कर्नाटक कॉन्ग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। वहाँ सियासी उठापटक तेज हो गई है। ऑल इंडिया कॉन्ग्रेस कमिटी (AICC) ने कर्नाटक की प्रदेश कमिटी को भंग करने का फैसला किया है। हालाँकि आश्चर्यजनक रूप से प्रदेश कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष और कार्यकारी अध्यक्ष अपने पद पर बने रहेंगे।
The AICC has decided to dissolve the present committee of Karnataka Pradesh Congress Committee. The President and working President remain unchanged.
आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव के बाद राज्यों में हुए पार्टी के प्रदर्शन का आकलन करने को लेकर एक कमिटी बनाई गई थी। अभी तक यही माना जा रहा है कि उस कमिटी की रिपोर्ट के बाद ही नाराज AICC ने यह फैसला लिया है।
इससे पहले कर्नाटक कॉन्ग्रेस से ही एक और खबर आई थी – कॉन्ग्रेस ने पूर्व मंत्री रौशन बेग को पार्टी-विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप में पार्टी से निलंबित कर दिया है। हाल ही में उन्होंने लोकसभा चुनाव में करारी हार को लेकर पार्टी के शीर्ष नेताओं की आलोचना की थी, जिस कारण उन्हें कर्नाटक प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी ने निलंबित करने का निर्णय लिया।
सोचने वाली बात यह है कि जिस कर्नाटक प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी ने रौशन बेग को पार्टी से निकाला, क्या उसे जरा भी अंदाजा होगा कि अगले कुछ घंटों में वो लोग भी रफा-दफा कर दिए जाएँगे! शायद नहीं। कॉन्ग्रेस की उठा-पटक वाली राजनीति में अभी और भी बहुत कुछ देखना शायद बाकी है।
श्री लंका ने भी अब अंतरिक्ष में अपनी धाक दिखाई है। हालाँकि, यह द्वीपीय देश इससे पहले अंतरिक्ष में अपने क्रियाकलापों के लिए बहुत चर्चा में नहीं रहा है लेकिन पिछले कुछ दिनों से श्री लंका एक सैटेलाइट को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चर्चा का बाज़ार गर्म है। ‘रावण-1’ श्री लंका का पहला ऐसा सैटेलाइट है, जिसे अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित किया गया। सोमवार (जून 17, 2019) को ये प्रक्रिया सफलतापूर्वक संचालित की गई। इसे अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) से कक्षा में स्थापित किया गया।
रावण-1 के साथ ही नेपाल और जापान के 2 BIRDS सैटेलाइट भी कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किए गए। रावण-1 एक क्यूब सैटेलाइट है, जिसे श्री लंका के 2 रिसर्च इंजीनियरों द्वारा डिजाइन किया गया है। इन दोनों इंजीनियरों ने ही जापान क्यूशू इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में रिसर्च कर इस कार्य को अंजाम दिया और अपने देश का नाम रौशन किया। इसे सोमवार को क़रीब पौने 4 बजे कक्षा में भेजा गया। इन सैटेलाइट्स को इसी वर्ष अप्रैल में अंतरिक्ष में भेजा गया था।
Well done, Tharindu & Dulaani! We’re delighted that #SriLanka‘s first CubeSat RAAVANA-1 was successfully released into orbit, marking Sri Lanka’s entry into global space age. So happy the United States could assist in taking RAAVANA-1 to the @Space_Station. pic.twitter.com/GfuzFzEBt9
यह सैटेलाइट धरती से 400 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कक्षा में पृथ्वी की परिक्रमा करेगा। श्री लंका के इस पहले सैटेलाइट (कक्षा में स्थापित) का वजन 1.5 किलोग्राम है। यह सैटेलाइट श्री लंका और उसके आसपास के क्षेत्रों के चित्र लेकर उस इलाके की भौगोलिक परिस्थितियों को समझने में और बेहतरी प्रदान करेगा। इस सैटेलाइट को कुल 5 मिशन पूरे करने हैं। इसकी न्यूनतम जीवन अवधि डेढ़ वर्ष की है।
