर ही ठोक दिया केस

झारखंड के रामगढ़ में आफताब अंसारी ने एक विवाहित जनजातीय महिला का रेप किया था। इसके बाद उस पर धर्मांतरण के लिए दबाव बना रहा था। उसकी शिकायत होने के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था। हालाँकि वह हिरासत से भाग निकला था। शनिवार (26 जुलाई 2025) को नदी में उसकी लाश मिली है। पुलिस ने उसकी शिकायत करने वाले हिंदू कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया है।

हिंदू जनजातीय महिला को आफताब ने नौकरी का लालच देकर अर्शी गारमेंट्स नाम की एक दुकान पर बुलाया था। बाद में दुकान के पीछे लेजाकर महिला के साथ रेप किया। मामले की सूचना मिलने पर बुधवार (23 जुलाई 2025) को ‘हिंदू टाइगर फोर्स’ नामक एक संगठन से जुड़े हिंदू कार्यकर्ताओं ने आफताब अंसारी की पहले पिटाई की। इसके बाद रेप जैसे जघन्य अपराध के लिए उसे पुलिस के हवाले कर दिया।

हालाँकि, आफताब पुलिस हिरासत से भाग निकला और अधिकारियों से बचने के लिए दामोदर नदी में कूद गया। इसका सीसीटीवी फुटेज भी जारी हुआ है। इसमें अंसारी को जेल से भागते हुए देखा जा सकता है।

इसके बाद शनिवार ( 26 जुलाई 2025) को आफताब अंसारी का शव उसी नदी में मिला। हालाँकि उसकी मौत से इलाके में काफी तनाव पैदा हो गया है। उसके परिवार ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने हिरासत में लेकर उसकी हत्या कर दी। स्थानीय मुस्लिम समुदाय भी परिवार के समर्थन में सामने आया है और आरोप लगाया है कि आफताब की हत्या पुलिस ने की है।

आफताब अंसारी की मौत के बाद, स्थानीय पुलिस ने हिंदू संगठन ‘हिंदू टाइगर फोर्स’ के 12 सदस्यों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। वहीं एक सदस्य राजेश सिन्हा को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि उन्हें सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले एक वीडियो को ऑनलाइन पोस्ट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

इस बीच हजारीबाग से भाजपा सांसद मनीष जायसवाल ने उनकी गिरफ्तारी की निंदा करते हुए कहा है कि लिखित शिकायत दर्ज कराने के बावजूद पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई इसलिए पीड़ित महिला ने मदद के लिए सिन्हा से संपर्क किया था।

इसके अलावा रविवार (27 जुलाई 2025) को बड़कागाँव के भाजपा विधायक रोशन लाल चौधरी के नेतृत्व में हिंदू संगठनों ने न्याय की इस चूक के खिलाफ करीब डेढ़ घंटे तक धरना दिया।

बोकारो रेंज के IGP क्रांति कुमार गरिदेशी ने घटना के बाद कार्रवाई में लापरवाही के लिए रामगढ़ पुलिस स्टेशन के प्रभारी प्रमोद कुमार सिंह और तीन कांस्टेबल को निलंबित कर दिया है।

इस बीच पार्टी के राज्य कार्यकारी अध्यक्ष शहजादा अनवर के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने रामगढ़ SP अजय कुमार से मुलाकात की। उन्होंने अंसारी की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों की तत्काल गिरफ्तारी की माँग की। स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है।

भारतीय के घर में घुसा अमेरिकी, कहा- ईसाई बनो, समृद्धि मिलेगी: टूरिस्ट-बिजनेस वीजा पर भारत आता था जैकब, हिंदुओं को धर्मांतरण के लिए देता था लालच

महाराष्ट्र के पिंपरी-चिंचवड में एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ विदेशी पैसे का इस्तेमाल कर धर्म परिवर्तन कराने के आरोप में पुलिस ने एक अमेरिकी नागरिक और उसके भारतीय साथी को गिरफ्तार किया है। ये लोग ईसाइयत अपनाने के लिए पैसों का लालच देते थे। इस मामले में एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया गया है।

इससे देश में विदेशी फंड के जरिए धर्मांतरण पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। पुलिस का कहना है कि ये लोग स्थानीय लोगों को ईसाई बनाने के लिए पैसों का लालच देते थे। फिलहाल जाँच चल रही है और पुलिस पूरे मामले की गहराई से छानबीन कर रही है।

