Home Blog Page 5388

बंगाल: वर्चस्व को लेकर टीएमसी के दो गुटों में बमबाजी, गोली लगने से राहगीर की मौत

पश्चिम बंगाल में दिनोंदिन सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं का संघर्ष भी बढ़ता जा रहा है। ऐसी ही एक घटना में 26 साल के शेख इन्सान के मारे जाने की है। वह वीरभूम के निकट सांईथिया इलाके के कल्याणपुर गाँव में वर्चस्व को लेकर टीएमसी के दो गुटों की बमबाजी और गोलीबारी का शिकार हो गया। कुछ लोगों के जख्मी होने की भी खबर है। तनाव को देखते हुए गॉंव में पुलिस बल की तैनाती की गई है।

दरअसल, कल्याणपुर गाँव में वर्चस्व को लेकर लम्बे समय से तृणमूल के स्थानीय अध्यक्ष और पार्टी के एक जिलास्तरीय नेता के बीच संघर्ष चल रहा है। सोमवार रात दोनों गुटों के लोगों का एक-दूसरे से आमना-सामना हो गया। दोनों पक्षों के बीच कहासुनी से मामला सीधे बमबाजी और गोलीबारी तक पहुँच गया।

तृणमूल के दोनों गुटों के बीच हुए इस ख़ूनी संघर्ष का दौर सुबह तक चला। इस दौरान रास्ते से गुजर रहे शेख इन्सान को तीन गोलियाँ लगीं। घायल शेख को स्थानीय लोग अस्पताल ले गए। अस्पताल पहुँचते ही डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलने पर पहुँची पुलिस ने किसी तरह हालात पर काबू पाया।

मृतक शेख के परिवार का दावा है कि उसका सम्बन्ध किसी भी राजनीतिक दल से नहीं था। उन्होंने आरोप लगाया कि डालिम, ताहिरुल नाम के व्यक्तियों ने जानबूझकर शेख को गोली मार दी। इस घटना के बाद से ही मृतक के परिजनों में काफी रोष है। उन्होंने सभी आरोपितों को कठोर सजा देने की माँग की है। इस घटना को भाजपा ने तृणमूल कॉन्ग्रेस की गुटबाजी बताया तो तृणमूल के उपाध्यक्ष अभिजीत सिंह ने भाजपा के आरोप को निराधार करार देते हुए कहा कि असामाजिक तत्वों की हरकत के चलते राह चलते युवक की जान चली गई।

गौरतलब है कि सोमवार को ही ऐसी एक अन्य घटना में टीएमसी के तीन कार्यकर्ताओं के परखच्चे उड़ गए थे। मुर्शिदाबाद जिले के तलताली इलाके में नदी तट पर कब्जे को लेकर पार्टी के दो गुटों के बीच संघर्ष के कारण यह घटना घटी। बताया जाता है कि प्रतिद्वंद्वी गुट पर हमले के बम बनाते वक्त हुए धमाके में मिंटू मंडल, ननटू मोला और छवि शेख की मौत हो गई।

डेनमार्क की रानी का सर काटने की धमकी देने वाला मजहब विशेष का आरोपित गिरफ्तार

डेनमार्क के कोपेनहेगन में रहने वाले एक समुदाय विशेष के व्यक्ति को स्थानीय पुलिस ने स्वीडिश राजपरिवार को जान से मारने की धमकी देने के चलते गिरफ्तार किया। स्थानीय अदालत ने आरोपित व्यक्ति को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। बता दें कि हिरासत में लिया गया व्यक्ति समुदाय विशेष से ताल्लुक रखता है और लम्बे समय से वहाँ के राजपरिवार को धमकियाँ दे रहा था।

आरोपित सिलसिलेवार फेसबुक पोस्ट्स में डेनमार्क की रानी मार्गरेथ (द्वितीय) और उनके पूरे राजपरिवार को जान से मारने की धमकी दे रहा था। अपनी धमकी में उसने रानी का सर काटने की बात तक कही थी। स्वीडन में काम करने वाला यह आरोपित व्यक्ति कट्टरपंथी विचारों की तरफ झुकाव रखता है। एक समय यह कट्टरपंथी आरोपित स्वीडन के राजा और दक्षिणपंथी संगठन के संस्थापक कार्ल गुस्ताफ को भी जान से मारने की धमकी दे चुका है।

अपने फेसबुक पोस्ट में आरोपित ने लिखा था, “मैं रानी और उसके पूरे राजपरिवार की गर्दन काट कर धड़ से अलग कर दूँगा। मैंने पहले भी धमकी दी है कि गर्दन काटने से कम का तो कोई सवाल ही नहीं।” इसी तरह उस व्यक्ति ने 16 से 24 अक्टूबर के बीच कई ऐसी पोस्ट लिखीं, जो राजा कार्ल गुस्ताफ के लिए था। उसने लिखा, “अगर मुझे जल्दी उत्तर नहीं मिला तो समझना कि स्वीडिश पुलिस और सीमा बल के लिए यह मेरी आखिरी चेतावनी है, वरना अल्लाह की मर्ज़ी से मैं किसी की परवाह किए बगैर इस राजा का सर काट दूँगा, काट कर अलग कर दूँगा, फिर चाहे इसके लिए क्यों न मुझे अपना ही सर कटवाना पड़े।”

