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लाहौर में भी मणिशंकर अय्यर ने दिखाई मोदी घृणा, कहा- पाकिस्तानी सबसे बड़ी संपत्ति, भारत में बात करने का साहस नहीं: बेटी ने राम मंदिर के विरोध में किया था अनशन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से काॅन्ग्रेस और उसके नेता मणिशंकर अय्यर की घृणा जगजाहिर है। अब अय्यर ने यही घृणा पाकिस्तान की जमीन से भी दिखाई है। पाकिस्तानियों को भारत की सबसे बड़ी संपत्ति बताते हुए कहा है कि मोदी सरकार में मेज पर बैठकर बात करने का साहस नहीं है। उन्होंने बीते 10 साल में पाकिस्तान के साथ बातचीत नहीं होने को सबसे बड़ी गलती भी बताया है।

डाॅन की रिपोर्ट के अनुसार लाहौर के अलहमरा में फैज फेस्टिवल के दौरान एक सत्र को संबोधित करते हुए मणिशंकर अय्यर ने यह बात कही। इस दौरान मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए अय्यर ने कहा, “मैं पाकिस्तान के लोगों से कहना चाहता हूँ कि वे याद रखें कि मोदी को कभी भी एक तिहाई से ज्यादा वोट नहीं मिले हैं। लेकिन हमारी भारत प्रणाली ऐसी है कि एक तिहाई वोट पाकर भी उनके पास दो तिहाई सीटें है। पर दो तिहाई भारतीय आपके पाकिस्तानी साथ आने को तैयार हैं।”

अपने मित्र सतिंदर कुमार लांभा की किताब का हवाला देते हुए अय्यर ने कहा कि काॅन्ग्रेस और बीजेपी सरकारों में इस्लामाबाद में तैनात रहे 5 भारतीय उच्चायुक्तों का मानना था कि जैसे भी मतभेद हों पर पाकिस्तान को भारत से जुड़ना चाहिए। लेकिन 10 वर्षों में हमने बातचीत नहीं कर सबसे बड़ी गलती की। उन्होंने कहा, “हमारे पास आपके खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक का साहस है, लेकिन मेज पर बैठकर बात करने का साहस नहीं है।”

काॅन्ग्रेस नेता ने कहा कि पाकिस्तान के साथ संबंधों में सद्भावना की आवश्यकता थी। लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार के गठन के बाद से बीते 10 साल में सद्भावना के उलट काम हुए हैं। इस दौरान उन्होंने पाकिस्तानियों की आवभगत का जिक्र करते हुए उन दिनों को याद किया जब वे कराची में महावाणिज्य दूत थे। अय्यर ने कहा कि पाकिस्तान के अलावा उन्होंने कोई ऐसा देश नहीं देखा, जहाँ इतने खुले दिल से उनका स्वागत किया गया हो। महावाणिज्य दूत रहते हर कोई मेरी और मेरी पत्नी के देखभाल कर रहा था। उन्होंने बताया कि इससे जुड़ी कई घटनाओं का जिक्र उन्होंने अपनी किताब में भी किया है।

अय्यर ने कहा, “मेरे जो अनुभव हैं वे बताते हैं कि पाकिस्तानी दूसरे पक्ष पर जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया देते हैं। अगर हम मित्रतापूर्ण हैं, तो वे ज्यादा मित्रतापूर्ण रहेंगे। अगर हम शत्रुतापूर्ण व्यवहार करते हैं तो वे और भी ज्यादा शत्रुतापूर्ण प्रतिक्रिया देते हैं।” इस दौरान काॅन्ग्रेस नेता ने पाकिस्तान की जमीन पर फल-फूल रहे आतंकवाद का कोई जिक्र नहीं किया।

गौरतलब है कि पिछले महीने जब राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम हुआ था, तब मणिशंकर अय्यर की बेटी सुरन्या ने इसके विरोध में 3 दिनों का अनशन किया था। उसने सनातन धर्म के खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट भी किए थे। इसके बाद दिल्ली के जंगपुरा स्थित जिस सोसायटी में वे रहती हैं, वहाँ उन्हें विरोध भी झेलना पड़ा था। रेसिडेंट्स वेलफेयर सोसायटी (RWA) ने उनसे पत्र लिख कर कहा था कि या तो वे अपनी हरकत के लिए माफी माँगें या फिर सोसायटी छोड़ कर चली जाएँ।

माँ-बहन की गाली दे रहा था युवक, एल्विश यादव ने बीच रेस्टोरेंट में थप्पड़ मारा: Video वायरल होने पर बोले- मैंने कुछ गलत नहीं किया

सोशल मीडिया स्टार और बिग बॉस ओटीटी सीजन 2 के विनर एल्विश यादव एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार उनपर इल्जाम लगा है रेस्टोरेंट में एक व्यक्ति को झापड़ मारने का। वीडियो तेजी से वायरल हो रही है। लोग इस पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

वायरल वीडियो में देखने को मिल रहा है कि एल्विश यादव एक रेस्टोरेंट में हैं, जहाँ उनके आसपास पुलिस भी है। तभी, वो गुस्से में एक आदमी की सीट पर जाते हैं और फिर उसे थप्पड़ जड़ देते हैं। इसके बाद उन्हें उनके आसपास मौजूद लोग रोकने का प्रयास करते हैं। लेकिन एल्विश शांत नहीं होते। टेबल पर बैठा शख्स दोबारा एल्विश को कुछ कहता है और वह फिर उसे पकड़ने आगे बढ़ते है। इसके बाद उनकी टीम उन्हें समझा बुझाकर वहाँ से ले जाती है।

