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जयन्ती मिश्रा

कॉन्ग्रेस में ‘G’ प्रथा को तोड़िए चिदंबरम जी, सबरीमाला-राम मंदिर आपसे न हो पाएगा

प्रथा वो है, जिसमें कॉन्ग्रेस पार्टी की विचारधारा लीन है। ‘परिवारवाद’ है प्रथा चिदंबरम जी... और अगर ये प्रथा नहीं है तो ‘राहुल गाँधी’ ही क्यों कॉन्ग्रेस पार्टी के अध्यक्ष हैं... आप बन जाइए!

माता-पिता को कोर्ट तक लेकर जाना चाहता है मुंबई का एक शख़्स, वजह- ‘मुझे पैदा क्यों किया?’

प्रजनन एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे दुनिया निरंतर आगे चलती रहती है। यह बेहद बेफकूफ़ाना तर्क़ है कि बिना मेरी मर्ज़ी के जाने मुझे जन्म क्यों दिया गया।

डियर सोसायटी, लड़की को आप ‘वर्जिनिटी टेस्ट’ पर आँक लेते हैं… लड़कों के लिए भी ऐसा ही कुछ किया जाए?

अगर एक हाइमन के ब्रेक हो जाने से उसके चरित्र पर ही उँगलियाँ उठें और शर्मसार हो जाना पड़े तो जरूरी है कि न केवल महाराष्ट्र की सरकार बल्कि पूरे देश में इस ‘वर्जिनिटी टेस्ट’ को अपराध घोषित कर दिया जाए।

पहले न्यूनतम आय फिर कर्ज़माफ़ी… सत्ता के लिए और कितने लॉलीपॉप देंगे जनता को राहुल बाबा!

राज्यों में चुनाव जीतने से पहले राहुल यह वादा करते थे कि अगर वो चुनाव जीतते हैं तो 10 दिन के भीतर किसानों का कर्ज माफ़ कराएँगे। लेकिन चुनाव के तुरंत बाद राहुल जनता को समझाते नज़र आए कि यह इतना आसान काम नहीं हैं।

जब ‘हिजाब’ से पितृसत्ता और धार्मिक कुरीतियों की बू आने लगे… तो उसे उतार फेंकना चाहिए

Nike वाला डिज़ाइनर हिजाब किसी विशेष धर्म की कुरीतियों को बढ़ावा देना नहीं तो और क्या है कि अब दौड़ के मैदान में भी एक लड़की 'खिलाड़ी' बनकर नहीं बल्की 'मुस्लिम खिलाड़ी' बनकर दौड़ेगी।

रवीश जी, मोदी की खुन्नस बच्चों पर क्यों? लीजिए 15 कार्य गिनिए जो मोदी ने शिक्षा के लिए किए

एक प्रधानमंत्री की पहुँच अगर इतनी है कि वो एक साथ लाखों विद्यार्थियों से जुड़ जाए, तो क्या रवीश जी यह चाहते हैं कि 10,000 बच्चे इस साल आत्महत्या कर लें, तब तक सरकार हर स्कूल में काउंसलर की वेकन्सी निकाले?

बजट 2019 में मिली आँकड़ों के साथ महिला सशक्तिकरण को भी जगह

महिलाओं की सशक्तिकरण पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मातृत्व योजना में महिलाओं को 26 हफ्ते की मैटरनिटी लीव दी जा रही है।

‘संस्कृत’ से नहीं उन्हें ‘संस्कृति’ से गुरेज़ है, उन्हें ‘श्लोक’ से नहीं ‘हिंदू-धर्म’ से परहेज़ है

अब कोर्ट इसका निर्णय करेगा कि विद्यालयों में ‘असतो मा सदगमय’ (मुझे झूठ से सच की ओर ले चलें) जैसी प्रार्थनाएँ गाई जा सकती हैं या फिर नहीं।