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दलित से शादी करने वाले की नहीं बदल जाती जाति, इसके बाद भी हो सकता है SC/ST का केस: हिमाचल हाई कोर्ट, कहा- जन्म के समय ही निर्धारित हो जाती है जाति

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा है कि अगर कोई महिला दलित व्यक्ति से शादी करती है, तो भी एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई से नहीं बच सकती है। कोर्ट ने ये फैसला राज्य सरकार बनाम सरोजनी मामले में निचली अदालत के फैसले को खारिज करते हुए कही है। कोर्ट के मुताबिक जाति का निर्धारण जन्मजात होता है। ये विवाह से नहीं बदल सकता।

दरअसल सरोजनी ने एक दलित व्यक्ति से शादी की थी। ससुराल में झगड़े के दौरान जातिसूचक शब्द के इस्तेमाल का उस पर आरोप लगाया गया। इस मामले में निचली अदालत ने कहा कि सरोजनी ने अनुसूचित जाति के व्यक्ति से शादी की है इसलिए उस पर एससी-एसटी एक्ट नहीं लगेगा। कोर्ट ने सरोजनी को बरी कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

हाई कोर्ट के मुताबिक ऐसी शादियाँ एससी- एसटी एक्ट,1989 के तहत अपराध करने से नहीं रोकता है। राज्य सरकार बनाम सरोजनी मामले पर सुनवाई करते हुए जस्टिस राकेश कैंथला ने कहा, “जाति किसी व्यक्ति के जन्म से निर्धारित होती है, जो जीवनभर नहीं बदलती है। निचली अदालत ने ये गलत माना कि आरोपित महिला का विवाह अनुसूचित जाति के व्यक्ति से हुआ है इसलिए वह अब अनुसूचित जाति की सदस्य बन गई है।”

हाई कोर्ट ने कहा कि अनुसूचित जाति- अनुसूचित जनजाति अधिनियम 1989 की धारा 3(1)(s)अनुसूचित जाति-जनजाति के सदस्य को सार्वजनिक स्थान पर जाति का नाम लेकर गाली देने को अपराध मानती है। हाईकोर्ट ने निचली कोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए आरोपित महिला के खिलाफ फिर से मामले को तय करने के लिए वापस भेज दिया है।

इससे पहले निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए राज्य सरकार ने कहा कि जाति हमेशा एक जैसी रहती है, इसे बदला नहीं जा सकता। कोर्ट ने इससे सहमति जताते हुए कहा कि भारत में जाति का निर्धारण जन्म से ही होता है और एससी-एसटी एक्ट के तहत इसमें बदलाव की बात भी नहीं की गई है। इसलिए सरोजनी के मामले में भी ऐसा ही होगा।

आज जो म्यांमार गृहयुद्ध, तख्तापलट और नार्को-टेरिरिज्म में फँसा, वहाँ 1000 साल पहले था समृद्ध बागान साम्राज्य: बौद्ध राजवंश पर थी भारतीय संस्कृति की छाप, खूब हुआ मंदिरों का निर्माण

म्यांमार हाल ही में गृह युद्ध, सैन्य तख्तापलट, नार्को-टेररिज्म और चीन द्वारा चलाए जा रहे ऐसे कॉल सेंटर्स की वजह से सुर्खियों में है, जहाँ भारत और अन्य देशों से अगवा किए गए पर्यटक और नौकरी के तलाश में गए लोग फँसे हुए पाए गए हैं। इन गंभीर घटनाओं ने इस बौद्ध-बहुल देश के गौरवशाली अतीत को कहीं पीछे छोड़ दिया है। जबकि कभी इसे ‘स्वर्ण भूमि’ कहा जाता था।

कभी यह देश एक समृद्ध और सांस्कृतिक रूप से जीवंत सभ्यता था। यहाँ सुंदर प्राकृतिक दृश्य और सुनहरे मंदिरों की भरमार थी। लेकिन अब यह देश लगातार राजनीतिक अशांति और हिंसा से जूझ रहा है।

म्यांमार के लंबे और रोचक इतिहास में कई साम्राज्य और राजवंश आए और गए – जैसे अवा साम्राज्य, हंथवाडी राज्य और तौंगू साम्राज्य। इन सभी ने इस देश की सांस्कृतिक धरोहर और ऐतिहासिक विरासत को गहराई से प्रभावित किया और समृद्ध बनाया है।

जब बागान साम्राज्य ने जमाई जड़ें

बागान (जिसे कुछ ग्रंथों में पैगन भी कहा गया है) वंश म्यांमार का पहला ऐसा साम्राज्य था जिसने उन क्षेत्रों को एकजुट किया जो आगे चलकर वर्तमान म्यांमार (पहले बर्मा) बना। ‘म्रनमा’ या ‘बर्मन’ लोगों को ही ‘बर्मा’ और ‘म्यांमार’ नामों की उत्पत्ति का स्रोत माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार, बर्मन लोग तिब्बत और पश्चिमी चीन की सीमावर्ती पहाड़ियों से आए थे।

9वीं शताब्दी ईस्वी के मध्य में जब प्यू राज्य एक सैन्य संकट से जूझ रहा था, तब बर्मन लोगों ने इस अवसर का लाभ उठाया और उस क्षेत्र पर कब्जा कर लिया। उन्होंने 849 ईस्वी में बागान (Bagan) को अपनी राजधानी बनाया। हालाँकि यह कब्जा पूरी तरह से जबरदस्ती नहीं था, क्योंकि बर्मन लोगों ने प्यू संस्कृति और परंपराओं को लूटने और नष्ट करने की बजाय अपनाने की कोशिश की।

प्यू लोग पहले से ही भारत के साथ सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से जुड़े हुए थे। वे बौद्ध धर्म को मानते थे और बर्मन लोगों ने भी यही रास्ता अपनाया। प्यू लोगों की गीली धान की खेती (wet-rice cultivation), जो आज भी इरावडी डेल्टा में होती है, बर्मन लोगों के लिए एक नई चीज थी, क्योंकि वे पहाड़ी इलाकों के अनुकूल थे जहाँ तापमान और जमीन दोनों अलग थे।

प्यिनब्या को आधुनिक इतिहासकार बागान साम्राज्य के शुरुआती राजाओं में से एक माना जाता है। उसने आने वाले दो सौ वर्षों में मध्य म्यांमार पर अधिकार कर लिया। लेकिन पारंपरिक म्यांमार के राजवंश-ग्रंथों में प्यिनब्या को बागान वंश का 33वाँ राजा बताया गया है।

जब सत्तारुढ़ होता है ‘अनावराता’

बागान एक साधारण राज्य था, लेकिन 1044 में जब अनिरुद्ध (जो बाद में अनावराता के नाम से प्रसिद्ध हुए) राजा बने, तो राज्य का भाग्य बदल गया। अनावराता, राजा पिनब्या के परपोते थे। उनके शासन में बागान न सिर्फ एक शक्तिशाली राज्य बना, बल्कि पूरे क्षेत्र की दिशा भी बदल गई।

राजा अनावराता ने अपने राज्य में सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाया, जिससे बागान चावल उत्पादन में अग्रणी बन गया। इसके साथ ही उन्होंने साहसिक सैन्य अभियान भी चलाए। 1057 में उन्होंने दक्षिण में स्थित, समृद्ध और सुंदर मोन राज्य की राजधानी थाटोन पर विजय प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने पूरे इरावदी क्षेत्र को बागान के अधीन कर लिया और पहला बर्मी साम्राज्य स्थापित किया।

इस बड़ी उपलब्धि के बाद आस-पास के मोन शासक भी बर्मा की सत्ता को मानने लगे। अनावराता की सफलता सिर्फ युद्ध में नहीं थी, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी उनका शासन महत्वपूर्ण रहा। वे मोन परंपरा से प्रभावित थे और थेरवाद बौद्ध धर्म के समर्थक बने। उन्होंने इस धर्म को पूरे बागान क्षेत्र में फैलाया क्योंकि वे इसे एकता का माध्यम मानते थे।

