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नहीं धराया है हल्द्वानी दंगों का मुख्य साजिशकर्ता अब्दुल मलिक, नैनीताल पुलिस ने उसे पकड़े जाने वाली खबरों को नकारा

उत्तराखंड के हल्द्वानी में हुए दंगों का मुख्य साजिशकर्ता अब्दुल मलिक अभी नहीं गिरफ्तार हुआ है, नैनीताल पुलिस ने ये साफ़ किया है। क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में है और पुलिस व सुरक्षा एजेंसियाँ अब दंगाइयों की धर-पकड़ में लग गई है। बनभूलपुरा में 5 दंगाइयों को गिरफ्तार किया गया है। इसमें एक समाजवादी पार्टी के एक नेता का भाई है, 2 निवर्तमान पार्षद हैं और एक खनन कारोबारी भी शामिल है। इस हिंसा के मुख्य साजिशकर्ताओं में एक अब्दुल मलिक का नाम सामने आया।

अब्दुल मलिक हिंसा के बाद से फरार है। 75 से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। हिंसा में जिन महिलाओं को आगे किया गया था, उन्हें भी चिह्नित किया जा रहा है। 19 नामजद और 5000 अज्ञातों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। आरोपित जावेद सिद्दीकी का भाई अब्दुल मतीन सपा का उत्तराखंड प्रदेश प्रभारी है। लाइन नंबर 16 का पार्षद महबूब आलम और लाइन नंबर 14 इंद्रानगर निवासी जीशान परवेज पार्षद हैं।

वहीं खनन कारोबारी अरशद अय्यूब लाइन नंबर 12 में रहता है। असलम चौधरी डेयरी संचालक है और लाइन नंबर 3 में उसका घर है। ये सब वो हैं जिन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। पाँचों को रिमांड पर लेकर उनसे पूछताछ की जा रही है। अब्दुल मलिक ने ही मलिक बगीचा पर अवैध कब्ज़ा कर के निर्माण करवाया था, जहाँ स्थित अवैध मस्जिद-मदरसे को ध्वस्त करने प्रशासन आया तो हिंसा भड़की। इस कार्रवाई का सबसे ज्यादा विरोध अब्दुल मलिक ही कर रहा था।

फरार अब्दुल मलिक को पकड़ने के लिए पुलिस दबिश दे रही थी, जिसमें अभी तक सफलता नहीं मिली है। उसके खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने, जमीन पर कब्ज़ा करने, लोगों को भड़काने और साजिश रचने समेत कई धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। उसने ही अवैध मदरसे और नमाज स्थल का निर्माण करवाया था। नगर निगम ने 8 महीने पहले भी मलिक का बगीचा नाम स्थान पर अवैध निर्माण तोड़े थे। यहाँ छोटे-छोटे प्लॉट बना कर बेच दिए गए, मकान खड़ा कर दिया गया।

28 दिसंबर, 2023 को सिटी मजिस्ट्रेट ऋचा सिंह से किसी ने अवैध कब्जे और निर्माण की शिकायत की थी। फिर नगर आयुक्त तक बात पहुँची। नगर आयुक्त गणेश भट्ट के नेतृत्व में 28 दिसंबर को ही अतिक्रमण हटाया गया था। नमाज स्थल और मदरसा हटाने की तैयारी शुरू की गई, बात उच्च न्यायालय तक पहुँची। जब नगर निगम की टीम पहुँची तो हिंसा हो गई। अब्दुल मलिक की गिरफ़्तारी के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी 2 टीमें भेजी गई थीं।

अपडेट: मीडिया रिपोर्ट के आधार पर पहले हमने अब्दुल मलिक की गिरफ्तारी की खबर पब्लिश की थी। नैनीताल के SSP की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद हल्द्वानी दंगों के मुख्य साजिशकर्ता की गिरफ्तारी वाली बात गलत निकली। इसी आधार पर हमने इस रिपोर्ट को अपडेट किया है।

बॉर्डर पर 2000 ट्रैक्टर + 25000 किसानों की प्लानिंंग और हिंसा: PM आवास के सामने धरना देने का दर्जनों बार रिहर्सल, खुफिया रिपोर्ट में दावा

लोकसभा का चुनाव नजदीक आते ही किसान के नाम पर राजनीति और सरकार को डराने के लिए राजधानी दिल्ली को बंधक बनाने की साजिश रची जाने लगी है। इस काम को पूरी योजना के साथ अंजाम दिया गया है। पंजाब और हरियाणा के करीब 23 किसान संगठनों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य कानून और एमएस स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की माँग को लेकर 13 फरवरी को दिल्ली कूच का ऐलान किया है। इसको लेकर खुफिया एजेंसियाँ भी सतर्क हैं।

किसानों के आंदोलन को लेकर एक खुफिया रिपोर्ट भी सामने आई है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि इस आंदोलन के लिए कई महीने पहले से ही तैयारी शुरू हो चुकी थी। कुछ किसान गुपचुप तरीके से प्रधानमंत्री, गृहमंत्री, कृषि मंत्री और भाजपा के अन्य बड़े नेताओं के घर के बाहर डेरा डाल सकते हैं। दिल्ली में घुसने के लिए वे बच्चों और महिलाओं को आगे कर सकते हैं।

इतना ही नहीं, ट्रैक्टर मार्च निकालने के लिए कथित किसान 40 रिहर्सल कर चुके हैं। इनमें पंजाब में 30 रिहर्सल और हरियाणा में 10 किए गए हैं। सिर्फ पंजाब के गुरुरदासपुर में ही 15 रिहर्सल किए गए हैं। वहीं, किसान संगठन 100 से अधिक मीटिंग भी कर चुका है। खुफिया रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि दिल्ली के आसपास के राज्यों के ये कथित किसान कार, बाइक, रेल, बस मेट्रो आदि से दिल्ली में घुस सकते हैं।

इंटेलिजेंस रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि अगर किसानों को दिल्ली की सीमाओं पर रोका गया तो वहाँ 2 हजार से 25 हजार ट्रैक्टर एवं ट्रॉलियों के साथ 25 हजार तक प्रदर्शनकारी किसान जमा हो सकते हैं। इसके साथ ही यह भी आशंका जताई गई है कि इस दौरान पुलिस पर हमले और आगजनी भी हो सकती है। फेंसिंग, कंटेनर और क्रेन के साथ सुरक्षाबलों ने इसके लिए तैयारियाँ शुरू कर दी हैं।

