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भारत में ₹66000 करोड़ का निवेश करेगी इजरायल की कंपनी, सेमीकंडक्टर क्षेत्र में आगे बढ़ेगा देश: मोदी सरकार के पास आया प्रस्ताव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार कह चुके हैं कि भारत सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में लगातार आगे बढ़ रहा है और इस क्षेत्र में निवेश भी आकर्षित किए जा रहे हैं। अब इजरायल भी इस क्षेत्र में भारत का साथ देने के लिए आ गया है। इजरायल की कंपनी ‘टॉवर सेमीकंडक्टर’ ने भारत में 800 करोड़ डॉलर (66,411 करोड़ रुपए) के निवेश का प्रस्ताव दिया है। साथ ही कंपनी ने इसके लिए भारत सरकार से ज़रूरी मंजूरी भी माँगी है। कंपनी का कहना है कि वो भारत में 65 नैनोमीटर और 40 नैनोमीटर के चिप का निर्माण करेगी।

मोदी सरकार के प्रमुख कारोबारी एजेंडों में सेमीकंडक्टर भी है। इसके लिए दिसंबर 2021 में केंद्र सरकार ने 10 बिलियन डॉलर की योजनाएँ भी लॉन्च की हैं। अक्टूबर 2023 में केंद्रीय IT मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने ‘टॉवर सेमीकंडक्टर’ के CEO रसल्ल सी एललवंगेर से मुलाकात भी की थी। इस बैठक में भारत में इजरायल के एम्बेस्डर नाओर गिलोन ने भी हिस्सा लिया था। उस समय भी भारत और इजरायली कंपनी के बीच सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में पार्टनरशिप की बात हुई थी।

वहीं 2022 में International Semiconductor Consortium (ISMC), जिसका ‘टॉवर सेमीकंडक्टर’ भी एक हिस्सा है, उसने भारत की सेमीकंडक्टर योजना में सहभागिता के लिए प्रस्ताव दिया था। उस समय Intel ने ‘टॉवर सेमीकंडक्टर’ को खरीदने का प्रस्ताव दिया था। उधर इसकी प्रक्रिया चल रही थी, इसीलिए ISMC के प्रस्ताव को भारत सरकार ने ठन्डे बस्ते में रखे हुआ था। भारत सरकार चाहती थी कि Intel अपनी प्रक्रिया पूरी कर ले, फिर इस पर आगे बढ़ा जाए।

Intel के सीईओ पेट गेलसिंगेर ने भी पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। साथ ही वो MeiTY मंत्री अश्विनी वैष्णव से भी 2022 में मिले थे। उस दौरान उन्होंने कहा था कि निकट भविष्य में भारत में यूनिट स्थापित करने की कोई योजना नहीं है। अब अन्तर-टॉवर सेमीकंडक्टर की डील रद्द हो गई है। भारत सरकार फिर से अब इजरायली कंपनी के संपर्क में है। 300 से अधिक संस्थाएँ व कंपनियाँ इसकी ग्राहक हैं। अमेरिका की Micron पहले ही भारत में बड़े निवेश का ऐलान कर चुकी है।

राजदीप सरदेसाई को ‘रसगुल्ला पत्रकारिता’ का मिला इनाम, TMC ने बीवी को बनाया राज्यसभा सांसद: बंगाल हिंसा पर नहीं पूछा था सवाल

राजदीप सरदेसाई की पत्नी सागरिका घोष को पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी TMC (तृणमूल कॉन्ग्रेस) ने राज्यसभा भेजा है। सागरिका घोष के अलावा ममता बाला ठाकुर और नदीमुल हक़ को भी राज्यसभा भेजे जाने की घोषणा की गई है। वहीं सुष्मिता देव को भी दोबारा राज्यसभा भेजा जाएगा। वो 2021 में TMC में शामिल हुई थीं और उसी साल उन्हें राज्यसभा भेजा गया था। कुछ दिन पहले ही उनका कार्यकाल खत्म हुआ था। नदीमुल हक़ भी पहले से तृणमूल से ही राज्यसभा सांसद हैं।

ममता ठाकुर को मतुआ समुदाय ‘माँ’ के रूप में मानता है। वो 2019 में बनगाँव लोकसभा सीट से चुनाव लड़ चुकी हैं, लेकिन भाजपा के शांतनु ठाकुर ने उन्हें शिकस्त दे दी थी। जहाँ तक बात सागरिका घोष की है, वो पत्रकार हैं और उनके पति राजदीप सरदेसाई भी पत्रकार हैं। राजदीप सरदेसाई को अक्सर सोशल मीडिया और ‘इंडिया टुडे’ न्यूज़ चैनल के माध्यम से भाजपा व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरुद्ध प्रोपेगंडा के लिए जाना जाता है। दोनों पति-पत्नी इस मामले में समान राय रखते हैं।

राजदीप सरदेसाई को ‘रसगुल्ला पत्रकारिता’ के लिए भी जाना जाता है, जिसका इनाम शायद उन्हें पत्नी की राज्यसभा सांसदी के रूप में मिला है। राजदीप ने एक प्रश्न के उत्तर में स्वीकार किया था कि अगर वे ममता बनर्जी से उनके राज्य में हो रही हिंसा पर कठिन प्रश्न पूछते तो उन्हें रसगुल्ले नहीं मिलते। पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा को लेकर राजदीप सरदेसाई ने सीएम ममता बनर्जी से कोई सवाल नहीं पूछा था, क्योंकि वो ‘चाय पर चर्चा’ के लिए गए थे और सवाल पूछने पर उन्हें रसगुल्ले नहीं मिलते।

