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‘जानवरों की तरह नोंचा, मुँह में कपड़ा ठूँसा’: दिल्ली के भजनपुरा में 6 साल की मासूम से 3 मुस्लिम नाबालिगों ने किया गैंगरेप, पीड़ित परिवार की आपबीती का Video

बिस्तर पर लेटी उस 6 साल की बच्ची ने जब अपनी टूटी-फूटी जुबान से दर्द बयाँ किया, तो वहाँ मौजूद हर शख्स की आँखें नम हो गईं। बच्ची ने बताया कि वे तीन लड़के थे जिन्होंने उसके साथ गंदा काम किया। उसे डराया-धमकाया गया और उसकी चीखें दबाने के लिए उसके मुँह में कपड़ा ठूँस दिया गया था।

देश की राजधानी दिल्ली में शाम ढलते ही मानवता को शर्मसार करने वाली एक रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है। यहाँ के भजनपुरा थाना क्षेत्र में महज 6 साल की मासूम बच्ची के साथ पड़ोस में रहने वाले तीन नाबालिग मुस्लिम लड़कों ने सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) की घटना को अंजाम दिया। दरिंदगी इस कदर बर्बर थी कि जब बच्ची खून से लथपथ हो गई, तो उसे घर के दरवाजे पर एक आरोपित यह झूठ बोलकर छोड़ गया कि वह ‘ई-रिक्शा से टकराकर गिर गई’ है। दर्द से कराह रही वह नन्हीं जान जैसे ही कमरे के अंदर दाखिल हुई, अपनी माँ की आँखों के सामने ही बेहोश होकर गिर पड़ी। अपनी लाड़ली की यह हालत देख माँ के पैरों तले जमीन खिसक गई।

बेटी के कपड़ों को खून से सना देख माँ ममता के मारे उसे अस्पताल की ओर लेकर भागी, लेकिन रास्ते में ही उसने विचार बदला और वह बच्ची को लेकर सीधे जाफराबाद पुलिस थाने पहुँच गई। वहाँ उसने पुलिस को पूरी कहानी सुनाई। हैरानी की बात यह रही कि जिन आरोपितों को पकड़ने के लिए पुलिस को महज 10 मिनट का रास्ता तय करना था, वहाँ पहुँचने में पुलिस को 10 घंटे लग गए। इस देरी का नतीजा यह हुआ कि पुलिस केवल दो आरोपितों को ही हिरासत में ले सकी, जबकि गैंगरेप का मुख्य आरोपित घटना के 10 दिन बीत जाने के बाद भी दिल्ली पुलिस की गिरफ्त से मीलों दूर है।

ग्राउंड रिपोर्ट: बदबूदार गली के उस कमरे की कहानी जहाँ सिसक रही है मासूमियत

इस भयावह घटना की हकीकत जानने के लिए ऑपइंडिया की टीम बीते बुधवार (28 जनवरी, 2026) को पीड़ित परिवार के घर पहुँची। भजनपुरा इलाके की एक छोटी सी और बदबूदार गली के आखिरी छोर पर यह परिवार एक बड़े से कमरे में रहने को मजबूर है। यह गली आगे से बंद है, जो इलाके के घुटन भरे माहौल को दर्शाती है। कमरे के अंदर का दृश्य हृदयविदारक था। पीड़ित बच्ची कंबल ओढ़े बेड पर सुध-बुध खोकर लेटी थी, जबकि गहरी चिंता और बेबसी में डूबे माता-पिता बेड के अलग-अलग कोनों पर बैठे अपनी किस्मत और कानून व्यवस्था को कोस रहे थे।

पीड़िता के पिता ने बताया कि 18 जनवरी 2026 की शाम करीब 7 बजे जब वह बाजार सब्जी लेने जा रहे थे, तब उनकी बिटिया ने साथ चलने की जिद की। पिता ने उसे घर के बाहर एक दुकान से कुछ सामान दिलाया और बाजार चले गए। जब वह लौट रहे थे तो उन्होंने देखा कि एक आरोपित और उसका परिवार उनके सामने से ही भाग रहा था, लेकिन तब उन्हें अंदाजा नहीं था कि वह भागने वाला शख्स उनके परिवार की खुशियाँ लूट चुका है। घर पहुँचने पर उन्हें पता चला कि उसी लड़के और उसके दो साथियों ने मासूम बेटी के साथ घिनौनी हरकत की है। पिता का कहना है कि मुख्य आरोपित वर्तमान में बिहार के दरभंगा में खुलेआम घूम रहा है, लेकिन पुलिस उसे पकड़ने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। इस सदमे के कारण न तो पिता रिक्शा चलाने जा पा रहे हैं और न ही माँ काम पर जा रही है। दोनों बारी-बारी से बस अपनी बेटी के घावों को सहला रहे हैं।

