संसद में कॉन्ग्रेस बिना छपी किताब का सहारा लेकर सरकार और प्रधानमंत्री को बदनाम करने की कोशिश की। लेकिन जब निशिकांत दुबे ने छपी किताबें पेश की, तो कॉन्ग्रेस बौखला गई।
जहाँ हर बार की तरह बजट से पहले निर्मला सीतारमण की साड़ी लोगों तक पहुँच जाती है, और उस साड़ी के जरिए बुनकरों की मेहनत पहुँच जाती है। लेकिन रवीश कुमार इसे पचा नहीं पा रहे हैं।
बिजनेस लीडर्स के मंच से बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने बेलडांगा हिंसा की पृष्ठभूमि में 'मुस्लिम वोटबैंक' को खुश करने के लिए कट्टरपंथी भीड़ द्वारा सड़कों पर अवरोध करने का बचाव किया।
UN में भारत ने ट्रंप के सीजफायर के दावों को एक बार फिर सिरे से खारिज करते हुए पाकिस्तान को उसकी औकात दिखाई। ऑपरेशन सिंदूर पर दोहराया कि फैसला भारत ने खुद लिया।
RJ सायमा ने अपराधी का मुस्लिम नाम छिपाकर 'CRPF' पर फोकस किया। यह वही सायमा है, जिसको दिल्ली ब्लास्ट के फिदायीन उमर नबी का वीडियो प्रसारित होना नामंजूर था।
मुंब्रा वार्ड में 'हिजाब वाली' सहर यूनुस शेख AIMIM के टिकट से नई पार्षद बनीं। 22 साल की सहर शेख ने जीत के बाद थैंक्यू स्पीच में कहा कि उनका मकसद पूरे मुंब्रा को 'ग्रीन' (हरा) रंग से रंगना है।
आरफा खानुम शेरवानी ने नमाज को दुनिया की सबसे 'खामोश इबादत' बताया है। अगर ऐसा है तो जुमे की नमाज के बाद दंगा कौन भड़का रहा? क्या ये सब उसी 'खामोश इबादत' का हिस्सा है?