Wednesday, September 30, 2020
Home राजनीति वो कॉन्ग्रेसी, जिसने इंदिरा को सिखाया था 'No मने No' का मतलब और नेहरू...

वो कॉन्ग्रेसी, जिसने इंदिरा को सिखाया था ‘No मने No’ का मतलब और नेहरू को संसद में दिया था करारा जवाब

जब-जब सियासत में उसूलों की बातें होती हैं, तो लगातार 4 बार लोकसभा चुनाव जीतने के बावजूद मात्र 59 की उम्र में राजनीति से संन्यास लेने वाले कॉन्ग्रेस नेता भक्तदर्शन का जिक्र करना आवश्यक हो जाता है।

भाजपा नेता मनोहर पर्रिकर के निधन के साथ ही भारतीय राजनीति में मौजूद उसूलों, सेवा भाव और कर्तव्यपरायणता पर एक बार फिर जमकर चर्चा हुई। वास्तव में आज के समय में ऐसा कोई व्यक्ति विरल ही मिलता है, जिसे अपने कार्य के प्रति ईमानदारी और समर्पण के कारण विपक्ष भी सम्मान देता हो। वर्तमान राजनीति में उत्तराखंड के डॉ. भक्तदर्शन एक मिसाल हैं और जब-जब सियासत में उसूलों की बातें होती हैं, तो लगातार 4 बार लोकसभा चुनाव जीतने के बावजूद मात्र 59 की उम्र में राजनीति से संन्यास लेने वाले कॉन्ग्रेस नेता भक्तदर्शन का जिक्र करना आवश्यक हो जाता है।

राजनीति आरोप-प्रत्यारोप का पर्याय बन चुकी है, और दुर्भाग्यवश हमने हाल ही में वो काला दिन भी देखा, जब अजातशत्रु कहे जाने वाले भारतरत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी पर सत्ता की कुंठा में विवेक शून्य हो चुकी कॉन्ग्रेस पार्टी ने जमकर आरोप लगाए और इस काम के लिए उन्होंने जो दिन चुना, वो था अटल जी के निर्वाण का!

डॉ. भक्तदर्शन सिंह

सियासत में ऐसा ही एक बड़ा नाम है, 50 से 60 के दशक में आजाद भारत की प्रथम लोकसभा में गढ़वाल (उत्तराखंड) का प्रतिनिधित्व करने वाले, राजनीति के पुरोधा एवं साहित्यकार डॉ. भक्तदर्शन सिंह का। भक्तदर्शन सिंह उत्तराखंड राज्य की राजनीति का बहुत बड़ा चेहरा थे। आजादी के बाद वर्ष 1951 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में भक्तदर्शन गढ़वाल सीट से कॉन्ग्रेस के टिकट पर पहली बार सांसद चुने गए थे।

‘राजदर्शन’ नाम में गुलामी की बू भाँपकर खुद अपना नाम रखा था भक्तदर्शन

भक्तदर्शन का जन्म 12 फरवरी 1912 को गोपाल सिंह रावत के घर हुआ था। उत्तराखंड में उनका मूल गाँव था, भौराड़, पट्टी साँबली, पौड़ी गढ़वाल। ब्रिटिश उपनिवेश के समय सम्राट जॉर्ज पंचम के राज्यारोहण वर्ष में पैदा होने के कारण उनके पिता ने उनका नाम ‘राजदर्शन’ रखा था, परन्तु राजनीतिक चेतना विकसित होने के बाद जब उन्हें अपने नाम से गुलामी की बू आने लगी, तो उन्होंने अपना नाम राजदर्शन से बदलकर ‘भक्तदर्शन’ कर लिया था।

1929 में डॉ. भक्तदर्शन कॉन्ग्रेस के अधिवेशन में बने थे स्वयंसेवक

प्रारम्भिक शिक्षा के बाद भक्तदर्शन ने डी.ए.वी. कॉलेज देहरादून से इंटरमीडिएट किया और विश्व भारती (शान्ति निकेतन) से कला स्नातक व 1937 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर परीक्षाएँ पास कीं। शिक्षा प्राप्त करते हुए ही उनका सम्पर्क गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर, डॉ. हजारी प्रसाद द्विवेदी आदि से हुआ। वर्ष 1929 में ही डॉ. भक्तदर्शन लाहौर में हुए कॉन्ग्रेस के अधिवेशन में स्वयंसेवक बने। 1930 में नमक आंदोलन के दौरान उन्होंने प्रथम बार जेल यात्रा की। इसके बाद वे 1941, 1942 व 1944, 1947 तक कई बार जेल गए।

