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कैमरे पर ही बीवी को पीटने चला पाकिस्तान का क्रिकेट एक्सपर्ट, फिर अल्लाह का जताने लगा शुक्र: मोहसिन अली का वीडियो देख भड़के लोग

पाकिस्तान के क्रिकेट एक्सपर्ट मोहसिन अली यूट्यूब लाइव स्ट्रीम के दौरान अपनी बीवी को पीटने की कोशिश करते दिखाई दिए हैं। मोहसिन लाइव स्ट्रीम में अपनी बीवी की आवाज आ जाने से नाराज थे। क्रिकेट के बारे में चर्चा वाली इस लाइव स्ट्रीम को पत्रकार रिज़वान हैदर होस्ट कर रहा था। जब पीछे से मोहसिन अली की बीवी की आवाज आई तो बातचीत का माहौल ही बदल गया। लाइव स्ट्रीम में ही मोहसिन अपनी बीवी की तरफ बढ़े और अपना बायाँ हाथ पिटाई के मकसद से उठाया। कुछ ही देर में यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

मोहसिन अली की इस हरकत को नेटीजेंस ने घरेलू हिंसा करार दिया है। उनकी हरकत पर सोशल मीडिया में नाराजगी जताई जा रही है। लोगों को तब और अधिक हैरत हुई जब इसी लाइव स्ट्रीम में आगे मोहसिन अली ने अपनी करतूत पर माफ़ी माँगने के बजाय सफाई देनी शुरू कर दी। एक यूजर अंशुल राज सिंह ने लिखा, “मानवता सबसे पहले आती है। मोहसिन अली माफी माँगें क्योंकि आपने उन्होंने लाइव के 1:40 वें सेकंड पर घरेलू हिंसा की है। उन्हें अपनी पत्नी का सम्मान करना चाहिए।”

लाइव स्ट्रीम पर आ रहे कमेंट को पढ़ कर शो को होस्ट कर रहे पत्रकार रिज़वान हैदर ने इस मामले में अपनी तरफ से सफाई पेश करने की कोशिश की। हालाँकि, मोहसिन अली ने बीच में रिज़वान को टोका और अपनी तरफ से सफाई देने की पेशकश की। मोहसिन ने कहा, “इस मुद्दे पर मुझे बात करने दीजिए। मेरे भाई अंशुल, बात ये है कि जब आप लाइव बैठे हो और बीच में कोई समस्या आ जाए तो आप पता नहीं कौन सा वायलेंस (हिंसा) करेंगे।”

इसके बाद मोहसिन खान ने अपनी शादीशुदा जिंदगी के 31 साल पूरे होने की बात कहते हुए अंशुल की उतनी उम्र भी न होने जैसा कुतर्क दिया। आगे उन्होंने कहा, “अल्लाह का शुक्र है कि हम अपनी मां, बहन और पत्नी का सम्मान करते हैं। मेरी 31 साल पुरानी शादी इसका सबूत है। यह घरेलू हिंसा नहीं है। थोड़ा तमीज सीखो।” हालाँकि, मोहसिन अली की ये बातें नेटीजेंस को संतोषजनक नहीं लगीं। एक यूजर ने लिखा कि मोहसिन के व्यवहार में कुछ भी नया नहीं है क्योंकि उनकी हरकतें ऐसी ही हैं। वहीं एक अन्य यूजर ने ऐसी घटनाएँ पाकिस्तान में सामान्य बात बताया।

इन सभी के अलावा एक अन्य यूजर ने मोहसिन अली को फ्रेस्टेड पति बताया है जबकि ललित ने इस्लामाबाद पुलिस को टैग करते हुए क्रिकेट एक्सपर्ट की गिरफ्तारी की माँग की है।

बताते चलें कि सोशल मीडिया पर मोहसिन अली के तमाम फॉलोवर हैं। उनके अपने यूट्यूब चैनल पर 107K से अधिक सब्सक्राइबर हैं। वहीं रिजवान हैदर के चैनल पर 577K से अधिक सब्सक्राइबर हैं। यहाँ पर ये अक्सर क्रिकेट के बारे में बात करते हैं।

बच्चों को पिलाते हैं शराब, पतियों को मारते हैं: संदेशखाली की 10 पीड़िताओं का दर्द, बोलीं- सुंदर औरतों का होता है यौन शोषण, बाकी करती हैं काम

बंगाल के संदेशखाली में तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों के अत्याचारों का खुलासा एक और रिपोर्ट के जरिए हुआ है। ये रिपोर्ट आजतक की पत्रकार श्वेता सिंह ने संदेशखाली में जाकर की। इस रिपोर्ट में 10 महिलाओं ने अपने दर्द को उजागर किया है।

श्वेता सिंह से बात करते हुए एक (पहली) महिला ने बताया कि टीएमसी गुंडे उन्हें उनकी मर्जी के बगैर जबरन अपने पार्टी कार्यालय ले जाते हैं और कहते हैं कि रात में मीटिंग है और सबको वहाँ रहना जरूरी है।

दूसरी पीड़िता को कहते सुना गया, “वे दिन के किसी भी समय आते और हमें अपने साथ चलने के लिए मजबूर करते। भले ही हम घर पर खाना बना रहे हों, हमसे उम्मीद की जाती है कि हम घर का सारा काम छोड़कर पार्टी की बैठकों में शामिल हों। उन्होंने हमारी ज़मीनों पर कब्ज़ा कर लिया है और हमें पट्टे का भुगतान नहीं करते हैं… हम कहाँ जाएँगे? पुलिस हमारी बात नहीं सुन रही है और महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जवाबी एफआईआर दर्ज कर रही है।”

