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सहेली गुड्डी के साथ हमबिस्तर थी इशरत परवीन, 10 साल के श्रेयांशु ने आपत्तिजनक हालत में देखा: चाकुओं से गोदकर कर दी हत्या

पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में रविवार (18 फरवरी 2024) को एक 10 वर्षीय मासूम की उसके ही घर में निर्ममता से हत्या कर दी गई। मृतक श्रेयांशु शर्मा को चाकू घोंपे गए थे और सिर पर किसी बड़ी चीज से वार किया गया था। इतना ही नहीं, बच्चे के हाथों की नसें भी काट दी गई थी। पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए मंगलवार (20 फरवरी 2024) को मृतक की माँ सहित 2 महिलाओं को गिरफ्तार कर लिया।

मृतक श्रेयांशु की माँ शांता शर्मा उर्फ गुड्डी का इशरत परवीन नाम की एक महिला महिला के साथ समलैंगिक यानी लेस्बियन संबंध थे। श्रेयांशु ने अपनी माँ को इशरत के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था। इसके बाद दोनों का डर सताने लगा कि यह बात वह किसी और को ना बता दे। बदनामी से बचने के लिए शांता ने अपनी पार्टनर इशरत परवीन के साथ मिलकर अपने बेटे की हत्या कर दी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला हुगली जिले के कौननगर क्षेत्र का है। यहाँ 18 फरवरी को 10 साल के मासूम श्रेयांशु की उनके ही घर में लाश मिली थी। हत्या से पहले टीवी की आवाज बढ़ा दी गई थी और पालतू कुत्ते को बाँध कर उसके मुँह को बंद कर दिया गया था। कक्षा 4 में पढ़ने वाले श्रेयांशु के दोनों हाथों की नसों को काट दिया गया था और सिर पर गणेश जी की मूर्ति से वार कर दिया था।

हत्या के लिए सब्ज़ी काटने वाली छुरी का प्रयोग किया गया था। श्रेयांशु के पिता पंकज शर्मा ने मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई थी। पंकज कोलकाता के एक निजी कंपनी में काम करते थे। वहीं, शांता एक कॉस्मेटिक की दुकान पर काम करती थी। इशरत परवीन और शांता शादी के पहले से सहेली थी। शादी के पहले से ही दोनों के समलैंगिक संबंध थे।

शांता की शादी 2012 में पंकज शर्मा हुई थी। वहीं, इशरत परवीन की शादी 2018 में हुई थी। शादी के कुछ समय बाद ही इशरत परवीन ने अपने पति का घर छोड़ दिया। इधर शांता के भी अपने पति से अच्छे रिश्ते नहीं थे। पंकज अपने घर से दूर कोलकाता में रहकर नौकरी किया करते थे। इस बीच शांता और इशरत के रिश्ते बदस्तूर जारी रहे। शादी के बाद भी दोनों अक्सर मिला करते थे।

पुलिस ने जब इस मामले की जाँच शुरू की तो शांता के घर एक टेढ़ा-मेढ़ा चाकू बरामद हुआ। इसी से श्रेयांशु के शरीर पर अनगिनत वार किए गए थे। पंकज ने पुलिस से बताया कि उनका किसी के साथ कोई झगड़ा या दुश्मनी नहीं थी। हालाँकि, श्रेयांशु का कुछ दिन पहले एक सीनियर छात्र से झगड़ा हुआ था, लेकिन पुलिस यह बात गले नहीं उतरी कि मामूली झगड़े में इस तरह हत्या को अंजाम दिया गया।

पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज जाँच की तो श्रेयांशु के घर से दो महिलाएँ निकलते हुए नजर आईं। इनमें से एक श्रेयांशु की माँ थी और दूसरी उसकी सहेली इशरत परवीन। पुलिस ने दोनों से पूछताछ की तो उन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। घटना के दिन भी शांता ने इशरत से फोन पर बात की थी। दोनों का मोबाइल टावर भी घटनास्थल पर दिखा रहा था।

श्रीरामपुर के डीसीपी अर्णब विश्वास के अनुसार, कुछ ही दिनों पहले शांता के बेटे श्रेयांशु ने दोनों सहेलियों को एक ही बिस्तर पर हमबिस्तरी करते देख लिया था। शांता को डर था कि उनका बेटा किसी के आगे भेद न खोल दे। आखिरकार राज को राज ही रखने के लिए शांता ने अपनी सहली इशरत के साथ मिल कर अपने ही बेटे की हत्या की साजिश रच डाली।

18 फरवरी को जब शांता के पति घर से बाहर थे तब उसने अपनी सहली इशरत के साथ मिल कर श्रेयांशु को चाकुओं से गोद कर मार डाला। पुलिस ने शांता और उनकी लेस्बियन साथी इशरत परवीन को जरूरी कानूनी कार्रवाई के बाद जेल भेज दिया है। इस मामले में यह पता चला है कि पंकज को अपनी पत्नी के समलैंगिक होने की जानकारी पहले से ही थी।

’18 की हो या 40 साल की, जो अच्छी लगती उसे उठा लेते थे शाहजहाँ शेख के लोग’: मीडिया को पीड़िताओं ने बताया दर्द, बंगाल के CS-DGP को ST आयोग का नोटिस

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में महिलाओं के यौन शोषण को लेकर विरोध प्रदर्शन के स्वर और आक्रामक होते जा रहे हैं। अब इस मामले में ‘राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST)’ ने भी पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव एवं पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी किया है। साथ ही संस्था के उपाध्यक्ष अपनी टीम के साथ क्षेत्र का दौरा करेंगे। NCST ने स्पष्ट किया है कि आयोग इस मामले की जाँच करेगा। साथ ही CS और DGP से जवाब माँगा गया है कि इस मामले में की गई कार्रवाइयों से वो अवगत कराएँ।

इन दोनों ही अधिकारियों से कहा गया है कि अगर उन्होंने तय समयसीमा में जवाब नहीं दिया तो उन्हें तलब किया जा सकता है। ये नोटिस मंगलवार (20 फरवरी, 2024) को जारी किया गया। संदेशखाली मामले में मुख्य अभियुक्त TMC नेता शाहजहाँ शेख है, जो फ़िलहाल फरार है। ‘दैनिक भास्कर’ की ग्राउंड रिपोर्ट में एक महिला ने बताया कि ये सब 13 साल से चल रहा था। जो भी महिला उन्हें सुंदर लगती, उसे उठा लिया जाता था और जितने दिन मन हो उतने दिन अपने पास रखते थे।

