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कनाडा में जब पिता बने आतंक की ढाल तो विमान में हुआ ब्लास्ट, 329 लोगों की हुई मौत… अब बेटा उसी बारूद से खेल रहा

भारत और कनाडा की बीच राजनीतिक तनातनी चरम सीमा पर पहुँच गई है। कनाडा के लगातार आतंकियों का समर्थन करने के चलते भारत ने अपने हाई कमिश्नर को कनाडा से वापस बुला लिया है और कनाडा के 6 राजनयिकों को देश से निकलने को कहा है। इस तनातनी का कारण कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो का खालिस्तानी आतंकियों से प्रेम है।

जस्टिन ट्रूडो स्थानीय राजनीति चमकाने के लिए लगातार भारत विरोधी रवैया अपना रहे हैं। चाहे खालिस्तानियों को अपनी सरकार में जगह देना हो या फिर उन्हें अपने देश में शरण देना, वह लगातार भारत विरोधियों की सहायता कर रहे हैं। कनाडा में भारत विरोधी जलसे और रैलियाँ हो रही हैं।

जस्टिन ट्रूडो और उनकी पुलिस इस बीच हास्यास्पद दावे भी कर रही है। कनाडा की पुलिस ने इस बीच यह स्वीकार कर लिया है कि उनके यहाँ खालिस्तान समर्थक खुला घूम रहे हैं। उन्होंने यह बात स्वीकारी है कि कनाडा भारत विरोधी गतिविधियाँ करने वालों के लिए काफी सुरक्षित जगह है।

खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या मामले में अभी तक कोई सबूत ना पेश कर पाने वाला कनाडा अब गैंगस्टर लॉरेंस विश्नोई को भी इस मामले में संलिप्त बता रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर चेहरा बचाने और घरेलू राजनीति में वोट बढ़ाने के लिए ट्रूडो एकदम मूर्खता पर उतर आए हैं।

39 सालों में भी कनिष्क विमान बम धमाके की जाँच को अंजाम तक ना पहुँचा पाने वाली कनाडा सरकार भारत को घेरने का विफल प्रयास कर रही है। हालाँकि, यह कोई पहली बार नहीं है जब कनाडा ने भारत विरोधी रवैया अपनाया हो। इससे पहले जस्टिन ट्रूडो के पिता और कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री पियरे ट्रूडो ने भी ऐसा ही कारनामा किया था।

जस्टिन ट्रूडो के पिता पियरे ट्रूडो ने भी खालिस्तानी आतंकियों का पक्ष लिया था। इसकी कनाडा को भारी कीमत चुकानी पड़ी थी। जस्टिन के पिता पियरे वर्ष 1968 से लेकर 1979 और 1980 से 1984 के बीच कनाडा के प्रधानमंत्री रहे थे। इस दौरान भारत में खालिस्तान का आतंक चरम पर था और खालिस्तानी आतंकी भारत से भागकर कनाडा में शरण ले लेते थे।

भारत ने बढ़ते हुए आतंकवाद को रोकने के लिए कनाडा से इन तत्वों पर कार्रवाई की माँग की थी। पियरे ट्रूडो की सरकार ने इस दौरान भारत का सहयोग करने से इनकार कर दिया था। पियरे ट्रूडो की सरकार ने इस दौरान ना ही कनाडा में संचालित भारत विरोधी गतिविधियों को रोका और ना ही उन आतंकियों को भारत वापस भेजा जो कि लगातार कनाडा में बैठकर भारत को तोड़ने की साजिश कर रहे थे।

इसी कड़ी में भारत ने खालिस्तानी आतंकी तलविंदर सिंह परमार को प्रत्यर्पित करने को कहा था, जो उस समय कनाडा में रहता था। परमार ‘बब्बर खालसा इंटरनेशनल’ का पहला मुखिया था। वह 1970 में कनाडा भाग गया था और वहीं से खालिस्तानी गतिविधियों को संचालित करता था।

तलविंदर पर वर्ष 1981 में पंजाब पुलिस के 2 जवानों की हत्या का आरोप भी है, जिसके लिए उसे 1983 में जर्मनी में गिरफ्तार किया गया था। तलविंदर परमार ने पंजाब के बड़े नेता लाला जगत नारायण की भी वर्ष 1981 में हत्या कर दी थी।

तलविंदर इसके अतिरिक्त अन्य कई हत्याओं में भी शामिल रहा था। तलविंदर ने 1985 में एयर इंडिया के एक बोईंग 747 विमान जिसका नाम ‘कनिष्क’ था, उसे बम से उड़ा दिया था। यह विमान कनाडा के शहर मॉन्ट्रियल से लंदन के रास्ते भारत आ रहा था।

इस विमान में तलविंदर ने इन्दरजीत सिंह रैयत तथा अन्य कुछ आरोपितों के साथ मिलकर बम रखा था जो कि विमान की उड़ान के बीच प्रशांत महासागर में फट गया था और इस हादसे में 329 व्यक्तियों की मृत्यु हो गई थी। इस हादसे में मरने वाले 268 व्यक्ति कनाडाई नागरिक ही थे।

उसने इसी दिन एक और विमान को बम से उड़ाने के लिए एक बैग में बम रखा था, लेकिन वो इसे विमान के भीतर नहीं डाल पाया और टोक्यो में ही फट गया। तलविंदर ने यह बम एयर इंडिया के टोक्यो से बैंकाक जाने वाले विमान में रखने का प्लान बनाया था।

इसके लिए उसने वैंकुवर से उड़े एक विमान में रखे एक बैग में बम रखा था जो कि आगे जाकर टोक्यो में एयर इंडिया के विमान में हस्तांतरित किया जाना था। टोक्यो के एयरपोर्ट में यह बैग इस विमान से निकाले जाने और एयर इंडिया के विमान में रखे जाने से पहले ही स्टोरेज क्षेत्र में फट गया जिसमें 2 जापानी एयरपोर्ट कर्मियों की मृत्यु हो गई थी।

