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दिल्ली के दारू घोटाले में नेता नपे, अब पार्टी का नंबर: कोर्ट को ED ने बताया- AAP की संपत्ति जब्त करना चाहते हैं, लेकिन चुनाव को लेकर दुविधा में हैं

शराब घोटाले में दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की जमानत याचिका पर बुधवार (3 अप्रैल 2024) को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान सीएम केजरीवाल की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता और कॉन्ग्रेस के नेता अभिषेक मनु सिंघवी के पेश हुए, जबकि सरकार का पक्ष एएसजी एसवी राजू ने रखा।

दिल्ली हाई कोर्ट की न्यायाधीश स्वर्णकांता शर्मा की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान ED ने अपनी बात रखते हुए कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध हुआ है और इसमें कोई शक नहीं है। उन्होंने कहा कि अरविंद केजरीवाल खुद को संत की तरह प्रदर्शित करते हैं, लेकिन उन्होंने घोटाले में जो भी किया है वह बेहद चतुराई से किया है।

ED की ओर से एएसजी ने कहा कि बहुत मुश्किल से सबूत इकट्ठा किए गए हैं। उन्होंने कहा, “हम आम आदमी पार्टी की कुछ संपत्ति भी जब्त करना चाहते हैं। यदि हम ऐसा करेंगे तो कहा जाएगा कि चुनाव के समय पर ऐसा किया जा रहा है और नहीं करेंगे तो कहा जाएगा कि सबूत कहाँ है। मैं बहुत दुविधा में हूँ।”

राजू ने कोर्ट को बताया कि आबकारी नीति में 5 प्रतिशत प्रॉफिट को 12 प्रतिशत इसलिए किया गया, क्योंकि 7 प्रतिशत की रिश्वत ली जा सके। उन्होंने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि घोटाला हुआ है। शिकायत के बावजूद इंडो स्प्रिट को लाइसेंस दिया गया। इतना ही नहीं, जिन्होंने रिश्वत देने से मना किया, उन्हें लाइसेंस वापस देने को कहा गया।

उधर, अरविंद केजरीवाल की ओर से पेश सिंघवी ने इस मामले में गवाहों और ईडी के बीच फिक्स्ड मैच बताया। उन्होंने कहा कि गवाहों ने अपने शुरुआती बयानों में अरविंद केजरीवाल का नाम नहीं लिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि ED ने इन लोगों पर दबाव डालकर बयान दिलवाए हैं। केजरीवाल का नाम लेने के बाद इन सभी गवाहों को राहत दी गई।

सिंघवी ने कहा कि आचार संहिता लागू होने के बाद मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी का उद्देश्य अरविंद केजरीवाल को अपमानित करना और चुनाव प्रचार में शामिल होने से रोकना है। उन्होंने कहा कि केजरीवाल के पास से PMLA कानून के तहत धारा 50 की कोई सामग्री नहीं है। उन्हें बिना किसी जाँच, बयान और सबूत के गिरफ्तार किया गया है।

ईडी ने कोर्ट को बताया कि अरविंद केजरीवाल ने घोटाले के पैसों का इस्तेमाल आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए गोवा चुनाव अभियान में किया था। जाँच एजेंसी ने साफ तौर पर यह भी कहा कि अरविंद केजरीवाल सीधे तौर पर उत्पाद शुल्क नीति 2021-22 के निर्माण में शामिल थे और वही उसके मुख्य साजिशकर्ता हैं।

वहीं, ED ने अपने जवाब में यह भी कहा कि साउथ ग्रुप को दिए जाने वाले लाभों को ध्यान में रखकर इस शराब नीति को तैयार किया था। इसके गठन में विजय नायर, मनीष सिसोदिया और साउथ ग्रुप के सदस्य प्रतिनिधियों की मिलीभगत थी। अरविंद केजरीवाल ने उत्पाद शुल्क नीति 2021-22 के निर्माण और कार्यान्वयन में लाभ देने के बदले में साउथ ग्रुप से रिश्वत की माँग की थी।

दुनिया में कहीं भी आया संकट, भारतीयों के लिए PM मोदी बन गए संकटमोचक: यमन से लेकर इजरायल तक चले हर ऑपरेशन के बारे में जानिए सब कुछ

विश्व शान्ति की अस्थिर हालत आज किसी से छिपी नहीं है। हर वर्ष कहीं ना कहीं से युद्ध- गृह युद्ध के समाचार मिलते हैं। इन युद्धों के बीच कई देशों के नागरिक फंसते हैं। भारत के भी करोड़ों नागरिक विश्व भर के दूसरे देशों में रहते हैं। विश्व भर में कहीं भी बड़ा युद्ध या आपदा आ जाए भारतीय नागरिकों को विश्वास है कि मोदी सरकार उन्हें वापस अपने देश ले आएगी। मोदी सरकार ने बीते 10 वर्षों में इस बात को सिद्ध किया है कि वह विश्व के किसी भी देश से भारतीयों को वापस लेकर आएगी। यह बीते समय में हुए राहव बचाव ऑपरेशन दिखाते हैं।

2020 में आई कोरोना महामारी के दौरान दुनिया के कई देशों से लाखों भारतीयों को कठिन समय में निकाल कर लाया। यूक्रेन-रूस युद्ध के दौरान भारत सरकार के मंत्री वहाँ फंसे भारतीय छात्रों को लेने गए। सूडान से भारतीय सेना लोगों को निकाल कर लाई। मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद से मात्र भारतीयों ही नहीं बल्कि, आसपास के देशों के लोगों को भी भारत ने संकट से बचाया है और संकटमोचक बन कर उभरा है। ऐसे में मोदी सरकार के इन बड़े ऑपरेशन पर एक नजर डाली जाए तो पता चलता है कि यह मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धि है।

नेपाल में आया भूकम्प, भारत बढ़ाया ‘मैत्री’ का हाथ

नेपाल में अप्रैल 2015 में भीषण भूकम्प आया। इस भूकम्प से नेपाल का बड़ा हिस्सा और भारत का भी बड़ा इलाका थर्रा गया। पहले से आर्थिक रूप से कमजोर नेपाल की इस भूकम्प ने कमर तोड़ दी। हजारों घर गिरे, लाखों लोग बेघर हुए। नेपाल और भारत में रोटी-बेटी का रिश्ता रहा है। ऐसे में बड़ी सँख्या में भारतीय, नेपाल के भीतर इस भूकम्प में फंस गए। नेपाल के बड़े भाई का फर्ज अदा करते हुए मोदी सरकार ने तुरंत भारतीय सेनाओं को नेपाल में राहत बचाव के लिए भेजा।