बागान साम्राज्य का विस्तार और भारतीय प्रभाव

अनावराता (Anawrahta) के शासनकाल में बागान का स्वर्णकाल शुरू हुआ। मोन संस्कृति, जो भारतीय संस्कृति से गहराई से प्रभावित थी, अनावराता को बहुत प्रिय थी। उन्होंने मोन बंदरगाहों पर विजय प्राप्त कर भारी संपत्ति प्राप्त की और उसी धन से बगान को सजाने के लिए मोन इंजीनियरों, सुनारों, बढ़ईयों और कलाकारों को काम पर लगाया। मोन सभ्यता नदी परिवहन पर भी नियंत्रण रखती थी, जिससे उनका प्रभाव और अधिक बढ़ गया।

राजा अनावराता ने उस समय असंख्य मंदिरों, पगोडों और स्तूपों का निर्माण कराया। हर नया निर्माण पिछले से अधिक भव्य और विशाल होता था। इसी समय भारत का प्रसिद्ध धार्मिक महाकाव्य रामायण बर्मा (अब म्यांमार) में लोकप्रिय हुआ, जिसे बर्मी भाषा में रामा जतदाव (Rama Zatdaw) कहा गया।

इसकी कहानियाँ पहले मौखिक रूप से 13वीं शताब्दी के अंत में आवा (Ava) में प्रचलित थीं और 16वीं शताब्दी तक मौखिक परंपरा में चलती रहीं। 18वीं शताब्दी तक बौद्ध भिक्षुओं ने इसे एक महान कथा के रूप में स्वीकार किया और बगान की पुरानी मौखिक परंपराओं के आधार पर इसे गद्य, पद्य और नाट्य रूप में लिपिबद्ध किया गया।

अनावराता की मृत्यु 1077 में हुई, लेकिन बागान का स्वर्णकाल जारी रहा। व्यापार में वृद्धि के चलते मंदिरों का निर्माण तेजी से होता रहा। 1044 से 1287 ईस्वी तक बगान राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बना रहा।

लेकिन हर साम्राज्य की तरह बगान का भी पतन हुआ। 13वीं सदी के अंत में राजनीतिक और आर्थिक समस्याएँ शुरू हुईं और इसके बाद मंगोल आक्रमणों ने स्थिति को और बिगाड़ दिया। राजा नरथिहापते ने शुरू में मंगोल सम्राट कुबलई खान से कोई बातचीत नहीं की। नतीजा ये हुआ कि सन 1277 ईस्वी में बगान राज्य को नगासाउंगग्यान की लड़ाई में अप्रत्याशित हार मिली और दस साल बाद 1287 में बागान का पतन हो गया।

इसके बाद सदियों तक कई मंदिर और पगोडे त्याग दिए गए, लेकिन बगान की सांस्कृतिक विरासत समाप्त नहीं हुई। 15वीं शताब्दी में यह एक बार फिर बौद्ध तीर्थ स्थल के रूप में प्रसिद्ध हुआ और 1700 के दशक में फिर से मंदिर निर्माण शुरू हुआ।

आज भी यहाँ हजारों मंदिर, मठ और स्तूप हैं। ये स्तूप बुद्ध के अवशेषों या पवित्र वस्तुओं को संरक्षित करने वाले माउंटेन जैसे या घंटी के आकार के होते हैं। इनमें से अधिकतर ईंट और प्लास्टर से बने हुए हैं और आज भी श्रद्धा का केंद्र हैं।

बागान को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में किया गया शामिल

बागान एक पवित्र स्थल है जो म्यांमार में स्थित है। यह जगह बौद्ध कला और वास्तुकला का एक अनमोल खजाना है। यहाँ सदियों से थेरवाद बौद्ध परंपरा के तहत ‘पुण्य अर्जन’ (जिसे कम्माटिक बौद्ध धर्म कहा जाता है) की परंपरा चली आ रही है।

बागान का इतिहास 11वीं से 13वीं सदी के बीच के बागान काल से जुड़ा है, तब बौद्ध धर्म को राजा ने राजनीतिक नियंत्रण के एक साधन के रूप में अपनाया था। राजा ही मुख्य दाता (donor) बन गया और पुण्य अर्जन के चलते मंदिरों का निर्माण बहुत तेजी से बढ़ा। यह निर्माण कार्य 13वीं सदी में अपने शिखर पर पहुँचा।

बागान का यह क्षेत्र इरावदी नदी (Irrawaddy River) के एक मोड़ पर स्थित है और आठ हिस्सों (components) में बँटा हुआ है, इनमें से एक नदी के एक ओर है और बाकी सात दूसरी ओर।

यह क्षेत्र सिर्फ इमारतों का समूह नहीं है, बल्कि इसमें खेती, पारंपरिक सांस्कृतिक रीति-रिवाज, बौद्ध पूजा और पुण्य अर्जन की गतिविधियाँ भी शामिल हैं जो इसकी अमूर्त (intangible) सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती हैं।

यहाँ 3,595 दर्ज स्मारक हैं, जिनमें स्तूप, मंदिर और अन्य धार्मिक ढाँचे शामिल हैं। इसके अलावा, यहाँ खुदाई से जुड़ी कई जानकारियाँ, शिलालेख, भित्ति चित्र और मूर्तियाँ भी पाई गई हैं।

बागान एक जटिल और बहुस्तरीय सांस्कृतिक स्थल है जिसमें आधुनिक शहर और आवासीय इलाके भी शामिल हैं। इसे 2019 में संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संगठन (UNESCO) द्वारा विश्व धरोहर स्थल (World Heritage Site) घोषित किया गया था।

संस्कृति और धर्म का मिश्रण

बगान का मैदान लगभग 65 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। यह धार्मिक महत्व से भी एक ऐतिहासिक स्थान है। यहाँ 5,000 से अधिक धार्मिक स्मारक बगान के शासकों की देखरेख में बनाए गए थे। आज भी ‘बगान पुरातात्त्विक क्षेत्र’ (Bagan Archaeological Zone) में इन मूल संरचनाओं में से 2,000 से अधिक विभिन्न स्थिति में मौजूद हैं।

इन मंदिरों और स्तूपों की दीवारों पर भगवान बुद्ध और पूर्व बुद्धों के जीवन की चित्रकारी की गई है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, साम्राज्य की राजधानी रहते हुए बागान का स्वर्ण काल 250 वर्षों से अधिक चला। उस समय यहाँ 40 वर्ग मील के क्षेत्र में लगभग 10,000 धार्मिक स्मारक थे।

फोटो साभार: नेशनल ज्यॉग्राफी

इन हजारों स्मारकों में बड़े मंदिरों से लेकर छोटे एक-कक्षीय मठों तक कुछ बेहद खास और आकर्षक स्थल भी हैं। लौकानंदा पगोडा (Lawkananda Pagoda) विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जिसे राजा अनावराता ने बनवाया था। इसका सुनहरा गुंबद और छतरी के आकार की चोटी (finial) पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती है।

कहा जाता है कि इस पैगोडा में एक अवशेष रखा है जिसे बुद्ध के दाँतों में से एक माना जाता है, इसे श्रीलंका के शासक ने प्राप्त किया था। बगान में कई गुलाबी रंग के स्तूप और मंदिर लाल मिट्टी और हरे-भरे पेड़ों के बीच में खड़े हैं। यह इरावदी नदी के किनारे पर्यटकों के लिए अद्भुत दृश्य पेश करते हैं।

यह क्षेत्र दुनिया में बौद्ध मंदिरों की सबसे बड़ी एकत्रता में से एक माना जाता है और यह इस बात का प्रमाण है कि संस्कृति और धर्म का आपसी संबंध कितना गहरा था। विद्वानों ने यह भी अध्ययन किया है कि कैसे इस धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत ने 1900 के दशक की शुरुआत में बर्मी पहचान (Burmese identity) को आकार दिया।

बागान के लिए क्या है आगे?