इस हादसे की जाँच भी आगे कहीं नहीं पहुँच सकी क्योंकि कनाडा की सरकार ने इसमें काफी ढील बरती और मात्र इंदरजीत सिंह रैयत ही मात्र आरोपी ठहराया जा सका। इंदरजीत को भी जस्टिन ट्रूडो की सरकार ने 2017 में छोड़ दिया था और सामान्य जीवन बिताने को कह दिया था।

यह भी दावा किया जाता है कि कनाडा की पुलिस और ख़ुफ़िया एजेंसियों को इस बात की जानकारी थी कि तलविंदर सिंह ऐसा कोई बड़ा काण्ड करने वाला है लेकिन तब भी उन्होंने इसको गंभीरता से नहीं लिया और इसके कारण इतना बड़ा हमला हुआ।

तलविंदर सिंह परमार को कॉमनवेल्थ नियमों का हवाला देकर भारत को नहीं सौंपा गया था। नियमों के अनुसार, 2 कॉमनवेल्थ देशों के बीच अपराधियों के प्रत्यर्पण के लिए अलग से संधि नहीं करनीं पड़ती है।

इसी आधार पर इंदिरा गाँधी की सरकार ने परमार को भारत वापस भेजने को कहा था लेकिन पियरे ट्रूडो की सरकार ने यह कारण दिया कि भारत कॉमनवेल्थ का सदस्य तो है लेकिन वह ब्रिटेन की रानी को अपना राष्ट्राध्यक्ष नहीं मानता, इसलिए परमिंदर को भारत नहीं भेजा जा सकता।

परमिंदर को भारत ना भेजने और खालिस्तानियों पर ढील बरतने के कारण कनाडा में उस समय खालिस्तानी आतंकवादियों के हौसले खूब बढ़ गए थे, उन्होंने ऐसे सिखों को निशाना बनाना चालू कर दिया था जो कि अलग देश की माँग का विरोध करते थे।

इसी कड़ी में वर्ष 1998 में इंडो-कैनेडियन अखबार के सम्पादक तारा सिंह हायेर को मार दिया गया था। तारा सिंह को 18 नवम्बर, 1998 में उनके घर के बाहर गोली मार दी गई थी। वह सिख आतंकवाद के विरोधी थे और इस बारे में लिखते रहते थे। उन्होंने 1988 में एयर इंडिया विस्फोट के बारे में लिखते हुए बताया था कि इसमें तलविंदर का हाथ हो सकता है।

तलविंदर सिंह परमार बाद में भारत में एक एनकाउंटर में मार गिराया गया था। वह एयर इंडिया के इस विमान में बम धमाका करने के बाद भारत लौट आया था और यहाँ पर अपनी आतंकी गतिविधियों में लिप्त था। उसे वर्ष 1992 में पंजाब पुलिस ने एनकाउंटर में मार दिया था।

जस्टिन के पिता पियरे ट्रूडो की एक गलती के कारण 329 निर्दोष व्यक्तियों को अपनी जान गँवानी पड़ी थी और लोग हवाई यात्रा करने से भी डरने लगे थे। जस्टिन यही गलती फिर दोहरा रहे हैं। गौरतलब है कि उनकी सरकार पिछले कुछ सालों से ऐसे कृत्यों पर एकदम शांत है जिनमें भारत को सीधे सीधे धमकी दी गई है।

जस्टिन ट्रूडो लगातार ऐसे तत्वों के साथ नजर आते रहे हैं जो कि भारत को तोड़ने के लिए प्रयास कर रहे हैं। जस्टिन, जसपाल अटवाल के साथ नजर आते रहे हैं जो कि एक खालिस्तानी आतंकवादी है। कनाडा में गुरवन्तपंत सिंह पन्नू पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वह दिन भर भारत के विरुद्ध जहर उगलता है।

कनाडा सरकार के इस रवैये से भारत में सुरक्षा खतरों के साथ ही कनाडा में रहने वाले हिन्दुओं तथा खालिस्तान का विरोध करने वाले सिखों का जीवन खतरे में पड़ गया है। जस्टिन ने अपने पिता की गलितयों से नहीं सीख कर स्थितियों को और जटिल बना दिया है। भारत का सहयोग ना करने के बजाय अपनी राजनीति चमकाने का निर्णय जस्टिन ट्रूडो को भारी पड़ने वाला है।

मंदिर में घुसकर देवी प्रतिमा को लात मारने वाला निकला सलीम, होटल से हैदराबाद पुलिस ने किया गिरफ्तार

हैदराबाद पुलिस ने मंगलवार (15 अक्टूबर 2024) को मुत्यालम्मा मंदिर में हुई तोड़फोड़ के मामले में चौंकाने वाले खुलासे किए। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार किया, जिसे सीसीटीवी फुटेज में एक इस्लामिक टोपी पहने देखा गया था, और उसकी पहचान सलीम सलमान ठाकुर के रूप में की गई।

स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, सलीम मस्जिद जाते समय मंदिर को निशाना बनाया था। पुलिस ने आरोपित से पूछताछ की, जिसमें उसने बताया कि वह सिकंदराबाद के ‘सिने पुलिस होटल’ में ठहरा हुआ था।

सलीम ने कबूल किया कि उसने होटल से मस्जिद जाते वक्त मंदिर पर हमला किया। आरोपित की जानकारी के आधार पर पुलिस ने 50 कमरों वाले होटल पर छापा मारा, जहाँ पता चला कि यह होटल ज्यादातर चोरों द्वारा किराए पर लिया जाता था।

पुलिस ने आगे बताया कि सलीम के साथ और भी असामाजिक तत्व मंदिर पर हमला कर रहे थे, लेकिन बाकी सभी भाग गए। बता दें कि सोमवार (14 सितंबर 2024) को तेलंगाना के कुर्मागुड़ा क्षेत्र में मुत्यालम्मा मंदिर की मूर्ति तोड़े जाने के बाद सिकंदराबाद में तनाव पैदा हो गया, जिससे स्थानीय हिंदू निवासियों में गुस्सा और विरोध भड़क गया।

