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मोदी सरकार ने J&K से 370 किया साफ तो हूर पाने की कश्मीरी लौंडों की तमन्ना भी हुई फुर्र: 2018 में 200 बने थे आतंकी, 2025 में केवल 1

जम्मू-कश्मीर में नए स्थानीय आतंकियों की भर्ती लगभग ना के बराबर बची है। अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद आतंकियों की भर्ती में लगातार कमी हुई है। 2018 में 200 युवाओं ने आतंकवाद के लिए बंदूक उठाई थी। वहीं, इस वर्ष जम्मू-कश्मीर से केवल एक युवक आतंकी बना है।

अनुच्छेद 370 से कैसे बढ़ा आतंकवाद?

अनुच्छेद 370 को जम्मू-कश्मीर में बढ़ते आतंकवाद से जोड़कर देखा जाता रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जनवरी 2025 में कहा था कि अनुच्छेद 370 ने युवाओं के मन में अलगाव का बीज बोया था।

उन्होंने कहा था, “आतंकवाद देश के अन्य मुस्लिम इलाकों में क्यों नहीं फैला? एक तर्क यह भी है कि कश्मीर की सीमा पाकिस्तान से लगती है। यहाँ तक कि गुजरात और राजस्थान की सीमा भी पाकिस्तान से लगती है लेकिन आतंकवाद वहाँ तक नहीं पहुँचा। अनुच्छेद 370 ने इस भ्रांति को बढ़ावा दिया कि भारत और कश्मीर के बीच संबंध अस्थाई हैं। धीरे-धीरे, अलगाववाद आतंकवाद में बदल गया।”

जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कुछ दिनों पहले ही कहा था कि अनुच्छेद 370 के कारण आतंकवाद और आतंकी तंत्र को बढ़ावा मिला है। सिन्हा ने कहा कि 5 अगस्त 2019 को आतंकी तंत्र के खात्मे की शुरुआत हो गई थी।

200 से 1 आतंकी तक: 7 वर्षों में बदली सूरत

2016 में हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद घाटी में आतंकी भर्ती तेज हुई थी। 2018 में यह उच्चतम स्तर पर पहुँच गई। यह वही दौर था, जब आतंकियों के खुलेआम जनाजे निकाले जाते थे, स्थानीय युवाओं को भड़काया जाता था और सोशल मीडिया प्रचार व भाषणों के जरिए युवाओं को हथियार उठाने के लिए प्रेरित किया जाता था।

5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटा दिया गया और विशेष दर्जा खत्म हो गए। इसके बाद हालात तेजी से बदलने लगे। 2018 में जहाँ करीब 200 कश्मीरी युवाओं ने आतंकी संगठनों का रुख किया था, वहीं 2024 में यह संख्या घटकर सिर्फ 7 रह गई। 2025 में अब तक सिर्फ एक मामला सामने आया है।

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद आतंकी भर्ती में रिकॉर्ड कमी आई है। आधिकारिक आँकड़ों के मुताबिक, आतंकी संगठनों में भर्ती हुए स्थानीय युवकों की संख्या 2020 में 160, 2021 में 125, 2022 में 100, 2023 में 22 और 2024 में सिर्फ 7 रह गई। वहीं, 2025 में जनवरी में कुलगाम से एक युवक गायब हुआ था और बाद में खबर आई कि वह आतंकी संगठन में शामिल हो गया है।

अब आतंकियों के छोटे-छोटे समूह ज्यादातर पाकिस्तान से आने वाले प्रशिक्षित लड़ाकों से बनते हैं। 2019 से 2024 के बीच आतंकवाद से जुड़ी 700 घटनाओं में 1,050 आतंकियों को ढेर कर दिया गया है।

इन वजहों से कम हुई आतंकियों की भर्ती

अनुच्छेद 370 हटने के बाद घाटी में आतंकी भर्ती को रोकने के लिए सुरक्षा एजेंसियों द्वारा उठाए गए कदमों का असर अब साफ नजर आ रहा है। एजेंसियों ने एक के बाद एक ऐसे कई कदम उठाए जिनके चलते आतंकियों की भर्ती कम होती गई। पुलिस और एजेंसियों ने इंटेलिजेंस आधारित ऑपरेशनों पर जोर दिया। संदिग्ध युवाओं की सोशल मीडिया गतिविधियों, फोन कॉल्स और आने-जाने पर कड़ी निगरानी रखी गई।

जिन युवकों के आतंकी रास्ते पर जाने का शक था, उनके परिवारों से सीधे संपर्क किया गया। वहीं, जो लोग गाँँव-गाँँव घूमकर या सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को भड़काते थे। उन पर भी सरकार ने नजर बनाए रखी। इन्हें गिरफ्तार किया गया या ऑपरेशनों में ढेर किया गया।

2020 से एक बड़ा बदलाव आया और मारे गए आतंकियों के जनाजों पर रोक लगा दी गई। पहले, मारे गए आतंकियों के शव उनके गाँँवों में सौंप दिए जाते थे, जहां हजारों की भीड़ जुटती थी और भड़काऊ भाषण होते थे। ऐसे जनाजे कई बार भर्ती का मंच बन जाते थे। लेकिन अब शव गाँवों में देने की बजाय उत्तर कश्मीर के दूरदराज इलाकों में दफनाए जाने लगे।

LoC (लाइन ऑफ कंट्रोल) पर घुसपैठ पर नकेल कसी गई। इसके सहारे पाकिस्तान से लोग आकर स्थानीय आतंकियों को भड़काते थे। इसके लिए ड्रोन निगरानी, मजबूत फेंसिंग और हाई-टेक काउंटर-इंफिल्ट्रेशन ग्रिड का इस्तेमाल हुआ। इससे पाकिस्तान से हथियार, गोलाबारूद और आतंकी घुसपैठियों की सप्लाई चेन लगभग टूट गई।

370 हटने के बाद कैसे बदले हालात?

