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इजरायल ने जिस आतंकी अनस-अल को ठोका, उसे इस्लामी-लिबरल बता रहे ‘शरीफ’: मौत के बाद सामने आई अल-जजीरा के जिहादी की सच्चाई

इजरायली हमले में मारे गए अनस अल शरीफ समेत अल जजीरा के 5 कथित पत्रकारों को लेकर सोशल मीडिया इजरायल पर अटैक कर रहा है। कोई उसकी दूर दराज में किए गए रिपोर्टिंग को शेयर कर उसे ‘सच्चा पत्रकार’ साबित करने की कोशिश कर रहा है तो कोई ‘प्रेस टैंट पर अटैक’ कह कर मीडिया को खामोश करने की कवायद करार दे रहा है। हालाँकि इजरायल पहले ही बता चुका था कि अनस उसके ‘हिट लिस्ट’ में शामिल था।

इजरायल के मोस्ट वॉन्टेड लिस्ट में शामिल था अनस

गाजा में इजरायली हमले में अनस अल शरीफ और उसके 4 साथियों की मौत हो गई है। ये सभी अल जजीरा से जुड़े कथित पत्रकार थे। इजरायल पहले ही उसका नाम मोस्ट वॉन्टेड की सूची में शामिल कर चुका था। IDF ने अल जजीरा के 6 पत्रकारों की लिस्ट जारी की थी, जो हमास के लिए काम करता था। इसमें अनस अल शरीफ का नाम भी शामिल था। IDF के मुताबिक अनस अल-शरीफ रॉकेट लॉन्चिंग स्क्वॉड का प्रमुख था और हमास की नुसीरत बटालियन में नुखबा फोर्स कंपनी का आतंकी था।

हालाँकि अल जजीरा ने दावा किया था कि उसके पत्रकार का आंतकी संगठनों से कोई संबंध नहीं है। लेकिन IDF ने इसे खारिज कर कहा था कि उसके पास दस्तावेज मौजूद हैं जिससे साबित होता है कि वह आतंकी था।

इजरायल के खिलाफ अल जजीरा का दुष्प्रचार

अल जजीरा लगातार इजरायल को लेकर दुष्प्रचार करता रहा है। इस साल मई में बेंजामिन नेतन्याहू सरकार ने हमास का प्रोपेगेंडा चलाने के कारण इजरायल के भीतर अल जजीरा को बंद कर दिया था। सितम्बर, 2024 में इजरायल सरकार ने वेस्ट बैंक के रामल्लाह में अल जजीरा ब्यूरो को भी बंद कर दिया था।

अलजजीरा एक ऐसा नेटवर्क है जिसे कतर सरकार फंडिंग करती है। ये इजरायल के खिलाफ खबरें दिखाता है और फिलिस्तीन की मदद करता है। इजरायल कहता रहा है कि अल जजीरा हमास के आतंकियों को रिपोर्टर के रूप में फिलिस्तीन के दूर दराज के इलाके में भेजता है जो मुख्य रूप से आतंकी गतिविधि में शामिल रहते हैं। अनस अल शरीफ इसका अच्छा उदाहरण है जिसे पहले ही इजरायल ने हमास का आतंकी घोषित कर दिया था। आखिर एक वॉन्टेड आतंकी को रिपोर्ट बनाकर अल जजीरा हमास की मदद ही कर रहा है। वह गाजा के लोगों के बीच में छिप कर जिहादी मंसूबों को अंजाम दे रहा था।

लेकिन अनस अल शरीफ की मौत के बाद सोशल मीडिया पर उसके प्रति सहानुभूति जताने वाले इस्लामी और कथित लिबरल गैंग की बाढ़ आ गई है। कोई उसे ‘शहीद’ कह रहा है तो कोई पत्रकारों पर हमले को ‘इजरायली बर्बरता’ करार दे रहा है। इसमें कहा जा रहा है कि दुनिया, मीडिया सब खामोश हैं।

कोई उसे अल जजीरा का बड़ा चेहरा बता रहा है तो साहसपूर्ण रिपोर्टिंग की बात कह रहा है। कोई हमास के हमलावरों की तारीफों के पुल बाँधे जा रहे हैं। यहाँ तक कि परिवार के साथ फोटो और वीडियो शेयर किया जा रहे हैं।

इजरायली हमले को भयावह करार देते हुए सीएनएन ने कहा है कि ये स्थानीय पत्रकारों की स्थिति को बयां करता है। सीएनएन के मुताबिक अल शरीफ हमास के राजनीतिक प्रमुख इस्माइल हनीयेह के पारिवारिक घर के पास एक स्थान से लाइव रिपोर्टिंग कर रहे थे, इसलिए वहाँ मौजूद थे। हनीयेह की मंगलवार को तेहरान में हत्या कर दी गई थी। वहीं बीबीसी ने इसे ‘प्रेस की आजादी’ पर हमला करार दिया है।

लेकिन इससे अनस अल शरीफ की असलियत नहीं बदल सकती। उसके खिलाफ कई तरह के सबूत होने की बात इजरायल पहले से करता रहा है। जिहादी सोच का संबंध किसी पेश से नहीं होता। ये इंजीनियर ओसामा बिन लादेन से लेकर डॉक्टर अल जवाहिरी तक के केस में देखा जा सकता है। पत्रकार बनकर लोगों से बातें करना और उनके बीच रहना तो और आसान है।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी राफेल की डिमांड, भारतीय वायुसेना ने माँगे 114 फाइटर जेट: कहा – चीन और पाकिस्तान से लड़ाई में आएँगे काम

भारतीय वायुसेना (IAF) ने एक बार फिर फ्रांस से और राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए जोरदार माँग उठाई है। यह माँग उसकी लंबे समय से लटकी हुई 114 मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) परियोजना के तहत है, जिसमें ज्यादातर विमान भारत में ही विदेशी सहयोग से बनाए जाने हैं।

वायुसेना जल्द ही इस परियोजना को शुरू करने के लिए रक्षा खरीद परिषद (DAC) से प्रारंभिक मंजूरी (AoN) माँगेगी, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करते हैं। सूत्रों के मुताबिक, यह मंजूरी अगले एक-दो महीनों में मिल सकती है।

हालाँकि सवाल ये है कि ये माँग आखिर उठ क्यों रही है? भारतीय वायुसेना को किस चीज की कमी है? इस माँग को पूरा करने में कितना खर्च आएगा? और वायुसेना के सामने किस तरह की चुनौतियाँ हैं, आईए… आसान तरीके से समझते हैं।

