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SDPI के चाँद पाशा ने ज्ञानवापी वाले जज को बताया ‘RSS का जूता चाटने वाला’, SI तनवीर हुसैन ने विरोध करने वालों पर ही कर्नाटक में कर दी FIR

पिछले महीने वाराणसी की जिला अदालत ने ज्ञानवापी ढाँचे के व्यास जी तहखाना में पूजा का अधिकार हिंदुओं को दिया था। इस फैसले के बाद कर्नाटक के रामनगर में एक नया बखेड़ा शुरू हो गया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार फैसला सुनाने वाले जज को लेकर वकील चाँद पाशा ने आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। पाशा प्रतिबंधित इस्लामी संगठन PFI की राजनीतिक विंग SDPI से भी जुड़ा हुआ है। उसकी टिप्पणी का विरोध करने वाले वकीलों पर SI तनवीर हुसैन द्वारा FIR करने के बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया है।

यह मामला एक अभद्र फेसबुक पोस्ट से जुड़ा हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार SDPI से जुड़े वकील चाँद पाशा ने वाराणसी कोर्ट के जज के निर्णय पर प्रश्न उठाते हुए एक पोस्ट किया। उसने हिंदुओं को व्यास जी तहखाना में पूजा करने की अनुमति देने वाले जज को कथित तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ‘जूता चाटने वाला’ बताया था।

इसको लेकर रामनगर के वकीलों ने चाँद पाशा के खिलाफ इजूर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई। पाशा को जिले के अधिवक्ता संघ से निकाले जाने की माँग भी हुई। इसको लेकर जब मीटिंग बुलाई गई तो उसमें विवाद हो गया। आरोप है कि पाशा ने इस मीटिंग में खलल डाला।

वकीलों ने आरोप लगाया है कि पाशा और उसके समर्थकों ने उत्पात मचाया। इसके बाद पाशा के एक साथी रफीक खान ने विरोध करने वाले वकीलों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। इस पर इजूर थाने के SI तनवीर हुसैन ने 10 वकीलों समेत 40 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली।

वकीलों ने तनवीर पर पक्षपात करने का आरोप लगाया है। उन्होंने रामनगर में जिला कलेक्टर के दफ्तर के बाहर धरना देकर तनवीर को निलंबित किए जाने की माँग की है। इसको लेकर वकीलों ने रामनगर में रैली भी निकाली। वकीलों ने आरोप लगाया है कि स्थानीय प्रशासन उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और स्थानीय विधायक MA इकबाल हुसैन के दबाव में काम कर रहा है।

रामनगर की इस घटना पर अब राज्य में राजनीतिक पारा भी चढ़ गया है। भाजपा और जेडीएस ने राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन कर रहे वकीलों का समर्थन किया है। कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा विधायक आर अशोक ने आरोप लगाया है कि SI तनवीर हुसैन राष्ट्रविरोधी ताकतों को मदद दे रहा है। अशोक ने कहा कि चाँद पाशा लगातार ऐसे ही अभद्र बयान देता रहा है और उसके खिलाफ जिले में 12 शिकायतें दर्ज हैं।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेन्द्र ने भी इस मामले पर राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि राज्य की पुलिस को चाँद पाशा को गिरफ्तार करना चाहिए था, क्योंकि उसने न्यायपालिका पर अभद्र टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा कि तनवीर हुसैन को ऊपर से किसी ताकत का समर्थन हासिल है, क्योंकि उसने एक राष्ट्र विरोधी के साथ खड़े होने का काम किया है। इसकी उन्होंने जाँच की माँग की है।

बताया जा रहा है कि चाँद पाशा को तो गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन वकील अपनी माँग पर अड़े हैं। उनका कहना है कि इस मामले में तनवीर हुसैन ने सही आचरण नहीं दिखाया इसलिए उसे भी निलंबित किया जाना चाहिए। इसको लेकर आज (21 फरवरी 2024) बेंगलुरु में प्रदर्शन की भी चेतावनी दी है।

‘नाम बताओ… कोई मारो मत, मारना नहीं है’: पत्रकार ने पूछा सवाल तो राहुल गाँधी ने भीड़ को उकसाया, जातिवाद पर उतरे

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी की एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इस वायरल वीडियो में वह अपनी रैली में एक पत्रकार पर हमलावर हो रखे हैं और पत्रकार को भीड़ ने घेरा हुआ है। वीडियो में देख सकते हैं कि राहुल गाँधी एक जर्नलिस्ट का सवाल सुनकर भड़क जाते हैं और उसे वहीं जलील करना शुरू कर देते हैं।