बागान, जो म्यांमार (बर्मा) में स्थित है, एक बहुत ही पुराना और ऐतिहासिक शहर है। 18वीं शताब्दी की ‘महा यजाविन’ और 19वीं शताब्दी की ‘ह्मानन यजाविन’ नाम की इतिहास की किताबों में बागान का इतिहास दर्ज है।

1900 के दशक की शुरुआत में बर्मी और विदेशी शोधकर्ताओं ने और सटीक जानकारी पाने के लिए नए प्रमाण ढूँढे। इन प्रमुख शोधकर्ताओं में ब्रिटिश विद्वान गॉर्डन लूज और बर्मी विद्वान यू पे मांग टिन शामिल थे। बागान का इलाका भूकंपों के लिए जाना जाता है। यहाँ कई बार तेज भूकंप आए हैं। इनमें भी 1975 और 2016 के भूकंपों ने कई मंदिरों और ऐतिहासिक इमारतों को भारी नुकसान पहुँचाया था।

1990 के दशक में म्यांमार की सैन्य सरकार ने बड़े स्तर पर पुनःनिर्माण (restoration) का काम शुरू किया और लगभग 2,229 मंदिरों और स्मारकों को संरक्षित किया। हालाँकि इस काम की कई पुरातत्वविदों (archaeologists) ने आलोचना की, क्योंकि उन्हें लगा कि यह काम ऐतिहासिक दृष्टिकोण से सही तरीके से नहीं किया गया।

बागान को 2019 में विश्व धरोहर स्थल (World Heritage Site) का दर्जा मिला। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह दर्जा म्यांमार सरकार और विशेषज्ञों के बीच सहयोग को बढ़ावा देगा, ताकि बागान के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सके।

बागान को अक्सर एक पुरातात्त्विक चमत्कार कहा जाता है, लेकिन यह सिर्फ एक बीता हुआ इतिहास नहीं है, बल्कि यह आज भी एक जीवित धार्मिक स्थल है। यहाँ आज भी पूजा होती है और यह स्थान स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध समुदाय के लिए बेहद पवित्र है।

बागान के संरक्षण में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) ने भी अहम भूमिका निभाई है, जिसने इस सांस्कृतिक धरोहर को सँभालने में म्यांमार की मदद की।

बागान: भारतीय धर्म और संस्कृति का मिश्रण

बागान भारत के प्रभाव का  एक जीवंत उदाहरण है, खासकर उस धर्म का जो भारत में जन्मा और फिर पूरी दुनिया में फैला, जिसमें म्यांमार भी शामिल है। यह भारत और उसकी धार्मिक परंपराओं की गहरी छाप को दर्शाता है। भारत की वह धार्मिक परंपराएँ जो सदियों से दुनिया की संस्कृतियों, परंपराओं, समाजों और सभ्यताओं को प्रभावित करती आई है और इसका प्रमाण आज भी बागान जैसे स्थानों में देखा जा सकता है।

बागान यह भी दिखाता है कि बर्मा (अब म्यांमार) के बर्मी लोग विजेता थे, जिन्होंने दूसरे राज्यों को जीतकर अपना साम्राज्य बनाया। फिर भी उन्होंने स्थानीय विरासत को अपनाया और उसे मिटाने की बजाय उसमें घुल-मिल गए।

उस समय भारत की संस्कृति और एक भारतीय मूल के धर्म का क्षेत्र में पहले से ही प्रभाव था, जिसे बर्मियों ने न केवल स्वीकार किया बल्कि उसका प्रचार भी किया। इतना ही नहीं उन्होंने उस धर्म और संस्कृति को सम्मान देने के लिए भव्य स्मारक और मंदिर भी बनवाए।

इस लेख को मूल रूप से अंग्रेजी में रुक्मा राठौर ने लिखा है। इसे पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें। इसका अनुवाद सौम्या सिंह ने किया है।

पाकिस्तान ने करवाया पहलगाम में हिंदुओं का नरसंहार, UNSC ने आतंकी सैंक्शन रिपोर्ट में TRF का नाम किया शामिल: भारत को मिली बड़ी कूटनीतिक जीत

भारत को कूटनीतिक फ्रंट पर एक बड़ी जीत हासिल हुई है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की आतंक प्रतिबन्ध निगरानी समिति ने द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) को अपनी रिपोर्ट में शामिल किया है। TRF को पहलगाम आतंकी हमला करने का जिम्मेदार इस रिपोर्ट में बताया गया है। यह इसलिए भी बड़ी जीत हैं क्योंकि वर्तमान में पाकिस्तान UNSC का सदस्य है। इससे पहले अमेरिका ने TRF पर प्रतिबन्ध लगाए थे।

UNSC की समिति ने क्या कहा?

मंगलवार (29 जुलाई, 2025) को जारी की गई UNSC की प्रतिबन्ध निगरानी समिति रिपोर्ट में TRF पर बात की गई है। इस रिपोर्ट में कहा गया है, “22 अप्रैल को, 5 आतंकवादियों ने जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में एक पर्यटन स्थल पर हमला किया। इसमें 26 नागरिक मारे गए। उसी दिन हमले की ज़िम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली, जिसने घटनास्थल की एक तस्वीर भी जारी की। इसके अगले दिन दोबारा जिम्मेदारी का दावा किया गया।”

रिपोर्ट में आगे बताया गया है, “हालाँकि, 26 अप्रैल को, TRF ने अपना दावा वापस ले लिया। TRF की ओर से कोई और जानकारी इस पर नहीं आगे दी गई। किसी और ने इस हमले की जिम्मेदारी भी नहीं ली। इसके चलते इस क्षेत्र में तनाव अभी नाजुक मोड़ पर हैं, जिसका फायदा आतंकी उठा सकते हैं।”

इस रिपोर्ट के अनुसार,”एक सदस्य देश ने कहा कि यह हमला लश्कर-ए-तैयबा के समर्थन के बिना नहीं हो सकता था, और कि लश्कर तथा TRF के बीच कनेक्शन है। एक और देश ने कहा कि यह हमला TRF ने ही किया जो लश्कर का ही पर्याय है। एक और सदस्य देश ने इन विचारों को खारिज कर दिया और दावा किया कि लश्कर अब निष्क्रिय हो चुका है।”

यह क्यों भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक जीत?

UNSC की रिपोर्ट में TRF का जिक्र और उसे पहलगाम हमले से सीधे तौर पर लिंक किया जाना भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक सफलता है। भारत ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद UNSC को विशेष तौर पर TRF और उसके पाकिस्तान से लिंक के विषय में बताया था। भारत ने इस दौरान UNSC से TRF को वैश्विक आतंकी संगठन लिस्ट में शामिल करने की माँग की थी। भारत ने इस दौरान UNSC में इसके मददगारों पर भी एक्शन की माँग की थी।

अब UNSC की इस महत्वपूर्ण समिति कि रिपोर्ट में TRF का स्पष्ट तौर पर जिक्र है। यह जिक्र तब किया गया है जब UNSC के 15 सदस्यों में वर्तमान में पाकिस्तान भी शामिल है। पाकिस्तान वर्तमान में UNSC के 10 अस्थायी सदस्यों में से एक है। वह लगातार चीन के साथ मिलकर भारत के आतंक के खिलाफ एक्शन को रोकने के प्रयास करता रहा है। हालाँकि, भारत के कूटनीतिक प्रयासों के चलते उसकी एक नहीं चली और TRF को इस रिपोर्ट में शामिल किया गया।

पाकिस्तान ने इसका विरोध किया है, यह रिपोर्ट की एक लाइन से भी स्पष्ट होता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक सदस्य देश ने लश्कर-ए-तैयबा के खत्म होने की बात कही है। ऐसे दावे पाकिस्तान करता आया है। उसका दावा रहा है कि आतंक की नर्सरियों को बंद कर चुका है। हालाँकि, यह स्पष्ट है कि वह लगातार आतंकियों को खाद-पानी देता है। लश्कर और जमात उद दावा जैसे आतंकी समूह लगातार उसकी जमीन से चलते हैं।

अमेरिका ने भी लगाया था प्रतिबन्ध

अमेरिका ने भी जुलाई, 2025 में TRF को एक वैश्विक आतंकी संगठन घोषित किया था। अमेरिका की इस कार्रवाई को भारत ने एकदम सही कहा था और पाकिस्तान ने भी दबाव में माना था कि यह लश्कर से जुड़ा हुआ है। TRF पहलगाम आतंकी हमले के अलावा और भी कई हमलों में शामिल रही है।

