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200 बम बनवाई थी इमराना, मुजफ्फनरगर दंगों और CAA-विरोध में बाँटे ‘अपने लोगों’ को: चाचा-दादा से बम बनाना सीख जावेद करता था मदद

उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फ़ोर्स (UP STF) ने शुक्रवार (16 फरवरी 2024) को मुजफ्फरनगर से जावेद शेख नाम के एक युवक को चार ज़िंदा टाइम बम के साथ पकड़ा। वहीं, पुलिस बम खरीदने वाली महिला इमराना की जोर-शोर से तलाश कर रही है। इस मामले में अब चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। दरअसल, इससे पहले भी इमराना बम बनवा चुकी थी।

इंटेलीजेंस ब्यूरो (IB) और यूपी STF की पूछताछ में जानकारी मिली है कि इमराना ने साल 2013 में मुज्जफरनगर में हुए दंगों के दौरान भी तकरीबन 200 बम ऑर्डर देकर बनवाए थे। इन बमों को उसने दंगों के दौरान बँटवाए थे। उस दंगों के दौरान मुजफ्फरनगर और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी। हालाँकि, कुछ रिपोर्ट में बमों की संख्या 100 से अधिक बताई जा रही है।

एसटीएफ के एएसपी बृजेश सिंह ने बताया कि प्रारंभिक जाँच में पता चला है कि इमराना ने 2013 के मुजफ्फरनगर दंगे और 2020 में नागरिक संशोधन कानून (CAA) के दौरान हुए बवाल में उसने 100 से अधिक बम अपने लोगों को बाँटे थे। उन बमों को बनाने में जावेद की भूमिका तलाशी जा रही है। जावेद के पास बम बनाने के लिए और भी ऑर्डर मिले थे। वह हिंसा और दंगों के लिए भी बम तैयार करता था।

जावेद की गिरफ्तारी के बाद बम बनाने के लिए मिले ऑर्डर की सूची भी एसटीएफ ने हासिल की है। सूची में शामिल लोगों के साथ-साथ जावेद के संपर्क वालों के खिलाफ भी जाँच की जा रही है। जावेद ने पूछताछ में बताया कि इमराना तंत्र क्रिया भी करती है। इमराना शामली जिले की रहने वाली है, लेकिन मुजफ्फरनगर के मुस्लिम बहुल खालापार इलाके में रहती थी। एजेंसी ने उसके घर रेड डाली, लेकिन वह पहले ही फरार हो गई थी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जावेद दिन में फुटपाथ पर ठेली लगाकर टी-शर्ट और लोअर बेचता था और रात में बम बनाता था। पुलिस ने जब उसे गिरफ्तार किया, तब उसके पास से चार टाइम बम, बोतल में अंदर गन पाउडर 999, लोहे की छोटी गोलियाँ, कॉटन और पीओपी आदि भी मिले। इसमें धमाके का टाइम सेट करने के लिए घड़ियाँ भी लगाई गई थीं। बम निरोधक दस्ते को बुलाकर इन बमों को निष्क्रिय करा दिया।

जावेद ने पूछताछ में अधिकारियों को बताया कि इमराना ने उसे बोतल बम बनाने के लिए 50 हजार रुपए देने की बात कही थी। बम तैयार करने के लिए इमराना ने जावेद को 10 हजार रुपए एडवांस में दिए गए थे। बाकी के 40 हजार रुपए बम मिल जाने पर इमराना ने देने का वादा किया था। इन बमों का उपयोग कहाँ होना था, इसके बारे में जानकारी सिर्फ इमराना को ही पता है।

जावेद ने बताया कि उसने बम बनाना मुजफ्फरनगर में ही अपने चाचा और दादा से सीखा है। उसका चाचा मोहम्मद अर्शी मुजफ्फरनगर में पटाखे की दुकान चलाता है। उसने कुछ जानकारी यूट्यूब से इकट्ठा की है। बम बनाने के लिए जावेद ने ग्लुकोज की बोतलें डाक्टरों से हासिल की थी। लोहे की गोलियाँ साइकिल की एक दुकान से लाया था। वहीं, टाइम बम में लगाने के लिए घड़ियों की दुकान से घड़ी खरीदी थी।

जावेद का नेपाल कनेक्शन भी सामने आया है। उसका जन्म और परवरिश नेपाल में ही हुई है। इसके साथ ही उसकी 7वीं तक उसकी शुरुआती शिक्षा भी नेपाल में ही हुई है। वह दो भाई और एक बहन है। सबका जन्म और परवरिश नेपाल में हुई है। उसकी बहन की शादी नेपाल में ही हुई है और भाई अमेरिका के शॉपिंग मॉल में काम करता है।

जावेद शेख ने बताया कि उसके अब्बू उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के ही रहने वाले हैं। उसके पिता और दादा मुजफ्फरनगर में ही रहते हैं। नेपाल को लेकर उसने बताया कि उसके पिता नेपाल घूमने गए थे। वहाँ पर उनकी मुलाकात नीतू नाम की एक महिला से हुई। बाद में दोनों ने शादी कर ली। उसके पिता की मौत हो चुकी है और वह अपनी अम्मी से मिलने के लिए अभी भी नेपाल जाते रहता है।

चेहरे पर नकाब, कार से उतरे… गोली मार 21 कुत्तों की हत्या: तेलंगाना पुलिस कर रही जाँच, 5 घायल भी

तेलंगाना में एक साथ कई कुत्तों को गोली मार दी गई है। इसके कारण 21 कुत्तों की मौत हो गई। 15 फरवरी 2024 को रात 1:30 से 2:30 के बीच हुए इस गोलीकांड में लगभग 5 कुत्ते घायल भी हैं। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस अमानवीय घटना को नकाबपोश लोगों ने अंजाम दिया है।

20 से ज्यादा कुत्तों को गोली मारे जाने का मामला तेलंगाना के महबूब नगर जिले के पोन्नकल (Ponnakal) गाँव से जुड़ा है। जिन लोगों ने इस घटना को होते देखा, उनके अनुसार एक कार में चार लोग आए थे। सभी ने नकाब से अपना चेहरा ढँक रखा था। इन लोगों ने ही कुत्तों पर गोलियाँ चलाईं।

गोली लगने के कारण कई कुत्तों ने वहीं पर दम तोड़ दिया। जबकि कुछ कुत्तों की मौत भागते-भागते हुई। लगभग 5 कुत्तों की किस्मत अच्छी थी, उन्हें गोली तो लगी पर वो जिंदा हैं। घायल कुत्तों का इलाज पशु चिकित्सालय में किया गया।

