पश्चिम बंगाल के नॉर्थ 24 परगना स्थित संदेशखाली में जहाँ एक तरफ TMC (तृणमूल कॉन्ग्रेस) के नेता शाहजहाँ शेख के आतंक से त्रस्त महिलाएँ अपना दुःख बयाँ कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ पार्टी इन घटनाओं को लेकर उल्टा पीड़िताओं पर ही सवाल उठाने में लगी है। अब ‘दूरदर्शन न्यूज़’ के एक डिबेट शो में TMC की प्रवक्ता ने इन पीड़िताओं का अपमान कर के न सिर्फ अपनी, बल्कि अपनी पार्टी की भी संवेदनहीनता का परिचय दिया है। इसके बाद पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी की जम कर थू-थू हो रही है।
TMC प्रवक्ता जूही विश्वास इस दौरान पश्चिम बंगाल के संदेशखाली की बात न कर के उत्तर प्रदेश के हाथरस का मुद्दा लेकर आ गईं। उन्होंने सितंबर 2020 में हाथरस में हुई घटना का जिक्र करते हुए कहा कि वहाँ साबित हो गया था कि बलात्कार हुआ है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल से एक वीडियो या एक फुटेज भी सामने नहीं आया है, जिसमें रेप हुआ हो। इस पर एंकर रीमा पराशर ने उन्हें टोकते हुए पूछा कि क्या वो चाहती हैं कि अब रेप के फुटेज सार्वजनिक रूप से सामने आएँ?
इसके बाद जूही विश्वास भाजपा को कोसने लगीं। जूही विश्वास न सिर्फ TMC की महिला विंग की जनरल सेक्रेटरी हैं, बल्कि कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के वार्ड संख्या 81 से पार्षद भी हैं। ‘DD न्यूज़’ के शो ‘5 की पंचायत’ में उन्होंने ये विवादित बयान दिया है। ये काफी हैरान करने वाला है कि बलात्कार के आरोप को साबित करने के लिए सार्वजनिक रूप से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी की महिला नेता ही रेप का वीडियो फुटेज सामने लाने की माँग कर रही हैं।
ध्यान दिलाते चलें कि पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में टीएमसी नेता शिबू हाजरा गिरफ्तार हो गया है। वो संदेशखाली में इतने दिनों से छिपकर अपने ही ठिकाने पर बैठा था। उसे गिरफ्तारी के बाद मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया है। इस बीच, मजिस्ट्रेट के सामने एक पीड़ित महिला ने रेप के मामले में अपना बयान दर्ज कराया, जिसके बाद शिबू हाजरा के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर में रेप की धारा भी जोड़ दी गई है। इन सबके बीच मुख्य आरोपित टीएमसी नेता शेख शाहजहाँ अब भी फरार है। उसे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का करीबी माना जाता है।
पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार ने कहा कि प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) में बलात्कार की धाराएँ जोड़ी गई हैं। उनके मुताबिक, महिला ने पुलिस के सामने रेप का कोई बयान नहीं दिया था, बल्कि उसने आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया। राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस पूरे मामले में संदेशखाली में महिलाओं के साथ एकजुटता दिखाई है और उन्हें न्याय दिलाने का वादा किया है।
राजस्थान के जोधपुर में हिजाब को लेकर सवाल हो गया। सरकारी स्कूल में छात्राएँ हिजाब पहनने को लेकर अड़ गई हैं, तो उनके परिजनों ने जमकर हंगामा किया है। इस प्रदर्शन के दौरान पार्षद मुजफ्फर खलीफा ने शिक्षकों को धमकाया है कि सरकार आज है, कल चली जाएगी, लेकिन शिक्षकों को यहीं रहना है। इस दौरान नगर पालिका की उपाध्यक्ष के पति ने भी प्रदर्शन किया और छात्राओं की हिजाब वाली माँग का समर्थन किया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जोधपुर ग्रामीण जिले के पीपाड़ कस्बे में गवर्नमेंट सीनियर सेकंडरी स्कूल है। यहाँ दस से ज्यादा मुस्लिम लड़कियाँ हिजाब जैसा स्कार्फ पहनकर स्कूल पहुँची। इस पर शिक्षकों ने आपत्ति जताई और छात्राओं को घर भेज दिया। चूँकि स्कूलों में ड्रेस कोड लागू है। सरकार ने भी ड्रेस कोड लागू करने को लेकर सख्ती की बात कही है। ऐसे में स्कूल के प्रिंसिपल ने छात्राओं के अभिभावकों को बुलाकर लाने के लिए उन्हें घर भेज दिया। छात्राओं के साथ उनके अभिभावक वापस स्कूल पहुँचे और जमकर हंगामा किया।
प्रिंसिपल रामकिशोर सांखला ने बताया कि बालिकाएँ अन्य कपड़े से सिर और मुँह ढँककर स्कूल आई थीं, इस पर उन्हें मना किया गया। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा निर्धारित यूनीफॉर्म में ही स्कूल आने की अनुमति है। यदि सिर ढंककर ही आना है तो ड्रेस कोड की चुन्नी का इस्तेमाल किया जा सकता है। हालाँकि परिजनों ने हंगामा जारी रखा।
उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय पार्षद मुजफ्फर खलीफा ने शिक्षकों को धमकी भी दी है। उन्होंने कहा, “पार्षद मुजफ्फर खलीफा और पालिका उपाध्यक्ष के पति ने ड्रेस को लेकर गाइडलाइन के बारे में जानकारी माँगते हुए प्रदर्शन किया। साथ ही धमकाया कि सरकार आज है, कल नहीं रहेगी, लेकिन अध्यापक हमेशा यहीं रहने वाले हैं, जिनको इसका खामियाजा भुगतना ही पड़ेगा। इसके बाद पुलिस से शिकायत की गई। पुलिस ने मामला शांत कराया।”
गौरतलब है कि भजनलाल सरकार में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने एक बयान दिया था, जिसमें कहा था कि सभी सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को निर्धारित ड्रेस में आना होगा। राज्य सरकार में मंत्री किरोड़ीलाल मीणा के साथ ही बीजेपी विधायक बालमुकुंद आचार्य भी हिजाब पर प्रतिबंध की माँग कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा शासित पश्चिम बंगाल में महिलाओं के लिए नरक साबित होता जा रहा है। भाजपा नेता अमित मालवीय के शब्दों में कहें तो ममता बनर्जी का शासन बंगाल की महिलाओं के लिए अभिशाप बन गया है। दरअसल, कुछ दिन पहले 13 साल की एक किशोरी का अपहरण करके उसके साथ क्रूरता की हद पार कर दी गई। उसकी आँखें निकाल ली गईं और दोनों स्तन काट दिए गए। इसके बाद हत्या कर दी गई।
दरअसल, आँखें निकालने और स्तन काटने का आरोप लड़की के परिजनों ने लगाया है। इसी आरोप की बुनियाद पर परिजनों ने कलकत्ता हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कहा कि उसकी बेटी के साथ बेहद अमानवीय कृत्य किया गया है। इसलिए उसके शव की दोबारा जाँच की जाए। हाई कोर्ट के आदेश के बाद बंगाल पुलिस ने शुक्रवार (16 फरवरी 2024) को कब्र में से उसका शव निकाला।
लगभग 20 दिन बाद शव को निकालकर पुलिस ने उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, शव को कब्र से निकालकर पोस्टमार्टम के लिए कोलकाता के SSKM मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल भेजा गया है। दरअसल, इस घटना में पुलिस ने एक नाबालिग लड़के और उसके पिता को गिरफ्तार किया है। परीक्षण के बाद शव को भी दफना दिया गया था।
आरोप था कि किशोरी की रेप और हत्या के बाद आरोपित बाप-बेटे ने पीड़िता के शरीर के अलग-अलग हिस्सों में छेद किया और उसमें एसिड डाल दिया, ताकि शव जल्दी गल जाए। हालाँकि जाँच रिपोर्ट में इन सारी बातों का उल्लेख किया गया था, लेकिन पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ऐसी क्रूरताओं का कोई उल्लेख नहीं था। पुलिस की जाँच रिपोर्ट, केस डायरी और ऑटोप्सी रिपोर्ट में बातें अलग-अलग थीं।
ये पूरा मामला मुर्शिदाबाद जिले के हरिहरपारा क्षेत्र का है। यहाँ 13 साल की एक किशोरी पाँच दिनों से लापता थी। आखिरकार उसका शव 27 जनवरी 2024 को गाँव के सरसों के खेत में पड़ा मिला। किशोरी का शव क्षत-विक्षत था। उसके गले में फंदा था और दोनों आँखें बाहर की ओर निकली हुई थीं। इसके बाद लड़की के परिजनों ने बाप-बेटे के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।
वहीं, आनंद बाजार पत्रिका की रिपोर्ट में कहा गया है कि लड़की 26 जनवरी की रात करीब 8 बजे निकली थी। उसके बाद वह वापस नहीं लौटी। परिजनों और रिश्तेदारों हर जगह खोजा, लेकिन वह कहीं नहीं मिली। जिस कमरे में लड़की रहती थी, वहाँ एक नोट मिला। इसमें लिखा था, ‘चिंता मत करो।’ इसके बाद अगले दिन किशोरी का शव घर से कुछ दूरी पर स्थित सरसों के खेत में मिला।
मृतका के परिजनों का परिवार का आरोप है कि गाँव का ही एक युवक शादी का झाँसा देकर किशोरी को उसके घर से अगवा कर ले गया। उसके बाद उसकी बेटी के साथ बलात्कार किया गया, उसे शारीरिक यातना दी गई। लड़की के परिजनों ने आरोपित नाबालिग लड़के और उसके पिता का नाम भी पुलिस को बताया।
परिवार का दावा है कि लड़की की आँखें निकाल ली गईं थी और स्तन काट दिए गए थे। लड़की का अपहरण और शारीरिक यातना के बाद क़त्ल किया गया। पुलिस ने उस दौरान शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। हालाँकि, मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर द्वारा की गई ऑटोप्सी रिपोर्ट मृतका के परिजनों द्वारा शिकायत या पुलिस रिपोर्ट से मेल नहीं खाता है।
परिजनों ने इस मामले की गहन जाँच की माँग को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट का खटखटाया। न्यायमूर्ति जय सेनगुप्ता की एकल पीठ ने कहा कि चूँकि पहली पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जाँच रिपोर्ट में अंतर है। इसलिए पीड़िता के शव के दूसरे पोस्टमार्टम की आवश्यकता है। हाई कोर्ट ने पुलिस से इस मामले में केस डायरी भी माँगी है। मामले की अगली सुनवाई 6 मार्च 2024 को होगी।