अपने ही ‘सिस्टम’ से हार गई एक महिला जज, जिस पर लगाए यौन उत्पीड़न के आरोप उसे हाई कोर्ट का जज बनाया: इस्तीफा देकर लिखा- टूट चुकी हूँ, मेरे साथ न्याय नहीं हुआ

न्याय सुनिश्चित करना न्यायपालिका का काम है। पर एक महिला जज ने ही इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा है कि उन्हें न्याय देने में यह सिस्टम विफल रहा है। इस महिला जज का नाम अदिति शर्मा है।

उन्होंने राजेश कुमार गुप्ता को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का जज बनाए जाने के विरोध में इस्तीफा दिया है। महिला जज ने गुप्ता पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। हालाँकि जज गुप्ता का कहना है कि उन्हें ऐसे किसी आरोपों की आधिकारिक जानकारी नहीं है।

गुप्ता ने हाई कोर्ट के जज के तौर पर फिलहाल शपथ नहीं ली है। लेकिन इस पर विरोध दर्ज कराते हुए मध्य प्रदेश के शहडोल की सिविल जज अदिति शर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

अदिति शर्मा ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को अपना इस्तीफा भेजा है। इसमें कहा है, “अपनी नैतिकता और भावनाओं को लगे आघात को देखते हुए मैं न्यायिक सेवा से इस्तीफा दे रही हूँ, इसलिए नहीं कि मैंने न्याय में विश्वास खो दिया है, बल्कि इसलिए कि ‘न्याय’ ने उसी संस्था के भीतर अपना रास्ता खो दिया है जिसने इसकी रक्षा करने की शपथ ली थी।”

उन्होंने अपने इस्तीफे को ‘विरोध दर्ज कराने का तरीका’ कहा है। जज अदिति शर्मा ने लिखा है, “उन्होंने न्याय में विश्वास नहीं खोया है, बल्कि उस सिस्टम से टूट चुकी हैं, जो न्याय की संरक्षक मानी जाती है। उनका इस्तीफा इस रूप में दर्ज हो कि कभी मध्यप्रदेश में एक महिला जज थी जो न्याय के लिए समर्पित थी, लेकिन उसी संस्था ने उसके साथ न्याय नहीं किया।”

शर्मा ने इस साल की शुरुआत में भारत के राष्ट्रपति और सर्वोच्च न्यायालय कॉलेजियम से कई शिकायतें की थीं, जिनमें उन्होंने गुप्ता की पदोन्नति पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया था। शर्मा उन छह महिला जस्टिस में से एक थीं जिन्हें जून 2023 में मध्य प्रदेश सरकार ने सेवा से हटा दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए सभी 6 जजों की बहाली का आदेश दिया था। टॉप कोर्ट ने कहा था कि न्यायिक संस्थानों को महिला अधिकारियों के प्रति ज्यादा संवेदनशीलता दिखानी चाहिए थी और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि न्याय न सिर्फ दिया जा रहा है, बल्कि दिखाई भी दे रहा है। इसके बाद जज अदिति शर्मा शहडोल में 2024 में दोबारा सिविल जज बनीं ।

हाईकोर्ट के जज बने आरोपित जज राजेश कुमार गुप्ता पर जज अदिति शर्मा के अलावा दो दूसरी न्यायिक अधिकारियों ने भी यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे और शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने आरोपित जज के नाम की सिफारिश की और केन्द्र ने मंजूरी दे दी।

आरोपित जज राजेश गुप्ता ने खुद पर लगे आरोपों से इनकार करते हुए सार्वजनिक रूप से कहा था कि उनके खिलाफ किसी शिकायत की उन्हें आधिकारिक जानकारी नहीं है। वे तीन दशक से न्यायिक सेवा में अपना योगदान दे रहे हैं।

नाम- शमा परवीन, पहचान- भारत में अल कायदा की पहली महिला आतंकी, काम- इंस्टाग्राम पर जिहाद फैलाना: गुजरात ATS ने बेंगलुरु से दबोचा, 4 आतंकियों वाले मॉड्यूल से कनेक्शन

गुजरात की ATS यूनिट ने बेंगलुरु से अल कायदा इंडियन सब कॉन्टिनेन्ट (AQIS) की एक महिला इस्लामी आतंकी को गिरफ्तार किया है। इसका नाम शमा परवीन है। शमा परवीन सोशल मीडिया से अल कायदा का आतंक फैला रही थी। उसका लिंक हाल ही में अनकवर किए गए मॉड्यूल से है। ATS उससे बाकी जानकारियाँ निकालने में जुटी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह गिरफ्तारी बेंगलुरु में 30 जुलाई, 2025 के आसपास हुई है। पकड़ी गई शमा परवीन 30 वर्ष की है। शर्मा परवीन झारखंड की रहने वाली अहिहै। वह बेंगलुरु में अपने भाई के साथ रहती है। यहीं से वह सोशल मीडिया पर इस्लामी आतंक का प्रचार-प्रसार करती है।

शमा परवीन को कुछ रिपोर्ट्स में भारत अल कायदा मॉड्यूल का सरगना बताया गया है। शमा परवीन की गिरफ्तारी अल कायदा मॉड्यूल के खुलासे के बाद हुई है। 23 जुलाई, 2025 को देश के अलग-अलग हिस्से से पकड़े गए 4 इस्लामी आतंकियों से पूछताछ में शमा परवीन का नाम आया था। इसके बाद बाद उसे बेंगलुरु से गिरफ्तार किया गया।

गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष सांघवी के अनुसार, शमा परवीन पूरी तरह कट्टरपंथी है और पाकिस्तान के सीधे सम्पर्क में थी। यहाँ वह अपने हैंडलर्स से बातचीत करती थी। ATS ने बताया है कि वह इंस्टाग्राम समेत बाक़ी सोशल मीडिया पर आतंकी कंटेंट साझा करती थी और लोगों को भड़काती थी। इसके साथ ही वह आतंकी भर्ती में भी लगी हुई थी।

शमा परवीन भड़काऊ बयान डाउनलोड करके भी साझा करती थी। उसका लिंक गुजरात के अलकायदा मॉड्यूल से भी था। शमा परवीन और उससे जुड़े लोग देश भर में बड़े हमले की योजना बना रहे थे। यह भी जानकारी सामने आई है।

शमा परवीन वर्तमान में बेरोजगार है लेकिन उसका भाई बेंगलुरु में तीन साल से नौकरी करता है। ATS ने उसे गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश किया और उसकी ट्रांजिट रिमांड ली है। अब उससे और भी पूछताछ की जा रही है। अल कायदा मॉड्यूल में शमा परवीन पहली महिला आतंकी है।

गौरतलब है कि इससे पहले गुजरात ATS ने अल कायदा 4 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया था। यह आतंकवादी देश के अलग-अलग हिस्सों से गिरफ्तार किए गए थे। यह चारों अल कायदा के लिए भर्ती चला रहे थे। इनकी पहचान मोहम्मद फरदीन रईस, सेफुल्लाह कुरैशी रफीक, मोहम्मद फैक रिजवान और जीशान अली के रूप में हुई थी।

दो आतंकी को गुजरात में अलग-अलग जगहों से पकड़ा गया था। वहीं, एक को दिल्ली और अन्य को नोएडा से गिरफ्तार किया गया था। ये सभी आतंकी सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट डालकर लोगों को अल कायदा से जोड़ने का काम कर रहे थे। यह सोशल मीडिया पर कट्टरपंथी और आतंकवादी विचारधारा से संबंधित फोटो-वीडियो डालते थे।

सोने की खानों के लिए प्रसिद्ध कोलार की एक महिला का ब्लड ग्रुप ऐसा, जो दुनिया में किसी और का नहीं: न किसी को दे सकती है खून और न किसी से ले सकती है, जानिए क्या है CRIB?

