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अलीम, असलम, कामिल, सद्दाम, खालिद… अलवर बीफ मंडी केस की FIR में 22 नाम: बताया- गाय काटने की थी तैयारी, पुलिस को देखते ही भागे

राजस्थान पुलिस ने रविवार (18 फरवरी 2024) को गाय काट कर गोमांस बेचने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। मुखबिर ने पुलिस को बताया था कि राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले के किशनगढ़ बास में खुले में गाय काटी जा रही है और उसका मांस बेचा जा रहा है। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कई आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

ऑपइंडिया ने इस मामले में दर्ज की गई FIR हासिल की है। यह FIR 19 फरवरी 2024 को दर्ज गई थी। FIR में राजस्थान गोवंश पशु (वध निषेध और अस्थायी प्रवासन या निर्यात विनियमन) अधिनियम-1995 की धारा 3, 4, 5, 8 और 9 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। गाय काटने और बेचने के मामले में 22 लोगों को नामजद किया गया है।

गोमांस की बिक्री और गोवंश को काटने के मामले में सभी आरोपित मुस्लिम हैं। इस मामले में पुलिस ने रति खान, साहुन, मोसम, हारून, इब्बार, अलीम, असलम, कामिल, सद्दाम, खालिद, फकरू, मोर्मल, खल्ली, रहीस, सलीम, मन्नन, खालिद, कसम, हब्बी, असलम, कय्यूम समेत 22 लोगों को आरोपित बनाया गया है। ये सभी किशनगढ़ बास इलाके के मिर्जापुर और बरसंगपुर के निवासी हैं।

पुलिस FIR में दर्ज सभी गाय का गोमांस बेचने वालों के नाम
पुलिस FIR में दर्ज सभी आरोपितों के नाम

FIR के अनुसार, DSP दिनेश कुमार और उनकी टीम ने दैनिक भास्कर में अवैध गोमांस की मंडी को लेकर प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर 18 फरवरी को कार्रवाई शुरू की। उनके साथ लगभग 20 लोगों की टीम थी। इस टीम ने मिर्जापुर और गाँव बरसंगपुर के इलाके में अभियान चलाया। पुलिस की नजर लोगों पर विशेष तौर पर थी, जो पहले गौकशी और गौतस्करी में शामिल रहे थे।

राजस्थान पुलिस की टीम सूचना के आधार पर शाम को 5 बजे के आसपास मिर्जापुर के जंगल वाले बीहड़ इलाके में पहुँची। वहाँ पुलिस को एक जगह पर चार गाय बँधी हुई दिखीं। इन गायों के पास लगभग 18-19 लोग खड़े थे। वे इन गायों को काटने की तैयारी कर रहे थे। पुलिस को देखते ही ये सभी गाँवों को ओर भाग गए। इनमें से कुछ की पहचान पुलिस ने कर ली है।

वहाँ मिलीं गायों का परीक्षण करने पर पाया गया कि दो गायों को गहरे घाव इन गौतस्करों ने पहुँचाए थे, जबकि दो गायें सामान्य अवस्था में मिलीं। कुछ दूरी पर एक गाय मृत अवस्था में मिली, जिसकी खाल उतारी जा चुकी थी। पुलिस ने ज़िंदा मिली चार गायों को गौशाला भेज दिया। FIR में बताया गया है कि वहाँ पहले काटे गए कुछ गौवंश के अवशेष भी मिले हैं।

इस साफ़ हुआ है कि यहाँ लम्बे समय से गौकशी का धंधा चलता आ रहा है। इस विषय में जानकारी उच्चाधिकारियों को भी दे दी गई है। पुलिस ने इस मामले में स्थानीय लोगों से पूछताछ की है। FIR में स्पष्ट किया गया है कि जिन गौतस्करों के विरुद्ध अब मामला दर्ज हुआ है, वह पहले भी यही काम करते आए हैं और उनके खिलाफ पूर्व में भी मामले दर्ज हो चुके हैं।

गौरतलब है कि हाल ही में राजस्थान के अलवर में बीफ मंडी का खुलासा हुआ था। इसके बाद प्रशासन एक्शन के मोड में है। यह मंडी किशनगढ़ बास में रूंध गिदावड़ा के बीहड़ों में चल रही थी। यहाँ करीब 20 गाय रोजाना खुलेआम काटी जाती थी। 50 गाँवों और लगभग 300 दुकानों में गोमांस की सप्लाई होती थी।

इसको लेकर कुछ वीडियो भी सामने आए थे। वीडियो में दिख रहा था कि बिरसंगपुर के पास रुंध गिदवडा के बीहड़ों में गायों को बेरहमी से मारा जा रहा है। इसके बाद उनकी खाल उतारी जा रही है। गायों की हत्या के बाद गोमांस को व्हाट्सएप पर ऑर्डर लेकर घर तक सप्लाई दी जाती थी। इस मंडी में सैकड़ों की तादाद में खरीदार भी आते थे।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया था कि बीफ मंडी की जानकारी होने के बाद भी पुलिस कोई कार्रवाई नहीं करती। खुलासे के बाद जयपुर रेंज के IG उमेश चंद्र दत्त के नेतृत्व में बास इलाके के उन बीहड़ों में छापेमारी की गई, जहाँ गोकशी होने का दावा किया गया था। सूचना सही पाई गई। पुलिस को देखकर गोतस्कर अपने वाहन छोड़ फरार हो गए थे।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, बीहड़ की लगभग 500 बीघे जमीन पर पहले कब्जा किया गया और फिर बीफ मंडी शुरू की गई। कब्जे की 70 बीघे जमीन पर गेहूँ और सरसों की फसल लगाई गई थी। अवैध निर्माण भी किए थे। सोमवार (19 फरवरी 2024) को प्रशासन ने फसल रौंदकर इस जमीन को मुक्त कराया। साथ ही गोकशी से जुड़े लोगों के करीब दर्जनभर निर्माणों पर बुलडोजर की कार्रवाई की।

जिस आदिनाथ मंदिर को तोड़ बनाई ‘अदीना मस्जिद’, वहाँ हिन्दुओं ने की पूजा: बंगाल पुलिस ने की FIR, कहा- जहाँ मन हो वहाँ प्रणाम नहीं कर सकते