घटना उत्तर प्रदेश के रायबरेली की है। वहाँ ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान पहुँचे राहुल गाँधी एक सभा को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने पत्रकार के साथ बद्तमीजी की। पत्रकार इंडिया न्यूज का था। कहा जा रहा है राहुल गाँधी उसके सवाल का जब जवाब नहीं दे पाए तो वह उस पर चिल्लाने लगे।

सामने आए वीडियो में साफ तौर पर दिख रहा है कि वो पत्रकार से भीड़ में चिल्लाकर उसका नाम पूछते हैं और कहते हैं कि वो अपने मालिक का नाम उनको बताए। उनकी ऑडियो सुन ऐसा लगता है जैसे उनके पत्रकार को निशाना बनाते ही कुछ लोग उस पर हमलावर भी होते हैं। उस पर हाथ उठाते हैं। ऐसे में राहुल गाँधी को कहते सुना जाता है- मारो मत, मारो मत।

राहुल गाँधी कहते हैं- “मीडिया के हैं आप? नाम क्य़ा है आपका? आप शिव प्रसाद जी हैं। आपके मालिक का क्या नाम है। क्या नाम है। नाम बताओ। नाम बताओ… ओए मारो मत यार। मारो मत उसको। नाम बताओ उसका। वो ओबीसी है, नहीं। वो दलित है नहीं। वो आदिवासी है, नहीं। अरबपति है वो।”

राहुल गाँधी के इतना भड़काने पर जब समर्थक उस पत्रकार पर टूटे तो राहुल गाँधी कहते सुने गए- “भैया मारो मत उसे आजाओ। आ जाओ। मारना नहीं है उसे। इधर आओ, इधर आओ। आप रिलैक्स करो। शांति से बस बैठ जाओ। कोई प्रॉब्लम नहीं है। इनके मालिक अरबपति हैं ये किसानों की बात कभी नहीं करेंगे।”

लोग उनकी यह वीडियो देखने के बाद कह रहे हैं कि राहुल गाँधी ने खुलेआम अपने समर्थकों को एक पत्रकार विरुद्ध नाम और जाति पूछ-पूछकर भड़काया। ऐसे आदमी को सार्वजनिक स्थलों पर जाने की आजादी क्यों दी जा रही है।

यशवंत सिंह लिखते हैं, इंडिया न्यूज़ का रिपोर्टर शिव प्रसाद कांग्रेसियों द्वारा कूट दिया गया। इस पत्रकार ने राहुल गाँधी से सवाल पूछा था- “अखिलेश यादव आपके साथ नहीं हैं, क्या आपका गठबंधन टूट गया?” इसी सवाल को सुन पहले राहुल गाँधी गर्म हुए, मालिक का नाम पूछने लगे, फिर कार्यकर्ताओं ने पीट दिया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गाँधी ने पत्रकार को किया बेइज्जत

बता दें कि यह पहली दफा नहीं है जब राहुल गाँधी ने इस तरीके से किसी पत्रकार से बात की हो। इससे पहले भी वो कई बार पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार करने के कारण चर्चा में आ चुके हैं। उन्होंने कई बार पत्रकारों का अपमान भी किया है। पिछले साल 25 मार्च 2023 को जब राहुल गाँधी मीडिया से मुखातिब हुए थे उस वक्त पत्रकारों द्वारा सवाल पूछे -जाने पर वो बौखला गए थे।

पत्रकार ने मोदी चोर वाले बयान पर राहुल गाँधी से पूछा था कि बीजेपी कह रही है आपने पूरे ओबीसी समाज का अपमान किया है। इस पर पूरे देश में प्रेस कॉन्फ्रेंस की तैयारी है…यही सवाल राहुल गाँधी को पसंद नहीं आया था।

इस पर पूर्व सांसद ने जवाब दिया, “भैया देखिए… पहला अटेंप्ट आपका वहाँ से आया, दूसरा अटेंप्ट यहाँ से आया… आप डायरेक्टली बीजेपी के लिए काम क्यों कर रहे हो? थोड़ी डिस्कशन से करो यार। थोड़ा घूम-घाम कर पूछो। आपको ऑर्डर दिया है क्या? देखो मुस्करा रहे हैं।”