यह घटना पास के पासपोर्ट कार्यालय के पास हुई बताई जा रही है, और एक इस्लामिक कट्टरपंथी को स्थानीय लोगों ने तुरंत पकड़ लिया। बाद में उसे मार्केट पुलिस स्टेशन की हद में पुलिस को सौंप दिया गया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है। घटना के बाद अधिकारियों ने सुरक्षा कड़ी कर दी और शांति बहाल करने के प्रयास कर रहे हैं।

इस बीच, स्थानीय लोगों ने मंदिर के पास प्रदर्शन किया और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। प्रदर्शन में बीजेपी नेता भी शामिल हुए। इस प्रदर्शन के दौरान हैदराबाद लोकसभा सीट से बीजेपी की उम्मीदवार माधवी लता समेत कई बीजेपी कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार भी कर लिया गया। वहीं, केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी भी मंदिर पहुँचे थे और प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की। उन्होंने इस घटना को ‘शर्मनाक‘ करार दिया और कुछ लोगों पर जानबूझकर सांप्रदायिक तनाव भड़काने का आरोप लगाया।

इस बीच, घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया, जिसमें एक युवक सफेद कुर्ता और काली इस्लामिक टोपी पहने देवी की मूर्ति पर लात मारते हुए दिख रहा है। उसने मूर्ति को बेरहमी से तोड़ा और उसके टुकड़े ज़मीन पर फेंक दिए।

इस घटना का वीडियो पहले ही सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका था। वीडियो में देवी की मूर्ति को तोड़ा हुआ देखा जा सकता है, जिससे हिंदू समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुँची है। इसके साथ ही मंदिर का बाहरी हिस्सा भी क्षतिग्रस्त और तोड़ा हुआ देखा जा सकता है।

हैदराबाद में हुई इस घटना ने हिंदू समुदाय की भावनाओं को आहत किया है, जिन्होंने आरोपित के खिलाफ कड़ी सजा की माँग की है। फिलहाल इस मामले में पुलिस आगे की जाँच कर रही है।

हमरे लड़िका को तड़पाय-तड़पाय के… बहराइच में हुई जिस राम गोपाल मिश्रा की हत्या उनके परिवार के साथ CM योगी ने बाँटा दर्द, न्याय का दिलाया भरोसा

राम गोपाल मिश्रा के परिजनों ने 15 अक्टूबर 2024 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात। सीएम ने बहराइच की घटना को ‘अक्षम्य’ बताते हुए पीड़ित परिवार को ‘न्याय’ का भरोसा दिलाया। मिश्रा की 13 अक्टूबर को बहराइच में दुर्गा विसर्जन जुलूस पर हमला करने वाले इस्लामी कट्टरपंथियों ने हत्या कर दी थी।

य​ह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब राम गोपाल के परिजन-रिश्तेदार हत्यारों को फाँसी देने और उनके घरों पर बुलडोजर चलाने की माँग कर रहे हैं। राम गोपाल के पिता ने कहा है कि हत्यारों ने उनके परिवार को बर्बाद कर दिया है। इन लोगों ने पुलिस पर भी लापरवाही का आरोप लगाया है।

पीड़ित परिवार के साथ मुलाकात की तस्वीर ट्विटर/एक्स पर पोस्ट करते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ ने लिखा है, “दुख की इस घड़ी में उत्तर प्रदेश सरकार पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता से पीड़ित परिवार के साथ खड़ी है। आश्वस्त रहें, पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना UP सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है। इस घोर निंदनीय और अक्षम्य घटना के दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।”

रामगोपाल की पत्नी, माता और पिता ने दोपहर लगभग 1 बजे CM योगी से मुलाकत की। इस दौरान भाजपा विधायक सुरेश्वर सिंह भी पीड़ित परिजनों के साथ थे। मुख्यमंत्री से मिल कर राम गोपाल के परिजन रोने लगे। योगी आदित्यनाथ ने उनको ढाढ़स बँधाया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने से पहले रामगोपाल मिश्रा के पिता कैलाशनाथ ने न्यूज एजेंसी ANI से बात की। उन्होंने कहा, “हमरे लड़िका को मारा गया तड़पाय-तड़पाय के। गोली से मारा गवा। तउ कय सजा दीन जाए उनका। हमार परिवार नष्ट कय दीन गय। (मेरे बेटे को तड़पा-तड़पा कर मारा गया है। गोली भी मार दी गई। अब उन सभी को सजा मिले। उन्होंने मेरे परिवार को तबाह कर दिया।)”

इसी घटना पर राम गोपाल मिश्रा के रिश्तेदार प्रमोद का भी बयान आया है। प्रमोद ने आरोप लगाया है कि राम गोपाल की हत्या के पीछे पुलिस की लापरवाही एक बड़ी वजह है। उन्होंने कहा, “गोपाल जब झंडा लहराते हुए आगे बढ़ा तो अब्दुल हमीद के लड़के उसे खींच ले गए।” प्रमोद का यह भी दावा है कि राम गोपाल को बचाने के लिए जब कुछ ग्रामीण आगे बढ़े तो उनके ऊपर भी गोलियाँ बरसाई गई।

प्रमोद ने बताया कि रामगोपाल के परिजनों की सबसे अहम माँग कातिलों को सजा और उनके घरों पर बुलडोजर चलाया जाए है। इसी के साथ दिवंगत गोपाल की पत्नी को उचित मुआवजा मिलने की भी उम्मीद जताई गई है। पीड़ित परिजनों को इस बात का भरोसा है कि योगी सरकार में उनके साथ न्याय होगा।

शादी का झाँसा दे नाबालिग से किया रेप, हाई कोर्ट ने दी जमानत: कहा- 3 महीने में पीड़िता से विवाह करो, बच्चे के नाम पर ₹2 लाख का FD करो