पिछले आंदोलनों से सबक लेते हुए पुलिस प्रशासन इन किसानों को दिल्ली में पहुँचने से रोकने के लिए तैयारियाँ शुरू कर चुका है। दिल्ली की सीमाओं पर रास्ते को रोकने के लिए बड़े-बड़े ब्रेकर लगाए गए हैं। इसके अलावा, सड़कों पर लोहे की कील वाले चादर बिछाए गए हैं, ताकि जब किसान राजधानी में घुसने की कोशिश करें तो उन्हें रोका जा सके। वहीं, हरियाणा के सात जिलों में मोबाइल इंटरनेट पर पाबंदी लगा दी गई है।

किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा है, “एक तरफ तो सरकार हमें बातचीत का न्योता दे रही है और दूसरी तरफ हरियाणा में हमें डराने की कोशिश की जा रही है। बॉर्डर सील किए जा रहे हैं। धारा 144 लगा दी गई है। इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई है। ऐसे माहौल में बातचीत नहीं हो सकती है। सरकार इस तरफ तुरंत ध्यान दे।” दरअसल, हरियाणा के 13 जिलों में धारा 144 लागू की गई है।

दरअसल, तीन केंद्रीय मंत्री किसान नेताओं की माँगों पर विचार करने के लिए सोमवार (12 फरवरी 2024) को उनके प्रतिनिधियों के साथ बैठक करेंगे। किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने कहा कि पीयूष गोयल, अर्जुन मुंडा और नित्यानंद राय संयुक्त किसान मोर्चा (गैर राजनीतिक) और किसान मजदूर मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करने के लिए 12 फरवरी को चंडीगढ़ पहुँचेंगे।

बता दें कि हरियाणा पुलिस ने राज्य में 152 से ज्यादा जगहों पर वाहनों की जाँच के लिए चेकिंग प्वॉइंट स्थापित किए हैं। टीकरी और सिंघु बॉर्डर सहित कई स्थानों पर ड्रोन से निगरानी की जा रही है। हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने देश के गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर उन्हें किसान संगठनों के दिल्ली कूच के बारे में जानकारी दी है।

पंजाब-हरियाणा की सीमा से लगने वाले रास्तों पर पुलिस और अर्द्धसैनिक बल तैनात किए गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अर्द्धसैनिक बलों की 50 कंपनियाँ हरियाणा भेजी हैं। वहीं, रेलवे ने जीआरपी और आरपीएफ कर्मचारियों की छुट्टियों को रद्द कर दिया है। किसानों को दिल्ली कूच से रोकने के लिए हरियाणा सरकार ने कई उपाय किए हैं।

कीजिए उस चाँदी के हथौड़े और सोने की छेनी के दर्शन, जिनसे गढ़ी गई रामलला की दिव्य आँखें: अरुण योगीराज ने खुद दिखाया

मूर्तिकार अरुण योगीराज ने उस चाँदी के हथौड़े और स्वर्ण छेनी का दिव्य दर्शन कराया है, जिसका इस्तेमाल कर के रामलला की आँखें गढ़ी गई। अयोध्या में 22 जनवरी, 2024 को भगवान श्रीराम के बाल स्वरूप रामलला की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई, जिसमें खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बतौर यजमान उपस्थित थे। 3 मूर्तिकारों ने रामलला की अलग-अलग मूर्ति गढ़ी थी, जिसमें अरुण योगीराज की प्रतिमा को गर्भगृह में स्थापना के लिए चुना गया। अरुण योगीराज भारत के सबसे दक्ष मूर्तिकारों में से एक हैं।

अरुण योगीराज ने सोशल मीडिया पर उस चाँदी के हथौड़े और सोने की छेनी की तस्वीर साझा की है। तस्वीर में उनके हाथ में ये औजार देखे जा सकते हैं और सामने भगवान शिव सहित अन्य देवी-देवताओं की तस्वीरें रखी हुई हैं। उन्होंने बताया कि इन्हीं औजारों का इस्तेमाल कर के रामलला की दिव्य आँखों (नेत्रोन्मीलन) को गढ़ा गया है। लोगों ने उनसे कहा कि ये आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा का कार्य करेगा कि इन छोटे-छोटे औजारों का इस्तेमाल कर के उन्होंने क्या गढ़ा है।

बता दें कि रामलला की प्रतिमा को कृष्णशिला से गढ़ा गया है। आँखों को बनाने में श्याम शिला का इस्तेमाल किया गया है, जो नीले-काले रंग की होती है। उनके हाथ में तीर-धनुष भी देखा जा सकता है। रामलला की प्रतिमा को लेकर अरुण योगीराज ने कहा भी था कि प्रतिमा की आँखें बदल गई हैं, ये वो नहीं हैं जिन्हें उन्होंने गढ़ा था। उनके कहने का तात्पर्य था कि प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के बाद प्रतिमा में दिव्यत्व आ गया है। अरुण योगीराज ने ही केदारनाथ में जगद्गुरु शंकराचार्य और दिल्ली में सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा बनाई है।

बता दें कि अयोध्या के लिए वो सबसे उत्तम प्रतिमा बनाना चाहते थे। इस दौरान वो 6 महीने तक अपने परिवार वालों तक से नहीं मिले। अयोध्या में वो अपने कुलदेव की पूजा के साथ दिन की शुरुआत करते थे। इसके बाद वहाँ के पंडितों द्वारा की जाने वाली पूजा-अर्चना में हिस्सा लेते थे। रामकथा के विद्वानों ने उनकी मदद की, उन्हें बताया कि श्रीराम कैसे दिखते थे, उनमें आमजन क्या देखते हैं। मूर्ति बनाने के दौरान एक हादसा भी हो गया और उनकी आँख में एक पत्थर का नुकीला टुकड़ा घुस गया था। इसके बाद उनकी सर्जरी हुई। कई दिनों तक उन्हें एंटीबायोटिक और पेनकिलर्स पर रखा गया।

हल्द्वानी की मुस्लिम भीड़ को TheWire ने दिया क्लीन चिट: पैनल में कहा – मजहब के लिए पथराव करने से वे आतंकवादी नहीं बन जाते

