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हल्द्वानी में जिन दंगाइयों ने दलितों को पीटा, उनका केस वापस लेने की माँग पर अड़ी ‘भीम आर्मी’, वाल्मीकि-सोनकर परिवारों की बजाए मुस्लिमों के लिए माँगा मुआवजा

उत्तराखंड के हल्द्वानी में 8 फरवरी 2024 को हिंसा भड़क गई थी। पुलिस और नगर निगम स्टाफ के खिलाफ भड़की यह हिंसा अतिक्रमण हटाने के दौरान हुई थी। अब तक 58 दंगाइयों की गिरफ्तारी हो चुकी जबकि बाकियों की धरपकड़ के प्रयासों के साथ कुर्की जैसी कानूनी प्रक्रियाएँ जारी हैं। विगत 10 दिनों में प्रशासन के प्रयासों से हालात तेजी से सामान्य होते जा रहे हैं। हालाँकि इस बीच कुछ समूह और गिरोह अस्थिरता फ़ैलाने की फ़िराक में लगे हैं।

जहाँ 2 दिन पहले एक कथित फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने जा कर भ्रामक रिपोर्ट तैयार की तो वहीं अब ‘भीम आर्मी’ भी हिंसा पीड़ित मुस्लिमों से न मिलने देने पर प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जता रही है। सबसे खास बात तो यह है कि दलितों के हितों के नाम पर राजनीति कर रही भीम आर्मी नगर निगम के उन दलित स्टाफ के घर नहीं जा रही जिन्हे हिंसक भीड़ ने बेरहमी से मारा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शनिवार (17 फरवरी, 2024) को ‘भीम आर्मी’ का 60 सदस्यीय प्रतिनिध मंडल वनभूलपुरा के मुस्लिमों से मिलने निकला। इस प्रतिनिधि मंडल में राष्ट्रीय अध्यक्ष मनजीत नौटियाल के अलावा सोनू लाठी आदि मौजूद थे। प्रतिनिधि मंडल को उत्तराखंड पुलिस ने वनभूलपुरा क्षेत्र से काफी पहले ही हाईवे पर रोक दिया। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्र में कर्फ्यू लागू होने की जानकारी दी और हालत सामान्य करने में उनसे सहयोग की अपील की। हालाँकि प्रतिनिधि मंडल ने प्रशासन की बात नहीं मानी। तब प्रशासन ने इस समूह को थोड़े समय तक एहतियातन थाने में रोका और बाद में वापस लौटा दिया।

भीम आर्मी के अन्य सदस्य इस बात को ले कर सोशल मीडिया पर काफी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। वापस लौटाए जाने से भड़के मनजीत नौटियाल ने अपनी माँगों के न माने जाने पर आंदोलन तक का ऐलान कर दिया। उनकी माँगों में बेगुनाह मुस्लिमों के मुकदमे वापस लेना और वनभूलपुरा के पीड़ितों को मुआवजे के तौर पर 60 लाख रुपए देना शामिल है। ‘भीम आर्मी’ राष्ट्रीय अध्यक्ष यह भी चाहते हैं कि नैनीताल प्रशासन ध्वस्त किए गए अवैध मदरसे और मस्जिद के लिए फिर से जमीन दिलाए।

दंगाइयों के हमले में सबसे अधिक दलित ही पीड़ित

हल्द्वानी हिंसा में सबसे अधिक नुकसान पुलिस और नगर निगम के कर्मचारियों को उठाना पड़ा है। ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट में यह बात निकल कर सामने आई थी कि हिंसा के शिकार नगर निगम के अधिकतर स्टाफ अनुसूचित जाति (SC) वर्ग से हैं। इनमें से मनोज और मिथुन वाल्मीकि के अलावा सागर सोनकर ने तो ऑपइंडिया से बात करते हुए हिंसक भीड़ की करतूत बताई थी। मनोज, मिथुन और सागर के हाथों और पैरों में फैक्चर तब हैं जिसका इलाज सरकार करवा रही है। इन सभी ने बताया कि उस दिन दंगाइयों ने उन्हें मार कर जिन्दा जलाने के लिए रास्ते में कँटीले तार तक बिछा कर रखे हुए थे।

वहीं SC वर्ग से ही आने वाले कॉन्ग्रेस नेता गब्बर वाल्मीकि ने भी माना कि वनभूलपुरा की हिंसक भीड़ ने कानून को तोडा था। गब्बर वाल्मीकि ने दंगाइयों पर कड़ी कार्रवाई की भी माँग प्रशासन से की थी। इन सभी के अलावा वनभूलपुरा से निकली हिंसक भीड़ जिस रिहायशी बस्ती गांधीनगर में घुसना चाह रही थी, वहाँ भी अधिकतर परिवार दलित समुदाय के ही हैं। इन परिवारों के तमाम सदस्य दंगाइयों के हमले में पुलिसकर्मियों, नगर निगम स्टाफ और अपने खुद के परिवार की रक्षा करते हुए घायल हुए हैं।

घायलों में अनुसूचित जाति के अमरदीप सोनकर को गंभीर चोटें आईं हैं और वो अभी तक बिस्तर पर ही हैं। उनके अलावा मनीष सोनकर का सिर फट गया, ऋतिक सोनकर के चेहरे पर कई घाव लगे और आर्यन सोनकर का हाथ टूट गया है। इन सभी के अलावा गाँधीनगर की SC वर्ग की महिलाओं ने हमें बताया कि आज भी उनके मन में हिंसक भीड़ का उन्मादी रूप घूमता है। यह सारा मोहल्ला पुलिस के साथ अपनी खुद की रक्षा के लिए एकजुट हो गया था। इसी मोहल्ले पर न सिर्फ गोलियाँ चलाई गईं बल्कि पत्थरों के साथ पेट्रोल बम भी फेंके गए थे।

घायलों की जानकारी ऑपइंडिया सहित कई अन्य मीडिया संस्थानों पर प्रकाशित की गई है। हालाँकि भीम आर्मी का प्रतिनिधि मंडल वनभूलपुरा क्षेत्र में रहने वाले मुस्लिमों के लिए संघर्ष कर रहा है। अभी तक उनके माँग पत्र में दलित वर्ग से आने वाले नगर निगम के स्टाफ व इसी वर्ग के गाँधीनगर के घायलों के लिए कोई स्थान नहीं दिया गया है।