सोशल मीडिया पर दावा हो रहा है कि रेस्टोरेंट में एल्विश यादव ने जिस व्यक्ति को झापड़ मारा है उसने एल्विश की माँ/परिवार के बारे में अपशब्द कहे थे। एल्विश से यह बर्दाश्त नहीं हुआ और उन्होंने आपा खोते हुए जाकर उसे थप्पड़ मार दिया। घटना को पास में ही बैठे किसी शख्स ने रिकॉर्ड किया। एल्विश के हेटर्स का जहाँ ये कहना है कि ये काम उन्होंने नशे में किया होगा। वहीं उनके फैंस का कहना है कि अगर कोई आपके परिवार को गाली देता है तो इस तरह की प्रतिक्रिया देनी जरूरी होती है। वरना उसकी हिम्मत और भी बढ़ती है। फैंस के हिसाब से एल्विश ने कुछ गलत नहीं किया है।

वहीं एल्विश ने इस घटना की वीडियो वायरल होने के बाद कहा- “मुझे न लड़ाई करने का शौक है, न हाथ उठाने का शौक है। मैं अपने काम से मतलब रखता हूँ। फोटो खिंचवाने की बात है तो हम सबके साथ फोटो खिंचवाते हैं। लेकिन पीछे से जब कोई कमेंट पास करता है, माँ-बहन की गालियाँ देता है, तो हम उसको नहीं छोड़ते। वीडियो में तुम्हें दिख रहा होगा कि पुलिस भी पीछे चल रही है, तो ऐसा कुछ नहीं है कि मैंने गलत किया। उसने मेरे ऊपर पर्सनल कमेंट किया था तो मैंने पर्सनली जाकर उसे थप्पड़ मार दिया। मुझे इस बात का कोई गम नहीं है। उसने मुझे गाली दी तो मैंने उसे पीट दिया। मैं ऐसा ही हूँ।”

बता दें कि एल्विश यादव हमेशा से उन इन्फ्लुएंसरों में से रहे हैं जिनसे जुड़ी खबरें मीडिया में आती रहती हैं। एक बार एल्विश यादव पर गमला चोरी का इल्जाम लगाकर उन्हें फँसाने का प्रयास हुआ था। इसके बाद वो बिग बॉस विनर बनकर सुर्खियों में आए, फिर उनपर रेव पार्टियों में सांप के जहर का इस्तेमाल करने का आरोप लग गया और अब इस तरह ओपन रेस्टोरेंट में एक शख्स को मारने के कारण वो फिर सुर्खियों में हैं।

दिन में जो MLA खेल रहे थे बैट-बाॅल, उन्हें रात में तेजस्वी यादव के आवास से क्यों ले गई बिहार पुलिस: नीतीश सरकार की ‘ताकत’ का परीक्षण आज

28 जनवरी 2024 को 9वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार की सरकार का बहुमत परीक्षण आज (12 फरवरी 2023) होना है। उससे पहले बिहार विधानसभा के अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा। वैसे तो विधानसभा का गणित एनडीए के पक्ष में है, लेकिन जिस तरह चौधरी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने से इनकार किया है और तेजस्वी यादव के नेतृत्व में राजद ने विपक्षी विधायकों की बाड़बंदी की है, उसने बहुमत परीक्षण को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है।

बिहार विधानसभा की जो मौजूदा स्थिति है उसमें राजद, काॅन्ग्रेस और वाम दल मिलाकर 114 विधायक होते हैं। बहुमत का आँकड़ा 122 है। वहीं सत्ताधारी बीजेपी, जदयू और जीतनराम मांझी की पार्टी HUM को मिलाकर 127 विधायक हैं। इन्हें निर्दलीय सुमित सिंह का भी समर्थन हासिल है, जो मंत्री पद की शपथ ले चुके हैं। यदि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के इकलौते विधायक का समर्थन भी विपक्ष को मिल जाए तो भी वह सरकार गिराने लायक संख्या नहीं जुटा सकती है।

लेकिन राजनीतिक गलियारों में क्राॅस वोटिंग की आशंका भी जताई जा रही है। सबसे पहले चर्चा काॅन्ग्रेस के कुछ विधायकों के एनडीए के संपर्क में होने से शुरू हुई। इसका बाद काॅन्ग्रेस ने अपने सभी 19 विधायकों को हैदराबाद भेज दिया। वहीं राजद ने अपने विधायकों को बैठक के बहाने पूर्व मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव के आवास पर बुलाया और फिर उसके बाद इन विधायकों को अपने घर नहीं जाने दिया गया। दूसरी तरफ एनडीए खेमे की चिंता मंत्री श्रवण कुमार के आवास पर हुई भोज से जदयू के 5 विधायकों और उसके बाद मंत्री विजय चौधरी के आवास पर हुई बैठक से जदयू के 4 विधायकों के नदारद होने के बाद से बढ़ी हुई है। बीच-बीच में विपक्षी खेमे के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के संपर्क में होने की खबरें भी आती रहती हैं। हालांकि मांझी ने बार-बार ‘हम’ के एनडीए के साथ ही रहने की बात कही है।