संसद ने 5 अगस्त 2019 को अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाने को मंजूरी दी और 31 अक्टूबर, 2019 से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग केंद्र शासित प्रदेशों में बाँट दिया गया। इसके साथ ही, केंद्र सरकार के 170 कानून जो पहले लागू नहीं थे, अब वे इस क्षेत्र में लागू कर दिए गए।

370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में सत्ता का विकेंद्रीकरण होने भी शुरू हो गया। जनपद और जिला पंचायत के चुनाव हुए, 2018 में पंचायत चुनाव हुए और इसमें 74.1% मतदान हुआ। 2019 में पहली बार आयोजित ब्लॉक डेवलेपमेंट काउंसिल चुनाव में 98.3% मतदान हुआ।

कुछ दिनों पहले हुआ पहलगाम आतंकी हमला एक अपवाद जैसा था। आँकड़ों के मुताबिक, बीते एक दशक के दौरान वर्ष 2023 में आतंकी हिंसा में मरने वालों की संख्या सबसे कम रही है। इनमें 33 प्रतिशत कमी आ चुकी है।

आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार, 5 अगस्त 2019 से 4 अगस्त 2025 के बीच जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद से संबंधित कुल 1,230 मौतें दर्ज की गईं। वहीं, वर्ष 2013 से 2019 तक की अवधि में हुई कुल 1,845 मौतें हुई थीं। अनुच्छेद 370 हटने से पहले की छह वर्ष की अवधि 1121 आतंकवादी मारे गए, 475 सुरक्षाकर्मी और 243 नागरिक बलिदानी हुए हैं।

370 हटने के बाद विकास कार्यों में तेजी आई है। आईआईटी जम्मू, रियासी मेडिकल कॉलेज, एम्स अवंतीपोरा (2025 तक शुरू होने की उम्मीद) जैसे संस्थानों से शिक्षा को बढ़ावा मिला, वहीं 2019 के बाद 80,000 करोड़ रुपए का निवेश आया।

उदहमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक पूरी तरह चालू हो गया, कई टनल प्रोजेक्ट्स से कनेक्टिविटी बेहतर हुई और भारतनेट के तहत 9,789 फाइबर कनेक्शन दिए गए। पर्यटन में भी रिकॉर्ड वृद्धि हुई, श्रीनगर को 2024 में यूनेस्को ने ‘वर्ल्ड क्राफ्ट सिटी’ का दर्जा दिया और 2019 की तुलना में फ्लाइटों की संख्या 35 से बढ़कर 125 प्रतिदिन हो गई।

जम्मू-कश्मीर में कर राजस्व में भारी वृद्धि देखी गई। 2022 और 2024 के बीच जीएसटी संग्रह में 12%, उत्पाद शुल्क में 39% और कुल गैर-कर राजस्व में 25% की वृद्धि हुई है। राज्य का GDP 2015-16 के 1.17 लाख करोड़ रुपए से दोगुना होकर 2023-24 में 2.45 लाख करोड़ रुपए और 2024-25 में 2.63 लाख करोड़ रुपए हो गया है।

2023 में, रिकॉर्ड 2.11 करोड़ पर्यटक जम्मू-कश्मीर आए और पर्यटन ने GDP में 7% का योगदान दिया। 2019 के बाद 75 नए स्पॉ खोले गए। 2,000 से अधिक होमस्टे पंजीकृत किए गए जिनमें बहुत सारे दूरदराज के गांवों में स्थित है।

‘रनवे पर था विमान, उस पर ही पायलट उतार रहा था हवाई जहाज’: कॉन्ग्रेस MP केसी वेणुगोपाल के दावे को एयर इंडिया ने बताया झूठ, BJP बोली- इन्हें नो फ्लाई लिस्ट में डालो

केसी वेणुगोपाल ने अपने एक ट्वीट से सोशल मीडिया पर तूफान खड़ा कर दिया। उन्होंने दावा किया कि एयर इंडिया की फ्लाइट AI 2455… जिसमें वो खुद, कई सांसद और सैकड़ों यात्री सवार थे, एक बड़े हादसे से बाल-बाल बची।

वेणुगोपाल के मुताबिक, तिरुवनंतपुरम से दिल्ली जा रही इस फ्लाइट में पहले तो देरी हुई, फिर टेकऑफ के बाद भयानक टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा। करीब एक घंटे बाद कैप्टन ने बताया कि फ्लाइट के सिग्नल में खराबी है, जिसके चलते फ्लाइट को चेन्नई डायवर्ट करना पड़ा।

चेन्नई में लैंडिंग के दौरान के समय को लेकर वेणुगोपाल ने दावा किया कि रनवे पर दूसरा विमान होने की वजह से पायलट को आखिरी पल में फ्लाइट को फिर से ऊपर ले जाना पड़ा। उनके अनुसार, पायलट की सूझबूझ ने सभी की जान बचाई। दूसरी कोशिश में फ्लाइट सुरक्षित उतर गई। वेणुगोपाल ने DGCA और MoCA से इस मामले की तुरंत जाँच करने और दोषियों को सजा देने की माँग की। लेकिन इस पूरे मामले में एयर इंडिया का जवाब बिल्कुल अलग है।

एयर इंडिया ने तुरंत जवाब दिया कि ऐसा कुछ नहीं हुआ। उनके अनुसार, खराब मौसम और तकनीकी खराबी की आशंका में फ्लाइट को चेन्नई डायवर्ट किया गया था, और लैंडिंग के दौरान कोई दूसरा विमान रनवे पर नहीं था। एयर इंडिया ने साफ कहा कि उनके पायलट ने पूरी प्रक्रिया का पालन किया और सुरक्षा को सबसे ऊपर रखा।

एयर इंडिया ने कहा कि उनके पायलट अच्छी तरह प्रशिक्षित हैं और उन्होंने इस स्थिति में सभी मानक प्रक्रियाओं का पालन किया। एयरलाइन ने ये भी कहा कि ऐसी घटनाएँ यात्रियों के लिए परेशान करने वाली हो सकती हैं और इसके लिए उन्हें खेद है, लेकिन सुरक्षा हमेशा उनकी पहली प्राथमिकता है।

ये मामला इसलिए गंभीर है, क्योंकि एक बड़े नेता के ऐसे बयान से न सिर्फ एयर इंडिया की साख पर सवाल उठते हैं, बल्कि आम यात्रियों में डर और अविश्वास भी पैदा होता है।

