Monday, April 19, 2021
Home राजनीति कॉन्ग्रेस कर रही है बेरोजगारों की भर्ती, CD वाले से लेकर 'कमरा' वाले कतार...

कॉन्ग्रेस कर रही है बेरोजगारों की भर्ती, CD वाले से लेकर ‘कमरा’ वाले कतार में

तरह-तरह की बेरोजगारी के बीच कई तबकों में दबी आवाज़ में बात हो रही है कि मोदी का अंध-विरोध तो सही है, लेकिन वो चला गया तो उन सब की दुकान कैसे चलेगी जो 73 भाषाओं में अपने लेखों का अनुवाद करने से लेकर अकबर-बीरबल के चुटकुलों में मोदी-शाह घुसाकर घर चला रहे हैं।

चौकीदार vs बेरोजगार

ट्विटर पर चौकीदार और बेरोजगार की लड़ाई में योद्धा अपने अपने शिविर से निकल चुके हैं। सबने अपने पिछले रिकॉर्ड और क्षमता के साथ न्याय करते करते हुए अपने-अपने टैग और प्रोफ़ेशन चुन लिए। इसमें चौकीदार बनी है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेना और बेरोजगार बनी है कॉन्ग्रेस पार्टी की कार्यकर्ता टीम!

कॉन्ग्रेस के बेरोजगारों में सबसे पहला नाम जो नजर आया, वो है राहुल गाँधी के बाद पार्टी के दूसरे युवा नेता, कॉन्ग्रेस पार्टी अध्यक्ष पद के कड़े प्रतिद्वंदी और ‘पाटीदार आंदोलन फेम’ हार्दिक पटेल का। जिस हार्दिक पटेल का राजनीति में स्वागत ही एक ‘CD-काण्ड’ के साथ होता है, उसका ‘चौकीदार’ होना समाज के लिए उचित भी नहीं है।

ऑपइंडिया तीखी मिर्ची सेल द्वारा जारी ‘चुनावी बेरोजगारी’ के आँकड़े

बेरोजगार कॉन्ग्रेस

मेरा मानना है कि हार्दिक पटेल की बेरोजगारी इस देश के युवा के लिए एक मानक की तरह आदर्श बेरोजगारी घोषित की जानी चाहिए। यह युवा नेता ऐसा बेरोजगार है, जो पिछले 4-5 सालों में पाटीदार जाति के लिए आरक्षण का झंडा उठाकर बहुत ही कम समय में राष्ट्रीय केजरीवाल बनकर उभरा है। अपने इस तमाम सफर में हार्दिक पटेल CD-काण्ड जैसी एक के बाद एक बड़ी कठिनाई से गुजरे। इसके बाद ब्याह रचाया और अब 2019 के आम चुनाव से पहले अपनी सभी बड़ी जिम्मेदारियाँ निपटाने के बाद समय से अपना सेटलमेंट करने के लिए बेरोजगार हो जाना चुन चुके हैं। हार्दिक पटेल को ‘आदर्श बेरोजगार’ का दर्जा देना चुनावी घोषणापत्र में शामिल किया जाना चाहिए। कॉन्ग्रेस पार्टी के भीतर रहते हुए ‘दर्जा-दिलाऊ’ पत्रकारों के अभियान से यह जल्दी से संपन्न भी हो जाएगा। हार्दिक पटेल की बेरोजगारी इसलिए भी चर्चा का विषय होनी चाहिए कि बहुत ही कम समय में उन्हें देश की सबसे प्राचीन राजनीतिक पार्टी ने भर्ती किया और उसके बाद वो बेरोजगार हो गए।