ये वही सागरिका घोष हैं, जिन्होंने बेहद सुविधाजनक तरीके से ग्रूमिंग जिहाद के ज़रिए होने वाले जबरन धर्मांतरण के ख़तरे को, हिन्दू परिवारों और मुस्लिम दामादों के बीच बतौर ‘मानसिक उन्माद’ तोड़-मरोड़ कर रख दिया था। सागारिका घोष जघन्य अपराध के पीड़ितों को चुप कराते हुए पीड़ित को ही दोष देने लगी थीं। उनका मानना था कि उन महिलाओं की आपबीती जिन्हें इस तरह के भयावह हालातों का सामना करना पड़ता है, यह ‘मुस्लिम दामादों’ के प्रति मानसिक उन्माद का नतीजा है।

किसान आंदोलन को लेकर दिल्ली पुलिस सतर्क: सीलमपुर सहित कई इलाकों में धारा 144 लागू, बॉर्डर पर बैरिकेंडिग

न्यूनतम समर्थन मूल्य की माँग को लेकर किसानों द्वारा मंगलवार (13 फरवरी 2024) को दिल्ली मार्च को देखते हुए सुरक्षा को पुख्ता कर दिया गया है। दूसरे राज्यों से लगने वाली सीमा पर हर तरह की सुरक्षा तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। इसके अलावा, पूर्वी दिल्ली और सीलमपुर एरिया में अगले एक महीने तक जमावड़े पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

मार्च में हिस्सा लेने के लिए 2,000-2,500 ट्रैक्टरों पर 15,000 से 20,000 किसान दिल्ली पहुँच सकते हैं। मार्च को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने दिल्ली-नोएडा सीमा पर हेवी-ड्यूटी बुलडोजर, बैकहो मशीन, दंगा नियंत्रण वाहन और वॉटर कैनन पार्क किए हैं।

पुलिस का कहना है कि किसी भी तरह की अपरिहार्य घटना केस निपटने के लिए और कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते CrPC की धारा 144 लागू कर दिया गया है। पुलिस का यह भी कहना है कि जान और संपत्तियों को नुकसान से बचाने के लिए जैसा करना जरूरी है। वहीें, दिल्ली के टिकरी बॉर्डर और सिंघू बॉर्डर पर भी सुरक्षा को चाक-चौबंद कर दी गई है।

किसानों के आंदोलन को लेकर एक खुफिया रिपोर्ट भी सामने आई है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि इस आंदोलन के लिए कई महीने पहले से ही तैयारी शुरू हो चुकी थी। कुछ किसान गुपचुप तरीके से प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, कृषि मंत्री और भाजपा के अन्य बड़े नेताओं के घर के बाहर डेरा डाल सकते हैं। दिल्ली में घुसने के लिए वे बच्चों और महिलाओं को आगे कर सकते हैं।

इतना ही नहीं, ट्रैक्टर मार्च निकालने के लिए कथित किसान 40 रिहर्सल कर चुके हैं। इनमें पंजाब में 30 रिहर्सल और हरियाणा में 10 किए गए हैं। सिर्फ पंजाब के गुरुरदासपुर में ही 15 रिहर्सल किए गए हैं। वहीं, किसान संगठन 100 से अधिक मीटिंग भी कर चुका है। खुफिया रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि दिल्ली के आसपास के राज्यों के ये कथित किसान कार, बाइक, रेल, बस मेट्रो आदि से दिल्ली में घुस सकते हैं।

इंटेलिजेंस रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि अगर किसानों को दिल्ली की सीमाओं पर रोका गया तो वहाँ 2 हजार से 25 हजार ट्रैक्टर एवं ट्रॉलियों के साथ 25 हजार तक प्रदर्शनकारी किसान जमा हो सकते हैं। इसके साथ ही यह भी आशंका जताई गई है कि इस दौरान पुलिस पर हमले और आगजनी भी हो सकती है। फेंसिंग, कंटेनर और क्रेन के साथ सुरक्षाबलों ने इसके लिए तैयारियाँ शुरू कर दी हैं।

पिछले आंदोलनों से सबक लेते हुए पुलिस प्रशासन इन किसानों को दिल्ली में पहुँचने से रोकने के लिए तैयारियाँ शुरू कर चुका है। दिल्ली की सीमाओं पर रास्ते को रोकने के लिए बड़े-बड़े ब्रेकर लगाए गए हैं। इसके अलावा, सड़कों पर लोहे की कील वाले चादर बिछाए गए हैं, ताकि जब किसान राजधानी में घुसने की कोशिश करें तो उन्हें रोका जा सके। वहीं, हरियाणा के सात जिलों में मोबाइल इंटरनेट पर पाबंदी लगा दी गई है।

किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा है, “एक तरफ तो सरकार हमें बातचीत का न्योता दे रही है और दूसरी तरफ हरियाणा में हमें डराने की कोशिश की जा रही है। बॉर्डर सील किए जा रहे हैं। धारा 144 लगा दी गई है। इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है। ऐसे माहौल में बातचीत नहीं हो सकती है। सरकार इस तरफ तुरंत ध्यान दे।” दरअसल, हरियाणा के 13 जिलों में धारा 144 लागू की गई है।

