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ब्रांडेड परफ्यूम, महँगी घड़ियाँ, विदेशी पैसे… हल्द्वानी के दंगाई अब्दुल मलिक के घर से 6 ट्रकों में सामान भर कर ले गई पुलिस, घर में जिम भी बना रखा था

उत्तरखंड के हल्द्वानी में 8 फरवरी 2024 को हुई हिंसा के मुख्य आरोपित अब्दुल मलिक के घर की पुलिस ने कुर्की की है। इस कार्रवाई की जद में उसके फरार चल रहे बेटे मोईद का भी मकान आया। शनिवार (17 फरवरी, 2024) को हुई कुर्की के बाद दोनों के घरों से लगभग 6 ट्रकों में सामान जब्त हुआ है। जब्त हुए सामानों को अर्धसैनिक बलों की निगरानी में रखा गया है। प्रशासन हिंसा में शामिल अन्य फरार आरोपितों के घर की भी कुर्की की तैयारियों में जुटा हुआ है।

हल्द्वानी प्रशासन के मुताबिक कुर्की की कार्रवाई शुक्रवार (16 फरवरी 2024) से शुरू हुई थी। हालाँकि, ये एक दिन बाद शनिवार को जा कर पूरी हुई। इस मौके पर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त थे। बताया जा रहा है कि 13 घंटे तक चली इस कार्रवाई में अब्दुल मलिक और उसके बेटे मोईद के घर का चप्पा-चप्पा छाना गया। इस दौरान दरवाजे के पास रखे गए डोरमैट, गीजर, सीलिंग फैन आदि तक जब्त किए गए। दंगा आरोपित बाप-बेटे के घर से जब्त सामान लगभग 6 ट्रकों में आए। इनको पैरामिलिट्री की अभिरक्षा में रखा गया है।

बरामद हुए सामान की कीमत करोड़ों में बताई जा रही है। इनमें से विदेशी घड़ियाँ, महंगे परफ्यूम, कीमती फर्नीचर के अलावा क्रॉकरी और गाड़ियाँ शामिल हैं। हिंदुस्तान ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया है कि कुर्की में अब्दुल मलिक के घर से विदेशी मुद्राएँ भी मिली हैं। ये मुद्राएँ बांग्लादेश, नेपाल और सऊदी अरब की बताई जा रही हैं। मलिक और उसके बेटे ने घर में कसरत के लिए जिम भी बना रखा था। इस जिम में मौजूद तमाम सामान भी पुलिस ने जब्त कर लिया है।

इसी दिन शनिवार को ही पुलिस ने हिंसा में शामिल फरार चल रहे वसीम, रईस और तस्लीम के घरों की भी कुर्की की है। अब पुलिस नीलामी योग्य सामानों की भी लिस्ट बना रही है। साथ ही इस बरामदगी की सूची अदालत में भी जमा की जाएगी। पुलिस जब्त की गई सम्पत्तियों की अनुमानित वैल्यू पता करने में भी जुटी हुई है। वहीं दूसरी तरफ पुलिस CCTV फुटेज के आधार पर अन्य दंगाइयों को चिन्हित करने में जुटी हुई है।

तमिलनाडु वक्फ बोर्ड का चेयरमैन अब्दुल रहमान करता है पैसों की हेराफेरी, विदेश से लाता है फंडिंग: ED की कार्रवाई के लिए पत्र

तमिलनाडु वक्फ बोर्ड के चेयरमैन अब्दुल रहमान पर गंभीर आरोप लगे हैं। उन पर अपने पद के दुरुपयोग करने और संदिग्ध गतिविधियों के भी आरोप लगे हैं। राज्य के सूफी इस्लामिक बोर्ड ने केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय की जाँच एजेंडी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को पत्र लिखकर जाँच की माँग की है। तमिलनाडु वक्फ बोर्ड के चेयरमैन पर आरोप हैं कि वो बिना किसी एनओसी के विदेश जाते हैं और विदेशी पैसों की भी हेर फेर करते हैं। सूफी इस्लामिक बोर्ड ने उनके खिलाफ चल रहे कई गंभीर एफआईआर का भी जिक्र किया है।

सूफी इस्लामिक बोर्ड ने आरोप लगाया है कि चेयरमैन की अगुवाई में ‘संदिग्ध काम’ हो रहे हैं। बोर्ड ने उनपर एक मेडिकल कॉलेज के निर्माण में अपने पद के दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं। सूफी इस्लामिक बोर्ड ने अपनी शिकायत में कहा है, “साल 2022 की शुरुआत से इस बारे में जानकारी सार्वजनिक है कि अब्दुल रहमान की अगुवाई में तिरुची के वेप्पुर में एक मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। अब्दुल रहमान इस मेडिकल कॉलेज के नाम फंड (पैसा) लाने के लिए अपने सार्वजनिक पद का दुरुपयोग कर रहे हैं।”

इस्लामिक सूफी बोर्ड ने आरोप लगाए हैं कि ये ‘उगाही’ के पैसे हैं, जो करीब 300 करोड़ हैं। इसके लिए रहमान ने राज्य में कई जगहों पर बैठकें की। शिकायत में कहा गया है कि रहमान ने विदेशों से भी पैसे इकट्ठे किए हैं। शिकायत में बताया गया है कि “अब्दुल रहमान को पता है कि उसे ‘चंदा उगाही’ के लिए विदेश जाने के लिए जरूरी एनओसी नहीं मिलेगा, ऐसे में उसने 27 अक्टूबर 2022 को सऊदी अरबा में उमरा की योजना बनाई। उमरा के नाम पर ही उसने 22-11-2022 को एनओसी प्राप्त किया, जो सरकार के प्रमुख सचिव ने दी। लेकिन वो इस यात्रा पर फंड पाने के लिए काम करता रहा।”

