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‘पीड़ित को सुने बिना SC/ST केस में नहीं दी जा सकती है बेल’: दिल्ली हाईकोर्ट ने रद्द किया निचली अदालत का फैसला

दिल्ली उच्च न्यायालय ने SC/ST एक्ट को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत पीड़ित को सुने बिना आरोपित को जमानत नहीं दी जा सकती है। हाईकोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता को नोटिस दिए बिना आरोपित को बेल नहीं दी जा सकती। जस्टिस नवीन चावला ने बुधवार (14 फरवरी, 2024) को एक मामले की सुनवाई करते हुए ये आदेश दिया।

असल में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 (बलात्कार), 354B (सार्वजनिक रूप से किसी महिला को नग्न करना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत एक शख्स के ऊपर मामला दर्ज किया गया था। साथ ही इसमें SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(w)(i) (किसी दलित/जनजातीय समाज की महिला को गलत तरीके से छूना) और 3(2)(v) (दलित/जनजातीय समाज की महिला का अपमान करना) भी लगाई गई थी। शिकायतकर्ता महिला का कहना था कि उसे नोटिस दिए बिना निचली अदालत ने आदेश पारित कर दिया।

अदालत ने कहा कि जज को पहले उक्त महिला को सुनना चाहिए, उसके बाद जमानत को लेकर कोई फैसला सुनना चाहिए। दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपित की जमानत रद्द करते हुए वापस निचली अदालत में मामले को भेज दिया। हालाँकि, ये भी कहा गया कि आरोपित को अगले 15 दिनों में हिरासत में न लिया जाए, या फिर जब तक स्पेशल जज कोई अगला आदेश नहीं दे देते। पीड़िता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिदीप पैस, मिहिर सैमसन, असवारी सोढ़ी और गार्गी सेठी पेश हुईं।

वहीं सरकार की तरफ से इस मामले में एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (APP) शोएब हैदर ने प्रतिनिधित्व किया। वहीं आरोपित की तरफ से अदालत में सीनियर एडवोकेट कर्मण्य सिंह चौधरी, ऋतिक और लविश ने पैरवी की। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST एक्ट को खत्म कर दिया था, लेकिन भारी विरोध के बाद इसे केंद्र सरकार को वापस लाना पड़ा था। कई बार एससी-एसटी एक्ट के दुरूपयोग की खबरें भी आती रही हैं। कई संगठन इसके खिलाफ अब भी मुखर हैं।

मिशनरी स्कूल में हिन्दू धर्म का अपमान, जिस छात्रा ने की शिकायत उसे मिल रही हत्या की धमकियाँ: सोशल मीडिया पर वायरल कर रहे तस्वीरें, अरब मुल्कों से भी

कर्नाटक के मंगलुरु में एक मिशनरी स्कूल के अंदर हिन्दू देवी-देवताओं के अपमान पर उठा विवाद शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। क्लास 7 में पढ़ने वाली जिस छात्रा ने इस अपमान के खिलाफ आवाज उठाई थी, उसके परिजनों को अब धमकियाँ मिल रहीं हैं। छात्रा के घर वालों के न सिर्फ सोशल मीडिया पर फोटो वायरल किए जा रहे हैं बल्कि कई विदेशी नंबरों से उन्हें धमकाया भी जा रहा है। मंगलवार (20 फरवरी, 2024) को इस पूरे मामले की शिकायत पुलिस से की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता छात्रा की माँ भी टीचर हैं। उन्होंने मंगलवार (20 फरवरी, 2024) को मंगलुरु के कंकनाड़ी पुलिस स्टेशन में शिकायत दी है। शिकायत में बताया गया है कि उनके सोशल मीडिया हैंडल से परिवार वालों की तमाम तस्वीरें उठा ली गईं हैं। इन तस्वीरों को अलग-अलग कैप्शन दे कर वायरल किया जा रहा है। इसी के साथ खाड़ी देशों से पीड़िता के परिवार वालों को फोन पर धमकियाँ दी जा रही हैं। ये धमकियाँ सऊदी अरब, कुवैत और कतर आदि देशों से आ रहीं हैं। धमकी देने वाले पीड़िता के परिजनों को ही पूरे विवाद की वजह बताते हुए गंभीर परिजन भुगतने की चेतावनी दे रहे हैं।