भारत के राज्य कर्नाटक में स्थित कोलार जिला वैसे तो अपने सोने की खदानों के साथ दूध के उत्पादन के लिए सबसे अधिक प्रसिद्ध है। लेकिन अब ये जिला एक अन्य कारण से भी चर्चा में है।

चर्चा ये कि यहाँ पर 38 वर्षीय महिला में एक नया और दुर्लभ रक्त समूह सामने आया है। ये रक्त समूह महिला को नई पहचान देने के साथ उसके लिए मुश्किलों का सबब भी है। वह न तो किसी को अपना खून दे सकती है और न ही किसी तरह की आपात स्थिति में दुनिया केस किसी भी अन्य रक्त समूह से ब्लड यूनिट ले पाएगी। आइए आपके बताते हैं पूरा मामला

पहुँची हार्ट सर्जरी के लिए, सामने आई दूसरी मुश्किल

कर्नाटक के कोलार जिले में 38 वर्ष की एक महिला अपने हृदय की सर्जरी के लिए अस्पताल पहुँची। सामान्य जाँचों में उसका रक्त समूह O+ve निकल कर आया। हालाँकि डॉक्टरों को रक्त में कुछ बदलाव नजर आया। आगे की जाँच में उन्हें पता चला कि महिला का रक्त किसी अन्य O+ve रक्त यूनिट से मेल नहीं खाता। इसके बाद आगे की जाँच की गई।

जाँच में पाया गया कि महिला का रक्त पैनरिएक्टिव था। इसका अर्थ है कि ये रक्त किसी भी अन्य रक्त के नमूने से किसी भी तरह से मैच नहीं हो रहा था। इसके बाद महिला के रक्त को रोटरी बैंगलोर टीटीके ब्लड सेंटर की एडवांस्ड इम्यूनोहेमेटोलॉजी लैब को भेजा गया। यहाँ पर जाँच होने के साथ-साथ रक्त का नमूना ब्रिटेन स्थित इंटरनेशनल ब्लड ग्रुप रेफरेंस लैब भी भेजा गया।

10 महीने लंबी जाँच के बाद सामने आया CRIB

इस पूरे मामले में 10 महीने की लंबी जाँच की प्रक्रिया चली। वैज्ञानिकों और डॉक्टरों की मेहनत रंग लाई। पता चला कि महिला के रक्त में नया एंटीजन है। यह दुर्लभ है। दुर्लभ रक्त का मतलब है कि किसी व्यक्ति के रक्त में एक बहुत ही सामान्य एंटीजन की कमी है जो अधिकांश आबादी में पाया जाता है, या फिर उसमें एंटीजन का एक संयोजन मौजूद नहीं है।

10 महीने की गहन जाँच के बाद वैज्ञानिकों द्वारा खोजे गए नए रक्त एंटीजन को क्रोमर समूह की श्रेणी में रखा गया है। इसका नाम CRIB रखा गया है। CR का मतलब क्रोमर Cromer और IB का अर्थ भारत और बेंगलुरू (India, Bangalore) है।

पूरी जांच के बाद जब महिला का रक्त समूह सामने आया उसके बाद महिला के हार्ट सर्जरी की गई। खास बात यह रही कि इस हार्ट सर्जरी में महिला को बिना किसी अतिरिक्त खून ब्लड यूनिट के पूरी शल्य प्रक्रिया खत्म की गई।

न किसी को खून दे सकती है, न ले सकती है

हालाँकि इस नए रक्त समूह के जानकारी के बाद महिला के साथ एक नई चुनौती भी है और वह किसी से खून ले नहीं सकती और न ही किसी को खून दे सकती है। ऐसे में भविष्य में यदि महिला को कभी भी रक्त की आवश्यकता होती है तो उन्हें अपना ही रक्त पहले ब्लड बैंक को देना होगा ताकि उसकी जाँच के बाद वहीं उन्हें वापस चढ़ाया जा सकेगा।

भारत के कुछ दुर्लभ रक्त समूह

भारत में सामान्य तौर पर A+, B+, A-, B-, AB+, AB-, O+ और O-ve रक्त समूह मिलते हैं। -ve फैक्टर वाले रक्त समूह ज्यादातर कम ही पाए जाते हैं। इनके साथ ही भारत में पाए जाने वाले बॉम्बे ब्लड ग्रुप और RhNull दुर्लभ रक्त समूह हैं।

एअर इंडिया में 100 गड़बड़ियाँ, 7 बेहद गंभीर: ऑडिट रिपोर्ट से हुई पहचान, DGCA ने सुधार के लिए 23 अगस्त तक का समय दिया

अहमदाबाद में हुए एअर इंडिया विमान हादसे के बाद इसकी जाँच जारी है। 12 जून 2025 को हुए इस हादसे में 260 लोगों की जान चली गई थी। इस पर AAIB की शुरुआती जाँच रिपोर्ट के बाद अब कंपनी में विमान संचालन को लेकर DGCA की ऑडिट रिपोर्ट सामने आई है।

ऑडिट रिपोर्ट में 100 से ज्यादा गड़बड़ियों का जिक्र

विमानन सुरक्षा नियामक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी DGCA ने अपने ऑडिट में टाटा समूह की एयरलाइंस एअर इंडिया में 100 से ज्यादा खामियाँ पाई हैं। जानकारी के मुताबिक ऑडिट रिपोर्ट में चालक दल के आराम और काम की अवधि, प्रशिक्षण, चालक दल की संख्या में कमी और उड़ान की योग्यता से संबंधित 100 से ज्यादा उल्लंघन और निष्कर्ष डीजीसीए ने अपनी रिपोर्ट में दिए हैं।

इन खामियों को 7 भागों में विभाजित किया गया है। लेवल 1 में 7 गडबड़ियाँ हैं जो सुरक्षा मानको की दृष्टि से अति गंभीर श्रेणी में आते हैं। इन गड़बड़ियों को 30 जुलाई तक ठीक करने के लिए कहा गया है। शेष 93 खामियों को सुधारने के लिए 23 अगस्त 2025 तक का समय दिया गया है। डीजीसीए की रिपोर्ट के मुताबिक, ” एअर इंडिया की संचालन प्रणाली में पायलटों के प्रशिक्षण अधूरे, ट्रेनिंग रिकॉर्ड बिखरे और रोस्टर में गड़बड़ियाँ मिली। कम विजिबिलिटी में उड़ान भरने के लिए जरूरी अनुमतियों में भी अनियमितता मिलीं।”

ऑडिट रिपोर्ट पर एअर इंडिया की प्रतिक्रिया

एअर इंडिया ने इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। एअर इंडिया ने कहा है कि डीजीसीए की रिपोर्ट का एयरलाइन जवाब देगी और सुधार के लिए कदम उठाए जाएँगे। एअर इंडिया के मुताबिक, “सभी एयरलाइन कंपनियों में नियमित परीक्षण और उन्हें लगातार मजबूत बनाने के लिए नियमित ऑडिट की जाती है।” एअर इंडिया के मुताबिक, “हम अपना जवाब सुधारात्मक कार्रवाइयों की जानकारी देते हुए डीजीसीए के सामने तय समय में पेश करेंगे।” कंपनी ने कहा है कि 12 जून 2025 को हुए विमान हादसे के बाद विमानों की नियमित जाँच की जा रही है।

गुरुग्राम सेंटर में 1-4 जुलाई तक हुआ ऑडिट

एअर इंडिया का ऑडिट 1 से 4 जुलाई के बीच गुरुग्राम सेंटर पर हुआ था। इसमें फ्लाइट के पूरे ऑपरेशन की जाँच की गई थी। डीजीसीए ने 23 जुलाई को एअर इंडिया को कारण बताओ नोटिस भेजा था। इसमें ऑपरेशनल प्रोसीजर मसलन चालक दल के आराम और ड्यूटी नियमों का उल्लंघन, ट्रेनिंग के नियम को लेकर सवाल पूछे गए थे।