ऐसे किया रहमान ने खेल

सूफी इस्लामिक बोर्ड ने बताया, “अब्दुल रहमान को उमराह के लिए सिर्फ मक्का और मदीना की यात्रा की इजाजत थी, इसके बावजूद वो 3 दिसंबर 2022 को यूएई गया। इसके बाद इसने सऊदी अरब की राजधानी जेद्दा की यात्रा की। उसने 14 दिसंबर 2022 को जेड्डा में प्रपोज्ड मेडिकल कॉलेज के लिए फंडिंग माँगी। इस बारे में सोशल मीडिया पर खूब प्रचार किया गया, ये कहकर कि मेडिकल कॉलेज के लिए बैठक आयोजित की गई। इन पोस्ट में बताया गया कि काफी काम हो चुका है। अब्दुल रहमान का ये काम साफ करता है कि उसने उमरा के लिए मिली एनओसी का गलत इस्तेमाल किया और फर्जी तरीके से वो फंडिंग बटोरने का काम कर रहा था।”

सूफी इस्लामिक बोर्ड ने आरोप लगाए कि अब्दुल रहमान ने सिर्फ मक्का के लिए मिली यात्रा अनुमति को तोड़ा और उसने जेद्दा और यूएई की भी यात्रा की। अब्दुल रहमान पर तिरंगे के अपमान का भी आरोप है। उसके खिलाफ 339/2022 एफआईआर भी दर्ज है। जो चेन्नई के नॉर्थ बीच पुलिस स्टेशन में दर्ज है। ऐसा व्यक्ति, जो देश के तिरंगे का अपमान करता हो, वो विदेशों में भारत का क्या सम्मान बढ़ाएगा? बोर्ड ने अब्दुल रहमान के खिलाफ एनओसी के उल्लंघन और 420 यानी धोखाधड़ी का मुकदमा चलाने की भी माँग की। बता दें कि सितंबर 2022 में भी अब्दुल रहमान के खिलाफ तिरंगे के अपमान के मामले में केस दर्ज हुआ था। ये शिकायत अजमल खान ने दर्ज कराई थी।

इस्लामिक बोर्ड ने बताया है कि अब्दुल रहमान सार्वजनिक पद पर रहते हुए विदेशी मदद भी नहीं ले सकता है। इसके अलावा उस पर फेमा के उल्लंघन का भी मामला बनता है। सूफी बोर्ड का आरोप है कि अब्दुल रहमान राजनीतिक पार्टियों के लिए पैसों की दलाली का भी काम करता है। वो लायजनिंग करता है, ताकि राजनीतिक पार्टियों को काला धन मिले और वो उसे सफेद करा दे। उसके लिए वो ‘कायदे मिल्लत तमिल पेरावई’ नाम के एनजीओ को चलाया है। उसके मलेशिया व साउथ-ईस्ट के कई देशों में अच्छे कॉन्टैक्ट्स हैं।

मूल रूप से ये समाचार अंग्रेजी में प्रकाशित की गई है। मूल समाचार को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

‘गरीब हर वर्ग में, फिर लाभ एक ही तबके को क्यों?’ EWS आरक्षण के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका, केंद्र सरकार से 6 हफ़्तों में माँगा जवाब

सामान्य वर्ग को मिलने वाले EWS आरक्षण मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में इस रिजर्वेशन को असंवैधानिक बताया गया है। इस याचिका में कहा गया है कि अगर गरीब हर वर्ग में हैं तो इसका लाभ केवल सामान्य तबके को ही क्यों मिल रहा है। इस याचिका पर हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। नोटिस में केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए 6 सप्ताह का समय दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह याचिका ‘एडवोकेट यूनियन फॉर डेमोक्रेसी एन्ड सोशल जस्टिस’ नामक संस्था की तरफ से दायर की गई है। याचिका में सिर्फ सामान्य वर्ग को EWS का लाभ देना अनुचित बताया गया है। याचिका दायर करने वालों की तरफ से एडवोकेट रामेश्वर पी सिंह और विनायक शाह पेश हुए हैं। इन्होने बताया कि 17 जनवरी 2019 को भारत सरकार द्वारा आरक्षण का EWS कोटा लागू करना संवैधानिकता को चुनौती जैसा है। दोनों वकीलों ने ईडब्ल्यूएस पॉलिसी को संविधान के अनुच्छेद 15 (6), 16 (6) के तहत असंगत बताया है।

याचिकाकर्ताओं ने इसके अलावा कई अन्य तर्क पेश किए हैं। इसमें ओबीसी, एससी-एसटी को इस लाभ से वंचित किया जाना अनुच्छेद-14 के विरुद्ध और EWS कोटा स्पेशल रिजर्वेशन होना बताते हुए इसकी वैधानिकता पर सवाल खड़े किए गए हैं। अधिवक्ताओं ने EWS को गरीबों के साथ भेदभाव करने वाली योजना करार दिया है। इसी के साथ आवेदकों का यह भी दावा है कि 103वे संविधान के संशोधन में प्रत्येक वर्ग के गरीबों को ईडब्ल्यूएस आरक्षण का लाभ दिए जाने का प्रावधान है।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रवि मलिमथ और न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की खंडपीठ ने की। प्रारम्भिक तर्कों को सुन कर खंडपीठ ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब देने के लिए छह हफ्ते का समय दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था EWS आरक्षण

बताते चलें कि इस से पहले भी EWS आरक्षण की वैधानिकता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। तब नवंबर 2022 में आए अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने EWS आरक्षण बरकरार रखा था। तब 5 जजों की खंडपीठ ने 3:2 से इस कोटे के समर्थन में फैसला सुनाया था। हालाँकि कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने तब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को जातिवादी करार दिया था।

‘अभी बहुत से निर्णय बाकी हैं,’: BJP अधिवेशन में PM मोदी ने साफ़ किया 2024 का एजेंडा, बोले – मैं सुख-वैभव के लिए जीने वाला व्यक्ति नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (18 फरवरी, 2024) को नई दिल्ली में भाजपा के अधिवेशन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज ने छत्रपति बनने के बाद आराम नहीं किया बल्कि अपना अभियान जारी रखा, इसीलिए तरह वो भी सुख-वैभव के लिए जीने वाले व्यक्ति नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वो भाजपा सरकार का लगातार तीसरा कार्यकाल सत्ता भोग के लिए नहीं माँग रहे। उन्होंने कहा कि अगर वो अपने घर की केवल चिंता करते तो करोड़ों लोगों को घर नहीं मिल पाता।

