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रामभद्राचार्य और गुलजार को ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’: 100+ पुस्तकें लिख चुके हैं ‘तुलसी पीठ’ के संस्थापक, 68 साल से लिख रहे हैं संपूर्ण सिंह कालरा

जगद्गुरु रामभद्राचार्य और गीतकार गुलजार को ‘ज्ञानपीठ अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया है। जहाँ गुलजार सामान्यतः हिंदी-उर्दू शब्दों का इस्तेमाल कर के गीत और गजलें लिखते हैं, वहीं रामभद्राचार्य ने संस्कृत में कई पुस्तकें लिखी हैं और साथ ही गोस्वामी तुलसीदास के लेखन पर गहन शोध किया है। इन दोनों को वर्ष 2023 के ‘ज्ञानपीठ सम्मान’ के लिए चुना गया है। गुलजार को उर्दू भाषा में उनकी रचनाओं और योगदान के लिए ‘ज्ञानपीठ अवॉर्ड’ से सम्मानित किया जा रहा है।

वहीं जगद्गुरु रामभद्राचार्य को संस्कृत भाषा में उनके योगदान के लिए इस सम्मान से नवाजा जा रहा है। नेत्रहीन रामभद्राचार्य चित्रकूट स्थित ‘तुलसी पीठ’ के संस्थापक हैं और साथ ही दिव्यांगों के लिए एक यूनिवर्सिटी और स्कूल का संचालन भी करते हैं। उन्होंने 100 से भी अधिक पुस्तकें लिख रखी हैं। वहीं गुलजार को इससे पहले 2002 में साहित्य अकादमी पुरस्कार, 2013 में दादासाहब फाल्के पुरस्कार और 2004 में पद्म भूषण पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

गुलजार की प्रमुख रचनाओं में ‘चाँद पुखराज का’, ‘रात पश्मिने की’ और ‘पंद्रह पांच पचहत्तर’ शामिल हैं। उनका पूरा नाम संपूर्ण सिंह कालरा है। गुलजार का जन्म 18 अगस्त, 1934 को अविभाजित भारत के झेलम जिले के देना गाँव में हुआ था। उनकी माँ का कम उम्र में ही निधन हो गया था, पिता माखन सिंह छोटे कारोबारी थे। 12वीं में फेल हो चुके गुलजार की साहित्य में गहरी रुचि थी। रवीन्द्रनाथ टैगोर और शरतचंद्र उनके पसंदीदा लेखक थे।

वहीं रामभद्राचार्य की आँखों की रोशनी उनके जन्म के 2 महीने बाद ही चली गई थी। कहा जाता है कि उन्हें 22 भाषाओं का ज्ञान है। उन्हें पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है। 2015 में भारत सरकार ने उन्हें ये पुरस्कार दिया था। 2022 की बात करें तो उस साल के लिए ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ गोवा के लेखक दामोदर मावजो को दिया गया था। इस बार दो ऐसे लोगों को ये सम्मान मिला है, जो दशकों से अपने-अपने क्षेत्र में सक्रिय हैं और अभी भी लगातार काम कर रहे हैं।

जॉनी सिन्स को समझ बैठी थी जॉन सीना: रणवीर सिंह वाले वीडियो में नजर आई एक्ट्रेस ने बताया कैसे बोली AD के लिए ‘हाँ’, कहा- वो बड़े कॉपरेटिव

जॉनी सिन्स हाल में भारत के एक कमर्शियल विज्ञापन में नजर आए थे। इस एड में रणवीर सिंह भी थे। ये दोनों लोग पुरुषों की यौन समस्या के समाधान के लिए बोल्डकेयर किट का प्रचार कर रहे थे। इस विज्ञापन को बहुत ही ड्रामे वाले अंदाज में बनाया गया था जिसके बाद लोगों के बीच ये विज्ञापन बहुत ही चर्चा में रहा। इस एड में एक एक्ट्रेस भी थीं जिसने जॉनी सिन्स की पत्नी का रोल निभाया था और मजेदार डॉयलॉग्स के साथ काफी अच्छी एक्टिंग की थी। इस एक्ट्रेस का नाम भावना चौहान है। भावना ने खुलासा किया है कि उन्होंने जॉनी सिन्स को जॉन सेना समझकर एड के लिए हाँ कर दिया था।

इंडिया टुडे से बात करते हुए भावना ने बताया, “मुझे नहीं पता कि मैंने नाम गलत क्यों पढ़ा। लेकिन जरा सोचिए, मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि जॉनी इस तरह के एड का हिस्सा होंगे। मैंने सोचा कि पहलवान भारत में बहुत काम करते हैं और इसलिए मैं बेवकूफ सोच रही थी कि ये जॉन सीना होंगे। लास्ट डिटेल्स मिलने के बाद ही मुझे पता चला कि यह जॉनी सिन्स था।”