एक तरफ एनडीए बहुमत हासिल करने को लेकर आश्वस्त है, वहीं राजद दावा कर रही है कि नीतीश सरकार अब बस कुछ घंटों की ही है। पूर्व मंत्री और बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा है, “नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार विधानसभा में अपना बहुमत साबित करेगी। हमारी संख्या बढ़ने वाली है। विपक्ष चाहे कुछ भी कर ले, कुछ नहीं होगा। बिहार में जंगल राज वापस नहीं आएगा।”

राजनीतिक गहमागहमी के बीच 11 फरवरी की रात तेजस्वी यादव के घर के बाहर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी दिखे। वे शिवहर से राजद के विधायक चेतन आनंद की तलाश में आए थे। पुलिसकर्मियों को इस दौरान राजद समर्थकों का विरोध भी झेलना पड़ा। लेकिन वे देर रात चेतन आनंद को अपने साथ लेकर चले गए।

चेतन आनंद पूर्व सांसद आनंद मोहन के बेटे हैं। उन्हें तेजस्वी यादव का करीबी माना जाता है। तेजस्वी यादव के आवास से राजद विधायकों के जो वीडियो बाहर आए थे, उसमें वे क्रिकेट खेलते भी दिखे थे। लेकिन इस कहानी में ट्विस्ट तब आया, जब चेतन के गायब होने की शिकायत उनके छोटे भाई ने पाटलिपुत्रा थाने में दी। इसके बाद बिहार पुलिस कार्रवाई करते हुए तेजस्वी यादव के आवास पर पहुँच गई।

इसके बाद राजद ने एक्स/ट्विटर पर एक पोस्ट में कहा था, “नीतीश कुमार ने सरकार जाने के डर से हजारों की संख्या में पुलिस भेज तेजस्वी यादव के आवास को चारों तरफ से घेर लिया है। ये किसी भी तरह से, किसी भी बहाने आवास के अंदर घुस कर विधायकों के साथ अप्रिय घटना करना चाहते हैं। बिहार की जनता नीतीश कुमार और पुलिस के कुकर्म देख रही है। याद रहे हम डरने और झुकने वालों में से नहीं है। ये वैचारिकी का संघर्ष है और हम इसे लड़ेंगे और जीतेंगे, क्योंकि बिहार की न्यायप्रिय जनता इस पुलिसिया दमन का प्रतिकार करेगी।”

‘कतर से भारत आ पाए, तो सिर्फ पीएम मोदी की वजह से’: पूर्व नौसैनिक अधिकारियों ने बताया, मोदी सरकार ने असंभव को संभव कर दिखाया

कतर ने भारतीय नौसेना के 8 पूर्व अधिकारियों-कर्मचारियों को जेल से रिहा कर दिया है। फाँसी की सजा से बच निकलने वाले इन 8 लोगों में से 7 वापस भारत आ भी गए हैं। दिल्ली के इंटरनेशनल हवाई अड्डे पर पहुँचे इन पूर्व नौसैनिकों ने ‘भारत माता की जय’ का नारा लगाया। इन पूर्व नौसैनिकों ने भारत पहुँचने के बाद कहा कि वो यहाँ पहुँच पाए हैं और अपनी धरती पर कदम रख पाए हैं, तो वो सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वजह से।

बता दें कि इन सभी को जासूसी के आरोपों में फाँसी की सजा दी गई थी, लेकिन पीएम मोदी ने दुबई दौरे के समय इनकी रिहाई को सुनिश्चित कर दिया था। पीएम मोदी के दौरे से इन लोगों को पहले तो फाँसी की सजा से राहत मिली, और फिर अब डिप्लोमेटिक रास्ते से सभी को रिहा करा लिया गया।

कतर की जेल से राहत भरी मुस्कान और शांत भाव के साथ रिहा हुए एक पूर्व नौसेना अधिकारी ने एएनआई को बताया, “पीएम मोदी के हस्तक्षेप के बिना हमें आजादी नहीं मिलती। अगर उन्होंने हमारे लिए प्रयास नहीं किए होते, तो हम आज आपके सामने खड़े नहीं होते।” उन्होंने आगे कहा कि भारत सरकार ने हमें बचाने के लिए बहुत काम किया। हमें आजादी दिलाने के लिए हाई लेवल से कोशिशें की गई।

कतर से लौटे एक पूर्व नौसैनिक ने कहा, “हमने भारत वापस आने के लिए लगभग 18 महीने तक इंतजार किया। हम पीएम के बेहद आभारी हैं। यह उनके व्यक्तिगत हस्तक्षेप और कतर के साथ उनके समीकरण के बिना संभव नहीं होता। हम भारत सरकार द्वारा किए गए हर प्रयास के लिए तहे दिल से आभारी हैं और उन प्रयासों के बिना यह दिन संभव नहीं होता।” पीएम मोदी और कतर के अमीर के बीच जो अंडरस्टैंडिंग बनी, उसके बिना ये संभव नहीं था। दोनों नेताओं के मजबूत रिश्तों की वजह से भी हमें मदद मिली।”