भारतीय वायु सेना और थल सेना समेत आपदा मोचन बल की टुकड़ियों ने नेपाल पहुँच कर मोर्चा संभाला। इस दौरान भारत ने नेपाल की सहायता करने के साथ ही यहाँ फंसे 43,000 से अधिक भारतीयों को जमीन के रास्ते सुरक्षित रूप से 30 अप्रैल तक ही निकाल लिया था। वायु सेना और सेना के विमानों ने दौरान 2200 से अधिक उड़ानों के साथ 11,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया। इस दौरान भारती सेनाओं ने 1700 टन से अधिक सहायता का सामान पहुँचाया। भारतीय सेनाओं ने बड़ी संख्या में नेपालियों को भी बचाया।

यमन में हुआ गृह युद्ध, भारत ने पहुँचाई ‘राहत’

विश्व के नक़्शे पर बीच में पड़ने वाला अरबी भाषी इलाका लम्बे समय से विवादों और गृह युद्धों का गढ़ रहा है। अफ्रीका के हिन्द महासागर वाले कोने वाले इलाके में स्थित देश यमन भी 2015 में गृह युद्ध में फंसा। हूथी विद्रोहियों और सरकार के बीच भीषण लड़ाई छिड़ी। बड़ी सँख्या में यहाँ भारतीय संकट में फंस गए। मोदी सरकार ने तुरंत ही इस संकट से भारतीयों को निकालने के लिए आगे आई। भारत ने यहाँ से आपने नागरिकों को निकालने के लिए ‘ऑपरेशन राहत’ चलाया।

भारत ने नौसेना और वायु सेना को यहाँ भेज कर अपने नागरिक निकालने चालू किए। भारत ने 1 अप्रैल, 2015 को इस ऑपरेशन को चालू करके 11 अप्रैल को समाप्त किया। इस दौरान भारत ने 5600 से अधिक लोगों को बचाया। इनमें 4600 से अधिक भारतीय और 900 से अधिक विदेशी नागरिक शामिल थे। भारत ने अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों के नागरिकों को भी बचाया। भारत ने विश्व के 41 देशों के नागरिकों को इस ऑपरेशन में बचाया था। इस ऑपरेशन के लिए पीएम मोदी ने केन्द्रीय राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह को भेजा था।

दक्षिणी सूडान में भिड़े विद्रोही-सरकार, संकट मोचन गया भारत

विश्व के सबसे नए देश दक्षिणी सूडान में 2016 में भारी लड़ाई छिड़ी। सरकार और विद्रोहियों के बीच गृह युद्ध की स्थिति आ गई। दक्षिणी सूडान के तत्कालीन राष्ट्रपति ने अपने पुराने साथी पर विद्रोह का आरोप लगाया। पहले ही समस्याओं में फंसे दक्षिणी सूडान में और बुरी स्थिति आ गई। भारत के भी कुछ नागरिक इस समस्या में फंसे। मोदी सरकार ने जुलाई 2016 में यहाँ से अपने नागरिकों को बचाने के इए ‘ऑपरेशन संकट मोचन’ चलाया।

मोदी सरकार ने यहाँ भी केन्द्रीय राज्य मंत्री वीके सिंह को विदेश मंत्रालय की एक टीम के साथ भेजा। यहाँ चलाए गए सफल ऑपरेशन में भारत ने 155 लोगों को बचाया जिनमें 153 भारतीय और 2 नेपाली नागरिक अपने देश वापस सुरक्षित वापस लौटे। इस ऑपरेशन में भी भारत ने वायु सेना का विमान भेजा था जो कि यहाँ से लोगो को बचा का लाया। इस ऑपरेशन ने यह सिद्ध किया कि किसी भी देश में भारत भूमि से कितनी भी दूर भारतीय अगर संकट में होंगे तो सरकार उनकी सहायता के लिए सामने आएगी।

ऑपरेशन समुद्र सेतु और ऑपरेशन वन्दे भारत: कोरोना महामारी के बीच भारत आए देशवासी

2020 में विश्व भर कोरोना महामारी आई। इसके कारण पूरी दुनिया जहाँ की तहाँ रुक गई। बड़ी संख्या में भारतीय भी विदेशों में फंस गए। कोरोना के समय में भारतीयों को वापस अपने देश लाने के लिए भी सरकार ने कमर कसी। मोदी सरकार ने दुनिया भर से भारतीयों की वापसी के लिए ऑपरेशन समुद्र सेतु और वन्दे भारत मिशन चलाया। नौसेना ने अपने जहाजों जलाश्व, मगर और ऐरावत और शार्दूल को काम पर लगाया। नौसेना इस दौरान अलग अलग देशों से 3992 लोगों को बचा कर सुरक्षित वापस लाई।

जहाँ कोरोना के दौरान पूरी दुनिया में उड़ाने बंद हो गई थी, वहीं मोदी सरकार ने इस दौरान वन्दे भारत मिशन चालू करके अपने नागरिकों को 100 से अधिक देशों से निकाला। मार्च 2022 में संसद में दिए गए एक जवाब में विदेश मंत्रालय ने बताया कि उसने 2.97 करोड़ लोगों को उसने सहायता पहुँचाई। इस दौरान चीन, अमेरिका, रूस समेत तमाम देशों से भारतीय वापस आए।

अफगानिस्तान में आया तालिबान, ऑपरेशन देवी शक्ति से वापस आए भारतीय

15 अगस्त 2021 जब भारत अपना स्वतंत्रता दिवस मना रहा था तब पड़ोसी देश अफगानिस्तान में उथल पुथल मची हुई थी। आतंकी संगठन तालिबान काबुल के दरवाजे पर खड़ा था। अफगानिस्तान की सरकार गिर चुकी थी। काबुल का पतन हो गया था। अफगानिस्तान की सुरक्षा स्थिति लगभग 4 दशकों से खराब है लेकिन अमेरिका के यहाँ रहते हुए थोड़ी सी स्थिरता आई थी। हालाँकि, तालिबान के काबुल पर कब्जे के बाद सब बदलने वाला था। कब्जे के बाद भारतीयों की सुरक्षा को लेकर चिंताएँ बढ़ गईं।

