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32 साल बाद अजमेर सेक्स स्कैंडल के 6 दोषियों को उम्रकैद, कुछ रिहा हो गए तो कोई विदेश में बैठा है: 1992 में दरगाह के खादिमों-कॉन्ग्रेस नेताओं ने खेला था घिनौना खेल

1992 के अजमेर सेक्स स्कैंडल में स्पेशल पॉक्सो कोर्ट के जज रंजन सिंह ने 6 दोषियों को सज़ा सुनाई है। इन सभी को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई है, साथ ही 5-5 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।

32 वर्ष पुराने अजमेर सेक्स स्कैंडल में 6 को अदालत ने दोषी माना है। 1992 के इस प्रकरण को भारत के काले अध्यायों में से एक में गिना जाता है। इस मामले में नफीस चिश्ती, नसीम उर्फ़ टार्जन, सलीम चिश्ती, इकबाल भाटी, सोहेल गनी और सैयद जमीर हुसैन को दोषी ठहराया गया है। राजस्थान के अजमेर स्थित विशेष न्यायालय में इस मामले की सुनवाई चल रही थी। इकबाल भाटी को एम्बुलेंस के जरिए दिल्ली से अजमेर लाया गया, वहीं 1 दोषी को तबीयत खराब होने के कारण पेश नहीं किया जा सका।

इस मामले में 23 जून, 2001 को ही चार्जशीट दायर की गई थी। पॉक्सो कोर्ट में भी इस मामले की सुनवाई चल रही थी। बता दें कि ये मामला 1992 का है जब 100 से भी अधिक लड़कियों के साथ न सिर्फ सामूहिक बलात्कार की घटनाएँ हुई थीं, बल्कि उनकी नग्न तस्वीरें भी फैला दी गई थीं। इस मामले में कुछ लड़कियों ने आत्महत्या भी की थी। अजमेर की लड़कियों की शादी होनी बंद हो गई है। इस मामले में दरगाह के खादिमों और कॉन्ग्रेस नेताओं का हाथ सामने आया था।

एक आरोपित अभी तक फरार है, जिसका कोई अता-पता नहीं चल सका है। इतना ही नहीं, एक कारोबारी के बेटे तक के साथ कुकर्म किया गया था। फिर तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल कर उसे उसकी गर्लफ्रेंड के साथ पॉल्ट्री फार्म पर बुलाया और उसका गैंगरेप किया था। उस लड़की को न्यूड तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल कर सहेलियों को लाने का दबाव बनाया गया। एक लैब में इन्होंने तस्वीरें उतारने के लिए दी थीं, उसके कुछ कर्मचारियों ने तस्वीरें सर्कुलेट कर दी, इसकी जेरोक्स कॉपी कइयों को बेचीं गई और फिर उन लड़कियों को ब्लैकमेल कर उनका यौन शोषण किया गया।

इस मामले में सबसे पहले 18 आरोपितों पर ट्रायल चला था – कलर लैब का मैनेजर हरीश डोलानी, यूथ कॉन्ग्रेस का प्रेजिडेंट रहा फारूख चिश्ती, वाईस प्रेजिडेंट नफीस चिश्ती, जॉइंट सेक्रेटरी अनवर चिश्ती, लैब डेवलपर पुरुषोत्तम उर्फ़ बबली, इकबाल भाटी, कैलाश सोनी, सलीम चिश्ती, सोहेल गनी, जमीर हुसैन, अल्मास महाराज, इशरत अली, परवेज अंसारी, मोइजुल्लाह उर्फ़ पूतन इलाहाबादी, नसीम उर्फ़ टार्जन, कलर लैब का मालिक महेश डोलानी, ड्राइवर शम्शू उर्फ़ माराडोना, नेता जउर चिश्ती।

इनमें से 5 अपनी सज़ा काट चुके हैं, वहीं 6 को अब सज़ा सुनाई गई है। इशरत अली, अनवर चिश्ती, मोइजुल्लाह उर्फ़ पूतन इलाहाबादी और शमशुद्दीन उर्फ़ माराडोना की उम्रकैद की सज़ा को सुप्रीम कोर्ट ने 10 वर्ष के कारावास में बदल दिया। इन्हें 2003 में सज़ा हुई थी, फ़िलहाल सभी रिहा हो गए हैं। परवेज अंसारी, महेश लोदानी, हरीश तोलानी और कैलाश सोनी को 1998 में निचली अदालत ने उम्रकैद दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने इन्हें बरी कर दिया। पुरुषोत्तम उर्फ़ बबली 1994 में ही आत्महत्या कर चुका है।

फारूख चिश्ती को 2007 में उम्रकैद तो मिली, लेकिन 2013 में उसे रिहा कर दिया गया। अल्मास महाराज के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी है, वो विदेश चला गया है। 6 लड़कियों ने प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या की थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत की सरकार ने CB-CID को मामले की जाँच सौंपी थी। 32 साल बाद भी इस मामले में ठीक से इंसाफ नहीं हो पाया है, पुलिस ने इस मामले में आरोपितों के खिलाफ अलग-अलग चार्जशीट पेश की थी। 7 आरोपितों ने तो घटना के 11 साल बाद 2003 में आत्मसमर्पण किया।

इस मामले में 16 पीड़िताएँ कोर्ट में पेश हुईं। अब तक तो इनमें से कई दादी भी बन चुकी हैं। कई पीड़िताएँ सामाजिक कारणों से बाद में मुकर गईं। तत्कालीन DIG ओमेंद्र भारद्वाज ने बिना जाँच ही लड़कियों के चरित्र पर सवाल उठा दिए थे, जिस पर कोर्ट ने आपत्ति जताते हुए सरकार से उनके खिलाफ भी जाँच कराने को कहा था। सोहैल गनी तो 2018 में गिरफ्तार हुआ, जिसके बाद ट्रॉयल फिर रुकी और फिर चार्जशीट पेश हुआ था। अब तक 104 गवाह पेश किए जा चुके हैं।