भावना कहती हैं कि उन्हें बाद में जाकर पता चला कि कास्टिंग टीम क्यों बार बार उनसे पूछ रही थी कि वो पक्का इस एड को करेंगी न और वो विश्वास के साथ ‘हाँ’ कह रही थीं। भवान ने कहा कि उनका ये अब तक का सबसे बोल्ड प्रोजेक्ट रहा है। वो कहती हैं- “मैं अभी तक किसिंग सीन से भी दूर रहती थी और सीधे जॉनी सिन्स के साथ प्रोजेक्ट कर दिया।”

भावना बताती हैं – “मुझसे कई लोगों ने पूछा कि मैं तो कुछ निश्चित सीनों के कारण कई प्रोजेक्ट को मना करती रही हूँ, फिर मैंने इस सीन के लिए कैसे हाँ कर दी। ऐसे लोगों को समझना चाहिए कि जो एड किया गया है वो बहुत क्लासी ढंग से हुआ है। डायरेक्टर को मेरा ऑडिशन पसंद आया। उन्होंने मुझे कहा कि मैं इसी ढंग से एड करूँ।”

भावना ने कहा कि इस एड को लेकर उनका इंडस्ट्री में किसी ने मजाक नहीं उड़ाया और न ही उनका अपमान किया गया। रणवीर सिंह के साथ काम करने को भी उन्होंने बहुत अच्छा अनुभव बताया और बोलीं- “रणवीर को भी मेरा काम पसंद आया। वहीं जॉनी सिन्स भी बहुत कॉपरेटिव और प्रोफेशनल थे।”

बोल्ड केयर एड में रणवीर सिंह, भावना चौहान और जॉनी सिन्स

बता दें कि बोल्डकेयर का इस चर्चित विज्ञापन में रणवीर सिंह डेली सोप वाले जेठ का रोल निभा रहे हैं और अपनी भाई (जॉनी सिन्स) की बीवी से पूछते हैं कि वो घर छोड़कर क्यों जा रही है। इस पर भाई की बीवी उन्हें अपने सारी समस्या के बारे में बताती है। कभी कहती है- डाली पर फूल नहीं खिलता। कभी- पप्पू कांट डांस साला जैसे डॉयलॉग मारती है।

इसके बाद ड्रामे वाले अंदाज में भाई की बीवी को बालकनी से नीचे गिरते दिखाया जाता है। तभी रणवीर सिंह, जॉनी सिन्स को वो बोल्डकेयर का डब्बा देते हैं और ऐसे दिखाया जाता है कि जैसे जॉनी उसका सेवन करने के बाद अपनी बीवी को संतुष्ट करके जमीन पर सुरक्षित उतार लेते हैं। फिर, एड खत्म हो जाता है और रणवीर सिंह सामने आकर बोल्डकेयर किट की जरूरत और असर पर बात करते हैं।

बता दें कि ये विज्ञापन ‘#TakeBoldCareOfHerCampaign’ का हिस्सा है। बोल्डकेयर के को-फाउंडर रणवीर सिंह ने कहा, “मैं यहाँ उस पॉजिटिव इम्पैक्ट का इस्तेमाल करने आया हूँ जो मेरे पास है, ताकि हम लोगों को जागरूक कर सकें। बोल्ड केयर कैंपेन किसी बातचीत से कहीं ज्यादा है। यह मेरा एक मिशन है, जिसमें मैं गहराई से शामिल हूँ, और मैं यहाँ पुरुषों के सेक्सुअल हेल्थ के बारे में संदेश पहुँचाने के लिए आया हूँ, ताकि हम एक असरदार समाधान ला सकें, ताकि देशवासियों के जीवन पर इसका बड़ा असर पड़ सके।”

‘इस बार हर सीट पर कमल का फूल लड़ेगा चुनाव’: पीएम मोदी बोले – BJP का 370 का लक्ष्य श्यामा प्रसाद मुखर्जी को सच्ची श्रद्धांजलि

लोकसभा चुनाव की घोषणा से ठीक पहले सत्ताधारी पार्टी भाजपा की दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन आज शनिवार (17 फरवरी 2024) को दिल्ली में शुरू हो गया। इस अधिवेशन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी पहुँचे। उन्होंने ‘भाजपा 370 के पार’ की रणनीति बताई। अधिवेशन में पहुँचे नेताओं के सामने उन्होंने कहा कि इस बार लोकसभा सीट पर भाजपा का सिर्फ एक ही उम्मीदवार होगा और वह है कमल का फूल।

पीएम मोदी ने कहा कि बीजेपी का 370 लोकसभा सीटें जीतना श्यामा प्रसाद मुखर्जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी, जिन्होंने कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म करने के लिए लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने कहा कि इस बार के लोकसभा चुनाव 2024 में बीजेपी का चुनाव चिह्न ‘कमल’ ही पार्टी का उम्मीदवार होगा। उन्होंने सभी कार्यकर्ताओं से भाजपा की जीत एक बार फिर सुनिश्चित करने के लिए कहा।