राफेल से जुड़ा क्या है ये पूरा मामला

बीते कुछ सालों से भारतीय वायुसेना की ताकत कम हो रही है। अभी वायुसेना के पास 31 फाइटर स्क्वाड्रन (16-18 विमानों की टुकड़ी) हैं, जो अगले महीने पुराने मिग-21 विमानों के रिटायर होने के बाद 29 तक सिमट जाएँगे। यह अब तक का सबसे निचला स्तर होगा।

वायुसेना को 42.5 स्क्वाड्रन की जरूरत है, ताकि वह पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसियों से एक साथ होने वाली चुनौतियों का सामना कर सके। इस कमी को पूरा करने के लिए वायुसेना चाहती है कि फ्रांस से और राफेल विमान खरीदे जाएँ, जो 4.5वीं पीढ़ी के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान हैं।

यह माँग हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर (7-10 मई 2025) के बाद और तेज हो गई है। इस ऑपरेशन में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे। इन हमलों में राफेल विमानों ने लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों का इस्तेमाल किया, जिससे उनकी ताकत और उपयोगिता साबित हुई। लेकिन इस ऑपरेशन ने यह भी दिखाया कि अगर भारत को भविष्य में ऐसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, तो उसके पास पर्याप्त आधुनिक विमान नहीं हैं।

वायुसेना को क्यों है इतने सारे राफेल की जरूरत

भारत के सामने दो बड़े खतरे हैं: पाकिस्तान और चीन। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने चीनी मूल के J-10 लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया, जो PL-15 मिसाइलों से लैस थे। ये मिसाइलें 200 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तक मार कर सकती हैं। इसके अलावा खबर है कि चीन जल्द ही पाकिस्तान को 40 J-35A स्टील्थ फाइटर जेट्स देने वाला है, जो पाँचवीं पीढ़ी के अत्याधुनिक विमान हैं। दूसरी ओर भारत के पास अभी पाँचवीं पीढ़ी का कोई विमान नहीं है। राफेल जो 4.5वीं पीढ़ी का है, भारत का सबसे आधुनिक विमान है।

वायुसेना का कहना है कि अगर हमें पाकिस्तान और चीन की संयुक्त चुनौती का सामना करना है, तो हमें और राफेल विमानों की जरूरत है। ये विमान न केवल हवा में दुश्मन के विमानों से लड़ सकते हैं, बल्कि जमीन पर सटीक हमले भी कर सकते हैं। ऑपरेशन सिंदूर में राफेल ने SCALP क्रूज मिसाइलों और HAMMER प्रेसिजन-गाइडेड हथियारों का इस्तेमाल करके आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद किया था। यह दिखाता है कि राफेल भारत की रक्षा के लिए कितना जरूरी है।

भारतीय वायुसेना को किस बात की कमी?

भारतीय वायुसेना की सबसे बड़ी कमी है उसके फाइटर स्क्वाड्रनों की घटती संख्या। अभी 31 स्क्वाड्रन हैं, जो अगले महीने 29 हो जाएँगे। यह कमी तब और गंभीर हो जाती है, जब हम देखते हैं कि हमें 42.5 स्क्वाड्रनों की जरूरत है। पुराने मिग-21 विमान अब रिटायर हो रहे हैं, और नए विमानों की खरीद में देरी हो रही है। MRFA प्रोजेक्ट, जिसके तहत 114 नए विमान खरीदे जाने हैं, वो पिछले 7-8 सालों से अटका हुआ है। इसका शुरुआती खर्च 1.2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा अनुमानित था, और अब यह और बढ़ सकता है।

इसके अलावा भारत के पास अभी पाँचवीं पीढ़ी के स्टील्थ फाइटर जेट्स नहीं हैं, जबकि पाकिस्तान को चीन से ऐसे विमान मिलने वाले हैं। भारत का अपना AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) 2035 तक तैयार होगा, लेकिन तब तक हमें रूसी सुखोई-57 या अमेरिकी F-35 जैसे विमानों पर विचार करना पड़ सकता है। हालाँकि, इनके लिए अभी कोई आधिकारिक बातचीत शुरू नहीं हुई है।

सरकार को ये डिमांड कब तक पूरी करनी होगी?

वायुसेना चाहती है कि MRFA प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द शुरू किया जाए। इसके लिए पहला कदम, यानी AoN, अगले एक-दो महीनों में DAC से माँगा जाएगा। अगर मंजूरी मिल जाती है, तो फ्रांस के साथ सरकारी स्तर पर डील जल्द हो सकती है। वायुसेना का कहना है कि सरकारी डील से प्रक्रिया तेज होगी, क्योंकि वैश्विक टेंडर में समय लगता है। अगर सब कुछ ठीक रहा, तो अगले कुछ सालों में नए राफेल भारत में आ सकते हैं। नौसेना को भी 2028-2030 तक 26 राफेल-मरीन विमान मिलने वाले हैं, जो INS विक्रांत विमानवाहक पोत से ऑपरेट करेंगे।

भारत सरकार के सामने क्या है चुनौती

सबसे बड़ी चुनौती है पैसा और समय। MRFA प्रोजेक्ट का अनुमानित खर्च 1.2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है, और इतनी बड़ी रकम जुटाना आसान नहीं है। इसके अलावा भारत चाहता है कि ज्यादातर विमान देश में ही बनें, ताकि ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा मिले। लेकिन इसके लिए विदेशी कंपनियों के साथ तकनीकी साझेदारी और स्थानीय उत्पादन की व्यवस्था करनी होगी, जो समय लेने वाली प्रक्रिया है।

दूसरी चुनौती है पड़ोसियों की बढ़ती ताकत। पाकिस्तान के पास पहले से ही चीनी J-10 विमान हैं, और जल्द ही J-35A जैसे स्टील्थ जेट्स भी आ जाएँगे। चीन की वायुसेना भी तेजी से आधुनिक हो रही है। ऐसे में भारत को अपनी रक्षा तैयारियों को तेज करना होगा। ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने दावा किया कि उसने पाकिस्तान के 5 फाइटर जेट्स और एक बड़े विमान को मार गिराया।

इस प्रोजेक्ट पर कितना खर्च आएगा?

