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बीहड़ की जमीन पर किया कब्जा, फिर शुरू की बीफ मंडी: अवैध निर्माणों पर चला बुलडोजर, 70 बीघा जमीन से हटाया कब्जा; रोज काटते थे 20 गाय

राजस्थान के अलवर में बीफ मंडी के खुलासे के बाद प्रशासन एक्शन के मोड में है। यह मंडी किशनगढ़बास में रूंध गिदावड़ा के बीहड़ों में चल रही थी। करीब 20 गाय रोजाना खुलेआम काटी जाती थी। 50 गाँवों और लगभग 300 दुकानों में गोमांस की सप्लाई होती थी।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार बीहड़ की लगभग 500 बीघे जमीन पर पहले कब्जा किया गया और फिर बीफ मंडी शुरू की गई। कब्जे की 70 बीघे जमीन पर गेहूँ और सरसों की फसल लगाई गई थी। अवैध निर्माण भी थे। सोमवार (19 फरवरी 2024) को प्रशासन ने फसल रौंदकर इस जमीन को मुक्त कराया। साथ ही गोकशी से जुड़े लोगों के करीब दर्जनभर निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई की गई।

खैरथल-तिजारा के कार्यवाहक एसपी अनिल बेनीवाल के हवाले से बताया गया है कि पुलिस काे बीहड़ में गोकशी के लिए लाई गई एक दर्जन गाय मिली हैं। इन्हें बचाकर गोशाला भेजा गया है। 18 फरवरी को बीहड़ के आसपास के गाँवों में दबिश के बाद 35 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए करीब 300 पुलिसकर्मियों की टीम लगाई गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सोमवार को राजस्थान के वनमंत्री संजय शर्मा ने अलवर के बास थाना क्षेत्र में उन बीहड़ों का दौरा किया, जहाँ गौमांस की मंडी चलने की शिकायत मिली थी। इस दौरान रुंध गिदावड़ा गाँव में उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को आड़े हाथों लिया। गोतस्करी में शामिल लोगों को चोरी की बिजली किसके माध्यम से मिली, इसके जाँच के उन्होंने आदेश दिए हैं। वहीं SDM को फटकार लगाते हुए कब्ज़ा की गई सरकारी भूमि को भी फ़ौरन मुक्त कराने का आदेश दिया है।

इस बीच पुलिस ने भी अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। बीफ मंडी को लेकर 25 लोगों को नामजद किया गया है। केस दर्ज होने के बाद से ये सभी फरार हैं। आरोपितों में कई ऐसे भी हैं जिन पर पहले से ही गोकशी और गोतस्करी जैसे मामले दर्ज हैं। मामले का खुलासा होने के बाद पूरे बास थाना को लाइन हाजिर कर दिया गया था। 4 पुलिसकर्मी सस्पेंड भी किए गए हैं।

दैनिक भास्कर ने रविवार (18 फरवरी 2024) को अलवर के बास थाना क्षेत्र में चल रही बीफ मंडी का खुलासा किया था। खुलासे में ऐसे वीडियो सामने आए थे जिसमें बिरसंगपुर के पास रुंध गिदवडा के बीहड़ों में गायों को बेरहमी से मार कर उनकी खाल उतारी जा रही थी। व्हाट्सएप पर मांस के ऑर्डर लेकर घर तक सप्लाई की जाती थी। इस मंडी में सैकड़ों की तादाद में खरीदार भी आते थे।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया था कि बीफ मंडी की जानकारी होने के बाद भी पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती। खुलासे के बाद जयपुर रेंज के IG उमेश चंद्र दत्त के नेतृत्व में बास इलाके के उन बीहड़ों में छापेमारी की गई, जहाँ गोकशी होने का दावा किया गया था। सूचना सही पाई गई। पुलिस को देखकर गोतस्कर अपने वाहन छोड़ फरार हो गए थे।

अब तक क्यों नहीं किया शेख शाहजहाँ को गिरफ्तार: संदेशखाली पर कलकत्ता HC ने लगाई ममता सरकार को फटकार, TMC के गुंडों पर था यौन शोषण का आरोप

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में पीड़िताओं ने अपने बयान में तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता शेख शाहजहाँ का नाम आरोपितों के तौर पर स्पष्ट ढंग से लिया है, लेकिन फिर भी वह आजाद है। ऐसे में कलकत्ता हाई कोर्ट ने बंगाल सरकार को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि शाहजहाँ को इस तरह राज्य से बढ़ावा नहीं मिल सकता। प्रथम दृष्ट्या में पता चलता है कि उसने लोगों का नुकसान किया है।

पीठ ने कहा, “यह चौंकाने वाला है कि समस्या की जड़ वाला व्यक्ति अभी तक पकड़ा नहीं जा सका है और वो फरार है। अगर उसके खिलाफ हजारों झूठे आरोप हैं, लेकिन इनमें अगर एक भी आरोप सही है तो आपको उसकी जाँच करनी चाहिए। आप बेवजह लोगों को परेशान कर रहे हैं।”