एक महिला ने बताया कि वो नहीं गई तो उसके पति को उठा लिया गया और मारा-पीटा गया। ये इलाका बशीरहाट लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहाँ से अभिनेत्री नुसरत जहाँ सांसद हैं। इलाके में ऐसे संवेदनशील और गंभीर माहौल होने के बावजूद वो यॉट पर वैलेंटाइन्स डे मनाती हुई देखी गईं। वहीं TMC के ही सुकुमार महतो यहाँ से विधायक हैं। शाहजहाँ शेख के दोनों शागिर्द शिबू हाजरा और उत्तम सरदार गिरफ्तार किए जा चुके हैं। संदेशखाली के पात्रोपाड़ा में महिलाओं का प्रदर्शन जारी है।

शाहजहाँ शेख राशन घोटाले में भी आरोपित है। इसी मामले में ED उसे गिरफ्तार करने पहुँची थी, लेकिन उसके समर्थकों ने प्रवर्तन निदेशालय की टीम पर हमला बोल दिया। एक महिला ने बताया कि TMC के दफ्तर में बैठक होती थी और उसमें जो नहीं जाता था उससे मारपीट की जाती थी। बैठक के बाद मर्दों को घर भेज दिया जाता था, महिलाओं को रख लिया जाता था और उनके साथ गलत हरकतें की जाती थीं। 18-40 साल तक की उम्र की महिलाओं को शिकार बनाया जाता था।

महिलाओं का सीधा कहना है कि शाहजहाँ शेख, उत्तम सरकार और शिबू हाजरा मिल कर ये सब करते थे। एक महिला ने बताया कि वो कई बार थाने गई लेकिन पुलिस ने उसकी एक न सुनी। महिलाएँ अपने बच्चों का वास्ता देती थी, लेकिन उन्हें नहीं छोड़ा जाता था। एक महिला ने बताया कि उसकी डेढ़ बीघा जमीन कब्जा ली गई है। महिलाओं ने कहा कि वो गरीब परिवार से आती हैं, उन्होंने कुछ कहा तो मारी जाएँगी। महिलाओं ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा गठित SIT भी उनसे उलटे-सीधे सवाल करती है, बातों में उलझा कर रखती है।

यौन शोषण की लगभग 30 शिकायतें हैं, जिसमें एक FIR ही दर्ज की गई थी। सामाजिक कार्यकर्ता पियाली दास केस दर्ज कराने में इन महिलाओं की मदद कर रही हैं। नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी को इलाके में जाने से पुलिस रोक रही थी, लेकिन कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के बाद वो यहाँ पहुँचे। उन्होंने महिलाओं से बात कर के कहा कि उनके अनुभव रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कह रही हैं कि सब भाजपा का किया-धरा है। सरकार मामले को रफा-दफा करने का प्रयास कर रही है।

अब्दुल्ला बने शिव, फातिमा बनी कविता: 25 साल पहले मकान मालिक ने बनाया था मुस्लिम, फिर से सनातनी हुए पति-पत्नी

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में एक मुस्लिम दम्पति ने घर वापसी की है। अब अब्दुल्ला शिव प्रसाद बन चुके हैं, जबकि उनकी बीवी फातिमा अब कविता के नाम से जानी जाएँगी। मंगलवार (20 फरवरी 2024) को इस परिवार ने विधि-विधान से सुंदरकांड का पाठ और हवन आदि कर घरवापसी की। 25 साल पहले इस्लाम कबूल करने वाले इस दम्पति ने अपना जीवन सनातनी के रूप में बिताने का संकल्प लिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शिव प्रसाद मूल रूप से वाराणसी के रहने वाले हैं। लगभग 25 साल पहले वो रोजी-रोटी के मकसद से फतेहपुर के थाना क्षेत्र हथगाम आए थे। यहाँ वो अधारी गाँव में एक मुस्लिम व्यक्ति के घर में किराए पर रहने लगे। मकान मालिक अक्सर उनसे इस्लाम कबूलने के लिए कहा करता था। एक दिन उसके प्रभाव में आकर पति-पत्नी ने इस्लाम कबूल कर लिया। शिव प्रसाद ने अपना नाम अब्दुल्ला और पत्नी कविता का नाम फातिमा कर दिया।

लगभग 6 महीने पहले शिव प्रसाद ने गाँव अधारी में अपना मकान भी बनवा लिया है। उनका कहना है कि वो सनातनी थे और भविष्य में भी वही रहेंगे। इस्लाम कबूलने की वजह उन्होंने आसपास के लोग और वैसा ही माहौल बताया। लगभग 20 दिन पहले शिव प्रसाद ने एक स्थानीय हिन्दू संगठन राम दल के अध्यक्ष अगेन्द्र साहू से सम्पर्क किया और फिर से सनातन में आने की इच्छा जताई। अगेन्द्र साहू के मुताबिक उन्होंने धर्मान्तरित दम्पति को सुरक्षा का भरोसा दिया। आखिरकार मंगलवार को पति-पत्नी ने घर वापसी कर ली।

इस मौके पर शिव प्रसाद के घर में सुंदर काण्ड का पाठ हुआ, जिसमें स्थानीय हिन्दू संगठन के सदस्यों ने भी भागीदारी की। बाद में हवन हुआ जिसमें सनातनी परिधान में पति-पत्नी शामिल हुए। दोनों ने फिर से सनातनी बनने पर बेहद ख़ुशी जताई है। साथ ही उन्होंने भविष्य में भी सनातनी ही रहने का संकल्प लिया।

Shiv Prasad and Fatima become Abdullah after returning home in Fatehpur

बंगाल पुलिस के गले पड़ा ‘खालिस्तानी’ दाँव, बोले BJP नेता सुवेंदु अधिकारी- साबित करो, नहीं तो लेंगे लीगल एक्शन

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में भारतीय जनता पार्टी के नेता सुवेंदु अधिकारी को पीड़ितों से मिल उनका हाल जानने की अनुमति मिलने के बाद सोशल मीडिया पर एक नया बवाल सामने आया। बंगाल पुलिस ने एक वीडियो शेयर किया और दावा किया कि सुवेंदु अधिकारी ने उनके सिख पुलिस अधिकारी को ‘खालिस्तानी’ कहा जो कि किसी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।

अजीब बात ये है कि पुलिस ने अपने ट्वीट के नीचे आए रिप्लाई को हाइड किया हुआ है जिससे पता नहीं चल पा रहा कि जनता का इस पर क्या रिएक्शन है। हालाँकि उनके इस ट्वीट के बाद सुवेंदु अधिकारी की प्रतिक्रिया आई है। उन्होंने कहा है कि बंगाल पुलिस जो इल्जाम लगा रही है वो साबित करे वरना वो लीगल एक्शन लेंगे।

