प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शु्क्रवार (15 मार्च 2024) को दक्षिण भारत की यात्रा पर हैं। तमिलनाडु के कन्याकुमारी में सभा को संबोधित करने के बाद पीएम मोदी तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के मल्काजगिरी में रोड शो किया। वहीं, तमिलनाडु के कोयम्बटूर में उनके रोड शो को लेकर मद्रास हाई कोर्ट ने इजाजत दे दी है। दरअसल, तमिलनाडु सरकार ने रोड शो के लिए इजाजत देने से इनकार कर दिया था।
हैदराबाद के मल्काजगिरी लोकसभा क्षेत्र में रोड शो के दौरान पीएम मोदी केसरिया रंग की टोपी पहने हुए खुली छत वाले वाहन में सवार थे। इस दौरान उन्होंने सड़क के दोनों ओर खड़े लोगों की ओर हाथ हिलाकर उनका अभिवादन किया। इस रोड शो में सिकंदराबाद और मल्काजगिरी के भाजपा प्रत्याशी भी शामिल थे।
वहीं, पीएम मोदी की तमिलनाडु के कोयंबटूर में 18 मार्च 2024 को होने वाली रोड शो की इजाजत मद्रास हाई कोर्ट ने दे दी। इसके लिए हाई कोर्ट ने कोयंबटूर पुलिस को निर्देश दिया। न्यायाधीश एन आनंद वेंकटेश ने इसके लिए सशर्त इजाजत देने की बात कही। शर्त यह है कि यह यात्रा कोयंबटूर शहर में सिर्फ चार किलोमीटर लंबी होगी।
Tamil Nadu | Madras High Court Justice N Anand Venkatesh directs Coimbatore Police to permit a 4-km road show during Prime Minister Narendra Modi's visit to the city on 18th March with certain conditions.
दरअसल, कोयंबटूर पुलिस ने पीएम मोदी को रोड शो की इजाजत नहीं दी थी। इसके लिए पुलिस ने चार कारण गिनवाए थे। पहला कारण यह बताया था कि यह सुरक्षा के लिहाज से सही नहीं होगा। पुलिस ने दूसरा कारण यह बताया था कि कोयंबटूर संवेदनशील इलाका है। तीसरा कारण बताया गया कि इससे आम लोगों को परेशानी होगी और चौथा कारण बताया कि 18-19 मार्च को छात्रों की परीक्षाएँ हैं। इससे उन्हें दिक्कत होगी।
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 मार्च 2024 को दक्षिण भारत के तीन राज्यों के दौरे पर है। वे तमिलनाडु, केरल और तेलंगाना में अलग-अलग कार्यक्रम में हिस्सा लिया। ये सारे कार्यक्रम लोकसभा चुनाव प्रचार से जुड़े हुए हैं। वे पहले कन्याकुमारी गए, उसके बाद केरल और अंत में हैदराबाद में रोड शो किया।
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा के खिलाफ शुक्रवार (15 मार्च 2024) को POCSO (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण) अधिनियम और आईपीसी की धारा 354 (ए) के तहत मामला दर्ज किया गया। यहाँ एक महिला ने बेंगलुरु के सदाशिवनगर पुलिस स्टेशन से संपर्क कर दावा किया था कि उसकी 17 साल की उम्र की बेटी का बीएस येदियुरप्पा ने यौन उत्पीड़न किया, जब वो दोनों धोखाधड़ी के एक मामले में मदद के लिए उनके पास पहुँची थी।
हालाँकि, टीवी9 कन्नड़ ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि शिकायतकर्ता (नाबालिग लड़की की माँ) इस तरह के मामले 53 मशहूर लोगों के खिलाफ दर्ज करा चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक, लड़की की माँ साल 2015 से अब तक जाने-माने राजनेताओं, पुलिस अधिकारियों और अपने बिजनेस पार्टनर के खिलाफ इस तरह की शिकायतें दर्ज करा चुकी है, जिसमें 2015 में उसने बेंगलुरु के इलेक्ट्रॉनिक सिटी पुलिस स्टेशन में अपने पति के एक रिश्तेदार के खिलाफ भी यही (अपनी बेटी के साथ यौन उत्पीड़न का) मामला दर्ज कराया था।
The Deputy Inspector General of Police (DIG) handovers the alleged sexual assault case under the POCSO act against former CM BS Yediyurappa to CID under the Additional Police Director General of Karnataka.
इस मामले में अब येदियुरप्पा के ऑफिस की तरह से एक लिस्ट जारी की गई है, जिसमें शिकायतकर्ता ने ऐसे मामले दर्ज कराए हैं, जो किसी खास पैटर्न की तरफ इशारा करता है।
कर्नाटक के पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ मामला
बता दें कि शुक्रवार (15 मार्च 2024) को एक 17 साल की नाबालिक लड़की की माँ ने पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है, जिसमें उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए गए हैं। इस एफआईआर में बताया गया है कि ये घटना कथित तौर पर 2 फरवरी को हुई, जब वो अपनी बेटी के साथ एक मामले में मदद के लिए उनके पास पहुँची थी।
महिला ने दावा किया कि येदियुरप्पा उनकी बेटी को एक कमरे में ले गए और उसके साथ ‘गलत काम’ को अंजाम दिया। इसके बाद उन्होंने दोनों से माफी माँगी और अनुरोध किया कि दोनों इस मामले में सार्वजनिक तौर पर कुछ भी न बोलें। इस मामले में उनके खिलाफ सदाशिवनगर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया।
इस मामले में कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार ने बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ जाँच का जिम्मा सीआईडी को सौंपा है।
येदियुरप्पा ने आरोपों से किया इनकार
इस मामले में येदियुरप्पा ने आरोपों से इनकार किया है और आरोपों को बकवास बताया है। उन्होंने कहा कि ये मामला पुलिस कमिश्नर के सामने रखा गया है।
Former CM B.S. Yediyurappa refuted the charges of "harassing a minor girl" and said that he was ready to face any case.