3 अधिकारियों पर गिरी थी गाज

इससे पहले 21 जून को एअर इंडिया के 3 अधिकारियों को शेड्यूलिंग और रोस्टरिंग में लापरवाही का आरोप लगाते हुए ड्यूटी से हटाने का निर्देश डीजीसीए ने एअर इंडिया को दिया था। डीजीसीए ने अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए थे और घोर लापरवाही की बात कहते हुए एअर इंडिया को कड़ी फटकार लगाई थी।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक डीजीसीए ने एअर इंडिया को कहा था कि एयरबस ए 320 के पार्टस् का बदलाव तय समय पर नहीं किया गया और काम समय पर पूरा दिखाने के लिए एएओ रिकॉर्ड बदला गया। एजेंसी के मुताबिक एयरलाइन ने अपनी गलती मान ली थी। हालाँकि कहा था कि दिक्कत की जानकारी मिलते ही उसने जरूरी कदम उठा लिए थे।

AAIB की शुरुआती जाँच रिपोर्ट

AAIB ने अपनी रिपोर्ट में कॉकपिट के ऑडियो रिकॉर्ड के आधार पर बताया था कि विमान के इंजन हवा में बंद हो गए थे। दोनों इंजनों के काम नहीं करने पर विमान नीचे गिर गया। रिपोर्ट के मुताबिक MAY DAY का कॉल पायलट की तरफ से दुर्घटना के चंद सैकेंड पहले आया था, हालाँकि विमान नॉर्मल टेकऑफ की तरह की उड़ान भरा था लेकिन चंद सेकेंड के बाद ही उसमें गड़बड़ी आ गयी।

रिपोर्ट में उन तकनीकी चीजों का सिलसिलेवार तरीके से जिक्र किया गया, जो विमान के उड़ान के बाद कुछ सेकेंड में घटित हुए।

अहमदाबाद में हुआ था विमान हादसा

एअर इंडिया की फ्लाइट AI 171 अहमदाबाद से लंदन गैटविक के लिए अहमदाबाद हवाई अड्डे से उड़ान भरी थी। एअर इंडिया का ये बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर विमान कुछ सेकेंड बाद ही बी जे मेडिकल कॉलेज के होस्टल पर गिर गया। इस दुर्घटना में 260 लोग मारे गए।

मरने वालों में 241 यात्री और चालक दल के सदस्य शामिल थे। इसके अलावा बीजी मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में मौजूद कई छात्रों समेत 19 अन्य लोग भी अपनी जान गँवा बैठे। इस हादसे में एक यात्री की जान बच गई। ये विमान हादसा भारत की सबसे भयानक विमान दुर्घटनाओं में एक माना जाता है।

रूस में 73 साल का सबसे जोरदार भूकंप आया, अमेरिका-जापान समेत 30+ देशों में सुनामी की चेतावनी: 12 फीट ऊँची लहरें उठने की आशंका, भारत ने भी नागरिकों के लिए जारी किया अलर्ट

रूस के पूर्वी क्षेत्र के तटवर्ती इलाके कामचटका में बुधवार (30 जुलाई 2025) को जोरदार भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर तीव्रता 8.8 मापी गई है। यह भूकंप समुद्र के नीचे 19.3 किलोमीटर (12 मील) की गहराई पर आया है।

इसके बाद अमेरिका के कैलिफोर्निया के तट से लेकर जापान तक सुनामी के लिए चेतावनी जारी कर दी गई है। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे (यूएसजीएस) के अनुसार, समुद्र में 3 से 12 फीट तक ऊँची लहरें उठ सकती हैं जिसके कारण कई क्षेत्रों में तबाही के आशंका जताई गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भूकंप जापान के चार बड़े द्वीपों में से सबसे उत्तरी द्वीप होक्काइडो से लगभग 250 किलोमीटर (160 मील) दूर था। वहाँ इसके हल्के झटके महसूस हुए। हालाँकि होक्काइडो तट पर भी 30 सेंटीमीटर ऊँची लहरें पहुँचीं।

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की मानें तो भूकंप समुद्र में आया। कुरील द्वीप समूह की मुख्य बस्ती सेवेरो-कुरील्स्क में पहली सुनामी लहर टकराई। इसके बाद आस पास के क्षेत्रों में बाढ़ आ गई। हालाँकि अलर्ट के चलते पहले ही संभावित क्षेत्रों से लोगों को हटा दिया गया था। लगभग 2,000+ लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया है।

73 वर्षों बाद फिर हिला कामचटका

रूस में 1 महीने के अंदर 5 बार भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। कामचटका में इतना तीव्रता वाला भूकंप इससे पहले 4 नवंबर 1952 को आया था जिसकी तीव्रता 9 थी और इसके कारण कामचटका में काफी नुकसान हुआ था।

रूस में कामचटका एक प्रायद्वीप है, जो उसके पूर्वी हिस्से में स्थित है। यह प्रशांत महासागर के किनारे साइबेरिया के पूर्व में बसा है। मुख्यतः रूस से जुड़े होने के साथ इसके उत्तर में बेरिंग सागर, दक्षिण में जापान और पूर्व में प्रशांत महासागर है।

जापान में भी जारी हुआ अलर्ट

सुनामी की चेतावनी पर जापान के फुकुशिमा न्यूक्लियर प्लांट को खाली कर दिया गया है। 2011 में यहाँ पर 9 की तीव्रता पर भूकंप और सुनामी आई थी, जिसके बाद फुकुशिमा न्यूक्लियर पावर प्लांट को काफी क्षति पहुँची थी। स्थिति इतनी खराब हो चुकी थी कि सुनामी के लहरों के कारण यहाँ का कूलिंग और बिजली का सिस्टम ठप हो गया था इसकी वजह से रेडियोएक्टिव रिसाव की स्थिति भी बन गई थी।

इन देशों में भी सुनामी का खतरा

रूस में आई सुनामी के बाद जापान समेत आसपास के 30 देशों में भूकंप और सुनामी के लिए चेतावनी जारी की गई है और चपेट में आ सकने वाले संभावित उलाकों को खाली करवाया जा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपने सोशल मीडिया हैंडल ट्रुथ पर भूकंप की जानकारी साझा की है।

अलर्ट जारी किए गए देशों में अमेरिकी समोआ, एंटार्टिका, कोलंबिया, कुक आइलैंड्स, कोस्टा रीका, अल सल्वाडोर, फिजी, गुआम, गुआटेमाला, होलैंड एंड बेकर, इंडोनेशिया, जार्विस आइलैंड, कैर्मेडिस आइलैंड, किरीबाटी, मार्शल आइलैंड, मेक्सिको, मिडवे आइलैंड, न्यूजीलैंड, निकारागुआ, पलाऊ, पल्मिरा आइलैंड, पनामा, पापुआ न्यू गिनी, पेरू, फिलीपींस,समोआ, ताइवान, टोन्गा और वानुअतु शामिल हैं। सभी देशों में पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए चेतावनी जारी की गई है।

अलर्ट में मोड पर आया भारत

भूकंप की खबर के बाद भारत सरकार भी अपने पर्यटकों और भारतीय नागरिकों को लेकर अलर्ट मोड पर है। सैन फ्रांसिस्को स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास से भारतीय नागरिकों के लिए चेतावनी जारी की गई है। इसके तहत कैलिफोर्निया, हवाई और अमेरिका के अन्य पश्चिमी तटीय राज्यों में रहने वाले भारतीय नागरिकों को अलर्ट रहने के लिए कहा गया है।

लोगों ने सोशल मीडिया पर साझा किए वीडियो

सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने सुनामी को लेकर उनके घर में आए भूकंप के झटकों की वीडियो और तस्वीरें साझा की हैं जिसमें झटकों के साथ उसके बाद की भयावहता को साफ तौर पर देखा जा सकता है।

सुनामी के चलते कामचटका में छोटे बच्चों के स्कूल किंडरगार्टन की इमारत भी ध्वस्त हो गई। हालाँकि उस समय इमारत में कोई भी नहीं था। अलर्ट से इमारत को पहले ही खाली करवा लिया गया था।

‘वाह रे बयानबहादुरों, पूरा देश आप पर हँस रहा है’: PM मोदी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर कॉन्ग्रेस को दिखाया आइना, कहा- इनका भरोसा पाकिस्तान के रिमोट कंट्रोल के सहारे