सवाल से बौखलाकर राहुल गाँधी ने अंग्रेजी में कहना शुरू किया, “यदि आप बीजेपी के लिए काम करना चाहते हैं तो अपनी छाती पर भाजपा का ठप्पा लगा लो। फिर मैं उसी अनुसार जवाब दूँगा… पत्रकार बनने का नाटक मत करो।” इस दौरान पूर्व एमपी के चेहरे से साफ जाहिर हो रहा था कि वे चिढ़ गए थे। लेकिन उन्होंने अपनी कुंठा निकालने के लिए यहाँ तक कहा कि हवा निकल गई।

‘3 दिन में कमाइए ₹81000, करोड़पति बना देगा ये एप’: अब विराट कोहली का डीपफेक वीडियो हुआ वायरल, रश्मिका मंदाना और सारा तेंदुलकर भी बन चुकी हैं शिकार

डीप फेक वीडियो के शिकार हस्तियों में अब भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली भी शामिल हो गए हैं। मंगलवार (20 फरवरी, 2024) से उनका भी एक फेक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो को एक न्यूज़ चैनल की क्लिप के साथ बनाया गया है। वीडियो में विराट के इंटरव्यू के दौरान उनकी लिप्सिंग के साथ मिला कर किसी और की आवाज जोड़ी गई है। इस से पहले भी रश्मिका मंदाना और सारा तेंदुलकर आदि के भी डीप फेक वीडियो वायरल किया जा चुका है।

X यूजर ‘@_SaySatya’ ने इस वीडियो को 18 फरवरी को शेयर किया है। 54 सेकेंड के इस वीडियो में एंकर के तौर पर अंजना ओम कश्यप को दिखाया गया है। एंकर की तरफ से कहा गया है कि यह एप्लिकेशन एविएटर के साथ आपको करोड़पति बना देगी। साथ ही यह भी दावा किया गया कि क्रिकेटर विराट कोहली ने इसे जाँचने का फैसला किया और उन्हें इसका झटका लगा। इस दौरान विराट द्वारा 3 दिनों में हजार रुपए से 81 हजार रुपए कमाने की भी बात कही गई है।

इसी वीडियो में 16 वें सेकेंड से विराट कोहली दिखाई देते हैं। उनकी आवाज में एविएटर गेम में 2000% जीत पक्की बताई गई। इसके आगे कम पैसे में ज्यादा से ज्यादा कमाई का लालच दिया जा रहा है। खेल के लिए 500 से हजार रुपए तक से शुरुआत करने के लिए उकसाया जा रहा है। विराट कोहली की बैकग्राउंड आवाज में यह भी दावा किया जा रहा है कि वो खुद ही इसे खेलना सिखाएँगे। वीडियो शेयर करने वाले यूजर सत्या ने इसे AI तकनिकी का खतरनाक दुरूपयोग करार दिया है।

बताते चलें कि इस से पहले रश्मिका मंदना का भी डीपफेक वीडियो बना कर वायरल किया गया था। तब ब्रिटिश मॉडल जारा पटेल के अंतरंग वीडियो पर रश्मिका मंदाना का चेहरा लगा दिया गया था। वीडियो काफी वायरल होने के बाद खुद रश्मिका ने इस मामले में अपनी सफाई दी थी। नवंबर 2023 के इसी माह में ही पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर की बेटी सारा का डीपफेक वीडियो वायरल किया गया था। तब सारा तेंदुलकर और उनके भाई अर्जुन की फोटो के साथ AI तकनिकी से छेड़छाड़ की गई थी।

अर्जुन की जब शुभम गिल की तस्वीर लगा कर तब यह दावा किया गया था कि सारा तेंदुलकर ने शुभम के साथ अपने रिश्ते पर मुहर लगा दी है।

‘ममता बनर्जी की तानाशाही नहीं चलेगी, संदेशखाली का सच दिखाते रहेंगे’: पश्चिम बंगाल में पत्रकार की गिरफ़्तारी के खिलाफ प्रदर्शन, सवाल – शाहजहाँ शेख कहाँ है?

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में सत्ताधारी TMC (तृणमूल कॉन्ग्रेस) के नेता शाहजहाँ शेख के गुंडों पर स्थानीय महिलाओं ने उत्पीड़न एवं यौन शोषण का आरोप लगाया। राशन घोटाले की जाँच के लिए पहुँचे ED अधिकारियों पर हमला कराने के बाद से ही शाहजहाँ शेख फरार है। पीड़ित महिलाओं की आवाज़ उठाने पर पश्चिम बंगाल पुलिस ने ‘रिपब्लिक बांग्ला’ टीवी न्यूज़ चैनल के पत्रकार को लाइव कैमरे पर रिपोर्टिंग के दौरान ही गिरफ्तार कर लिया। मीडिया का गिरोह विशेष इस पर चुप है।