झारखण्ड में पुलिस ने नागपुरी फ़िल्म में काम दिलाने का झाँसा देकर बलात्कर करने वाले तीन आरोपितों को गिरफ़्तार कर लिया है। चाईबासा की नाबालिग लड़की के साथ तीन लोगों ने गैंगरेप किया था। सभी आरोपितों के नाम हैं- काँके थाना क्षेत्र में स्थित मुरूम गाँव निवासी मोहम्मद ख़ालिद, पिठोरिया थाना क्षेत्र में स्थित ओखलगड़ा गाँव निवासी बाबू अंसारी, और बीआईटी निवासी यशराज सुनेजा। इन तीनों को आज बुधवार (जून 19, 2019) को जेल भेजने की प्रक्रिया पूरी की गई।
पुलिस द्वारा पूछताछ के दौरान इन तीनों ने बताया कि इन्होंने नागपुरी फ़िल्म में काम करने का प्रलोभन देकर नाबालिग को तीन अलग-अलग जगहों पर ले जाकर रेप किया। सबसे पहले पीड़िता की बातचीत ख़ालिद से हुई। ख़ालिद ने उसे फ़िल्म में काम देने के बहाने राँची बुलाया था। यह 13 जून की घटना है। उसने लड़की को काँटाटोली बस स्टैंड से अपने बाइक पर बिठाया और अपने दोस्त यशराज के बरियातू भरमटोली पहाड़ी स्थित घर पर ले गया। वहाँ ख़ालिद और यशराज ने मिल कर उसके साथ गैंगरेप किया।
दैनिक जागरण के राँची संस्करण में छपी ख़बर
इस घटना के बाद ख़ालिद उसे लेकर बबलू अंसारी के घर गया। ख़ालिद ने लड़की को अंसारी के घर छोड़ दिया, इसके बाद अंसारी ने भी पीड़िता के साथ बलात्कार किया। इन तीनों ने पीड़िता को धमकी भी दी कि किसी से भी ये बात न कहे और इस घटना का जिक्र न करे। इसके बाद कुछ लोगों की मदद से लोअर बाजार थाना पहुँची पीड़िता ने पुलिस को सारे घटनाक्रम की जानकारी दी। इस मामले में महिला थाने में प्राथमिकी दर्ज करने के साथ ही पुलिस ने कार्रवाई शुरू की और सभी आरोपितों को एक-एक कर धर दबोचा।
एक 12 वर्षीय बच्ची के साथ ऐसी दरिंदगी की गई कि वह राँची स्थित राजेंद्र इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (RIMS) में लगभग 8 दिनों तक बेहोश रही। ‘हिंदुस्तान’ की ख़बर के अनुसार, मुंबई में दर्जन भर लोगों ने एक साल तक बच्ची का बलात्कार किया। पीड़ित बच्ची के बयान पर शमा परवीन, तबरेज आलम और अब्दुल रहमान के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई है। शमा महिला हैं। बरियातू पुलिस ने अधिक जानकारी देते हुए बताया कि पीड़िता कोडरमा की रहने वाली है। डेढ़ साल पहले उसकी मौसी शमा परवीन उसे लेकर मुंबई गई। उसकी मौसी उसे पढ़ाने व अच्छी शिक्षा-दीक्षा दिलाने के बहाने मुंबई ले गई। लेकिन मुंबई ले जाने के बाद बच्ची से नौकरानी की तरह काम कराया जाने लगा।
वहाँ बच्ची से घर का कामकाज कराया जाता और अगर वो विरोध करती तो उसके साथ मारपीट की जाती। हर रात बच्ची को नशे की दवा जबरन खिलाई जाती थी और उसके साथ बलात्कार किया जाता था। जब बच्ची सुबह उठती तो उसके शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं होता था। बच्ची ने अपनी मौसी को कई बार इस बात से अवगत कराया लेकिन उसकी मौसी उसे डाँट-डपट कर चुप करा देती थी। फ़रवरी में जब एक रात बच्ची को होश आया तो उसने देखा कि अब्दुल रहमान उसके साथ रेप कर रहा है।
जब बच्ची ने इस बात की जानकारी अपने मौसी को दी तो मौसी ने उसे खूब मारा-पीटा। बच्ची के शरीर को कई जगहों से जला दिया गया, उसे प्रताड़ित किया गया। पुलिस व डॉक्टरों को भी बच्ची के शरीर पर कई जगह जले के निशान मिले हैं। अप्रैल में जब बच्ची की तबियत बहुत ज्यादा ख़राब हो गई, तब उसकी मौसी उसे लेकर कोडरमा पहुँची। जब बच्ची की माँ ने तबियत ख़राब होने का कारण पूछा तो मौसी ने बहाने बना दिए और कहा कि इलाज के लिए वह रुपए देगी। इसके बाद मौसी बिना रुपए दिए मुंबई लौट गई और बच्ची को कोडरमा छोड़ दिया।
झारखंड के रांची स्थित रिम्स में आठ दिन तक बेहोशी की हालत में रहने के बाद 12 वर्षीय बच्ची ने मंगलवार को बरियातू पुलिस को बयान दिया कि मुंबई में एक साल तक दर्जनों लोगों ने उसके साथ दुष्कर्म किया#Rape@dasraghubarhttps://t.co/3rIvpkUcmI