Reacting to the development of an FIR filed against him, he said, “I came to know that a woman has filed a complaint against me. I will face everything… pic.twitter.com/VScuZa8kXI
न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा, “कुछ दिन पहले एक महिला मेरे घर आई और उसने किसी मामले में मदद माँगी। मैंने इस मामले में पुलिस कमिश्नर को फोन करके उस महिला की मदद के लिए कहा। मैंने उससे कहा कि इस मामले को मैंने कमिश्नर को बता दिया है कि वो मामले को देख लेंगे। बाद में वो महिला मेरे खिलाफ बोलने लगी और अब मेरे खिलाफ उसने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। देखते हैं कि आगे क्या होता है। मुझे इस बारे में बिल्कुल भी नहीं पता कि इसके पीछे कोई राजनीतिक मकसद है।”
Bengaluru | On charges of sexual assault against him, former Karnataka CM BS Yediyurappa says, "A few days ago a woman came to my house. She was crying saying that there was some problem. I asked her what was the matter and I personally called the police commissioner about the… pic.twitter.com/6lhf2lXkeQ
इस बीच, कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने कहा कि पुलिस मामले की जाँच कर रही है और जाँच पूरी होने पर सच्चाई सामने आ जाएगी। जब कॉन्ग्रेस नेता से किसी संभावित राजनीतिक साजिश के बारे में पूछा गया तो उन्होंने नकारात्मक जवाब दिया। उन्होंने शिकायतकर्ता के मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित दावों पर भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
#WATCH | On the case against former CM BS Yediyurappa for allegedly sexually assaulting a minor, Karnataka Home Minister G Parameshwara says, "Last night around 10pm, a lady registered a complaint against BS Yediyurappa. Police have registered the case. Until we know the truth,… pic.twitter.com/GvbhyM4hai
कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने इसे संवेदनशील मामला बताया और कहा, “कल रात करीब 10 बजे एक महिला ने बीएस येदियुरप्पा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। जब तक हमें सच्चाई का पता नहीं चलता, हम कुछ भी बता नहीं सकते। मुझे नहीं लगता कि इसमें कोई राजनीतिक एंगल है। अगर पीड़ित महिला को सुरक्षा की जरूरत है तो दी जाएगी।”
राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रियंक कानूनगो ने कर्नाटक के बंगलुरु में एक अवैध यतीमख़ाने को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि यहाँ रहने वाली बच्चियों से प्राथमिक बातचीत से प्रतीत होता है कि खाड़ी देशों में शादी के नाम पर तस्करी के लिए इन्हें ग्रूम करने का काम यहाँ किया जाता है।
उन्होंने सोशल मीडिया साइट X (पूर्व में ट्विटर) पर कहा कि दक्षिण भारत में पहले भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। बच्चियों ने बातचीत में बताया कि चिल्ड्रन होम की देखभाल करने वाली सलमा नाम की महिला लड़कियों के रिश्ते कुवैत में तय करवाती है। उन्होंने कहा कि जाँच के दौरान जब लड़कियों को CWC के सामने पेश करने की बात आयी तो सलमा और उसके मालिक समीर ने गुंडों को बुला लिया।
प्रियंक कानूनगो ने X पर लिखा, “इन गुंडों ने झगड़ा करने की कोशिश की। जब पुलिस के हस्तक्षेप से गुंडों को क़ाबू किया तो वे एक गुंडे ने फ़ोन पर किसी को और भीड़ को बुलाने के लिए मस्जिद से एलान करने के लिए कहा। पुलिस की सलाह पर महिला अधिकारियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हम लोग पुलिस स्टेशन आ गए हैं। कर्नाटक सरकार तुष्टिकरण के चलते अपराधियों के आगे नतमस्तक है।”
NCPCR के अध्यक्ष ने कहा कि इस यतीमखाने में 20 लड़कियाँ थीं, जिनमें अनाथ बच्चियाँ भी हैं। इन बच्चियों को स्कूल नहीं भेजा जाता है। पूरे बालगृह में खिड़की या रोशनदान नहीं है। उन्होंने कहा कि लड़कियों को एकदम क़ैद करके रखा गया है। कुछ बच्चियाँ यहाँ आने के पहले स्कूल जातीं थीं, लेकिन उनकी पढ़ाई छुड़वा दी गयी है।
आज कर्नाटक के बंगलुरु में एक अवैध यतीमख़ाने का निरीक्षण करने के दौरान चौकाने वाली जानकारी सामने आयी है। – यहाँ 20 लड़कियाँ थीं जिनमें से अनाथ बच्चियाँ भी हैं। – बच्चियों को स्कूल नहीं भेजा जाता है,पूरे बाल गृह में भी खिड़की या रोशनदान नहीं है,लड़कियों को एकदम क़ैद कर के रखा गया… pic.twitter.com/fPKLhW4W57
— प्रियंक कानूनगो Priyank Kanoongo (मोदी का परिवार) (@KanoongoPriyank) March 15, 2024
कर्नाटक सरकार ने गुरुवार (23 नवंबर 2023) को प्रियंक कानूनगो के खिलाफ वारंट जारी किया था। बेंगलुरु में एक यतीमखाने की विजिट के दौरान प्रियंक कानूनगो ने वहाँ के बच्चों की हालत देख उसकी तुलना तालिबानी जिंदगी से कर दी थी। उसी से नाराज होकर कर्नाटक सरकार ने एक शिकायत पर यह कदम उठाया था।