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत सरकार की राजनयिक कोशिशों के चलते कतर ने ये फैसला लिया है। कतर का ये फैसला भारत-कतर के बीच ऐतिहासिक गैस समझौते के कुछ ही दिन बाद आया है। बता दें कि इन सभी लोगों को कथित तौर पर जासूसी के आरोपों में फाँसी की सजा सुनाई गई थी, लेकिन अदालत से लेकर राजनयिक स्तर पर भारत सरकार ने इनकी रिहाई के लिए जोरदार पैरवी की और अब जाकर इन सभी पूर्व नौसैनिकों को रिहा कर दिया गया है।

जानें- कैसे पीएम मोदी की एक मुलाकात ने दिलाई कूटनीतिक सफलता

भारत पर इन पूर्व अधिकारियों को बचाने का दबाव था। ऐसे में भारत सरकार कानूनी तौर पर इसे चुनौती दे रही थी। इसके साथ ही भारत डिप्लोमैटिक चैनल से भी बातचीत कर रहा था। नवंबर में जब इन लोगों को मौत की सजा सुनाई गई थी, तब तक इस बात की कोई जानकारी नहीं मिल पाई थी कि इन 8 लोगों के साथ क्या कुछ हो रहा है। फाँसी की सजा के बाद मामला दुनिया की नजर में आया।

भारत सरकार ने इन बंधकों के लिए कतर से कान्सुलर एक्सेस की माँग की। जिनेवा कन्वेंशन के मुताबिक, ऐसे मामलों में कांसुलर एक्सेस (राजनयिक पहुँच) देना उस देश के लिए जरूरी हो जाता है, जहाँ दूसरे देश के नागरिक गिरफ्तार किए जाते हैं। भारत ने नवंबर माह में कांसुलर एक्सेस हासिल कर लिया और केस के बारे में पूरी जानकारी हासिल की। राजनयिक चैनल से भारत सरकार सक्रिय थी ही, कानूनी पहलुओं पर भी विचार हो रहा था। भारत सरकार के सहयोग से इन पूर्व अधिकारियों ने कतर के उच्च न्यायालय में अपील दायर की। अपील स्वीकार होने के बाद सरकार कानूनी प्रक्रिया में लग गई। इधर, भारत कतर पर राजनयिक दबाव भी बढ़ाता जा रहा था।

इस बीच, दिसंबर माह के शुरुआत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दुबई में कतर के अमीर से मुलाकात हुई। पीएम मोदी COPE28 की बैठक में भाग लेने दुबई गए थे। इस मुलाकात के चार सप्ताह के भीतर ही फाँसी की सजा पलट दी गई थी। जब इस केस में सुनवाई हो रही थी, तब कोर्ट में भारत के राजदूत भी मौजूद थे। उनकी मौजूदगी ये बताती है कि मोदी सरकार इस मामले को लेकर कितनी गंभीर थी।

इन पूर्व नौसैनिकों को मिली जेल से रिहाई

कतर की जेल से रिहा हुए पूर्व नौसैनिकों को गिरफ्तार किया गया था, उनके नाम हैं- कमांडर पूर्णेन्द्रु तिवारी, कमांडर नवतेज सिंह गिल, कमांडर वीरेंद्र कुमार वर्मा, कमांडर सुगुनाकर पकाला, कमांडर संजीव गुप्ता, कमांडर अमित नागपाल, कैप्टन सौरभ वशिष्ठ और कैप्टन गोपाकुमार। ये सभी जेल में बंद होने से पहले दहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजी एंड कंसल्टेंसी में काम कर रहे थे। कथित तौर पर इनपर जासूसी के आरोप लगाए गए थे और फाँसी की सजा सुना दी गई थी। लेकिन दिसंबर 2023 की शुरुआत में भारत सरकार ने राजनयिक कोशिशों के चलते कांसुलर एक्सेस हासिल कर लिया था, इसके बाद उनकी फाँसी की सजा पर रोक लगवाई थी।

कतर के फैसले का स्वागत

भारत के विदेश मंत्रालय ने कतर के इस फैसले का स्वागत किया है। विदेश मामलों के मंत्रालय की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया है, “भारत सरकार कतर में हिरासत में लिए गए दहरा ग्लोबल कंपनी के लिए काम करने वाले आठ भारतीय नागरिकों की रिहाई का स्वागत करती है। उनमें से आठ में से सात भारत लौट आए हैं। हम इन नागरिकों की रिहाई और घर वापसी को सक्षम करने के लिए कतर के अमीर के फैसले की सराहना करते हैं।”

बता दें कि कतर की एक अदालत ने 26 अक्टूूबर, 2023 को भारतीय नौसेना के 8 पूर्व अधिकारियों को मौत की सजा सुनाई थी। साल 2022 में कतर की एक कंपनी में काम करने वाले इन अधिकारियों पर जासूसी का आरोप लगाकर वहाँ की इस्लामी सरकार ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया था। ये सभी पूर्व अधिकारी वहाँ की ‘अल दहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज’ (ADGTCS) नाम की कंपनी के लिए काम कर रहे थे।

हल्द्वानी हिंसा के 30 दंगाई गिरफ्तार: 24 घंटे में पुलिस ने 25 को पकड़ा, थाने से लूटे गए 99 कारतूस भी बरामद