अपनी पोस्ट में उसने कार्ल द्वारा स्थापित दक्षिणपंथी संगठन के नेता रासमस पलादीन की एक तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा, “अगर तुम एक मर्द हो तो सामने आओ, अगर तुमने कुरान की एक भी आयत को जलाने की कोशिश की तो मैं पूरे डेनमार्क के साथ तुम्हें भी जलाकर राख कर दूँगा।” आपको बता दें कि दक्षिणपंथी संगठन के इसी नेता ने एक बार अभिव्यक्ति की आज़ादी मनाते हुए कुरान जला दी थी।

आरोपित शख्स की बीवी ने बताया कि उसका पति गाँजे के अत्यधिक सेवन से पागलपन का शिकार हो गया। दिन-प्रतिदिन बदलते उसके व्यवहार को देखकर उसकी पत्नी ने उसे किसी मनोचिकित्सक के पास जाने की हिदायत दी थी।

वहीं दूसरी ओर अपनी याचिका की सुनवाई के दौरान आरोपित ने सफाई देते झुए कहा कि वह इस्लाम का पालन कर रहा था। इन्हीं दलीलों के चलते अदालत ने अपनी असहमति जताते हुए उसे रिहा करने से इनकार कर 10 दिनों के लिए जेल भेज दिया। बता दें कि यह व्यक्ति स्वीडन का रहने वाला है मगर अपनी पत्नी और एक बेटी के साथ कोपेनहेगेन में रह रहा था। वह अपने काम पर जाने के लिए स्वीडन के माल्मो से रोज़ यात्रा किया करता था।

जेल में बहुत बेचैनी होती है, मुझे जमानत दे दो… चाहे तो घर में ही नज़रबंद कर दो, पर जेल नहीं: नीरव मोदी

भगोड़े हीरा व्यापारी नीरव मोदी ने ‘बेचैनी की समस्या’ (एंग्जायटी इश्यूज) का हवाला देते हुए पाँचवीं बार अदालत से बेल दिए जाने की अपील की है। इसके पहले इसी महीने (अक्टूबर, 2019 में) यूनाइटेड किंगडम की राजधानी लंदन की एक अदालत ने उनकी न्यायिक हिरासत 11 नवंबर, 2019 (सोमवार) तक बढ़ा दी थी। नीरव मोदी ₹13,500 करोड़ की राशि के पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटाले और मनी लॉन्डरिंग केस का मुख्य आरोपित हैं और भारत से फरार हैं। 48 साल के बिजनेसमैन ने लंदन की एक अदालत में एप्लीकेशन दाखिल कर याचना की कि उन्हें बेचैनी और डिप्रेशन (अवसाद) की दिक्कत है, इसलिए बेहतर होगा कि उन्हें जेल से बाहर निकाल कर घर ही में नज़रबंद रखा जाए।

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के अनुसार नीरव मोदी ने इसके पहले अदालत से जमानत पाने की 4 और कोशिशें की थीं। 19 मार्च, 2019 को स्कॉटलैंड यार्ड के हाथों गिरफ्तार होने के बाद मोदी की लीगल टीम ने 4 बेल ऍप्लिकेशन्स लगाईं थीं, जिन्हें हर बार उनके भाग जाने (फ्लाइट रिस्क होने) के आधार पर ख़ारिज कर दिया गया। नीरव मोदी की लीगल टीम का नेतृत्व सॉलिसिटर आनंद दुबे और बैरिस्टर क्लेयर मोंट्गोमेरी कर रहे हैं।

अपने निर्णय में रॉयल कोर्ट्स ऑफ़ जस्टिस इन लंदन ने कहा था कि यह मानने के अच्छे भले कारण हैं कि मोदी को अगर जमानत दे दी गई तो उसकी अवधि समाप्त होने के बाद वे समर्पण नहीं करेंगे। उनके पास भाग निकलने के साधन हैं।

अपने निर्णय में रॉयल कोर्ट्स ऑफ़ जस्टिस इन लंदन के जज सिमलर ने वही चिंताएँ उठाईं, जो इसके पहले वेस्टमिंस्टर मजिस्ट्रेट्स कोर्ट ने मोदी के बेल पाने के प्रयासों के बारे में उठाईं थीं। जज सिमलर के अनुसार सभी प्रस्तुत मैटेरियल को ध्यान में रखने के बाद वे इस नतीजे पर पहुँची हैं कि इस केस में गवाहों के साथ छेड़छाड़ और सबूतों को नष्ट करने के सबूत मौजूद हैं। उनके हिसाब से ऐसा फिर से भी हो सकता है।

