बांग्लादेश के लगभग 7 साल पुराने वीडियो को ट्वीट कर इमरान ने दावा किया कि भारतीय पुलिस मुस्लिमों पर अत्याचार कर रही है। वहीं, यूपी पुलिस ने भी साफ़ कर दिया है कि ये वीडियो फर्जी हैं और उनकी ओर से इस तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गई है। बुरी तरह ट्रोल होने के बाद इमरान ने ये वीडियो हटा लिया।
"मैं यहाँ मुख्यमंत्री से मिलने आया। मैंने उनसे मिलने हेतु अपॉइंटमेंट के लिए कई गुजारिश की। लेकिन मैं उनसे नहीं मिल सका। सावरकर जी की इज्जत का मामला होने के बाद भी उनके (मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे) पास मुझसे बात करने के लिए एक मिनट का समय नहीं हैं।"
पाकिस्तान के इस उग्र भीड़ ने शाम होते-होते भी ननकाना साहिब गुरुद्वारे को घेर रखा है। वहीं, पुलिस-प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। लोग बड़ी मुश्किल से अपनी जान बचाकर अंदर छिपे हुए हैं।
भाजपा को धोखा देने के बाद शिवसेना से जनता ने उम्मीद की थी कि वे पार्टी की मूल विचारधारा यानी 'हिदुत्व' के साथ बेईमानी न करें। लेकिन अब आदित्य ठाकरे के ऐसे समारोह में शामिल होने की खबर देखकर लग रहा है कि शिवसेना अपनी मूल विचारधारा पर भी पानी फेरने को तैयार है।
इससे पहले कि माहौल बिगड़ता घटना की सूचना मिलते ही एसडीएम ऋषिराज, सीओ यूएम मिश्रा पुलिस दल-बल के साथ घटना-स्थल पर पहुँचे। पुलिस के आते ही सभी उपद्रवियों ने अपने घरों और गलियों में घुसना शुरू कर दिया और ग़ायब हो गए।
हिंसा में शामिल बांग्लादेशी घुसपैठिए सीमापुरी में छिपकर रह रहे थे। जुमे की नमाज के बाद भड़की हिंसा के दौरान जमकर उत्पात मचाया गया था। उपद्रवियों ने पुलिस पर हमले भी किए थे।
सीएए और एनआरसी के मुद्दे पर जमात-ए-इस्लामी हिंद मुंबई, मराठी पत्रकार संघ और एसोसिएशन ऑफ प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (एपीसीआर) के संयुक्त कार्यक्रम मुंबई वीटी स्टेशन के नजदीक पत्रकार भवन में शनिवार शाम को रखा गया है।
इस मामले में पुलिस ने 13 मुकदमें दर्ज कर क़रीब 148 उपद्रवियों को नामजद किया और 500 से अधिक लोग अज्ञात हैं। पुलिस ने दंगे में शामिल उपद्रवियों की फोटो और वीडियो के आधार पर उनकी पहचान की है। साथ ही दंगाइयों के पोस्टर्स भी शहर भर में लगाए गए हैं।