दरअसल, भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 1951 में कहा था कि एक देश में दो निशान, दो प्रधान और दो विधान नहीं चलेंगे। यह नारा जम्मू-कश्मीर में दिया गया था। उन्होंने अनुच्छेद 370 हटाने की माँग की थी। अब बीजेपी सरकार ने अनुच्छेद 370 हटा दिया है तो प्रधानमंत्री ने मुखर्जी को श्रद्धांजलि के लिए 370 सीटों का लक्ष्य रखा है।

भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने कहा कि पीएम मोदी ने कहा कि बीजेपी 370 और एनडीए 400 पार में 370 सिर्फ एक आँकड़ा नहीं है। तावड़े के अनुसार, पीएम ने कहा कि बीजेपी का उम्मीदवार कमल का फूल है। उम्मीदवारों का चयन चलता रहेगा, लेकिन कमल के फूल को जिताने के लिए हर कार्यकर्ता को काम पर लग जाना चाहिए।

इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केंद्र सरकार और बीजेपी की राज्य सरकारों की योजना के लाभार्थियों से कार्यकर्ता मिलेंगे। यह अभियान 25 फरवरी से देश भर में शुरू होगा। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि भाजपा कार्यकर्ता आने वाले 100 दिन तक सीधे बूथ पर काम करें। पिछले बार के मुकाबले हर बूथ पर 370 वोट ज्यादा मिले, इसके लिए काम करें।

मोदी ने पार्टी नेताओं से यह भी कहा कि फर्स्ट टाइम वोटर को 2014 से पहले के भारत और 2014 के बाद के भारत के बीच का अंतर बताएँ। इसके साथ ही उन्हें बताए कि इस दौरान कैसे भारत का गौरव बढ़ा है। पीएम ने कहा कि महिला वोटर पर भी फोकस करने और उनके लिए सरकार द्वारा किए कार्यों को बताने का निर्देश दिया।

तावड़े ने कहा कि केंद्र में भाजपा सरकार के 10 साल हो गए। पीएम मोदी को संवैधानिक पद पर आए हुए भी 23 साल हो गए। इतने सालों में उन पर भ्रष्टाचार का एक भी आरोप नहीं लगा है। भाजपा की सरकार ने भ्रष्टाचार मुक्त, आरोप मुक्त, विकास पर आधारित जो सफलता पाई है, वह मतदाताओं तक पहुँचाना है।

तावड़े ने कहा कि पीएम ने कहा कि विपक्ष इस चुनाव में ‘तू-तू मैं-मैं’ की राजनीतिक ज्यादा करेगा। भावनात्मक मुद्दों को ज्यादा उछालेगा, लेकिन भाजपा की सरकार ने गरीब कल्याण के लिए जो काम किया है, वही पार्टी का चुनावी अभियान रहेगा। भाजपा मतदाताओँ तक गरीब कल्याण, विकास, देश के गौरव के आधार पर पहुँचेगी।

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा कहा कि लोकसभा प्रवास योजना में 161 लोकसभा में 430 प्रवास केंद्रीय मंत्रियों के हुए हैं। ये 161 सीटें वे हैं, जो पिछले चुनाव में भाजपा हार गई थी। नड्डा ने भरोसा जताया कि इसमें ज्यादातर सीटें जीतने में भाजपा इस बार कामयाब होगी।

दिल्ली पहुँचे कमलनाथ, सांसद बेटे ने ‘X’ बायो से हटाया कॉन्ग्रेस का नाम: BJP में शामिल होने की अटकलें, दिग्विजय के करीबी को राज्यसभा भेजे जाने से नाराज़?

क्या मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ कॉन्ग्रेस छोड़ रहे हैं? अटकलों का बाजार गर्म है, इसी बीच कमलनाथ अपने बेटे नकुल समेत शनिवार (17 फरवरी, 2024) को राजधानी नई दिल्ली भी पहुँच गए हैं। कई जगह अटकलें ये भी हैं कि वो भाजपा में शामिल हो सकते हैं, हालाँकि, पार्टी नेता तजिंदर बग्गा ने इन खबरों को अफवाह करार दिया है। हाल ही में महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण कॉन्ग्रेस छोड़ कर भाजपा में शामिल हुए हैं।

उधर नकुल नाथ ने अपने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) बायो से कॉन्ग्रेस का नाम हटा लिया है। वो 2019 में छिंदवाड़ा लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए हैं। इस सीट पर बीच में एक साल छोड़ दें तो 1980 से ही इसी परिवार का कब्ज़ा है। कमलनाथ यहाँ से 9 बार सांसद रहे हैं, जबकि उनकी पत्नी अलका नाथ भी एक बार सांसद बन चुकी हैं। वहीं कमलनाथ छिंदवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से लगातार दूसरी बार विधायक भी बने हैं। इस पूरे क्षेत्र को इस परिवार का गढ़ माना जाता है।