बेरोजगार पत्रकार

खुद को बेरोजगार बताने की लहर मोदी लहर से ज्यादा चली है। जबकि, अगर आप आँकड़े देखें तो 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से बहुत से लोगों को रोजगार मिला है। रोजाना नरेंद्र मोदी सरकार के घोटालों के स्वप्न को सच साबित करने वालों को रोजगार मिला है, संसद में उनके गले पड़ने वालों को रोजगार मिला है। मीडिया में बैठे पत्रकारिता के समुदाय विशेष को तो सबसे ज्यादा रोजगार मिला है। जिन पत्रकारों को TRP न आने के चलते नौकरी छिन जाने का भय भी सताने लगा था, उन्होंने भी पाकिस्तान में अच्छी-खासी फैन फॉलोविंग पुलवामा आतंकी हमले के दौरान दिन-रात प्रोपेगेंडा चलाने की मेहनत कर के जुटा ली है। ये मीडिया गिरोह तो मन ही मन चाह रहा होगा कि अबकी बार फिर से नरेंद्र मोदी ही सरकार बनाएँ, ताकि इनके पास खूब रोजगार के अवसर और मुद्दे रहें। अख़बारों की ख़बरों को काट-पीटकर TV चैनल पर अपने प्रोपेगेंडा के अनुसार बनाकर प्रस्तुत करना क्या रोजगार नहीं है?

यदि इन सब रोजगार के आँकड़ों को भी नकार दिया जाए, तो 2 मिनट का समय निकालकर आप उस आदमी के बारे में सोचिए, जिसे सिर्फ इसलिए रोजगार मिला हुआ है क्योंकि एक मुद्दों से भटका हुआ मनचला पत्रकार रोज शाम को उससे अलग-अलग भाषाओं में अपने फेसबुक स्टेटस को ट्रांसलेट करवा रहा है।

बेरोजगार कॉमेडियंस

मोदी सरकार के शपथ ग्रहण करते ही रोजगार की लहर सबसे ज्यादा कॉमेडियंस के बीच देखने को मिली है। इतिहास में यह पंचवर्षीय, कॉमेडियंस का स्वर्णकाल कहलाई जाएगी। इस दौरान वो लोग भी कॉमेडियन कहलाए गए हैं, जिन्होंने रेलवे प्लेटफॉर्म पर बिकने वाली अकबर-बीरबल के चुटकुलों वाली किताब से चुटकुले पढ़कर यूट्यूब पर सुनाकर वायरल कर डाले। उनकी कॉमेडी का हुनर कॉन्ग्रेस को इतना भाया है कि राज परिवार द्वारा मोदी सरकार को गाली देने के लिए उसे अब भाड़े पर रख लिए गए।

हालाँकि, इन सभी सस्ते-महँगे कॉमेडियंस द्वारा कॉमेडी के नाम पर बनाए गए चुटकुले इतने बकवास थे कि उन्हें कॉमेडी कहा जाना ही सबसे बड़ी कॉमेडी हो पड़ी। AIB समूह के साथ इस दौरान जो घटना घटी, वो चौंका देने वाली थी। इसमें कॉमेडी ये थी कि अपने #MeToo कांडों का ठीकरा वो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सर पर नहीं फोड़ सके और AIB एक नाकाम फिदायीन की तरह ‘Self Goal’ को प्राप्त हुआ। फिर भी, AIB की दुकान बंद होने का दारोमदार राहुल गाँधी ने अपने कन्धों पर संभाले रखा और जनता को कभी भी इंटरटेनमेंट में कोई कमी महसूस नहीं होने दी।

बेरोजगार फ़्रीलांस प्रोटेस्टर्स और कॉन्ग्रेस IT ट्रॉल सेल

JNU की फ्रीलांस प्रोटेस्टर शेहला रशीद से लेकर व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी में रिश्तेदरों के ग्रुप में होने वाली ‘वायरल तस्वीर‘ का फैक्ट चेक कर के अपनी दुकान चलाने वाले लोगों के रोजगार के आंकड़ों में भी ‘बूम’ नजर आया है। कभी-कभी ‘फैक्ट चेक’ की कमी के चलते इनका धंधा मंद हुआ, लेकिन यही मौका था जब उनकी रचनात्मकता से लोग खुश होते और वो अपने प्रोपेगैंडा के चितेरे प्रशंसकों की उम्मीदों पर खरे उतरे। ये सब मोदी सरकार के दौरान ही तंदुरुस्त हुए हैं। देखा जाए तो इन्हें मोदी सरकार का शुक्रगुजार होना चाहिए, जिसके विरोध में लिखने और ‘ऑन डिमांड धरना प्रदर्शन’ के कारण इनका अस्तित्व लोगों के सामने आ सका। इसी तरह से कॉन्ग्रेस और AAP का संयुक्त IT सेल प्रमुख ध्रुव राठी भी यदि खुद को बेरोजगार कह दे, तो उसे भी तुरंत कॉमेडियन का दर्जा देकर रोजगार में तब्दील कर दिया जाना चाहिए।