सी यतीमखाने के एक सदस्य की शिकायत पर कर्नाटक पुलिस ने प्रियंक कानूनगो के खिलाफ केस को दर्ज किया था। एनसीपीसीआर ने इस एफआईआर के बाद बयान में बताया था कि 19 नवंबर को कानूनगो ने जिला बाल संरक्षण अधिकारी और अन्य अधिकारियों के साथ एक अवैध यतीमखाने में छापेमारी की थी, जिसका नाम दारुल उलूम सैय्यादिया यतीमखाना है। इसमें कई अनियमतताएँ पाई गई थीं।
इस यतीमखाने के निरीक्षण के बाद एनसीपीसीआर ने कर्नाटक सरकार की क्लास लगाई थी और कहा था कि यह राज्य सरकार की लापरवाही का सुबूत और देश के संविधान का उल्लंघन है। आयोग ने इस पर संज्ञान लेते हुए राज्य के चीफ़ सेक्रेटरी को नोटिस जारी किया था। उनसे 7 दिन के भीतर कार्रवाई करके मामले में रिपोर्ट देने को बोला गया था।
दिल्ली की एक सत्र अदालत ने शुक्रवार (15 मार्च 2024) को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की याचिका को खारिज कर दिया। इस याचिका में दिल्ली उत्पाद शुल्क के संबंध में प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा केजरीवाल के खिलाफ दायर मामले में मजिस्ट्रेट अदालत के समक्ष कार्यवाही पर रोक लगाने की माँग की गई थी। साथ ही उन्होंने अदालत में उपस्थित होने को लेकर छूट माँगी थी।
राउज़ एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश (पीसी) अधिनियम राकेश सयाल ने केजरीवाल की उस याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि इसके लिए वे मजिस्ट्रेट कोर्ट में ही अर्जी दाखिल कर सकते हैं। इस तरह मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को कोर्ट की तरफ से करारा झटका लगा है।
दरअसल, अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट (ACMM) दिव्या मल्होत्रा ने ED द्वारा दायर दो अलग-अलग याचिकाओं को लेकर सीएम केजरीवाल को समन जारी किया था। कोर्ट ने उन्हें पहला समन 7 फरवरी 2024 को जारी किया गया था, वहीं दूसरी शिकायत पर 7 मार्च को समन जारी किया गया था। ACMM इन दोनों मामलों पर 16 मार्च को सुनवाई करेगा।
शराब घोटाले में पूछताछ के लिए ED अरविंद केजरीवाल को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत समन जारी की थी। हालाँकि, वे बार-बार समन की अनदेखी कर रहे थे। इसके बाद ईडी ने केजरीवाल के खिलाफ शिकायत दी थी। वहीं, 17 फरवरी को केजरीवाल कोर्ट में वर्चुअली शामिल हुए थे और कहा था कि वे 16 मार्च को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होंगे।
हालाँकि, सुनवाई से ठीक दो दिन पहले सीएम केजरीवाल ने ACMM के दोनों आदेशों को चुनौती देते हुए सत्र अदालत के समक्ष याचिका दायर कर दी। हालाँकि, कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। सीएम केजरीवाल की तरफ से सीनियर वकील रमेश गुप्ता और राजीव मोहन पेश हुए।
वकील गुप्ता ने तर्क दिया, “सीएम एक लोक सेवक हैं। वे कहते हैं कि उन्हें उनकी व्यक्तिगत क्षमता में बुलाया गया था, लेकिन मैं रिकॉर्ड से प्रदर्शित करूँगा कि उन्हें समन उस मामले में भेजा गया था जो कि उनके सीएम रहते हुए उत्पाद शुल्क नीति से संबंधित है।”
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने आगे कहा, “मैंने कभी नहीं कहा कि मुझे अपनी बहन की बेटी की शादी में जाना है। मैंने कहा कि मेरे अपने आधिकारिक कर्तव्य हैं। समन के बाद शामिल नहीं होने का मैंने कारण बता दिया है। इसलिए कोई जानबूझकर चूक नहीं कर रहा हूँ।”
बता दें कि दिल्ली एक्साइज पॉलिसी को लेकर दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और आम आदमी पार्टी से राज्यसभा सासंद संजय सिंह जैसे वरिष्ठ नेता पहले से ही हिरासत में हैं। आम आदमी पार्टी का आरोप है कि ED आगामी लोकसभा चुनाव से पहले केजरीवाल को गिरफ्तार करना चाहती है।
दिल्ली शराब नीति घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) लगातार एक्शन मोड में है। अब हैदराबाद से ईडी ने तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव यानी केसीआई की बेटी के कविता (K Kavitha) को गिरफ्तार कर लिया है। उनसे ईडी की टीम ने पूछताछ की और फिर उन्हें हिरासत में लेकर गिरफ्तार कर लिया। ईडी की टीम उन्हें हैदराबाद से दिल्ली ला रही है।
समाचार एजेंसी एएनआई ने ईडी के सूत्रों के हवाले से कहा है कि भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) की नेता और एमएलसी नेता के.कविता को आज (15 मार्च 2024) की रात को ही हैदराबाद से दिल्ली लाएगी। इस मामले में पूछताछ की तमाम कार्रवाई और अन्य औपचारिकताओं को दिल्ली में पूरा किया जाएगा। इस मामले में ईडी ने दिन भर कविता के घर और अन्य ठिकानों पर छापेमारी की, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
BRS MLC K Kavitha has been arrested by the Enforcement Directorate (ED).
आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, के कविता से ईडी तीन बार पहले भी पूछताछ कर चुकी थी, लेकिन पिछली बार के 2 समन में वो ईडी के सामने पेश नहीं हुई थी। इसके बाद इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, फिर भी कार्रवाई!
