दिल्ली की एक सत्र अदालत ने शुक्रवार (15 मार्च 2024) को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की याचिका को खारिज कर दिया। इस याचिका में दिल्ली उत्पाद शुल्क के संबंध में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा केजरीवाल के खिलाफ दायर मामले में मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष कार्यवाही पर रोक लगाने की माँग की गई थी। साथ ही उन्होंने अदालत में उपस्थित होने को लेकर छूट माँगी थी।
राउज़ एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश (पीसी) अधिनियम राकेश सयाल ने केजरीवाल की उस याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि इसके लिए वे मजिस्ट्रेट कोर्ट में ही अर्जी दाखिल कर सकते हैं। इस तरह मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को कोर्ट की तरफ से करारा झटका लगा है।
दरअसल, अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट (ACMM) दिव्या मल्होत्रा ने ED द्वारा दायर दो अलग-अलग याचिकाओं को लेकर सीएम केजरीवाल को समन जारी किया था। कोर्ट ने उन्हें पहला समन 7 फरवरी 2024 को जारी किया गया था, वहीं दूसरी शिकायत पर 7 मार्च को समन जारी किया गया था। ACMM इन दोनों मामलों पर 16 मार्च को सुनवाई करेगा।
शराब घोटाले में पूछताछ के लिए ED अरविंद केजरीवाल को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत समन जारी की थी। हालाँकि, वे बार-बार समन की अनदेखी कर रहे थे। इसके बाद ईडी ने केजरीवाल के खिलाफ शिकायत दी थी। वहीं, 17 फरवरी को केजरीवाल कोर्ट में वर्चुअली शामिल हुए थे और कहा था कि वे 16 मार्च को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होंगे।
हालाँकि, सुनवाई से ठीक दो दिन पहले सीएम केजरीवाल ने ACMM के दोनों आदेशों को चुनौती देते हुए सत्र अदालत के समक्ष याचिका दायर कर दी। हालाँकि, कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। सीएम केजरीवाल की तरफ से सीनियर वकील रमेश गुप्ता और राजीव मोहन पेश हुए।
वकील गुप्ता ने तर्क दिया, “सीएम एक लोक सेवक हैं। वे कहते हैं कि उन्हें उनकी व्यक्तिगत क्षमता में बुलाया गया था, लेकिन मैं रिकॉर्ड से प्रदर्शित करूँगा कि उन्हें समन उस मामले में भेजा गया था जो कि उनके सीएम रहते हुए उत्पाद शुल्क नीति से संबंधित है।”
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने आगे कहा, “मैंने कभी नहीं कहा कि मुझे अपनी बहन की बेटी की शादी में जाना है। मैंने कहा कि मेरे अपने आधिकारिक कर्तव्य हैं। समन के बाद शामिल नहीं होने का मैंने कारण बता दिया है। इसलिए कोई जानबूझकर चूक नहीं कर रहा हूँ।”
बता दें कि दिल्ली एक्साइज पॉलिसी को लेकर दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सासंद संजय सिंह जैसे वरिष्ठ नेता पहले से ही हिरासत में हैं। आम आदमी पार्टी का आरोप है कि ED आगामी लोकसभा चुनाव से पहले केजरीवाल को गिरफ्तार करना चाहती है।
दिल्ली शराब नीति घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) लगातार एक्शन मोड में है। अब हैदराबाद से ईडी ने तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव यानी केसीआई की बेटी के कविता (K Kavitha) को गिरफ्तार कर लिया है। उनसे ईडी की टीम ने पूछताछ की और फिर उन्हें हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया। ईडी की टीम उन्हें हैदराबाद से दिल्ली ला रही है।
समाचार एजेंसी एएनआई ने ईडी के सूत्रों के हवाले से कहा है कि भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की नेता और एमएलसी नेता के.कविता को आज (15 मार्च 2024) की रात को ही हैदराबाद से दिल्ली लाएगी। इस मामले में पूछताछ की तमाम कार्रवाई और अन्य औपचारिकताओं को दिल्ली में पूरा किया जाएगा। इस मामले में ईडी ने दिन भर कविता के घर और अन्य ठिकानों पर छापेमारी की, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
BRS MLC K Kavitha has been arrested by the Enforcement Directorate (ED).
आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, के कविता से ईडी तीन बार पहले भी पूछताछ कर चुकी थी, लेकिन पिछली बार के 2 समन में वो ईडी के सामने पेश नहीं हुई थी। इसके बाद इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, फिर भी कार्रवाई!
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से कविता को बड़ी राहत भी मिली थी। सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को यह निर्देश दिया कि वो 20 मार्च तक कविता को पेशी के लिए समन ना भेजें और गिरफ्तारी से भी छूट दी गई। हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने आज साफ किया कि वो बार-बार इस तरह कविता की राहत को आगे नहीं बढ़ाएंगे। मामले की अगली सुनवाई अब 19 मार्च को होगी।
क्या है मामला?