बच्ची का इलाज कोडरमा में क़रीब 1 महीने तक चला लेकिन उसके साथ इतनी ज्यादतियाँ हुई थीं कि उसकी तबियत में तनिक भी सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उसे राँची स्थित रिम्स में भर्ती करा दिया गया। पुलिस पिछले 8 दिनों से पीड़िता का बयान लेना चाह रही थी लेकिन उसकी स्थिति को देखते हुए यह संभव नहीं हो पा रहा था। बच्ची अभी भी बहुत ज्यादा डरी हुई है। वह किसी को भी देख कर ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लग रही है। महिला पुलिसकर्मियों द्वारा कोशिश करने के बाद बच्ची ने अपना बयान दर्ज कराया।
बरियातू पुलिस ने कहा कि मामले की प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए पुलिस की एक टीम को मुंबई भेजा जाएगा। बच्ची के परिजनों का बयान लेने के बाद पुलिस ने रिम्स प्रशासन से उसके इलाज के सम्बन्ध में भी बात की। रिम्स ने आश्वासन दिया है कि पीड़ित बच्ची का इलाज मुफ़्त में किया जाएगा और परिजनों से एक भी रुपया नहीं लिया जाएगा।
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में स्थित रवींद्र भारती विश्वविद्यालय में बवाल खड़ा हो गया है। सोमवार को यूनिवर्सिटी के 4 विभागाध्यक्षों (HODs) और 3 डीन (Deans) ने इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद राज्य के शिक्षा मंत्री को वहाँ पहुँच कर स्थिति का जायजा लेना पड़ा। ये सामूहिक इस्तीफा 4 प्रोफेसरों को उनकी जाति को लेकर किए गए अपशब्दों के कारण दिया गया है। ये चारों अनुसूचित जाति से आते हैं। बताया जा रहा है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस के छात्र संघ समर्थित छात्रों ने इन प्रोफेसरों के साथ जातिसूचक अपमानजनक अपशब्द कहे थे।
हिंदुस्तान टाइम्स में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, मंत्री पार्थ चटर्जी ने यूनिवर्सिटी के कुलपति सब्यसाची बासु रे चौधरी और अन्य प्रोफेसरों एवं छात्रों के साथ बैठक कर उनकी बातें सुनी और मामले की जाँच का आदेश दिया। तृणमूल समर्थित छात्रों के इस व्यवहार के कारण पूरे कैंपस में विरोध-प्रदर्शन हुए और उनके ख़िलाफ़ नारे लगे। कहा जा रहा है कि कुछ छात्र बार-बार क्लास बंक कर रहे थे, जिस कारण प्रोफेसरों ने उन्हें ऐसा करने से मना किया था। इसके बाद छात्रों व प्रोफेसरों में तीखी बहस हुई थी।
चटर्जी ने कहा कि दोषियों को नहीं छोड़ा जाएगा। पिछले महीने दलित समुदाय से आने वाली भूगोल की प्रोफेसर सरस्वती केरकेटा ने आरोप लगाया था कि छात्रों व कर्मचारियों के एक वर्ग ने उनकी जातीय पृष्ठभूमि को लेकर अपशब्द कहे थे और क्लास में जानबूझ कर उन्हें बैठने के लिए कुर्सी नहीं दी थी। ऑर्थपेडिक समस्या से जूझ रही सरस्वती ने कहा कि इस बारे में लोगों को पता होने के बावजूद उन लोगों ने उन्हें बैठने नहीं दिया। इसके बाद कुछ अन्य प्रोफेसरों ने इसी तरह के आरोप लगाए कि उनके साथ भी ऐसा ही व्यवहार समय-समय पर किया गया है।
4 HoDs, 3 deans in Bengal varsity resign over alleged casteist slurs..students hurled abuses at the staff. #WestBengalhttps://t.co/VR6aa467Qo
सोमवार को मामला तब प्रकाश में आया जब बंगाली, संस्कृत, अर्थशास्त्र और राजनीतिक विज्ञान- इन चारों विभागों के प्रोफेसरों (HOD) ने अपने पद से सामूहिक इस्तीफा दे दिया। इनके अलावा स्कूल ऑफ लैंग्वेज एंड कल्चर, डिपार्टमेंट ऑफ़ विसुअल आर्ट और बी आर आंबेडकर स्टडी सेंटर के प्रोफेसरों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया। इस मामले पर बैठक करने के बाद पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने कहा:
“मैंने इन प्रोफेसरों से निवेदन किया कि वे इस्तीफा न दें। मैंने उनसे कहा कि टैगोर के नाम पर स्थापित विश्विद्यालय में हमें इस तरह की घटनाओं को नहीं होने देना चाहिए। शिक्षक और छात्र के बीच के रिश्ते की हर क़ीमत पर रक्षा की जानी चाहिए। मैंने शिक्षकों एवं छात्रों से भी कहा कि उन्हें सभी क्लासेज में उपस्थिति दर्ज करानी ही चाहिए। जाँच समिति जल्द ही अपनी रिपोर्ट सबमिट करेगी और उसे सार्वजनिक किया जाएगा। मैंने छात्रों से यह भी कहा कि अपमानित किए गए प्रोफेसरों से माफ़ी माँगें।”