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से कविता को बड़ी राहत भी मिली थी। सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को यह निर्देश दिया कि वो 20 मार्च तक कविता को पेशी के लिए समन ना भेजें और गिरफ्तारी से भी छूट दी गई। हालाँकि सुप्रीम कोर्ट ने आज साफ किया कि वो बार-बार इस तरह कविता की राहत को आगे नहीं बढ़ाएंगे। मामले की अगली सुनवाई अब 19 मार्च को होगी।
क्या है मामला?
बता दें कि ईडी ने शराब घोटाला मामले में जो चार्जशीट दायर की है, उसमें कहा है कि कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की बेटी और विधान परिषद की सदस्य (MLC) के कविता ने कुछ लोगों के साथ मिलकर AAP के संचार प्रभारी विजय नायर को 100 करोड़ रुपए की रिश्वत दी। रिश्वत देने का उद्देश्य शराब कारोबार में अनुचित लाभ हासिल करना था। उल्लेखनीय है कि इस साजिश में व्यवसायी समीर महेंद्रू, ओंगोल (आंध्र प्रदेश) से सांसद मगुनता श्रीनिवासुलु रेड्डी (एमएसआर), उनके बेटे राघव मगुनता और सरथ रेड्डी शामली थे।
आरोप-पत्र (Chargesheet) में कहा गया है कि दक्षिण भारत के इस समूह के साथ मिलकर महेंद्रू और नायर ने रिश्वत वसूलने के लिए बहुत चालाकी से एक ‘उत्पादक संघ’ बनाया। इस संघ में शराब बनाने वाली कंपनी पेरनोड रिकार्ड, बिनॉय बाबू, विजय नायर, अरुण पिल्लई, के कविता, मगुनता श्रीनिवासुलु रेड्डी और उनके बेटे राघव, सरथ रेड्डी, अभिषेक बोइनपल्ली और बुच्ची बाबू शामिल थे।
इस मामले में दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत कई लोग जेल में हैं। वहीं, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल लगातार ईडी के समन पर पूछताछ से बचते रहे हैं। हालाँकि कोर्ट ने साफ कर दिया है कि उन्हें 16 मार्च को हर हाल में ईडी के सामने पेश होना पड़ेगा।
अमेरिकी विदेश विभाग ने नागरिकता संशोधन कानून 2019 पर टिप्पणी की, तो भारत ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। अमेरिका ने कहा कि हम सीएए पर नजर रख रहे हैं, जिसके बाद भारत सरकार के विदेश मामलों के मंत्रालय (MEA) ने कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि यह भारत का आंतरिक मामला है। इसमें किसी भी बाहरी देश के दखल की कोई जरूरत नहीं है।
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अमेरिका के रिएक्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम भारत का आंतरिक मामला है और यह भारत की समावेशी परंपराओं और मानवाधिकारों के प्रति हमारी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को ध्यान में रखते हुए है। यह अधिनियम अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदायों से संबंधित उत्पीड़ित अल्पसंख्यकों को सुरक्षित आश्रय प्रदान करता है, जो 31 दिसंबर 2014 को या उससे पहले भारत में प्रवेश कर चुके हैं।
रणधीर जायसवाल ने आगे कहा, “सीएए नागरिकता देने के बारे में है, नागरिकता छीनने के बारे में नहीं। यह राज्यविहीनता के मुद्दे को संबोधित करता है, मानवीय गरिमा प्रदान करता है और मानवाधिकारों का समर्थन करता है। जहाँ तक सीएए के कार्यान्वयन पर अमेरिकी विदेश विभाग के बयान का संबंध है, हमारा मानना है कि यह गलत, गलत जानकारी वाला और अनुचित है।”
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “भारत का संविधान अपने सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है। अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार पर किसी भी चिंता का कोई आधार नहीं है। वोट बैंक की राजनीति को संकट में फंसे लोगों की मदद के लिए किसी प्रशंसनीय पहल के बारे में विचार निर्धारित नहीं करना चाहिए। जिन लोगों को भारत की बहुलवादी परंपराओं और क्षेत्र के विभाजन के बाद के इतिहास की सीमित समझ है, उन्हें बोलने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। भारत के भागीदारों और शुभचिंतकों को उस इरादे का स्वागत करना चाहिए जिसके साथ यह कदम उठाया गया है।”
#WATCH | On CAA, MEA Spokesperson Randhir Jaiswal says, "As you are well aware, the Citizenship Amendment Act 2019 is an internal matter of India and is in keeping with India's inclusive traditions and a long-standing commitment to human rights. The act grants a safe haven to… pic.twitter.com/cJBiDvI7JU