क्या था पूरा मामला

ये मामला मेंगलुरु स्थित सेंट गेरोसा इंग्लिश एचआर प्राइमरी स्कूल का है। आरोप है कि बीते गुरुवार (8 फरवरी, 2024) को सातवीं कक्षा के बच्चों को पढ़ाते हुए एक टीचर ने रामायण और महाभारत को काल्पनिक बताया। क्लास में ही गोधरा काण्ड और बिलकिस बानो जैसे मुद्दों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी अशोभनीय बातें की गईं। इसका खुलासा होने के बाद स्थानीय भाजपा विधायक भरत शेट्टी की अगुवाई में स्कूल के आगे प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारियों ने स्कूल में बच्चों के ब्रेनवॉश की साजिश का आरोप लगाया। साथ ही ऐसी बातें हर साल होने का भी दावा किया गया। 11 फरवरी 2024 को हुए इस प्रदर्शन के दौरान भाजपा MLA भरत शेट्टी ने हिंदू परिजनों से ‘ईसाई मिशनरियों द्वारा संचालित स्कूलों में अपने बच्चों को दाखिला देने पर पुनर्विचार करने’ की भी अपील की। प्रदर्शन में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्या भी शामिल रहे। बाद में पुलिस ने भाजपा MLA भी पर केस दर्ज किया था।

होनी थी शादी, स्माइली फेस के लिए युवक करवा रहा था सर्जरी, हो गई मौत: तेलंगाना की घटना, परिजन बोले- ज्यादा एनेस्थीसिया देने से मौत

तेलंगाना के हैदराबाद में एक युवक ने अपनी हँसी बढ़ाने के लिए डॉक्टरों से ऑपरेशन कराया और बाद में उसकी मौत हो गई। युवक की जल्द ही शादी होने वाली थी। यह ऑपरेशन उसने हैदराबाद के एक नामी क्लीनिक में करवाया था। मृतक के परिजनों ने डॉक्टरों पर उसे बेहोशी की दवा की ओवरडोज देने का आरोप लगाया है।

जानकारी के अनुसार, 28 वर्षीय लक्ष्मी नारायण विन्जम ने हैदराबाद के जुबली हिल्स में स्थित FMS डेंटल क्लीनिक में अपना स्माइल डिजाइनिंग (हँसी बढ़ाना) ऑपरेशन करवाया था। यह ऑपरेशन 16 फरवरी को हुआ था। विन्जम के पिता ने बताया की उनके बेटे की मौत ऑपरेशन के दौरान हो गई थी।

उन्होंने बताया कि उन्हें बीच ऑपरेशन में ही उन्हें बुलाया गया और जब वह क्लीनिक पहुँचे तो डॉक्टरों ने उनके बेटे को मृत घोषित कर दिया। पिता के अनुसार, उनके बेटे ने उन्हें इस ऑपरेशन के विषय में उन्हें कुछ नहीं बताया था। उन्होंने कहा कि उनका बेटा पूरी तरीके से स्वस्थ था और उसकी मौत कुछ गड़बड़ी के कारण हुई है।

विन्जम के विषय में यह भी जानकारी सामने आई है कि उसकी पिछले ही सप्ताह सगाई हुई थी और वह अगले माह शादी के बंधन में बंधने वाला था। वह इसकी तैयारियों में जुटा हुआ था। लेकिन, यह ऑपरेशन उसके लिए प्राणघातक साबित हुआ।

इस मामले पर पुलिस ने बताया, “विन्जम को लगभग 4:30 बजे ऑपरेशन थिएटर के भीतर ले जाया गया था, उनका ऑपरेशन 2 घंटे तक चला, इसके बाद उनके घरवालों को बुलाया गया और उन्हें अपोलो अस्पताल ले जाया गया जहाँ पहुँचने से पहले ही उनकी मौत हो गई थी।”

मृतक विन्जम के पिता ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे को ऑपरेशन के लिए जरूरत से अधिक एनेस्थीसिया दे दी गई। इसके कारण ही उसकी मौत हो गई। उन्होंने इस मामले में पुलिस से शिकायत भी दर्ज करवाई है। पुलिस इस मामले में अस्पताल का रिकॉर्ड चेक करके जाँच कर रही है।

महाराष्ट्र में मराठा को 10% आरक्षण: विधानसभा में सर्व-सम्मति से बिल पास, सपा के MLA बोले – मुस्लिमों को भी 5% कोटा दो

महाराष्ट्र विधानसभा में मंगलवार (20 फरवरी, 2024) को मराठा आरक्षण बिल एकमत से पारित हो गया। इसके अंतर्गत मराठों को शिक्षा और नौकरियों में 10% का आरक्षण दिया जा सकेगा। मराठा आरक्षण विधेयक को महाराष्ट्र विधानसभा ने एकमत से पारित किया है। यह विधेयक महाराष्ट्र की भाजपा-शिवसेना-राकांपा की गठबंधन वाली सरकार लेकर आई थी।