तेलंगाना पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है। किसने एक साथ इतने सारे कुत्तों पर गोली चलाई, गोली चलाने का मकसद क्या था? अड्डकल पुलिस थाने में इससे संबंधित केस दर्ज किया गया है। जाँच में पशु चिकित्सकों की मदद ली जा रही है। संबंधित मामले में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से भी कुछ खुलासा हो सकता है, जो अभी तक नहीं आई है।

आपको बता दें कि तेलंगाना के विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी ने 15 फरवरी 2024 को ही विधानसभा में सड़क पर आवारा घूमते कुत्तों की समस्या पर बोला था। उनका कहना था कि इन आवारा कुत्तों को काबू में करने के लिए उपाय खोजने होंगे।

‘हॉकी स्टिक, पाइल और डंडों से मारा, गला घोंट कर दी हत्या’: गुजरात में हिन्दू शख्स को घर से खींच कर ले गई 100-200 की भीड़, भाई ने बताया – शव लेने गए तो बरसाए पत्थर

गुजरात के साबरकाँठा में बुधवार (14 फरवरी, 2024) को एक मुस्लिम भीड़ ने एक हिन्दू परिवार पर हमला करके एक व्यक्ति की हत्या कर दी। मुस्लिम भीड़ ने हिन्दू इलाके में घुस कर खूब उत्पात मचाया। मुस्लिम भीड़ ने हिन्दू व्यक्ति को उनके घर से खींच लिया और मार दिया। इस मामले में पुलिस ने 17 लोगों के विरुद्ध FIR दर्ज की है। ऑपइंडिया ने पीड़ित के परिवार से बात करके पूरी घटना के बारे में जानकारी इकट्ठा की है। इससे चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

जिन राजूभाई भोई की मुस्लिम भीड़ ने हत्या की, ऑपइंडिया ने उनके भाई सुभाषभाई से बात की है। सुभाष ने बताया, “हमारे भाई का इस घटना से कोई लेना-देना नहीं था। एक व्यक्ति जो कि हमारे घर के पास ही रहता था और उसका कुछ मुस्लिम लोगों से पैसे को लेकर कुछ विवाद हुआ था। उनका यह विवाद एक सप्ताह पहले हुआ था और 14 फरवरी को इस मामले में मारपीट भी हुई थी। इसके बाद वह घर आकर भी हल्ला-गुल्ला मचाने लगे।”

‘मुस्लिम भीड़ ने मेरे भाई को अँधेरे में खींचा और हत्या कर दी’

मुस्लिम भीड़ द्वारा अपने भाई की हत्या के विषय में सुभाष ने ऑपइंडिया को बताया, “जब वो लोग उस व्यक्ति को पीट रहे थे तो मेरे भाई ने बस इतना कह दिया कि क्या उसे मार दोगे? इस पर भीड़ उस पर हमलावर हो गई और उस पर हॉकी स्टिक, पाइप और डंडों से हमला किया। वह 100-200 लोग थे, वे मेरे भाई को घर से 100 फीट दूर उठा ले गए और वहाँ उसकी बेरहमी से पिटाई की। उसका गला घोंट दिया गया और उसकी पाइप मार कर हत्या कर दी गई।

लाश तक नहीं उठाने दी, पत्थर बरसाए

रिपोर्ट्स में बताया गया है कि राजूभाई कि हत्या के बाद भी मुस्लिम भीड़ का मन नहीं भरा। सुभाष ने बताया कि उन्होंने लाश तक नहीं उठाने दी और लगातार पत्थर बरसाते रहे। सुभाष ने बताया, “मेरे भाई की मौके पर ही मौत हो गई थी। जब कुछ लोग उसकी लाश उठाने पहुँचे तो वो लोग पत्थर बरसा रहे थे। वहाँ पत्थरों की बरसात हो रही थी जिससे कोई भी लाश के पास ना पहुँच सके। इसके बाद एक भाई हिम्मत करके वहाँ पहुँचा और देखा कि राजूभाई की लाश वहाँ पड़ी है।”

“ज्यादातर हिन्दू यहाँ से भाग गए, हमें भी भगाना चाहते हैं”

सुभाष ने बताया कि आसपास की अधिकांश जनसंख्या मुस्लिम है। पहले यहाँ मोदी और शाह जाति के कुछ लोग रहते थे लेकिन इन मुस्लिमों की प्रताड़ना की वजह से वह यहाँ से पलायन कर गए। यहाँ केवल भोई समाज के घर हैं जिन्हें अब तंग किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम लोग हिन्दुओं के लड़कों को सड़क पर पीटते हैं। उन्होंने बताया कि इस तरह की प्रताड़ना देकर मुस्लिम यहाँ से भगाना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि यहाँ कि स्थिति बहुत खराब है।

सुभाष ने ऑपइंडिया को बताया कि हत्या के 3 दिनों के बाद भी मात्र 4 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। बाकी फरार हैं। उन्होंने सरकार से न्याय की माँग की है। पुलिस ने ऑपइंडिया को बताया है कि इस मामले में पाँच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और बाकी की तलाश जारी है। सुभाष ने बताया है कि इस घटना के बाद बृहस्पतिवार को भी मुस्लिमों ने पत्थर बरसाए। अभी यहाँ पर माहौल को शांत करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसबल तैनात है।

हिन्दू संगठनों ने दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम

यहाँ राजूभाई की हत्या के बाद एक तरफ जहाँ स्थानीय हिन्दू गुस्से में हैं, वहीं दूसरी तरफ हिन्दू संगठन भी पीड़ित परिवार के साथ खड़े हैं। ‘विश्व हिंदू परिषद’ (VHP) के नेता हितेंद्रसिंह राजपूत ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा, “हमने पीड़ित परिवार से मिलकर उनका दुःख बाँटने का प्रयास किया है। उनके परिवार को न्याय दिलाने के लिए हम उनके साथ हैं। हमने पुलिस-प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। अगर आरोपितों को गिरफ्तार नहीं किया गया तो ‘विश्व हिंदू परिषद’ और ‘बजरंग दल’ सहित सड़कों पर उतरेंगे और न्याय के लिए संघर्ष करेंगे।” उन्होंने पुलिस प्रशासन के विरुद्ध अपनी नाराजगी भी जाहिर की है।

उन्होंने कहा है कि जिस इलाके में घटना हुई, वहाँ की जनसांख्यिकी भी चिंता का विषय है। उनका कहना है कि हिंदू यहाँ से पलायन कर रहे हैं, ऐसे में अशांत क्षेत्र धारा लागू करने की माँग जोर पकड़ रही है। उन्होंने यहाँ अशांत क्षेत्र धारा लागू करने की माँग की। उन्होंने इसके लिए भविष्य में आन्दोलन की चेतावनी भी दी है।

क्या था पूरा मामला?