कोर्ट ने कहा- “राज्य में कानून व्यवस्था की समस्या तो है। वह जनप्रतिनिधि है। वह कानून का अपमान नहीं कर सकता। देखते हैं कि वो कोर्ट के आगे पेश होगा या नहीं।” कोर्ट ने कहा कि स्वत: संज्ञान मामले में हम उन्हें सरेंडर करने को कहेंगे।”

अदालत ने कहा- “पूरे 18 दिन हो गए हैं। एक आदमी जो पूरी समस्या की जड़ है वो अब भी फरार है। हमें ये भी नहीं पता कि उसे संरक्षण मिला है या नहीं लेकिन उसे नहीं पकड़ा जा सका है ये पक्का है।”

बता दें कि कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक ओर जहाँ टीएमसी नेता की गिरफ्तारी न करने पर बंगाल सरकार को फटकारा है, वहीं कोर्ट की डिविजन बेंच ने आज (20 फरवरी 2024) बंगाल के प्रतिपक्ष नेता शुभेंदु अधिकारी को हिंसा प्रभावित संदेशखाली में जाने की इजाजत दी, जिसके बाद बीजेपी नेता संदेशखाली पहुँचे। अब वह वहाँ पीड़ितों से मुलाकात करेंगे।

लाल मोहम्मद से शाहीना बेगम तक, सब हुए PM मोदी के कायल, जम्मू को PM मोदी ने दी ₹32000 करोड़ की सौगात, बोले – ‘आर्टिकल 370’ फिल्म से सामने आएगी सच्चाई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (20 फरवरी, 2024) को जम्मू का दौरा किया। उन्होंने न सिर्फ जन-कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों से बातचीत की, बल्कि मौलाना आज़ाद मैदान में एक विशाल रैली को भी संबोधित किया। उन्होंने इस दौरान 32,000 करोड़ रुपए से भी अधिक की विकास परियोजनाओं की सौगात प्रदेश को दी। आवास योजना के लाभार्थी पुँछ के लाल मोहम्मद से लेकर सेल्फ-हेल्प ग्रुप की लाभार्थी बाँदीपोरा की शाहीना बेगम तक, सबने एक सुर से पीएम मोदी की तारीफ़ की।

इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि जब वो लखपति दीदी की बात करते हैं, तो दिल्ली के AC कमरों में बैठकर जो दुनियाभर की गंध उछालते रहते हैं, उनके गले से उतरता ही नहीं हैं कि कोई गाँव में लखपति दीदी बन सकता है। लाभार्थियों से बात करने के बाद उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों को अब समझ आएगा कि ये हो सकता है। पीएम मोदी ने कहा कि अब हमने विकसित जम्मू-कश्मीर का संकल्प लिया है। उन्होंने वहाँ की जनता पर विश्वास जताते हुए कहा कि हम सब विकसित जम्मू-कश्मीर बनाकर रहेंगे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 70-70 साल से अधूरे आपके सपने आने वाले कुछ ही वर्षों में मोदी पूरे करके देगा। पीएम मोदी ने याद किया कि एक वो दिन भी थे, जब जम्मू-कश्मीर से सिर्फ निराशा की खबरें आती थीं – बम, बंदूक, अपहरण, अलगाव… ऐसी ही बातें जम्मू-कश्मीर का दुर्भाग्य बना दी गई थीं, लेकिन आज जम्मू-कश्मीर विकसित होने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। बकौल पीएम मोदी, जम्मू-कश्मीर बहुत दशकों तक परिवारवाद की राजनीति का शिकार रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि परिवारवाद की राजनीति करने वालों ने हमेशा सिर्फ अपना स्वार्थ देखा है, आपके हितों की चिंता नहीं की है। उन्होंने कहा कि परिवारवाद की राजनीति का सबसे ज्यादा अगर कोई नुकसान उठाता है, तो हमारे युवा उठाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जो सरकारें सिर्फ एक परिवार को आगे बढ़ाने में जुटी रहती हैं, वो सरकारें अपने राज्य के दूसरे युवाओं का भविष्य ताक पर रख देती हैं और ऐसी परिवारवादी सरकारें युवाओं के लिए योजनाएँ बनाने पर भी प्राथमिकता नहीं देती।

पीएम मोदी ने कहा, “सिर्फ अपने परिवार के बारे में सोचने वाले लोग कभी आपके परिवार की चिंता नहीं करेंगे। मुझे खुशी है कि जम्मू-कश्मीर को इस परिवार राजनीति से मुक्ति मिल रही है। नया भारत अपनी वर्तमान पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा देने के लिए ज्यादा से ज्यादा खर्च कर रहा है। बीते 10 साल में देश में रिकॉर्ड संख्या में स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटीज का निर्माण हुआ है। आज हम एक नया जम्मू-कश्मीर बनते हुए देख रहे हैं। प्रदेश के विकास में सबसे बड़ी दीवार अनुच्छेद-370 की थी, इस दीवार को भाजपा सरकार ने हटा दिया है। अब जम्मू कश्मीर संतुलित विकास की ओर बढ़ रहा है।”