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रेप के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए आरोपित को जमानत दे दी है, लेकिन इसके साथ कुछ शर्तें भी जोड़ी हैं। जस्टिस कृष्ण पहल की सिंगल बेंच ने सहारनपुर निवासी आरोपित अभिषेक की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए उसे पीड़िता से शादी करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि आरोपित नवजात शिशु के नाम पर 2 लाख रुपए की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) जमा करेगा, जो कि बच्चे के वयस्क होने तक उसके नाम पर सुरक्षित रहेगी।

ये मामला सहारनपुर जिले के थाना चिलकाना का है, जहाँ अभिषेक के खिलाफ पॉक्सो और दुष्कर्म के आरोप में एफआईआर दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया गया था। शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपित ने उसकी 15 वर्षीय बेटी से शादी का झूठा वादा कर शारीरिक संबंध बनाए, जिससे वह गर्भवती हो गई। बाद में आरोपित ने शादी से इंकार कर दिया। शिकायतकर्ता ने अपनी बेटी की उम्र 15 वर्ष बताई, जबकि आरोपित के वकील ने कोर्ट में कहा कि मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार पीड़िता की उम्र 18 वर्ष है। इसी आधार पर आरोपित ने अपनी जमानत की अर्जी दाखिल की थी।

हाई कोर्ट ने आरोपित को जमानत देते हुए यह शर्त लगाई कि उसे जेल से रिहा होने के तीन महीने के भीतर पीड़िता से विवाह करना होगा। इसके अलावा नवजात शिशु के भविष्य की सुरक्षा के लिए आरोपित को जेल से रिहाई की तिथि से छह महीने के अंदर बच्चे के नाम पर 2 लाख रुपए की एफडी करानी होगी। यह राशि पीड़िता के बच्चे के वयस्क होने तक उसके नाम पर सुरक्षित रहेगी। हाई कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि आरोपित को पीड़िता और उसके बच्चे की देखभाल करनी होगी।

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा, “असली शोषण के मामलों और आपसी सहमति से बने रिश्तों के बीच फर्क करना चुनौतीपूर्ण है। ऐसे मामलों में न्याय करने के लिए सूझ-बूझ और सावधानीपूर्वक न्यायिक विचार की जरूरत होती है, ताकि न्याय सही तरीके से हो सके।” कोर्ट ने यह भी कहा, “जब तक किसी का अपराध साबित नहीं हो जाता, उसे निर्दोष माना जाता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत किसी व्यक्ति के जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार को केवल आरोपों के आधार पर नहीं छीना जा सकता, जब तक उसका अपराध संदेह से परे साबित न हो जाए।”

कोर्ट ने यह भी जोर दिया, “न्यायिक प्रक्रिया में यह सिद्धांत प्रमुख है कि ‘जमानत सामान्य स्थिति है, और जेल भेजना अपवाद है’।” इस संदर्भ में कोर्ट ने आरोपित को जमानत देने का फैसला किया क्योंकि ऐसा कोई ठोस प्रमाण नहीं था जिससे यह सिद्ध हो कि वह जमानत पर रिहा होने के बाद भागने या न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करेगा।

आरोपित के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए बयान में कहा कि उसके साथ कोई बल प्रयोग नहीं किया गया। इसके अलावा, आरोपित ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि वह पीड़िता से शादी करने और नवजात शिशु की देखभाल करने के लिए तैयार है। वकील ने यह भी कहा कि आरोपित कई महीनों से जेल में है और अगर उसे जमानत मिलती है, तो वह इसका दुरुपयोग नहीं करेगा।

राज्य सरकार की ओर से जमानत का विरोध किया गया, लेकिन कोर्ट ने पाया कि ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है जिससे यह साबित हो कि आरोपित जमानत मिलने के बाद न्याय से भागने की कोशिश करेगा या गवाहों को धमकाने का प्रयास करेगा।

नॉर्थ-ईस्ट के लोगों से सही बर्ताव नहीं करता बॉलीवुड: मणिपुरी अभिनेता का छलका दर्द, कहा- ‘जिगरा’ बनाने वालों ने फँसाकर रखा, दूसरे मौके भी हाथ से निकल गए

बॉलीवुड फिल्म जिगरा में काम देने को लेकर पूर्वोत्तर के एक एक्टर ने गंभीर आरोप लगाए हैं। एक्टर ने कहा है कि बॉलीवुड में पूर्वोत्तर उन लोगों के साथ सही बर्ताव नहीं होता। एक्टर ने अपनी आपबीती सोशल मीडिया पर लिख कर बताई है।

मणिपुर से आने वाले एक्टर बिजोऊ थांगजम ने रविवार (13 अक्टूबर, 2024) को एक पोस्ट में लिखा, “मैं यहाँ पर जिगरा फिल्म पर दिव्या खोसला के कॉपी करने के आरोपों को लेकर नहीं बोलूँगा। लेकिन मैंने जिगरा की टीम के साथ अपने अनुभव को काफी समय तक दबा कर रखा था, लेकिन अब बताने का समय आ गया है।”

उन्होंने आगे लिखा, “2023 में, मुझे उनकी कास्टिंग टीम ने एक रोल के लिए ऑडिशन देने के लिए कहा था। मैंने उनकी टाइमलाइन के अनुसार चार महीने के भीतर दो बार अपने टेप भेज दिए थे। नवम्बर, 2023 के आखिर में, उन्होंने मुझे बताया कि मैं दिसंबर में शूटिंग में शामिल होऊंगा। यह कितनी शानदार बात होती।”

इसके बाद बिजोय ने अपनी पीड़ा बताई। उन्होंने लिखा, “इसके बाद उन्होंने मुझे कभी भी कोई शूटिंग की तारीख नहीं बताई। इसके बावजूद उन्होंने मुझे पूरे दिसम्बर के लिए फंसा कर रखा और आशा की कि मैं किसी भी समय शूटिंग के लिए तैयार होऊँगा। मणिपुर के इम्फाल में रहने वाले एक आदमी के तौर पर मैंने शुरू में ही साफ़ कर दिया था कि मुझे यात्रा के इंतजाम करने की जरूरत पड़ेगी। हालाँकि लगता है कि इससे जिगरा के लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ा।”