धर्मांतरण कराने की साजिश में शामिल था विदेशी नागरिक

पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपितों की पहचान अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया निवासी शेफ़र जैविन जैकब (41) और पिंपरी के रईसोनी सोसाइटी निवासी स्टीवन विजय कदम (46) के रूप में हुई है। जैकब पिंपरी-चिंचवड के मुकाई चौक के पास एक किराए के फ्लैट में रह रहा था।

जाँच में पता चला है कि जैकब 2016 से भारत आ रहा है। टूरिस्ट और बिजनेस वीजा पर कई बार भारत का दौरा किया। इससे यह संदेह पैदा हुआ कि कहीं वह वैध यात्रा के बहाने धर्म प्रचार जैसे गतिविधियों में तो शामिल नहीं था।

FIR विवरण: हिंदू व्यक्ति को पैसे का लालच देने का कथित प्रयास

पिंपरी के रहने वाले हिंदू-सिंधी समुदाय के 27 वर्षीय सनी धनानी ने रविवार (27 जुलाई 2025) को पिंपरी पुलिस स्टेशन में एक शिकायत दर्ज कराई। FIR के अनुसार, जैकब और कदम 27 जुलाई सुबह करीब 11:30 बजे सनी के घर आए और उन्हें ईसाइयत अपनाने के लिए कहने लगे।

शिकायत के मुताबिक आरोपितों ने खुद को धार्मिक जानकार बताते हुए हिंदू धर्मग्रंथों का हवाला दिया और मोक्ष के लिए हिन्दू धर्म के बजाए ईसाइयत को बेहतर रास्ता बताया। उन्होंने सनी और उनके परिवार से वादा किया कि अगर वे ईसाइयत अपना लेंगे, तो उन्हें मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और विदेशों से आर्थिक सहायता मिलेगी।

सनी को जब शक हुआ, तो पिंपरी पुलिस स्टेशन गया और मामला दर्ज करवाया। पुलिस ने दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। FIR में सनी ने कहा है कि अमेरिकी नागरिक ने उससे कहा था कि अगर वह ईसाइयत अपनाता है तो वह खुश रहेगा। मानसिक रूप से शांत रहेगा और आर्थिक रूप से मजबूत हो जाएगा। उन्होंने विदेशी मदद दिलाने का भी वादा किया।

डिजिटल ट्रेल और व्यवस्थित आउटरीच संदिग्ध

पुलिस को शक है कि जैकब और कदम एक बड़े अभियान का हिस्सा थे जो लोगों का धर्मांतरण कराने की कोशिश में लगे हैं। माना जा रहा है कि ये लोग स्थानीय परिवारों से संपर्क बनाने के लिए WhatsApp, मोबाइल कॉल्स और आमने-सामने की बातचीत जैसे तरीकों का इस्तेमाल करते हैं।

FIR में बताया गया है कि वे भावनात्मक दबाव और धार्मिक ग्रंथों की चुनी हुई व्याख्या का इस्तेमाल कर लोगों को प्रभावित करने की कोशिश करते थे।

पुलिस ने उनके पास से इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और कुछ किताबें जब्त की हैं। पुलिस को शक है कि इसका इस्तेमाल धार्मिक प्रचार के लिए किया गया होगा। फिलहाल इन सब की फॉरेंसिक जाँच और पैसों के लेन-देन की भी जाँच चल रही है।

नाबालिग के भूमिका की जाँच जारी

अधिकारियों ने एक नाबालिग लड़के को भी हिरासत में लिया है। हालाँकि मामले में उसकी भूमिका अभी तक स्पष्ट नहीं है। आशंका है कि उसका इस्तेमाल परिवारों का विश्वास जीतने या बैठकों और आउटरीच में मदद करने के लिए किया जाता था।

BNS और विदेशी अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई

पिंपरी-चिंचवड पुलिस ने आरोपित अमेरिकी नागरिक और उसके साथियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और विदेशियों अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है।

BNS की धारा 299 के तहत उन्हें धार्मिक भावनाएँ भड़काने के इरादे से जानबूझकर की गई हरकतों के लिए आरोपित बनाया गया है। साथ ही, धारा 3(5) के तहत उन पर प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराने का आरोप भी लगाया गया है।

इसके अलावा विदेशी नागरिक होने के कारण उन पर विदेशियों अधिनियम की धारा 14(b) और 14(c) के तहत भी केस दर्ज किया गया है। इन धाराओं के तहत उस पर वीजा की शर्तों का उल्लंघन करने और भारत में अनुमति से बाहर जाकर गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है।