पीएम मोदी ने इस दौरान यामी गौतम की आने वाली फिल्म ‘आर्टिकल 370’ का भी जिक्र किया और जम्मू की जनता से कहा कि पूरे देश में आपकी जय जयकार होने वाली है। उन्होंने कहा कि ये अच्छा है, लोगों को सही जानकारी मिलेगी। प्रधानमंत्री ने विश्वास दिलाया कि अब जम्मू-कश्मीर का कोई भी इलाका पीछे नहीं रहेगा, सब मिलकर आगे बढ़ेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग दशकों तक अभाव में जी रहे थे, उन्हें भी आज सरकार के होने का एहसास हुआ है।

पीएम मोदी ने कहा, “भारत के संविधान में जिस सामाजिक न्याय का भरोसा दिया गया है, वो भरोसा पहली बार जम्मू-कश्मीर के सामान्य जन को भी मिला है। हमारे शरणार्थी परिवार हों, वाल्मीकि समुदाय हो, सफाई कर्मचारी हों, उनको लोकतांत्रिक हक मिला है। आज जब दुनिया, जम्मू-कश्मीर में G-20 का आयोजन होते देखती है, तो इसकी गूँज बहुत दूर तक पहुँचती है। पूरी दुनिया, जम्मू-कश्मीर की सुंदरता, यहाँ की परंपरा-संस्कृति और आप सभी के स्वागत से बहुत प्रभावित हुई है। आज हर कोई जम्मू-कश्मीर आने के लिए तत्पर है।”

मैं भी बन सकता था विराट-रोहित पर… ममता के मंत्री ने MSD से पूछा सवाल, आखिरी घरेलू मैच के बाद मनोज तिवारी ने धोनी को बनाया ‘विलेन’

पूर्व क्रिकेटर मनोज तिवारी ने कहा है कि अच्छा प्रदर्शन करने के बाद भी उन्हें भारतीय टीम में उचित स्थान नहीं दिया गया। उन्होंने इसके लिए टीम प्रबन्धन और तत्कालीन कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी को जिम्मेदार ठहराया है और उनसे सवाल पूछने की बात कही है। तिवारी ने हाल ही में रणजी ट्रॉफी की आलोचना की थी, जिसके कारण उन्हें BCCI का जुर्माना झेलना पड़ा है।

मनोज तिवारी ने हाल ही में अपना अंतिम घरेलू मैच खेला। इसके बाद उन्होंने पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने इसी दौरान यह बात कही। जब उनसे भारतीय टीम में मौके ना मिलने की बात पूछी गई तो उन्होंने कहा, “जब भी मौका मिलेगा, मैं धोनी से पूछना चाहूँगा कि मुझे अंतिम 11 में क्यों नहीं लिया गया जबकि मैंने शतक बनाया था? मुझमें भी विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसा प्रदर्शन करने की क्षमता थी लेकिन मैं नहीं बन सका। आज जब मैं खिलाड़ियों को मौके पाते हुए देखता हूँ तो मुझे दुख होता है।”

मनोज ने अपने प्रदर्शन को लेकर भी इस दौरान बातचीत की। उन्होंने कहा कि मुझे भारतीय टीम से टेस्ट खेलने का मौक़ा नहीं दिया गया जबकि तब प्रथम श्रेणी में मेरा औसत 65 का था। उन्होंने कहा कि उनके अच्छे प्रदर्शन के बावजूद उनकी जगह युवराज सिंह को टीम में लिया गया, इसके बाद जब उन्होंने शतक बनाया तब भी अगले 14 मैच तक उन्हें जगह नहीं दी गई। मनोज ने कहा कि उन्हें लगातार 14 मैच के लिए टीम में नहीं लिया गया जिससे उनका आत्मविश्वास टूट गया।

गौरतलब है कि 38 वर्षीय तिवारी ने बंगाल से आते हैं। वह बंगाल के लिए अब तक घरेलू क्रिकेट में खेलते रहे हैं। उनका अंतरराष्ट्रीय टीम में चयन 2008 में हुआ था। उन्हें 12 एकदिवसीय जबकि 3 टी20 मैच खेलने का मौक़ा BCCI द्वारा दिया गया था। उन्हें टेस्ट टीम में कभी जगह नहीं दी गई। हालाँकि, प्रथम श्रेणी के क्रिकेट में उन्होंने 148 मैच खेले हैं। इसमें उनके 10,000 से अधिक रन हैं। वह बंगाल टीम के कप्तान भी रहे हैं। उन्होंने हाल ही में क्रिकेट से संन्यास लिया है। उन्होंने अपना अंतिम मैच 2015 में खेला था।

मनोज तिवारी का धोनी को लेकर यह बयान सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। गौरतलब है कि हाल ही में मनोज तिवारी पर BCCI ने जुर्माना भी लगाया था। उन पर भारत में सबसे प्रतिष्ठित घरेलू टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी की आलोचना करने को लेकर यह जुर्माना लगाया गया था। दरअसल, मनोज तिवारी ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट करके कहा था कि रणजी ट्रॉफी में काफी गड़बड़ियाँ हैं और अगले साल से इसे बंद कर देना चाहिए। इसको लेकर उन पर मैच शुल्क का 20% जुर्माना BCCI ने लगाया था।