बता दें कि ईडी ने शराब घोटाला मामले में जो चार्जशीट दायर की है, उसमें कहा है कि कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की बेटी और विधान परिषद की सदस्य (MLC) के कविता ने कुछ लोगों के साथ मिलकर AAP के संचार प्रभारी विजय नायर को 100 करोड़ रुपए की रिश्वत दी। रिश्वत देने का उद्देश्य शराब कारोबार में अनुचित लाभ हासिल करना था। उल्लेखनीय है कि इस साजिश में व्यवसायी समीर महेंद्रू, ओंगोल (आंध्र प्रदेश) से सांसद मगुनता श्रीनिवासुलु रेड्डी (एमएसआर), उनके बेटे राघव मगुनता और सरथ रेड्डी शामली थे।
आरोप-पत्र (Chargesheet) में कहा गया है कि दक्षिण भारत के इस समूह के साथ मिलकर महेंद्रू और नायर ने रिश्वत वसूलने के लिए बहुत चालाकी से एक ‘उत्पादक संघ’ बनाया। इस संघ में शराब बनाने वाली कंपनी पेरनोड रिकार्ड, बिनॉय बाबू, विजय नायर, अरुण पिल्लई, के कविता, मगुनता श्रीनिवासुलु रेड्डी और उनके बेटे राघव, सरथ रेड्डी, अभिषेक बोइनपल्ली और बुच्ची बाबू शामिल थे।
इस मामले में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत कई लोग जेल में हैं। वहीं, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल लगातार ईडी के समन पर पूछताछ से बचते रहे हैं। हालाँकि कोर्ट ने साफ कर दिया है कि उन्हें 16 मार्च को हर हाल में ईडी के सामने पेश होना पड़ेगा।
अमेरिकी विदेश विभाग ने नागरिकता संशोधन कानून 2019 पर टिप्पणी की, तो भारत ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। अमेरिका ने कहा कि हम सीएए पर नजर रख रहे हैं, जिसके बाद भारत सरकार के विदेश मामलों के मंत्रालय (MEA) ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि यह भारत का आंतरिक मामला है। इसमें किसी भी बाहरी देश के दखल की कोई जरूरत नहीं है।
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अमेरिका के रिएक्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम भारत का आंतरिक मामला है और यह भारत की समावेशी परंपराओं और मानवाधिकारों के प्रति हमारी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को ध्यान में रखते हुए है। यह अधिनियम अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों से संबंधित उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों को सुरक्षित आश्रय प्रदान करता है, जो 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश कर चुके हैं।
रणधीर जायसवाल ने आगे कहा, “सीएए नागरिकता देने के बारे में है, नागरिकता छीनने के बारे में नहीं। यह राज्यविहीनता के मुद्दे को संबोधित करता है, मानवीय गरिमा प्रदान करता है और मानवाधिकारों का समर्थन करता है। जहाँ तक सीएए के कार्यान्वयन पर अमेरिकी विदेश विभाग के बयान का संबंध है, हमारा मानना है कि यह गलत, गलत जानकारी वाला और अनुचित है।”
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “भारत का संविधान अपने सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है। अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार पर किसी भी चिंता का कोई आधार नहीं है। वोट बैंक की राजनीति को संकट में फंसे लोगों की मदद के लिए किसी प्रशंसनीय पहल के बारे में विचार निर्धारित नहीं करना चाहिए। जिन लोगों को भारत की बहुलवादी परंपराओं और क्षेत्र के विभाजन के बाद के इतिहास की सीमित समझ है, उन्हें बोलने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। भारत के भागीदारों और शुभचिंतकों को उस इरादे का स्वागत करना चाहिए जिसके साथ यह कदम उठाया गया है।”
#WATCH | On CAA, MEA Spokesperson Randhir Jaiswal says, "As you are well aware, the Citizenship Amendment Act 2019 is an internal matter of India and is in keeping with India's inclusive traditions and a long-standing commitment to human rights. The act grants a safe haven to… pic.twitter.com/cJBiDvI7JU
बता दें कि सीएए का नोटिफिकेशन जारी के होने के बाद अमेरिका ने गुरुवार को कहा था कि वह सीएए के नोटिफिकेशन को लेकर चिंतित है और इस पर नजर बनाए हुए है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने कहा था कि हम 11 मार्च से प्रभाव में आए सीएए के बारे में चिंतित हैं। हम बारीकी से निगरानी कर रहे हैं कि इस अधिनियम को कैसे लागू किया जाएगा। धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान और सभी समुदायों के लिए कानून के तहत समान व्यवहार मौलिक लोकतांत्रिक सिद्धांत है।
पश्चिम बंगाल के संदेशखाली की पाँच महिलाओं सहित हिंसा की शिकार 11 पीड़ितों ने शुक्रवार (15 मार्च 2024) को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। उन्होंने इस मामले में हस्तक्षेप की माँग की है। बता दें कि संदेशखाली में सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के पूर्व नेता शाहजहाँ शेख ने संदेशखाली की कई महिलाओं का यौन शोषण किया था।