2016 से भारत आ रहा है जैकब

यह मामला भारत के छोटे शहरों और कस्बों में संगठित रूप से विदेशी फंडिंग के सहारे धर्मांतरण की गहरी साजिश की ओर भी इशारा कर रहा है। कई सामाजिक संगठनों ने माँग की है कि जैकब के 2016 से अब तक के भारत दौरे और उसके संपर्कों की गहराई से जाँच होनी चाहिए।

ऐसा माना जा रहा है कि आरोपित ने पिंपरी-चिंचवड इलाके में संपर्कों का एक नेटवर्क बना लिया था। ये भी आशंका जताई जा रही है कि उसने कई कमजोर परिवारों के साथ भी इसी तरह की कोशिश की होगी।

अमेरिकी नागरिक इस समय न्यायिक हिरासत में है और इमिग्रेशन अधिकारियों को इस बारे में सूचित कर दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक उसके वीजा को स्थायी रूप से रद्द कर उसे देश से डिपोर्ट भी जा सकता है।

1000+ लोग, 3000 घंटे की पूछताछ… देश को गृह मंत्री ने बताया कैसे भारतीय सेना ने पूरा किया पहलगाम का बदला: चिंदबरम से लेकर POTA तक पर अमित शाह ने कॉन्ग्रेस को किया नंगा

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया है कि पहलगाम आतंकी हमले का बदला ले लिया गया है। यह हमला करने वाले तीन आतंकी मार गिराए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि आतंकियों की पहचान भी स्पष्ट हो गई है। गृह मंत्री ने यह सारी बातें ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान लोकसभा में मंगलवार (29 जुलाई, 2025) को बताईं। उन्होंने इस दौरान कॉन्ग्रेस और बाकी विपक्ष पर भी प्रश्न उठाए। उन्होंने कहा कि आतंकियों का बचाव करके वोटबैंक बनाने वालों को नरेन्द्र मोदी की आतंक विरोधी नीति नहीं पसंद आएगी।

केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बताया, “22 जुलाई को दाचीगाम में आतंकी मौजूद होने की पुष्टि हो गई। इसके बाद 4 पैरा, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF ने आतंकियों को घेरा। 28 जुलाई को जो ऑपरेशन हुआ, उसमे हमारे निर्दोष नागरिकों को मारने वाले आतंकी मौत के घाट उतारे गए… आतंकियों की राइफल विशेष विमान चंडीगढ़ भेजी गईं, इनको रात भर फायर करके खोखे का मिलान हुआ। इसके बाद स्पष्ट हुआ कि यही आतंकी पहलगाम हमले में शामिल थे।”

उन्होंने इस दौरान विपक्ष पर भी प्रश्न उठाए। विपक्ष के शोर मचाने पर उन्होंने कहा, “मुझे तो लगा था आतंकियों के मरने की खबर पर विपक्ष में ख़ुशी की लहर दौड़ जाएगी, लेकिन यहाँ तो स्याही पड़ गई… यह कैसी राजनीति है।” उन्होंने इस दौरान पहलगाम हमले की जाँच को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा, “पहलगाम हमले की जाँच के दौरान मृतकों के परिजनों से बातचीत, दुकानदारों, खच्चर वालों, पर्यटकों समेत 1055 लोगों की 3000 घंटे जानकारी के लिए की गई।”

उन्होंने आगे कहा, “इसका वीडियो बनाया गया, इसके आधार पर स्केच बनाया गया। 22 जून, 2025 को बशीर और परवेज की पहचान की गई। इन्होंने हमले के अगले दिन आतंकियों को शरण दी थी। गिरफ्तार किए गए सहायक आरोपितों की माँ ने तीनों आतंकियों की लाश पहचान ली है। दोनों सहायकों ने पहचान लिया है। FSL की पुष्टि भी आज सुबह (29 जुलाई, 2025) को हो गई है।” गृह मंत्री अमित शाह ने इस दौरान पूर्व गृह मंत्री और कॉन्ग्रेस नेता चिदंबरम के बयान की आलोचना भी की।

चिदंबरम ने पहलगाम में हमला करने वाले आतंकियों के पाकिस्तानी होने पर प्रश्न उठाए थे। उन्होंने कहा, “हमारे पास प्रूफ है कि तीनों आतंकी पाकिस्तानी थे। तीनों के पाकिस्तानी वोटर नम्बर हमारे पास हैं, उनकी राइफल हमारे पास हैं। उनके पास पाकिस्तान से बनाई चॉकलेट मिली हैं। ये कहते हैं कि वो पाकिस्तानी नहीं थे। पूरी दुनिया को इस देश के पूर्व गृह मंत्री (चिदंबरम) पाकिस्तान को क्लीन चिट दे रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि चिदंबरम को शक था तो मुझसे पूछ लेते। उन्होंने इस दौरान लगातार कॉन्ग्रेस के हंगामे पर भी प्रहार किया। उन्होंने कहा, “मुझे लगता था कि रक्षा मंत्री के भाषण के बाद पक्ष में भाषण चालू करेगी और अगर थोड़ी-बहुत जनता की इच्छा की परख होती तो यही करते… लेकिन फिर भी उन्होंने सवाल किए, सवाल किए तो मुझे जवाब देना पड़ेगा।”