उन्होंने गरीबों, महिलाओं एवं युवाओं के सपने को अपना संकल्प करार देते हुए कहा कि इसके लिए हम सेवा भाव से दिन-रात एक कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 10 वर्ष में हमने जो प्राप्त किया वो पड़ाव मात्र है और मंजिल तक पहुँचने का विश्वास है, हमें हर भारतीय के जीवन को बदलने के लिए बहुत कुछ हासिल करने के लिए बहुत से निर्णय अभी बाकी हैं। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में जैन मुनि विद्यासागर जी महाराज को श्रद्धापूर्वक और आदरपूर्वक नमन करते हुए श्रद्धाजंलि अर्पित की।

उन्होंने कहा कि हमने हर व्यवस्था को पुरानी सोच से बाहर निकाला, जिन्हें किसी ने नहीं पूछा उन्हें हमने न सिर्फ पूछा बल्कि पूजा है। उन्होंने बताया कि सबसे पिछड़ी जनजातियों को किसी ने नहीं पूछा, हमने उनके लिए योजना बनाई। उन्होंने कारीगरों के लिए बनी विश्वकर्मा योजना और रेहड़ी-पटरी वालों के लिए बने स्वनिधि योजना का भी जिक्र किया। भ्रूण-हत्या की समस्या के खिलाफ सामाजिक चेतना और कड़े कानून का सहारा लेने का जिक्र करते हुए कहा कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का सार्थक परिणाम निकला।

उन्होंने बताया कि वो देश के पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने लाल किले से शौचालय की बात की, 10 करोड़ उज्जवला कनेक्शन दिया, 4 करोड़ घर बनाए गए, 10 करोड़ परिवारों को नल से जल दिया गया। उन्होंने बताया कि 25 करोड़ से अधिक महिलाओं के बैंक खाते खोले गए। उन्होंने बताया कि प्रेग्नेंसी लीव को बढ़ा कर 26 हफ्ते किया गया, श्रम कानूनों में सुधार हुआ, पैरामिलिट्री फ़ोर्स में महिलाओं की भर्ती दोगुने से अधिक हुई।

पीएम मोदी ने कहा, “आने वाले समय में हमारी माताओं-बहनों-बेटियों के लिए अवसर ही अवसर आने वाले हैं। मिशन शक्ति से देश में नारी शक्ति की सुरक्षा और सशक्तिकरण का संपूर्ण इकोसिस्टम बनेगा। 15 हजार महिला SHG को ड्रोन मिलेंगे। अब ड्रोन दीदी खेती में वैज्ञानिकता और आधुनिकता लाएँगी। अब देश में 3 करोड़ महिलाएँ लखपति दीदी बनाई जाएगी। जो काम सदियों से लटके थे, हमने उनका समाधान करने का साहस करके दिखाया है।”

पीएम मोदी ने ध्यान दिलाया कि कैसे अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण करके 5 सदियों का इंतजार खत्म किया गया है। गुजरात के पावागढ़ में 500 साल बाद धर्म ध्वजा फहराई गई है। 7 दशक बाद करतारपुर साहिब राहदारी खोली गई। 7 दशक के इंतजार के बाद देश को आर्टिकल 370 से मुक्ति मिली है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे विपक्ष के दल भले ही योजनाओं को पूरा करना न जानते हों, लेकिन झूठे वादे करने में इनका कोई जवाब नहीं है।

पीएम मोदी ने कहा कि आज एक वायदा करने से ये सारे राजनीतिक दल घबराते हैं, वो वादा है – विकसित भारत का, और ये हमारा वादा है। बकौल पीएम मोदी, सिर्फ और सिर्फ भाजपा और NDA गठबंधन ने ही इसका सपना देखा है और हम 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने के लिए काम कर रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि हमारी कैबिनेट में रिकॉर्ड संख्या में पूर्वोत्तर के मंत्री हैं। नागालैंड से पहली बार एक महिला राज्यसभा में सांसद बन गई है। हमे गर्व है कि हमने पहली बार त्रिपुरा के व्यक्ति को मंत्री परिषद में स्थान दिया है। पहली बार हमारी सरकार में अरुणाचल प्रदेश को कैबिनेट मिनिस्टर मिला है।

‘फिर PM बनेंगे मोदी, इसमें शक नहीं’: BJP अधिवेशन में बोले अमित शाह – परिवार के लिए लड़ रहा INDI गठबंधन

दिल्ली में चल रहे भाजपा के दो दिवसीय अधिवेशन के अंतिम दिन रविवार (18 फरवरी 2024) को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। नड्डा ने अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभिनंदन करते हुए श्रीराम मंदिर निर्माण पर प्रस्ताव पेश किया। वहीं, अमित शाह ने कॉन्ग्रेस और I.N.D.I गठबंधन के खिलाफ प्रस्ताव किया।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ‘बीजेपी देश की आशा और विपक्ष की हताशा’ नाम से प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने कहा, “पांडवों और कौरवों की तरह चुनाव से पहले दो खेमे हैं। एक तरफ मोदी जी के नेतृत्व में NDA का गठबंधन है और दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस के नेतृत्व में सारी परिवारवादी पार्टियों का घमंडिया गठबंधन है। ये घमंडिया गठबंधन भ्रष्टाचार, परिवारवाद और तुष्टिकरण की राजनीति का पोषक है।”

अमित शाह ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने तुष्टिकरण की राजनीति के कारण राम मंदिर का न्योता ठुकराया। उन्होंने आगे कहा, “एक कहावत है- बड़े मियाँ तो बड़े मियाँ, छोटे मियाँ सुभान अल्लाह। आम आदमी पार्टी आबकारी घोटला, मोहल्ला क्लीनिक घोटाला और कोर्ट से भागता है। छत्तीसगढ़ में महादेव घोटाला हुआ। लालू जी सजायाफ्ता हैं। पूरा इंडी अलायंस भ्रष्टाचार में लिप्त है। अब देश की जनता को तय करना है कि मोदी को मैनडेट देना है या इंडी अलायंस को देना है।”

उन्होंने कहा कि भाजपा और NDA गठबंधन राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत पर चलने वाला गठबंधन है। देश ने तय कर लिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फिर से देश के पीएम बनेंगे। भारत की दुनिया में बढ़ते कद को लेकर उन्होंने कहा, “दुनिया में कहीं भी जाओगे तो लोग पूछेंगे कि मोदी के भारत से आ रहे हो। मोदी जी देश के गरीबों के लिए काम कर रहे हैं। दूसरी ओर अपने परिवार की चिंता करने वाली पार्टी है।”

