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लोकसभा चुनाव 2024 से पहले लागू होगा सीएए, गृहमंत्री अमित शाह बोले- ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य पर काम कर रही मोदी सरकार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ऐलान किया है कि लोकसभा चुनाव 2024 से पहले ही नागरिकता संसोधन विधेयक (सीएए) को लागू किया जाएगा। अमित शाह ने ईटी नाउ ग्लोबल बिजनेस समिट कार्यक्रम में शुक्रवार (10 फरवरी 2024) को भारत के भविष्य के लिए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विजन को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने “विकसित भारत” एजेंडा पर ध्यान केंद्रित करते हुए हितधारकों की भागीदारी और सामाजिक प्रगति पर जोर दिया।

गृहमंत्री ने कहा कि बीजेपी का लक्ष्य 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य केवल आर्थिक विकास से ही नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक गौरव के माध्यम से भी प्राप्त किया जाएगा।

अमित शाह ने आगामी चुनावों के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दूरदर्शी एजेंडे को रेखांकित करते हुए अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, ”आजाद भारत में पहली बार यह पहला चुनाव होगा, जो मजबूत भविष्य को ध्यान में रखते हुए विकसित भारत@2047 के एजेंडे पर लड़ा जाएगा। मेरा मानना ​​है कि अपने तीसरे कार्यकाल में हम एजेंडे के तहत और भी बहुत कुछ करने में सक्षम होंगे।”

गृहमंत्री ने कहा कि मोदी सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में कई महत्वपूर्ण नीतिगत पहल की हैं जो भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में ले जाएंगी। उन्होंने इन पहलों में प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत योजना, और उज्ज्वला योजना शामिल हैं। शाह ने कहा कि मोदी सरकार ने देश में बुनियादी ढांचे के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सड़कों, रेलवे, हवाई अड्डों और जलमार्गों के विकास में भारी निवेश किया है।

लोकसभा चुनाव से पहले लागू होगा सीएए

गृहमंत्री अमित शाह ने यह भी घोषणा की कि नागरिकता (संशोधन) अधिनियम को अगले चुनाव से पहले लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सीएम भारत में रहने वाले सभी हिंदुओं, बौद्धों, सिखों, जैनियों, पारसियों और ईसाइयों को नागरिकता प्रदान करेगा जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हैं। उन्होंने कहा कि सीएए अल्पसंख्यक समुदायों के प्रताड़ित सदस्यों को नागरिकता प्रदान करने के लिए एक आवश्यक कानून है।

अमित शाह ने कहा, “सीएए किसी भी भारतीय नागरिक के अधिकारों का हनन नहीं करता है। यह केवल उन लोगों को नागरिकता प्रदान करता है जो धार्मिक उत्पीड़न के कारण अपने देशों से भागने को मजबूर हुए हैं। यह उन लोगों को नागरिकता देगी, जो वर्षों से भारत में वैध तरीके से रहते आए हैं।”

गृहमंत्री ने सीएए का विरोध करने के लिए विपक्षी दलों को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल देश को गुमराह कर रहे हैं और सीएए के बारे में गलत जानकारी फैला रहे हैं। उन्होंने कहा, “विपक्षी दल सीएए का विरोध कर रहे हैं क्योंकि वे अल्पसंख्यक समुदायों के वोट बैंक को खुश करना चाहते हैं। वे देश के हितों की परवाह नहीं करते हैं।”

राजनीति में बीजेपी बढ़ना खुशहाली की बात

अमित शाह ने इस कार्यक्रम में आगे कहा, “बीजेपी की अपनी विचारधारा और एजेंडा सही जगह पर है। लोग जुड़ते हैं और लोग निकलते हैं, और यह स्वाभाविक है। मैं परिवार नियोजन में विश्वास करता हूँ, लेकिन राजनीति में यह हमेशा अधिक खुशहाली की बात होती है।” अमित शाह ने कहा कि बीजेपी का बढ़ना देशहित में है, तो हमें भी खुशहाली मिलती है।

मोदी सरकार का विकसित भारत एजेंडा

आर्थिक विकास: मोदी सरकार का लक्ष्य भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाना है। इसके लिए सरकार बुनियादी ढांचे के विकास, विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने और नौकरियों के सृजन पर ध्यान केंद्रित करेगी।
सामाजिक न्याय: मोदी सरकार सभी वर्गों के लोगों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों में निवेश करेगी।
राष्ट्रीय सुरक्षा: मोदी सरकार भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए सरकार रक्षा बलों को आधुनिक बनाने और आतंकवाद से लड़ने पर ध्यान केंद्रित करेगी।
सांस्कृतिक गौरव: मोदी सरकार भारत की समृद्ध संस्कृति और विरासत को संरक्षित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए सरकार कला, संस्कृति और शिक्षा को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित करेगी।

ये जो नया जेनरेशन है… बेटे ने की PM मोदी की तारीफ, राजदीप सरदेसाई को नहीं हुआ ‘हजम’: तीसरी बार मोदी सरकार पर हो रही थी चर्चा