बेरोजगार महागठबंधन

2019 के आम चुनाव के बाद जो सड़क पार आने की स्थिति में होगा वो होगा महागठबंधन। नरेंद्र मोदी के दुबारा प्रधानमंत्री बनने का सपना देखने वाले समाजवादी नेताजी तो अब मार्गदर्शक मंडल में ही रोजगार पाएँगे, लेकिन अखिलेश यादव और बहन मायावती के साथ यदि जनता ने कॉमेडी कर दी तो उनका ट्विटर एकाउंट में भी बेरोजगार जुड़ना तय है।

बेरोजगार आम आदमी पार्टी वालंटियर्स

आज के समय में यदि कोई सबसे ज्यादा बेरोजगार है, तो वो है नई वाली राजनीति फेम आम आदमी पार्टी अध्यक्ष अरविन्द केजरीवाल। वो गिड़गिड़ाकर, रो-रो कर गठबंधन की भीख माँग रहे हैं, लेकिन गठबंधन है कि उन्हें रोजगार देने को तैयार ही नहीं है।

आप चुनावी माहौल में सिर्फ चुनावी चकल्लस की तलाश में निकले हैं, इसलिए मामले की गंभीरता से आप दूर हैं। आप बेरोजगार हार्दिक पटेल का असल मर्म नहीं जानते। कॉन्ग्रेस पार्टी में पहले से ही एक चिर युवा अध्यक्ष राहुल गाँधी अध्यक्ष पद पर मौजूद हैं। अब, जब एक पाटीदार देश के सबसे प्राचीन राजनीतिक दल में घुस चुका है, तो वो आरक्षण के बल पर अध्यक्ष पद पाने की महत्वाकांक्षा मन में पाल रहा है। अब जब तक उसे ये पद मिल नहीं जाता, उसने खुद को बेरोजगार मानने का संकल्प धारण कर लिया है। इस तरह से अभी तक कॉन्ग्रेस  में सिर्फ राहुल गाँधी ही भाजपा के स्टार प्रचारक माने जाते थे लेकिन अब हार्दिक पटेल भी भाजपा की स्लीपर सेल इकाई के तौर पर देखे जाने चाहिए।

जो भी है, मगर ये VIP बेरोजगार एंटरटेनमेंट में कोई कमी नहीं आने दे रहे दे रहे हैं। आम आदमी को इससे ज्यादा और चाहिए भी क्या?

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

आशीष नौटियाल
पहाड़ी By Birth, PUN-डित By choice

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘मई में दिखेगा कोरोना का सबसे भयंकर रूप’: IIT कानपुर की स्टडी में दावा- दूसरी लहर कुम्भ और रैलियों से नहीं

प्रोफेसर मणिन्द्र और उनकी टीम ने पूरे देश के डेटा का अध्ययन किया। अलग-अलग राज्यों में मिलने वाले कोरोना के साप्ताहिक आँकड़ों को भी परखा।

‘कुम्भ में जाकर कोरोना+ हो गए CM योगी, CMO की अनुमति के बिना कोविड मरीजों को बेड नहीं’: प्रियंका व अलका के दावों का...

कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी ने CMO की अनुमति के बिना मरीजों को अस्पताल में बेड्स नहीं मिल रहे हैं, अलका लाम्बा ने सीएम योगी आदित्यनाथ के कोरोना पॉजिटिव होने और कुम्भ को साथ में जोड़ा।

जमातों के निजी हितों से पैदा हुई कोरोना की दूसरी लहर, हम फिर उसी जगह हैं जहाँ से एक साल पहले चले थे

ये स्वीकारना होगा कि इसकी शुरुआत तभी हो गई थी जब बिहार में चुनाव हो रहे थे। लेकिन तब 'स्पीकिंग ट्रुथ टू पावर' वालों ने जैसे नियमों से आँखें मूँद ली थी।

मनमोहन सिंह का PM मोदी को पत्रः पुराने मुखौटे में कॉन्ग्रेस की कोरोना पॉलिटिक्स को छिपाने की सोनिया-राहुल की नई कवायद