गृह मंत्री शाह ने इस दौरान कॉन्ग्रेस पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान में मारे गए 10 बड़े आतंकियों में से 8 चिदंबरम के समय आतंकी घटनाएँ करते थे, नरेन्द्र मोदी की सरकार ने उन्हें ठिकाने लगाया है।” उन्होंने आगे कहा, “उरी में हमला हुआ, हमने सर्जिकल स्ट्राइक किया। पुलवामा में हमला हुआ, एयरस्ट्राइक किया। पहलगाम में हमला हुआ, एयरस्ट्राइक की… मनमोहन सिंह ने सर्टीफाइड कर दिया था कि पाकिस्तान भी आतंक के विक्टिम हैं।

गृह मंत्री शाह ने 10 मई, 2025 को हुए सीजफायर पर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा, “9 मई को सेना को हुक्म दिया। एक मीटिंग हुई राजनाथ सिंह, NSA और सेना प्रमुखों ने तय किया और पाकिस्तान के 11 एयरबेस पर हमला हुआ। 8 एयरबेस ऐसे निशाना बनाए गए कि पाकिस्तान का एयर डिफेन्स बेकार हो गया…पाकिस्तान के पास शरण में आने के अलावा कोई चारा नहीं था, इसलिए 10 मई को पाकिस्तान के DGMO ने भारतीय DGMO को फोन किया, हमने 5 बजे इस संघर्ष को विराम किया।”

कॉन्ग्रेस के प्रश्नों पर उन्होंने ऐतिहासिक गलतियाँ भी बताईं। उन्होंने कहा, “1948 में कश्मीर में हमारी सेनाएँ निर्णायक बढ़त पर थीं, सरदार पटेल मना करते रहे लेकिन नेहरू ने सीजफायर कर दिया… मैं जिम्मेदारी से बोलता हूँ कि अगर POK है तो इसका जिम्मेदार जवाहर लाल नेहरू है। 1965 की लड़ाई में हाजी पीर जैसी जगह पर हमने कब्जा किया था। 1966 में हमने उसे लौटा दिया।”

उन्होंने 1971 के युद्ध पर भी प्रकाश डाला। गृह मंत्री शाह ने कहा, “1971 के युद्ध के बाद 93 हजार युद्धबंदी हमारे पास थे, 15 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र हमारे पास था लेकिन शिमला में समझौता हुआ और POK वापस माँगना ही भूल गए… तब वापस माँग लेते तो हमें कैम्प तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ती।” उन्होंने जवाहर लाल नेहरू सरकार की और भी कई कमियाँ गिनवाई। उन्होंने 1962 युद्ध का भी जिक्र किया।

लोकसभा में गृह मंत्री शाह ने कहा, “1962 के युद्ध में हमने जमीन चीन को दे दी… तब बहस हुई तो नेहरू जी ने कहा कि वहाँ घास का तिनका तक नहीं उगता।” उन्होंने आगे कहा, “गौरव गोगोई जी जानते हैं क्या कि उन्होंने (नेहरू ने) असम को बाय-बाय बोल दिया था।”

भारत के UNSC सदस्यता ठुकराने पर उन्होंने कहा, “अनौपचारिक रूप से USA ने प्रस्ताव दिया कि चीन को UN में ले लिया जाए लेकिन सुरक्षा परिषद् में नहीं, नेहरू जी ने कहा कि हम इसे स्वीकार नहीं करते क्योंकि इससे चीन के साथ हमारे संबंध खराब होंगे और चीन जैसे महान देश को बुरा लगेगा।”

उन्होंने UPA सरकार पर भी निशाना साधा। गृह मंत्री शाह ने कहा, “मनमोहन सिंह-सोनिया गाँधी की सरकार ने पहली ही कैबिनेट में POTA कानून रद्द किया। मैं पूछता हूँ कि किसके फायदे के लिए यह हुआ… 2005 में अयोध्या में रामलला के टेंट पर हमला हुआ, 2006 में मुंबई में ट्रेन में धमाके हुए, 2006 में डोडा में हमला हुआ।”