इस मामले में बीजेपी नेता अमित मालवीय ने कॉन्ग्रेस के सीनियर नेता केसी वेणुगोपाल के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार किया। मालवीय ने कहा कि वेणुगोपाल का दावा बहुत गंभीर है। वेणुगोपाल ने कहा था कि चेन्नई में एक एयर इंडिया की फ्लाइट को लैंडिंग रोकनी पड़ी क्योंकि रनवे पर दूसरा विमान था। लेकिन एयर इंडिया ने तुरंत उनके दावे को गलत बताया।

मालवीय ने कहा कि इनमें से कोई एक झूठ बोल रहा है। उन्होंने कहा कि विमानन सुरक्षा सबसे जरूरी है और जिम्मेदार लोगों के सोशल मीडिया पोस्ट को बिना जाँच के नहीं छोड़ा जा सकता। अगर वेणुगोपाल का दावा सही है, तो चेन्नई एटीसी और एयर इंडिया को जवाब देना होगा। लेकिन अगर ये गलत है, तो वेणुगोपाल को सजा मिलनी चाहिए, जैसे कि उन्हें नो-फ्लाई लिस्ट में डाल देना चाहिए। मालवीय ने कहा कि झूठी खबरें फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठने चाहिए।

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लाखों लोगों तक पहुँचती है और अगर वो गलत है, तो अफवाहें और डर फैलने में वक्त नहीं लगता। लोग पहले से ही हवाई यात्रा को लेकर सतर्क रहते हैं। ऐसे में अगर कोई जिम्मेदार नेता बिना पुख्ता सबूत के ऐसी बातें कहता है, तो लोग सोचने लगते हैं कि क्या हवाई यात्रा वाकई सुरक्षित है? इससे न सिर्फ एयर इंडिया, बल्कि पूरे विमानन उद्योग और सार्वजनिक परिवहन पर लोगों का भरोसा डगमगा सकता है।

आसिम मुनीर ने मुकेश अंबानी को धमकाया: अमेरिका के प्यादे बना रहे भारत के उद्योगपतियों को निशाना, राहुल गाँधी दे रहे ‘मौन समर्थन’

भारत की आर्थिक तरक्की में उसके उद्योगपतियों का बड़ा हाथ है। पहले टाटा-बिरला और बाद में अडानी-अम्बानी जैसे कारोबारी समूह भारत की आर्थिक तरक्की को आगे ले जा रहे हैं। इसी आर्थिक तरक्की ने भारत को पाकिस्तान से कई गुना आगे खड़ा किया है और मजबूत बनाया है। इस आर्थिक तरक्की के स्तम्भों को लगातार निशाने पर लिया जा रहा है। इसके पीछे वह तत्व हैं, जिन्हें अमेरिका या उससे जुड़ी एजेंसियों का समर्थन प्राप्त है। कॉन्ग्रेस MP राहुल गाँधी भारतीय आर्थिक हितों को निशाना बनाने वालों के सुर में सुर मिलाते रहे हैं।

‘मुल्ला मुनीर’ ने अब मुकेश अम्बानी पर किया प्रलाप

आर्थिक दौड़ में भारत से कोसों पीछे हो चुका पाकिस्तान वर्तमान में कर्जों के बल पर ज़िंदा है। IMF, अमेरिका और सऊदी के पैसों पर उसकी अर्थव्यवस्था दिवालिया होने से बच रही है। भारत की बराबरी ना कर पाने के चलते पाकिस्तान अब भारत की अर्थव्यवस्था के स्तम्भों को कमजोर करने की धमकियाँ दे रहा है। इसी कड़ी में पाक फ़ौज के सरगना आसिम मुनीर ने अमेरिकी जमीन से भारतीय कारोबारी मुकेश अम्बानी को निशाना बनाने की बात कही है।

द प्रिंट में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, मुनीर ने अमेरिका में एक जनरल के विदाई समारोह में अपने भाषण में खूब जहर उगला। इसमें मुनीर ने एक सोशल मीडिया पोस्ट का हवाला दिया। इसमें मुकेश अम्बानी की एक तस्वीर और कुरान की एक आयत थी। मुनीर ने अपने इस वक्तव्य में मुकेश अम्बानी की हत्या की धमकी एक तरह से दी। दरअसल, जिस आयत का जिक्र मुकेश अम्बानी की फोटो पर था, चिड़ियों ने दुश्मन की सेना पर पत्थर गिराए और उसे तबाह किया।

मुनीर ने सीधे तौर पर यह कहने का प्रयास किया कि वह अगले युद्ध में मुकेश अम्बानी को निशाना बनाएँगे। किसी सैन्य अधिकारी का दूसरे देश के उद्योगपति को लेकर ऐसा बयान काफी चौंकाने वाला था। हालाँकि, पाक फ़ौज के मुखिया से और कोई उम्मीद नहीं की जा सकती थी। ज्यादा परेशान करने वाली बात है कि यह धमकी लाहौर या इस्लामाबाद से नहीं बल्कि अमेरिका की जमीन से दी गई। उस कमरे से दी गई, जहाँ अमेरिका के बड़े से बड़े सैन्य अधिकारी तक मौजूद थे।

इसे सीधे तौर पर समझा जाए कि अमेरिका की शह पर मुनीर भारतीय कारोबारी को धमका रहे हैं, इसमें अमेरिका की मौन सहमति भी मानी जाए। उन्हें भारतीय कारोबारी को धमकाते टाइम ना किसी ने रोका, ना किसी ने टोका। यह मौन स्वीकृति बताती है कि मुनीर के अम्बानी पर हमले के दौरान अमेरिका उसके साथ खड़ा रहेगा। मुनीर की लफंगई का कई तरीकों से अर्थ निकाला गया है। कुछ ने इसे गुजरात के के जामनगर रिफाइनरी से भी जोड़ा।

जामनगर में रिलाइंस की बड़ी रिफाइनरी है। यह ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी खतरे की जद में बताई गई थी। इस तरह से यह मतलब भी निकाला जाए कि भारतीय औद्योगिक हितों का निशाना बनाए जाने से अमेरिका को कोई समस्या नहीं है और वह इसके लिए अपनी जमीन भी इस्तेमाल होने देगा, इसके साथ ही वह पाकिस्तान के साथ खड़ा रहेगा। मुनीर का बयान भले ही चौंकाने वाला हो लेकिन अमेरिका का भारतीय कारोबारी हितों को प्रभावित करना कोई नई बात नहीं है।

