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‘हेलिकाॅप्टर से आश्रम जाते थे काॅन्ग्रेसी CM, सरकारी खजाने से भरा जाता था पैसा’: असम के मंत्री ने तरुण गोगोई के ‘Joy Ride’ का किया खुलासा

कॉन्ग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने शनिवार (10 फरवरी, 2024) को लोकसभा में एक स्थगन प्रस्ताव देते हुए असम सरकार द्वारा मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की हवाई यात्राओं के खर्चों पर बहस की माँग की। कलियाबोर से लोकसभा सांसद गौरव गोगोई ने दावा किया कि सीएम सरमा व अन्य VIP लोगों के सर ट्रेवल पर 58.23 करोड़ रुपए सरकारी खजाने से खर्च किए गए हैं, जिसमें कई गैर-सरकारी यात्राएँ भी शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य से बाहर शादियों एवं राजनीतिक कार्यक्रमों को अटेंड करने के लिए इन फ्लाइट्स का इस्तेमाल किया गया।

अब असम सरकार ने इस मामले पर गौरव गोगोई और कॉन्ग्रेस को करारा जवाब दिया है। असम सरकार में संसदीय मामलों, जल संसाधन और सूचना एवं PR जैसे विभाग सँभाल रहे पीजूष हजारिका ने इसका जवाब देते हुए लिखा, “मुझे याद है कैसे दिवंगत तरुण गोगोई डंगोरिया कई बार हेलीकॉप्टर से 50 किलोमीटर का मजेदार सफर करते थे, गुवाहाटी से नलबारी स्थित जागीरोड अपने ज्योतिष से मिलने जाते थे। कॉन्ग्रेस पार्टी ने कभी इन खर्चों का बिल नहीं भरा।”

उन्होंने इस मुद्दे पर गौरव गोगोई को बात करने की चुनौती दी। बता दें कि असमिया भाषा में ‘डंगोरिया’ का अर्थ ‘सम्मानित’ होता है। बता दें कि पीजूष हजारिका जागीरोड से ही विधायक हैं। उन्होंने बताया है कि तरुण गोगोई उस क्षेत्र में स्थित आश्रम में हेलीकॉप्टर से सरकारी खर्चे पर आते थे। बता दें कि तरुण गोगोई 15 वर्षों तक लगातार असम के मुख्यमंत्री रहे हैं। उससे पहले वो सांसद और मंत्री भी रहे हैं। गौरव गोगोई उनके ही बेटे हैं।

वहीं असम मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी इस पर सफाई देते हुए कहा है कि CM हिमंता बिस्वा सरमा के चुनावी खर्चों का भुगतान असम सरकार नहीं करती है। CMO ने कहा कि ऐसे सभी खर्च उनसे जुड़ी राजनीतिक पार्टी द्वारा चेक-ऑनलाइन ट्रांसफर के माध्यम से पे किए जाते हैं। हालाँकि, जब वो राज्य में कहीं किसी सरकारी कार्यक्रम में जाते हैं और वहाँ कोई श्रद्धांजलि या सामाजिक कार्यक्रम होते हैं तो वो अटेंड कर लेते हैं। इस पूरे मुद्दे को 2 मीडिया संस्थानों ने RTI के हवाले से इन्वेस्टीगेशन का दावा किया था।

‘अगले 25 साल में विकसित बन जाएगा भारत’: PM मोदी ने 17वीं लोकसभा के समापन पर गिनाए 5 साल में हुए ऐतिहासिक कार्य, कहा – खत्म हुआ पीढ़ियों का इंतज़ार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट सत्र में संसद की लोकसभा में चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि इस कार्यकाल में कई पीढ़ियों का इंतज़ार खत्म हुआ है। पीएम मोदी ने शनिवार (10 फरवरी, 2024) को कहा कि आज का ये दिवस लोकतंत्र की एक महान परंपरा का महत्वपूर्ण दिवस है। उन्होंने कहा कि 17वीं लोकसभा ने 5 वर्ष देश सेवा में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय किए गए और अनेक चुनौतियों का सामना करते हुए भी सबने अपने सामर्थ्य से देश को उचित दिशा देने का प्रयास किया। उन्होंने अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने और तीन तलाक को गैर-कानूनी बनाने के फैसले का भी जिक्र किया।

पीएम मोदी ने कहा कि एक प्रकार से आज का ये दिवस हम सबकी उन 5 वर्ष की वैचारिक यात्रा का, राष्ट्र को समर्पित समय का और देश को एक बार फिर से अपने संकल्पों को राष्ट्र के चरणों में समर्पित करने का अवसर है। बकौल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ये 5 वर्ष देश में रिफॉर्म, परफॉर्म एवं ट्रांसफॉर्म के रहे हैं। उन्होंने सांसदों का भी इस बात के लिए आभार व्यक्त किया कि संकट काल में देश की आवश्यकताओं को देखते हुए सांसद निधि छोड़ने का प्रस्ताव जब उन्होंने सांसदों के सामने रखा, तो एक पल के विलंब के बिना सभी सांसदों ने इस प्रस्ताव को मान लिया।