किशोरी के साथ दरिंदगी को लेकर स्थानीय लोगों में भारी गुस्सा है। वे अपराधियों को कड़ी से कड़ी सजा दिए जाने की माँग कर रहे हैं। तनावपूर्ण हालात को देखते हुए कब्र से शव निकालने के दौरान पुलिस ने सुरक्षा के पर्याप्त बंदोबस्त कर रखे थे। चारों तरफ बाड़ेबंदी भी की थी।
कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को लेकर कल (17 फरवरी 2024) खबर आई थी कि उन्हें श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में महन्त राजेन्द्र तिवारी द्वारा गर्भगृह के दर्शन-पूजन कराए गए। ये खबर सोशल मीडिया और ईटीवी पर खूब चली। अब इस संबंध में श्री काशी विश्वनाथ विशिष्ट क्षेत्र विकास परिषद ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बयान दिया है।
बयान में स्पष्ट कहा गया है कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास द्वारा गर्भ गृह में पूजन-अर्चन के लिए अर्चक नियुक्त हैं तथा नियुक्त अर्चक द्वारा ही मंदिर के गर्भगृह में पूजन-पाठ कराया जाता है। इस बयान में ये भी साफ किया गया है कि श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में महंत नाम का कोई पद है ही नहीं और न ही कोई पद पर नियुक्त है।
— Shri Kashi Vishwanath Temple Trust (@ShriVishwanath) February 17, 2024
न्यास की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में राहुल गाँधी से संबंधित प्रसारण और दावे को पूर्णत: भ्रामक और मिथ्या बताया गया है। साथ ही ये भी कहा गया है कि मंदिर परिसर में राजेंद्र तिवारी द्वारा कोई संकल्प अथवा पूजन नहीं करवाया गया है। न्यास ने मीडिया से अनुरोध करते हुए लिखा, “आप समस्त प्रिंट/इलेक्ट्रॉनिक मीडिया बंधुओं से अनुरोध है कि इस प्रकार की किसी खबर/वीडियो का संज्ञान न्यास के अधिकारिक बयान के बगैर न लें। जिसमें न्यास या मंदिर का उल्लेख किया गया है।”
बता दें कि इस प्रेस विज्ञप्ति को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट की ओर से जारी किया गया है। इससे पहले खबर आई थी कि राहुल गाँधी ने मंदिर के गर्भगृह में षोडशोपचार विधि से पूजा पाठ की और काशी विश्वनाथ के महंत को दिल्ली आने का न्योता दिया।
हालाँकि अब इस खबर की प्रमाणिकता और प्रसारण दोनों पर सवाल उठ रहे हैं कि जब महंत नाम का कोई पद है ही नहीं तो राहुल गाँधी को पूजा किसने कराई और किसके आधार पर ऐसे बयान जारी हुए। न्यास का कहना है कि अगर कोई उनके नाम पर ये करता है तो वो ठग माना जाएगा और वह उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करवा सकते हैं।
ईटीवी पर चलाई गई खबर
ईटीवी की अपडेट रिपोर्ट में भी न्यास के बयान की जानकारी दी गई है जिसमें राजेंद्र तिवारी का भी बयान है। उन्होंने कहा कि प्रशासन तय नहीं करेगा कि कौन मंदिर का महंत है। हम पुस्तकों से महंत हैं और महंती करेंगे। अधिकग्रहण मंदिर का हुआ है परिवार का नहीं।
पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में टीएमसी नेता शिबू हाजरा गिरफ्तार हो गया है। वो संदेशखाली में इतने दिनों से छिपकर अपने ही ठिकाने पर बैठा था। उसे गिरफ्तारी के बाद मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया है। इस बीच, मजिस्ट्रेट के सामने एक पीड़ित महिला ने रेप के मामले में अपना बयान दर्ज कराया, जिसके बाद शिबू हाजरा के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर में रेप की धारा भी जोड़ दी गई है। इन सबके बीच मुख्य आरोपित टीएमसी नेता शेख शाहजहाँ अब भी फरार है। उसे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का करीबी माना जाता है।
शिबू हाजरा टीएमसी का ब्लॉक अध्यक्ष हैं और संदेशखाली महिलाओं द्वारा शुरुआती शिकायतों में दो अन्य उत्तम सरदार और मुख्य आरोपित शेख शाहजहाँ के साथ उसका नाम सामने आया। उसे संदेशखाली में एक ठिकाने से गिरफ्तार किया गया और रविवार को स्थानीय अदालत में पेश किया जाएगा। उस पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की संबंधित धाराओं के तहत बलात्कार और अन्य आरोपों के लिए मामला दर्ज किया गया है। उत्तम सरदार समेत 18 को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न, जमीनों पर कब्जे, लोगों पर हमले के आरोपों में मामला दर्ज किया गया है।
पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार ने कहा कि प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) में बलात्कार की धाराएं जोड़ी गई हैं। उनके मुताबिक, महिला ने पुलिस के सामने रेप का कोई बयान नहीं दिया था, बल्कि उसने आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 164 के तहत मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया।