यहाँ यह जान लेना ज़रूरी है कि भगोड़े हीरा व्यापारी नीरव मोदी ने भारतीय जाँच एजेंसियों और अदालतों द्वारा लगातार समन भेजे जाने के बावजूद भारत लौटने से इनकार कर दिया था। भारत उनके प्रत्यर्पण के लिए ब्रिटेन में कोशिश कर रहा है। मोदी के प्रत्यर्पण का मुकदमा ब्रिटेन में मई 2020 में शुरू होने की उम्मीद की जा रही है। भारत ने उन पर आर्थिक अपराधों का आरोप लगाया है।

‘बगदादी को अमेरिका ने नहीं मारा, मुस्लिमों ने उसे नकारा और उसकी विचारधारा को मारा’

ISIS के सरगना अबु बकर अल बगदादी की मौत का श्रेय अभी तक जहाँ अमेरिका को दिया जा रहा था, वहीं इसी बीच एक तथाकथित बुद्धिजीवी शाहिद सिद्दीकी ने कहा है कि बगदादी को अमेरिका ने नहीं मारा बल्कि उसे और उसकी विचारधारा को मुस्लिमों ने मारा है।

शाहिद सिद्दीकी ने अपने ट्विटर पर लिखा, “बगदादी मरा क्योंकि पूरे विश्व के मुस्लिमों ने उसे खारिज कर दिया था और उसकी जहरीली मानसिकता के ख़िलाफ़ लड़ाई की थी। उसने अपनी राजनीति साधने के लिए इस्लाम पर कब्जा कर लिया था, वो 21वीं सदी में इस्लाम का सबसे बड़ा दुश्मन था। अमेरिका ने उसे नहीं मारा बल्कि ये मुस्लिम हैं, जिन्होंने उसे नकारा एवं उसकी विचारधारा को मारा।“

हालाँकि, अपने ट्वीट में शाहिद बगदादी और उसकी विचारधारा के ख़िलाफ़ स्पष्ट नजर आए, लेकिन फिर भी उनकी बातों में विरोधाभास दिखाई दिया। क्योंकि पहली बात तो बगदादी की विचारधार का अभी तक अंत नहीं हुआ है और न ही वो आतंकवादी संगठन अभी समाप्त हुआ है, जिसका वो नेतृत्व करता था। इसलिए ये घोषित करना बहुत जल्दबाजी होगी कि बगदादी को किसने मारा।

इसके बाद उनके ट्वीट में बताया गया कि पूरे विश्व के सभी मुस्लिमों ने उसे और उसकी जहरीली विचारधारा को नकारा… जबकि साल 2015 के PEW के सर्वे को देखा जाए तो पता चलता है कि सीरिया के 21% लोग जो ISIS को सपोर्ट करते हैं, उसके अलावा लिबिया के 7%, नाइजिरिया के 14%, ट्यूनिशिया के 13%, मलेशिया के 11% और पाकिस्तान के 9% लोग भी ISIS को समर्थन करते हैं। इसका मतलब है कि पूरे विश्व में अच्छी-खासी तादाद में ऐसे मुस्लिम हैं, जिन्हें ISIS की विचारधारा से फर्क पड़ता है।

2015 में आई PEW रिसर्च के आँकड़े

इसके अलावा ये समझने वाली चीज है कि ISIS केवल कट्टरपंथी इस्लाम का चेहरा नहीं है, बल्कि ये कट्टरपंथी इस्लामी आतंकवाद का एक चेहरा है। जिसके आधार पर तालिबान, अलकायदा, बोको हराम, अल शबाब जैसे संगठन भी उपजे हैं। ये सभी अलग-अलग देशों में सक्रिय हैं और खूँखार रूप ले चुके हैं। इसलिए सिद्दीकी का ये तर्क कि सभी मुस्लिमों ने बगदादी की विचारधारा को नकारा इसलिए वो मरा… ये पूर्ण रूप से गलत है।

इस ट्वीट के कारण सोशल मीडिया पर यूजर्स सिद्दीकी का काफी मजाक उड़ा रहे हैं। लोगों का पूछना है कि वे एक ओर नई दुनिया उर्दू (शाहिद सिद्दीकी नई दुनिया उर्दू के चीफ एडिटर हैं) के जरिए बगदादी के प्रति अपनी संवेदना प्रकट कर रहे हैं और अंग्रेजी पाठकों को दर्शाने के लिए कुछ और ही बोल रहे हैं।

एक यूजर ने कहा कि जिस तरह से सिद्दीकि अपने तर्क दे रहे हैं, उसके अनुसार तो हाफिज सईद और मसूद अजहर का समर्थन करते हैं, क्योंकि वे तो अभी तक जिंदा हैं।

