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‘इनके चुतड़ा पर कील गाड़नी चाहिए’: बोले हरियाणा के किसान- पंजाब के लोगों ने हमारे बच्चों को बनाया नशेड़ी, दिल्ली में घुसने नहीं देंगे

किसान आंदोलन 2.0 चर्चा में है। दरअसल, साल 2020 से साल 2021 के आखिर तक दिल्ली में देश भर के किसानों ने जोरदार प्रदर्शन किया था। करीब डेढ़ तक चले प्रदर्शनों के बाद केंद्र सरकार ने तीन कानूनों को वापस ले लिया था। इस दौरान पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश के किसानों ने दिल्ली को लगभग बंधक लिया था। अब उन प्रदर्शनों को दोहराने की कोशिश में पंजाब के किसान फिर से दिल्ली का रूख कर चुके हैं। हरियाणा के बॉर्डर पर पंजाब से आ रहे किसानों को शंभू प्वॉइंट पर रोक लिया गया है। इसके अलावा दिल्ली में उनके घुसने की कोशिशों को विफल किया जा रहा है। इस बीच, केंद्र सरकार पूरी तरह से सक्रिय है और किसानों से लगातार बातचीत कर रही है। वहीं, 20 फरवरी 2024 को एक यू-ट्यूब चैनल से हरियाणा के किसानों ने किसान आंदोलन 1.0 को लेकर गहरी नाराजगी जताई है।

यूट्यूब चैनल न्यूज व्यूज से बातचीत में हरियाणा के किसानों ने पंजाब के किसानों को लेकर गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने कहा कि पंजाब से आए लोगों ने हरियाणा के युवाओं को उनकी राह से भटका दिया। उन्होंने उन्हें बहकाया और नशे का आदी बना दिया। किसानों ने बताया, “किसान आंदोलन 1.0 से पहले हरियाणा के युवाओं में ‘चित्ता’ का कोई नशा नहीं था। वो जानते भी नहीं थे कि ये आखिर है क्या चीज? हमारे बच्चे उन प्रदर्शनों के दौरान नसे के आदी बन गए। इसके लिए जिम्मेदार कौन है?” जिन्हें नहीं पता, उन्हें बता दें कि हेरोइन के नशे को ‘चित्ता’ कहते हैं, जो पंजाब में काफी गहरे तक जड़ें जमा चुका है।

उन्होंने हमें बेवकूफ बनाया

मीडिया से बातचीत करते हुए हरियाणा के किसाों ने कहा कि ये प्रदर्शन सिर्फ आने वाले लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए किए जा रहे हैं। उन किसानों में से एक ने कहा, “उन्हें विदेशों से पैसे मिल रहे हैं। देश विरोधी गतिविधियाँ हो रही हैं। लेकिन हम वो सब फिर से नहीं (जो पिछली बार हुआ-नशे का फैलाव इत्यादि) होने देंगे। उन्होंने हमें बेवकूफ बनाया। ऐसे में इस बार हम उन्हें समर्थन नहीं दे रहे।” उन्होंने आगे कहा, “हमने पंजाब में अपने प्रधानमंत्री को खतरे में डाला, लेकिन ऐसा फिर से नहीं होगा।”

हरियाणा के किसानों ने प्रदर्शनकारियों के लगातार दिल्ली जाने की बात पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा, “सरकार जो कह (सरकार का ऑफर) रही, वो मान नहीं रहे। वो सिर्फ ‘दिल्ली’ ‘दिल्ली’ ‘दिल्ली’ की रट लगाए पड़े हैं।” उन्होंने अन्ना आंदोलन के समय को याद करते हुए आगे कहा, “उस समय जो भी प्रदर्शन वाली जगह जा रहे थे, उनकी जाँच हो रही थी। सबकुछ आराम से चल रहा था। मैं गारंटी लेकर कहता हूँ कि शराब और ड्रग्स की सल्पाई रोक दी जाए, फिर देखो 4 दिन में सारे गायब हो जाएँगे।”

इस दौरान जब पत्रकार ने उसके पूछा कि किसान सरकार से भिड़ने की प्लानिंग कर चुके हैं, वो उन्हें रोकने के लिए लगाए गए बैरिकेटिंग को उखाड़ने की तैयारी कर चुके हैं, इस पर किसान ने कहा, “अगर कोई देश में अव्यवस्था फैलाना चाहता है, तो सरकार भी कुछ सुरक्षा के कदम उठाती है। अगर उनके लिए रोड खोल दिए जाए, तो वो (प्रदर्शनकारी) उस रोड को जाम कर देंगे और अर्थव्यवस्था को ठप कर देंगे। इस क्षेत्र की हजारों कंपनियाँ ने इस इलाके को छोड़ (पहले किसान आंदोलन के समय) दिया। हजारों लोग बेरोजगार हो गए। उन (प्रदर्शनकारियों) ने पूरे इलाके को बर्बाद कर दिया। जो कंपनियाँ वापस नहीं आई, जो यहाँ से चली गई। हरियाणा के लोग एक बार फिर से इसके लिए (इन प्रदर्शनों के लिए, नुकसान के लिए) तैयार नहीं हैं।”

हरियाणा के किसान बोले, देश की अर्थव्यवस्था में सभी भागीदार

पत्रकार ने जब किसानों ने बातचीत के दौरान कहा कि प्रदर्शन कर रहे किसान ‘अन्नदाता’ हैं, तो हरियाणा के किसानों ने जवाब में कहा, ‘हर कोई दाता है। ड्राइवर भी दाता है। घर बनाने वाला मजदूर भी दाता है। अर्थव्यवस्था में सभी लोग अहम किरदार निभाते हैं। हर किसी का रोल अलग-अलग है।’ एक किसान ने इंडी गठबंधन की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘विपक्षी गठबंधन और कॉन्ग्रेस ने I.N.D.I.A. नाम रख लिया, इसका मतलब ये नहीं कि वो चुनाव जीत ही जाएँगे।’ किसान ने आगे कहा, “सोचिए, अगर झारखंड देश को कोयला देना बंद कर दे, तो ये तथाकथित ‘पंजाब के अन्नदाता’ अपना कोई काम नहीं कर पाएँगे।”

किसानों ने कहा कि सरकार ने चौथे दौर की वार्ता के बाद एक बेहतरीन प्लान (4 फसलों पर 5 साल के लिए गारंटी) बनाया, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उसे नकार दिया। उन्होंने कहा, “वो देश भर में अगले 15 दिनों में अव्यवस्था फैलान चाहते हैं। प्रदर्शन करने वाले लोग पीएम मोदी के खिलाफ माहौल बनाना चाहते हैं। वो सिर्फ वोट काटने आए हैं।” उन्होंने आगे कहा, “पंजाब में जो मजदूर किसानों के खेतों में काम करते हैं, क्या उनके लिए भी इन लोगों (प्रदर्शनकारियों) ने पेंशन की माँग की? ये मामला सिर्फ किसानी का नहीं है। पंजाब में सबसे ज्यादा बंधुआँ मजदूर मिले हैं, उनके लिए क्या माँग कर रहे हैं?”