उन्होंने हाल ही में नए खिलाडियों के आईपीएल पर अधिक ध्यान देने और रणजी ना खेलने को लेकर भी प्रश्न उठाए थे। मनोज तिवारी वर्तमान में बंगाल की ममता सरकार में खेल और युवा मामलों के राज्य मंत्री हैं। वह हावड़ा की शिबपुरी सीट से 2021 में विधायक चुने गए थे।

कोविड काल में भी करोड़ों कूट रहे थे राजदीप सरदेसाई, बीवी सागरिका घोष के हलफनामे से खुलासा: घर से लेकर निवेश तक की पूरी डिटेल

पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) द्वारा पत्रकार सागरिका घोष को राज्यसभा का टिकट दिए जाने के बाद सागरिका ने एक हलफनामा जमा कराया था जिसमें उनकी संपत्ति की जानकारी थी। अब इस हलफनामे की डिटेल सामने आई है। इसमें सागरिका घोष ने जानकारी दी है कि वह कोविड से पहले 2019 में 40 लाख रुपए कमा रही थीं, वहीं 2021 के कोविड में उनकी कमाई 10 लाख रुपए हो गई और फिर 2023 में 17 लाख रुपए हुई।

तस्वीर साभार: सागरिका घोष का हलफनामा

वहीं उनके पति राजदीप की कमाई का खुलासा भी इस हलफनामे से हुआ। इसमें बताया गया कि राजदीप 2019 में 4.55 करोड़ रुपए कमा रहे थे जबकि कोविड के दौरान उनकी कमाई घटकर 2.83 करोड़ रुपए हो गई और 2023 में वह दोबारा 3.54 करोड़ रुपए पहुँच गई।

तस्वीर साभार: सागरिका घोष का हलफनामा

हलफनामे में खुलासा हुआ कि राजदीप सरदेसाई ने 25 करोड़ रुपए म्यूच्युल फंड, स्टॉक्स और बॉन्ड में लगा रखे हैं।

तस्वीर साभार: सागरिका घोष का हलफनामा

इसके बाद जानकारी दी गई है कि राजदीप सरदेसाई और सागरिका ने मिलकर 2008 में एक घर खरीदा था। तब वह करीब 25 करोड़ रुपए का था और अब उसकी कीमत 49 करोड़ रुपए हो गई है।

तस्वीर साभार: सागरिका घोष का हलफनामा

गौर देने वाली बात है कि कोविड के दौरान या उससे पहले भी मीडियाकर्मियों की नौकरी पर खतरा हमेशा से बना देखा गया है। ऐसा हमेशा से होता आया है कि मीडिया को सालोंसाल देने वाले टेक्निकल कर्मचारियों की छँटनी कर दी जाती है जबकि कुछ बड़े पत्रकार अपनी करोड़ों की कमाई का आनंद लेते हैं और आवाज तक नहीं उठाते।

2017 में एनडीटीवी ने जब अपने 70 कर्मचारियों को निकाला था उस समय शायद रवीश जैसे रवीश भी इतना कमा रहे थे। इसी तरह 2013 की रिपोर्टों को यदि देखें तो पता चलेगा कि टीवी18 ब्रॉडकास्ट लिमिटेड, नेटवर्क18 लिमिटेड की शाखा, जो सीएनबीसी-टीवी18, सीएनबीसी आवाज, सीएनएन-आईबीएन, आईबीएन7 और आईबीएन लोकमत चैनल चलाती है, उसने अपने विभिन्न विभागों के 300 कर्मचारियों – को बर्खास्त कर दिया था। खबर थी कि उस समय कर्मचारियों को बस अंदर बुलाया गया और उनके पत्र सौंप दिए गए थे, उन्हें दूसरी नौकरी ढूँढने तक का समय नहीं दिया गया था।

कोविड के सालों में ये काम कई मीडिया हाउसों ने किया। टाइम्स ऑफ इंडिया, इंडियन एक्सप्रेस, क्विंट जैसे संस्थान भी ऐसा करने के काऱण चर्चा में आए थे जबकि उनके बड़े पत्रकारों पर कोई असर नहीं देखने को मिला था।

बता दें कि सागरिका घोष ने तृणमूल कॉन्ग्रेस पार्टी का हाथ ऐसे समय पर थामा है जब संदेशखाली का मुद्दा गरमाया हुआ है। उन्होंने न इस मुद्दे पर महिला होने के नाते अपनी बात रखी है न ही पत्रकार होने के नाते। उलटा उन्होंने अपने टीएमसी ज्वाइन करने को यह कहकर बचाव किया कि ममता बनर्जी लोकतांत्रिक मूल्यों का चेहरा हैं।

हल्द्वानी में बम के लिए दंगाइयों को पेट्रोल देने वाला अरबाज गिरफ्तार, मास्टरमाइंड अब्दुल मलिक अब भी फरार: बनभूलपुरा में कर्फ्यू हटा, 68 गिरफ्तार