मोदी सरकार ने यहाँ से अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए ‘ऑपरेशन देवी शक्ति’ चलाया और 500 से अधिक नागरिकों को सुरक्षित निकाला। मोदी सरकार ने बड़ी सँख्या में अफगानी नागरिकों को भी निकाला जिनमें सिख भी थे। वह भी तस्वीरें सामने आई जिसमें सिख गुरुग्रंथ साहिब को सर पर लेकर भारत आए। भारत ने अफगानियों को शरण भी दी।

यूक्रेन युद्ध के बीच पहुँचा भारत, ऑपरेशन गंगा से वापस

फरवरी 2022 में रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध छिड़ गया। रूस ने यूक्रेन बड़े इलाके पर बमबारी चालू की। इस कारण यूक्रेन में बड़ी संख्या में भारतीय फंसे। इन भारतीयों में सबसे बड़ी संख्या यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले छात्रों की थी। युद्ध चालू होने के समय 20,000 से अधिक भारतीय यूक्रेन में मौजूद थे। इनको निकालने के लिए भारत सरकार पर भी दबाव था। भारत ने यूक्रेन से छात्रों को निकालने के लिए अपनी कूटनीतिक ताकत का इस्तेमाल किया।

मोदी सरकार ने रूस और यूक्रेन से बातचीत करके अपने नागरिकों के लिए सेफ कॉरिडोर बनाया। मोदी सरकार ने इस दौरान ऑपरेशन गंगा के अंतर्गत 90 से अधिक फ्लाइट के जरिए 18,282 भारतीय नागरिक वापस लाए गए। भारत सरकार के मंत्री भी इस पूरे मिशन में लगे रहे। भारत ने कई नेपाली नागरिकों को भी यूक्रेन से निकाला।

ऑपरेशन कावेरी और ऑपरेशन अजय

भारत लगातार अपने नागरिकों को दुनिया के अलग अलग कोने से बचाता रहा है। मोदी सरकार ने वर्ष 2023 में अफ्रीका के सूडान और इजरायल से अपने नागरिकों को निकाला। अप्रैल 2023 में सूडान में सेना के दो धडों के बीच भीषण जंग चालू हो गई थी। यह अब भी जारी है। सूडान में 3500 से अधिक भारतीय फंसे हुए थे। इनमे बड़ी सँख्या कर्नाटक से गए हुए लोगों की थी। भारत ने इन्हें बचाने के लिए ऑपरेशन कावेरी चलाया। ऑपरेशन कावेरी के अंतर्गत भारत ने सूडान से 3961 भारतीयों और 136 विदेशी नागरिकों को निकाला।

इस ऑपरेशन में भारतीय वायु सेना ने एक जगह पर रात में काफी खतरा उठा कर भारतीयों को बचाया। अक्टूबर, 2023 में जब इस्लामी आतंकी संगठन हमास ने इजरायल पर हमला बोला तो यहाँ से मांग आई कि भारतीयों को बचाया जाए। इजरायल के खतरनाक हालात को देखते हुए मोदी सरकार ने ऑपरेशन अजय चालू किया। भारत ने इजरायल से 1300 से अधिक नागरिक सुरक्षित रूप से निकाल लिए।

बीते कुछ वर्षों में भारत के नागरिकों में अपनी सरकार पर यह विश्वास आया है कि वह विश्व के किसी भी कोने में हों, उनके पीछे सरकार खड़ी है। भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने एक बार कहा था कि यदि कोई भारतीय नागरिक चाँद पर भी फंसा होगा तो भारतीय दूतावास उसकी सहायता करेगा। भारत आज उन्हीं शब्दों को चरितार्थ कर रहा है।

AAP कर रही थी केजरीवाल के 4.5 किलो सूखने का दावा, तिहाड़ जेल प्रशासन ने नकारा: कहा- 65 किलो के आए थे, 65 किलो के ही हैं

आम आदमी पार्टी की नेता और दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी ने दावा किया था कि 12 दिनों में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का वजन तेजी से कम हो रहा है। आतिशी ने दावा किया कि अरविंद केजरीवाल का वजन 4.5 किलो कम हो गया है। ऐसा शुगर की वजह से हुआ है। हालाँकि अब तिहाड़ जेल प्रशासन की तरफ से जानकारी सामने आई है कि आतिशी या आम आदमी पार्टी की तरफ से किए जा रहे दावे फर्जी है। तिहाड़ प्रशासन ने कहा है कि अरविंद केजरीवाल को जब जेल लाया गया था, तब उनका वजन 65 किलो था और अब भी उनका वजन 65 किलो ही है।

आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, अरविंद केजरीवाल को 1 अप्रैल 2024 को तिहाड़ जेल लाया गया था। यहाँ उनकी दो डॉक्टरों ने जाँच की थी। उनके सभी अंग पूरी तरह से ठीक हैं। उनका वजन भी 65 किलो बना हुआ है। जब से वो जेल में आए हैं, तब से अब तक उन्हें घर का बना खाना मिल रहा है। चूँकि कोर्ट का ऑर्डर है, इसलिए घर का खाना खाने की परमिशन उन्हें दी गई है। उन्हें शरीर के सभी मापदंड पूरी तरह से सामान्य हैं।

इससे पहले, दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी ने बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अरविंद केजरीवाल की सेहत को लेकर बड़े दावे किए थे। उन्होंने कहा, “ईडी जब अरविंद केजरीवाल को अपनी हिरासत में ले गई थी, जब अरविंद केजरीवाल का वजन 69.5 किलो था। आज उनका वजन 65 किलो है। उनका वजन 12 दिनों में 4.5 किलो कम हो गया है।”

आप के एक्स हैंडल पर आतिशी का वीडियो पोस्ट किया गया, जिसमें आतिशी कह रही हैं, “दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल शुगर के गंभीर मरीज हैं। डायबिटीज ऐसी बीमारी है, जो बढ़ती है, तो कई अन्य दिक्कतें पैदा होती हैं। शुगर का असर इंसान के दिल, किडनी, आँखों और पूरे नर्वस सिस्टम पर पड़ता है। गंभीर शुगर का बड़ा खतरा है शुगर लेवल का तेजी से नीचे गिरना। 50 से नीचे गिरने से जान का खतरा हो सकता है। लेकिन इसके बावजूद भी, आज तक अरविंद केजरीवाल जी ने अपने स्वास्थ्य को देश सेवा में अड़चन नहीं बनने दिया, चाहे कई बार अनशन पर बैठना हो, चाहे सुबह से लेकर देर रात तक काम करना हो।”