बंगाल पुलिस ने शेयर की वीडियो

बंगाल पुलिस ने अपने लिखा था- “इस घटना क्रम से नाराज हम, पश्चिम बंगाल पुलिस बिरादरी, इस वीडियो को साझा कर रहे हैं जिसमें हमारे ही एक अधिकारी को राज्य के विपक्ष के नेता द्वारा ‘खालिस्तानी’ कहा गया। उनका ‘दोष’ यह है कि वह एक गौरवान्वित सिख हैं और एक सक्षम पुलिस अधिकारी भी हैं जो कानून लागू करने की कोशिश कर रहे थे।”

पुलिस ने लिखा, “यह टिप्पणी जितनी दुर्भावनापूर्ण और नस्लीय है, उतनी ही सांप्रदायिक रूप से भड़काने वाली भी है। यह एक आपराधिक कृत्य है। हम स्पष्ट रूप से किसी व्यक्ति की धार्मिक पहचान और विश्वास पर अकारण, अस्वीकार्य हमले की निंदा करते हैं जिसका उद्देश्य लोगों को हिंसा करने और कानून तोड़ने के लिए उकसाना है। हम इस मामले में कड़ी कार्रवाई करेंगे।”

क्या है वीडियो में

वीडियो में एक सिख पुलिसकर्मी दिखाई दे रहे हैं, जिनका नाम जसप्रीत सिंह है। वह बंगाल पुलिस में एएएसपी के पद पर तैनात हैं। वीडियो में दिखता है कि संदेशखाली के रास्ते में कुछ लोग पुलिस से भिड़ रहे हैं। इस बीच एक आवाज आती है- ये एक खालिस्तानी है।

अब इस क्लिप से ये स्पष्ट नहीं है कि खालिस्तानी बोला किसने, लेकिन वीडियो की अगली क्लिप में उन्हें एक भाजपा महिला नेता से पूछते देखा जा सकता है कि आखिर कैसे उन्हें खालिस्तानी कहा गया, उनके धर्म पर बात उठाई गई। वह कहते हैं- “सिर्फ इसलिए कि मैंने पगड़ी पहनी है, आप लोग मुझे खालिस्तानी कह रहे हैं? क्या आपने यही सीखा है? यदि कोई पुलिस अधिकारी पगड़ी पहनता है और अपना कर्तव्य ईमानदारी से निभाता है, तो वह आपके लिए खालिस्तानी बन जाता है? आपको शर्म आनी चाहिए।”

इस मामले पर भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के साथ मौजूद भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल ने कहा है कि ये खालिस्तानी शब्द उन लोगों ओर से बिलकुल नहीं बोला गया। वहीं सुवेंदु अधिकारी ने कहा है- “मैं बंगाल की एडीजी सुप्रतीम सरकार से कहूँगा कि वो या तो 24 घंटों के अंदर सारे आरोपों को साबित करें वरना वो उनके खिलाफ एक्शन लेंगे।”

वहीं मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी कहा कि उन्होंने सुवेंदु अधिकारी से बात की है। उन्होंने कहा है कि उन्होने ऐसे शब्द नहीं कहे। सिरसा कहते हैं कि अधिकारी तो सिख समुदाय और समुदाय परंपरा का सम्मान करते हैं। सिखों को टीएमसी का राजनीतिक मोहरा नहीं बनाया जाएगा। मैं पश्चिम बंगाल पुलिस से फिर आग्रह करूँगा कि वह संदेशखाली के लुटेरों और बलात्कारियों को खोजने पर ध्यान केंद्रित करे।

किसान आंदोलन 2.0: केंद्र सरकार ने पाँचवें दौर की वार्ता के लिए बुलाया, अब तक कोई जवाब नहीं आया, चौथे दौर के प्रस्ताव को आंदोलनकारियों ने ठुकराया

दिल्ली को घेरने के लिए पंजाब-हरियाणा के शंभू बॉर्डर पर डटे किसान आंदोलन कारियों को केंद्र सरकार ने पाँचवें दौर की वार्ता के लिए बुलाया है। केंद्र सरकार की तरफ से कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा है कि सरकार इस समस्या का हल चाहती है, इसके लिए वो बातचीत कर रास्ता निकाल रही है। सरकार ने किसानों की सभी बातों को सुना है और चौथे दौर की बातचीत के बाद किसानों की तरफ से जो प्रतिक्रिया आई, सरकार ने उसका भी संज्ञान लिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, किसानों ने सरकार के सामने 13 सूत्रीय मांगें रखी थीं, इनमें 10 पर सहमति बन गई है। तीन माँगें पूरी किए जाने पर को लेकर पेच फंसा है। सरकार का कहना है कि इन मांगों को पूरा करने के लिए वक्त की जरूरत है। हालाँकि, सरकार ने एमएसपी गारंटी को लेकर किसानों के सामने चौथे दौर की वार्ता के दौरान एक फॉर्मूला भी सामने रखा था, जिसे किसानों ने खारिज कर दिया है। इसके बाद सरकार ने अब पाँचवें दौर की वार्ता की पेशकश की है। वहीं, सरकार से बातचीत को लेकर किसान आपस में चर्चा कर रहे हैं और एक बैठक कर रहे हैं, जिसके बाद पाँचवें दौर की बातचीत के लिए मुद्दे तय किए जाएँगे।

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कही ये बात

किसानों से पाँचवें दौर की वार्ता को लेकर कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि सरकार हर मुद्दे पर बातचीत के लिए तैयार है। सरकार सभी समस्याओं का समाधान ढूँढ रही है। उन्होंने कहा, “चौथे दौर तक की बातचीत होने के बाद किसान संगठनों के माध्यम से जो प्रतिक्रिया आई, हम उसे संज्ञान में लेते हुए पुन: पाँचवें दौर की बैठक और उस बैठक में ऐसे सभी मुद्दे, जिन मुद्दों पर हम सभी मिलकर समाधान निकाल सकते हैं, हम वार्ता के लिए तैयार हैं। चाहे वो एमएसपी का मुद्दा हो, चाहे पराली का मुद्दा हो, चाहे एफआईआर का हो या क्रॉप डायवर्सिफिकेशन का हो। ऐसे सभी मुद्दे पर बातचीत के लिए हम तैयार हैं। मैं यही निवेदन करूँगा कि सबको शांति के साथ ऐसे विषयों पर बातचीत करते हुए समाधान ढूँढने की जरूरत है। ये अपील है कि वो शांति बनाए रखें। और बातचीत के लिए मैं हमेशा से कोशिश यही करता हूँ कि हम सब मिलकर समाधान ढूँढे। बातचीत करें, वार्ता जारी रहनी चाहिए। कई चीजें सहमति बनती हैं, कई नहीं बनती हैं। कई विषय आते हैं। हम जब बातचीत करेंगे तो आपसी सौहार्दपूर्ण वातावरण में समाधान के रास्ते निकलते हैं।”