बिजोय ने इसके बाद आरोप लगाया कि जिगरा टीम के ढीलेढाले रवैये के कारण उन्हें और भी काम छोड़ने पड़े कब जबकि जिगरा में भी काम नहीं दिया गया। उन्होंने लिखा, “मैं पूरे एक महीने तक इन्तजार करता रहा। कास्टिंग टीम से बातचीत होती रही लेकिन शूटिंग के बारे में कोई अपडेट नहीं दिया गया। मुझे आखिर आखिरी बार 26 सितम्बर, 2024 को मैसेज किया गया उसके उसके बाद से पूरी तरह शान्ति हो गई। इस बीच मुझे अन्य प्रोजेक्ट भी छोड़ने पड़े, मैं उनका इन्तजार करता रहा।”

बिजोय ने इसके बाद आरोप लगाया कि पूर्वोत्तर भारत से आने वाले एक्टरों के साथ भेदभाव होता है। उन्होंने लिखा, “मैं समझता हूँ कि बड़े प्रोडक्शन हाउस कैसे काम करते हैं। जिगरा के डायरेक्टर के प्रतिभाशाली हैं। लेकिन जिस तरह से उन्होंने इस पूरी स्थिति को संभाला वह बेहद खराब था। पूर्वोत्तर से आने वाले मेरे जैसे एक्टरों के लिए, यह काफी भेदभाव वाला लगा। मेरा समय बर्बाद हुआ, और मैंने बाकी मौके भी खो दिए।”

बिजोय ने लिखा कि वह किसी एजेंडा के तहत यह नहीं लिखा है बल्कि वह असलियत सामने लाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इससे लोगों को पता लगेगा कि आखिर हमें क्या-क्या झेलना पड़ता है। बिजॉय का यह पोस्ट सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। बिजोय के इस पोस्ट के बाद कई लोगों ने उनका समर्थन किया।

जिस जिगरा फिल्म के ऊपर बिजोय ने आरोप लगाए हैं, उसे 11 अक्टूबर, 2024 को लॉन्च किया गया था। यह फिल्म मंगलवार (15 अक्टूबर, 2024) तक लगभग ₹18 करोड़ की कमाई कर चुकी है। अलिया भट्ट के प्रमुख रोल वाली यह फिल्म इस बीच विवादों में भी आ गई है और आरोप है कि इसमें सावी फिल्म की कहानी को कॉपी की गई।

खालिस्तानियों के लिए जन्नत है कनाडा: खुद जस्टिन ट्रूडो की पुलिस ने कबूला, वाशिंगटन पोस्ट ‘आपराधिक गतिविधियों’ के लिए अमित शाह को बता रहा जिम्मेदार

कनाडा की पुलिस ने 14 अक्टूबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत पर गंभीर आरोप लगाए, जिसमें यह कहा गया कि भारत कनाडा में आपराधिक गतिविधियों में शामिल है, जिसमें खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या भी शामिल है। रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) के बयान में कहा गया कि सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे की वजह से उन्होंने इस मामले की जानकारी सार्वजनिक करने का निर्णय लिया। एजेंसी ने साफ किया कि भारत की तरफ से पूरे सिख समुदाय को नहीं, बल्कि सिर्फ खालिस्तानी समर्थकों को निशाना बनाया जा रहा है। अब यह बात साफ हो गई है कि कनाडा खालिस्तान समर्थकों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना बन गया है।

रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) ने कहा कि उन्हें दक्षिण एशियाई समुदाय विशेष रूप से खालिस्तानी समर्थकों से जुड़ी कई हिंसक धमकियों का पता चला है। इनमें हत्या और वसूली जैसी गतिविधियाँ शामिल हैं। RCMP ने फरवरी 2024 में भारतीय सरकार के एजेंटों द्वारा कनाडा में चल रही आपराधिक गतिविधियों की जाँच के लिए एक स्पेशल टीम का गठन किया था। रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस का दावा है कि भारतीय सरकार के एजेंट इन गतिविधियों को कनाडा में अंजाम दे रहे हैं और इसके लिए अपराधियों की मदद ले रहे हैं, जिनमें लॉरेंस बिश्नोई गैंग का नाम प्रमुखता से लिया गया है।

रोचक बात यह है कि RCMP ने लॉरेंस बिश्नोई गैंग को इन आपराधिक गतिविधियों का मुख्य दोषी बताया और कहा कि भारतीय सरकार बिश्नोई के सहयोगियों का उपयोग खालिस्तानी आतंकवादियों को निशाना बनाने के लिए कर रही है। RCMP के सहायक आयुक्त ब्रिजिट गॉविन ने कहा, “भारत दक्षिण एशियाई समुदाय को निशाना बना रहा है, लेकिन विशेष रूप से खालिस्तानी तत्वों को। हम देख रहे हैं कि ये (भारत) ऑर्गनाइड्स क्रिमिनल्स के गिरोह से जुड़े लोगों/अपराधियों का उपयोग कर रहे हैं, जो विशेष रूप से बिश्नोई समूह के साथ जुड़े हैं।”

इस बीच, वाशिंगटन पोस्ट ने भारतीय गृह मंत्री अमित शाह पर कनाडा में आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया है। रिपोर्ट के अनुसार, कनाडाई अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने खालिस्तानी आतंकवादियों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा दिया है, जिसमें हरदीप सिंह निज्जर की हत्या भी शामिल है। इन आरोपों के पीछे इंटरसेप्टेड संचार और नई खुफिया जानकारी का दावा किया गया है।

