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राजस्थान में नौकरी के नाम पर 23 महिलाओं से गैंगरेप, कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व कमिश्नर पर आरोप: दोनों ने बताया साजिश, पुलिस कर रही जाँच

राजस्थान के सिरोही में अलग-अलग जगहों की लगभग 23 महिलाओं के साथ आँगनबाड़ी में नौकरी दिलाने के नाम पर दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। पीड़िताओं ने आरोप लगाया है कि उनका अश्लील वीडियो भी बना लिया गया है। अब उन्हें ब्लैकमेल करके 5 लाख रुपए माँगे जा रहे हैं और रेप के लिए उन्हें बुलाया जा रहा है। मामले में आरोपित पूर्व आयुक्त महेंद्र चौधरी ने इसे फर्जी बताया है।

राजस्थान की पाली जिला निवासी 8 महिलाओं ने सिरोही नगर परिषद के सभापति महेंद्र मेवाड़ा और पूर्व आयुक्त महेंद्र चौधरी के साथ उनके दोस्तों 10-15 दोस्तों एवं परिचितों के खिलाफ नशीला पदार्थ खिलाकर गैंगरेप करने और अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया है। न्यायालय के आदेश पर सिरोही के कोतवाली पुलिस थाना और जोधपुर में मामला दर्ज कराया है।

महिलाओं की शिकायत पर पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। इसके साथ ही मामले की जाँच सीओ सिरोही पारसाराम को सौंपी है। पुलिस क्षेत्राधिकारी परसाराम का कहना है कि महिलाओं ने अलग-अलग मुकदमे दर्ज करवाए हैं। दर्ज प्रकरण में अनुसंधान जारी है। वहीं, मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि सभी रिपोर्टों में एक जैसे आरोप लगाए गए हैं।

इस संबंध में ऑपइंडिया ने सिरोही की पुलिस अधीक्षक ज्येष्ठा मैत्रेयी से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनका सरकारी नंबर स्वीच ऑफ मिला। वहीं, राजस्थान पुलिस की वेबसाइट पर दी सिरोही जिले के डिप्टी एसपी परसाराम चौधरी का मोबाइल नंबर ने नेटवर्क क्षेत्र से बाहर मिला। वहीं, छोटे स्तर के अधिकारी इस मामले में कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं।

पाली के सूरजपोल की रहने वाली महिला ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया कि आँगनबाड़ी में नौकरी के लिए वह 2-3 महीने पहले 15-20 महिलाओं के साथ वह पाली से सिरोही गई थी। वहाँ पर नगर परिषद सभापति महेन्द्र मेवाडा और तत्कालीन आयुक्त नगर परिषद महेन्द्र चौधरी मिले। दोनों ने उन्हें अपने परिचित के यहाँ ठहराया। वहीं पर खाने-पीने की व्यवस्था भी की गई थी।

महिला का आरोप है कि खाने में नशीला पदार्थ मिला दिया गया था। इसकी वजह से खाना खाने के बाद सभी महिलाएँ बेहोश हो गईं। इसके बाद मेवाडा और चौधरी ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर बेहोश महिलाओं के साथ गैंगरेप किया और उनके वीडियो भी बना लिए। महिलाओं को होश आया तो उनका सिर दर्द हो रहा था। जब इसके बारे में उन्होंने चौधरी से पूछा तो तब उन्होंने साजिश के बारे में बताया।

आरोप के अनुसार, मेवाडा और चौधरी ने महिलाओं से कहा, “तुम सभी से हमने खूब मजे लिए। इसके लिए ही हमने तुम लोगों को धोखे से बुलाया था।” महिलाओं ने बताया कि जब चौधरी उन्हें यह सब बता रहा था, तब इन लोगों के 10-15 दोस्त भी मौजूद थे। वे सभी जोर-जोर से हँस रहे थे। वे सभी शराब के नशे में थे और उनके सामने शराब की बाेतलें रखी हुई थीं। 