कोर्ट के आदेश पर उत्तराखंड के हल्द्वानी में अतिक्रमण हटाने का काम शुरू हुआ था। इसके बाद इस्लामी कट्टरपंथियों ने पुलिस बल और निगम कर्मियों पर हमला कर दिया था। इस हमले में 300 से अधिक अधिकारी घायल हुए हैं। कट्टरपंथियों ने ना सिर्फ पुलिस पर पथराव किया, बल्कि उन पर पेट्रोल बम भी फेंके और वाहनों में आग लगा दी। इस घटना के बाद पुलिस आरोपितों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी में जुट गई है।

इस बीच वामपंथी, इस्लामी और लिबरल्स का रोना पीटना शुरू हो गया है। वामपंथी सिद्धार्थ वरदराजन द्वारा चलाए जा रहे प्रोपेंगेडा वेबसाइट ‘द वॉयर’ पर इस हिंसा को लेकर प्रोपेगेंडा फैलाने का काम शुरू हो गया है। इस्लामी के हमेशा पाक-साफ बताने में जुटी रहने वाली आरफा खानम शेरवानी ने हल्द्वानी हिंसा पर एक पैनल डिस्कशन का आयोजन किया गया था।

इस पैनल डिस्कशन में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने वाले और फिर उसे छुड़ाने गई पुलिस पर हमला करने वाले कट्टरपंथी मुस्लिमों को निर्दोष बताने के लिए तमाम तर्क पेश किए गए। इस पैनल डिस्कशन में आरफा खानम शेरवानी के अलावा, पत्रकार त्रिलोचन भट्ट, पत्रकार उमाकांत लखेरा और वायर के ही एक और संपादक याकूत अली शामिल थे।

आरफा अपनी तरह की एक अन्य प्रोपेगेंडा वेबसाइट स्क्रॉल की खबर का हवाला देते हुए कहती हैं कि कोर्ट के ऑर्डर के बिना पुलिस-प्रशासन मस्जिद और मदरसे को तोड़ने के लिए पहुँचा था। वो कहती हैं कि इसी सांप्रदायिक आधार पर स्टेट अपनी राजनीति करना चाहता है। सांप्रदायिक उन्माद फैलाने की नापाक कोशिश की जा रही है।

वायर के ही कर्मचारी याकूत अली हल्द्वानी के स्थानीय लोगों का हवाला देते हुए कहते हैं कि लोगों का कहना था पुलिस प्रशासन चाहते तो वह स्थानीय मुस्लिमों से बात करके मामले को सुलझा सकते थे, लेकिन सीधा बुलडोजर लेकर आ जाना और कार्रवाई की शुरुआत बेहद खराब तरीके से किया गया। वहाँ महिलाओं के ऊपर लाठी चार्ज की गईं। इन सारे संवाद को वीडियो के शुरुआती 10 मिनट में सुना जा सकता है।

हालाँकि, याकूत अली और आरफा ने ये नहीं बताया कि पुलिस ने भीड़ पर लाठी चार्ज कब किया। वे एकतरफा नैरेटिव बनाने की कोशिश कर रही हैं। दरअसल, पुलिस प्रशासन जब एक अवैध मस्जिद और मदरसे को गिराने के लिए पहुँची तो वहाँ महिलाओं और नाबालिग लड़के सामने आकर पुलिस का विरोध करने लगे। इस दौरान पुलिस पर पथराव भी किया गया। इस वजह से भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को लाठी चार्ज करनी पड़ी।

वहीं, पत्थरबाजों के पक्ष में बैटिंग करते हुए पैनलिस्ट त्रिलोचन भट्ट कहते हैं, रासुका के तहत इन पर (मुस्लिमों पर) मुकदमा दर्ज करने की तैयारी की जा रही है। सबसे बड़ी बात ये है। चलो माना कि उन्होंने पत्थरबाजी की, लेकिन एक धार्मिक स्थल को बचाने के लिए धार्मिक भावनाओं के तहत (पथराव) कर दिया होगा। तो उन पर रासुका लगाओगे? वो आतंकवादी थोड़े ही हैं। उन्हें सीधे टारगेट किया जा रहा है।” इस बयान को वीडियो में 13वें मिनट से 13:22 तक सुना जा सकता है।

पत्रकार लखेरा का कहना है कि उकसावे की कार्रवाई राज्य सरकार और प्रशासन की ओर से की गई है और उनके बिना ये हो नहीं सकती। उन्होंने स्थानीय पुलिस प्रशासन को सस्पेंड करने की माँग तक कर डाली। लखेरा कहते हैं कि नगर निगम के उन अधिकारियों को जिन्होंने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की उन्हें तत्काल सस्पेंड करना चाहिए। उनका कहना है कि सरकार अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने के लिए माहौल बना रही है।

लखेरा अपने बयान में खुद ही साबित करते हैं कि जहाँ मुस्लिम अधिक संख्या में होते हैं, वह कानून-व्यवस्था की दृष्टि से संवेदनशील हो जाता है। वे कहते हैं, “वहाँ कोई हाइवे बन रहा था? वो तो एक संकरी सी गली है। उसमें बुलडोजर लेकर जाना और लोगों को भड़काने और माहौल को खराब करने के लिए एक ऐसे एरिया को चुना जो, पहले से ही संवेदनशील है। वहाँ माइनॉरिटीज के लोग रहते हैं।” (इसे 19वें मिनट से 19.27 तक सुना जा सकता है।

मुस्लिमों को निर्दोष साबित करते हुए इसके बाद आरफा कहती हैं, “सबसे बड़ी तो इसमें यही है कि जिनके पास आप अपील कर रहे हैं, अगर वो ही एक पार्टी हों तो उन्हीं के जरिए पूरा षडयंत्र रचा जा रहा हो तो आखिर एक आम नागरिक, एक निर्दोष मुस्लिम जाए तो जाए कहाँ?” आरफा ने धर्मांतरण विरोध कानून पर भी अपनी हताशा जाहिर की।