अमित शाह ने कहा, “75 वर्ष में इस देश ने 17 लोकसभा चुनाव, 22 सरकारें और 15 प्रधानमंत्री देखे हैं। हर सरकार ने अपने समय में विकास के प्रयास किए। आज मैं बिना किसी संदेह के कह सकता हूँ कि समग्र विकास, हर क्षेत्र का विकास और हर व्यक्ति का विकास केवल नरेंद्र मोदी जी के 10 वर्षों में हुआ है। मोदी जी ने 10 ही साल में ही परिवारवाद, जातिवाद, तुष्टीकरण को खत्म कर दिया।”

परिवारवाद पर निशाना साधते हुए अमित शाह ने कहा, “राजनीति में इंडी गठबंधन का उद्देश्य क्या है? पीएम मोदी का लक्ष्य आत्मनिर्भर भारत है। सोनिया गाँधी का लक्ष्य है राहुल गाँधी को पीएम बनाना है। पवार साहब का लक्ष्य है अपनी बेटी को सीएम बनाना। ममता बनर्जी का लक्ष्य है अपने भतीजे को सीएम बनाना। स्टालिन का लक्ष्य है अपने बेटे को सीएम बनाना।”

क्षेत्रीय दलों के परिवारवाद पर निशाना साधते हुए अमित शाह ने आगे कहा, लालू यादव का लक्ष्य है अपने बेटे को सीएम बनाना। उद्धव ठाकरे का लक्ष्य है अपने बेटे को सीएम बनाना। मुलायम सिंह यादव ने सुनिश्चित किया कि उनका बेटा सीएम बनें। जिनका लक्ष्य अपने परिवार के लिए सत्ता हासिल करना है, क्या वे कभी गरीबों के कल्याण के बारे में सोचेंगे?”

जेपी नड्डा ने कहा कि अयोध्या का भव्य राम मंदिर बनाने का संकल्प ऐसे समय में पूरा हुआ है, जब पीएम मोदी के नेतृत्व में राष्ट्र विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में लगा हुआ है। भव्य राम मंदिर भारत की सांस्कृतिक चेतना का प्रतिबिंब बन गया है। उन्होंने कहा कि गुलामी की अतीत से प्रेरणा लेते हुए भारत खड़ा हो रहा है। पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत की सांस्कृतिक विरासत को संवर्धित किया जा रहा है>

उन्होंने कहा, “भारत की सभ्यता और संस्कृति के कण-कण में प्रभु श्रीराम, माता सीता, रामायण रचे-बसे हुए हैं। हमारा संविधान रामराज्य के आदर्शों से प्रेरित रहा है। भारत के संविधान के मूल प्रति में भी मौलिक अधिकारों के खंड पर भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी का विजय पश्चात अयोध्या लौटने का चित्र बना हुआ है। वह इस बात का प्रमाण है कि मौलिक अधिकारों के प्रेरणास्रोत भगवान श्रीराम ही हैं।”

यशस्वी जायसवाल: सबसे ज्यादा छक्के के साथ डबल सेंचुरी का वर्ल्ड रिकॉर्ड, सबसे कम उम्र में लगातार दूसरे दोहरे शतक की लिस्ट में भी शामिल

भारत-इंग्लैंड के बीच राजकोट टेस्ट में यशस्वी जायसवाल ने डबल सेंकुरी ठोंक दी है। यशस्वी जायसवाल ने सीरीज के दूसरे मैच में भी डबल सेंचुरी ठोंकी थी। उन्होंने नाबाद 214 रनों की पारी खेली। इसके साथ ही कप्तान रोहित शर्मा ने भारत की पारी घोषित कर दी। यशस्वी की दमदार पारी की बदौलत टीम इंडिया ने इंग्लैंड के सामने 557 रनों का लक्ष्य रखा है।

इंग्लैंड के सामने 557 रनों का लक्ष्य

भारतीय टीम ने यशस्वी जायसवाल, शुभमन गिल, कुलदीप यादव और सरफराज खान की दमदार बल्लेबाजी के दम पर दूसरी पारी में 4 विकेट के नुकसान पर 430 रन बनाए और इंग्लैंड के सामने जीत के लिए 557 रनों का लक्ष्य रखा है। भारतीय टीम को पहली पारी में 126 रनों की बढ़त मिली थी। भारतीय पारी की घोषणा के समय यशस्वी जायसवाल 214 रनों पर तो सरफराज खान 68 रन बनाकर मैदान में डटे थे, दोनों नाबाद लौटे। वहीं, शुभमन गिल 91 रन बनाकर रन आउट हो गए थे। कुलदीप यादव ने नाइट वॉचमैन के तौर पर गेंदों का सामना किया और 27 रन बनाए।

यशस्वी-सरफराज का कमाल

यशस्वी जायसवाल और पहला ही टेस्ट मैच खेल रहे सरफराज खान ने महज 26.2 ओवरों में 172 रनों की साझेदारी की। यशस्वी जायसवाल ने 236 गेदों की अपनी पारी में 14 चौके और 12 छक्के लगाए। वहीं, पहली पारी में अर्धशतक लगाकर रन-आउट होने वाले सरफराज खान ने दूसरी पारी में नाबाद 68 रन बनाए। उन्होंने महज 72 गेंदों का सामना करते हुए 3 छक्के और 6 चौके लगाए। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 94.44 का रहा, तो यशस्वी ने अपनी पूरी पारी में 90 से अधिक का स्ट्राइक रेट बनाए रखा।

रोहित ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने से रोका!