कमलनाथ ने कहा है कि जो भी आगे का फैसला होगा, उस संबंध में बताया जाएगा। वो 1980, 1984, 1989, 1991, 1998, 1999, 2004, 2009 और 2014 में छिंदवाड़ा से सांसद चुने जा चुके हैं। वहीं वो मनमोहन सिंह की सरकार में 10 वर्ष केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं। उससे पहले वो केंद्र में राज्यमंत्री रह चुके हैं। कमलनाथ दिसंबर 2018 से मार्च 2020 तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। वो राज्य में कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष भी रह चुके हैं।

मीडिया के सवालों पर कमलनाथ ने कहा कि आपलोग इतने उत्साहित क्यों हो रहे हैं, जो होगा वो खुद सूचित करेंगे। बता दें कि 2023 में मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस की हार का ठीकरा कमलनाथ के सिर पर ही फोड़ा गया था। अचानक से उनसे अध्यक्ष पद छीन कर जीतू पटवारी को बिठा दिया गया। वो केंद्र में ही ज्यादातर सक्रिय रहे हैं, लेकिन उन्हें राज्य में पार्टी ने सीमित कर दिया था। हाल ही में दिग्विजय सिंह समर्थक अशोक सिंह को राज्यसभा सदस्य बनाए जाने से भी वो नाराज़ बताए जा रहे हैं।

ISRO लॉन्च करने जा रहा ‘नॉटी बॉय’, प्रक्षेपण से पहले मंदिर में हुई पूजा-अर्चना: इनसैट सीरिज की है ये तीसरी सैटेलाइट

ISRO के मौसम उपग्रह इनसैट-3डीएस की 17 फरवरी 2024 को सफल लॉन्चिंग के लिए इसरो अध्यक्ष ने भगवान का आशीर्वाद लिया। इसरो चीफ एस सोमनाथ आज आँध्र प्रदेश के सुल्लुरपेट में श्री चेंगलम्मा मंदिर में पहुँचे और फिर उनकी एक वीडियो सामने आई जिसमें वह मंदिर के भीतर पूजा पूाठ कर रहे थे। इस रॉकेट को इसरो ने ‘नॉटी बॉय’ निकनेम दिया है।

बता दें कि 17 फरवरी 2024 शाम यानी आज 5:35 पर श्रीहरिकोटा के सतीष धवन स्पेस सेंटर से उपग्रह इनसैट-3डीएस को जीएसएलवी एफ14 रॉकेट की मदद से पृथ्वी की भूस्थैतिक कक्षा में स्थापित किया जाएगा।

जीएसएलवी एफ14 का ये 16वाँ मिशन होगा। जीएसएलवी एफ14 महज 20 मिनट में सैटेलाइट को उसके लक्ष्य तक पहुँचा देगा। अब तक इस जीएसएलवी ने 15 सैटेलाइट को लॉन्च किया है जिसमें से केवल 4 ही विफल हुई है।

ये सैटेलाइट बताया जा रहा है कि ये समुद्र की सतह का बारीकी से अध्ययन करेगी, जिससे मौसम की सटीक जानकारी मिल सके और प्राकृतिक आपदाओं के बारे में भी ठीक से अनुमान लगाया जा सके। इनसैट-3डीएस के बारे में आई जानकारी के अनुसार, इसका वजन 2,274 किलो है और इसे ले जाने वाले रॉकेट की लंबाई 51.7 मीटर है। इस सैटेलाइट में रॉकेट इमेजर, पेलोड, साउंडर, डेटा रिले ट्रांसपोंडडर और सेटेलाइन एडेड सर्च एंड रेस्क्यू ट्रांसपोंडर जा सकेगा।

इस सैटेलाइट की मिशन लाइफ 10 साल है। ये इनसैट सीरिज की 3 सैटेलाइट है। इस मिशन को मिनिस्ट्री ऑफ अर्थ साइंस द्वारा फंड किया गया था। इसरो का कहना है कि इनसैट-3डीएस वर्ष 2013 में लॉन्च किए गए मौसम उपग्रह इनसैट-3डीएस का उन्नत रूप हैं। वहीं 1 जनवरी 2024 को पीएसएलवी-सी58/एस्पोसैट मिशन के सफल प्रक्षेरण के बाद इस साल इसरो का यह दूसरा मिशन होगा।

DJ बजाने पर मस्जिद के सामने सरस्वती पूजा यात्रा पर हमला, पत्थरबाजों में बच्चों-बुजुर्गों से लेकर महिलाएँ भी: 10 घायल, उलटे मुखिया विनोद यादव पर ही FIR