BJP का अधिवेशन, कार्यकर्ताओं संग जमीन पर बैठे तमिलनाडु के प्रदेश अध्यक्ष K अन्नामलाई: तस्वीर देख लोगों को आई नरेंद्र मोदी के पुराने दिनों की याद

तमिलनाडु में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष K अन्नामलाई की सोशल मीडिया पर जम कर तारीफ़ हो रही है। बता दें कि दिल्ली में भाजपा का 2 दिवसीय अधिवेशन शनिवार (17 फ़रवरी, 2024) और रविवार को संपन्न हुआ। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर देश भर से भाजपा के हजारों कार्यकर्ताओं एवं नेताओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष के अन्नामलाई को कार्यकर्ताओं के साथ जमीन पर बैठे हुए देखा गया। लोग उनके समर्पण की तारीफ कर रहे हैं।

के अन्नामलाई के लिए कुर्सी आरक्षित थी, क्योंकि वो प्रदेश अध्यक्ष हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ जमीन पर बैठना चुना। लोगों ने कहा कि उनसे एक कार्यकर्ता के रूप में प्रेरणा ली जा सकती है। इतना ही नहीं, उनकी तुलना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी हो रही है, जिनकी कई ऐसी पुरानी तस्वीरें सामने आती हैं जिनमें वो जमीन पर बैठे दिखते हैं। एक तस्वीर में लालकृष्ण आडवाणी को कुर्सी पर और आगे नरेन्द्र मोदी को साथी कार्यकर्ताओं के साथ जमीन पर बैठे देखा जा सकता है।

भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ टिप्पणी के बाद मालदीव के 3 मंत्रियों की बतख़ास्तगी के बाद चर्चा में आए ‘मिस्टर सिन्हा’ ने लिखा कि अन्नामलाई की यही चीज बाकियों से अलग करती है। पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी ने लिखा, “इस व्यक्ति का भविष्य शानदार दिखता है।” कइयों ने तो उन्हें ‘साउथ का मोदी’ भी कह कर संबोधित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बताया कि कैसे राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले अपने 11 दिवसीय अनुष्ठान के दौरान उन्होंने दक्षिण भारत का दौरा किया और उस दौरान उन्हें जो प्यार मिला उसे वो शब्दों में बयाँ नहीं कर सकते।

के अन्नामलाई के बारे में सोशल मीडिया पर लोग यहाँ तक कह रहे हैं कि वो भविष्य में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री तो बनेंगे ही, उनमें प्रधानमंत्री बनने की भी सारी काबिलियत मौजूद है। हाल ही में उन्होंने पूरा राज्य में पदयात्रा निकाली है, जिसमें उन्हें भरपूर जनसमर्थन मिला। उनकी सादगी की अक्सर चर्चा होती रहती है। अन्नामलाई पहले पुलिस अधिकारी थे, त्याग-पत्र देकर उन्होंने भाजपा का दामन थामा। तमिलनाडु द्रविड़ राजनीति का गढ़ है, जहाँ कमल खिलाना उनके लिए चुनौती मानी जा रही है।

हर मौसम में बिना गद्दा-चादर के सोना, 24 घंटे में अंजुल भर पानी पीना: जानिए कौन हैं जैन धर्मगुरु आचार्य विद्यासागर जी महाराज, जिन्होंने ली महासमाधि

जैन धर्म के प्रमुख गुरु जैन मुनि विद्यासागर जी महाराज ने शनिवार की रात करीब 2:30 बजे छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़-राजनंदगाँव में अपना देह त्याग दिया। रविवार (18 फरवरी 2024) को उनका अंतिम संस्कार पूरा हो गया। उन्होंने छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित चन्द्रगिरि तीर्थ में आचार्य पद का त्याग करने के बाद 3 दिन का उपवास और मौन धारण कर लिया था।

मुनि जी का जन्म 10 अक्टूबर 1946 को शरद पूर्णिमा के दिन कर्नाटक के बेलगाँव जिले के सदलगा गाँव में हुआ था। दीक्षा के पहले भी उनका नाम विद्यासागर ही था। उन्होंने 22 साल की उम्र में घर-परिवार छोड़ दी थी। इसके बाद 30 जून 1968 को राजस्थान के अजमेर में अपने गुरु आचार्य श्रीज्ञानसागर जी महाराज से दीक्षा ली थी। दीक्षा के बाद उन्होंने कठोर तपस्या की।

मुनि जी दिन भर में सिर्फ एक बार एक अंजुली पानी पीते थे। वे खाने में सीमित मात्रा में सादी दाल और रोटी लेते थे। उन्होंने आजीवन नमक, चीनी, फल, हरी सब्जियाँ, दूध, दही, सूखे मेव, अंग्रेजी दवाई, तेल, चटाई का त्याग किया। इसके अलावा उन्होंने थूकने का भी त्याग रखा। उन्होंने आजीवन सांसारिक एवं भौतिक पदार्थों का त्याग कर दिया। वे हर मौसम में बिना चादर, गद्दे, तकिए के शख्त तख्त पर सिर्फ एक करवट में शयन करते थे।

मुनि जी ने पैदल ही पूरे देश में भ्रमण किया। उनकी तपस्या को देखते हुए श्रीज्ञानसागर जी महाराज ने 22 नवम्बर 1972 को उन्हें आचार्य पद सौंपा था। आचार्य विद्यासागर के पिता का नाम श्री मल्लप्पा था, जो बाद में संन्यास लेकर मुनि मल्लिसागर बने। उनकी माता का नाम श्रीमंती था, जो आगे चलकर संन्यास ले लीं और आर्यिका समयमति बनीं। मुनि उत्कृष्ट सागर जी दिवंगत विद्यासागर जी के बड़े भाई हैं।

वहीं, उनके भाई अनंतनाथ और शांतिनाथ ने भी आचार्य विद्यासागर जी से दीक्षा ग्रहण कर लिया है। शांतिनाथ जी अब मुनि योगसागर जी हैं और शांतिनाथ जी अब मुनि समयसागर जी के नाम से जाने जाते हैं। आचार्य विद्यासागर के चार भाई और दो बहने भी थीं। विद्यासागर जी महाराज पूरे भारत के संभवत: ऐसे अकेले आचार्य रहे, जिनका पूरा परिवार संन्यास ले चुका है।