खैर बता दें कि शाहिद सिद्दीकी अक्सर इस तरह की बातें गढ़ने के लिए पहचाने जाते हैं। जिसका हालिया उदाहरण अभी कमलेश तिवारी मामले में भी देखा गया था, जहाँ वो कट्टरपंथी इस्लामिक आतंकवाद का मुद्दा छोड़कर हिंदुत्व ब्रिगेड पर नफरत फैलाने संबंधी आरोप मढ़ते नजर आए थे।

निसार ने बेगम सोनी और साली पप्पी को कुल्हाड़ी से काटा, भीड़ ने पीट-पीट कर मार डाला

उत्तर प्रदेश में एक युवक द्वारा अपनी पत्नी की कथित हत्या और उसके बाद आरोपित की गुस्साई भीड़ के द्वारा हत्या कर देने का मामला सामने आया है। मीडिया खबरों के अनुसार मोहमद निसार ने अवैध संबंधों के शक में बेगम सोनी उर्फ़ अख्तरी की कुल्हाड़ी से हत्या कर दी। वह इतने पर ही नहीं रूका, उसने सास और पत्नी की बहन (साली) को भी कुल्हाड़ी से गंभीर रूप से घायल कर दिया। इस घटना के बाद इकट्ठा हुई आक्रोशित भीड़ ने नाराज़ होकर मोहम्मद निसार को भी पीट पीटकर मार डाला।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार मामला उत्तर प्रदेश के जिला फतेहपुर में गाँव सेमौर का है। यहाँ की रहने वाली 35 वर्षीया मृतका सोनी उर्फ़ अख्तरी, पुत्री मोहम्मद सईद, का निकाह 9 साल पहले छत्तीसगढ़ के रहने वाले मोहम्मद निसार के साथ हुआ था। दोनों के बीच फ़िलहाल कोई आपसी विवाद चल रहा था, और ऐसा कहा जा रहा है कि निसार को सोनी के अवैध संबंधों का शक था। वह ससुराल आया हुआ था और दोपहर में जब पत्नी उसे खाना देने पहुँची तो मोहम्मद निसार ने उस पर धारदार हथियार से हमला कर उसकी हत्या कर दी। अख्तरी की चीख सुनकर उसकी माँ सोगरा और बहन अकरी उर्फ पप्पी जब कमरे में पहुँचे तो निसार ने उन्हें भी बुरी तरह घायल कर दिया। कुछ मीडिया रिपोर्टों में निसार के अपनी 8 साल की बेटी की भी हत्या के प्रयास की बात कही जा रही है।

हो हल्ला सुनकर आस पास के लोगों की भीड़ भी वहाँ इकट्ठा हो गई। भीड़ ने मोहम्मद निसार के कथित कृत्य से क्षुब्ध होकर उस पर हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि जब तक वारदात की सूचना पाकर पुलिस वहाँ पहुँची, भीड़ तब तक मोहम्मद निसार को भी पीट पीटकर उसकी हत्या कर चुकी थी। पुलिस ने घायल सोगरा, अकरी उर्फ़ पप्पी और निसार की बेटी को इलाज के लिए गाजीपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (कम्युनिटी हेल्थ सेंटर, सीएचसी) में भर्ती कराया है। अभी तक निसार की हत्या या मॉब लिंचिंग के लिए किसी के गिरफ़्तार होने की बात किसी भी मीडिया रिपोर्ट में सामने नहीं आई है।

अमर उजाला की खबर के अनुसार कई थानों की पुलिस फ़ोर्स को मौके पर तैनात कर दिया गया है। इलाके के हालात भी तनावपूर्ण बताए जा रहे हैं। इसके अलावा सोनी के इसके पहले भी करीब 2 साल मायके में गुज़ारने की बात कही जा रही है। लाइव हिंदुस्तान ने यह भी दावा किया है कि निसार का इरादा अपने चारों बच्चों की हत्या करने और ससुराल में आग लगाने का भी था। सास के हस्तक्षेप से 5 साल की जोया बच कर भाग निकली और उसने ही शोर मचाकर लोगों को इकठ्ठा किया।

‘सत्ता की हवस और सिद्धांतों की चिता’ से दूर ध्यानमग्न राहुल गाँधी: सुरजेवाला ने किया कन्फर्म

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गॉंधी की विदेश यात्रा का राज खुल गया है। वे आध्यात्मिक यात्रा पर विदेश जाते हैं। ध्यान लगाने के लिए। यह सनसनीखेज खुलासा उनके खासमखास पार्टी के कम्युनिकेशन सेल के मुखिया रणदीप सिंह सुरजेवाला ने की है।

‘सत्ता की हवस एंव सिद्धांतों की चिता पर गठित हरियाणा की नई भाजपा-जजपा सरकार को शुभकामनाएँ’ देने के तीन दिन बाद सुरजेवाला ने अपने नेता की यात्रा की पुष्टि की है। वैसे, सूत्रों के हवाले से राहुल गॉंधी के 23 दिन के भीतर दूसरी विदेश यात्रा की खबर पहले ही आ गई थी।

