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केशव मालान

Senior Reporter

पाँच वक्त का नमाजी था आतंकी मुजम्मिल, अल-फलाह यूनिवर्सिटी की मस्जिद जाता था: इमाम इश्तियाक ने अपने घर में दी थी पनाह

अल-फलाह यूनिवर्सिटी से लाखों बच्चे पढ़कर निकले हैं, कभी किसी ने कोई गंदा काम नहीं किया। ये पहली घटना हुई है। इमाम साहब का कोई संबंध नहीं है।

जम्मू-कश्मीर के ज्यादातर छात्र, मुस्लिम गेटअप में कैंपस आते प्रोफेसर और हिंदू महिला प्रोफेसर का डर: जानें आतंकी डॉक्टरों के अड्डे ‘अल-फलाह’ यूनिवर्सिटी में...

फरीदाबाद के अल फलाह यूनिवर्सिटी इन दिनों सुर्खियों में है। यहाँ के तीन डॉक्टरों के जिहादी होने के सबूत हैं। ऑपइंडिया ने यूनिवर्सिटी कैंपस जाकर माहौल जानने की कोशिश की।

अलीगढ़ में मंदिर विवाद की वजह से करन अहेरिया की हत्या, असद का परिवार फेंकता था हड्डियाँ: पीड़ित परिवार के आरोप गंभीर, प्रशासन ने...

अलीगढ़ में मुस्लिम समाज की जिस महिला को करन दवा दिलाने ले गया था, हत्या के पीछे उनका हाथ भी लोगों के बीच चर्चा का विषय है।

असद ने चाकू से काटा करन का गला फिर शरीर पर किए 15 वार, थाने के नल पर धोए खून से सने हाथ-पैर: अलीगढ़...

असद ने करन को पास के खंडहर मकान में खींच लिया। वहाँ दोस्तों के साथ मिलकर पहले सिर दीवार से ठोका, फिर चाकू से गला काटा और शरीर पर 15 वार किए।

‘न झुकूँगा-न डरूँगा, खजुराहो जाकर अनशन करूँगा’: CJI पर जूता फेंकने वाले वकील बोले- भगवान ने 100 करोड़ लोगों में से मुझे चुना, Video

डॉ. राकेश किशोर ने कहा कि इस देश में सनातन की आज ये जो हालत है वह इसलिए कि हम सनातन के अपमान पर आज तक चुप रहे।

‘मैं खुद दलित, उन्हें पता नहीं है तो मैं क्या करूँ’: ऑपइंडिया से बोले ‘जूता कांड’ वाले वकील राकेश किशोर, कहा- CJI गवई के...

CJI पर जूता फेंकने की कोशिश करने वाले वकील ने ऑपइंडिया को बताया है कि वह खुद एक दलित हैं। उन्होंने कहा, "मैं अपने जाति प्रमाण पत्र दिखाने को भी तैयार हूँ।"

‘यमुना की बाढ़ में सबकुछ बर्बाद हो गया, खाने-पीने की भी कमी…’ : दिल्ली में राहत कार्यों में जुटी रेखा सरकार, 2 लापता-हजारों बेघर

दिल्ली के यमुना बाजार, बुराड़ी, एमनेस्टी मार्केट, तिब्बती बाजार आदि इलाकों की सड़कों पर यमुना के बाढ़ का पानी घूम रहा है।

अलीगढ़ में रजबहे पर अवैध अतिक्रमण हटाने के लिए चला योगी का बुलडोजर, मस्जिद-मदरसे की सीढ़ियाँ तोड़ीं: विरोध के बावजूद हुई कार्रवाई, अब खेतों...

अलीगढ़ का यह रजबहा गंग नहर से निकलकर 20 गाँवों की फसलों को पानी देता था, लेकिन 15 साल से अतिक्रमण के कारण बंद था।