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इजरायल ने भारत से 1 लाख लोग माँगे थे, 60+ श्रमिकों का पहला जत्था हुआ रवाना: हमास आतंकियों के हमले के बाद रद्द कर दिए थे फिलिस्तीनियों के परमिट

पिछले साल फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास द्वारा इजरायल पर आतंकी हमले के बाद इस यहूदी ने एक बड़ा कदम उठाया है। वहाँ की सरकार फिलिस्तीनी कामगारों की जगह अब एक लाख भारतीय श्रमिकों को अपने यहाँ नौकरी देना चाह रही है। इसकी शुरुआत भी हो चुकी है। 60 भारतीय श्रमिकों का पहला जत्था इजरायल रवाना हो गया है।

इजरायली अधिकारियों ने मंगलवार (2 अप्रैल 2024) को बताया कि दोनों देशों के बीच सरकारी समझौते के तहत भारतीय निर्माण श्रमिकों के पहले बैच को इजरायल भेज दिया गया है। हालाँकि, इस बात को लेकर कोई स्पष्टता नहीं थी कि भारतीय पक्ष ने इस कदम पर हस्ताक्षर किए हैं या नहीं। दरअसल, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने 8 मार्च को एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा था कि भारत श्रमिकों को इज़रायल भेजने के G2G समझौता पर अभी भी काम कर रहा है।

भारत में इजरायल के राजदूत नाओर गिलोन ने 2 अप्रैल को सोशल मीडिया साइट X पर पोस्ट किया, “आज हमारे यहाँ G2G समझौते के तहत इज़रायल जाने वाले 60+ भारतीय निर्माण श्रमिकों के पहले बैच का विदाई कार्यक्रम था। यह NSDC (National Skill Development Corporation) सहित कई लोगों की कड़ी मेहनत का परिणाम है। मुझे यकीन है कि ये लोग भारत-इजरायल के लोगों के संबंधों के ‘राजदूत’ बनेंगे।”

दरअसल, इजरायल ने भारत और अन्य देशों से हजारों श्रमिकों की भर्ती करने की घोषणा की थी। ये भर्ती फिलिस्तीनी श्रमिकों की जगह हो रही है। दरअसल, हमास के साथ संघर्ष के बाद इजरायल ने अक्टूबर 2024 में फिलिस्तीनिी श्रमिकों के वर्क परमिट को रद्द कर दिया था।

पिछले साल दिसंबर यानी दिसंबर 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ फोन इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने टेलीफोन पर बात की थी और भारत से श्रमिकों के बुलाने के प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का आग्रह किया था। हालाँकि, इजरायली राजदूत के बयान के बाद विदेश में रोजगार की निगरानी करने वाले विदेश मंत्रालय सहित भारत की ओर से कोई बयान नहीं आया है।

इन दोनों राज्यों के सैकड़ों श्रमिकों ने इज़रायल के निर्माण क्षेत्र में चिनाई, बढ़ईगीरी, टाइलिंग और बार-बेंडिंग जैसे क्षेत्र में नौकरियों के लिए टेस्ट दिया था। इसके बाद भारत और इज़रायल ने 3 नवंबर 2023 को दो क्षेत्रों – निर्माण और घर-आधारित देखभाल में भारतीय श्रमिकों के अस्थायी रोजगार की सुविधा के एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।

बता दें कि NSDC सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत वित्त मंत्रालय द्वारा स्थापित एक सार्वजनिक लिमिटेड कंपनी है। यह भारतीय श्रमिकों को कौशल विकास और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करती है। NSDC ने इज़रायल में काम करने के इच्छुक श्रमिकों के की स्क्रीनिंग और साक्षात्कार के लिए हरियाणा और उत्तर प्रदेश में कार्यक्रमों आयोजित किए थे।

NSDC की वेबसाइट के एक पैम्फलेट में कहा गया है कि फ्रेमवर्क वर्कर और बार-बेंडर्स, दोनों के लिए तीन-तीन हजार नौकरियाँ हैं। वहीं, टाइलिंग और प्लेटिंग के लिए 2-2 हजार नौकरियाँ हैं। इसमें कहा गया है कि इन नौकरियों के 1,37,000 रुपए मासिक वेतन दिया जाएगा। एनएसडीसी के लोगो वाले एक अन्य पैम्फलेट में कहा गया है कि श्रमिकों को अपनी यात्रा और स्थानांतरण के लिए भुगतान करना होगा।

दरअसल, पिछले साल नवंबर में विदेशी अखबार इंडिपेंडेंट ने VOA के हवाले से कहा था कि इजरायल के निर्माण क्षेत्र की कंपनियों ने कहा था कि फिलिस्तीनी श्रमकिों की जगह भारतीय श्रमिकों को काम पर रखने के लिए तेल अवीव के अधिकारियों से अनुमति माँगी थी। फिलिस्तीनियों का वर्क परमिट रद्द करने के बाद यह इंडस्ट्री बड़े पैमाने पर प्रभावित हुई।

इजराइल बिल्डर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष हैम फीग्लिन ने तब कहा था, “फिलहाल हम भारत के साथ बातचीत कर रहे हैं। हम इसे मंजूरी देने के लिए इजरायली सरकार के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। हम पूरे बिल्डिंग क्षेत्र को चलाने और इसे सामान्य स्थिति में लाने के लिए 50,000 से 100,000 भारतीय श्रमिकों को शामिल करने की उम्मीद करते हैं।”