अब देश भर में पत्रकार सन्तु पान की गिरफ़्तारी के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गया है। ‘DD न्यूज़’ के पत्रकारों अशोक श्रीवास्तव और प्रखर श्रीवास्तव के अलावा कई अन्य संस्थानों के मीडियाकर्मी मंगलवार (20 फरवरी, 2024) को ‘प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (PCI)’ में जुटे और विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने ‘ममता बनर्जी की तानाशाही नहीं चलेगी’, ‘पत्रकार को रिहा करो’, ‘संदेशखाली का सच दिखाते रहेंगे’, ‘ना डरेंगे, ना झुकेंगे’ और ‘ममता दीदी, तानाशाही बंद करो’ लिखे हुए प्लाकार्ड्स ले रखे थे।

‘प्रेस क्लब, कोलकाता’ ने भी इस संबंध में बयान जारी किया है। संस्था ने कहा है कि पत्रकार की गिरफ्तारी को लेकर वो चिंतित है। साथ ही सन्तु पान को रिहा करने की माँग भी की। संस्था ने कहा कि पत्रकार के खिलाफ लगे आरोपों की जाँच हो, लेकिन अपना काम करते समय उसकी गिरफ़्तारी सही नहीं है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी पूछा है कि आखिर शाहजहाँ शेख कहाँ है? पश्चिम बंगाल के राज्यपाल CV आनंद बोस ने कहा कि मीडिया को दबाने का कोई भी कदम बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्रदर्शनकारी बुद्धिजीवियों ने कहा कि अभी ये भूल जाने का वक्त है कि कौन किस खेमे में खड़ा है, सबको संदेशखाली पर बोलना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई गुंडा किसी घर की सुंदर स्त्रियों को उठाए और पुलिस उसके साथ मिली हो, ये आतंक हमने सिर्फ आज तक फिल्मों में देखा है। उधर सन्तु पान को कस्टडी में भेज दिया गया है। बंगलुरु में भी इसे लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ। ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स’ ने भी इसकी निंदा करते हुए कहा है कि ये गलत है।

संगठन ने ऐलान किया है कि रविवार (21 फरवरी, 2024) को न सिर्फ जंतर-मंतर से लेकर बंग भवन तक हेली रोड के माध्यम से मार्च निकाला जाएगा, बल्कि भारी विरोध प्रदर्शन भी होगा। ‘दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (DJA)’ भी पूरी तरह इसमें NUJI के साथ है। दोनों संगठनों ने कहा है कि मीडिया को दबा कर पश्चिम बंगाल में अघोषित आपातकाल लगाया जा रहा है। NUJI की 3 सदस्यीय जाँच कमिटी पश्चिम बंगाल जाएगी और इस प्रकरण पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी।

‘रात को शराब पीकर नाचते हैं काशी के युवक’: राहुल गाँधी के आपत्तिजनक बयान पर बोले लोग – माफ़ी माँगो

कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने काशी के युवाओं पर आपत्तिजनक बयान दिया है। उन्होंने खुद को चश्मदीद बताते हुए दावा किया है कि काशी के युवा रात में बाजा बजा कर सड़क पर शराब पी कर दिखते हैं। यह बयान उन्होंने सोमवार (19 फरवरी, 2024) को रायबरेली में दिया था। राहुल गाँधी के इस बयान की काफी आलोचना हो रही है। सोशल मीडिया पर उनके माफ़ी की भी माँग उठी है। हालाँकि, अभी तक राहुल गाँधी ने अपने इस बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

दरअसल 2024 लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे राहुल गाँधी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ ले कर भारत के विभिन्न हिस्सों में घूम रहे हैं। इसी माह उनकी यात्रा उत्तर प्रदेश में प्रवेश की। पिछले हफ्ते राहुल गाँधी ने वाराणसी में रोड शो भी किया था। इसके बाद राहुल गाँधी की यात्रा का अगला पड़ाव अमेठी और रायबरेली में हुआ। 19 फरवरी को उन्होंने रायबरेली में आयोजित रोड शो में वाराणसी के बारे में अपना अनुभव बताया। उनके भाषण का 30 सेकेंड का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