1992 में जब अजमेर में स्कूली लड़कियों के साथ बलात्कार उन्हें ब्लैकमेल करने का मामला सामने आया था, तब साप्ताहिक समाचार पत्र ‘लहरों की बरखा’ चलाने वाले मदन सिंह ने इस पूरे मामले को बड़े पैमाने पर उठाया था। इस कारण पहले उन्हें धमकियाँ मिलीं। लेकिन, बाद में गोली मारकर हत्या कर दी गई। श्रीनगर रोड पर मदन सिंह पर हमला किया गया था। घायल होने के बाद उन्हें अजमेर के जेएलएन अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन अस्पताल के वार्ड में ही गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई।

करीब 30 साल बाद 7 जनवरी 2023 को इस दिवंगत पत्रकार के दो बेटों ने एक शख्स को गोलियों से भून​ दिया। चिल्लाकर बताया कि अपने पिता की मौत का बदला ले लिया है। जुलाई 2023 में इस घटना पर बनी फिल्म ‘अजमेर 92’ भी रिलीज हुई थी। इस फिल्म में सुमित सिंह, मनोज जोशी, करण वर्मा, राजेश शर्मा, जरीना वहाब और शालिनी कपूर महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। फिल्म का लेखन पुष्पेंद्र सिंह, ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह और सूरजपाल पाठक ने किया है। फिल्म के डायरेक्टर पुष्पेंद्र सिंह हैं। वहीं, उमेश कुमार तिवारी और करण वर्मा ने मिलकर फिल्म को प्रोड्यूस किया है।

इस्लामी भीड़ ने इस फिल्म के खिलाफ जम कर विरोध प्रदर्शन किया था। अजमेर दरगाह से जुड़े कई खादिम आज भी नहीं सुधरे हैं, जब भाजपा नेता रहीं नूपुर शर्मा के खिलाफ ‘सर तन से जुदा’ के नारे लगे थे और उदयपुर में कन्हैया लाल तेली की गला रेती गई थी उनका समर्थन करने के कारण, तब इस हत्याकांड से गौहर चिश्ती को गिरफ्तार किया गया था। इसी तरह सलमान चिश्ती ने नूपुर शर्मा की हत्या के लिए उकसाया था। 1992 के अजमेर रेप-कांड की शिकार अधिकतर स्कूल और कॉलेज जाने वाली लड़कियाँ थीं। 

उस वक़्त अजमेर में 350 से भी अधिक पत्र-पत्रिका थी और इस सेक्स स्कैंडल के पीड़ितों का साथ देने के बजाए स्थानीय स्तर के कई मीडियाकर्मी उल्टा उनके परिवारों को ब्लैकमेल किया करते थे। इस केस पर बाद में टीवी मीडिया पर शो से लेकर किताबें तक लिखी गईं लेकिन एक चीज जो आज तक कहीं नहीं दिखा, वो है- न्याय। अगर उस समय पुलिस ने इस केस में आरोपितों पर शिकंजा कसा होता तो शायद उन्हें फाँसी की सज़ा भी मिल सकती थी।

फाँसी लगाकर मर गई 15 साल की वह ST लड़की जिससे शाहिद अनवर ने किया रेप: घर पर हमला कर पुलिस के पास जाने से रोका, पंचायत ने इज्जत की ₹1.35 लाख लगाई ‘कीमत’

झारखंड के साहिबगंज के संथाल परगना में एक नाबालिग लड़की ने आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि उसके पड़ोसी शाहिद अनवर ने उसे जान से मारने की धमकी देकर उसके साथ दुष्कर्म किया था। इसी के बाद लड़की ने ये कदम उठाया। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बाबू लाल मरांडी ने इस घटना को लेकर ट्वीट किया है। उन्होंने अखबार में छपी खबर का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए झारखंड में अलग-अलग जगहों पर हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए सवाल उठाया है कि आखिर कब तक मुसलमानों के वोटबैंक खिसकने के डर से हेमंत सरकार ऐसी घटनाओं की निंदा करने से बचेगी।

बता दें कि राधानगर थाना क्षेत्र में 15 साल की किशोरी ने 18 अगस्त को अपने दुपट्टे से फाँसी लगाई। 15 अगस्त को उसको शाहिद अनवर ने जान से मारने की धमकी देते हुए उसके साथ दुष्कर्म किया था। जब लड़की के घरवालों को इस संबंध में पता चला तो उन्होंने विरोध किया, शिकायत दर्ज कराने की बात कही, लेकिन आरोपित के परिवार ने उन्हें धमकी दी और फिर 18 अगस्त को पंचायत बैठी। आरोपित से सवाल जवाब हुए। पंचायत में उसने स्वीकार लिया कि उसने लड़की के साथ गंदी हरकत की है। इसके बाद पंचायत ने आरोपित पक्ष पर 1.35 लाख रुपए का जुर्माना लगाया लेकिन लड़की के घरवालों ने ये पैसे लेने से मना कर दिए। बच्ची पंचायत के इस फैसले से बहुत आहत हुई और उसने देर रात फंदे पर लटक अपनी जान दे दी।

सुसाइड की खबर सुन आरोपित परिवार फरार

बच्ची की सुसाइड की खबर सुनने के बाद से आरोपित परिवार फरार है। पुलिस उनकी तलाश में छापेमारी कर रही है। पीड़ित परिवार ने ये भी बताया है कि 16 अगस्त को वो इस पूरे मामले की शिकायत थाने में देने जा रहे थे लेकिन तभी शाहिद का परिवार घर आ गया। उन लोगों ने मामले को रफा-दफा करने को कहा। हालाँकि पीड़ित परिवार ने जब नहीं सुनी तो रिपोर्ट के मुताबिक अलाउद्दीन शेख, तस्लीम शेख, लाखन शेख, आजाद शेख, शहजाद शेख सहित आरोपित के घर के 15-16 सदस्यों ने मिलकर मारपीट की। साथ ही धमकी भी दी।