दरअसल, तीन केंद्रीय मंत्री किसान नेताओं की माँगों पर विचार करने के लिए सोमवार (12 फरवरी 2024) को उनके प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि पीयूष गोयल, अर्जुन मुंडा और नित्यानंद राय संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करने के लिए 12 फरवरी को चंडीगढ़ पहुँचेंगे।

बता दें कि हरियाणा पुलिस ने राज्य में 152 से ज्यादा जगहों पर वाहनों की जाँच के लिए चेकिंग प्वॉइंट स्थापित किए हैं। टीकरी और सिंघु बॉर्डर सहित कई स्थानों पर ड्रोन से निगरानी की जा रही है। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने देश के गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर उन्हें किसान संगठनों के दिल्ली कूच के बारे में जानकारी दी है।

‘घर में घुस कर महिलाओं को पीट रही पुलिस’: सोशल मीडिया पर दावे के उलट ग्राउंड की सच्चाई, जहाँ से चले पत्थर उन्हीं इलाके में दूध-दवाई बाँट रहे पुलिस वाले

उत्तराखंड के हल्द्वानी में अवैध कब्ज़ा कर के बनाए गए मदरसे और मस्जिद को हटाने के लिए प्रशासन पहुँचा तो बवाल हो गया। इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ ने थाना और पेट्रोल पंप फूँक दिया। पुलिस वालों को ज़िंदा जलाने की कोशिश की गई। कई वाहन क्षतिग्रस्त कर दिए गए। चश्मदीदों का कहना है कि छतों पर पानी की टंकी में पत्थर जमा कर के रखे गए थे। वहीं अब एक गिरोह विशेष द्वारा सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा है कि पुलिस ने महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया है।

नेहा दीक्षित नाम की तथाकथित पत्रकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक नोट जारी कर के दावा किया कि हल्द्वानी में पुलिस हिंसक हो गई है। उन्होंने दावा किया कि उत्तराखंड पुलिस लोगों के घरों में घुस कर उन्हें पीट रही है। महिलाओं को निशाना बनाए जाने के आरोप भी लगाए गए। नेहा दीक्षित ने तो यहाँ तक दावा कर दिया कि पुलिस के डर से बनभूलपुरा के मुस्लिमों ने पलायन कर के जंगल में शरण लेना शुरू कर दिया है। दावा किया गया कि कई घरों में बच्चों के पीने के लिए दूध तक नहीं है।

लेकिन, ग्राउंड पर स्थिति इसके एकदम उलट है। वीडियो में देखा जा सकता है कि खुद पुलिस के अधिकारी कर्फ्यू वाले इलाकों में दूध और खाने-पीने की वस्तुएँ वितरित कर रहे हैं। ये वही इलाके जहाँ, इसी पुलिस को निशाना बनाया गया था। छतों से पत्थर चले थे। कर्फ्यू वाले इलाकों में एम्बुलेंस भेजी गई हैं, दवाएँ भेजी गई हैं। इसके अलावा डॉक्टरों को भी तैनात किया गया है। वीडियो में देखा जा सकता है कैसे पुलिस मुस्लिमों को मदद सामग्रियाँ बाँट रही है।

वहीं नैनीताल पुलिस ने भी बयान जारी कर के चेताया है कि अफवाह फैला कर माहौल ख़राब न किया जाए। महिलाओं के साथ पुलिस द्वारा दुर्व्यवहार किए जाने की खबरों को लेकर नैनीताल पुलिस ने कहा कि ये भ्रामक हैं और इनके माध्यम से अनावश्यक रूप से समाज में संवेदनशीलता पैदा की जा रही है। इस पोस्ट में स्पष्ट किया गया है कि पुलिस ने महिलाओं के साथ कोई दुर्व्यवहार नहीं किया है। नियमानुसार अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस ने अनुरोध किया है कि किसी भी प्रकार की भ्रामक खबरें न पोस्ट करें, न कमेंट करें। बता दें कि उत्तराखंड के हल्द्वानी में हुए दंगों का मुख्य साजिशकर्ता अब्दुल मलिक गिरफ्तार कर लिया गया है। क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में है और पुलिस व सुरक्षा एजेंसियाँ अब दंगाइयों की धर-पकड़ में लग गई है। बनभूलपुरा में 5 दंगाइयों को गिरफ्तार किया गया है। इसमें एक समाजवादी पार्टी के एक नेता का भाई है, 2 निवर्तमान पार्षद हैं और एक खनन कारोबारी भी शामिल है। इस हिंसा के मुख्य साजिशकर्ताओं में एक अब्दुल मलिक का नाम सामने आया, जिसे दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है

झूठ बोलकर मुल्ला इमरान और अब्दुल ने दीपिका को भेजा ओमान, बंधक बनाकर करते थे पिटाई: भारत सरकार के प्रयासों से लौटीं वापस

मानव तस्करों को जाल में उलझकर ओमान पहुँची और वहाँ आठ महीने तक बंधक बनाकर रखी गई 29 साल की दीपिका जोगी आखिरकार भारत लौट आई हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें बुजुर्ग महिला का खाना पकाने के काम के लिए भेजा गया था, लेकिन वहाँ उनसे घर का कामकाज कराया जाता था। इसके साथ ही उनसे मारपीट भी की जाती थी।