पश्चिम बंगाल के मालदा में एक युवा पुजारी के नेतृत्व में हिन्दुओं के एक दल ने विवादित ‘अदीना मस्जिद’ परिसर के भीतर पूजा की। यह पूजा शनिवार (17 फरवरी, 2024) को की गई। इस युवा पुजारी का नाम हिरनमॉय गोस्वामी है।

गोस्वामी ने भारतीय पुरातव सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित विवादित अदीना मस्जिद का दौरा किया था। यहाँ उन्होंने शिवलिंग और अन्य हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ भी देखी थी। इसके बाद उन्होंने अपने कुछ अनुयायियों के साथ यहाँ पर पूजा और मंत्रोच्चार चालू कर दिया।

गोस्वामी और अन्य हिन्दुओं के पूजा-पाठ से इलाके के मुस्लिमों को समस्या हो गई। उन्होंने स्थानीय पुलिस को सूचना दी। यहाँ पर गोस्वामी को रोकने के लिए सब इंस्पेक्टर नवीन चन्द्र पोद्दार पहुँच गए। गोस्वामी को पोद्दार ने बताया कि वह इस विवादित मस्जिद में पूजा-अर्चना नहीं कर सकते। इससे दोनों पक्षों में गहमागहमी बढ़ गई। हिरनमॉय गोस्वामी ने पूजा रोके जाने को लेकर पुलिस अधिकारी से प्रश्न पूछने चालू कर दिए।

गोस्वामी ने पुलिस अधिकारी पोद्दार से पूछा कि आखिर उनका अपराध क्या है? पोद्दार ने इस पर कहा, “तुम्हारा अपराध ये है कि तुम जहाँ चाह रहे हो वहाँ पर प्रणाम कर रहे हो, ये यहाँ नहीं हो सकता।” उनकी इस टिप्पणी पर विवाद हो गया। यहाँ पूजा करने वाले गोस्वामी वृन्दावन में विश्वविद्या ट्रस्ट के भी मुखिया हैं। गोस्वामी ने पुलिस अधिकारी पोद्दार से कहा कि जब यहाँ उन्हें मूर्तियाँ दिख रही हैं तो भला वह पूजा क्यों नहीं कर सकते?

उन्होंने कहा, “मुझे वो आदेश दिखाओ जिसमें यह लिखा हो कि मैं यहाँ प्रणाम नहीं कर सकता। मैं तो यहीं प्रणाम करूँगा। तुम क्या कर लोगे? क्या तुम्हारे पास ये अधिकार है कि मुझे यहाँ से बाहर जाने के लिए बोलो।” इसके बाद हिन्दुओं ने लिखित आदेश दिखाने की माँग की कि यहाँ उनका आना वर्जित है।

इस मामले में ASI ने हिरनमॉय गोस्वामी के विरुद्ध FIR मालदा के एक पुलिस थाने में दर्ज करवाई है। एक पुलिस अधिकारी ने इस विषय में द टेलीग्राफ को बताया, “हमने ASI की शिकायत के आधार पर एक FIR दर्ज कर ली है।” यह भी बताया गया है कि इस इलाके में पुलिस की बड़ी संख्या में तैनाती की गई है।

गौरतलब है कि जिस विवादित मदीना मस्जिद के भीतर यह पूरा विवाद हुआ है, उसका निर्माण इस्लामिक आक्रान्ता सुल्तान सिकंदर शाह ने 1369 में हिन्दू और बौद्ध मंदिरों को तोड़ कर करवाया था। इससे पहले मई 2022 में भाजपा नेता रतीन्द्र बोस ने कहा था कि इस विवादित मस्जिद के नीचे ‘आदिनाथ मंदिर‘ है। उन्होंने एक ट्वीट में यह बताया था कि इसके लिए जीतू सरदार ने अपने प्राणों की आहुति दी थी।

उन्होंने बताया था, “जीतू सरदार की मौत इस मंदिर को मुस्लिम और अंग्रेज शासकों से बचाते हुए हुई थी। यह मामला मेरे मन में कई बार जब मैंने यहाँ स्थानीय विधायक चिन्मोय देब बर्मन के साथ यात्रा की। काशी के भगवान विश्वनाथ अपने स्थान पर वापस आ गए हैं, क्या अब भगवान आदिनाथ का मौक़ा है?”

‘सम्यक ज्ञान, सम्यक दर्शन और सम्यक चरित्र की त्रिवेणी थे आचार्य विद्यासागर’: जैन मुनि को PM मोदी ने किया नमन, कहा- उनका जीवन शिक्षा जैसे क्षेत्रों में भी पथ प्रदर्शक

जीवन में हम बहुत कम ऐसे लोगों से मिलते हैं, जिनके निकट जाते ही मन-मस्तिष्क एक सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। ऐसे व्यक्तियों का स्नेह, उनका आशीर्वाद, हमारी बहुत बड़ी पूँजी होती है। संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज मेरे लिए ऐसे ही थे। उनके समीप अलौकिक आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता था। आचार्य विद्यासागर जी जैसे संतों को देखकर ये अनुभव होता था कैसे भारत में आध्यात्म किसी अमर और अजस्र जलधारा के समान अविरल प्रवाहित होकर समाज का मंगल करता रहता है।

आज मुझे, उनसे हुई मुलाकातें, उनसे हुआ संवाद, सब बार-बार याद आ रहा है। पिछले साल नवंबर में छत्तीसगढ़ में डोंगरगढ़ के चंद्रगिरी जैन मंदिर में उनके दर्शन करने जाना मेरे लिए परम सौभाग्य की बात थी। तब मुझे जरा भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि आचार्य जी से मेरी यह आखिरी मुलाकात होगी। वह पल मेरे लिए अविस्मरणीय बन गया है। इस दौरान उन्होंने काफी देर तक मुझसे बातें की। उन्होंने पितातुल्य भाव से मेरा ख्याल रखा और देश सेवा में किए जा रहे प्रयासों के लिए मुझे आशीर्वाद भी दिया। देश के विकास और विश्व मंच पर भारत को मिल रहे सम्मान पर उन्होंने प्रसन्नता भी व्यक्त की थी। अपने कार्यों की चर्चा करते हुए वह काफी उत्साहित थे। इस दौरान उनकी सौम्य दृष्टि और दिव्य मुस्कान प्रेरित करने वाली थी। उनका आशीर्वाद आनंद से भर देने वाला था, जो हमारे अंतर्मन के साथ-साथ पूरे वातावरण में उनकी दिव्य उपस्थिति का अहसास करा रहा था। उनका जाना उस अद्भुत मार्गदर्शक को खोने के समान है, जिन्होंने मेरा और अनगिनत लोगों का मार्ग निरंतर प्रशस्त किया है।