अपने बयान में राहुल गाँधी ने कहा, “वाराणसी में देखा मैंने। रात को बाजा बज रहा है, बाजा बज रहा है। वहाँ पर शराब पिए, शराब पिए सड़क पर लेटते हुए। बाजा बज रहा है। UP का भविष्य रात को शराब पिए नाच रहा है, डाँस कर रहा है। नशे में।” इसी बीच राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को ‘ठहर जा-ठहर जा’ कह सम्बोधित करते रहे। सोशल मीडिया पर वायरल होने के साथ ही राहुल गाँधी के इस बयान का विरोध होना शुरू हो गया है। हिन्दू महासभा पदाधिकारी ने राहुल गाँधी की बौखलाहट की वजह उनकी न्याय यात्रा में लोगों का न आना बताया है।

राहुल गाँधी का जो वीडियो शेयर हो रहा है उसमें कैप्शन के तौर पर उन्हें चुनावी हिन्दू बताया गया है। इसी बयान पर नाराज़गी जताते हुए मुक्तानंद गिरी ने लिखा, “राहुल गाँधी ने कहा था लोग मन्दिर में लड़की छेड़ने जाते है। आज काशी जी को कहा शराबियों का अड्डा। ऐसी भाषा सिख, मुस्लिम ईसाई के विषय में क्यों नहीं बोलता।”

चित्र साभार: मुक्तानंद गिरी का ‘X’ हैंडल

प्रशांत कुमार शुक्ला का कहना है कि जब काशी का विकास देख कर राहुल गाँधी की आँखें चौंधिया गईं तब वो वहाँ के युवाओं को अनाप-शनाप बोलने लगे।

चित्र साभार: प्रशांत कुमार शुक्ला का ‘X’ हैंडल

इसके अलावा सोशल मीडिया पर कई नेटीजेंस ने राहुल गाँधी द्वारा काशी के युवाओं पर दिए बयान को आपत्तिजनक और अशोभनीय माना है। उनसे माफ़ी की भी माँग की जा रही है। फ़िलहाल इस बयान पर राहुल गाँधी या उनकी पार्टी की तरफ से किसी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है।

कंटेनर में हो रही थी गोतस्करी, रोकने पहुँचे बजरंग दल कार्यकर्ताओं पर धारदार हथियारों से हमला: 2 दर्जन हमलावरों की तलाश में MP पुलिस की ताबड़तोड़ दबिश

मध्य प्रदेश के दमोह में गोतस्करों द्वारा बजरंग दल कार्यकर्ताओं पर हमले की खबर है। आरोप है कि यह हमला तब हुआ जब बजरंग दल के कार्यकर्ता उस कंटेनर को बरामद करने गए थे जिसमें उन्हें तस्करी की आशंका थी। हमले में हिन्दू संगठन के 3 कार्यकर्ता घायल हो गए। इस मामले की जानकारी होने पर हिन्दू संगठन के कार्यकर्ताओं ने थाने पर हंगामा किया। 20 से 25 आरोपितों पर केस दर्ज हुआ है जिनकी तलाश में पुलिस टीमें दबिश दे रहीं हैं। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। घटना मंगलवार (19 फरवरी, 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला दमोह जिले के जबलपुर नाका क्षेत्र का है। 19 फरवरी को बजरंग दल कार्यकर्ताओं को सूचना मिली थी कि न्यू दमोह कॉलोनी में गोवंश की तस्करी की जा रही है। यह तस्करी कंटेनरों में होने की सूचना थी जिसे सुन कर बजरंग दल के कार्यकर्ता वहाँ पहुँचे थे। बताया जा रहा है कि अचानक ही मुस्लिम समुदाय के लगभग 2 दर्जन लोग वहाँ पहुँच गए। उन्होंने बजरंग दल के 3 सदस्यों को बुरी तरह से मारा-पीटा। आरोप है कि हमलावरों के पास लाठी-डंडों के अलावा धारदार हथियार भी थे। हिन्दू संगठन के घायल कार्यकर्ताओं को अस्पताल ले जाया गया।

इस बीच साथियों पर हमले की सूचना मिलते ही अन्य हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ता भड़क उठे। कुछ ही देर में जबलपुर नाका पुलिस चौकी के आगे सैकड़ों लोगों का जमावड़ा लग गया। इस दौरान नारेबाजी हुई और पुलिस पर कार्रवाई में सुस्ती दिखाने का आरोप लगा। कुछ सदस्यों ने सड़क भी जाम कर दी। मौके पर पुलिस के सीनियर अधिकारी पहुँचे। उन्होंने लोगों को समझाने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारी हमलावरों पर कड़ी कार्रवाई की माँग को ले कर अड़े रहे। काफी देर बाद हंगामा जैसे-तैसे शाँत हुआ।