झारखंड में प्रतिमा विसर्जन के दौरान 2 अलग-अलग हिस्सों में हिंसा की खबर है। यह हिंसा देवघर जिलों में हुई है। हिंसा के दौरान पत्थरबाजी की गई और उन्मादी नारे लगाए गए। हिंसा के चलते लगभग 10 लोग जख्मी हुए हैं। प्रभावित इलाकों में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है। आरोपितों की पहचान करके उन पर कानूनी कार्रवाई की जा रही है। घटना शुक्रवार (16 फरवरी 2024) की है। ऑपइंडिया से बात करते हुए देवघर के पीड़ित हिन्दुओं ने बताया कि उन पर प्रशासन की मौजूदगी में पत्थरबाजी हुई है।

पहला मामला देवघर जिले के थानाक्षेत्र मधुपुर का है। यहाँ शुक्रवार (16 फरवरी) को गाँव चोंगाखर में हिन्दुओं ने मूर्ति विसर्जन का जुलूस निकाला था। जुलूस में शामिल जयदेव कुमार यादव ने ऑपइंडिया से बात करते हुए घटना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लगभग 25-30 श्रद्धालुओं के जुलूस में बच्चे और महिलाएँ भी चल रहीं थीं। जुलूस में DJ पर भजन आदि बज रहा था। जब यात्रा चोंगखर चौराहा मस्जिद के सामने पहुँची तो आसपास के रहने वाले मुस्लिम समुदाय के कुछ लोग आ गए और विरोध किया।

जयदेव यादव का आरोप है कि इन लोगों में शहाबुद्दीन अंसारी, हबीब, आज़ाद सहित कई लोग शामिल थे। इन्होंने मस्जिद के आगे DJ बंद करने को कहा। हालाँकि श्रद्धालुओं ने अपनी यात्रा जारी रखी। मौके पर मौजूद प्रशासन के लोगों ने मामले को बिगड़ता देखकर जुलूस को तेज गति से आगे बढ़ाने के लिए दबाव डाला। जयदेव और उनके साथियों ने प्रशासन की बात मान ली और तेजी से जुलूस आगे बढ़ाने लगे।

बकौल जयदेव यादव इसी बीच मस्जिद के आसपास मौजूद घरों से उन पर पथराव होने लगा। पत्थरबाजों में बच्चे, बूढ़े और महिलाएँ भी शामिल थीं। इनके हमले से विसर्जन यात्रा में चल रहे लोगों में अफरातरफरी मच गई। लगभग 8 श्रद्धालु घायल बताए जा रहे हैं। हमलावरों को रोकने के प्रयास में पुलिस के 2 जवान भी घायल बताए जा रहे हैं। आखिरकार DJ आदि बंद करवाकर बची-खुची यात्रा प्रशासन ने जैसे-तैसे पूरी करवाई। अतिरिक्त फ़ोर्स पहुँचने पर हालत को काबू किया जा सका। फ़िलहाल पीड़ित हिन्दुओं की तरफ से थाने में शिकायती प्रार्थना पत्र दिया गया है।

पीड़ित श्रद्धालुओं की तरफ से लगभग आधे दर्जन नामजद और 50 अज्ञात हमलावरों पर FIR दर्ज की गई है। यात्रा में शामिल जयदेव यादव के मुताबिक, आरोपित शहाबुद्दीन ईंट-भट्ठे के साथ जुआ आदि जैसे गैरकानूनी काम भी करता है। बकौल जयदेव वो नहीं समझ पा रहे हैं कि अचानक हमलावरों के पास इतने पत्थर कहाँ से आ गए। स्थानीय बजरंग दल पदाधिकारी धनञ्जय ने भी जयदेव के आरोपों को सही बताया और प्रशासन से आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की आशा जताई है। जयदेव यादव इस बात के लिए भी चिंतित दिखे कि जो प्रतिमाएँ विसर्जन के लिए अभी बचीं हैं उनका क्या होगा।

गाँव ने मुखिया ने JMM सरकार को कोसा

ऑपइंडिया ने इस मामले में चोंगाखार गाँव के मुखिया विनोद यादव से बात की। विनोद यादव ने JMM (झारखंड मुक्ति मोर्चा) सरकार को कोसते हुए कहा कि प्रशासन ने मामले को रफा-दफा करने के लिए हिन्दुओं पर भी FIR दर्ज कर दी है। इस FIR में मुखिया विनोद यादव भी नामजद हैं, जबकि उनका दावा है वो हिंसा में दूर-दूर तक नहीं शामिल थे।

मुखिया के मुताबिक, ऐसा प्रशासन ने दोनों पक्षों में समझौता कराने का दबाव बनाने के लिए करवाया है। स्थानीय निवासियों ने ऑपइंडिया को घटना से जुड़े कुछ वीडियो भी भेजे हैं। इनमें भीड़ का शोर और अफरा-तफरी दिख रही है। ऑपइंडिया ने मामले में आधिकारिक बयान के लिए थाना प्रभारी मधुपुर को सम्पर्क किया तो उनका फोन बंद मिला। पुलिस वर्जन आने के बाद उसे खबर में अपडेट किया जाएगा।