भारतवर्ष की ये विशेषता रही है कि यहाँ की पावन धरती ने निरंतर ऐसी महान विभूतियों को जन्म दिया है, जिन्होंने लोगों को दिशा दिखाने के साथ-साथ समाज को भी बेहतर बनाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। संतों और समाज सुधार की इसी महान परंपरा में संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज जी का प्रमुख स्थान है। उन्होंने वर्तमान के साथ ही भविष्य के लिए भी एक नई राह दिखाई है।

उनका संपूर्ण जीवन आध्यात्मिक प्रेरणा से भरा रहा। उनके जीवन का हर अध्याय, अद्भुत ज्ञान, असीम करुणा और मानवता के उत्थान के लिए अटूट प्रतिबद्धता से सुशोभित है।

संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी महाराज जी सम्यक ज्ञान, सम्यक दर्शन और सम्यक चरित्र की त्रिवेणी थे। उनके व्यक्तित्व की सबसे विशेष बात ये थी कि उनका सम्यक दर्शन जितना आत्मबोध के लिए था, उतना ही सशक्त उनका लोक बोध भी था। उनका सम्यक ज्ञान जितना धर्म को लेकर था, उतना ही उनका चिंतन लोक विज्ञान के लिए भी रहता था।

करुणा, सेवा और तपस्या से परिपूर्ण आचार्य जी का जीवन भगवान महावीर के आदर्शों का प्रतीक रहा, उनका जीवन, जैन धर्म की मूल भावना का सबसे बड़ा उदाहरण रहा। उन्होंने जीवन भर अपने काम और अपनी दीक्षा से इन सिद्धांतों का संरक्षण किया। हर व्यक्ति के लिए उनका प्रेम, ये बताता है कि जैन धर्म में ‘जीवन’ का महत्व क्या है। उन्होंने सत्यनिष्ठा के साथ अपनी पूरी आयु तक ये सीख दी कि विचारों, शब्दों और कर्मों की पवित्रता कितनी बड़ी होती है। उन्होंने हमेशा जीवन के सरल होने पर जोर दिया। आचार्य जी जैसे व्यक्तित्वों के कारण ही, आज पूरी दुनिया को जैन धर्म और भगवान महावीर के जीवन से जुड़ने की प्रेरणा मिलती है।

वो जैन समुदाय के साथ ही अन्य विभिन्न समुदायों के भी बड़े प्रेरणास्रोत रहे। विभिन्न पंथों, परंपराओं और क्षेत्रों के लोगों को उनका सानिध्य मिला, विशेष रूप से युवाओं में आध्यात्मिक जागृति के लिए उन्होंने अथक प्रयास किया।

शिक्षा का क्षेत्र उनके हृदय के बहुत करीब रहा है। बचपन में सामान्य विद्याधर से लेकर आचार्य विद्यासागर जी बनने तक की उनकी यात्रा ज्ञान प्राप्ति और उस ज्ञान से पूरे समाज को प्रकाशित करने की उनकी गहरी प्रतिबद्धता को दिखाती है। उनका दृढ़ विश्वास था कि शिक्षा ही एक न्यायपूर्ण और प्रबुद्ध समाज का आधार है। उन्होंने लोगों को सशक्त बनाने और जीवन के लक्ष्यों को पाने के लिए ज्ञान को सर्वोपरि बताया। सच्चे ज्ञान के मार्ग के रूप में स्वाध्याय और आत्म-जागरूकता के महत्त्व पर उनका विशेष जोर था। इसके साथ ही उन्होंने अपने अनुयायियों से निरंतर सीखने और आध्यात्मिक विकास के लिए निरंतर प्रयास करने का भी आग्रह किया था।

संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी महाराज की इच्छा थी कि हमारे युवाओं को ऐसी शिक्षा मिले, जो हमारे सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित हो। वह अक्सर कहा करते थे कि चूँकि हम अपने अतीत के ज्ञान से दूर हो गए हैं, इसलिए वर्तमान में हम अनेक बड़ी चुनौतियों से जूझ रहे हैं। अतीत के ज्ञान में वो आज की अनेक चुनौतियों का समाधान देखते थे। जैसे जल संकट को लेकर वो भारत के प्राचीन ज्ञान से अनेक समाधान सुझाते थे। उनका यह भी विश्वास था कि शिक्षा वही है, जो स्किल डवलपमेंट और इनोवेशन पर अपना ध्यान केंद्रित करे।

आचार्य जी ने कैदियों की भलाई के लिए भी विभिन्न जेलों में काफी कार्य किया था। कितने ही कैदियों ने आचार्य जी के सहयोग से हथकरघा का प्रशिक्षण लिया। कैदियों में उनका इतना सम्मान था कि कई कैदी रिहाई के बाद अपने परिवार से भी पहले आचार्य विद्यासागर जी से मिलने जाते थे।

संत शिरोमणि आचार्य जी को भारत देश की भाषायी विविधता पर बहुत गर्व था। इसलिए वह हमेशा युवाओं को स्थानीय भाषाएँ सीखने के लिए प्रोत्साहित करते थे। उन्होंने स्वयं भी संस्कृत, प्राकृत और हिंदी में कई सारी रचनाएँ की हैं। एक संत के रूप में वे शिखर तक पहुँचने के बाद भी जिस प्रकार जमीन से जुड़े रहे, ये उनकी महान रचना ‘मूक माटी’ में स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ती है। इतना ही नहीं, वे अपने कार्यों से वंचितों की आवाज भी बने।

संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी महाराज जी के योगदान से स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भी बड़े परिवर्तन हुए हैं। उन्होंने उन क्षेत्रों में विशेष प्रयास किया, जहाँ उन्हें ज्यादा कमी दिखाई पड़ी। स्वास्थ्य को लेकर उनका दृष्टिकोण बहुत व्यापक था। उन्होंने शारीरिक स्वास्थ्य को आध्यात्मिक चेतना के साथ जोड़ने पर बल दिया, ताकि लोग शारीरिक और मानसिक रूप, दोनों से स्वस्थ रह सकें।