आचार्य जी संस्कृत, प्राकृत, हिन्दी, मराठी और कन्नड़ में पारंगत थे। उन्होंने जैन धर्म एवं दर्शन का गहन अध्ययन किया। उन्होंने हिन्दी और संस्कृत में कई ग्रंथ लिखे हैं। 100 से अधिक शोधार्थियों ने उनके कार्य पर PhD किया है। उनके कार्यों में निरंजना शतक, भावना शतक, परीषह जाया शतक, सुनीति शतक और शरमाना शतक शामिल हैं। उन्होंने काव्य मूकमाटी की भी रचना की है। इसे कई संस्थानों में स्नातकोत्तर के हिन्दी पाठ्यक्रम में पढ़ाया जाता है।

वे कभी भी और कहीं भी यात्रा के लिए निकल पड़ते थे। इसके लिए उन्होंने पहले से योजना नहीं बनाई। वे अक्सर नदी, झील, पहाड़ जैसे प्राकृतिक जगहों पर ठहरते और वहाँ साधना करते थे। यहीं, आचार्य विद्यासागर महाराज अकेले ऐसे मुनि हैं, जिन्होंने संभवत: पूरे भारत में अकेले सबसे अधिक दीक्षा दी है। उन्होंने 350 से अधिक लोगों को दीक्षा दी है।

आचार्य विद्यासागर जी धन संचय करने के खिलाफ थे। उन्होंने दान-दक्षिणा में भी कभी किसी से पैसे नहीं लिए। उन्होंने आज तक ना ही कोई बैंक अकाउंट खुलवाया और ना ही कोई ट्रस्ट भी नहीं बनाया। लोगों का तो यहाँ तक कहना है कि आचार्य ने पैसे को कभी हाथ भी नहीं लगाया। उनके नाम पर यदि कोई दान देता भी था तो उसे वे समाज सेवा के लिए दे देते थे।

आचार्यश्री ने भारत के पिछड़े बुन्देलखण्ड क्षेत्र में शिक्षा एवं सामाजिक कल्याण हेतु कई कार्यों को बढ़ावा दिया। उनके प्रयासों से इन सूखे इलाके में स्कूलों, अस्पतालों और सामुदायिक केंद्रों की स्थापना हुई। इसके कारण वहाँ के अनगिनत व्यक्तियों के जीवन में बदलाव आया।

बता दें कि साल 2023 में छत्तीसगढ़ चुनावों से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य के राजनांदगाँव जिले में स्थित प्रसिद्ध तीर्थस्थल डोंगरगढ़ का दौरा किया था। यहाँ उन्होंने माँ बम्लेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना की थी और जैन मुनि आचार्य विद्यासागर महाराज से के दर्शन किए थे। पीएम मोदी ने आचार्यश्री का चरण छूकर उनसे आशीर्वाद लिया था। इसकी तस्वीरें भी खूब वायरल हुई थीं।

जानिए कमलनाथ की कॉन्ग्रेस से नाराज़गी की वजहें: अब समर्थक पूर्व मंत्री ने लिखा ‘जय श्री राम’, कई विधायक और महापौर भी छोड़ेंगे पार्टी?

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके सांसद बेटे नकुलनाथ के कॉन्ग्रेस से मोहभंग होने और बीजेपी में शामिल होने की संभावनाएं मीडिया में जताई जा रही हैं। हालाँकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। इस बीच, अंदरखाने कमलनाथ की नाराजगी की वजहों पर भी चर्चाएँ चल रही हैं। माना जाता है कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस की हार के बाद ही कमलनाथ और राहुल गाँधी के बीच में दूरियाँ आई हैं।

कॉन्ग्रेस चुनाव हारी, ठीकरा कमलनाथ पर?

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कॉन्ग्रेस को प्रबल दावेदार माना जा रहा था। ये कहा जा रहा था कि कॉन्ग्रेस किसी भी अन्य राज्य की तुलना में मध्य प्रदेश में कहीं ज्यादा मजबूत है। लेकिन कॉन्ग्रेस को हार झेलनी पड़ी। इस चुनाव में रणदीप सुरजेवाला को पर्यवेक्षक बनाया गया था। उन्होंने रिपोर्ट सौंपी कि कमलनाथ का सॉफ्ट हिंदुत्व बीजेपी का मुकाबला नहीं कर पाया। इसके अलावा कॉन्ग्रेस की गुटबाजी भी इसकी वजह बनी।

कॉन्ग्रेस की हार हुई, तो सारा ठीकरा कमलनाथ के सिर पर फोड़ दिया गया। उन्हें तुरंत ही प्रदेश अध्यक्ष पद से हटा दिया गया। यही नहीं, कॉन्ग्रेस ने उन्हें नेता प्रतिपक्ष भी नहीं बनाया। वो भी तब, जब लोकसभा चुनाव 2024 सिर पर है। यही नहीं, उनके भगवान भक्त होने पर भी सवाल उठाए गए, उनकी आस्था का भी मजाक उड़ाने की कोशिश की गई। इस बीच, राहुल गाँधी का व्यवहार भी रुखा रहा। ऐसे में माना जा रहा है कि कमलनाथ ने अब फैसला ले लिया है।

कमलनाथ को कभी इंदिरा गाँधी का तीसरा बेटा तक कहा जाता था। वो हमेशा पार्टी के लिए खड़े रहे। जब पार्टी के बहुत बड़े नेताओं ने भी साथ छोड़ दिया, तब भी उन्होंने कॉन्ग्रेस को संभाले रखा। लेकिन इस समय जो चर्चाएँ चल रही हैं, वो ये बता रही हैं कि कमलनाथ अब आगे का रास्ता कॉन्ग्रेस के बगैर ही तय करने वाले हैं।