सेंटर फॉर एससी-एसटी सपोर्ट एंड रिसर्च के निदेशक डॉक्टर पार्थ बिस्वास का कहना है, “संदेशखाली के मुद्दे को लेकर पीड़ितों ने आज भारत के राष्ट्रपति को ज्ञापन दिया। राष्ट्रपति ने पूरे मामले को बड़ी संवेदना और सहानुभूति के साथ सुना और इस घटना से वो दुखी हुईं। आज 11 पीड़ित यहाँ आए हैं, जिनमें पाँच महिलाएँ और 6 पुरुष हैं।”
#WATCH | Delhi | 11 victims of violence including five women from West Bengal's Sandeshkhali met President Droupadi Murmu, in Rashtrapati Bhawan, today
Dr. Partha Biswas, Director of the Center for SC/ST Support and Research says, "Regarding the issue of Sandeshkhali, the… pic.twitter.com/3lqQ9R0QFr
मीडिया से बात करते हुए डॉक्टर पार्थ ने कहा, “पीड़िताओं को चिह्नित करके धमकाया जा रहा है कि जब उनके आसपास मीडिया के बंधु नहीं होंगे और शेख शाहजहाँ वापस आ जाएगा तो आप लोगों का क्या होगा… वहाँ स्कूल में जो बच्चे पढ़ने जा रहे हैं, उनके खिलाफ झूठा केस दिया जा रहा है। अभी वहाँ की स्थिति है।”
बिस्वास ने आगे बताया, “साल 2003 में शेख शाहजहाँ सीपीएम में शामिल हो गया। साल 2013 में वह टीएमसी में शामिल हो गया। शेख शाहजहाँ का अत्याचार 8-10 वर्षों से जारी है। जैसे-जैसे उनकी राजनीतिक शक्ति और प्रभाव वहाँ बढ़ता गया, वैसे-वैसे लोगों पर अत्याचार पूरे संदेशखाली में बढ़ता गया। ये सिर्फ एक दिन की बात नहीं है।”
#WATCH | Delhi | Sandeshkhali incident | Dr. Partha Biswas, Director of the Center for SC/ST Support and Research says, "They (victims) are being identified and threatened that when the media would not be around them and Sheikh Shahjahan would return, what would happen to… pic.twitter.com/J6YCo92Ass
डॉक्टर पार्थ ने बताया कि पीड़ितों ने संदेशखाली में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय की सुरक्षा के लिए राष्ट्रपति के हस्तक्षेप का आग्रह किया है। इसके साथ ही राष्ट्रपति को ज्ञापन भी दिया गया है, जिसमें कहा गया है कि पीड़ित परिवारों की स्थिति बेहद चिंताजनक है और इस पर तत्काल ध्यान देते हुए हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
दरअसल, 5 जनवरी 2024 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने राशन घोटाले को लेकर 24 नॉर्थ परगना जिले में आरोपित शाहजहाँ शेख के यहाँ छापा मारा था। हालाँकि, शाहजहाँ भाग निकला, लेकिन हजारों लोगों की भीड़ को बुलाकर ईडी की टीम पर हमला करवा दिया था। इस हमले में कई अधिकारी घायल हो गए थे।
इस घटना के करीब 2 सप्ताह बाद संदेशखाली की महिलाएँ सड़कों पर उतर आईं। उन्होंने शाहजहाँ और उसके सहयोगियों पर यौन उत्पीड़न, जमीन हड़पने और वसूली करने का आरोप लगाते हुए गिरफ्तारी की माँग की थी। देश भर से दबाव पड़ने के बाद बंगाल की पुलिस ने आखिरकार शाहजहाँ को गिरफ्तार कर लिया। बाद में टीएमसी ने उसे पार्टी से भी निकाल दिया।
लोकसभा चुनावों के ऐलान से एक दिन पहले ही मोदी सरकार के हिस्से एक बड़ी कामयाबी आई है। मोदी सरकार देश के 75% ग्रामीण घरों में नल से जल पहुँचाने में सफल रही है। अब गाँवों में रहने वाले व्यक्ति भी अपने घर में ही पानी की आपूर्ति पा रहे हैं। जल्द ही पानी के मटके ले कर जाती महिलाओं की तस्वीर इतिहास की बात हो होने वाली है। देश के तीन चौथाई ग्रामीण घरों में पानी पहुँचाने की यह सफलता मोदी सरकार ने हर घर नल से जल के अंतर्गत ‘जल जीवन मिशन’ के अंतर्गत हासिल की है।
जल जीवन मिशन मोदी सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है। यह प्रधानमंत्री के विकसित भारत लक्ष्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। देश के हर गाँव में नल से साफ़ जल पहुँचे, इसके लिए मोदी सरकार बीते लगभग पाँच वर्षों से काफी पैसा खर्च कर चुकी है।
लोकसभा चुनावों से पहले मोदी सरकार के कामकाज का मूल्यांकन किया जा रहा है। ऐसे में कई मूलभूत समस्याओं को हल करने में सरकार ने सफलता पाई है। आवास योजना के जरिए जहाँ लोगों को घर मुहैया करवाए गए हैं तो वहीं उज्ज्वला के जरिए गैस सिलेंडर दिए गए हैं। पानी की समस्या को खत्म करने के लिए लाई गई योजना जल जीवन मिशन में भी मोदी सरकार अब 75% से अधिक नम्बरों से पास होती दिख रही है।
देश की आबादी का बड़ा हिस्सा आज भी गाँवों में रहता है। हालाँकि, 2014 तक इन गाँवों में पानी जैसी मूलभूत जरूरत को पूरा करने के लिए कोई विशेष कदम नहीं उठाए गए थे। किसी भी सरकार ने यह नहीं सोचा कि देश के गाँवों में भी पीने के साफ़ पानी की आपूर्ति नल के जरिए की जा सकती है। महिलाएँ कई कई किलोमीटर दूर पानी लेने जाने की तस्वीरें सामने आती रहती थीं लेकिन कोई सरकार इस बारे में काम नहीं करती थी।