पीएम मोदी ने कहा कि आने वाले 25 वर्ष हमारे देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं, राजनीति की गहमा-गहमी अपनी जगह है, लेकिन देश का संकल्प बन चुका है कि देश अब इच्छित परिणाम प्राप्त कर के रहेगा। उन्होंने कहा कि 1930 में जब महात्मा गाँधी ने नमक सत्याग्रह किया था, दांडी यात्रा की थी, उस समय ये घटनाएँ छोटी लगती थीं लेकिन 1947 में उस 25 साल के कालखंड ने देश के हर व्यक्ति के दिल में आज़ादी का जज्बा पैदा कर दिया था।

’25 साल में हम विकसित भारत रहेंगे’ – पीएम मोदी ने इसे ध्येय बताया। उन्होंने कहा कि पिछले 5 वर्ष में युवाओं के लिए कई ऐतिहासिक कानून बने, व्यवस्था में पारदर्शिता लाकर युवाओं को नए मौके दिए गए। इस दौरान पेपर लीक को लेकर बने कठोर कानून का भी उन्होंने जिक्र किया। उन्होंने ‘नेशनल रिसर्च फाउंडेशन’ का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने अनुसन्धान को महत्व दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी में हमारी मूलभूत ज़रूरतें बदल रही हैं, जिसका कल कोई मोल नहीं था वो आज मूल्यवान हो जाता है।

उन्होंने कहा कि इसी में से एक है – डेटा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि डिजिटल सुरक्षा की व्यवस्था करते हुए उनकी सरकार ने कानून बनाया। पीएम मोदी ने कहा कि जल, थल, नभ जैसे क्षेत्रों की चर्चा सदियों से चली है, लेकिन अब साइबर और अंतरिक्ष क्षेत्र में मुकाबले का भी समय है। पीएम मोदी ने इस दौरान अंग्रेजों के ज़माने के कानूनों से मुक्ति दिलाए जाने के फैसले की भी बात की। पीएम मोदी ने कहा कि ‘जन विश्वास एक्ट’ के तहत 180 से अधिक प्रावधानों को अपराधीकरण से हटाया गया, छोटी-छोटी बातों पर जेल न हो ऐसी व्यवस्था लाई गई, नागरिकों पर भरोसा बढ़ा।

इसी तरह उन्होंने मध्यस्थता कानून की बात करते हुए कहा कि इससे छोटी-छोटी चीजों के लिए कोर्ट में दौड़ने से मुक्ति मिली। ट्रांसजेंडर समुदाय की ज़िंदगी बेहतर बनाने के लिए बने कानून को लेकर कहा कि दुनिया भर में इसकी चर्चा है। उन्होंने जानकारी दी कि 16-17 हजार ट्रांसजेंडर लोगों को आईकार्ड मिला है, उन्हें कारोबार के लिए मुद्रा लोन मिल रहे हैं, पद्म अवॉर्ड मिले हैं। पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना जैसी विकट परिस्थिति में भी देश की संसद ने अच्छे काम किए।

इस्लामी देश मलेशिया में ‘रद्द’ हुए शरिया के 16 कानून, कट्टरपंथी भड़के: बोले- हमारी आँखों के सामने क्या-क्या हो रहा है

मलेशिया की सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला लेते हुए केलंतन राज्य में शरिया आधारित आपराधिक कानूनों को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह संघीय सरकार का अधिकार है और इस तरह के कानून उस पर अतिक्रमण करते हैं। इस फैसले के बाद मलेशिया में इस्लामी कट्टरपंथी नाराज हो रखे हैं।

जानकारी के मुताबिक, कोर्ट में यह केस 2022 में दो मुस्लिम महिलाओं की ओर से दायर किया गया था जिसपर सुनवाई करते हुए 9 फरवरी 2024 को नौ सदस्यीय संघीय न्यायालय ने 8-1 के बहुमत से फैसला सुनाया। फैसले में 16 कानूनों को अमान्य करार दिया गया।

इन कानूनों में कुकर्म, यौन उत्पीड़न, अनाचार और ‘क्रॉस ड्रेसिंग’ (विपरीत लिंग से संबंधित कपड़े पहनना) से लेकर झूठे सबूत देने तक के अपराधों के लिए दंड का प्रावधान किया गया था। कोर्ट ने इन कानूनों को रद्द करते हुए कहा कि इन (उक्त) विषयों के लिए इस्लामी कानून नहीं बना सकते, क्योंकि ये विषय मलेशियाई संघीय कानून के अंतर्गत आते हैं।

इस फैसले को सुनाते वक्त कोर्ट के बाहर सिक्योरिटी टाइट थी क्योंकि इस्लामी कट्टरपंथी इस केस के विरोध में पहले से थे। द स्ट्रेट टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि निर्णय आने के वक्त 1000 से अधिक कट्टरपंथी लोग पुतराज्य में कोर्ट के बाहर प्रदर्शन करने के लिए कोर्ट के बाहर थे। निर्णय आने के बाद वह सब नाराज हो गए।

उन्होंने कहा, “इस तरह का निर्णय इस्लामी मुल्क में नहीं लिया जाना चाहिए। ये हमारी आँखों के आगे हो रहा है। हम मुस्लिमों को लग रहा है कि हमें चुनौती दी जा रही है। अगर हमारे मुल्क में कानून नहीं होगा तो मुश्किल हो सकती है। देश मुश्किल में पड़ जाएगा।”