उन्होंने पूछा, “आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई होती है… 2005 से 2011 के बीच 27 जघन्य हमले हुए… 1000 लोग मारे गए। मैं आपसे पूछना चाहता हूँ अपने क्या किया।” गृह मंत्री ने इसके साथ ही अपनी सरकार का रिपोर्ट कार्ड भी पेश किया और बताया कि इस दौरान हुए हमले पाक प्रायोजित और कश्मीर पर केन्द्रित थे। उन्होंने इस दौरान कॉन्ग्रेस नेता सलमान खुर्शीद के बाटला हाउस पर सोनिया गाँधी के रोने वाले बयान का भी जिक्र किया।

उन्होंने मोदी सरकार का रिपोर्ट कार्ड पेश किया। उन्होंने कहा, “2004-14 में 1770 में नागरिकों की मृत्यु हुई थी। 2015-25 में कम होकर 357 हो गईं थी। 80% की कमी हो गई। सुरक्षाबलों की मृत्यु में 1060 थी, हमारे समय में 542 हुईं। आतंकियों की मौत में 123% का इजाफा हुआ।” उन्होंने UPA सरकार पर हुर्रियत नेताओं को VIP ट्रीटमेंट देने का आरोप लगाया।

उन्होंने कहा, “एक समय में यहाँ हुर्रियत के नेताओं को VIP ट्रीटमेंट मिलता था… मनमोहन सिंह की सरकार के दूत इनके साथ चर्चा करते थे, हमने हुर्रियत के सारे कॉम्पोनेन्ट बैन कर दिए थे।” गौरव गोगोई के हंगामा मचाने पर गृह मंत्री ने कहा, “आपके समय में आतंकी को घुसने की जरूरत ही नहीं थी… जैसे आप पाकिस्तान जाते हो, वैसे वो यहाँ आते थे।”

गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार में आतंक पर एकदम कड़ा स्टैंड लिया जाएगा।

सुपारी की जगह 11000 बीघे पर उग गए ‘घुसपैठिए’, अब ‘सफाई’ करवा रही असम की हिमंता बिस्वा सरकार: 2000 परिवारों का कब्जा हटा, स्थानीय बोले- ज्यादातर अतिक्रमणकारी मुस्लिम

असम सरकार ने गोलाघाट और उरियमघाट में बेदखली अभियान तेज कर दिया है। असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने गोलागाट के रिजर्व वन के 11,000 बीघा जमीन से 2000 से अधिक परिवारों को हटाने और 3,600 एकड़ वन भूमि को खाली करने का अभियान शुरू करने की कवायद तेज कर दी है।

गोलाघाट के रेंगमा रिजर्व फॉरेस्ट असम-नागालैंड सीमा पर स्थित है। यहाँ लगभग 2,000 अवैध घुसपैठिए परिवारों ने कब्जा कर लिया था। इसके कारण लगभग 3,600 एकड़ (11,000 बीघे) जमीन पर अवैध कब्जा जमा हुआ था। इस जमीन से अवैध कब्जा हटाने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है।

11,000 बीघे जमीन पर लगभग 2,000 घुसपैठिए परिवारों के कब्जे को हटाने के लिए लगभग 1,500 परिवारों को 7 दिन का नोटिस दिया गया था। इनमें से 80% से अधिक परिवारों ने पहले से ही घर खाली कर दिए। इसके अलावा लगभग 500 परिवारों के पास फॉरेस्ट राइट्स कमेटी (एफआरसी) से प्रमाणपत्र हैं। वे कानूनी रूप से जंगल क्षेत्र में रह रहे हैं।

गोलाघाट जिला प्रशासन और वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सरुपथार उप-मंडल में असम-नगालैंड सीमा पर उरियमघाट में रेंगमा वन अभयारण्य की लगभग 11,000 बीघा (3,600 एकड़ से अधिक) भूमि पर अतिक्रमण को हटाने के लिए मंगलवार (29 जुलाई 2025) की सुबह से बेदखली अभियान शुरू किया गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बिद्यापुर क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। इस दौरान अवैध मकानों को तोड़ा जा रहा है। स्थानीयों के अनुसार, जिनके पास एफआरसी प्रमाणपत्र हैं वे बोडो, नेपाली समेत अन्य जनजातीय समुदायों से हैं। इसके अलावा स्थानीयों ने यह भी कहा कि जिनके घर अतिक्रमण के तहत तोड़े जा रहे हैं वे लगभग सभी मुस्लिम समुदाय से हैं।