भट्ट आगे कहते हैं कि पहाड़ी क्षेत्रों में मुस्लिमों की आबादी बेहद कम है, इसलिए उनकी छोटी-छोटी मजारें सड़कों के किनारे मिल जाएगी। वो कहते हैं, वो मजारें भी हिंदू ही बना रहे हैं और क्यों बना रहे है, उसकी वजह ये है कि पहाड़ों में स्वास्थ्य सुविधाएँ होती नहीं हैं। वहाँ के लोग ऊपर की शक्ति में विश्वास करते हैं। कोई बीमारी हो तो कहते हैं कि तुम्हें सैयद लग गया। सैयद लग गया तो छोटी-छोटी मजार बना दी जाती हैं।” (24:50 मिनट से 25:50 मिनट तक)

इस पूरे पैनल डिस्कशन में एंकर से लेकर पैनल में शामिल होने वाले लोगों ने वहाँ के मुस्लिमों को मासूम बता दिया। इसके साथ इस हमले का सारा दोष प्रशासन और राज्य सरकार पर मढ़ दिया। चर्चा के दौरान लोगों का कहना है कि चुनाव को देखकर मुस्लिमों को उकसाया गया।

राजस्थान में नौकरी के नाम पर 23 महिलाओं से गैंगरेप, कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व कमिश्नर पर आरोप: दोनों ने बताया साजिश, पुलिस कर रही जाँच

राजस्थान के सिरोही में अलग-अलग जगहों की लगभग 23 महिलाओं के साथ आँगनबाड़ी में नौकरी दिलाने के नाम पर दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। पीड़िताओं ने आरोप लगाया है कि उनका अश्लील वीडियो भी बना लिया गया है। अब उन्हें ब्लैकमेल करके 5 लाख रुपए माँगे जा रहे हैं और रेप के लिए उन्हें बुलाया जा रहा है। मामले में आरोपित पूर्व आयुक्त महेंद्र चौधरी ने इसे फर्जी बताया है।

राजस्थान की पाली जिला निवासी 8 महिलाओं ने सिरोही नगर परिषद के सभापति महेंद्र मेवाड़ा और पूर्व आयुक्त महेंद्र चौधरी के साथ उनके दोस्तों 10-15 दोस्तों एवं परिचितों के खिलाफ नशीला पदार्थ खिलाकर गैंगरेप करने और अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया है। न्यायालय के आदेश पर सिरोही के कोतवाली पुलिस थाना और जोधपुर में मामला दर्ज कराया है।

महिलाओं की शिकायत पर पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। इसके साथ ही मामले की जाँच सीओ सिरोही पारसाराम को सौंपी है। पुलिस क्षेत्राधिकारी परसाराम का कहना है कि महिलाओं ने अलग-अलग मुकदमे दर्ज करवाए हैं। दर्ज प्रकरण में अनुसंधान जारी है। वहीं, मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि सभी रिपोर्टों में एक जैसे आरोप लगाए गए हैं।

इस संबंध में ऑपइंडिया ने सिरोही की पुलिस अधीक्षक ज्येष्ठा मैत्रेयी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनका सरकारी नंबर स्वीच ऑफ मिला। वहीं, राजस्थान पुलिस की वेबसाइट पर दी सिरोही जिले के डिप्टी एसपी परसाराम चौधरी का मोबाइल नंबर ने नेटवर्क क्षेत्र से बाहर मिला। वहीं, छोटे स्तर के अधिकारी इस मामले में कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं।

पाली के सूरजपोल की रहने वाली महिला ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया कि आँगनबाड़ी में नौकरी के लिए वह 2-3 महीने पहले 15-20 महिलाओं के साथ वह पाली से सिरोही गई थी। वहाँ पर नगर परिषद सभापति महेन्द्र मेवाडा और तत्कालीन आयुक्त नगर परिषद महेन्द्र चौधरी मिले। दोनों ने उन्हें अपने परिचित के यहाँ ठहराया। वहीं पर खाने-पीने की व्यवस्था भी की गई थी।

महिला का आरोप है कि खाने में नशीला पदार्थ मिला दिया गया था। इसकी वजह से खाना खाने के बाद सभी महिलाएँ बेहोश हो गईं। इसके बाद मेवाडा और चौधरी ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर बेहोश महिलाओं के साथ गैंगरेप किया और उनके वीडियो भी बना लिए। महिलाओं को होश आया तो उनका सिर दर्द हो रहा था। जब इसके बारे में उन्होंने चौधरी से पूछा तो तब उन्होंने साजिश के बारे में बताया।

आरोप के अनुसार, मेवाडा और चौधरी ने महिलाओं से कहा, “तुम सभी से हमने खूब मजे लिए। इसके लिए ही हमने तुम लोगों को धोखे से बुलाया था।” महिलाओं ने बताया कि जब चौधरी उन्हें यह सब बता रहा था, तब इन लोगों के 10-15 दोस्त भी मौजूद थे। वे सभी जोर-जोर से हँस रहे थे। वे सभी शराब के नशे में थे और उनके सामने शराब की बाेतलें रखी हुई थीं। 

महिला का आरोप है कि यह पूरा षड्यंत्र महेंद्र मेवाडा और महेंद्र चौधरी ने अपने अन्य दोस्तों-परिचितों के साथ मिलकर रचा था। महिला ने यह आरोप लगाया है कि महेंद्र मेवाड़ा और महेंद्र चौधरी ने बेहोशी की हालत में बनाए गए अश्लील वीडियो को दिखाकर उन्हें ब्लैकमेल कर रहे हैं। उससे 5 लाख रुपए की माँग की जा रही है। इसके साथ ही फिर रेप के लिए दबाव बनाया जा रहा हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है ​कि महेंद्र मेवाडा ने नौकरी का झांसा देकर महिलाओं से खाली कागजों और स्टैंप पेपर पर साइन कराए हैं। उन कागजातों पर महिलाओं से अँगूठे के निशान भी लगवाए हैं। इसके बाद ये कागज अपने पास रख लिए है। बताते चलें कि महेंद्र मेवाड़ा कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता हैं।

इन आरोपों पर सिरोही नगर परिषद के सभापति महेंद्र मेवाडा ने कहा, “मेरे खिलाफ षडय़ंत्र रचा किया गया है। साल 2023 में भी 22 महिलाओं ने एक साथ रेप का मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें पीड़ित सामने तक सामने नहीं आए। वह आरोप भी झूठा साबित हुआ था। अब फिर से षडयंत्र रचकर मामला दर्ज कराया है। यह भी झूठा है। जाँच में सब साफ हो जाएगा।”