जेल प्रशासन की तरफ से दी गई जानकारी में आतिशी के दावे फर्जी साबित हुए हैं। जेल प्रशासन ने कहा है कि अरविंद केजरीवाल जब तिहाड़ जेल पहुँचे थे तब उनका वजन लगभग 65 किलो था और अभी भी उनका वजन 65 किलो ही है। जेल में अरविंद केजरीवाल का स्वास्थ्य फिलहाल ठीक है, शुगर नॉर्मल है शुगर लेवल रैंडम 170 है।1 घंटे पहले दोबारा शुगर चेक किया गया जो 140 है, यानी नॉर्मल है। वहीं उनका BP लेवल 116/80 है। उन्होंने आज भी सुबह उठ कर योगा किया और ध्यान लगाया। उन्होंने अपनी बैरक में वॉक भी किया।

BJP में शामिल हुए विजेंद्र सिंह बेनीवाल: मथुरा से कॉन्ग्रेस का लोकसभा प्रत्याशी बनने के थे चर्चे, भारत के लिए ओलंपिक मेडल जीतने वाले पहले बॉक्सर हैं

बॉक्सर विजेंद्र सिंह, जो फ़िलहाल कॉन्ग्रेस में हैं – वो भाजपा में शामिल होने जा रहे हैं। विजेंद्र सिंह को कॉन्ग्रेस पार्टी ने उत्तर प्रदेश के मथुरा लोकसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार अभिनेत्री हेमा मालिनी के खिलाफ उतारा था। हालाँकि, इसके कुछ ही दिनों बाद अब मीडिया में चर्चा है कि विजेंद्र सिंह भाजपा शामिल हो सकते हैं। अगर वो कॉन्ग्रेस छोड़ते हैं तो ये पार्टी के लिए भी एक बड़ा झटका होगा। उन्हें राहुल गाँधी के साथ भी देखा जा चुका है। वो सोशल मीडिया पर भी पार्टी के लिए मुखर थे।

अब लगभग पुष्ट है कि विजेंद्र सिंह नई दिल्ली स्थित BJP मुख्यालय में पार्टी का दामन थामेंगे। 2019 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उन्हें कॉन्ग्रेस ने साउथ दिल्ली से मैदान में उतारा था, लेकिन भाजपा के रमेश विधूड़ी के हाथों उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। वो तीसरे स्थान पर रहे थे। दूसरे स्थान पर AAP के राघव चड्ढा रहे थे। उन्हें 13.56% (1.64 लाख) वोट प्राप्त हुए थे। यानी, 5.22 लाख वोटों से उनकी बुरी हार हुई थी।

विजेंद्र सिंह बेनीवाल 39 वर्ष के हैं। उन्होंने 2008 में बीजिंग में हुए ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक प्राप्त किया था। वो पहले भारतीय बॉक्सर हैं, जिन्हें ओलंपिक में मेडल प्राप्त हुआ। वहीं 2009 के वर्ल्ड चैंपियनशिप में और 2010 में भारत में हुए कॉमनवेल्थ खेलों में उन्हें ब्रॉन्ज मेडल प्राप्त हुआ। उन्होंने 3 ओलंपिक खेलों में हिस्सा लिया है। हरियाणा के भिवानी स्थित कालुवास गाँव में जन्मे विजेंद्र सिंह के पिता सरकारी बस में ड्राइवर थे।

ये भी कहा जा रहा है कि विजेंद्र सिंह भाजपा के मुख्यालय पहुँच गए हैं। वो बॉलीवुड फिल्म में भी काम कर चुके हैं। उन्होंने ‘फगली’ (2014) फिल्म के जरिए डेब्यू किया था, जिसमें सलमान खान व अक्षय कुमार ने भी एक गाने में स्पेशल अपीयरेंस दिया था। विजेंद्र सिंह के भाजपा में आने के बाद जाट समाज में पार्टी की पकड़ और मजबूत होगी, साथ ही हरियाणा, दिल्ली और यूपी में भी पार्टी चुनाव प्रचार के लिए उनके चेहरे का इस्तेमाल करेगी।

खुला के तहत मुस्लिम महिलाओं को तलाक देने का अधिकार, सुप्रीम कोर्ट करेगा विचार: केरल हाई कोर्ट के फैसले को दी गई है चुनौती

सुप्रीम कोर्ट मुस्लिम महिलाओं को शरीयत के तहत मिले ‘खुला’ के अधिकार के तहत अपने शौहर को तलाक देने की वैधता पर विचार करेगा। दरअसल, केरल हाई कोर्ट ने एक फैसले में मुस्लिम महिलाओं को खुला के तहत तलाक देने का अधिकार दिया गया था। अब हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है, जिस पर सुनवाई करने लिए शीर्ष न्यायालय तैयार हो गया है।

न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने केरल मुस्लिम जमात और एक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका को लेकर केरल उच्च न्यायालय को नोटिस भी जारी किया है। केरल हाई कोर्ट में मुस्लिम विवाह विच्छेद अधिनियम (Dissolution of Muslim Marriages Act) के तहत मुस्लिम महिला द्वारा अपने शौहर से ‘खुला’ के तहत अलग होने को चुनौती दी गई थी।

इस मामले पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने माना था कि विवाह समाप्त करने का अधिकार मुस्लिम बीवी का पूर्ण अधिकार है, जो उसे कुरान द्वारा दिया गया है। यह उसके शौहर की स्वीकृति या इच्छा के अधीन नहीं है। हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि ‘फस्ख’ को छोड़कर शरीयत अधिनियम की धारा 2 में उल्लेखित सभी प्रकार के तलाक मुस्लिम महिलाओं के लिए भी उपलब्ध हैं।

इसके बाद शौहर ने इस फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में एक समीक्षा याचिका दायर की। कोर्ट ने इसे 20222 में खारिज करते हुए कहा था कि बीवी की इच्छा उस शौहर की इच्छा से संबंधित नहीं हो सकती, जो तलाक के लिए सहमत नहीं है। अदालत ने कहा कि ‘खुला’ का अधिकार मुस्लिम महिला को कुरान से मिला है। यदि यह अधिकार शौहर की इच्छा के अधीन होगा तो अप्रभावी हो जाएगा।

केरल उच्च न्यायालय ने केसी मोईन बनाम नफीसा मामले में 49 साल पुराने उस फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें मुस्लिम महिलाओं को तलाक लेने के लिए कोर्ट से अलग हटकर अपनाए जाने वाले तरीकों का सहारा लेने से रोक दिया था। कोर्ट ने कहा था कि धर्मनिरपेक्ष कानून की अनुपस्थिति में खुला वैध होगा, अगर तीन शर्तें पूरी की जाती हों।

ये तीन शर्तें हैं- (i) पत्नी द्वारा विवाह को अस्वीकार करने या समाप्त करने की घोषणा। (ii) वैवाहिक बंधन के दौरान उसे प्राप्त मेहर या कोई अन्य भौतिक लाभ वापस करने का प्रस्ताव। (iii) खुला की घोषणा से पहले सुलह का प्रभावी प्रयास किया गया।” दरअसल, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा था कि शौहर अपनी बीवी द्वारा खुला की माँग को खारिज कर सकता है।

क्या है खुला?