मैं भारत का पक्ष रखने के लिए खड़ा हुआ हूँ… प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अपना वक्तव्य इन लाइनों के साथ चालू किया। उन्होंने इस दौरान जहाँ भारतीय सेनाओं की सफलता पर बात की तो वहीं कॉन्ग्रेस को लगातार उलटे-सीधे प्रश्न उठाने पर आइना भी दिखाया। प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है।

ऑपरेशन सिंदूर में कॉन्ग्रेस ने पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा फैलाया

लोकसभा में प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कॉन्ग्रेस पर जमकर निशाना साधा। पीएम ने कहा कि कॉन्ग्रेस अब पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा को आगे बढ़ा रही है।

पीएम ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर को दुनिया का समर्थन तो मिला, लेकिन दुर्भाग्य है कि मेरे देश के वीरों के पराक्रम को कॉन्ग्रेस का समर्थन नहीं मिला। 22 अप्रैल 2025 के बाद 3-4 दिन में ही यह उछल रहे थे। ये लोग अपनी स्वार्थी राजनीति के लिए मुझ पर निशाना साध रहे थे, लेकिन इनकी बयानबाजी और इनका छिछोरापन देश के सैनिकों का मनोबल गिराती रही।”

ऑपरेशन सिंदूर पर कॉन्ग्रेस ने पाकिस्तान का प्रोपेगेंडा फैलाने काम किया है। इस पर पीएम ने कहा, “10 मई 2025 को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत हो रहे एक्शन को रोकने की घोषणा की। इसको लेकर यहाँ भांति-भांति की बातें कही गईं। यह वही प्रोपेगेंडा है जो सीमा पार से फैलाया गया है। कुछ लोग सेना द्वारा दिए तथ्यों की जगह पाकिस्तान के झूठ को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं।”

पीएम ने आगे कहा, “देश देख रहा है कि कॉन्ग्रेस राजनीतिक मुद्दों के लिए पाकिस्तान पर निर्भर होता जा रहा है। कॉन्ग्रेस को पाकिस्तान के मुद्दे इम्पोर्ट करने पड़ रहे हैं। जब बालाकोट में एयरस्ट्राइक हुई तो कॉन्ग्रेस वाले पूछने लगे कि फोटो दिखाई, पाकिस्तान भी यही पूछता था, ये भी यही पूछते थे। आतंकवादी रो रहे हैं, उनके आका रो रहे हैं और उनको रोते देख यहाँ भी कुछ लोग रो रहे हैं।”

पीएम ने कॉन्गेस के लिए कहा, “पाकिस्तान के बयान और हमारा विरोध करने वालों के बयान फुल स्टॉप और कॉमा के साथ एक हैं। देश हैरान है कि कॉन्ग्रेस ने पाकिस्तान को क्लीन चिट दे दी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस को भारत के रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और गृह मंत्री पर भरोसा नहीं है, इनका भरोसा पाकिस्तान के रिमोट कंट्रोल से बनता और बदलता है।

इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कॉन्ग्रेस के उठाए गए सवालों को लेकर विपक्ष को जमकर घेरा। पीएम ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर पर इन्होंने (विपक्ष) कहा कि रोक क्यों दिया, पहले मानते ही नहीं थे और पूछते हैं कि रोक क्यों दिया। वाह रे बयानबहादुरों, पूरा देश आप पर हँस रहा है।” प्रधानमंत्री ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने कारगिल की लड़ाई में भारत की जीत को भी अब तक नहीं अपनाया है।

कॉन्ग्रेस की गलती याद दिलाईं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉन्ग्रेस सरकार को उनकी गलती याद दिलाईं। इनमें सिंधु जल समझौता से लेकर बाटला हाउस एनकाउंटर का जिक्र किया।

प्रधानमंत्री ने कहा, “1962 और 1963 के बीच कॉन्ग्रेस के नेता जम्मू-कश्मीर के नेता पूँछ, नीलम वैली और उरी को छोड़ देने का प्रस्ताव रख रहे थे। यह सब लाइन ऑफ़ पीस के नाम पर किया जा रहा था, 1966 में इन्होंने ही कच्छ के रण पर मध्यस्थता स्वीकार की थी, यह इनका राष्ट्रीय सुरक्षा पर विजन है।

पीएम ने आगे कहा, “1971 में पाकिस्तान के 93 हजार फौजी हमारे पास बंदी थे, उसका हजारों किलोमीटर एरिया हमने कब्जा किया था। हम बहुत कुछ कर सकते थे। उस दौरान थोड़ी समझ होती तो POK वापस लिया जा सकता था। इतना सारा जब सामने टेबल पर था तो करतारपुर साहिब वापस ले सकते थे।”

सिंधु जल समझौते पर बोलते हुए पीएम ने कहा, “सिंधु नदी से भारत जाना जाता था, लेकिन कॉन्ग्रेस ने उस पर पंचायत करने का अधिकार वर्ल्ड बैंक को दिया। सिंधु जल समझौता भारत के स्वाभिमान के साथ बहुत बड़ा धोखा था। राज्यों के भीतर पानी को लेकर विवाद होता रहा और पाकिस्तान मौज मनाता रहा। अगर सिंधु जल समझौता ना होता तो कई बड़ी परियोजनाएँ बनतीं। सिंधु जल समझौते के बाद नेहरूजी ने करोड़ों रूपए भी दिए ताकि पाकिस्तान नहर बना सके।”

पीएम ने आगे कहा, “बाँध हमारा है, पानी हमारा है लेकिन पाकिस्तान का निर्णय है कि आप उसकी सफाई (डीसिल्टिंग) नहीं कर सकते। नेहरू ने कहा था कि सिंधु जल समझौता बाकी समस्याओं के लिए रास्ता खोलेगा। उन्होंने बाद में कहा लेकिन हम वहीं के वहीं हैं।”

कॉन्ग्रेस सरकार के दौरान देश में असुरक्षा के माहौल पर बोलते हुए पीएम ने कहा, “2014 से पहले असुरक्षा का जो माहौल था, उसे याद करके लोग सिहर जाते हैं… हर जगह पर घोषणा होती थी कि कोई भी लावारिस चीज दिखे छूना मत, ये बम हो सकता है। देश के कोने-कोने में यही हाल था।”

बाटला हाउस एनकाउंटर के दौरान सोनिया गाँधी के आँसूओं का जिक्र करते हुए पीएम ने कहा, “दिल्ली में जब बाटला हाउस एनकाउंटर हुआ तो कॉन्ग्रेस की एक बड़ी नेता के आँख में आसू थे, वोट पाने के लिए इसे देश भर में प्रसारित किया गया।”

पीएम ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने हिंदुत्व का अपमान किया है। पीएम ने बताया, “कॉन्ग्रेस दुनिया को हिन्दू आतंकवाद की थ्योरी बेचने में लगी हुई थी। कॉन्ग्रेस के एक बड़े नेता ने अमेरिका के राजनयिक को कह दिया था कि लश्कर से बड़ा खतरा हिंदुत्व हैं।”

लोकसभा से पाकिस्तान को लताड़ा

प्रधानमंत्री ने लोकसभा से पाकिस्तान को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान फैलाई गई झूठी साजिशों का पर्दाफाश किया। पाकिस्तान को ‘आतंकियों का आका’ बताकर पीएम ने कहा कि उनकी रूह काँप रही है।

पीएम ने कहा, “सेना को कार्रवाई की खुली छूट दी गई कि कब, कहाँ और कैसे जवाब दिया जाए। आतंकियों के आकाओं को ऐसी सजा मिली कि उनकी अब तक रूह काँप रही है। ऑपरेशन सिंदूर में 22 मिनट में 22 अप्रैल 2025 का बदला सेना ने निर्धारित लक्ष्य के साथ ले लिया।”