छत्तीसगढ़ के दुर्ग स्थित भिलाई की रहने वाली दीपिका जोगी ने बताया कि आर्थिक समस्याओं की वजह से उन्हें काम के लिए विदेश जाना पड़ा था। हालाँकि, काम के लिए विदेश जाने की घटना को उन्होंने अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल बताया। दीपिका ने कहा हाउस मेड की नौकरी के लिए वह केरल की एक प्लेसमेंट एजेंसी के जरिए मई 2023 में ओमान पहुँची थी।

खुर्सीपार निवासी मुल्ला मोहम्मद इमरान खान और हैदराबाद निवासी अब्दुल ने दीपिका से खाना बनाने का काम दिलाने की बात कही थी। इसके बाद मानव तस्करों उन्हें दुर्ग से हैदराबाद ले गए। वहाँ से दीपिका को मस्कट भेज दिया गया। मस्कट एयरपोर्ट से दीपिका को हफीजा के घर जैनब नाम की महिला लेकर गई। इसके बाद दीपिका को वहाँ बंधक बना लिया गया।

दीपिका ने बताया कि दलाल अब्दुल ने उन्हें बताया था कि जहाँ उन्हें भेजा जा रहा है कि वहाँ एक बूढ़ी महिला की सेवा करनी और परिवार के लिए खाना बनाना है। परिवार बेहद छोटा है। दीपिका का कहना कि जब वहाँ गईं तो देखा कि उस बुजुर्ग महिला के नौ बेटे थे और सभी बेटे के तीन से चार बच्चे थे। इस तरह उस घर में कुल लगभग 50 लोग थे।

पति और दो बच्चों को छोड़कर ओमान जाने वाली दीपिका का यह भी कहना है कि वह उस घर में काम करने वाली अकेली महिला थी। उनसे घर की साफ-सफाई कराई से लेकर हर का काम कराया जाता था। जब वह काम करने से मना करती थीं तो उन्हें बुरी तरह मारा-पीटा जाता था। इसकी शिकायत उन्होंने परिवार के मुखिया और हैदराबाद के दलाल अब्दुल्ला को फोन करके दी।

दीपिका की बात सुनकर अब्दुल्ला उन्हें धमकी देने लगा। बकौल दीपिका, अब्दुल ने कहा कि ‘जो करना है कर लो। अब तो तुम्हें वहीं रहना होगा।’ दीपिका का कहना कि वह भाग्यशाली हैं जो वहाँ से निकल आईं। उन्होंने कहा कि वहाँ कई महिलाएँ हैं जो वर्षों से फँसी हैं। आशंका है कि ये इन सब महिलाओं को भी झूठ बोलकर भेजा गया होगा।

जब ओमान में दीपिका के लिए निकलना मुश्किल हो गया तो किसी तरह से उन्होंने मोबाइल फोन के जरिए वीडियो बनाकर अपने पति को भेजा और मदद की गुहार लगाई। इसके बाद दीपिका के पति ने अपने विधायक रिकेश सेन से मदद मदद माँगी। इसके बाद रिकेश सेन ने केंद्र और राज्य सरकार को इसकी जानकारी दी और गृहमंत्री को भी इसके बारे में बताया। साथ महिला को उन्होंने हिम्मत बढ़ाई।

दीपिका ने कहा, “विधायक जी मुझसे कहा कि तुम वहाँ से किसी तरह भारतीय दूतावास आ जाओ। हम तुम्हें निकाल लेंगे। मैं एंबेसी में एक सप्ताह रही। इसके बाद दूतावास ने ओमान से दिल्ली तक टिकट करवाकर मुझे भेजा। दिल्ली से रायपुर तक विधायक जी ने टिकट करवाया।” दीपिका शुक्रवार (9 फरवरी 2024) को घर पहुँची और वहाँ उनका खूब स्वागत हुआ।

उम्र – 8 साल और 10 साल, अपराध – 5 साल की बच्ची का गैंगरेप: स्कूल में पॉर्न फिल्म देखने के बाद वारदात को दिया अंजाम, पीड़िता के प्राइवेट पार्ट में सूजन

उत्तर प्रदेश के गोंडा में अश्लील फिल्म देखने के बाद 2 बच्चों ने मिल कर एक बच्ची का सामूहिक बलात्कार किया। वारदात को अंजाम देने वाले बच्चों की उम्र मात्र 8 साल और 10 साल है। घटना एक प्राइवेट स्कूल में हुई, जहाँ ये बच्चे पढ़ाई करते थे। उन दोनों ने पढ़ाई करने की जगह मोबाइल पर अश्लील फिल्म देखनी शुरू कर दी। इसके बाद लंच ब्रेक के दौरान उन्होंने अपने साथ पढ़ने वाली एक बच्ची को ही शिकार बनाया। यूपी पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर ली है।

स्थानीय SP ने जानकारी दी है कि घर पहुँचने के बाद बच्ची ने अपने परिजनों को बताया कि उसके साथ क्या हुआ है। जब परिजन उसे लेकर स्कूल पहुँचे तो स्कूल प्रबंधन ने उनकी एक न सुनी और उन्हें वहाँ से भगा दिया। स्कूल प्रशासन का कहना था कि विद्यालय को बदनाम करने के लिए झूठा आरोप लगाया जा रहा है। इसके बाद परिजन थाने पहुँचे और वहाँ शिकायत दी। इस आधार पर पुलिस ने केस भी दर्ज कर लिया। शनिवार (10 फरवरी, 2024) को लड़की का मेडिकल टेस्ट कराया गया।