MRFA प्रोजेक्ट का शुरुआती अनुमान 1.2 लाख करोड़ रुपए था, लेकिन अब यह रकम और बढ़ सकती है। पहले से ही भारत ने 36 राफेल विमानों के लिए 2016 में 59,000 करोड़ रुपए की डील की थी। इसके अलावा नौसेना के लिए 26 राफेल-मरीन विमानों की डील 63,887 करोड़ रुपए (लगभग 7 बिलियन यूरो) में हुई है। नए विमानों की खरीद में भी इतना ही या इससे ज्यादा खर्च हो सकता है। हालाँकि अगर विमान भारत में बनते हैं, तो लागत कुछ कम हो सकती है और स्थानीय उद्योग को फायदा होगा।

राफेल ही क्यों?

वायुसेना का कहना है कि और राफेल खरीदना ज्यादा फायदेमंद है। पहला – भारत के पास पहले से 36 राफेल हैं, जो अंबाला और हासिमारा एयरबेस पर तैनात हैं। इन बेस पर और स्क्वाड्रन रखने की जगह और बुनियादी ढांचा पहले से तैयार है। दूसरा – अगर नौसेना और वायुसेना दोनों राफेल का इस्तेमाल करें, तो रखरखाव और उपकरणों में समानता रहेगी, जिससे लागत और समय बचेगा। तीसरा – सरकारी डील से प्रक्रिया तेज होगी, जबकि वैश्विक टेंडर में सालों लग सकते हैं।

ऑपरेशन सिंदूर ने भारत को यह एहसास दिलाया कि आधुनिक युद्ध में मजबूत वायुसेना कितनी जरूरी है। राफेल विमानों ने इस ऑपरेशन में अपनी ताकत दिखाई, लेकिन स्क्वाड्रनों की कमी और पड़ोसियों की बढ़ती ताकत भारत के लिए चिंता का सबब है। MRFA प्रोजेक्ट के जरिए और राफेल खरीदने की माँग इस दिशा में एक बड़ा कदम है। लेकिन इसके लिए पैसा, समय और सही रणनीति की जरूरत है। अगर भारत इस दिशा में तेजी से कदम उठाता है, तो वह अपनी रक्षा को और मजबूत कर सकता है।

डोनाल्ड ट्रंप की गोद में बैठ असीम मुनीर ने भारत को दी ‘न्यूक्लियर हमले’ की गीदड़भभकी, कहा- आधी दुनिया को अपने साथ ले जाएँगे: सिंधु पर बाँध बना तो 10 मिसाइल मारेंगे

भूखे-प्यासे पाकिस्तान में जनता रोटी को तरस रही और हुक्मरान परमाणु बम का ख्वाब देख रहे हैं। कुछ दिनों पहले भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद पाकिस्तान बीच बचाव के लिए अमेरिका से भीख माँग रहा था। अब पाकिस्तान का फौजी चीफ असीम मुनीर डोनाल्ड ट्रंप की गोद में बैठकर भारत को गीदड़भभकी दे रहा है। वो भी न्यूक्लियर हमले की।

मुनीर ने क्या कहा?

द प्रिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी दौरे पर पहुँचे मुनीर ने एक डिनर पार्टी में गीदड़भभकी देते हुए कहा कि भारत के साथ युद्ध में पाकिस्तान के अस्तित्व को खतरा हुआ तो वो इस क्षेत्र को परमाणु युद्ध में झोंक देगा। मुनीर ने कहा, “हम एक परमाणु राष्ट्र हैं, अगर हमें लगता है कि हम डूब रहे हैं, तो हम आधी दुनिया को अपने साथ ले जाएँगे।” माना जा रहा है कि यह अमेरिकी धरती से किसी तीसरे देश को पहली परमाणु धमकी है।

पाकिस्तान द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दिया है। मुनीर ने इस पर भी जहर उगला है। मुनीर ने इस फैसले से 25 करोड़ लोगों को भुखमरी का खतरा बताया है। मुनीर ने कहा, “हम भारत के बांध बनाने का इंतजार करेंगे और जब वह ऐसा करेगा, तो हम उसे 10 मिसाइलों से तबाह कर देंगे।” मुनीर ने कहा, “सिंधु नदी भारत की पारिवारिक संपत्ति नहीं है। हमें मिसाइलों की कमी नहीं है, अल्हम्दुलिल्लाह।”

मुनीर ने खुद ही कर दी पाकिस्तान की बेइज्जती

मदरसे में पढ़े और कट्टर इस्लामिक विचारधारा को मानने वाले मुनीर ने खुद ही पाकिस्तान की बेइज्जती भी कर दी है। पाकिस्तान की भूखी-नंगी हालात को मुनीर से बेहतर कौन जानता होगा। उसके उदाहरण भी वैसे ही है।

मुनीर ने कहा, “भारत एक चमचमाती हुई मर्सिडीज़ है जो फेरारी की तरह हाईवे पर आ रही है। हम बजरी से भरा एक डंप ट्रक हैं। अगर ट्रक कार से टकरा जाए, तो नुकसान किसका होगा?”

पाकिस्तान खुद को सड़क छाप, टक्कर मारने वाले गुंडे से ज्यादा क्या ही समझेगा। दुनिया जानती है कि पाकिस्तान का ‘डंप ट्रक’ अब बिना पेट्रोल, बिना ड्राइवर और बिना ब्रेक के खाई में गिर चुका है। मुनीर ये मत भूलना कि भारत की मर्सिडीज दौड़ती रहेगी और पाकिस्तान का ट्रक कबाड़ में ही बिकेगा।

यह बात भी साफ है कि भारत ने पाकिस्तान के परमाणु ब्लैकमेल को ना सुनने का भी मन बना लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्पष्ट कर चुके हैं कि अब कोई न्यूक्लियर धमकी नहीं सुनी जाएगी।

मुनीर ने अपने दौरे के दौरान अमेरिकी राजनीतिक और सैन्य अधिकारियों के साथ-साथ पाकिस्तानी प्रवासी समुदाय से भी मुलाकात की। इस दौरान मुनीर ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के निवर्तमान कमांडर जनरल माइकल कुरीला के सेवानिवृत्ति समारोह और एडमिरल ब्रैड कूपर के कार्यभार ग्रहण समारोह में भी हिस्सा लिया है।