जल जीवन मिशन से पहले खराब थी हालत
जल जीवन मिशन का ऐलान पीएम मोदी ने 15 अगस्त 2019 को लालकिले से किया था। पीएम ने इस मिशन को लेकर कहा था कि इससे देश में जल संकट की समस्या को खत्म किया जाएगा। गौरतलब है कि यह मिशन चालू होने से पहले देश के अधिकाँश गाँवों में नल से जल की आपूर्ति नहीं होती थी और लोगों को पानी को लेकर काफी समस्या थी।
जल शक्ति मंत्रालय के आँकड़े बताते हैं कि वर्ष 2019 में देश के ग्रामीण क्षेत्र के 19.3 करोड़ घरों में से मात्र 16% घरों में ही नल से जल की आपूर्ति हो पाई थी। यानी 1947 से लेकर 2019 तक देश के मात्र 3.23 करोड़ ग्रामीण घरों तक ही पानी पहुँच सका था।
आँकड़ों के अनुसार, 2019 तक देश के मात्र 10 राज्यों में ही गाँवों में 50% से अधिक जनता नल से सुरक्षित पानी पा रही थी। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों में 5% ग्रामीण घर भी पानी नहीं पहुँचा था। ऐसे में यह मिशन लाया गया।
जल जीवन मिशन ने बदली तस्वीर
2019 में चालू किया गया जल जीवन मिशन लगातार तेजी से बढ़ रहा है और गाँव-गाँव इससे पानी का कनेक्शन पहुँच रहा है। जल शक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि वर्तमान में देश के 75% घर नल से जल पा रहे हैं। अब देश के 19.3 करोड़ ग्रामीण घरों में से 14.5 करोड़ घर अब स्वच्छ पानी पा रहे हैं।
जल जीवन मिशन से पहले और बाद की स्थिति
जल जीवन मिशन शुरू होने के बाद 11.2 करोड़ घरों में पानी का कनेक्शन पहुँचाया गया है। जब यह मिशन चालू किया गया था तब देश के 16 करोड़ से अधिक ग्रामीण घर ऐसे थे जो कि नल से जल नहीं पा रहे थे। अब इनमें से 70% घरों तक पानी पहुँचा है। इसके जरिए देश के दुर्गम इलाकों तक में पानी पहुँचाया जा चुका है।
जल जीवन मिशन पर सरकार ने मिशन मोड में काम किया है। इसके लिए गाँव-गाँव में पानी की टंकियाँ बनाई गई हैं। इनके जरिए पानी की आपूर्ति की जाएगी। इसके अलावा हर गाँव में पानी की पाईपलाइन भी डाली जा चुकी है।
इन 11 करोड़ घरों में पानी पहुँचने का यह लाभ हुआ है कि अब इन घरों की महिलाओं को घर से दूर पानी लेने नहीं जाना पड़ता। पानी के साफ़ और सुरक्षित होने की भी चिंता नहीं करनी पड़ती है। ऐसे में महिलाएँ बचने वाले समय का उपयोग अन्य कामों में कर पा रही हैं।
NEWS18 द्वारा हाल ही में लोकसभा चुनाव को लेकर किए गए सर्वे में 70% लोगों ने बताया कि वह सरकार की जल जीवन मिशन योजना से लाभान्वित हुए हैं। उन्होंने उज्ज्वला और अन्य योजनाओं के साथ इस योजना को प्रभावी बताया।
हरियाणा-गुजरात ने पहुँचाया 100% घरों में पानी, बंगाल-झारखंड फिसड्डी
जल जीवन मिशन के अंतर्गत कई राज्यों के 100% ग्रामीण घरों में नल से जल पहुँच गया है। देश के 11 राज्यों/प्रदेशों ने यह उपलब्धि हासिल की है। ये हैं – गोवा, अंडमान और निकोबार द्वीप, दादरा नगर हवेली और दमन दीव, हरियाणा, तेलंगाना, पुद्दुचेरी, गुजरात, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम। इन सभी राज्यों/प्रदेशों के 100% घरों को नल से जल पहुँचाया जा चुका है।
इसके अलावा बिहार और उत्तराखंड जैसे राज्यों में 90% से अधिक घरों में नल से जल पहुँचाया जा चुका है। अब देश के दो राज्यों को छोड़ कर सभी जगह 50% से अधिक ग्रामीण घर पानी पा रहे हैं। हालाँकि, कई राज्यों का इस योजना के क्रियान्वन में प्रदर्शन चिंताजनक है।
तृणमूल कॉन्ग्रेस की सत्ता वाला राज्य पश्चिम बंगाल इस योजना को लागू करने में सबसे पीछे रहा है। पश्चिम बंगाल में अभी मात्र 45% घरों में ही नल से जल पहुँचाया जा सका है। वहीं झारखंड के मात्र 51% और केरल के 52% घरों में नल से जल पहुँचा है। रेगिस्तानी क्षेत्रफल होने के कारण राजस्थान भी 50% से नीचे है।
केंद्र सरकार ने इस योजना पर अब तक ₹1.82 लाख करोड़ खर्चे हैं। केंद्र सरकार साल दर साल अपना योगदान इस योजना में बढ़ा रही है। वर्ष 2023-24 में इस योजना के लिए ₹66,023 करोड़ का आवंटन किया था। जबकि 2022-23 में इस योजना के लिए ₹54,744 करोड़ दिए थे।
इस बार के लोकसभा चुनावों में मोदी सरकार 10 साल में किए गए विकास को मुद्दा बना कर जनता के सामने जाने वाली है। मोदी सरकार जल जीवन मिशन को आवास योजना और मुफ्त राशन योजना जैसी सफलताओं के साथ जोड़ कर लोगों के सामने रखेगी। ग्रामीण जनता पर भी इस अपील का बड़ा असर देखने को मिल सकता है। पानी की समस्या सुलझने से लोगों के जीवन स्तर में बदलाव आया है, ऐसे में वह इस मुद्दे को लेकर भाजपा का समर्थन इन चुनावों में कर सकते हैं।