बता दें कि सीएए का नोटिफिकेशन जारी के होने के बाद अमेरिका ने गुरुवार को कहा था कि वह सीएए के नोटिफिकेशन को लेकर चिंतित है और इस पर नजर बनाए हुए है। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने कहा था कि हम 11 मार्च से प्रभाव में आए सीएए के बारे में चिंतित हैं। हम बारीकी से निगरानी कर रहे हैं कि इस अधिनियम को कैसे लागू किया जाएगा। धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान और सभी समुदायों के लिए कानून के तहत समान व्यवहार मौलिक लोकतांत्रिक सिद्धांत है।
पश्चिम बंगाल के संदेशखाली की पाँच महिलाओं सहित हिंसा की शिकार 11 पीड़ितों ने शुक्रवार (15 मार्च 2024) को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। उन्होंने इस मामले में हस्तक्षेप की माँग की है। बता दें कि संदेशखाली में सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के पूर्व नेता शाहजहाँ शेख ने संदेशखाली की कई महिलाओं का यौन शोषण किया था।
सेंटर फॉर एससी-एसटी सपोर्ट एंड रिसर्च के निदेशक डॉक्टर पार्थ बिस्वास का कहना है, “संदेशखाली के मुद्दे को लेकर पीड़ितों ने आज भारत के राष्ट्रपति को ज्ञापन दिया। राष्ट्रपति ने पूरे मामले को बड़ी संवेदना और सहानुभूति के साथ सुना और इस घटना से वो दुखी हुईं। आज 11 पीड़ित यहाँ आए हैं, जिनमें पाँच महिलाएँ और 6 पुरुष हैं।”
#WATCH | Delhi | 11 victims of violence including five women from West Bengal's Sandeshkhali met President Droupadi Murmu, in Rashtrapati Bhawan, today
Dr. Partha Biswas, Director of the Center for SC/ST Support and Research says, "Regarding the issue of Sandeshkhali, the… pic.twitter.com/3lqQ9R0QFr
मीडिया से बात करते हुए डॉक्टर पार्थ ने कहा, “पीड़िताओं को चिह्नित करके धमकाया जा रहा है कि जब उनके आसपास मीडिया के बंधु नहीं होंगे और शेख शाहजहाँ वापस आ जाएगा तो आप लोगों का क्या होगा… वहाँ स्कूल में जो बच्चे पढ़ने जा रहे हैं, उनके खिलाफ झूठा केस दिया जा रहा है। अभी वहाँ की स्थिति है।”
बिस्वास ने आगे बताया, “साल 2003 में शेख शाहजहाँ सीपीएम में शामिल हो गया। साल 2013 में वह टीएमसी में शामिल हो गया। शेख शाहजहाँ का अत्याचार 8-10 वर्षों से जारी है। जैसे-जैसे उनकी राजनीतिक शक्ति और प्रभाव वहाँ बढ़ता गया, वैसे-वैसे लोगों पर अत्याचार पूरे संदेशखाली में बढ़ता गया। ये सिर्फ एक दिन की बात नहीं है।”
#WATCH | Delhi | Sandeshkhali incident | Dr. Partha Biswas, Director of the Center for SC/ST Support and Research says, "They (victims) are being identified and threatened that when the media would not be around them and Sheikh Shahjahan would return, what would happen to… pic.twitter.com/J6YCo92Ass
डॉक्टर पार्थ ने बताया कि पीड़ितों ने संदेशखाली में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय की सुरक्षा के लिए राष्ट्रपति के हस्तक्षेप का आग्रह किया है। इसके साथ ही राष्ट्रपति को ज्ञापन भी दिया गया है, जिसमें कहा गया है कि पीड़ित परिवारों की स्थिति बेहद चिंताजनक है और इस पर तत्काल ध्यान देते हुए हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
दरअसल, 5 जनवरी 2024 को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने राशन घोटाले को लेकर 24 नॉर्थ परगना जिले में आरोपित शाहजहाँ शेख के यहाँ छापा मारा था। हालाँकि, शाहजहाँ भाग निकला, लेकिन हजारों लोगों की भीड़ को बुलाकर ईडी की टीम पर हमला करवा दिया था। इस हमले में कई अधिकारी घायल हो गए थे।
इस घटना के करीब 2 सप्ताह बाद संदेशखाली की महिलाएँ सड़कों पर उतर आईं। उन्होंने शाहजहाँ और उसके सहयोगियों पर यौन उत्पीड़न, जमीन हड़पने और वसूली करने का आरोप लगाते हुए गिरफ्तारी की माँग की थी। देश भर से दबाव पड़ने के बाद बंगाल की पुलिस ने आखिरकार शाहजहाँ को गिरफ्तार कर लिया। बाद में टीएमसी ने उसे पार्टी से भी निकाल दिया।
लोकसभा चुनावों के ऐलान से एक दिन पहले ही मोदी सरकार के हिस्से एक बड़ी कामयाबी आई है। मोदी सरकार देश के 75% ग्रामीण घरों में नल से जल पहुँचाने में सफल रही है। अब गाँवों में रहने वाले व्यक्ति भी अपने घर में ही पानी की आपूर्ति पा रहे हैं। जल्द ही पानी के मटके ले कर जाती महिलाओं की तस्वीर इतिहास की बात हो होने वाली है। देश के तीन चौथाई ग्रामीण घरों में पानी पहुँचाने की यह सफलता मोदी सरकार ने हर घर नल से जल के अंतर्गत ‘जल जीवन मिशन’ के अंतर्गत हासिल की है।
जल जीवन मिशन मोदी सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है। यह प्रधानमंत्री के विकसित भारत लक्ष्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। देश के हर गाँव में नल से साफ़ जल पहुँचे, इसके लिए मोदी सरकार बीते लगभग पाँच वर्षों से काफी पैसा खर्च कर चुकी है।