प्रोफेसर सरस्वती केरकेटा ने तो यूनिवर्सिटी आना ही बंद कर दिया है। जब शिक्षा मंत्री ने उन्हें कॉल किया, तो उनका फोन ऑफ पाया गया। चटर्जी ने कहा कि अगर उनका फोन लग जाता तो वह उनकी बात सीधे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से कराते। तृणमूल शिक्षक संघ की सदस्य जोईता रॉय ने कहा कि उन्हें भी नहीं छोड़ा गया और जातिगत टिप्पणी करते हुए प्रताड़ित किया गया। शिक्षक संघ के सचिव ने बताया कि यह सब काफ़ी दिनों से चल रहा है और शिकायत करने के बाद ऐसी घटनाएँ बढ़ ही जाती हैं।
बांग्ला में योगेन्द्र को अक्सर जोगेंद्र कहा जाता है। बंगाल के दलित नेता थे जोगेंद्र नाथ मंडल। आपने उनका नाम नहीं सुना होगा। आम तौर पर दल हित चिन्तक उनका नाम लेने से कतराते नजर आएँगे। आजकल जो जय भीम के साथ जय मीम जोड़ने की कवायद चल रही है, ये नाम उसकी नींव ही खोद डालता है। इसलिए इनके बारे में जानने के लिए आपको खुद ही पढ़ना पड़ेगा।
उनका जन्म ब्रिटिश बंगाल में 29 जनवरी 1904 को हुआ था। पाकिस्तान के जन्मदाताओं में से वो एक थे। सन 1940 में कलकत्ता म्युनिसिपल कॉरपोरेशन में चुने जाने के बाद से ही मुस्लिम समुदाय की उन्होंने खूब मदद की। उन्होंने बंगाल की ए.के. फज़लुल हक़ और ख्वाजा नज़ीमुद्दीन (1943-45) की सरकारों की खूब मदद की और 1946-47 के दौरान मुस्लिम लीग में भी उनका योगदान खूब था। इस वजह से जब कायदे आज़म जिन्ना को अंतरिम सरकार के लिए पाँच मंत्रियों का नाम देना था तो एक नाम उनका भी रहा।
जोगेंद्र नाथ मंडल पाकिस्तान के पहले कानून मंत्री थे। जोगेंद्र नाथ मंडल के इस पद को स्वीकारने से कॉन्ग्रेस के उस निर्णय की बराबरी हो जाती थी, जिसमें कॉन्ग्रेस ने अपनी तरफ से मौलाना अबुल कलाम आजाद को मनोनीत किया था।
आप सोचेंगे कि जोगेंद्र नाथ मंडल ने ऐसा क्या किया था कि जिन्ना ने उन्हें चुना? 3 जून 1947 की घोषणा के बाद असम के सयलहेट जिले को मतदान से ये तय करना था कि वो पाकिस्तान का हिस्सा बनेगा या भारत का। उस इलाके में हिन्दुओं और मुस्लिमों की जनसंख्या लगभग बराबर थी। चुनाव में नतीजे बराबरी के आने की संभावना थी। जिन्ना ने मंडल को वहाँ भेजा। दलितों का मत, मंडल ने पाकिस्तान के समर्थन में झुका दिया। मतों की गिनती हुई तो सयलहेट पाकिस्तान में गया। आज वो बांग्लादेश में है।
जोगेंद्र नाथ मंडल
जोगेंद्र नाथ मंडल पाकिस्तान के पहले श्रम मंत्री भी थे। सन 1949 में जिन्ना ने उन्हें कॉमनवेल्थ और कश्मीर मामलों के मंत्रालय की जिम्मेदारी भी सौंप दी थी। इस 1947 से 1950 के बीच ही पाकिस्तान में हिन्दुओं पर लौमहर्षक अत्याचार होने शुरू हो चुके थे। दरअसल हिन्दुओं को कुचलना कभी रुका ही नहीं था। बलात्कार आम बात थी। हिन्दुओं की स्त्रियों को उठा ले जाना जोगेंद्र नाथ मंडल की नजरों से भी छुपा नहीं था। वो बार-बार इन पर कार्रवाई के लिए चिट्ठियाँ लिखते रहे।
इस्लामिक हुकूमत को ना उनकी बात सुननी थी, ना उन्होंने सुनी। हिन्दुओं की हत्याएँ होती रहीं। जमीन, घर, स्त्रियाँ लूटी जाती रहीं। कुछ समय तो जोगेंद्र नाथ मंडल ने प्रयास जारी रखे। आखिर उन्हें समझ आ गया कि उन्होंने किस पर भरोसा करने की मूर्खता कर दी है। जिन्ना की मौत होते ही 1950 में जोगेंद्र नाथ मंडल भारत लौट आए। पश्चिम बंगाल के बनगांव में वो गुमनामी की जिन्दगी जीते रहे। अपने किए पर 18 साल पछताते हुए आखिर 5 अक्टूबर 1968 को उन्होंने गुमनामी में ही आखरी साँसें लीं।
अब आपको शायद ये सोचकर थोड़ा आश्चर्य हो रहा होगा कि कैसे आपने कभी इस नेता का नाम तक नहीं सुना? राजनीति में तो अच्छी खासी दिलचस्पी है ना आपकी? अपने फायदे के लिए कैसे एक समुदाय विशेष ने एक दलित का इस्तेमाल किया था उसका ये इकलौता उदाहरण भी नहीं है। बस समस्या है कि ना आपने खुद पढ़ने की कोशिश की और दल हित चिन्तक तो आपको सिर्फ एक वोट बनाना चाहते हैं! तो वो क्यों पढ़ने देते भला?
