सिंधिया ने अब राज्य सरकार की ट्रांसफर और पोस्टिंग पर सवाल उठाए हैं। सरकार पर तंज कसते हुए कहा, “ट्रांसफर- पोस्टिंग का क्या हाल है वो तो सब जानते ही हैं। मैं आपसे ये कहूँगा कि आप काम पर ध्यान दें।”
वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिस एक आरोपित को बाइक पर बैठाकर ले जा रही है। वीडियो के अंत में एक युवक आकर बताता है कि महिला के साथ बदतमीजी करने वालों में 6 लड़के शामिल थे।
पुलिस के अनुसार तीनों कथित एक्टिविस्ट्स 4 ऐसे संगठनों से जुड़े थे, जो प्रतिबंधित माओवादी संगठन के मुखौटे के रूप में काम करते हैं। वर्नोन और फरेरा नक्सली संगठन में भर्ती के लिए के लिए भी लोगों को उकसा रहे थे।
जय शाह को निशाना बनाते हुए कार्ति ने ट्वीट किया, "क्या होता अगर मेरे पिता के गृह मंत्री रहते हुए मुझे बीसीसीआई का सचिव चुना जाता। उस समय राष्ट्रवादी और भक्त इस पर कैसी प्रतिक्रिया देते?" लेकिन यह पैंतरा उन पर ही भारी पड़ गया।
इस तरह की टिप्पणी कर लोगों को उकसाते वक्त सिद्धरमैया शायद यह भूल जाते हैं कि संविधान में कई बार बदलाव और संशोधन किए गए हैं। इनमें से कई सारे विवादास्पद संवैधानिक संशोधनों के लिए उनकी खुद की पार्टी जिम्मेदार है।
पाकिस्तान को इस मामले में चीन, तुर्की और मलेशिया से मदद की आस थी। पिछली बार उसे ब्लैकलिस्ट होने से इन्हीं तीन मुल्कों ने बचाया था। लेकिन, इस बार ये तीनों देश भी उससे किनारा करते नजर आ रहे हैं।
"हम हिंदुस्तान के वफादार नागरिक हैं। विवाद पसंद नहीं करते। हम मुस्लिम हैं। हमारा मजहब कहता है कि जिस मुल्क में रहो उसके वफादार बनो, उसका कानून मानो। कौन-क्या कह रहा है उससे हमारा कोई लेना-देना नहीं है।"
वसुंधरा राजे ने मीसा बंदियों के लिए पेंशन शुरू किया था। राजे ने उन्हें लोकतंत्र सेनानी का दर्जा दिया था। मीसा बंदियों को 20 हजार रुपए मासिक पेंशन, निशुल्क बस यात्रा और निशुल्क चिकित्सा सुविधा देने की योजना लागू थी।