रोहित शर्मा ने जिस समय भारतीय पारी घोषित की, उस समय तक अपनी दोहरी शतकीय पारी में यशस्वी जायसवाल 12 छक्के लगाकर वसीम अकरम के वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी कर चुके थे। यशस्वी जायसवाल ये रिकॉर्ड अगली ही गेंद पर तोड़ सकते थे, लेकिन रोहित शर्मा ने पारी घोषित कर दी। वसीम अकरम ने साल 1996 में शेखूपुरा में जिम्बॉब्वे जैसी कमजोर टीम के खिलाफ अपने जीवन का सबसे बड़ा स्कोर बनाया था। उन्होंने 363 गेंदों पर 257 रनों की नाबाद पारी खेली थी। इस दौरान उन्होंने 22 चौके और 12 छक्के लगाए थे। हालाँकि संयुक्त रूप से ये रिकॉर्ड अब यशस्वी के नाम पर भी हो गया है।

तीसरे सबसे छोटे 2 दोहरा शतक बनाने वाले खिलाड़ी

यशस्वी जायसवाल ने महज 7 टेस्ट मैचों की 13 पार्टियों में दो दोहरे शतक बना डाले हैं। उन्होंने अपतक अपने छोटे से करियर में तीन शतक लगाए हैं, जिसमें दो दोहरे शतक हैं। तो उन्होंने 2 अर्धशतकीय पारियाँ भी खेली हैं। इस मैच में दोहरा शतक बनाते समय यशस्वी जायसवाल की उम्र 22 साल 49 दिन की है। ये रिकॉर्ड अब भी विनोद कांबली के नाम है। उन्होंने 21 साल 54 दिनों में ही दो दोहरे शतक ठोंक दिए थे। डॉन ब्रैडमैन ने भी महज 21 साल 318 दिनों में ये कारनामा कर दिया था। दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान ग्रीम स्मिथ चौथे नंबर पर हैं, उन्होंने 22 साल 173 दिनों में दो दोहरे शतक बना डाले थे।

भारत ने छक्कों का बनाया रिकॉर्ड

भारतीय टीम ने महज तीसरे ही टेस्ट मैच में अब तक 48 छक्के ठोंक डाले हैं। ये किसी भी टीम के लिए अब तक किसी भी सीरीज में सबसे ज्यादा छक्कों का विश्व रिकॉर्ड है। भारत के ही नाम पर इससे पिछला रिकॉर्ड भी था। भारतीय टीम ने साल 2029 में दक्षिण अफ्रीकी टीम के खिलाफ 47 छक्के लगाए थे। यही नहीं, इस मैच में भारतीय टीम ने 28 छक्के लगाए, जो किसी भी टीम के लिए सबसे ज्यादा छक्के हैं। ये रिकॉर्ड भी पहले भारतीय टीम के ही नाम दर्ज था, जिसने साल 2019 में विशाखापट्टनम टेस्ट में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 27 छक्के लगाए थे।

मैच हाईलाइट्स

भारतीय टीम ने टॉस जीता, पहले बल्लेबाजी का फैसला। ध्रुव जुरेल और सरफराज खान को डेब्यू का मौका

भारतीय टीम ने पहली पारी में 445 रन बनाए। इसमें कप्तान रोहित शर्मा ने 131 रनों की शतकीय पारी खेली, तो रविंद्र जडेजा ने 112 रन बनाए। सरफराज खान 62 रन बनाकर आउट हुए, तो ध्रुव जुरेल ने 46 रन बनाए। इंग्लैंड के लिए मार्क वुड ने 4 विकेट लिए।

इंग्लैंड की टीम ने पहली पारी में 319 रन बनाए. बेन डकेट ने 153 रनों की शानदार पारी खेली। उन्होंने महज 151 गेंदों पर ही 153 रन ठोंक दिए। कप्तान बेन स्टोक्स 41 रन बना पाए। मोहम्मज सिराज ने 4 विकेट लिए, तो जडेजा-कुलदीप यादव ने 2-2 विकेट लिए. बुमराह को एक विकेट मिला। भारतीय टीम को पहली पारी के आधार पर 128 रनों की बढ़त मिली।

भारत ने अपनी दूसरी और मैच की तीसरी पारी 4 विकेट के नुकसान पर 430 रनों पर घोषित कर दी है और इंग्लैंड के सामने 557 रनों का लक्ष्य रखा है।

कैमरे पर ही बीवी को पीटने चला पाकिस्तान का क्रिकेट एक्सपर्ट, फिर अल्लाह का जताने लगा शुक्र: मोहसिन अली का वीडियो देख भड़के लोग

पाकिस्तान के क्रिकेट एक्सपर्ट मोहसिन अली यूट्यूब लाइव स्ट्रीम के दौरान अपनी बीवी को पीटने की कोशिश करते दिखाई दिए हैं। मोहसिन लाइव स्ट्रीम में अपनी बीवी की आवाज आ जाने से नाराज थे। क्रिकेट के बारे में चर्चा वाली इस लाइव स्ट्रीम को पत्रकार रिज़वान हैदर होस्ट कर रहा था। जब पीछे से मोहसिन अली की बीवी की आवाज आई तो बातचीत का माहौल ही बदल गया। लाइव स्ट्रीम में ही मोहसिन अपनी बीवी की तरफ बढ़े और अपना बायाँ हाथ पिटाई के मकसद से उठाया। कुछ ही देर में यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

मोहसिन अली की इस हरकत को नेटीजेंस ने घरेलू हिंसा करार दिया है। उनकी हरकत पर सोशल मीडिया में नाराजगी जताई जा रही है। लोगों को तब और अधिक हैरत हुई जब इसी लाइव स्ट्रीम में आगे मोहसिन अली ने अपनी करतूत पर माफ़ी माँगने के बजाय सफाई देनी शुरू कर दी। एक यूजर अंशुल राज सिंह ने लिखा, “मानवता सबसे पहले आती है। मोहसिन अली माफी माँगें क्योंकि आपने उन्होंने लाइव के 1:40 वें सेकंड पर घरेलू हिंसा की है। उन्हें अपनी पत्नी का सम्मान करना चाहिए।”

लाइव स्ट्रीम पर आ रहे कमेंट को पढ़ कर शो को होस्ट कर रहे पत्रकार रिज़वान हैदर ने इस मामले में अपनी तरफ से सफाई पेश करने की कोशिश की। हालाँकि, मोहसिन अली ने बीच में रिज़वान को टोका और अपनी तरफ से सफाई देने की पेशकश की। मोहसिन ने कहा, “इस मुद्दे पर मुझे बात करने दीजिए। मेरे भाई अंशुल, बात ये है कि जब आप लाइव बैठे हो और बीच में कोई समस्या आ जाए तो आप पता नहीं कौन सा वायलेंस (हिंसा) करेंगे।”