पत्रकार राजदीप सरदेसाई अक्सर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के खिलाफ माहौल बनाने के लिए जाने जाते हैं। लेकिन, अब पता चला है कि खुद उनका बेटा ही मोदी फैन है। राजदीप सरदेसाई ने खुद ये बात एक चर्चा के दौरान बताई है। उन्होंने बताया कि उनका बेटा जयपुर गया था, वहाँ से लौटने के बाद उसने फोरलेन हाइवे की तारीफ की। बकौल राजदीप सरदेसाई, उनके बेटे ने कहा, “मोदी जी को देखिए, उन्होंने सड़कों को बदल कर रख दिया है।” राजदीप सरदेसाई ने ‘आज तक’ के सर्वे पर चर्चा के दौरान ये बातें कही, जिसमें भाजपा को 304 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है।

राजदीप सरदेसाई के अनुसार, उन्होंने अपने बेटे को जवाब दिया कि मोदी जी तो हैं, लेकिन नितिन गडकरी केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री हैं, उन्होंने भी किया है। इस पर राजदीप सरदेसाई के बेटे ने कहा कि उसे ये पता है, लेकिन मोदीजी हैं। सोशल मीडिया पर लोग इसे ‘राजदीप सरदेसाई का बेटा निकला मोदी भक्त’ लिख कर शेयर कर रहे हैं। राजदीप सरदेसाई की पत्नी सागरिका घोष भी भाजपा और पीएम मोदी के खिलाफ अक्सर ट्वीट करती रहती हैं। राजदीप सरदेसाई इस दौरान ‘नए जनरेशन’ को लेकर परेशान दिखे।

इस पर सौरभ द्विवेदी ने कहा कि राजदीप सरदेसाई के घर में ही मोदी समर्थक है। राजदीप सरदेसाई ने नितिन गडकरी पर चर्चा के दौरान ये बताया, जो ‘मूड ऑफ द नेशन सर्वे’ में पीएम मोदी के उत्तराधिकारी के रूप में 16% लोगों के समर्थन के साथ तीसरे नंबर पर हैं। पहले नंबर पर 29% समर्थन के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और 25% के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हैं। वीडियो में 1:52 घंटे के बाद इसे देखा जा सकता है।

राजदीप सरदेसाई ने ‘द लल्लनटॉप’ के शो ‘नेता नगरी’ में हिस्सा लेते हुए ये बात कही। इसमें पत्रकार सौरभ द्विवेदी भी मौजूद थे। राजदीप सरदेसाई ने जुलाई 2020 में एक पुराने वाकये का जिक्र करते हुए बताया था कि कैसे उन्होंने नरेंद्र मोदी का प्रोग्राम रद्द कर दिया था। उन्होंने कहा था, “इंडो यूएस समिट में पीएम मोदी अंग्रेजी में बात कर रहे हैं। यह इस बात का सबूत है कि वह कई सालों पहले मुझसे किए गए एक वादे पर खरे उतरे हैं! मैंने एक बार प्रोग्राम में आखिरी समय में उनकी जगह प्रमोद महाजन को लिया था क्योंकि महाजन बेहतर अंग्रेजी बोलते थे।”

बकौल राजदीप सरदेसाई, फिर नरेंद्र मोदी ने उनसे कहा था – “एक दिन मैं अंग्रेजी में भाषण दूँगा।” दिल्ली में AAP की जीत पर राजदीप सरदेसाई ने स्टूडियो में डांस किया था। राजदीप सरदेसाई ने स्वीकार किया था कि वह व्यक्तिगत रूप से मानते थे कि गोधरा नरसंहार के बाद हुए 2002 के दंगों के लिए मोदी जिम्मेदार नहीं थे। इसके बावजूद वो गुजरात दंगों को लेकर प्रोपेगंडा चलाते रहे हैं। किसान आंदोलन के दौरान भी राजदीप सरदेसाई ने पीएम मोदी की आलोचना की थी।

22 साल बाद साधु के भेष में बेटा अरुण नहीं ठग नफीस आया, इमोशनल वीडियो वायरल होने के बाद लोकल मीडिया ने किया खुलासा

उत्तर प्रदेश के अमेठी में फ्रॉडगिरी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसे सुन आप भी हैरान रह जाएँगे। कुछ दिन पहले खबर आई थी कि वहाँ जायस के खरौली गाँव में एक परिवार को साधु भेष में उनका खोया बेटा अरुण वापस मिला है। लेकिन अब खबर आई है कि वो कोई अरुण नहीं, बल्कि नफीस है जो परिवार से लाखों रुपए लूटने आया था।

ये खुलासा दैनिक जागरण ने और लोकल मीडिया यूट्यूब चैनल ‘जैसी पत्रकारिता’ ने अपनी पड़ताल में किया है। जागरण ने बताया कि खरौली गाँव में अरुण का परिवार अपने बेटे की शक्ल वाले साधु भेष में घूम रहे शख्स को देख फफक पड़े थे। उन्होंने उसे अपना बेटा अरुण मान लिया था।

परिवारवाले कोशिश कर रहे थे कि बेटा किसी तरह साधु का भेष छोड़ गृहस्थ जीवन जीने लगे। पहले तो इसके लिए उस शख्स ने मना किया, लेकिन बाद में फोन कर कहने लगा कि अगर उसे वापस पाना है तो उसके मठ को 10 लाख रुपए देने होंगे।