ऐसा लगता है कि कॉन्ग्रेस ने मान लिया है कि सोनिया या राहुल के पत्र गंभीरता नहीं जगा पाते। उसके पास किसी भी तरह के पत्र को विश्वसनीय बनाने का एक ही रास्ता है और वह है मनमोहन सिंह का हस्ताक्षर।

‘छोटा सा लॉकडाउन, दिल्ली छोड़कर न जाएँ’: इधर केजरीवाल ने किया 26 अप्रैल तक कर्फ्यू का ऐलान, उधर ठेकों पर लगी कतार

केजरीवाल सरकार ने 26 अप्रैल की सुबह 5 बजे तक तक दिल्ली में लॉकडाउन की घोषणा की है। इस दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं को दुरुस्त कर लेने का भरोसा दिलाया है।

मोदी सरकार ने चुपके से हटा दी कोरोना वॉरियर्स को मिलने वाली ₹50 लाख की बीमा: लिबरल मीडिया के दावों में कितना दम

दावा किया जा रहा है कि कोरोना की ड्यूटी के दौरान जान गँवाने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के लिए 50 लाख की बीमा योजना केंद्र सरकार ने वापस ले ली है।

प्रचलित ख़बरें

‘वाइन की बोतल, पाजामा और मेरा शौहर सैफ’: करीना कपूर खान ने बताया बिस्तर पर उन्हें क्या-क्या चाहिए

करीना कपूर ने कहा है कि वे जब भी बिस्तर पर जाती हैं तो उन्हें 3 चीजें चाहिए होती हैं- पाजामा, वाइन की एक बोतल और शौहर सैफ अली खान।

‘छोटा सा लॉकडाउन, दिल्ली छोड़कर न जाएँ’: इधर केजरीवाल ने किया 26 अप्रैल तक कर्फ्यू का ऐलान, उधर ठेकों पर लगी कतार

केजरीवाल सरकार ने 26 अप्रैल की सुबह 5 बजे तक तक दिल्ली में लॉकडाउन की घोषणा की है। इस दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं को दुरुस्त कर लेने का भरोसा दिलाया है।

SC के जज रोहिंटन नरीमन ने वेदों पर की अपमानजनक टिप्पणी: वर्ल्ड हिंदू फाउंडेशन की माफी की माँग, दी बहस की चुनौती

स्वामी विज्ञानानंद ने SC के न्यायाधीश रोहिंटन नरीमन द्वारा ऋग्वेद को लेकर की गई टिप्पणियों को तथ्यात्मक रूप से गलत एवं अपमानजनक बताते हुए कहा है कि उनकी टिप्पणियों से विश्व के 1.2 अरब हिंदुओं की भावनाएँ आहत हुईं हैं जिसके लिए उन्हें बिना शर्त क्षमा माँगनी चाहिए।

ईसाई युवक ने मम्मी-डैडी को कब्रिस्तान में दफनाने से किया इनकार, करवाया हिंदू रिवाज से दाह संस्कार: जानें क्या है वजह

दंपत्ति के बेटे ने सुरक्षा की दृष्टि से हिंदू रीति से अंतिम संस्कार करने का फैसला किया था। उनके पार्थिव देह ताबूत में रखकर दफनाने के बजाए अग्नि में जला देना उसे कोरोना सुरक्षा की दृष्टि से ज्यादा ठीक लगा।

रोजा वाले वकील की तारीफ, रमजान के बाद तारीख: सुप्रीम कोर्ट के जज चंद्रचूड़, पेंडिग है 67 हजार+ केस

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने याचिककर्ता के वकील को राहत देते हुए एसएलपी पर हो रही सुनवाई को स्थगित कर दिया।

Remdesivir का जो है सप्लायर, उसी को महाराष्ट्र पुलिस ने कर लिया अरेस्ट: देवेंद्र फडणवीस ने बताई पूरी बात

डीसीपी मंजूनाथ सिंगे ने कहा कि पुलिस ने किसी भी रेमडेसिविर सप्लायर को गिरफ्तार नहीं किया है बल्कि उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया था, क्योंकि...
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

292,985FansLike
82,232FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe