Tuesday, November 24, 2020
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डियर सोसायटी, लड़की को आप ‘वर्जिनिटी टेस्ट’ पर आँक लेते हैं… लड़कों के लिए भी ऐसा ही कुछ किया जाए?

हाल ही में जाधवपुर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर का आपत्तिजनक बयान सुर्खियों का हिस्सा बना था जिसमें उन्होंने अपने छात्रों को वर्जिनिटी की महत्वता बताते हुए फेसबुक पोस्ट में कहा था कि क्या आप टूटी सील के साथ कोल्ड ड्रिंक की बोतल या बिस्किट के पैकेट ख़रीदना चाहेंगे?

कुछ समय पहले पुणे के कुछ युवकों ने समाज की एक भद्दी कुरीति ‘वर्जिनिटी टेस्ट’ को ख़त्म करने के लिए ऑनलाइन मुहिम की शुरूआत की थी। जिसके मद्देनज़र महाराष्ट्र सरकार द्वारा महिलाओं के हित में बुधवार (फरवरी 6, 2019) को बेहद सराहनीय फ़ैसला लिया गया। इस फ़ैसले में महाराष्ट्र सरकार ने कहा कि किसी भी महिला को उसके ‘वर्जिनिटी टेस्ट’ के लिए बाध्य करने को जल्द ही सरकार एक दंडनीय अपराध बनाएगी।

ये क़दम उठाने के पीछे महाराष्ट्र सरकार का उद्देश्य साफ़ था कि राज्य के कुछ समुदायों में आज भी यह परंपरा है कि शादी के बाद महिला ख़ुद को ‘वर्जिन’ साबित करे। ज़ाहिर है ये कार्य स्वेच्छा से जुड़ा हुआ तो बिल्कुल भी नहीं हैं, इसलिए समुदाय से संबंधित लोग उस नवविवाहिता को ऐसा करने के लिए बाध्य करते थे।

इस बाध्यता को कभी ‘परंपरा’ मानकर तो कभी ‘संस्कार’ मानकर समुदाय विशेष से जुड़ी अधिकतम लड़कियाँ ख़ुद को इस कुरीति की भेंट बनाकर चढ़ा देती हैं। ‘वर्जिनिटी टेस्ट’ को लेकर कई समुदायों में मान्यता है कि इससे लड़की की पवित्रता और अपवित्रता के बारे में पता चलता है।

हालाँकि बढ़ते हुए भारत की तस्वीर में यह चीज़ें थोड़ी पिछड़ी हुई बातें लगती हैं। लेकिन थोडा जूम इन करके देखा जाए तो पता चलेगा कि यह आज भी कई ग्रामीण क्षेत्रों में और विशेष जाति में नवविवाहिताओं के साथ बीतने वाली कड़वी हकीकत है।

वर्जिनिटी टेस्ट के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करती महाराष्ट्र की महिलाएँ

देर-सवेर सही लेकिन इस मामले को संजीदगी से लेते हुए गृह राज्य मंत्री रंजीत पाटिल ने बुधवार संवाददाताओं के सामने कहा है कि वर्जिनिटी टेस्ट को यौन हमले का एक प्रकार समझा जाएगा। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में विधि एवं न्याय विभाग के साथ सलाह के बाद परिपत्र जारी होगा, जिसमें इसे दंडनीय अपराध के रूप में घोषित किया जाएगा।

हमारे समाज में आज से ही नहीं बल्कि पौराणिक काल से कभी सती के नाम पर तो कभी वर्जिनिटी टेस्ट के नाम पर महिलाओं का शोषण किसी न किसी कुरीति के रूप में होता आया है। ऐसी ढकोसलों से भरी परंपराओं की शुरूआत करने वालों की सबसे विशेष बात होती है कि वो लड़कियों को शुरू से ही इस प्रकार प्रशिक्षित करते हैं कि महिलाओं की श्रेणी में आते-आते उनके लिए यह सब जीवन का एक हिस्सा हो जाए। वे न कभी ख़ुद पर कोई बात करें और न ही कभी अपने अधिकारों पर।

क्षेत्रों से लेकर समुदायों और देश से लेकर समाज तक यह कुरीति सिर्फ़ महाराष्ट्र के चुनिंदा समुदायों की हक़ीकत नहीं हैं। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हर बार अधिकतर जगहों पर आज भी लड़की के वर्जिन होने का प्रमाण हर कोई माँगता ही रहता है।

अपने तय किए मानदंडों पर महिलाओं की पवित्रता को आँका और पहचाना जाता है। अगर कहीं पर भी महिला उन मानदंडो पर किन्हीं कारणों से असफल हो जाए तो उसे हीन नज़र से देखा जाता है और वैवाहिक जीवन तक पर खतरा बन ही जाता है। महाराष्ट्र में कंजरभाट समुदाय में आज भी दूल्हे की इच्छा पर दुल्हन को अपने वर्जिन होने का सबूत देना पड़ता है।

सोचने वाली बातें हैं कि अगर किसी समुदाय में वर्जिन होना ही परंपरा और संस्कार का आईना हैं तो फिर यह सब सिर्फ़ महिलाओं तक ही क्यों सीमित है? लड़की के वर्जिनिटी टेस्ट पर सवाल खड़ा करने वाले लोग लड़के के वर्जिन होने पर कभी भूले-बिसरे भी उँगली नहीं उठाते। इसे कुरीति का नाम न मिले तो और किसका मिलेगा जिसमें सिर्फ़ लड़की को ऐसी परीक्षाएँ भी देनी है और असफल होने पर सबके आगे शर्मसार भी होना है।

अभी हाल ही में कंजरभाट समुदाय के नवविवाहित जोड़े का ‘वर्जिनिटी टेस्ट’ से जुड़ा मामला सामने आया। इस ख़बर में सबसे दुखद बात थी कि लड़का और लड़की दोनों ने उच्च शिक्षा ग्रहण की हुई है। साथ ही परिवार भी शिक्षित है। लड़का पढ़ाई करके इंग्लैंड से लौटा था। लेकिन फिर भी लड़के ने लड़की के वर्जिनिटी टेस्ट की माँग की थी जैसे यह उसका जन्मसिद्ध अधिकार हो। ऐसे पढ़े-लिखे लोगों का इन गिरे मुद्दों को लेकर खबरों में आना हमें बताता है कि आज भी शिक्षा के प्रभाव से ज्यादा समुदाय के माहौल का फर्क हम पर पड़ता है।

यहीं कारण है कि पितृसत्ता से जकड़ा हुआ समाज शिक्षित होने के बाद भी इन कुरीतियों को विकल्प के तौर पर अधिकार मानकर चलता है और सोचता है कि वो जब चाहें समुदाय विशेष द्वारा मिले इन अधिकारों का इस्तेमाल करके महिलाओं के दमन को बढ़ावा दे सकते हैं।

याद दिला दूँ अभी हाल ही में जाधवपुर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर का आपत्तिजनक बयान सुर्खियों का हिस्सा बना था जिसमें उन्होंने अपने छात्रों को वर्जिनिटी की महत्वता बताते हुए फेसबुक पोस्ट में कहा था कि क्या आप टूटी सील के साथ कोल्ड ड्रिंक की बोतल या बिस्किट के पैकेट ख़रीदना चाहेंगे?

इस बात पर हालाँकि बवाल बहुत हुआ लेकिन सोचने वाला विषय यह है कि फेसबुक पोस्ट पर लिखी यह बात भले ही चर्चाओं में आ गई हो, लेकिन क्लासरूम के भीतर ऐसे शिक्षक का होना आने वाली लड़कियों के लिए किसी ख़तरे से कम नहीं हैं। शिक्षा के नाम पर लड़की के वर्जिन होने की महत्तवता पर बात करना कुंठित मानसिकता की न सिर्फ़ पहचान है बल्कि उसे बढ़ावा देना भी दर्शाता है।

इसके अलावा कुछ समय पहले ख़बर आई थी कि कुवैत में एक शख़्स ने अपनी बीवी की वर्जिनिटी पर शक़ करते हुए फॉरेंसिक जाँच माँगी थी। इस मामले का इतना तूल पकड़ना बताता है कि आज महिलाओं की वर्जिनिटी का यह मुद्दा सिर्फ़ देश, राज्यों और क्षेत्रों तक सिमटा हुआ नहीं हैं बल्कि अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी महिलाएँ इस पीड़ा से गुज़र रही हैं।

आज न केवल समाज और समुदायों द्वारा इसे बढ़ावा दिया जा रहा है बल्कि बाज़ार भी इसे ढाल बनाने से नहीं पीछे हट रहा। लगातार बाज़ार में ऐसे प्रोडक्ट उतारे जाते रहे हैं जो महिलाओं की वर्जिनिटी को टारगेट करके अपनी ज़मीन तैयार करते हैं। साल 2012 में ऐसा ही मुद्दा गर्माया था जिसमें ऐसी क्रीम के विज्ञापन विवाद का हिस्सा बने थे। इनमें ख़ासियत यह थी कि यह उत्पाद महिलाओं की योनि को गोरा करने से लेकर उन्हें दुबारा वर्जिन बनाने का दावा करते थे।

सोचिए, बढ़ते हुए भारत की तस्वीर में जहाँ पर लड़कियाँ घर से लेकर नौकरियों में, व्यापार में, सिने-जगत, खेलजगत में लगातार अपनी उपस्थितियाँ दर्ज करा रही हैं। भागदौड़ भरी ज़िंदगियों में वो हर प्रकार का संघर्ष कर रही हैं और खुद को स्वस्थ रखने के लिए व्यायाम से लेकर योग कर रही हैं। और, इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में जहाँ लड़कियाँ साइकिल चलाने से लेकर पेड़ पर चढ़ते हुए कार्यों को करने से पीछे नहीं हटती हैं।

वहाँ ऐसी स्थितियों में अगर एक हाइमन के ब्रेक हो जाने से उसके चरित्र पर ही उँगलियाँ उठें और शर्मसार हो जाना पड़े तो जरूरी है कि न केवल महाराष्ट्र की सरकार बल्कि पूरे देश में इस ‘वर्जिनिटी टेस्ट’ को अपराध घोषित कर दिया जाए। ताकि, पितृसत्ता से जकड़ा हुआ समाज आज ख़ुद ऐसे रीति-रिवाज़ों को गढ़ने से पहले क़ानूनी रूप से अपराधी बन जाए।

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