लोकसभा चुनावों से पहले मोदी सरकार के कामकाज का मूल्यांकन किया जा रहा है। ऐसे में कई मूलभूत समस्याओं को हल करने में सरकार ने सफलता पाई है। आवास योजना के जरिए जहाँ लोगों को घर मुहैया करवाए गए हैं तो वहीं उज्ज्वला के जरिए गैस सिलेंडर दिए गए हैं। पानी की समस्या को खत्म करने के लिए लाई गई योजना जल जीवन मिशन में भी मोदी सरकार अब 75% से अधिक नम्बरों से पास होती दिख रही है।
देश की आबादी का बड़ा हिस्सा आज भी गाँवों में रहता है। हालाँकि, 2014 तक इन गाँवों में पानी जैसी मूलभूत जरूरत को पूरा करने के लिए कोई विशेष कदम नहीं उठाए गए थे। किसी भी सरकार ने यह नहीं सोचा कि देश के गाँवों में भी पीने के साफ़ पानी की आपूर्ति नल के जरिए की जा सकती है। महिलाएँ कई कई किलोमीटर दूर पानी लेने जाने की तस्वीरें सामने आती रहती थीं लेकिन कोई सरकार इस बारे में काम नहीं करती थी।
जल जीवन मिशन से पहले खराब थी हालत
जल जीवन मिशन का ऐलान पीएम मोदी ने 15 अगस्त 2019 को लालकिले से किया था। पीएम ने इस मिशन को लेकर कहा था कि इससे देश में जल संकट की समस्या को खत्म किया जाएगा। गौरतलब है कि यह मिशन चालू होने से पहले देश के अधिकाँश गाँवों में नल से जल की आपूर्ति नहीं होती थी और लोगों को पानी को लेकर काफी समस्या थी।
जल शक्ति मंत्रालय के आँकड़े बताते हैं कि वर्ष 2019 में देश के ग्रामीण क्षेत्र के 19.3 करोड़ घरों में से मात्र 16% घरों में ही नल से जल की आपूर्ति हो पाई थी। यानी 1947 से लेकर 2019 तक देश के मात्र 3.23 करोड़ ग्रामीण घरों तक ही पानी पहुँच सका था।
आँकड़ों के अनुसार, 2019 तक देश के मात्र 10 राज्यों में ही गाँवों में 50% से अधिक जनता नल से सुरक्षित पानी पा रही थी। उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों में 5% ग्रामीण घर भी पानी नहीं पहुँचा था। ऐसे में यह मिशन लाया गया।
जल जीवन मिशन ने बदली तस्वीर
2019 में चालू किया गया जल जीवन मिशन लगातार तेजी से बढ़ रहा है और गाँव-गाँव इससे पानी का कनेक्शन पहुँच रहा है। जल शक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट बताती है कि वर्तमान में देश के 75% घर नल से जल पा रहे हैं। अब देश के 19.3 करोड़ ग्रामीण घरों में से 14.5 करोड़ घर अब स्वच्छ पानी पा रहे हैं।
जल जीवन मिशन से पहले और बाद की स्थिति
जल जीवन मिशन शुरू होने के बाद 11.2 करोड़ घरों में पानी का कनेक्शन पहुँचाया गया है। जब यह मिशन चालू किया गया था तब देश के 16 करोड़ से अधिक ग्रामीण घर ऐसे थे जो कि नल से जल नहीं पा रहे थे। अब इनमें से 70% घरों तक पानी पहुँचा है। इसके जरिए देश के दुर्गम इलाकों तक में पानी पहुँचाया जा चुका है।
जल जीवन मिशन पर सरकार ने मिशन मोड में काम किया है। इसके लिए गाँव-गाँव में पानी की टंकियाँ बनाई गई हैं। इनके जरिए पानी की आपूर्ति की जाएगी। इसके अलावा हर गाँव में पानी की पाईपलाइन भी डाली जा चुकी है।
इन 11 करोड़ घरों में पानी पहुँचने का यह लाभ हुआ है कि अब इन घरों की महिलाओं को घर से दूर पानी लेने नहीं जाना पड़ता। पानी के साफ़ और सुरक्षित होने की भी चिंता नहीं करनी पड़ती है। ऐसे में महिलाएँ बचने वाले समय का उपयोग अन्य कामों में कर पा रही हैं।
NEWS18 द्वारा हाल ही में लोकसभा चुनाव को लेकर किए गए सर्वे में 70% लोगों ने बताया कि वह सरकार की जल जीवन मिशन योजना से लाभान्वित हुए हैं। उन्होंने उज्ज्वला और अन्य योजनाओं के साथ इस योजना को प्रभावी बताया।
हरियाणा-गुजरात ने पहुँचाया 100% घरों में पानी, बंगाल-झारखंड फिसड्डी
जल जीवन मिशन के अंतर्गत कई राज्यों के 100% ग्रामीण घरों में नल से जल पहुँच गया है। देश के 11 राज्यों/प्रदेशों ने यह उपलब्धि हासिल की है। ये हैं – गोवा, अंडमान और निकोबार द्वीप, दादरा नगर हवेली और दमन दीव, हरियाणा, तेलंगाना, पुद्दुचेरी, गुजरात, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम। इन सभी राज्यों/प्रदेशों के 100% घरों को नल से जल पहुँचाया जा चुका है।
इसके अलावा बिहार और उत्तराखंड जैसे राज्यों में 90% से अधिक घरों में नल से जल पहुँचाया जा चुका है। अब देश के दो राज्यों को छोड़ कर सभी जगह 50% से अधिक ग्रामीण घर पानी पा रहे हैं। हालाँकि, कई राज्यों का इस योजना के क्रियान्वन में प्रदर्शन चिंताजनक है।
तृणमूल कॉन्ग्रेस की सत्ता वाला राज्य पश्चिम बंगाल इस योजना को लागू करने में सबसे पीछे रहा है। पश्चिम बंगाल में अभी मात्र 45% घरों में ही नल से जल पहुँचाया जा सका है। वहीं झारखंड के मात्र 51% और केरल के 52% घरों में नल से जल पहुँचा है। रेगिस्तानी क्षेत्रफल होने के कारण राजस्थान भी 50% से नीचे है।