पुलिस ने इस घटना में शामिल दोनों आरोपित नाबालिगों को पकड़ लिया है। उन्हें बाल सुधार गृह में भेजा जाएगा। पुलिस का कहना है कि दोनों ने इस अपराध को कबूल भी कर लिया है। नाबालिगों ने बताया है कि पॉर्न फ़िल्में देख कर उन्होंने ऐसा किया। बच्ची को स्कूल के पीछे ले जाकर उन्होंने इस वारदात को अंजाम दिया था। घटना के बाद वो दोनों घर चले गए थे। वहाँ वो डरे-सहमे घर में छिपे हुए थे। पीड़िता ने उन दोनों की पहचान भी कर ली है। बच्ची के प्राइवेट पार्ट में सूजन आ गई थी, कपड़े बदलते वक्त माँ को इसका पता चला।

दोनों बच्चों को बाल सुधार गृह में भेजे जाने से पहले जुवेनाइल कोर्ट में पेश किया गया। बच्ची की उम्र मात्र 5 साल बताई जा रही है। उत्तर प्रदेश के कासगंज से एक ऐसा ही मामला सामने आया था जहाँ एक नाबालिग लड़के ने अपनी बहन को ही हवस का शिकार बना लिया। फिर उसने वारदात के खुलासे के डर से लड़की को मार भी डाला। आजकल कई ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं, जहाँ पॉर्न फ़िल्में देख कर बच्चों ने किसी नाबालिग लड़की को हवस का शिकार बनाया।

नहीं धराया है हल्द्वानी दंगों का मुख्य साजिशकर्ता अब्दुल मलिक, नैनीताल पुलिस ने उसे पकड़े जाने वाली खबरों को नकारा

उत्तराखंड के हल्द्वानी में हुए दंगों का मुख्य साजिशकर्ता अब्दुल मलिक अभी नहीं गिरफ्तार हुआ है, नैनीताल पुलिस ने ये साफ़ किया है। क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में है और पुलिस व सुरक्षा एजेंसियाँ अब दंगाइयों की धर-पकड़ में लग गई है। बनभूलपुरा में 5 दंगाइयों को गिरफ्तार किया गया है। इसमें एक समाजवादी पार्टी के एक नेता का भाई है, 2 निवर्तमान पार्षद हैं और एक खनन कारोबारी भी शामिल है। इस हिंसा के मुख्य साजिशकर्ताओं में एक अब्दुल मलिक का नाम सामने आया।

अब्दुल मलिक हिंसा के बाद से फरार है। 75 से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। हिंसा में जिन महिलाओं को आगे किया गया था, उन्हें भी चिह्नित किया जा रहा है। 19 नामजद और 5000 अज्ञातों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। आरोपित जावेद सिद्दीकी का भाई अब्दुल मतीन सपा का उत्तराखंड प्रदेश प्रभारी है। लाइन नंबर 16 का पार्षद महबूब आलम और लाइन नंबर 14 इंद्रानगर निवासी जीशान परवेज पार्षद हैं।

वहीं खनन कारोबारी अरशद अय्यूब लाइन नंबर 12 में रहता है। असलम चौधरी डेयरी संचालक है और लाइन नंबर 3 में उसका घर है। ये सब वो हैं जिन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। पाँचों को रिमांड पर लेकर उनसे पूछताछ की जा रही है। अब्दुल मलिक ने ही मलिक बगीचा पर अवैध कब्ज़ा कर के निर्माण करवाया था, जहाँ स्थित अवैध मस्जिद-मदरसे को ध्वस्त करने प्रशासन आया तो हिंसा भड़की। इस कार्रवाई का सबसे ज्यादा विरोध अब्दुल मलिक ही कर रहा था।

फरार अब्दुल मलिक को पकड़ने के लिए पुलिस दबिश दे रही थी, जिसमें अभी तक सफलता नहीं मिली है। उसके खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने, जमीन पर कब्ज़ा करने, लोगों को भड़काने और साजिश रचने समेत कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। उसने ही अवैध मदरसे और नमाज स्थल का निर्माण करवाया था। नगर निगम ने 8 महीने पहले भी मलिक का बगीचा नाम स्थान पर अवैध निर्माण तोड़े थे। यहाँ छोटे-छोटे प्लॉट बना कर बेच दिए गए, मकान खड़ा कर दिया गया।

28 दिसंबर, 2023 को सिटी मजिस्ट्रेट ऋचा सिंह से किसी ने अवैध कब्जे और निर्माण की शिकायत की थी। फिर नगर आयुक्त तक बात पहुँची। नगर आयुक्त गणेश भट्ट के नेतृत्व में 28 दिसंबर को ही अतिक्रमण हटाया गया था। नमाज स्थल और मदरसा हटाने की तैयारी शुरू की गई, बात उच्च न्यायालय तक पहुँची। जब नगर निगम की टीम पहुँची तो हिंसा हो गई। अब्दुल मलिक की गिरफ़्तारी के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी 2 टीमें भेजी गई थीं।