कनाडाई सरकार ने इन आरोपों के जवाब में छह भारतीय राजनयिकों की पहचान की, जो खालिस्तानी आतंकवादियों पर जानकारी इकट्ठा करने में संलिप्त थे। इन राजनयिकों को कनाडा छोड़ने का आदेश दिया गया है, जिसमें कनाडा में भारतीय उच्चायुक्त संजय कुमार वर्मा भी शामिल हैं। इसके जवाब में भारत ने भी छह कनाडाई राजनयिकों को निष्कासित कर दिया है। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भी भारत पर आरोप लगाया है कि उनके पास इस बात के विश्वसनीय सबूत हैं कि भारतीय सरकार कनाडा में आपराधिक गतिविधियों में शामिल है। भारत ने इन आरोपों का खंडन करते हुए इसे ट्रूडो सरकार का राजनीतिक एजेंडा बताया है।

RCMP की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारतीय राजनयिकों का आपराधिक गतिविधियों से गहरा संबंध है, जिसमें घर में घुसपैठ, गोलीबारी और हत्या शामिल हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय राजनयिकों द्वारा इकट्ठी की गई जानकारी भारत के रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) को भेजी गई, जिसने अलगाववादी व्यक्तियों पर हमलों के लिए आपराधिक सिंडिकेट्स का उपयोग किया।

मूल रूप से यह रिपोर्ट अंग्रेजी में प्रकाशित की गई है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

शिमला से मंडी तक अवैध मस्जिद पर पलट गए मुस्लिम, निर्माण तोड़ने पर लिया स्टे: जब सड़क पर थे हिंदू, तब खुद गिराने का किया था वादा

हिमाचल प्रदेश के मंडी में मुस्लिम जेल रोड पर बनी अवैध मस्जिद तोड़ने के खिलाफ हो गए है। मुस्लिम पक्ष ने इस मामले में अब मस्जिद तोड़ने के आदेश के खिलाफ स्टे ले लिया है। इससे पहले हिन्दू संगठनों का आंदोलन तेज होता देख मुस्लिम खुद ही मस्जिद तोड़ने लगे थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुस्लिम पक्ष ने प्रधान सचिव शहरी निकाय व नगर नियोजन के न्यायालय में मस्जिद गिराने के आदेश के विरुद्ध याचिका लगाई थी। इसके आधार पर अब मस्जिद तोड़ने के नगर निगम के फैसले पर रोक लग गई है। अब सुनवाई के बाद ही तोड़ने पर फैसला होगा।

मंडी नगर निगम को यह आदेश भी मिला है कि वह मस्जिद पर अब कोई कार्रवाई ना करे। मुस्लिम पक्ष ने दावा किया है कि जितने भी क्षेत्रफल में मस्जिद बनी है, सब वैध है और उसका कब्जा उनका पास है। मुस्लिम पक्ष ने यह भी दावा किया है कि 386 वर्गमीटर जमीन उसके पास है।

मुस्लिम पक्ष ने प्रधान सचिव के न्यायालय में दावा किया है कि मस्जिद का रिकॉर्ड 1936 से मौजूद है और 2013 की बारिश में मस्जिद का बड़ा हिस्सा गिर गया था। इसके बाद नया निर्माण किया गया। मुस्लिम पक्ष के इस दावे के बाद नगर निगम से रिकॉर्ड माँगा गया है।

अवैध मस्जिद को लेकर अब सुनवाई 20 अक्टूबर, 2024 को होगी। गौरतलब है कि मंडी नगर निगम ने जेल रोड पर बनी मस्जिद को सितम्बर माह में अवैध करार दिया था। मस्जिद कमिटी को इसके बाद अवैध हिस्सा तोड़ने का आदेश नगर निगम आयुक्त ने दिया था।

नगर निगम ने इस आदेश के बाद मस्जिद की पानी और बिजली भी काट दी थी। हालाँकि, मुस्लिमों ने इस आदेश का पालन नहीं किया और प्रधान सचिव के न्यायालय में चले गए। इसके बाद इस निर्णय पर रोक लग गई। मंडी मस्जिद का मामला सितम्बर माह में ही शिमला की संजौली की अवैध मस्जिद के बाद उठा था।

सरकार की जाँच में यह भी सामने आया था कि मंडी में बनाई गई मस्जिद ने PWD की जमीन पर कब्जा किया है। यह भी सामने आया था कि मस्जिद के पास मात्र 45 वर्गमीटर की जमीन है लेकिन उन्होंने लगभग 200 वर्गमीटर कब्जा कर रखा है।

जहाँ अब मुस्लिम पक्ष मंडी की मस्जिद बचाने को हर जतन कर रहा है, वहीं शिमला समेत बाकी शहरों में आंदोलन के बाद उसने खुद ही मस्जिद तोड़ना चालू कर दिया था। हिन्दू पक्ष ने मस्जिद तोड़ने पर रोक के बाद फिर से आंदोलन की चेतावनी दी है।

मंडी के जैसा ही रुख मुस्लिम पक्ष ने शिमला की संजौली मस्जिद मामले में अपनाया है। यहाँ पहले मस्जिद तोड़ने की बात कही गई और उसके बाद एक पक्ष कहने लगा कि वह तोड़ने के आदेश के विरुद्ध कोर्ट जाएगा। हिन्दू संगठनों ने आरोप लगाया है कि मुस्लिम अवैध मस्जिदों के मामले में हिमाचल के लोगों को भ्रमित कर रहे हैं।

हिन्दू जागरण मंच के मुखिया कमल गौतम ने ऑपइंडिया से कहा है कि मुस्लिमों का एक पक्ष गिराने की बात करता है जबकि उनका ही एक धड़ा कोर्ट जाने की बात करता है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इसको लेकर हिन्दू बड़ा आंदोलन करेंगे।

आकाश को पीट-पीटकर मार डाला, माँ बचाने आईं तो उन्हें भी मारा, पिता को पीटकर अंधा किया, पत्नी का गर्भपात: मुंबई की सड़क पर मॉब लिंचिंग