मैं विशेष रूप से आने वाली पीढ़ियों से यह आग्रह करूँगा कि वे राष्ट्र निर्माण के प्रति संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की प्रतिबद्धता के बारे में व्यापक अध्ययन करें। वे हमेशा लोगों से किसी भी पक्षपातपूर्ण विचार से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह किया करते थे। वे मतदान के प्रबल समर्थकों में से एक थे और मानते थे कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भागीदारी की सबसे सशक्त अभिव्यक्ति है। उन्होंने हमेशा स्वस्थ और स्वच्छ राजनीति की पैरवी की। उनका कहना था- ‘लोकनीति लोभसंग्रह नहीं, बल्कि लोकसंग्रह है’। इसलिए नीतियों का निर्माण निजी स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि लोगों के कल्याण के लिए होना चाहिए।

आचार्य जी का गहरा विश्वास था कि एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण उसके नागरिकों के कर्तव्य भाव के साथ ही अपने परिवार, अपने समाज और देश के प्रति गहरी प्रतिबद्धता की नींव पर होता है। उन्होंने लोगों को सदैव ईमानदारी, सत्यनिष्ठा और आत्मनिर्भरता जैसे गुणों को विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया। ये गुण एक न्यायपूर्ण, करुणामयी और समृद्ध समाज के लिए आवश्यक हैं। आज जब हम विकसित भारत के निर्माण की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं कर्तव्यों की भावना और ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है।

ऐसे कालखंड में जब दुनियाभर में पर्यावरण पर कई तरह के संकट मंडरा रहे हैं, तब संत शिरोमणि आचार्य जी का मार्गदर्शन हमारे बहुत काम आने वाला है। उन्होंने एक ऐसी जीवनशैली अपनाने का आह्वान किया, जो प्रकृति को होने वाले नुकसान को कम करने में सहायक हो। यही तो ‘मिशन लाइफ’ है जिसका आह्वान आज भारत ने वैश्विक मंच पर किया है। इसी तरह उन्होंने हमारी अर्थव्यवस्था में कृषि को सर्वोच्च महत्त्व दिया। उन्होंने कृषि में आधुनिक टेक्नोलॉजी अपनाने पर भी बल दिया। मुझे विश्वास है कि वो नमो ड्रोन दीदी अभियान की सफलता से बहुत खुश होते।

संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज जी, देशवासियों के हृदय और मन-मस्तिष्क में सदैव जीवंत रहेंगे। आचार्य जी के संदेश उन्हें सदैव प्रेरित और आलोकित करते रहेंगे। उनकी अविस्मरणीय स्मृति का सम्मान करते हुए हम उनके मूल्यों को मूर्त रूप देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह ना सिर्फ उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि होगी, बल्कि उनके बताए रास्ते पर चलकर राष्ट्र निर्माण और राष्ट्र कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त होगा।

(नोट: जैन मुनि आचार्य विद्यासागर जी महाराज को श्रद्धांजलि देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह लेख अपने ब्लॉग पर लिखा है। आप इस लिंक पर क्लिक कर इसे पढ़ सकते हैं)

जिस हीरो को कंगना रनौत ने बताया था ‘कॉकरोच’, उसने माँगी माफी: कहा- हिंदुओं को अपमानित करने का नहीं था इरादा

बॉलीवुड अभिनेता विक्रांत मैसी अभी हाल में अपने भाई के मजहब का खुलासा करने के कारण चर्चा में आए थे, इस बीच उनका एक पुराना ट्वीट वायरल हो गया। इस ट्वीट में उन्होंने श्रीराम भगवान और माता सीता के बीच संवाद को दिखाकर हिंदूवादी लोगों का, श्रीराम भक्तों का, और राष्ट्रवादी लोगों का अपमान किया था। ट्वीट के वायरल होने के बाद विक्रांत मैसी ने माफी माँगी है।

विक्रांत मैसी का पुराना ट्वीट साल 2018 के समय का है। कठुआ कांड के बाद उन्होंने इसे शेयर किया था। इस पोस्ट में श्रीराम भगवान से माता सीता का संवाद दिखाया गया है। इसमें माता सीता हाथ में अखबार लिए हुए हैं जिसकी हेडलाइन है- बच्ची का रेप मंदिर में हुआ, भाजपा विधायक ने बच्ची का रेप किया, योगी ने रेप आरोपित को संरक्षण दिया। इसे पढ़कर माता सीता को कहते दिखाया जाता है- “मैं बहुत खुश हूँ कि मेरा किडनैप रावण ने किया था। तुम्हारे भक्तों ने नहीं।”

विक्रांत मैसी का ट्वीट

कठुआ कांड को लेकर बनाए गए इस कार्टून में श्रीराम के भक्तों को बलात्कारी दिखाने का प्रयास हुआ था। इसे शेयर करते हुए विक्रांत ने लिखा था- अधपके आलू और अधपके राष्ट्रवादी आपके पेट में दर्द का कारण बन सकते हैं।

विक्रांत ने माँगी माफी

विक्रांत के इसी ट्वीट को सोशल मीडिया पर खूब शेयर किया गया जिसके बाद विक्रांत ने लंबे नोट के साथ माफी माँगी। उन्होंने लिखा- “2018 के ट्वीट के संदर्भ में कुछ शब्द: मेरा इरादा कभी भी हिंदू समुदाय को चोट पहुँचाने, बदनाम करने या अपमान करने का नहीं था। वो बात अखबार का कार्टून शेयर किए बिना भी कही जा सकती थी। मैं अत्यंत विनम्रता से उन सभी लोगों से माफी माँगना चाहता हूँ जिन्हें इससे आहत हुआ। जैसा कि आप सभी अब तक जानते हैं, कि मैं सभी आस्थाओं, विश्वासों और धर्मों को यथासंभव सर्वोच्च सम्मान देता हूँ।”

विक्रांत ने लिखा- “हम सभी समय के साथ बड़े होते हैं और अपनी गलतियों पर विचार करते हैं। यह मेरी गलती थी।”

उनके इस माफी वाले ट्वीट के नीचे लोग उन्हें कह रहे हैं कि उन्हें शुक्र करना चाहिए कि उनका ये ट्वीट हिंदूविरोधी था इस्लाम विरोधी नहीं। हिंदू सहिष्णु होते हैं। उनके फैंस उन्हें कह रहे हैं कि वो ऐसे ट्वीट देखकर बहुत निराश हैं।