परिवार को बेटा वापस चाहिए था तो वो अपनी 14 बिस्वा जमीन बेचकर बेटा वापस पाने की तैयारी में जुट गए। पूरा सौदा 3 लाख 60 हजार में जाकर तय हुआ। लेकिन इसी बीच पता चला कि जिस लड़के के लिए परिवार अपना सबकुछ बेचने के तैयार हो गया है वो उनका बेटा नहीं बल्कि ठग नफीस है जो असल में गोंडा के टिकरिया गाँव का है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि नफीस जिस गाँव का रहने वाला है वहाँ के कुछ लोग ठगी के आरोप में जेल तक जा चुके हैं। नफीस का खुद का भाई राशिद 29 जुलाई 2021 को जोगी बनकर मिर्जापुर के सहसपुरा परसोधा गाँव पहुँचा था। वहाँ भी बुधिराम विश्वकर्मा का बेटा रवि 14 साल पहले गायब हुआ था। उस परिवार ने भी राशिद को अपना बेटा रवि समझ घर में जगह दे दी थी। बाद में वही राशिद लाखों लेकर फरार हो गया था।

इस बार यही ठगी का तरीका नफीस ने अपनाया। वो अमेठी के खरौली गाँव साधु के भेष में पहुँचा और उस परिवार को निशाना बनाया जिन्होंने अपना बच्चा खोया था। उसने उनकी भावनाओं का इस्तेमाल कर उन्हें बेवकूफ बनाया। 27 जनवरी को खरौली पहुँच उसने कहा कि उसने झारखंड के पारसनाथ मठ में शिक्षा ली है और उसके गुरु ने कहा कि वह अयोध्या दर्शन के बाद अपने गाँव जाकर परिजनों से भिक्षा माँगे तभी उसकी दीक्षा पूरी होगी।

परिवार ने इतना सुन उसे 1 फरवरी को 13 क्विंटल अनाज दिया और संपर्क में रहने के लिए एक मोबाइल भी दिया। बाद में वो सामान पिक अप में लादकर अयोध्या ले जाया गया। जब 9 फरवरी को रतीपाल उनके बताए अयोध्या के अड्रेस पर पहुँचे तो वहाँ कुछ नहीं मिला।

रिपोर्ट बताती है कि जिस मठ का नाम लेकर नफीस ये ठगी को अंजाम दे रहा था वैसा कोई मठ झारखंड में है ही नहीं। इस घटना के बाद पुलिस ने लोगों को ऐसे ठगों से सतर्क रहने की हिदायत दी है। पुलिस ने आश्वासन दिया है कि परिवार के साथ किसी प्रकार की धोखाघड़ी नहीं होने दी जाएगी। मामले पर पुलिस लगातार नजर बनाए हुए है।

वहीं जैसी पत्रकारिता के चैनल पर एक ऑडियो भी डाली गई है जिसमें एक शख्स दावा कर रहा है कि जो युवक परिवार से मिला वो अरुण नहीं बल्कि टिकरिया गाँव का नफीस है। इस ऑडियो को वीडियो में ढाई मिनट के बाद सुना गया था। वीडियो को यूट्यूब पर देखा जा सकता है। एक वीडियो में ऑडियो रिकॉर्डिंग के माध्यम से खुलासा है और एक में ग्राउंड रिपोर्ट के जरिए।

JNU में जिस दिन आतंकी अफजल गुरु के नारे, उसी दिन भारत के समर्थन में नारे लगाने वाले छात्रों पर धारदार हथियार और ढपली से हमला: ABVP के दिव्यांग कार्यकर्ता सहित कई घायल

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में शुक्रवार (9 फरवरी 2024) को देर रात 2 छात्र संगठन (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और लेफ्ट ग्रु) के सदस्यों के बीच मारपीट हो गई। इस झगड़े में कुछ छात्रों के घायल होने की खबर है। घायलों का इलाज दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में हुआ

बताया जा रहा है कि एबीवीपी और वामपंथी गुटों के बीच यह झड़प चुनाव से पहले होने वाली जनरल बॉडी मीटिंग के वक्त हुई जो कि साबरबती ढाबे के पास थी। एबीवीपी छात्रों का कहना है कि लेफ्ट संगठनों ने उनके कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की, तो लेफ्ट के छात्रों का कहना है कि एबीवीपी के छात्रों ने चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास किया।

जेएनयू के एबीवीपी समूह ने कुछ तस्वीरें और वीडियो अपने सोशल मीडिया हैंडल पर शेयर की है। इसमें दावा है कि एक बीए-प्रथम वर्ष के छात्र को लेफ्ट-एनएसयूआई गुंडो ने पेट पर घूँसा मारा। एबीवीपी का कहना है कि जेएनयू के मासूम छात्रों पर वामपंथी गुटों ने धारदार हथियार और अपनी स्टील की बनी ढपलियों से हमला किया। इसमें कई छात्र (दिव्यांग और लड़कियाँ) समेत कई घायल हुए।

एबीवीपी का ट्वीट, जिसमें धारदार हथियार और स्टील की ढपलियों से मारने की बात है

वीडियो में देख सकते हैं कि एक छात्र कहता सुनाई पड़ रहा है कि 9 फरवरी 2016 के दिन साबरमती ढाबे पर आतंकी अफजल गुरू के लिए नारे लगाए गए थे और आज 9 फरवरी के दिन भारत के समर्थन में नारे लगाने के लिए राष्ट्रवादी छात्रों पर ढपली से हमला किया गया है।