मराठों को आरक्षण देने के लिए लाया गया यह विधेयक विधानसभा में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पेश किया। इसके लिए महाराष्ट्र विधानसभा का विशेष एकदिवसीय सत्र बुलाया गया था। यहाँ इसे सभी पार्टियों ने समर्थन दिया और यह एकमत से पारित हो गया। मराठा आरक्षण का यह विधेयक महाराष्ट्र पिछड़ा वर्ग आयोग की एक रिपोर्ट के आधार पर लाया गया था। यह रिपोर्ट रिटायर्ड जस्टिस सुनील शुक्रे ने राज्य सरकार को बीते सप्ताह सौंपी थी। आरक्षण विधेयक पारित होने पर इसे सीएम शिंदे ने ऐतिहासिक मौक़ा बताया।

सीएम शिंदे ने सी मौके पर कहा, “मैं एक सामान्य मराठा किसान का बेटा हूँ, मैं उनका दर्द समझता हूँ। हमने इसकी कानूनी बारीकियों पर काम कर लिया है और इससे अन्य किसी भी कोटा पर फर्क नहीं पड़ेगा।” उन्होंने कोर्ट के सामने इसके कानूनी रूप से सफल रहने की आशा भी जताई है।

महाराष्ट्र में तीसरी बार ऐसा हो रहा है कि मराठा आरक्षण के लिए विधेयक लाया गया है। इससे पहले वर्ष 2014 में पृथ्वीराज चव्हाण और 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस की सरकार भी मराठा आरक्षण के लिए प्रयास कर चुकी हैं। 2014 में कॉन्ग्रेस की सरकार द्वारा लाया गया विधेयक अध्यादेश ही था, इस पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। वहीं 2018 में इसको लेकर एक गंभीर प्रयास किया गया था। फड़णवीस सरकार ने मराठों को 16% आरक्षण दिया था जिसको लेकर कानूनी समस्याएँ आई थीं।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस आरक्षण को बरकार रखा था लेकिन इसे शिक्षा में घटा कर 12% और नौकरियों में 13% कर दिया था। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा था जहाँ मराठा आरक्षण को 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसके पीछे आरक्षण पर 50% सीमा का कारण बताया था। शिंदे सरकार ने पुनर्विचार याचिका भी डाली थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने वह भी खारिज कर दी थी। मराठा आरक्षण को लेकर हाल ही में काफी प्रदर्शन भी हुए हैं।

अब महाराष्ट्र सरकार को कोर्ट के सामने इस आरक्षण को सही साबित करना होगा, उसके बाद ही इसका लाभ मराठों को मिलेगा। मराठा आरक्षण आंदोलन का नेतृत्व कर रहे एक्टिविस्ट मनोज जारांगे ने इसका स्वागत किया है लेकिन इसमें कुछ और माँग भी जोड़ दी हैं। अब देखना होगा सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है।

मराठा आरक्षण विधेयक आज विधानसभा में पारित होने के समय मुस्लिम नेताओं ने अलग राग भी अलापा। यहाँ सपा नेता अबू आजमी और रईस शेख ने माँग की कि मुस्लिमों को भी 5% आरक्षण दिया जाए, इसके लिए इन्होंने एक बैनर लेकर विधानसभा के बाहर प्रदर्शन किया। उन्होंने मुस्लिमों को आरक्षण ना देना अन्याय बताया है। हालाँकि, शिंदे सरकार ने इस पर कोई भी प्रतिक्रिया या प्रावधान को लेकर बात नहीं की।

‘चोर, च#@%… कीड़े से भी कम ताकत बाबा में’ : मुफ्ती सलमान अजहरी ने CM योगी का किया अपमान, पुरानी वीडियो वायरल

अपने भड़काऊ बयानों के लिए कुख्यात मुफ़्ती सलमान अज़हरी का एक और आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में सलमान अज़हरी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक जाति विशेष का बताते हुए अपशब्द बोल रहा है। बरकाती नेटवर्क पर 5 नवंबर 2023 को शेयर हुए इस वीडियो में सलमान अज़हरी अपराधियों के खिलाफ योगी सरकार के बुलडोजर ट्रीटमेंट पर नाराजगी दिखा रहा है। ये वीडियो पुराना है और सलमान अजहरी फिलहाल साबरमती जेल में है।

वायरल वीडियो 49 सेकेंड का है। वीडियो में अज़हरी बोला, “हिंदुस्तान की सरजमीं पर लोग अभी से घबराने लग गए, डरने लग गए। क्या होगा। अरे चोर च*र आए, जंगल में रहने वाले ऐसे जानवर, हुकूमतों में बैठ कर अगर किसी गरीब के घर पर बुलडोजर चलाते हैं तो तुम खौफ न खाना। ये कीड़ों से भी कम ताकत रखने वाले बाबा हैं। कीड़ों से भी कम ताकत जिनकी हैबत से तुम्हें घबराने की जरूरत नहीं। डरने की जरूरत नहीं।”