कंगना ने विक्रांत को कहा था कॉकरोच

बता दें कि विक्रांत मैसी का ये अकेला ट्वीट वायरल नहीं है। एक बार उन्होंने अभिनेत्री यामी गौतम को दुल्हन वाली लाल साड़ी में देखकर उनकी तुलना राधे माँ से की थी। इस पर कंगना ने उन्हें जवाब देते हुए कहा था- “ये कॉकरोच कहाँ से आया लाओ मेरी चप्पल।”

यामी के पोस्ट पर विक्रांत और कंगना के बीच हुई बात

विक्रांत मैसी ने भाई के मजहब को लेकर किया था खुलासा

गौरतलब है इन ट्विटों से पहले विक्रांत मैसी के एक इंटरव्यू की क्लिप वायरल हुई थी-  “मेरे भाई का नाम मोइन है, और मेरा नाम विक्रांत है। आपको आश्चर्य होगा कि मोइन नाम क्यों? उसने इस्लाम अपना लिया, मेरे परिवार ने उसे अपना धर्म बदलने दिया। उन्होंने कहा कि बेटा, अगर तुम्हें इसमें संतुष्टि मिलती है तो आगे बढ़ो। उसने 17 साल की उम्र में धर्म परिवर्तन किया, यह एक बड़ा कदम है। मेरी मां सिख हैं। मेरे पिता ईसाई हैं और चर्च जाते हैं। वह हफ्ते में दो बार चर्च जाते हैं। मैंने छोटी उम्र से ही धर्म और आध्यात्म को लेकर काफी तर्क सुने और बहस देखी है।”

विक्रांत बोले, “मेरे करीबी रिश्तेदारों ने मेरे पिता से सवाल किया कि तुम इसकी (भाई के धर्म परिवर्तन की) अनुमति कैसे दे सकते हो। इस पर पापा ने जवाब दिया कि यह सोचना उनका (रिश्तेदारों) का काम नहीं है। वो मेरा बेटा है। वो सिर्फ मेरे प्रति जवाबदेह है और उसे यह चुनने का पूरा अधिकार है कि वह क्या चाहता है। यह देखने के बाद, मैं अपनी खोज में लग गया और सोचने लगा कि आखिर धर्म क्या है? यह इंसान (Man-Made) की बनाई हुई चीज है।”

SDPI के चाँद पाशा ने ज्ञानवापी वाले जज को बताया ‘RSS का जूता चाटने वाला’, SI तनवीर हुसैन ने विरोध करने वालों पर ही कर्नाटक में कर दी FIR

पिछले महीने वाराणसी की जिला अदालत ने ज्ञानवापी ढाँचे के व्यास जी तहखाना में पूजा का अधिकार हिंदुओं को दिया था। इस फैसले के बाद कर्नाटक के रामनगर में एक नया बखेड़ा शुरू हो गया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार फैसला सुनाने वाले जज को लेकर वकील चाँद पाशा ने आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। पाशा प्रतिबंधित इस्लामी संगठन PFI की राजनीतिक विंग SDPI से भी जुड़ा हुआ है। उसकी टिप्पणी का विरोध करने वाले वकीलों पर SI तनवीर हुसैन द्वारा FIR करने के बाद इस मामले ने तूल पकड़ लिया है।

यह मामला एक अभद्र फेसबुक पोस्ट से जुड़ा हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार SDPI से जुड़े वकील चाँद पाशा ने वाराणसी कोर्ट के जज के निर्णय पर प्रश्न उठाते हुए एक पोस्ट किया। उसने हिंदुओं को व्यास जी तहखाना में पूजा करने की अनुमति देने वाले जज को कथित तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ‘जूता चाटने वाला’ बताया था।

इसको लेकर रामनगर के वकीलों ने चाँद पाशा के खिलाफ इजूर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई। पाशा को जिले के अधिवक्ता संघ से निकाले जाने की माँग भी हुई। इसको लेकर जब मीटिंग बुलाई गई तो उसमें विवाद हो गया। आरोप है कि पाशा ने इस मीटिंग में खलल डाला।

वकीलों ने आरोप लगाया है कि पाशा और उसके समर्थकों ने उत्पात मचाया। इसके बाद पाशा के एक साथी रफीक खान ने विरोध करने वाले वकीलों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई। इस पर इजूर थाने के SI तनवीर हुसैन ने 10 वकीलों समेत 40 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कली।

वकीलों ने तनवीर पर पक्षपात करने का आरोप लगाया है। उन्होंने रामनगर में जिला कलेक्टर के दफ्तर के बाहर धरना देकर तनवीर को निलंबित किए जाने की माँग की है। इसको लेकर वकीलों ने रामनगर में रैली भी निकाली। वकीलों ने आरोप लगाया है कि स्थानीय प्रशासन उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और स्थानीय विधायक MA इकबाल हुसैन के दबाव में काम कर रहा है।

रामनगर की इस घटना पर अब राज्य में राजनीतिक पारा भी चढ़ गया है। भाजपा और जेडीएस ने राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन कर रहे वकीलों का समर्थन किया है। कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा विधायक आर अशोक ने आरोप लगाया है कि SI तनवीर हुसैन राष्ट्रविरोधी ताकतों को मदद दे रहा है। अशोक ने कहा कि चाँद पाशा लगातार ऐसे ही अभद्र बयान देता रहा है और उसके खिलाफ जिले में 12 शिकायतें दर्ज हैं।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेन्द्र ने भी इस मामले पर राज्य की कॉन्ग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि राज्य की पुलिस को चाँद पाशा को गिरफ्तार करना चाहिए था, क्योंकि उसने न्यायपालिका पर अभद्र टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा कि तनवीर हुसैन को ऊपर से किसी ताकत का समर्थन हासिल है, क्योंकि उसने एक राष्ट्र विरोधी के साथ खड़े होने का काम किया है। इसकी उन्होंने जाँच की माँग की है।

बताया जा रहा है कि चाँद पाशा को तो गिरफ्तार कर लिया गया है, लेकिन वकील अपनी माँग पर अड़े हैं। उनका कहना है कि इस मामले में तनवीर हुसैन ने सही आचरण नहीं दिखाया इसलिए उसे भी निलंबित किया जाना चाहिए। इसको लेकर आज (21 फरवरी 2024) बेंगलुरु में प्रदर्शन की भी चेतावनी दी है।

‘नाम बताओ… कोई मारो मत, मारना नहीं है’: पत्रकार ने पूछा सवाल तो राहुल गाँधी ने भीड़ को उकसाया, जातिवाद पर उतरे