मुंबई की सड़कों पर एक परिवार के सपने टुकड़ों में बिखर गए। मलाड-ईस्ट में 12 अक्टूबर 2024 की शाम जब आकाश माईन अपनी पत्नी और माता-पिता के साथ दशहरा मनाने निकले थे, उन्हें क्या पता था कि यह उनकी आखिरी यात्रा होगी। एक छोटी सी गलती, एक मामूली ओवरटेक और देखते ही देखते सबकुछ बदल गया। इस वीभत्स कहानी में क्रूरता, दर्द और एक परिवार का टूटता सपना है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आकाश जो महज 27 साल का था, अपने परिवार के साथ एक नई कार खरीदने की योजना बनाकर घर से निकला था। परिवार के लिए यह एक खुशी का दिन था। वे सपनों को साकार करने निकले थे, लेकिन सड़कों पर छिपे राक्षसों ने उनकी खुशी को मातम में बदल दिया। मलाड रेलवे स्टेशन के पास एक ऑटो ड्राइवर अविनाश कदम ने आकाश की बाइक को ओवरटेक कर दिया। कुछ ही पलों में बात इतनी बढ़ गई कि आकाश और ऑटो चालक अविनाश के बीच झगड़ा होने लगा। स्थानीय दुकानदार और अन्य ऑटो ड्राइवर भी इस झगड़े में कूद पड़े। इन लोगों की आँखों में कोई इंसानियत नहीं थी, सिर्फ बेरहमी थी।

जब आकाश को जमीन पर पटक दिया गया, तब उसकी माँ दीपाली माईन उसे बचाते हुए उसके ऊपर लेट गईं। वह अपने बेटे की ढाल बनकर उसे बचाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन इस भीड़ की बेरहमी इतनी बढ़ चुकी थी कि उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ा। माँ को भी लातों से मारा गया। आकाश के पिता जो अपने बेटे को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, उनकी आँख पर चोट लगी। यह चोट इतनी गहरी थी कि उनकी बाईं आँख हमेशा के लिए खराब हो गई।

आकाश की पत्नी, जो गर्भवती थी, उस भयानक दृश्य को देखकर शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर टूट चुकी थी। इस क्रूर हमले के बाद उसका गर्भपात हो गया। एक खुशहाल परिवार, जो नई शुरुआत की ओर बढ़ रहा था, उसे सड़कों पर रौंद दिया गया।

आकाश पर तब तक वार किए गए जब तक कि उसकी साँसे थम नहीं गईं। उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। यह न सिर्फ एक व्यक्ति की हत्या थी, बल्कि एक पूरे परिवार के सपनों और भविष्य की भी निर्मम हत्या थी।

इस घटना का वीडियो इंटरनेट पर वायरल हो गया। वीडियो में दिख रहा है कि कैसे एक माँ अपने बेटे के ऊपर लेटकर उसे बचाने की कोशिश कर रही है, लेकिन उन हैवानों का दिल नहीं पिघला। इस भयावह घटना ने हर किसी के दिल को झकझोर दिया।

मुंबई पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए नौ आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। दिंडोशी पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया और आरोपितों को 22 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है। लेकिन क्या यह गिरफ्तारी आकाश के परिवार के घाव भर सकती है? उसकी माँ, जिसके दिल में हर रोज बेटे की चीखें गूँजती रहेंगी, क्या वो कभी उस दर्द से उबर पाएँगी? पिता, जो अपने बेटे की लाश को देख रहे थे, क्या कभी उस पल को भुला पाएँगे?

यह घटना केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं है, यह समाज के उस हिस्से को उजागर करती है जहाँ इंसानियत मर चुकी है।

रिपोर्ट में दावा- रामगोपाल मिश्रा के नाखून उखाड़े, बहराइच पुलिस ने नकारा

बहराइच में रामगोपाल मिश्रा को केवल गोली ही नहीं मारी गई थी। हत्यारों ने उनके साथ काफी बर्बरता की। उनका गला धारदार हथियार से काटा गया था। उनके नाखूनों को प्लास से उखाड़ दिया गया था। उनके शव में गोलियों के 35 छर्रे मिले हैं। पैरों पर धारदार हथियार के घाव पाए गए हैं।

इस्लामी कट्टरपंथियों ने रविवार (13 अक्टूबर 2024) को दुर्गा विसर्जन जुलूस पर हमला कर मिश्रा की हत्या कर दी थी। दावा है कि उन्हें अब्दुल हमीद के घर में खींचकर मारा गया। हमीद के अलावा सरफराज, फहीम और साहिर खान जैसे नाम इस हत्याकांड में नामजद हैं। आज (15 अक्टूबर 2024) रामगोपाल मिश्रा के परिवार से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुलाकात करेंगे।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के हवाले से मीडिया रिपोर्टों में मिश्रा के साथ हुई बर्बरता के बारे में बताया गया है। इसके मुताबिक रामगोपाल का सीना गोलियों से छलनी कर दिया गया था। उनके दोनों पैरों के नाखूनों को नोच डाला गया था। रामगोपाल के भाई हरि मिलन मिश्रा ने ऑपइंडिया को बताया कि जब वो अंतिम संस्कार से पहले शव को स्नान करा रहे थे, तब उन्हें भी बर्बरता के निशान दिखे।

हरि मिलन मिश्रा ने बताया कि उनके भाई के गले पर 3 गोलियाँ मारी गईं थीं। सीने पर गोलियों के 6 निशान थे। गर्दन को एक जगह किसी धारदार हथियार से काटा गया था। चेहरे के कुछ हिस्से पर तलवारों के निशान थे। रामगोपाल के पैरों पर भी तलवार चलाई गई थी। उनके नाखूनों को उखाड़ने के लिए प्लास का इस्तेमाल किया गया था। मृतक के भाई ने आशंका जताई कि इतनी क्रूरता रामगोपाल की जान निकलने से पहले ही दिखाई गई हो।

लगभग ढाई महीने पहले रामगोपाल से लव मैरिज करने वाली रोली मिश्रा ने दैनिक भास्कर को बताया कि उनके पति को जानवरों की तरह मारा गया। उन्होंने दावा किया कि रामगोपाल के पेट में भी गोलियों के निशान थे। रोली मिश्रा चाहती हैं कि उनके पति के कातिलों को सख्त सजा मिले। रामगोपाल की माँ ने कहा कि उनके बेटे के पूरे शरीर पर घाव थे। इसी रिपोर्ट में स्थानीय लोगों ने दावा किया है कि अगर सही से तलाशी ली जाए तो घटनास्थल के आसपास के घरों में AK 47 तक बरामद हो सकती है।