अपडेट: मीडिया रिपोर्ट के आधार पर पहले हमने अब्दुल मलिक की गिरफ्तारी की खबर पब्लिश की थी। नैनीताल के SSP की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद हल्द्वानी दंगों के मुख्य साजिशकर्ता की गिरफ्तारी वाली बात गलत निकली। इसी आधार पर हमने इस रिपोर्ट को अपडेट किया है।

बॉर्डर पर 2000 ट्रैक्टर + 25000 किसानों की प्लानिंंग और हिंसा: PM आवास के सामने धरना देने का दर्जनों बार रिहर्सल, खुफिया रिपोर्ट में दावा

लोकसभा का चुनाव नजदीक आते ही किसान के नाम पर राजनीति और सरकार को डराने के लिए राजधानी दिल्ली को बंधक बनाने की साजिश रची जाने लगी है। इस काम को पूरी योजना के साथ अंजाम दिया गया है। पंजाब और हरियाणा के करीब 23 किसान संगठनों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य कानून और एमएस स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की माँग को लेकर 13 फरवरी को दिल्ली कूच का ऐलान किया है। इसको लेकर खुफिया एजेंसियाँ भी सतर्क हैं।

किसानों के आंदोलन को लेकर एक खुफिया रिपोर्ट भी सामने आई है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि इस आंदोलन के लिए कई महीने पहले से ही तैयारी शुरू हो चुकी थी। कुछ किसान गुपचुप तरीके से प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, कृषि मंत्री और भाजपा के अन्य बड़े नेताओं के घर के बाहर डेरा डाल सकते हैं। दिल्ली में घुसने के लिए वे बच्चों और महिलाओं को आगे कर सकते हैं।

इतना ही नहीं, ट्रैक्टर मार्च निकालने के लिए कथित किसान 40 रिहर्सल कर चुके हैं। इनमें पंजाब में 30 रिहर्सल और हरियाणा में 10 किए गए हैं। सिर्फ पंजाब के गुरुरदासपुर में ही 15 रिहर्सल किए गए हैं। वहीं, किसान संगठन 100 से अधिक मीटिंग भी कर चुका है। खुफिया रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि दिल्ली के आसपास के राज्यों के ये कथित किसान कार, बाइक, रेल, बस मेट्रो आदि से दिल्ली में घुस सकते हैं।

इंटेलिजेंस रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि अगर किसानों को दिल्ली की सीमाओं पर रोका गया तो वहाँ 2 हजार से 25 हजार ट्रैक्टर एवं ट्रॉलियों के साथ 25 हजार तक प्रदर्शनकारी किसान जमा हो सकते हैं। इसके साथ ही यह भी आशंका जताई गई है कि इस दौरान पुलिस पर हमले और आगजनी भी हो सकती है। फेंसिंग, कंटेनर और क्रेन के साथ सुरक्षाबलों ने इसके लिए तैयारियाँ शुरू कर दी हैं।

पिछले आंदोलनों से सबक लेते हुए पुलिस प्रशासन इन किसानों को दिल्ली में पहुँचने से रोकने के लिए तैयारियाँ शुरू कर चुका है। दिल्ली की सीमाओं पर रास्ते को रोकने के लिए बड़े-बड़े ब्रेकर लगाए गए हैं। इसके अलावा, सड़कों पर लोहे की कील वाले चादर बिछाए गए हैं, ताकि जब किसान राजधानी में घुसने की कोशिश करें तो उन्हें रोका जा सके। वहीं, हरियाणा के सात जिलों में मोबाइल इंटरनेट पर पाबंदी लगा दी गई है।

किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा है, “एक तरफ तो सरकार हमें बातचीत का न्योता दे रही है और दूसरी तरफ हरियाणा में हमें डराने की कोशिश की जा रही है। बॉर्डर सील किए जा रहे हैं। धारा 144 लगा दी गई है। इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है। ऐसे माहौल में बातचीत नहीं हो सकती है। सरकार इस तरफ तुरंत ध्यान दे।” दरअसल, हरियाणा के 13 जिलों में धारा 144 लागू की गई है।

दरअसल, तीन केंद्रीय मंत्री किसान नेताओं की माँगों पर विचार करने के लिए सोमवार (12 फरवरी 2024) को उनके प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि पीयूष गोयल, अर्जुन मुंडा और नित्यानंद राय संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करने के लिए 12 फरवरी को चंडीगढ़ पहुँचेंगे।

बता दें कि हरियाणा पुलिस ने राज्य में 152 से ज्यादा जगहों पर वाहनों की जाँच के लिए चेकिंग प्वॉइंट स्थापित किए हैं। टीकरी और सिंघु बॉर्डर सहित कई स्थानों पर ड्रोन से निगरानी की जा रही है। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने देश के गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर उन्हें किसान संगठनों के दिल्ली कूच के बारे में जानकारी दी है।

पंजाब-हरियाणा की सीमा से लगने वाले रास्तों पर पुलिस और अर्द्धसैनिक बल तैनात किए गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अर्द्धसैनिक बलों की 50 कंपनियाँ हरियाणा भेजी हैं। वहीं, रेलवे ने जीआरपी और आरपीएफ कर्मचारियों की छुट्टियों को रद्द कर दिया है। किसानों को दिल्ली कूच से रोकने के लिए हरियाणा सरकार ने कई उपाय किए हैं।