केंद्र सरकार ने इस योजना पर अब तक ₹1.82 लाख करोड़ खर्चे हैं। केंद्र सरकार साल दर साल अपना योगदान इस योजना में बढ़ा रही है। वर्ष 2023-24 में इस योजना के लिए ₹66,023 करोड़ का आवंटन किया था। जबकि 2022-23 में इस योजना के लिए ₹54,744 करोड़ दिए थे।
इस बार के लोकसभा चुनावों में मोदी सरकार 10 साल में किए गए विकास को मुद्दा बना कर जनता के सामने जाने वाली है। मोदी सरकार जल जीवन मिशन को आवास योजना और मुफ्त राशन योजना जैसी सफलताओं के साथ जोड़ कर लोगों के सामने रखेगी। ग्रामीण जनता पर भी इस अपील का बड़ा असर देखने को मिल सकता है। पानी की समस्या सुलझने से लोगों के जीवन स्तर में बदलाव आया है, ऐसे में वह इस मुद्दे को लेकर भाजपा का समर्थन इन चुनावों में कर सकते हैं।
रमजान के महीने में हनुमान मंदिर में हनुमान आरती न की जाए, इसके लिए महाराष्ट्र के संभाजीनगर के चिकलथाना इलाके के कामगार कॉलोनी में मुस्लिम भीड़ ने हंगामा कर दिया। इस्लामवादियों ने वहाँ मंदिर में घुसकर आरती रोकने का प्रयास किया। बाद में बात बढ़ी और आरती में शामिल होने जा रहे हिंदुओं पर पथराव हुआ। घटना में 3 लोग घायल हो गए। पुलिस ने लाठीचार्ज करके मामला संभाला। बाद में 13 मार्च को हिंदू पक्ष ने घटना के विरोध में महाआरती की।
क्या है पूरा मामला
बताया जा रहा है कि 12 मार्च को चिकलथाना की कामगार कॉलोनी में हनुमान मंदिर में नियमित रूप से मंगलवार शाम की आरती चल रही थी। ऐसे में इस्लामवादियों ने मंदिर के अंदर घुसकर हिंदुओं को चेतावनी दी कि वह एक महीने तक आरती न करें (क्योंकि रमजान चल रहा है)। उनकी यह बात सुनकर हिंदू पक्ष के लोग भी नाराज हो गए और दोनों की ओर से लाउडस्पीकर पर अपनी अपनी प्रार्थना की गई।
छत्रपती संभाजीनगर मधील चिकलठाणा येथील हनुमान मंदिरात एकत्रित झालेला सकल हिंदू समाज…
— Sudarshan Maharashtra (@SudarshanNewsMH) March 13, 2024
इस दौरान आरती के लिए कुछ अन्य हिंदू युवक मंदिर पर आने लगे कि तभी उनके ऊपर पत्थर फेंके गए जिसके बाद मामला बढ़ गया और मंदिर में मौजूद लोग सड़क पर आ गए। उन्होंने जालना रोड पर इकट्ठा होकर यातायात को बाधित किया, फिर नारेबाजी हुई।
जानकारी के मुताबिक, पत्थरबाजी की घटना में तीन हिंदू युवक बेरहमी से घायल हुए। अराजक तत्वों द्वारा महिलाओं तक से मारपीट हुई। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि अंत में स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। घायल हिंदू युवकों की पहचान अविनाश बोंद्रे, सागर बंजारे और शुभम राठौड़ के रूप में हुई। उन्हें इलाज के लिए जिला अस्पताल ले जाया गया। शुभम ने पुलिस को बताया कि वे आरती के लिए हनुमान मंदिर जा रहे थे तभी उन पर पथराव किया गया। इससे दहशत फैल गई व सभी डर के मारे अपनी मोटरसाइकिलें छोड़कर जालना रोड की ओर भाग गए।
छत्रपती संभाजी नगर मधील चिकलठाणा येथे हनुमान मंदिराची आरती बंद करण्यासाठी रोज जिहादी हल्ले करत असल्याची घटना काल सुदर्शन मराठीने समोर आणली होती…
त्याचा परिणाम म्हणजे या घटनेनंतर आज संबंधित ठिकाणी हनुमान मंदिरात छत्रपती संभाजीनगर मधील सकल हिंदू समाजाने महाआरतीचे नियोजन केले… pic.twitter.com/68KHQj3mLO
— Sudarshan Maharashtra (@SudarshanNewsMH) March 13, 2024
घटना के ठीक एक दिन बाद हिंदुओं ने इस्लामी हिंसा के विरोध में 13 मार्च को महाआरती की। महाआरती को करवाने वाले शिवसेना के जिला अध्यक्ष राजेंद्र जंजाल थे। महाआरती में करीबन 1500 लोगों ने भाग लिया।
हनुमान मंदिराची आरती बंद करण्या साठी रोज जिहादी करताय हल्ले. हनुमान मंदिर, छत्रपती संभाजी महाराज नगर च्या हिंदूंमध्ये जबरदस्त आक्रोश. pic.twitter.com/Lv1Sxt3ee1
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दो FIR दर्ज
गौरतलब है कि इस मामले में दो मुकदमे दर्ज किए गए हैं। कृष्णा नागे नामक व्यक्ति द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, बदमाशों ने रजनी गुप्ता, हरिलाल गुप्ता, कृष्णा नागे, राजू रोठे, रामसनाई गुप्ता और अन्य पर हमला किया। शिकायत में शकील जैनुद्दीन शेख, अकील जैनुद्दीन शेख, अनीस जैनुद्दीन, रफीक जैनुद्दीन शेख, शोएब सलीम कुरेशी और 12 अन्य का नाम है। इसके अलावा दूसरी शियाकत में दीपक राजेंद्र चव्हाण, अजय गायकवाड़ और 30 से 40 अन्य के खिलाफ दंगा करने का मामला दर्ज किया गया है।