तीसरी पीड़िता ने बताया- “जब हम अपने पैसे माँगने जाते हैं, तो वे हमारे साथ गाली-गलौज करते हैं और हमें जबरदस्ती हमारे घरों से ले जाते हैं। अगर हम उनका विरोध करते हैं तो वे हमारे घर आ जाते हैं और घर के पुरुषों को धमकाते हैं। अगर हम पार्टी की बैठकों में शामिल नहीं हुए तो वे हमें अपहरण करने की धमकी देते हैं।”

चौथी पीड़ित महिला ने कहा- “वे (टीएमसी गुंडे) मीटिंग के नाम पर हमें पार्टी कार्यालय में ले जाते और फिर हमें प्रताड़ित करने लगते। वहाँ वह ‘खूबसूरत महिलाओं’ का यौन शोषण करते थे और दूसरी महिलाओं से खाना बनवाते थे या फिर काम करवाते थे। ऐसा दिन-ब-दिन होता था। अगर महिलाएँ ऐसा करने से मना करती थीं तो उनके पतियों पर हमला होता था।”

बच्चों को बिगाड़ रहे टीएमसी गुंडे, जबरन पार्टी को वोट डलवाते हैं

इसी तरह पाँचवी महिला ने जानकारी दी कि टीएमसी गुंडे इलाके के बच्चों को भी बिगाड़ रहे हैं। महिला ने कहा, “वे 14-15 साल के बच्चों को शराब और बंदूकें देते हैं और अगर हम राजनीति में भाग नहीं लेते तो वे हमारे माता-पिता और परिवार के सदस्यों की हत्या करने की धमकी देते हैं।”

छठी महिला ने संदेशखाली में कैसे दबाव डालकर वोट लिया जाता है इसके बारे में बताया। उसने कहा- “अगर हम उन्हें वोट नहीं देना चाहते तो वो जबरदस्ती लेते हैं। वोट बैलट पेपर पर होता है। ये लोग खुद सील लेकर खुद को वोट दे देते हैं हमारी मर्जी नहीं चलने देते।”

मुँह छिपाने को महिलाएँ मजबूर, गुंडे ‘सेक्सी’ कहकर बुलाते हैं

कई महिलाओं ने टीएमसी गुंडों के डर से अपना चेहरा दिखाने से भी मना कर दिया। सातवीं पीड़िता ने मुँब छिपाकर कहा- “गाँव में सब टीएमसी समर्थक हैं। चाहे शिबू हाजरा और उत्तम सरदार जैसे लोगों ने हमारी जमीन ही क्यों न हड़प ली हो। हम लगातर डर में हैं। हम अपना चेहरा भी कैमरे में नहीं दिखा सकते।”

आठवीं पीड़िता ने कहा, “वे हमें पार्टी कार्यालय आने के लिए मजबूर करते थे और फिर कहते थे कि हमें घर जाने की अनुमति नहीं है। वे हमें ‘सेक्सी’ कहते थे और चाहते थे कि हम पार्टी बैठकों में 200-400 और महिलाओं को लाएँ। वह हमसे कहते थे कि हम उनका मनोरंजन करें वरना वो हमें नहीं छोड़ेंगे।”

ममता दीदी कभी नहीं आई संदेशखाली: पीड़िताओं ने पूछा- क्या वो झूठ बोल रही हैं

नौवीं पीड़िता ने दुखी होकर कहा, “पुलिस ने हमारी कभी मदद नहीं की। वह शीबू हाजरा जैसे लोगों के साथ खड़े थे। हमारी कोई नहीं सुनता था। वे कभी भी आते और हमें अपने साथ ले जाते। अगर हम उनके साथ नहीं जाते तो वे हमारे पतियों की पिटाई करते। अगर हम स्वेच्छा से पार्टी कार्यालय नहीं जाते, तो वे हमें हमारी इच्छा के विरुद्ध ले जाने के लिए बाइक पर किसी को भेजते। हमें उनका मनोरंजन करना होता था। कोई और रास्ता नहीं था…ममता दीदी यहाँ कभी नहीं आईं। वास्तव में, यहाँ कोई भी हमारी जाँच करने नहीं आया। ममता दीदी कह रही हैं कि संदेशखाली में कुछ नहीं हुआ? क्या हम झूठ बोल रहे हैं?”

महिलाओं ने जानकारी देते हुए कहा कि यह दरिंदगी उनके साथ साल 2011 से हो रही है। उन्होंने कहा, “अगर शिबू हाजरा और शाहजहाँ शेख खुले में हैं, तो हमारे साथ हत्या सहित कुछ भी हो सकता है। हमें लगता है कि जब हम घर पर होंगे तो दोनों हमें मार सकते हैं। हम पति और बच्चों के बिना रहते हैं। हम उन्हें रोक नहीं पाएँगे। हम शांति चाहते हैं। जब तक वे गिरफ्तार होंगे, हमें मानसिक शांति नहीं मिलेगी। अगर उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई तो हम लोग अपने घरों में नहीं रह पाएँगे। अगर उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया तो इलाके में और अधिक आतंक फैल जाएगा।”

एक अन्य स्थानीय (दसवीं) महिला ने संदेशखाली में टीएमसी सरकार को आड़े हाथों लिया। उसने आधार कार्ड दिखाकर कहा कि वो संदेशखाली की मूल निवासी है। महिला ने ऐसा अपना चेहरा दिखाते हुए कहा और टीएमसी नेताओं के उन सवालों का जवाब दिया जिसमें वो कह रहे थे कि आरोप लगाने वाली महिलाएँ संदेशखाली की नहीं हैं।