इसी घटना के बाद 18 अगस्त को पंचायत हुई थी। पंचायत में जब बच्ची ने सुना कि उसके साथ जो हुआ उसकी कीमत लग रही है तो उसने आहत होकर अपनी जान दे दी। सुबह जब घरवाले उठे और कमरे में झांक कर देखा तो बच्ची फंदे पर लटकी थी। अब पुलिस ने इस मामले में मृतिका की माँ की शिकायत पर शाहिद अनवर समेत उसके परिजनों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। जल्द ही आरोपितों को गिरफ्तार करने का आश्वासन भी दिया गया है।

बाबू लाल मरांडी ने उठाए सवाल

बाबू लाल मरांडी ने इस घटना की बाबत अपने पोस्ट में लिखा- “संथाल परगना की एक और बेटी दुष्कर्म की भेंट चढ़ गई। शाहिद अनवर नाम के दरिंदे ने साहिबगंज की 15 वर्षीय नाबालिग युवती से दुष्कर्म किया, जिससे आहत होकर पीड़िता ने अपनी जान दे दी।”

उन्होंने दुमका की घटना, साहिबगंज की में हुई रूह कंपा देने वाली हैवानियत का जिक्र करते हुए कहा, “इस घटना ने फिर से जख्मों को कुरेदने का काम किया है… दिलदार अंसारी, मो. शाहरुख, शाहिद अनवर जैसे कौम विशेष के दरिंदे गरीब जनजातीय लड़कियों को हवस का शिकार बना रहे हैं। बेटियों को कभी पेट्रोल डालकर जिंदा जलाया जा रहा है, तो कभी टुकड़ों में काटकर फेंक दिया जा रहा है।”

उन्होंने कहा, “पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की बजाय मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड मुस्लिम मोर्चा की सरकार वहशी दरिंदों को बचाने के लिए हमेशा आगे आई है। मुसलमानों का वोटबैंक खिसकने के डर से हेमंत सोरेन ने कभी भी खुलकर इन शर्मनाक घटनाओं की निंदा तक नहीं की, आरोपितों पर कठोर कारवाई करना तो दूर की बात है।”

उन्होंने गौर कराया, “ताजा प्रकरण में भी मुख्य आरोपित शाहिद अनवर और उसके परिवार के 15- 16 सदस्यों ने पीड़िता और उसके घरवालों के साथ मारपीट कर बर्बाद करने की धमकी दी, फिर आराम से सभी फरार भी हो गए। एकसाथ आरोपित का पूरा परिवार बिना पुलिस प्रशासन के मिलीभगत और सरकार के संरक्षण के फरार नहीं हो सकता। जनजातीय समाज को समझना होगा कि मुसलमानों की गोद में बैठकर राजनीति करने वाले हेमंत कभी भी जनजातीय बेटियों को न्याय नहीं दिला सकते। जनजातीय समाज को अपनी बेटियों की इज्जत बचाने के लिए खुद आगे आना होगा।”

पाकिस्तान के चीफ जस्टिस का सिर काटने पर 1 करोड़ रुपए, इस्तीफे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में घुसी ‘भीड़’: ईशनिंदा में अहमदिया व्यक्ति को बरी करने से भड़के इस्लामी कट्टरपंथी

पाकिस्तान के चीफ जस्टिस काजी फैज ईसा के सिर पर 1 करोड़ का ईनाम रख दिया गया है, जिन्होंने एक अहमदिया व्यक्ति मुबारकी सानी को ‘राइट टू रिलीजन’ के तहत ‘ईशनिंदा’ के आरोपों से बरी कर दिया था। यही नहीं, अब हजारों कट्टरपंथियों की भीड़ सुप्रीम कोर्ट में घुस आई है और चीफ जस्टिस काजी फैज ईसा के इस्तीफे की माँग कर रही है। उन्हें पीछे ढकेलने के लिए वॉटर कैनन और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा है।

काजी फैज ईसा पिछले साल ही पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस नियुक्त किए गए थे, लेकिन फरवरी 2024 में उनके एक फैसले की वजह से आज उनकी जान पर बन आई है। इस मामले में उन्होंने फरवरी में उसकी सजा पर रोक लगाई थी और फिर 29 मई को मामले की सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया था। उनके साथ सुप्रीम कोर्ट की बेंच में जस्टिस इरफान सआदत खान और जस्टिस नईम अख़्तर अफगान भी शामिल थे।

ताजा विरोध प्रदर्शन 24 जुलाई को शुरू हुए, जब उन्होंने इस मामले में पंजाब सरकार की याचिका स्वीकार कर ली। इसके साथ ही कई इस्लामी संगठनों ने भी याचिकाएँ दायर की और सुप्रीम कोर्ट से अपने फैसले की समीक्षा की माँग की। इन मामलों में सुनवाई 22 अगस्त 2024 को होगी, लेकिन उससे पहले ही हजारों कट्टरपंथियों की भीड़ ने इस्लामाबाद के अति सुरक्षित रेड-जोन को पार कर लिया और सुप्रीम कोर्ट के बाह पड़ाव डालकर प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

