एक वीडियो में सीपीआई नेता डी. राजा की बेटी अपराजिता के हाथ में डंडा है। लेफ्ट विंग के ऐक्टिविस्टिस और छात्र विडियो में मफलर पहने हुए रॉड और डंडे इकट्ठे करते दिख रहे हैं। दूसरे वीडियो में वामपंथी प्रोफेसर बीएस बडोला को सुरक्षाकर्मियों को धमकी देते देखा जा सकता है।
ऑपइंडिया पर ABVP JNU के छात्र मनीष जांगिड़ का वो इंटरव्यू, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे साज़िश के तहत जेएनयू में हिंसा हुई और तुरंत कॉन्ग्रेस व वामपंथी नेता पहुँच गए। उन्होंने राहुल कँवल पर भी बड़ा आरोप लगाया। जेएनयू में कैसे वामपंथी गुंडों को बचाया जा रहा है, जानें मनीष के शब्दों में।
इन तस्वीरों में पुलिसकर्मी "नो सीएए, नो एनआरसी", "वी अपोज एनआरसी एन्ड सीएए", "मासूमों पर लाठीचार्ज अब हमसे न हो पाएगा" और "नो एनआरसी, नो कैब" लिखी तख्तियाँ लेकर धरना देते हुए दिख रहे हैं।
ऑपइंडिया ने एक ख़बर में बताया था कि कॉन्ग्रेस के अधिकतर विधायक ग्रामीण इलाक़ों से जीत कर आए हैं। ऐसे में, पार्टी को सहकारिता, कृषि और ग्रामीण सम्बन्धी एक भी विभाग न मिलना पार्टी नेताओं के बीच नाराज़गी की वजह बन रही है।
ये पहली बार नहीं है जब प्रवेश वर्मा ने इस मुद्दे को सार्वजनिक तौर पर उठाया। इससे पहले वे इस संबंध में 18 जून को दिल्ली के उपराज्यपाल को पत्र लिख चुके हैं। उस पत्र में उन्होंने आरोप लगाया था कि देश की राजधानी में कई मस्जिदों का निर्माण सरकारी जमीन पर अवैध रूप से किया गया है।
काशी विद्वत परिषद के रामनारायण द्विवेदी ने ऑपइंडिया को बताया कि परिषद की बैठक में ये प्रस्ताव रखा गया था कि सुबह की आरती और दर्शन के समय जो लोग शिवलिंग का स्पर्श दर्शन करना चाहते हैं या फिर स्पर्श कर के पूजन करना चाहते हैं, उनके लिए ड्रेस कोड तय किए जाएँ।
"आप मुझसे तारीख मत पूछिए, मैंने आपसे कह दिया तो ये होकर रहेगा। हम कोशिश ही कर सकते हैं और कोशिश ही कर रहे हैं। आप लोग थोड़ा टाइम दीजिए। आप लोग परीक्षाओं को FIR से नहीं जोड़ सकते हैं। हम कोर्ट जाएँगे और कोर्ट की तारीखें हम तय नहीं कर सकते हैं। आप लोगों की ही माँग पर यूनिवर्सिटी को खोला गया।"