उल्लेखनीय है कि कॉन्ग्रेस अपनी जमीन तलाशने के लिए 1 से 8 नवंबर तक एक अभियान चलाने जा रही है। इसके तहत अलग-अलग राज्यों में 35 प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मोदी सरकार को घेरा जाएगा। इसी कार्यक्रम को लेकर मीडिया से बात करते हुए सुरजेवाला ने बताया, “राहुल गाँधी समय-समय पर आध्यात्म दौरे पर जाते रहते हैं। वर्तमान में भी वे इसी पर हैं। कॉन्ग्रेस का 1 से 8 नवंबर के बीच 35 प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए सरकार को घेरने की योजना वाला प्रोग्राम पूरी तरह से उनके दिशा-निर्देशों और परामर्श पर तैयार किया गया है।”

सुरजेवाला का यह बयान सोशल मीडिया में राहुल गॉंधी की भद पिटवाने के लिए काफी था। यूजर्स ने राहुल के हालिया विदेश दौरे का हवाला देते हुए पूछा कि आध्यात्म के लिए बैंकॉक कौन जाता है? साथ ही सलाह भी दी कि आध्यात्म के लिए हिमालय अच्छी जगह है।

एक यूजर ने सुरजेवाला को राहुल गाँधी की आया बताया और कहा कि इन्हें मालूम है कब राहुल के लिए डायपर्स बदलने हैं।

एक यूजर ने सुरजेवाला के बयान पर कहा कि आखिर राहुल गाँधी से पूछने की और उनके निर्देश लेने की जरूरत क्या है, जब वे कॉन्ग्रेस के प्रेसीडेंट ही नहीं हैं। पार्टी को स्पष्ट करना चाहिए कि राहुल गाँधी पार्टी ने पार्टी छोड़ दी है या सिर्फ़ आँख में धूल झोंकी जा रही है।

दीगर है कि सुरजेवाला किसी जमाने में कॉन्ग्रेस के ज्वाइंट किलर थे। लेकिन, राहुल गॉंधी के नेतृत्व में पार्टी संगठन में उनकी तरक्की के साथ ही उनका चुनावी प्रदर्शन गिरने लगा। हालिया हरियाणा विधानसभा चुनाव में भी उन्हें शिकस्त झेलनी पड़ी है। अब उन्हें कौन बताए कि विदेश यात्राओं से तो राजनीति के गुर नहीं सीखे जाते। वरना जब इसी महीने राहुल बैंकॉक गए थे तो पार्टी के वरिष्ठ नेता एके एंटनी ने उम्मीद जताई थी कि वे नई ऊर्जा के साथ लौटेंगे। हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनावों में यह ऊर्जा महज सात रैलियों में ही निपटते जनता ने देखा है।

BJP विधायक दल का नेता चुने गए फडणवीस, शिवसेना के साथ सरकार गठन का ऐलान

महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस दोबारा भाजपा विधायक दल के नेता चुन लिए गए हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर और भाजपा उपाध्यक्ष अविनाश राय खन्ना इस दौरान पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में मौजूद रहे। भाजपा के सभी 105 विधायकों ने एकमत से देवेंद्र फडणवीस को अपना नेता चुना। फडणवीस ने 1 दिन पहले ही साफ़ कर दिया था कि चूँकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सार्वजनिक रूप से उनके नाम का ऐलान कर चुके हैं, विधायक दल की बैठक में उनका नेता चुना जाना बस औपचारिकता है। फडणवीस ने कहा है कि अगले 5 वर्ष के लिए राज्य का मुख्यमंत्री वही रहेंगे।

भाजपा के वरिष्ठ नेता नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि विधायक दल की बैठक में किसी अन्य नेता के नाम पर चर्चा ही नहीं हुई और न किसी अन्य नेता का नाम प्रस्तावित किया गया। फडणवीस का नाम प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने प्रस्तावित किया और पहली फडणवीस सरकार में वित्त मंत्रालय का जिम्मा संभाल रहे सुधीर मुनगंटीवार सहित 6 अन्य नेताओं ने इस प्रस्ताव का अनुमोदन कर इसे आगे बढ़ाया। मुख्यमंत्री फडणवीस ने भाजपा विधायकों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि पार्टी ने उन पर दोबारा भरोसा जताया है। साथ ही सीएम फडणवीस ने शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे को भी धन्यवाद दिया।

उधर शिवसेना की बात करें तो पार्टी ने गुरुवार (अक्टूबर 31, 2019) अपनी पार्टी के नव-निर्वाचित विधायकों की बैठक बुलाई है, जिसमें आगे की रणनीति के लिए फ़ैसला लिया जाएगा। जहाँ एक तरफ फडणवीस ने साफ़ कर दिया है कि भाजपा-शिवसेना मिल कर सरकार बनाएगी, शिवसेना की तरफ़ से ऐसा कोई बयान नहीं आया है। शिवसेना ने आज यूरोपियन पार्लियामेंट के पैनल के जम्मू कश्मीर दौरे को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा। वहीं फडणवीस ने कहा कि ये जनादेश ‘महायुति’ के लिए है क्योंकि राजग नेता ‘महायुति’ के लिए ही वोट माँगने गए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का गठन भी ‘महायुति’ ही करेगी, इसमें कोई संशय नहीं रहना चाहिए।

एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने पहले कहा था कि जनता ने उनकी पार्टी को विपक्ष में बैठने का जनादेश दिया है और इसीलिए वो सरकार में शामिल होने का प्रयास नहीं करेंगे। एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने अपने नेता ने इस स्टैंड को दोहराया। हालाँकि, साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि अगर परिस्थितियाँ बदलती हैं तो पार्टी उस हिसाब से फ़ैसला लेगी। बता दें कि भाजपा और शिवसेना के बीच सरकार गठन के लिए पेंच फँसा हुआ है। शिवसेना 50-50 की बात करते हुए ढाई वर्ष के लिए अपना मुख्यमंत्री बनाना चाह रही है। पार्टी नेता आदित्य ठाकरे को सीएम बनाने की माँग के साथ पोस्टर लगा कर भाजपा पर दबाव बनाने में लगे हैं।

उधर महाराष्ट्र में नेताओं के बीच कार्टून का वॉर भी दिलचस्प होता जा रहा है। शिवसेना नेता संजय राउत ने एक कार्टून ट्वीट किया था, जिसमें एक बाघ अपने पंजे में कमल का फूल लिए हुआ था। इसके जवाब में भाजपा ने भी एक कर्टून जारी किया था, जिसमें उद्धव क़द में अपने से काफ़ी विशाल फडणवीस को गीदड़-भभकी देते दिख रहे हैं कि उन्हें बड़ा भाई बोला जाए। अब एनसीपी नेता क्लाइड क्रस्टो ने एक कार्टून जारी किया है, जिसमें धनुष-तीर कमल की तरफ ही तना हुआ है और वार करने को तैयार है। बता दें कि धनुष-तीर शिवसेना का चुनाव चिह्न है।

वहीं कॉन्ग्रेस फिर से शिवसेना पर डोरे डालने में लग गई है। पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चौहान ने कहा कि अगर शिवसेना कॉन्ग्रेस के पास सरकार गठन का प्रस्ताव लेकर आती है तो उसे पार्टी आलाकमान के और सहयोगी पार्टियों से इस सम्बन्ध में विचार-विमर्श किया जाएगा। महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस के कद्दावर नेता चौहान ने पूछा कि जब भाजपा और शिवसेना के बीच विश्वास नाम की चीज है ही नहीं, तो वे साथ में सरकार कैसे बना सकते हैं? उन्होंने कहा कि दोनों दलों के बीच गठबंधन को लेकर क्या-क्या बातें हुई थीं, ये जनता को सार्वजनिक की जानी चाहिए।मुंबई शिवसेना के अध्यक्ष नवाब मलिक ने कहा कि अगर शिवसेना समर्थन माँगेगी तो पार्टी विचार करेगी।

हालाँकि, नवाब के बयान का महत्व नहीं है क्योंकि महाराष्ट्र एनसीपी के अध्यक्ष जयंत पाटिल ने साफ़ कर दिया है कि उनकी पार्टी कॉन्ग्रेस के साथ विपक्ष में बैठेगी। शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने कहा कि वो विपक्ष में बैठेंगे और नई सरकार की खामियों को उजागर करेंगे।

उधर महाराष्ट्र में यूथ कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सत्यजीत ताम्बे ने वर्ली के नव-निर्वाचित विधायक और शिवसेना नेता आदित्य ठाकरे को सलाह दी है कि उनके पास मुख्यमंत्री बनने का मौक़ा आया है तो इसे यूँ ही नहीं जाने देना जाना चाहिए। उन्होंने ख़ुद का उदाहरण देते हुए बताया कि वो 24 वर्ष की उम्र में ही डिस्ट्रिक्ट काउंसिल का नेतृत्व करने वाले थे लेकिन ये मौक़ा चला गया। उन्होंने आदित्य को सलाह देते हुए कहा कि राजनीतिक ज़मीन एक बार घिसक जाए तो इसे फिर से हासिल करना बड़ा ही मुश्किल काम है।

यूरोप के 23 सांसदों ने J&K पर मोदी सरकार का किया समर्थन, मीडिया और ओवैसी को फटकारा

जम्मू कश्मीर से लौटे यूरोपियन पार्लियामेंट के प्रतिनिधिमंडल ने मोदी सरकार द्वारा आतंकवाद के ख़ात्मे के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की है। 23 सदस्यीय यूरोपियन पैनल ने कहा है कि वो आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में मोदी सरकार के हर क़दम का स्वागत करते हैं। उन्होंने कहा कि वे यूरोप से आए हैं, जहाँ वर्षों तक चली लड़ाई के बाद शांति क़ायम हुई। यूरोपियन पैनल ने आशा जताई कि भारत दुनिया का सबसे शांतिपूर्ण देश बनेगा। सभी यूरोपियन सांसदों ने विश्व समुदाय को आगाह करते हुए कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में भारत का साथ दिया जाना चाहिए।