रमजान के महीने में हनुमान मंदिर में हनुमान आरती न की जाए, इसके लिए महाराष्ट्र के संभाजीनगर के चिकलथाना इलाके के कामगार कॉलोनी में मुस्लिम भीड़ ने हंगामा कर दिया। इस्लामवादियों ने वहाँ मंदिर में घुसकर आरती रोकने का प्रयास किया। बाद में बात बढ़ी और आरती में शामिल होने जा रहे हिंदुओं पर पथराव हुआ। घटना में 3 लोग घायल हो गए। पुलिस ने लाठीचार्ज करके मामला संभाला। बाद में 13 मार्च को हिंदू पक्ष ने घटना के विरोध में महाआरती की।
क्या है पूरा मामला
बताया जा रहा है कि 12 मार्च को चिकलथाना की कामगार कॉलोनी में हनुमान मंदिर में नियमित रूप से मंगलवार शाम की आरती चल रही थी। ऐसे में इस्लामवादियों ने मंदिर के अंदर घुसकर हिंदुओं को चेतावनी दी कि वह एक महीने तक आरती न करें (क्योंकि रमजान चल रहा है)। उनकी यह बात सुनकर हिंदू पक्ष के लोग भी नाराज हो गए और दोनों की ओर से लाउडस्पीकर पर अपनी अपनी प्रार्थना की गई।
छत्रपती संभाजीनगर मधील चिकलठाणा येथील हनुमान मंदिरात एकत्रित झालेला सकल हिंदू समाज…
— Sudarshan Maharashtra (@SudarshanNewsMH) March 13, 2024
इस दौरान आरती के लिए कुछ अन्य हिंदू युवक मंदिर पर आने लगे कि तभी उनके ऊपर पत्थर फेंके गए जिसके बाद मामला बढ़ गया और मंदिर में मौजूद लोग सड़क पर आ गए। उन्होंने जालना रोड पर इकट्ठा होकर यातायात को बाधित किया, फिर नारेबाजी हुई।
जानकारी के मुताबिक, पत्थरबाजी की घटना में तीन हिंदू युवक बेरहमी से घायल हुए। अराजक तत्वों द्वारा महिलाओं तक से मारपीट हुई। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि अंत में स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। घायल हिंदू युवकों की पहचान अविनाश बोंद्रे, सागर बंजारे और शुभम राठौड़ के रूप में हुई। उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया। शुभम ने पुलिस को बताया कि वे आरती के लिए हनुमान मंदिर जा रहे थे तभी उन पर पथराव किया गया। इससे दहशत फैल गई व सभी डर के मारे अपनी मोटरसाइकिलें छोड़कर जालना रोड की ओर भाग गए।
छत्रपती संभाजी नगर मधील चिकलठाणा येथे हनुमान मंदिराची आरती बंद करण्यासाठी रोज जिहादी हल्ले करत असल्याची घटना काल सुदर्शन मराठीने समोर आणली होती…
त्याचा परिणाम म्हणजे या घटनेनंतर आज संबंधित ठिकाणी हनुमान मंदिरात छत्रपती संभाजीनगर मधील सकल हिंदू समाजाने महाआरतीचे नियोजन केले… pic.twitter.com/68KHQj3mLO
— Sudarshan Maharashtra (@SudarshanNewsMH) March 13, 2024
घटना के ठीक एक दिन बाद हिंदुओं ने इस्लामी हिंसा के विरोध में 13 मार्च को महाआरती की। महाआरती को करवाने वाले शिवसेना के जिला अध्यक्ष राजेंद्र जंजाल थे। महाआरती में करीबन 1500 लोगों ने भाग लिया।
हनुमान मंदिराची आरती बंद करण्या साठी रोज जिहादी करताय हल्ले. हनुमान मंदिर, छत्रपती संभाजी महाराज नगर च्या हिंदूंमध्ये जबरदस्त आक्रोश. pic.twitter.com/Lv1Sxt3ee1
— Sudarshan Maharashtra (@SudarshanNewsMH) March 13, 2024
दो FIR दर्ज
गौरतलब है कि इस मामले में दो मुकदमे दर्ज किए गए हैं। कृष्णा नागे नामक व्यक्ति द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, बदमाशों ने रजनी गुप्ता, हरिलाल गुप्ता, कृष्णा नागे, राजू रोठे, रामसनाई गुप्ता और अन्य पर हमला किया। शिकायत में शकील जैनुद्दीन शेख, अकील जैनुद्दीन शेख, अनीस जैनुद्दीन, रफीक जैनुद्दीन शेख, शोएब सलीम कुरेशी और 12 अन्य का नाम है। इसके अलावा दूसरी शियाकत में दीपक राजेंद्र चव्हाण, अजय गायकवाड़ और 30 से 40 अन्य के खिलाफ दंगा करने का मामला दर्ज किया गया है।
चुनाय आयोग ने गुरुवार (14 मार्च 2024) को एसबीआई से प्राप्त चुनावी ब्रांड का डाटा जारी किया। ये डाटा दो शीट में जारी किया गया, जिसकी पहली शीट में 12 अप्रैल 2019 से 11 जनवरी 2024 तक इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदने वालों की जानकारी है, तो दूसरे में 12 अप्रैल 2019 से 24 जनवरी 2024 तक इन बॉन्ड्स को भुनाने वाले राजनीतिक दलों की जानकारी। हालाँकि, भारत में मुख्य विपक्षी पार्टियों के लिए दुख की बात ये रही कि इलेक्टोरल बॉन्ड वाली लिस्ट में जिन नामों की उन्हें सबसे ज्यादा उम्मीद थी, वो कहीं मिले ही नहीं। इनका अनुमान था कि इस लिस्ट में अडानी ग्रुप और रिलायंस ग्रुप का नाम सबसे ऊपर होगा, लेकिन इस लिस्ट में इनका नाम तक नहीं आया।
इस लिस्ट में अडानी का नाम होने को लेकर इतनी ज्यादा निराशा फैला दी गई कि इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक होने से एक दिन पहले ही शेयर बाजार में अडानी ग्रुप के शेयरों में काफी गिरावट दर्ज की गई। जानकारों का कहना था कि ये गिरावट घबराहट की वजह से हुई, क्योंकि अडानी का नाम इस लिस्ट में आने की उम्मीद थी। इसकी वजह से अडानी ग्रुप के शेयरों को काफी नुकसान हुई, लेकिन जब प्रोपेगेंडा में शामिल लोगों को इस बात का पता चला कि इस लिस्ट में अडानी और अंबानी की कंपनियों का जिक्र तक नहीं है, तो उन्होंने तुरंत ही फेक न्यूज फैलाने शुरू कर दिए, ताकि अडाणी ग्रुप को नुकसान पहुँचाया जा सके।