वहीं, जेएनयू के AISA संगठन ने आरोप लगाया कि एबीवीपी ने यूजीबीएम (जनरल बॉडी मीटिंग) को बाधित किया। उन्होंने जेएनयूएसयू के अध्यक्ष और अन्य लोगों के साथ हाथापाई की और उन्होंने साउंड सिस्टम तोड़ दिया।

आइसा ने अपने ट्वीट में कहा कि जेएनएसयू के द्वारा UGBM आयोजित करवाई गई थी। यहाँ पर एक संगठन है ABVP- इसी संगठन द्वारा जेएनयू में बवाल किया जा रहा है। वीडियो में आइसा कार्यकर्ता नीतिश कहते हैं कि जेएनयूसू के संविधान में लिखा गया है कि अगर चुनाव नहीं होता है तो उस स्टूडेंट यूनियन को तब तक के लिए आगे बढ़ाया जाता है जब तक अगले चुनाव नहीं होते। तो इस यूनियन को 6 महीने या अगले वर्ष तक के लिए एक्सटेंड किया गया था। UGBM इसीलिए बुलाई गई थी कि नया चुनाव करवाया जा सके लेकिन एक संगठन हंगामा करके पूरे लोकतांत्रिक मूल्य को खत्म कर रहा है और डिबेट कल्चर जिसके लिए जेएनयू जाना जाता है उसे दबा दिया जा रहा है।

हल्द्वानी में मुस्लिम भीड़ का टारगेट थी पुलिस और मीडिया, पहले से तैयार थी हमले की योजना: हिंसा पीड़ित पत्रकार मुकेश सिंह ने बताया सब कुछ

उत्तराखंड के हल्द्वानी में अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई कर रही पुलिस पर किए गए हमले में एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। नैनीताल की जिलाधिकारी वंदना सिंह ने शुक्रवार (9 फरवरी 2024) को बताया कि हल्द्वानी नगर निगम की टीम पर हुआ हमला पूर्व नियोजित था। वहीं, हिंसा पीड़ित पत्रकार मुकेश सिंह ने भी कहा पुलिस और मीडिया को निशाना बनाने की योजना पहले ही बना ली गई थी।

मुकेश सिंह ने कहा, “हमले में पुलिस और मीडियाकर्मियों को निशाना बनाया गया। इसमें कई पुलिस अधिकारी गंभीर रूप से घायल हो गए और पत्रकारों की गाड़ियों में आग लगा दी गई। यह हमला पूरी योजना के साथ किया गया था। घटना के दिन शाम करीब 4:30 बजे अवैध अतिक्रमण को ध्वस्त कर दिया गया और 4:45 बजे तक मौके पर करीब 1500 लोग मौजूद थे। इस दौरान भीड़ ने पथराव किया और पेट्रोल बम फेंके। यह सब बनभूलपुरा के निवासियों द्वारा योजना बनाकर किया गया था।”

पत्रकार मुकेश सिंह ने आगे कहा कि जिस कॉलोनी में तोड़फोड़ की कार्रवाई की गई, वह अवैध है। उन्होंने कहा कि सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बनाए गए मदरसा-मस्जिद के खिलाफ अधिकारियों ने यह कार्रवाई उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेश के बाद किया था। उन्हें इस लिंक पर सुना जा सकता है। उनका कहना है कि बनभूलपुरा में कई बाहरी लोग बसे हैं।

पत्रकार मुकेश सिंह ने कहा, “केवल वही लोग जानते हैं कि ये कहाँ से आए हैं… उनमें से कई के पास कोई सत्यापन या आईडी नहीं है… वे यूपी से यहाँ आए हैं और वह जगह [अतिक्रमण स्थल] अवैध है। उन्होंने [मदरसा-मस्जिद अधिकारियों] ने अवैध रूप से सरकारी भूमि पर कब्जा कर लिया है।”

पत्रकार ने आगे बताया, “कल जब सरकार अपनी जमीन पर दावा करने पहुँची तो उन पर पत्थरों से हमला कर दिया गया। जमीन भी पंजीकृत नहीं है, लेकिन केवल 50 रुपए का पट्टा है और यह जमीन नगर निगम का है।” मुकेश सिंह ने कहा कि दंगाइयों ने बनभूलपुरा पुलिस स्टेशन पर हमले किए और दर्जनों वाहनों में पेट्रोल बम फेंक कर आग लगा दी गई थी।

बनभूलपुरा में गुरुवार को हुई हिंसा में 300 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं। इनमें कई अधिकारी भी शामिल हैं। भीड़ की हिंसा में घायल हुए पुलिस अधिकारियों के कई वीडियो सामने आए हैं। घायलों में सिर्फ पुरुष अधिकारी ही नहीं, बल्कि कई महिला अधिकारी भी शामिल हैं। हमले में घायल हुई ऐसी ही एक महिला अधिकारी ने इस्लामी भीड़ द्वारा फैलाई गई भयावहता के बारे में बताया।

महिला अधिकारी ने कहा, “पथराव से बचने के लिए हमने एक घर में शरण ली। उस घर में 15-20 लोग घुस आए और हम पर हमला कर दिया। हम पर हर तरफ से पथराव किया जा रहा था। यहाँ तक कि छतों से भी हमला किया गया। भीड़ ने हमें जिंदा जलाने के इरादे से घर में आग लगाने का भी प्रयास किया।” पथराव करने में सैकड़ों की संख्या में महिलाएँ और नाबालिग बच्चे भी शामिल थे।