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी की एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इस वायरल वीडियो में वह अपनी रैली में एक पत्रकार पर हमलावर हो रखे हैं और पत्रकार को भीड़ ने घेरा हुआ है। वीडियो में देख सकते हैं कि राहुल गाँधी एक जर्नलिस्ट का सवाल सुनकर भड़क जाते हैं और उसे वहीं जलील करना शुरू कर देते हैं।

घटना उत्तर प्रदेश के रायबरेली की है। वहाँ ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान पहुँचे राहुल गाँधी एक सभा को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने पत्रकार के साथ बद्तमीजी की। पत्रकार इंडिया न्यूज का था। कहा जा रहा है राहुल गाँधी उसके सवाल का जब जवाब नहीं दे पाए तो वह उस पर चिल्लाने लगे।

सामने आए वीडियो में साफ तौर पर दिख रहा है कि वो पत्रकार से भीड़ में चिल्लाकर उसका नाम पूछते हैं और कहते हैं कि वो अपने मालिक का नाम उनको बताए। उनकी ऑडियो सुन ऐसा लगता है जैसे उनके पत्रकार को निशाना बनाते ही कुछ लोग उस पर हमलावर भी होते हैं। उस पर हाथ उठाते हैं। ऐसे में राहुल गाँधी को कहते सुना जाता है- मारो मत, मारो मत।

राहुल गाँधी कहते हैं- “मीडिया के हैं आप? नाम क्य़ा है आपका? आप शिव प्रसाद जी हैं। आपके मालिक का क्या नाम है। क्या नाम है। नाम बताओ। नाम बताओ… ओए मारो मत यार। मारो मत उसको। नाम बताओ उसका। वो ओबीसी है, नहीं। वो दलित है नहीं। वो आदिवासी है, नहीं। अरबपति है वो।”

राहुल गाँधी के इतना भड़काने पर जब समर्थक उस पत्रकार पर टूटे तो राहुल गाँधी कहते सुने गए- “भैया मारो मत उसे आजाओ। आ जाओ। मारना नहीं है उसे। इधर आओ, इधर आओ। आप रिलैक्स करो। शांति से बस बैठ जाओ। कोई प्रॉब्लम नहीं है। इनके मालिक अरबपति हैं ये किसानों की बात कभी नहीं करेंगे।”

लोग उनकी यह वीडियो देखने के बाद कह रहे हैं कि राहुल गाँधी ने खुलेआम अपने समर्थकों को एक पत्रकार विरुद्ध नाम और जाति पूछ-पूछकर भड़काया। ऐसे आदमी को सार्वजनिक स्थलों पर जाने की आजादी क्यों दी जा रही है।

यशवंत सिंह लिखते हैं, इंडिया न्यूज़ का रिपोर्टर शिव प्रसाद कांग्रेसियों द्वारा कूट दिया गया। इस पत्रकार ने राहुल गाँधी से सवाल पूछा था- “अखिलेश यादव आपके साथ नहीं हैं, क्या आपका गठबंधन टूट गया?” इसी सवाल को सुन पहले राहुल गाँधी गर्म हुए, मालिक का नाम पूछने लगे, फिर कार्यकर्ताओं ने पीट दिया।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गाँधी ने पत्रकार को किया बेइज्जत

बता दें कि यह पहली दफा नहीं है जब राहुल गाँधी ने इस तरीके से किसी पत्रकार से बात की हो। इससे पहले भी वो कई बार पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार करने के कारण चर्चा में आ चुके हैं। उन्होंने कई बार पत्रकारों का अपमान भी किया है। पिछले साल 25 मार्च 2023 को जब राहुल गाँधी मीडिया से मुखातिब हुए थे उस वक्त पत्रकारों द्वारा सवाल पूछे -जाने पर वो बौखला गए थे।

पत्रकार ने मोदी चोर वाले बयान पर राहुल गाँधी से पूछा था कि बीजेपी कह रही है आपने पूरे ओबीसी समाज का अपमान किया है। इस पर पूरे देश में प्रेस कॉन्फ्रेंस की तैयारी है…यही सवाल राहुल गाँधी को पसंद नहीं आया था।

इस पर पूर्व सांसद ने जवाब दिया, “भैया देखिए… पहला अटेंप्ट आपका वहाँ से आया, दूसरा अटेंप्ट यहाँ से आया… आप डायरेक्टली बीजेपी के लिए काम क्यों कर रहे हो? थोड़ी डिस्कशन से करो यार। थोड़ा घूम-घाम कर पूछो। आपको ऑर्डर दिया है क्या? देखो मुस्करा रहे हैं।”

सवाल से बौखलाकर राहुल गाँधी ने अंग्रेजी में कहना शुरू किया, “यदि आप बीजेपी के लिए काम करना चाहते हैं तो अपनी छाती पर भाजपा का ठप्पा लगा लो। फिर मैं उसी अनुसार जवाब दूँगा… पत्रकार बनने का नाटक मत करो।” इस दौरान पूर्व एमपी के चेहरे से साफ जाहिर हो रहा था कि वे चिढ़ गए थे। लेकिन उन्होंने अपनी कुंठा निकालने के लिए यहाँ तक कहा कि हवा निकल गई।

‘3 दिन में कमाइए ₹81000, करोड़पति बना देगा ये एप’: अब विराट कोहली का डीपफेक वीडियो हुआ वायरल, रश्मिका मंदाना और सारा तेंदुलकर भी बन चुकी हैं शिकार

डीप फेक वीडियो के शिकार हस्तियों में अब भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली भी शामिल हो गए हैं। मंगलवार (20 फरवरी, 2024) से उनका भी एक फेक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो को एक न्यूज़ चैनल की क्लिप के साथ बनाया गया है। वीडियो में विराट के इंटरव्यू के दौरान उनकी लिप्सिंग के साथ मिला कर किसी और की आवाज जोड़ी गई है। इस से पहले भी रश्मिका मंदाना और सारा तेंदुलकर आदि के भी डीप फेक वीडियो वायरल किया जा चुका है।

X यूजर ‘@_SaySatya’ ने इस वीडियो को 18 फरवरी को शेयर किया है। 54 सेकेंड के इस वीडियो में एंकर के तौर पर अंजना ओम कश्यप को दिखाया गया है। एंकर की तरफ से कहा गया है कि यह एप्लिकेशन एविएटर के साथ आपको करोड़पति बना देगी। साथ ही यह भी दावा किया गया कि क्रिकेटर विराट कोहली ने इसे जाँचने का फैसला किया और उन्हें इसका झटका लगा। इस दौरान विराट द्वारा 3 दिनों में हजार रुपए से 81 हजार रुपए कमाने की भी बात कही गई है।