कुछ प्रदर्शनकारियों ने इस फैसले के लिए नेताओं को दोषी बताया। वहीं कुछ ने माँग की कि शरिया को वापस से वैसे ही राज्य में लागू किया जाए जैसे वो पहले था। उसमें कोई बदलाव न हो।

गौरतलब है कि मलेशिया में 1990 से कट्टरपंथी पैन मलेशियाई इस्लामिक पार्टी या PAS का राज है। वहाँ दो स्तरीय कानून प्रणाली चलती है। इसके तहत शरिया के तहत मुस्लिमों के व्यक्तिगत और पारिवारिक मामले आते हैं और साथ ही यहाँ सिविल कानून भी चलता है। जिस राज्य की अदालत ने इस फैसले को सुनाया है वहाँ की 97 फीसद आबादी मुस्लिमों की है।

‘पानी की बोतलों में पेट्रोल भरकर किए हमले, महिला पुलिसकर्मियों के फाड़े कपड़े’: हल्द्वानी में घायलों की सेवा के लिए आगे आया ‘बजरंग दल’

हल्द्वानी में अवैध मदरसा-मस्जिद को कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन बुलडोजर लेकर ध्वस्त करने पहुँचा तो भीड़ उग्र हो गई। पत्थरबाजी की गई, गोलीबारी की गई, बनभूलपुरा थाना व पेट्रोल पंप फूँक दिया गया, गाड़ियाँ क्षतिग्रस्त कर दी गईं और बुलडोजर का शीशा भी फोड़ दिया गया। पुलिसकर्मियों को ज़िंदा जलाने का प्रयास भी किया गया। हिन्दू कार्यकर्ताओं ने इस दौरान पीड़ितों की सहायता की, पुलिस की मदद की। कई महिला पुलिसकर्मियों को भी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

इस घटना के चश्मदीद रहे ‘बजरंग दल’ के एक कार्यकर्ता ने ऑपइंडिया से बातचीत कर के आँखों देखा हाल बताया। हल्द्वानी के रहने वाले जोगिन्दर सिंह राणा ने इसे एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना करार दिया। उन्होंने बताया कि जब से उन्होंने होश सँभाला है, तब से ऐसी घटना नहीं देखी। उन्होंने बताया कि 1992 में बाबरी ढाँचे के विध्वंस के समय दंगे भड़के थे, लेकिन तब भी ऐसी हिंसा नहीं हुई थी। उन्होंने बताया कि पुलिस पर पथराव किया गया, महिला सिपाहियों के कपड़े तक फाड़ डाले गए।

उन्होंने बताया कि कैसे बनभूलपुरा थाने और पेट्रोल पंप को आग के हवाले कर दिया। उन्होंने इसे भय पैदा करने वाली घटना करार दिया। जोगिन्दर सिंह राणा ने बताया कि गुरुवार (8 फरवरी, 2024) को रात के 10 बजे पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों से उनकी बातचीत हुई थी, तब उनका कहना था कि हल्द्वानी के 4 अस्पतालों में 100-150 गया पुलिसकर्मी भर्ती थे। हिन्दू कार्यकर्ताओं से पुलिस-प्रशासन ने निवेदन किया कि वो घायल पुलिसकर्मियों की देखरेख करें।

‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ता ने बताया कि पुलिस से मुठभेड़ उस समय चल ही रही थी और उनलोगों का अस्पतालों में जाना खतरे से खाली नहीं था, लेकिन रात डेढ़ बजे तक वो लोग सेवाएँ देते रहे। उन्होंने कहा कि वो इस कारण चिंतित थे क्योंकि कुछ ही महीनों पहले नूँह में हिंसा हुई थी और जिहादियों ने अस्पताल में घुस कर भी पुलिस वालों को मारने का प्रयास किया था। इसीलिए, अस्पताल में हिन्दू कार्यकर्ता न सिर्फ सेवा कर रहे थे बल्कि सुरक्षा भी कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि ऐसी कोई विकट परिस्थिति आती तो हर हिन्दू कार्यकर्ता इससे निपटने में सक्षम था। उन्होंने कहा कि अगर आप पीड़ित हैं तो आप प्रशासन से शिकायत कर सकते हैं, लेकिन इन्होंने पुलिस पर हमले का रास्ता चुना जो लोकतंत्र पर हमला है। उन्होंने बताया कि कैसे महिला सिपाही रो रही थीं, कह रही थीं कि कैसे वो जान बचा कर भागीं। कइयों ने कुछ घरों में घुस कर जान बचाई। जोगिन्दर सिंह राणा ने इस दौरान वाल्मीकि समाज के लोगों की तारीफ़ करते हुए कहा कि स्थानीय वाल्मीकि लोगों ने पुलिस के साथ मिल कर काम किया।

हालाँकि, इस दौरान उन्होंने बाहर से यहाँ आकर बसने वालों के सत्यापन की माँग भी उठाई। उन्होंने बताया कि कैसे प्लास्टिक व काँच की बोतलों में पेट्रोल डाल कर बम बनाया गया। पुलिस वालों से मैगजीन भी छीन ली गई। कूड़े में पड़े बोतलों से पेट्रोल बम बनाया गया। उन्होंने बताया कि कूड़े के कारोबार करने वाले वही लोग हैं। ‘सभी मुस्लिम एक जैसे नहीं होते’ वाले नैरेटिव पर उन्होंने कहा कि उन्होंने पुलिस पर हमला करने वालों में इन सभी को शामिल देखा।