वहीं, पूर्व आयुक्त महेंद्र चौधरी ने भी मामले को फर्जी बताया है। उन्होंने कहा, “मैं किसी को नहीं जानता। नगर पालिका आँगनबाड़ी की नौकरी नहीं देती है। मैं अगस्त 2022 में रिटायर हो गया हूँ। सब फर्जी है। जब मुकदमा दर्ज हुआ उस समय मैं कमिश्नर ही नहीं था।”

हरियाणा के 7 जिलों में इंटरनेट बंद, बॉर्डर पर बढ़ाई गई सुरक्षा व्यवस्था: किसानों के दिल्ली कूच के बाद हरकत में प्रशासन, शांति-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा

हरियाणा में एक बार फिर से किसानों के सड़क पर उतरने के बाद 7 जिलों में इंटरनेट सेवाएँ निलंबित कर दी गई हैं। इंटरनेट के अलावा खेप में SMS भेजे जाने और डोंगल सेवाओं को भी बंद कर दिया गया है। हालाँकि, वॉइस कॉल सेवाएँ चालू रहेंगी। इन जिलों में इंटरनेट बंद किया गया है – अम्बाला, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद, हिसार, फतेहाबाद और सिरसा। रविवार (11 फरवरी, 2024) से लेकर मंगलवार को रात के 12 बजे तक ये आदेश लागू रहेगा।

बता दें कि हरियाणा में किसानों ने दिल्ली कूच का ऐलान किया है। हरियाणा के गृह मंत्रालय के एडिशन चीफ सेक्रेटरी ने ये आदेश जारी किया है। उन्होंने कहा है कि पुलिस को सूचना मिली है कि किसानों के कुछ संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन के ऐलान के बाद तनाव भड़क सकता है, सरकारी-निजी संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया जा सकता है। उन्होंने कहा है कि इसी के मद्देनजर अफवाहों पर लगाम लगाने के लिए और संदिग्ध कंटेंट्स के प्रसारण को रोकने के लिए इंटरनेट बंद करने का कदम उठाया गया है।

नोटिस में कहा गया है कि सोशल मीडिया के माध्यम से भड़काऊ सामग्रियाँ फैला कर जान-माल को क्षति पहुँचाए जाने की आशंका है। हालाँकि, बैंकिंग सेवाएँ चलती रहेंगी मोबाइल रिचार्ज भी किया जा सकेगा। अम्बाला के शंभू बॉर्डर पर किसान डेरा डाल सकते हैं, इसीलिए इससे जुड़े इलाकों में पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई है। वहाँ सीमेंट के बैरिकेड्स और कंक्रीट की दीवारें लगा दी गई हैं। किसान ट्रैक्टर लेकर इसे हटा न पाएँ, इसीलिए ये बंदोबस्त किया गया है।

शंभू बॉर्डर को पूरी तरह सील कर दिया गया है। दिल्ली-जम्मू नेशनल हाइवे पर घग्गर नदी पर एक पुल है, जहाँ दिल्ली-पंजाब वाली ट्रैफिक रहती है। पिछली बार यहीं से किसान दिल्ली में घुसे थे। इस बार इसके आसपास के इलाकों में खुदाई कर दी गई है। पूरी कोशिश की जा रही है कि किसान हरियाणा में न घुस पाएँ, क्योंकि फिर वो दिल्ली में घुस जाएँगे। किसान MSP सहित कई मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर हमलवार हैं। अब देखना है कि इस बार उनका दिल्ली कूच सफल हो पाता है या नहीं।

महाराष्ट्र: ट्वीट ने ‘अपराजित भारत’ को पहुँचाया सलाखों के पीछे, एससी/एसटी एक्ट में मामला दर्ज, 3 दिन की पुलिस हिरासत

महाराष्ट्र के मुलुंड में सोशल मीडिया पोस्ट की वजह से एक एक्स यूजर अमेय प्रधान को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने @AParaBharat नाम के एक्स हैंडल पर कुछ पोस्ट किए थे। बताया जा रहा है कि शुक्रवार (9 फरवरी 2024) की रात बिना किसी नोटिस के गिरफ्तार कर लिया गया।

ऑपइंडिया के पास मौजूद एफआईआर की कॉपी के मुताबिक, एक्स यूजर अमेय प्रधान ने भारत रत्न डॉ भीमराव आंबेडकर के खिलाफ कुछ ट्वीट पोस्ट किए थे, जिसकी वजह से उनके अनुयायियों की “धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची।” इस मामले में नासिक साइबर पुलिस स्टेशन ने उन पर एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नासिक पुलिस ने अमेय प्रधान को कोर्ट में पेश किया था, जहाँ उन्हें 3 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।

इन ट्वीट्स की वजह से जेल पहुँचे अमेय प्रधान..

ट्वीट-1: “मुझे खुशी है कि आपने स्वीकार किया कि डॉ. बीआर आंबेडकर की विचारधारा इस देश में फेल हो गई है। उन्होंने भारत को कभी नहीं देखा, उन्हें बस यही पता था कि भारत के बारे में अंग्रेजों ने इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है।”

ट्वीट-2: “उन्हें एहसास हो गया है कि 21वीं सदी में धीरे-धीरे आंबेडकर बेनकाब हो जाएँगे। इसलिए वे फर्जी कहानी को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।”

ट्वीट-3: “आंबेडकर का उल्लेख स्वतंत्रता सेनानी के रूप में क्यों किया जाता है…?”

नासिक पुलिस स्टेशन में हेमंत तायडे नाम के एक अन्य एक्स यूजर ने शिकायत दर्ज कराई थी।

एफआईआर के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने प्रधान द्वारा अपने एक्स हैंडल पर किए गए तीन पोस्ट के स्क्रीनशॉट सौंपे। शिकायतकर्ता ने कहा कि उसकी आरोपित के साथ कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है और वह किसी राजनीतिक दल से जुड़ा नहीं है।

एफआईआर में इन तीन ट्वीट्स का जिक्र किया गया है।

शिकायत में कहा गया है, “7/2/2024 को सुबह 11.30 बजे अपनी प्रोफ़ाइल @hemanttayade2 पर जाते समय, मुझे प्रकाश आंबेडकर की एक पोस्ट मिली, जिस पर अपराजित भारत नाम के एक्स यूजर ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के अपमान के साथ जवाब दिया था।” शिकायत में आगे कहा गया है कि प्रधान के पोस्ट संभावित रूप से दो समुदायों के बीच तनाव पैदा कर सकते हैं। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि आरोपित “उच्च जाति” से है।