इसके बाद मोहसिन खान ने अपनी शादीशुदा जिंदगी के 31 साल पूरे होने की बात कहते हुए अंशुल की उतनी उम्र भी न होने जैसा कुतर्क दिया। आगे उन्होंने कहा, “अल्लाह का शुक्र है कि हम अपनी मां, बहन और पत्नी का सम्मान करते हैं। मेरी 31 साल पुरानी शादी इसका सबूत है। यह घरेलू हिंसा नहीं है। थोड़ा तमीज सीखो।” हालाँकि, मोहसिन अली की ये बातें नेटीजेंस को संतोषजनक नहीं लगीं। एक यूजर ने लिखा कि मोहसिन के व्यवहार में कुछ भी नया नहीं है क्योंकि उनकी हरकतें ऐसी ही हैं। वहीं एक अन्य यूजर ने ऐसी घटनाएँ पाकिस्तान में सामान्य बात बताया।

इन सभी के अलावा एक अन्य यूजर ने मोहसिन अली को फ्रेस्टेड पति बताया है जबकि ललित ने इस्लामाबाद पुलिस को टैग करते हुए क्रिकेट एक्सपर्ट की गिरफ्तारी की माँग की है।

बताते चलें कि सोशल मीडिया पर मोहसिन अली के तमाम फॉलोवर हैं। उनके अपने यूट्यूब चैनल पर 107K से अधिक सब्सक्राइबर हैं। वहीं रिजवान हैदर के चैनल पर 577K से अधिक सब्सक्राइबर हैं। यहाँ पर ये अक्सर क्रिकेट के बारे में बात करते हैं।

बच्चों को पिलाते हैं शराब, पतियों को मारते हैं: संदेशखाली की 10 पीड़िताओं का दर्द, बोलीं- सुंदर औरतों का होता है यौन शोषण, बाकी करती हैं काम

बंगाल के संदेशखाली में तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों के अत्याचारों का खुलासा एक और रिपोर्ट के जरिए हुआ है। ये रिपोर्ट आजतक की पत्रकार श्वेता सिंह ने संदेशखाली में जाकर की। इस रिपोर्ट में 10 महिलाओं ने अपने दर्द को उजागर किया है।

श्वेता सिंह से बात करते हुए एक (पहली) महिला ने बताया कि टीएमसी गुंडे उन्हें उनकी मर्जी के बगैर जबरन अपने पार्टी कार्यालय ले जाते हैं और कहते हैं कि रात में मीटिंग है और सबको वहाँ रहना जरूरी है।

दूसरी पीड़िता को कहते सुना गया, “वे दिन के किसी भी समय आते और हमें अपने साथ चलने के लिए मजबूर करते। भले ही हम घर पर खाना बना रहे हों, हमसे उम्मीद की जाती है कि हम घर का सारा काम छोड़कर पार्टी की बैठकों में शामिल हों। उन्होंने हमारी ज़मीनों पर कब्ज़ा कर लिया है और हमें पट्टे का भुगतान नहीं करते हैं… हम कहाँ जाएँगे? पुलिस हमारी बात नहीं सुन रही है और महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जवाबी एफआईआर दर्ज कर रही है।”

तीसरी पीड़िता ने बताया- “जब हम अपने पैसे माँगने जाते हैं, तो वे हमारे साथ गाली-गलौज करते हैं और हमें जबरदस्ती हमारे घरों से ले जाते हैं। अगर हम उनका विरोध करते हैं तो वे हमारे घर आ जाते हैं और घर के पुरुषों को धमकाते हैं। अगर हम पार्टी की बैठकों में शामिल नहीं हुए तो वे हमें अपहरण करने की धमकी देते हैं।”

चौथी पीड़ित महिला ने कहा- “वे (टीएमसी गुंडे) मीटिंग के नाम पर हमें पार्टी कार्यालय में ले जाते और फिर हमें प्रताड़ित करने लगते। वहाँ वह ‘खूबसूरत महिलाओं’ का यौन शोषण करते थे और दूसरी महिलाओं से खाना बनवाते थे या फिर काम करवाते थे। ऐसा दिन-ब-दिन होता था। अगर महिलाएँ ऐसा करने से मना करती थीं तो उनके पतियों पर हमला होता था।”

बच्चों को बिगाड़ रहे टीएमसी गुंडे, जबरन पार्टी को वोट डलवाते हैं

इसी तरह पाँचवी महिला ने जानकारी दी कि टीएमसी गुंडे इलाके के बच्चों को भी बिगाड़ रहे हैं। महिला ने कहा, “वे 14-15 साल के बच्चों को शराब और बंदूकें देते हैं और अगर हम राजनीति में भाग नहीं लेते तो वे हमारे माता-पिता और परिवार के सदस्यों की हत्या करने की धमकी देते हैं।”

छठी महिला ने संदेशखाली में कैसे दबाव डालकर वोट लिया जाता है इसके बारे में बताया। उसने कहा- “अगर हम उन्हें वोट नहीं देना चाहते तो वो जबरदस्ती लेते हैं। वोट बैलट पेपर पर होता है। ये लोग खुद सील लेकर खुद को वोट दे देते हैं हमारी मर्जी नहीं चलने देते।”

मुँह छिपाने को महिलाएँ मजबूर, गुंडे ‘सेक्सी’ कहकर बुलाते हैं

कई महिलाओं ने टीएमसी गुंडों के डर से अपना चेहरा दिखाने से भी मना कर दिया। सातवीं पीड़िता ने मुँब छिपाकर कहा- “गाँव में सब टीएमसी समर्थक हैं। चाहे शिबू हाजरा और उत्तम सरदार जैसे लोगों ने हमारी जमीन ही क्यों न हड़प ली हो। हम लगातर डर में हैं। हम अपना चेहरा भी कैमरे में नहीं दिखा सकते।”

आठवीं पीड़िता ने कहा, “वे हमें पार्टी कार्यालय आने के लिए मजबूर करते थे और फिर कहते थे कि हमें घर जाने की अनुमति नहीं है। वे हमें ‘सेक्सी’ कहते थे और चाहते थे कि हम पार्टी बैठकों में 200-400 और महिलाओं को लाएँ। वह हमसे कहते थे कि हम उनका मनोरंजन करें वरना वो हमें नहीं छोड़ेंगे।”

