"पाठ्यक्रम की पुस्तकों में वीर सावरकर जैसे लोगों की प्रशंसा की गई थी, जिन्होंने देश के स्वतंत्रता संग्राम में कोई योगदान नहीं दिया। जब हमारी सरकार ने सत्ता संभाली, तब पुस्तकों में पढ़ाई जा रहीं इन चीजों का विश्लेषण करने के लिए एक समिति बनाई, जिसके बाद पुख्ता सबूतों के आधार पर ये बदलाव किए गए।"
जब मामला बढ़ने लगा तो परम विशिष्ट सेवा मेडल से नवाजे जा चुके जनरल साहब रक्षात्मक मुद्रा में आ गए। उन्होंने वह ट्वीट डिलीट कर दिया। साथ ही सफाई देनी शुरू कर दी कि उनका वह मतलब नहीं था जो समझा और प्रसारित किया जा रहा है।
इंफोसिस फाउंडेशन का कहना है कि संगठन ने खुद गृह मंत्रालय से एफसीआरए पंजीकरण को रद्द करवाने के लिए ओवदन किया था। जिसके बाद गृह मंत्रालय ने यह कार्रवाई की। इसके लिए वो मंत्रालय को धन्यवाद देते हैं।
ज़िले में इतना बड़ा क़द रखने के बावजूद अगर उनकी हत्या की नौबत आ जाती है और हमलावरों की भीड़ में समुदाय विशेष के होने की बात मीडिया एवं प्रशासन द्वारा छिपाई जाती है (सांसद के दावे के अनुसार), तो यह एक बहुत ही गंभीर मामला है। सांसद की तरफ से ऑपइंडिया को बताया गया कि हमलावरों में 90% समुदाय विशेष से थे।
"वो दूसरों की पत्नियों व बहनों की इज़्ज़त कैसे कर सकते हैं, जब उन्होंने राजनीतिक फ़ायदे के लिए ख़ुद की ही पत्नी को छोड़ दिया। मुझे तो यह भी पता चला है कि भाजपा में ख़ासकर विवाहित महिलाएँ अपने पतियों को पीएम मोदी के नजदीक जाते देख कर यह सोचते हुए काफ़ी घबराई रहती हैं।"
नवीन पटनायक ने इस पत्र में ओडिशा में हुए नुकसान का जिक्र करते हुए पुनर्वास के लिए केंद्र से मदद का अनुरोध किया है। उन्होंने चक्रवात से प्रभावित लोगों के लिए प्रधान मंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) के तहत 5 लाख घर बनाए जाने की माँग की है।
दिल्ली में एक सार्वजानिक मंच से बोलते हुए गुस्साए केजरीवाल ने कहा, "मैं बीजेपी वालों को भी चेतावनी देता हूँ, अपनी औकात में रहो। दिल्ली की जनता से पंगा मत लो वरना ये तुम्हारे घर में घुस कर इतनी जूते मारेंगे, इतने जूते मरेंगे, कि तुम्हारी शक्ल ही नहीं दिखेगी।"