बता दें कि 8 फरवरी 2024 को अवैध मदरसे और मस्जिद के विध्वंस को लेकर एक इस्लामी भीड़ ने उत्तराखंड के हल्द्वानी के बनभूलपुरा में हिंसा फैलाई थी। अवैध संरचना के बारे में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रह्लाद मीणा ने कहा कि मदरसा-मस्जिद का निर्माण अतिक्रमण की गई सरकारी भूमि पर अवैध रूप से किया गया था। इन्हें गिराने की कार्रवाई अदालत के आदेश के तहत की गई थी।

वहीं, नैनीताल की डीएम वंदना सिंह ने कहा, “यह एक खाली संपत्ति है जिसमें दो संरचनाएँ हैं। ये धार्मिक संरचनाओं के रूप में पंजीकृत नहीं हैं या उन्हें ऐसी कोई मान्यता नहीं दी गई है। कुछ लोग इस संरचना को मदरसा कह रहे हैं।

दुकानों में तोड़फोड़, जुमे से पहले ही बँट गया था पर्चा… ग्राउंड में इकट्ठा होने का था आदेश, मौलाना तौकीर रज़ा के भड़काने के बाद बरेली में हिंसा – चश्मदीदों ने

बरेली में मौलाना तौकीर रज़ा के इशारे पर निकली भीड़ ने जुमे की नमाज के बाद हिन्दुओं को पीटा, गाड़ियाँ क्षतिग्रस्त की, पत्थरबाजी की और पुलिस के बैरिकेड्स तोड़े। मौलाना ने ज्ञानवापी के तहखाने में अदालत द्वारा पूजा फिर से शुरू करवाए जाने के खिलाफ गिरफ़्तारी देने और ‘जेल भरो’ अभियान का ऐलान किया था। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि जुमे से पहले पर्चे बाँटे गए थे। उसने बताया कि इकट्ठा होने के बाद भीड़ ने बवाल किया, हिंसा की।

दुकानों में भी तोड़फोड़ की है, एक दुकान में लगे फूलों को तोड़ कर फेंक दिया गया। पीड़ित दुकानदार ने बताया कि 2000 रुपए का नुकसान हुआ है, बाकी दिन फूल यूँ ही लगे होते थे और कोई गड़बड़ी नहीं होती थी। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि भीड़ ने पत्थर भी फेंके, CCTV कैमरों में सब कुछ कैद है। उन्होंने बताया कि अगर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन होगा। प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि पर्चे में ग्राउंड में इकट्ठा होने को कहा गया। नाबालिग बच्चों को भी आगे किया गया।

एक अन्य प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि नमाज के बाद निकलते हुए लोगों ने हिंसा की, दुकानों को तोड़ दिया गया। उधर मौलाना तौकीर रज़ा ने कहा कि वो ज्ञानवापी पर मुस्लिम पक्ष का दावा छोड़ने के लिए तैयार हैं, लेकिन पहले भाजपा के लोग अगर सचमुच मंदिर से मोहब्बत करते हैं तो कैलाश मानसरोवर को चीन से आज़ाद कराएँ। उन्होंने दावा किया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मौजूद रहने के बावजूद कोर्ट में मुस्लिमों के फैसले भी UCC के तहत होते रहे हैं, UCC देश में पहले से मौजूद है।

बता दें कि बवाल श्यामगंज इलाके से शुरू हुआ। ‘मौलाना आज़ाद इंटर कॉलेज’ के सामने कमल शर्मा और समीर सागर नामक 2 युवक मौजूद थे, उनके साथ मारपीट की गई। उनकी बाइक तोड़े जाने के बाद पत्थरबाजी शुरू कर दी गई। बिहारीपुर पुलिस चौकी के पास मौलाना तौकीर रज़ा ने गिरफ़्तारी दी। पुलिस ने उन्हें तुरंत रिहा भी कर दिया, जिसके बाद वो अपने घर चला गया। GIC ऑडिटोरियम के पास स्थित मस्जिद में नमाज के बाद मुस्लिम भीड़ ने ‘जेल भरो’ अभियान शुरू किया।

हल्द्वानी पहुँचे CM धामी, कहा- चलता रहेगा बुलडोजर: दंगों को लेकर अब तक 5000 पर केस, 19 नामजद-4 गिरफ्तार

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी हिंसा पीड़ितों से मुलाकात के बाद कहा कि अतिक्रमण विरोधी अभियान कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक ही जारी रहेगा। उन्होंने हल्द्वानी में हमला करने वालों और खून बहाने वालों के बारे में कहा कि उनसे कानून अपने तरीके से निपटेगा। बता दें कि हल्द्वानी हिंसा में अब तक 6 लोगों की मौत हो चुकी है, तो 300 से अधिक लोग घायल हैं। घायलों में पुलिसकर्मियों की संख्या 200 से अधिक है। इस बीच हल्द्वानी में पुलिस प्रशासन ने अपना एक्शन शुरू कर दिया है। हिंसा से जुड़े मामलों में 3 एफआईआर दर्ज की गई हैं, तो अब तक 4 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