संदेशखाली विवाद की पृष्ठभूमि

8 फरवरी 2024 को संदेशखाली में महिलाएँ टीएमसी के अत्याचारों से तंग आकर सड़कों पर उतरीं। उन्होंने टीएमसी नेता शेख शाहजहाँ और उसके दो साथी शीबू हाजरा और उत्तम सरदार पर कई आरोप लगाए। महिलाओं ने इनकी गिरफ्तारी की माँग भी की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। महिलाओं ने अपने ऊपर अत्याचारों को मीडिया में बताया। जिसके बाद पूरा देश संदेशखाली के बारे में सुन सन्न रह गया। हालात देखते हुए वहाँ 10 फरवरी धारा 144 लगाई गई। ग्रामीणों का गुस्सा शांत करने के लिए टीएमसी ने उत्तम सरदार को निलंबित कर दिया और बाद में गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा सीपीआई (एम) निर्पदा सरदार को प्रदर्शन मामले में अरेस्ट किया गया और घटना का विरोध करने वाले भाजपा नेता विकास सिंह को भी गिरफ्तार किया गया। 17 फरवरी को जाकर शीबू प्रसाद हाजरा की भी गिरफ्तारी हुई।

कमलनाथ के साथ ही मनीष तिवारी भी? कॉन्ग्रेस की डूबती नाव से उतर रहे महारथी, पंजाब में बीजेपी को मिलेगी मजबूती

कॉन्ग्रेस पार्टी को झटके पर झटके लग रहे हैं। इंडी गठबंधन में तो साथी दल लगातार साथ छोड़ ही रहे हैं, पार्टी के भी हैवीवेट नेता लगातार कॉन्ग्रेस का साथ छोड़कर दूसरे दलों में जा रहे हैं। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंंत्री कॉन्ग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए और राज्यसभा चले गए, तो मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस के सबसे बड़े नेता और राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके कमलनाथ के भी कॉन्ग्रेस से दूर जाने के बीच पंजाब से भी पार्टी के लिए बुरी खबर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी भी कॉन्ग्रेस का साथ छोड़ सकते हैं। वो अभी कॉन्ग्रेस के ही टिकट पर लोकसभा सांसद हैं, लेकिन अगला चुनाव उनके बीजेपी के टिकट पर लड़ने की बातें सामने आ रही हैं।

मनीष तिवारी अभी पंजाब के आनंदपुर साहिब से लोकसभा सांसद हैं। वो लुधियाना लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं। इसके लिए बीजेपी से बातचीत चल रही है। आजतक ने बीजेपी सूत्रों के हवाले से बताया है कि बीजेपी के पास लुधियाना लोकसभा सीट के लिए सक्षम उम्मीदवार है। ऐसे में वो मनीष तिवारी को लुधियाना से नहीं लड़ाना चाहती। हालाँकि दोनों तरफ से इस बात लेकर बातचीत अंतिम चरण में है। वो कभी भी कॉन्ग्रेस छोड़ने की घोषणा कर सकते हैं।

दिल्ली में कमलनाथ-नकुलनाथ

बता दें कि सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके सांसद बेटे नकुलनाथ भी कॉन्ग्रेस छोड़ सकते हैं। दोनों ही इन दिनों दिल्ली में हैं। बताया जा रहा है कि वो बीजेपी आलाकमान के संपर्क में है। जल्द ही इस बात की घोषणा की जा सकती है। नकुलनाथ अभी छिंदवाड़ा से लोकसभा सांसद हैं। ये सीट कमलनाथ की पारंपरिक सीट मानी जाती है। वो दशकों तक इस सीट से लोकसभा चुनाव जीतते आए हैं, उनके बाद उनके बेटे नकुलनाथ ने विरासत को थाम रखा है।

ऐसे में कमलनाथ, नकुलनाथ और अब मनीष तिवारी का जाना कॉन्ग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। कुछ दिन पहले ही मुंबई कॉन्ग्रेस के कई बड़े नेता पार्टी छोड़ चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण राज्यसभा पहुँच चुके हैं, तो पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली देवरा एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो चुके हैं। वहीं, बाबा सिद्दीकी जैसे कॉग्रेस के बड़े नेता भी पार्टी छोड़ चुके हैं।

मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस के कई विधायक भी छोड़ सकते हैं पार्टी

कमलनाथ-नकुलनाथ एपिसोड के साथ ही एक बार फिर से मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस में टूट हो सकती है। कॉन्ग्रेस के कई विधायक कमलनाथ के साथ ही पार्टी बदल सकते हैं। न्यूज18 की रिपोर्ट की मानें, तो कमलनाथ के साथ ही सुनील उईके (जुन्नारदेव), सोहन वाल्मीकि (परासिया), विजय चौरे (सौंसर), निलेश उईके (पांढुर्णा), सुजीत चौधरी (चौरई), कमलेश शाह (अमरवाड़ा), दिनेश गुर्जर (मुरैना), संजय उईके (बैहर), मधु भगत (परसवाड़ा) और विवेक पटेल (वारासिवनी) जैसे विधायक कॉन्ग्रेस छोड़ सकते हैं। वहीं, कमलनाथ समर्थक मुरैना और छिंदवाड़ा के महापौर भी कॉन्ग्रेस छोड़ सकते हैं।

कमलनाथ के समर्थक पूर्व मंत्री ने लिखा ‘जय श्री राम’, पटवारी खेमे में खामोशी

कमलनाथ के समर्थक पूर्व सांसद और मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे सज्जन सिंह वर्मा ने एक्स पर जय श्री राम पोस्ट किया। कमलनाथ-नकुलनाथ की बीजेपी के शीर्ष नेताओं से मुलाकात के समय ये पोस्ट बहुत कुछ कह रही है।