अभी वो अडानी का नाम लिस्ट में न ढूँढ पाने की निराशा से निकले भी नहीं थे, कि उन्हें नवयुग इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड का नाम दिख गया, जिसका लिंक तुरंत अडानी से जोड़कर सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलाने का सिलसिला शुरू कर दिया गया। जबकि ये बहुत पहले साफ हो चुका है कि उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में बन रही सिल्कयारा सुरंग को बनाने वाली कंपनी नवयुग से अडानी का कोई लिंक नहीं है, इसके बावजूद नवयुग को अडानी के साथ जोड़कर फेक न्यूज फैलाया जाने लगा और बताया जाने लगा कि नवयुग के माध्यम से अडानी ने इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से चंदा दिया है।
स्क्रीनशॉट: नवयुग कंपनी को अडानी का होना का दावा किया जा रहा है।
अनवर खान नाम के एक्स हैंडल पर भी ये झूठ परोसा गया।
अडानी पर फर्जी दावों की भरमार
कई हैंडल्स पर नवयुग और अडानी का फर्जी कनेक्शन बताया गया।
न्यूटन नाम के एक्स हैंडल पर भी फर्जी दावा
नवयुग पर प्रकाश डालने वाला वही स्क्रीनशॉट कई लोगों द्वारा गौतम अडानी की तस्वीरों के साथ साझा किया गया था, जिसमें दावा किया गया था कि नवयुग इंजीनियरिंग “गौतम अडानी के स्वामित्व वाली” सहायक कंपनी है। हकीकत में अडानी ग्रुप का नवयुग से कोई लेना-देना भी नहीं है।
बता दें कि कई वामपंथी मीडिया पोर्टल और उनसे जुड़े ‘पत्रकारों’ ने भी ये दावा किया था कि नवयुग का स्वामित्व अडानी के पास है। द वायर ने तो पिछले व्यापारिक लेनदेन का भी हवाला दे दिया था और बताया था कि अडानी ग्रुप ने आंध्र प्रदेश में कृष्णापटनम पोर्ट कंपनी में हिस्सेदारी खरीदी थी। हालाँकि हालाँकि, अडानी समूह ने पिछले साल नवंबर में एक मीडिया बयान में यह स्पष्ट कर दिया था कि सिल्कयारा सुरंग के निर्माण से जुड़ी किसी भी कंपनी का उनका स्वामित्व नहीं है। बयान में स्पष्ट किया गया है कि अडानी समूह की कोई भी कंपनी या सहायक कंपनी सुरंग के काम से जुड़ी नहीं है और अडानी के किसी भी कंपनी के मालिक होने के दावे और आरोप झूठे हैं।
Clarification on nefarious attempts to link us to the unfortunate collapse of a tunnel in Uttarakhand. pic.twitter.com/4MoycgDe1U
कुछ फर्जी समाचार विक्रेताओं ने अडानी समूह के एक पुराने संयुक्त उद्यम का हवाला देते हुए झूठा दावा करने की कोशिश की है कि अडानी नवयुग के “मालिक” हैं। यदि कोई बड़ा समूह किसी विशेष परियोजना के लिए किसी अन्य कंपनी के साथ संयुक्त उद्यम में प्रवेश करता है, तो वे कंपनी के “मालिक” नहीं बन जाते हैं। व्यापार जगत में संयुक्त उद्यम आम बात है, खासकर बड़ी निर्माण परियोजनाओं में। अडानी समूह पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि नवयुग इंजीनियरिंग कंपनी का उनका स्वामित्व नहीं है, और उक्त कंपनी उनकी सहायक कंपनी नहीं है।
हालाँकि मोदी सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने के लिए किसी विश्वसनीय मुद्दे के अभाव में अडानी और अंबानी पर हमला करना कॉन्ग्रेस पार्टी और कई विपक्षी दल के नेताओं की पुरानी आदत रही है। यही ट्रेंड इस बार भी दिख रहा है, जिसमें नवयुग कंपनी को अडानी का बताकर लोगों में भ्रम फैलाया जा रहा है।
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का विरोध करने वाली आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस के खिलाफ आज (15 मार्च 2024) फिर पाकिस्तानी और अफगानिस्तानी शरणार्थी सड़कों पर उतरे। उन्होंने हाथ में पोस्टर और तिरंगा लेकर AAP और कॉन्ग्रेस का विरोध किया। इसे देखते हुए अरविंद केजरीवाल की एक और बार सख्त टिप्पणी आई है।
अरविंद केजरीवाल ने सड़कों पर प्रदर्शन करते शरणार्थियों को देख अपना गुस्सा व्यक्त किया। उन्होंने कहा, “इन पाकिस्तानियों की हिम्मत? पहले हमारे देश में गैर कानूनी तरीके से घुसपैठ की, हमारे देश का क़ानून तोड़ा। इन्हें जेल में होना चाहिए था। इनकी इतनी हिम्मत हो गई कि हमारे देश में प्रदर्शन कर रहे हैं, हुडदंग कर रहे हैं? CAA आने के बाद पूरे देश में पाकिस्तानी और बांग्लादेशी फैल जाएँगे और लोगों को परेशान करेंगे। बीजेपी इन्हें अपना वोट बैंक बनाने के स्वार्थ में पूरे देश को परेशानी में धकेल रही है।”
इन पाकिस्तानियों की हिम्मत? पहले हमारे देश में ग़ैर क़ानूनी तरीक़े से घुसपैठ की, हमारे देश का क़ानून तोड़ा। इन्हें जेल में होना चाहिए था। इनकी इतनी हिम्मत हो गयी कि हमारे देश में प्रदर्शन कर रहे हैं, हुडदंग कर रहे हैं? CAA आने के बाद पूरे देश में पाकिस्तानी और बांग्लादेशी फैल… https://t.co/xjVVrrglt7