उन्होंने बताया कि कैसे बनभूलपुरा थाने में तैनात एक घायल मुस्लिम अधिकारी की सेवा ‘बजरंग दल’ वालों ने की, साथ ही उन्हें घर भी छोड़ा। जोगिन्दर सिंह राणा कहा, “अगर पुलिस वाले या वाल्मीकि समाज के लोग इन्हें नहीं रोकते तो स्थिति और ख़राब होती। 5-6 हजार लोगों की भीड़ थी। इतनी कम समय में इतनी मात्रा में पेट्रोल या पत्थर इकट्ठा कैसे हुआ, इसकी जाँच होनी चाहिए।” साफ़ है, हिन्दू कार्यकर्ताओं ने अपनी जान पर खेल कर पुलिस वालों का इलाज कराया, उनकी सुरक्षा भी की।

एक अन्य चश्मदीद दीपांशु ने ऑपइंडिया से बताया कि महिला कॉन्स्टेबल रो रही थीं, बता रही थीं कि उन्हें चोट लगी है। उन्होंने कहा, “सोचिए, किसी व्यक्ति के ऊपर ईंट पड़ेगी तो वो कितना रोएगा। बहुत दर्दनाक मंजर था। हमलावर छत से पत्थर फेंक रहे थे, टंकी में पानी की जगह पत्थर भरे थे। वीडियो सर्वे में कोई पत्थर नहीं मिला था, वो छिपा कर रखे गए थे। VHP और ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ताओं ने ब्लड डोनेट किया। इसमें प्रशासन की कोई गलती नहीं है। सरकारी आदेश पर वो ड्यूटी करने आए थे।”

राम मंदिर बनाकर पीएम मोदी ने इतिहास रचा है: अमित शाह, बोले-जो राम के बिना भारत की कल्पना करते हैं, वो भारत को नहीं जानते

राम मंदिर पर बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि 22 जनवरी 2024 का दिन 1528 में शुरू हुए एक संघर्ष और एक आंदोलन के अंत का दिन है। देश की संस्कृति और रामायण अलग नहीं है। गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में कहा, ‘मैं आज अपने मन की बात और देश की जनता की आवाज को इस सदन के सामने रखना चाहता हूँ। जो वर्षों से कोर्ट के कागजों में दबी हुई थी।’ उन्होंने कहा कि 22 जनवरी 2024 का दिन सहस्त्रों वर्षों के लिए ऐतिहासिक बन गया है। जो इतिहास और ऐतिहासिक पलों को नहीं पहचानते, वो अपने अस्तित्व को खो देते हैं।

बजट सत्र के आखिरी दिन लोकसभा में राम मंदिर पर चर्चा हुई। इस दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा कि 22 जनवरी पूरे भारत के लिए आध्यात्मिक चेतना का दिन है। यह सदियों के लिए ऐतिहासिक और जीत का दिन है। यह न्याय की लड़ाई की जीत का दिन है। ये 1528 में शुरू हुए एक संघर्ष और एक आंदोलन के अंत का दिन है। देश की संस्कृति और रामायण अलग नहीं है।

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, “राम के बिना देश की कल्पना नहीं की जा सकती है। अमित शाह ने इस दौरान बिना नाम लिए विपक्ष पर भी निशाना साधा। राम मंदिर पर सवाल खड़े करने वाले नेताओं को लेकर उन्होंने कहा कि जो ऐतिहासिक पलों को नहीं पहचानते, वो अस्तित्व खो देते हैं।’ गृह मंत्री ने विपक्षी दलों से राम मंदिर को किसी धर्म से नहीं जोड़ने का आग्रह भी किया।

गृहमंत्री शाह ने कहा, “ये दिन मां भारती विश्व गुरु के मार्ग पर ले जाने को प्रशस्त करने वाला दिन है। इस देश की कल्पना राम और रामचरितमानस के बिना नहीं की जा सकती। राम का चरित्र और राम इस देश के जनमानस का प्राण है। जो राम के बिना भारत की कल्पना करते हैं, वो भारत को नहीं जानते। हमने राम मंदिर निर्माण का वादा किया था उसे पूरा किया। पीएम मोदी ने जन आकांक्षाओं को पूरा किया है। पीएम ने सही राजनेता होने का परिचय दिया। गृहमंत्री ने कहा कि 1528 के बाद से हर पीढ़ी ने किसी न किसी रूप में इस आंदोलन को देखा है। यह मामला लंबे समय तक अटका रहा, लेकिन मोदी सरकार के समय यह सपना पूरा किया गया।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल क्यों?