यही सिर्फ एक वोट बनकर रह जाने का अफ़सोस था जो आपने रोहित वेमुल्ला की चिट्ठी में लिखा पाया था। उनकी चिट्ठी में जो कुछ हिस्सा आप आज कटा हुआ देखते हैं वो कल कोई और लिखेगा। आप पढ़ने से इनकार करते रहेंगे उधर मासूम अपने खून से बार बार ऐसी चिट्ठियाँ लिखते रहेंगे। कभी सोचा है कि वो आपको जोगेंद्र नाथ मंडल का नाम क्यों नहीं बताते? कभी सोचा है कि वो आपको पढ़ने क्यों नहीं कहते? कभी सोचा है कि उन्होंने आपको चार किताबों का नाम बताकर खुद पढ़कर आने को क्यों नहीं कहा? वो खुद को आंबेडकरवादी कहते हैं ना? आंबेडकर और फुले दम्पति तो जिन्दगी भर शिक्षा के लिए संघर्ष करते रहे! फिर ये क्यों आपको किताबों से दूर करते हैं?
ऐसा वो इसलिए करते हैं क्योंकि पढ़ने के बाद आप सिर्फ एक वोट नहीं रह जाएँगे। पढ़ने के बाद आप दर्ज़नों तीखे सवाल हो जाएँगे। पढ़ने पर आप देखेंगे कि आंबेडकर खुद क्या कहते थे।
बाकी किसी विदेशी फण्ड पर पलने वाले की पूँछ पकड़ कर चलना है, या खुद से दलित चिंतन करना है, ये फैसला तो आपको खुद ही करना होगा।
ये फैसला भी आपको खुद ही करना होगा कि संसद में ‘जय भीम जय मीम’ का नारा लगा कर ओवैसी ने कोई इतिहास नहीं रचा है। और यह समझना भी होगा कि जिस जोगेंद्र नाथ मंडल ने इस तर्ज पर इतिहास रचा था, खुद उनका और उनके प्रयास का हश्र क्या हुआ। यह भी समझना होगा कि जोगेंद्र नाथ मंडल तो नेता थे, मंत्री थे – परिस्थितियाँ विपरीत हुईं तो गुमनामी में सही लेकिन वापस भारत आ गए – लेकिन उनका क्या जो मंडल जी के आह्वान पर मात्र एक वोट बनकर पाकिस्तानी हुए और अब बांग्लादेशी होकर भी कैसी जिंदगी जी रहे होंगे, यह सोचने के लिए किसी दिव्य-दृष्टि की जरुरत नहीं।
बाजार नियामक The Securities and Exchange Board of India (SEBI) ने न्यू दिल्ली टेलीविज़न लिमिटेड (NDTV) पर 12 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना शेयर बाजार को समय पर जानकारी न देने के कारण लगाया गया। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने पाया कि एनडीटीवी ने नियम के तहत सूचनाएँ सार्वजनिक करने के मामले में चूक की, जिसके बाद यह आदेश दिया गया। एनडीटीवी के ख़िलाफ़ शेयरों की बड़ी ख़रीद और अधिग्रहण के नियम का अनुपालन न करने का मामला पाया गया है। अपने आदेश में सेबी ने अधिक जानकारी देते हुए बताया:
“जनवरी 2018 में इंडियाबुल्स फाइनेंसियल सर्विसेज ने एनडीटीवी के 40 लाख शेयरों का अधिग्रहण किया था। यह कम्पनी की कुल शेयर पूँजी का 6.4% है। एनडीटीवी के प्रमोटर्स ने जुलाई 2018 में 20.28% शेयर पूँजी का अधिग्रहण किया। नियमानुसार, इस प्रक्रिया के बाद कम्पनी को सम्बंधित प्रावधानों के अंतर्गत इससे जुड़ी ज़रूरी जानकारियाँ देनी थीं, जो उसने नहीं की। एनडीटीवी को इस से जुड़ी जानकारियाँ बीएसई और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज से भी साझा करनी थीं। जबकि, कम्पनी ने इस बातों को छुपाया और जानकारी देने में देरी की।”
एनडीटीवी ने अपने शेयरों में हुए बदलाव व इंडियाबुल्स के साथ हुए समझौते के बाद समय पर सब कुछ खुलासा नहीं किया, इसीलिए उस पर 12 लाख रुपए का जुर्माना लगाने का निर्णय लिया गया। इससे पहले एक मामले में NDTV के दोनों प्रमोटरों प्रणय रॉय और राधिका रॉय पर कम्पनी में किसी भी प्रकार का पद लेने से 2 साल का प्रतिबन्ध लगा दिया था। नियामक ने दोनों के होल्डिंग्स और म्यूच्यूअल फंड को भी सीज कर दिया था। सेबी ने अपनी जाँच में पाया था कि इन्होंने आईसीआईसीआई बैंक से 375 करोड़ रुपए का क़र्ज़ ले रखा था, जिसे बाद में वीसीपीएल से 350 करोड़ का क़र्ज़ लेकर चुकाया।