डॉ. भक्तदर्शन और खादी प्रेम

18 फरवरी 1931 को शिवरात्रि के दिन भक्तदर्शन का विवाह जब सावित्री जी से हुआ था, तब उनकी जिद के कारण सभी बारातियों ने खादी वस्त्र पहने थे। उन्होंने न वर के रूप में पारम्परिक मुकुट धारण किया और न ही शादी में कोई भेंट स्वीकार की। देशभक्ति का जुनून उन पर इतना था कि शादी के अगले दिवस ही वे स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेने के लिए चल दिए, इसी दौरान संगलाकोटी में ओजस्वी भाषण देने के कारण उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। यदि भक्तदर्शन आज के समय में ऐसा करते तो कॉन्ग्रेस द्वारा दिहाड़ी रोजगार पर रखे गए सस्ते कॉमेडियन और मीडिया गिरोह उन्हें ‘हायपर नेशनलिज़्म’ और ‘देशभक्त’ कहकर चुटकुले जरूर बनाते।

इसके बाद भक्तदर्शन ने ‘गढ़देश’ के सम्पादकीय विभाग में कार्य किया। ‘कर्मभूमि’ पत्रिका लैंसडौन में वो 1939 से 1949 तक सम्पादक रहे। प्रयाग से प्रकाशित ‘दैनिक भारत’ के लिए काम करने के कारण उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली। वे कुशल लेखक थे। उनकी लेखन शैली व सुलझे विचारों का पाठकों पर बड़ा प्रभाव पड़ता था। भक्तदर्शन 1945 में गढ़वाल में कस्तूरबा गाँधी राष्ट्रीय स्मारक निधि और आजाद हिन्द फौज के सैनिकों हेतु निर्मित कोष के संयोजक रहे। उन्होंने प्रयत्न कर आजाद हिन्द फौज के सैनिकों को भी स्वतंत्रता सेनानियों की तरह पेंशन व अन्य सुविधाएँ दिलवाई थीं।

भक्तदर्शन बन चुके थे गढ़वाल सीट पर कॉन्ग्रेस की जीत का पर्याय

आजादी के बाद 1951 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में भक्तदर्शन गढ़वाल सीट से कॉन्ग्रेस के टिकट पर पहली बार सांसद चुने गए, जिसमें उन्होंने 68.81% मत प्राप्त कर शानदार जीत दर्ज की। वर्ष 1951-52 में उन्होंने लोकसभा में गढ़वाल सीट का प्रतिनिधित्व किया। उस समय गढ़वाल सीट में मुरादाबाद तक का क्षेत्र शामिल था, इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा और कुल 4 बार इस सीट पर जीत दर्ज की। 1957, 1962, 1967 के लोकसभा चुनाव में भक्तदर्शन बार-बार चुनाव जीतते गए।

भक्तदर्शन के रूप में गढ़वाल लोकसभा सीट कॉन्ग्रेस की जीत का पर्याय बन चुकी थी। वह भक्तदर्शन की राजनीति का स्वर्णिम दौर था। देश की राजनीति में उनका तगड़ा दखल था। नेहरू कैबिनेट में वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री तक रह चुके थे। केन्द्रीय शिक्षामंत्री के रूप में उन्होंने केन्द्रीय विद्यालयों की स्थापना करवाई और केन्द्रीय विद्यालय संगठन के पहले अध्यक्ष रहे। अपने व्यक्तित्व के कारण वर्ष 1963 से 1971 तक वे जवाहर लाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री व इंदिरा गाँधी के मंत्रिमंडलों के सदस्य रहे।

हिंदी भाषा प्रेम के कारण जवाहरलाल नेहरू को किया था ‘ट्रॉल’

गाँधी जी के हिन्दी के प्रति प्रेम और उन्हीं के विचारों से प्रेरित होकर भक्तदर्शन ने केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय की स्थापना कराई थी। दक्षिण भारत व पूर्वोत्तर में हिन्दी के प्रचार-प्रसार में उनका अद्वितीय योगदान रहा। वे ओजस्वी वक्ता थे और इतना सुन्दर बोलते थे कि श्रोता मंत्रमुग्ध हो जाते थे। संसद में वे हिन्दी में ही भाषण देते थे और प्रश्नों का उत्तर भी हिन्दी में ही देते थे। एक बार जवाहरलाल नेहरू ने डॉ. भक्तदर्शन को टोका तो उन्होंने विनम्रतापूर्वक टालते हुए जवाब दिया, “मैं आपके आदेश का जरूर पालन करता, परन्तु मुझे हिन्दी में बोलना उतना ही अच्छा लगता है, जितना अन्य विद्वानों को अंग्रेजी में।”