हमास के हमले से पहले विनिर्माण क्षेत्र के कुल वर्क फोर्स का 25 प्रतिशत सिर्फ फिलिस्तीनी थे। इसके बाद 42000 भारतीय श्रमिकों को इजरायल ले जाने के लिए वहाँ की सरकार ने भारत के साथ समझौता किया था। इनमें से 34,000 श्रमिकों को विनिर्माण क्षेत्र और बाकी के 8,000 श्रमिकों को नर्सिंग के क्षेत्र में लगाए जाने की बात कही गई थी।

पासपोर्ट करना होगा सरेंडर, लोकेशन रखना होगा ऑन: जानिए किन शर्तों पर जेल से बाहर आ रहे संजय सिंह, शराब घोटाले पर बयानबाजी भी नहीं कर पाएँगे

दिल्ली के शराब घोटाला मामले में आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह को आज (3 अप्रैल 2024) राउज एवेन्यू कोर्ट से सशर्त जमानत मिली। अदालत ने उन्हें 2 लाख रुपए के निजी मुचलके पर बेल दी जिसे उनकी पत्नी ने भरा।

संजय सिंह ने बहुत अपील की कि उन्हें दिल्ली एनसीआर से बाहर जाने से न रोका जाए क्योंकि चुनाव का समय है। हालाँकि फिर भी कोर्ट द्वारा उनका पासपोर्ट जब्त कर लिया गया। इस दौरान संजय सिंह के वकील लगातार समझाते रहे कि वो सांसद हैं और देश छोड़कर विदेश नहीं जाएँगे।

कोर्ट ने पासपोर्ट जब्ती के अलावा संजय सिंह पर कुछ शर्ते और लगाईं। जैसे उन्हें साफ-साफ कहा गया कि वह सबूतों से छेड़छाड़ की कोशिश न करें। इसके अलावा जाँच में पूरा सहयोग दें। साथ ही मीडिया के सामने इन मामलों से जुड़ी सार्वजनिक बयानबाजी न की जाए। इसके अतिरिक्त उन्हें कहा गया कि अगर वह दिल्ली-एनसीआर से बाहर आते-जाते हैं तो उन्हें इसकी सूचना कोर्ट को देनी होगी। बिना अदालत के इजाजत के वो विदेश यात्रा भी नहीं कर सकते इसीलिए उनका पासपोर्ट जब्त हुआ है। कोर्ट ने कहा कि संजय सिंह जहाँ भी जाएँगे उन्हें जाँच अधिकारी को गूगल लोकेशन देनी होगी। इस दौरान वह अपना फोन नंबर नहीं बदल सकते हैं। वह केस से जुड़े भी कोई मीडिया में बयान नहीं देंगे।

6 महीने बाद मिली जमानत

गौरतलब है कि संजय सिंह को शराब घोटाले मामले में पिछले वर्ष अक्टूबर में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। 6 माह जेल में बिताने के बाद उन्हें हाल में जमानत मिली है। हालाँकि अभी संजय सिंह जेल से रिहा नहीं हुए हैं। उन्हें लिवर सिरोसिस नाम की बीमारी है।

24 घंटे पहले उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वहाँ उनकी बायोप्सी हुई। अगर कुछ गंभीर नहीं पाया गया तो उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी। इसके बाद उन्हें जेल भेजा जाएगा और जेल में जैसे ही कोर्ट का रिहाई आदेश पहुँचेगा। उसके बाद उन्हें जेल से रिहा किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने आप नेता संजय सिंह को दिल्ली शराब घोटाले मामले में मंगलवार को जमानत की अनुमति दी थी। मामले की सुनवाई जस्टिस संजीव खन्ना, दीपांकर दत्ता और प्रसन्ना बी वारले ने की थी। इस दौरान ईडी ने संजय सिंह की जमानत का विरोध नहीं किया। वहीं जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने पहले मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए आदेश पारित किया कि संजय सिंह जमानत की अवधि के दौरान राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने के हकदार होंगे। केस के बारे में कोई बात नहीं होगी।

इस सब दलीलों के बाद कोर्ट ने निर्णय लिया कि संजय सिंह को जमानत दी जाती है। इससे पहले 22 दिसंबर को दिल्ली की ट्रायल कोर्ट ने उनकी बेल को खारिज किया था। उसके बाद 9 फरवरी को हाईकोर्ट ने उनको देने से मना किया था।

मालूम हो कि संजय सिंह की गिरफ्तार झशराब घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में आरोपित हैं। उनपर शराब घोटाले से उपजी अपराध की आय को वैध बनाने का आरोप लगा है। ईडी का कहना था कि संजय सिंह घोटाले से आई अपराध की आय को ठिकाने लगाने में शामिल थे।

कैंसर से जूझ रहे हैं सुशील कुमार मोदी, कहा – लोकसभा चुनाव में नहीं रहूँगा सक्रिय, PM मोदी को सबकुछ बता दिया है

बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर खुद ही पोस्ट कर के ये जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि वो पिछले 6 महीने से कैंसर से संघर्ष कर रहे हैं, अब लगा कि लोगों को बताने का समय आ गया है। साथ ही उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024 में अपनी सक्रियता को लेकर भी असमर्थता जताई है। 72 वर्षीय भाजपा नेता ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस संबंध में जानकारी दे दी है।