हल्द्वानी में अतिक्रमण हटाने गई नगर निगम और पुलिस टीम पर हमला करने वालों पर एक्शन जारी है। पुलिस लगातार दंगाइयों की धर-पकड़ कर रही है। हल्द्वानी हिंसा के दौरान दंगाइयों को बम ले लिए पेट्रोल देने वाला एक आरोपित पकड़ा गया है। उसके पास से पुलिस ने पेट्रोल भी बरामद किया है। पेट्रोल बम बनाने वाले भी पुलिस की गिरफ्त में आए हैं।

हल्द्वानी पुलिस ने बताया है कि उसने सोमवार (19 फरवरी 2024) को 10 और दंगाइयों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही गिरफ्तार दंगाइयों की संख्या बढ़कर 68 हो गई है। पुलिस ने बताया है कि इन दंगाइयों में अरबाज भी शामिल है, जिसने बम के लिए पेट्रोल उपलब्ध करवाए थे। उसके पास से 9 लीटर पेट्रोल भी बरामद हुआ है।

अरबाज ने शहजाद और फैजान को पेट्रोल दिया था। गिरफ्तार दंगाई मोहम्मद शुएब के पास से पुलिस ने लूटे हुए दो कारतूस बरामद किए हैं। नैनीताल पुलिस ने दंगाइयों तस्लीम, वसीम सिद्दीकी उर्फ़ हप्पा, नाजिम और उजैर को भी गिरफ्तार किया है। तस्लीम और वसीम की तलाश के लिए हल्द्वानी पुलिस ने शहर भर में पोस्टर भी लगाए थे।

इस मामले में 3 FIR दर्ज हुई थी। हालाँकि, अभी दंगे का मास्टरमाइंड मुख्य अब्दुल मलिक और उसका बेटा फरार है। पुलिस उनकी तलाश में लगी है। इनके ऊपर इनाम घोषित किए जाने की भी तैयारी है। जिन दंगाइयों को गिरफ्तार किया गया है, उनमें से अधिकांश बनभूलपुरा के ही निवासी हैं, जहाँ दंगा हुआ था। पुलिस ने फरार आरोपितों के घरों में कुर्की भी की है।

गौरतलब है कि 8 फरवरी 2024 को हल्द्वानी के बनभूलपुरा में अवैध अतिक्रमण कर बनाई गई मस्जिद और मदरसे को गिराने के लिए पुलिस और नगर निगम की टीम पहुँची थी। यहाँ दंगाई इस्लामी भीड़ ने उन्हें घेर कर हमला किया था। उन पर पेट्रोल बम से हमले किए गए थे। हमले में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी घायल हुए थे। ऑपइंडिया ग्राउंड पर जाकर इस हमले की सच्चाई बताई थी कि कैसे पुलिस और मीडिया पर उनकी पहचान देख कर हमले किए गए थे।

बीच-बिकिनी में आखिरी पोस्ट… एडल्ट फिल्मों की मशहूर हिरोइन ने की सुसाइड, लोग बोले- पोर्न इंडस्ट्री ऐसा ही हाल कर देती है

एडल्ट फिल्मों की मशहूर स्टार काग्नी लिन कार्टर की 36 साल की उम्र में मौत हो गई। बताया जा रहा है काग्नी ने सुसाइड की है। उनकी मौत की खबर सुनने के बाद लोगों को विश्वास नहीं हो रहा। सबको काग्नी का लास्ट इंस्टा पोस्ट याद आ रहा है। उन्होंने एक हफ्ते पहले अपना यह पोस्ट शेयर किया था जिसे देख किसी को भनक भी नहीं हो सकती कि काग्नी कोई ऐसा कदम उठाने वाली हैं। इस पोस्ट में उन्होंने अपनी फोटो डाली थी।

अभिनेत्री की मौत के बाद उनके दोस्त सदमे में है और उनकी अंतिम संस्कार के लिए गो फंड साइट से फंड जुटा रहे हैं। उनका कहना है कि इकट्ठा किए गए पैसों को वो काग्नी के अंतिम संस्कार में लगाएँगे और जो पैसा बचेगा उसे पशु बचाव में।

रिपोर्ट्स के मुताबिक एडल्स फिल्मों की हिरोइन काग्नी लंबे समय से मानसिक रूप से बीमार चल रही थीं। इसी के चलते वो इतनी परेशान भी थी कि आखिर में उन्होंने जान देना ही उचित समझा। उनके बारे में मौजूद जानकारी बताती है कि काग्नी लिन कार्टर सन् 2000 में एडल्ट फिल्मों में आई थीं। उन्होंने 2019 में लॉस एंजिल्स और पोल डांसिंग करना शुरू किया। उनके इंस्टा अकॉउंट पर भी उनकी पोल डांल करने वाली कई वीडियोज को देखा जा सकता है। इसके अलावा रिंग के साथ डांस की वीडियोज भी उनके अकॉउंट पर मौजूद हैं।

वहीं उनके पोस्ट में उन्होंने एक फोटो डाली है जिसमें वह पिंक बिकिनी में बीच के पास नजर आ रही हैं। उन्होंने अपने पोस्ट में फ्लॉरिडा में होने की जानकारी दी थी। उससे पहले उन्होंने रिंग के साथ और पोल के साथ डांस करने की वीडियोज को डाला था। उनके अकॉउट पर उनके गानों की भी बहुत सारी वीडियोज डली हुई है।