इसी वीडियो में 16 वें सेकेंड से विराट कोहली दिखाई देते हैं। उनकी आवाज में एविएटर गेम में 2000% जीत पक्की बताई गई। इसके आगे कम पैसे में ज्यादा से ज्यादा कमाई का लालच दिया जा रहा है। खेल के लिए 500 से हजार रुपए तक से शुरुआत करने के लिए उकसाया जा रहा है। विराट कोहली की बैकग्राउंड आवाज में यह भी दावा किया जा रहा है कि वो खुद ही इसे खेलना सिखाएँगे। वीडियो शेयर करने वाले यूजर सत्या ने इसे AI तकनिकी का खतरनाक दुरूपयोग करार दिया है।

बताते चलें कि इस से पहले रश्मिका मंदना का भी डीपफेक वीडियो बना कर वायरल किया गया था। तब ब्रिटिश मॉडल जारा पटेल के अंतरंग वीडियो पर रश्मिका मंदाना का चेहरा लगा दिया गया था। वीडियो काफी वायरल होने के बाद खुद रश्मिका ने इस मामले में अपनी सफाई दी थी। नवंबर 2023 के इसी माह में ही पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर की बेटी सारा का डीपफेक वीडियो वायरल किया गया था। तब सारा तेंदुलकर और उनके भाई अर्जुन की फोटो के साथ AI तकनिकी से छेड़छाड़ की गई थी।

अर्जुन की जब शुभम गिल की तस्वीर लगा कर तब यह दावा किया गया था कि सारा तेंदुलकर ने शुभम के साथ अपने रिश्ते पर मुहर लगा दी है।

‘ममता बनर्जी की तानाशाही नहीं चलेगी, संदेशखाली का सच दिखाते रहेंगे’: पश्चिम बंगाल में पत्रकार की गिरफ़्तारी के खिलाफ प्रदर्शन, सवाल – शाहजहाँ शेख कहाँ है?

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में सत्ताधारी TMC (तृणमूल कॉन्ग्रेस) के नेता शाहजहाँ शेख के गुंडों पर स्थानीय महिलाओं ने उत्पीड़न एवं यौन शोषण का आरोप लगाया। राशन घोटाले की जाँच के लिए पहुँचे ED अधिकारियों पर हमला कराने के बाद से ही शाहजहाँ शेख फरार है। पीड़ित महिलाओं की आवाज़ उठाने पर पश्चिम बंगाल पुलिस ने ‘रिपब्लिक बांग्ला’ टीवी न्यूज़ चैनल के पत्रकार को लाइव कैमरे पर रिपोर्टिंग के दौरान ही गिरफ्तार कर लिया। मीडिया का गिरोह विशेष इस पर चुप है।

अब देश भर में पत्रकार सन्तु पान की गिरफ़्तारी के खिलाफ प्रदर्शन शुरू हो गया है। ‘DD न्यूज़’ के पत्रकारों अशोक श्रीवास्तव और प्रखर श्रीवास्तव के अलावा कई अन्य संस्थानों के मीडियाकर्मी मंगलवार (20 फरवरी, 2024) को ‘प्रेस क्लब ऑफ इंडिया (PCI)’ में जुटे और विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने ‘ममता बनर्जी की तानाशाही नहीं चलेगी’, ‘पत्रकार को रिहा करो’, ‘संदेशखाली का सच दिखाते रहेंगे’, ‘ना डरेंगे, ना झुकेंगे’ और ‘ममता दीदी, तानाशाही बंद करो’ लिखे हुए प्लाकार्ड्स ले रखे थे।

‘प्रेस क्लब, कोलकाता’ ने भी इस संबंध में बयान जारी किया है। संस्था ने कहा है कि पत्रकार की गिरफ्तारी को लेकर वो चिंतित है। साथ ही सन्तु पान को रिहा करने की माँग भी की। संस्था ने कहा कि पत्रकार के खिलाफ लगे आरोपों की जाँच हो, लेकिन अपना काम करते समय उसकी गिरफ़्तारी सही नहीं है। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी पूछा है कि आखिर शाहजहाँ शेख कहाँ है? पश्चिम बंगाल के राज्यपाल CV आनंद बोस ने कहा कि मीडिया को दबाने का कोई भी कदम बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्रदर्शनकारी बुद्धिजीवियों ने कहा कि अभी ये भूल जाने का वक्त है कि कौन किस खेमे में खड़ा है, सबको संदेशखाली पर बोलना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई गुंडा किसी घर की सुंदर स्त्रियों को उठाए और पुलिस उसके साथ मिली हो, ये आतंक हमने सिर्फ आज तक फिल्मों में देखा है। उधर सन्तु पान को कस्टडी में भेज दिया गया है। बंगलुरु में भी इसे लेकर विरोध प्रदर्शन हुआ। ‘नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स’ ने भी इसकी निंदा करते हुए कहा है कि ये गलत है।

संगठन ने ऐलान किया है कि रविवार (21 फरवरी, 2024) को न सिर्फ जंतर-मंतर से लेकर बंग भवन तक हेली रोड के माध्यम से मार्च निकाला जाएगा, बल्कि भारी विरोध प्रदर्शन भी होगा। ‘दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (DJA)’ भी पूरी तरह इसमें NUJI के साथ है। दोनों संगठनों ने कहा है कि मीडिया को दबा कर पश्चिम बंगाल में अघोषित आपातकाल लगाया जा रहा है। NUJI की 3 सदस्यीय जाँच कमिटी पश्चिम बंगाल जाएगी और इस प्रकरण पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी।

‘रात को शराब पीकर नाचते हैं काशी के युवक’: राहुल गाँधी के आपत्तिजनक बयान पर बोले लोग – माफ़ी माँगो

कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने काशी के युवाओं पर आपत्तिजनक बयान दिया है। उन्होंने खुद को चश्मदीद बताते हुए दावा किया है कि काशी के युवा रात में बाजा बजा कर सड़क पर शराब पी कर दिखते हैं। यह बयान उन्होंने सोमवार (19 फरवरी, 2024) को रायबरेली में दिया था। राहुल गाँधी के इस बयान की काफी आलोचना हो रही है। सोशल मीडिया पर उनके माफ़ी की भी माँग उठी है। हालाँकि, अभी तक राहुल गाँधी ने अपने इस बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