हालाँकि, इस अवस्था में भी उन्होंने देश, बिहार और पार्टी के प्रति सदैव समर्पित करने का वचन देते हुए आभार जताया। सुशील कुमार मोदी नवंबर 2005 से लेकर जून 2013 तक और फिर जुलाई 2017 से लेकर नवंबर 2020 तक बिहार के उप-मुख्यमंत्री रहे। इस दौरान उनके पास राज्य का वित्त मंत्रालय भी रहा। बीच की अवधि में वो बिहार विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष रहे। सुशील कुमार मोदी उन गिने-चुने नेताओं में हैं जो चार सदन के सदस्य रहे।

दिसंबर 2020 में उन्हें राज्यसभा सांसद बनाया गया था। उससे पहले वो 2004 में भागलपुर से लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं। पटना सेन्ट्रल विधानसभा क्षेत्र से उन्होंने बतौर विधायक हैट्रिक भी लगाई थी। सुशील कुमार मोदी बिहार के लिए 13 बार बजट पेश कर चुके हैं, जो एक रिकॉर्ड है। सुशील कुमार मोदी को बिहार में नब्बे के दशक से ही लालू यादव विरोधी राजनीति का केंद्र माना गया, चारा घोटाले पर कार्रवाई के लिए जम कर आवाज़ उठाने वालों में से वो एक थे।

सुशील कुमार मोदी उन नेताओं में हैं, जो 70 के दशक में जयप्रकाश नारायण (JP) के आंदोलन में बतौर छात्र नेता उभरे। वो RSS से भी जुड़े रहे हैं। ABVP में वो कई बड़े पदों पर रहे। 1990 से लेकर 2023 तक वो लगातार 33 वर्षों तक चारों सदन में किसी न किसी पद पर रहे। सुशील कुमार मोदी बिहार में भाजपा के सबसे वफादार सिपाहियों में से एक रहे हैं, जिन्होंने पार्टी द्वारा जब जो आदेश दिया गया उसका पालन किया। हालाँकि, पार्टी संगठन और जनता में उनके प्रति कई बार असंतोष भी देखने को मिला।

कट्टरपंथियों के समर्थन से भारत-विरोधी ताकतों का साथ लेती है कॉन्ग्रेस, SDPI के समर्थन से हैरानी नहीं : PFI के राजनीतिक धड़े ने किया इंडी गठबंधन का समर्थन, गृहमंत्री अमित शाह ने बोला हमला

भारत सरकार ने कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) पर प्रतिबंध लगाया था। लेकिन उसका एक राजनीतिक धड़ा है, जो केरल में कॉन्ग्रेस के अगुवाई वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) को लोकसभा चुनाव 2024 में समर्थन कर रहा है। पीएफआई के राजनीतिक फ्रंट का नाम सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) है। उसके केरल राज्य के अध्यक्ष मुवत्तुपुझा अशरफ मौलवी ने केरल में कॉन्ग्रेस और उसके धड़े को समर्थन का ऐलान किया है। एसडीपीआई के कॉन्ग्रेस के समर्थन के ऐलान के बाद गृहमंत्री अमित शाह ने कॉन्ग्रेस पर करारा हमला बोला और कहा कि ‘कॉन्ग्रेस को भारत की संप्रभुता से कोई मतलब नहीं है।’

केरल में पीएफआई ने दिया कॉन्ग्रेस को समर्थन

कॉन्ग्रेस केरल में एसडीपीआई के अध्यक्ष अशरफ मौलवी ने एर्नाकुलम प्रेस क्लब में बाकायदा सोमवार (01 अप्रैल 2024) को प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर कॉन्ग्रेस के समर्थन का ऐलान किया। मौलवी ने बताया कि उसने कॉन्ग्रेस को समर्थन देने का फैसला इसलिए किया है, क्योंकि कॉन्ग्रेस ही बीजेपी के विरोध में खड़े इंडी गठबंधन का मुख्य चेहरा है। एसडीपीआई ने साल 2019 के लोकसभा चुनाव में केरल की 9 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ा था।

इस लोकसभा चुनाव में वो तमिल नाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, झारखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में 18 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही है। बाकी की लोकसभा सीटों पर वो बीजेपी के खिलाफ खड़े उम्मीदवारों को समर्थन दे रही है।

इस मुद्दे पर जब केरल में कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष एमएम हसन से पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि हमें भी अभी पता चला है कि एसडीपीआई हमारा समर्थन कर रही है। जब उन्हें बताया गया कि एसडीपीआई कट्टरपंथियों से जुड़ी पार्टी है, तो उन्होंने इसके जवाब में उन्होंने कहा कि ये देखना हमारा काम नहीं है। हम इस मामले को पार्टी की बैठक में उठाएँगे।

कॉन्ग्रेस को एसडीपीआई के समर्थन से हैरानी नहीं : शाह

इस मामले को लेकर गृहमंत्री अमित शाह ने कॉन्ग्रेस पर जोरदार हमला बोला। कर्नाटक के रामनगर में रोडशो के दौरान सीएनएन-न्यूज18 ने उनसे इस बारे में सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस को इस तरह के समर्थन से वो हैरान नहीं हैं।