शिकायत में कहा गया है कि, “हमारा समुदाय डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की पूजा करता है, उनका सम्मान करता है। हम उन्हें अपना भगवान मानते हैं और उनकी पूजा करते हैं। एक्स उपयोगकर्ता @Aparभारत ने दो समुदायों के बीच विभाजन पैदा करने और सामाजिक एकता को खतरे में डालने और अपने पोस्ट के माध्यम से शांति को बाधित करने का प्रयास करके मेरी और मेरे समुदाय की धार्मिक और सामाजिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई है।”

कॉन्ग्रेस को ठेंगा: ममता-नीतीश के बाद अब अरविंद केजरीवाल ने इंडी गठबंधन को दिया झटका, पंजाब-चंडीगढ़ की सभी 14 लोकसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान

आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कॉन्ग्रेस और इंडी गठबंधन को ठेंगा दिखा दिया है। उन्होंने आम आदमी पार्टी द्वारा पंजाब-चंडीगढ़ की सभी 14 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। अरविंद केजरीवाल ने शनिवार (10 फरवरी 2024) को पंजाब में इस बात का खुला ऐलान कर दिया है कि उनकी पार्टी पंजाब और चंडीगढ़ की सभी 14 (13+1) लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

इंडी गठबंधन से जुड़े होने की कसमें बार-बार खाने के बावजूद आखिरकार अरविंद केजरीवाल को इसका ऐलान करना पड़ा, क्योंकि इंडी गठबंधन की बैठकों और कॉन्ग्रेस हाई-कमान के साथ बैठकों के बावजूद कोई ठीक-ठाक जवाब नहीं मिला। दोनों ही पार्टियाँ सीटों पर बंटवारे पर सहमति नहीं बना पाई। इसके बाद अरविंद केजरीवाल ने इस बात का ऐलान कर दिया।

अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के खन्ना में आयोजित कार्यक्रम में पंजाब की जनता से पहले की तरह प्यार माँगा और लोगों से आम आदमी पार्टी को वोट देने की अपील भी की। उन्होंने कहा, “आज से 2 साल पहले आपने हमें बहुत बड़ा ‘आशीर्वाद’ दिया था और पंजाब में 117 में से 92 सीट जिताई थी। आज आपसे हाथ जोड़कर एक और आशीर्वाद माँगने आया हूँ। 2 महीने बाद लोकसभा के चुनाव हैं। लोकसभा चुनाव के लिए पंजाब में 13 सीट हैं और एक सीट चंडीगढ़ में है। आने वाले 15 दिनों में आम आदमी पार्टी इन 14 सीटों पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर देगी।”

बता दें कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान कई बार बिना कॉन्ग्रेस के गठबंधन के चुनाव लड़ने की बात कह चुके हैं। दिल्ली में जब कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं के बीच सीट शेयरिंग को लेकर बैठकें हुई उससे भगवंत मान ने दूरी बनाए रखी। अब केजरीवाल ने जिस तरह पंजाब में सभी सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया है, वो ये साफ करता है कि आम आदमी पार्टी की पंजाब इकाई का दबाव काम कर गया।

बैठक के लिए बुलाया, फिर तेजस्वी यादव के घर में नजरबंद कर दिए गए RJD के सभी MLA: रिपोर्टों में दावा, बिहार में कुनबा बचाने में जुटा विपक्ष

बिहार की राजनीति में हलचल अब भी जारी है। सोमवार (12 फरवरी, 2024) को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को विधानसभा में बहुमत साबित करना है। भाजपा और जदयू को मिला कर बहुमत का आँकड़ा पार हो जाता है, लेकिन साथ में जीतन राम माँझी की HAM और मुकेश साहनी की VIP भी है। इधर अब खबर आ रही है कि राजद नेता तेजस्वी यादव ने अपने आवास पर ही राजद के विधायकों एवं विधान पार्षदों को नज़रबंद कर के रख लिया है।

‘न्यूज़ 18’ ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया है कि पटना के 5, देशरत्न मार्ग स्थित अपने आवास में पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने अपने विधायकों और विधान पार्षदों को कैद कर के रखा हुआ है। फ्लोर टेस्ट संपन्न होने से पहले इनमें से किसी को भी बाहर जाने की अनुमति नहीं मिलेगी। खबर के अनुसार, तेजस्वी यादव ने सभी विधायकों और विधान पार्षदों को कह दिया है कि वो अपने-अपने घर से पहनने वाले अतिरिक्त कपड़े मँगा लें।

फ्लोर टेस्ट में शामिल होने के लिए इन सभी विधायकों को तेजस्वी यादव के आवास से ही विधानसभा से लेकर जाया जाएगा। तेजस्वी यादव ने बैठक में कॉन्ग्रेस और लेफ्ट के भी सभी विधायकों और विधान पार्षदों को एकजुट रहने के लिए कहा है। इस दौरान विधायकों ने हाथ उठा कर तेजस्वी यादव का समर्थन किया। तेजस्वी यादव के आवास पर फ़िलहाल सुरक्षा भी कड़ी कर के रखी गई है। साथ ही मीडियाकर्मियों के प्रवेश करने पर भी रोक लगा दी गई है।

पुरुष एवं महिला विधायकों-विधान पार्षदों के रुकने के लिए आवास के भीतर ही अलग-अलग व्यवस्था की गई है। साथ ही मुख्य दरवाजे पर बैरिकेडिंग कर दी गई है। उनके खाने-पीने से लेकर आराम करने तक के सारे इंतज़ाम कर दिए गए हैं। इस दौरान कुछ लोगों को सामान लेकर तेजस्वी यादव के आवास के भीतर जाते हुए भी देखा गया। बता दें कि बिहार में नीतीश कुमार ने राजद का साथ छोड़ कर भाजपा का दामन थामा है। 9वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अब उन्हें विधानसभा में बहुमत साबित करना है।

राजद के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा है कि हमारे लिए 12 फरवरी कोई सामान्य तारीख़ नहीं है। उन्होंने इसकी पुष्टि की कि विधायकों ने निर्णय लिया है कि वो अगले 48 घंटे तक एक साथ रहेंगे और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि विधायक अंदर अंतराक्षरी खेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमने इस खेल को शुरू नहीं किया, लेकिन तेजस्वी यादव इसे खत्म करेंगे। उन्होंने दावा किया कि नीतीश कुमार खुद ही गठबंधन करने आए थे।