अतिक्रमण को हटाने के लिहाज से क्षेत्र में वन विभाग के कर्मियों के साथ काफी संख्या में सुरक्षाबल तैनात किया गया है। इस दौरान 12 गाँवों के 2648 अवैध घरों को तोड़ने की तैयारी है। इन गाँवों में – सोनारीबिल टॉप, नंबर 2 पिथाघाट, नंबर 2 और नंबर 3 दयालपुर, दलानपाथर, खेरबारी, विद्यापुर, विद्यापुर बाजार, नंबर 2 मधुपुर, आनंदपुर, राजापुखुरी और गेलाजा शामिल हैं।

असम सरकार का कहना है कि जंगल की जमीन को अतिक्रमणकारियों ने सुपारी की खेती के लिए साफ कर दिया था। जंगल की जमीन पर अवैध कब्जा जमा लिया गया। इसके कारण असम की सांस्कृतिक पहचान को भी खतरा है। यह इलाका रेंगमा रिजर्व फॉरेस्ट का हिस्सा है, जो पारिस्थितिकीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बेदखली अभियान को लेकर 21 जुलाई 2025 को बयान दिया था कि पिछले चार वर्षों में राज्य में 1.29 लाख बीघा भूमि से अतिक्रमण हटाया गया है, जबकि अभी भी 29 लाख बीघा भूमि पर अभी भी अतिक्रमण है।

नेपाल में ‘तबलीग’ कर रहा बांग्लादेश का इस्लामी संगठन, हिंदू बहुल इलाकों में उग रहीं मस्जिदें: ‘दावत’ के जरिए डेमोग्राफी जिहाद में जुटा है ASH

दक्षिण एशिया में भारत के अलावा नेपाल ही एकमात्र हिंदू-बहुल देश है। यहाँ की कुल जनसंख्या में लगभग 81% यानी लगभग 2.36 करोड़ (2021 के डाटा के अनुसार) लोग हिंदू हैं। वहीं, मुस्लिम आबादी करीब 5% है।

लेकिन अब नेपाल में धार्मिक जनसंख्या को बदलने की एक संगठित कोशिश की जा रही है। बांग्लादेश के मुस्लिम संगठन नेपाल में धार्मिक जनसांख्यिकी को बदलने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। यह सब ‘मानवता की सेवा’ के नाम पर बहुत चतुराई से किया जा रहा है।

नेपाल में एएसएच की पहली मस्जिद की आधारशिला रखते हुए (फाइल फोटो,साभार – दैनिक अभिविन्यास,बांग्ला )

‘अलहाज शम्सुल हक फाउंडेशन’ (ASH) नामक एक बांग्लादेशी संगठन इस लक्ष्य पर मिशन मोड में काम कर रहा है।

मोहम्मद नासिर उद्दीन द्वारा स्थापित ASH फाउंडेशन नाम की यह संस्था बांग्लादेश के चटगाँव से संचालित होती है। यह संस्था बांग्लादेश, अमेरिका, ब्रिटेन और मिस्र में भी काम करती है। हालाँकि ASH फाउंडेशन का दावा है कि इसका उद्देश्य भूख और गरीबी मिटाना है, लेकिन असल में इसके काम इस्लाम के प्रचार (तबलीग़) और धर्म परिवर्तन से जुड़े हुए हैं।

(फाइल फोटो,साभार – दैनिक अभिविन्यास,बांग्ला )

हाल ही में मोहम्मद नासिर उद्दीन ने नेपाल के सुनसरी जिले में ‘मस्जिद-ए-रज़्ज़ाक़’ की नींव रखी। इसके लिए उसने बांग्लादेश से फंड जुटाया। शुक्रवार (25 जुलाई 2025) को फेसबुक पर वायरल वीडियो में उसने कहा, “नेपाल में केवल 5% मुस्लिम हैं। यहाँ दावत (इस्लामी धर्मांतरण) का अवसर है।”

18 जुलाई को एक फेसबुक पोस्ट में ASH फाउंडेशन ने बताया कि यह मस्जिद कम से कम 15% आबादी तक इस्लाम का संदेश पहुँचाने का केंद्र बनेगी। इसने बैंक खातों का विवरण भी जारी किया और बांग्लादेशियों से दान माँगा ताकि वे हिंदू बहुल देश में और अधिक मस्जिदें बनाने और स्थानीय आबादी का धर्म परिवर्तन करने के अपने मिशन में योगदान दे सकें।