इस्लामिक कट्टरपंथियों की नाराजगी की वजह

जानकारी के मुताबिक, 19 अगस्त 2024 को इस्लामिक कट्टरपंथियों के बड़े समूह ने इस्लामाबाद के आत्यधिक सुरक्षित माने जाने वाले रेड-जोन की सुरक्षा को तोड़ दिया और सुप्रीम कोर्ट के गेट पर धावा बोल दिया। इस्लामिक कट्टरपंथियों की माँग है कि चीफ जस्टिस तुरंत इस्तीफा दें। दरअसल, फरवरी के फैसले में जस्टिस ईसा ने अहमदिया व्यक्ति मुबारक अहमद सानी को जमानत दे दी थी, जिस पर साल 2019 में ईशनिंदा का आरोप लगा था। उसने अहमदियों से जुड़े पर्चे बाँटे थे। सानी को पंजाब पवित्र कुरान (प्रिंटिंग एंड रिकॉर्डिंग) (संसोधन) एक्ट, 2021 के तहत सजा सुनाई गई थी।

हालाँकि जस्टिस ईसा की अगुवाई में तीन सदस्यीय बेंच ने कहा कि सानी को उस कानून के तहत सजा दी गई है, जो साल 2021 से पहले थी ही नहीं। इसके बाद कोर्ट ने सानी को जमानत देते हुए उसकी तुरंत रिहाई का आदेश दिया था। इसके तुरंत बाद तहरीक-ए-लब्बैक-पाकिस्तान और अन्य इस्लामिक संगठनों ने काजी फैज ईसा के खिलाफ नफरती अभियान चलाना शुरू कर दिया। फरवरी 2024 में पेशावर में 3 हजार से अधिक इस्लामिक कट्टरपंथियों ने रोड़ ब्लॉक करके ‘कादियानों को मौत’ के नारे लगाए। इस प्रदर्शन के बाद सुप्रीम कोर्ट को बाकायदा बयान जारी कर अपने फैसले पर सफाई देनी पड़ी थी।

चीफ जस्टिस का सर काटने पर 1 करोड़ का ईनाम

पाकिस्तान के कट्टरपंथी इस्लामी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) ने पाकिस्तान के चीफ जस्टिस ईसा के सिर पर 1 करोड़ का ईनाम घोषित किया है। टीएलपी के दूसरे नंबर के नेता पीर जहीरुल हसन शाह ने ये ईनाम घोषित किया। उसने अपने बयान में कहा, “टीएलपी को छोड़िए, एक मोमिन और प्रोफेट मोहम्मद का गुलाम होने के तौर पर, मैं अपनी हैसियत से घोषणा करता हूँ कि जो फैज ईसा का सिर कलम करेगा, उसे मैं 1 करोड़ रुपए दूँगा।” उसने अहमदियों को मरजई भी कहा।

इस बीच, सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने शाह की भड़काऊ टिप्पणी का एक वीडियो साझा किया और कहा, “पाकिस्तान राज्य में इस तरह के बयानों के लिए कोई जगह नहीं है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। काजी साहब ने किसी समूह या समूह के पक्ष में कोई फैसला नहीं दिया। जिस आधार पर यह घृणित कथा प्रचारित की जा रही है, हम इस तरह के बयानों की कड़ी निंदा करते हैं और इसका पुरजोर खंडन करते हैं, ऐसी मानसिकता पाकिस्तान को गंभीर नुकसान पहुँचा रही है। इस झूठे नरेटिव के पीछे राजनीतिक मकसद हैं।”

गौरतलब है कि पाकिस्तान में अहमदिया समुदाय के लोगों को 1974 में राज्य द्वारा औपचारिक रूप से गैर-मुस्लिम घोषित किए जाने के बाद से ही गंभीर उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है और उनके खिलाफ नियमित रूप से ईशनिंदा कानून का इस्तेमाल किया जाता है। यहाँ अहमदिया समुदाय को काफिर माना जाता है। ये विडंबना ही है कि जिस अहमदिया समुदाय ने पाकिस्तान के निर्माण में सबसे ज्यादा अहम भूमिका निभाई थी, आज वही पाकिस्तान में गैर-मुस्लिम हो गए हैं। वैसे, इस्लामिक कट्टरपंथियों के दबाव की वजह से सुप्रीम कोर्ट बैकफुट पर दिख रहा है। ऐसे में इस बात की संभावना कहीं अधिक है कि सुप्रीम कोर्ट अपने फैसले को बदल दे और आरोपित अहमदिया व्यक्ति को फिर से जेल में डाल दे।

ये समाचार मूल रूप से अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित किया गया है। मूल समाचार को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

पाकिस्तान में बैन, अब ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी का चुनाव लड़ेंगे इमरान खान: जेल से ही चांसलर बनने के लिए दिया आवेदन, 800 साल में पहली बार ऑनलाइन मतदान

पाकिस्तान की जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में चांसलर बनने के लिए आवेदन दे दिया है। ये जानकारी इमरान खान के सलाहकार सैयद जुल्फिकार बुखारी ने सोशल मीडिया के जरिए दी है। 1972 में दर्शनशास्त्र, राजनीति और अर्थशास्त्र की पढ़ाई ऑक्सफॉर्ड यूनिवर्सिटी से करने वाले इमरान खान को लेकर बुखारी ने पुष्टि की कि वह यूनिवर्सिटी के चांसलर पद का चुनाव लड़ने को तैयार हो गए हैं।

बुखारी ने बताया कि इमरान खान ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी चांसलर इलेक्शन 2024 का आवेदन फॉर्म जमा कर दिया है। अब चुनाव 28 अक्टूबर को होने हैं। बुखारी ने बताया, “अगर इमरान खान चांसलर बनते हैं, तो वह एशियाई मूल के पहले व्यक्ति होंगे। यह सिर्फ पाकिस्तान के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे एशिया और बाकी दुनिया के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।”

