इशरत जहाँ ने भड़काऊ भाषण देते हुए कहा था- "हम मर भी जाएँ लेकिन यहाँ से नहीं हटेंगे। हम आज़ादी लेकर रहेंगे।" इशरत के समर्थक खालिद ने भीड़ से पुलिस पर पत्थरबाजी करने को कहा था। साबू अंसारी उस भीड़ का नेतृत्व कर रहा था, जिसने पुलिस पर पत्थरबाजी की।
धुर वामपंथी संगठनों के प्रभाव वाले छात्र संघ ने पोस्टर जारी कर कहा था, “हमारा कैंपस/JNUSU ऑफिस उन सभी लोगों के लिए खुला है, जिन्हें आश्रय की जरूरत है।” पोस्टर में 4 लोगों के नाम और नंबर भी थे। ये नाम हैं- आइशी घोष, साकेत मून, सतीश चंद्र और दानिश।
24 फरवरी को हिंसा भड़कने के बाद श्याम दुकान बंद ही कर रहे थे कि दंगाइयों की भीड़ अचानक से पत्थरबाजी करती हुई आई। दंगाइयों ने पहले लूटपाट और तोड़फोड़ की। इसके बाद दुकान को आग के हवाले कर दिया।
शाकिर ने 2018 के अंत से फरवरी 2019 तक अपने घर में आदिल अहमद डार और पाकिस्तानी आतंकवादी मोहम्मद उमर फारूक को शरण दी थी। विस्फोटक जुटाने में मदद की थी। इस हमले 40 जवान बलिदान हो गए थे।
कन्हैया कुमार और उसके साथियों के खिलाफ बीते साल जनवरी में ही पुलिस ने आरोप पत्र दायर किया था। लेकिन केजरीवाल सरकार फाइल पर कुंडली मारे बैठी थी। दबाव बढ़ने पर अब उसने देशद्रोह का केस चलाने को मॅंजूरी दे दी है।
अंकित शर्मा को दंगाई घसीटकर ताहिर के घर में ले गए थे और उनकी निर्मम हत्या कर दी थी। उनका शव नाले से बरामद किया गया था। उन्हें 400 से ज्यादा बार चाकुओं से गोदा गया था।
यमुना विहार में दंगाइयों ने प्रीति के घर को घेर रखा था। पेट्रोल बम फेंका। घर में आग लग गई। अंदर प्रीति अपने पति और दो बच्चों के साथ फॅंसी थी। आज भी प्रीति उस वक्त को याद कर सिहर जाती हैं। आँखों में मौत का खौफ दिखाई देता है और गला भर आता है।