प्रियंका गाँधी की ‘दादी’ को कह दिया था, “No मने No”

इंदिरा गाँधी का रुतबा और छवि ऐसी थी कि बड़े-बड़े नेता भी उनसे आँख मिलाकर बात करने में घबराते थे। लेकिन वो पहाड़ी ही क्या, जो अपनी ‘चौड़ाई’ में न रहे। 1971 में भक्तदर्शन ने सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने का विचार किया। इस पर इंदिरा गाँधी चाहती थीं कि भक्तदर्शन लोकसभा चुनाव लड़ें और उनको संन्यास लेने से मना किया क्योंकि इस समय भक्तदर्शन अपने राजनीतिक करियर के शीर्ष पर थे। अपने सिद्धान्तों के धुनी भक्तदर्शन ने इंदिरा गाँधी को यह कह कर एक ही बार में मना कर दिया कि उनकी उम्र अब सक्रिय राजनीति में रहने की नहीं रह गई है। उनका मानना था कि नए लोगों को राजनीति में मौका दिया जाना चाहिए।

भक्तदर्शन ने 1971 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा। जब भक्तदर्शन का सक्रिय राजनीति से मोहभंग हुआ तो उनकी आयु मात्र 59 वर्ष थी। वे उन दुर्लभ राजनेताओं में थे, जिन्होंने उच्च पद पर रह कर स्वेच्छा से राजनीति छोड़ी। जीवन पर्यन्त, एक लम्बे समय तक राजनीति के शीर्ष पर रहने के बावजूद वे बेदाग निकल आए।

आज की राजनीति में नए लोगों को मौका देने की बातें तो खूब होती हैं, लेकिन इन पर अमल करने वाले कम ही उदाहरण मिलते हैं। लेकिन भक्तदर्शन ने इंदिरा गाँधी से जो कहा, उसे जीवन भर निभाया। एक बार सक्रिय राजनीति से मुँह फेरा, तो फिर उस ओर झाँका तक नहीं।

प्रेरणाशील व्यक्ति अपने साधन और मार्ग तलाश लेता है। राजनीति से संन्यास लेने के पश्चात् उन्होंने अपना सारा जीवन शिक्षा व साहित्य की सेवा में लगा दिया। वे एक लोकप्रिय जनप्रतिनिधि थे। जिस किसी पद पर भी वे रहे, उन्होंने निष्ठा व ईमानदारी से कार्य किया। महात्मा गाँधी के व्यक्तित्व का प्रभाव उनके जीवन के हर भाग में आया, वे सादा जीवन और उच्च विचार के जीवन्त उदाहरण बने रहे। बड़े से बड़ा पद प्राप्त होने पर भी अभिमान और लोभ उन्हें छू न सका। वे ईमानदारी से सोचते थे, ईमानदारी से काम करते थे। निधन के समय भी डॉ. दर्शन किराए के मकान में रह रहे थे। आजीवन किसी दबाव पर अपनी सत्यनिष्ठा छोड़ने को वे कभी तैयार नहीं हुए।

1972 से 1977 तक भक्तदर्शन खादी बोर्ड के उपाध्यक्ष रहे और 1972 से 1977 तक कानपुर विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर आसीन रहे। 1988-90 में उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान के उपाध्यक्ष रहे और दक्षिण भारत के अनेक हिन्दी विद्वानों को उन्होंने सम्मानित करवाया। हिन्दी और भारतीय भाषाओं के लेखकों की पुस्तकों का अनुवाद करवाया और उनके प्रकाशन में सहायता की।

डॉ. भक्तदर्शन ने अनेक उपयोगी ग्रंथ लिखे और सम्पादित किए। इनमें श्रीदेव सुमन स्मृति ग्रंथ (श्रीदेव सुमन ने टिहरी में प्रजा मंडल आंदोलन द्वारा जनता को ब्रिटिश सरकार के एहसानों में दबी राजशाही के अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी), गढ़वाल की दिवंगत विभूतियाँ (दो भाग), कलाविद मुकुन्दी लाल बैरिस्टर, अमर सिंह रावत एवं उनके आविष्कार तथा स्वामी रामतीर्थ पर आलेख प्रमुख हैं। इसीलिए डॉ. भक्तदर्शन को मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया था। 79 वर्ष की उम्र में अप्रैल 30, 1991 को देहरादून में डॉ. भक्तदर्शन का निधन हो गया।

वर्तमान समय में जरूरी है उन हस्तियों को याद किया जाना, जिन्होंने समाज में उदाहरण पेश किए कि यदि व्यक्ति अपने कार्य के प्रति समर्पित, लग्नशील और ईमानदार है तो वह निडर होकर परिस्थितियों का सामना कर समाज के लिए मिसाल बन जाता है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