इमरान खान की पार्टी पीटीआई ने भी इस संबंध में ट्वीट किया है। उन्होंने बताया, “पाकिस्तान के राष्ट्रीय हीरो और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान, पाकिस्तान की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी पीटीआई के संस्थापक और अध्यक्ष, एक क्रिकेट लीजेंड, एक परोपकारी और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र, जेल में रहते हुए ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के चांसलर पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं।

मालूम हो कि ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के 800 सालों के इतिहास में पहली बार चांसलर चुनाव के लिए ऑनलाइन मतदान होगा। इसके लिए आवेदक को 18 अगस्त तक रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत थी। अब अक्टूबर की शुरुआत में उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की जाएगी।

रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि इस पद के लिए पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, थेरेसा मे और बोरिस जॉनसन ने भी नामांकन किया है। इसके अलावा कई महिला आवेदन भी इस लिस्ट में शामिल हैं। अगर उनमें से भी कोई चांसलर पद के लिए निर्वाचित होता है तो पहली बार कोई ऑक्सफॉर्ड यूनिवर्सिटी में महिला चांसलर बनेगा।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले ऑक्सफॉर्ड यूनिवर्सिटी के चांसलर लॉर्ड क्रिस पैटन थे। उन्होंने इसी साल फरवरी में अपने पद से इस्तीफे का ऐलान किया था। उन्होंने चांसलर पद की कमान 2003 में संभाली थी। इसके बाद 2024 यानी 21 साल वो इस पद पर रहे और हाल में उन्होंने अपना इस्तीफा दिया। वो इससे पहले हांगकांग के 28वें और अंतिम ब्रिटिश गवर्नर के तौर पर भी काम कर चुके थे

त्रिपुरा में घुसते 7 बांग्लादेशी पकड़े गए, अमेरिकी डॉलर भी मिले: एक अन्य अभियान में 5 भारतीय मददगार समेत 18 घुसपैठिए गिरफ्तार

त्रिपुरा के रास्ते भारत में बांग्लादेशियों की अवैध घुसपैठ में तेजी आई है। त्रिपुरा पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने शनिवार से सोमवार तक 18 बांग्लादेशी घुसपैठियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही इनकी मदद कर रहे 5 भारतीयों को भी पकड़ा गया है। इस बीच, एक ग्रुप के पास से 1.5 लाख टका और 300 अमेरिकी डॉलर भी रिकवर हुए हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बीएसएफ ने हरनाखोला बॉर्डर ऑउटपोस्ट इलाके से शनिवार (19 अगस्त 2024) की रात 7 बांग्लादेशी नागरिकों को सीमा पार करते समय गिरफ्तार किया है। इनमें से 2 लोग बांग्लादेश के मौलवीबाजार जिले के हैं, तो पाँच लोग ब्राह्मणबरिया के हैं, जिनमें एक महिला और एक बच्चा भी शामिल है। इनके पास से 1.5 लाख टका बरामद हुई है, तो 300 डॉलर भी इनके कब्जे से बरामद हुआ है। इन्हें पश्चिम त्रिपुरा जिले की सिधाई पुलिस के हवाले कर दिया गया।

शनिवार-रविवार को 18 घुसपैठिए, 5 भारतीय सहायक गिरफ्तार

वहीं, अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, त्रिपुरा में शनिवार और रविवार को पुलिस ने व्यापक अभियान चलाया। त्रिपुरा पुलिस ने सूचना के आधार पर छापेमारी करते हुए 3 अलग-अलग जगहों से 18 बांग्लादेशियों और उनके सहायक 5 भारतीयों को भी गिरफ्तार किया है। सहायक महानिरीक्षक (कानून एवं व्यवस्था) अनंत दास ने कहा, “पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि त्रिपुरा के गुमती जिले के लामप्रपारा में बांग्लादेशी नागरिकों का एक दल मौजूद है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने रविवार को छापेमारी शुरू की और आठ व्यक्तियों को गिरफ्तार किया।”

इसके अलावा शनिवार (17 अगस्त 2024) को भी बांग्लादेश के सात नागरिकों और उनकी मदद करने वाले पाँच भारतीय नागरिकों को पश्चिमी त्रिपुरा जिले के सिधई क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया था, तो एक अलग अभियान के दौरान पश्चिम त्रिपुरा के एमबीबी हवाई अड्डा क्षेत्र से सोमवार को तीन बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा गया।

बता दें कि बांग्लादेश से सटी सीटा पर 4096 किमी इलाके की रक्षा का जिम्मा बीएसएफ पर है। इसमें असम, मेघायल, त्रिपुरा, मिजोरम और बंगाल का हिस्सा भी शामिल है। पूर्वोत्तर के कई संगठनों ने भी बांग्लादेश से अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए कदम उठाने की माँग को लेकर केंद्र से गुहार लगाई है। उनका कहना है कि अवैध प्रवासन ने जनसांख्यिकीय गड़बड़ी पैदा की है और पूर्वोत्तर में स्वदेशी समुदायों की पहचान और संस्कृति के लिए खतरा पैदा किया है।

गौरतलब है कि त्रिपुरा के रास्ते भारत में बांग्लादेशियों के घुसपैठ की खबरें आम हैं। अगरतला रेलवे स्टेशन के सहारे लगातार अवैध तरीके से बांग्लादेशी और रोहिंग्या लगातार देश भर में जा रहे हैं। पिछले डेढ़ साल में ही त्रिपुरा में घुसपैठ करने वाले हजारों बांग्लादेशी और रोहिंग्या को सुरक्षाबलों ने पकड़ा है। बांग्लादेशी घुसपैठिए अगर से ट्रेन के सहारे देश के अन्य हिस्सों में घुस जाते हैं। वो सुरक्षा बलों से बचने के लिए सेकंड क्लास के डिब्बे में सफर करते हैं, इस टिकट के लिए कोई पहचान पत्र नहीं दिखाना होता और फिर वो आगे के सफर पर निकल जाते हैं। हालाँकि त्रिपुरा में लगातार सख्ती की वजह से अब तक हजारों घुसपैठियों को पकड़ा जा चुका है।