केंद्रीय कृषि मंत्रि अर्जुन मुंडा ने पाँचवें दौर की वार्ता के लिए किसान संगठनों की प्रतिक्रिया के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि अभी तक किसानों की तरफ से कोई जानकारी नहीं आई है। सरकार ने प्रस्ताव भेज दिया है। उन्होंने कहा, “अभी तक किसानों की तरफ से पाँचवें दौर की वार्ता की कोई सूचना आई नहीं है। हम यही अपील करेंगे कि पाँचवें दौर की वार्ता के लिए हम सबको बातचीत के लिए आगे आना चाहिए। ऐसे मुद्दे पर संवेदनशील होकर हम अपना पक्ष रखें, क्योंकि सरकार भी यही चाहती है कि इसका समाधान हो। तत्कालीन दृष्टि से भी, दीर्घकालीन दृष्टि से भी। हमें समस्या के समाधान की दिशा में वार्ता के माध्यम से आगे बढ़ना चाहिए।”

बता दें कि किसानों के साथ चौथे दौर की वार्ता में केंद्र सरकार ने रविवार (18 फरवरी 2024) को नए प्रस्ताव दिए थे, जिसके बाद किसानों ने कहा था कि वो बातचीत करके सरकार को सूचित कर देंगे। सरकार ने अपनी तरफ से चौथे दौर की वार्ता के दौरान जो प्रस्ताव दिया था, उसमें एमएसपी पर फसल खरीदने के लिए 5 साल के कॉन्ट्रैक्ट की बात कही थी। जिसमें ये कॉन्ट्रैक्ट एनसीसीएफ, NAFED और CCI जैसी सहकारी समितियों के साथ होनी थी। इसमें खरीद की लिमिट भी नहीं रहेगी। सरकार ने इसमें उड़द दाल, मसूर दाल और मक्का-कपास को जोड़ने और खरीद के लिए पाँच साल की गारंटी की बात कही थी।

इस बैठक में किसानों के 14 प्रतिनिधि और केंद्र सरकार के किसान कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय शामिल हुए थे। इनके अलावा बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी मौजूद थे। हालाँकि बाद में किसानों ने कहा था कि उन्हें एमएसपी से कम पर कुछ भी मंजूर नहीं है।

हाईकोर्ट का आदेश भी किसानों के ठेंगे पर, ट्रैक्टर-ट्रॉली के इस्तेमाल से रोका तो JCB और मिट्टी खोदने वाली मशीनें लेकर पहुँचे

किसानों का दूसरा आंदोलन और उग्र होता जा रहा है। वो मिट्टी खोदने वाली मशीनें लेकर पंजाब-हरियाणा की सीमाओं पर पहुँच गए हैं। हरियाणा पुलिस ने कहा है कि ये मशीनें किसान हटाएँ, वरना कार्रवाई की जाएगी। किसानों ने अपना ‘दिल्ली चलो’ मार्च एक बार फिर से शुरू करने का निर्णय लिया है। बता दें कि इन मशीनों के इस्तेमाल से पंजाब-हरियाणा सीमा पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को नुकसान पहुँच सकता है। किसान पोकलेन और JCB लेकर प्रदर्शन स्थल पर डटे हुए हैं।

इन मशीनों के मालिकों से पुलिस ने कहा है कि वो ये मशीनें किसान प्रदर्शनकारियों को उपलब्ध न कराएँ। साथ ही उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटाने के लिए भी कहा गया है। इसे गैर-जमानती अपराध बताते हुए कहा गया है कि इन मशीनों का इस्तेमाल कर के सुरक्षा बलों को नुकसान पहुँचाए जाने की आशंका है, ऐसे में इनके मालिक आपराधिक रूप से जिम्मेदार ठहराए जा सकते हैं। MSP (न्यूनतम समर्थन मूल्य) पर किसान संगठनों ने केंद्र सरकार का प्रस्ताव भी ख़ारिज कर दिया है।

बात न माने जाने पर हरियाणा पुलिस इन बुलडोजरों और मिट्टी खोदने वाली मशीनों को जब्त करेगी। हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (DGP) शत्रुजीत कपूर ने कहा कि ऐसे उपकरण सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। 13 फरवरी को ‘किसान आंदोलन 2.0’ शुरू हुआ था। पंजाब-हरियाणा के शम्भू एवं खनौरी बॉर्डर पर ये किसान डटे हुए हैं। हरियाणा सीमा पर ही उन्हें रोक कर रखा गया है। 3 केंद्रीय मंत्रियों की समिति 4 दौर की बातचीत किसान संगठनों के साथ कर चुकी है।

उधर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने कहा है कि हाइवे पर ट्रैक्टर-ट्रॉली का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। मोटर व्हीकल एक्ट का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि किसान अमृतसर से दिल्ली ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर निकले हुए हैं, जो गैर-कानूनी है। मुख्य न्यायाधीश GS संधावालिया और जस्टिस लपिता बनर्जी की पीठ ने कहा कि सबको अपने अधिकार पता हैं, लेकिन कुछ संवैधानिक कर्तव्य भी होते हैं। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से पूछा कि उसने किसानों के इतने बड़े विरोध प्रदर्शन को अनुमति कैसे दी।

पंचकूला स्थित ‘अमरावती एन्क्लेव’ के रहने वाले अधिवक्ता उदय प्रताप सिंह ने इस संबंध में जनहित याचिका (PIL) दायर की थी। उन्होंने बताया था कि कैसे किसानों द्वारा सड़क जाम करने से एम्बुलेंसों, स्कूली बसों और रोजाना आवाजाही करने वाले लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जहाँ एक तरफ किसान उग्र रूप अख्तियार किए हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ मीडिया में उनके नेता शांति की बातें कर रहे हैं। ‘पंजाब हरियाणा किसान मजदूर संघ’ के अध्यक्ष सरवन सिंह पंधेर ने किसानों से कहा कि वो शांतिपूर्वक दिल्ली कूच करें।

शम्भू बॉर्डर पर मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि ये प्रधानमंत्री की भी जिम्मेदारी है कि वो हमें सुनें। उन्होंने दावा किया कि उनलोगों ने भी देश का प्रधानमंत्री बनाने के लिए वोट दिया है, देश सबका है और पीएम सबके हैं, ऐसे में उन्हें आकर स्थिति को सँभालना चाहिए और उनकी माँगों को पूरा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि डेढ़-दो लाख करोड़ रुपए बड़ी रकम नहीं है, फैसला केंद्र को लेना है। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि वो इस गतिरोध को खत्म करें और लोकतान्त्रिक तरीके से प्रदर्शन करने दें।

अलीम, असलम, कामिल, सद्दाम, खालिद… अलवर बीफ मंडी केस की FIR में 22 नाम: बताया- गाय काटने की थी तैयारी, पुलिस को देखते ही भागे