बुधवार रात करीब 10 बजे साबरकाँठा जिले के अंतर्गत आने वाले प्रांतिज के खोडियार कुवा मोटामाध इलाके में लाठी, लोहे के रॉड और पत्थर से लैस 30 गुंडों की मुस्लिम भीड़ ने एक हिंदू परिवार पर हमला कर राजू भोई की हत्या कर दी। इसके पीछे आपसी लेनदेन का मामला बताया बताया गया था। पुलिस ने 30 लोगों के खिलाफ हत्या समेत अन्य कई मामलों में FIR दर्ज की है।

FIR में अयाज कुरैशी, मुनाफ कुरैशी, अयूब कुरैशी, राशिद मियाँ, इमरान मियाँ कुरैशी, मकबूल मियाँ कुरैशी, जानी कमरूद्दीन, रईस मियाँ, मेहबूब खान, मालेक, समीर, मनन हारुन, निसार भाई, रफीक भट्टे, निसार मियाँ, बाबू अकबर, यूनुस मियाँ और फिरोज मियाँ की पहचान हमलावरों के रूप में हुई है।

हिंदू विरोधी हिंसा में नाम, ISI से जिसका लिंक… उसे ममता बनर्जी ने बनाया राज्य सभा सांसद: संदेशखाली पर TMC जो कर रही, वही उसका DNA

संदेशखाली में हिंदू महिलाओं की आपबीती सुन देश सन्न है। लेकिन बंगाल मुख्यमंत्री और तृणमूल कॉन्ग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी अपने पार्टी नेताओं से सवाल तक नहीं कर रहीं। उलटा वह उन्हें क्लीनचिट दे रही हैं और इसके लिए भाजपा-आरएसएस को जिम्मेदार बता रही हैं। उन्होंने संदेशखाली को आरएसएस बंकर कहा है। साथ ही अपने नेता शाहजहाँ शेख का बचाव करते हुए ये कहा कि जमीन हड़पने और यौन उत्पीड़न के जो इल्जाम सामने आए हैं वो महिलाओं ने दबाव में दिए।

ऐसा पहली बार नहीं है कि तृणमूल कॉन्ग्रेस की सुप्रीमो किसी ऐसे शख्स का बचाव कर रही हों जिसपर हिंदू विरोधी घटनाओं में शामिल होने का इल्जाम हो। बीते समय में भी वह कई हिंदू विरोधी नेताओं का पक्ष ले चुकी हैं। इसके अलावा एक बार तो उन्होंने पाकिस्तान के जन्मे हिंदू विरोधी नेता को राज्यसभा तक पहुँचा दिया था। उस नेता का नाम अहमद हसन इमरान था।

आतंकी संगठनों से लिंक से लेकर हिंदू विरोधी हिंसा में था अहमद हसन का नाम

अहमद हसन इमरान का जन्म कथित तौर पर पूर्वी पाकिस्तान के सिलहट के श्रीहट्टा के एक गाँव में हुआ था और वह बांग्लादेश के बनने से पहले 1970-71 में पूर्वी पाकिस्तान से भारत में आया था। इमरान ने पश्चिम बंगाल में ‘कलाम’ नाम की एक बंगाली पत्रिका में कार्यकारी संपादक के रूप में काम किया।

हालाँकि, बाद में उसने पत्रिका को शारदा समूह के प्रमुख सुदीप्त सेन को बेच दिया। इसके अलावा इमरान ने बांग्लादेशी दैनिक नया दिगंता के लिए भारत संवाददाता के रूप में भी काम किया था। आज नया दिगंता जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश का मुखपत्र है

अहमद हसन इमरान के बारे में खुफिया एजेंसियों की जाँच कहती हैं कि उसके पाकिस्तान की ISI से संबंध थे। वह अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में (अब) प्रतिबंधित इस्लामी आतंकवादी संगठन स्टूडेंट्स इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) का संस्थापक सदस्य भी था। इसके अलावा उसने जमात-ए-इस्लामी (पहले जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश, जेएमबी के नाम से जाना जाता था), जमात-उल-मुजाहिदीन और अन्य इस्लामी आतंकवादी संगठनों के लिए भी काम किया।

खुफिया रिपोर्ट में ये भी बताया गया कि अहमद हसन इमरान 1977 के बाद नियमित रूप से बांग्लादेश जाता था और जेएमबी आतंकवादियों से मिलता था। 2001 में, अहमद हसन इमरान ने हावड़ा में इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक (आईडीबी) द्वारा आयोजित इस्लामिक दर्शन पर एक सेमिनार में भाग लिया था। यहाँ जेएमबी आतंकी गुलाम आजम के बेटे ने कहा था कि इस्लाम एक राष्ट्र से बड़ा है। इस सेमिनार से एक साल पहले इमरान की पत्रिका ‘कलाम’ की ओर से भी एक सेमिनार आयोजित किया था जिसमें जमात के आतंकवादी अबुल कासेम अली और अबू जाफर ने भाग लिया था।

नलियाखाली गाँव में हिंदू विरोधी हिंसा कराने वाला था अहमद हसन इमरान

13 फरवरी 2013 को मौलवी रोहुल कुद्दुस की कथित हत्या को लेकर कट्टरपंथी इस्लामी भीड़ ने नलियाखाली गाँव के हिंदुओं पर कहर बरपाया था। उस हिंदू विरोधी हिंसा का मुख्य साजिशकर्ता भी अहमद हसन इमरान को बताया जाता है। इस हिंसा में नलियाखाली गाँव, जो दक्षिण 24 परगना जिले के कैनिंग पुलिस स्टेशन परिसर के अंतर्गत आता है, वहाँ लगभग 10,000 लोगों की भीड़ ने नलियाखली और पड़ोसी हेरोभंगा, गोपालपुर और गोलाडोगरा गाँवों में 200 घरों को जला दिया था। रिपोर्ट बताती है कि तब ये भीड़ बड़ी संख्या में कोलकाता से ट्रक में भरकर नलियाखली लाई गई थी। भीड़ के हमले में कई पुलिस अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

हिंसा के बाद हिंदुओं के जले घर (तस्वीर साभार: NDTV)