बता दें कि सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके सांसद बेटे नकुलनाथ भी कॉन्ग्रेस छोड़ सकते हैं। दोनों ही इन दिनों दिल्ली में हैं। बताया जा रहा है कि वो बीजेपी आलाकमान के संपर्क में है। जल्द ही इस बात की घोषणा की जा सकती है। नकुलनाथ अभी छिंदवाड़ा से लोकसभा सांसद हैं। ये सीट कमलनाथ की पारंपरिक सीट मानी जाती है। वो दशकों तक इस सीट से लोकसभा चुनाव जीतते आए हैं, उनके बाद उनके बेटे नकुलनाथ ने विरासत को थाम रखा है।

कॉन्ग्रेस के कई विधायक भी छोड़ सकते हैं पार्टी

कमलनाथ-नकुलनाथ एपिसोड के साथ ही एक बार फिर से मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस में टूट हो सकती है। कॉन्ग्रेस के कई विधायक कमलनाथ के साथ ही पार्टी बदल सकते हैं। रिपोर्ट की मानें, तो कमलनाथ के साथ ही सुनील उईके (जुन्नारदेव), सोहन वाल्मीकि (परासिया), विजय चौरे (सौंसर), निलेश उईके (पांढुर्णा), सुजीत चौधरी (चौरई), कमलेश शाह (अमरवाड़ा), दिनेश गुर्जर (मुरैना), संजय उईके (बैहर), मधु भगत (परसवाड़ा) और विवेक पटेल (वारासिवनी) जैसे विधायक कॉन्ग्रेस छोड़ सकते हैं। वहीं, कमलनाथ समर्थक मुरैना और छिंदवाड़ा के महापौर भी कॉन्ग्रेस छोड़ सकते हैं।

कमलनाथ के समर्थक पूर्व मंत्री ने लिखा ‘जय श्री राम’, पटवारी खेमे में खामोशी

कमलनाथ के समर्थक पूर्व सांसद और मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे सज्जन सिंह वर्मा ने एक्स पर जय श्री राम पोस्ट किया। कमलनाथ-नकुलनाथ की बीजेपी के शीर्ष नेताओं से मुलाकात के समय ये पोस्ट बहुत कुछ कह रही है। उन्होंने इस बात का ऐलान कर दिया है कि जहाँ भी कमलनाथ होंगे, वहाँ वो खड़े मिलेंगे।

ब्रांडेड परफ्यूम, महँगी घड़ियाँ, विदेशी पैसे… हल्द्वानी के दंगाई अब्दुल मलिक के घर से 6 ट्रकों में सामान भर कर ले गई पुलिस, घर में जिम भी बना रखा था

उत्तरखंड के हल्द्वानी में 8 फरवरी 2024 को हुई हिंसा के मुख्य आरोपित अब्दुल मलिक के घर की पुलिस ने कुर्की की है। इस कार्रवाई की जद में उसके फरार चल रहे बेटे मोईद का भी मकान आया। शनिवार (17 फरवरी, 2024) को हुई कुर्की के बाद दोनों के घरों से लगभग 6 ट्रकों में सामान जब्त हुआ है। जब्त हुए सामानों को अर्धसैनिक बलों की निगरानी में रखा गया है। प्रशासन हिंसा में शामिल अन्य फरार आरोपितों के घर की भी कुर्की की तैयारियों में जुटा हुआ है।

हल्द्वानी प्रशासन के मुताबिक कुर्की की कार्रवाई शुक्रवार (16 फरवरी 2024) से शुरू हुई थी। हालाँकि, ये एक दिन बाद शनिवार को जा कर पूरी हुई। इस मौके पर सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त थे। बताया जा रहा है कि 13 घंटे तक चली इस कार्रवाई में अब्दुल मलिक और उसके बेटे मोईद के घर का चप्पा-चप्पा छाना गया। इस दौरान दरवाजे के पास रखे गए डोरमैट, गीजर, सीलिंग फैन आदि तक जब्त किए गए। दंगा आरोपित बाप-बेटे के घर से जब्त सामान लगभग 6 ट्रकों में आए। इनको पैरामिलिट्री की अभिरक्षा में रखा गया है।

बरामद हुए सामान की कीमत करोड़ों में बताई जा रही है। इनमें से विदेशी घड़ियाँ, महंगे परफ्यूम, कीमती फर्नीचर के अलावा क्रॉकरी और गाड़ियाँ शामिल हैं। हिंदुस्तान ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया है कि कुर्की में अब्दुल मलिक के घर से विदेशी मुद्राएँ भी मिली हैं। ये मुद्राएँ बांग्लादेश, नेपाल और सऊदी अरब की बताई जा रही हैं। मलिक और उसके बेटे ने घर में कसरत के लिए जिम भी बना रखा था। इस जिम में मौजूद तमाम सामान भी पुलिस ने जब्त कर लिया है।

इसी दिन शनिवार को ही पुलिस ने हिंसा में शामिल फरार चल रहे वसीम, रईस और तस्लीम के घरों की भी कुर्की की है। अब पुलिस नीलामी योग्य सामानों की भी लिस्ट बना रही है। साथ ही इस बरामदगी की सूची अदालत में भी जमा की जाएगी। पुलिस जब्त की गई सम्पत्तियों की अनुमानित वैल्यू पता करने में भी जुटी हुई है। वहीं दूसरी तरफ पुलिस CCTV फुटेज के आधार पर अन्य दंगाइयों को चिन्हित करने में जुटी हुई है।

तमिलनाडु वक्फ बोर्ड का चेयरमैन अब्दुल रहमान करता है पैसों की हेराफेरी, विदेश से लाता है फंडिंग: ED की कार्रवाई के लिए पत्र

तमिलनाडु वक्फ बोर्ड के चेयरमैन अब्दुल रहमान पर गंभीर आरोप लगे हैं। उन पर अपने पद के दुरुपयोग करने और संदिग्ध गतिविधियों के भी आरोप लगे हैं। राज्य के सूफी इस्लामिक बोर्ड ने केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण और केंद्रीय की जाँच एजेंडी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को पत्र लिखकर जाँच की माँग की है। तमिलनाडु वक्फ बोर्ड के चेयरमैन पर आरोप हैं कि वो बिना किसी एनओसी के विदेश जाते हैं और विदेशी पैसों की भी हेर फेर करते हैं। सूफी इस्लामिक बोर्ड ने उनके खिलाफ चल रहे कई गंभीर एफआईआर का भी जिक्र किया है।