दमोह के एडिशनल एसपी ने बताया कि घायलों से तहरीर ले कर मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। लगभग 20 से 25 आरोपितों को नामजद कर के कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। उन्होंने कहा कि मामले की बारीकी से जाँच करवाई जा रही है। इस बीच केस दर्ज होने की सूचना मिलते ही हमलावर फरार हो गए हैं। पुलिस टीमों का गठन कर के उनकी तलाश की जा रही है। मौके से कंटेनर भी बरामद कर लिया गया है। हिन्दू संगठनों से जुड़े सदस्यों का आरोप है कि आरोपित पहले भी गौतस्करी और अन्य गैरकानूनी कामों में संलिप्त रहे हैं।

‘पीड़ित को सुने बिना SC/ST केस में नहीं दी जा सकती है बेल’: दिल्ली हाईकोर्ट ने रद्द किया निचली अदालत का फैसला

दिल्ली उच्च न्यायालय ने SC/ST एक्ट को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत पीड़ित को सुने बिना आरोपित को जमानत नहीं दी जा सकती है। हाईकोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता को नोटिस दिए बिना आरोपित को बेल नहीं दी जा सकती। जस्टिस नवीन चावला ने बुधवार (14 फरवरी, 2024) को एक मामले की सुनवाई करते हुए ये आदेश दिया।

असल में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376 (बलात्कार), 354B (सार्वजनिक रूप से किसी महिला को नग्न करना) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत एक शख्स के ऊपर मामला दर्ज किया गया था। साथ ही इसमें SC/ST एक्ट की धारा 3(1)(w)(i) (किसी दलित/जनजातीय समाज की महिला को गलत तरीके से छूना) और 3(2)(v) (दलित/जनजातीय समाज की महिला का अपमान करना) भी लगाई गई थी। शिकायतकर्ता महिला का कहना था कि उसे नोटिस दिए बिना निचली अदालत ने आदेश पारित कर दिया।

अदालत ने कहा कि जज को पहले उक्त महिला को सुनना चाहिए, उसके बाद जमानत को लेकर कोई फैसला सुनना चाहिए। दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपित की जमानत रद्द करते हुए वापस निचली अदालत में मामले को भेज दिया। हालाँकि, ये भी कहा गया कि आरोपित को अगले 15 दिनों में हिरासत में न लिया जाए, या फिर जब तक स्पेशल जज कोई अगला आदेश नहीं दे देते। पीड़िता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता त्रिदीप पैस, मिहिर सैमसन, असवारी सोढ़ी और गार्गी सेठी पेश हुईं।

वहीं सरकार की तरफ से इस मामले में एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर (APP) शोएब हैदर ने प्रतिनिधित्व किया। वहीं आरोपित की तरफ से अदालत में सीनियर एडवोकेट कर्मण्य सिंह चौधरी, ऋतिक और लविश ने पैरवी की। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST एक्ट को खत्म कर दिया था, लेकिन भारी विरोध के बाद इसे केंद्र सरकार को वापस लाना पड़ा था। कई बार एससी-एसटी एक्ट के दुरूपयोग की खबरें भी आती रही हैं। कई संगठन इसके खिलाफ अब भी मुखर हैं।

मिशनरी स्कूल में हिन्दू धर्म का अपमान, जिस छात्रा ने की शिकायत उसे मिल रही हत्या की धमकियाँ: सोशल मीडिया पर वायरल कर रहे तस्वीरें, अरब मुल्कों से भी

कर्नाटक के मंगलुरु में एक मिशनरी स्कूल के अंदर हिन्दू देवी-देवताओं के अपमान पर उठा विवाद शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। क्लास 7 में पढ़ने वाली जिस छात्रा ने इस अपमान के खिलाफ आवाज उठाई थी, उसके परिजनों को अब धमकियाँ मिल रहीं हैं। छात्रा के घर वालों के न सिर्फ सोशल मीडिया पर फोटो वायरल किए जा रहे हैं बल्कि कई विदेशी नंबरों से उन्हें धमकाया भी जा रहा है। मंगलवार (20 फरवरी, 2024) को इस पूरे मामले की शिकायत पुलिस से की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीड़िता छात्रा की माँ भी टीचर हैं। उन्होंने मंगलवार (20 फरवरी, 2024) को मंगलुरु के कंकनाड़ी पुलिस स्टेशन में शिकायत दी है। शिकायत में बताया गया है कि उनके सोशल मीडिया हैंडल से परिवार वालों की तमाम तस्वीरें उठा ली गईं हैं। इन तस्वीरों को अलग-अलग कैप्शन दे कर वायरल किया जा रहा है। इसी के साथ खाड़ी देशों से पीड़िता के परिवार वालों को फोन पर धमकियाँ दी जा रही हैं। ये धमकियाँ सऊदी अरब, कुवैत और कतर आदि देशों से आ रहीं हैं। धमकी देने वाले पीड़िता के परिजनों को ही पूरे विवाद की वजह बताते हुए गंभीर परिजन भुगतने की चेतावनी दे रहे हैं।