उत्तराखंड के हल्द्वानी के बनभूलपुरा में हुई हिंसा के बाद पुलिस लगातार उपद्रवियों को पकड़ने में लगी है। अभी तक नैनीताल पुलिस की कार्रवाई में 30 लोग गिरफ्तार हुए हैं। इनमें से 5 को पहले अरेस्ट किया गया था और 25 की गिरफ्तारी हाल में हुई। पुलिस को जाँच में इनके पास से 7 तमंचे और 54 कारतूस बरामद हुए हैं। इसके अलावा थाने से लूटे गए 99 कारतूस भी पुलिस को इन अभियुक्तों के पास से मिले हैं।

एसएसपी नैनीताल प्रहलाद नारायण मीणा ने इस सबंध में जानकारी दी कि इस हिंसा मामले में 3 एफआईआर (मुकदमा संख्या 21/24, 22/24, 23/24) दर्ज हुई है। सबमें अलग-अलग जाँच अधिकारी हैं। 24 घंटे में 25 आरोपित गिरफ्तार हुए हैं उससे पहले 5 लोग गिरफ्तार हुए थे।

कुल 30 गिरफ्तारी इस मामले में हो गई है। इनके पास से वो जिंदा कारतूस भी मिले हैं जो इन्होंने थाने में हमला करते समय लूटे थे। बाकी गायब कारतूसों को बरामद करने की कोशिश हो रही है। मुख्य आरोपित को पकड़ने का भी प्रयास चल रहा है जैसा ही वो पक़ड़ में आएगा इसकी जानकारी दी जाएगी।

संबंधित मामले में उत्तराखंड पुलिस द्वारा किया गया ट्वीट

गिरफ्तार किए गए आरोपितों के नाम जुनैद, निजाम, महबूब, शहजाद, अब्दुल माजिद, शाजिद, नईम, शहनवाज, शकीर अहमद, इशरार, शानू, रईस, गुलजार अहमद, रईस, मोहम्मद फरीद, जावेद पुत्र अब्दुल हमीद, मोहम्मद साद, मोहम्मद तस्लीम, अहमद हसन, शाहरूख, अरजना, रिहान, जिशान, माजिद हैं।

गिरफ्तार अभियुक्तों के नामों की लिस्ट (तस्वीर साभार: uttarakhand police)

एसएसपी मीणा ने यह भी जानकारी दी कि अब हल्द्वानी में धीरे-धीरे सब सामान्य हो रहा है। हालातों पर नियंत्रण पा लिया गया है। यातायात सामान्य ढंग से चल रहे हैं। एग्जाम कराए गए हैं जिसमें अटेंडेंस काफी सही रही। उन्होंने ये भी बताया कि बनभूलपुरा में पुलिस ने दूध और बाकी जरूरतों के सामानों को पहुँचाने का काम किया है। आगे कुछ दिनों में बाकी क्षेत्रों में लगे कर्फ्यू को भी हटा दिया जाएगा।

बता दें कि 8 फरवरी 2024 को अवैध मदरसे और मस्जिद के विध्वंस को लेकर एक इस्लामी भीड़ ने उत्तराखंड के हल्द्वानी के बनभूलपुरा में हिंसा फैलाई थी। अवैध संरचना के बारे में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रह्लाद मीणा ने कहा कि मदरसा-मस्जिद का निर्माण अतिक्रमण की गई सरकारी भूमि पर अवैध रूप से किया गया था। इन्हें गिराने की कार्रवाई अदालत के आदेश के तहत की गई थी।

भारत की बड़ी राजनयिक जीत: कतर में फाँसी की सजा पाए सभी 8 पूर्व नौसैनिक रिहा, स्वदेश पहुँचे 7 लोग, विदेश मंत्रालय ने कही ये बात

कतर में 8 भारतीयों को मौत की सजा के मामले में भारत सरकार को बड़ी राजनयिक जीत मिली है। अब फाँसी की सजा पाने वाले नौसेना के सभी 8 पूर्व अधिकारियों को रिहा कर दिया गया है। उनमें से 7 लोग भारत वापस आ चुके हैं। कुछ समय पहले ही इनकी फाँसी की सजा पर कतर की अदालत ने रोक लगा दी थी। कतर के अमीर के हस्तक्षेप के बाद सभी 8 लोगों को जेल से आजादी मिल गई है। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने कतर के अमीर के इस फैसले पर खुशी जताई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत सरकार की राजनयिक कोशिशों के चलते कतर ने ये फैसला लिया है। कतर का ये फैसला भारत-कतर के बीच ऐतिहासिक गैस समझौते के कुछ ही दिन बाद आया है। बता दें कि इन सभी लोगों को कथित तौर पर जासूसी के आरोपों में फाँसी की सजा सुनाई गई थी, लेकिन अदालत से लेकर राजनयिक स्तर पर भारत सरकार ने इनकी रिहाई के लिए जोरदार पैरवी की और अब जाकर इन सभी पूर्व नौसैनिकों को रिहा कर दिया गया है। रिहा कर दिए गए 8 में से 7 पूर्व अधिकारी भारत वापस आ भी चुके हैं। इसके लिए विशेष तैयारी की गई थी।