उसी दौरान जयनगर पुलिस स्टेशन के बारुईपुर क्षेत्र में एक दर्जन हिंदू स्वामित्व वाली दुकानों को लूट लिया गया। इसके बाद, कैनिंग, जयनगर, कुलतली और बसंती पुलिस थाना क्षेत्रों के आसपास के क्षेत्रों में भी हिंसा की सूचना मिली थी। बाद में तत्कालीन जिला खुफिया ब्यूरो (डीआईबी) ने जिला पुलिस अधीक्षक को दो पेज की रिपोर्ट भेजी थी। (मामला संख्या: 84, दिनांक 19.02.2013, आईपीसी की धारा 394/302/307/153 ए और शस्त्र अधिनियम की धारा 25/27)।

डीआईबी की रिपोर्ट में कहा गया था कि अहमद हसन इमरान के उकसावे के कारण, विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में मुस्लिम युवा राजाबाजार, मेटियाब्रुज़, मोगराहाट, बसंती और अन्य स्थान पर इकट्ठा हुए थे। रिपोर्ट में ये भी लिखा था- “…अहमद हसन इमरान और रहमान के बीच विवाद है। यदि हम रहमान से मिलें, तो उसकी (अहमद हसन) और अन्य लोगों की गुप्त गतिविधियों के संबंध में अधिक जानकारी और सबूत इकट्ठा करने की पूरी संभावना है, जिनके कारण पूरा माहौल खराब हो रहा है और सांप्रदायिकता फैल रही है।” रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि अहमद हसन विदेशी धन इकट्ठा करता है और चोरी-छिपकर ऐसी हिंसाओं को अंजाम दिलवाता है।

डीआईबी रिपोर्ट (साभार: इंडिया टुडे)

टीएमसी ने अहमद को भेजा राज्यसभा

2013 की हिंसा की घटना पर डीआईबी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि अहमद हसन इमरान मुस्लिम युवाओं को भड़काने और उन्हें बम और अन्य हथियारों के साथ प्रभावित क्षेत्र में भेजने के लिए जिम्मेदार था। लेकिन, बावजूद इस रिपोर्ट के 2014 में मुस्लिम समुदाय का समर्थन हासिल करने के लिए इमरान को तृणमूल कॉन्ग्रेस ने राज्यसभा की सदस्यता से पुरस्कृत किया था।

ऐसे में सोचिए जब तृणमूल कॉन्ग्रेस आतंकवादी समूहों से संबंध रखने के आरोपित और हिंदुओं के खिलाफ हिंसा भड़काने वाले एक पाकिस्तानी नागरिक को राज्यसभा भेज सकती है, तो टीएमसी प्रमुख द्वारा एक अन्य हिंदू विरोधी शाहजहाँ शेख को समर्थन देता देखना कहाँ आश्चर्य की बात है।

शारदा चिट फंड में नाम

दिलचस्प बात यह है कि अहमद हसन इमरान का नाम अन्य आतंकी संबंधों, हिंदुओं के खिलाफ हिंसा भड़काने में शामिल होने के अलावा शारदा चिट फंड घोटाले में भी आया था। 2014 में, टीएमसी सांसद अहमद हसन इमरान से प्रवर्तन निदेशालय ने शारदा समूह के मालिक सुदीप्त सेन के साथ उनके संबंधों पर पूछताछ की थी। ईडी अधिकारियों ने इमरान से सवाल किया था कि वह बंगाली दैनिक कलाम कैसे चला रहे थे।

तुष्टिकरण की राजनीति में जुटी टीएमसी

गौरतलब है कि टीएमसी वर्षों से मुस्लिम समुदाय के तुष्टीकरण की राजनीति में लगी हुई है। आज संदेशखाली मामले में पीड़िताओं का दावा है कि इलाके की विवाहित हिंदू महिलाओं को उनकी उम्र और सुंदरता के आधार पर उठाया जाता है और टीएमसी के लोग ‘संतुष्ट’ होने तक उनका रात-दिन उनका उत्पीड़न करते हैं, लेकिन ममता बनर्जी इन आरोपों को भाजपा-आरएसएस की साजिश कहकर खारिज कर रही हैं। जो कि बिलकुल हैरान करने वाला नहीं है।

आखिरकार जब टीएमसी अहमद हसन इमरान जैसे किसी व्यक्ति का समर्थन कर सकती है, तो यह आश्चर्य की बात नहीं होगी अगर पार्टी शाहजहाँ शेख को राज्यसभा के लिए नामांकित करती है और उनके कामों पर पर्दा डालती है।

केजरीवाल का बहाना नंबर #6: न अदालत पहुँचे, न ED को दिया अभी तक समय – विधानसभा में विश्वासमत का खेला खेल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल एक बार फिर शराब घोटाले में पूछताछ के कन्नी काटते नजर आए। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बार-बार समन देने के बाद भी पूछताछ के लिए हाजिर नहीं होने पर सीएम केजरीवाल के खिलाफ दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई है। वहीं, कोर्ट ने सीएम केजरीवाल को 17 फरवरी 2024 को कोर्ट में हाजिर होने के लिए कहा था।

अरविंद केजरीवाल 17 फरवरी 2024 को कोर्ट में भी नहीं पेश हुए। हालाँकि, सुनवाई के दौरान वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट से जुड़े रहे, लेकिन व्यक्तिगत रूप से वे कोर्ट की कार्यवाही में शामिल नहीं हुए। उनके वकील ने वकील ने कोर्ट को बताया कि दिल्ली सरकार के बजट सत्र और विश्वास प्रस्ताव की वजह से वे पेश नहीं हो पा रहे हैं।

केजरीवाल ने कोर्ट से कहा कि, “मैं कोर्ट आना चाहता था, लेकिन बजट और विश्वास प्रस्ताव की वजह से मैं नहीं आ सका। अगली तारीख पर कोर्ट आ जाऊँगा।” इस दौरान ईडी ने इसका विरोध नहीं किया। अब इस मामले में 16 मार्च 2024 को सुनवाई होगी। वहीं, आज दिल्ली विधानसभा में विश्वासमत पर भी चर्चा होने वाली है।

अरविंद केजरीवाल के वकील रमेश गुप्ता ने बताया कि केजरीवाल कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हाजिर हुए थे। अगली तारीख 16 मार्च 2024 की मिली है। इस तारीख पर अगर सब कुछ ठीक रहा तो अरविंद केजरीवाल अदालत में पेश होंगे। बता दें कि अरविंद केजरीवाल के वकील ने व्यक्तिगत पेशी से छूट के लिए अदालत में आवेदन दिया है।

