182 कुल लेख

शिव

7 वर्षों से खबरों की तलाश में भटकता पत्रकार...

जैश-ए-मोहम्मद का ‘डिजिटल हवाला’: 300+ मरकज बनाने के लिए 390 करोड़ रुपए जुटा रहा आतंकी मसूद अजहर, FATF से बचने के लिए डिजिटल वॉलेट्स...

ऑनलाइन पैसा लेने के अलावा जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी जुमे की नमाज के दौरान मस्जिद से पैसा इकट्ठा कर रहे हैं। मसूद का ट्रस्ट 'अल-रहमत' भी आतंकी फंडिग में अहम कड़ी बन गया है।

पाकिस्तान से सिंधु जल संधि का ‘खलनायक’ भी नेहरू ही: संसद की अनुमति लिए बगैर किया था लागू, न वाजपेयी की सुनी-न ‘दूसरा विभाजन...

सिंधु जल संधि के विरोध में विपक्षी विभिन्न दलों के विभिन्न सांसदों समेत कई कॉन्ग्रेसी सांसद भी थे और उनका मानना था कि भारत ने पाकिस्तान को बहुत रियायत दे दी है।

द्रौपदी मुर्मू, जगदीप धनखड़ और अब CP राधाकृष्णन…हर बात में तमिल राग अलापने वाले स्टालिन कर पाएँगे विरोध? BJP के मास्टरस्ट्रोक से उपराष्ट्रपति चुनाव...

द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्रपति और धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद के चुनाव के दौरान भी विपक्षी एकता छिन्न भिन्न हो गई थी। ममता बनर्जी की पार्टी तल्ख रिश्तों के बाद भी धनखड़ का विरोध नहीं कर पाई थी।

7 दिनों में हलफनामा दें या माफी माँगें…चुनाव आयोग ने राहुल गाँधी के दावों की खोल दी पोल: CEC ने बिहार SIR में गड़बड़ी...

चुनाव आयोग ने राहुल गाँधी के 'वोट चोरी' के आरोपों पर कड़ा पलटवार किया है। CEC ने कहा है कि राहुल गाँधी या तो 7 दिन में अपना हलफनामा दाखिल करें या वो देश से माफी माँगें।

यूँ ही सुप्रीम कोर्ट से मोदी सरकार ने नहीं कहा- इससे पैदा होगी संवैधानिक अराजकता, राष्ट्रपति ने भी ‘डेडलाइन’ पर पूछे थे 14 सवाल:...

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति और राज्यपाल द्वारा बिल की मंजूरी दिए जाने के लिए डेडलाइन दी थी जिस पर केंद्र सरकार ने 'संवैधानिक अराजकता' की स्थिति पैदा होने की चेतावनी दी है।

लाल किले से सुकमा तक ‘वामपंथी आतंक’ पर एक साथ प्रहार, जिन गाँवों में चलता था ‘लाल सलाम’ वहाँ पहली बार 15 अगस्त पर...

125 जिलों में फैला नक्सलवाद अब 20 जिलों तक सिमट गया है। वहीं, वामपंथी आतंकियों का गढ़ रहे बस्तर के 29 गाँवों में पहली बार स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराया गया है।

न्यूक्लियर ब्लैकमेल नहीं अब भारत का डायरेक्ट एक्शन: 1990 से अमेरिका की गोद में बैठ भारत को ‘चुराए’ न्यूक्लियर हथियारों का डर दिखाता रहा...

पाकिस्तान की परमाणु धमकियाँ कई बार सफल भी हुईं लेकिन अब भारत की नीति बदल गई है। अब भारत ने नया 'न्यू नॉर्मल' बना लिया है, जिसमें किसी परमाणु ब्लैकमेल की कोई जगह नहीं है।

क्या ‘मनोविकारी’ हैं राहुल गाँधी? भारतीय राजनीति के इस ‘शिशुपाल’ के कितने अपराध क्षमा करेंगी हमारी लोकतांत्रिक संस्थाएँ?

यह पहली बार नहीं है जब राहुल गाँधी ने किसी लोकतांत्रिक संस्था पर हमला किया है। अनाप-शनाप बोलने की इस लंपट प्रवृत्ति को रोकने के लिए दंड के नए विधान लिखने होंगे।