राम मंदिर पर चर्चा के दौरान अमित शाह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद राम मंदिर का निर्माण शुरू हुआ। आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल क्यों खड़े हो रहे हैं। राम मंदिर कानून के मुताबिक बना है। गृहमंत्री ने कहा, “2014 से 2019 तक लंबी कानूनी लड़ाई चली। निहंगों ने लड़ाई शुरू की थी। आडवाणी जी ने सोमनाथ से अयोध्या के लिए यात्रा निकाली, जनजागृति फैलाई। अशोक सिंघल जी इसे चरम सीमा पर ले गए और आखिर में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मोदी जी ने जनआकांक्षा की पूर्ति की। कोई एक देश अपने बहुसंख्यक समाज की धार्मिक विश्वास की पूर्ति के लिए धैर्य रखकर सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाता रहे, यह बात देश के लोकतांत्रिक इतिहास में लिखी जाएगी।”

इस दौरान अमित शाह ने कॉन्ग्रेस के नेताओं पर चुटकी ली। उन्होंने लोकसभा में बोलते हुए कहा, “हमारे गुजरात में एक कहावत है- हवन में हड्डी नहीं डालनी चाहिए। पूरा देश जब आनंद में डूबा है, भैया स्वागत कर लो। इसी में देश का भला है।”

Those who imagine India without Ram, do not know India, says Amit Shah

‘पानी की टंकी में भर रखे थे पत्थर, अल्लाहू अकबर का नारा लगा रही थी दंगाई भीड़’: हल्द्वानी में चश्मदीद ने जो देखा, सब कुछ ऑपइंडिया को बताया

उत्तराखंड के हल्द्वानी में कोर्ट के आदेश के बाद अवैध संरचनाओं को ध्वस्त करने के लिए प्रशासन बुलडोजर लेकर पहुँचा, लेकिन मुस्लिम भीड़ उग्र हो गई और उसने पत्थरबाजी शुरू कर दी। इसके बाद हिंसा, आगजनी और गोलीबारी का दौर चला। थाना और पेट्रोल पंप फूँक दिया गया। वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। घटना के बीच एक शख्स का वीडियो भी वायरल हुआ था, जो बाइक पर बैठा हुआ है। उसने पत्थरबाजी के बीच वीडियो बना कर बताया था कि क्या हो रहा है।

वीडियो में वो कहता दिख रहा है कि जब पुलिस के जवानों पर पथराव हो सकता है तो आप और हम क्या हैं। वीडियो में वो कहता है, “ये है भाईचारा। आइए, भाईचारा दिखाता हूँ आपको।” उसने कैमरे में दिखाया कि कैसे पुलिस पर पत्थरबाजी हो रही है। ऑपइंडिया ने वायरल वीडियो में दिख रहे शख्स को ढूँढ निकाला है। उसका नाम दीपांशु है। दीपांशु ने ऑपइंडिया से बात करते हुए बताया कि ये वीडियो गुरुवार (8 फरवरी, 2024) को शाम 5 बजे के बाद का है।

उन्होंने बताया कि वो मौके पर ही मौजूद थे, वो कहीं से आ रहे थे और अफरा-तफरी का माहौल देख कर उन्हें पता चला कि अवैध मस्जिद-मदरसा पर बुलडोजर चलाने के कारण भीड़ ने हमला कर दिया गया। बकौल दीपांशु, उन्होंने देखा कि 100-150 की संख्या में महिला कर्मचारी खुद की जान बचाती हुई हेलमेट पहन कर भागती हुई आ रही थीं। उन्होंने बताया कि उनमें से कई घायल थीं, जिनमें से कुछ को उनलोगों ने अस्पताल छोड़ा। दीपांशु ने बताया कि उन्होंने खुद घायलों को पानी पिलाया और अस्पताल छोड़ा।

‘पुलिस वालों को मुस्लिम पानी पिला रहे थे’ – इस नैरेटिव पर दीपांशु ने कहा कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं देखा है, मुस्लिम तो पत्थर चला रहे थे। दीपांशु ने कहा कि सरकारी विभाग के अधिकतर अधिकारी चोटिल थे, किसी के सिर, किसी के पाँव तो किसी के हाथ से खून निकल रहा था। दीपांशु ने बताया कि उन्हें देख कर बड़ा दुःख हो रहा था कि जब वर्दी वाले ही पीड़ित हैं तो आम लोग क्या हैं, वो रो-तड़प रहे थे। उन्होंने कहा कि जो लोग हिन्दू-मुस्लिम भाईचारा की बात करते हैं, उनके लिए उन्होंने वीडियो बताया।

दीपांशु ने बताया कि महिला कॉन्स्टेबल रो रही थीं, बता रही थीं कि उन्हें चोट लगी है। उन्होंने कहा, “सोचिए, किसी व्यक्ति के ऊपर ईंट पड़ेगी तो वो कितना रोएगा। बहुत दर्दनाक मंजर था। हमलावर छत से पत्थर फेंक रहे थे, टंकी में पानी की जगह पत्थर भरे थे। वीडियो सर्वे में कोई पत्थर नहीं मिला था, वो छिपा कर रखे गए थे। VHP और ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ताओं ने ब्लड डोनेट किया। इसमें प्रशासन की कोई गलती नहीं है। सरकारी आदेश पर वो ड्यूटी करने आए थे।”

दीपांशु ने बताया कि ‘अल्लाहु अकबर’ के नारे लग रहे थे। उन्होंने बताया कि कॉन्ग्रेस विधायक सुमित हृदयेश अब भी दंगाइयों के साथ हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस-प्रशासन ने किसी को टॉर्चर नहीं किया, उलटे उन्हें राक्षसों की तरह मारा गया। दीपांशु फोटोग्राफी की दुकान चलाते हैं। बता दें कि हल्द्वानी की डीएम वंदना सिंह ने बताया था कि पुलिस वालों को ज़िंदा लगाने की कोशिश की गई थी। घटना के बाद हल्द्वानी के बनभूलपुरा में कर्फ्यू लगा दिया गया और दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश जारी किए गए।