उन्होंने न्यूज18 से बातचीत में खुलेआम इस बात का ऐलान कर दिया था कि जहाँ भी कमलनाथ होंगे, वहाँ वो खड़े मिलेंगे।

शरजील इमाम के भाषण इतने भड़काऊ कि विशेष समुदाय (मुस्लिम) ने मचाई तबाही, दंगे हुए, बड़ी संख्या में मौतें: दिल्ली कोर्ट का जमानत से इनकार

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) प्रदर्शन की आड़ में दिल्ली में दंगे की साजिश रचने वाले शरजील इमाम को दिल्ली की अदालत ने जमानत देने से एक बार फिर इनकार कर दिया। शरजील इमाम वहीं शख्स है, जिसने़ पूर्वोत्तर राज्यों को देश के अन्य हिस्सों से काटने की बात कही थी। शरजील पर देशद्रोह का मामला दर्ज है।

दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने शनिवार (17 फरवरी 2024) को अपने फैसले में कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया। जज ने कहा कि CAA के खिलाफ शरजील इमाम के भाषणों और अन्य गतिविधियों में लोगों को हथियार उठाने या मारने के लिए नहीं कहा गया, लेकिन इसके कारण लोग लामबंद हुए। इसके कारण दिल्ली में अशांति फैल गई।

अदालत ने कहा कि शरजील इमाम के भाषण इतने भड़काऊ (Powerful) थे कि इसने विशेष समुदाय (मुस्लिम) लोगों की कल्पना पर कब्जा कर लिया और उन्हें विघटनकारी गतिविधियों में भाग लेने के लिए उकसाया। शरजील ने सोशल मीडिया और अपने भाषणोें में वास्तविक तथ्यों से छेड़छाड़ की और शहर में तबाही मचाने के लिए लोगों को उकसाया। जिसके कारण फरवरी 2020 में दिल्ली में दंगे हुए।

अदालत ने कहा कि शरजील इमाम के भाषणों के कारण दिल्ली में प्रदर्शनकारियों और विरोध स्थलों की संख्या बढ़ गई। भीड़ ने मुख्य सड़कों को अवरुद्ध करना शुरू कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप पूरा शहर ठप हो गया। जज ने कहा, “आखिरकार, अलग-अलग तारीखों और स्थानों पर दंगे हुए। हिंसा हुई, सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान हुआ और बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई।”

दरअसल, शरजील इमाम के खिलाफ द्रेशद्रोह और गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज है। साल 2019 में दिल्ली के जामिया इलाके और फिर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में शरजील इमाम ने भड़काऊ भाषण दिया था। इन्हीं मामलों में जमानत की अर्जी पर सुनवाई करते हुए जज ने टिप्पणी की।

जामिया और एएमयू में भड़काऊ भाषण देने के मामले में शरजील इमाम को 28 जनवरी 2020 को गिरफ्तार किया गया था। उसने जमानत के लिए जुलाई 2022 में पहली अर्जी दाखिल की थी, जिसे ट्रायल कोर्ट ने खारिज कर दी थी। वहीं, दिल्ली हाई कोर्ट ने 30 जनवरी को देशद्रोह और UAPA मामले में शरजील इमाम की जमानत याचिका पर शीघ्र निर्णय लेने का ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया था।

शरजील इमाम ने कोर्ट में तर्क दिया कि वह सात साल की अधिकतम सजा में से चार साल पहले ही जेल में बीता चुका है, जो आधी से अधिक है। इसलिए वह जमानत का पात्र है। उसने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए के तहत राजद्रोह के अपराध को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने स्थगित रखा है और उनके खिलाफ लगाए गए UAPA में सात साल से अधिक की सजा का प्रावधान नहीं है।

सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक ने तर्क दिया कि अपराधों के लिए सजा की गणना क्रमिक रूप से की जाती है न कि एक साथ। उन्होंने कहा कि धारा 436 के तहत जमानत अनिवार्य नहीं है और अपराध की गंभीरता पर विचार किया जाना चाहिए। तर्क सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि वह राजद्रोह के अपराध पर विचार नहीं कर रहा, लेकिन इमाम के कृत्य सामान्य अर्थों में राजद्रोह के रूप में योग्य होंगे।

संदेशखाली में रेप हुआ तो उसका वीडियो दिखाओ, TMC की महिला नेता ने माँगा फुटेज: ‘DD न्यूज़’ की एंकर बोलीं – शर्म कीजिए

पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना स्थित संदेशखाली में जहाँ एक तरफ TMC (तृणमूल कॉन्ग्रेस) के नेता शाहजहाँ शेख के आतंक से त्रस्त महिलाएँ अपना दुःख बयाँ कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ पार्टी इन घटनाओं को लेकर उल्टा पीड़िताओं पर ही सवाल उठाने में लगी है। अब ‘दूरदर्शन न्यूज़’ के एक डिबेट शो में TMC की प्रवक्ता ने इन पीड़िताओं का अपमान कर के न सिर्फ अपनी, बल्कि अपनी पार्टी की भी संवेदनहीनता का परिचय दिया है। इसके बाद पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी की जम कर थू-थू हो रही है।

TMC प्रवक्ता जूही विश्वास इस दौरान पश्चिम बंगाल के संदेशखाली की बात न कर के उत्तर प्रदेश के हाथरस का मुद्दा लेकर आ गईं। उन्होंने सितंबर 2020 में हाथरस में हुई घटना का जिक्र करते हुए कहा कि वहाँ साबित हो गया था कि बलात्कार हुआ है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल से एक वीडियो या एक फुटेज भी सामने नहीं आया है, जिसमें रेप हुआ हो। इस पर एंकर रीमा पराशर ने उन्हें टोकते हुए पूछा कि क्या वो चाहती हैं कि अब रेप के फुटेज सार्वजनिक रूप से सामने आएँ?