खुला भी तलाक का ही एक रूप होता है, लेकिन इसके इस्तेमाल का हक सिर्फ पत्नी के पास ही होता है। खुला के तहत अगर बीवी अपने शौहर से अलग होती है तो उसे अपने शौहर से उसकी जायदाद लौटानी पड़ेगी, पर यह जरूरी है कि दोनों इसके लिए रजामंद हों। उल्लेखनीय है कि खुला की पहल केवल बीवी ही कर सकती है। कुरान और हदीस मे इसका जिक्र है।

वहीं, भारत में मुस्लिमों के बीच मान्य पुस्तक फतवा-ए-आलमगीरी में कहा गया है कि जब निकाह के बाद शौहर-बीवी इस बात पर राज़ी हैं कि अब वे साथ नहीं रह सकते तो तो पत्नी कुछ संपत्ति पति को वापस करके स्वयं को उसके बंधन से मुक्त कर सकती है। जायदाद में बीवी अपनी मेहर की रकम छोड़ सकती है या फिर कोई अन्य रकम/संपत्ति दे सकती है।

खुला को लेकर मुस्लिमों की आपत्ति

‘खुला’ को लेकर हनफी सहित कुछ तबके के उलेमाओं का कहना है कि इसके तहत मुस्लिम महिला तभी तलाक ले सकती है, जब उसका शौहर तैयार हो। अगर शौहर मना कर दे तो महिला के पास मुस्लिम विवाह विघटन अधिनियम 1939 के प्रावधानों के तहत अदालत जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

वहीं, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने साल 2021 में ‘खुला’ के संबंध में कहा था कि इस प्रक्रिया में पति की स्वीकृति एक शर्त है। वहीं, अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि कुरान एक मुस्लिम पत्नी को एक प्रक्रिया निर्धारित किए बिना उसकी निकाह को रद्द करने के लिए ‘खुला’ का अधिकार देता है।

मुस्लिम महिलाओं को तलाक का अधिकार

इस्लाम में मुस्लिम महिलाओं को भी अपने शौहर से तलाक लेने का प्रावधान है। यदि मुस्लिम महिला अपने पति से खुश नहीं है या किसी अन्य वजह से उसके साथ रहना नहीं चाहती है तो वह निकाह को तोड़ सकती है। मुस्लिम महिला तलाक-ए-ताफवीज, मुबारत, ‘खुला’, लिएन या फिर मुस्लिम मैरिज एक्ट 1939 के तहत अपने शौहर से अलग हो सकती है।

मुस्लिम महिला तलाक-ए-ताफवीज़ के तहत तलाक ले सकती है। ताफवीज एक ऐसा अनुबंध है, जिसमें मुस्लिम पुरुष अनुबंध के जरिए निकाह को खत्म करने का अपना अधिकार महिला को सौंपता है। बफातन बनाम शेख मेमूना बीवी AIR (1995) कोलकाता (304) और महराम अली बनाम आयशा खातून इसका प्रमुख उदाहरण है।

मुबारत के जरिए भी शौहर-बीवी अलग हो सकते हैं। मुबारत का शाब्दिक अर्थ होता है पारस्परिक छुटकारा। मुबारत में अलग होने का प्रस्ताव चाहे पत्नी की ओर से आए या पति की ओर से, उसकी स्वीकृति से तलाक हो जाता है। इसके बाद पत्नी को इद्दत का पालन करना अनिवार्य हो जाता है।

लिएन वह प्रक्रिया है, जब कोई मुस्लिम शौहर अपनी पत्नी पर व्यभिचार का आरोप लगाता है, लेकिन वह आरोप झूठा हो जाता है तो बीवी को तलाक लेने का अधिकार मिल जाता है।

मुस्लिम विवाह विच्छेद अधिनियम 1939 के तहत भी मुस्लिम महिला को तलाक लेने का अधिकार है। इस अधिनियम की धारा 2 के तहत मुस्लिम महिलाओं को शौहर की अनुपस्थिति (चार साल से अधिक), बीवी की भरण पोषण करने में असफलता (शौहर अगर 2 साल से उसका भरण-पोषण नहीं दे रहा है), शौहर को कारावास (कम से कम 7 साल), शौहर द्वारा वैवाहिक दायित्व पालन में असफलता (कम से कम 2 साल से), शौहर की नपुंसकता, शौहर को पागलपन या कुष्ठ-एड्स जैसे संक्रामक रोग होना, बीवी द्वारा निकाह अस्वीकार करना और शौहर की क्रूरता की स्थिति में तलाक लेने का अधिकार है।

मांस कारोबारी हाजी सालिम के घर लगी आग, सपा विधायक की दो भतीजियों की बाथरूम में दम घुटने से मौत: AC में हुआ था शॉर्ट सर्किट, Video वायरल

भारत में मांस के बड़े कारोबारी मोहम्मद सालिम शब्बो कुरैशी के दिल्ली स्थित आवास में आग लगने की खबर है। इस आगजनी में उनकी 2 बेटियों की दम घुटने से मौत हो गई है। मृतकाओं के नाम 15 वर्षीया गुलआशना और 13 साल की अनाया हैं। घटना के समय हाजी सालिम कुरैशी कारोबार के सिलसिले में दुबई गए थे जो अब लौट आए हैं। घटना मंगलवार (2 अप्रैल 2024) की है। मीट कारोबारी सालिम कुरैशी मुरादाबाद के देहात विधानसभा से समाजवादी पार्टी के विधायक नासिर कुरैशी के भाई हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना दिल्ली के सदर थानाक्षेत्र की है। मूल रूप से मुरादाबाद के गलशहीद थानाक्षेत्र में आने वाले गाँव असातलपुरा के रहने वाले हाजी सालिम कुरैशी लगभग 30 साल पहले दिल्ली आ कर बस गए थे। यहाँ उन्होंने सदर इलाके के चमेलियन रोड पर कुरैश नगर में 2 मंजिला मकान बनवाया था। ‘अमानत’ नाम के इसी मकान में वो अपने परिवार सहित रहते थे। मंगलवार दोपहर अचानक ही इस घर में आग लग गई। लोग कुछ समझ पाते इससे पहले चारों तरफ आगे की लपटें और धुएँ का गुबार दिखने लगा। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