‘अगर CM योगी बंगाल आए तो वापस नहीं जाने देंगे’: ज्ञानवापी में पूजा पर TMC मंत्री सिद्दीकुल्लाह ने दी धमकी, कहा- मस्जिद खाली करो

वाराणसी के जिला कोर्ट द्वारा हिंदुओं को व्यास तहखाने में पूजा का अधिकार मिला तो कई लोग नाराज हो गए। इस लिस्ट में ममता बनर्जी के मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी का भी नाम है। उन्होंने हाल में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धमकी दी है।

सिद्दीकुल्लाह ने एक रैली में कहा कि अगर सीएम योगी बंगाल आए तो वो लोग उनका घेराव करेंगे और उनको वापस नहीं जाने देंगे। तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेता ने यूपी सीएम को धमकी देने के साथ माँग की है कि ज्ञानवापी में हिंदुओं को पूजा न करने दिया जाए।

उन्होंने कहा, “कोर्ट की मदद से ये लोग जबरदस्ती मस्जिद में पूजा कर रहे है। उनको (योगी आदित्यनाथ) अकल है या नहीं? अगर वो बंगाल आए तो हमारा संगठन उन्हें घेरेगा और उन्हें बंगाल से जाने नहीं दिया जाएगा। हमें ज्ञानवापी खाली चाहिए। हम तो किसी मंदिर में नहीं जाते इबादत करने। तो हमारी मस्जिदों में क्यों आ रहे हैं। मस्जिद तो मस्जिद है। ज्ञानवापी मस्जिद को खाली करें तुरंत।”

बंगाल में सिद्दीकुल्लाह ने यह बयान जमीयत उलेमा-ए-हिंद की एक सभा में दिया और कहा कि ज्ञानवापी मस्जिद वहाँ पर 800 सालों से है वो कैसे उसे ध्वस्त कर सकते है।

ममता बनर्जी के मंत्री सिद्दीकुल्लाह के हिंदूविरोधी बयान

बता दें कि पहली बार ममता बनर्जी के मंत्री ने इस तरह हिंदूविरोधी बयान नहीं दिया। 2021 में इसी मंत्री ने कहा था बंगाल में गायों को कटने से कोई नहीं रोक सकता। टीएमसी मंत्री ने कहा था, “उत्तर प्रदेश सीएम योगी आदित्यनाथ यहाँ आए और कह गए कि अगर उनकी सरकार आई तो गौकशी नहीं होगी।”

इस पर उन्होंने कहा था, “गौकशी बंगाल में 1000-1200 सालों से होती आई है। हर कोई बीफ खाता है। मुस्लिम और अन्य भी। बीफ का वोट से क्या लेना देना। ये हिंदूवादी मानसिकता को बढ़ाने का प्रयास कर सकती है।” उन्होंने राम मंदिर फैसले पर भी कहा था कि इससे पीएम मोदी की छवि खराब होगी।

सिद्दीकुल्लाह वही व्यक्ति हैं जिन्होंने सितंबर 2018 में कुरान को संविधान से ऊपर बताते हुए तीन तलाक पर लगे प्रतिबंध के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त की थी। इसके अलावा वह ममता बनर्जी के उस कमेटी का भी हिस्सा थे जो टीएमसी ने सागरदिघि में करारी हार के बाद बनाई गई थी। इस कमेटी का उद्देश्य यही पता लगाना था कि जब ममता सरकार मुस्लिमों के लिए इतनी स्कीमें चला रही है तो फिर उन्हें वोट क्यों नहीं मिला।

सबसे ज़्यादा सीटें नवाज़ की पार्टी को, लेकिन उम्मीदवार सबसे ज़्यादा जीते इमरान के: पाकिस्तान में नतीजों के बाद जोड़तोड़ शुरू, दोनों पक्ष कर रहे जीत के दावे

पाकिस्तान में आम चुनावों के परिणाम घोषित होने के साथ ही सत्ता के लिए गठबंधन बनाने व जोड़-तोड़ की प्रक्रिया शुरू हो गई है। पाकिस्तान में आम चुनावों के साथ-साथ प्रांतीय चुनाव भी हुए हैं। शुक्रवार (9 फरवरी, 2024) को देर रात तक कई राजनीतिक दलों की बैठकें चलीं। PML-N के के नवाज़ शरीफ ने कहा है कि उन्होंने अपने भाई शाहबाज़ को गठबंधन के लिए बातचीत की जिम्मेदारी दी है। दोनों भाई पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रह चुके हैं।

भुट्टो-जरदारी परिवार के PPP और सिंध में दखल रखने वाली MQM-P के साथ शरीफ भाइयों की बातचीत चल रही है। बिलावल भुट्टो और आसिफ अली ज़रदारी लाहौर पहुँचे हुए हैं। दोनों की शाहबाज़ शरीफ के भाई के साथ बैठक हुई। शाहबाज़ शरीफ ने MQM-P के संयोजक डॉ खालिद महमूद सिद्दीकी से भी बात की। उनकी पार्टी फ़िलहाल अज़ीज़ाबाद के जिन्ना ग्राउंड में जीत का जश्न मनाने में मशगूल है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के पास ब्रीफकेस नहीं है, लेकिन सभी निर्दलीय विजेताओं का स्वागत है।