इसके बाद जूही विश्वास भाजपा को कोसने लगीं। जूही विश्वास न सिर्फ TMC की महिला विंग की जनरल सेक्रेटरी हैं, बल्कि कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के वार्ड संख्या 81 से पार्षद भी हैं। ‘DD न्यूज़’ के शो ‘5 की पंचायत’ में उन्होंने ये विवादित बयान दिया है। ये काफी हैरान करने वाला है कि बलात्कार के आरोप को साबित करने के लिए सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी की महिला नेता ही रेप का वीडियो फुटेज सामने लाने की माँग कर रही हैं।

ध्यान दिलाते चलें कि पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में टीएमसी नेता शिबू हाजरा गिरफ्तार हो गया है। वो संदेशखाली में इतने दिनों से छिपकर अपने ही ठिकाने पर बैठा था। उसे गिरफ्तारी के बाद मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया है। इस बीच, मजिस्ट्रेट के सामने एक पीड़ित महिला ने रेप के मामले में अपना बयान दर्ज कराया, जिसके बाद शिबू हाजरा के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर में रेप की धारा भी जोड़ दी गई है। इन सबके बीच मुख्य आरोपित टीएमसी नेता शेख शाहजहाँ अब भी फरार है। उसे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का करीबी माना जाता है।

पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार ने कहा कि प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) में बलात्कार की धाराएँ जोड़ी गई हैं। उनके मुताबिक, महिला ने पुलिस के सामने रेप का कोई बयान नहीं दिया था, बल्कि उसने आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया। राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस पूरे मामले में संदेशखाली में महिलाओं के साथ एकजुटता दिखाई है और उन्हें न्याय दिलाने का वादा किया है।

जोधपुर के सरकारी स्कूल में हिजाब पहनने पर अड़ी छात्राएँ: पार्षद मुजफ्फर खलीफा की धमकी, ‘आज सरकार है, कल क्या? शिक्षकों को यहीं रहना है’

राजस्थान के जोधपुर में हिजाब को लेकर सवाल हो गया। सरकारी स्कूल में छात्राएँ हिजाब पहनने को लेकर अड़ गई हैं, तो उनके परिजनों ने जमकर हंगामा किया है। इस प्रदर्शन के दौरान पार्षद मुजफ्फर खलीफा ने शिक्षकों को धमकाया है कि सरकार आज है, कल चली जाएगी, लेकिन शिक्षकों को यहीं रहना है। इस दौरान नगर पालिका की उपाध्यक्ष के पति ने भी प्रदर्शन किया और छात्राओं की हिजाब वाली माँग का समर्थन किया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जोधपुर ग्रामीण जिले के पीपाड़ कस्बे में गवर्नमेंट सीनियर सेकंडरी स्कूल है। यहाँ दस से ज्यादा मुस्लिम लड़कियाँ हिजाब जैसा स्कार्फ पहनकर स्कूल पहुँची। इस पर शिक्षकों ने आपत्ति जताई और छात्राओं को घर भेज दिया। चूँकि स्कूलों में ड्रेस कोड लागू है। सरकार ने भी ड्रेस कोड लागू करने को लेकर सख्ती की बात कही है। ऐसे में स्कूल के प्रिंसिपल ने छात्राओं के अभिभावकों को बुलाकर लाने के लिए उन्हें घर भेज दिया। छात्राओं के साथ उनके अभिभावक वापस स्कूल पहुँचे और जमकर हंगामा किया।

प्रिंसिपल रामकिशोर सांखला ने बताया कि बालिकाएँ अन्य कपड़े से सिर और मुँह ढँककर स्कूल आई थीं, इस पर उन्हें मना किया गया। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा निर्धारित यूनीफॉर्म में ही स्कूल आने की अनुमति है। यदि सिर ढंककर ही आना है तो ड्रेस कोड की चुन्नी का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालाँकि परिजनों ने हंगामा जारी रखा।

उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय पार्षद मुजफ्फर खलीफा ने शिक्षकों को धमकी भी दी है। उन्होंने कहा, “पार्षद मुजफ्फर खलीफा और पालिका उपाध्यक्ष के पति ने ड्रेस को लेकर गाइडलाइन के बारे में जानकारी माँगते हुए प्रदर्शन किया। साथ ही धमकाया कि सरकार आज है, कल नहीं रहेगी, लेकिन अध्यापक हमेशा यहीं रहने वाले हैं, जिनको इसका खामियाजा भुगतना ही पड़ेगा। इसके बाद पुलिस से शिकायत की गई। पुलिस ने मामला शांत कराया।”

गौरतलब है कि भजनलाल सरकार में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने एक बयान दिया था, जिसमें कहा था कि सभी सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को निर्धारित ड्रेस में आना होगा। राज्य सरकार में मंत्री किरोड़ीलाल मीणा के साथ ही बीजेपी विधायक बालमुकुंद आचार्य भी हिजाब पर प्रतिबंध की माँग कर चुके हैं।

13 साल की लड़की की आँँखें निकाली, स्तन काटे: बंगाल में हाई कोर्ट के आदेश के बाद दोबारा पोस्टमॉर्टम

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा शासित पश्चिम बंगाल में महिलाओं के लिए नरक साबित होता जा रहा है। भाजपा नेता अमित मालवीय के शब्दों में कहें तो ममता बनर्जी का शासन बंगाल की महिलाओं के लिए अभिशाप बन गया है। दरअसल, कुछ दिन पहले 13 साल की एक किशोरी का अपहरण करके उसके साथ क्रूरता की हद पार कर दी गई। उसकी आँखें निकाल ली गईं और दोनों स्तन काट दिए गए। इसके बाद हत्या कर दी गई।