उन्होंने आगे कहा, “पाकिस्तान की न्यूक्लियर धमकी को हमने झूठा साबित कर दिया, भारत ने सिद्ध कर दिया कि न्यूक्लियर ब्लैकमेलिंग अब नहीं चलेगी और ना ही अब इसके सामने भारत झुकेगा। आज तक पाकिस्तान के कई एयरबेस ICU में पड़े हैं… ऑपरेशन सिंदूर तकनीक की महारत में सफल सिद्ध हुआ है, पिछले 10 साल में हमने जो तैयारियाँ की हैं, वह ना की होती तो तकनीक के युग में हमारा कितना नुकसान हो सकता था, इसका अंदाजा लगा सकते है।”

पाकिस्तान को धमकी देते हुए पीएम ने कहा, “पहले दिन से क्लियर था कि हमारा लक्ष्य आतंकी और उनके आका हैं, उनके अड्डे हैं… उनको हम ध्वस्त करना चाहते हैं, हमने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि हमने अपना काम कर दिया है। पाकिस्तान में समझदारी होती तो आतंकियों के साथ खुलेआम खड़े रहने की गलती ना करता, उसने निर्लज्ज होकर आतंकियों के साथ खड़े होने का फैसला किया… हम पूरी तरह तैयार थे और मौके की तलाश में थे।”

प्रधानमंत्री ने सीजफायर पर बोलते हुए कहा, “पकिस्तान ने इतने कड़े प्रहार के बाद DGMO को पाकिस्तान ने फोन करके गुहार लगाई कि बहुत मारा, अब और मार झेलने की ताकत नहीं है, हमला रोक दो। उसी दौरान 9 मई, 2025 को रात को अमेरिका के उपराष्ट्रपति ने मुझसे बात का प्रयास किया।”

पीएम ने आगे कहा, “वह घंटे भर प्रयास कर रहे थे, लेकिन सेना के साथ मीटिंग के चलते मैं फोन उठा नहीं पाया। मैंने उन्हें कॉल बैक किया… तब उन्होंने फोन पर बताया कि पाकिस्तान बहुत बड़ा हमला करने वाला है। मेरा जवाब था- अगर पाकिस्तान का यह इरादा है तो उसे बहुत महँगा पड़ेगा। मैंने कहा था- हम गोली का जवाब गोले से देंगे।”

अंत में पीएम मोदी ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर अब भी जारी है।”

पेमेंट रिवर्सल, पैसे भेजने वाले का दिखेगा नाम… 50 बार बैलेंस चेक: 1 अगस्त से UPI हो रहा और आसान-तेज, NPCI बोली- नई टेक्निक से कम होंगे साइबर क्राइम

जल्दी ही UPI (Unified Payments Interface) में बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। इससे पैसा भेजते वक्त अकाउंट होल्डर का नाम भी दिखेगा। बैलेंस देखने और गलती से पेमेंट होने पर भी पैसा वापस लेने को लेकर भी नियम बदल रहे हैं। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के अनुसार, यह बदलाव 1 अगस्त, 2025 से लागू हो रहे हैं।

बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, NPCI का कहना है कि इससे रिस्पॉन्स टाइम (भुगतान में लगने वाला समय) बेहतर होगा और UPI ट्रांजैक्शन्स की परफॉर्मेंस सुधरेगी। अब आप एक दिन में किसी एक UPI एप से 50 से ज्यादा बार अपना बैंक बैलेंस चेक कर पाएँगे। वहीं ऑटो-पे (जैसे EMI, सब्सक्रिप्शन या बिल पेमेंट) अब किसी भी समय के बजाय तय समय स्लॉट्स में होंगे। वहीं अगर कोई पेमेंट अटक जाता है तो आप उसका स्टेटस सिर्फ 3 बार चेक कर सकते हैं।

जानिए कौन-कौन से फीचर्स में होगा बदलाव?

1. डेली बैलेंस चेक लिमिट: अब हर UPI ऐप पर यूजर एक दिन में केवल 50 बार ही अपना बैंक बैलेंस चेक कर सकेंगे। अगर आप अलग-अलग ऐप (जैसे PhonePe, Google Pay, Paytm) इस्तेमाल करते हैं, तो हर ऐप पर अलग-अलग यह लिमिट लागू होगी।

2. ट्रांजैक्शन स्टेटस चेक लिमिट: पेंडिंग ट्रांजैक्शन का स्टेटस आप सिर्फ 3 बार ही चेक कर सकते हैं और हर बार इसके बीच में 90 सेकंड का अंतर जरूरी होगा।

3. ऑटो-पे (AutoPay) टाइमिंग: ऑटो पे ट्रांजैक्शन्स में अब सिर्फ तीन विशेष समय स्लॉट में ही प्रोसेस होंगी- सुबह 10 बजे से पहले, दोपहर 1 बजे से शाम 5 बजे के बीच और रात 9:30 बजे के बाद

4. लिंक्ड बैंक अकाउंट व्यू लिमिट: इसके तहत आप अपने ऐप में बैंक अकाउंट की डिटेल्स एक दिन में केवल 25 बार ही देख पाएँगे।

5. पेमेंट रिवर्सल लिमिट: अगर कोई ट्रांजैक्शन गलत हो गया हो, तो आप 30 दिनों में अधिकतम 10 बार रिवर्सल की रिक्वेस्ट कर सकते हैं। वहीं एक सेंडर की ओर से अधिकतम 5 रिक्वेस्ट ही मान्य होंगी।

6. बेनीफिशियरी नाम डिस्प्ले: अब पेमेंट करने से पहले रिसीवर का बैंक में रजिस्टर्ड नाम दिखेगा, जिससे गलती और फ्रॉड की संभावना कम होगी।

7. बैंक और UPI ऐप्स पर सख्त निगरानी: NPCI अब बैंकों और UPI ऐप्स की API यूजेज को मॉनिटर करेगा। अगर कोई ऐप या बैंक नियमों का पालन नहीं करता, तो उस पर जुर्माना लग सकता है या उसकी UPI एक्सेस सीमित भी की जा सकती है।

यूजर्स के लिए ऐप में खुद ही लागू होंगे सभी बदलाव

आम यूजर्स को इन बदलावों के लिए कुछ भी करने की आवश्यकता नहीं होगी। आपका हर दिन का पेमेंट, बिल पेमेंट या मनी ट्रांसफर सब उसी तरह से चलता रहेगा, जैसे नियम बदलने से पहले चलता था। वहीं ये सभी बदलाव आपके UPI एप्स में अपने आप लागू हो जाएँगे।

NPCI का कहना है कि पिछले महीनों में UPI सर्वर पर बोझ बढ़ा था, जिससे कई बार ट्रांजैक्शन फेल होने या स्लो होने की शिकायतें आईं थी। NPCI के मुताबिक, बार-बार बैलेंस चेक करने या ऑटोपे प्रोसेसिंग से सिस्टम पर दबाव पड़ता है। अब नए नियमों से सर्वर लोड कम होगा।

NPCI इस नई तकनीक पर काम कर रहा है ताकि बढ़ते साइबर क्राइम से बचा जा सके और पेमेंट प्रक्रिया को और सुरक्षित बनाया जा सके। इसके अलावा इस योजना पर भी विचार चल रहा है कि UPI में पिन को वैकल्पिक करके फेस और फिंगर का भी इस्तेमाल किया जाए।

भविष्य में यह सुविधा करोड़ों UPI यूजर्स के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। यह फीचर कम पढ़े-लिखे लोगों और बुजुर्गों के लिए मददगार सिद्ध होगा। जानकारी के अनुसार, हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत की तेज और उन्नत डिजिटल पेमेंट प्रणाली की तारीफ भी की है।

IMF ने कहा, “भारत अब दुनिया में सबसे तेज पेमेंट्स करने वाला देश बन गया है।” गौरतलब है कि UPI के आने के बाद से कैश का इस्तेमाल धीरे-धीरे कम हो रहा है और डेबिट/क्रेडिट कार्ड्स जैसे अन्य माध्यमों की तुलना में UPI ने बहुत तेजी से विस्तार किया है।

आज UPI हर महीने 18 अरब (18 billion) से ज्यादा ट्रांजैक्शन प्रोसेस करता है और भारत में इलेक्ट्रॉनिक रिटेल पेमेंट का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है।