अब तक की बातचीत से साफ़ है कि पाकिस्तान में शरीफ ब्रदर्स की PML-N और भुट्टो-जरदारी परिवार की PPP मिल कर सरकार बनाने की कोशिश करेगी। पाकिस्तान के पंजाब प्रान्त में भी इन दोनों दलों की ही सरकार होगी। पाकिस्तान में किसी को भी स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, ऐसे में सरकार का स्वरूप कैसा होगा इस पर काफी संशय है। PTI के कई उम्मीदवार निर्दलीय लड़ कर जीते हैं, ऐसे में उन्हें भी अलग-अलग पार्टियाँ अपने पाले में लुभाने में जुटी हुई हैं।

पाकिस्तान में 266 में से जिन 246 सीटों के नतीजे आए हैं, जिसमें से 91 पर PTI और उसके निर्दलीय कैंडिडेट्स जीते हैं। PML-N 71 सीटें जीत कर सबसे बड़ी पार्टी बनी है, वहीं PPP ने 51 सीटें अपने नाम की हैं। नॉर्थ वजीरिस्तान में गोलीबारी भी हुई है, जिसमें नेशनल एसेम्ब्ली का एक पूर्व सदस्य घायल हो गया। उधर इमरान खान को 12 मामलों को जमानत मिल गई है। हालाँकि, वो अभी जेल में ही रहेंगे। उनकी बहन ने कहा है कि फ़ौज उनकी हत्या कराना चाहती है।

चौधरी चरण सिंह की सरकार की तरह काम करती है मोदी सरकार: जयंत चौधरी, बोले-डील नहीं, विश्वास की वजह से आया बीजेपी के साथ

संसद के बजट सत्र का शनिवार (10 फरवरी 2024) को राम मंदिर और चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दिए जाने पर चर्चा की गई। इस दौरान संसद में संसद में राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष जयंत चौधरी ने भी अपनी बात रखी। इस दौरान राज्यसभा में जयंत चौधरी ने कहा कि मोदी सरकार में चौधरी साहब की झलक दिखती है। जब जयंत चौधरी बोल रहे थे, तो उस समय कॉन्ग्रेस नेताओं ने व्यवधान भी डाला, जिसपर जयंत ने जोरदार जवाब दिया।

राज्यसभा में जयंत सिंह जब बोल रहे थे, उस समय काफी हंगामा भी देखने को मिला। जब वो बोल रहे थे, तो कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने उनपर आरोप लगाए। यही नहीं, इस दौरान कॉन्ग्रेस के नेता प्रमोद तिवारी और जयराम रमेश भी बोल रहे थे, जिसपर सभापति जगदीप धनखड़ ने नाराजगी भी जताई। दरअसल, आज (10 फरवरी 2024) को बजट सत्र के आखिरी दिन जयंत चौधरी सत्तापक्ष की तरफ बैठे नजर आए, जिसके बाद उन्हें कॉन्ग्रेस ने घेरने की कोशिश की और उनपर ‘डील’ करने का आरोप लगाया।

डील के आरोपों पर बोलते हुए जयंत चौधरी ने कहा, “कॉन्ग्रेस ने जो किया उससे उनको हानि ही पहुँचेगी। कोई व्यक्ति अगर चौधरी साहब पर कुछ बोलना चाहता है उसे रोका जाएगा तो गाँव के लोग और किसान आहत ही होगा। कॉन्ग्रेस के पास बहुत मौका था लेकिन उन्होंने पहले चौधरी साहब को सम्मान क्यों नहीं दे दिया। जहाँ तक बात रही बीजेपी के साथ डील की, तो वह डील नहीं विश्वास की बात है।”

आरएलडी सांसद जयंत चौधरी ने कहा, “मैं 10 साल तक विपक्ष में रहा हूँ, कुछ समय के लिए इस सदन के इस तरफ बैठा हूँ, मौजूदा सरकार की कार्यशैली में भी चौधरी चरण सिंह के विचारों की झलक मिलती है। पीएम मोदी गाँव में शौचालयों के मुद्दों को संबोधित करते हैं, जब भारत सरकार महिला सशक्तिकरण को अपना मंच बनाती है और गाँवों में जागरूकता पैदा करती है, तो मुझे इसमें चौधरी चरण सिंह जी का उद्धरण याद आता है।”

आरएलडी सांसद जयंत चौधरी ने कहा, “मेरा मानना ​​है कि पीएम मोदी और भारत सरकार ने चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दिया है, इससे दो बड़े काम हुए हैं, एक तो यह कि हम चौधरी चरण सिंह की विरासत को फिर से स्थापित कर रहे हैं…मेरा मानना ​​है कि यह सिर्फ एक पुरस्कार नहीं, सबसे बड़ा सम्मान है। एक जमीनी सरकार, जो जमीन की आवाज को समझती है और उसे ऊपर उठाना चाहती है, ऐसी सरकार ही धरती पुत्र चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न दे सकती है।”