प्रदर्शन के दौरान किसानों की मौत से जुड़े सवाल पर किसान ने कहा, “हमारे गाँव में भी 4 लोगों की मौत हुई। अगर उनकी जान शराब पीकर या हार्ट अटैक से गई है, तो उन्हें शहीद नहीं कर सकते। एक काम करिए, आप 2 लाख लोगों को इकट्ठा करिए, कम से कम 4 लोग प्राकृतिक तरीके से दम तोड़ देंगे, इसका मतलब ये नहीं है कि उन सभी को शहीद बोला जाए।”

सभी तबकों का ध्यान रखे सरकार

एमएसपी के सवाल पर किसान ने कहा, “सरकार ने फसलों पर एमएसपी दी, जिसकी उसे जरूरत लगी। सरकार को पूरे देश के बारे में सोचना पड़ता है। सरकार को समाज के हर तबके के लिए काम करना पड़ता है। हर सवात किसानों के लिए फायदा चाहता है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि समाज के अन्य वर्गों को अनदेखा कर दिया जाए।”

‘प्रधानमंत्री कोई तानाशाह नहीं’

इस दौरान पत्रकार ने जब पूछा कि कॉन्ग्रेस पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तानाशाह कहती है, तो किसानों ने कहा, “अगर किसी तरह की तानाशाही होती, तो किसान साल भर से ज्यादा समय नहीं बैठ पाते। लोगों को चौटाला का राज याद है? 50 गोलियाँ और 100 पुलिस वाले किसी भी विरोध प्रदर्शन को खत्म कर देती हैं।” उन्होंने आगे कहा, “अगर पीएम मोदी तानाशाह होते, तो वो उन्हें पंजाब के एक फ्लाइओवर पर नहीं रोक पाते। क्या तुम्हें लगता है कि पीएम मोदी के पास ताकत नहीं है?” किसानों ने आरोप लगाया कि ये प्रदर्शन सिर्फ एक ही परिवार को फायदा पहुँचाने के लिए जुटे हुए हैं, ऐसे लोग भ्रष्टाचारी हैं और भ्रष्टाचार का समर्थन करते हैं।

किसानों ने कहा कि बीजेपी के शासनकाल में जो जिस लायक है, उसे उस तरह का काम मिल रहा है, चाहे वो किसी भी राजनीतिक विचारधारा का है। किसानों ने कहा, “कोई काबिल है, तो उसे काम मिल रहा है। ये सरकार ऐसी नहीं है, जिसमें सिर्फ घूसखोरों को नौकरी मिले।”

राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को न मिले अनुमति

एक किसान ने कहा, “हम किसानों के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जो लोग भारत विरोधी नारेबाजी कर रहे हैं, उनके खिलाफ कड़ा कदम उठाना चाहिए। हमारे सामने कोई खालिस्तानी नारे लगाएगा या हमारे प्रधानमंत्री के लिए अभद्र बातें करेगा, तो हम उसे छोड़ेगे नहीं। राष्ट्र ध्वज और लाल किला हमारे गर्व हैं। हम बिल्कुल नहीं चाहेंगे कि कोई लाल किले पर जाए और अपनी पसंद का झंडा फहरा आए।” उन किसानों में से एक ने कहा, “हरियाणा के किसान इस बात को समझ चुके हैं कि पंजाब सरकार हमारे साथ धोखा कर रही है। वो हमारा इस्तेमाल कर रही है। वो हमें सामने रखकर सबकुछ करना चाहती है, पता है क्यों? क्योंकि हम लोग इमोशनल हैं।”

किसान आंदोलन 1.0 के दौरान हरियाणा के युवा हुए बर्बाद

किसान ने आगे कहा, ‘मैंने एक लोकल नेता का इंटरव्यू सुना, उन्होंने कहा कि हमारे बच्चे नशेड़ी बन गए। पिछले प्रदर्शन से पहले कोई भी लड़का ‘चिट्टा’ का नशेड़ी नहीं था। उन्हें तो पता भी नहीं था कि ये होता क्या है? हमारे बच्चे इन प्रदर्शनों के दौरान नशे में डूब घए। इसके लिए कौन जिम्मेदार है? हम उन्हें इसलिए नहीं सपोर्ट कर रहे, क्योंकि हमें अपने बच्चों को नशे से बचाना है। ‘

उन्होंने कहा कि अगर इन प्रदर्शनों के दौरान हरियाणा के किसी युवा की जान जाती है, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा? “वो लोग तो उसे शहीद बता देंगे, लेकिन किसान घोषित कर देने भर से हम उसे वापस नहीं ला पाएँगे न?” उन्होंने आगे कहा, “प्रदर्शनकारी पेंशन चाहते हैं। वो लोन माफी चाहते हैं। ठीक है, हम ये बात समझते हैं। लेकिन आम नागरिकों पर इसके बदले में जो 14-20 लाख करोड़ का बोझ पड़ेगा, उसका क्या? हमें लिखित में दें कि टैक्स पेयर्स की पैसों से लोनमाफी नहीं दी जाएगी, फिर उन लोगों को एमएसपी दे दें।”

एक किसान ने कहा, “पिछली बार उन लोगों ने (पंजाब के किसानों ने) कहा था कि वो SYL मुद्दे पर भी बातचीत करेंगे, लेकिन उन्होंने नहीं किया। उन्होंने फिर से प्रदर्शन शुरू कर दिया। पहले वो पानी समझौते के मुद्दे पर बात करें, फिर हम प्रदर्शनों के बारे में बात करेंगे। “

केंद्र सरकार और किसानों के बीच पाँचवें दौर की वार्ता जल्द

बता दें कि किसानों के साथ चौथे दौर की वार्ता में केंद्र सरकार ने रविवार (18 फरवरी 2024) को नए प्रस्ताव दिए थे, जिसके बाद किसानों ने कहा था कि वो बातचीत करके सरकार को सूचित कर देंगे। सरकार ने अपनी तरफ से चौथे दौर की वार्ता के दौरान जो प्रस्ताव दिया था, उसमें एमएसपी पर फसल खरीदने के लिए 5 साल के कॉन्ट्रैक्ट की बात कही थी। जिसमें ये कॉन्ट्रैक्ट एनसीसीएफ, NAFED और CCI जैसी सहकारी समितियों के साथ होनी थी। इसमें खरीद की लिमिट भी नहीं रहेगी। सरकार ने इसमें उड़द दाल, मसूर दाल और मक्का-कपास को जोड़ने और खरीद के लिए पाँच साल की गारंटी की बात कही थी।