सूफी इस्लामिक बोर्ड ने आरोप लगाया है कि चेयरमैन की अगुवाई में ‘संदिग्ध काम’ हो रहे हैं। बोर्ड ने उनपर एक मेडिकल कॉलेज के निर्माण में अपने पद के दुरुपयोग के आरोप लगाए हैं। सूफी इस्लामिक बोर्ड ने अपनी शिकायत में कहा है, “साल 2022 की शुरुआत से इस बारे में जानकारी सार्वजनिक है कि अब्दुल रहमान की अगुवाई में तिरुची के वेप्पुर में एक मेडिकल कॉलेज और अस्पताल के निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। अब्दुल रहमान इस मेडिकल कॉलेज के नाम फंड (पैसा) लाने के लिए अपने सार्वजनिक पद का दुरुपयोग कर रहे हैं।”

इस्लामिक सूफी बोर्ड ने आरोप लगाए हैं कि ये ‘उगाही’ के पैसे हैं, जो करीब 300 करोड़ हैं। इसके लिए रहमान ने राज्य में कई जगहों पर बैठकें की। शिकायत में कहा गया है कि रहमान ने विदेशों से भी पैसे इकट्ठे किए हैं। शिकायत में बताया गया है कि “अब्दुल रहमान को पता है कि उसे ‘चंदा उगाही’ के लिए विदेश जाने के लिए जरूरी एनओसी नहीं मिलेगा, ऐसे में उसने 27 अक्टूबर 2022 को सऊदी अरबा में उमरा की योजना बनाई। उमरा के नाम पर ही उसने 22-11-2022 को एनओसी प्राप्त किया, जो सरकार के प्रमुख सचिव ने दी। लेकिन वो इस यात्रा पर फंड पाने के लिए काम करता रहा।”

ऐसे किया रहमान ने खेल

सूफी इस्लामिक बोर्ड ने बताया, “अब्दुल रहमान को उमराह के लिए सिर्फ मक्का और मदीना की यात्रा की इजाजत थी, इसके बावजूद वो 3 दिसंबर 2022 को यूएई गया। इसके बाद इसने सऊदी अरब की राजधानी जेद्दा की यात्रा की। उसने 14 दिसंबर 2022 को जेड्डा में प्रपोज्ड मेडिकल कॉलेज के लिए फंडिंग माँगी। इस बारे में सोशल मीडिया पर खूब प्रचार किया गया, ये कहकर कि मेडिकल कॉलेज के लिए बैठक आयोजित की गई। इन पोस्ट में बताया गया कि काफी काम हो चुका है। अब्दुल रहमान का ये काम साफ करता है कि उसने उमरा के लिए मिली एनओसी का गलत इस्तेमाल किया और फर्जी तरीके से वो फंडिंग बटोरने का काम कर रहा था।”

सूफी इस्लामिक बोर्ड ने आरोप लगाए कि अब्दुल रहमान ने सिर्फ मक्का के लिए मिली यात्रा अनुमति को तोड़ा और उसने जेद्दा और यूएई की भी यात्रा की। अब्दुल रहमान पर तिरंगे के अपमान का भी आरोप है। उसके खिलाफ 339/2022 एफआईआर भी दर्ज है। जो चेन्नई के नॉर्थ बीच पुलिस स्टेशन में दर्ज है। ऐसा व्यक्ति, जो देश के तिरंगे का अपमान करता हो, वो विदेशों में भारत का क्या सम्मान बढ़ाएगा? बोर्ड ने अब्दुल रहमान के खिलाफ एनओसी के उल्लंघन और 420 यानी धोखाधड़ी का मुकदमा चलाने की भी माँग की। बता दें कि सितंबर 2022 में भी अब्दुल रहमान के खिलाफ तिरंगे के अपमान के मामले में केस दर्ज हुआ था। ये शिकायत अजमल खान ने दर्ज कराई थी।

इस्लामिक बोर्ड ने बताया है कि अब्दुल रहमान सार्वजनिक पद पर रहते हुए विदेशी मदद भी नहीं ले सकता है। इसके अलावा उस पर फेमा के उल्लंघन का भी मामला बनता है। सूफी बोर्ड का आरोप है कि अब्दुल रहमान राजनीतिक पार्टियों के लिए पैसों की दलाली का भी काम करता है। वो लायजनिंग करता है, ताकि राजनीतिक पार्टियों को काला धन मिले और वो उसे सफेद करा दे। उसके लिए वो ‘कायदे मिल्लत तमिल पेरावई’ नाम के एनजीओ को चलाया है। उसके मलेशिया व साउथ-ईस्ट के कई देशों में अच्छे कॉन्टैक्ट्स हैं।

मूल रूप से ये समाचार अंग्रेजी में प्रकाशित की गई है। मूल समाचार को पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

‘गरीब हर वर्ग में, फिर लाभ एक ही तबके को क्यों?’ EWS आरक्षण के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका, केंद्र सरकार से 6 हफ़्तों में माँगा जवाब

सामान्य वर्ग को मिलने वाले EWS आरक्षण मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में इस रिजर्वेशन को असंवैधानिक बताया गया है। इस याचिका में कहा गया है कि अगर गरीब हर वर्ग में हैं तो इसका लाभ केवल सामान्य तबके को ही क्यों मिल रहा है। इस याचिका पर हाईकोर्ट की जबलपुर बेंच ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। नोटिस में केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए 6 सप्ताह का समय दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह याचिका ‘एडवोकेट यूनियन फॉर डेमोक्रेसी एन्ड सोशल जस्टिस’ नामक संस्था की तरफ से दायर की गई है। याचिका में सिर्फ सामान्य वर्ग को EWS का लाभ देना अनुचित बताया गया है। याचिका दायर करने वालों की तरफ से एडवोकेट रामेश्वर पी सिंह और विनायक शाह पेश हुए हैं। इन्होने बताया कि 17 जनवरी 2019 को भारत सरकार द्वारा आरक्षण का EWS कोटा लागू करना संवैधानिकता को चुनौती जैसा है। दोनों वकीलों ने ईडब्ल्यूएस पॉलिसी को संविधान के अनुच्छेद 15 (6), 16 (6) के तहत असंगत बताया है।