पत्थरबाजी, पुलिस पर हमला, डंडा-तलवारों से हिंसा और गाली… ‘किसानों’ की पोल खोलते कई वीडियो वायरल, प्रदर्शन में खालिस्तानी आतंकियों वाले टीशर्ट

देश में एक बार फिर से ‘किसान आंदोलन’ शुरू हो गया है। इस दौरान सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो सामने आई हैं, जिनमें इन तथाकथित किसानों को अराजकता फैलाते हुए और हिंसा करते हुए देखा जा सकता है। हरियाणा-पंजाब के शम्भू बॉर्डर पर इन किसानों ने सबसे ज्यादा उत्पात मचा रखा है। साथ ही ये खालिस्तान का समर्थन भी कर रहे हैं। कई पुलिस वाले घायल हुए हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ये लोग सचमुच देश के किसानों का प्रतिनिधित्व करते हैं?

एक वीडियो में इन किसानों को पुलिस पर ताबड़तोड़ पत्थरबाजी करते हुए देखा गया। उन्हें खूब पता था कि उनकी हरकतें कैमरे पर रिकॉर्ड की जा रही हैं, लेकिन इसके बावजूद वो नहीं रुके। वीडियो में देखा जा सकता है कि नील रंग के कपड़े पहने एक गुंडे ने तो पुलिस को धमकाने के लिए अपना तलवार तक निकाल लिया।

वहीं एक अन्य वीडियो में एक प्रदर्शनकारी को पुलिस को धमकाते हुए देखा गया। वो कह रहा है, “तुम टोपी वाले हमें नहीं रोक सकते। हम तुम्हारे गर्दन काट लेंगे। हम अपने हाथों से तुम्हें कुचल देंगे।” क्या ये किसी किसान की भाषा हो सकती है?

एक अन्य वीडियो में देखा जा सकता है कि प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों से उनके साजोसामान छीन रहे हैं, उन्होंने खुद की सुरक्षा के लिए जो चीजें रखी हैं उन्हें छीना जा रहा है। ये पुलिसकर्मी सिंघु बॉर्डर पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात किए गए थे।

गालियाँ बकने में भी ये तथाकथित किसान पीछे नहीं हैं। एक वीडियो में इन्हें DSP स्तर के अधिकारी को गाली बकते हुए देखा जा सकता है। पुलिस अधिकारी ने उनसे सिर्फ इतना निवेदन किया था कि वो पीछे हटें और प्रदर्शन को रोकें।

वहीं एक तस्वीर ‘मिस्टर सिन्हा’ ने भी डाली, जो मालदीव के खिलाफ मोर्चा खोलने के बाद सुर्ख़ियों में आए थे। उन्होंने लिखा, “ये देखिए, तथाकथित किसानों ने इस निर्दोष पुलिस अधिकारी के साथ क्या किया। इनके परिवार का क्या? इनके मानवाधिकार का क्या? या फिर ये सब सिर्फ गद्दारों के लिए आरक्षित हैं?” इस तस्वीर में किसान प्रदर्शनकारियों के हमले में घायल पुलिसकर्मी को देखा जा सकता है।

पुलिस की गाड़ी तक को नहीं छोड़ा गया। एक वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे खुद को किसान बताने वाले ये गुंडे डंडों से पुलिस के वाहन पर हमला कर रहे हैं। कई पुलिसकर्मी इसमें घायल भी हुए।

वहीं नोएडा पुलिस ने जब किसानों के एक समूह को संसद की तरफ मार्च करने से रोका तो उन्होंने उपद्रव शुरू कर दिया। हरियाणा में तो किसानों ने टेनिस गेंदों का इस्तेमाल कर के सर्विलांस ड्रोन्स तक को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की। इसके लिए उन्होंने पतंगों तक का इस्तेमाल किया। वहीं किसान आंदोलन में लगातार खालिस्तानी पोस्टर-बैनर भी देखे जा रहे हैं। एक शख्स को आतंकी अमृतपाल की तस्वीर वाला टीशर्ट पहने हुए देखा गया।

हरियाणा पुलिस के CCTV कैमरों में कई ऐसे वीडियो आए हैं। खालिस्तान समर्थक अमृतपाल, जो फ़िलहाल जेल में है, उसकी तस्वीर भी लगाए हुए लोग दिखे। अमृतपाल को असम पुलिस पकड़ कर ले गई, वो वहीं की जेल में बंद है।

जीवन का कुछ नहीं पता… ‘दंगल गर्ल’ ने 19 साल की उम्र में दुनिया छोड़ी, दवाइयों के साइड इफेक्ट ने ली जान

बॉलीवुड की सुपरहिट फिल्म दंगल में छोटी बबीता का किरदार निभाने वाली एक्स्ट्रेस सुहानी भटनागर का 19 साल की उम्र में निधन हो गया। वह कुछ समय से बीमार थीं और उनका इलाज एम्स में चल रहा था। बहुत कोशिशों के बाद भी डॉक्टर सुहानी को नहीं बचा सके।