चुनाय आयोग ने गुरुवार (14 मार्च 2024) को एसबीआई से प्राप्त चुनावी ब्रांड का डाटा जारी किया। ये डाटा दो शीट में जारी किया गया, जिसकी पहली शीट में 12 अप्रैल 2019 से 11 जनवरी 2024 तक इलेक्टोरल बॉन्ड खरीदने वालों की जानकारी है, तो दूसरे में 12 अप्रैल 2019 से 24 जनवरी 2024 तक इन बॉन्ड्स को भुनाने वाले राजनीतिक दलों की जानकारी। हालाँकि, भारत में मुख्य विपक्षी पार्टियों के लिए दुख की बात ये रही कि इलेक्टोरल बॉन्ड वाली लिस्ट में जिन नामों की उन्हें सबसे ज्यादा उम्मीद थी, वो कहीं मिले ही नहीं। इनका अनुमान था कि इस लिस्ट में अडानी ग्रुप और रिलायंस ग्रुप का नाम सबसे ऊपर होगा, लेकिन इस लिस्ट में इनका नाम तक नहीं आया।
इस लिस्ट में अडानी का नाम होने को लेकर इतनी ज्यादा निराशा फैला दी गई कि इलेक्टोरल बॉन्ड से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक होने से एक दिन पहले ही शेयर बाजार में अडानी ग्रुप के शेयरों में काफी गिरावट दर्ज की गई। जानकारों का कहना था कि ये गिरावट घबराहट की वजह से हुई, क्योंकि अडानी का नाम इस लिस्ट में आने की उम्मीद थी। इसकी वजह से अडानी ग्रुप के शेयरों को काफी नुकसान हुई, लेकिन जब प्रोपेगेंडा में शामिल लोगों को इस बात का पता चला कि इस लिस्ट में अडानी और अंबानी की कंपनियों का जिक्र तक नहीं है, तो उन्होंने तुरंत ही फेक न्यूज फैलाने शुरू कर दिए, ताकि अडाणी ग्रुप को नुकसान पहुँचाया जा सके।
अभी वो अडानी का नाम लिस्ट में न ढूँढ पाने की निराशा से निकले भी नहीं थे, कि उन्हें नवयुग इंजीनियरिंग कंपनी लिमिटेड का नाम दिख गया, जिसका लिंक तुरंत अडानी से जोड़कर सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलाने का सिलसिला शुरू कर दिया गया। जबकि ये बहुत पहले साफ हो चुका है कि उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में बन रही सिल्कयारा सुरंग को बनाने वाली कंपनी नवयुग से अडानी का कोई लिंक नहीं है, इसके बावजूद नवयुग को अडानी के साथ जोड़कर फेक न्यूज फैलाया जाने लगा और बताया जाने लगा कि नवयुग के माध्यम से अडानी ने इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से चंदा दिया है।
स्क्रीनशॉट: नवयुग कंपनी को अडानी का होना का दावा किया जा रहा है।
अनवर खान नाम के एक्स हैंडल पर भी ये झूठ परोसा गया।
अडानी पर फर्जी दावों की भरमार
कई हैंडल्स पर नवयुग और अडानी का फर्जी कनेक्शन बताया गया।
न्यूटन नाम के एक्स हैंडल पर भी फर्जी दावा
नवयुग पर प्रकाश डालने वाला वही स्क्रीनशॉट कई लोगों द्वारा गौतम अडानी की तस्वीरों के साथ साझा किया गया था, जिसमें दावा किया गया था कि नवयुग इंजीनियरिंग “गौतम अडानी के स्वामित्व वाली” सहायक कंपनी है। हकीकत में अडानी ग्रुप का नवयुग से कोई लेना-देना भी नहीं है।
बता दें कि कई वामपंथी मीडिया पोर्टल और उनसे जुड़े ‘पत्रकारों’ ने भी ये दावा किया था कि नवयुग का स्वामित्व अडानी के पास है। द वायर ने तो पिछले व्यापारिक लेनदेन का भी हवाला दे दिया था और बताया था कि अडानी ग्रुप ने आंध्र प्रदेश में कृष्णापटनम पोर्ट कंपनी में हिस्सेदारी खरीदी थी। हालाँकि हालाँकि, अडानी समूह ने पिछले साल नवंबर में एक मीडिया बयान में यह स्पष्ट कर दिया था कि सिल्कयारा सुरंग के निर्माण से जुड़ी किसी भी कंपनी का उनका स्वामित्व नहीं है। बयान में स्पष्ट किया गया है कि अडानी समूह की कोई भी कंपनी या सहायक कंपनी सुरंग के काम से जुड़ी नहीं है और अडानी के किसी भी कंपनी के मालिक होने के दावे और आरोप झूठे हैं।
Clarification on nefarious attempts to link us to the unfortunate collapse of a tunnel in Uttarakhand. pic.twitter.com/4MoycgDe1U
कुछ फर्जी समाचार विक्रेताओं ने अडानी समूह के एक पुराने संयुक्त उद्यम का हवाला देते हुए झूठा दावा करने की कोशिश की है कि अडानी नवयुग के “मालिक” हैं। यदि कोई बड़ा समूह किसी विशेष परियोजना के लिए किसी अन्य कंपनी के साथ संयुक्त उद्यम में प्रवेश करता है, तो वे कंपनी के “मालिक” नहीं बन जाते हैं। व्यापार जगत में संयुक्त उद्यम आम बात है, खासकर बड़ी निर्माण परियोजनाओं में। अडानी समूह पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि नवयुग इंजीनियरिंग कंपनी का उनका स्वामित्व नहीं है, और उक्त कंपनी उनकी सहायक कंपनी नहीं है।
हालाँकि मोदी सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने के लिए किसी विश्वसनीय मुद्दे के अभाव में अडानी और अंबानी पर हमला करना कॉन्ग्रेस पार्टी और कई विपक्षी दल के नेताओं की पुरानी आदत रही है। यही ट्रेंड इस बार भी दिख रहा है, जिसमें नवयुग कंपनी को अडानी का बताकर लोगों में भ्रम फैलाया जा रहा है।