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अनुपम कुमार सिंह

भारत की सनातन परंपरा के पुनर्जागरण के अभियान में 'गिलहरी योगदान' दे रहा एक छोटा सा सिपाही, जिसे भारतीय इतिहास, संस्कृति, राजनीति और सिनेमा की समझ है। पढ़ाई कम्प्यूटर साइंस से हुई, लेकिन यात्रा मीडिया की चल रही है। अपने लेखों के जरिए समसामयिक विषयों के विश्लेषण के साथ-साथ वो चीजें आपके समक्ष लाने का प्रयास करता हूँ, जिन पर मुख्यधारा की मीडिया का एक बड़ा वर्ग पर्दा डालने की कोशिश में लगा रहता है।

भगवाधारी महंत के कंधे पर देश के सबसे बड़े नेता का हाथ: लखनऊ राजभवन के गलियारों से निकला सन्देश, जिसने ध्वस्त किए कई नैरेटिव

'पीएम मोदी ने योगी आदित्यनाथ को पैदल कर दिया' और जन्मदिन की बधाई नहीं दी' वाला नैरेटिव अब ध्वस्त हो गया है। देश के सबसे बड़े नेता का हाथ भगवाधारी महंत के कंधे पर है। लखनऊ राजभवन के गलियारों से निकला सन्देश क्या कहता है?

सेक्युलर मुखौटे वाला खालिस्तानी आंदोलन, जहाँ भीड़तंत्र के सामने बेबस रही पुलिस: ‘ठेकेदारों’ से निपटने और कम्युनिकेशन पर सोचे केंद्र

कार्यकर्ताओं को भरोसे में नहीं लिया या संचार व्यवस्था कमजोर रही? भीड़तंत्र वाले 'ठेकेदारों' के हिंसक आंदोलन के बाद क्या करे केंद्र सरकार? आगे इस तरह की बलैकमेलिंग से निपटने का रास्ता क्या हो?

वो कार्टूनिस्ट थे, ये कार्टून डालने पर पीटते हैं: ‘नीच मानुष’ के साथ सत्ता भोग रहे उद्धव, पिता को जेल भेजने वाले को बना...

बाल ठाकरे कार्टूनिस्ट थे। अब शिवसेना कार्टून फॉरवर्ड करने पर पिटाई करती है। जिस छगन भुजबल ने शिवसेना तोड़ी थी, वो अब मंत्री हैं। सब कुछ बदल गया।

जनजातीय गौरव दिवस: जानिए बिरसा मुंडा सहित उन 12 नायकों की गाथा, जिन्होंने अंग्रेजों और इस्लामी आक्रांताओं के दाँत खट्टे किए

यहाँ हम बिरसा मुंडा के अलावा उन 11 जनजातीय नायकों की बात करते हैं, जिन्हें पीएम मोदी के 'जनजातीय गौरव दिवस' कार्यक्रम में याद किया जाएगा।

पेरियार ने मनाया था शोक, आंबेडकर के लिए बाकी थी ‘सच्ची आज़ादी’, लेफ्ट ने कहा था ‘झूठी आज़ादी’: फिर कंगना पर बवाल क्यों?

आंबेडकर ने बताया था 'ट्रू सेन्स' में आज़ादी कब मिलेगी। पेरियार ने 15 अगस्त, 1947 को शोक मनाया था। वामपंथियों ने कहा था - 'ये आज़ादी झूठी है।'

लाल झंडा और हँसिया छाप ही आदिवासियों का रहनुमा, माँ लक्ष्मी की तस्वीर वाला गुंडा: हिंदीभाषी निर्माता की ‘जय भीम’ में हिंदी पर थप्पड़

'जय भीम' में सिर्फ हँसिया छाप वाले ही वनवासियों के हक़ की आवाज़ उठाते दिखते हैं। मुख्य विलेन के घर में माँ लक्ष्मी की तस्वीर होती है। हिंदी बोलने पर थप्पड़ पड़ते हैं।

बेटा बलात्कारी निकल गया तो श्रीकृष्ण ने घर में घुस किया उसका वध: दिवाली की एक कथा ये भी

मॉं-बाप अच्छे हों तो जरूरी नहीं कि संतान भी सद्गुणी हो। वरना भूमि पुत्र भौमासुर अत्याचारी कैसे होता। बेटा ही जब स्त्रियों का सम्मान नहीं करे, तो क्या करना चाहिए? हिंदू धर्म ग्रंथ बताते हैं इसका भी रास्ता।

बिहार ने फिर बताया लालू का लालटेन नहीं विकल्प: गंगा के दोनों तरफ RJD की दुर्गति, कॉन्ग्रेस-कन्हैया पर भारी चिराग

मुंगेर के तारापुर और दरभंगा के कुशेश्वर स्थान उपचुनाव में जदयू की जीत क्या कहती है? राजद अब भी नकारात्मकता का पर्याय। कॉन्ग्रेस-कन्हैया फेल।