इसी वीडियो में आगे मुफ़्ती सलमान अज़हरी खुद को सुन रहे लोगों को भड़काता दिखा। उसने आगे कहा, “उनको ललकार कर के कहो कि तुमने तो एक घर नष्ट किया है या किसी की दुकान पर बुलडोजर चलाया है। ये तो दीवारें हैं बन जाएँगी। जिस दिन तुम्हारा मन करे सीने पर चलाओ। उस दिन भी हम अपने नबी का नाम पुकारते रहेंगे।”

सलमान अजहरी ने अपने इस वीडियो के पीछे योगी आदित्यनाथ के साथ यति नरसिंहानंद की फोटो ग्राफिक में लगा रखी है। इस वीडियो को बरकाती नेटवर्क पर ही अब तक लगभग 14 लाख लोग देख चुके हैं। इसके नीचे ईशान खान, ज़ाहिद, वाहिद अंसारी और मदासिफ खान आदि ने माशाअल्लाह व लब्बैक लब्बैक आदि लिख कर सलमान अज़हरी का समर्थन किया है।

गौरतलब है कि सलमान अज़हरी विवादित बयानबाजी के लिए कुख्यात है। फरवरी 2024 को अज़हरी का एक अन्य वीडियो सोशल मीडिय पर वायरल हुआ था। इस वीडियो में अज़हरी अयोध्या में बन रहे राम मंदिर के खिलाफ लोगों को भड़काता दिख रहा है। उससे साल 31 जनवरी को सलमान अज़हरी ने गुजरात के जूनागढ़ में भी आपत्तिजनक बयानबाजी की थी। इस बयानबाजी में उसने कुत्ता जैसे शब्द प्रयोग कर के हिंदुओं के खिलाफ जहर उगला था। जून 2022 में मुफ़्ती सलमान अज़हरी ने उदयपुर में हुए कन्हैयालाल हत्याकांड के आरोपितों को क्लीन चिट दे डाली थी।

बताते चलें कि अपनी आपत्तिजनक बयानबाजी के चलते सलमान अज़हरी फिलहाल गुजरात की साबरमती जेल में हैं। बुधवार (21 फरवरी) को उसकी जमानत अर्जी पर सुनवाई होनी है। 12 फरवरी 2024 को उसे गुजरात पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। पहली गिरफ्तारी में सलमान को 24 घंटे में जमानत मिल गई थी। हालाँकि गुजरात पुलिस ने अपनी कार्रवाई जारी रखी। एक अन्य FIR में गुजरात पुलिस को सलमान अज़हरी की 5 दिनों की रिमांड मिल गई। रिमांड अवधि पूरी होने पर अज़हरी को जेल भेज दिया गया है।

दिल्ली के हिन्दू विरोधी दंगों में मर गए थे अशफाक और ज़ाकिर, जिन 4 हिन्दुओं पर लगा आरोप उन्हें कोर्ट ने किया बरी: नहीं मिला सबूत

दिल्ली की एक अदालत ने साल 2020 के हिन्दू विरोधी दंगों में हत्या के एक मामले में 4 आरोपितों को बरी कर दिया है। बरी होने वाले आरोपितों के नाम अशोक, अजय, शुभम और जितेंद्र हैं। इन चारों पर अशफाक हुसैन और ज़ाकिर की हत्या करने का आरोप था। अपने फैसले में अदालत ने कहा कि पुलिस इस बात के ठोस सबूत नहीं दे पाई कि चारों आरोपित दंगाई भीड़ का हिस्सा थे। यह फैसला शुक्रवार (16 फरवरी, 2024) को सुनाया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मामला 25 फरवरी, 2020 का है। तब थाना क्षेत्र दयालपुर के अंतर्गत आने वाली बृजपुरी क्षेत्र में साम्प्रदायिक हिंसा के दौरान अशफाक हुसैन और ज़ाकिर नाम के 2 युवकों की हत्या हो गई थी। पुलिस ने इस मामले में 2 अलग-अलग FIR दर्ज की थी। इन FIR में अशोक, अजय, शुभम और जितेंद्र को आरोपित किया गया। जाँच के बाद विवेचक ने भी इन्हीं 4 आरोपितों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट भेजी। आखिरकार लगभग 4 साल बाद इस मामले की सुनवाई दिल्ली के नॉर्थ ईस्ट डिस्ट्रिक कोर्ट में पूरी हुई।

16 फरवरी को दोनों पक्षों की दलीलों के साथ तमाम सबूतों और गवाहों के आधार पर सेशन जज पुलत्स्य प्रमाचला ने अपना फैसला सुनाया। उन्होंने बताया कि पुलिस ऐसा कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाई है जिस से यह साबित हो रहा हो कि घटना के समय चारों आरोपित वहाँ मौजूद थे। अदालत ने इस बात का भी जिक्र किया कि घटना के चश्मदीद गवाह ने भी बाद में आरोपों के विपरीत गवाही दी। हालाँकि, पुलिस ने कॉल डिटेल के साथ तलवारों व कपड़ों आदि की बरामदगी के आधार पर चारों आरोपितों को सजा देने की माँग की थी।