अडानी को निशाना बना रही थी अमेरिकी फर्म

अमेरिकी जमीन से जहाँ मुनीर ने भारतीय कारोबारी मुकेश अम्बानी को निशाना बनाया, तो कुछ समय पहले तक दूसरे कारोबारी गौतम अडानी भी उसकी ही जमीन से निशाना बनाए जा रहे थे। अमेरिकी शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग ने जनवरी, 2023 से लेकर 2024 तक लगातार अडानी पर रिपोर्ट्स छापीं। अडानी पर हिंडनबर्ग रिपोर्ट ने तमाम तरह के आरोप लगाए। इसके आधार पर भारत में खूब हंगामा हुआ। भारतीय निवेशकों की लाखों करोड़ की पूँजी चली गई।

अडानी पर हिंडनबर्ग की इस रिपोर्ट के आधार पर प्रधानमंत्री मोदी तक को निशाना बनाया गया। अडानी समूह पर धोखाधड़ी, शेयर बाजार में गड़बड़ी और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने जैसे आरोप तक लगाए गए। यह सब उस हिंडनबर्ग ने किया, जिसका सीधा संबंध जॉर्ज सोरोस से था। यह वही सोरोस है, जिसने दुनिया भर में सत्ताएँ बदलने का काम किया है। वह भारत के खिलाफ भी जहर उगल रहा था। तब अमेरिका के बायडेन प्रशासन ने हिंडनबर्ग और बाकी ऐसे तत्वों को खुली छूट दी कि वह भारतीय कारोबारी हितों को नुकसान पहुँचे।

अडानी के खिलाफ अमेरिका में बायडेन प्रशासन के अंतिम दिनों में मुकदमा भी दर्ज कर दिया गया। एक कथित रिश्वतखोरी के मामले में गौतम अडानी और उनकी कम्पनी के बाकी लोगों को आरोपित बनाया गया है। इसमें अमेरिका की सरकारी एजेंसी SEC तक अडानी को निशाना बनाने में जुटी हुई थी। अडानी को इससे भी कोई विशेष फर्क नहीं पड़ा लेकिन भारत के आर्थिक हितों को लेकर अमेरिका का क्या रुख है, यह जरूर साफ़ हुआ।

राहुल गाँधी भी इसी गेम में शामिल!

जहाँ पाकिस्तान-अमेरिका का नेक्सस भारतीय कारोबारियों को निशाने ले रहा है तो वहीं उसको मौन सहयोग कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी दे रहे हैं। राहुल गाँधी ने हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद तमाम आरोप प्रधानमंत्री मोदी पर लगाए थे। कॉन्ग्रेस ने इस दौरान हिंडनबर्ग द्वारा प्रसारित हर झूठ को आगे बढ़ाया। राहुल गाँधी ने अडानी को PM मोदी का दोस्त बताया था और कई आरोप लगाए थे। कॉन्ग्रेस कहीं अडानी और प्रधानमंत्री मोदी को लेकर कोई नया शब्द गढ़ती थी तो कहीं इस्तीफ़ा माँगती थी।

हिंडनबर्ग के सहारे प्रधानमंत्री मोदी और अडानी को जोड़ कर सारा प्रोपेगेंडा चलाने का नेतृत्व राहुल गाँधी के पास ही था। बाद हिंडनबर्ग के लगाए आरोप ताश के पत्तों की तरह बिखर गए। हालाँकि, इतने दिनों तक राहुल गाँधी अमेरिकी कम्पनी हिंडनबर्ग की प्लेबुक पर खेलते रहे। दुखद बात यह है कि पाकिस्तानी जनरल मुनीर के बयान के दौरान भी उन्होंने चुप्पी साध रखी है। उनका समर्थन भारत के आर्थिक हितों को नहीं है।

यहाँ तक कि जो सेना इन आर्थिक हितों को प्रभावित होने से बचाएगी, उसके शौर्य पर प्रश्न उठाने स भी राहुल गाँधी नहीं चूके हैं। राहुल गाँधी की पार्टी के कई नेताओं ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना के एक्शन को लेकर प्रश्न पूछे हैं। कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता यह भी नहीं मानने को तैयार हैं कि ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान के 5-6 विमान मार गिराए। इससे पाकिस्तान को शह मिल रही है और उसकी फ़ौज की मुखिया अब भारतीय कारोबारी हितों को निशाना बना रहा है।

बिहार SIR पर विपक्ष ने नहीं दर्ज कराई एक भी आपत्ति, न तो कॉन्ग्रेस के पास शिकायत न RJD के पास: ‘हंगामा खड़ा करना’ वाले मकसद पर चला विपक्ष, बैरिकेट्स तक कूदे

बिहार में वोटर वेरिफिकेशन पर लगातार विपक्ष संसद से सड़क तक हंगामा कर रहा है। वोटर लिस्ट में नाम काटने का आरोप लगा रहा है लेकिन चुनाव आयोग ने 1 अगस्त से एक महीने तक किसी भी तरह की शिकायत होने पर राजनीतिक दलों को दर्ज कराने को कहा है। 10 दिन बीत जाने के बावजूद अब तक एक भी आपत्ति या शिकायत कोई भी पार्टी दर्ज नहीं करा पाई है।

ऊपर से तेजस्वी यादव के दो जगह नाम होने पर चुनाव आयोग को जवाब नहीं दे पा रहे। कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी पटना से दिल्ली तक एसआईआर के खिलाफ बवाल कर रहे हैं, गले फाड़-फाड़ कर लिस्ट में गड़बड़ी का आरोप लगा रहे हैं। लेकिन आयोग को बताने नहीं जा रहे कि उन्हें आखिर आपत्ति किस बात पर है?