इस बैठक में किसानों के 14 प्रतिनिधि और केंद्र सरकार के किसान कल्याण मंत्री अर्जुन मुंडा, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय शामिल हुए थे। इनके अलावा बैठक में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान भी मौजूद थे। हालाँकि बाद में किसानों ने कहा था कि उन्हें एमएसपी से कम पर कुछ भी मंजूर नहीं है। सरकार ने एक बार फिर से किसानों को वार्ता के लिए बुलाया है।

मूल रूप से ये खबर अंग्रेजी में लिखी गई है, मूल खबर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

जनता जुड़ी नहीं, साथी छोड़ते चले गए… यात्रा के फ्लॉप होने के बाद राहुल गाँधी के विदेश जाने का कयास: बहन तक का नहीं मिला साथ, बंगाल से लेकर महाराष्ट्र तक कॉन्ग्रेस को झटके

राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ को न तो कोई खास जन-समर्थन मिल रहा है, न ही मीडिया में कवरेज। ऐसे में अब कहा जा रहा है कि वो बीच में ही यात्रा छोड़-छाड़ के विदेश यात्रा पर निकल सकते हैं। खबरों में कहा जा रहा है कि राहुल गाँधी अगले हफ्ते ही इंग्लैंड की यात्रा पर निकल सकते हैं। चर्चा है कि इंग्लैंड में वो 10 दिन गुजारेंगे, इसी बीच उनका कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी का दौरा भी प्रस्तावित है। बता दें कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव से लेकर राहुल गाँधी की बहन प्रियंका तक उनकी यात्रा में शामिल नहीं हुईं।

‘रिपब्लिक वर्ल्ड’ ने अपनी खबर में बताया है कि राहुल गाँधी की ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ को ठंडी प्रतिक्रिया मिलने की वजह से वो विदेश जा रहे हैं। राहुल गाँधी की ये यात्रा शुरू होने के साथ ही विवादों में है। यात्रा शुरू होने ही वाली थी कि उधर मुंबई कॉन्ग्रेस के अध्यक्ष रहे मिलिंद देवड़ा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। मिलिंद देवड़ा ने शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) का दामन थाम लिया। अब पूर्व CM अशोक चव्हाण भी भाजपा में आ गए हैं। देवड़ा वाले झटके के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कॉन्ग्रेस के साथ गठबंधन से इनकार कर दिया।

इस तरह I.N.D.I. गठबंधन को भी झटका लगता रहा। TMC की सत्ता वाले पश्चिम बंगाल में राहुल गाँधी के पहुँचते ही गठबंधन टूट गया। बिहार में महागठबंधन की एक बड़ी रैली प्रस्तावित थी, लेकिन यहाँ राहुल गाँधी के पहुँचने से पहले ही नीतीश कुमार की जदयू ने पाला बदल लिया और भाजपा के साथ मिल कर सरकार बना ली। राजद विपक्ष में आ गई। गाँधी परिवार के गढ़ रहे अमेठी में ‘वापस जाओ’ नारे के साथ राहुल गाँधी का स्वागत हुआ, यूपी में उनकी यात्रा में भीड़ नहीं जुटी सो अलग।

ऊपर से राहुल गाँधी के एक के बाद एक विवादित बयानों के कारण कॉन्ग्रेस को लेकर नकारात्मक माहौल ही बना। उन्होंने अभिनेत्री ऐश्वर्या राय को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी। साथ ही काशी के युवकों को शराबी व नशेड़ी बता दिया। कॉन्ग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा है कि ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ 26 फरवरी से लेकर 1 मार्च तक रुकी रहेगी। उन्होंने बताया है कि इस दौरान कुछ महत्वपूर्ण चुनावी बैठकें होनी हैं, जिनमें राहुल गाँधी की मौजूदगी ज़रूरी है।

नाचती ऐश्वर्या राय, ₹25 लाख में आई तृषा कृष्णन… उत्तर से दक्षिण तक राजनीति का वही कीचड़: हिरोइन भी किसी की माँ, किसी की बेटी होती हैं राहुल गाँधी

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी इन दिनों न्याय यात्रा पर हैं और आए दिन उनके भाषणा की कोई न कोई क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल होती रहती है। जनता से मुखातिब होते हुए वह कहीं से भी कोई भी उदाहरण देने लगते हैं जिसके कारण उनका मजाक भी बनता है तो कई बार बवाल भी होता है। हाल की बात करें तो उन्होंने अपने भाषण को दमदार दिखाने के लिए ऐश्वर्या राय बच्चन जैसी नामी हिरोइन का नाम ले लिया। शायद उन्हें लगा हो कि ऐश्वर्या का नाम लेने से जनता का ध्यान उनकी ओर खिंचेगा। लेकिन उन्हें ये एहसास नहीं हुआ कि इससे ऐश्वर्या राय का कितना अपमान हो रहा है।

अपनी रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करने के लिए राहुल गाँधी ने जनता से कहा कि मीडिया हाउस जनता की आवाज को नहीं सुनाएँगे। उन्होंने कहा, “ये मीडिया हाउस… अडानी जी के अंबानी जी के हैं। ये किसान के बारे में, मजदूर के बारे में, गरीब के बारे में ये कभी नहीं दिखाने वाले। ये कर ही नहीं सकते…इनके मालिक कहते हैं भईया नहीं। हिंदुस्तान के गरीबों के बारे में मीडिया में नहीं दिखाना। मीडिया पूरे दिन नरेंद्र मोदी को दिखाता है और फिर कभी आपको ऐश्वर्या राय नाचती हुई दिखेगी। दूसरी तरफ अमिताभ बच्चन बल्ले-बल्ले करते हुए निकलेगा।”

राहुल गाँधी ऐसा कहते हुए राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल लोगों के प्रति अपनी घृणा दिखा रहे थे। लेकिन यह समझ नहीं आया कि आखिर उन्होंने ऐश्वर्या का नाम क्यों लिया। ऐश्वर्या तो उस कार्यक्रम में शामिल तक नहीं थीं। अगर उन्हें उदाहरण देना ही था तो कार्यक्रम में शामिल लोगों का भी दिया जा सकता है। मगर, नहीं। राहुल गाँधी के मुँह पर पिछले कुछ दिनों से अपमानित करने के लिए ऐश्वर्या राय का नाम बार-बार आ चुका है।

वैसे वो अकेले नेता नहीं है जो अपने भाषणों और बयानों से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए इस तरह बॉलीवुड की महिला कलाकारों के नाम का इस्तेमाल उनके प्रोफेशन, स्किल या फिर उनकी रंग रूप के कारण करते हों।

25 लाख रुपए में रिजॉर्ट में आई हिरोइन तृषा- तमिलनाडु नेता ने बयान देकर माँगी माफी