दरिंदों ने बच्ची को जानवरों की तरह नोंचा- माँ

पीड़ित माँ ने उस शाम का मंजर याद करते हुए बताया कि वह घर पर ही थीं तभी एक आरोपित लड़का उनकी बेटी को गोद में उठाकर लाया और एक्सीडेंट की झूठी कहानी गढ़ी। माँ ने जब देखा कि बच्ची के प्राइवेट पार्ट से खून बह रहा है तो उनका माथा ठनका। उन्होंने आरोपित से सवाल किया कि अगर टक्कर लगी तो चेहरे या सिर पर चोट क्यों नहीं है? इसके बाद वह आरोपित बच्ची को वहीं छोड़कर भाग निकला। माँ ने बताया कि दरिंदों ने बच्ची को जानवरों की तरह नोंचा था। उसके शरीर पर दांतों के निशान थे, कपड़े फटे हुए थे और कान पर गंभीर सूजन थी।

जब पुलिस को लेकर माँ घटनास्थल पर पहुँची तो वहाँ का नजारा देख रूह काँप गई। एक चूड़ी की फैक्ट्री की छत और दीवारों पर खून के धब्बे बिखरे हुए थे, जो चीख-चीख कर उस शाम की बर्बरता गवाही दे रहे थे। पुलिस ने मौके का वीडियो तो बनाया लेकिन दबिश देने में इतनी देरी की कि मुख्य आरोपित को फरार होने का पूरा मौका मिल गया। हद तो तब हो गई जब घटना के अगले दिन एक आरोपित की माँ ने पीड़ित परिवार के घर आकर सहानुभूति दिखाने के बजाय उन्हें धमकाया और कहा कि ‘तेरी बेटी के साथ जो हुआ वह ठीक ही हुआ, ऐसे ही होना चाहिए।’

तीन दरिंदों ने मुँह में कपड़ा ठूँस कर लूटी मासूमियत

बिस्तर पर लेटी उस 6 साल की बच्ची ने जब अपनी टूटी-फूटी जुबान से दर्द बयाँ किया, तो वहाँ मौजूद हर शख्स की आँखें नम हो गईं। बच्ची ने बताया कि वे तीन लड़के थे जिन्होंने उसके साथ गंदा काम किया। उसे डराया-धमकाया गया और उसकी चीखें दबाने के लिए उसके मुँह में कपड़ा ठूँस दिया गया था। आरोपितों ने न केवल कानून का उल्लंघन किया, बल्कि मानवता के हर उस मापदंड को तोड़ दिया जो समाज को सुरक्षित बनाता है।

यह पीड़ित परिवार मूल रूप से उत्तराखंड के रुद्रपुर जिले का रहने वाला है और पिछले 15 सालों से दिल्ली में आजीविका की तलाश में संघर्ष कर रहा है। पिता पैडल वाला रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पेट पालते हैं, जबकि माँ एक कागज बनाने वाली फैक्ट्री में मजदूरी करती है। यह परिवार पिछले तीन सालों से भजनपुरा के इस किराए के कमरे में रह रहा है। पिता बताते हैं कि उनके पाँच बच्चे थे (3 लड़की, 2 लड़का) लेकिन आठ महीने पहले 14 साल के सबसे बड़े बेटे की बीमारी के कारण मौत हो गई। गरीबी के चलते वह अपने बच्चों तक का इलाज नहीं करा सके। अब इस दरिंदगी ने उनकी बची-खुची हिम्मत भी तोड़ दी है।

पिता बताते हैं कि जिस गली में यह वारदात हुई, वहाँ उनका अकेला हिंदू परिवार रहता है, जबकि बाकी सभी पड़ोसी मुस्लिम समुदाय से हैं। हालाँकि, यह पूरा इलाका हिंदू बाहुल्य है, लेकिन उस विशेष गली में वे सामाजिक और सुरक्षा के लिहाज से खुद को बेहद कमजोर महसूस कर रहे हैं। 12 वर्ष की उनकी बड़ी बेटी अब घर पर रहकर छोटे भाई-बहनों की देखभाल करती है, क्योंकि माता-पिता इस सदमे से उबर नहीं पा रहे हैं।

पड़ोसी बोले- आरोपितों को हो फाँसी की सजा

इलाके के लोगों में भी इस घटना को लेकर भारी रोष व्याप्त है। गली में रहने वाली एक हिंदू महिला ने गुस्से में कहा कि आरोपितों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए कि किसी की रूह काँप जाए। उन्हें तड़पा-तड़पा कर चौराहे पर मारना चाहिए।

वहीं, बाजार में चाय बेचने वाली एक मुस्लिम महिला ने भी आरोपितों के लिए फाँसी की माँग की। उन्होंने कहा कि ‘आज उस बच्ची के साथ हुआ है, कल हमारी बेटियों के साथ भी हो सकता है।’

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