Markets regulator SEBI has imposed a penalty of Rs 12 lakh on New Delhi Television Ltd (@ndtv )https://t.co/04LqM1iGiI
सेबी ने कहा कि बाकी शेयरधारकों से इन बातों को छुपाया गया क्योंकि लोन लेने के दौरान तय हुई शर्तों के तहत वीपीसीएल एनडीटीवी में 30% तक शेयर हासिल करने की क्षमता रखता था। बाद में मंगलवार (जून 18, 2019) को ‘The Securities Appellate Tribunal (SAT)’ ने सेबी द्वारा रॉय दम्पति के कोई पद न लेने वाले निर्णय पर रोक लगा दी। सैट ने कहा कि ऐसा करना कम्पनी के शेयरधारकों के हित में नहीं होगा। एजेंसी ने सेबी से रॉय दम्पति को प्रत्युत्तर देने के लिए तीन सप्ताह का समय देने को कहा।
Listed Company cannot remain headless: SAT stays SEBI order against Radhika Roy, Prannoy Roy
रॉय दम्पति व एनडीटीवी की एक अन्य शेयरधारक कम्पनी आरआरपीआर होल्डिंग्स द्वारा इस तरह से क़र्ज़ लेने व समझौते करने से बाकी के निवेशकों को कम्पनी की माली हालत के बारे में अंदाज़ा नहीं लगा, जिस कारण सेबी ने एक्शन लिया। फिलहाल इस मामले में रॉय दम्पति के प्रत्युत्तर के बाद एजेंसियाँ आगे का निर्णय लेंगी। प्रणय रॉय और राधिका रॉय ने बयान जारी कर सेबी के आदेश को क़ानूनी रूप से ग़लत एवं नियमों के ख़िलाफ़ बताया था। उनका आरोप था कि जिन बातों को आधार बना कर ये आदेश दिए गए हैं, उसके बारे में उन्हें भेजे गए ‘कारण बताओ नोटिस’ में कोई चर्चा ही नहीं थी।
कॉन्ग्रेस ने पूर्व मंत्री रौशन बेग को पार्टी-विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप में पार्टी से निलंबित कर दिया है। हाल ही में उन्होंने लोकसभा चुनाव में करारी हार को लेकर पार्टी के शीर्ष नेताओं की आलोचना की थी, जिस कारण उन्हें कर्नाटक प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी ने निलंबित करने का निर्णय लिया। कॉन्ग्रेस ने कहा कि प्रदेश यूनिट की तरफ से की गई सिफारिश को स्वीकार करते हुए रौशन बेग को निलंबित किया जाता है। पार्टी ने कहा कि यह निर्णय इस मामले की जाँच पूरी करने के बाद लिया गया। रौशन बेग ने पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दारमैया को ‘दम्भी’ बताया था और प्रदेश कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष दिनेश गुंडु राव को ‘अपरिपक्व’ कहा था।
रौशन बेग 7 बार विधायक रह चुके हैं और वह कॉन्ग्रेस-जेडीएस गठबंधन सरकार में मंत्रीपद न मिलने से नाराज़ चल रहे थे। उनके क्षेत्र शिवाजीनगर में एक पोंजी स्कीम से भी उनका नाम जुड़ा है, जिसे आईएमए ज्वेल्स द्वारा शुरू किया गया था और इसके तहत सैकड़ों निवेशकों के साथ धोखाधड़ी की गई थी। इन निवेशकों में अधिकतर मुस्लिम हैं। रौशन ने इन आरोपों से इनकार किया लेकिन सीनियर कॉन्ग्रेस नेताओं का कहना है कि रौशन ने आईएमए ज्वेल्स के संस्थापक मंसूर खान के साथ उन लोगों से संपर्क साधा था। एक ऑडियो क्लिप भी काफ़ी सर्कुलेट हुआ था, जिसमें मंसूर यह कहते पाए गए थे कि उन्होंने बेग को 400 करोड़ रुपए दे रखे हैं, जो उन्हें अभी तक नहीं लौटाया गया।
कर्नाटक कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष गुंडु ने मंगलवार (जून 18, 2019) को कहा कि इस स्कैम से रौशन बेग के साथ जुड़े तार को आलाकमान के ध्यान में लाया जाएगा। अभी एक स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम इसकी जाँच कर रही है और शिकायतकर्ता निवेशकों की संख्या 38,000 पार हो चुकी है। बताया जाता है कि यह 15,000 करोड़ का स्कैम है। लोकसभा चुनावों में राज्य में मिली बुरी हार के बाद कॉन्ग्रेस-जेडीएस गठबंधन की हालत ख़राब है और हाल ही में मंत्रिमंडल विस्तार कर के निर्दलियों को जगह दी गई ताकि सरकार को स्थिर रखा जा सके। एक अन्य पूर्व मंत्री रमेश जर्किहोली भी सरकार की आलोचना कर चुके हैं।