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, “मैं यह देखकर हैरान नहीं हूँ कि एसडीपीआई कॉन्ग्रेस का समर्थन कर रही है। सांप्रदायिक ताकतों के समर्थन से कॉन्ग्रेस कई वर्षों से भारत विरोधी अभियानों का समर्थन करती रही है। एसडीपीआई के समर्थन का मतलब है कि आप भारत की संप्रभुता में विश्वास नहीं करते हैं।” वहीं, इस मामले में कॉन्ग्रेस के महासचिव और अलाप्पुझा लोकसभा सीट से प्रत्याशी केसी वेणुगोपाल ने कहा कि अभी एसडीपीआई के समर्थन को लेकर पार्टी में कोई चर्चा नहीं हुई है।

‘चोर हैं ये माद₹#@$’: राहुल गाँधी की यात्रा में शामिल हुए, अब पुलिस से माँग रहे ‘न्याय’, कहा- कंटेनर मँगवाए, पर पैसे नहीं दिए

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा में ट्रक कंटेनर भेजने वाले मालिकों ने आरोप लगाया है कि उनकी गाड़ियों के किराए का पैसा नहीं मिला है। इन ट्रक मालिकों का कई लाख रूपए यात्रा के कारण ट्रांसपोर्टर पर बकाया है, जिसका भुगतान अभी तक नहीं हुआ है। इस सम्बन्ध में मालिकों ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में शिकायत भी पुलिस को दी है। उधर ट्रांसपोर्टर ने इस मामले में आरोप लगाया है कि गाड़ी मालिक इस मामले का राजनीतिकरण कर रहे हैं और उन्होंने उनका माल रोक रखा है।

दैनिक भास्कर की एक खबर के अनुसार, कुछ ट्रक ड्राइवरों की गाड़ियाँ कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा में गईं थी। यह गाड़ियाँ दिल्ली के दो ट्रांसपोर्टर अनिल कौशिक और मनोज सिंह ने इन ट्रक मालिकों से ली थी। कौशिक बिहार बंगाल ट्रांसपोर्ट (दिल्ली) जबकि मनोज सिंह दिल्ली हरिद्वार ट्रांसपोर्ट के मालिक हैं।

उन्होंने इन पर राहुल गाँधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा वाले सफ़ेद कंटेनर लगवाए थे। यह गाड़ियाँ 20 दिसम्बर, 2023 को कॉन्ग्रेस यात्रा के लिए भेजी गई थीं। इन ट्रांसपोर्टर को गाड़ियाँ भेजने वाले मालिकों का आरोप है कि यात्रा खत्म होने के बाद भी उनकी गाड़ियों के किराए का पैसा नहीं दिया जा रहा है।

इन गाड़ी मालिकों ने आरोप लगाया है कि उनका भुगतान रोका गया। भुगतान माँगने पर उनसे साफ़ बात नहीं की जा रही और उन्हें मारने की धमकियाँ मिल रही हैं। उन्हें घर से उठवाने की बात कही जा रही है। आरोप है इन गाड़ी मालिकों ने मनोज सिंह और अनिल कौशिक के 22-25 स्पेशल कंटेनर भी रोक रखे हैं। मालिकों का कहना है कि वह कंटेनर तब देंगे जब उनका पैसा मिल जाएगा।

ऑपइंडिया ने इस मामले में बिहार बंगाल ट्रांसपोर्ट के मालिक अनिल कौशिक से भी बात की है। कौशिक ने बताया कि यह ड्राईवर बिना बात विवाद खड़ा कर रहे हैं। कौशिक ने कहा कि यह गाड़ियाँ उन्हें 1 जनवरी, 2024 को मिली थीं। इसके बाद इन्हें 2 महीने 22 दिन यात्रा में संचालित किया गया। गाड़ियों के भुगतान को लेकर कौशिक ने बताया कि वह हर 15 दिन पर हर गाड़ी का भुगतान कर देते हैं। इन गाड़ियों का भी 2 महीने का भुगतान हो गया है और 22 दिन का भुगतान बाकी है जो कि वह देने को भी तैयार हैं।

कौशिक ने आरोप लगाया कि गाड़ी मालिक पैसा ना मिलने के इस मामले में कॉन्ग्रेस को बिना वजह घसीट रहे हैं। उन्होंने बताया कि राहुल गाँधी की यात्रा में जाने वाले एक कंटेनर की कीमत लगभग ₹3 लाख है, इनमें AC जैसी सुविधाएँ हैं। ऐसे 22-25 कंटेनर इन गाड़ी मालिकों ने बुलंदशहर में रोके हुए हैं और वापस कौशिक के कहने पर फरीदाबाद नहीं ला रहे। कौशिक का कहना है कि उन्हें अपने कंटेनर वापस मिलते ही इन ड्राईवर का भुगतान हो जाएगा और वह उससे पहले भी भुगतान करने को तैयार हैं लेकिन ड्राईवर उनकी बात नहीं सुन रहे।

इस मामले में कौशिक ने समझौते के लिए अपने सहयोगी मनोज को बुलंदशहर भेजा है। कौशिक ने धमकी देने के आरोप पर बताया है कि मालिकों के उनके कंटेनर और माल रोकने पर उन्होंने वापस लेने की बात कही थी। उन्होंने इस मामले में राजनीतिकरण और गाड़ी मालिकों पर गड़बड़ करने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इस मामले में कॉन्ग्रेस का कोई लेना देना नहीं है और अन्य दलों के लिए भी इवेंट मैनेजमेंट भी करते हैं।