याचिकाकर्ताओं ने इसके अलावा कई अन्य तर्क पेश किए हैं। इसमें ओबीसी, एससी-एसटी को इस लाभ से वंचित किया जाना अनुच्छेद-14 के विरुद्ध और EWS कोटा स्पेशल रिजर्वेशन होना बताते हुए इसकी वैधानिकता पर सवाल खड़े किए गए हैं। अधिवक्ताओं ने EWS को गरीबों के साथ भेदभाव करने वाली योजना करार दिया है। इसी के साथ आवेदकों का यह भी दावा है कि 103वे संविधान के संशोधन में प्रत्येक वर्ग के गरीबों को ईडब्ल्यूएस आरक्षण का लाभ दिए जाने का प्रावधान है।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रवि मलिमथ और न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की खंडपीठ ने की। प्रारम्भिक तर्कों को सुन कर खंडपीठ ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब देने के लिए छह हफ्ते का समय दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था EWS आरक्षण

बताते चलें कि इस से पहले भी EWS आरक्षण की वैधानिकता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। तब नवंबर 2022 में आए अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने EWS आरक्षण बरकरार रखा था। तब 5 जजों की खंडपीठ ने 3:2 से इस कोटे के समर्थन में फैसला सुनाया था। हालाँकि कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने तब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को जातिवादी करार दिया था।

‘अभी बहुत से निर्णय बाकी हैं,’: BJP अधिवेशन में PM मोदी ने साफ़ किया 2024 का एजेंडा, बोले – मैं सुख-वैभव के लिए जीने वाला व्यक्ति नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (18 फरवरी, 2024) को नई दिल्ली में भाजपा के अधिवेशन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज ने छत्रपति बनने के बाद आराम नहीं किया बल्कि अपना अभियान जारी रखा, इसीलिए तरह वो भी सुख-वैभव के लिए जीने वाले व्यक्ति नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वो भाजपा सरकार का लगातार तीसरा कार्यकाल सत्ता भोग के लिए नहीं माँग रहे। उन्होंने कहा कि अगर वो अपने घर की केवल चिंता करते तो करोड़ों लोगों को घर नहीं मिल पाता।

उन्होंने गरीबों, महिलाओं एवं युवाओं के सपने को अपना संकल्प करार देते हुए कहा कि इसके लिए हम सेवा भाव से दिन-रात एक कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 10 वर्ष में हमने जो प्राप्त किया वो पड़ाव मात्र है और मंजिल तक पहुँचने का विश्वास है, हमें हर भारतीय के जीवन को बदलने के लिए बहुत कुछ हासिल करने के लिए बहुत से निर्णय अभी बाकी हैं। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में जैन मुनि विद्यासागर जी महाराज को श्रद्धापूर्वक और आदरपूर्वक नमन करते हुए श्रद्धाजंलि अर्पित की।

उन्होंने कहा कि हमने हर व्यवस्था को पुरानी सोच से बाहर निकाला, जिन्हें किसी ने नहीं पूछा उन्हें हमने न सिर्फ पूछा बल्कि पूजा है। उन्होंने बताया कि सबसे पिछड़ी जनजातियों को किसी ने नहीं पूछा, हमने उनके लिए योजना बनाई। उन्होंने कारीगरों के लिए बनी विश्वकर्मा योजना और रेहड़ी-पटरी वालों के लिए बने स्वनिधि योजना का भी जिक्र किया। भ्रूण-हत्या की समस्या के खिलाफ सामाजिक चेतना और कड़े कानून का सहारा लेने का जिक्र करते हुए कहा कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का सार्थक परिणाम निकला।

उन्होंने बताया कि वो देश के पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने लाल किले से शौचालय की बात की, 10 करोड़ उज्जवला कनेक्शन दिया, 4 करोड़ घर बनाए गए, 10 करोड़ परिवारों को नल से जल दिया गया। उन्होंने बताया कि 25 करोड़ से अधिक महिलाओं के बैंक खाते खोले गए। उन्होंने बताया कि प्रेग्नेंसी लीव को बढ़ा कर 26 हफ्ते किया गया, श्रम कानूनों में सुधार हुआ, पैरामिलिट्री फ़ोर्स में महिलाओं की भर्ती दोगुने से अधिक हुई।

पीएम मोदी ने कहा, “आने वाले समय में हमारी माताओं-बहनों-बेटियों के लिए अवसर ही अवसर आने वाले हैं। मिशन शक्ति से देश में नारी शक्ति की सुरक्षा और सशक्तिकरण का संपूर्ण इकोसिस्टम बनेगा। 15 हजार महिला SHG को ड्रोन मिलेंगे। अब ड्रोन दीदी खेती में वैज्ञानिकता और आधुनिकता लाएँगी। अब देश में 3 करोड़ महिलाएँ लखपति दीदी बनाई जाएगी। जो काम सदियों से लटके थे, हमने उनका समाधान करने का साहस करके दिखाया है।”

पीएम मोदी ने ध्यान दिलाया कि कैसे अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण करके 5 सदियों का इंतजार खत्म किया गया है। गुजरात के पावागढ़ में 500 साल बाद धर्म ध्वजा फहराई गई है। 7 दशक बाद करतारपुर साहिब राहदारी खोली गई। 7 दशक के इंतजार के बाद देश को आर्टिकल 370 से मुक्ति मिली है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे विपक्ष के दल भले ही योजनाओं को पूरा करना न जानते हों, लेकिन झूठे वादे करने में इनका कोई जवाब नहीं है।

पीएम मोदी ने कहा कि आज एक वायदा करने से ये सारे राजनीतिक दल घबराते हैं, वो वादा है – विकसित भारत का, और ये हमारा वादा है। बकौल पीएम मोदी, सिर्फ और सिर्फ भाजपा और NDA गठबंधन ने ही इसका सपना देखा है और हम 2047 तक भारत को विकसित देश बनाने के लिए काम कर रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि हमारी कैबिनेट में रिकॉर्ड संख्या में पूर्वोत्तर के मंत्री हैं। नागालैंड से पहली बार एक महिला राज्यसभा में सांसद बन गई है। हमे गर्व है कि हमने पहली बार त्रिपुरा के व्यक्ति को मंत्री परिषद में स्थान दिया है। पहली बार हमारी सरकार में अरुणाचल प्रदेश को कैबिनेट मिनिस्टर मिला है।

