इस समय कश्मीर से बाहर रह रहे छात्र और आम लोग ट्विटर हैंडल @CRPFmadadgaar पर संपर्क कर सकते हैं। बस इतना याद रखें कि ये वही CRPF है, जिसके जवानों पर कश्मीर में आए दिन पत्थरबाजी होती है।
क्या अकारण वीरगति को प्राप्त हुए सेना के जवान और आतंकी मनसूबों के साथ मरने वाले आतंकवादियों में कोई फर्क ही नहीं रह गया है? अपने दुख को इन जवानों के घर वालों के दुख के समान बताकर किस तरह का माहौल बनाया जा रहा है?
लगातार धर्म की आड़ में आतंकियों को पालने वाले पाकिस्तान को अच्छे से यह बात मालूम है कि जो आतंक का बीज़ वो अपनी धरती पर लगाता है, उसकी जड़ें भी बनेंगी और वो फैलेंगी भी।
केजरीवाल ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, "हमारे मन में देश को लेकर बहुत ज्यादा चिंता है, इसी वजह से हम लालायित हैं, उन्होंने (कॉन्ग्रेस) ने लगभग मना कर दिया है।"
इस त्रासदी का 346 टन ज़हरीला कचरा अब भी भारत के लिए एक चुनौती बना हुआ है। ये कचरा कंपनी के कारख़ाने में कवर्ड शेड में मौजूद है। इसके ख़तरे को देखते हुए आम जन का प्रवेश यहाँ पर वर्जित है।
इस अंतरिम घोषणा के बाद कई श्रद्धालुओं की आँख में उम्मीद के तारे चमकते नज़र आए हैं। इन श्रद्धालुओं की कतार में यूपी से बंगाल के बाद महाराष्ट्र से मध्यप्रदेश के भी कई नामी चेहरे खड़े नज़र आ सकते हैं।
प्रथा वो है, जिसमें कॉन्ग्रेस पार्टी की विचारधारा लीन है। ‘परिवारवाद’ है प्रथा चिदंबरम जी... और अगर ये प्रथा नहीं है तो ‘राहुल गाँधी’ ही क्यों कॉन्ग्रेस पार्टी के अध्यक्ष हैं... आप बन जाइए!