क्या था पूरा मामला

ये मामला मेंगलुरु स्थित सेंट गेरोसा इंग्लिश एचआर प्राइमरी स्कूल का है। आरोप है कि बीते गुरुवार (8 फरवरी, 2024) को सातवीं कक्षा के बच्चों को पढ़ाते हुए एक टीचर ने रामायण और महाभारत को काल्पनिक बताया। क्लास में ही गोधरा काण्ड और बिलकिस बानो जैसे मुद्दों को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ भी अशोभनीय बातें की गईं। इसका खुलासा होने के बाद स्थानीय भाजपा विधायक भरत शेट्टी की अगुवाई में स्कूल के आगे प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारियों ने स्कूल में बच्चों के ब्रेनवॉश की साजिश का आरोप लगाया। साथ ही ऐसी बातें हर साल होने का भी दावा किया गया। 11 फरवरी 2024 को हुए इस प्रदर्शन के दौरान भाजपा MLA भरत शेट्टी ने हिंदू परिजनों से ‘ईसाई मिशनरियों द्वारा संचालित स्कूलों में अपने बच्चों को दाखिला देने पर पुनर्विचार करने’ की भी अपील की। प्रदर्शन में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्या भी शामिल रहे। बाद में पुलिस ने भाजपा MLA भी पर केस दर्ज किया था।

होनी थी शादी, स्माइली फेस के लिए युवक करवा रहा था सर्जरी, हो गई मौत: तेलंगाना की घटना, परिजन बोले- ज्यादा एनेस्थीसिया देने से मौत

तेलंगाना के हैदराबाद में एक युवक ने अपनी हँसी बढ़ाने के लिए डॉक्टरों से ऑपरेशन कराया और बाद में उसकी मौत हो गई। युवक की जल्द ही शादी होने वाली थी। यह ऑपरेशन उसने हैदराबाद के एक नामी क्लीनिक में करवाया था। मृतक के परिजनों ने डॉक्टरों पर उसे बेहोशी की दवा की ओवरडोज देने का आरोप लगाया है।

जानकारी के अनुसार, 28 वर्षीय लक्ष्मी नारायण विन्जम ने हैदराबाद के जुबली हिल्स में स्थित FMS डेंटल क्लीनिक में अपना स्माइल डिजाइनिंग (हँसी बढ़ाना) ऑपरेशन करवाया था। यह ऑपरेशन 16 फरवरी को हुआ था। विन्जम के पिता ने बताया की उनके बेटे की मौत ऑपरेशन के दौरान हो गई थी।

उन्होंने बताया कि उन्हें बीच ऑपरेशन में ही उन्हें बुलाया गया और जब वह क्लीनिक पहुँचे तो डॉक्टरों ने उनके बेटे को मृत घोषित कर दिया। पिता के अनुसार, उनके बेटे ने उन्हें इस ऑपरेशन के विषय में उन्हें कुछ नहीं बताया था। उन्होंने कहा कि उनका बेटा पूरी तरीके से स्वस्थ था और उसकी मौत कुछ गड़बड़ी के कारण हुई है।

विन्जम के विषय में यह भी जानकारी सामने आई है कि उसकी पिछले ही सप्ताह सगाई हुई थी और वह अगले माह शादी के बंधन में बंधने वाला था। वह इसकी तैयारियों में जुटा हुआ था। लेकिन, यह ऑपरेशन उसके लिए प्राणघातक साबित हुआ।

इस मामले पर पुलिस ने बताया, “विन्जम को लगभग 4:30 बजे ऑपरेशन थिएटर के भीतर ले जाया गया था, उनका ऑपरेशन 2 घंटे तक चला, इसके बाद उनके घरवालों को बुलाया गया और उन्हें अपोलो अस्पताल ले जाया गया जहाँ पहुँचने से पहले ही उनकी मौत हो गई थी।”

मृतक विन्जम के पिता ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे को ऑपरेशन के लिए जरूरत से अधिक एनेस्थीसिया दे दी गई। इसके कारण ही उसकी मौत हो गई। उन्होंने इस मामले में पुलिस से शिकायत भी दर्ज करवाई है। पुलिस इस मामले में अस्पताल का रिकॉर्ड चेक करके जाँच कर रही है।