‘घर में से महिलाओं को उठा ले जाते हैं TMC के गुंडे, ‘संतुष्ट’ होने के बाद छोड़ते हैं’: जिसने ED पर करवाया हमला, उस शेख के खिलाफ बंगाल में महिलाओं ने खोला मोर्चा

पश्चिम बंगाल में उत्तर 24 परगना जिला है। यहाँ संदेशखाली नाम की जगह है। इस साल की शुरुआत में इसी जगह के टीएमसी नेता शेख शाहजहाँ पर रेड करने की गई ईडी की टीम पर जानलेवा हमले हुए थे। अब यहाँ गुरुवार (8 फरवरी 2024) से एक बार फिर मामला गरमा गया। सड़कों पर उतरी महिलाओं ने टीएमसी नेता शाहजहाँ शेख, शिबा हाजरा समेत उसके सहयोगियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। ये प्रदर्शन शनिवार को भी जारी है। बता दें कि गुरुवार को टीएमसी कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों के बीच हुई मारपीट में 13 नेता और कार्यकर्ता घायल हो गए। इस पर पुलिस ने इलाके में धारा 144 लागू करने के साथ ही इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी थी।

क्यों हो रहा है प्रदर्शन?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार द्वारा पश्चिम बंगाल को फंड न देने को लेकर टीएमसी नेताओं ने संदेशखाली के त्रिमोहानी बाजार में लोगों के साथ मिलकर रैली निकाली थी। इस रैली में शाहजहाँ शेख के नारे लगाने पर बवाल मच गया। संदेशखाली की महिलाओं और पुरुषों ने लाठी-डंडे लेकर टीएमसी के गुंडों को दौड़ा लिया। इस दौरान दोनों ओर से मारपीट शुरू हो गई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि टीएमसी नेता बाहरी लोगों के साथ मिलकर रैली निकालकर इलाके में अशांति फैला रहे हैं।

वहीं, महिलाओं की माँग है कि टीएमसी नेता शाहजहाँ शेख को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए, क्योंकि शाहजहाँ शेख टीएमसी के नाम पर अत्याचार करता है। उनका कहना है कि शेख और उसके आदमी ईडी की टीम पर हमले से बहुत पहले से लोगों पर गंभीर अत्याचार कर रहे हैं।

बता दें कि ममता बनर्जी का बेहद करीबी शेख शाहजहाँ 5 जनवरी 2024 कोईडी और सीएपीएफ कर्मियों पर हमले के पीछे का मास्टरमाइंड है और तभी से वो फरार है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला शुक्रवार (09 फरवरी 2024) को तब गरमा गया, जब संदेशखाली और उसके आसपास के इलाकों में महिलाओं ने मोर्चा निकाला और गुस्साए लोगों ने शेख शाहजहाँ के करीबी विश्वासपात्र शिबू हाजरा के पोल्ट्री फार्म को आग लगा दिया और टीएमसी नेताओं की संपत्तियों पर हमले लिए। लोगों ने कहा कि जिस पॉल्टी फार्म को बर्बाद किया गया, उस जगह पर शिबू हाजरा ने जबरन कब्जाया था। उस जगह से कई गैर-कानूनी गतिविधियों को अंजाम दिया जाता रहा है। शेख शाहजहाँ और उसके साथियों ने गरीबों की काफी जमीनों पर जबरन कब्जा किया है।

संदेशखाली में टीएमसी के गुंडे महिलाओं को उठाते, रात भर भोगते फिर छोड़ते

हिंदुस्तान टाइम्स ने संदेशखाली की रहने वाली महिला के हवाले से हताया है कि शाहजहाँ के करीबी उत्तम सरकार और शिबा हाजरा ने सैकड़ों एकड़ जमीनों पर कब्जा कर लिया है और वहाँ मछलीपालन करके पैसे बना रहे हैं। कई सालों में उन्होंने प्रधान मंत्री आवास योजना के तहत बने घरों तक को उजाड़ दिया और ग्रामीणों को मनरेगा जैसी योजनाओं से मिले मेहनत के पैसों को भी मार लिया। महिला ने बताया, “जमीनों पर कब्जे करने वाले गुंडे स्थानीय लोगों से बेगारी कराते थे और पैसे बनाते थे। दिन ढलने के बाद महिलाएँ घर से नहीं निकल पाती, क्योंकि शाहजहाँ के साथी उनके साथ बदतमीजी करते।”

इस बीच, बीजेपी नेता अमित मालवीय ने एक्स पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें पश्चिम बंगाल के संदेशखाली की रहने वाली एक स्थानीय महिला टीएमसी के गुंडों के हाथों स्थानीय महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों के बारे में बताती हुई सुनाई दे रही है। वह इस बात पर अफसोस जताती हैं कि कैसे तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता बाइक पर 20-30 के ग्रुप में आते हैं और वे इलाके की हर महिला की जाँच करते हैं। वे सबसे कम उम्र की और सबसे अच्छी दिखने वाली महिला को चुनते हैं और उसे अपने साथ ले जाते हैं। वह कहती हैं, वे रात-रात भर उसके साथ संबंध बनाते हैं, और उसे तभी छोड़ते हैं जब वे “संतुष्ट” हो जाते हैं।

महिला शेख शाहजहाँ और उसके आदमियों की ओर से फैलाए गए आतंक और डर को बयान करती है। महिला ने कहा कि “जिस भी महिला पर इन गुंडों की नजर पड़ गई, भले ही वो कुँवारी हो या शादीशुदा, वो उसे उठा ले जाते हैं। यही नहीं, शादीशुदा महिलाओं के पति को भी उसपर कोई हक नहीं होता। बस उन्हें महिला पसंद आनी चाहिए, इसके बाद सबकुछ उनकी मर्जी।” वो महिला ममता बनर्जी के शासन पर अफसोस जताते हुए महिलाओं की बेबसी बयान करती दिख रही है।

इस बीच, शेख शाहजहाँ के समर्थक भी सड़कों पर उतर आए और टीएमसी नेता और उनके सहयोगियों की गिरफ्तारी की माँग को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर ही हमले करने लगे।