ममता दीदी कभी नहीं आई संदेशखाली: पीड़िताओं ने पूछा- क्या वो झूठ बोल रही हैं

नौवीं पीड़िता ने दुखी होकर कहा, “पुलिस ने हमारी कभी मदद नहीं की। वह शीबू हाजरा जैसे लोगों के साथ खड़े थे। हमारी कोई नहीं सुनता था। वे कभी भी आते और हमें अपने साथ ले जाते। अगर हम उनके साथ नहीं जाते तो वे हमारे पतियों की पिटाई करते। अगर हम स्वेच्छा से पार्टी कार्यालय नहीं जाते, तो वे हमें हमारी इच्छा के विरुद्ध ले जाने के लिए बाइक पर किसी को भेजते। हमें उनका मनोरंजन करना होता था। कोई और रास्ता नहीं था…ममता दीदी यहाँ कभी नहीं आईं। वास्तव में, यहाँ कोई भी हमारी जाँच करने नहीं आया। ममता दीदी कह रही हैं कि संदेशखाली में कुछ नहीं हुआ? क्या हम झूठ बोल रहे हैं?”

महिलाओं ने जानकारी देते हुए कहा कि यह दरिंदगी उनके साथ साल 2011 से हो रही है। उन्होंने कहा, “अगर शिबू हाजरा और शाहजहाँ शेख खुले में हैं, तो हमारे साथ हत्या सहित कुछ भी हो सकता है। हमें लगता है कि जब हम घर पर होंगे तो दोनों हमें मार सकते हैं। हम पति और बच्चों के बिना रहते हैं। हम उन्हें रोक नहीं पाएँगे। हम शांति चाहते हैं। जब तक वे गिरफ्तार होंगे, हमें मानसिक शांति नहीं मिलेगी। अगर उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई तो हम लोग अपने घरों में नहीं रह पाएँगे। अगर उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया तो इलाके में और अधिक आतंक फैल जाएगा।”

एक अन्य स्थानीय (दसवीं) महिला ने संदेशखाली में टीएमसी सरकार को आड़े हाथों लिया। उसने आधार कार्ड दिखाकर कहा कि वो संदेशखाली की मूल निवासी है। महिला ने ऐसा अपना चेहरा दिखाते हुए कहा और टीएमसी नेताओं के उन सवालों का जवाब दिया जिसमें वो कह रहे थे कि आरोप लगाने वाली महिलाएँ संदेशखाली की नहीं हैं।

संदेशखाली विवाद की पृष्ठभूमि

8 फरवरी 2024 को संदेशखाली में महिलाएँ टीएमसी के अत्याचारों से तंग आकर सड़कों पर उतरीं। उन्होंने टीएमसी नेता शेख शाहजहाँ और उसके दो साथी शीबू हाजरा और उत्तम सरदार पर कई आरोप लगाए। महिलाओं ने इनकी गिरफ्तारी की माँग भी की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। महिलाओं ने अपने ऊपर अत्याचारों को मीडिया में बताया। जिसके बाद पूरा देश संदेशखाली के बारे में सुन सन्न रह गया। हालात देखते हुए वहाँ 10 फरवरी धारा 144 लगाई गई। ग्रामीणों का गुस्सा शांत करने के लिए टीएमसी ने उत्तम सरदार को निलंबित कर दिया और बाद में गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा सीपीआई (एम) निर्पदा सरदार को प्रदर्शन मामले में अरेस्ट किया गया और घटना का विरोध करने वाले भाजपा नेता विकास सिंह को भी गिरफ्तार किया गया। 17 फरवरी को जाकर शीबू प्रसाद हाजरा की भी गिरफ्तारी हुई।

कमलनाथ के साथ ही मनीष तिवारी भी? कॉन्ग्रेस की डूबती नाव से उतर रहे महारथी, पंजाब में बीजेपी को मिलेगी मजबूती

कॉन्ग्रेस पार्टी को झटके पर झटके लग रहे हैं। इंडी गठबंधन में तो साथी दल लगातार साथ छोड़ ही रहे हैं, पार्टी के भी हैवीवेट नेता लगातार कॉन्ग्रेस का साथ छोड़कर दूसरे दलों में जा रहे हैं। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंंत्री कॉन्ग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए और राज्यसभा चले गए, तो मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस के सबसे बड़े नेता और राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके कमलनाथ के भी कॉन्ग्रेस से दूर जाने के बीच पंजाब से भी पार्टी के लिए बुरी खबर सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी भी कॉन्ग्रेस का साथ छोड़ सकते हैं। वो अभी कॉन्ग्रेस के ही टिकट पर लोकसभा सांसद हैं, लेकिन अगला चुनाव उनके बीजेपी के टिकट पर लड़ने की बातें सामने आ रही हैं।

मनीष तिवारी अभी पंजाब के आनंदपुर साहिब से लोकसभा सांसद हैं। वो लुधियाना लोकसभा सीट से चुनाव लड़ना चाहते हैं। इसके लिए बीजेपी से बातचीत चल रही है। आजतक ने बीजेपी सूत्रों के हवाले से बताया है कि बीजेपी के पास लुधियाना लोकसभा सीट के लिए सक्षम उम्मीदवार है। ऐसे में वो मनीष तिवारी को लुधियाना से नहीं लड़ाना चाहती। हालाँकि दोनों तरफ से इस बात लेकर बातचीत अंतिम चरण में है। वो कभी भी कॉन्ग्रेस छोड़ने की घोषणा कर सकते हैं।

दिल्ली में कमलनाथ-नकुलनाथ

बता दें कि सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके सांसद बेटे नकुलनाथ भी कॉन्ग्रेस छोड़ सकते हैं। दोनों ही इन दिनों दिल्ली में हैं। बताया जा रहा है कि वो बीजेपी आलाकमान के संपर्क में है। जल्द ही इस बात की घोषणा की जा सकती है। नकुलनाथ अभी छिंदवाड़ा से लोकसभा सांसद हैं। ये सीट कमलनाथ की पारंपरिक सीट मानी जाती है। वो दशकों तक इस सीट से लोकसभा चुनाव जीतते आए हैं, उनके बाद उनके बेटे नकुलनाथ ने विरासत को थाम रखा है।