राजस्थान पुलिस ने रविवार (18 फरवरी 2024) को गाय काट कर गोमांस बेचने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। मुखबिर ने पुलिस को बताया था कि राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले के किशनगढ़ बास में खुले में गाय काटी जा रही है और उसका मांस बेचा जा रहा है। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

ऑपइंडिया ने इस मामले में दर्ज की गई FIR हासिल की है। यह FIR 19 फरवरी 2024 को दर्ज गई थी। FIR में राजस्थान गोवंश पशु (वध निषेध और अस्थायी प्रवासन या निर्यात विनियमन) अधिनियम-1995 की धारा 3, 4, 5, 8 और 9 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। गाय काटने और बेचने के मामले में 22 लोगों को नामजद किया गया है।

गोमांस की बिक्री और गोवंश को काटने के मामले में सभी आरोपित मुस्लिम हैं। इस मामले में पुलिस ने रति खान, साहुन, मोसम, हारून, इब्बार, अलीम, असलम, कामिल, सद्दाम, खालिद, फकरू, मोर्मल, खल्ली, रहीस, सलीम, मन्नन, खालिद, कसम, हब्बी, असलम, कय्यूम समेत 22 लोगों को आरोपित बनाया गया है। ये सभी किशनगढ़ बास इलाके के मिर्जापुर और बरसंगपुर के निवासी हैं।

पुलिस FIR में दर्ज सभी गाय का गोमांस बेचने वालों के नाम
पुलिस FIR में दर्ज सभी आरोपितों के नाम

FIR के अनुसार, DSP दिनेश कुमार और उनकी टीम ने दैनिक भास्कर में अवैध गोमांस की मंडी को लेकर प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर 18 फरवरी को कार्रवाई शुरू की। उनके साथ लगभग 20 लोगों की टीम थी। इस टीम ने मिर्जापुर और गाँव बरसंगपुर के इलाके में अभियान चलाया। पुलिस की नजर लोगों पर विशेष तौर पर थी, जो पहले गौकशी और गौतस्करी में शामिल रहे थे।

राजस्थान पुलिस की टीम सूचना के आधार पर शाम को 5 बजे के आसपास मिर्जापुर के जंगल वाले बीहड़ इलाके में पहुँची। वहाँ पुलिस को एक जगह पर चार गाय बँधी हुई दिखीं। इन गायों के पास लगभग 18-19 लोग खड़े थे। वे इन गायों को काटने की तैयारी कर रहे थे। पुलिस को देखते ही ये सभी गाँवों को ओर भाग गए। इनमें से कुछ की पहचान पुलिस ने कर ली है।

वहाँ मिलीं गायों का परीक्षण करने पर पाया गया कि दो गायों को गहरे घाव इन गौतस्करों ने पहुँचाए थे, जबकि दो गायें सामान्य अवस्था में मिलीं। कुछ दूरी पर एक गाय मृत अवस्था में मिली, जिसकी खाल उतारी जा चुकी थी। पुलिस ने ज़िंदा मिली चार गायों को गौशाला भेज दिया। FIR में बताया गया है कि वहाँ पहले काटे गए कुछ गौवंश के अवशेष भी मिले हैं।

इस साफ़ हुआ है कि यहाँ लम्बे समय से गौकशी का धंधा चलता आ रहा है। इस विषय में जानकारी उच्चाधिकारियों को भी दे दी गई है। पुलिस ने इस मामले में स्थानीय लोगों से पूछताछ की है। FIR में स्पष्ट किया गया है कि जिन गौतस्करों के विरुद्ध अब मामला दर्ज हुआ है, वह पहले भी यही काम करते आए हैं और उनके खिलाफ पूर्व में भी मामले दर्ज हो चुके हैं।

गौरतलब है कि हाल ही में राजस्थान के अलवर में बीफ मंडी का खुलासा हुआ था। इसके बाद प्रशासन एक्शन के मोड में है। यह मंडी किशनगढ़ बास में रूंध गिदावड़ा के बीहड़ों में चल रही थी। यहाँ करीब 20 गाय रोजाना खुलेआम काटी जाती थी। 50 गाँवों और लगभग 300 दुकानों में गोमांस की सप्लाई होती थी।

इसको लेकर कुछ वीडियो भी सामने आए थे। वीडियो में दिख रहा था कि बिरसंगपुर के पास रुंध गिदवडा के बीहड़ों में गायों को बेरहमी से मारा जा रहा है। इसके बाद उनकी खाल उतारी जा रही है। गायों की हत्या के बाद गोमांस को व्हाट्सएप पर ऑर्डर लेकर घर तक सप्लाई दी जाती थी। इस मंडी में सैकड़ों की तादाद में खरीदार भी आते थे।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया था कि बीफ मंडी की जानकारी होने के बाद भी पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती। खुलासे के बाद जयपुर रेंज के IG उमेश चंद्र दत्त के नेतृत्व में बास इलाके के उन बीहड़ों में छापेमारी की गई, जहाँ गोकशी होने का दावा किया गया था। सूचना सही पाई गई। पुलिस को देखकर गोतस्कर अपने वाहन छोड़ फरार हो गए थे।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, बीहड़ की लगभग 500 बीघे जमीन पर पहले कब्जा किया गया और फिर बीफ मंडी शुरू की गई। कब्जे की 70 बीघे जमीन पर गेहूँ और सरसों की फसल लगाई गई थी। अवैध निर्माण भी किए थे। सोमवार (19 फरवरी 2024) को प्रशासन ने फसल रौंदकर इस जमीन को मुक्त कराया। साथ ही गोकशी से जुड़े लोगों के करीब दर्जनभर निर्माणों पर बुलडोजर की कार्रवाई की।

जिस आदिनाथ मंदिर को तोड़ बनाई ‘अदीना मस्जिद’, वहाँ हिन्दुओं ने की पूजा: बंगाल पुलिस ने की FIR, कहा- जहाँ मन हो वहाँ प्रणाम नहीं कर सकते

पश्चिम बंगाल के मालदा में एक युवा पुजारी के नेतृत्व में हिन्दुओं के एक दल ने विवादित ‘अदीना मस्जिद’ परिसर के भीतर पूजा की। यह पूजा शनिवार (17 फरवरी, 2024) को की गई। इस युवा पुजारी का नाम हिरनमॉय गोस्वामी है।

गोस्वामी ने भारतीय पुरातव सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित विवादित अदीना मस्जिद का दौरा किया था। यहाँ उन्होंने शिवलिंग और अन्य हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ भी देखी थी। इसके बाद उन्होंने अपने कुछ अनुयायियों के साथ यहाँ पर पूजा और मंत्रोच्चार चालू कर दिया।

गोस्वामी और अन्य हिन्दुओं के पूजा-पाठ से इलाके के मुस्लिमों को समस्या हो गई। उन्होंने स्थानीय पुलिस को सूचना दी। यहाँ पर गोस्वामी को रोकने के लिए सब इंस्पेक्टर नवीन चन्द्र पोद्दार पहुँच गए। गोस्वामी को पोद्दार ने बताया कि वह इस विवादित मस्जिद में पूजा-अर्चना नहीं कर सकते। इससे दोनों पक्षों में गहमागहमी बढ़ गई। हिरनमॉय गोस्वामी ने पूजा रोके जाने को लेकर पुलिस अधिकारी से प्रश्न पूछने चालू कर दिए।

गोस्वामी ने पुलिस अधिकारी पोद्दार से पूछा कि आखिर उनका अपराध क्या है? पोद्दार ने इस पर कहा, “तुम्हारा अपराध ये है कि तुम जहाँ चाह रहे हो वहाँ पर प्रणाम कर रहे हो, ये यहाँ नहीं हो सकता।” उनकी इस टिप्पणी पर विवाद हो गया। यहाँ पूजा करने वाले गोस्वामी वृन्दावन में विश्वविद्या ट्रस्ट के भी मुखिया हैं। गोस्वामी ने पुलिस अधिकारी पोद्दार से कहा कि जब यहाँ उन्हें मूर्तियाँ दिख रही हैं तो भला वह पूजा क्यों नहीं कर सकते?

उन्होंने कहा, “मुझे वो आदेश दिखाओ जिसमें यह लिखा हो कि मैं यहाँ प्रणाम नहीं कर सकता। मैं तो यहीं प्रणाम करूँगा। तुम क्या कर लोगे? क्या तुम्हारे पास ये अधिकार है कि मुझे यहाँ से बाहर जाने के लिए बोलो।” इसके बाद हिन्दुओं ने लिखित आदेश दिखाने की माँग की कि यहाँ उनका आना वर्जित है।

इस मामले में ASI ने हिरनमॉय गोस्वामी के विरुद्ध FIR मालदा के एक पुलिस थाने में दर्ज करवाई है। एक पुलिस अधिकारी ने इस विषय में द टेलीग्राफ को बताया, “हमने ASI की शिकायत के आधार पर एक FIR दर्ज कर ली है।” यह भी बताया गया है कि इस इलाके में पुलिस की बड़ी संख्या में तैनाती की गई है।

गौरतलब है कि जिस विवादित मदीना मस्जिद के भीतर यह पूरा विवाद हुआ है, उसका निर्माण इस्लामिक आक्रान्ता सुल्तान सिकंदर शाह ने 1369 में हिन्दू और बौद्ध मंदिरों को तोड़ कर करवाया था। इससे पहले मई 2022 में भाजपा नेता रतीन्द्र बोस ने कहा था कि इस विवादित मस्जिद के नीचे ‘आदिनाथ मंदिर‘ है। उन्होंने एक ट्वीट में यह बताया था कि इसके लिए जीतू सरदार ने अपने प्राणों की आहुति दी थी।

उन्होंने बताया था, “जीतू सरदार की मौत इस मंदिर को मुस्लिम और अंग्रेज शासकों से बचाते हुए हुई थी। यह मामला मेरे मन में कई बार जब मैंने यहाँ स्थानीय विधायक चिन्मोय देब बर्मन के साथ यात्रा की। काशी के भगवान विश्वनाथ अपने स्थान पर वापस आ गए हैं, क्या अब भगवान आदिनाथ का मौक़ा है?”

‘सम्यक ज्ञान, सम्यक दर्शन और सम्यक चरित्र की त्रिवेणी थे आचार्य विद्यासागर’: जैन मुनि को PM मोदी ने किया नमन, कहा- उनका जीवन शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भी पथ प्रदर्शक

जीवन में हम बहुत कम ऐसे लोगों से मिलते हैं, जिनके निकट जाते ही मन-मस्तिष्क एक सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। ऐसे व्यक्तियों का स्नेह, उनका आशीर्वाद, हमारी बहुत बड़ी पूँजी होती है। संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज मेरे लिए ऐसे ही थे। उनके समीप अलौकिक आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता था। आचार्य विद्यासागर जी जैसे संतों को देखकर ये अनुभव होता था कैसे भारत में आध्यात्म किसी अमर और अजस्र जलधारा के समान अविरल प्रवाहित होकर समाज का मंगल करता रहता है।

आज मुझे, उनसे हुई मुलाकातें, उनसे हुआ संवाद, सब बार-बार याद आ रहा है। पिछले साल नवंबर में छत्तीसगढ़ में डोंगरगढ़ के चंद्रगिरी जैन मंदिर में उनके दर्शन करने जाना मेरे लिए परम सौभाग्य की बात थी। तब मुझे जरा भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि आचार्य जी से मेरी यह आखिरी मुलाकात होगी। वह पल मेरे लिए अविस्मरणीय बन गया है। इस दौरान उन्होंने काफी देर तक मुझसे बातें की। उन्होंने पितातुल्य भाव से मेरा ख्याल रखा और देश सेवा में किए जा रहे प्रयासों के लिए मुझे आशीर्वाद भी दिया। देश के विकास और विश्व मंच पर भारत को मिल रहे सम्मान पर उन्होंने प्रसन्नता भी व्यक्त की थी। अपने कार्यों की चर्चा करते हुए वह काफी उत्साहित थे। इस दौरान उनकी सौम्य दृष्टि और दिव्य मुस्कान प्रेरित करने वाली थी। उनका आशीर्वाद आनंद से भर देने वाला था, जो हमारे अंतर्मन के साथ-साथ पूरे वातावरण में उनकी दिव्य उपस्थिति का अहसास करा रहा था। उनका जाना उस अद्भुत मार्गदर्शक को खोने के समान है, जिन्होंने मेरा और अनगिनत लोगों का मार्ग निरंतर प्रशस्त किया है।

भारतवर्ष की ये विशेषता रही है कि यहाँ की पावन धरती ने निरंतर ऐसी महान विभूतियों को जन्म दिया है, जिन्होंने लोगों को दिशा दिखाने के साथ-साथ समाज को भी बेहतर बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। संतों और समाज सुधार की इसी महान परंपरा में संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज जी का प्रमुख स्थान है। उन्होंने वर्तमान के साथ ही भविष्य के लिए भी एक नई राह दिखाई है।

उनका संपूर्ण जीवन आध्यात्मिक प्रेरणा से भरा रहा। उनके जीवन का हर अध्याय, अद्भुत ज्ञान, असीम करुणा और मानवता के उत्थान के लिए अटूट प्रतिबद्धता से सुशोभित है।

संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी महाराज जी सम्यक ज्ञान, सम्यक दर्शन और सम्यक चरित्र की त्रिवेणी थे। उनके व्यक्तित्व की सबसे विशेष बात ये थी कि उनका सम्यक दर्शन जितना आत्मबोध के लिए था, उतना ही सशक्त उनका लोक बोध भी था। उनका सम्यक ज्ञान जितना धर्म को लेकर था, उतना ही उनका चिंतन लोक विज्ञान के लिए भी रहता था।