कॉन्ग्रेस ने रौशन बेग को निलंबित करने का निर्णय लिया
रौशन बेग ने हाल ही में अल्पसंख्यकों को ख़ास सलाह देते हुए कहा था कि अगर अगली बार भी राजग की सरकार बनती है तो वे लोग समझौता कर लें। उन्होंने कहा था कि राजग की सरकार बनने की स्थिति में उन्हें परिस्थितियों से समझौता कर लेना चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि अगर ज़रूरत पड़ती है तो मुस्लिमों को भाजपा से हाथ मिलाने से भी नहीं हिचकना चाहिए। रौशन बेग समुदाय विशेष के बीच राज्य में जाना-पहचाना चेहरा हैं। उन्होंने समुदाय विशेष को सलाह देते हुए कहा था कि उन्हें किसी ख़ास पार्टी का वफ़ादार नहीं बने रहना चाहिए। उन्होंने कॉन्ग्रेस पर अल्पसंख्यकों की उपेक्षा करने का आरोप लगाते हुए यह भी कहा था कि पार्टी ने एक ही मुस्लिम को टिकट दिया है।
Karnataka MLA Roshan Baig suspended for anti-party activities/indiscipline. Sources : Baig indulged in anti-party activities during last LokSabha poll. A Lok Sabha candidate from Karnataka had complained about him to Cong Chief Rahul Gandhi & now Baig has been suspended by Aicc
कहा जा रहा है कि रौशन बेग इसीलिए भी नाराज़ चल रहे थे क्योंकि राज्य के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री बी जेड अमीर अहमद ख़ान का क़द राजनीति में लगातार बढ़ रहा है और वह उनकी जगह मुस्लिमों का चेहरा बन सकते हैं।
सार्वजनिक या सरकारी जमीनों का धर्म के नाम पर अतिक्रमण होना आम है। छोटे-मोटे स्तर पर यह हर जगह देखने को मिल जाता है। लेकिन है यह गैरकानूनी। पश्चिम दिल्ली लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के सांसद प्रवेश साहिब सिंह ने अब इसके खिलाफ आवाज उठाई है। सांसद साहिब सिंह ने दिल्ली के उप राज्यपाल अनिल बैजल को इस मामले से संबंधित एक पत्र लिखा है।
अपने पत्र में साहिब सिंह ने उप राज्यपाल बैजल को पश्चिमी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र में सार्वजनिक भूमि पर मस्जिदों के गैर-कानूनी रूप से बढ़ते निर्माण को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने लिखा कि उनके संसदीय क्षेत्र में सरकारी जमीन, सड़कों, पार्कों और दूसरे अनुचित स्थानों पर मस्जिदों का निर्माण किया जा रहा है। इस ओर ध्यान दिलाते हुए सासंद ने उप राज्यपाल से इन गैर-कानूनी निर्माण कार्यों की जाँच की माँग की है।
सांसद प्रवेश साहिब सिंह ने अपने पत्र में गैर-कानूनी मस्जिद निर्माण से जुड़ी समस्याओं की ओर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने लिखा कि सार्वजनिक जमीनों पर बनी मस्जिदों के कारण न सिर्फ ट्रैफिक की समस्या होती है, बल्कि आस-पास रहने वाले लोगों को भी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
इस समस्या के निदान के लिए सासंद साहिब सिंह ने एलजी से एक कमिटी गठित करने की माँग की। कमिटी की संरचना को लेकर उन्होंने सुझाव दिया कि इसमें एमसीडी, पीडब्ल्यूडी, एनडीएमसी, पुलिस, सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण विभाग के प्रतिनिधि तक शामिल होने चाहिए ताकि हर दृष्टिकोण से इस पर जाँच हो और उसके अनुरूप आवश्यक कदम उठाए जाएँ। साहिब सिंह का कहना है कि इस गंभीर मामले की जाँच संबंधित इलाके के डिस्ट्रिक मजिस्ट्रेट करें। सांसद ने यह भी सुझाव दिया कि संबंधित विभाग के अधिकारी जिन इलाकों में मस्जिद बने हैं, वहां का सर्वे करें।