महाराष्ट्र में मराठा को 10% आरक्षण: विधानसभा में सर्व-सम्मति से बिल पास, सपा के MLA बोले – मुस्लिमों को भी 5% कोटा दो

महाराष्ट्र विधानसभा में मंगलवार (20 फरवरी, 2024) को मराठा आरक्षण बिल एकमत से पारित हो गया। इसके अंतर्गत मराठों को शिक्षा और नौकरियों में 10% का आरक्षण दिया जा सकेगा। मराठा आरक्षण विधेयक को महाराष्ट्र विधानसभा ने एकमत से पारित किया है। यह विधेयक महाराष्ट्र की भाजपा-शिवसेना-राकांपा की गठबंधन वाली सरकार लेकर आई थी।

मराठों को आरक्षण देने के लिए लाया गया यह विधेयक विधानसभा में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पेश किया। इसके लिए महाराष्ट्र विधानसभा का विशेष एकदिवसीय सत्र बुलाया गया था। यहाँ इसे सभी पार्टियों ने समर्थन दिया और यह एकमत से पारित हो गया। मराठा आरक्षण का यह विधेयक महाराष्ट्र पिछड़ा वर्ग आयोग की एक रिपोर्ट के आधार पर लाया गया था। यह रिपोर्ट रिटायर्ड जस्टिस सुनील शुक्रे ने राज्य सरकार को बीते सप्ताह सौंपी थी। आरक्षण विधेयक पारित होने पर इसे सीएम शिंदे ने ऐतिहासिक मौक़ा बताया।

सीएम शिंदे ने सी मौके पर कहा, “मैं एक सामान्य मराठा किसान का बेटा हूँ, मैं उनका दर्द समझता हूँ। हमने इसकी कानूनी बारीकियों पर काम कर लिया है और इससे अन्य किसी भी कोटा पर फर्क नहीं पड़ेगा।” उन्होंने कोर्ट के सामने इसके कानूनी रूप से सफल रहने की आशा भी जताई है।

महाराष्ट्र में तीसरी बार ऐसा हो रहा है कि मराठा आरक्षण के लिए विधेयक लाया गया है। इससे पहले वर्ष 2014 में पृथ्वीराज चव्हाण और 2018 में तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस की सरकार भी मराठा आरक्षण के लिए प्रयास कर चुकी हैं। 2014 में कॉन्ग्रेस की सरकार द्वारा लाया गया विधेयक अध्यादेश ही था, इस पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने रोक लगा दी थी। वहीं 2018 में इसको लेकर एक गंभीर प्रयास किया गया था। फड़णवीस सरकार ने मराठों को 16% आरक्षण दिया था जिसको लेकर कानूनी समस्याएँ आई थीं।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस आरक्षण को बरकार रखा था लेकिन इसे शिक्षा में घटा कर 12% और नौकरियों में 13% कर दिया था। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुँचा था जहाँ मराठा आरक्षण को 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसके पीछे आरक्षण पर 50% सीमा का कारण बताया था। शिंदे सरकार ने पुनर्विचार याचिका भी डाली थी लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने वह भी खारिज कर दी थी। मराठा आरक्षण को लेकर हाल ही में काफी प्रदर्शन भी हुए हैं।

अब महाराष्ट्र सरकार को कोर्ट के सामने इस आरक्षण को सही साबित करना होगा, उसके बाद ही इसका लाभ मराठों को मिलेगा। मराठा आरक्षण आंदोलन का नेतृत्व कर रहे एक्टिविस्ट मनोज जारांगे ने इसका स्वागत किया है लेकिन इसमें कुछ और माँग भी जोड़ दी हैं। अब देखना होगा सरकार इस पर क्या प्रतिक्रिया देती है।

मराठा आरक्षण विधेयक आज विधानसभा में पारित होने के समय मुस्लिम नेताओं ने अलग राग भी अलापा। यहाँ सपा नेता अबू आजमी और रईस शेख ने माँग की कि मुस्लिमों को भी 5% आरक्षण दिया जाए, इसके लिए इन्होंने एक बैनर लेकर विधानसभा के बाहर प्रदर्शन किया। उन्होंने मुस्लिमों को आरक्षण ना देना अन्याय बताया है। हालाँकि, शिंदे सरकार ने इस पर कोई भी प्रतिक्रिया या प्रावधान को लेकर बात नहीं की।