केजरीवाल ने यह टिप्पणी पीटीआई द्वारा साझा की गई वीडियो पर की। इसमें सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों को विरोध करते देखा जा सकता है। वहीं दूसरी ओर पुलिस उन्हें रोकने का प्रयास करती दिख रही है। सामने आई वीडियो कॉन्ग्रेस हेडक्वार्टर के पास की है। यहाँ प्रदर्शन करने आई एक महिला को कहते सुना जा सकता है- “हम अरविंद केजरीवाल, राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं, ये लोग क्यों हमारे अधिकार छीनना चाहते हैं जब पीएम हमें दे रहे हैं।”
#WATCH | Delhi: A refugee Nanki says, "…We are protesting against Arvind Kejriwal, Rahul Gandhi and Sonia Gandhi…Why are they snatching away our rights? PM Modi is giving us rights, nobody has the right to snatch it away…" pic.twitter.com/aYzgaJ1IaB
बता दें कि जब से मोदी सरकार ने सीएए को लेकर अधिसूचना जारी की है उसके बाद से कॉन्ग्रेस नेता और आप नेता समेत बाकी विपक्षी दल भी इसके विरोध में टिप्पणियाँ कर रहे हैं। हाल में कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने CAA को भेदभावपूर्ण था। उन्होंने कहा था कि सीएए भारतीय संविधान के मूल सिद्धांतों और भावना के खिलाफ है। चुनाव से ठीक पहले अधिसूचित CAA नियम दर्शाता है कि बीजेपी ध्रुवीकरण की राजनीति को लेकर कितनी सजग है।
#WATCH | Hindu refugees from Pakistan stage protest outside Delhi CM Arvind Kejriwal's residence over his remarks on CAA. pic.twitter.com/TGCKsGzqVb
वहीं AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि अगर सीएए लागू होगा तो देश में अंधाधुंध लोग आएँगे, जैसा कि स्वतंत्रता के बाद हुआ था। इससे कानून व्यवस्था बिगड़ेगी और चोरियाँ, डकैतियाँ और बलात्कार आदि होंगे।
इन्हीं बयानों के बाद कल भी पाकिस्तान से आए शरणार्थी सड़कों पर उनके विरोध में उतरे थे। इस दौरान उन्होंने मोदी सरकार के समर्थन में नारे लगाए थे और सीएम केजरीवाल को कहा था कि वह सीएए पर भ्रम न फैलाएँ, जनता को सच बताएँ। केजरीवाल के इसी बयान के विरोध में गृहमंत्री अमित शाह ने भी उनसे कहा था कि वो हिंदू, सिख, ईसाई, पारसी और बौद्ध के खिलाफ बोलते हैं मगर कभी रोहिंग्याओं के खिलाफ नहीं कहा।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (15 मार्च 2024) को चुनावी बांड मामले में भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) से चुनावी बॉन्ड की संख्या का खुलासा न करने पर प्रतिक्रिया माँगी। इसके साथ इससे संबंधित सारे विवरण क्यों नहीं सामने लाए गए, इसको लेकर भी पूछा है। कोर्ट ने कहा कि चुनावी बॉन्ड की संख्या से पहचान करने में मदद मिलेगी।
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली जस्टिस संजीव खन्ना, बीआर गवई, जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्रा की पाँच सदस्यीय पीठ ने इस पर सुनवाई की। पीठ ने कहा कि एसबीआई ने 11 मार्च 2024 के कोर्ट के आदेश का पूरी तरह से पालन नहीं किया है। इस आदेश में कोर्ट ने चुनावी बॉन्ड से संंबंधित सभी विवरणों का खुलासा करने के लिए बैंक को कहा था।
कोर्ट ने कहा, “संविधान पीठ के फैसले ने स्पष्ट किया कि चुनावी बॉन्ड के सभी विवरण खरीद की तारीख, खरीदार का नाम, मूल्यवर्ग सहित उपलब्ध कराए जाएँगे। एसबीआई ने चुनावी बॉन्ड संख्या (अल्फा न्यूमेरिक नंबर) का खुलासा नहीं किया है। हम रजिस्ट्री को निर्देश देते हैं कि वह एसबीआई को सोमवार को पेश होने के लिए नोटिस जारी करे।”
इस पीठ ने फरवरी 2024 में चुनावी बॉन्ड योजना को रद्द कर दिया था। पीठ ने कहा था कि एसबीआई 12 अप्रैल 2019 से लेकर अभी तक का चुनावी बॉन्ड के माध्यम से पैसे हासिल करने वाले राजनीतिक दलों का विवरण भारत के चुनाव आयोग को सौंपे। यह काम 6 मार्च तक किया जाना था, लेकिन एसबीआई ने समय सीमा बढ़ाने की माँग की।
एसबीआई ने कहा कि पूरे डेटा को निकालने के लिए उसे जून 2024 तक का समय दिया जाए। हालाँकि, सुप्रीम कोर्ट ने एसबीआई के अनुरोध को खारिज करते हुए कहा कि 11 मार्च 2024 खरीदे गए प्रत्येक चुनावी बॉन्ड का विवरण भारतीय निर्वाचन आयोग को प्रस्तुत किया जाना चाहिए। साथ ही इस पूरे डिटेल को आयोग की वेबसाइट पर भी दिखना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने एसबीआई से कहा था कि चुनावी बॉन्ड खरीदने वाले का नाम, चुनावी बॉन्ड की कीमत और उसका नकदीकरण करने की तारीख से लेकर राजनीतिक दलों द्वारा भुनाए गए प्रत्येक बॉन्ड का विवरण उपलब्ध कराए। आखिरकार एसबीआई ने 12 मार्च 2024 को चुनाव आयोग को यह विवरण भेजा और 14 मार्च को चुनाव आयोग ने इसे अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित किया।