माथे पर सिंदूर-बिंदी, 3 थैले में भरे मिले शरीर के टुकड़े: कोलकाता में महिला के साथ वीभत्सता, हाथ-पैर और पेट का हिस्सा गायब

कोलकाता के वाटगंज थाना इलाके में खाली पड़े एक क्वॉर्टर से मंगलवार (2 मार्च 2024) को काले प्लास्टिक के पैकेट में एक महिला का शव कई टुकड़ों में पड़ा मिला। पुलिस ने बताया कि बरामद हुए टुकड़ों में से शरीर के कई अंग अभी भी गायब हैं। शव किस महिला का है और किसने यहाँ ऐसे ये पैकेट फेंके सब सवालों के जवाब ढूँढने के प्रयास हो रहे हैं

मंगलवार (2 अप्रैल 2024) को मामला प्रकाश में तब आया जब एक बिल्डिंग के कुछ लोगों ने शिकायत दी कि खाली पड़े क्वार्टर के पास कुछ सड़ रहा है। पुलिस ने आकर देखा तो पता चला कि पन्नी में महिला के शव के टुकड़े थे जिनमें सिर, धड़, हाथ-पैर समेत शरीर के अलग-अलग हिस्से पड़े हुए थे

पुलिस के मुताबिक, बराबद टुकड़ों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। अनुमान लगाया जा रहा है कि महिला की हत्या तीन से चार दिन पहले की गई थी और शव को दूसरी जगह से लाकर खाली क्वार्टर में फेंक दिया गया था। हत्या को ज्यादा दिन होने के कारण शव के सारे टुकड़े सड़ने लगे थे और शव से काफी बदबू आ रही थी।

घटना की जाँच में जुटे ज्वाइंट सीपी सैयद वकार रजा ने इस घटना पर बताया, “हमें तीन प्लास्टिक बैगों में महिला के शव के टुकड़े मिले हैं। उसके माथे पर सिंदूर और बिंदी लगा था जिससे पता चलता है कि वो शादीशुदा थी। बैग के भीतर ईंट भी हैं जिससे लग रहा है कि बैग नदी या तालाब में फेंकने की कोशिश हुई होगी। प्लास्टिक बैग में महिला के हाथ, तलुआ और पेट का हिस्सा नहीं मिला है। मामले की जाँच की जा रही है। केस अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज कर लिया गया है।”

जाँच अधिकारी ने बताया कि ऐसा लग रहा है जैसे किसी ने हड़बड़ी में ये प्लास्टिक बैग फेंका। जाँच चल रही है। पुलिस के मुताबिक कुछ लोग खाली क्वार्टर के पास बातचीत करने आए थे। उन्होंने पुलिस को 2:50 बजे इन थैलों के बारे में बताया। पुलिस घटनास्थल पर फौरन भागकर गई तो देखा तो वहाँ तीन काली पॉलीथीन पड़ीं थीं और उसमें 30-35 साल की महिला के शव के टुकड़े थे। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज की जाँच कर रही है। ट्रैकर डॉग्स को काम में लगा दिया गया है। आगे की जानकारी जाँच के बाद सामने आएगी।

शराब नीति बनाने में अरविंद केजरीवाल की थी डायरेक्ट भूमिका, पूरी साजिश में हैं शामिल, उनके जरिए ही मनी लॉन्ड्रिंग: ED ने कोर्ट को बताया क्यों दिल्ली के CM को किया गिरफ्तार

दिल्ली हाई कोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) मंगलवार (02 अप्रैल 2024) को जवाब दाखिल कर बताया है कि दिल्ली शराब नीति घोटाले में अरविंद केजरीवाल ही मुख्य साजिशकर्ता हैं। ईडी ने अरविंद केजरीवाल को शराब घोटाले के मामले का ‘मुख्य साजिशकर्ता’ बताते हुए कहा है कि आम आदमी पार्टी के जरिए वही मनी लॉन्ड्रिंग कर रहे थे। ईडी ने अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी की वजह भी बताते हुए कहा कि वो लगातार ईडी के समन से भागते रहे और 9 समन जारी होने के बावजूद पूछताछ में शामिल नहीं हुए। वहीं, आम आदमी पार्टी ने ईडी को झूठा बताया है और कहा है कि मनी ट्रेल न मिलने पर ईडी झूठे दावे कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने खुद मनी ट्रेल की बात को नकारा है। बता दें कि अरविंद केजरीवाल की याचिका पर मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट सुनवाई कर रही है। केजरीवाल ने खुद की गिरफ्तारी को अवैध बताया है।

हिंदुस्तान टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि ईडी ने दिल्ली हाई कोर्ट से कहा कि ‘दिल्ली शराब नीति घोटाले’ के मुख्य सरगना और साजिश कर्ता अरविंद केजरीवाल हैं। उनके ही नेतृत्व में दिल्ली सरकार के मंत्रियों, आम आदमी पार्टी ने नेताओं और अन्य व्यक्तियों ने ये नीति तैयार की थी। ये नीति ‘दक्षिण के समूह’ को फायदा पहुँचाने के लिए विजय नायर, मनीष सिसोदिया और दक्षिण ग्रुप से सदस्यों की मिलीभगत से तैयार की गई थी।