यूरोपियन पार्लियामेंट के डेलीगेशन में शामिल यूके के सांसद न्यूटन डन ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया को पक्षपाती बताते हुए कहा कि उन्होंने जो भी ज़मीनी हालात देखा है, वो दुनिया को बताएँगे। यूरोपियन पैनल के अनुसार, कश्मीर की जनता ने उनसे कहा कि वे सभी भारतीय हैं और हमेशा भारतीय ही रहना चाहते हैं। कश्मीर की जनता ने यूरोप के सांसदों से कहा कि वो आम भारतीयों की तरह रहना चाहते हैं और अपने क्षेत्र में भी उसी तरह का विकास देखना चाहते हैं, जैसा देश का बाकी हिस्सों में हो रहा है। इन सांसदों को श्रीनगर के एक होटल में ठहराया गया था।

जिस दिन यूरोप के जनप्रतिनिधियों ने भारत में क़दम रखा, उसी दिन जम्मू कश्मीर में आतंकियों ने एक ट्रक ड्राइवर की हत्या कर दी। जिस दिन वो कश्मीर पहुँचे, उस दिन भी कुलगाम में आतंकियों द्वारा 6 बंगाली मजदूरों को घर से घसीटते हुए निकाल कर मार डाला गया। यूरोपियन पैनल ने नजरबन्द नेताओं, नव-निर्चाचित पंचायत सदस्यों व कॉउन्सिलर्स और स्थानीय सैन्य अधिकारियों से मुलाक़ात कर राज्य की ज़मीनी स्थिति के बारे में जानकारियाँ प्राप्त की। यूरोपियन पैनल ने कहा कि वो भारत के आंतरिक मामलों में कोई हस्तक्षेप नहीं करना चाहते हैं। उन्होंने कहा:

“जम्मू कश्मीर को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया की कवरेज पक्षपातपूर्ण रही है। जैसे ही हम अपने-अपने देश पहुँचेंगे, हम दुनिया को बताएँगे कि हमनें ज़मीन पर क्या देखा? हम लोगों को सच्चाई से अवगत कराएँगे। उलटा हमें ही फासिस्ट बता कर हमारी छवि को कलंकित करने की कोशिश की जा रही है। लोगों को ऐसा करने से पहले कम से कम जानकारियाँ जुटा लेनी चाहिए। अनुच्छेद 370 भारत का आंतरिक मसला है। हमें सिर्फ़ आतंकवाद से मतलब है, जो दुनिया भर में सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। हम हालिया आतंकी घटनाओं पर खेद व्यक्त करते हैं। आतंकियों द्वारा की जा रही हत्याएँ निंदनीय है।”

हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया था कि यूरोपियन पैनल में जितने भी सांसद शामिल हैं, वो सभी हिटलर की नाजी विचारधारा से प्रेरित हैं। इसके जवाब में यूरोपियन प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि वो लोग नाजी विचारधारा का अनुसरण करने वाले लोग नहीं हैं। पैनल ने ओवैसी के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस बयान से वो सभी काफ़ी आक्रोशित हैं। उन्होंने पूछा कि अगर वो नाजी विचारधारा को मानने वाले होते तो क्या जनता द्वारा चुन कर भेजे जाते? सांसदों ने कहा कि वो यहाँ की राजनीति में हस्तक्षेप नहीं करना चाहते और वो बस ‘फैक्ट फाइंडिंग’ के लिए आए हैं।

यूरोपियन प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि वो कश्मीर दौरे को लेकर यूरोपियन यूनियन को किसी प्रकार की रिपोर्ट सौंपने नहीं जा रहे हैं। उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत की भी पैरवी की। कॉन्ग्रेस के प्रवक्ता आनंद शर्मा ने इसे मोदी सरकार का प्यार एक्सरसाइज करार दिया। वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती ने कहा कि यूरोपियन सांसदों से पहले भारत के विपक्षी सांसदों को वहाँ भेजा जाना चाहिए था। 23 सदस्यीय यूरोपियन पैनल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनएसए अजीत डोभाल ने भी मुलाक़ात की थी। उन्हें पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के बारे में बताया गया था।

ममता बनर्जी के टीएमसी से खौफ में टैगोर का विश्व भारती, केंद्र से मॉंगी CISF सुरक्षा

पश्चिम बंगाल के शान्ति निकेतन स्थित विश्व भारती यूनिवर्सिटी के कुलपति विद्युत चक्रवर्ती ने परिसर की सुरक्षा-व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने केंद्र सरकार से सीआईएसएफ जवानों की स्थायी तैनाती परिसर में करने की मॉंग की है। परिसर की सुरक्षा में तैनात निजी सुरक्षाकर्मियों की सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेताओं के प्रति वफादारी का हवाला देते हुए उन्होंने यह मॉंग की है।