दरअसल 2024 लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटे राहुल गाँधी ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ ले कर भारत के विभिन्न हिस्सों में घूम रहे हैं। इसी माह उनकी यात्रा उत्तर प्रदेश में प्रवेश की। पिछले हफ्ते राहुल गाँधी ने वाराणसी में रोड शो भी किया था। इसके बाद राहुल गाँधी की यात्रा का अगला पड़ाव अमेठी और रायबरेली में हुआ। 19 फरवरी को उन्होंने रायबरेली में आयोजित रोड शो में वाराणसी के बारे में अपना अनुभव बताया। उनके भाषण का 30 सेकेंड का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

अपने बयान में राहुल गाँधी ने कहा, “वाराणसी में देखा मैंने। रात को बाजा बज रहा है, बाजा बज रहा है। वहाँ पर शराब पिए, शराब पिए सड़क पर लेटते हुए। बाजा बज रहा है। UP का भविष्य रात को शराब पिए नाच रहा है, डाँस कर रहा है। नशे में।” इसी बीच राहुल गाँधी कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को ‘ठहर जा-ठहर जा’ कह सम्बोधित करते रहे। सोशल मीडिया पर वायरल होने के साथ ही राहुल गाँधी के इस बयान का विरोध होना शुरू हो गया है। हिन्दू महासभा पदाधिकारी ने राहुल गाँधी की बौखलाहट की वजह उनकी न्याय यात्रा में लोगों का न आना बताया है।

राहुल गाँधी का जो वीडियो शेयर हो रहा है उसमें कैप्शन के तौर पर उन्हें चुनावी हिन्दू बताया गया है। इसी बयान पर नाराज़गी जताते हुए मुक्तानंद गिरी ने लिखा, “राहुल गाँधी ने कहा था लोग मन्दिर में लड़की छेड़ने जाते है। आज काशी जी को कहा शराबियों का अड्डा। ऐसी भाषा सिख, मुस्लिम ईसाई के विषय में क्यों नहीं बोलता।”

चित्र साभार: मुक्तानंद गिरी का ‘X’ हैंडल

प्रशांत कुमार शुक्ला का कहना है कि जब काशी का विकास देख कर राहुल गाँधी की आँखें चौंधिया गईं तब वो वहाँ के युवाओं को अनाप-शनाप बोलने लगे।

चित्र साभार: प्रशांत कुमार शुक्ला का ‘X’ हैंडल

इसके अलावा सोशल मीडिया पर कई नेटीजेंस ने राहुल गाँधी द्वारा काशी के युवाओं पर दिए बयान को आपत्तिजनक और अशोभनीय माना है। उनसे माफ़ी की भी माँग की जा रही है। फ़िलहाल इस बयान पर राहुल गाँधी या उनकी पार्टी की तरफ से किसी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है।

कंटेनर में हो रही थी गोतस्करी, रोकने पहुँचे बजरंग दल कार्यकर्ताओं पर धारदार हथियारों से हमला: 2 दर्जन हमलावरों की तलाश में MP पुलिस की ताबड़तोड़ दबिश

मध्य प्रदेश के दमोह में गोतस्करों द्वारा बजरंग दल कार्यकर्ताओं पर हमले की खबर है। आरोप है कि यह हमला तब हुआ जब बजरंग दल के कार्यकर्ता उस कंटेनर को बरामद करने गए थे जिसमें उन्हें तस्करी की आशंका थी। हमले में हिन्दू संगठन के 3 कार्यकर्ता घायल हो गए। इस मामले की जानकारी होने पर हिन्दू संगठन के कार्यकर्ताओं ने थाने पर हंगामा किया। 20 से 25 आरोपितों पर केस दर्ज हुआ है जिनकी तलाश में पुलिस टीमें दबिश दे रहीं हैं। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। घटना मंगलवार (19 फरवरी, 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला दमोह जिले के जबलपुर नाका क्षेत्र का है। 19 फरवरी को बजरंग दल कार्यकर्ताओं को सूचना मिली थी कि न्यू दमोह कॉलोनी में गोवंश की तस्करी की जा रही है। यह तस्करी कंटेनरों में होने की सूचना थी जिसे सुन कर बजरंग दल के कार्यकर्ता वहाँ पहुँचे थे। बताया जा रहा है कि अचानक ही मुस्लिम समुदाय के लगभग 2 दर्जन लोग वहाँ पहुँच गए। उन्होंने बजरंग दल के 3 सदस्यों को बुरी तरह से मारा-पीटा। आरोप है कि हमलावरों के पास लाठी-डंडों के अलावा धारदार हथियार भी थे। हिन्दू संगठन के घायल कार्यकर्ताओं को अस्पताल ले जाया गया।

इस बीच साथियों पर हमले की सूचना मिलते ही अन्य हिन्दू संगठनों के कार्यकर्ता भड़क उठे। कुछ ही देर में जबलपुर नाका पुलिस चौकी के आगे सैकड़ों लोगों का जमावड़ा लग गया। इस दौरान नारेबाजी हुई और पुलिस पर कार्रवाई में सुस्ती दिखाने का आरोप लगा। कुछ सदस्यों ने सड़क भी जाम कर दी। मौके पर पुलिस के सीनियर अधिकारी पहुँचे। उन्होंने लोगों को समझाने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारी हमलावरों पर कड़ी कार्रवाई की माँग को ले कर अड़े रहे। काफी देर बाद हंगामा जैसे-तैसे शाँत हुआ।

दमोह के एडिशनल एसपी ने बताया कि घायलों से तहरीर ले कर मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। लगभग 20 से 25 आरोपितों को नामजद कर के कार्रवाई अमल में लाई जा रही है। उन्होंने कहा कि मामले की बारीकी से जाँच करवाई जा रही है। इस बीच केस दर्ज होने की सूचना मिलते ही हमलावर फरार हो गए हैं। पुलिस टीमों का गठन कर के उनकी तलाश की जा रही है। मौके से कंटेनर भी बरामद कर लिया गया है। हिन्दू संगठनों से जुड़े सदस्यों का आरोप है कि आरोपित पहले भी गौतस्करी और अन्य गैरकानूनी कामों में संलिप्त रहे हैं।