कतर की जेल से रिहा होने वाले पूर्व नौसैनिक पहुँचे भारत, ये हैं नाम

कतर में जिन पूर्व नौसैनिकों को गिरफ्तार किया गया था, उनके नाम हैं- कमांडर पूर्णेन्द्रु तिवारी, कमांडर नवतेज सिंह गिल, कमांडर वीरेंद्र कुमार वर्मा, कमांडर सुगुनाकर पकाला, कमांडर संजीव गुप्ता, कमांडर अमित नागपाल, कैप्टन सौरभ वशिष्ठ और कैप्टन गोपाकुमार। ये सभी गिरफ्तार होने से पहले दहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजी एंड कंसल्टेंसी में काम कर रहे थे। कथित तौर पर इन पर जासूसी के आरोप लगाए गए थे और फाँसी की सजा सुना दी गई थी। लेकिन दिसंबर 2023 की शुरुआत में भारत सरकार ने राजनयिक कोशिशों के चलते कांसुलर एक्सेस हासिल कर लिया था, इसके बाद उनकी फाँसी की सजा पर रोक लगवाई थी।

पीएम मोदी की मुलाकात ने बदला कतर का फैसला

बता दें कि पीएम मोदी ने दिसंबर 2023 की शुरुआत में दुबई में कतर के अमीर से मुलाकात की थी। तब पीएम मोदी COPE28 की बैठक में भाग लेने दुबई गए थे। इस मुलाकात के चार सप्ताह के भीतर ही फाँसी की सजा पलट दी गई थी। जब इस केस में सुनवाई हो रही थी, तब कोर्ट में भारत के राजदूत भी मौजूद थे। उनकी मौजूदी ये बताती है कि मोदी सरकार इस मामले को लेकर कितनी गंभीर थी।

कतर के फैसले का स्वागत

भारत के विदेश मंत्रालय ने कतर के इस फैसले का स्वागत किया है। विदेश मामलों के मंत्रालय की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया है, “भारत सरकार कतर में हिरासत में लिए गए दहरा ग्लोबल कंपनी के लिए काम करने वाले आठ भारतीय नागरिकों की रिहाई का स्वागत करती है। उनमें से आठ में से सात भारत लौट आए हैं। हम इन नागरिकों की रिहाई और घर वापसी को सक्षम करने के लिए कतर के अमीर के फैसले की सराहना करते हैं।”

बता दें कि कतर की एक अदालत ने 26 अक्टूूबर, 2023 को भारतीय नौसेना के 8 पूर्व अधिकारियों को मौत की सजा सुनाई थी। साल 2022 में कतर की एक कंपनी में काम करने वाले इन अधिकारियों पर जासूसी का आरोप लगाकर वहाँ की इस्लामी सरकार ने इन्हें गिरफ्तार कर लिया था। ये सभी पूर्व अधिकारी वहाँ की ‘अल दहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजीज एंड कंसल्टेंसी सर्विसेज’ (ADGTCS) नाम की कंपनी के लिए काम कर रहे थे।

वाक्कुशल सुधांशु त्रिवेदी, कॉन्ग्रेस से आए RPN सिंह, हरियाणा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुभाष बराला… BJP की राज्यसभा वाली लिस्ट आ गई, देखें किस राज्य से किनका नाम

भाजपा ने राज्यसभा के चुनाव को लेकर अपनी सूची जारी की है, जिसमें उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, हरियाणा, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल की सीटों से नाम तय किए गए हैं। उत्तर प्रदेश कोटे से सुधांशु त्रिवेदी को फिर से राज्यसभा भेजा जाएगा। वहीं हरियाणा में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रहे सुभाष बराला भी राज्यसभा भेजे जाएँगे। उत्तर प्रदेश से RPN सिंह भी राज्यसभा भेजा गया है। वो कॉन्ग्रेस छोड़ कर भाजपा में आए थे। बिहार के डॉ धर्मशील गुप्ता और भीम सिंह का नाम है।

भीम सिंह अति-पिछड़ा समाज से आते हैं। वहीं डॉ धर्मशील गुप्ता वैश्य समाज से आते हैं। राज्यसभा वाली लिस्ट में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम माँझी और पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी का नाम नहीं है। NDA के पास बिहार में 3 सीटें हैं, जिनमें से 2 पर उम्मीदवार उतारे गए हैं और एक पर जदयू नेता संजय झा को राज्यसभा भेजा जा सकता है। यूपी से लिस्ट में चौधरी तेजवीर सिंह, साधना सिंह, अमरपाल मौर्य, संगीता बलवंत और नवीन जैन का भी नाम है।

पश्चिम बंगाल से सामिक भट्टाचार्य, उत्तराखंड से महेंद्र भट्ट, कर्नाटक से नारायणा कृष्णासा भांडगे और छत्तीसगढ़ से देवेंद्र प्रताप सिंह को भी इस सूची में डाला गया है। ये सब राज्यसभा सांसद बनेंगे। बता दें कि देश भर में 56 सीटों के लिए 27 फरवरी, 2024 को राज्यसभा के चुनाव होने हैं। 15 फरवरी नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि है, जबकि 20 फरवरी तक नामांकन वापस लिया जा सकता है। सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान होगा।

इससे पहले TMC ने भी अपनी सूची जारी की है, जिसमें सागरिका घोष, ममता बाला ठाकुर, सुष्मिता देव और नदीमुल हक़ का नाम है। सागरिका घोष ने इंदिरा गाँधी पर एक किताब लिख रखी है। मार्च 2018 में उनकी इस अंग्रेजी किताब का हिन्दू अनुवाद ‘इंदिरा: भारत की सबसे शक्तिशाली प्रधानमंत्री’ Amazon पर लिस्ट हुई थी। उन्होंने जब इस बारे में ट्वीट किया तो अजय खंडेलवाल नामक एक शख्स ने तंज कसा कि सागरिका घोष को राज्यसभा टिकट नहीं दिया गया।