बता दें कि पश्चिम बंगाल पुलिस ने मीडिया को धमकाते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी थी। पश्चिम बंगाल पुलिस ने 14 फरवरी को रेप के आरोपों को खारिज करते हुए रिपोर्ट लिखने वाले पत्रकारों को धमकाया था।
राज्यपाल ने गृह मंत्रालय को सौंपी रिपोर्ट
इससे पहले, बुधवार (14 फरवरी) को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने संदेशखाली विरोध प्रदर्शन पर गृह मंत्रालय को एक रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में संदेशखाली में “उपद्रवी तत्वों” के साथ मिलीभगत के लिए पश्चिम बंगाल पुलिस को जिम्मेदार ठहराया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्यपाल ने सोमवार को प्रभावित इलाके का दौरा किया और प्रदर्शनकारी महिलाओं से चर्चा की. गवर्नर बोस ने रिपोर्ट में कहा कि स्थानीय लोग टीएमसी नेताओं से जुड़े यौन उत्पीड़न के अपने दावों की जाँच के लिए एक विशेष कार्य बल या एक विशेष जाँच दल यानी एसआईटी बनाने की माँग कर रहे हैं।
संदेशखाली में अत्याचार की इंतिहा
राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) को ग्रामीण महिलाओं ने जो गवाही दी उससे उनमें पसरे भय और व्यवस्थित उत्पीड़न के बारे में पता चला। मालूम चला कि कैसे टीएमसी के सदस्य और पुलिसकर्मी उन्हें परेशान करते हैं। जो महिलाएँ बोलने का प्रयास करती हैं उन्हें फौरन विरोध झेलना पड़ता है। उनके घर के पुरुषों को गिरफ्तार कर लिया जाता है आदि-आदि।
एनसीडब्ल्यू ने बताया कि संदेशखली ग्रामवासियों की ओर से हस्ताक्षरित एक सामूहिक बयान में, गाँव की महिलाओं ने उत्पीड़न, यातना और उनकी गरिमा और अधिकारों के घोर उल्लंघन सहित उनके द्वारा सहन की गई पीड़ाओं का विवरण दिया। इसके अलावा एनसीडब्लू की टीम ने ये भी बताया कि उन्होंने एक महिला की गवाही को कैमरे पर रिकॉर्ड किया था लेकिन बाद में उसे डिलीट करना पड़ा क्योंकि महिला अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हो गई और उनके आगे उसे डिलीट कराने के लिए गिड़गिड़ाने लगी।
आयोग ने कहा कि महिलाओं को मिल रही ऐसी धमकी और सेंसरशिप को देखते हुए तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत है। एनसीडब्ल्यू अध्यक्ष रेखा शर्मा आने वाले दिनों में संदेशखली का दौरा करेंगी और पुलिस व पीड़ितों से बातचीत करेंगी ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि पश्चिम बंगाल में महिलाओं की जिंदगी और स्वतंत्रता की रक्षा की जा सके। एनसीडब्लू ने इस पूरे मामले में संदेशखाली में महिलाओं के साथ एकजुटता दिखाई है और उन्हें न्याय दिलाने का वादा किया है। इससे पहले SC आयोग ने भी इस मामले में जाँच के बाद कहा था कि लोग बहुत कुछ बोलना चाहते हैं पर उन्हें बोलने नहीं दिया जा रहा।
मुजफ्फरनगर में बैठकर टाइम बोतल बम बनाने वाले जावेद की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को जिस इमराना की तलाश थी, वो इमराना यूपी एसटीएफ द्वारा पकड़ ली गई है। शनिवार (17 फरवरी 2024) की शाम को पुलिस ने उसे उसके घर से गिरफ्तार किया और अब उससे पूछताछ जारी है। एसटीएफ के बाद दिल्ली की आईबी की टीम भी इमराना से पूछताछ करेगी।
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, अभी तक की पड़ताल में सामने आया है कि इमराना 15 साल पहले तक भट्टी पर मजदूरी का काम करती थी आज उसके पास कई मकान और प्लाट हैं। साथ ही वो महंगी गाड़ियों में भी घूमती है।
पुलिस एक ओर पता लगा रही है कि उसके पास इतना पैसा कहाँ से आया। वहीं दूसरी ओर ये ज्ञात हुआ है कि उसने बम इसलिए बनवाए थे कि ताकि जब लोकसभा चुनाव से पहले सीएए लागू करने की घोषणा हो, तब वह उन बमों का इस्तेमाल कर सके। बताया जा रहा है कि इमराना ने ऐसा ऑर्डर दिल्ली के किसी शख्स के कहने पर दिया था। ये शख्स कौन है इसके बारे में आगे जानकारी आएगी।
यूपी पुलिस की एसटीएफ इमराना की गिरफ्तारी के बाद अब उसके नेटवर्क के बारे में सूचना जुटा रही है। पता लगाया जा रहा है कि इमराना के पीछे किन संगठनों का हाथ है, उनकी मंशा क्या है। इसके अलावा ये भी मालूम हुआ है कि इमराना और जावेद एक दूसरे के संपर्क में कैसे आए।
दरअसल, पुलिस ने बताया कि इमराना का इलाज 2009 से जावेद के पिता हकीम जरीफ अहमद से चल रहा था। उस समय भी इमराना ने जावेद से 2 बम तैयार करवाए थे। इनमें एक बम का प्रयोग चलाकर किया गया था जबकि दूसरे को काली नदी में फेंक दिया गया था। इस बार भी उसने 10 हजार रुपए देकर उससे बम तैयार करने को कहे थे और बाद में 50 हजार का वादा किया था।