इसके बाद चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर अनुरोध किया कि मुख्य मामले की सुनवाई के दौरान पीठ को सीलबंद लिफाफे/बक्से में सौंपे गए चुनावी बॉन्ड के दस्तावेज उसे वापस कर दिए जाएँ। आयोग का कहना था कि उसके पास इसकी कोई अन्य प्रति नहीं है। आयोग ने कहा कि कोर्ट द्वारा लौटाए जाने के बाद वह उन दस्तावेजों को अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर सकता है।
चुनाव आयोग की इस माँग को सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने स्वीकार कर लिया और यह सुनिश्चित किया कि न्यायालय द्वारा स्कैन और डिजिटलीकरण के बाद मूल प्रतियाँ चुनाव आयोग को वापस कर दी जाएँ। 17 मार्च को या उससे पहले वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा।
दरअसल, चुनावी बॉन्ड को वित्त अधिनियम 2017 के माध्यम से पेश किया गया था। इसके कारण तीन अन्य क़ानूनों – भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, आयकर अधिनियम और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम में कम से कम पाँच संशोधन किए गए थे। इन संशोधनों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएँ दायर की गईं।
इन याचिकाओं में कहा गया है कि चुनावी बॉन्ड ने राजनीतिक दलों के लिए असीमित एवं अनियंत्रित फंडिंग के दरवाजे खोल दिए हैं। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सुनवाई शुरू की और लगभग सात साल बाद केंद्र सरकार के इस रुख को खारिज कर दिया कि चुनावी बॉन्ड वाली यह योजना पारदर्शी थी।
देश के चुनाव आयोग में नियुक्त किए गए दो नए चुनाव आयुक्त, ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू ने अपना पदभार ग्रहण कर लिया है। उन्हें कल (14 मार्च, 2024) चुनाव आयोग में दो खाली पदों पर नियुक्त किया गया था। चुनाव आयोग ने इसी के साथ लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान करने के लिए 16 मार्च, 2024 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है।
ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू ने आज (15 मार्च, 2024) को दिल्ली स्थित चुनाव आयोग के दफ्तर में अपना कार्यभार ग्रहण किया है। अब तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में कोई भी रिक्ति नहीं रह गई है। दोनों नवनियुक्त चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के समय देश के मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार भी मौजूद रहे।
CEC emphasized the significance of their joining at the historic point when ECI is all set to conduct #General Election2024 in the world's largest democracy.
इन चुनाव आयुक्तों की सिफारिश प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केन्द्रीय मंत्री अमित शाह और लोकसभा में कॉन्ग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी वाली समिति ने की थी। इनके नाम पर कल राष्ट्रपति भवन ने मुहर लगा दी थी। इनकी नियुक्ति नए कानून के तहत हुई है, जो कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हाल ही में पास किया गया था।
चुनाव आयुक्त नियुक्त किए जाने वाले ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू, दोनों ही पूर्व IAS अधिकारी हैं। ज्ञानेश कुमार केरल काडर के IAS अधिकारी रहे हैं और वह कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के समय केन्द्रीय गृह मंत्रालय में थे। वह IIT कानपुर और हार्वर्ड विश्वविद्यालय से पढ़े हुए हैं।
वहीं दूसरे चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू, हाल ही में IAS से रिटायर हुए थे। वह उत्तराखंड सरकार में मुख्य सचिव थे। वह उत्तराखंड बैच के IAS अधिकारी रहे हैं। वह इससे पहले भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के चेयरमैन भी रह चुके हैं। वह हाल ही में लोकपाल के सचिव के रूप में नियुक्त हुए थे।
चुनाव आयोग करेगा लोकसभा चुनाव का ऐलान
चुनाव आयोग ने कल (16 जनवरी, 2024) को 2024 लोकसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान करने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई है। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार और बाकी दो आयुक्त करेंगे। इसमें लोकसभा चुनाव के चरणों और साथ ही कुछ राज्यों के विधानसभा चुनावों की तारीखों का भी ऐलान किया जाएगा।
Press Conference by Election Commission to announce schedule for #GeneralElections2024 & some State Assemblies will be held at 3 pm tomorrow ie Saturday, 16th March. It will livestreamed on social media platforms of the ECI pic.twitter.com/1vlWZsLRzt
इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बार चुनाव अप्रैल-मई में होंगे और मई के अंत तक नई सरकार का गठन हो जाएगा। पिछली बार 10 मार्च, 2019 को लोकसभा चुनाव का ऐलान किया गया था। इस बार देश के 96.88 करोड़ मतदाता देश की सरकार तय करेंगे।