दरअसल, आँखें निकालने और स्तन काटने का आरोप लड़की के परिजनों ने लगाया है। इसी आरोप की बुनियाद पर परिजनों ने कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कहा कि उसकी बेटी के साथ बेहद अमानवीय कृत्य किया गया है। इसलिए उसके शव की दोबारा जाँच की जाए। हाई कोर्ट के आदेश के बाद बंगाल पुलिस ने शुक्रवार (16 फरवरी 2024) को कब्र में से उसका शव निकाला।

लगभग 20 दिन बाद शव को निकालकर पुलिस ने उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, शव को कब्र से निकालकर पोस्टमार्टम के लिए कोलकाता के SSKM मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल भेजा गया है। दरअसल, इस घटना में पुलिस ने एक नाबालिग लड़के और उसके पिता को गिरफ्तार किया है। परीक्षण के बाद शव को भी दफना दिया गया था।

आरोप था कि किशोरी की रेप और हत्या के बाद आरोपित बाप-बेटे ने पीड़िता के शरीर के अलग-अलग हिस्सों में छेद किया और उसमें एसिड डाल दिया, ताकि शव जल्दी गल जाए। हालाँकि जाँच रिपोर्ट में इन सारी बातों का उल्लेख किया गया था, लेकिन पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ऐसी क्रूरताओं का कोई उल्लेख नहीं था। पुलिस की जाँच रिपोर्ट, केस डायरी और ऑटोप्सी रिपोर्ट में बातें अलग-अलग थीं।

ये पूरा मामला मुर्शिदाबाद जिले के हरिहरपारा क्षेत्र का है। यहाँ 13 साल की एक किशोरी पाँच दिनों से लापता थी। आखिरकार उसका शव 27 जनवरी 2024 को गाँव के सरसों के खेत में पड़ा मिला। किशोरी का शव क्षत-विक्षत था। उसके गले में फंदा था और दोनों आँखें बाहर की ओर निकली हुई थीं। इसके बाद लड़की के परिजनों ने बाप-बेटे के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।

वहीं, आनंद बाजार पत्रिका की रिपोर्ट में कहा गया है कि लड़की 26 जनवरी की रात करीब 8 बजे निकली थी। उसके बाद वह वापस नहीं लौटी। परिजनों और रिश्तेदारों हर जगह खोजा, लेकिन वह कहीं नहीं मिली। जिस कमरे में लड़की रहती थी, वहाँ एक नोट मिला। इसमें लिखा था, ‘चिंता मत करो।’ इसके बाद अगले दिन किशोरी का शव घर से कुछ दूरी पर स्थित सरसों के खेत में मिला।

मृतका के परिजनों का परिवार का आरोप है कि गाँव का ही एक युवक शादी का झाँसा देकर किशोरी को उसके घर से अगवा कर ले गया। उसके बाद उसकी बेटी के साथ बलात्कार किया गया, उसे शारीरिक यातना दी गई। लड़की के परिजनों ने आरोपित नाबालिग लड़के और उसके पिता का नाम भी पुलिस को बताया।

परिवार का दावा है कि लड़की की आँखें निकाल ली गईं थी और स्तन काट दिए गए थे। लड़की का अपहरण और शारीरिक यातना के बाद क़त्ल किया गया। पुलिस ने उस दौरान शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। हालाँकि, मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर द्वारा की गई ऑटोप्सी रिपोर्ट मृतका के परिजनों द्वारा शिकायत या पुलिस रिपोर्ट से मेल नहीं खाता है।

परिजनों ने इस मामले की गहन जाँच की माँग को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट का खटखटाया। न्यायमूर्ति जय सेनगुप्ता की एकल पीठ ने कहा कि चूँकि पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जाँच रिपोर्ट में अंतर है। इसलिए पीड़िता के शव के दूसरे पोस्टमार्टम की आवश्यकता है। हाई कोर्ट ने पुलिस से इस मामले में केस डायरी भी माँगी है। मामले की अगली सुनवाई 6 मार्च 2024 को होगी।  

किशोरी के साथ दरिंदगी को लेकर स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा है। वे अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दिए जाने की माँग कर रहे हैं। तनावपूर्ण हालात को देखते हुए कब्र से शव निकालने के दौरान पुलिस ने सुरक्षा के पर्याप्त बंदोबस्त कर रखे थे। चारों तरफ बाड़ेबंदी भी की थी।

राहुल गाँधी काशी विश्वनाथ मंदिर में नहीं किए पूजा, अगर किए तो फर्जी महंत से: मंदिर के ट्रस्ट ने खोली पोल, बताया गर्भगृह और अर्चक की प्रक्रिया

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को लेकर कल (17 फरवरी 2024) खबर आई थी कि उन्हें श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में महन्त राजेन्द्र तिवारी द्वारा गर्भगृह के दर्शन-पूजन कराए गए। ये खबर सोशल मीडिया और ईटीवी पर खूब चली। अब इस संबंध में श्री काशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बयान दिया है।

बयान में स्पष्ट कहा गया है कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा गर्भ गृह में पूजन-अर्चन के लिए अर्चक नियुक्त हैं तथा नियुक्त अर्चक द्वारा ही मंदिर के गर्भगृह में पूजन-पाठ कराया जाता है। इस बयान में ये भी साफ किया गया है कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में महंत नाम का कोई पद है ही नहीं और न ही कोई पद पर नियुक्त है।