इस पर जवाब देते हुए सागरिका ने लिखा, “हाहा! मैं कभी कोई RS टिकट, PS टिकट या CS टिकट किसी भी राजनीतिक पार्टी से स्वीकार नहीं करूँगी सर।”

फ्रांस के बाद अब श्रीलंका और मॉरीशस में चलेगा UPI, पेमेंट के लिए RuPay कार्ड भी कर सकेंगे इस्तेमाल: डिजिटल कनेक्टिविटी में भारत ने बढ़ाया एक और कदम

भारत के बाद अब फ्रांस, श्रीलंका और मॉरीशस में भी भारत का ऑनलाइन बैंकिंग ट्रांसफर सिस्टम UPI (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) चलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे और मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जुगनाथ की मौजूदगी में सोमवार (12 फरवरी, 2024) को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए श्रीलंका-मॉरीशस में UPI के लॉन्च का हिस्सा बनेंगे। रविवार को इसकी घोषणा की है। भारतीय उच्चायोग ने इस संबंध में जानकारी दी है।

यानी, अब भारत के जो भी लोग घूमने के लिए श्रीलंका या मॉरीशस जाएँगे, वो UPI का इस्तेमाल कर के पेमेंट्स कर सकेंगे। इसके अलावा श्रीलंका या मॉरीशस से जो लोग भारत आएँगे, वो भी यूपीआई के माध्यम से पेमेंट कर पाएँगे। भारतीय उच्चायोग ने अपने बयान में कहा कि फिनटेक इनोवेशन और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में भारत भारत नेतृत्वकर्ता बन कर उभर रहा है। कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमारे विकास के अनुभवों एवं खोजों को साझा करने पर जोर दिया है।

भारतीय उच्चायोग ने कहा कि श्रीलंका और मॉरीशस के साथ भारत के मजबूत सांस्कृतिक एवं पीपल-टू-पीपल कॉन्टैक्ट को देखते हुए इस लॉन्च से एक बड़े वर्ग को फायदा मिलेगा, साथ ही इन देशों के बीच डिजिटल कनेक्टिविटी भी बढ़ेगी। इससे पेमेंट्स तेज होंगे, बिना किसी दिक्कत के होंगे। इसी महीने की शुरुआत में फ्रांस की राजधानी पेरिस स्थित एफिल टॉवर पर फ्रांस में UPI सेवाओं को लॉन्च किया गया। इस त्वरित पेमेंट सिस्टम को ‘नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI)’ ने 2016 में लॉन्च किया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपना रहा कि भारत में इस तरह का तेज़ डिजिटल पेमेंट सिस्टम हो। अब भारत का RuPay कार्ड भी श्रीलंका व मॉरीशस में चलेगा। फ्रांस में UPI के लॉन्च को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि इसे वैश्विक बनाने की तरफ ये एक महत्वपूर्ण कदम है। एफिल टॉवर घूमने के लिए भी यूपीआई से पेमेंट्स हो रहे हैं। बता दें कि UPI के माध्यम से एक से अधिक बैंक खाते एक ही प्लेटफॉर्म पर रखे जा सकते हैं।

‘लिख कर दे सकती हूँ – कभी किसी पार्टी का राज्यसभा ऑफर स्वीकार नहीं करूँगी’: 6 साल बाद TMC की हुईं सागरिका घोष, पति कहते थे – मोदी काल में संसद का महत्व ही नहीं

पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) ने ‘पत्रकार’ सागरिका घोष को राज्यसभा सांसद बनाए जाने की घोषणा की है। सागरिका घोष जहाँ ‘टाइम्स ऑफ इंडिया (TOI)’ में लिखती हैं, वहीं उनके पति राजदीप सरदेसाई ‘इंडिया टुडे’ में काम करते हैं। राज्यसभा नॉमिनेशन के बाद पति-पत्नी का दोहरा रवैया भी सामने आया है। जहाँ राजदीप सरदेसाई कहते थे कि राज्यसभा सीट बिकती है, सागरिका घोष का कहना था कि वो कभी ऐसा ऑफर स्वीकार नहीं करेंगी।

सागरिका घोष ने इंदिरा गाँधी पर एक किताब लिख रखी है। मार्च 2018 में उनकी इस अंग्रेजी किताब का हिन्दू अनुवाद ‘इंदिरा: भारत की सबसे शक्तिशाली प्रधानमंत्री’ Amazon पर लिस्ट हुई थी। उन्होंने जब इस बारे में ट्वीट किया तो अजय खंडेलवाल नामक एक शख्स ने तंज कसा कि सागरिका घोष को राज्यसभा टिकट नहीं दिया गया। इस पर जवाब देते हुए सागरिका ने लिखा, “हाहा! मैं कभी कोई RS टिकट, PS टिकट या CS टिकट किसी भी राजनीतिक पार्टी से स्वीकार नहीं करूँगी सर।”