ASH के संस्थापक मुहम्मद नासिर उद्दीन ने स्थानीय मुस्लिमों के साथ बातचीत के दौरान अपने नापाक एजेंडे का खुलासा किया। उसने कहा, “नेपाल दुनिया के सबसे बड़े हिंदू राष्ट्रों में से एक है, इसलिए दावत का आयोजन बेहद जरूरी है। हमारे धर्म के सबसे बड़े सिद्धांतों में से एक है लोगों को अल्लाह के मार्ग पर चलने का न्योता देना।” 

संस्था का काम करने का तरीका-

1. हिंदुओं की सहनशीलता की तारीफ करके उनका विश्वास जीतना।

2. बांग्लादेश के मुस्लिमों से चंदा इकट्ठा करना।

3. उसी पैसे से मस्जिदें बनाना और गरीब हिंदुओं को इस्लाम अपनाने के लिए प्रेरित करना।

नेपाल के कुछ हिंदू संगठनों ने सरकार और पुलिस को इसके लिए सचेत किया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

हिंदू बहुल नेपाल में बढ़ता इस्लामवाद

ऑपइंडिया ने नेपाल में मूल हिंदुओं के प्रति मुस्लिम समुदाय की बढ़ती दुश्मनी के कई उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। अप्रैल 2025 में नेपाल के परसा जिले के बीरगंज शहर में हिंसक मुस्लिम भीड़ ने हनुमान जयंती के जुलूस पर हमला किया था।

जुलाई 2024 में मुस्लिमों ने नेपाल के सरलाही जिले में सड़क निर्माण कार्य रोक कर उन पर पथराव किया था और दलित हिंदुओं के घरों पर भी हमला किया था।

एक महीने पहले हिंदू बहुल यह देश तब भी चर्चा में आया था जब मुस्लिमों ने रौतहट जिले में एक गाँव का नाम बदलकर ‘इस्लाम नगर’ और ‘ब्रह्म स्थान’ का नाम बदलकर ‘मदरसा चौक’ कर दिया था।

ब्रह्मस्थान को मदरसा चौक में बदला गया (फाइल फोटो – ऑपइंडिया)

ऑपइंडिया ने एक जमीन जिहाद मामले की भी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इसमें बताया था कि मुस्लिमों ने सरकारी जमीन पर नमाज पढ़कर और अवैध रूप से दीवार बनाकर कब्जा करने की कोशिश की थी। यह घटना नेपाल के जनकपुर शहर में हुई थी। सितंबर 2022 की शुरुआत में ही हमने देश के पूर्व हिंदू क्षेत्रों में मस्जिदों और मदरसों और मदरसों की बढ़ती संख्या के बारे में चेतावनी दी थी।

नेपाल में ASH फाउंडेशन जैसे बांग्लादेशी मुस्लिम संगठनों की बढ़ती उपस्थिति के कारण, धर्मांतरण और हिंदू समुदाय के प्रति आक्रामकता बढ़ने की संभावना है।

‘बंगाली बोलने के कारण महिला और उसके बच्चे का उत्पीड़न’: दिल्ली पुलिस ने ममता बनर्जी का ‘फैक्ट’ किया दुरुस्त, बताया कैसे बीबी सजनूर ने गढ़ी झूठी कहानी

पश्चिम बंगाल के मालदा से दिल्ली के गीता कॉलोनी में रहने आए एक बंगाली प्रवासी परिवार ने सोशल मीडिया पर लाइक्स और चर्चा में आने के लिए एक ऐसा वीडियो बनाया जिसके कारण राजनीतिक उठापटक मच गई। इसके बाद पुलिस जाँच हुई तो मामले की सच्चाई सामने आ गई।

शनिवार (26 जुलाई 2025) को एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें मुख्तार खान अपने छोटे से बच्चे के कान और चेहरे के साथ अपनी पत्नी सजनूर बीबी के चेहरे को भी दिखलाकर बंगाली भाषा में यह कहता नजर आ रहा है कि उन दोनों के साथ मारपीट की गई है और साधारण कपड़ों में आए कुछ पुलिस वालों ने उनसे 25,000 रुपए भी वसूले हैं। वीडियो में जीपीएस ट्रैक में लिखा है कि यह वीडियो नई दिल्ली के गीता कॉलोनी में बनाया गया है।

ममता ने लपका मौका

सोशल मीडिया में वायरल होते ही पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधने का मौका नहीं छोड़ा। 27 जुलाई 2025 को वीडियो को साझा करते हुए ममता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “भयानक, बेहद भयावह! देखिए मालदा के चंचल से दिल्ली आए एक प्रवासी परिवार के बच्चे और उसकी माँ को दिल्ली पुलिस ने कितनी बुरी तरह से मारा है।”

ममता बनर्जी ने आगे लिखा, “देखिए किस तरह बच्चों तक को हिंसा की क्रूरता से बक्शा नहीं जा रहा है। भाषाई आतंक के दौर में बीजेपी ने देश के बंगालियों के खिलाफ हिंसा शुरू कर दी है। हमारा देश किस दिशा में जा रहा है?”