सबसे हालिया मुद्दा तो दक्षिण के तमिलनाडु नेता से जुड़ा है। वहाँ की हिरोइन तृषा को लेकर नेता एवी राजू ने कहा कि एक रिजॉर्ट में एंटरटेनमेंट के लिए एक विधायक ने जवान लड़की को मँगाया था। तब तृषा कृष्णन 25 लाख रुपए में वहाँ आई थीं। एवी राजू के इस बयान पर तो एक्ट्रेस ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कानूनी कार्रवाई की भी बात कही है। वहीं नेता ने ऐसी प्रतिक्रिया देख उनसे माफी माँग ली है।

लेकिन, सवाल है कि क्या ये राजनीति के लिए हिरोइनों को अपमानित करने का कल्चर ऐसे ही चलता रहेगा।

जया प्रदा के अंडरगार्मेंट पर आजम खान का बयान

साल 2019 में समाजवादी पार्टी के सांसद आजम खान ने अभिनेत्री रहीं जया प्रदा की ओर इशारा करते हुए उनके अंडरगार्मेंट्स पर विवादित बयान दिया था। उन्होंने शाहबाद में आयोजित जनसभा में आजम खान ने भाजपा की प्रत्याशी और पूर्व सांसद जया प्रदा के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। आजम ने जया प्रदा की तरफ इशारा करते हुए कहा था, “उसकी असलियत समझने में आपको 17 साल लग गए। मैं तो 17 दिन में ही पहचान गया कि इनके नीचे का जो अंडरवियर है, वो भी खाकी रंग का है।“

‘जया प्रदा का काफिला निकला…रामपुर की शामें रंगीन हो जाएगी’

समाजवादी पार्टी के ही नेता फिरोज खान ने भी जया प्रदा पर मार्च 2019 में अभद्र टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि एक बार वह बस से कहीं जा रहे थे तो वहाँ से जया का क़ाफ़िला गुज़रा, जिसके कारण जाम लग गया, तो उन्होंने बस से उतर के उन्हें देखने की कोशिश की और ये भी सोचा कि जाम खुलवाने के लिए कहीं वो ठुमके न लगा दें। अपनी ओछी सोच और जया पर ऐसी अभद्र टिप्पणी करने के बाद उन्होंने कहा कि रामपुर की शामें अब रंगीन हो जाएँगी, जब चुनावी माहौल चलेगा।

‘हेमा मालिनी के गाल जैसी सड़क’

इसी तरह कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे पीसी शर्मा ने भी एक बार हेमा मालिनी के गालों पर टिप्पणी की थी। उन्होंने सड़कों पर गड्ढे देखने के बाद कहा था कि भोपाल की सड़कों में गड्ढे देख उन्होंने कहा था– सड़कें कैलाश विजयवर्गीय के गाल जैसी हो गई हैं। 15-20 दिन में सड़क चकाचक हो जाएगी। हेमा मालिनी के गाल जैसी हो जाएगी।”

फिल्मी हिरोइनें भी हैं किसी की बेटी-बहन

आप देखिए कि ये सारे राजनेताओं ने जो भी बयान दिए वो सम्मान देने के संदर्भ में नहीं हैं। जबकि, चाहे ऐश्वर्या राय हों, हेमा मालिनी हों, जया प्रदा हों या फिर दक्षिण की तृषा कृष्णन हों… ये सारी महिलाएँ अपने क्षेत्र में मेहनत करके नाम कमाकर एक ऐसी ऊँचाई तक पहुँचीं हैं कि देश का बच्चा-बुजुर्ग सब इन्हें जानते हैं। और उनकी इसी उपलब्धि का फायदा उठाकर ये नेता जनता से उनका जिक्र करते हैं ताकि एक संवाद स्थापित हो… अपमान करते समय शायद वो भूल जाते हैं कि वो लोग खुद अपना क्षेत्र को यदि छोड़ दें तो किस स्तर पर आते हैं।

राहुल गाँधी को पूरा देश जानता है कि वो समय-समय पर नारी सम्मान की बातें करते रहते हैं। अगर कोई घटना भाजपा प्रदेश में घटित हुई है तो तुरंत नारी को न्याय दिलाने वो उस प्रदेश में पहुँच जाते हैं, लेकिन जब बात अपनी पार्टी द्वारा शासित राज्य की आती है तो वही राहुल गाँधी चुप हो जाते हैं।

इसी तरह जब बात राजनीति की आती है तो भी वो भूल जाते हैं कि अपने घोषणा पत्रों में जो वो नारियों के सम्मान की बातें करती हैं उन नारियों में ऐश्वर्या राय से लेकर तृषा कृष्णन भी आती हैं। ये महिलाएँ भी किसी की माँ, बहन और बेटी हैं। इनका नाम भी मेहनत करने से ही ऊँचाई पर पहुँचा है। सार्वजनिक स्थलों से इस तरह उनका नाम अपमानजनक संदर्भों में उछालना आखिर कितना सही है। क्या ऐसी ही बातें ये राजनेता अपने घरों की बेटियों-बहनों के बारे में सुन पाएँगे।

आज जिस तरह से राहुल गाँधी के बयान का विरोध हो रहा है उससे यही पता चलता है कि जिस जनता का प्रतिनिधि करने वो चले हैं वो उनसे ज्यादा समझदार है… जो उन्हें बता रही है कि ऐश्वर्या राय की फिल्म जगत में उपलब्धि उनकी राजनीति क्षेत्र में हासिल उपलब्धि से कहीं ऊपर है। कम से कम उन्हें अपनी बात कहने के लिए इतने नीचे स्तर तक नहीं गिरना पड़ता। लोग उन्हें जानते हैं, उनके काम की सराहना करते हैं, कुछ उन्हें आदर्श मानते हैं और कुछ उनके संघर्ष से सीखते हैं।

पहले अम्मी को फँसाकर साथ रखने लगा, फिर 8 साल की बेटी को हवस का शिकार बनाया: लखनऊ में मदरसे का मौलाना गिरफ्तार, भाई अरशद की तलाश

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मदरसा में पढ़ाने वाले एक मौलाना द्वारा अपनी छात्रा से रेप करने का मामला सामने आया है। पीड़िता की उम्र महज 8 वर्ष है। मौलाना आब्दीन के बच्ची की माँ से भी अवैध संबंध बताए जा रहे है। दावा है कि पीड़िता की माँ को भी अपनी बेटी के साथ हो रहे दुष्कर्म की जानकारी थी। इस मामले में पीड़िता के अब्बा ने मौलाना और उसके भाई के खिलाफ शिकायत की है।