बता दें कि इमराना के पकड़े जाने से पहले खबर आई थी कि इमराना ने साल 2013 में मुज्जफरनगर में हुए दंगों के दौरान भी तकरीबन 200 बम ऑर्डर देकर बनवाए थे। इन बमों को उसने दंगों के दौरान बँटवाए थे। उस दंगों के दौरान मुजफ्फरनगर और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी। हालाँकि, कुछ रिपोर्ट में बमों की संख्या 100 से अधिक बताई जा रही है और कुछ रिपोर्ट अब कह रही हैं कि 50 से अधिक बम बनवाए थे।
लोग उसे इमराना बाबा के नाम से भी जानते थे क्योंकि वो काला जादू वगैरह का काम भी करती थी। जावेद की गिरफ्तारी के बाद से ही एसटीएफ और पुलिस इमराना की तलाश कर रही थी। उसके बारे में पता चला है कि शामली जिले की रहने वाली है, लेकिन मुजफ्फरनगर के मुस्लिम बहुल खालापार इलाके में रहती थी। जावेद की गिरफ्तारी के बाद जब जाँच एजेंसी ने उसके घर रेड मारी थी, तो वो पहले ही फरार हो गई थी।
अब इमराना की बेटी रूकसार ने बताया कि उन्होंने अपनी अम्मी को पुलिस को सौंप दिया है। वहीं पुलिस ने कहा कि बताया कि इमराना से गहनता के साथ पूछताछ की जाएगी। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। जावेद ने इसी इमराना के कहने पर टाइम बोतल बम तैयार किए थे। इन बमों को बनाने के लिए उसने गन पाउडर-999, लोहे की छोटी गोलियाँ, रुई, पीओपी आदि का इस्तेमाल किया। उसने डॉक्टरों से ग्लूकोज की बोतलें और साइकिल की दुकानों से आयरन की गोलियाँ और घड़ी की दुकानों से घड़ी की मशीनें खरीदी थीं।
धर्मांतरण की समस्या से जूझ रहे छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण बिल का ड्राफ्ट तैयार है। इसमें दूसरे धर्म में परिवर्तित होने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को कम-से-कम 60 दिन पहले एक फॉर्म में अपनी व्यक्तिगत जानकारी देते हुए उसे कलेक्टर के पास जमा करेगा। इसके बाद जिला मजिस्ट्रेट पुलिस से धर्मांतरण के वास्तविक इरादे, कारण और उद्देश्य का आकलन करने के लिए कहेगा।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, धर्मांतरण विरोधी ‘छत्तीसगढ़ गैरकानूनी धार्मिक रूपांतरण निषेध विधेयक’ की रूपरेखा है और उसे विधानसभा में जल्दी ही पेश किया जा सकता है। मसौदे में कहा गया है कि धर्मांतरण करने वाले को ही नहीं, बल्कि धर्मांतरण करवाने वाले व्यक्ति को भी एक फॉर्म भरकर जिलाधिकारी के पास जमा करना होगा।
मसौदे में यह भी कहा गया है कि बलपूर्वक, अनुचित प्रभाव डालकर, प्रलोभन देकर या किसी कपटपूर्ण तरीके से या फिर विवाह के द्वारा एक धर्म से दूसरे धर्म में रूपांतरण नहीं किया जा सकता है। अगर इसकी जानकारी जिलाधिकारी को मिलती है तो वह इस धर्मांतरण को अवैध घोषित करेगा। इतना ही नहीं, धर्मांतरण करने वाले हर व्यक्ति का पंजीकरण जिलाधिकारी के पास रहेगा।
बिल में कहा गया है कि धर्मांतरण पर आपत्ति की स्थिति में धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति से रक्त या गोद लेने संबंधी जुड़ा हुआ व्यक्ति इसके खिलाफ FIR दर्ज करा सकता है। यह केस गैर-जमानती होगा और यह सत्र अदालत द्वारा सुनवाई योग्य होगी। कोर्ट धर्म परिवर्तन के पीड़ित को 5 लाख रुपए तक का मुआवजा मंजूर कर सकता है।
नाबालिग, महिलाओं या अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के लोगों का अवैध रूप से धर्म परिवर्तन कराने वालों को कम-से-कम दो साल और अधिकतम 10 साल की जेल हो सकती है। इसके साथ ही उस पर कम-से-कम 25,000 रुपए का जुर्माना भी लगेगा। सामूहिक धर्म परिवर्तन पर कम-से-कम तीन साल और अधिकतम 10 साल की सजा और 50,000 रुपए जुर्माना लगेगा।
इन पूरे मामलों में यह साबित करने का भार कि धर्मांतरण अवैध नहीं था, धर्मांतरण कराने वाले व्यक्ति पर होगा। यह कानून उन लोगों पर लागू नहीं होता जो अपने पिछले धर्म में आने के लिए दोबारा धर्म परिवर्तन करना चाहते हैं। यानी घरवापसी करने वाले लोगों पर यह कानून लागू नहीं होगा।
बताते चलें कि दो दिन पहले ही राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार के मंत्री ने धर्मांतरण विरोधी बिल सदन में लाने की बात कही थी। शिक्षा एवं संस्कृति मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा था कि कई ताकतें छत्तीसगढ़ की डेमोग्राफी बदलने के लिए काम कर रही हैं। वहीं, लगभग 15 दिन पहले मुख्यमंत्री साय ने कहा था कि राज्य में ईसाई मिशनरियाँ स्वास्थ्य एवं शिक्षा की आड़ में धर्मांतरण करवा रही हैं।
