Homeराजनीति'हजारों की भीड़, मेरे को ही धकेल रहे इधर से उधर': लीक हुआ कॉन्ग्रेस...

‘हजारों की भीड़, मेरे को ही धकेल रहे इधर से उधर’: लीक हुआ कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का वीडियो, कहा – दूसरी बार मेरे साथ ऐसा हो रहा है

इससे स्पष्ट पता चलता है कि पार्टी में गाँधी परिवार ही सर्वेसर्वा है, उनके सलाहकारों के अलावा बाकी सब नेता एक ही पंक्ति में आते हैं।

अक्टूबर 2022 से ही कर्नाटक के दिग्गज नेता मल्लिकार्जुन खड़गे कॉन्ग्रेस पार्टी के अध्यक्ष हैं। उनके बेटे प्रियांक कर्नाटक में IT-BT (इलेक्ट्रॉनिक्स इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी एवं साइंस एन्ड टेक्नोलॉजी), ग्रामीण विकास और पंचायती राज जैसे मंत्रालय संभाल रहे हैं। इन सबके बावजूद मल्लिकार्जुन खड़गे को उचित सम्मान नहीं मिल पा रहा है। अब एक वीडियो लीक हुआ है। इससे स्पष्ट पता चलता है कि पार्टी में गाँधी परिवार ही सर्वेसर्वा है, उनके सलाहकारों के अलावा बाकी सब नेता एक ही पंक्ति में आते हैं।

भाजपा ने आरोप लगाया है कि मल्लिकार्जुन खड़गे कॉन्ग्रेस में उचित सम्मान न मिलने की वजह से दुःखी हैं। दरअसल, जो वीडियो वायरल हुआ है उसमें मल्लिकार्जुन खड़गे कहते हुए दिख रहे हैं, “पहले ही व्यवस्था करना आपलोग। हजारों लोगों की भीड़ थी, 400-500 लोगों में धकेला-धकेली। अनुशासन नहीं है। मेरे को ही धकेल रहे थे इधर से उधर। बात करते हैं बड़े-बड़े – ऐसा करो, वो करो। ये दूसरी बार हो रहा है।” वीडियो में कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष किसी कार्यक्रम को लेकर नाराज़ दिख रहे हैं।

मल्लिकार्जुन खड़गे 1960 के दशक से ही राजनीति में हैं, जो वो गुलबर्गा में स्टूडेंट यूनियन के लीडर बने थे। 1969 में वो कॉन्ग्रेस में शामिल हुए थे और उन्हें कलबुर्गी में पार्टी का नगर अध्यक्ष बनाया गया था। इस तरह वो 55 वर्षों से कॉन्ग्रेस पार्टी में हैं। फ़िलहाल वो राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। नरेंद्र मोदी के पहले प्रधानमंत्रित्व कार्यकाल में वो लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष थे। मल्लिकार्जुन खड़गे गुरमिटकल से 9 बार विधायक और गुलबर्गा से लगातार 2 बार सांसद रहे हैं।

2019 के लोकसभा चुनावों में उन्हें हार का मुँह देखना पड़ा था। माना जाता है कि सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी और प्रियंका गाँधी ने उन्हें पार्टी अध्यक्ष की कुर्सी पर बिठाया है, क्योंकि कॉन्ग्रेस पर वंशवाद के आरोप लग रहे थे। मल्लिकार्जुन खड़गे की दलित पहचान को भुनाने की भी भरपूर कोशिश की गई। लेकिन, अक्सर उन्हें नाराज़ मुद्रा में ही देखा जाता रहा है। अब नया वीडियो सामने आने के बाद लोग पूछ रहे हैं कि क्या वो सचमुच एक रबड़ स्टाम्प अध्यक्ष हैं, जैसे मनमोहन सिंह एक रबड़ स्टाम्प प्रधानमंत्री थे।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

दिलजीत दोसांझ की ‘सतलुज’ पर फैलाया जा रहा ‘अर्धसत्य’: इसे कानूनी वजहों से ZEE5 ने हटाया, सरकार ने नहीं लगाया कोई बैन; जानिए पूरा...

सतलुज पर सरकार ने बैन नहीं लगाया बल्कि फिल्म पहले IT नियम, 2021 के नियम 9 के तहत ZEE5 पर रिलीज हुई और बाद में उसी व्यवस्था के तहत उसे हटा भी दिया गया।

बाबू जगजीवन राम: वो दलित नेता जिन्हें कॉन्ग्रेस और लेफ्ट से कभी उनका हक नहीं मिला, क्योंकि वे हिंदू धर्म से नहीं करते थे...

डॉ. आंबेडकर ने जाति व्यवस्था से तंग आकर बौद्ध धर्म अपनाया, तो जगजीवन राम जीवनभर हिंदू समाज के भीतर रहकर ही कुरीतियों को सुधारने के पक्षधर रहे।
- विज्ञापन -