कीजिए उस चाँदी के हथौड़े और सोने की छेनी के दर्शन, जिनसे गढ़ी गई रामलला की दिव्य आँखें: अरुण योगीराज ने खुद दिखाया

मूर्तिकार अरुण योगीराज ने उस चाँदी के हथौड़े और स्वर्ण छेनी का दिव्य दर्शन कराया है, जिसका इस्तेमाल कर के रामलला की आँखें गढ़ी गई। अयोध्या में 22 जनवरी, 2024 को भगवान श्रीराम के बाल स्वरूप रामलला की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई, जिसमें खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बतौर यजमान उपस्थित थे। 3 मूर्तिकारों ने रामलला की अलग-अलग मूर्ति गढ़ी थी, जिसमें अरुण योगीराज की प्रतिमा को गर्भगृह में स्थापना के लिए चुना गया। अरुण योगीराज भारत के सबसे दक्ष मूर्तिकारों में से एक हैं।

अरुण योगीराज ने सोशल मीडिया पर उस चाँदी के हथौड़े और सोने की छेनी की तस्वीर साझा की है। तस्वीर में उनके हाथ में ये औजार देखे जा सकते हैं और सामने भगवान शिव सहित अन्य देवी-देवताओं की तस्वीरें रखी हुई हैं। उन्होंने बताया कि इन्हीं औजारों का इस्तेमाल कर के रामलला की दिव्य आँखों (नेत्रोन्मीलन) को गढ़ा गया है। लोगों ने उनसे कहा कि ये आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा का कार्य करेगा कि इन छोटे-छोटे औजारों का इस्तेमाल कर के उन्होंने क्या गढ़ा है।

बता दें कि रामलला की प्रतिमा को कृष्णशिला से गढ़ा गया है। आँखों को बनाने में श्याम शिला का इस्तेमाल किया गया है, जो नीले-काले रंग की होती है। उनके हाथ में तीर-धनुष भी देखा जा सकता है। रामलला की प्रतिमा को लेकर अरुण योगीराज ने कहा भी था कि प्रतिमा की आँखें बदल गई हैं, ये वो नहीं हैं जिन्हें उन्होंने गढ़ा था। उनके कहने का तात्पर्य था कि प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के बाद प्रतिमा में दिव्यत्व आ गया है। अरुण योगीराज ने ही केदारनाथ में जगद्गुरु शंकराचार्य और दिल्ली में सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा बनाई है।

बता दें कि अयोध्या के लिए वो सबसे उत्तम प्रतिमा बनाना चाहते थे। इस दौरान वो 6 महीने तक अपने परिवार वालों तक से नहीं मिले। अयोध्या में वो अपने कुलदेव की पूजा के साथ दिन की शुरुआत करते थे। इसके बाद वहाँ के पंडितों द्वारा की जाने वाली पूजा-अर्चना में हिस्सा लेते थे। रामकथा के विद्वानों ने उनकी मदद की, उन्हें बताया कि श्रीराम कैसे दिखते थे, उनमें आमजन क्या देखते हैं। मूर्ति बनाने के दौरान एक हादसा भी हो गया और उनकी आँख में एक पत्थर का नुकीला टुकड़ा घुस गया था। इसके बाद उनकी सर्जरी हुई। कई दिनों तक उन्हें एंटीबायोटिक और पेनकिलर्स पर रखा गया।

हल्द्वानी की मुस्लिम भीड़ को TheWire ने दिया क्लीन चिट: पैनल में कहा – मजहब के लिए पथराव करने से वे आतंकवादी नहीं बन जाते

कोर्ट के आदेश पर उत्तराखंड के हल्द्वानी में अतिक्रमण हटाने का काम शुरू हुआ था। इसके बाद इस्लामी कट्टरपंथियों ने पुलिस बल और निगम कर्मियों पर हमला कर दिया था। इस हमले में 300 से अधिक अधिकारी घायल हुए हैं। कट्टरपंथियों ने ना सिर्फ पुलिस पर पथराव किया, बल्कि उन पर पेट्रोल बम भी फेंके और वाहनों में आग लगा दी। इस घटना के बाद पुलिस आरोपितों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी में जुट गई है।

इस बीच वामपंथी, इस्लामी और लिबरल्स का रोना पीटना शुरू हो गया है। वामपंथी सिद्धार्थ वरदराजन द्वारा चलाए जा रहे प्रोपेंगेडा वेबसाइट ‘द वॉयर’ पर इस हिंसा को लेकर प्रोपेगेंडा फैलाने का काम शुरू हो गया है। इस्लामी के हमेशा पाक-साफ बताने में जुटी रहने वाली आरफा खानम शेरवानी ने हल्द्वानी हिंसा पर एक पैनल डिस्कशन का आयोजन किया गया था।

इस पैनल डिस्कशन में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने वाले और फिर उसे छुड़ाने गई पुलिस पर हमला करने वाले कट्टरपंथी मुस्लिमों को निर्दोष बताने के लिए तमाम तर्क पेश किए गए। इस पैनल डिस्कशन में आरफा खानम शेरवानी के अलावा, पत्रकार त्रिलोचन भट्ट, पत्रकार उमाकांत लखेरा और वायर के ही एक और संपादक याकूत अली शामिल थे।