काग्नी की पोस्ट

उनकी मौत की खबर सुनने के बाद लोग इन्हीं पोस्टों पर आकर उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं और कह रहे हैं कि काग्नी एक उभरती कलाकार थीं उन्हें इस तरह हार नहीं माननी चाहिए थी। वहीं कुछ लोग ये भी कह रहे हैं कि पोर्न इंडस्ट्री लोगों को इस तरह अंधकार में डालती है कि उन्हें ऐसे कदम उठाने ही पड़ते हैं।

संदेशखाली में डर लग रहा तो राजभवन में आकर रहिए… राज्यपाल ने पीड़िताओं के लिए खोले दरवाजे, NCW चीफ बोलीं- बगैर राष्ट्रपति शासन के नहीं बदलेगा बंगाल

संदेशखाली की पीड़िताओं के लिए पश्चिम बंगाल के राजभवन ने अपने दरवाजे खोल दिया है। कहा है कि जो खुद को वहाँ सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे यहाँ आकर रह सकते हैं। इनके रहने लिए राजभवन में ‘पीस होम’ बनाया गया है। इस बीच राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा है कि राष्ट्रपति शासन लगाए बिना पश्चिम बंगाल में हालात नहीं बदलेंगे।

संदेशखाली की महिलाओं ने टीएमसी के गुंडों पर प्रताड़ित करने और यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। इसके बाद से यह जगह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। खुद राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने भी प्रभावित इलाके का दौरा किया था। पीड़िताओं के लिए राजभवन की ओर से हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है।

अब राजभवन ने इन्हें शरण देने का फैसला किया है। राज्यपाल के OSD संदीप राजपूत ने बताया है, “माननीय राज्यपाल ने हाल ही में संदेशखाली जाकर पीड़िताओं से मुलाक़ात की थी। वहाँ उन्होंने एक हेल्पलाइन नम्बर जारी किया था। इस नम्बर पर कई फ़ोन आ रहे हैं। इससे राज्यपाल को पीड़िताओं के लिए रहने के लिए सुरक्षित जगह मुहैया कराने की आवश्यकता महसूस हुई है। इसलिए यहाँ ‘पीस होम’ और ‘सेफ होम’ नाम से उनके रहने का प्रबन्ध किया गया है। अगर कोई संदेशखाली से आता है तो हम यहाँ रहने की व्यवस्था करेंगे। उनके लिए खाना-पीने सहित सारे इंतजाम किए जाएँगे।”

राजपूत ने बताया, “पीड़िताओं की राज्यपाल से बात हुई है। हमारी तैयारी पूरी है। जिन लोगों को आने में दिक्कत है तो उन्हें यहाँ लाने की व्यवस्था भी हम करेंगे। हम यहाँ से ट्रांसपोर्ट भेज सकते हैं। यहाँ 100-200 लोगों के रहने की व्यवस्था हो सकती है।”

शनिवार (17 फरवरी, 2024) को राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने कहा था कि संदेशखाली पीड़िताओं के लिए राजभवन के दरवाजे हमेशा खुले हैं। उन्होंने एक हेल्पलाइन नम्बर 033-22001641 भी जारी किया था। इससे पहले राजभवन ने पिछले वर्ष पंचायत चुनाव में हुई हिंसा के पीड़ितों को भी शरण दी थी। राज्यपाल ने कहा था कि संदेशखाली की महिलाएँ उनकी ‘राखी बहन’ हैं और वह उनके लिए सब कुछ अपनी शक्तियों के तहत करेंगे।

गौरतलब है कि बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले के संदेशखाली में तृणमूल कॉन्ग्रेस नेता शेख शाहजहाँ और उसके समर्थकों के खिलाफ हाल ही में बड़ी संख्या में महिलाओं ने बलात्कार, अपहरण, लूटपाट और जमीन कब्जाने के आरोप लगाए थे। अधिकांश पीड़ित महिलाएँ दलित-आदिवासी हैं। पीड़िताओं से राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्यों ने भी मुलाक़ात की है। इनसे महिलाओं ने अपने साथ हुई भयावहता साझा की है।

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने संदेशखाली पीड़िताओं से मुलाक़ात कर उनकी समस्याएँ जानी। इसके बाद वह राज्यपाल सीवी आनंद बोस से मिलीं। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया, “संदेशखाली की कई महिलाओं का यौन शोषण हुआ है। मुझे बलात्कार की दो घटनाओं के बारे में जानकारी मिली है। एक में आज ही शिकायत दर्ज हुई है। यहाँ तब तक कुछ नहीं बदलेगा जब तक राष्ट्रपति शासन नहीं लग जाता।”

इससे पहले ऐसी खबरें भी सामने आई था कि संदेशखाली की महिलाओं को शाहजहाँ के लोगों ने शिकायतों के बाद काफी परेशान किया है। बंगाल पुलिस पर एक पीड़िता की पहचान सोशल मीडिया पर उजागर करने का भी आरोप है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस वीभत्स कांड को भाजपा की साजिश बताने की कोशिश कर रही हैं। पत्रकारों को भी ममता सरकार परेशान कर रही है। 19 फरवरी, 2024 को रिपब्लिक बांग्ला के एक रिपोर्ट को लाइव कैमरे पर पुलिस उठा ले गई थी।