अदालत ने इन सबूतों को अजय, शुभम, अशोक और जितेंद्र को दंडित करने के लिए नाकाफी माना। टिप्पणी में कोर्ट ने यह कहा कि किसी के पास तलवार बरामद होने का अर्थ ये नहीं है कि उसी से मृतक की हत्या हुई हो। कपड़ों की बरामदगी के बारे में अदालत ने टिप्पणी में कहा कि अभियोजन पक्ष ने इन सबूतों की फॉरेंसिक जाँच नहीं करवाई थी। अंत में अदालत ने सभी 4 आरोपितों को पुलिस FIR में लगाए गए सभी आरोपों से बरी कर दिया।

मुस्लिम हैं विक्रांत मैसी के बड़े भैया, ’12वीं फेल’ हीरो ने बताया- 17 साल में कबूला था इस्लाम, पिता ने कुछ नहीं कहा

बॉलीवुड अभिनेता और ’12वीं फेल’ फिल्म के एक्टर विक्रांत मैसी ने हाल में समदीश के शो में इंटरव्यू देने के दौरान परिवार से जुड़ा एक बड़ा खुलासा किया। विक्रांत मैसी ने बताया कि उनके घर में अलग-अलग धर्म को मानने वाले लोग रहते हैं। उनकी माँ सिख हैं, उनके पिता ईसाई धर्म को मानते हैं और उनका भाई मुसलमान बन गया है। विक्रांत ने यह खुलासा करते हुए बताया कि 17 साल की उम्र में उनके भाई ने इस्लाम कबूला था। उसका नाम मोइन है।

विक्रांत मैसी ने अनफिल्टर्ड बाय समदीश के इंटरव्यू में 1 घंटा 11 मिनट के स्लॉट के बाद धर्म पर बात करते हुए कहा, “मेरे भाई का नाम मोइन है, और मेरा नाम विक्रांत है। आपको आश्चर्य होगा कि मोइन नाम क्यों? उसने इस्लाम अपना लिया, मेरे परिवार ने उसे अपना धर्म बदलने दिया। उन्होंने कहा कि बेटा, अगर तुम्हें इसमें संतुष्टि मिलती है तो आगे बढ़ो। उसने 17 साल की उम्र में धर्म परिवर्तन किया, यह एक बड़ा कदम है। मेरी मां सिख हैं। मेरे पिता ईसाई हैं और चर्च जाते हैं। वह हफ्ते में दो बार चर्च जाते हैं। मैंने छोटी उम्र से ही धर्म और आध्यात्म को लेकर काफी तर्क सुने और बहस देखी है।”

विक्रांत मैसी कहते हैं कि जब उनके भाई ने इस्लाम कबूला था तब बहुत लोगों ने उनके पिता से सवाल किए थे लेकिन उन्होंने इसका जवाब दिया। विक्रांत बोले, “मेरे करीबी रिश्तेदारों ने मेरे पिता से सवाल किया कि तुम इसकी (भाई के धर्म परिवर्तन की) अनुमति कैसे दे सकते हो। इस पर पापा ने जवाब दिया कि यह सोचना उनका (रिश्तेदारों) का काम नहीं है। वो मेरा बेटा है। वो सिर्फ मेरे प्रति जवाबदेह है और उसे यह चुनने का पूरा अधिकार है कि वह क्या चाहता है। यह देखने के बाद, मैं अपनी खोज में लग गया और सोचने लगा कि आखिर धर्म क्या है? यह इंसान (Man-Made) की बनाई हुई चीज है।”

बता दें कि विक्रांत मैसी पहले टीवी कलाकार हुआ करते थे, लेकिन बाद उन्होंने फिल्मों में स्विच किया और अच्छा खासा नाम कमाया। अभी हाल में उनकी 12th fail फिल्म भी लोगों को खूब पसंद आई है। परिवार की बात करें तो वह उनका उनके पिता का नाम जॉली है और माँ का नाम मीना मैसी है। उन्होंने 2022 में अपनी गर्लफ्रेंड शीतल ठाकुर से शादी की थी। 7 फरवरी 2024 को दोनों के एक बेटा हुआ। अब जल्द ही वह एकता कपूर की फिल्म साबरमती रिपोर्ट में नजर आएँगे।

तीर से ड्रोन गिराने का दावा करने वाले निहंग ने दी बैसाखी पर खून-खराबे की धमकी, दीप सिद्धू को मानता है कहा – ‘बंदी सिंहों’ को छुड़ाने को एजेंडा बनाएँ किसान