‘फिर PM बनेंगे मोदी, इसमें शक नहीं’: BJP अधिवेशन में बोले अमित शाह – परिवार के लिए लड़ रहा INDI गठबंधन

दिल्ली में चल रहे भाजपा के दो दिवसीय अधिवेशन के अंतिम दिन रविवार (18 फरवरी 2024) को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। नड्डा ने अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का अभिनंदन करते हुए श्रीराम मंदिर निर्माण पर प्रस्ताव पेश किया। वहीं, अमित शाह ने कॉन्ग्रेस और I.N.D.I गठबंधन के खिलाफ प्रस्ताव किया।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने ‘बीजेपी देश की आशा और विपक्ष की हताशा’ नाम से प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने कहा, “पांडवों और कौरवों की तरह चुनाव से पहले दो खेमे हैं। एक तरफ मोदी जी के नेतृत्व में NDA का गठबंधन है और दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस के नेतृत्व में सारी परिवारवादी पार्टियों का घमंडिया गठबंधन है। ये घमंडिया गठबंधन भ्रष्टाचार, परिवारवाद और तुष्टिकरण की राजनीति का पोषक है।”

अमित शाह ने कहा कि कॉन्ग्रेस ने तुष्टिकरण की राजनीति के कारण राम मंदिर का न्योता ठुकराया। उन्होंने आगे कहा, “एक कहावत है- बड़े मियाँ तो बड़े मियाँ, छोटे मियाँ सुभान अल्लाह। आम आदमी पार्टी आबकारी घोटला, मोहल्ला क्लीनिक घोटाला और कोर्ट से भागता है। छत्तीसगढ़ में महादेव घोटाला हुआ। लालू जी सजायाफ्ता हैं। पूरा इंडी अलायंस भ्रष्टाचार में लिप्त है। अब देश की जनता को तय करना है कि मोदी को मैनडेट देना है या इंडी अलायंस को देना है।”

उन्होंने कहा कि भाजपा और NDA गठबंधन राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत पर चलने वाला गठबंधन है। देश ने तय कर लिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी फिर से देश के पीएम बनेंगे। भारत की दुनिया में बढ़ते कद को लेकर उन्होंने कहा, “दुनिया में कहीं भी जाओगे तो लोग पूछेंगे कि मोदी के भारत से आ रहे हो। मोदी जी देश के गरीबों के लिए काम कर रहे हैं। दूसरी ओर अपने परिवार की चिंता करने वाली पार्टी है।”

अमित शाह ने कहा, “75 वर्ष में इस देश ने 17 लोकसभा चुनाव, 22 सरकारें और 15 प्रधानमंत्री देखे हैं। हर सरकार ने अपने समय में विकास के प्रयास किए। आज मैं बिना किसी संदेह के कह सकता हूँ कि समग्र विकास, हर क्षेत्र का विकास और हर व्यक्ति का विकास केवल नरेंद्र मोदी जी के 10 वर्षों में हुआ है। मोदी जी ने 10 ही साल में ही परिवारवाद, जातिवाद, तुष्टीकरण को खत्म कर दिया।”

परिवारवाद पर निशाना साधते हुए अमित शाह ने कहा, “राजनीति में इंडी गठबंधन का उद्देश्य क्या है? पीएम मोदी का लक्ष्य आत्मनिर्भर भारत है। सोनिया गाँधी का लक्ष्य है राहुल गाँधी को पीएम बनाना है। पवार साहब का लक्ष्य है अपनी बेटी को सीएम बनाना। ममता बनर्जी का लक्ष्य है अपने भतीजे को सीएम बनाना। स्टालिन का लक्ष्य है अपने बेटे को सीएम बनाना।”

क्षेत्रीय दलों के परिवारवाद पर निशाना साधते हुए अमित शाह ने आगे कहा, लालू यादव का लक्ष्य है अपने बेटे को सीएम बनाना। उद्धव ठाकरे का लक्ष्य है अपने बेटे को सीएम बनाना। मुलायम सिंह यादव ने सुनिश्चित किया कि उनका बेटा सीएम बनें। जिनका लक्ष्य अपने परिवार के लिए सत्ता हासिल करना है, क्या वे कभी गरीबों के कल्याण के बारे में सोचेंगे?”

जेपी नड्डा ने कहा कि अयोध्या का भव्य राम मंदिर बनाने का संकल्प ऐसे समय में पूरा हुआ है, जब पीएम मोदी के नेतृत्व में राष्ट्र विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में लगा हुआ है। भव्य राम मंदिर भारत की सांस्कृतिक चेतना का प्रतिबिंब बन गया है। उन्होंने कहा कि गुलामी की अतीत से प्रेरणा लेते हुए भारत खड़ा हो रहा है। पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत की सांस्कृतिक विरासत को संवर्धित किया जा रहा है>

उन्होंने कहा, “भारत की सभ्यता और संस्कृति के कण-कण में प्रभु श्रीराम, माता सीता, रामायण रचे-बसे हुए हैं। हमारा संविधान रामराज्य के आदर्शों से प्रेरित रहा है। भारत के संविधान के मूल प्रति में भी मौलिक अधिकारों के खंड पर भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी का विजय पश्चात अयोध्या लौटने का चित्र बना हुआ है। वह इस बात का प्रमाण है कि मौलिक अधिकारों के प्रेरणास्रोत भगवान श्रीराम ही हैं।”

यशस्वी जायसवाल: सबसे ज्यादा छक्के के साथ डबल सेंचुरी का वर्ल्ड रिकॉर्ड, सबसे कम उम्र में लगातार दूसरे दोहरे शतक की लिस्ट में भी शामिल

भारत-इंग्लैंड के बीच राजकोट टेस्ट में यशस्वी जायसवाल ने डबल सेंकुरी ठोंक दी है। यशस्वी जायसवाल ने सीरीज के दूसरे मैच में भी डबल सेंचुरी ठोंकी थी। उन्होंने नाबाद 214 रनों की पारी खेली। इसके साथ ही कप्तान रोहित शर्मा ने भारत की पारी घोषित कर दी। यशस्वी की दमदार पारी की बदौलत टीम इंडिया ने इंग्लैंड के सामने 557 रनों का लक्ष्य रखा है।