न्यास की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में राहुल गाँधी से संबंधित प्रसारण और दावे को पूर्णत: भ्रामक और मिथ्या बताया गया है। साथ ही ये भी कहा गया है कि मंदिर परिसर में राजेंद्र तिवारी द्वारा कोई संकल्प अथवा पूजन नहीं करवाया गया है। न्यास ने मीडिया से अनुरोध करते हुए लिखा, “आप समस्त प्रिंट/इलेक्ट्रॉनिक मीडिया बंधुओं से अनुरोध है कि इस प्रकार की किसी खबर/वीडियो का संज्ञान न्यास के अधिकारिक बयान के बगैर न लें। जिसमें न्यास या मंदिर का उल्लेख किया गया है।”

बता दें कि इस प्रेस विज्ञप्ति को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट की ओर से जारी किया गया है। इससे पहले खबर आई थी कि राहुल गाँधी ने मंदिर के गर्भगृह में षोडशोपचार विधि से पूजा पाठ की और काशी विश्वनाथ के महंत को दिल्ली आने का न्योता दिया।

हालाँकि अब इस खबर की प्रमाणिकता और प्रसारण दोनों पर सवाल उठ रहे हैं कि जब महंत नाम का कोई पद है ही नहीं तो राहुल गाँधी को पूजा किसने कराई और किसके आधार पर ऐसे बयान जारी हुए। न्यास का कहना है कि अगर कोई उनके नाम पर ये करता है तो वो ठग माना जाएगा और वह उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा सकते हैं।

ईटीवी पर चलाई गई खबर

ईटीवी की अपडेट रिपोर्ट में भी न्यास के बयान की जानकारी दी गई है जिसमें राजेंद्र तिवारी का भी बयान है। उन्होंने कहा कि प्रशासन तय नहीं करेगा कि कौन मंदिर का महंत है। हम पुस्तकों से महंत हैं और महंती करेंगे। अधिकग्रहण मंदिर का हुआ है परिवार का नहीं।

‘संदेशखाली में एक भी रेप नहीं’ कहने वाली बंगाल पुलिस को जोड़नी पड़ी बलात्कार की धारा: मजिस्ट्रेट के सामने पहुँची पीड़ित महिला, TMC नेता शिबू हाजरा गिरफ्तार

पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में टीएमसी नेता शिबू हाजरा गिरफ्तार हो गया है। वो संदेशखाली में इतने दिनों से छिपकर अपने ही ठिकाने पर बैठा था। उसे गिरफ्तारी के बाद मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया है। इस बीच, मजिस्ट्रेट के सामने एक पीड़ित महिला ने रेप के मामले में अपना बयान दर्ज कराया, जिसके बाद शिबू हाजरा के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर में रेप की धारा भी जोड़ दी गई है। इन सबके बीच मुख्य आरोपित टीएमसी नेता शेख शाहजहाँ अब भी फरार है। उसे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का करीबी माना जाता है।

शिबू हाजरा टीएमसी का ब्लॉक अध्यक्ष हैं और संदेशखाली महिलाओं द्वारा शुरुआती शिकायतों में दो अन्य उत्तम सरदार और मुख्य आरोपित शेख शाहजहाँ के साथ उसका नाम सामने आया। उसे संदेशखाली में एक ठिकाने से गिरफ्तार किया गया और रविवार को स्थानीय अदालत में पेश किया जाएगा। उस पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की संबंधित धाराओं के तहत बलात्कार और अन्य आरोपों के लिए मामला दर्ज किया गया है। उत्तम सरदार समेत 18 को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न, जमीनों पर कब्जे, लोगों पर हमले के आरोपों में मामला दर्ज किया गया है।

पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार ने कहा कि प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) में बलात्कार की धाराएं जोड़ी गई हैं। उनके मुताबिक, महिला ने पुलिस के सामने रेप का कोई बयान नहीं दिया था, बल्कि उसने आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया।

बता दें कि पश्चिम बंगाल पुलिस ने मीडिया को धमकाते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी थी। पश्चिम बंगाल पुलिस ने 14 फरवरी को रेप के आरोपों को खारिज करते हुए रिपोर्ट लिखने वाले पत्रकारों को धमकाया था।

राज्यपाल ने गृह मंत्रालय को सौंपी रिपोर्ट

इससे पहले, बुधवार (14 फरवरी) को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने संदेशखाली विरोध प्रदर्शन पर गृह मंत्रालय को एक रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में संदेशखाली में “उपद्रवी तत्वों” के साथ मिलीभगत के लिए पश्चिम बंगाल पुलिस को जिम्मेदार ठहराया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्यपाल ने सोमवार को प्रभावित इलाके का दौरा किया और प्रदर्शनकारी महिलाओं से चर्चा की. गवर्नर बोस ने रिपोर्ट में कहा कि स्थानीय लोग टीएमसी नेताओं से जुड़े यौन उत्पीड़न के अपने दावों की जाँच के लिए एक विशेष कार्य बल या एक विशेष जाँच दल यानी एसआईटी बनाने की माँग कर रहे हैं।

संदेशखाली में अत्याचार की इंतिहा

राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) को ग्रामीण महिलाओं ने जो गवाही दी उससे उनमें पसरे भय और व्यवस्थित उत्पीड़न के बारे में पता चला। मालूम चला कि कैसे टीएमसी के सदस्य और पुलिसकर्मी उन्हें परेशान करते हैं। जो महिलाएँ बोलने का प्रयास करती हैं उन्हें फौरन विरोध झेलना पड़ता है। उनके घर के पुरुषों को गिरफ्तार कर लिया जाता है आदि-आदि।