पुलिस ने की पड़ताल

टीएमसी सुप्रीमो के इस ट्वीट के बाद पूर्वी दिल्ली के डीसीपी अभिषेक धनिया ने इस मामले की पूरी पड़ताल करवाई। सीसीटीवी फुटेज और परिवार से कड़ाई से पूछताछ की। पूरी जाँच के बाद डीसीपी ने अपना बयान जारी किया।

उन्होंने बताया कि यह पूरा मामला ही झूठा था और महिला ने मालदा जिले में रहने वाले अपने एक रिश्तेदार के कहने पर भी झूठा वीडियो बनाया था। यह रिश्तेदार एक राजनीतिक कार्यकर्ता है जिसने जानबूझकर इस तरह का वीडियो बनवाया जिससे वह किसी तरह का राजनीतिक लाभ उठा सके।

डीसीपी अभिषेक ने कहा, “पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने ‘X’ पर एक पोस्ट किया, जिसमें कहा गया कि दिल्ली पुलिस ने एक बंगाली भाषी महिला और उसके बच्चे के साथ मारपीट की। जानकारी मिलते ही हमने जाँच शुरू की और पता चला कि महिला का नाम सजनूर बीबी है। वह अपने पति मुख्तार खान और दो बच्चों के साथ पश्चिम विनोद नगर के मजबूर नगर में रहती है। पूछताछ के दौरान उसने बताया कि 26 जुलाई की रात लगभग 10:30 बजे चार पुलिसकर्मी सिविल ड्रेस में उनके घर आए और उन्हें एक सुनसान जगह ले जाकर पीटा, साथ ही ₹25,000 की माँग की, जो उन्होंने बाद में दे दिए।”

डीसीपी ने आगे कहा, “मामले की गंभीरता को देखते हुए हमने कई टीमें गठित कीं। तकनीकी और स्थानीय इंटेलिजेंस के साथ-साथ सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हमने कई सबूत इकट्ठा किए। उन सबूतों के आधार पर हमें यह ज्ञात हुआ कि महिला द्वारा बताई गई पूरी कहानी निराधार है। महिला अपनी मर्जी से दोपहर 12:03 बजे दोनों बच्चों के साथ घर से निकली। उसके साथ किसी के भी होने की बात CCTV फुटेज में सामने नहीं आई।”

डीसीपी अभिषेक ने बताया कि पूछताछ में महिला ने यह भी बताया कि वह रास्ता भटक गई थी। किसी स्थानीय की मदद से उसने अपने मामा को फोन किया। वह पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में रहता है और एक राजनीतिक कार्यकर्ता है। उसके कहने पर ही उसने यह झूठा वीडियो बनाया और उसे भेजा, जिसे बाद में स्थानीय मीडिया में प्रसारित किया गया।

डीसीपी ने कहा, “गहन जाँच और पूछताछ के बाद ये बात सामने आई है कि पूरा वीडियो झूठा और मनगढ़ंत है। इस वीडियो को जानबूझकर सोशल मीडिया पर फैलाया गया ताकि दिल्ली पुलिस की छवि को नुकसान पहुँचाया जा सके। आगे की जाँच अभी भी जारी है।”

यूजर्स ने भी ममता ‘दीदी’ को लताड़ा

पुलिस के बयान के बाद एक्स पर कई यूजर्स ने TMC सुप्रीमो और कोलकाता पुलिस को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। एक यूजर ने कहा कि कोलकाता पुलिस ने फेक न्यूज़ फैलाने के एवज में ममता बनर्जी का अकाउंट सस्पेंड नहीं किया, उन्हें कोई नोटिस जारी नहीं किया। लेकिन इसी जगह कोई दूसरा होता तो उसका अकाउंट अब तक बंद हो चुका होता। समानता सभी नागरिकों के लिए एक जैसी होनी चाहिए। जय हिंद।

एक अन्य यूजर ने दिल्ली पुलिस के लिए लिखा कि दिल्ली पुलिस को निराधार आरोप लगाने के लिए ममता बनर्जी पर मुकदमा करना चाहिए। एक यूजर ने लिखा, “हम सभी को पता है कि अब चुनाव होने वाले हैं तो बंगाल की ओर से इस तरह के अनगिनत ड्रामा देखने को मिलेंगे।”