इस मामले में पुलिस ने सोमवार (19 फरवरी 2024) को केस दर्ज करके मौलाना आब्दीन और बच्ची की माँ को गिरफ्तार कर लिया। वहीं, आब्दीन का भाई अरशद फरार है, जिसकी तलाश की जा रही है। आरोपितों के खिलाफ पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं में FIR दर्ज कर किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना लखनऊ के मलिहाबाद थाना क्षेत्र का है। शिकायतकर्ता बच्ची का अब्बा है, जो इसी थाना क्षेत्र का निवासी है। शिकायतकर्ता ओमान में नौकरी करता है। वह एक बार में 5 माह के लिए ओमान जाता है। इस बार जाने से पहले उसने अपनी बेटी का एडमिशन अपने घर से थोड़ी ही दूर स्थित न्यू हैदरगंज क्षेत्र में बने इस्लामिया शम्सुल उलूम मदरसे में करवा दिया था।

पीड़िता के पिता का आरोप है कि इस मदरसे में मौलाना आब्दीन बच्चों को दीनी (इस्लाम की) तालीम देता था। कुछ समय बाद मौलाना बच्ची के घर भी आने-जाने लगा। कुछ समय बाद मौलाना आब्दीन ने उनकी बीवी को अपने प्रेमजाल में फँसा लिया। थोड़े दिन बाद शिकायतकर्ता की बीवी मौलाना के ही साथ रहने लगी। बाद में महिला ने अपनी बेटी को मदरसे के हॉस्टल में शिफ्ट कर दिया।

यहाँ पर मौलाना ने 8 साल की इस बच्ची के साथ कई बार बलात्कार किया। जब बच्ची अपनी माँ को ये सारी बातें बताती थी तो वह उलटे उसकी पिटाई कर देती थी। शिकायतकर्ता का तो यहाँ तक आरोप है कि उसकी बीवी ही अपनी बेटी को मौलाना के पास भेजा करती थी। काफी समय बाद जब शिकायतकर्ता ओमान से लौटा तो बेटी ने उसे सारी बात बताई।

इसके बाद पीड़िता के अब्बा ने पुलिस में तहरीर दी और मौलाना आब्दीन के साथ उसके भाई अरशद को भी घिनौने कृत्य में शामिल बताया। शिकायतकर्ता ने अपनी बीवी पर भी रेप में मौलाना का साथ देने का आरोप लगाया है। इसके साथ ही बच्ची के पिता को जान से मारने की धमकी देने वाले मौलाना के अन्य भाइयों अलीम, शलीम, शमीम, हमीम और शाद को भी पुलिस ने आरोपित बनाया है।

‘गोली लगने से किसान की मौत’: हरियाणा पुलिस ने आंदोलनकारी नेताओं के दावे को बताया अफवाह, अब तक 3 पुलिसकर्मियों की हो चुकी है मौत

पंजाब से हजारों की संख्या में किसान दिल्ली के लिए मार्च कर गए, जिसे किसान आंदोलन 2.0′ कहा जा रहा है। ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर चले इन किसानों को हरियाणा के शम्भू और खनौरी बॉर्डर पर रोका गया है, जहाँ प्रदर्शनकारी JCB से लेकर मिट्टी खोदने वाली मशीनें तक लेकर आ गए। अब अफवाह उड़ाई जा रही है कि आंदोलन में 2 किसानों की मौत हो गई है। हालाँकि, हरियाणा पुलिस ने साफ़ कर दिया है कि आंदोलन में किसी किसान की मौत नहीं हुई है।

हरियाणा पुलिस ने कहा, “अभी तक की प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुधवार (21 फरवरी, 2024) को ‘किसान आंदोलन’ में किसी भी किसान की मृत्यु नहीं हुई है। यह मात्र एक अफवाह है। दाता सिंह-खनौरी बॉर्डर पर 2 पुलिसकर्मियों तथा एक प्रदर्शनकारी के घायल होने की सूचना है जिनका उपचार चल रहा है।” किसान नेता किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने दावा किया था कि उनके एक साथी की इस आंदोलन में मौत हो गई है। भारी-भड़कम मशीनों के साथ किसान बॉर्डर पर जमे हुए हैं।

हरियाणा पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की भी अपील की है। उधर निहंग किसान भी हरियाणा में बैरिकेडिंग के पास पहुँच कर उसे हटाने की कोशिश कर रहे हैं। इधर खबर ये है कि किसान आंदोलन में ड्यूटी पर लगे एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई है। रोहतक के रहने वाले सब-इंस्पेक्टर विजय कुमार को फतेहाबाद टोहाना के पंजाब बॉर्डर क्षेत्र में गश्त की जिम्मेदारी दी गई थी। ड्यूटी के दौरान ही उनके सीने में तेज़ दर्द उठा, जिसके बाद वो घर चले गए।

हरियाणा पुलिस ने ‘किसान आंदोलन’ में किसान की मौत की अफवाहों को नकारा

मंगलवार की शाम को उनकी मौत हो गई। इस आंदोलन में पुलिसकर्मियों की मौत का ये पहला मामला नहीं है, बल्कि इससे पहले भी 2 पुलिसकर्मियों की मौत हो चुकी है। रोहतक के अर्बन स्टेट के रहने वाले विजय इससे पहले नूहं में तैनात थे। वहीं हरियाणा की सीमाओं पर पुलिस और किसानों में झड़प जारी है। पुलिस ने रबड़ की गोलियों का इस्तेमाल कर प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा। किसान नेताओं का कहना है कि 25 किसान घायल भी हुए हैं। हिंसा के बावजूद वो अपने आंदोलन को शांतिपूर्ण बता रहे हैं।

नोटिस बोर्ड पर बताना होगा कंपनी में कितने कन्नड़ करते हैं काम: कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार का फरमान, कहा- उल्लंघन पर रद्द करेंगे MNC का लाइसेंस

कर्नाटक में काम करने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियों (MNC) के लिए राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार ने एक फरमान जारी किया है। राज्य में काम करने वाली MNCs को नोटिस बोर्ड पर यह जानकारी देनी होगी कि उनके यहाँ कितने कन्नड़ काम करते हैं। कर्नाटक सरकार के मंत्री ने कहा कि ऐसा नहीं करने वाली MNC कर्नाटक में काम नहीं कर पाएँगी और उनका लाइसेंस रद्द किया जाएगा।

कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार में संस्कृति मंत्री शिवराज तंगादगी ने विधान परिषद में बुधवार (21 फरवरी 2024) को यह ऐलान किया। तंगादगी ने कन्नड़ भाषा को बढ़ावा देने के लिए लाए गए विधेयक पर चर्चा के दौरान यह ऐलान किया। उन्होंने कहा कि इसके लिए राज्य में नियम बनाए जाएँगे और इसके लिए कमिटी बनाई जा चुकी है। हालाँकि, कुछ रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें टेक कंपनियों को अभी शामिल नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा, “इस बात पर विचार हुआ है कि यहाँ (कर्नाटक में) काम करने वाली MNC अपने यहाँ काम करने वाले कन्नड़ लोगों की जानकारी नोटिस बोर्ड पर दर्शाएँ। हम इसके लिए नियम बनाएँगे। इसके लिए एक कमिटी बनाई गई है और मैं इसका चेयरमैन हूँ। इसमें कई विभागों के सचिव हैं। वे कई सुझाव दे रहे हैं। हम MNC और बाकी कम्पनियों के लिए कानूनों पर चर्चा करेंगे और फिर नियम बना देंगे।”