दिल्ली पुलिस से बगैर अनुमति माँगे SIR के खिलाफ इंडी गठबंधन ने राहुल गाँधी के नेतृत्व में संसद से चुनाव आयोग के ऑफिस तक जाने की कोशिश की। इस दौरान बैरिकेड्स लगा कर नेताओं को रोकने की कोशिश की गई। इस दौरान एसपी नेता अखिलेश यादव उस पर चढ़ गए। कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी वाड्रा नारा लगाते दिखाई दी। नेताओं के बवाल के बाद पुलिस ने इन लोगों को हिरासत में ले लिया।

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी का कहना है कि “ये लोग बात नहीं करना चाहते हैं। देश के सामने सबकुछ सामने आ गया है। ये लड़ाई राजनीति नहीं है।”

चुनाव आयोग ने दिया सुप्रीम कोर्ट को भरोसा

चुनाव आयोग ने SIR पर शनिवार (9 अगस्त 2025) को सुप्रीम कोर्ट में अपना हलफनामा दाखिल कर दिया। आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना नोटिस दिए किसी भी मतदाता को अंतिम वोटर लिस्ट से बाहर नहीं किया जाएगा। चुनाव आयोग ने भरोसा दिया है कि बगैर सूचना दिए या बिना आदेश के वोटर लिस्ट में किसी का नाम नहीं हटाया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट में आयोग ने कहा कि वह हर वोटर को शामिल करने की पूरी कोशिश कर रहा है।

अब तक एक भी नाम नहीं बता पाई है पार्टियाँ

इससे पहले चुनाव आयोग ने 1 सितंबर तक किसी तरह की आपत्ति होने पर राजनीतिक दलों और आम लोगों से शिकायत, सुझाव और बदलाव हर तरह की जानकारी देने के लिए कहा है। 1 अगस्त से 9 अगस्त तक विपक्षी पार्टियों में किसी भी दल ने न तो कोई आपत्ति दर्ज की और न ही बदलाव की बात कही। सभी पार्टियाँ पूरी तरह निष्क्रिय दिख रहीं है। अगर किसी तरह की गड़बड़ी पार्टियों को दिख रही है, तो आधिकारिक तौर पर आयोग को सबूत के साथ बताएँ, न की बैरिकेड तोड़ कर मीडिया के सामने ड्रामा करने की कोशिश करें।

तेजस्वी यादव का वोटर लिस्ट में दो जगहों पर नाम

आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने दावा किया था कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में उनका नाम नहीं है। इसके बाद चुनाव आयोग ने उनके आरोप को बेबुनियाद करार देते हुए नाम लिस्ट भेजा। इस दौरान तेजस्वी यादव के दो जगह वोटर लिस्ट में नाम सामने आये। आयोग ने उनसे जवाब माँगा है लेकिन जवाब देने के बजाए तेजस्वी यादव नकारात्मक राजनीति करते नजर आ रहे हैं।

वोटर लिस्ट का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर वोटिंग प्रक्रिया का एक जरूरी हिस्सा है। विपक्षी पार्टियाँ शुरू से इसका विरोध कर रही हैं। कभी कहती हैं कि दस्तावेजों की कमी से योग्य मतदाता वोटिंग से वंचित रह जाएगा। जबकि इसी देश में राशन कार्ड पर मुफ्त राशन देने, बैंकों का खाता खोलने के लिए जरूरी दस्तावेज देने जैसी प्रक्रियाएँ सफलतापूर्वक की गई हैं और इसका फायदा आम लोगों को मिल रहा है। ऐसे में वोटर लिस्ट का शुद्धिकरण भी उतना ही जरूरी है जिसका अधिकार चुनाव आयोग को संविधान ने दिया है।

कॉलेज में साथ पढ़ता था मोहम्मद रमीस, ईसाई युवती पर धर्मांतरण और निकाह का डाला दबाव: पिटाई से परेशान युवती ने दे दी जान, केरल के एर्नाकुलम का मामला

केरल के एर्नाकुलम जिले में 23 वर्षीय सोना एल्धोसे ने धर्म परिवर्तन के दबाव में आकर आत्महत्या कर ली। युवती को मोहम्मद रमीस इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर कर रहा था। आए दिन उसके साथ मारपीट की जाती थी, जिससे तंग आकर उसने खुदकुशी कर ली।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घटना शनिवार (11 अगस्त 2025) को कोठामंगलम शहर की है। सोना ने आत्महत्या से पहले नोट भी लिखा है। नोट में आत्महत्या की वजह धर्म परिवर्तन का दबाव और प्रताड़ना बताई गई है। वहीं सोना के भाई ने भी रमीस और उसके परिवार पर आरोप लगाए हैं।

सोना के भाई ने बताया कि उसकी बहन सोना को रमीस ने कॉलेज के दौरान प्रेमजाल में फँसाया था। रमीस उनके घर पर निकाह करने का प्रस्ताव लेकर पहुँचा था, लेकिन इस शर्त पर कि सोना इस्लाम कबूल करेगी। सोना भी इस शर्त को मानने के लिए तैयार हो गई थी। लेकिन कुछ समय बाद सोना के पिता का निधन हो गया, जिसके कारण एक साल तक निकाह को टाल दिया गया।

इस एक साल में रमीस को पुलिस ने एक लॉज से अवैध व्यापार करते हुए पकड़ा। इसके बावजूद सोना ने निकाह के लिए इनकार नहीं किया और कोर्ट मैरिज करने की बात कही। लेकिन रमीस जल्द से जल्द सोना का धर्म परिवर्तन करवाना चाहता था। एक दिन सोना अपनी दोस्त के घर गई थी, तभी रमीस उसे वहाँ से अपने घर ले गया। यहाँ रमीस और उसके परिवार ने सोना को एक कमरे में बंद कर पीटा।

रमीस और उसके परिवार ने सोना को पोन्नानी में जाकर धर्म परिवर्तन करने के लिए दबाव डाला, लेकिन सोना लगातार मना करती रही। इसके चलते रमीस रोजाना सोना को प्रताड़ित करता रहा। इससे परेशान आकर सोना ने खुदकुशी कर ली। फिलहाल पुलिस मृतका के परिवार की शिकायत पर मामले की जाँच में जुटी हुई है।

कटिहार में 250 जनजातीय लोगों के धर्मांतरण की साजिश नाकाम, बजरंग दल ने रुकवाया: बिहार पुलिस ने 6 को दबोचा, 1 ईसाई परिवार ने की घर वापसी

बिहार के कटिहार जिले में 200-250 जनजातीय समाज के लोगों को ईसाई बनाने की साजिश की जा रही थी। इससे पहले की मिशनरी अपने मंसूबों में कामयाब हो पाते बजरंग दल से जुड़े लोगों ने मौके पर पहुँचकर इसे रुकवा दिया।