ईडी ने कहा कि आम आदमी पार्टी ने अरविंद केजरीवाल के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध किया है। ये पीएमएलए एक्ट 2002 के धारा 70 के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। ईडी ने बताया कि आम आदमी पार्टी दिल्ली शराब घोटाले की मुख्य लाभार्थी रही है। अरविंद केजरीवाल इसकी सभी गतिविधियों को नियंत्रित करते हैं। गवाहों के बयानों में भी यही बात है कि वो इस नीति को बनाने वालों में शामिल थे।

ईडी ने अरविंद केजरीवाल की जमानत का ये कहते हुए विरोध किया है कि अरविंद केजरीवाल को जाँच में शामिल होने के कई मौके दिए गए। उन्हें 9 समन जारी किए गए, लेकिन उन्होंने सहयोग नहीं किया। इस घोटाले से जुड़ी नकदी का हिस्सा 45 करोड़ रुपए साल 2022 में हुए गोवा विधानसभा चुनाव में खर्च किए गए।

अरविंद केजरीवाल ने 23 मार्च को अपनी गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था, जिसके बाद कोर्ट ने ईडी से जवाब माँगा था। ईडी ने अपनी बात कोर्ट में रखी थी, जिसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था। इसके बाद से अरविंद केजरीवाल ईडी की हिरासत में हैं। उन्हें 2 दिन पहले तिहाड़ जेल शिफ्ट कर दिया गया है।

आप ने ईडी को बताया झूठा

ईडी द्वारा हाई कोर्ट में दाखिल जवाब पर आम आदमी पार्टी ने पलटवार किया है। आम आदमी पार्टी ने ईडी को झूठा बताया है और कहा कि ईडी झूठ बोलती है। आप ने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट खुद माना है कि इस कथित घोटाले में कोई मनी ट्रेल मिली ही नहीं है। कोई पैसा भी नहीं मिला है। ये ईडी सुप्रीम कोर्ट में इस बारे में कोई सबूत पेश नहीं कर पाई।

कम हो रहा केजरीवाल का वजन

तिहाड़ जेल में बंद आम आदमी पार्टी के मुखिया और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का वजन तेजी से गिर रहा है। अरविंद केजरीवाल ने अपने तेजी से घटते वजन को लेकर मॉनिटरिंग की जरूरत बताई है। टाइम्स नाउ ने तिहाड़ के डॉक्टरों के हवाले से बात बताई है। आम आदमी पार्टी के सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अरविंद केजरीवाल का वजन 4.5 किलो घट गया है। हालाँकि तिहाड़ जेल के प्रशासन से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि ये दावा गलत है। अरविंद केजरीवाल का वजन 55 किलो था, वो वजन बरकरार है।

PM मोदी पर जातिवादी टिप्पणी की जाँच करेगा पिछड़ा आयोग, बंगाल के DGP से माँगी रिपोर्ट: TMC नेता ने कहा था- तेली के बेटे ने राम मंदिर में कैसे की पूजा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लेकर जातिवादी टिप्पणी करने वाले तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) नेता पियूष पांडा पर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग सख्त हो गया है। आयोग ने पश्चिम बंगाल के डीजीपी से इस मामले में की गई कार्रवाई का ब्यौरा माँगा है। आयोग के राष्ट्रीय अध्यक्ष हंसराज अहीर ने इस मामले में जाँच के आदेश भी दिए हैं।

राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने पश्चिम बंगाल के डीजीपी को मंगलवार (2 अप्रैल, 2024) को लिखे पत्र में कहा, “समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के माध्यम से राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को यह जानकारी प्राप्त हुई है कि तृणमूल कांग्रेस नेता पियूष पांडा ने भारत के माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक और जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया है।”

आयोग ने आगे लिखा, “भारत के प्रधानमंत्री पद पर बैठे हुए पिछड़े वर्ग के व्यक्ति के विरूद्ध की गई आपत्तिजनक टिप्पणी को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष श्री हंसराज गंगाराम अहीर ने गम्भीरता से लेते हुए जाँच करने का विनिश्वय किया है।”

आयोग ने इस सम्बन्ध में संविधान के अनुच्छेद 338(ख) के तहत पश्चिम बंगाल के डीजीपी से इस मामले में की गई कार्रवाई का ब्यौरा देने को कहा है। यह ब्यौरा डीजीपी को शपथ पत्र पर देना होगा। इससे पहले पियूष पांडा के बयान को लेकर भाजपा नेताओं ने चुनाव आयोग और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से कार्रवाई की माँग की थी।

इस कार्रवाई को लेकर आयोग के अध्यक्ष हंसराज अहीर ने कहा, “प्रधानमंत्री सरीखे उच्च पद पर बैठे व्यक्ति की जाति का नाम लेकर राम मंदिर उद्घाटन करने के अधिकार सम्बन्धी विचार व्यक्त किए जाते हैं तो यह आपत्तिजनक स्थिति है। इस सम्बन्ध में सुवेंदु अधिकारी ने मुझे शिकायत भेजी है। मैं निश्चित रूप से इस पर कार्रवाई करने जा रहा हूँ।”