उन्होंने आगे कहा, “मोदी सरकार में चौधरी साहब की झलक दिखती है। चौधरी साहब सिर्फ जाटों या किसानों के नेता नहीं थे। वह एक विचारक थे। चौधरी साहब को सम्मान मिलने के बाद झोपड़ी में पैदा होने वाला बच्चा भी सोचता है कि जब चौधरी चरण सिंह को सम्मान मिल सकता है तो उसे भी मिल सकता है। मैं इसके लिए मोदी सरकार को बधाई देता हूँ।”

बता दें कि भारत सरकार ने चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न सम्मान देने की घोषणा की। इसके बाद आरएलडी एनडीए के साथ आ गई। इसी के तहत वो 10 साल में पहली बार सत्ता पक्ष की तरफ बैठे। इत्तेफाक से ये संसद के बजट सत्र का आखिरी दिन था।

हल्द्वानी में अवैध हथियारों से लैस थे दंगाई, सपा नेता का भाई जावेद गिरफ्तार

हल्द्वानी हिंसा के बाद वहाँ पुलिस प्रशासन लगातार स्थिति को सामान्य करने की कोशिशों में जुटा है। ज्यादातर जगहों पर हालात नियंत्रित करके कर्फ्यू हटा लिया गया है। लेकिन बनभूलपुरा में अब भी कर्फ्यू लगा है। इस बीच पुलिस ने हिंसा भड़काने के मामले में समाजवादी पार्टी के नेता मतीन सिद्दीकी के भाई जावेद सिद्दीकी को गिरफ्तार किया है।

जाँच के दौरान हिंसा के मास्टरमाइंड अब्दुल मलिक के नाम का भी खुलासा हुआ है। उसी के कब्जे में वो जमीन थी जहाँ से अवैध मस्जिद हटाई गई है। इसके अलावा जाँच में 1 और समाजवादी पार्टी नेता का नाम भी सामने आया है। इनमें एक का नाम अरशद अयूब है। बनभूलपुरा का पार्षद जीशान परवेज भी पुलिस की निगाह में है।

दंगाइयों को पकड़ने की कार्रवाई शुरू हो गई है। सीसीटीवी की मदद से दंगाइयों की पहचान की जा रही है। ड्रोन से इलाकों में निगरानी रखी जा रही। स्थिति संभालने के लिए भारी पुलिस बल तैनात है। इस बीच मीडिया में मृतकों के साथ हुई वीभत्सता को लेकर कई खुलासे हुए हैं।

पता चला है कि दंगाई भीड़ सड़कों पर अवैध असलहों के साथ उतरी थी, जिनसे उसने कई निर्दोषों को मौत के घाट उतार दिया। अब उन मृतकों के परिजनों की रोती-बिलखती तस्वीरें आ रही है। एक वीडियो में महिला रोते हुए बता रही हैं कि उनका बेटा अजय दवाई लेने गया था लेकिन उसे गोली मार दी गई।

इसके अलावा बनभूलपुरा में जिन 5 लोगों की मौत हुई, सबकी वजह गोली लगने के कारण ही बताई जा रही है। इनमें कुछ मुस्लिम भी हैं। इसके कारण एक गिरोह इस खबर को ऐसे फैला रहा है जैसे पुलिस की गोलियों से ये घटना हुई, जबकि हकीकत ये है कि दंगे के दौरान अधिकांश पुलिस के पास लाठी-डंडे थे। वहीं दूसरी ओर दंगा करने वालों के पास ईंट-पत्थर, पेट्रोल, अवैध असलहे आदि थे।

पुलिस अब इन दंगाइयों पर सख्त है। 5 लोगों की मौत, 3 लोगों के गंभीर रूप से घायल होने और कई पुलिकर्मियों के चोटिल होने के मामले में पुलिस ने 3 एफआईआर दर्ज करके पत्थरबाजों की तलाश की जा रही है। खबर ये भी है कि कई लोग पुलिस का सख्त रवैया देख गायब हो रहे हैं। ऐसा देख वन विभाग को आशंका है कि कहीं ये गायब होते लोग आरक्षित वन क्षेत्र या फिर अतिक्रमण वाले इलाकों में छिपने न पहुँच जाएँ।

इसे लेकर गौला रेंज यानी बनभूलपुरा के नजदीकी जंगलों में वन विभाग ने गश्त भी की। हालाँकि कोई संदिग्ध नहीं पकड़ा गया। लेकिन फिर भी वनकर्मियों की टीम ने आंवला चौकी, इंदिरानगर, लालकुआं, बागजाला, गौलापुल, बागजाला से लेकर दानीबंगर तक के जंगलों में गश्त की। रेंजर गौला चंदन अधिकारी ने बताया कि वन क्षेत्र की सुरक्षा और संदिग्धों की घुसपैठ रोकने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएँगे।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, इस हिंसा के बाद वन विभाग भी अपनी एक बार फिर अतिक्रमण के खिलाफ अपनी रिपोर्ट बना रहे हैं। उन्होंने पूर्व में भी ऐसा प्रयास किया था लेकिन बीच में कार्रवाई रुक गई। मगर सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि इस हिंसा के बाद फिर से अतिक्रमण के विरुद्ध अभियान चलाने के लिए रिपोर्ट तैयार होने लगी है।

(प्रकाश कुमार की हत्या से जुड़े तथ्य सामने आने के बाद यह खबर संशोधित की गई है।)