किसान संगठनों ने MSP पर मोदी सरकार का फॉर्मूला ठुकराया, PHDCCI ने बताया- हर रोज ₹500 करोड़ का हो रहा नुकसान

18 फरवरी 2024 को किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच बातचीत हुई थी। इस दौरान केंद्र सरकार ने 4 फसलों पर एमएसपी की गारंटी का फॉर्मूला पेश किया था। लेकिन किसान संगठनों ने इस अस्वीकार करते हुए 21 फरवरी को दिल्ली कूच का ऐलान किया है। इस बीच PHD चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) ने बताया है कि मौजूदा किसान आंदोलन के कारण प्रतिदिन करीब 500 करोड़ रुपए का उद्योग-धंधों को नुकसान हो रहा है।

हरियाणा-पंजाब की सीमा पर जारी आन्दोलन के कारण पंजाब के कारोबारी भी प्रभावित हो रहे हैं। इसका प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था पर वित्त वर्ष 2023-24 की चौथी तिमाही में दिखेगा। यह जानकारी PHD चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने दी है।

अग्रवाल ने मीडिया को बताया है कि किसानों के प्रदर्शन की वजह से उत्तर भारत के राज्यों में रोजाना ₹500 करोड़ का नुकसान हो रहा है। किसान आन्दोलन के कारण बॉर्डर सील हैं और मालवाहक वाहनों की आवाजाही नहीं हो पा रही है। इससे रोजगार पर भी फर्क पड़ रहा है। पंजाब की छोटी कम्पनियों पर भी असर पड़ रहा है।

अग्रवाल ने बताया कि इसका असर वित्त वर्ष 2023-24 की अंतिम तिमाही (जनवरी-मार्च) वाली तिमाही के GDP बढ़त के आँकड़ों पर दिखेगा और यह इस इलाके में धीमी हो सकती है। उन्होंने कहा कि इस रुकावट के कारण फ़ूड प्रोसेसिंग, ऑटोमोबाइल, फ़ार्म मशीनरी, टूरिज्म और कच्चे माल जैसे क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं।

गौरतलब है कि किसान वर्तमान में हरियाणा-पंजाब के शम्भू बॉर्डर पर कब्जा किए हुए हैं। संजय अग्रवाल ने किसान संगठनों और सरकार से जल्द ही इस मामले को सुलझाने की अपील की है। इस दौरान उन्होंने मोदी सरकार द्वारा किसानों के लिए उठाए गए क़दमों जैसे कि किसान सम्मान निधि की प्रशंसा भी की।

गौरतलब है कि 13 फरवरी से शुरू हुए किसानों के हालिया प्रदर्शन के बाद उनकी सरकार के साथ अब तक कई बार बातचीत हो चुकी है। किसानों की माँग को लेकर हालिया बातचीत 18 फरवरी को चंडीगढ़ में हुई थी।

केंद्र सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर प्रस्ताव लाने के बाद किसान प्रदर्शनकारी थोड़े शांत हुए हैं। उन्होंने सरकार से चौथे दौर की बातचीत के बाद अपना प्रदर्शन कुछ समय रोकने का ऐलान किया। ये प्रस्ताव सरकार रविवार को लेकर आई। इस दौरान सरकार की ओर से एमएसपी पर फसल खरीदने के लिए 5 साल का कॉन्ट्रैक्ट करने के प्रस्ताव दिया गया था। ये कॉन्ट्रैक्ट एनसीसीएफ, NAFED और CCI जैसी सहकारी समितियों के साथ करने की बात कही गई थी। खरीद की लिमिट नहीं रखने का भी भरोसा दिया गया था। जिन उपजों को लेकर यह प्रस्ताव दिया गया था उनमें उड़द दाल, मसूर दाल और मक्का-कपास शामिल हैं।

इस बैठक में किसानों के 14 प्रतिनिधि और केंद्र सरकार के किसान कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय शामिल हुए थे। इनके अलावा बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी मौजूद थे।

गौरतलब है कि इससे पहले 2020 में हुए किसान आन्दोलन के कारण भी अर्थव्यस्था को गहरी चोट पहुँची थी। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने उस समय बताया था कि 12 महीनों में देश को इस आंदोलन के कारण करीब ₹60,000 करोड़ का नुकसान हुआ था। व्यापारियों के संगठन ने कहा था कि ये घाटा मुख्यतः इस आंदोलन के शुरुआती स्टेज यानी, नवंबर-दिसंबर 2020 और जनवरी 2021 में हुआ था। इस दौरान भी पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली में आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही में काफी दिक्कतें आई थी।

नेपाल फिर से बनेगा हिंदू राष्ट्र? नेपाली कॉन्ग्रेस के सुर में सुर मिला रहे वामपंथी भी, रिपोर्ट में बताया- राष्ट्रपति से लेकर PM तक इसके पक्षधर