एनसीडब्ल्यू ने बताया कि संदेशखली ग्रामवासियों की ओर से हस्ताक्षरित एक सामूहिक बयान में, गाँव की महिलाओं ने उत्पीड़न, यातना और उनकी गरिमा और अधिकारों के घोर उल्लंघन सहित उनके द्वारा सहन की गई पीड़ाओं का विवरण दिया। इसके अलावा एनसीडब्लू की टीम ने ये भी बताया कि उन्होंने एक महिला की गवाही को कैमरे पर रिकॉर्ड किया था लेकिन बाद में उसे डिलीट करना पड़ा क्योंकि महिला अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हो गई और उनके आगे उसे डिलीट कराने के लिए गिड़गिड़ाने लगी।

आयोग ने कहा कि महिलाओं को मिल रही ऐसी धमकी और सेंसरशिप को देखते हुए तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत है। एनसीडब्ल्यू अध्यक्ष रेखा शर्मा आने वाले दिनों में संदेशखली का दौरा करेंगी और पुलिस व पीड़ितों से बातचीत करेंगी ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि पश्चिम बंगाल में महिलाओं की जिंदगी और स्वतंत्रता की रक्षा की जा सके। एनसीडब्लू ने इस पूरे मामले में संदेशखाली में महिलाओं के साथ एकजुटता दिखाई है और उन्हें न्याय दिलाने का वादा किया है। इससे पहले SC आयोग ने भी इस मामले में जाँच के बाद कहा था कि लोग बहुत कुछ बोलना चाहते हैं पर उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा।

जावेद को 200 बमों का ऑर्डर देने वाली इमराना घर से गिरफ्तार, दिल्ली से भी कनेक्शन: 15 साल पहले करती थी भट्टी पर मजदूरी, अब पास हैं प्लॉट-मकान

मुजफ्फरनगर में बैठकर टाइम बोतल बम बनाने वाले जावेद की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को जिस इमराना की तलाश थी, वो इमराना यूपी एसटीएफ द्वारा पकड़ ली गई है। शनिवार (17 फरवरी 2024) की शाम को पुलिस ने उसे उसके घर से गिरफ्तार किया और अब उससे पूछताछ जारी है। एसटीएफ के बाद दिल्ली की आईबी की टीम भी इमराना से पूछताछ करेगी।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, अभी तक की पड़ताल में सामने आया है कि इमराना 15 साल पहले तक भट्टी पर मजदूरी का काम करती थी आज उसके पास कई मकान और प्लाट हैं। साथ ही वो महंगी गाड़ियों में भी घूमती है।

पुलिस एक ओर पता लगा रही है कि उसके पास इतना पैसा कहाँ से आया। वहीं दूसरी ओर ये ज्ञात हुआ है कि उसने बम इसलिए बनवाए थे कि ताकि जब लोकसभा चुनाव से पहले सीएए लागू करने की घोषणा हो, तब वह उन बमों का इस्तेमाल कर सके। बताया जा रहा है कि इमराना ने ऐसा ऑर्डर दिल्ली के किसी शख्स के कहने पर दिया था। ये शख्स कौन है इसके बारे में आगे जानकारी आएगी।

यूपी पुलिस की एसटीएफ इमराना की गिरफ्तारी के बाद अब उसके नेटवर्क के बारे में सूचना जुटा रही है। पता लगाया जा रहा है कि इमराना के पीछे किन संगठनों का हाथ है, उनकी मंशा क्या है। इसके अलावा ये भी मालूम हुआ है कि इमराना और जावेद एक दूसरे के संपर्क में कैसे आए।

दरअसल, पुलिस ने बताया कि इमराना का इलाज 2009 से जावेद के पिता हकीम जरीफ अहमद से चल रहा था। उस समय भी इमराना ने जावेद से 2 बम तैयार करवाए थे। इनमें एक बम का प्रयोग चलाकर किया गया था जबकि दूसरे को काली नदी में फेंक दिया गया था। इस बार भी उसने 10 हजार रुपए देकर उससे बम तैयार करने को कहे थे और बाद में 50 हजार का वादा किया था।

बता दें कि इमराना के पकड़े जाने से पहले खबर आई थी कि इमराना ने साल 2013 में मुज्जफरनगर में हुए दंगों के दौरान भी तकरीबन 200 बम ऑर्डर देकर बनवाए थे। इन बमों को उसने दंगों के दौरान बँटवाए थे। उस दंगों के दौरान मुजफ्फरनगर और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी। हालाँकि, कुछ रिपोर्ट में बमों की संख्या 100 से अधिक बताई जा रही है और कुछ रिपोर्ट अब कह रही हैं कि 50 से अधिक बम बनवाए थे।

लोग उसे इमराना बाबा के नाम से भी जानते थे क्योंकि वो काला जादू वगैरह का काम भी करती थी। जावेद की गिरफ्तारी के बाद से ही एसटीएफ और पुलिस इमराना की तलाश कर रही थी। उसके बारे में पता चला है कि शामली जिले की रहने वाली है, लेकिन मुजफ्फरनगर के मुस्लिम बहुल खालापार इलाके में रहती थी। जावेद की गिरफ्तारी के बाद जब जाँच एजेंसी ने उसके घर रेड मारी थी, तो वो पहले ही फरार हो गई थी।

अब इमराना की बेटी रूकसार ने बताया कि उन्होंने अपनी अम्मी को पुलिस को सौंप दिया है। वहीं पुलिस ने कहा कि बताया कि इमराना से गहनता के साथ पूछताछ की जाएगी। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। जावेद ने इसी इमराना के कहने पर टाइम बोतल बम तैयार किए थे। इन बमों को बनाने के लिए उसने गन पाउडर-999, लोहे की छोटी गोलियाँ, रुई, पीओपी आदि का इस्तेमाल किया। उसने डॉक्टरों से ग्लूकोज की बोतलें और साइकिल की दुकानों से आयरन की गोलियाँ और घड़ी की दुकानों से घड़ी की मशीनें खरीदी थीं।