आरफा अपनी तरह की एक अन्य प्रोपेगेंडा वेबसाइट स्क्रॉल की खबर का हवाला देते हुए कहती हैं कि कोर्ट के ऑर्डर के बिना पुलिस-प्रशासन मस्जिद और मदरसे को तोड़ने के लिए पहुँचा था। वो कहती हैं कि इसी सांप्रदायिक आधार पर स्टेट अपनी राजनीति करना चाहता है। सांप्रदायिक उन्माद फैलाने की नापाक कोशिश की जा रही है।

वायर के ही कर्मचारी याकूत अली हल्द्वानी के स्थानीय लोगों का हवाला देते हुए कहते हैं कि लोगों का कहना था पुलिस प्रशासन चाहते तो वह स्थानीय मुस्लिमों से बात करके मामले को सुलझा सकते थे, लेकिन सीधा बुलडोजर लेकर आ जाना और कार्रवाई की शुरुआत बेहद खराब तरीके से किया गया। वहाँ महिलाओं के ऊपर लाठी चार्ज की गईं। इन सारे संवाद को वीडियो के शुरुआती 10 मिनट में सुना जा सकता है।

हालाँकि, याकूत अली और आरफा ने ये नहीं बताया कि पुलिस ने भीड़ पर लाठी चार्ज कब किया। वे एकतरफा नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रही हैं। दरअसल, पुलिस प्रशासन जब एक अवैध मस्जिद और मदरसे को गिराने के लिए पहुँची तो वहाँ महिलाओं और नाबालिग लड़के सामने आकर पुलिस का विरोध करने लगे। इस दौरान पुलिस पर पथराव भी किया गया। इस वजह से भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठी चार्ज करनी पड़ी।

वहीं, पत्थरबाजों के पक्ष में बैटिंग करते हुए पैनलिस्ट त्रिलोचन भट्ट कहते हैं, रासुका के तहत इन पर (मुस्लिमों पर) मुकदमा दर्ज करने की तैयारी की जा रही है। सबसे बड़ी बात ये है। चलो माना कि उन्होंने पत्थरबाजी की, लेकिन एक धार्मिक स्थल को बचाने के लिए धार्मिक भावनाओं के तहत (पथराव) कर दिया होगा। तो उन पर रासुका लगाओगे? वो आतंकवादी थोड़े ही हैं। उन्हें सीधे टारगेट किया जा रहा है।” इस बयान को वीडियो में 13वें मिनट से 13:22 तक सुना जा सकता है।

पत्रकार लखेरा का कहना है कि उकसावे की कार्रवाई राज्य सरकार और प्रशासन की ओर से की गई है और उनके बिना ये हो नहीं सकती। उन्होंने स्थानीय पुलिस प्रशासन को सस्पेंड करने की माँग तक कर डाली। लखेरा कहते हैं कि नगर निगम के उन अधिकारियों को जिन्होंने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की उन्हें तत्काल सस्पेंड करना चाहिए। उनका कहना है कि सरकार अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के लिए माहौल बना रही है।

लखेरा अपने बयान में खुद ही साबित करते हैं कि जहाँ मुस्लिम अधिक संख्या में होते हैं, वह कानून-व्यवस्था की दृष्टि से संवेदनशील हो जाता है। वे कहते हैं, “वहाँ कोई हाइवे बन रहा था? वो तो एक संकरी सी गली है। उसमें बुलडोजर लेकर जाना और लोगों को भड़काने और माहौल को खराब करने के लिए एक ऐसे एरिया को चुना जो, पहले से ही संवेदनशील है। वहाँ माइनॉरिटीज के लोग रहते हैं।” (इसे 19वें मिनट से 19.27 तक सुना जा सकता है।

मुस्लिमों को निर्दोष साबित करते हुए इसके बाद आरफा कहती हैं, “सबसे बड़ी तो इसमें यही है कि जिनके पास आप अपील कर रहे हैं, अगर वो ही एक पार्टी हों तो उन्हीं के जरिए पूरा षडयंत्र रचा जा रहा हो तो आखिर एक आम नागरिक, एक निर्दोष मुस्लिम जाए तो जाए कहाँ?” आरफा ने धर्मांतरण विरोध कानून पर भी अपनी हताशा जाहिर की।

भट्ट आगे कहते हैं कि पहाड़ी क्षेत्रों में मुस्लिमों की आबादी बेहद कम है, इसलिए उनकी छोटी-छोटी मजारें सड़कों के किनारे मिल जाएगी। वो कहते हैं, वो मजारें भी हिंदू ही बना रहे हैं और क्यों बना रहे है, उसकी वजह ये है कि पहाड़ों में स्वास्थ्य सुविधाएँ होती नहीं हैं। वहाँ के लोग ऊपर की शक्ति में विश्वास करते हैं। कोई बीमारी हो तो कहते हैं कि तुम्हें सैयद लग गया। सैयद लग गया तो छोटी-छोटी मजार बना दी जाती हैं।” (24:50 मिनट से 25:50 मिनट तक)

इस पूरे पैनल डिस्कशन में एंकर से लेकर पैनल में शामिल होने वाले लोगों ने वहाँ के मुस्लिमों को मासूम बता दिया। इसके साथ इस हमले का सारा दोष प्रशासन और राज्य सरकार पर मढ़ दिया। चर्चा के दौरान लोगों का कहना है कि चुनाव को देखकर मुस्लिमों को उकसाया गया।