इंटरनेट, स्कूल-कॉलेज… सब बंद, फिर भी देवराज की अंतिम यात्रा में उमड़ पड़ा उदयपुर: कड़ी सुरक्षा के बीच अंतिम संस्कार, मुस्लिम छात्र ने मार दिया था चाकू

राजस्थान के उदयपुर के सरकारी स्कूल में हुई चाकूबाजी में हिंदू छात्र की सोमवार (19 अगस्त 2024) को मौत हो गई। उसका अंतिम संस्कार उसके पिता और चचेरे भाई ने किया। इस दौरान शव य़ात्रा में जमा हुई भीड़ नारेबाजी करती नजर आई। स्थिति संभालने के लिए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात था।

16 अगस्त 2024 को हुई घटना के बाद छात्र एमबी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन 19 अगस्त को करीबन 3 बजे उसकी तबीयत बिगड़ गई और बाद में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। छात्र की मौत के बाद 24 घंटे तक पूरे उदयपुर शहर, बेदला, बड़गाँव, बलीचा, देबारी, एकलिंगपुरा, कानपुर, ढीकली और बुवाणा में इंटरनेट सेवा निलंबित कर दी गई हैं। बताया जा रहा है कि नेटबंदी इन क्षेत्रों में आज भी रहेगी।

मृतक के परिजनों को आश्वासन दिया गया है कि मामले में एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई होगी। इसके अलावा मृतक के परिजनों को 51 लाख रुपए का मुआवाजा और नौकरी देने की बात हुई है। सामने आए विजुअल्स में इलाके में भारी पुलिस बल को तैनात देखा जा सकता है।

क्या हुआ 19 अगस्त को

बताया जा रहा है कि छात्र की मौत से कुछ देर पहले ही उसकी बहन ने उसके हाथ पर राखी बाँधी थी मगर उसके बाद यानी 3 बजे के आसपास छात्र की तबीयत बिगड़ने लगी। 5:30 बजे बच्चे की मौत की खबर आई। 6:00 बजे तक अस्पताल के इमरजेंसी गेट के बार विभिन्न संगठनों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया। 7:00 बजे के आसपास परिजनों की माँग पर सहमति बनी और फिर अंतिम संस्कार हुआ।

ड्रोन से रखी गई अंतिम संस्कारी की निगरानी

छात्र की अंतिम यात्रा में उदयपुर रेंज आईजी अजयपाल लांबा समेत कई बड़े अधिकारी मौजूद थे। प्रशासन ड्रोन से अंतिम संस्कार के दौरान निगरानी रख रहा था। इस घटना के बाद स्कूल-कॉलेजों में सुरक्षा लिहाज से छुट्टी रखी गई है। वहीं समाज के सभी नेताओं ने शांति की अपील भी की है। इस पूरे मामले में आरोपित को पकड़ने के बाद बाल सुधार गृह भेजा गया है। वहीं उसके घर पर बुलडोजर कार्रवाई हुई है।

दावा- मुस्लिम छात्र ने किया था चाकू से हमला

गौरतलब है कि उदयपुर शहर के भटियाणी चौहट्टा में शुक्रवार (16 अगस्त 2024) को सुबह एक सरकारी स्कूल के बाहर एक छात्र ने देवराज नाम के छात्र को चाकू मारकर घायल कर दिया था। बाद में जानकारी आई कि हमला करने वाला छात्र मुस्लिम समुदाय का था। हमले की जानकारी मिलते ही स्कूल के शिक्षक घायल हिंदू छात्र को लेकर महाराणा भूपाल सिंह हॉस्पिटल पहुँचे। वहीं हिंदू संगठन भी इस खबर की जानकारी होते ही सड़कों पर आ गए। इस दौरान जमकर नारेबाजी हुई। देखते ही देखते लोगों में आक्रोश बढ़ता गया और हिंदू कार्यकर्ता बाजार पहुँच गए। इसके बाद लोगों ने घटना के विरोध में बाजार बंद करा दिया और बाद में आरोपित को पकड़कर कार्रवाई हुई।

मध्य प्रदेश में रेलवे ट्रैक पर रखे थे 15 फीट लंबे 3 सरिए, टक्कर होते ही ड्राइवर ने लगाए इमरजेंसी ब्रेक: इसी तरह कानपुर में पलटी थी साबरमती एक्सप्रेस, IB कर रही है जाँच

मध्य प्रदेश में ट्रेन को बेपटरी कर बड़े हादसे की साजिश का मामला सामने आया है। यहाँ रेलवे ट्रैक पर 15 फिट के 3 सरिए रखे गए थे, जिनसे टकराकर ट्रेन डिरेल होकर ट्रैक से उतर सकती थी। ऐसा होने पर बड़ा हादसा हो सकता था। हालाँकि ट्रेन सरिया के ऊपर से गुजर गई, लेकिन धीमी गति में होने की वजह से कोई हादसा नहीं हुआ। अगर ट्रेन पटरी से उतर जाती, तो जन-धन की बड़ी हानि हो सकती थी।

आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हादसे को अंजाम देने की कोशिश जबलपुर और नागपुर डिवीजन के बीच स्थित कछपुरा स्टेशन के पास हुई। यहाँ रविवार (18 अगस्त 2024) को नैनपुर-जबलपुर ट्रेन को बेपटरी करने की साजिश रची गई थी। इस ट्रेन के सामने 15 फिट की 3 सरिया ट्रैक पर रखी हुई थी। हालाँकि ट्रेन की स्पीड काफी कम थी, जिसकी वजह से बेपटरी होने की जैसी दुर्घटना नहीं हुई।

कानपुर के बाद निशाने पर एमपी?