सोमवार (19 फरवरी, 2024) को पंजाबी यूट्यूब समाचार चैनल ‘रोजाना स्पोक्समैन’ का एक निहंग सिख के साथ बातचीत का वीडियो सामने आया। निहंग सिख का नाम गुरवंत सिंह है और वह अपनी तीरंदाजी को लेकर जाना जाता है। उसने इस वीडियो पर काफी विवादास्पद बयान दिए। सिंह किसानों के आंदोलन में भाग ले रहा है। उसने पंजाब के बड़े त्यौहार बैसाखी पर खून-खराबे की धमकी दी और कहा कि सरकार को इसके परिणाम झेलने होगे। उसने यहाँ तक कहा कि यदि सिख धर्मगुरु आंदोलन में पहुँच गए तो बैरिकेड मिनटों में हट जाएँगे।

उसने हरियाणा पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ आँसू गैस के गोले छोड़ने को लेकर भी प्रश्न किए। उसने कहा कि जो लोग लंगर बाँटते हैं उन पर आँसू गैस नहीं चलाई जानी चाहिए। हालाँकि, यह अब एक नयन शगल बन गया है कि सेवा को प्रदर्शन के लिए ढाल की तरह उपयोग किया जाए। जहाँ असल में यह लोग सेवाभाव से करते हैं तो वहीं प्रदर्शनकारी इसे अपनी एक विशेषता के तौर पर दर्शाते हैं।

गुरवंत सिंह ने किसानों के प्रदर्शन को छोड़ कर और भी कई आपत्तिजनक बातें की। उसने कहा कि निहंग सिख भी प्रदर्शन में जाएँगे लेकिन उनकी माँग है कि किसान अपने एजेंडा में ‘बंदी सिंह’ को छुड़वाने को लेकर वादा करें। ‘बंदी सिंह’ उन खालिस्तान सिख समर्थकों को कहा जाता है जो आतंक के किसी मामले में जेल काट रहे हैं। इनको छोड़ने की माँग लम्बे समय से हो रही है। गुरवंत सिंह ने भी यही बात दोहराई।

इसके बाद वह अपनी तीरंदाजी के गुर बताने लगा। निहंग गुरवंत ने कहा कि वह ड्रोन को भी तीर का निशाना लगाकर नीचे गिरा सकता है। यहाँ ध्यान देने वाली बात है कि अम्बाला के शम्भू बॉर्डर पर डटे प्रदर्शनकारियों पर नजर रखने और उनको नियंत्रित करने के लिए हरियाणा पुलिस ड्रोन का इस्तेमाल कर रही है। उसने इसके साथ ही कहा कि अगर ड्रोन गिराने के कारण वह किसी कानूनी पचड़े में फँसता है तो उसकी विधिक सहायता कौन करेगा, इसकी उसे चिंता है। उसने यहाँ अपनी तुलना ‘बंदी सिंहों’ के साथ की।

उसने यहाँ CRPF की आलोचना भी की, उसने कहा कि CRPF वालों को ब्रेनवॉश किया गया है कि वह प्रदर्शनकारियों को दिल्ली जाने से रोकें। उसने दावा किया कि इन्हें मेडल देने का वादा किया जा रहा है। साथ ही गुरवंत ने खालिस्तान की विचारधारा को लेकर भी बात की। उसने यहाँ दीप सिद्धू का नाम लिया। दीप सिद्धू पहले एक अभिनेता था जो कि किसान आन्दोलन 1.0 के समय नेतागिरी करने में आ गया था। गुरवंत ने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वह निशान साहिब के तले दिल्ली की तरफ कूच करें।

उसने ये भी कहा कि प्रदर्शनकारियों को टिड्डियो की तरह एक साथ चलना चाहिए ना कि मेढकों की तरह इधर-उधर कूदना चाहिए। इसके बाद उसने बैसाखी त्योहार पर खून-खराबे की धमकी भी दी। गुरवंत ने कहा कि प्रदर्शनकारियों में ‘चंडी दा वार’ का उपयोग करके और भी ताकत भरी जानी चाहिए। उसका यह वीडियो यूट्यूब पर लाखों लोगों द्वारा देखा जा चुका है। सुरक्षा एजेंसियों को ऐसे लोगों पर नजर रखने की जरूरत है। उसकी खून-खराबे वाली धमकी को लेकर सुरक्षा एजेंसियों को जाँच करनी चाहिए।

यहाँ यह ध्यान देने वाली बात है कि रोज कोई ना कोई कैमरा पर आकर सिखों को भड़काने का काम करता रहता है, ऐसे में लोगों को संभल कर कैमरा पर बोलना चाहिए क्योंकि इससे समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं और भड़काऊ भाषणों से कानून व्यवस्था की समस्या भी पैदा हो सकती है।