‘खुद को बॉस समझने वाले अर्थव्यवस्था करना चाहते हैं बर्बाद’…राजनाथ सिंह ने टैरिफ वॉर पर ट्रंप को सुनाई खरी-खरी: कहा – भारत को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ वॉर पर तीखा हमला बोला है। राजनाथ सिंह ने कहा कि कुछ लोग खुद को दुनिया का बॉस समझ बैठे हैं। ये लोग भारत की तेज विकास गति से नाराज हैं लेकिन कोई अब भारत को नहीं रोक सकता है।

टैरिफ वॉर पर राजनाथ सिंह का करारा वार

मध्य प्रदेश के रायसेन में आयोजित एक कार्यक्रम में राजनाथ सिंह ने कहा, “कुछ लोगों को भारत का तेज़ गति से होता हुआ विकास रास नहीं आ रहा है। उन्हें अच्छा नहीं लग रहा है। सबके बॉस तो हम हैं फिर भारत कैसे आगे बढ़ रहा है।”

उन्होंने कहा, “बहुत सारे लोगों द्वारा कोशिश की जा रही है, कुछ ऐसा करें कि भारत में, भारतवासियों के हाथों से जो चीजें तैयार होती हैं। वे दुनिया के देशों में जाएँ तो उन देशों में बनने वाली चीजें महँगी हो जाएँ ताकि दुनिया के लोग उन्हें ना खरीदें। भारत जितनी तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है, दुनिया की कोई ताकत भारत को विश्व की बड़ी शक्ति बनने से रोक नहीं सकती है।”

ट्रंप की टैरिफ धमकियों पर भारत का कड़ा पलटवार

ट्रंप द्वारा शुरू किए गए टैरिफ वॉर और भारत की दी गई रूस से तेल ना खरीदने की धमकी पर भारत ने कड़ा पलटवार किया है। ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ लगाने की घोषणा करते हुए रूस से तेल खरीदना बंद करने की माँग की है। ट्रंप की टैरिफ धमकी के बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से फोन पर बातचीत की है। भारत ने दिखा दिया है कि वो किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।

ट्रंप के टैरिफ की मार से जूझ रहे ब्राजील के राष्ट्रपति लुईस इनासियो लूला दा सिल्वा से भी पीएम मोदी ने बातचीत की है। लुला दा सिल्वा ने स्पष्ट किया था कि वे ट्रंप से टैरिफ के मुद्दे पर कोई बातचीत नहीं करेंगे। इसके अलावा वह पीएम मोदी चीन भी जाने वाले हैं और ट्रंप के टैरिफ के जवाब में रूस-भारत-चीन (RIC) सहयोग को फिर से मजबूत करने की बातचीत चल रही है।

पीएम मोदी कह चुके हैं ‘कीमत चुकाने’ की बात

पीएम मोदी ने टैरिफ धमकियों पर सीधे बयान नहीं दिया है। वह परोक्ष रूप से डेयरी उद्योग को लेकर अमेरिका से अटके व्यापार समझौते पर स्पष्ट संदेश दे चुके हैं। वह खुद ‘बहुत बड़ी कीमत चुकाने‘ की बात कह चुके हैं।

पीएम मोदी ने एमएस स्वामीनाथन शताब्दी अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में कहा था, “किसानों का हित हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। भारत अपने किसानों, पशुपालकों और मछुआरों के हितों से कभी समझौता नहीं करेगा। और मुझे पता है कि इसके लिए मुझे व्यक्तिगत रूप से बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी, लेकिन मैं तैयार हूँ।”

भारतीय और अमेरिकी अधिकारी व्यापार समझौते के लिए कई दौर की बैठकें कर चुके हैं और 15% टैरिफ पर यह समझौता होने की उम्मीद थी। भारत ने सिर्फ अमेरिका की शर्तों पर यह समझौता करने से इनकार कर दिया है।

ट्रंप बार-बार यह दावा भी करते रहे हैं कि भारत-पाकिस्तान के बीच हालिया संघर्ष को उन्होंने रुकवाया था। हालाँकि, भारत यह बार-बार नकारता रहा है और भारत ने कई बार यह साफ किया है कि पाकिस्तान के DGMO ने भारत के DGMO से बात कर संघर्ष रोकने का अनुरोध किया था। इसे लेकर भी ट्रंप झल्लाए हुए हैं।

‘फर्जी दस्तावेज’ के आधार पर 2 बार वोटिंग के दावे पर राहुल गाँधी को चुनाव आयोग ने भेजा नोटिस, प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए आरोपों के माँगे सबूत: 1 पते पर 80 वोटर वाला मामला भी निकला फेक

कॉन्ग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गाँधी चुनाव आयोग के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘फर्जी दस्तावेज’ दिखाने को लेकर आयोग के निशाने पर आ गए हैं। कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने राहुल गाँधी को नोटिस जारी करते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में उनके द्वारा लगाए गए आरोपों से जुड़े कागजात माँगे हैं।

राहुल गाँधी ने दिखाए फर्जी दस्तावेज!

7 अगस्त 2025 को राहुल गाँधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुछ दस्तावेज दिखाते हुए दावा किया था कि शकुन रानी नामक एक मतदाता की आईडी से दो बार वोट डाला गया है। राहुल गाँधी ने 70 वर्षीय शकुन रानी ने दो बार वोट बनवाने के लिए अप्लाई करने का दावा भी किया था। राहुल ने कहा, “इन्होंने (शकुन रानी) दो बार वोट किया है। पता नहीं इन्होंने किया है या किसी और ने किया है लेकिन इस ID कार्ड पर दो बार वोट लगा है। जो टिक लगी है वो पोलिंग बूथ के अधिकारी की है।”

राहुल गाँधी ने जो स्लाइड अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाई थी, उसमें बूथ नंबर 341 पर शकुन के दो बार वोट डालने का दावा था। इस स्लाइड में स्रोत के तौर पर ‘BLA द्वारा मार्क किया गया इलेक्टोरल रोल’ लिखा गया था।

राहुल गाँधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाई गई स्लाइड

कर्नाटक के CEO ने राहुल गाँधी के इस दावे पर आपत्ति जताते हुए इसे जाँच में गलत बताया गया है। CEO द्वारा जारी किए गए नोटिस में कहा गया है, “जाँच करने पर शकुन रानी ने बताया कि उन्होंने केवल एक बार मतदान किया है, 2 बार नहीं, जैसा कि आपने (राहुल गाँधी) आरोप लगाया है।”