बताया जा रहा है कि कुछ समय पहले सुहानी के पैर में फ्रैक्चर हुआ था। इसके बाद उन्होंने कुछ दवाइयाँ खाई जिनका उनके शरीर पर गंभीर साइड इफेक्ट देखने को मिले। उनके शरीर में धीरे-धीरे पानी भरता गया और इलाज के बाद भी वो रिकवर नहीं हो पाईं।

सुहानी का अंतिम संस्कार फरीदाबाद में होना है। उनके परिवार की ओर से अभी कोई बयान नहीं आया है। लेकिन फिल्म जगत में जो कोई भी उनके निधन की खबरें सुन रहा है वो सब हैरान हैं। सोशल मीडिया पर भी लोगों को विश्वास नहीं हो रहा कि अपने डॉयलॉगों से सब दिल जीतने वाली छोटी बबीता इतनी जल्दी दुनिया छोड़ गईं।

सुहानी ने 10-11 साल की छोटी सी उम्र में ही बॉलीवुड की दंगल फिल्म से अपना डेब्यू किया था। फिल्म में उनके काम को काफी पसंद भी किया गया था। एक्टिंग के अलावा उन्हें सिंगिंग और डांसिंग का काफी शौक था। लेकिन अपनी पढ़ाई अच्छे से पूरी करने के लिए उन्होंने एक्टिंग से ब्रेक ले लिया था। वो इंस्टाग्राम पर भी खासी एक्टिव नहीं थीं इसलिए उनके हेल्थ से जुड़ी खबर पहले नहीं आ पाई।

सोशल मीडिया पर उनकी मौत की खबर सुनकर कहा जा रहा है कि जीवन का सच में कुछ नहीं पता। सिर्फ 19 साल की उम्र में सुहानी चली गईं। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे।

रवीश कुमार ने ‘लव जिहाद’ को बताया काल्पनिक, नेशनल शूटर ने लताड़ा, कहा – ‘जिस जिहादी ने मुझे दी प्रताड़ना, उसे आप जैसों से मिलती है हिम्मत’

राइफल शूटर तारा शाहदेव ने रवीश कुमार के प्रोपेगंडा का तगड़ा जवाब दिया है। बता दें कि तारा शाहदेव जबरन धर्म-परिवर्तन, यौन उत्पीड़न और दहेज़ प्रताड़ना की शिकार रही हैं। रकीबुल ने उन्हें फँसा कर उनके साथ लव जिहाद’ की घटना को अंजाम दिया था। इस मामले में रकीबुल को राँची स्थित CBI की स्पेशल कोर्ट ने आजीवन कारावास की सज़ा भी सुनाई थी। झारखंड उच्च न्यायालय का तत्कालीन रजिस्ट्रार मुश्ताक अहमद को भी 15 वर्ष की सज़ा सुनाई गई थी।

पहले NDTV में रहे यूट्यूबर रवीश कुमार ने शुक्रवार (16 फरवरी, 2024) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक तस्वीर शेयर की, जिसमें उन्होंने अपने हाथ में ‘लव जिहाद एन्ड अदर फिक्शंस’ नामक एक पुस्तक ले रखी है। उन्होंने इस किताब का प्रचार करते हुए लिखा कि प्रगति मैदान में आयोजित पुस्तक मेले में इसके तीनों लेखक मौजूद रहेंगे और इस पर चर्चा होगी। रवीश कुमार ने ‘लव जिहाद’ को मनगढंत बताने वाली किताब का प्रमोशन किया।

इस पर उन्हें जवाब देते हुए तारा शाहदेव ने लिखा, “रकीबुल जैसे जिहादी, जिसने मुझे धर्म परिवर्तन और ‘लव जिहाद’ के लिए जो शारीरिक और मानसिक प्रताड़नाएँ दी, मैं उस समय समझ नही पाई थी कि वो हैवानियत करने की हिम्मत उसमे कहाँ से आई। लेकिन, आज समझ आया की वो हिम्मत उन जैसे लोगों को आप जैसे लोग ही देते हो।” तारा शाहदेव खुद ‘लव जिहाद’ की पीड़िता रही हैं, ऐसे में इसे काल्पनिक बताया जाना उन्हें बर्दाश्त नहीं हुआ और उन्होंने रवीश कुमार को करारा जवाब दे दिया।

बता दें कि तारा शाहदेव को रकीबुल हसन ने ‘रंजीत कोहली’ बन कर फाँसा था और इस साजिश में उसकी अम्मी कौशर रानी भी शामिल थीं। उसे भी 10 वर्ष की सज़ा सीबीआई की विशेष अदालत ने सुनाई थी। 2014 में ही ये मामला प्रकाश में आया था और 2015 में हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने जाँच शुरू की। असल में रकीबुल हसन पहले रंजीत कोहली हुआ करता था और उसने इस्लामी धर्मांतरण करा लिया था, लेकिन ये बात तारा को शादी के बाद पता चली।