करुणा, सेवा और तपस्या से परिपूर्ण आचार्य जी का जीवन भगवान महावीर के आदर्शों का प्रतीक रहा, उनका जीवन, जैन धर्म की मूल भावना का सबसे बड़ा उदाहरण रहा। उन्होंने जीवन भर अपने काम और अपनी दीक्षा से इन सिद्धांतों का संरक्षण किया। हर व्यक्ति के लिए उनका प्रेम, ये बताता है कि जैन धर्म में ‘जीवन’ का महत्व क्या है। उन्होंने सत्यनिष्ठा के साथ अपनी पूरी आयु तक ये सीख दी कि विचारों, शब्दों और कर्मों की पवित्रता कितनी बड़ी होती है। उन्होंने हमेशा जीवन के सरल होने पर जोर दिया। आचार्य जी जैसे व्यक्तित्वों के कारण ही, आज पूरी दुनिया को जैन धर्म और भगवान महावीर के जीवन से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।

वो जैन समुदाय के साथ ही अन्य विभिन्न समुदायों के भी बड़े प्रेरणास्रोत रहे। विभिन्न पंथों, परंपराओं और क्षेत्रों के लोगों को उनका सानिध्य मिला, विशेष रूप से युवाओं में आध्यात्मिक जागृति के लिए उन्होंने अथक प्रयास किया।

शिक्षा का क्षेत्र उनके हृदय के बहुत करीब रहा है। बचपन में सामान्य विद्याधर से लेकर आचार्य विद्यासागर जी बनने तक की उनकी यात्रा ज्ञान प्राप्ति और उस ज्ञान से पूरे समाज को प्रकाशित करने की उनकी गहरी प्रतिबद्धता को दिखाती है। उनका दृढ़ विश्वास था कि शिक्षा ही एक न्यायपूर्ण और प्रबुद्ध समाज का आधार है। उन्होंने लोगों को सशक्त बनाने और जीवन के लक्ष्यों को पाने के लिए ज्ञान को सर्वोपरि बताया। सच्चे ज्ञान के मार्ग के रूप में स्वाध्याय और आत्म-जागरूकता के महत्त्व पर उनका विशेष जोर था। इसके साथ ही उन्होंने अपने अनुयायियों से निरंतर सीखने और आध्यात्मिक विकास के लिए निरंतर प्रयास करने का भी आग्रह किया था।

संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी महाराज की इच्छा थी कि हमारे युवाओं को ऐसी शिक्षा मिले, जो हमारे सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित हो। वह अक्सर कहा करते थे कि चूँकि हम अपने अतीत के ज्ञान से दूर हो गए हैं, इसलिए वर्तमान में हम अनेक बड़ी चुनौतियों से जूझ रहे हैं। अतीत के ज्ञान में वो आज की अनेक चुनौतियों का समाधान देखते थे। जैसे जल संकट को लेकर वो भारत के प्राचीन ज्ञान से अनेक समाधान सुझाते थे। उनका यह भी विश्वास था कि शिक्षा वही है, जो स्किल डवलपमेंट और इनोवेशन पर अपना ध्यान केंद्रित करे।

आचार्य जी ने कैदियों की भलाई के लिए भी विभिन्न जेलों में काफी कार्य किया था। कितने ही कैदियों ने आचार्य जी के सहयोग से हथकरघा का प्रशिक्षण लिया। कैदियों में उनका इतना सम्मान था कि कई कैदी रिहाई के बाद अपने परिवार से भी पहले आचार्य विद्यासागर जी से मिलने जाते थे।

संत शिरोमणि आचार्य जी को भारत देश की भाषायी विविधता पर बहुत गर्व था। इसलिए वह हमेशा युवाओं को स्थानीय भाषाएँ सीखने के लिए प्रोत्साहित करते थे। उन्होंने स्वयं भी संस्कृत, प्राकृत और हिंदी में कई सारी रचनाएँ की हैं। एक संत के रूप में वे शिखर तक पहुँचने के बाद भी जिस प्रकार जमीन से जुड़े रहे, ये उनकी महान रचना ‘मूक माटी’ में स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है। इतना ही नहीं, वे अपने कार्यों से वंचितों की आवाज भी बने।

संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी महाराज जी के योगदान से स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भी बड़े परिवर्तन हुए हैं। उन्होंने उन क्षेत्रों में विशेष प्रयास किया, जहाँ उन्हें ज्यादा कमी दिखाई पड़ी। स्वास्थ्य को लेकर उनका दृष्टिकोण बहुत व्यापक था। उन्होंने शारीरिक स्वास्थ्य को आध्यात्मिक चेतना के साथ जोड़ने पर बल दिया, ताकि लोग शारीरिक और मानसिक रूप, दोनों से स्वस्थ रह सकें।

मैं विशेष रूप से आने वाली पीढ़ियों से यह आग्रह करूँगा कि वे राष्ट्र निर्माण के प्रति संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की प्रतिबद्धता के बारे में व्यापक अध्ययन करें। वे हमेशा लोगों से किसी भी पक्षपातपूर्ण विचार से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया करते थे। वे मतदान के प्रबल समर्थकों में से एक थे और मानते थे कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी की सबसे सशक्त अभिव्यक्ति है। उन्होंने हमेशा स्वस्थ और स्वच्छ राजनीति की पैरवी की। उनका कहना था- ‘लोकनीति लोभसंग्रह नहीं, बल्कि लोकसंग्रह है’। इसलिए नीतियों का निर्माण निजी स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि लोगों के कल्याण के लिए होना चाहिए।

आचार्य जी का गहरा विश्वास था कि एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण उसके नागरिकों के कर्तव्य भाव के साथ ही अपने परिवार, अपने समाज और देश के प्रति गहरी प्रतिबद्धता की नींव पर होता है। उन्होंने लोगों को सदैव ईमानदारी, सत्यनिष्ठा और आत्मनिर्भरता जैसे गुणों को विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया। ये गुण एक न्यायपूर्ण, करुणामयी और समृद्ध समाज के लिए आवश्यक हैं। आज जब हम विकसित भारत के निर्माण की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं कर्तव्यों की भावना और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है।