दरअसल, छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ समय से बड़े पैमाने पर धर्मांतरण का खेल चल रहा है। शिक्षा और स्वास्थ्य के नाम पर प्रलोभन देकर भोले-भाले जनजातीय समाज के लोगों को गुमराह कर उनका धर्मांतरण किया जा रहा है। हालाँकि, धर्मांतरण कर चुके जनजातीय लोगों को मूल धर्म हिंदू में वापस लाने के लिए जशपुर राजघराने के राजा एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री दिलीप सिंह जूदेव थे बड़े पैमाने पर अभियान चलाया था। अब उस अभियान को उनके बेटे प्रबल प्रताप सिंह जूदेव आगे बढ़ा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी जशपुर से ही आते हैं। वे दिलीप सिंह जूदेव को अपना गुरु मानते हैं। पिछले महीने सीएम साय ने कहा था, “जूदेव जी ने जशपुर में घर वापसी अभियान चलाया, जिससे हमारा जिला सुरक्षित है, अन्यथा एशिया का दूसरा सबसे बड़ा चर्च हमारे जिले में है और धर्मांतरण तेजी से होता। राजा होते हुए भी उन्होंने धर्मांतरित लोगों के पैर धोए और उन्हें हिंदू धर्म में वापस लाया और आज उनका बेटा इस काम को आगे बढ़ा रहे हैं।”
उत्तराखंड के नैनीताल जिले में आने वाले हल्द्वानी कस्बे में 8 फरवरी को हिंसा भड़क गई थी। यह हिंसा तब भड़की थी जब अवैध अतिक्रमण हटाने गए नगर निगम दस्ते और उनके साथ मौजूद पुलिस बल पर एक उन्मादी भीड़ ने हमला कर दिया। हमले की वजह से कई पुलिसकर्मी व नगर निगम स्टाफ चोटिल हो गए थे। इस दौरान पुलिस से हथियार भी छीने गए थे और थाने को आग लगा दी गई थी। इस मामले में पुलिस केस दर्ज कर के लगातार आरोपितों को चिन्हित कर के कार्रवाई में जुटी हुई है। अब तक कुल 58 दंगाइयों को गिरफ्तार किया गया है। इनके पास से पेट्रोल बम और पुलिस से लूटी गई मैगजीन भी बरामद हुई है।
नैनीताल पुलिस द्वारा शनिवार (17 फरवरी, 2024)को ताजा कार्रवाई के संबंध में जानकारी दी गई। पुलिस ने बताया कि 8 फरवरी की हिंसक घटना में थाना वनभूलपुरा में 3 FIR दर्ज की गई है। पुलिस टीमों का गठन कर के आसपास लगे CCTV फुटेज से कई आरोपितों को पहले चिह्नित किया गया और अब उनकी धर-पकड़ चल रही है। इसी कड़ी में अब 14 अन्य दंगाइयों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें से 3 ऐसे भी उपद्रवी हैं जिनके घर की कुर्की तक की जा चुकी है।
ताजा गिरफ्तारियों में बड़ी मस्जिद के पास रहने वाला शकील अन्सारी, शाह जी मस्जिद के पास रहने वाला मौकिन सैफी, सरताज कबाड़ी के पास रहने वाला जियाउल रहमान, ताज मस्जिद के पास रहने वाला शारिक सिद्दिकी, मौहम्मद दानिश, मोहम्मद फैज़ान, सलीम मिकरानी, शहज़ाद, काबी मस्जिद के पास रहने वाला अब्दुल रहमान, मोहम्मद इमरान, हैदर, बड़ी मस्जिद के पास रहने वाला गुड्डू वारसी, जावेद और फहद शामिल हैं। इसमें से अधिकतर नामजद आरोपित हैं जबकि कुछ की पहचान CCTV फुटेज के आधार पर हुई है।
नैनीताल पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए 14 आरोपितों में से शारिक और मौहम्मद दानिश के कब्जे से पुलिस से लूटी गई मैगजीन बरामद की गई है। यह मैगजीन PAC जवान की थी जो हिंसा के दौरान सरकारी रायफल छीनने के प्रयास में लूट ली गई थी। वहीं मोहम्मद फैज़ान पेट्रोल बम फेंकने वाला आरोपित है। पुलिस ने उसके घर से 4 पेट्रोल बम बरामद किए हैं। फैज़ान और शहज़ाद ने ही मुखानी के थाना प्रभारी के सरकारी वाहन में पेट्रोल डाल कर आग लगा दी थी। पुलिस पकड़े गए आरोपितों से पूछताछ कर रही है। इस पूछताछ में दंगे में शामिल इनके अन्य साथियों के नाम भी सामने आ सकते हैं।
हल्द्वानी हिंसा को लगभग 10 दिन पूरे हो चुके हैं। पिछले 10 दिनों में यहाँ मुख्यमंत्री से ले कर देश के तमाम मीडिया संस्थान दौरा कर चुके हैं। लगभग हर स्तर की आधिकारिक जाँच और तमाम मीडिया संस्थानों की ग्राउंड रिपोर्ट में यह बात निर्विवाद रूप से सामने आई है कि वनभूलपुरा में अवैध कब्ज़ा हटाने गए प्रशासन पर एक उन्मादी भीड़ ने जानलेवा हमला किया। इस हमले के न सिर्फ गवाह, परिस्थितिजन्य सबूत बल्कि कई भुक्तभोगी भी अभी हल्द्वानी में मिल जाएँगे। हिंसा के इन भुक्तभोगियों में आम नागरिक भी हैं जिनका किसी विवाद से कोई लेना-देना नहीं था।
ऑपइंडिया की भी ग्राउंड रिपोर्ट में यह बात निकल कर सामने आई थी कि पहले से साजिश रच कर तैयार बैठी हिंसक भीड़ का सामना प्रशासन और शांतिप्रिय आम जनता ने मिल कर किया था। इस बीच जब हालत तेजी से सामान्य होने की दिशा में बढ़ गए थे तब फैक्ट फाइंडिंग के नाम पर दिल्ली के कुछ लोगों की टीम मामले को तूल देने हल्द्वानी पहुँच जाती है। इस टीम ने सबसे पहले पत्थरबाजों, अग्निकांड के आरोपितों, अवैध कब्जेदारों को क्लीन चिट दे दी। इस कथित फैक्ट फाइंडिंग टीम ने अंत में घुमा-फिरा का सारा दोष प्रशासन के सिर मढ़ दिया।