CM योगी से मिलने निकला पीड़ित परिवार

सोमवार (14 अक्टूबर) को ऑपइंडिया से बातचीत में बहराइच के स्थानीय भाजपा विधायक सुरेश्वर सिंह ने बताया था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पीड़ित परिवार से मुलाकात करेंगे। इस दौरान उन्होंने कहा था कि CM की तरफ से रामगोपाल मिश्रा के परिवार की हरसम्भव मदद और उनके कातिलों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। रामगोपाल के भाई हरि मिलन मिश्रा ने ऑपइंडिया को बताया कि उनके परिवार के 3 सदस्य CM योगी से मिलने निकल चुके हैं।

योगी आदित्यनाथ से मिलने जा रहे रामगोपाल के पारिवारिक सदस्यों में मृतक के पिता, माता और पत्नी हैं। इन सभी को भाजपा MLA सुरेश्वर सिंह अपने साथ ले जा रहे है।

अपडेट: बहराइच पुलिस ने रामगोपाल मिश्रा के साथ बर्बरता के दावों को नकार दिया है। तलवार से मारने, करंट देने, नाखून उखाड़ने की खबरों का खंडन किया है। पुलिस का कहना है कि मिश्रा की मौत गोली लगने से हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी यही वजह बताई गई है। पुलिस के बयान के आधार पर रिपोर्ट की हेडलाइन में बदलाव किए गए हैं।

‘कर्नाटक वक्फ बोर्ड की जमीन पर मल्लिकार्जुन खड़गे का कब्जा’: JPC के सामने अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व चेयरमैन ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष की खोली पोल, बैठक छोड़ भाग गए विपक्षी सांसद

वक्फ संशोधन बिल पर आयोजित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की बैठक में कॉन्ग्रेस मुखिया मल्लिकार्जुन खरगे पर जमीन कब्जाने आरोप लगा है। खरगे पर आरोप है कि उन्होंने कर्नाटक वक्फ बोर्ड की जमीन कब्जा की। यह आरोप लगने के बाद विपक्ष के सांसदों ने JPC बैठक का बहिष्कार कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार (14 अक्टूबर, 2024) को नई दिल्ली में JPC की बैठक में कर्नाटक अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व चेयरमैन अनवर मनिप्पदी ने खरगे पर यह आरोप लगाए। अनवर ने JPC के सामने पेश होते हुए बताया कि खरगे ने कर्नाटक में वक्फ की जमीन पर कब्जा किया है।

अनवर मनिप्पदी ने JPC के सामने काफी जानकारी रखी। उन्होंने इस दौरान कर्नाटक में हुई वक्फ जमीनों की लूट की बातें JPC को बताई। इसके बाद JPC में शामिल विपक्ष के सांसद भड़क गए। उन्होंने कहा कि खरगे चूंकि इस JPC का हिस्सा नहीं है, ऐसे में उनके खिलाफ यहाँ कोई बात ना की जाए।

विपक्ष के सांसदों ने खरगे का नाम वक्फ की जमीन हथियाने में आने पर JPC का बहिष्कार कर दिया। AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी, AAP सांसद संजय सिंह, समाजवादी पार्टी सांसद मौलाना मोहिबुल्लाह समेत अन्य विपक्षी सांसद JPC बैठक छोड़ कर बाहर चले आए।

विपक्ष के सांसदों ने आरोप लगाया कि वक्फ बिल के मामले में JPC मुस्लिमों के अलावा बाकी लोगों को बुला रही है, जो ठीक नहीं है। विपक्ष के सांसदों ने कहा है कि मुस्लिमों के मसले में दूसरों को बुलाना ठीक नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि JPC के मुखिया जगदम्बिका पाल भी इस संबंध में कार्रवाई नहीं कर रहे।

विपक्ष के सांसदों ने जहाँ खरगे पर आरोपों को लेकर JPC बैठक का बहिष्कार कर दिया लेकिन इसको लेकर कॉन्ग्रेस या खरगे ने अभी तक कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है। कॉन्ग्रेस मुखिया खरगे ने जमीन कब्जे के आरोपों को अभी तक नहीं नकारा है।

इससे पहले भी JPC की बैठक में विवाद हो चुका है। मुंबई में सितम्बर माह में हुई बैठक में एक मुस्लिम संगठन के मुखिया इरफ़ान अली ने आरोप लगाया था कि जब उन्होंने वक्फ बिल का समर्थन किया तो AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी और TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने उनके साथ धक्कामुक्की की। इसको लेकर मामला भी दर्ज हुआ था।

खरगे और उनके परिवार पर वक्फ के अलावा और भी जमीनों को गलत ढंग से लेने का आरोप लगा है। हाल ही में मल्लिकार्जुन खरगे के परिवार वाले सिद्धार्थ विहार ट्रस्ट ने एक जमीन को वापस सरकार को लौटने का फैसला लिया है। यह जमीन ट्रस्ट को KIADB ने दी थी।

यह जमीन बेंगलुरु के काफी महंगे इलाके में है। यह जमीन सार्वजनिक सुविधाएँ बनाने के लिए दी गई थी। खरगे के बेटे राहुल खरगे ने हाल ही में एक पत्र लिख कर यह जमीन लौटा दी है।भाजपा ने आरोप लगाया है कि यह जमीन अवैध रूप से खरगे परिवार ने कब्जाई थी और मामले का खुलासा होने के बाद वह इसे लौटाने पर मजबूर हो गए हैं।

भाजपा ने आरोप लगाया है कि खरगे परिवार पिछले 50 वर्षों से कर्नाटक को लूट रहा और इस खुलासे के बाद कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खरगे को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए। इस मामले को लेकर कॉन्ग्रेस और खरगे परिवार बैकफुट पर है।