आग लगने की वजह AC में शॉर्ट सर्किट होना बताया जा रहा है। साथ ही ये भी कहा जा रहा है कि शॉर्ट सर्किट के बाद लड़कियों ने खुद को बाथरूम में बंद कर लिया था। जब धुआँ घर में फैला तो अंदर उनका दम घुटने लगा। बाद में आग लगने की सूचना पर मौके पर पुलिस बल और फायर ब्रिगेड पहुँची। स्थानीय लोगों ने दमकल विभाग के साथ आग पर जैसे-तैसे काबू पाया, लेकिन तब तक दोनों बहनों ने दम तोड़ दिया था। दोनों के शव तलाशी के दौरान बाथरूम में मिले। घर के भीतर का ज्यादातर सामान जल गया था।

घटना के समय हाजी सालिम कारोबार के सिलसिले में दुबई गए हुए थे। हादसे की जानकारी मिलते ही वो फ़ौरन लौट आए। फ़िलहाल उनके घर में मातम परसा है। हाजी सालिम के परिवार में इन दोनों बेटियों के अलावा 2 बेटे हैं जिनके नाम खिजर और शारिक हैं। हाजी सालिम का मांस का कारोबार कई देशों में फैला हुआ है। फिलहाल प्रशासन इस मामले में जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रहा है।

दलित लड़की को बनाया ‘आयशा’, जबरन खिलाया मांस: रोजा रखने से किया इनकार तो पीट-पीटकर किया लहूलुहान, पीड़िता बोली- 7 महीने से कर रखा था कैद

राजस्थान के भरतपुर से एक दलित लड़की को प्रेमजाल में फँसाकर जबरन धर्म परिवर्तन किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़िता ने मुबारक अली और उसकी अम्मी के खिलाफ 1 अप्रैल 2024 को पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। जबरन मांस खिलाने, नमाज पढ़ने और रोजा रखने तथा हिंदू देवी-देवताओं की पूजा करने से रोकने का आरोप दोनों पर लगाया है।

पीड़िता के अनुसार रोजा रखने से इनकार करने पर उसकी बुरी तरह पिटाई की गई। कथित तौर पर मुबारक ने उसे 7 महीने से अपने गाँव में कैद कर रखा था। पीड़िता को पुलिस ने उसके परिजनों को सौंप दिया है। वहीं मुबारक को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना भरतपुर के कामां थाना क्षेत्र की है। यहाँ के गाँव झेझपुरी के मुबारक अली पर आरोप है कि उसने नोएडा के यथार्थ अस्पताल में नर्सिंग का कोर्स कर रही 20 वर्षीया लड़की से फेसबुक के माध्यम से दोस्ती की। कुछ दिनों की बातचीत के बाद उसने पीड़िता को प्यार के जाल में फँसा लिया। लड़की से मिलने मुबारक नोएडा आया और 1 सितंबर 2023 को उसे अपने साथ ले कर राजस्थान के सीकरी थाना क्षेत्र के गाँव बेला में ले गया। यहाँ उसने लड़की को अपने बड़े भाई तालिम के घर 10 दिनों तक रखा।

बताया गया है कि बेला गाँव में ही मुबारक ने पीड़िता से निकाह किया और उसका नाम बदल कर ‘आयशा’ रख दिया। 10 दिनों बाद मुबारक पीड़िता को कामां थाना क्षेत्र के अपने गाँव झेझपुरी ले आया। यहाँ मुबारक के साथ उसका पूरा परिवार पीड़िता को आयशा नाम से बुलाने लगा। कुछ दिनों बाद आरोपित के घर वाले पीड़िता पर माँस खाने और नमाज़ पढ़ने का दबाव बनाने लगे। मना करने पर पीड़िता की बेरहमी से पिटाई की जाती। उसे हिन्दू देवी-देवताओं की पूजा करने से भी रोक दिया गया। कथित तौर पर मुबारक के गाँव के मुस्लिम सरपंच ने भी उसे रोजा रखने के लिए कहा था।

मुबारक के घर वालों पर आरोप है कि उन्होंने पीड़िता से मोबाइल फोन भी छीन लिया था। सोमवार (1 अप्रैल) को मुबारक अपना फोन चार्जिंग में लगा कर कहीं बाहर गया था। मौका मिलते ही पीड़िता ने मुबारक के ही फोन से अपने परिवार में कॉल किया और सारी व्यथा बताई। पीड़िता के घर वालों ने कामां थाने को सूचित किया तो पुलिस मुबारक के घर पहुँच गई। पुलिस मुबारक और पीड़िता दोनों को ले कर थाने आ गई। पीड़िता को उनके परिजनों के हवाले कर दिया गया है। मुबारक को हिरासत में ले कर पूछताछ की जा रही है।

मोदी सरकार ने चर्च ऑक्जिलरी फॉर सोशल एक्शन समेत 5 NGO का FCRA लाइसेंस किया कैंसिल, अब विदेश से नहीं ले पाएँगे चंदा: चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया पर भी हो चुकी है कार्रवाई

गृह मंत्रालय (एमएचए) ने गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। मंत्रालय ने पाँच एनजीओ के विदेशी योगदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। इस कार्रवाई के लिए एमएचए ने अन्य कारणों के अलावा विदेशी अनुदान के दुरुपयोग जैसे उल्लंघनों का हवाला दिया है। गृह मंत्रालय ने जिन एनजीओ के FCRA लाइसेंस रद्द किए हैं, उनमें चर्च ऑक्जिलरी फॉर सोशल एक्शन (सीएएसए) का नाम भी शामिल हैं।

गृह मंत्रालय ने चर्च ऑक्जिलरी फॉर सोशल एक्शन (सीएएसए) के साथ ही सीएनआई सिनोडिकल बोर्ड ऑफ सोशल सर्विस (सीएनआई-एसबीएसएस), वॉलंटरी हेल्थ एसोसिएशन ऑफ इंडिया (वीएचएआई), इंडो-ग्लोबल सोशल सर्विस सोसाइटी (आईजीएसएसएस) और इवेंजेलिकल फेलोशिप ऑफ इंडिया (ईएफओआई) का भी एफसीआरए लाइसेंस कैंसिल किया है।