आशीष नौटियाल
पहाड़ी By Birth, PUN-डित By choice

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

CM योगी ने की हाथरस पीड़िता के परिजनों से बात, परिवार को 25 लाख की आर्थिक मदद, मकान और सरकारी नौकरी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाथरस गैंगरेप पीड़िता के परिजनों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की। बुधवार शाम को हुई बातचीत में सीएम योगी ने न्याय का भरोसा दिलाया। मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार को ढाँढस बँधाया।

लड़कियों को भी चाहिए सेक्स, फिर ‘काटजू’ की जगह हर बार ‘कमला’ का ही क्यों होता है रेप?

बलात्कार आरोपित कटघरे में खड़ा और लोग तरस खा रहे... सबके मन में बस यही चल रहा है कि काश इसके पास नौकरी होती तो यह आराम से सेक्स कर पाता!

मस्जिद शहीद हुई कॉन्ग्रेस की मौजूदगी में, इसकी जड़ कॉन्ग्रेस पार्टी: बाबरी मस्जिद पर कोर्ट के फैसले से ओवैसी नाखुश

''सीबीआई कोर्ट का आज का फैसला भारत की अदालत की तारीख का काला दिन है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने जो 9 नवंबर को जो फैसला दिया था, वो..."

कोसी का ऊँट किस करवट बैठैगा इस बार? जहाँ से बनती-बिगड़ती है बिहार की सरकार… बाढ़ का मुद्दा किसके साथ?

लॉकडाउन की वजह से बाहर गए मजदूरों का एक बड़ा वर्ग इस बार घर पर ही होगा। पलायन की पीड़ा के अलावा जिस बाढ़ की वजह से...

यादों के झरोखों से: जब कारसेवकों ने बाबरी की रक्षा के लिए बना डाली थी ‘बेंगलुरु मॉडल’ वाली ह्यूमन चेन

चूक कहाँ हुई, यह राज बाबरी के साथ ही गया चला। लेकिन चंद जज्बाती लोगों ने ह्यूमन चेन बनाकर बाबरी की सुरक्षा की थी, यह इतिहास याद रखेगा।

यह तो पहली झाँकी है, काशी-मथुरा बाकी है: बाबरी मस्जिद पर कोर्ट के फैसले के बाद आचार्य धर्मेंद्र

"मैं आरोपी नंबर वन हूँ। सजा से डरना क्या? जो किया सबके सामने चौड़े में किया। सौभाग्य से मौका मुझे मिला, लोग इस बात को भूल गए हैं, लेकिन...”

प्रचलित ख़बरें

बेच चुका हूँ सारे गहने, पत्नी और बेटे चला रहे हैं खर्चा-पानी: अनिल अंबानी ने लंदन हाईकोर्ट को बताया

मामला 2012 में रिलायंस कम्युनिकेशन को दिए गए 90 करोड़ डॉलर के ऋण से जुड़ा हुआ है, जिसके लिए अनिल अंबानी ने व्यक्तिगत गारंटी दी थी।

व्यंग्य: दीपिका के NCB पूछताछ की वीडियो हुई लीक, ऑपइंडिया ने पूरी ट्रांसक्रिप्ट कर दी पब्लिक

"अरे सर! कुछ ले-दे कर सेटल करो न सर। आपको तो पता ही है कि ये सब तो चलता ही है सर!" - दीपिका के साथ चोली-प्लाज्जो पहन कर आए रणवीर ने...

एंबुलेंस से सप्लाई, गोवा में दीपिका की बॉडी डिटॉक्स: इनसाइडर ने खोल दिए बॉलीवुड ड्रग्स पार्टियों के सारे राज

दीपिका की फिल्म की शूटिंग के वक्त हुई पार्टी में क्या हुआ था? कौन सा बड़ा निर्माता-निर्देशक ड्रग्स पार्टी के लिए अपनी विला देता है? कौन सा स्टार पत्नी के साथ मिल ड्रग्स का धंधा करता है? जानें सब कुछ।

ईशनिंदा में अखिलेश पांडे को 15 साल की सजा, कुरान की ‘झूठी कसम’ खाकर 2 भारतीय मजदूरों ने फँसाया

UAE के कानून के हिसाब से अगर 3 या 3 से अधिक लोग कुरान की कसम खाकर गवाही देते हैं तो आरोप सिद्ध माना जा सकता है। इसी आधार पर...