जिले के प्रशासन की मुखिया DM (जिलाधिकारी) वंदना सिंह को पूरे विवाद का दोषी बताया। गलती में उनके साथ नगर निगम के अधिकारी को भी शामिल बताया गया। इस कथित फैक्ट फाइंडिंग टीम का नेतृत्व कथित एक्टिविस्ट नदीम खान कर रहे थे। उन्होंने जिलाधिकारी वंदना सिंह पर कुछ आरोप लगाए। NGO में गड़बड़ी के चलते CBI जाँच का सामना कर रहे हर्ष मंदर भी इस कथित फैक्ट फाइंडिंग टीम में शामिल थे। इन आरोपों में 20 साल पुरानी मस्जिद गिरा देना, किसी से न मिलना, उलेमाओं को विश्वास में न लेना, जाँच पुलिस द्वारा करवाना आदि शामिल हैं। एक मज़हबी उलेमा का तो यहाँ तक दावा है कि किसी भी इमाम तक कोई खबर नहीं पहुँची।
इस कथित फैक्ट फाइंडिंग की रिपोर्ट आने के बाद इसे बाकायदा इस्लामी हैंडलों से सोशल मीडिया पर वायरल करवाया गया। इसको वायरल करने वालों में UP पुलिस द्वारा फर्जी खबर फैलाने के मामले में गिरफ्तार किए जा चुके अली शोहराब और आए दिन हिन्दू धर्म के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट करने वाले कई अन्य X हैंडल भी शामिल हैं। इन सभी ने मिल कर #ArrestVandanaSingh नाम से ट्विटर ट्रेंड भी चलाया। मोदी जी नाम से हैंडल बनाने वाले हुजैफा (@ItxHuzaifa61) ने IAS वंदना सिंह को गंदी गाली दी।
हुजैफा का X हैंडल
वैस आज़मी ने अपने ट्वीट में कोठा, मुजरा और गजरा तक का जिक्र किया।
वैस आज़मी का ट्वीट
कथित फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के अलावा सोशल मीडिया पर IAS वंदना सिंह के खिलाफ आपत्तिजनक शब्द प्रयोग कर रहे एक खास वर्ग के लोगों ने कुछ अन्य आरोप लगाए हैं। इसमें से पुलिस दबिश के नाम पर वनभूलपुरा के मुस्लिमों के साथ कथित अत्याचार प्रमुख हैं।
हल्द्वानी के इमाम ने ही खोल दी फैक्ट फाइंडिंग की पोल
कथित फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट में आरोप है कि नैनीताल की जिलाधिकारी किसी से मिलती नहीं हैं। ऑपइंडिया की ग्राउंड रिपोर्ट में उन्हें न सिर्फ शहर के विभिन्न हिस्सों में पुलिस प्रशासन, पैरामिलिट्री और शहर के तमाम लोगों के साथ मीटिंग करते पाया गया था बल्कि हिंसा प्रभावित वनभूलपुरा में भी वो कई बार जा कर आम लोगों से मुलाक़ात करते दिखीं थीं। इस बीच फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के दावों से उलट जिलाधिकारी वंदना सिंह ने 17 फरवरी 2024 (शनिवार) को हल्द्वानी में हर वर्ग और धर्म से ताल्लुक रखने वाले तमाम संभ्रांत लोगों की मीटिंग बुलवाई। इस मीटिंग में सबने अपने-अपने विचार रखे।
इसी मीटिंग में हल्द्वानी की उमर मस्जिद के इमाम मोहम्मद मुकीम काज़मी भी मौजूद थे। वनभूलपुरा हिंसा पर बेहद अफ़सोस जताते हुए नैनीताल प्रशासन की दिल खोल कर तारीफ की। इमाम काज़मी ने प्रशासन से यह भी अपील की है कि दंगाई भले ही कोई भी हो उसको किसी भी हालत में छोड़ा न जाए। जिलाधिकारी वंदना सिंह को खासतौर पर इमाम ने न सिर्फ दंगों को रोकने में अहम भूमिका निभाने वाली अधिकारी बताया बल्कि उन्होने भविष्य में वनभूलपुरा में बिगड़ रहे युवाओं को सुधारने में भी उनकी मदद माँगी। मस्जिद के इमाम काज़मी ने पुलिस और नगर निगम के कर्मचारियों की भी तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने दंगाइयों के पत्थर सह कर भी धैर्य नहीं खोया जो कि काबिल ए तारीफ है।
इमाम काज़मी ने मीटिंग में मौजूद आम लोगों का भी इस बात के लिए शुक्रिया अदा किया है कि उन्होंने इतनी हिंसक गतिविधियों के बावजूद भी वनभूलपुरा के लोगों को गैर नहीं समझा। साथ ही काज़मी ने यह भी कहा कि हल्द्वानी प्रशासन की लगातार कोशिशों के चलते ही बेहद ही कम समय में अब हालत सामान्य होते जा रहे हैं।
लीज थी खत्म, गरीबों की भलाई के लिए जमीन का होना है प्रयोग
कथित फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने 20 साल पुरानी मस्जिद और कानूनी मदरसा जैसे बातें अपनी रिपोर्ट में बताई हैं। 17 फरवरी को हुई मीटिंग में जिलाधिकारी वंदना सिंह का एक बयान सामने आया है। इस बयान में उन्होंने बताया है कि जिस जगह से अतिक्रमण हटाया गया है वहाँ की लीज खत्म हो गई थी। इस लीज के खत्म होने के बावजूद भी अतिक्रमणकारी उसे छोड़ने के लिए तैयार नहीं हो रहे थे। जिस जगह यह अवैध कब्ज़ा हुआ था वहाँ उत्तराखंड सरकार जनकल्याणकारी योजनाओं को लागू करने की दिशा में प्रयास कर रहा है।
इन योजनाओं में खासतौर से उन गरीबों के बच्चों का ध्यान रखा जाएगा जिनके परिजन कहीं बाहर से कमाने-खाने के मकसद से हल्द्वानी आते हैं। हालाँकि कथित फैक्ट फाइंडिंग कमेटी यह नहीं स्पष्ट कर पाई है कि जमीन पर गरीब बच्चों के लिए आशियाना उचित होता या अरबपति अब्दुल मलिक का अतिक्रमण।
दोषियों के खिलाफ जारी रहेगी कार्रवाई