इसमें से सीएनआई-एसबीएसएस की स्थापना 1970 में चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (सीएनआई) के गठन के साथ की गई थी, जो ग्रामीण विकास क्षेत्र में काम करने वाली चर्च की आधिकारिक शाखा के रूप में कार्यरत थी। पिछले दिसंबर में गृह मंत्रालय ने दिल्ली स्थित चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (सीएनआई) का लाइसेंस रद्द कर दिया था। अधिकारियों ने कहा कि सीएनआई और उसके सहयोगियों को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के आरोपों का सामना करना पड़ा, चर्च संपत्तियों के कथित दुरुपयोग के लिए सीएनआई के खिलाफ छापे मारे गए। इसके बाद चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया का FRCA लाइसेंस रद्द कर दिया गया था।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की आजादी के समय नेशनल काउंसिल ऑफ चर्च ने ‘एनसीसी रिलीफ कमेटी’ (एनसीसी) का गठन किया था, जो बाद में चर्च की ऑक्जिलरी फॉर सोशल एक्शन (सीएएसए) के रूप में विकसित हुई। रिपोर्ट के अनुसार, CASA को जर्मनी, संयुक्त राज्य अमेरिका और स्वीडन सहित विभिन्न देशों से विदेशी दान प्राप्त हुआ था, जिसमें अप्रैल से जून 2023 तक FCRA योगदान विवरण में पर्याप्त राशि का उल्लेख किया गया था।

वहीं, साल 1970 में स्थापित वॉलंटरी हेल्थ एसोसिएशन ऑफ इंडिया (VHAI) ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद जैसे संगठनों के साथ मिलकर काम किया है। ईटी की रिपोर्ट में कहा गया है कि इसे संयुक्त राज्य अमेरिका और फ्रांस जैसे देशों से विदेशी अनुदान प्राप्त हुआ है, जो विशेष रूप से गुजरात के भुज भूकंप, ओडिशा के सुपर चक्रवात और कोविड -19 महामारी जैसी घटनाओं के बाद आपदा राहत प्रयासों के दौरान सक्रिय है। एक अन्य एनजीओ, इंडो ग्लोबल सोशल सर्विस सोसाइटी को जर्मनी, यूनाइटेड किंगडम और सिंगापुर से विदेशी धन प्राप्त हो रहा था।

इकोनॉमिक टाइम्स ने अधिकारियों का हवाला देते हुए बताया कि पाँचवें एनजीओ, इवेंजेलिकल फेलोशिप ऑफ इंडिया का एफसीआरए नियमों का उल्लंघन करने के लिए एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर दिया गया था।

चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया पर पिछले साल हुई थी कार्रवाई

बता दें कि पिछले साल के आखिर में गृह मंत्रालय ने देश के बड़े ईसाई संगठन ‘चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया’ (CNI) एनजीओ का भी FCRA लाइसेंस रद्द कर दिया था। यह ईसाई संगठन पिछले पाँच दशक से भारत में ईसाइयत को फैलाने का काम कर रहा है। ‘चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया’ को वर्ष 1970 में 6 अलग-अलग संगठनों को मिलाकर बनाया गया था। इसके अंतर्गत चर्च ऑफ इंडिया, पाकिस्तान, बर्मा (म्यांमार), सीलोन (श्रीलंका) के तथा कुछ अन्य ईसाई संगठनों को मिलाकर बनाया गया था।

यह उत्तर भारत में चर्च का नियन्त्रण करने वाली संस्था है। इस संस्था का दावा है कि 22 लाख लोग इसके सदस्य हैं। इसके अलावा यह भारत के 28 क्षेत्रों में अपने बिशप रखता है जो कि वहाँ के चर्च पर नियंत्रण रखते हैं। इसके अलावा ‘चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया’ का दावा है कि इसके पास 2200 से अधिक पादरी हैं और 4500 से अधिक चर्च इसके नियन्त्रण में हैं।

इसके अलावा पिछले साल ही सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च, राजीव गाँधी फाउंडेशन, राजीव गाँधी चैरिटेबल ट्रस्ट (पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी के नेतृत्व में) और ऑक्सफैम इंडिया जैसी उल्लेखनीय संस्थाओं सहित 100 से अधिक गैर सरकारी संगठनों ने अपने एफसीआरए लाइसेंस खो दिए थे। इस साल जनवरी में, सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (सीपीआर) ने अपने एफसीआरए लाइसेंस को कई उल्लंघनों के लिए रद्द कर दिया था।

‘करियर बचाना है तो BJP में शामिल हो जाओ’: बड़बोले दावे पर फँसी दिल्ली की मंत्री आतिशी, लीगल नोटिस भेज माँगा सबूत, बोले दिल्ली भाजपा अध्यक्ष- इस बार नहीं छोड़ेंगे

दिल्ली शराब घोटाले मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी/ED) द्वारा कोर्ट में आतिशी मार्लेना का नाम लिए जाने के बाद आम आदमी पार्टी की महिला नेता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा था कि उन्हें भाजपा ने ऑफर दिया है कि अगर उन्हें करियर बचाना है तो वो बीजेपी में शामिल हो जाएँ। अब उनकी इसी बात पर भारतीय जनता पार्टी ने लीगल नोटिस भेजते हुए उनसे सबूत माँगे हैं।

दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा- “हमने दिल्ली की मंत्री और आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी मार्लेना को कानूनी नोटिस भेजा है कि वो अपनी कही बात के सबूत दें। हम उन्हें छोड़ेंगे नहीं। इस बार उन्हें जवाब देना ही होगा।”

भाजपा अध्यक्ष ने अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “कल AAP नेता आतिशी ने कहा कि एक नजदीकी व्यक्ति के माध्यम से उनके ऊपर दलबदल का दबाव डाला जा रहा है। वो पहले भी आदतन इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगाती रही हैं। उन्होंने एक झूठा और खुद का गढ़ा हुआ बयान दिया है।”

उन्होंने कहा कि आतिशी ने अपने बयान के साथ कोई ठोस या सही जानकारी नहीं दी है। उन्होंने नहीं बताया कि किसने उन्हें संपर्क किया। उन्होंने ये भी नहीं बताया कि उन्हें कब इस संबंध में संपर्क किया गया। इसके अलावा जिसने उन्हें संपर्क किया अगर वो उनका नजदीकी था, तो वो जवाब दें वो व्यक्ति कौन था और किसके निर्देश पर उन्होंने इस संबंध में किसी को नहीं बताया।