दरअसल, प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा पूछताछ के लिए लगातार बुलाए जाने के बाद बी सीएम केजरीवाल सहयोग नहीं कर रहे थे। इसके बाद ED ने दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट में इसकी शिकायत की थी। कोर्ट ने उन्हें 17 फरवरी को कोर्ट में पेश होने के लिए कहा था। हालाँकि, इस बार भी वे बचते नजर आए और बजट एवं विश्वासमत के नाम पर बच निकले।

ईडी ने शराब घोटाले में पूछताछ के लिए सीएम केजरीवाल को पाँच बार समन भेजा था। प्रवर्तन निदेशालय ने उन्हें पूछताछ के लिए 2 नवंबर 2023 और 21 दिसंबर 2023 के बाद इस साल 3 जनवरी, 18 जनवरी और 2 फरवरी 2024 को पूछताछ के लिए बुलाया था। हालाँकि, वे पूछताछ में शामिल नहीं हुए। इसके बाद भी एजेंसी ने उन्हें छठा समन भेजते हुए 19 फरवरी को पूछताछ के लिए बुलाया है।

दरअसल, ईडी ने नवम्बर 2023 में जब केजरीवाल को समन भेजा गया था तो उन्होंने कहा था कि वह मध्य प्रदेश चुनाव प्रचार के लिए जा रहे हैं। हालाँकि, उनकी पार्टी मध्य प्रदेश में 90% सीट पर अपनी जमानत नहीं बचा पाई थी। इसके बाद दिसम्बर में जब उन्हें जाँच एजेंसी ने बुलाया तो उन्होंने कहा कि वे विपश्यना के लिए पंजाब जा रहे हैं। इसलिए वे नहीं आ सकते।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ईडी द्वारा भेजे गए समन को राजनीतिक साजिश बताते आए हैं। वह यह भी सवाल करते रहे हैं कि एक मुख्यमंत्री को ईडी किस हैसियत से पूछताछ के लिए बुला रही है। अरविंद केजरीवाल कहते रहे हैं कि उन्हें गिरफ्तार करने की साजिश की जा रही है, ताकि वे लोकसभा चुनावों में अपनी पार्टी AAP के लिए चुनाव प्रचार ना कर सकें।

हल्द्वानी हिंसा में पार्षद समेत 2 कॉन्ग्रेस नेता भी वॉन्टेड, सरगना अब्दुल मलिक और बेटे की संपत्ति कुर्क: CM धामी बोले- आग से खेल रहे हैं दंगाई, उनकी पीढ़ियाँ याद रखेंगी

उत्तराखंड के हल्द्वानी में बनभूलपुरा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान मुस्लिम भीड़ द्वारा की गई पत्थरबाजी, हिंसा और आगजनी को लेकर पुलिस अब एक्शन मोड में है। इस हिंसा के सरगना अब्दुल मलिक और उसके बेटे अब्दुल मोईद सहित 9 आरोपितों को वॉन्टेड घोषित करते हुए शहर भर में उनके पोस्टर लगाए गए हैं। प्रशासन ने दोनों बाप-बेटे की संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई शुरू की है। वॉन्टेड की सूची में कॉन्ग्रेस के दो नेता भी शामिल हैं।

दरअसल, नैनीताल पुलिस ने हल्द्वानी हिंसा के मुख्य आरोपित अब्दुल मलिक और उसके बेटे समेत 9 आरोपितों के पोस्टर लगवाए हैं। इसमें कहा गया है कि आरोपितों के कहीं भी दिखने पर पुलिस को सूचित की जाए। इसमें पुलिस के नंबर भी हैं। पुलिस को मलिक के अलावा तस्लीम, वसीम उर्फ़ हप्पा, अयाज अहमद, रईस, अब्दुल मोईद, शकील अंसारी, मौकिन सैफी और जिया उल रहमान की तलाश है।

ये सभी आरोपित फरार हैं और पुलिस को इनकी सरगर्मी से तलाश है। पुलिस ने कहा है कि जो भी इन आरोपितों की सूचना देगा, उनका नाम गुप्त रखा जाएगा। शुक्रवार (16 फरवरी 2024) को शहर में लगाए गए पोस्टर में कॉन्ग्रेस के दो नेता भी हैं। इनमें से एक यूथ कॉन्ग्रेस का विधानसभा अध्यक्ष मौकिन सैफी और निवर्तमान पार्षद शकील अंसारी का भी नाम शामिल है।

हल्द्वानी हिंसा में पुलिस द्वारा लगाए गए वॉन्टेड की पोस्टर (साभार: न्यूज 18)

वहीं, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 15 फरवरी 2024 को हिंसा में वांछित अब्दुल मलिक और उसके बेटे अब्दुल मोईद के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर भी जारी किया है। वहीं, अब्दुल मलिक और उसके बेटे अब्दुल मोईद के बनभूलपुरा स्थित घर की कुर्की की गई। कुर्की के दौरान पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर मौजूद रही। यह कुर्की हिंसा में हुए नुकसान की भरपाई के लिए की जा रही है।

बताते चलें कि कोर्ट ने 14 फरवरी को इन सभी आरोपितों के खिलाफ कुर्की के आदेश दिए थे। कुर्की के लिए नगर निगम ने अब्दुल मलिक के खिलाफ नोटिस जारी कर दिया था। वहीं, कुर्की के दौरान मौके पर हल्द्वानी के एसपी सिटी हरबंस सिंह, सीओ लालकुआं संगीता, हल्द्वानी के तहसीलदार सचिन कुमार, प्रभारी निरीक्षक डीआर वर्मा, नंदन सिंह रावत, थानाध्यक्ष कालाढूंगी समेत अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।

हल्द्वानी हिंसा को लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार (16 फरवरी 2024) को दंगाइयों को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड में अशांति फैलाने वालों पर ऐसी कार्रवाई होगी कि उनकी पीढ़ियाँ याद रखेंगी। उन्होंने हिंसा में घायल लोगों से अस्पताल जाकर मुलाकात भी की।

उन्होंने कहा, “हम देवभूमि में किसी प्रकार की भी हिंसा किसी कीमत पर हम सहन करने वाले नहीं हैं। हम दंगाइयों को नहीं बख्शेंगे। कुछ दिनों में वो खुद ही समझ जाएँगे कि उन्होंने आग से खेलने की कोशिश की है, जो उनको बहुत भारी पड़ेगी।” सीएम धामी न साफ किया कि हल्द्वानी में चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान को रोका नहीं जाएगा।