एक और संदेशखाली: TMC नेता खलील अहमद के खिलाफ हावड़ा में महिलाओं ने खोला मोर्चा, जिस तालाब में करते है विसर्जन उस पर कर रहा कब्जा

बंगाल के संदेशखाली के बाद अब हावड़ा जिले के अंतर्गत आने वाले पंचला कस्बे में महिलाओं के एक बड़े समूह ने सड़क पर उतर कर जोरदार प्रदर्शन किया है। यह प्रदर्शन सोमवार (19 फरवरी, 2024) को हुआ। महिलाएँ स्थानीय तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता शेख खलील अहमद के जमीनों को कब्जाने को लेकर प्रदर्शन कर रही थीं। बड़ी संख्या में महिला यहाँ झाड़ू और लाठियों के साथ प्रदर्शन करने उतरीं।

प्रदर्शनकारी महिलाएँ आरोप लगा रही हैं कि यहाँ का सबसे बड़े तालाब, जो कि 360 बीघा में फैला हुआ है, में रेत भरी जा रही है। इस तरीके से तालाब को पाट देने की योजना है। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने तृणमूल कॉन्ग्रेस के स्थानीय नेता शेख खलील अहमद पर किसानों की जमीन जोर जबरदस्ती से कब्जाने का आरोप भी लगाया है। उन्होंने कहा है कि अहमद बहुत ही कम कीमत पर यह जमीनें खरीद रहा है।

इस मामले में बंगाली समाचार चैनल ABP आनंद की एक रिपोर्ट बताती है कि जब यहाँ के लोगों ने अहमद के अवैध कामों को लेकर प्रश्न उठाया तो उसके गुडों ने लोगों पर हमला बोल दिया। उसके गुंडों ने यह हमला 18 फरवरी को किया। इस मामले में स्थानीय पुलिस थाने में एक शिकायत भी दर्ज करवाई गई है।

हालाँकि, सही कार्रवाई ना होते देख पंचाल की महिलाओं ने मामला अपने हाथ में लिया और सोमवार (19 फरवरी, 2024) को झाड़ू-लाठी लेकर सड़कों पर आ गईं। उन्होंने यहाँ प्रदर्शन करते हुए उन वाहनों को भी रोका जिनमें रेत भर कर इस तालाब में डालने के लिए ले जाई रही थी।

इस प्रदर्शन के बाद काफी अफरा तफरी माहौल बन गया। यहाँ पुलिस भी इन प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पहुँची। महिलाओं का प्रदर्शन रोकने के लिए ममता सरकार ने यहाँ त्वरित कार्य बल (Rapid Action Force) की तैनाती भी कर दी है।

हालाँकि, इस महिला प्रदर्शन के बाद TMC नेता बैकफुट पर आ गए हैं। स्थानीय तृणमूल MLA गुलशन मलिक ने इस मामले को लेकर कहा कि यह भाजपा की साजिश है। उन्होंने इस मामले के राजनीतिकरण का आरोप लगाया। मलिक ने कहा कि महिलाओं को सड़कों पर उतरने के लिए भाजपा ने कहा है।

NEWS18 बांग्ला से बात करते हुए एक प्रदर्शनकारी महिला ने बताया, “यहाँ एक जलाशय हुआ करता था, अब उसको पाटा जा रहा है। उन्होंने हमारी जमीन लेकर उसको भी पाट दिया है, हमारे पास खाने को भी कुछ नहीं है।”

महिला ने बताया कि इस जलाशय का उपयोग स्थानीय लोग नहाने और मूर्तियाँ विसर्जित करने के लिए करते हैं। महिला ने यह आरोप लगाया कि यह जमीन बिना खरीदे ही इसमें रेत भरी जा रही है जिसके कारण प्रदर्शन हो रहा है।

एक स्थानीय भाजपा नेता पौलोमी अदक ने कहा, “यहाँ पर लोग खेतीबाड़ी करके गुजारा करते हैं, लोगों का कामधंधा खत्म करने के लिए TMC के गुंडों ने तालाब में रेत भरने का काम किया है। ऐसे में अब यहाँ जब बरसात होगी तो बाढ़ आएगी। यहाँ का प्रशासन, पंचायत और सरकारी अधिकारी एकदम निष्क्रिय हैं। यह सब खलील के इशारे पर रहा है जो कि यहाँ पंचायत का उप मुखिया है।”