साथ ही उन्होंने चुनौती देते हुए कहा था कि वो ये चीज लिख कर भी दे सकती हैं, या फिर उनके इस ट्वीट को सेव भी किया जा सकता है। अब इसके 6 साल बाद जब सागरिका घोष खुद को राज्यसभा सांसद बनाए जाने की TMC की घोषणा को रीट्वीट कर रही है, लोग उनसे पूछ रहे हैं कि क्या अब उनकी राय बदल गई है? सागरिका घोष ने एक बार लिखा था कि पत्रकार होना ज्यादा बड़ी बात है, सरकार में शामिल होने या राज्यसभा जाने से।

वहीं राजदीप सरदेसाई का एक अन्य वीडियो भी सामने आया है जिसमें वो कहते दिख रहे हैं कि एक जमाने में राज्यसभा की अहमियत हुआ करती थी, लेकिन अब नरेंद्र मोदी के काल में तो संसद की ही कोई अहमियत नहीं रह गई है। उन्होंने कहा था कि उन्हें ये समझ ही नहीं आता है कि लोग राज्यसभा जाना क्यों चाहते हैं। अगस्त 2010 में CNN-IBN में काम करने के दौरान राजदीप सरदेसाई ने ‘खुलासा’ चलाया था कि राज्यसभा के टिकट बिक रहे हैं।

सागरिका घोष के पति राजदीप सरदेसाई को ‘रसगुल्ला पत्रकारिता’ के लिए भी जाना जाता है, जिसका इनाम शायद उन्हें पत्नी की राज्यसभा सांसदी के रूप में मिला है। राजदीप ने एक प्रश्न के उत्तर में स्वीकार किया था कि अगर वे ममता बनर्जी से उनके राज्य में हो रही हिंसा पर कठिन प्रश्न पूछते तो उन्हें रसगुल्ले नहीं मिलते। पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा को लेकर राजदीप सरदेसाई ने सीएम ममता बनर्जी से कोई सवाल नहीं पूछा था, क्योंकि वो ‘चाय पर चर्चा’ के लिए गए थे और सवाल पूछने पर उन्हें रसगुल्ले नहीं मिलते।

‘हाथ दर्द करेगा बेटा, मुझे मिल गया तुम्हारा प्यार’: जब रैली में PM मोदी ने बच्चे को दिया आशीर्वाद, बोले – हमारे लिए जनजातीय समाज वोट बैंक नहीं, देश का गौरव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार (11 फरवरी, 2024) को मध्य प्रदेश के झाबुआ में पहुँचे, जहाँ एक बच्चे ने उनका ध्यान आकर्षित किया। इस दौरान पीएम मोदी ने जो कहा, उसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है। पीएम मोदी यहाँ 7550 करोड़ रुपए की विकास परियोजनाओं के उद्घाटन व शिलान्यास के लिए पहुँचे थे। उन्होंने जनजातीय महासभा को भी संबोधित किया। इस दौरान एक छोटा सा बच्चा बार-बार पीएम मोदी की तरफ देख कर हाथ हिला रहा था।

इसके बाद प्रधानमंत्री ने उसे टोका और हाथ न हिलाने के लिए कहा, ताकि उसे दर्द ना हो। पीएम मोदी इस दौरान बच्चे से कहते हैं, “मुझे तुम्हारा प्यार मिल गया बेटा। कृपया अपना हाथ नीचे कर लें, नहीं तो दर्द होने लगेगा।” उक्त बच्चा अपने पिता के साथ आया था और पीएम मोदी को देख कर खासा खुश था। वो उनकी तरफ देख कर अपना हाथ हिला रहा था और उनका ध्यान आकर्षित कर रहा था। पीएम मोदी के इस वीडियो को देख कर लोग उनकी तारीफ कर रहे हैं।

वीडियो में वो कहते हैं, “बेटा, तुम्हारा हाथ दर्द करेगा, दुःख जाएगा। तुमने बहुत किया। मिल गया मुझे बेटा, मिल गया तेरा प्यार। तेरा हाथ दर्द करेगा बेटा। अब हाथ नीचे करो, मुझे मिल गया।” जब उक्त बच्चे ने अपना हाथ नीचे कर लिया तब पीएम मोदी बोले, “शाबाश, समझदार हो।” इस रैली में पीएम मोदी ने कहा कि कॉन्ग्रेस और उसके दोस्तों की दो ही ताकत हैं – जब ये सत्ता में रहते हैं- तब लूटते हैं, जब सत्ता से बाहर जाते हैं, तो लोगों को लड़वाते हैं, यानी लूट और फूट- यही कॉन्ग्रेस का ऑक्सीजन है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इनको बंद करते ही कॉन्ग्रेस पार्टी का सियासी दम टूटने लगता है।

पीएम मोदी ने कहा, “हमारे लिए जनजातीय समाज वोट बैंक नहीं, देश का गौरव है। आपका सम्मान भी और आपका विकास भी – ये मोदी की गारंटी है। जिस समाज को पिछली सरकारों ने पिछड़ा बताकर जंगल तक सीमित कर दिया था, आज उसका गौरव पूरा विश्व जान रहा है। मुझे विश्वास है, आप सबके आशीर्वाद से ये मध्य प्रदेश के विकास की जो संकल्प यात्रा शुरू हुई है, वो और गति से आगे बढ़ेगी। जनता ने कॉन्ग्रेस को जो जवाब अब तक दिया है, वो केवल ब्याज ही था। कॉन्ग्रेस का पूरा हिसाब तो अभी बाकी है।”