शाम तक कोई पोस्ट न आए तो समझना गेम ओवर: सुशांत सिंह पर वीडियो बनाने वाले यूट्यूबर को मुंबई पुलिस ने ‘उठाया’

"साहिल चौधरी को कहीं और ले जाया गया। वह बांद्रा के कुर्ला कॉम्प्लेक्स में अपने पिता के साथ थे। अभी उनकी लोकेशन किसी परिजन को नहीं मालूम। मदद कीजिए।"

‘हिन्दू राष्ट्र में आपका स्वागत है, बाबरी मस्जिद खुद ही गिर गया था’: कोर्ट के फैसले के बाद लिबरलों का जलना जारी

अयोध्या बाबरी विध्वंस मामले में कोर्ट का फैसला आने के बाद यहाँ हम आपके समक्ष लिबरल गैंग के क्रंदन भरे शब्द पेश कर रहे हैं, आनंद लीजिए।

आंध्र प्रदेश: पठान सलार खान ने 15 सालों में 80 से भी ज्यादा मंदिरों की दानपेटियों से चुराए रुपए, गिरफ्तार

जाँच के दौरान 50 वर्षीय पठान सलार नाम के एक युवक को गिरफ्तार किया। जिसके बाद पुलिस की जाँच पड़ताल में उसने चोरी की सारी वारदातों को कबूल किया।

राजस्थान में दो नाबालिग लड़कियों को अगवाकर, तीन दिनों तक किया गया सामूहिक बलात्कार, केस दर्ज

अपहरण के बाद आरोपित दोनों लड़कियों को कोटा, जयपुर और अजमेर ले गए । कथिततौर पर तीन दिनों तक उनके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि से ईदगाह हटाने की याचिका को मथुरा सिविल कोर्ट ने किया खारिज, अब याचिकाकर्ता हाईकोर्ट में करेंगे अपील

कृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह मामले में मथुरा के सिविल कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि मंदिर-ईदगाह के स्थान में कोई बदलाव नहीं होगा।

CM योगी ने की हाथरस पीड़िता के परिजनों से बात, परिवार को 25 लाख की आर्थिक मदद, मकान और सरकारी नौकरी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाथरस गैंगरेप पीड़िता के परिजनों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की। बुधवार शाम को हुई बातचीत में सीएम योगी ने न्याय का भरोसा दिलाया। मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार को ढाँढस बँधाया।

लड़कियों को भी चाहिए सेक्स, फिर ‘काटजू’ की जगह हर बार ‘कमला’ का ही क्यों होता है रेप?

बलात्कार आरोपित कटघरे में खड़ा और लोग तरस खा रहे... सबके मन में बस यही चल रहा है कि काश इसके पास नौकरी होती तो यह आराम से सेक्स कर पाता!

राम के काज में कभी कोई अपराध नहीं होता: अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष ने किया CBI कोर्ट के फैसले का स्‍वागत

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरी ने कोर्ट द्वारा बरी किए गए सभी को बधाई देते हुए कहा कि भगवान राम के कार्य में कोई अपराध नहीं होता है।

ब्रेकिंग न्यूज़: पेरिस में जोरदार धमाके से दहशत का माहौल, कारण स्पष्ट नहीं

फ्रांस की राजधानी पेरिस में बुधवार (30 सितंबर, 2020) को एक तेज धमाके सी आवाज ने पूरे शहर को दहला दिया।

हाथरस गैंगरेप: पीड़िता का अंतिम संस्कार, आरोपित गिरफ्तार, SIT के साथ जानिए अब तक क्या हुआ इस पूरे मामले में

उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से पीड़िता के परिवार को 10 लाख रुपए का मुआवजा देने की घोषणा की गई है। वहीं इस मामले पर संज्ञान लेते हुए पीएम मोदी ने भी यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से मामले में जानकारी ली।

मस्जिद शहीद हुई कॉन्ग्रेस की मौजूदगी में, इसकी जड़ कॉन्ग्रेस पार्टी: बाबरी मस्जिद पर कोर्ट के फैसले से ओवैसी नाखुश

''सीबीआई कोर्ट का आज का फैसला भारत की अदालत की तारीख का काला दिन है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने जो 9 नवंबर को जो फैसला दिया था, वो..."

ड्रग केस के लपेटे में आ सकते हैं S, R, A नाम वाले तीन बड़े अभिनेता, दीपिका पादुकोण के साथ कर चुके हैं काम

धर्मा प्रोडक्शंस के पूर्व एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर क्षितिज रवि प्रसाद ने बॉलीवुड के तीन बड़े अभिनेताओं के नाम लिए हैं। इन अभिनेताओं के नाम S, R और A से शुरू होते हैं।

हमसे जुड़ें

264,935FansLike
78,094FollowersFollow
326,000SubscribersSubscribe