संदेशखाली में भी महिला प्रदर्शन में जमीन का मामला

बंगाल के ही संदेशखाली से महिलाओं के यौन उत्पीड़न के अलावा जमीन कब्जाने के मामले भी सामने आए हैं। इसका आरोप TMC नेता शेख शाहजहाँ और उसके दो गुर्गों शिबू हाजरा, उत्तम सरदार पर लगा है। यहाँ भी महिलाओं ने इनके खिलाफ उतर कर प्रदर्शन किया और उसकी संपत्तियों को तहस नहस किया। इन महिलाओं पर तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेताओं ने हमला भी किया लेकिन पुलिस ने बीचबचाव करने की जहमत नहीं उठाई। इसके बाद यहाँ धारा 144 लगा दी गई। अभी संदेशखाली मामला पूरे देश की नजरों में है।

कॉन्ग्रेस के डोनेशन अभियान में सबसे ज्यादा दान अल्पसंख्यक विभाग को, इसके आधे में भी नहीं OBC या किसान प्रकोष्ठ: ‘न्याय यात्रा’ में राहुल गाँधी ने माँगा और चंदा

राहुल गाँधी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ के बाद अब ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ निकाल रहे हैं। इस दौरान कॉन्ग्रेस पार्टी लगातार अपना डोनेशन अभियान भी चला रही है। खबर लिखे जाने तक पार्टी 22.59 करोड़ रुपए इकट्ठी भी कर चुकी है। इसमें से 5.68 करोड़ रुपए मौजूदा यात्रा के दौरान आए हैं। सबसे अधिक 1.07 करोड़ रुपए का दान आंध्र प्रदेश से आया है, जिसके बाद राजस्थान (88.65 लाख रुपए) का स्थान है। 12% दानदाता अकेले इसी राज्य से हैं, वहीं 11.9% उत्तर प्रदेश से हैं।

अब एक खास बात आपको बताते हैं। कॉन्ग्रेस को दान देते समय ये पूछा जाता है कि आप पार्टी के किस विभाग को रुपए डोनेट करना चाहते हैं। जैसे प्रोफेशनल्स कॉन्ग्रेस, यूथ कॉन्ग्रेस, सेवा दल या फिर OBC डिपार्टमेंट। लेकिन ठहरिए, अभी आपको हम ये बताते हैं कि सबसे ज्यादा दान कॉन्ग्रेस के किस विभाग को मिल रहा है। प्रोफेशनल्स, यूथ, सेवा, किसान, SC, जनजातीय, छात्र (NSUI) या OBC नहीं, बल्कि माइनॉरिटी डिपार्टमेंट इन सबसे आगे है।

कॉन्ग्रेस पार्टी के अल्पसंख्यक विभाग को सबसे अधिक डोनेशन मिल रहा है। खबर लिखे जाने तक पार्टी के अल्पसंख्यक विभाग को 90.82 लाख रुपए का दान मिल चुका है। दूसरे स्थान पर प्रोफेशनल्स प्रकोष्ठ है, लेकिन उसका आँकड़ा अल्पसंख्यक वाले का आधा भी नहीं है। उसे 39.34 लाख रुपए का डोनेशन मिला है। ये आँकड़ा ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ का है। राहुल गाँधी ने एक ट्वीट के जरिए डोनेशन की माँग की है और वेबसाइट का लिंक साझा किया है, जिस पर ये आँकड़े मौजूद हैं।

ये चौंकाने वाला है, क्योंकि राहुल गाँधी कभी केंद्रीय सचिवों की नियुक्ति में OBC को प्रतनिधित्व न दिए जाने के आरोप लगाते हैं, तो कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘नकली OBC’ बताते हैं। राहुल गाँधी ने कई भाषणों में ओबीसी-ओबीसी का रट्टा लगाया, लेकिन पार्टी के दानदाता ओबीसी प्रकोष्ठ को पैसे दे ही नहीं रहे हैं। संसद में भी राहुल गाँधी ने ओबीसी वाला मुद्दा उठाया था। अब उन्हें अपील करनी चाहिए कि सिर्फ अल्पसंख्यक ही नहीं, पार्टी की ओबीसी यूनिट को भी लोग दान दें।

‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान कॉन्ग्रेस के माइनॉरिटी डिपार्टमेंट को सबसे ज्यादा डोनेशन

इससे पहले जब कॉन्ग्रेस ने डोनेशन अभियान चलाया था तब अजबोगरीब गड़बड़झाला हुआ था। असल में कॉन्ग्रेस पार्टी ने समर्थकों से चंदा इकट्ठा करने के लिए ‘डोनेट फॉर देश’ नाम का अभियान शुरू किया था। हालाँकि, कॉन्ग्रेस ने जिस नाम का अभियान शुरू किया था उस नाम का डोमेन नेम किसी और ने रजिस्टर कर लिया था। न सिर्फ रजिस्टर कर लिया था, बल्कि वहाँ भाजपा को डोनेट करने का लिंक भी डाल दिया गया था। इसके बाद समर्थकों ने ही पार्टी को गालियों से नवाजा था।