पांडा के बयान को सामने लाने वाले पश्चिम बंगाल के भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने इस मामले पर कार्रवाई करने के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष हंसराज अहीर का धन्यवाद किया है। सुवेंदु अधिकारी ने पीएम मोदी को ‘तेली के बेटे’ कहे जाने को लेकर पियूष के खिलाफ कार्रवाई की माँग थी और कहा था कि TMC सुप्रीमो बनर्जी ने ऐसे नेताओं को छूट दी हुई है।

गौरतलब है कि TMC नेता पियूष पांडा का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जाति (तेली) बताते हुए अपमानजनक भाषा का उपयोग कर रहे थे। उन्होंने इस बयान में कहा था, “नरेन्द्र मोदी अहंकारी हैं, वह तेली (जाति) के बेटे हैं, वह राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा और पूजा कैसे कर सकते हैं जहाँ किसी ब्राम्हण को नहीं बुलाया गया। फिर ब्राम्हणों का क्या काम है, मैं अपना जनेऊ प्रधानमंत्री कार्यालय भेज दूँगा। मैं कोंटई बस स्टैंड पर बैठ का जूते पॉलिश करूँगा।”

पियूष पांडा ने पीएम मोदी पर जातिवादी टिप्पणी के अलावा और भी कई बातें कही थीं। उन्होंने पीएम मोदी की डिग्री और चाय बेचने को लेकर भी प्रश्न उठाए थे। पांडा ने कहा था कि आज से 50-60 साल पहले देश में कम्प्यूटर और टाइपराइटर नहीं थे लेकिन पीएम मोदी की डिग्री कम्प्यूटराइज्ड है।

पियूष पांडा ने कहा था, “वह (पीएम मोदी) कौन से स्टेशन पर चाय बेंचते थे? क्या आपको नाम पता है? किस स्टेशन पर भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री और गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री चाय बेचा करते थे? बहुत जल्द वह पूर्व प्रधानमंत्री हो जाएँगे। अगर कोई मुझे यह बता देगा कि वह किस स्टेशन पर चाय बेचा करते थे तो मैं राजनीति से संन्यास ले लूँगा।” गौरतलब है कि यह सर्वविदित है पीएम मोदी गुजरात के वडनगर रेलवे स्टेशन पर चाय बेचा करते थे। यहाँ पर उनकी वह चाय की दुकान अब भी सुरक्षित है।

पांडा ने पीएम मोदी की शिक्षा को लेकर कहा था, “वह 70 साल के हैं, कोई बता सकता है कि 50 साल पहले जारी किए गए प्रमाण पत्र कहाँ हैं, तब पेन से लिख कर जारी किए जाते थे, लेकिन मोदी जी के प्रमाणपत्र कम्यूटर से जारी हैं। 50 साल पहले देश में कम्यूटर और टाइपराइटर भी नहीं थे। वह बहुत बड़े धोखेबाज हैं, एकदम फर्जी हैं।”

हिंदुओं से इतनी घृणा क्यों आज तक? 12 साल की बच्ची से 63 साल के ‘पादरी’ ने की शादी, क्योंकि कोई और उस ‘कुँवारी’ से न कर सके सेक्स; लेकिन Aaj Tak ने ‘पुजारी’ बता बेची खबर

अफ्रीका के घाना में एक बुजुर्ग ईसाई पादरी ने एक छोटी बच्ची से शादी कर ली और आजतक इस मामले में हिंदू पुजारियों को बदनाम करने पर तुला है। हाल में खबर आई थी कि घाना के नंगुआ में 63 साल के एक प्रभावशाली पादरी ‘गबोरबू वुनोबो नुउमो बोरकेटे लावे XXXIII’ ने 12 साल की बच्ची से शादी की है और उसका शुद्धिकरण भी करवाया गया है।

खबर में लिखा था कि ये शादी पुराने रिवाजों के कारण हुई जिसके तहत कहा जाता है कि ईसाई पादरी को एक कुँवारी लड़की से शादी करनी होती है। अब आजतक ने इस इस खबर को कैसे मरोड़ा ये देखिए।

खबर के ट्वीट का स्क्रीनशॉट जहाँ पुजारी शब्द लिखा है (फोटो साभार: आजतक)

ईसाई पादरी को आजतक ने अपनी खबर की सोशल हेडलाइन और टेक्स्ट में हर जगह पुजारी लिखा ताकि पाठकों को ऐसा लगे कि ये काम किसी हिंदू पुजारी का है। हाालँकि सोशल मीडिया पर जब खबर को पढ़ने वालों ने आजतक की हरकत को पकड़कर उजागर किया तो बड़ी चालाकी से उन्होंने खबर में जहाँ-जहाँ ‘पुजारी’ लिखा था, उन सबको हटा दिया और वहाँ पादरी लिख दिया। वहीं आजतक के ट्वीट को यदि देखें तो उसमें अब (खबर लिखने तक) भी पुजारी ही लिखा हुआ है।

खबर का स्क्रीनशॉट जहाँ पादरी शब्द लिखा है (फोटो साभार: आजतक)

लोग अब आजतक से खबरों में ऐसे गलत शब्द के इस्तेमाल के लिए माफी माँगने को कह रहे हैं क्योंकि ऐसा पहली बार नहीं है कि मीडिया ने गलत शब्दों से मीडिया को भ्रमित करने का प्रयास किया हो। अक्सर ऐसी रिपोर्ट्स हमें देखने को मिलती रहती है जब मौलवी या पादरी को पुजारी लिखा जाए, झाड़फूँक करने वाले फकीर को तांत्रिक कहा जाए आदि-आदि।