CEO ने कहा, “हमारे ऑफिस द्वारा की गई शुरुआती जाँच से यह भी पता चला है कि आपके द्वारा प्रजेंटेशन में दिखाया गया टिक मार्क किया गया दस्तावेज मतदान अधिकारी द्वारा जारी किया गया दस्तावेज नहीं है।”

CEO ने राहुुल गाँधी से वो सभी दस्तावेज उपलब्ध कराने की माँग की है, जिनके आधार पर शकुन रानी या किसी अन्य शख्स के दो बार वोट करने की बात उन्होंने कही है।

मतदाता सूची पर भी राहुल गाँधी का फर्जी दावा

राहुल गाँधी ने रविवार (10 अगस्त 2025) को वोटर चोरी से जुड़ा एक कैंपेन लॉन्च किया। राहुल गाँधी ने X पर इसका वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “चुनाव आयोग से हमारी मांग साफ है-पारदर्शिता दिखाएं और डिजिटल मतदाता सूची सार्वजनिक करें।”

चुनाव आयोग ने कुछ ही देर में राहुल गाँधी की इस माँग का फैक्ट-चेक कर दिया। चुनाव आयोग ने कहा, “चुनाव से पहले प्रारूप एवं अंतिम मतदाता सूची की डिजिटल तथा भौतिक प्रतियाँ समस्त राजनीतिक दलों, जिनमें कॉन्ग्रेस (INC) भी सम्मिलित है, को उनके हस्ताक्षर के साथ विधिवत रूप से प्रदान की जाती हैं।”

चुनाव आयोग ने कहा, “यह दावा कि राजनीतिक दलों को मतदाता सूची की डिजिटल प्रतियाँ प्रदान नहीं की जातीं, पूरी तरह से झूठा और पूरी तरह भ्रामक है।”

राहुल गाँधी का एक पते 80 वोटर वाला दावा भी नहीं निकला सच

राहुल गाँधी ने एक मकान संख्या पर 80 फर्जी वोटरों का आरोप लगाते हुए जो दावा किया था उसकी भी अब पोल खुल गई है। महादेवपुरा के जिस मुनीयप्पा रेड्डी गार्डन क्षेत्र में यह मकान स्थित वहाँ के BLO मुनीरत्न ने न्यूज चैनल से बातचीत में बताया है कि यहाँ कोई डुप्लीकेसी का मामला नहीं है।

इस घर में अधिकांश लोग किराए पर रहने आते हैं और बीते 14 वर्षों से कोई स्थाई रूप से इसमें नहीं रहा है। पते के प्रमाण के लिए लोग रेंट एग्रीमेंट करवाकर वोटर आईडी बनवाते हैं लेकिन फिर मकान को छोड़ देते हैं।

मुनीरत्न ने कहा कि लोग रजिस्टर्ड हैं और जो अब कहीं और बाहर रह रहे हैं। पहले जिन लोगों का नाम यहाँ से रजिस्टर्ड था उनकी सूची बनाकर चुनाव आयोग को दे दी गई है और उसे हटा दिया जाएगा।

चुनाव आयोग ने राहुल से की है माफी की माँग

चुनाव आयोग ने राहुल गाँधी द्वारा लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताया है और कहा है कि इससे आयोग की निष्पक्षता पर गलत सवाल उठाए जा रहे हैं। आयोग ने जोर देकर कहा है कि लोकतंत्र की प्रक्रिया को बनाए रखने के लिए नेताओं को अपने बयान हमेशा तथ्य और ठोस सबूतों के साथ देना चाहिए।

आयोग ने यह भी कहा कि अगर राहुल गाँधी के पास अपने आरोपों को साबित करने के लिए कोई आधिकारिक दस्तावेज या साक्ष्य है, तो वे तुरंत उसे प्रस्तुत करें नहीं तो उन्हें पूरे देश से माफी माँगनी चाहिए।

जब से वित्त मंत्री ने गोल्ड से इंपोर्ट ड्यूटी घटाई, तब से केरल की ब्लैक इकॉनमी डगमगाई: काला धन घटने से रियल एस्टेट में छाई मंदी, अब 1Kg सोने पर सिर्फ ₹3 लाख मुनाफा

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जुलाई 2024 में देश में सोने के आयात पर 15% से घटाकर 6% शुल्क लगाने का फैसला लिया। इसका सबसे अधिक असर केरल को हुआ, जहाँ सालों से सोने के अवैध कारोबार के जरिए पैरलल इकॉनमी मजबूत हो रही थी। पैरलल इकॉनमी का मतलब है कि पैसों का लेन-देन तो हो रहा होता है, लेकिन वो किसी सिस्टम में दर्ज नहीं होता। इसी पैरलल इकॉनमी से निकले मनी को ब्लैक मनी भी कहते हैं।

बिजनेस वर्ल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, केरल के चार अतंरराष्ट्रीय हवाई अड्डे- तिरुवनंतपुरम, कोच्चि, कोझिकोड और कन्नुर खाड़ी देशों से सोने की तस्करी करने वाले मुख्य रास्ते हैं। यहाँ तक कि केरल की सोने की तस्करी का गढ़ माने जाने वाले दुबई से भी कनेक्शन मिले। केरल इन खाड़ी देशों से संबंध बेहतर करने के चलते ही ‘तस्करों का स्वर्ग’ बनता गया।

साल 2020 से 2023 तक केरल में 3,100 से अधिक सोना तस्करी के मामले सामने आए, इन सभी मामलों में करीब 200 से 400 टन अवैध सोना बरामद किया गया। लेकिन इससे भी हैरानी की बात यह है कि केरल में हर साल ₹1,31,586 करोड़ (15 अरब डॉलर) की कीमत के सोने की तस्करी होती थी, जो कि जब्त किए गए सोने के मुकाबले काफी कम मानी गई।

यह सोना तस्करी का कारोबार तब तक बढ़ता चला गया जब तक सोने के आयात में अच्छा शुल्क था। उस समय एक किलो सोने में करीब ₹9 लाख का मुनाफा होता, जिसमें से कुछ कैरियर शुल्क भी दिया जाता था। इस मुनाफा ने केवल तस्करों को अमीर नहीं बल्कि केरल की अनौपचारिक अर्थव्यवस्था (जिसका कागजों में कोई आकड़ा नहीं है) को भी गति दी।