ऐसे कालखंड में जब दुनियाभर में पर्यावरण पर कई तरह के संकट मंडरा रहे हैं, तब संत शिरोमणि आचार्य जी का मार्गदर्शन हमारे बहुत काम आने वाला है। उन्होंने एक ऐसी जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया, जो प्रकृति को होने वाले नुकसान को कम करने में सहायक हो। यही तो ‘मिशन लाइफ’ है जिसका आह्वान आज भारत ने वैश्विक मंच पर किया है। इसी तरह उन्होंने हमारी अर्थव्यवस्था में कृषि को सर्वोच्च महत्त्व दिया। उन्होंने कृषि में आधुनिक टेक्नोलॉजी अपनाने पर भी बल दिया। मुझे विश्वास है कि वो नमो ड्रोन दीदी अभियान की सफलता से बहुत खुश होते।

संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज जी, देशवासियों के हृदय और मन-मस्तिष्क में सदैव जीवंत रहेंगे। आचार्य जी के संदेश उन्हें सदैव प्रेरित और आलोकित करते रहेंगे। उनकी अविस्मरणीय स्मृति का सम्मान करते हुए हम उनके मूल्यों को मूर्त रूप देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह ना सिर्फ उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि होगी, बल्कि उनके बताए रास्ते पर चलकर राष्ट्र निर्माण और राष्ट्र कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त होगा।

(नोट: जैन मुनि आचार्य विद्यासागर जी महाराज को श्रद्धांजलि देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह लेख अपने ब्लॉग पर लिखा है। आप इस लिंक पर क्लिक कर इसे पढ़ सकते हैं)

जिस हीरो को कंगना रनौत ने बताया था ‘कॉकरोच’, उसने माँगी माफी: कहा- हिंदुओं को अपमानित करने का नहीं था इरादा

बॉलीवुड अभिनेता विक्रांत मैसी अभी हाल में अपने भाई के मजहब का खुलासा करने के कारण चर्चा में आए थे, इस बीच उनका एक पुराना ट्वीट वायरल हो गया। इस ट्वीट में उन्होंने श्रीराम भगवान और माता सीता के बीच संवाद को दिखाकर हिंदूवादी लोगों का, श्रीराम भक्तों का, और राष्ट्रवादी लोगों का अपमान किया था। ट्वीट के वायरल होने के बाद विक्रांत मैसी ने माफी माँगी है।

विक्रांत मैसी का पुराना ट्वीट साल 2018 के समय का है। कठुआ कांड के बाद उन्होंने इसे शेयर किया था। इस पोस्ट में श्रीराम भगवान से माता सीता का संवाद दिखाया गया है। इसमें माता सीता हाथ में अखबार लिए हुए हैं जिसकी हेडलाइन है- बच्ची का रेप मंदिर में हुआ, भाजपा विधायक ने बच्ची का रेप किया, योगी ने रेप आरोपित को संरक्षण दिया। इसे पढ़कर माता सीता को कहते दिखाया जाता है- “मैं बहुत खुश हूँ कि मेरा किडनैप रावण ने किया था। तुम्हारे भक्तों ने नहीं।”

विक्रांत मैसी का ट्वीट

कठुआ कांड को लेकर बनाए गए इस कार्टून में श्रीराम के भक्तों को बलात्कारी दिखाने का प्रयास हुआ था। इसे शेयर करते हुए विक्रांत ने लिखा था- अधपके आलू और अधपके राष्ट्रवादी आपके पेट में दर्द का कारण बन सकते हैं।

विक्रांत ने माँगी माफी

विक्रांत के इसी ट्वीट को सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया गया जिसके बाद विक्रांत ने लंबे नोट के साथ माफी माँगी। उन्होंने लिखा- “2018 के ट्वीट के संदर्भ में कुछ शब्द: मेरा इरादा कभी भी हिंदू समुदाय को चोट पहुँचाने, बदनाम करने या अपमान करने का नहीं था। वो बात अखबार का कार्टून शेयर किए बिना भी कही जा सकती थी। मैं अत्यंत विनम्रता से उन सभी लोगों से माफी माँगना चाहता हूँ जिन्हें इससे आहत हुआ। जैसा कि आप सभी अब तक जानते हैं, कि मैं सभी आस्थाओं, विश्वासों और धर्मों को यथासंभव सर्वोच्च सम्मान देता हूँ।”

विक्रांत ने लिखा- “हम सभी समय के साथ बड़े होते हैं और अपनी गलतियों पर विचार करते हैं। यह मेरी गलती थी।”

उनके इस माफी वाले ट्वीट के नीचे लोग उन्हें कह रहे हैं कि उन्हें शुक्र करना चाहिए कि उनका ये ट्वीट हिंदूविरोधी था इस्लाम विरोधी नहीं। हिंदू सहिष्णु होते हैं। उनके फैंस उन्हें कह रहे हैं कि वो ऐसे ट्वीट देखकर बहुत निराश हैं।

कंगना ने विक्रांत को कहा था कॉकरोच

बता दें कि विक्रांत मैसी का ये अकेला ट्वीट वायरल नहीं है। एक बार उन्होंने अभिनेत्री यामी गौतम को दुल्हन वाली लाल साड़ी में देखकर उनकी तुलना राधे माँ से की थी। इस पर कंगना ने उन्हें जवाब देते हुए कहा था- “ये कॉकरोच कहाँ से आया लाओ मेरी चप्पल।”

यामी के पोस्ट पर विक्रांत और कंगना के बीच हुई बात

विक्रांत मैसी ने भाई के मजहब को लेकर किया था खुलासा

गौरतलब है इन ट्विटों से पहले विक्रांत मैसी के एक इंटरव्यू की क्लिप वायरल हुई थी-  “मेरे भाई का नाम मोइन है, और मेरा नाम विक्रांत है। आपको आश्चर्य होगा कि मोइन नाम क्यों? उसने इस्लाम अपना लिया, मेरे परिवार ने उसे अपना धर्म बदलने दिया। उन्होंने कहा कि बेटा, अगर तुम्हें इसमें संतुष्टि मिलती है तो आगे बढ़ो। उसने 17 साल की उम्र में धर्म परिवर्तन किया, यह एक बड़ा कदम है। मेरी मां सिख हैं। मेरे पिता ईसाई हैं और चर्च जाते हैं। वह हफ्ते में दो बार चर्च जाते हैं। मैंने छोटी उम्र से ही धर्म और आध्यात्म को लेकर काफी तर्क सुने और बहस देखी है।”

विक्रांत बोले, “मेरे करीबी रिश्तेदारों ने मेरे पिता से सवाल किया कि तुम इसकी (भाई के धर्म परिवर्तन की) अनुमति कैसे दे सकते हो। इस पर पापा ने जवाब दिया कि यह सोचना उनका (रिश्तेदारों) का काम नहीं है। वो मेरा बेटा है। वो सिर्फ मेरे प्रति जवाबदेह है और उसे यह चुनने का पूरा अधिकार है कि वह क्या चाहता है। यह देखने के बाद, मैं अपनी खोज में लग गया और सोचने लगा कि आखिर धर्म क्या है? यह इंसान (Man-Made) की बनाई हुई चीज है।”