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आशीष नौटियाल

पहाड़ी By Birth, PUN-डित By choice

हिन्दुओं का अपहरण और लव जिहाद: बंगाल बन रहा है पाकिस्तान की सस्ती फोटोकॉपी

नाबालिग लड़की ने बताया कि दोनों बहनों को शादी करने के लिए धमकाया गया था। साथ ही उनसे कहा गया था कि अगर शादी नहीं की तो माता-पिता समेत परिवार के सदस्यों को मार देंगे और दोनों के चेहरे पर तेजाब फेंक देंगे। इससे दोनों घबरा गईं थीं। यह निकाह कोलकाता के बुर्रा बाजार इलाके की ‘बड़ी मस्जिद’ में कराया गया।

4 बीघा में खड़ी फसल कटना जरुरी है, ताकि मायावती भर सके हेलीकॉप्टर से उतरकर हुँकार

फसल को इसलिए कटवाया जा रहा है ताकि मायावती का विमान आसमान से वहाँ पर उतरे और उनका चुनावी भाषण जोर-शोर से वोटर्स को सुनाया जा सके। चिंता की बात यह भी है कि अभी फ़सल पकने का समय नहीं है, ऐसे में यह फ़सल मवेशियों के चारे के अलावा किसी काम में नहीं आ सकेगा।

सोनिया गाँधी जी आपका यह वीडियो किस सन्दर्भ में था? जस्ट किडिंग, हमें तो पता ही है!

खानदान विशेष के एहसानों और पुरस्कारों के बोझ तले दबा यह मीडिया गिरोह 2014 में सवाल नहीं पूछ पाया था, शायद तब तक कभी गाँधी परिवार ने इसे एहसास भी नहीं होने दिया था कि मीडिया का काम सवाल पूछना भी हो सकता है। सवाल पूछ पाने की यह वैचारिक क्रांति इस मीडिया गिरोह में 2014 के बाद ही देखने को मिली है।

Hey न्यूयॉर्क टाइम्स f**k you, फिर से!

भारत ने अंतरिक्ष में आज एक और कामयाबी का परचम लहराया है और मिशन शक्ति की सफलता के साथ अमेरिका, चीन, रूस के बाद भारत दुनिया का चौथा सबसे शक्तिशाली देश बन गया है।

फ़्री-लान्स विरोधकर्मी से ऑन-डिमांड-एथीस्ट बनने वाली वामपंथन से नाराज हुए मार्क्स चचा

JNU वामपंथी की हालिया गतिविधियों के तार अगर एक सिरे से जोड़ते हुए देखा जाए, तो पता चलता है कि ये कोई विद्यार्थी या नेता या समाजवादी नहीं, बल्कि सिर्फ और सिर्फ एक शहरों में रहने वाला अनपढ़, कूप-मण्डूक, गतानुगतिक है, जिसे किसी भी हाल में क्रांति की तलाश थी और समय आने पर उसने अपनी क्रांति को परिभाषित भी कर डाला है, जिसका उदाहरण ऑन डिमांड आस्तिकता वाली शेहला राशिद है।

राजस्थान: राजसमंद सीट से रमेंद्र सिंह राठौड़ हो सकते हैं भाजपा के उम्मीदवार

किसानों और मजदूर संगठनों पर मजबूत पकड़ रमेंद्र सिंह राठौड़ के पक्ष में नजर आती दिख रही है। किसान और मजदूर संघर्ष समिति द्वारा चलाए गए आंदोलनों में भी राठौड़ सक्रिय भूमिका में रहे। इस कारण करीब 50,000 मजदूर और डेढ़ लाख किसानों को मिलाकर लगभग 2 लाख मतदाताओं तक इनकी सीधी पकड़ के कारण विरोधियों के लिए इनसे जीत पाना आसान नहीं होगा।

राबर्ट ठठेरा की ‘लाल डायरी’ लगी ऑपइंडिया तीखी मिर्ची सेल के हाथ, गंभीर खुलासे

जब हमने इस लाल डायरी की सत्यता प्रमाणित करने के लिए ‘सॉल्ट न्यूज़’ से सम्पर्क किया, तो उन्होंने डायरी से उठने वाली सौंधी-सौंधी महक से ही पहचान कर इसके ‘वायरल’ होने की आशंका के चलते इस का फैक्ट चेक किया।

वो कॉन्ग्रेसी, जिसने इंदिरा को सिखाया था ‘No मने No’ का मतलब और नेहरू को संसद में दिया था करारा जवाब

अपने समय में इंदिरा गाँधी का रुतबा ऐसा थी कि बड़े-बड़े नेता भी उनसे आँख मिलाकर बात करने में घबराते थे। लेकिन भक्तदर्शन पहाड़ी थे, अपनी 'चौड़ाई' में रहते थे। 71 लोकसभा चुनाव में इंदिरा को जीत चाहिए थी लेकिन अपने आदर्शों के कारण भक्तदर्शन ने अपने प्रधानमंत्री को दो टूक शब्दों में कहा...