“हमें ऐसे बयानों की निंदा करने की जरूरत है। कश्मीर बंद नहीं है। वहाँ कर्फ्यू नहीं है। अगर कर्फ्यू होता तो लोगों को ‘कर्फ्यू पास’ के साथ बाहर निकलना होता।”
सुरक्षा परिषद के बाद अब मानवाधिकार परिषद में भी पाकिस्तान की किरकिरी हुई है। भारतीय विदेश मंत्रालय के सचिव विजय ठाकुर ने कहा कि दुनिया ख़ूब समझती है कि जो देश आतंकवाद का मुख्य केंद्र है, वह ग़लत नैरेटिव फैलाता रहता है।
स्कूलों की पोल तब खुली, जब पैरेंट्स एसोसिएशन ने एक आरटीआई दाखिल की। 2000 से अधिक स्कूलों में फायर एनओसी का न होने का मतलब है कि 2 लाख बच्चे ख़तरे की जद में आ जाते हैं। दिल्ली सरकार किस अनहोनी के इंतजार में हाथ पर हाथ धरे बैठी है?
इस डॉक्यूमेंट के 11वें पेज पर जम्मू कश्मीर में ‘लोगों पर भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा अत्याचार’ की बात कही गई है, जो पाकिस्तान का वर्षों पुराना प्रोपेगेंडा रहा है। इसमें ऐसे महिलाओं को ढूँढ कर लाने और उनका अनुभव प्रकाशित करने को कहा गया है, जिन्हें यौन शोषण का सामना करना पड़ा। इसी तरह प्रोपेगेंडा फैलाने के लिए अन्य विभिन्न तरीकों की बात की गई है।
'चर्च ऑफ इंग्लैंड' के सबसे वरिष्ठ पादरी वेबली ने कहा कि जलियाँवाला बाग़ में जो अपराध हुआ था, उसके लिए वह शर्मिंदा हैं और एक धार्मिक नेता होने के तौर पर वह इस त्रासदी की निंदा करते हैं। उन्होंने माफ़ी माँगते हुए कहा कि इसकी यादें हमेशा रहेंगी।
फारूक खान ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि एक महीने से अधिक समय बीत गया, लेकिन सुरक्षा बलों तथा पुलिस की ओर से कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए एक भी गोली नहीं चलाई गई।
पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में जम्मू कश्मीर का मसला उठाया है। भारत द्वारा इस सम्बन्ध में उसे उसी मंच पर जवाब दिया जाएगा। पाकिस्तान इस मामले में यूएनएचआरसी की अर्जेन्ट बैठक बुलाना चाहता है। लेकिन......