उन्होंने आतिशी और आम आदमी पार्टी के लगातार आरोपों पर जवाब देते हुए कहा कि आतिशी या उनकी पार्टी जब भी राजनीतिक हालत में गिरकर जवाबदेह होते हैं तो हमेशा विधायक तोड़ने या नेताओं की गिरफ्तारी की कहानी सुनाते हैं।

उन्होंने आप की महिला नेता के दावों को कमजोर और झूठा करार देते हुए कहा कि शराब घोटाले में जितने भी आम आदमी पार्टी नेता गिरफ्तार हुए हैं सभी की गिरफ्तारी ट्रायल कोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक मान्य हुई है। उन्होंने कहा कि आतिशी को अपने झूठे बयानों पर तुरंत माफी माँगनी चाहिए वरना भाजपा एंव कार्यकर्ताओं की मानहानि पर मुकदमा दायर किया जाएगा।

आतिशी ने की थी प्रेस कॉन्फ्रेंस

बता दें कि कल (2 अप्रैल 2024) को आतिशी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि भाजपा के एक नेता ने उनके करीबी से संपर्क साधा है। उनको बोला है की आतिशी को अपना करियर बचा के रखना है तो वह जल्द भाजपा में शामिल हो जाए, अन्यथा उसे भी गिरफ्तार किया जाएगा। उन्हें मालूम हुआ कि भाजपा आम आदमी पार्टी को कुचलना चाहती है। इस कड़ी में उनके साथ-साथ सौरव भारद्वाज, राघव चड्ढा और दुर्गेश पाठक को जल्दी ही गिरफ्तार किया जाएगा। उनके घरों पर भी रेड की जाएगी और फिर समन भेज कर तलब किया जाएगा। उस दौरान उन्हें गिरफ्तार करने की योजना है।

सीता को रावण के साथ नचाया… पॉन्डिचेरी यूनिवर्सिटी ने HoD को हटाया: हिंदू विरोधी नाटक को बताया ‘पितृसत्ता का विरोध’, डायरेक्टर और राइटर पर केस

पॉन्डिचेरी यूनवर्सिटी (PU) हाल ही में वहाँ खेले गए एक हिन्दू विरोधी नाटक को लेकर सुर्ख़ियों में आया था। अब इस मामले में कार्रवाई करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने ‘डिपार्टमेंट ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स’ के विभागाध्यक्ष (HoD) को उनके पद से मुक्त कर दिया है। वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘Ezhini 2014’ के दौरान ये नाटक खेला गया था। ABVP (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) ने इसके खिलाफ सड़क पर उतर कर तगड़ा विरोध प्रदर्शन किया था।

यूनिवर्सिटी ने एक आंतरिक समिति बना कर उसे इस मामले की जाँच की जिम्मेदारी सौंपी है। जाँच में कुछ निकल कर आए, इससे पहले HoD को अपने पद से इस्तीफा देने के लिए कह दिया गया है। शुक्रवार (29 मार्च, 2024) को ये नाटक खेला गया था। स्थानीय पुलिस थाने में भी इसके खिलाफ शिकायत दी गई है। कालापेट पुलिस स्टेशन ने त्वरित कार्यवाही करते हुए इस नाटक के निर्देशक और स्क्रिप्ट राइटर के खिलाफ FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

इनके खिलाफ सांप्रदायिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने की धाराएँ लगाई गई हैं। PU के अस्सिस्टेंट रजिस्ट्रार D नंदगोपाल ने छात्रों को इस उच्च-स्तरीय समिति के गठन की जानकारी दी है। समिति को कहा गया है कि वो 3-4 दिनों में जाँच पूरी कर अपनी रिपोर्ट दाखिल करे। साथ ही ”डिपार्टमेंट ऑफ परफॉर्मिंग आर्ट्स’ के सभी प्रोफेसरों से स्पष्टीकरण माँगा गया है। उन्होंने कहा कि पॉन्डिचेरी यूनिवर्सिटी परिसर में शांतिपूर्ण और भाईचारे वाला माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का कोई भी कृत्य यूनिवर्सिटी कैम्पस में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रजिस्ट्रार इंचार्ज ने छात्रों से शांति बनाए रखने की अपील की है। वहीं ‘सोमायणम’ नाम के इस नाटक के पक्ष में डिपार्टमेंट और उसके छात्रों ने बयान जारी कर इसका बचाव किया है। इसमें कहा गया है कि वो लोग विभिन्न सांस्कृतिक और सामाजिक पृष्ठभूमियों से आते हैं, इसीलिए सबकी भावनाओं का सम्मान करते हैं और उनका ऐसा इरादा न होने के बावजूद किसी को ठेस पहुँची है तो वो माफ़ी माँगते हैं।

इसमें कहा गया है कि उन्होंने थेरुकूथू (स्ट्रीट प्ले) के अंदाज़ में महिलाओं पर पितृसत्ता के सिद्धांतों को थोपे जाने को दिखाया गया। इन छात्रों का कहना है कि प्राचीन काल में ‘महिलाओं की शुचिता’ वाला कॉन्सेप्ट था और इसे गलत साबित करने के लिए उन्होंने ये नाटक खेला। साथ ही पूछा कि महिलाओं की ‘पवित्रता’ को उसके सम्मान से जोड़ कर देखा जाता है, जबकि पुरुषों के विषय में ऐसा नहीं होता। हालाँकि, इसमें भगवान राम, माँ सीता और हनुमान जी को दिखाने जाने की ज़रूरत क्या थी, इस पर कुछ नहीं कहा गया।

याद दिला दें कि इसमें माँ सीता के किरदार का नाम ‘गीता’ और नृत्य करते हुए रावण को ‘भावना’ नाम दिया गया। वहीं सीता हरण वाले दृश्य में दिखाया गया कि माँ सीता रावण को गोमांस खाने के लिए दे रही हैं। इसमें सीता वाले किरदार से कहलवाया गया है, “मैं शादीशुदा हूँ, लेकिन हम दोस्त बन सकते हैं।” इसमें हनुमान जी की पूँछ को एंटीना के रूप में दिखाया गया। इसका निर्देशन करने वाले MPA 1st ईयर के पुष्पराज, इसमें शामिल एक्टर्स मिथुन कृष्णा, श्रीपार्वती, आदित्य बेबी और विशाख भसी हैं। रावण को माँ सीता के साथ नृत्य करते हुए भी दिखाया गया था।