विदेशी ताकतों और कट्टरपंथियों का मंसूबा है कि भारत में डेमोग्राफी बदलकर किसी तरह सामाजिक ताने-बाने को तोड़ दिया जाए। देश में जगह-जगह इस्लामिक कट्टरपंथी और ईसाई मिशनरियों के गिरोह दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कटिहार के सहायक थाना क्षेत्र में आदिवासी टोला में रविवार (10 अगस्त 2025) को सैकड़ों हिंदुओं का धर्मांतरण कर उन्हें ईसाई बनाने की साज़िश चल रही थी। इस गिरोह के निशाने पर मुख्यत: संथाली जनजातीय समाज के लोग थे।

इलाके के इन गरीब और मासूम लोगों का ब्रेन-वॉश किया गया था। हालाँकि, इसकी जानकारी बजरंग दल के लोगों को मिल गई और वे पुलिस लेकर घटनास्थल पर पहुँच गए। पुलिस ने इस साजिश में शामिल 6 लोगों को हिरासत में ले लिया है। दावा किया जा रहा है कि जब बजरंग दल के लोग ईसाइयों की प्रार्थना सभा रुकवाने पहुँचे थे तो वहाँ झड़प भी हुई थी।

बजरंग दल के लोगों ने क्या कहा?

बजरंग दल के जिला संयोजक राणा कुमार का कहना है कि कई दिनों से उन्हें इस इलाके में हिंदुओं का धर्मांतरण कराए जाने की खबर मिल रही थी। इसके बाद वे मौके पर पहुँचे तो पता चला कि 200 से 250 लोगों को धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया में शामिल किया गया है। राणा को मौके से कुछ ऐसी धार्मिक किताबें और आपत्तिजनक चीजें मिली हैं जो धर्मांतरण की बात को पुख्ता करती हैं।

बजरंग दल के उत्तर बिहार प्रांत सुरक्षा प्रमुख अनिश सिंह ने बताया कि धर्मांतरण की सूचना मिलने के बाद पुलिस को बुलाया गया था। पुलिस ने छापेमारी की और संदिग्धों को थाने ले आई है। बजरंग दल की माँग है कि इस मामले में FIR दर्ज की जाए और सख्ती से जाँच की जाए।

पुलिस ने क्या कहा?

पुलिस ने धर्मांतरण की शिकायत मिलने के बाद 2 पुरुषों और 4 महिलाओं को हिरासत में लिया है। कटिहार के SP शिखर चौधरी का कहना है कि धर्मांतरण कराने का मामला सामने आया है और पुलिस इसकी जाँच कर रही है। उन्होंने कहा, “कुछ लोगों को पूछताछ के लिए थाने लाया गया है। आरोप लगाने वालों ने मारपीट की है जिसमें 2 लोग घायल हुए हैं।”

SP के मुताबिक, आरोपितों की पहचानकर FIR कर कार्रवाई की जा रही है। पुलिस ने जाँच की बात कही है। वहीं, हिंदू संगठन से जुड़े लोगों का साफ कहना है कि अगर ऐसी गतिविधियाँ अगर चलती रहीं तो वे बड़ा प्रदर्शन करेंगे।

भारत तोड़ने की साजिश: पूर्व डिप्टी CM

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कटिहार के बीजेपी विधायक तारकिशोर प्रसाद ने इसे भारत को तोड़ने की साजिश बताया है। तारकिशोर प्रसाद का कहना है कि सीमांचल में धर्मांतरण का खेल चल रहा है जिससे सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण की साजिश के जरिए कोई पुण्य का काम नहीं हो रहा है और लोग इसे अब किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेंगे।

कटिहार में ईसाई परिवार ने की घर वापसी

धर्मांतरण की गहरी साजिश के बीच ईसाई धर्म अपनाने वाले एक परिवार ने घर वापसी की है। महाकाल सेना से जुड़े लोगों ने विधिवत पूजा-अर्चना और मंत्रोच्चार के साथ इस परिवार की घर वापसी कराई है।

महाकाल सेना के शिवानंद का कहना है कि उन लोगों तक पहुँचा जा रहा है, जिन्होंने किसी लोभ, साजिश या मजबूरी में अपना धर्म बदला है। संख्या बढ़ाकर सीमावर्ती क्षेत्रों में कब्जा कर रहे बांग्लादेशी घुसपैठिए और मिशनरी संगठनों की संगठित कोशिशों को उन्होंने दो बड़ी चुनौती बताया है।

‘लैंड पूलिंग पॉलिसी जल्द वापस ले पंजाब सरकार, वरना करेंगे बड़ा आंदोलन’: भगवंत मान सरकार के खिलाफ सड़कों पर किसान, हाईकोर्ट पहले ही लगा चुका है फटकार

पंजाब में किसानों ने भगवंत मान सरकार को चेताया है कि अगर लैंड पूलिंग पॉलिसी वापस नहीं लिया तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा। किसानों ने इसको लेकर पंजाब के कई जिलों में बाइक रैली निकाली। ये रैली सोमवार (11 अगस्त 2025) को किसान मजदूर संघर्ष समिति (केएमएम) के नेता सरवन सिंह पंधेर की अगुआई में अमृतसर के जलियांवाला बाग से अटारी बॉर्डर तक गई। इस दौरान भगवंत मान सरकार के फैसले का जमकर विरोध किया गया।

किसानों से जमीन छीनने की साजिश- पंधेर

किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा, “हम चाहते हैं कि भगवंत मान सरकार जल्द से जल्द लैंड पूलिंग नीति वापस ले, वरना हमें उन्हें ऐसा करने पर मजबूर करना पड़ेगा। यह सिर्फ किसानों का मुद्दा नहीं है।”

किसान मोर्चा का कहना है कि राज्य के उपजाऊ कृषि भूमि को कॉर्पोरेट के हाथों में जाने से बचाना उनका मकसद है। उन्होंने प्रस्तावित लैंड पूलिंग नीति को ‘काला कानून’ करार दिया। किसान नेताओं का कहना है कि इसका मकसद 65000 एकड़ से ज्यादा जमीन निजी हाथों में सौंपना चाहती है राज्य सरकार।

हाईकोर्ट ने भगवंत सरकार को लगाई थी फटकार

इससे पहले भगवंत मान सरकार को ‘लैंड अर्बन डेवलपमेंट’ के लिए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने जमकर फटकार लगाई थी और इस पर 4 हफ्ते के लिए रोक लगा दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि ऐसा लगता है कि लैंड पूलिंग पॉलिसी जल्दीबाजी में बनाया गया है । सरकार ने सामाजिक असर, पर्यावरण और दूसरी शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया। इन पर ध्यान देना चाहिए था।

क्या है लैंड पूलिंग पॉलिसी?