5000 से अधिक लोगों के खिलाफ एफआईआर

हल्द्वानी हिंसा मामले में पुलिस-प्रशासन एक्शन मोड में है। लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के मुताबिक, कुल 3 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और हिंसा से जुड़े लोगों की पहचान की जा रही है। इस बीच पुलिस ने 4 दंगाइयों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने 19 नामजद लोगों के साथ ही 5000 अज्ञात लोगों को भी एफआईआर में शामिल किया है। वहीं, सीसीटीवी फुटेज के आधार पर 100 से ज्यादा उपद्रवियों की पहचान की जा चुकी है, उनके खिलाफ जल्द एक्शन लेने की तैयारी प्रशासन कर रहा है।

मुख्यमंत्री ने की पीड़ितों से मुलाकात

हल्द्वानी हिंसा पीड़ितों से मिलने के बाद उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “अदालत के निर्देश पर अतिक्रमण विरोधी अभियान चल रहा है। कल (8 फरवरी 2024) जब प्रशासन अवैध संपत्ति को तोड़ने की कोशिश कर रहा था, तो यह हिंसा भड़क उठी और महिला अधिकारियों सहित हमारे पुलिस कर्मियों पर हमला किया गया। उन पर पथराव किया गया। यह बेहद निंदनीय है।”

मुख्यमंत्री ने कहा, “उत्तराखंड ‘देवभूमि’ है…यहाँ ऐसा कभी नहीं हुआ…कुछ लोगों ने देवभूमि में माहौल खराब करने की कोशिश की है और कानून अपने हाथ में ले लिया है। पत्रकारों पर भी हमला किया गया, उनके कैमरे तोड़ दिए गए। सार्वजनिक संपत्तियों को जला दिया गया। वीडियो फुटेज की जाँच कर सबकी पहचान की जाएगी और कानून अपना काम करेगा।”

उत्तराखंड पुलिस बनभूलपुरा में हुई हिंसा के उपद्रवियों और पत्थरबाजों की पहचान मौके से मिले सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कर रही है। पुलिस की त्वरित कार्रवाई से फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। एहतियात के तौर पर हल्द्वानी में चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात कर स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है। बता दें कि सुबह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि उपद्रवियों और दंगाइयों को तुरंत सलाखों के पीछे भेजा जाए।

मुख्य सचिव ने प्रभावित इलाके का लिया जायजा

उत्तराखंड की मुख्य सचिव राधा रतूड़ी हल्द्वानी के हिंसा प्रभावित क्षेत्र बनभूलपुरा के हालात का जायजा लेने के लिए हिंसा प्रभावित इलाकों में पहुँचीं। जिलाधिकारी नैनीताल एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को स्थिति पर निरन्तर निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए। प्रशासन एवं पुलिस अधिकारियों को आम जनता की सुरक्षा एवं शांति को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखते हुए कानून व्यवस्था बनाए रखने के सख्त निर्देश दिए। मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने सुशीला तिवारी अस्पताल पहुँचकर घायलों से मुलाकात की और उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली।

हल्द्वानी में इस्लामी कट्टरपंथियों का कहर

बता दें कि हल्द्वानी के बनभूलपुरा थाना इलाके के ‘मालिक का बगीचा’ में गुरुवार (08 फरवरी 2024) को अतिक्रमण विरोधी अभियान चला रही नगर निगम और पुलिसकर्मियों पर पथराव हुआ। इसके बाद टीम पर पेट्रोल बम से हमला किया गया, तो इस्लामिक कट्टरपंथियों की भीड़ ने थाने को घेरकर गाड़ियों को आग लगा दी और थाने को भी छतिग्रस्त कर दिया। इस दौरान हिंसा में 6 लोगों की मौत भी हो गई है, वहीं, तीन सौ से अधिक लोग घायल हो गए हैं। घायलों में प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा 200 से अधिक पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।

हिंदुओं की तुलना कुत्ते से करने वाले मौलाना सलमान अजहरी के खिलाफ तीसरा मामला दर्ज, जमानत मिलते ही फिर गिरफ्तार करेगी गुजरात पुलिस

भड़काऊ भाषण देने के मामले में विवादित मौलाना मुफ्ती सलमान अजहरी के खिलाफ तीसरा मामला दर्ज किया गया है। अजहरी के खिलाफ यह मामला अरावली जिले के मोडासा टाउन पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया है। अजहरी ने पिछले साल दिसंबर में मोडासा में एक सभा की थी, जिसमें उन्होंने भड़काऊ भाषण दिया था।

दरअसल, अजहरी ने 24 दिसंबर 2023 को मोडासा में भाषण दिया था। यह मुकदमा पुलिस ने खुद दर्ज कराई है। आरोपियों में मुफ्ती सलमान अजहरी के अलावा आयोजक इशाक का नाम भी शामिल है। इस दौरान बेहद उत्तेजक भाषण दिए गए थे। आरोपितों के खिलाफ एट्रोसिटी ऐक्ट (Atrocity Act) की धाराएँ भी लगाई गई हैं।