घाना में पादरी और बच्ची की शादी

बता दें कि घाना में आधिकारिक तौर पर बाल विवाह की अनुमति नहीं है लेकिन किसी परंपरा के तहत वहाँ ऐसा करने देते हैं। ये शादी भी पुलिस की मौजूगी में हुई, लेकिन प्रशासन ने अभी इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

सिर्फ, बताया गया है कि ईसाई पादरी को कुँवारी लड़की से शादी करनी थी और नुंगुआ में उस बच्ची के अलावा फिलहाल नौ से अधिक उम्र की कोई कुँवारी लड़की नहीं है, इसलिए पादरी ने उस बच्ची को अपनी दुल्हन चुना।

ये भी कहा जा रहा है कि बच्ची का चुनाव पादरी ने तभी कर लिया था जब वो 6 साल की थी। शादी के बाद अब लड़की के शुद्धिकारण के लिए पारंपरिक समारोह होना है जिसके बाद वो बतौर पादरी की पत्नी बनकर जीवन जिएगी।

इस शादी की खबर सुनकर जहाँ हर कोई हैरान है तो वहीं घाना में चर्च के लोग इसके बचाव में तर्क दे रहे हैं। समझाया जा रहा है कि बच्ची अभी स्कूल में है और उसे अन्य किसी लड़की से बचाने के लिए यह शादी हुई है। जब लड़की परिपक्व हो जाएगी तो अंतिम निर्णय लिया जाएगा। शुद्धिकरण समारोह की बात करें तो ये तर्क दिया गया कि कोई पुरुष उस बच्ची संग संबंध न बनाए इसलिए ये सब जरूरी था।

सबसे अजीब बात यह है कि इस शादी के बचाव में चर्च के प्रवक्ता द्वारा अजीबोगरीब तर्क दिए गए हैं। इस शादी के बारे बात करते हुए उन्होंने कहा कि लड़की का पुनर्जन्म हुआ है, वो ऐसी लड़की है 300 साल पहले जीवित थी वो आज वापस आई है इसलिए इस तरह के काम किए गए हैं।

बता दें कि इस शादी के बाद अब बच्ची गोबरसू वुलोमा की पत्नी हो गई है। चर्च और वहाँ का समाज इसका समर्थन कर रहा है और ये कहा जा रहा है कि लड़की अभी स्कूल में है। पादरी यौन संबंध बनाने के लिए और बच्चा पैदा करने के लिए उसके परिपक्व होने का इंतजार करेगा।

ताइवान में भूकंप, 7.5 तीव्रता के झटके, दर्जनों हताहत: सुनामी की आशंका, जापान से लेकर चीन तक हाई अलर्ट

जापान से लेकर फिलीपींस तक सुनामी की आशंका और भूकंप के झकटों ने पूरे दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में दहशत फैला दिया। ताइवान में कई इमारतें ताश के पत्तों की तरह ढह गई। जापान से लेकर फिलीपींस तक सुनामी की चेतावनी जारी कर दी गई। हालाँकि बाद में सुनामी की चेतावनी को रद्द कर दिया गया, लेकिन तब तक हजारों लोगों को समुद्री इलाकों से दूर हटाया जा चुका था। बुधवार की सुबह दक्षिण एशियाई देशों के लिए आफत बनकर आई। इन तीनों देशों में दर्जनों लोगों के हताहत होने की सूचना मिल रही है।

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, ताइवान से जापान के बीच ज्यादा तबाही मची है। भूकंप की वजह से सुनामी का खतरा बढ़ गया था, जिसकी वजह से ताइवान, जापान और फिलीपींस में तटीय इलाकों के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की गई। इस बीच, ताइवान में इंटरनेट बंद होने से लेकर कई बिल्डिंगों के गिरने की सूचना आ रही है।

एनडब्ल्यूएस ने बाद में सुनामी की चेतावनी वापस ले ली। उसने बताया कि ताईवान में 7.5 तीव्रता के भूकंप के झटके आए। एनडब्ल्यूएस अमेरिकी एजेंसी है, जो एशिया प्रशांत क्षेत्रों के साथ अमेरिका में भी भूकंप जैसी आपदाओं को लेकर पूर्व चेतावनी जारी करता है।

ताइवान के हुआलिएन में दो बिल्डिंगें एक-दूसरे पर गिर गई। दमकल विभाग के हवाले से एएफनी ने बताया है कि इस बिल्डिंग में कई लोग फंसे हो सकते हैं, हालाँकि अभी ज्यादा जानकारी नहीं मिल पाई है। इस इलाके में 7.4 तीव्रता के भूकंप के झटके लगे हैं और यहाँ भी सुनामी की चेतावनी जारी की गई थी।

जानकारी के मुताबिक, भूकंप का केंद्र ताइवान के हुआलिए प्रांत के पूर्वी तटीय इलाके से दूर समुद्र में था। समुद्र में केंद्र होने की वजह से ही जापान और ताइवान के अलावा फिलीपींस तक सुनामी की चेतावनी जारी कर दी गई। हालाँकि ताइवान में भूकंप के टकराने की वजह से सुनामी का आशंका कम हो गई, इसके बावजदू जापान के दक्षिणी पश्चिमी तटीय इलाकों में 3 मीटर ऊंचाई तक समुद्री लहरें उठती दिखी थी।