हिंदूपोस्ट ने शेख शाहजहाँ के गुंडों द्वारा स्थानीय लोगों और महिलाओं पर हमले का एक छोटा सा वीडियो शेयर किया है। घायलों में एससी, ओबीसी जैसे तबकों के लोग हैं। हिंदू पोस्ट ने लिखा, “पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में टीएमसी नेता शेख शाहजहाँ के गुंडों ने हिंदू ग्रामीणों पर हमला किया। दलित भारतीय धर्मनिरपेक्षता उर्फ इस्लामवाद के सबसे ज्यादा शिकार हैं, लेकिन कोई भी भीम आर्मी, बामसेफ, एपीपीएससी इन लोगों के लिए कभी नहीं बोलेगा।”

इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष अरुण हलदार ने शाहजहाँ पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि महिलाओं ने शाहजहाँ और उनके गंडों पर घटिया आरोप लगाए हैं। वो राक्षस है। उसके खिलाफ एनआईए जाँच कर रही है। वो देशद्रोही और गद्दार है।

बीजेपी ने बोला टीएमसी पर हमला

पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने टीएमसी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह से भी हस्तक्षेप की माँग की है। सुकाँत ने कहा, “संदेशखाली में हालात अभी बहुत खराब हैं, ग्रामीणों ने जमीन पर कब्जा…लड़कियों के अपहरण जैसे अत्याचारों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया, जो सालों से चल रहे हैं…पुलिस स्थिति को नियंत्रित नहीं कर सकी। वो टीएमसी के गुंडों का साथ दे रही है और ग्रामीणों को गिरफ्तार कर रही है। टीएमसी के गुंडों ने ग्रामीणों पर भी हमला किया, उनके घरों में आग लगा दी और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया…मैंने केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखकर इस बारे में कुछ करने का अनुरोध किया, वहाँ के लोग गंभीर खतरे में हैं।”

हालाँकि, स्थानीय पुलिस ने टीएमसी गुंडों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय कुछ स्थानीय ग्रामीणों को गिरफ्तार कर लिया है। इस बीच, स्थानीय लोगों ने संदेशखाली पुलिस स्टेशन के बाहर धरना शुरू कर दिया है और कहा है कि यह तब तक जारी रहेगा जब तक शाहजहाँ और उसके सहयोगियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता।

पुलिस अधीक्षक हुसैन मेहेदी रहमान ने कहा कि स्थिति से निपटने के लिए क्षेत्र में ज्यादा जवान भेजे गए हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों ने गुरुवार को शाहजहाँ और उसके सहयोगियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, जिसकी जाँच की जा रही है। उन्होंने कहा कि शेख शाहजहाँ की तलाश की जा रही है।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अतिरिक्त महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) मनोज वर्मा ने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और लोगों से कानून को अपने हाथ में नहीं लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “दर्ज की गई सभी शिकायतों की जांच चल रही है और कार्रवाई की जाएगी। वहीं, अगर कोई कानून अपने हाथ में लेगा तो कानून अपना काम करेगा। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।”

कौन है शेख शाहजहाँ?

बता दें कि शुक्रवार (05 जनवरी 2024) को ईडी की एक टीम टीएमसी नेता शेख शाहजहाँ के संदेशखली के सरबेरिया स्थित घर पर रेड मारने गई थी। ये जगह बांग्लादेश की सीमा से सटी है। अधिकारियों ने देखा उसके घर ताला लगा है। जब उन्होंने लॉक तोड़ने की कोशिश की तो टीएमसी समर्थकों की भीड़ ने उनपर हमला किया। जानकारी के मुताबिक, संदेशखली इलाके में 53 वर्षीय टीएमसी नेता शेख शाहजहाँ का रसूख है उसे लोग संदेशखली का बेताज बादशाह बताते हैं। शेख का कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं है लेकिन फिर भी वह राजनीति में बड़ी तेजी से आगे बढ़ा। वह जन्मा गरीब घर में ही था, जिसके कारण शुरुआत में उसने ट्रक ड्राइवर का काम किया, तो कभी कंडक्टर का। कभी सब्जी बेची तो कभी कुछ और किया। लेकिन इन सबके साथ वो संदेशखली में बड़े नेताओं से संपर्क भी बनाता रहा।

धीरे-धीरे समय आया कि वो खुद एक रसूखदार आदमी बन गया। 2006 में वामपंथी सरकार के वक्त उसने मोस्लेम शेख के सबसे करीबी सहयोगी के रूप में पैसे उगाही जैसे काम करने की शुरूआत की। धीरे-धीरे वो रियल स्टेट में घुसा और फिर मछली पालन जैसे कामों में लग गया।

सत्ता परिवर्तन के साथ उसका पाला भी बदल गया। 2011 में वामपंथी सरकार गई तो 2013 में वो टीएमसी में आ गया। यहाँ वह खाद्य मंत्री ज्योतिप्रियो मल्लिक का खास बन गया। बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ टीएमसी कार्यकर्ताओं की झड़पों में भी शेख का नाम आता रहा। 2020 में उसके ऊपर दो भाजपा नेताओं की हत्या का इल्जाम लगा, लेकिन वह उससे भी बच गया। उसकी नीति यही रही कि वो हमेशा से बड़े लोगों के ग्रुप में उठता-बैठता, जिससे जब उस पर कोई दोष लगे तो वह बच सके। यही वजह है कि उसपर कार्रवाई नहीं हुई। उसपर अपने चुनाव क्षेत्र में चुनाव के दौरान धांधली करने का आरोप भी लगता रहा है।

उसकी टीएमसी में कितनी पैठ है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश सीएम के खास लोगों ने शाहजहाँ शेख को सपोर्ट किया था। वहीं 1 जनवरी 2024 को तो शाहजहाँ ने खुले में धमकी ही दी थी। ये जानकारी बीजेपी नेता अमित मालवीय के ट्वीट से मिली। इसमें शाहजहाँ ने कहा था कि सीबीआई और ईडी उसके बाल तक नहीं छू सकतीं। उसने सबसे ये दुआ करने को भी कहा था कि सब दुआ करें उसे गुस्सा न आए वरना वो बीजेपी कार्यकर्ताओं और नेताओं के दाँत तोड़ देगा और उनकी खाल उतार देगा।