इसके पहले अजहरी के खिलाफ एक मामला गुजरात के जूनागढ़ और एक मामला कच्छ में दर्ज में पहले ही दर्ज किया जा चुका है। जूनागढ़ के मामले में गिरफ्तारी के बाद मुफ्ती सलमान अजहरी को एक दिन की रिमांड पर जेल भेजा गया था। हालाँकि, जूनागढ़ कोर्ट ने बुधवार (7 फरवरी) को उसे जमानत दे दी।

जमानत मिलते ही कच्छ पुलिस ने अजहरी को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद कच्छ पुलिस ने उसे गुरुवार (8 फरवरी 2024) को कोर्ट में पेश किया, जहाँ उसे 3 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। मुफ्ती सलमान अजहरी फिलहाल पुलिस हिरासत में है।

अब यह लगभग साफ हो चुका है कि यदि अजहरी को कच्छ मामले में जमानत मिलती है तो पुलिस उसे अरावली मामले में गिरफ्तार करेगी। उसके बाद उसे कोर्ट में पेश करके रिमांड माँगेगी। इस बीच गुजरात पुलिस का आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) मुफ्ती सलमान अज़हर द्वारा संचालित तीनों ट्रस्टों की फंडिंग की भी जाँच कर रहा है।

अजहरी को गुजरात पुलिस ने मुंबई में उनके घाटकोपर स्थित आवास से उठाया था। इसके बाद उनके समर्थकों ने बवाल कर दिया था और सड़क को रोक दिया था। इतना ही नहीं, बड़ी संख्या में स्थानीय मुस्लिम अजहरी के समर्थन में पुलिस स्टेशन में जमा हो गए थे। हालाँकि, बाद में पुलिस अजहरी को लेकर जूनागढ़ ले गई।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि मौलाना सलमान अजहरी के खिलाफ मुंबई में भी एक मामला दर्ज कर लिया गया है। मुंबई में उसके साथ ही दो और लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया है। मुंबई में मौलाना के खिलाफ धारा 153(C), 505(2), 188 और 114 के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है।

दरअसल, गुजरात में अपने भाषण के दौरान सलमान अजहरी ने बेहद भड़काऊ भाषण दिया था। उसने अपने भाषण में कहा था, “मस्जिद में बुत रखने से मस्जिद बुतखाना नहीं बन जाती। तुमने एक रखा है। काबा में 360 रखे थे, फिर भी काबा तो काबा ही रहा, न तवाफ रुका, न हज रुका। इंकलाब आपके घर से होगा।”

उसने हिंदुओं की तुलना कुत्तों से करते हुए आगे कहा था, “उनमें मस्जिदों को बुतखाना बनाने की हिम्मत नहीं है। आपने मस्जिदों को वीरान छोड़ दिया है और हमारे यहाँ मुहावरा है कि जब मैदान खुला होता है तो कुत्तों का राज होता है। यदि तुम मैदान में घूमते रहोगे तो कोई कुत्ते नहीं होंगे।”

भाषण के अंत में उसने कहा था, ”मुसलमानों घबराओ मत, अभी खुदा की शान बाकी है। अभी इस्लाम जिंदा है, अभी कुरान बाकी है, ऐ जालिम काफिर क्या समझता है जो रोज हमसे उलझता है, अभी तो कर्बला का आखिरी मैदान बाकी है। कुछ देर की खामोशी है, किनारा आएगा… आज कुत्तों का वक्त है, कल हमारा दौर आएगा।”

‘किस मुँह से इनकार करूँ’: चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न मिलने के बाद जयंत चौधरी ने NDA के साथ गठबंधन की बात स्वीकारी, बागपत और बिजनौर पर लड़ सकती है RLD

राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के प्रमुख जयंत चौधरी ने शुक्रवार (9 फरवरी 2024) को आगामी कुछ महीनों में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश में भाजपा के साथ गठबंधन की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि भाजपा के प्रस्ताव को वे अस्वीकार नहीं कर सकते। बता दें कि केंद्र की भाजपा सरकार ने जयंत चौधरी के दादा एवं पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह सहित तीन लोगों को भारत रत्न देने की घोषणा शुक्रवार को ही की।

जयंत चौधरी ने कहा, “अब मैं इस प्रस्ताव को कैसे अस्वीकार कर सकता हूँ? मोदी जी के विजन ने वह कर दिखाया, जो अब तक कोई अन्य पार्टी नहीं कर सकी।” भाजपा के साथ रालोद के गठबंधन को लेकर पत्रकारों द्वारा किए गए सवाल पर चौधरी ने कहा, “कोई कसर रहती है? आज मैं किस मुँह से इनकार करूँ आपके सवालों को।”

सीटों की सहमति पर लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा, “जब मुझे बधाई दी जा रही है तो सीटों या वोटों के बारे में बात करने से आज के दिन का महत्व कम हो जाएगा। पीएम मोदी ने एक निर्णय लिया है, जो ये साबित करता है कि वे देश की मूल भावनाओं और चरित्र को समझते हैं।”

मीडिया रिपोर्ट में सीट बँटवारे को लेकर जो बातें सामने आई हैं, उनके अनुसार आरएलडी उत्तर प्रदेश में दो लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी और राज्यसभा में एक सीट दी जाएगी। यूपी के जिन दो लोकसभा सीटों को आरएलडी को देने की बात सामने आ रही है, वो बागपत और बिजनौर है।