हल्द्वानी दंगा के मामले में पुलिस अब तक 42 आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। नैनीताल पुलिस ने बताया है कि उसने बृहस्पतिवार (15 फरवरी 2024) को पाँच आरोपितों को गिरफ्तार किया है। जिन आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है, उनके नाम हैं- मोहम्मद इस्तकार उर्फ जब्बा, शरीफ उर्फ पाचा, आदी खान, मोहम्मद आसिफ और हुकुम रजा। इनमें से अधिकांश बनभूलपुरा के ही निवासी हैं।

गौरतलब है कि 8 फरवरी 2024 को हल्द्वानी के बनभूलपुरा में अतिक्रमण हटाने गई पुलिस और नगर निगम की टीम पर कट्टरपंथी मुस्लिमों की दंगाई भीड़ ने हमला कर दिया था। इस दंगे में 6 लोगों की जान चली गई थी। दंगाइयों ने पुलिस को घेर कर उन पर हमला कर दिया था। इस हमले में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी घायल हुए थे।

घटना के दौरान दंगाइयों ने बनभूलपुरा में जमकर उत्पात मचाया था। उन्होंने कई गाड़ियों को आग लगा दी थी। इतना ही नहीं, मुस्लिम दंगाइयों ने हिंदू पत्रकारों एवं मीडिया कर्मियों को भी निशाना बनाया था। ऑपइंडिया ने इस मामले में ग्राउंड से दंगे की भयावहता बताई थी।

सरस्वती माँ की तोड़ी मूर्ति, शोभायात्रा पर पत्थर-लाठी-डंडे… मुस्लिम इलाके और मजहबी स्थलों में ‘भाईचारे’ की मौत: भागलपुर, राँची और दरभंगा में बवाल

सरस्वती पूजा के बाद विसर्जन के दिन बिहार के दरभंगा, भागलपुर और झारखंड के राँची में शोभा यात्रा पर पत्थरबाजी की घटना सामने आई। इस दौरान कुछ जगह माँ की मूर्ति भी क्षतिग्रस्त की गई और दर्जन से ज्यादा लोग भी घायल हुए। बवाल इतना ज्यादा बढ़ा कि प्रशासन को धारा 144 लगानी पड़ी और इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा।

भागलपुर में बिगड़े हालात

भागलपुर में यह पत्थरबाजी की घटना लोदीपुर में शुक्रवार (16 फरवरी 2024) रात हुई। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक शुक्रवार को तहबलपुर मंडल टोला की प्रतिमा लोदीपुर मुस्लिम टोला से गुजरकर मैदान तक जानी थी। लेकिन, मुस्लिम टोले से गुजरते वक्त बीच में ही पथराव होने लगा।

यात्रा में शामिल लोग इधर-उधर भागे। इस दौरान सरस्वती माता की मूर्ति को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। इसे देख जुलूस में शामिल युवक भी गुस्से में आ गए। नतीजतन दो घंटे तक अराजत स्थिति बनी रही। लोदीपुर पुलिस को जब घटना की सूचना मिली तो वो मौके पर पहुँचे। उनके साथ केंद्र की दंगा नियंत्रण बल और अतिरिक्त पुलिस बल को भेज हालातों को नियंत्रण में लिया गया। भारी पुलिस देख पत्थरबाज भी शांत हुए। लेकिन पुलिस वहाँ गश्त करती रही और अपनी मौजूदगी में सरस्वती माता की प्रतिमाओं का विसर्जन कराया।

दरभंगा में थाने के करीब पत्थरबाजी

दरभंगा के बेनीपुरबहेड़ा में भी शुक्रवार की देर शाम सरस्वती माता के विसर्जन जुलूस पर पथराव की घटना सामने आई। यहाँ तो पत्थरबाज इतने बेखौफ थे कि थाना महज 200 गज दूरी पर था फिर भी उन्होंने जुलूस पर जोर-जोर से पत्थर फेंके। इस घटना में डेढ़ दर्जन से ज्यादा लोग घायल हुए।

प्रभात खबर द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, विसर्जन का जुलूस बहेड़ा बाजार से छोटे बाजार जा रहा था। प्रतिमा को तालाब में विसर्जित करने का प्रयास हो रहा था। जुलूस तालाब से कुछ ही दूर था। इसी बीच मजहबी स्थल के पास वाली छतों से कुछ अराजक तत्वों ने पत्थर फेंकने शुरू किए।

देखते ही देखते ही जुलूस की जगह सड़क पर अफरातफरी मच गई। पुलिस ने फौरन घटनास्थल पर पहुँच स्थिति संभालने का प्रयास किया। विभिन्न थाने के अध्यक्ष वहाँ पहुँचे और बड़ी मुश्किल से लोगों को शांत कराया गया। लेकिन तब तक दर्जन से ज्यादा लोग इस घटना में घायल हो गए थे, जिनका इलाज बहेड़ा के पीएचसी में हुआ।

बता दें कि इस घटना से पहले दरभंगा में एक और जगह हिंसा की घटना सामने आई थी। दरभंगा के ही कसाई टोला में गुरुवार (15 फरवरी 2024) को सरस्वती माता के विसर्जन के दौरान हिंदुओं के जुलूस पर हमला हुआ था। घटना में कई लोगों को चोट आई थी और इस्लामिक कट्टरपंथियों ने माँ सरस्वती की मूर्ति भी खंडित कर दी। इस हमले में तेजाब का इस्तेमाल भी हुआ था। जाँच में पता चला कि घटना को अंजाम देने के लिए पहले से वॉट्सएप के जरिए प्लॉनिंग की गई थी।

झारखंड राँची के नगड़ी में सड़क पर बिछे पत्थर ही पत्थर

इसी तरह झारखंड के राँची के नगड़ी के मेन रोड में प्रतिमा विसर्जन के दौरान शुक्रवार की शाम को बवाल हुआ। हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार 16 फरवरी 2024 को 8 बजे यात्रा में शामिल लोग नाच-गाना करते हुए मूर्ति विसर्जन के लिए जा रहे थे। इसी दौरान उनका जुलूस मजहबी स्थल के भी आगे से गुजरा और तभी दोनों पक्षों में विवाद शुरू हुआ।

बात इतनी बढी कि पत्थरबाजी होने लगी। उसके बाद असामाजिक तत्वों ने लाठी-डंडे चलाए और कई राउंड फायरिंग भी की। हालाँकि पुलिस ने बवाल में फायरिंग की बात की पुष्टि नहीं की है। लेकिन ये पता चला है कि इस घटना में भी आधा दर्जन से ज्यादा लोग घायल हुए।