इस काले धन से बिना हिसाब-किताब के रीयल एस्टेट डील, ज्वैलरी नेटवर्क और हवाला कारोबार चलाया गया। इससे जुड़ा एक मामला भी सामने आया था, जिसमें एक ज्वैलरी चेन के 4000 निवेशक थे, जो SEBI की सीमा का उल्लंघन है। ऐसी कंपनियाँ मनी लॉन्ड्रिंग जैसे अपराध में भी सक्रिय रहती हैं।

लेकिन वित्त मंत्री ने जब से सोने के आयात पर शुल्क घटाने का फैसला लिया है, तभी से यह पूरी व्यवस्था ढह गई है। एक किलों पर मुनाफा घटकर अब करीब ₹3 लाख रह गया है, कैरियर की फीस भी कम हो गई और यहाँ तक की खाड़ी देशों से केरल आने वाला सोना भी अब कम हो गया है। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड ने भी इस फैसले के बाद जब्तियों में तेज गिरावट की पुष्टि की है।

एयर ट्रैफिक के आँकड़े बताते हैं कि खाड़ी देशों से आने वाले यात्रियों की संख्या भी भारत में कम हुई है। यहाँ तक कि गल्फ एयर ने डिमांड कम होने के चलते साल 2025 में कालीकट की उड़ानें बंद कर दीं। इससे साफ है कि तस्करी के तार टूटने लगे हैं।

हालाँकि, इससे कानूनी सोने का व्यापार जरूर बढ़ा और वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने साल 2024 की तीसरी तिमाही में हर साल 18% वृद्धि दर्ज की। लेकिन अवैध नगदी के अचानक गायब होने से केरल की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा। 2024-25 में प्रदेश की GSDP ग्रोथ 6.19% रह गई, जो दक्षिण भारत में सबसे कम थी। रीयल एस्टेट, निर्माण और लग्जरी रिटेल जैसे सभी क्षेत्रों में गिरावट साफ दिखने लगी।

इस मंदी ने साफ कर दिया केरल की अर्थव्यवस्था अब तक काले धन पर निर्भर थी। केरल में प्रॉपर्टी डील 18% घटी, लग्जरी हाउसिंग की कीमतें 25% तक नीचे आईं और निर्माण क्षेत्र की वृद्धि राष्ट्रीय औसत से पीछे रह गई। खाड़ी से आने वाले रेमिटेंस में भी 2024 में 10% की कमी आई, जिससे प्रदेश में काला धन लाने वाले कानूनी और अवैध सोर्स दोनों की कमजोर हो गए।

यह कदम महज एक टैक्स सुधार नहीं था बल्कि एक रणनीतिक प्रहार था, जिसने आतंकवाद फंडिंग और राजनीतिक भ्रष्टाचार से जुड़े एक अपराधिक नेटवर्क को कमजोर कर दिया। लेकिन इस कहानी का राजनीतिक पहलू अभी भी जीवित है। साल 2020 के केरल गोल्ड स्मगलिंग केस की मुख्य आरोपितों में से एक स्वप्ना सुरेश ने 2023 में सनसनीखेज दावा किया कि उन्हें मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन का नाम केस से हटाने के लिए 30 करोड़ रुपए की पेशकश हुई थी।

एक फेसबुक लाइव ब्रॉडकास्ट में स्वप्ना सुरेश ने आरोप लगाया कि खुद मुख्यमंत्री ने उन्हें देश छोड़ने की धमकी दी और CPM के प्रदेश सचिव गोविंदन मास्टर के कहने पर पार्टी के लोग उन्हें डराने-धमकाने लगे। यहाँ तक कि उन्हें हरियाणा या जयपुर भेजने की योजना बनाई गई थी, जिसमें सरकार की तरफ से फ्लैट और फर्जी पासपोर्ट की भी व्यवस्था की जा रही थी।

स्वप्ना ने कई बार सीएम विजयन और उनके परिवार के सदस्यों और तीन कैबिनेट मंत्रियों के नाम हवाला और तस्करी से जुड़े मामलों में लिए हैं। उन्होंने पहले भी गवाही में कहा था कि 2016 में दुबई में मौजूद सीएम को भेजे जा रहे नगदी से भरे बैग को एयरपोर्ट स्कैनिंग में पकड़ा गया था, जो कांसुलर प्रोटोकॉल के तहत भेजा जा रहा था। उन्होंने यह भी दावा किया कि तब के प्रिंसिपल सेक्रेटरी एम. शिवशंकर के निर्देश पर UAE कॉन्सुलेट से मेटल से भरे बिरयानी के बर्तन मुख्यमंत्री के सरकारी आवास क्लिफ हाउस में ले जाए गए।

ये आरोप 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले सामने आए थे और 2024 में फिर से चर्चा में आ गए, जब केंद्र सरकार के इस राजकोषीय प्रहार ने उस आर्थिक जड़ को काट दिया, जिस पर यह पूरा अवैध साम्राज्य खड़ा था।

कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी के पति रॉबर्ट वाड्रा पर ED का शिकंजा, गुरुग्राम जमीन घोटाले में अवैध कमाई मामले में चार्जशीट दाखिल: अपराध से कमाए ₹58 करोड़, मनी लॉन्ड्रिंग का भी आरोप

कॉन्ग्रेस महासचिव और वायनाड की सांसद प्रियंका गाँधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा को 58 करोड़ रुपए की अपराध की आय हुई थी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ दायर चार्जशीट में यह अहम खुलासा हुआ है। यह मामला गुरुग्राम में कथित जमीन घोटाले से जुड़ा हुआ है। ED ने गुरुग्राम स्थित शिखोपुर (अब सेक्टर 83) लैंड डील मामले में 17 जुलाई 2025 को चार्जशीट दायर की थी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, वाड्रा को यह धन दो कंपनियों के जरिए आया था। इसमें ब्लू ब्रीज ट्रेडिंग प्राइवेट लिमिटेड (BBTPL) के जरिए 5 करोड़ रुपए और स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड (SLHPL) के जरिए 53 करोड़ रुपए वाड्रा को मिले हैं। बताया जा रहा है कि ये दोनों कंपनियाँ रॉबर्ट वाड्रा के कारोबारी नेटवर्क से जुड़ी हुई हैं।

वाड्रा ने यह रकम अचल संपत्तियाँ खरीदने, अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश करने, कंपनियों को कर्ज देने और अपने समूह की कंपनियों का बकाया चुकाने में लगाई है। ईडी का आरोप है कि यह पूरी रकम अवैध कमाई से आई थी और इसका इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। जांच एजेंसी ने कहा कि यह पैसा ‘शेड्यूल अपराध’ से आया है यानी उसे सोर्स से जिसे कानून पहले से ही अपराध मानता है।