दरअसल, लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा उत्तर प्रदेश में 16 सीटें हारी थीं। उन 16 सीटों में सात सीटें पश्चिम उत्तर प्रदेश की थीं। भाजपा मुरादाबाद मंडल की सभी छह सीटें हार गई थीं। दरअसल, पश्चिमी यूपी के कुछ सीटों पर जाटों की ठीक-ठाक संख्या है और इससे भाजपा को फायदा होगा।

उधर, कॉन्ग्रेस की नेतृत्व वाली I.N.D.I गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच उत्तर प्रदेश में सीट बँटवारे को लेकर मतभेद की भी खबरें आईं। कॉन्ग्रेस और सपा के बीच सीट बँटवारे पर बातचीत नहीं हो पाई है। वहीं, सपा ने प्रदेश में 16 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी। हालाँकि, जनवरी में अखिलेश यादव ने कहा था कि राष्ट्रीय लोग दल को सात सीटें आवंटित की जाएँगी।

अखिलेश ने भले RLD को 7 सीटें देने की बात कही, लेकिन सीटें कौन-कौन सी होंगी, ये स्पष्ट नहीं थी। इस सप्ताह की शुरुआत में जब RLD के NDA में शामिल होने की चर्चा होने लगी तो अखिलेश ने कहा था, “जयंत चौधरी शिक्षित व्यक्ति हैं और वे राजनीति को अच्छी तरह से समझते हैं। मुझे उम्मीद है कि वे यूपी की समृद्धि एवं किसानों की लड़ाई कमजोर नहीं होने देंगे।”

भड़काया, गिरफ़्तारी दी, फिर घर लौट गया मौलाना तौकीर रज़ा, इधर इस्लामी भीड़ ने की पत्थरबाजी-तोड़फोड़, हिन्दुओं को पीटा… बरेली में अलर्ट

उत्तर प्रदेश के बरेली में शुक्रवार (9 फरवरी, 2024) को जुमे की नमाज के बाद बवाल हो गया। मौलाना तौकीर रज़ा के बुलावे पर इस्लामिया ग्राउंड में भीड़ पहुँची थी, जिसने लौटते समय हिंसा शुरू कर दी। नारेबाजी की गई, 2 युवकों को पकड़ कर पीट दिया गया। एक बाइक क्षतिग्रस्त कर दी गई। बता दें कि हाल ही में वाराणसी स्थित ज्ञानवापी ढाँचे के तहखाने में अदालत के आदेश के बाद पूजा फिर से शुरू हुई थी, तभी से ‘इंडियन मुस्लिम काउंसिल (IMC)’ के मुखिया मौलाना तौकीर रज़ा ने

बवाल श्यामगंज इलाके से शुरू हुआ। ‘मौलाना आज़ाद इंटर कॉलेज’ के सामने कमल शर्मा और समीर सागर नामक 2 युवक मौजूद थे, उनके साथ मारपीट की गई। उनकी बाइक तोड़े जाने के बाद पत्थरबाजी शुरू कर दी गई। बिहारीपुर पुलिस चौकी के पास मौलाना तौकीर रज़ा ने गिरफ़्तारी दी। पुलिस ने उन्हें तुरंत रिहा भी कर दिया, जिसके बाद वो अपने घर चला गया। GIC ऑडिटोरियम के पास स्थित मस्जिद में नमाज के बाद मुस्लिम भीड़ ने ‘जेल भरो’ अभियान शुरू किया।

हल्द्वानी में हिंसा भड़कने के बाद मौलाना तौकीर रज़ा और भड़क गए। बता दें कि हल्द्वानी में मुस्लिम भीड़ ने थाने और पेट्रोल पंप को फूँक दिया। तौकीर रज़ा ने दरगाह आला हजरत पर नमाज पढ़ने के बाद गिरफ़्तारी दी। अफरा-तफरी के बाद लोग भागते हुए नज़र आए। वीडियो में देखा जा सकता है कि 2 घायल युवकों को ले जाया जा रहा है। पत्थरबाजों ने हाथ में तिरंगा भी ले रखा था। मौलाना तौकीर रज़ा ने इससे पहले भड़काते हुए कहा कि हमने ज्यादती और जुल्म देखा है।

उन्होंने कहा कि हमारे लोगों को जबरदस्त रोका गया, हमने अपने नौजवानों को किसी तरह कंट्रोल किया। उन्होंने VHP और ‘बजरंग दल’ जैसे संगठनों पर सरकार के दम पर बेईमानी का आरोप मढ़ते हुए कहा कि अदालत आस्था के हिसाब से काम कर रही है, कुछ संगठनों को नियंत्रित नहीं किया गया तो दिक्कत होगी। मौलाना तौकीर रज़ा ने कहा कि हमारा नौजवान जवाब देगा, हालात खराब होंगे। उन्होंने मुंबई के कट्टरपंथी मुफ़्ती सलमान अजहरी को रिहा किए जाने की माँग की।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर हालात के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया। उन्होंने बुलडोजर कार्रवाई बंद करने की माँग की। मौलाना तौकीर रज़ा ने कहा था, “अब किसी बुलडोजर को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अगर कोर्ट संज्ञान नहीं ले रहा है तो हम अपनी हिफाजत खुद करेंगे। हमें कानूनी अधिकार है अगर हमारे ऊपर हमला होता है तो हम उसको जान से मार दें। ये हमारा कानूनी अधिकार है।”