तंगादगी ने कहा कि जो कम्पनियाँ इन नियमों को नहीं मानेंगी, उनका लाइसेंस रद्द किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कन्नड़ भाषा में न्यायिक काम हो, इसके लिए भी सरकार प्रयासरत है। उन्होंने वकीलों से अपील की कि वो कोर्ट में कन्नड़ में बहस करें। साथ ही निर्णय भी कन्नड़ में हों। मंत्री ने यह भी कहा कि एक एप बनाया जा रहा है, जिस पर कन्नड़ भाषा का अपमान होने पर शिकायत की जा सकती है।

गौरतलब है कि कर्नाटक विधानसभा इस समय एक ऐसे विधेयक पर चर्चा कर रही है जिसके अंतर्गत कर्नाटक में प्रतिष्ठानों को अपने नाम का 60% हिस्सा कन्नड़ भाषा में रखना होगा। यह विधेयक कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने बजट पेश करते हुए सामने रखा था। यह बिल बीते दिनों हुए कुछ प्रदर्शनों के बाद आया है।

बीते दिनों कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में हुए कुछ प्रदर्शनों में कई बड़ी कम्पनियों के साइनबोर्ड तोड़ दिए गए थे क्योंकि उन पर कन्नड़ नहीं लिखी थी। इस प्रदर्शन के दौरान तोड़फोड़ करने वाले लोगों पर दर्ज केस रद्द करने की माँग भी की गई है।

UIDAI ने कहा दुरुस्त होगी ‘तकनीकी गलती’, फिर भी आधार पर रार ठान रही ममता बनर्जी: नया कार्ड देगी बंगाल की TMC सरकार

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने उन सभी को ‘नया आधार’ देने का ऐलान किया है, जिनके आधार कार्ड तकनीकी गड़बड़ियों की वजह से बंद हुए। ममता बनर्जी ने इसकी शिकायत केंद्र सरकार से भी की है, साथ ही पश्चिम बंगाल के लोगों के लिए नया ‘पोर्टल’ लॉन्च कर दिया गया है। ममता बनर्जी ने कहा है कि राज्य के लोगों को सरकारी योजनाओं से वंचित नहीं किया जाएगा, जिसका भी आधार कार्ड बंद किया गया हो, वो तुरंत उस पोर्टल पर जाकर अपनी डिटेल्स दे दें, इसके बाद पश्चिम बंगाल सरकार उन्हें अपनी (राज्य) तरफ से ‘आधार’ जैसा कार्ड देगी। हालाँकि यूआईएडीआई ने कहा है कि तकनीकी खामियों की वजह से कुछ आधार बंद हुए थे, लेकिन सभी फिर से चालू किए जा चुके हैं।

ममता बनर्जी ने सोमवार (19 फरवरी 2024) को सचिवालय में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “मैं लोगों से पोर्टल को सूचित करने के लिए कहूँगा कि क्या उनका आधार कार्ड निष्क्रिय कर दिया गया है। उन्हें एक वैकल्पिक पहचान पत्र देंगे, उनकी तस्वीरें लेंगे और उसे जारी करेंगे ताकि बंगाल के लोग उन्हें मिलने वाले लाभों से वंचित न रहें। अगर आधार कार्ड नहीं है तो चिंता न करें। हम दूसरा कार्ड जारी करेंगे। हम आवश्यक कार्रवाई करेंगे। अगर जरूरत पड़ी तो हम एक अलग कार्ड जारी करेंगे ताकि कोई भी हमारी सामाजिक कल्याण योजनाओं से वंचित न रहे।”

ममता बनर्जी ने कहा कि चुनाव से ठीक पहले कार्ड बंद करना, किस तरह की राजनीति है? उन्होंने कहा कि वह आधार कार्ड को निष्क्रिय करने पर कानूनी सलाह ले रही हैं और अपना विरोध दर्ज कराने के लिए प्रधानमंत्री को भी लिखेंगी।

पश्चिम बंगाल में आधार कार्ड के डिएक्टिवेशन का आरोप लगाते हुए ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भी लिखा है। उन्होंने पत्र में लिखा, “यह पता चला है कि नई दिल्ली में यूआईडीएआई का प्रधान कार्यालय बिना किसी जाँच या व्यक्तियों को सुने और राज्य सरकार को विश्वास में लिए, सीधे व्यक्तियों और परिवार के सदस्यों को पत्र जारी कर उनके आधार कार्ड को बंद करने के बारे में सूचित कर रहा है, इसके पीछे आधार (नामांकन और अद्यतन) विनियम, 2016 के नियन 28ए का हवाला दिया जा रहा है। यह आश्चर्य की बात है कि बिना किसी पूर्व सूचना के और कार्ड धारकों को सुनवाई का कोई अवसर दिए बिना आधार कार्ड को निष्क्रिय करने की ऐसी प्रक्रिया घोर उल्लंघन है। आधार (नामांकन और अद्यतन) विनियम, 2016 के विनियम 29(1) और प्राकृतिक न्याय का भी घोर उल्लंघन है।”

ममता बनर्जी ने पत्र में आगे लिखा, “मैं आपसे बिना कारण बताए आधार कार्ड को निष्क्रिय करने की ऐसी अचानक कार्रवाई के कारणों के बारे में जानना चाहती हूँ। क्या यह सिर्फ पात्र लाभार्थियों को लाभ से वंचित करने के लिए है या आगामी लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बड़े पैमाने पर लोगों के बीच दहशत की स्थिति पैदा करने के लिए है?” पत्र में उन्होंने आगे लिखा, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और समाज के गरीब वर्ग के हितों के खिलाफ राज्य में आधार कार्ड को निष्क्रिय करने की ऐसी कार्रवाई देखकर मैं वास्तव में स्तब्ध हूँ।

तकनीकी खराबी की वजह से दिक्कतें?

बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर ने कहा कि जिन लोगों के आधार कार्ड “निष्क्रिय” हो गए हैं, उन्हें वापस मिलेगा। उन्होंने कहा, “केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पहले ही साफ कर दिया है कि आधार को बंद करने की प्रक्रिया रोक दी गई है और जिनके कार्ड पहले ही बंद हो चुके हैं, उन्हें वापस मिल जाएगा। मुझे उन लोगों से आवेदन लेने की जिम्मेदारी दी गयी है। आपको बस अपना नाम, फोन नंबर और आधार नंबर लिखना होगा और लिखना होगा कि इसे बंद कर दिया गया है। मैं इसे गृह मंत्रालय को सौंप दूँगा और समस्या का समाधान हो जाएगा।”

शांतनु ठाकुर ने कहा, “मैं पहले ही कह चुका हूँ कि यह कुछ तकनीकी खराबी के कारण हुआ।” उन्होंने कहा, “मैं मुख्यमंत्री से पूछना चाहता हूँ कि क्या यह (आधार) राज्य का मुद्दा है? यह विभाग सीधे केंद्र सरकार के अधीन है। आप ऐसे दावे (आधार बंद किए जा रहे) करके लोगों को गुमराह कर रही हैं। बता दें कि आधार एजेंसी ने पश्चिम बंगाल में आधार को लेकर फैली बातों को अफवाह करार दिया है और कहा है कि किसी का भी आधार ‘डिएक्टिवेट’ नहीं हुआ है। कुछ तकनीकी खामियों की वजह से ये दिक्कत आई थी।

Mamata Banerjee announces alternate AADHAR Card for minorities in West Bengal after mass deactivation by centre

केरल से ₹45 लाख चुरा कर अजमेर के दरगाह क्षेत्र में छिपे दानिश-शहजाद, पकड़ने आई पुलिस टीम पर की फायरिंग-मारा पेचकस: IPS अधिकारी घायल

राजस्थान के अजमेर में अपराधियों को पकड़ने गई केरल और अजमेर की पुलिस संयुक्त टीम पर हमले की खबर है। इस हमले में एक IPS अधकारी घायल हो गया है। हालाँकि, अधिकारी के साथ मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों ने दानिश और शहजाद को दबोच लिया। मूलतः उत्तराखंड निवासी इन दोनों आरोपितों के पास से हथियार और गोलियाँ बरामद हुई हैं। घटना मंगलवार (20 फरवरी 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला अजमेर के दरगाह थाना क्षेत्र का है। मंगलवार को यहाँ केरल पुलिस अपने राज्य में हुई 45 लाख रुपए की चोरी की जाँच करने पहुँची थी। सहयोग के लिए केरल पुलिस ने अजमेर पुलिस को भी साथ लिया था। टीम का नेतृत्व आईपीएस अधिकारी शरण कांवले गोपीनाथ कर रहे थे। चोरी में उत्तराखंड के रुड़की क्षेत्र निवासी दानिश और शहज़ाद थे।

पुलिस को पता यह भी चला कि दोनों आरोपित दरगाह थाना क्षेत्र में फरारी काटने का इंतज़ाम बना रहे थे। सूचना सही पाई गई थी और दानिश व शहजाद पुलिस को दरगाह थाना क्षेत्र में ही मिल गए। पुलिस का दोनों से आमना-सामना शाम को हुआ। जैसे ही सादी वर्दी में आए पुलिसकर्मियों ने दोनों आरोपितों को दबोचा, वो पुलिस बल से उलझ गए। दोनों छुड़ा कर भागने की कोशिश करने लगे।

इसी दौरान एक आरोपित ने पुलिस पर गोली चला दी। इतना ही नहीं, पेचकस से हमला करने की कोसिश हुई। इस संघर्ष में IPS शरण कांवले घायल हो गए। हालाँकि, अन्य पुलिसकर्मियों ने दानिश और शहजाद को भागने नहीं दिया और आखिरकार उन्हें दबोच लिया गया। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस मामले में अब दोनों पर फायरिंग का भी मामला दर्ज किया गया है।

जब दोनों की तलाशी हुई तो उनके पास से 2 पिस्टल और 7 गोलियों के साथ एक पेचकस भी बरामद हुआ। इस पेचकस का इस्तेमाल हमले में भी हुआ था। दोनों के पास से कुछ नकदी भी मिली है, जिसे सील कर दिया गया है। घायल अंडर ट्रेनी IPS की हालात फ़िलहाल खतरे से बाहर बताई जा रही है। केरल पुलिस दानिश और शहजाद को कानूनी प्रकियाएँ पूरी करके अपने साथ केरल ले गई।

‘हम प्राचीन एवं महान सभ्यताएँ, अब संबंधों को देंगे आधुनिक स्वरूप’: ग्रीस के प्रधानमंत्री से मिले PM मोदी, कृषि से लेकर डिफेन्स तक में साथी होगा यूनान

यूनान (Greece) के प्रधानमंत्री किरियाकोस मित्सोताकिस भारत पहुँचे हुए हैं। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इसके बाद दोनों राजनेताओं ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। पीएम मोदी ने ग्रीक प्रधानमंत्री और उनके प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए याद किया कि पिछले वर्ष वो भी ग्रीस गए थे। उन्होंने बताया कि ये यात्रा दोनों देशों के बीच मजबूत होती रणनीतिक साझेदारी का संकेत है। पीएम मोदी ने कहा कि 16 वर्षों के बाद ग्रीस के प्रधानमंत्री का भारत आना अपने-आप में एक ऐतिहासिक अवसर है।

पीएम मोदी ने कहा कि हमारी आज की चर्चाएँ बहुत ही सार्थक और उपयोगी रहीं, ये प्रशंसा का विषय है कि 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने की ओर अग्रसर हैं। सहयोग को नई ऊर्जा और दिशा देने के लिए नए अवसरों की पहचान की गई। पीएम मोदी ने कहा कि कृषि के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच करीबी सहयोग की अनेक संभावनाएँ हैं, पिछले वर्ष इस क्षेत्र में किए गए समझौते के कार्यान्वयन के लिए दोनों देश कदम उठा रहे हैं। पीएम मोदी ने बताया कि फार्मा, मेडिकल उपकरण, तकनीक, खोज, स्किल डेवलपमेंट और स्पेस जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “दोनों देशों के स्टार्टअप्स को आपस में जोड़ने पर चर्चा हुई। शिपिंग और कनेक्टिविटी दोनों देशों के लिए उच्च प्राथमिकता के विषय हैं, इनमें भी सहयोग को बढ़ाने पर विचार-विमर्श हुआ। डिफेंस और सिक्योरिटी में बढ़ता सहयोग हमारे गहरे आपसी विश्वास को दर्शाता है। इस क्षेत्र में वर्किंग ग्रुप के गठन से हम डिफेन्स, साइबर सिक्योरिटी, आतंकवाद निरोध और समुद्री सुरक्षा जैसी साझा चुनौतियों पर आपसी समन्वय बढ़ा सकेंगे। भारत में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में सहयोग के लिए नए अवसर बन रहे हैं।”