नेपाल को ‘हिंदू राष्ट्र’ बनाने की माँग एक बार फिर से जोरों पर है। इसके लिए वहाँ ललितपुर के गोदावरी में सोमवार (19 फरवरी 2024) को महासमिति की बैठक भी होना शुरू हो गई है। इस बैठक का नेतृत्व नेपाली कॉन्ग्रेस के सांसद व केंद्रीय समिति के सदस्य शंकर भंडारी द्वारा किया जा रहा है। बैठक में इस बात पर चर्चा हो रही है कि किस तरीके से नेपाल को दोबारा से ‘वैदिक सनातन हिंदू राष्ट्र’ का दर्जा दिलाया जा सकता है।

द काठमांडू की रिपोर्ट के अनुसार, इस संबंध में नेपाल की 22 केंद्रीय कार्य समितियों ने बीते शुक्रवार (16 फरवरी 2024) को हिंदू राष्ट्र बनाने की माँग को पार्टी के आगे उठाया था। इसके बाद 17 फरवरी को इस अभियान को 4 पृष्ठ डोजियर के साथ पब्लिक किया गया। भंडारी ने नेपाली कॉन्ग्रेस के नेताओं से इस मुद्दे को उठाने के लिए समर्थन माँगा।

उन्होंने कहा, “हम पार्टी के नेतृत्व पर इस मुद्दे को उठाने का दबाव बनाएँगे। पार्टी अध्यक्ष शेर बहादुर देबा ने इस मुद्दे को सकारात्मक ढंग से लिया है। उनके अलावा सीपीएम-यूएमएल और सीपीएन के नेता भी इस अभियान में साथ देने को तैयार हैं।” नेपाली कॉन्ग्रेस सांसद ने कहा कि ये सिर्फ एक अभियान नहीं है। ये राष्ट्र निर्माण के लिए अहम अभियान है।

बता दें कि एक तरफ जहाँ कहा जा रहा है कि नेपाल को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए कई राजनेता एक साथ खड़े हो रहे हैं। वहीं ये भी जानकारी है कि कुछ कॉन्ग्रेस नेता इस मुद्दे से सहमत नहीं है। शुक्रवार को पार्टी की कार्यकारी समिति की बैठक में इस मुद्दे को नकार दिया गया था।

नेपाली कॉन्ग्रेस नेता भंडारी ने कहा कि वो अन्य पार्टियों और समुदायों के साथ मिलकर भी इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे। वहीं पूर्व मंत्री व नेपाली कॉन्ग्रेस नेता देवेंद्र राज कादेल ने कहा कि हिंदू राष्ट्र की बहाली के लिए नेपाली कॉन्ग्रेस को अभियान चलाना चाहिए। उनकी सहमति के बिना ये नहीं हो पाएगा।

कादेल ने कहा कि अगर नेपाली कॉन्ग्रेस माँग मानने को तैयार होती है तो अन्य पार्टियों से भी बात की जाएगी। अगर ज्यादातर सभी इस पर राजी होंगे तो फिर संविधान में संशोधन का मार्ग प्रशस्त होगा। एक बार जब हम आधारशिला रख दी गई तो अच्छे राष्ट्र का निर्माण तो होगा ही।

जानकारी के लिए बता दें कि इससे पूर्व एक महासमिति की बैठक दिसंबर 2018 में हुई थी। उस समय 700 महासमिति के सदस्यों ने हिंदू राष्ट्र के लिए सहमति दी थी। लेकिन फिर भी कुछ नहीं हुआ। इस बार नेपाली कॉन्ग्रेस के नियुक्त प्रतिनिधि महासमिति बैठक में भाग ले रहे हैं और देश की राजनीति, नीति, पार्टी संगठन समेत कई समसामायिक मुद्दों पर चर्चा होगी और हिंदू राष्ट्र का मुद्दा उठेगा।

भंडारी का कहना है कि आज के समय में जनता वर्तमान स्थिति से त्रस्त है, इसलिए हिंदू राष्ट्र का जो मुद्दा उठा है उस पर विचार होना जरूरी है। उनके मुताबिक वामपंथी नेता तो धर्म आदि पर बात ही नहीं करते लेकिन बात राष्ट्र की है तो वो भी साथ देने को तैयार हैं।

बता दें कि 28 मई, 2008 को नेपाल आधिकारिक तौर पर एक गणतंत्र बनाया गया था। उस दिन नेपाल की संविधान सभा की पहली बैठक हुई थी। उसके बाद बाद राजाओं को शासन खत्म हो गया। हालाँकि अब एक बार फिर से हिंदू राष्ट्र बनाने की कोशिश की जा रही है और इसे राष्ट्र निर्माण के लिए जरूरी कदम भी बताया जा रहा है।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में तो सूत्रों के हवाले से कहा गया कि भले ही नेपाल एक धर्मनिरपेक्ष राज्य है, फिर भी उसे अपने हिंदू वंश पर गर्व है। वास्तव में, नेपाल में वर्तमान नेतृत्व – प्रधान मंत्रीपुष्पा कमला दहल और राष्ट्रपति राम चंद्र पौडेल भी चाहते हैं कि हिंदू राज्य की इस बहाली पर बहस हो।