ऐसे में कमलनाथ, नकुलनाथ और अब मनीष तिवारी का जाना कॉन्ग्रेस के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। कुछ दिन पहले ही मुंबई कॉन्ग्रेस के कई बड़े नेता पार्टी छोड़ चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण राज्यसभा पहुँच चुके हैं, तो पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली देवरा एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो चुके हैं। वहीं, बाबा सिद्दीकी जैसे कॉग्रेस के बड़े नेता भी पार्टी छोड़ चुके हैं।

मध्य प्रदेश में कॉन्ग्रेस के कई विधायक भी छोड़ सकते हैं पार्टी

कमलनाथ-नकुलनाथ एपिसोड के साथ ही एक बार फिर से मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस में टूट हो सकती है। कॉन्ग्रेस के कई विधायक कमलनाथ के साथ ही पार्टी बदल सकते हैं। न्यूज18 की रिपोर्ट की मानें, तो कमलनाथ के साथ ही सुनील उईके (जुन्नारदेव), सोहन वाल्मीकि (परासिया), विजय चौरे (सौंसर), निलेश उईके (पांढुर्णा), सुजीत चौधरी (चौरई), कमलेश शाह (अमरवाड़ा), दिनेश गुर्जर (मुरैना), संजय उईके (बैहर), मधु भगत (परसवाड़ा) और विवेक पटेल (वारासिवनी) जैसे विधायक कॉन्ग्रेस छोड़ सकते हैं। वहीं, कमलनाथ समर्थक मुरैना और छिंदवाड़ा के महापौर भी कॉन्ग्रेस छोड़ सकते हैं।

कमलनाथ के समर्थक पूर्व मंत्री ने लिखा ‘जय श्री राम’, पटवारी खेमे में खामोशी

कमलनाथ के समर्थक पूर्व सांसद और मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे सज्जन सिंह वर्मा ने एक्स पर जय श्री राम पोस्ट किया। कमलनाथ-नकुलनाथ की बीजेपी के शीर्ष नेताओं से मुलाकात के समय ये पोस्ट बहुत कुछ कह रही है।

उन्होंने न्यूज18 से बातचीत में खुलेआम इस बात का ऐलान कर दिया था कि जहाँ भी कमलनाथ होंगे, वहाँ वो खड़े मिलेंगे।

शरजील इमाम के भाषण इतने भड़काऊ कि विशेष समुदाय (मुस्लिम) ने मचाई तबाही, दंगे हुए, बड़ी संख्या में मौतें: दिल्ली कोर्ट का जमानत से इनकार

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) प्रदर्शन की आड़ में दिल्ली में दंगे की साजिश रचने वाले शरजील इमाम को दिल्ली की अदालत ने जमानत देने से एक बार फिर इनकार कर दिया। शरजील इमाम वहीं शख्स है, जिसने़ पूर्वोत्तर राज्यों को देश के अन्य हिस्सों से काटने की बात कही थी। शरजील पर देशद्रोह का मामला दर्ज है।

दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने शनिवार (17 फरवरी 2024) को अपने फैसले में कोई भी राहत देने से इनकार कर दिया। जज ने कहा कि CAA के खिलाफ शरजील इमाम के भाषणों और अन्य गतिविधियों में लोगों को हथियार उठाने या मारने के लिए नहीं कहा गया, लेकिन इसके कारण लोग लामबंद हुए। इसके कारण दिल्ली में अशांति फैल गई।

अदालत ने कहा कि शरजील इमाम के भाषण इतने भड़काऊ (Powerful) थे कि इसने विशेष समुदाय (मुस्लिम) लोगों की कल्पना पर कब्जा कर लिया और उन्हें विघटनकारी गतिविधियों में भाग लेने के लिए उकसाया। शरजील ने सोशल मीडिया और अपने भाषणोें में वास्तविक तथ्यों से छेड़छाड़ की और शहर में तबाही मचाने के लिए लोगों को उकसाया। जिसके कारण फरवरी 2020 में दिल्ली में दंगे हुए।

अदालत ने कहा कि शरजील इमाम के भाषणों के कारण दिल्ली में प्रदर्शनकारियों और विरोध स्थलों की संख्या बढ़ गई। भीड़ ने मुख्य सड़कों को अवरुद्ध करना शुरू कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप पूरा शहर ठप हो गया। जज ने कहा, “आखिरकार, अलग-अलग तारीखों और स्थानों पर दंगे हुए। हिंसा हुई, सार्वजनिक संपत्ति को भारी नुकसान हुआ और बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई।”

दरअसल, शरजील इमाम के खिलाफ द्रेशद्रोह और गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) के तहत मामला दर्ज है। साल 2019 में दिल्ली के जामिया इलाके और फिर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में शरजील इमाम ने भड़काऊ भाषण दिया था। इन्हीं मामलों में जमानत की अर्जी पर सुनवाई करते हुए जज ने टिप्पणी की।

जामिया और एएमयू में भड़काऊ भाषण देने के मामले में शरजील इमाम को 28 जनवरी 2020 को गिरफ्तार किया गया था। उसने जमानत के लिए जुलाई 2022 में पहली अर्जी दाखिल की थी, जिसे ट्रायल कोर्ट ने खारिज कर दी थी। वहीं, दिल्ली हाई कोर्ट ने 30 जनवरी को देशद्रोह और UAPA मामले में शरजील इमाम की जमानत याचिका पर शीघ्र निर्णय लेने का ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया था।

शरजील इमाम ने कोर्ट में तर्क दिया कि वह सात साल की अधिकतम सजा में से चार साल पहले ही जेल में बीता चुका है, जो आधी से अधिक है। इसलिए वह जमानत का पात्र है। उसने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए के तहत राजद्रोह के अपराध को भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने स्थगित रखा है और उनके खिलाफ लगाए गए UAPA में सात साल से अधिक की सजा का प्रावधान नहीं है।

सुनवाई के दौरान लोक अभियोजक ने तर्क दिया कि अपराधों के लिए सजा की गणना क्रमिक रूप से की जाती है न कि एक साथ। उन्होंने कहा कि धारा 436 के तहत जमानत अनिवार्य नहीं है और अपराध की गंभीरता पर विचार किया जाना चाहिए। तर्क सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि वह राजद्रोह के अपराध पर विचार नहीं कर रहा, लेकिन इमाम के कृत्य सामान्य अर्थों में राजद्रोह के रूप में योग्य होंगे।