पीएम मोदी ने कहा कि भारत और ग्रीस की चिंताएँ एवं प्राथमिकताएँ समान हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन और महान सभ्यताओं के रूप में भारत और ग्रीस के बीच गहरे सांस्कृतिक और पीपल-टू-पीपल संबंधों का लंबा इतिहास है, विचारों का आदान-प्रदान होता रहा है। इन संबंधों को आधुनिक स्वरूप देने के लिए कई आधुनिक अवसरों की पहचान हुई। 2025 में भारत-ग्रीस के कूटनीतिक संबंधों की 75वीं वर्षगाँठ मनाई जाएगी, इसके लिए एक्शन प्लान बना है।

इसका तहत दोनों देशों के साझा धरोहर और अन्य उपलब्धियों को वैश्विक मंचों पर दर्शाया जाएगा। दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच कई क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा हुई। इस पर सहमति जताई गई कि कूटनीतिक तरीकों से ही मसलों का हल संभव है। इंडो-पैसिफिक में ग्रीस की भूमिका का भारत ने स्वागत किया। UN व अन्य वैश्विक संस्थानों में सुधार कर के उन्हें समकालिक बनाए जाने पर भी बल दिया गया। ग्रीस और भारत के संबंध कई ईसापूर्व पहले तक जाते हैं।

जिस हिरोइन से ‘रेप’ करना चाहता था मंसूर अली खान, उस पर अब तमिलनाडु के नेता ने की गंदी बात: कहा- ₹25 लाख में आई… चेतावनी के बाद माँगी माफी

तमिलनाडु की अन्नाद्रमुक (AIADMK) पार्टी के पूर्व नेता एवी राजू ने दक्षिण फिल्मों की हिरोइन तृषा कृष्णन पर एक बेहद आपत्तिजनक बयान दिया, जिसे सुन अभिनेत्री भड़क गईं हैं। एक्ट्रेस ने पूर्व नेता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है। पूरा मामला सोशल मीडिया पर वायरल है। लोग उनकी आलोचना कर रहे हैं। अभिनेत्री ने भी उनकी आलोचना की है।

जानकारी के अनुसार, सालेम के नेता एवी राजू को AIADMK से 17 फरवरी को निकाल दिया गया था। इसके बाद पार्टी के खिलाफ उन्होंने मोर्चा खोल दिया। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभिनेत्री तृषा पर काफी आपत्तिजनक बयान दिया। राजू ने कहा कि जब 2017 में उनकी पार्टी के भीतर विधायकों ने बगावत की थी तो इन विधायकों को कूवाथुर में स्थित गोल्डन बे रिजॉर्ट में ठहराया गया था। यहाँ पर पार्टी के विधायकों के मनोरंजन के इंतजाम हुए थे।

उन्होंने इसी बयान में आगे कहा कि इस रिजॉर्ट में अभिनेत्री तृषा को भी बुलाया गया था। उन्होंने कहा कि अभिनेत्री तृषा को एक विधायक के कहने पर बुलाया गया था और उन्हें इसके लिए ₹25 लाख दिए गए थे। एक मीडिया रिपोर्ट में बताया गया है कि एवी राजू के यह आरोप AIADMK के पूर्व विधायक वेंकटचालम पर हैं। उन्होंने तृषा को बुलाने के सम्बन्ध में कहा कि वेंकटचालम कोई युवा लड़की चाहते थे। एवी राजू ने यह सब इंतजाम करने के आरोप एक अन्य अभिनेता पर लगाए हैं। उनके इस बयान पर सोशल मीडिया पर खलबली मच गई और उनकी आलोचना हुई।

तृषा ने अपने ऊपर दिए गए बयान पर एक्स पर ट्वीट कर जवाब दिया, “मुझे यह देख कर बहुत पीड़ा होती है कि निचले और तुच्छ लोग ध्यानाकर्षण के किसी भी स्तर तक गिर सकते हैं। तुम चिंता ना करो, इस पर मैं कड़ी कार्रवाई करूँगी। जो भी कहा जाना था इस मामले में कहा जा चुका है, और अब मामला कानूनी रूप से देखा जाएगा।”

तृषा के इस जवाब के बाद एवी राजू ने तृषा से माफ़ी माँग ली। राजू ने कहा कि उन्होंने सिर्फ वह बताया जो उन्हें वेंकटचालम से पता चला था। उन्होंने कहा कि उनके बयान को गलत तरीक से पेश किया गया और अगर इससे किसी को दुख हुआ है तो वह इसके लिए माफ़ी माँगते हैं।

हालाँकि, अभी यह नहीं स्पष्ट हुआ है कि माफ़ी के बाद आगे तृषा की रणनीति क्या होगी। यह स्पष्ट है कि तृषा को इस मामले में बड़े स्तर पर समर्थन हासिल हुआ है। तृषा के समर्थन में FEFSI (फिल्म एम्प्लोयी फेडरेशन ऑफ साउथ इंडिया) ने भी एक आधिकारिक बयान जारी करके एवी राजू के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की माँग की है।

तृषा पर मंसूर अली खान का विवादित बयान

इससे पहले तृषा को लेकर दक्षिणी फिल्मों में काम करने वाले अभिनेता मंसूर अली खान ने भी विवादित बयान दिया था। मंसूर अली खान ने कहा था, “मुझे जब मालूम हुआ कि मैं तृषा के साथ काम कर रहा हूँ तो मुझे लगा कि यह एक बेडरूम सीन होगा। मुझे लगा कि मैं फिल्म में तृषा को उठाकर बेडरूम में ले जाऊँगा जैसा मैंने और भी कई अभिनेत्रियों के साथ पहले फिल्मों में किया है। मैंने पहले भी कई रेप सीन किए हैं और मेरे लिए यह कोई नई बात नहीं है। लेकिन, इन लोगों ने कश्मीर में शूटिंग के दौरान मुझे तृषा को देखने तक नहीं दिया।”

मंसूर ने यह बयान फिल्म विजय को लेकर दिया था, जिसमें वह और तृषा तथा विजय साथ में काम कर रहे थे। इसके बाद तृषा ने उन्हें करारा जवाब दिया था। तृषा ने ट्विटर पर लिखा था, “मेरी जानकारी में एक वीडियो आया है, जिसमें मंसूर अली खान मेरे बारे में उल्टी सीधी बातें कर रहे हैं। मुझे यह बयान स्त्री-विरोधी, रूढ़िवादी, अश्लील और भद्दा लगा। मैं इसकी निंदा करती हूँ। वो मेरे साथ काम करने की उम्मीद करते रह सकते हैं, लेकिन यह मेरी खुशकिस्मती रही है कि मैंने उनके जैसे नीच आदमी के साथ कभी काम नहीं किया है और कोशिश करूँँगी कि भविष्य में भी ना करूँ। उनके जैसे लोग मानवता पर दाग हैं।” इसके बाद इस मामले ने कानूनी रूप ले लिया था लेकिन उन पर एक अदालत ने ₹1 लाख का जुर्माना भी लगाया था।