पंजाब की मान सरकार ने जमीन पर आवासीय कॉलोनी और फ्लैट बनाने के लिए जमीन किसानों से लेना चाहती है। इसमें कहा गया है कि किसानों की इच्छा के बिना ये नहीं हो सकता। किसानों का कहना है कि ये पॉलिसी किसानों की जमीन लेकर कॉरपोरेट को देने की साजिश है। किसान खुलकर इसका विरोध कर रहे हैं।

किसानों का कहना है कि उनपर चारों ओर से हमले किए जा रहे हैं। एक तरफ जमीन छीनने की साजिश की जा रही है वहीं दूसरी तरफ भारत पर लगातार अमेरिका दबाव बना रहा है कि कृषि, डेयरी, पोल्ट्री, मछलीपालन जैसे क्षेत्र में उसे भारत में घुसने दिया जाए।

निमिषा प्रिया मामले में केरल के मौलाना का नहीं लेना-देना, यमन में पीड़ित के भाई ने किया साफ़: मौत की सजा के नाम पर क्रेडिट लेने की कोशिश कर चुका है कंथापुरम, हर बार साबित हुआ झूठा

यमन में मौत की सजा पा चुकी भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को बचाने के मलयाली मौलाना के दावे झूठे सिद्ध हुए हैं। मौलाना कंथापुरम के निमिषा प्रिया के बचाने के दावों को अब्दुल फतह मेहदी ने नकार दिया है। अब्दुल फतह मेहदी, उस तलाल मेहदी का भाई है जिसकी हत्या के आरोप में निमिषा प्रिया को मौत की सजा दी जा रही है। अब्दुल फतह मेहदी ने कहा है कि वह तलाल के परिजनों से कंथापुरम के सम्पर्क करने की कोई कोशिश कामयाब नहीं होने देगा। उसने कंथापुरम को झूठा भी करार दिया है।

निमिषा प्रिया पर क्या बोला अब्दुल?

ऑनमनोरमा की एक रिपोर्ट के अनुसार, अब्दुल ने इससे सम्बन्धित दो फेसबुक पोस्ट की हैं। अब्दुल ने कहा, “यह भारतीय मौलाना का कर्तव्य था कि वह पीड़ित के खून का सम्मान करें और इस दौरान सच्चाई को ईमानदारी से रखें। हमने दाम तलाल के माता-पिता के साथ किसी के भी मिलने या बैठक पर रोक लगी हुई है… चाहे यह सीधे हो, कंथापुरम हो या फिर हबीब उमर बिन हाफिज के कार्यालय द्वारा किसी भी माध्यम से हो।”

अब्दुल ने इसके बाद कंथापुरम पर झूठ बोलने का आरोप भी लगाया। अब्दुल ने कहा कि इस्लाम सच्चाई का धर्म है और यहाँ झूठ की कोई गुंजाइश नहीं है। अब्दुल ने स्पष्ट किया कि निमिषा प्रिया की मौत की सजा रोकने या उसके परिवार से कोई डील करने की बात सच नहीं है। अब्दुल ने बताया कि ऐसी खबर अगर सच होती तो पहले ही इसकी घोषणा कर देते। अब्दुल मेहदी ने कहा कि हम खून का बदला खून से लेंगे और इसे कोई बदल नहीं सकता।

निमिषा प्रिया की मौत को भुनाने का आरोप भी अब्दुल ने कुछ लोगों पर लगाया। अब्दुल ने कहा कि जिस त्रासदी से उसका भाई और उसका परिवार गुजरा है, निमिषा प्रिया को मौत की सजा के जरिए उसका बदला पूरा होगा। अब्दुल और उसके परिवार ने यमन के अधिकारियों से बातचीत करके निमिषा की मौत की सजा की डेट जल्द फाइनल करने को कहा है। अब्दुल का यह बयान तब आया है जब कंथापुरम लगातार निमिषा प्रिया को बचाने से जुड़े दावे कर रहे हैं।

कंथापुरम कर रहे बचाने का दावा

मौलाना कंथापुरम ने हाल ही में एक समारोह में दावा किया था कि वह निमिषा प्रिया को मानवीय आधार पर बचा रहे हैं। कंथापुरम ने बोला था कि वह इसके लिए कोई क्रेडिट नहीं चाहते। हालाँकि, यह कोई पहला मौक़ा नहीं है जब उन्होंने या उनके दफ्तर ने यह दावा किया हो कि निमिषा प्रिया को बचा लिया गया है। इससे पहले कंथापुरम के दफ्तर ने दावा किया था कि निमिषा प्रिया की मौत की सजा खत्म कर दी गई है।

इससे पहले 16 जुलाई, 2025 को होने वाली निमिषा प्रिया की मौत की सजा जब टली थी, तब भी कंथापुरम को हीरो की तरह पेश किया गया था। मुस्लिमों के साथ ही वामपंथी मीडिया पोर्टल्स ने यह दिखाने का प्रयास किया था कि निमिषा की मौत की सजा उन्होंने टलवाई। इसको लेकर खूब प्रचार हुआ था। मौलाना के दफ्तर ने भी कई पोस्ट की थीं। इसके पीछे मौलाना का इस्लामी प्रभाव बताया गया था। इसको लेकर लम्बे लम्बे लेख लिखे गए थे। हालाँकि, यह बातें बाद में झूठी साबित हुईं।

निमिषा प्रिया पर बार-बार पकड़ा गया मौलाना का झूठ

निमिषा प्रिया की मौत को लेकर मौलाना कंथापुरम का झूठ कोई पहली बार नहीं पकड़ा गया है। जब मौत की सजा रोकी गई थी, तो भी मौलाना के रोल को भारतीय विदेश मंत्रालय ने नकार दिया था। इसके अलावा जब मौलाना के दफ्तर ने निमिषा प्रिया के मौत की सजा रुकने की बात कही थी तब भी यह झूठ निकला था और मौलाना के दफ्तर के पोस्ट हटानी तक पड़ी थी। अब जब उसने फिर से इससे जुड़ा दावा किया है तो मृतक मेहदी के भाई ने ही इसे नकार दिया है और मौलाना को झूठा तक करार दे दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR से आवारा कुत्तों को हटाने को कहा, जो रुकावट डालें – उन पर हो कार्रवाई: रेबीज से मरे लोगों को वापस लाएँगे क्या NGO वाले?