अपने खिलाफ लगाए जा रहे तमाम भ्रामक आरोपों और हो रही गाली गलौज को अनदेखा कर के जिलाधिकारी नैनीताल वन्दना सिंह ने दोषियों के खिलाफ अपने तेवर सख्त रखे। उन्होंने कहा कि जिले में हर प्रकार के गलत कार्यों में संलिप्त लोगों को चिन्हित किया जा रहा है और जाँच करवा कर उनके खिलाफ जरूरी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
नगर निगम की जिस भूमि की लीज खत्म हो गई है, प्रशासन द्वारा उन्हें कब्ज़ा मुक्त करा के वहाँ जनहित के काम कराने की योजना है। देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले श्रमिकों, उनके परिजनों-बच्चों के लिए भी उस क्षेत्र में काम होंगे।
मुआवजा दंगाइयों को नहीं बल्कि घायल प्रशासनिक स्टाफ को
17 फरवरी को हल्द्वानी में हुई इस मीटिंग में उत्तराखंड अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष मजहर नईम नवाब भी मौजूद थे। उन्होंने भी अपने बयान में जो कुछ भी कहा वो कथित फैक्ट फाइंडिंग कमेटी के रिपोर्ट्स को दरनिकार करने जैसा है। मज़हर नईम ने मुआवजे की माँग दंगाइयों की बजाए उन पुलिस और नगर निगम स्टाफ के लिए उठाई जो कि हिंसा के दौरान पत्थरबाजी की चपेट में आ कर घायल हुए थे। उन्होंने बताया कि इस आशय का पत्र मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को प्रेषित भी किया जा चुका है। मज़हर ने खुद को दंगाइयों नहीं बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों के साथ खड़ा बताया।
पहले भी उड़ाई गईं थीं अफवाहें लेकिन समय रहते हुआ फैक्ट चेक
बतातें चलें कि हल्द्वानी हिंसा के तुरंत बाद मीडिया का एक खास गिरोह अफवाहों को तूल देने लगा था। हिंसा के 48 घंटों के ही भीतर यह गिरोह प्रभावित इलाकों में दूध और अन्य रोजमर्रा की जरूरतों को रोक देने और मुस्लिमों के भूखे-प्यासे होने जैसे भ्रामक खबरें फैलाने लगा था। हालाँकि ग्राउंड जीरो पर मौजूद ऑपइंडिया की टीम ने तब ही सबूतों के साथ यह बताया था कि प्रभावित इलाकों में पुलिस सुरक्षा में प्रशासनिक अधिकारी तमाम जरूरी सामानों की सप्लाई में जुटे हुए थे। हालाँकि तब भी पोल खुल जाने के बाद खास गिरोह ने न तो अपनी खबर को अपडेट किया और न ही उसे डिलीट किया है।
राहुल गाँधी ने एक बार फिर से ‘भारत जोड़ो न्याय यात्रा’ के दौरान कुछ ऐसा कह दिया है, जिसके बाद उनकी खासी फजीहत हुई है। इस दौरान जो मीडिया संस्थान राहुल गाँधी के भाषण को कवर कर रहे थे, उन्हें भी उन्होंने नहीं छोड़ा। कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष ने महँगाई और बेरोजगारी की बात करते हुए ANI (एशिया न्यूज़ इंटरनेशनल) और PTI (प्रेस ट्रस्ट और मीडिया) जैसे संस्थानों का नाम लिया और इन्हें अम्बानी-अडानी का बता दिया। वाराणसी में उन्होंने दावा किया कि मुकेश अम्बानी और गौतम अडानी इन चैनलों के मालिक हैं।
बकौल राहुल गाँधी, किसान और मजदूर के बारे में ये मीडिया संस्थान कभी नहीं दिखाने वाले, क्योंकि इनके मालिक कहते हैं कि हिंदुस्तान के गरीबों के बारे में नहीं दिखाना है, सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में 24 घंटे दिखाना है। कॉन्ग्रेस पार्टी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल से इस वीडियो को डाला। अब समाचार एजेंसी PTI ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर कॉन्ग्रेस के इसी वीडियो का रिप्लाई देते हुए उत्तर प्रदेश में दिए गए राहुल गाँधी के इस भाषण पर पलटवार किया।
PTI ने लिखा, “हम ये जान कर हैरान हैं कि राहुल गाँधी कह रहे हैं कि PTI के मालिक अम्बानी और अडानी हैं। PTI एक स्वतंत्र, गैर-मुनाफा वाली कंपनी है। देश की स्वतंत्रता के समय से ही समाचार-पत्रों का कुछ समूह मिल कर PTI को चलाता है, जो इसके राजस्व से किसी प्रकार की आय का लाभ नहीं लेते।” बता दें कि PTI एक कोऑपरेटिव संस्था है, जिसे 500 से भी अधिक पत्र-पत्रिका समूह मिल कर चलाते रहे हैं। 27 अगस्त, 1947 को तत्कालीन मद्रास (अब चेन्नई) में इसकी स्थापना हुई थी।
Shocked to hear Rahul Gandhi say PTI is owned by Adani and Ambani. PTI is an independent, not-for-profit company. It has been jointly owned since Independence by a group of newspaper companies that derive no income from PTI's revenue.@RahulGandhi@INCIndia
बता दें कि मीडिया लगातार किसान आंदोलन के बारे में चला रहे हैं, इसके बावजूद राहुल गाँधी कह रहे हैं कि ANI और PTI के मालिक अम्बानी-अडानी हैं। जबकि दोनों ही संचार एजेंसी के सोशल मीडिया हैंडल्स पर किसानों के आंदोलन की खबरें भरी पड़ी हैं। राहुल गाँधी जिस मीडिया पर निशाना साध रहे हैं, वो लगातार किसान नेताओं के बयान चला रही है। इसके बावजूद राहुल गाँधी इसी मीडिया पर निशाना साध रहे हैं। तथ्यात्मक रूप से भी ये गलत है कि ANI या PTI में अम्बानी-अडानी का पैसा लगा है।