शादी के बाद न सिर्फ तारा शाहदेव, बल्कि उनकी माँ को भी प्रताड़ित किया जाता था। तारा को कई-कई दिनों तक खाना नहीं दिया जाता था। धमकी दी गई थी कि अगर उन्होंने सिंदूर लगाया तो उनके हाथ-पाँव तोड़ डाले जाएँगे। साथ ही उन पर इस्लाम कबूल करने का दबाव भी बनाया जाता था। डेढ़ महीने की प्रताड़ना के बाद तारा ने किसी तरह अपने भाई को फोन किया, जिसके बाद उन्हें कैद से मुक्त कराया जा सका। उन्हें दहेज़ के लिए भी प्रताड़ित किया गया था।

जहाँ तक ‘लव जिहाद’ की बात है, लगभग रोज इससे जुड़ी कुछ न कुछ घटना सामने आती रहती है। हाल ही में मोहम्मद अनीश ने इंस्टाग्राम के जरिए सीतामढ़ी की हिन्दू नाबालिग को फँसाया और फिर गोरखपुर से सीतामढ़ी बुलाकर होटल में रखा। सितंबर 2023 में लव जिहाद, बलात्कार, अप्राकृतिक यौन संबंध से पीड़ित महिला ने सोशल मीडिया के जरिए बेंगलुरु पुलिस से न्याय की गुहार लगाई थी। हिन्दू ही नहीं, बल्कि अन्य धर्मों की लड़कियाँ भी इसकी शिकार हुई हैं। लद्दाख में बौद्ध संगठनों ने वहाँ हुई ऐसी ही एक घटना के बाद तगड़ा विरोध प्रदर्शन किया था

यौन सुख पाने के लिए लिंग में घुसा ली 3 बैटरी, न निकलने पर हुई हालात खराब: डॉक्टरों ने काट कर निकाला, 3 स्टेज में होगा प्राइवेट पार्ट रिपेयर

ऑस्ट्रेलिया से हैरान करने वाली घटना सामने आई है। खबर है कि वहाँ एक 73 साल के बुजुर्ग ने यौन सुख पाने के लिए अपने लिंग में बटन के साइज वाली बैटरियाँ घुसा लीं। लेकिन बाद में वह उसे निकाल नहीं पाया और हालत बद्तर हो गई। बाद में डॉक्टरों ने उसका ऑपरेशन किया।

ये घटना चूँकि ऑस्ट्रेलिया की पहली घटना है इसलिए इस पर मेडिकल स्टडी यूरोलॉजी केस रिपोर्ट में प्रकाशित हुई है। स्टडी में मरीज का नाम नहीं डाला गया है। लेकिन बताया गया है कि आखिर उसने यौन सुख पाने के लिए क्या किया।

मीडिया रिपोर्ट्स में आई जानाकरी के अनुसार, 73 वर्षीय बुजुर्ग अपने प्राइवेट पार्ट में यौन संतुष्टि के लिए अलग-अलग चीजें डालता था। एक दिन उसने कुछ अलग प्रयोग करने के क्रम में अपने पेनिस में बटन साइज वाली बैटरियाँ डाल लीं। लेकिन बाद में वह उन्हें निकाल नहीं पाया और दर्द से तड़पता रहा।

तस्वीर साभार: न्यू यॉर्क टाइम्स

24 घंटे पीड़ा सहने के बाद उसने इस संबंध में डॉक्टरों से मदद माँगी। तब तक उसका पेशाब बंद हो गया था। डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत देखते हुए तुरंत सर्जरी करके बैटरी को बाहर किया, जो कि काले तार जैसे पदार्थ से लिपटी हुई थीं। डॉक्टरों ने कहा कि यदि उसका समय पर इलाज न होता तो उसके शरीर के टिशू बिलकुल नष्ट हो जाते। इससे उसकी मौत भी हो सकती थी।

सर्जरी के बाद बुजुर्ग खतरे से तो बाहर आ गया लेकिन उसकी परेशानियाँ नहीं कम हुईं। 10 दिन तक उसके पेनिस में सूजन रही और कुछ अजीब सा डिस्चार्ज उसके पेनिस से होता रहा। डॉक्टरों ने उसकी हालत देखी तो फिर उसका ऑपरेशन किया। इस दफा उसके लिंग की खाल पर चीरा मारा गया तब जाकर वो सारी पस निकलकर बाहर आई।

अध्य्यन के अनुसार डॉक्टरों को डर था कि कहीं व्यक्ति को नेक्रोसिस न हो जाए, जो कि सच हुआ। अंत में डॉक्टरों को इलाज के लिए व्यक्ति के यूरेथ्रा को हटाना पड़ा। अब पेनिस को दोबारा से रिकंस्ट्रक्ट करने पर 3 चरण में सर्जरी करनी पड़ेगी और यही सबसे अच्छा निर्णय होगा।