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और आसपास के इलाकों में आवारा कुत्तों को तुरंत हटाने का बड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा कि जो भी इस काम में रुकावट डालेगा, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, “जो लोग रेबीज से मर गए, क्या कोई उन्हें वापस ला सकता है?” यह आदेश दिल्ली में कुत्तों के काटने और रेबीज से होने वाली मौतों के बढ़ते मामलों को देखते हुए आया है।

जस्टिस जे.बी. परदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम में आवारा कुत्तों को पकड़कर दूर के इलाकों में ले जाने का आदेश दिया। जस्टिस परदीवाला ने कहा कि यह जनता के हित में है और भावनाओं में बहकर फैसला नहीं लिया जा सकता। उन्होंने साफ कहा, “सभी इलाकों से कुत्तों को पकड़ो और उन्हें दूर ले जाओ।”

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि दिल्ली के कई हिस्सों में हालात गंभीर हैं। खासकर बच्चे और बुजुर्ग रेबीज का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि माता-पिता कोर्ट के इस कदम से खुश हैं, क्योंकि बच्चों की जान बचाना सबसे जरूरी है।

मेहता ने यह भी बताया कि पहले कुत्तों को हटाने की कोशिश की गई थी, लेकिन एक डॉग राइट्स एक्टिविस्ट ने कोर्ट से स्टे ऑर्डर ले लिया था, जिससे काम रुक गया। इस पर जस्टिस परदीवाला ने तल्ख टिप्पणी की, “क्या ये एक्टिविस्ट रेबीज से मरे लोगों को वापस ला सकते हैं?”

कुत्तों के लिए शेल्टर और सख्त निगरानी की व्यवस्था

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार, MCD और NDMC को आदेश दिया कि वो कुत्तों के लिए शेल्टर बनाएँ, जहाँ उनकी नसबंदी और वैक्सीनेशन हो। कोर्ट ने यह भी कहा कि शेल्टर में CCTV कैमरे लगाए जाएँ, ताकि कोई कुत्ता वापस सड़कों पर न छोड़ा जाए। कोर्ट ने कहा कि सबसे पहले सभी इलाकों को आवारा कुत्तों से मुक्त करना है। इसके लिए जरूरत पड़े तो अलग से फोर्स बनाई जाए।

कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर कोई इस काम में अड़ँगा डालेगा, तो उसे कोर्ट की अवमानना माना जाएगा और सख्त कार्रवाई होगी। यह फैसला दिल्ली-NCR में रेबीज के खतरे को कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

दैनिक भास्कर ने बिहार SIR पर की सनसनी फैलाने की कोशिश, राजदीप सरदेसाई ने डाला ‘आग में घी’: मुजफ्फरपुर प्रशासन ने खोल दी सबकी पोल

बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बीच दैनिक भास्कर ने एक खबर से सनसनी फैलाने की कोशिश की। भास्कर ने एक पते पर 269 वोटर होने की खबर दी। ‘पत्रकार’ कहे जाने वाले राजदीप सरदेसाई ने भी इस मुद्दे पर ‘आग में घी’ डाल दिया। हालाँकि, इस आग से कुछ नुकसान हो पाता, इससे पहले ही प्रशासन ने इसकी पोल खोल दी।

दैनिक भास्कर के दावे को राजदीप ने दी हवा

दैनिक भास्कर ने 10 अगस्त को बिहार के मतदाता सूची प्रारूप को लेकर खबर छापी। इसमें कहा गया, “मुजफ्फरपुर में एक ही पते पर 269 तो जमुई में 247 वोटर रहते हैं”। खबर में मुजफ्फरनगर में बूथ नंबर 370 के मकान नंबर 27 पर 269 मतदाता और जमुई के बूथ नंबर 86 पर मकान नंबर 3 पर 247 वोटर होने की बात कही गई।

विपक्ष लगातार SIR को लेकर हल्ला-हंगामा कर रहा है। TMC की राज्यसभा साँसद सागरिका घोष के पति राजदीप सरदेसाई ने भी विपक्ष के सुर में सुर मिलाए हैं। राजदीप ने इस खबर को लेकर भास्कर की तारीफ की। उन्होंने X पर खबर शेयर करते हुए मतदाता सूची के रिवीजन को जल्दबाजी का काम बताया है।

प्रशासन ने दिया जवाब

मुजफ्फरपुर के जिला प्रशासन ने राजदीप को जवाब देते हुए इस खबर की असली कहानी खोल दी। प्रशासन ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि निर्वाचक सूची में वोटरों को दिया जाने वाला मकान नंबर अस्थाई और प्रतीकात्मक (Notional) होता है। प्रशासन ने कहा, “इसका निर्वाचक के असली मकान नंबर या परिवार से कोई संबंध नहीं होता है।”

प्रशासन के मुताबिक, SIR में योग्य निर्वाचकों का केवल सत्यापन किया गया है। निर्वाचक सूची में यह मकान नंबर SIR के पहले से दर्ज है। 7 जनवरी 2025 को प्रकाशित मतदाता सूची में ही मकान नंबर इसी तरह दर्ज थे। SIR के दौरान भी किसी ने इस पर आपत्ति नहीं की।

जिस बड़े खुलासे के सहारे भास्कर और राजदीप बिहार में सनसनी फैलाने की कोशिश कर रहे थे, प्रशासन और चुनाव आयोग को घेरने की कोशिश कर रहे थे। वो बस एक भ्रामक दावा ही साबित हुआ है। चुनाव आयोग लगातार विपक्ष के निशाने पर है और ऐसे में कुछ खास राजनीतिक झुकाव वाले पत्रकार तथ्यों को परवाह किए बगैर बस हमलावर हैं।