विश्व भारती की स्थापना रबींद्रनाथ टैगोर ने 1921 में की थी। राष्ट्रपति विश्व भारती के विजिटर और प्रधानमंत्री चांसलर होते हैं। चकवर्ती ने बीते महीने पत्र लिख केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय से सुरक्षा की मॉंग की। पत्र की कॉपी प्रधानमंत्री कार्यालय को भी प्रेषित की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ वीसी ने कहा है वर्तमान समय में जो सिक्योरिटी गार्ड्स तैनात हैं वे टीएमसी की ओर झुकाव रखते हैं। वे सिक्योरिटी ऑफिसर के आदेशों को नहीं मानते हैं। पत्र में चक्रवर्ती ने कहा है कि जब अनियमितता के लिए गार्ड को तलब किया जाता है या किसी गड़बड़ी के लिए निकाला जाता है तो टीएमसी के कार्यकर्ता उनके बचाव में आ जाते हैं। पत्र में उन्होंने कहा है, “विश्वविद्यालय को सुचारू तरीके से चलाने के लिए कैम्पस में सीआईएसएफ की तैनाती की जाए। देश के प्रति उनके निस्वर्स्थ सेवा भाव से ही परिसर में शांति और स्थिरता की स्थिति वापस लाने में मदद मिलेगी।”

ख़बरों के मुताबिक एचआरडी मंत्रालय इस पर सीआईएसएफ से बात कर रहा है। ऐसा पहली बार नहीं है कि किसी केन्द्रीय विश्वविद्यालय में सुरक्षाबलों की तैनाती की माँग की गई है। इससे पहले 2017 में बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी में भी यही माँग उठी थी। उस वक्त विवि प्रशासन का दावा था कि उनके पास परिसर के छात्रों को संभालने के लिए पर्याप्त सुरक्षाकर्मी नही हैं। एक वर्ग शिक्षण संस्थानों में सुरक्षाबलों की तैनाती एक बेहद संवेदनशील मुद्दा बताता है। कुछ लोग इसे छात्रों की ओर से उठने वाले विरोध के स्वर को दबाने के रूप में देखते हैं।

34 साल का बटुआ चोर चिल्लाने लगा ‘अल्लाहु-अकबर’, थियेटर में जोकर देख रहे लोगों में मची भगदड़

पेरिस के एक थियेटर में रविवार रात (27 अक्टूबर, 2019 को) तब भगदड़ मच गई जब दर्शकों में से एक ने “अल्लाहु अकबर” का नारा लगाना शुरू कर दिया था। ग्रैंड रेक्स सिनेमा में हॉलीवुड फिल्म जोकर की स्क्रीनिंग के दौरान यह घटना हुई। बाद में पता चला कि नारा लगाने वाला शख्स लोगों में डर पैदा कर लूट की घटना को अंजाम देना चाहता था।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक हैरान कर देने वाली इस घटना अंजाम देने वाले शख्स की उम्र 34 साल बताई गई है। चश्मदीद के अनुसार अनुसार उसने पहले तो फिल्म पर राजनीतिक होने का आरोप बार बार लगाते हुए “इट्स पोलिटिकल, इट्स पोलिटिकल” (“यह राजनीतिक है, यह राजनीतिक है”) चिल्लाना शुरू कर दिया। पहले तो लोग उसकी मूर्खता पर हँसे, फिर कुछ लोगों ने उसे चुप रहने के लिए कहा।

चश्मदीद के मुताबिक उसके बाद वो आदमी अपनी जगह पर खड़ा हुआ। उसने अपना हाथ सीने पर रखा और “अल्लाहु अकबर” चिल्लाना शुरू कर दिया। इसके बाद लोग घबरा कर अपनी-अपनी सीटों से उठ कर बाहर निकलने को दौड़ने लगे। इस बीच दर्शकों में से ही किसी ने उस आदमी के पास बंदूक होने की बात भी फैला दी, जो बाद में गलत निकली।

मीडिया से बात करते हुए ग्रैंड रेक्स के निदेशक ने बताया कि असल में इस आदमी ने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर थियेटर में लूट की साजिश रची थी। उसका प्लान था कि घबराहट में भागे लोगों द्वारा पीछे छोड़े गए फ़ोन और बैग इत्यादि वह चोरी कर लेगा।

जब यह आदमी थियेटर से निकल रहा था तो दर्शकों और सिक्योरिटी गार्ड ने उसे पकड़ने की कोशिश की। लेकिन भीड़ के कारण वे असफल रहे। हालाँकि उसका कोट उनके हाथ लगा। इसमें उसके नाम का पास और फ़ोन था। इसके आधार वह पकड़ा गया।