उप राज्यपाल अनिल बैजल को इस मामले से संबंधित जो पत्र सासंद साहिब सिंह ने लिखा है, उसमें उन्होंने आगाह किया है कि अगर इस समस्या का निदान नहीं किया गया तो यह मामला आगे चलकर बहुत मुश्किल पैदा कर सकता है।
पूर्व मिस इंडिया यूनिवर्स उशोषी सेनगुप्ता ने फेसबुक पर अपनी दास्ताँ बयाँ की है, और बताया है कि कैसे 6 लड़कों ने उनकी गाड़ी के साथ अपनी बाइक भिड़ाने के बाद उनके ऊबर कैब के ड्राइवर को बेरहमी से पीटा, उसकी गाड़ी तोड़ दी और उशोषी के भी साथ बदतमीज़ी की। और इस दौरान कोलकाता की पुलिस मूकदर्शक बनी ज्यूरिस्डिक्शन-ज्यूरिस्डिक्शन (मेरा एरिया-उनका एरिया) खेलती रही। मामले की प्राथमिकी दर्ज करने से भी इनकार किया और मामला तूल पकड़ने के बाद ही ढंग से प्राथमिकी हुई।
फेसबुक पर सुनाया दर्द
उशोषी ने फेसबुक पर पोस्ट कर बताया कि कैसे देर रात जब वह एक समारोह में भाग ले कर ऊबर के कैब से निकलीं तो कैब में आकर कुछ लड़कों ने टक्कर मार दी। उसके बाद वे उनके ड्राइवर को निकाल कर पीटने लगे। जब ज़रा दूर खड़े पुलिस वालों से उन्होंने मदद माँगनी चाही तो उन्होंने यह कह कर मना कर दिया कि मामला उनके ‘अधिकार क्षेत्र’ के बाहर दूसरे थाने का है। उशोषी के दबाव बनाने पर जब पुलिस वाले आए तो वह लड़के भाग खड़े हुए।
लेकिन कैब का पीछा कर रहे लड़कों ने फिर से उन्हें रोका। इस बार उनका निशाना उशोषी थीं क्योंकि उन्होंने वारदात का वीडियो बना रखा था। लड़कों ने उशोषी को कार के बाहर घसीटा, और उनका फोन छीन कर तोड़ने की कोशिश की। स्थानीय लोगों के आ जाने पर उन्हें फिर भागना पड़ा। उशोषी ने अपने घर वालों और पुलिस को फोन किया। वहाँ पहुँची पुलिस ने फिर से ज्यूरिस्डिक्शन-ज्यूरिस्डिक्शन का नाटक शुरू कर दिया, और उशोषी की तो प्राथमिकी लिखी लेकिन ड्राइवर (जिसकी गाड़ी को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर दिया गया था) की एफआईआर लिखने से मना कर दिया।
उशोषी ने तंज कसते हुए कहा, “अगर आपके साथ मारपीट, बदसलूकी, छेड़खानी या फिर मर्डर की घटना हो, तब पुलिस के पास जाने से पहले उनके सीमा क्षेत्र के बारे में जान लें, क्योंकि घटनास्थल पुलिस थाने की सीमा से 100 मीटर भी बाहर हुआ, तो वे मदद नहीं करेंगे।”
लड़के के हेलमेट न लगाने को लेकर उन्होंने लिखा, “आखिर 15 बाइक सवार लड़के बगैर हेलमेट के कैसे आसानी से कैब ड्राइवर को सरेराह पीट सकते हैं और गाड़ी को नुकसान पहुँचा सकते हैं? मुझे लगता है कि उन्होंने ड्राइवर को भीड़ के सामने धमका कर पैसे ऐंठने के लिए ऐसा किया।”
उशोषी ने घटना का ब्यौरा और वीडियो फेसबुक पर पोस्ट करते हुए लिखा:
तूल पकड़ने के बाद जागी कोलकाता पुलिस
जब इंडिया टुडे ने इस मामले को उठाया और मामला तूल पकड़ने लगा तो कोलकाता पुलिस ने ट्विटर पर सूचना दी कि सात लोगों को मामले में गिरफ्तार कर लिया गया है, और मामले की एफआईआर ‘बहुत सीनियर लेवल’ पर की गई है। लेकिन मामले में पहले हीला-हवाली करने वाले पुलिस अफसरों पर किसी भी तरह की कार्रवाई की सूचना इसमें भी नहीं है।
We have taken this incident very seriously and seven persons have been arrested so far. On the order of the Commissioner of Police, Kolkata, an inquiry regarding the non-registration of F.I.R. has been initiated into this incident, at a very senior level.