बता दें कि कानपुर में शनिवार (17 अगस्त) की रात पटना से अहमदाबाद जा रही साबरमती एक्सप्रेस को पलटाने की साजिश की गई थी। साबरमती एक्सप्रेस के नीचे करीब 2.30 बजे गोविंदपुरी और भीमसेन स्टेशन के बीच रेलवे की ही पटरी का टुकड़ा रख दिया गया था। पटरी का ये टुकड़ा करीब 3 फिट लंबा था, जिसकी वजह से इंजन ही पटरी से उतर गई थी। रेल की पटरी से टक्कर लगते ही तेज धमाका हुआ था, जिसके बाद ड्राइवर ने इमरजेंसी ब्रेक लगा दिए थे और ट्रेन बेपटरी हो गई थी। 20 डिब्बे भी पटरी से उतर गए थे। इस हादसे की जानकारी मिलते ही आईबी ने जाँच शुरू कर दी थी, तो एटीएस भी मामले की जाँच कर रही है।

ठीक इसी तर्ज पर एक दिन बाद मध्य प्रदेश में भी ऐसी ही साजिश रची गई थी, जिसमें ट्रेन के सामने 15 फिट की 3 छड़ें रखी गई थी। हालाँकि ट्रेन की रफ्तार काफी कम थी, इसलिए कोई नुकसान नहीं पहुँचा और न ही ट्रेन पटरी से उतरी। वरना बड़ा हादसा हो सकता था।

जिस RG Kar अस्पताल में रेप के बाद डॉक्टर की हुई हत्या, उसमें कितने राज दफन? ममता सरकार ने SIT का किया गठन, BJP बोली- ये संदीप घोष को बचाने की चाल

पश्चिम बंगाल के आर जी कर अस्पताल महिला डॉक्टर की रेप और हत्या के बाद अब वित्तीय गड़बड़ी से जुड़े मामले में सुर्खियों में है। पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष के खिलाफ मिली शिकायतों के बाद ममता सरकार ने निर्णय लिया है कि वो अस्पताल में साल 2021 से लेकर अब तक हुई वित्तीय अनियमतताओं की जाँच कराएँगे। इस क्रम में उन्होंने एक विशेष जाँच दल गठित करने का ऐलान किया, जिसके बाद बीच भाजपा नेता अमित मालवीय ने सवाल उठाए कि पुलिस कब से वित्तीय गड़बड़ की जाँच करने लगी। उन्होंने अंदेशा जताया कि संभव है ये सब सिर्फ बचाने के लिए किया जा रहा हो।

आधिकारिक बयान के अनुसार, बताया गया कि इस एसआईटी को प्रणव कुमार द्वारा हेड किया जाएगा जबकि मुर्शिदाबाद रेंज के डीआईजी वकार रजा, सीआईडी ​​के डीआईजी सोमा दास मित्रा और कोलकाता पुलिस की डीसीपी इंदिरा मुखर्जी इस एसआईटी का हिस्सा होंगे। पैनल को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है।

इसी जानकारी के सामने आने के बाद बंगाल भाजपा के सह प्रभारी अमित मालवीय ने कहा है- “अब, पश्चिम बंगाल सरकार ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के बदनाम प्रिंसिपल डॉ. संदीप घोष द्वारा वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जाँच के लिए एक एसआईटी का गठन किया है। 4 आईपीएस अधिकारी एसआईटी का हिस्सा हैं। पुलिस अधिकारी वित्तीय अपराधों की जाँच कैसे कर सकती है।”

आगे वह लिखते हैं- “यह कुछ और नहीं बल्कि ममता बनर्जी की घोष को बचाने की चाल है। कोलकाता पुलिस संदीप घोष को समय रहते गिरफ्तार कर लेगी, ताकि सीबीआई उन्हें हिरासत में न ले सके… जब तक ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं दे देती तब तक महिला डॉक्टर के रेप और मर्डर की निष्पक्ष जाँच हो ही नहीं सकती। उन्हें इस्तीफा देना ही देना चाहिए।”

गौरतलब है कि बंगाल सरकार द्वारा एसआईटी का गठन ऐसे समय में किया गया है जब आर जीकर मामले की जाँच के दौरान केंद्रीय जाँच ब्यूरो पिछले चार दिनों से अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष से पूछताछ कर रही है। इसी घटनाक्रम को देखते हुए माकपा के राज्यसभा सदस्य और वरिष्ठ अधिवक्ता विकास रंजन भट्टाचार्य ने दावा किया कि एसआईटी का गठन इसलिए किया गया है क्योंकि पिछले कुछ दिनों से पूछताछ के दौरान घोष ने सीबीआई के सामने कई राज उजागर किए होंगे।

2.5 किमी तक स्कूटी सवार युवती का पीछा, धक्का मार गिराने की कोशिश… जिसने भी रोका उसे धमकाया: यूसुफ-फिरोज गिरफ्तार, Video वायरल

आगरा में रक्षा बंधन से ठीक पहले की शाम को यूसुफ और फिरोज ने एक स्कूटी सवार युवती का करीब ढ़ाई किमी तक पीछा किया। वो उसे परेशान करते रहे। यहाँ तक कि स्कूटी में पैर मारकर उन्हें गिराने का भी प्रयास किया। हालाँकि बाद में आगरा पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला रविवार का है। जब शाम के समय विक्टोरिया पार्क से बेलनगंज की ओर जा रही युवती की स्कूटी का पेट्रोल खत्म हो गया। उसने मदद माँगी तो बाइक सवार तीन युवकों ने अपने पैर से स्कूटी को धक्का देकर पेट्रोल पंप तक पहुँचाने में मदद करने लगे। इस बीच, बाइक पर सवार होकर 2 युवक वहाँ पहुँचे और चलती बाइक से ही फब्तियाँ कसने लगे।