इंग्लैंड के सामने 557 रनों का लक्ष्य

भारतीय टीम ने यशस्वी जायसवाल, शुभमन गिल, कुलदीप यादव और सरफराज खान की दमदार बल्लेबाजी के दम पर दूसरी पारी में 4 विकेट के नुकसान पर 430 रन बनाए और इंग्लैंड के सामने जीत के लिए 557 रनों का लक्ष्य रखा है। भारतीय टीम को पहली पारी में 126 रनों की बढ़त मिली थी। भारतीय पारी की घोषणा के समय यशस्वी जायसवाल 214 रनों पर तो सरफराज खान 68 रन बनाकर मैदान में डटे थे, दोनों नाबाद लौटे। वहीं, शुभमन गिल 91 रन बनाकर रन आउट हो गए थे। कुलदीप यादव ने नाइट वॉचमैन के तौर पर गेंदों का सामना किया और 27 रन बनाए।

यशस्वी-सरफराज का कमाल

यशस्वी जायसवाल और पहला ही टेस्ट मैच खेल रहे सरफराज खान ने महज 26.2 ओवरों में 172 रनों की साझेदारी की। यशस्वी जायसवाल ने 236 गेदों की अपनी पारी में 14 चौके और 12 छक्के लगाए। वहीं, पहली पारी में अर्धशतक लगाकर रन-आउट होने वाले सरफराज खान ने दूसरी पारी में नाबाद 68 रन बनाए। उन्होंने महज 72 गेंदों का सामना करते हुए 3 छक्के और 6 चौके लगाए। इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 94.44 का रहा, तो यशस्वी ने अपनी पूरी पारी में 90 से अधिक का स्ट्राइक रेट बनाए रखा।

रोहित ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने से रोका!

रोहित शर्मा ने जिस समय भारतीय पारी घोषित की, उस समय तक अपनी दोहरी शतकीय पारी में यशस्वी जायसवाल 12 छक्के लगाकर वसीम अकरम के वर्ल्ड रिकॉर्ड की बराबरी कर चुके थे। यशस्वी जायसवाल ये रिकॉर्ड अगली ही गेंद पर तोड़ सकते थे, लेकिन रोहित शर्मा ने पारी घोषित कर दी। वसीम अकरम ने साल 1996 में शेखूपुरा में जिम्बॉब्वे जैसी कमजोर टीम के खिलाफ अपने जीवन का सबसे बड़ा स्कोर बनाया था। उन्होंने 363 गेंदों पर 257 रनों की नाबाद पारी खेली थी। इस दौरान उन्होंने 22 चौके और 12 छक्के लगाए थे। हालाँकि संयुक्त रूप से ये रिकॉर्ड अब यशस्वी के नाम पर भी हो गया है।

तीसरे सबसे छोटे 2 दोहरा शतक बनाने वाले खिलाड़ी

यशस्वी जायसवाल ने महज 7 टेस्ट मैचों की 13 पार्टियों में दो दोहरे शतक बना डाले हैं। उन्होंने अपतक अपने छोटे से करियर में तीन शतक लगाए हैं, जिसमें दो दोहरे शतक हैं। तो उन्होंने 2 अर्धशतकीय पारियाँ भी खेली हैं। इस मैच में दोहरा शतक बनाते समय यशस्वी जायसवाल की उम्र 22 साल 49 दिन की है। ये रिकॉर्ड अब भी विनोद कांबली के नाम है। उन्होंने 21 साल 54 दिनों में ही दो दोहरे शतक ठोंक दिए थे। डॉन ब्रैडमैन ने भी महज 21 साल 318 दिनों में ये कारनामा कर दिया था। दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान ग्रीम स्मिथ चौथे नंबर पर हैं, उन्होंने 22 साल 173 दिनों में दो दोहरे शतक बना डाले थे।

भारत ने छक्कों का बनाया रिकॉर्ड

भारतीय टीम ने महज तीसरे ही टेस्ट मैच में अब तक 48 छक्के ठोंक डाले हैं। ये किसी भी टीम के लिए अब तक किसी भी सीरीज में सबसे ज्यादा छक्कों का विश्व रिकॉर्ड है। भारत के ही नाम पर इससे पिछला रिकॉर्ड भी था। भारतीय टीम ने साल 2029 में दक्षिण अफ्रीकी टीम के खिलाफ 47 छक्के लगाए थे। यही नहीं, इस मैच में भारतीय टीम ने 28 छक्के लगाए, जो किसी भी टीम के लिए सबसे ज्यादा छक्के हैं। ये रिकॉर्ड भी पहले भारतीय टीम के ही नाम दर्ज था, जिसने साल 2019 में विशाखापट्टनम टेस्ट में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 27 छक्के लगाए थे।

मैच हाईलाइट्स

भारतीय टीम ने टॉस जीता, पहले बल्लेबाजी का फैसला। ध्रुव जुरेल और सरफराज खान को डेब्यू का मौका

भारतीय टीम ने पहली पारी में 445 रन बनाए। इसमें कप्तान रोहित शर्मा ने 131 रनों की शतकीय पारी खेली, तो रविंद्र जडेजा ने 112 रन बनाए। सरफराज खान 62 रन बनाकर आउट हुए, तो ध्रुव जुरेल ने 46 रन बनाए। इंग्लैंड के लिए मार्क वुड ने 4 विकेट लिए।

इंग्लैंड की टीम ने पहली पारी में 319 रन बनाए. बेन डकेट ने 153 रनों की शानदार पारी खेली। उन्होंने महज 151 गेंदों पर ही 153 रन ठोंक दिए। कप्तान बेन स्टोक्स 41 रन बना पाए। मोहम्मज सिराज ने 4 विकेट लिए, तो जडेजा-कुलदीप यादव ने 2-2 विकेट लिए. बुमराह को एक विकेट मिला। भारतीय टीम को पहली पारी के आधार पर 128 रनों की बढ़त मिली।

भारत ने अपनी दूसरी और मैच की तीसरी पारी 4 विकेट के नुकसान पर 430 रनों पर घोषित कर दी है और इंग्लैंड के सामने 557 रनों का लक्ष्य रखा है।