बिगड़ते हालात देखते हुए प्रशासन ने अंचल क्षेत्र में धारा 144 लागू की। वहीं मौके पर पुलिस के आला अधिकारी भी पहुँचे। इसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करनी पड़ी। भीड़ इतनी उग्र थी कि उन्होंने वाहनों तक में तोड़फोड़ की और आते-जाते लोगों को पीटने लगे।

सड़क पर पत्थर ही पत्थर नजर आए। लोग मजहबी स्थल के पास हथियार लेकर जुट गए और नारेबाजी होने लगी। पुलिस ने मौके पर पहुँच इन्हें समझाया और उपद्रवियों को खदेड़ा। इसके बाद हालात संभालने के लिए वहाँ अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया।

मुगल आक्रांताओं के कारण मेरे पूर्वज मुस्लिम बने, मेरी आस्था सनातन में: बिहार की नसीमा खातून बनी मीनाक्षी शर्मा, प्रेमी से रचाया विवाह

बिहार के पुर्णिया की रहने वाली नसीमा खातून नाम ने इस्लाम त्यागकर घर वापसी की और अपने प्रेमी महेश शर्मा से हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार शादी कर ली। नसीमा खातून अब मीनाक्षी शर्मा बन गई है। नसीमा का कहना है कि उसके शौहर ने 6 महीने पहले उसे तीन तलाक दे दिया था। इसके बाद उस पर हलाला का दबाव बनाया जा रहा था। युवती की पहले पति से डेढ़ साल की एक बच्ची भी है।

बिहार के पुर्णिया की रहने वाली नसीमा खातून सोशल मीडिया इंस्टाग्राम के जरिए महेश शर्मा के संपर्क में आई थी। महेश उत्तर प्रदेश के बरेली क्षेत्र के रहने वाले हैं। सोशल मीडिया पर संपर्क के बाद दोनों में धीरे-धीरे बातचीत होने लगी। इसके बाद दोनों के बीच दोस्ती और फिर प्यार हो गया। इसके बाद दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया।

अपने प्रेमी से शादी करने के लिए नसीमा खातून पुर्णिया से बरेली आ गई। यहाँ नसीमा ने 10 जनवरी 2024 को बरेली के जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर घर वापसी का आग्रह किया था। ऑपइंडिया के पास मौजूद इस पत्र में नसीमा ने कहा था कि वह 20 साल की वयस्क है और तलाकशुदा है। वह अपना अच्छा-बुरा सोचने में पूरी तरह तरह सक्षम है। इसलिए उसके आवेदन पर तुरंत कार्रवाई की जाए।

अपने आवेदन में नसीमा ने लिखा है, “मुगल आक्रांताओं के आतंक के कारण मेरे पूर्वज इस्लाम धर्म के अनुयायी बन गए थे, किन्तु मेरा विश्वास और आस्था हिंदू सनातन धर्म में है। मैं हिंदू देवी-देवताओं की पूजा अर्चना करती हूँ। इस्लाम धर्म में महिलाओं का कोई सम्मान नहीं है। तीन तलाक, हलाला जैसी कुप्रथाएँ प्रचलित हैं। मैं स्वेच्छा से घरवापसी कर हिंदू/वैदिक/सनातन धर्म ग्रहण करना चाहती हूँ।”

इसके बाद नसीमा खातून कानूनी तौर पर धर्म परिवर्तन कर लिया। फिर वह बरेली के अगस्त्य मुनि आश्रम पहुँची। वहाँ पंडित केके शंखधार से मुलाकात की पंडित शंखधर ने जरूरी दस्तावेज की जाँच करने बाद वैदिक विधि से उसका सनातन में घर वापसी करवाई। इसके बाद नसीमा से मीनाक्षी बनी युवती का विवाह उसके प्रेमी महेश शर्मा के साथ विवाह संपन्न कराया।

शादी के बाद नसीमा को अब अपने परिजनों का भय सता रहा है। उसने बरेली के एसएसपी को एक चिट्ठी लिखकर सुरक्षा की गुहार लगाई है। ऑपइंडिया के पास मौजूद चिट्ठी में नसीमा ने लिखा है कि सनातन में वापसी और प्रेमी के साथ शादी करने से उसके घर वाले खुश नहीं हैं। नसीमा ने लिखा, “वे मेरी और मेरे पति तथा ससुराल वालों के जान के दुश्मन बन गए हैं और जान से मारने की धमकी दे रहे हैं।”

नसीमा का कहना है कि उसका निकाह आगरा में हुआ था, जिससे उसकी डेढ़ साल की एक बच्ची भी है। उसने बताया कि किसी बात को लेकर 6 महीने पहले उसके शौहर ने तीन तलाक दे दिया। इसके बाद उस पर हलाला के लिए दबाव बनाया जाने लगा था। जब उसने हलाला का विरोध किया तो शौहर और उसके परिजनों ने उसे धक्के मारकर घर से निकाल दिया। इसके बाद मायके में रहने लगी। इसी दौरान वह सोशल मीडिया के माध्यम से बरेली के महेश शर्मा के संपर्क में आई।

बता दें कि दो पहले ही यूपी के बुलंदशहर में शाहिदा नाम की एक मुस्लिम महिला ने घर वापसी के बाद अपने प्रेमी ओम प्रकाश से शादी कर ली थी। घर वापसी के बाद उसने अपना नाम शारदा रख लिया था। शाहिदा अपने शराबी शौहर से पहले ही तलाक ले चुकी थीं। शाहिदा के 2 नाबालिग बेटे भी अब हिन्दू धर्म के अनुसार जीवन बिताएँगे। इस घर वापसी में हिन्दू संगठनों ने शाहिदा की मदद की है।

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने हड़ताल पर 6 महीने के लिए लगाई रोक, उल्लंघन करने वालों की बिना वारंटी की होगी गिरफ्तारी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राज्य में अगले 6 माह के लिए हड़ताल और प्रदर्शन पर रोक लगा दी है। योगी सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अगले छह माह में राज्य में कोई कर्मचारी हड़ताल या प्रदर्शन करता है तो सरकार उससे सख्ती से निपटेगी। ऐसा करने वालों को पुलिस बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है।

दिल्ली तथा हरियाणा एवं पंजाब की सीमा पर चल रहे किसान प्रदर्शन के बीच यह ऐलान अहम माना जा रहा है। राज्य सरकार के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों के लिए एसेंशियल सर्विस मैनेजमेंट एक्ट (ESMA) लागू कर दिया गया है। यह आदेश कार्मिक विभाग ने आज शुक्रवार (16 फरवरी 2024) निकाला है। यह आदेश अगले 6 माह के लिए लागू की गई है।