अधिकारियों के मुताबिक, जांच में बैंक लेन-देन, कंपनी के रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों के आधार पर पैसों की पूरी आवाजाही का पता लगाया गया। ईडी ने बताया कि जिन कंपनियों से यह रकम आई, उन्हें वाड्रा के करीबी सहयोगी चला रहे थे। एजेंसी का आरोप है कि इन कंपनियों का इस्तेमाल पैसे को वैध दिखाने के लिए किया गया।

इससे पहले वाड्रा को गुरुग्राम में 3.5 एकड़ जमीन रिश्वत में मिलने की बात भी सामने आई थी। चार्जशीट के मुताबिक, ओंकारेश्वर प्रॉप्रटीज प्राइवेट लिमिटेड (OPPL) ने जमीन स्काई लाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड (SLHPL) को रिश्वत के तौर पर दी थी ताकि SLHPL के निदेशक रॉबर्ट वाड्रा अपनी व्यक्तिगत पहुँच का इस्तेमाल कर हरियाणा के तत्कालीन ‘नगर एवं ग्राम नियोजन’ मंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से OPPL को उसी गाँव में हाउसिंग लाइसेंस दिला सकें।

यह मामला 2018 में हरियाणा पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के बाद शुरू हुआ था। ईडी ने दिसंबर 2018 में इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की थी। अदालत ने इस मामले में वाड्रा को नोटिस जारी किया है और 28 अगस्त को इसकी सुनवाई होनी है। गौरतलब है कि यह वाड्रा के खिलाफ दायर पहली आपराधिक चार्जशीट है।

पाकिस्तान में पत्रकार पर चला सरकार का चाबुक, अमेरिका जा रहे ‘तोते वाले पत्रकार’ असद अली तूर को इस्लामाबाद एयरपोर्ट पर रोका: PNIL में डाला नाम, प्रेस फ्रीडम में सबसे नीचे है देश

पाकिस्तान में मीडिया की हालत बद से बदतर होती जा रही है और वहाँ पत्रकारों पर शिकंजा कसना कोई नई बात नहीं है। इस बार पाकिस्तान ने अपने पत्रकार असद अली तूर को इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरने से रोक दिया। असद कुछ दिनों पहले तोता खरीद को लेकर चर्चा में आए थे, जब तोता खरीदने के बाद इनके बैंक अकाउंट्स को फ्रीज कर दिया गया था।

असद अली तूर इस्लामाबाद से अमेरिकी विदेश मंत्रालय के 12 दिवसीय इंटरनेशनल विजिटर लीडरशिप प्रोग्राम (IVLP) में भाग लेने के लिए वॉशिंगटन जा रहे थे। इमिग्रेशन अधिकारियों ने तूर ने कहा कि उनका नाम पाकिस्तान की प्रोविजनल नेशनल आइडेंटिफिकेशन लिस्ट (PNIL) में है। पाकिस्तान में इस लिस्ट में शामिल लोगों को कुछ समय तक विदेश यात्रा से रोक दिया जाता है।

तूर ने पाकिस्तानी सरकार को घेरा

तूर ने शनिवार (9 अगस्त 2025) को एक्स पर एक पोस्ट में पाकिस्तानी सरकार की आलोचना की है। तूर ने लिखा, “मैंने बार-बार PNIL में अपना नाम जोड़ने का कारण पूछा लेकिन अधिकारियों के पास कोई जवाब नहीं था।”

तूर ने कहा, “पाकिस्तान में पत्रकारिता और सत्ता के सामने सच बोलना अपराध माना जाता है। हाँ, मैंने यह अपराध किया है और मैं यह अपराध दोहराता रहूँगा। एक पत्रकार को रोकना इस ‘हाइब्रिड’ शासन की एक और उपलब्धि है, जिसके शासन में पाकिस्तान विश्व प्रेस स्वतंत्रता सूचकांक में 152वें स्थान से 6 अंक गिरकर 158वें स्थान पर आ गया है।”

पाकिस्तान मानवाधिकार परिषद (HRCP) ने तूर को विदेश जाने से रोके जाने की निंदा की हैं और पत्रकारों के उत्पीड़न को रोकने की माँग की है।

तूर की एक्स प्रोफाइल से पता चलता है कि वह ब्लूचिस्तान के गायब हुए लोगों को लेकर प्रदर्शन करने वालों का समर्थन कर रहे थे। तूर ने कई पोस्ट में पाकिस्तान की सरकार पर सवाल भी उठाए थे।

तूर की X पोस्ट

पत्रकारों के लिए सबसे खतरनाक देशों में शामिल पाकिस्तान

रिपोटर्स विदआउट बॉर्डर्स (RSF) द्वारा जारी 2025 के प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में पाकिस्तान 180 देशों की सूची में 158वें नंबर पर है। RSF ने अपनी प्रोफाइल में कहा है कि पाकिस्तान पत्रकारों के लिए दुनिया के सबसे खतरनाक देशों में से एक है और जहाँ हर साल कई पत्रकारों की हत्याएँ होती हैं।

अगर कोई पाकिस्तानी पत्रकार वहाँ की सेना के नियमों के खिलाफ जाता है तो उसके अपहरण होने, कई वर्षों तक जेल में रहने का खतरा बना रहता है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI किसी भी आलोचना करने वाले को ‘चुप’ करा देती है। पत्रकारिता की सुरक्षा की आड़ लेकर पाकिस्तानी कानून का उपयोग सरकार और सेना की किसी भी आलोचना को सेंसर करने के लिए किया जाता है।

पाकिस्तान में मुश्किल होती पत्रकारिता

पाकिस्तान में पत्रकारों के लिए स्थितियाँ मुश्किल होती जा रही हैं। सरकार से सवाल करने वाले पत्रकारों पर हमले किए जाने का लंबा इतिहास है। हामिद मीर जैसे कई पत्रकारों को उनकी पत्रकारिता के लिए निशाना बनाया गया है। 2025 के शुरुआत में आई HRCP की रिपोर्ट में बताया गया कि पाकिस्तान में स्वतंत्र पत्रकारिता के पक्षधर मीडिया आउटलेट्स को कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है। इस रिपोर्ट में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बिगड़ती स्थिति का वर्णन किया गया था।

वायुसेना के शौर्य पर संदेह, विदेशी मीडिया पर विश्वास! कॉन्ग्रेस नेताओं ने फिर उठाए ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल: क्या सेना के पराक्रम को छोटा दिखाकर देशद्रोही ताकतों को देना चाहती है बढ़ावा?

वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने एक दिन पहले (शनिवार – 9 अगस्त 2025) ही ऑपरेशन सिंदूर को लेकर एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि भारत ने इस ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान के पाँच लड़ाकू विमानों को मार गिराया था। यह बयान भारतीय वायुसेना की ताकत, रणनीति और साहस का प्रतीक है। इस बयान से जहाँ देशवासियों का मनोबल बढ़ा, वहीं कॉन्ग्रेस नेताओं ने इस पर सवाल खड़े कर दिए।

वहीं कॉन्ग्रेस के एक और वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने भी संदेह जताते हुए कहा कि उन्हें वायुसेना प्रमुख की बातों पर शक नहीं है, लेकिन सरकार ने यह स्पष्ट क्यों नहीं किया कि भारतीय विमान भी मारे गए या नहीं? यानी जब भी सेना या सरकार की ओर से कोई जानकारी दी जाती है, कॉन्ग्रेस उसमें भी संदेह खोजती है।

कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने आरोप लगाया कि वायुसेना प्रमुख यह बयान तब दे रहे हैं जब वोट चोरी का मामला सामने आया है। उन्होंने कहा कि यह बयान ध्यान भटकाने के लिए दिया जा रहा है और सेना को राजनीतिक मोहरा बनाया जा रहा है। यह एक गंभीर आरोप है, जो देश की सुरक्षा से जुड़े विषय को सस्ती राजनीति में घसीटने जैसा है।

यह पहला मौका नहीं है जब कॉन्ग्रेस ने भारतीय सेना के पराक्रम पर सवाल उठाए हों। बालाकोट एयर स्ट्राइक, उरी सर्जिकल स्ट्राइक और गलवान संघर्ष जैसे मामलों में भी कॉन्ग्रेस ने सेना के दावों पर भरोसा करने के बजाय विदेशी मीडिया की रिपोर्टों का हवाला दिया। खासकर ब्रिटिश मीडिया जैसे BBC की रिपोर्ट्स को सच मानते हुए बार-बार भारतीय सेना की छवि को कमजोर करने की कोशिश की गई है।

कॉन्ग्रेस  को यह समझने की जरूरत है कि राजनीति में आलोचना जरूरी हो सकती है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में सेना का सम्मान और विश्वास सर्वोपरि होना चाहिए। अगर हर सैन्य ऑपरेशन को राजनीतिक चश्मे से देखा जाएगा, तो इससे भारत की सामरिक छवि भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभावित होगी।

सोहिल खान ने सोहिल राजपूत बन हिंदू युवती को शादी का झाँसा देकर किया रेप, जबरन धर्मांतरण के बाद पढ़ाया निकाह: अम्मी रजिया-अब्बू और मौलवी अब्दुल रहमान समेत 13 के खिलाफ FIR

इंदौर के परदेशीपुरा में रहने वाली 23 साल की एक हिंदू लड़की ने पुलिस में शिकायत की कि सोहिल खान नाम के शख्स ने उसका जिंदगी बर्बाद कर दी। उसने बताया कि करीब तीन साल पहले फेसबुक पर फाइटर राजपूत नाम से एक लड़के से उसकी दोस्ती हुई। उसने अपना नाम सोहिल राजपूत बताया और कहा कि वो हिंदू है। दोनों की बातचीत एक साल तक चली। इस दौरान सोहिल ने शादी का वादा किया। लड़की ने हाँ कर दी, लेकिन उसके मम्मी-पापा शादी के लिए तैयार नहीं हुए।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, सोहिल ने लड़की को बहाने से 21 जून 2025 को अहमदाबाद बुलाया। उसने 3 लाख रुपये और कुछ कागजात साथ लाने को कहा। अहमदाबाद में एक होटल में दो दिन तक रखा और शादी से पहले ही जबरदस्ती शारीरिक संबंध बनाए। फिर कुछ गुजराती में कागज बनवाए और लड़की से साइन करवाए। लड़की को गुजराती नहीं आती थी, इसलिए वो समझ नहीं पाई कि कागजों में क्या लिखा है।

इसके बाद सोहिल उसे अपने दोस्त के कारखाने में बने एक कमरे में ले गया। फिर अपने घर ले गया, जहाँ उसके अम्मी-अब्बू, भाई-बहन और कुछ रिश्तेदार थे। वहाँ लड़की को पता चला कि सोहिल का असली नाम सोहिल खान है और वो मुस्लिम है। सोहिल और उसके परिवार ने मिलकर उस पर धर्म बदलने का दबाव डाला। जबरदस्ती कलमा पढ़वाया और उसका नाम सना फातिमा रख दिया। फिर परिवार वालों ने मिलकर सोहिल के साथ उसका निकाह करवा दिया।

निकाह के बाद लड़की को घर से बाहर नहीं निकलने दिया गया। उसकी हर हरकत पर नजर रखी जाती थी। एक दिन उसने सोहिल का फोन देखा, तो पता चला कि वो और भी कई लड़कियों से बात करता है। जब उसने सोहिल से इस बारे में पूछा, तो उसने बेशर्मी से कहा कि हिंदू लड़कियों को फँसाना उसका काम है।

लड़की ने हिम्मत करके अपनी माँ और भाई से फोन पर संपर्क किया और सारी बात बताई। उनके साथ मिलकर उसने शनिवार (9 अगस्त 2025) को परदेशीपुरा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की।

पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की और सोहिल खान उर्फ फाइटर राजपूत, उसकी अम्मी रजिया बेगम, अब्बू मोहम्मद यूनुस खान, भाई जाहिद खान, बहन नाजिया खान, रिश्तेदार मोहम्मद रफीक, मोहम्मद सलीम, शबाना बी, फरहाना बी, मोहम्मद इरफान, मोहम्मद शाहिद, मोहम्मद आसिफ और मौलवी अब्दुल रहमान के खिलाफ रेप, धोखाधड़ी, जबरन धर्म परिवर्तन और धमकी देने की धाराओं में केस दर्ज किया। पुलिस ने बताया कि मामले की जाँच चल रही है और आरोपितों की तलाश की जा रही है।