युवती की मदद करने वाले युवकों ने विरोध की कोशिश की, तो दोनों दबंगों ने उन्हें धमका दिया। और फिर ट्रैफिक पुलिस के सिपाही राजीव कुमार ने उन्हें रोकने की कोशिश की, तो फिरोज और यूसुफ उनसे भी बहस करने लगे। इसके बाद कॉन्स्ट्रेबल राजीव कुमार ने अपनी बाइक बढ़ाकर आगे पुलिस चौकी को सूचित कर दिया, जिसने दोनों आरोपियों को पकड़ लिया।

फिलहाल, आगरा की छत्ता पुलिस ने एंटी रोमिया स्क्वॉड की तरफ से दर्ज कराए गए मामले के आधार पर यूसुफ और फिरोज को जेल भेज दिया है, क्योंकि पीड़ित युवती ने केस दर्ज कराने से इनकार कर दिया था।

दरअसल, कई मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा था कि पाँचों युवकों ने युवती से छेड़छाड़ की, लेकिन इसमें सच ये है कि बाइक सवार 3 युवक बाईं तरफ से लड़की की मदद के लिए उसकी स्कूटी में धक्का लगा रहे थे, ताकि वो पेट्रोल पंप तक पहुँच जाए, तो बाइक सवार दाईं तरफ से चल रहे 2 युवक छेड़छाड़ कर रहे थे।

इस मामले में छत्ता थाना एसीपी द्वारा वीडियो बाइट भी जारी की गई, जिसमें विस्तार से जानकारी दी गई है। पुलिस ने बताया है कि आरोपित दोनों युवकों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया गया है और मामले की जाँच की जा रही है।

‘दरगाह के मुफ़्ती जावेद ने भारतीय मुद्रा को पैरों से कुचला’: वीडियो वायरल होने के बाद रामपुर पुलिस में शिकायत दर्ज, प्रशासन ने शुरू की जाँच

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में भारतीय मुद्रा के अपमान का मामला सामने आया है। यह अपमान जिले की एक दरगाह पर हुआ है जिसका आरोप यहाँ के सज्जादनशीन पर लगा है। बताया जा रहा है कि आरोपित ने उर्स के मौके पर भारतीय मुद्रा को अपने पैरों तले कुचला है। एक घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। शुक्रवार (16 अगस्त, 2024) को राष्ट्रीय शिवशक्ति सेना ने इस वीडियो के आधार पर प्रशासन से आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

पुलिस ने इस मामले का संज्ञान लिया है। एसपी रामपुर ने इस घटना पर केस दर्ज कर के जाँच कराए जाने का आश्वासन दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला रामपुर जिले के थाना क्षेत्र मिलक का है। शुक्रवार को ‘राष्ट्रीय शिवशक्ति सेना’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय गुप्ता पुलिस अधीक्षक रामपुर के कार्यालय पर पहुँचे। उन्होंने एसपी को एक शिकायत पत्र दिया। संजय गुप्ता ने बताया कि भारतीय मुद्रा को पैरों तले रौंदना देशद्रोही और जहालत भरा कृत्य है। संजय गुप्ता के साथ मौजूद एक वकील ने बताया कि मुद्रा को पैरों से मुफ़्ती जावेद ने रौंदा है जिसकी करतूत वायरल वीडियो में साफ देखी जा सकती है। वकील ने इस हरकत से हिन्दू समाज में गुस्सा बताया है।

शिकायतकर्ताओं ने बताया कि पुलिस अधीक्षक रामपुर ने उनकी शिकायत का संज्ञान ले लिया है और मामले की जाँच के साथ जरूरी कार्रवाई के निर्देश भी दे दिए हैं। पुलिस अधीक्षक रामपुर IPS विद्यासागर मिश्रा ने इस मामले में मीडिया से बताया कि उन्होंने वायरल वीडियो का संज्ञान लिया है। उन्होंने बताया कि मिलक थाने के SHO को उचित धाराओं में FIR दर्ज कर के जाँच और जरूरी कार्रवाई के निर्देश दे दिए गए हैं। बकौल पुलिस अधीक्षक पूरे वीडियो की गहराई से पड़ताल करवाई जाएगी और भारतीय मुद्रा के अपमान में शामिल प्रत्येक आरोपित पर नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

क्या है वायरल वीडियो में

वायरल हो रहा वीडियो मिलक थानाक्षेत्र में आने वाली एक बड़ी दरगाह का है। इसे सालाना उर्स के दौरान बनाया गया बताया जा रहा है। उर्स में कई स्थानों से लोग दरगाह पर जमा होते हैं। बीच में एक जगह खाली है जिसमें आसपास इस्लामी परिधान में मौजूद तमाम लोग नोट फेंक रहे हैं। नोट फेंकने के दौरान कुछ लोग उछल कूद कर रहे हैं तो कुछ लोगों को नाचते देखा जा सकता है। बीच में मुस्लिम ड्रेस में मौजूद एक व्यक्ति फेंके जा रहे उन नोटों को कुचल रहा है।

बैकग्राउंड म्यूजिक में कव्वाली जैसी आवाज आ रही है। इसमें ‘हम दर पे तुम्हारे आए हैं’ भी बोला जा रहा है। बताया जा रहा है कि नोटों को कुचल रहा व्यक्ति दरगाह का सज्जादनशीन मुफ़्ती जावेद है। हालाँकि ये वीडियो कब और कहाँ का है इसकी अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। ऑपइंडिया वायरल हो रहे इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता है। प्रशासन की तरफ से इस मामले में आगे की गई कार्रवाई की जानकारी फ़िलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है। प्रशासन का पक्ष आने पर उसे खबर में अपडेट किया जाएगा।