इस आदेश में कहा गया है कि राज्य सरकार के अंतर्गत काम करने वाला कोई भी कर्मचारी यदि प्रदर्शन या हड़ताल में शामिल होता है और सामान्य गतिविधि को बाधित करता है तो उसे बिना किसी चेतावनी या वारंट के गिरफ्तार कर लिया जाएगा।यह नियम राज्य सरकार के अंतर्गत आने वाले सरकारी विभागों, निगमों और प्राधिकरणों पर लागू होगा।

दरअसल ESMA कानून ऐसी सुविधाओं पर लागू होता है, जो आवश्यक मानी जाती हैं। राज्य सरकार के अंतर्गत काम करने वाले कर्मचारी जब लम्बी हड़ताल या प्रदर्शन पर जाते हैं तो उसे रोकने और सुविधाओं को सामान्य रूप से संचालित करने के लिए सरकार ESMA लगाती है। हालाँकि, एक बार लगाया गया ESMA 6 माह तक ही जारी रह सकता है।

योगी सरकार के इस कदम के पीछे उत्तर प्रदेश में चालू होने जा रही बोर्ड की परीक्षाएँ, आगामी लोकसभा चुनाव और वर्तमान में चल रहा किसान प्रदर्शन माना जा रहा है। इससे पहले योगी सरकार ने ESMA का उपयोग जुलाई 2023 में किया था, तब बिजली कर्मचारी प्रदर्शन कर रहे थे। सरकार ने बिजली आपूर्ति सुचारू करने के ESMA लगाया था।

वहीं, किसान प्रदर्शन का भी असर इस निर्णय पर माना जा रहा है। गौरतलब है कि पंजाब और हरियाणा से बड़ी संख्या में आए किसान प्रदर्शनकारी दिल्ली की तरफ कूच कर चुके हैं। वे हरियाणा पार करके दिल्ली आना चाहते हैं। हालाँकि, अभी अधिकांश किसानों को पंजाब और हरियाणा सीमा पर रोक दिया गया है। पुलिस उन्हें आगे नहीं बढ़ने दे रही है।

किसानों के संगठन दावा कर रहे हैं कि उनके साथ हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान भी हैं। हालाँकि, इस बार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इसका कोई ख़ास असर नहीं देखा जा रहा। उत्तर प्रदेश से किसान प्रदर्शन की कोई बड़ी खबर अभी सामने नहीं आई है और न ही कहीं अराजकता देखने को मिली है।

अवैध संबंधों के बाद ब्लैकमेल करने लगा था सोहेल, दानिश्ता ने परिजनों के साथ मिल हत्या कर टुकड़ों में काटकर फेंका: गाजियाबाद में जावेद ने उस्तरा से बीवी का गला काटा

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद और मेरठ से हत्या की दो घटनाएँ सामने आई हैं। दोनों ही मामलों में वीभत्सता से हत्या की गई है। जहाँ मेरठ में एक युवक की धोखे से हत्या करके उससे टुकड़ों में काटकर फेंक दी गई, वहीं गाजियाबाद में पति ने अपनी ही पत्नी का गला उस्तरे से काट दिया। उसने खुद को और अपनी बेटी को भी घायल कर लिया।

बुलंदशहर से मेरठ बुलाया, फिर कर दी हत्या

मेरठ के लिसाड़ी गेट क्षेत्र में दानिश्ता नाम की एक महिला ने अपने परिजनों के साथ मिलकर बुलंदशहर के रहने वाले सोहेल नाम के युवक की हत्या कर दी। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, दानिश्ता और सोहेल का लम्बे समय से प्रेम प्रसंग चल रहा था। दानिश्ता का पहले ही निकाह हो चुका था। एक बार दोनों फरार भी हो चुके थे। हालाँकि, बाद में वे वापस आ गए।

रिपोर्ट में बताया गया है कि बाद में दोनों के परिवारों में सुलह-समझौता हो गया। बताया गया कि यह सब दानिश्ता के नोएडा में रहते हुए हुआ था। यहाँ सोहेल का परिवार उसका पड़ोसी था। दानिश्ता बाद में मेरठ आ गई थी। अलग होने के कुछ दिनों बाद सोहेल की उससे फिर नजदीकियाँ बढ़ गई थीं। पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि सोहेल दानिश्ता पर निकाह का दबाव बना रहा था।

उससे निकाह नहीं करने पर सोहेल दानिश्ता की अश्लील फोटो और वीडियो वायरल करने की धमकी देता था। इसको लेकर दानिश्ता ने सोहेल की हत्या का प्लान बनाया। दानिश्ता ने पहले उसे बुलंदशहर से फ़ोन करके बुलाया और घर पर नशीली चाय पिलाई। दानिश्ता ने निकाह का झाँसा दिया था। जब सोहेल बेहोश हो गया तो उसकी गला घोंटकर हत्या कर दी।

इसके बाद दानिश्ता ने अपनी बहन रुखसाना और दो भाइयों तथा जीजा फिरोज के साथ मिलकर उसकी लाश के टुकड़े किए और बोरे में भर कर फेंक दिए। बताया जा रहा है कि इस पूरे हत्याकांड की मास्टरमाइंड रुखसाना ही है। पुलिस ने दानिश्ता, रुखसान और उसके जीजा फिरोज को गिरफ्तार कर लिया है, दानिश्ता के जबकि भाइयों की तलाश जारी है।

गाजियाबाद में जावेद ने की पत्नी की हत्या, बेटी को भी किया घायल

वहीं, गाजियाबाद में भी हत्या की एक घटना सामने आई है, जो रूह को कंपाने वाली है। यहाँ लोनी इलाके में रहने वाले जावेद नाम के एक शख्स ने अपनी पत्नी की उस्तरा से गला काटकर हत्या कर दी। इसके बाद उसने अपनी बेटी की भी उस्तरे से काट कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। उसने खुद को भी बुरी तरह घायल कर लिया। जावेद नाई का काम करता है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उसका अपनी बीवी सबरीना से अक्सर लड़ाई-झगड़ा करता था। वह अपनी बीवी पर लगातार शक किया करता था। इससे अजीज आकर उसकी बीवी अपने मायके में रहने लगी। हालाँकि, हत्या से कुछ दिन पहले ही उसने अपनी बीवी को वापस बुलाया था, लेकिन इसी बात को लेकर फिर से झगड़ा होने लगा था।