महिला का आरोप है कि यह पूरा षड्यंत्र महेंद्र मेवाडा और महेंद्र चौधरी ने अपने अन्य दोस्तों-परिचितों के साथ मिलकर रचा था। महिला ने यह आरोप लगाया है कि महेंद्र मेवाड़ा और महेंद्र चौधरी ने बेहोशी की हालत में बनाए गए अश्लील वीडियो को दिखाकर उन्हें ब्लैकमेल कर रहे हैं। उससे 5 लाख रुपए की माँग की जा रही है। इसके साथ ही फिर रेप के लिए दबाव बनाया जा रहा हैं।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है ​कि महेंद्र मेवाडा ने नौकरी का झांसा देकर महिलाओं से खाली कागजों और स्टैंप पेपर पर साइन कराए हैं। उन कागजातों पर महिलाओं से अँगूठे के निशान भी लगवाए हैं। इसके बाद ये कागज अपने पास रख लिए है। बताते चलें कि महेंद्र मेवाड़ा कॉन्ग्रेस पार्टी के नेता हैं।

इन आरोपों पर सिरोही नगर परिषद के सभापति महेंद्र मेवाडा ने कहा, “मेरे खिलाफ षडय़ंत्र रचा किया गया है। साल 2023 में भी 22 महिलाओं ने एक साथ रेप का मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें पीड़ित सामने तक सामने नहीं आए। वह आरोप भी झूठा साबित हुआ था। अब फिर से षडयंत्र रचकर मामला दर्ज कराया है। यह भी झूठा है। जाँच में सब साफ हो जाएगा।”

वहीं, पूर्व आयुक्त महेंद्र चौधरी ने भी मामले को फर्जी बताया है। उन्होंने कहा, “मैं किसी को नहीं जानता। नगर पालिका आँगनबाड़ी की नौकरी नहीं देती है। मैं अगस्त 2022 में रिटायर हो गया हूँ। सब फर्जी है। जब मुकदमा दर्ज हुआ उस समय मैं कमिश्नर ही नहीं था।”

हरियाणा के 7 जिलों में इंटरनेट बंद, बॉर्डर पर बढ़ाई गई सुरक्षा व्यवस्था: किसानों के दिल्ली कूच के बाद हरकत में प्रशासन, शांति-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा

हरियाणा में एक बार फिर से किसानों के सड़क पर उतरने के बाद 7 जिलों में इंटरनेट सेवाएँ निलंबित कर दी गई हैं। इंटरनेट के अलावा खेप में SMS भेजे जाने और डोंगल सेवाओं को भी बंद कर दिया गया है। हालाँकि, वॉइस कॉल सेवाएँ चालू रहेंगी। इन जिलों में इंटरनेट बंद किया गया है – अम्बाला, कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद, हिसार, फतेहाबाद और सिरसा। रविवार (11 फरवरी, 2024) से लेकर मंगलवार को रात के 12 बजे तक ये आदेश लागू रहेगा।

बता दें कि हरियाणा में किसानों ने दिल्ली कूच का ऐलान किया है। हरियाणा के गृह मंत्रालय के एडिशन चीफ सेक्रेटरी ने ये आदेश जारी किया है। उन्होंने कहा है कि पुलिस को सूचना मिली है कि किसानों के कुछ संगठनों द्वारा विरोध प्रदर्शन के ऐलान के बाद तनाव भड़क सकता है, सरकारी-निजी संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया जा सकता है। उन्होंने कहा है कि इसी के मद्देनजर अफवाहों पर लगाम लगाने के लिए और संदिग्ध कंटेंट्स के प्रसारण को रोकने के लिए इंटरनेट बंद करने का कदम उठाया गया है।

नोटिस में कहा गया है कि सोशल मीडिया के माध्यम से भड़काऊ सामग्रियाँ फैला कर जान-माल को क्षति पहुँचाए जाने की आशंका है। हालाँकि, बैंकिंग सेवाएँ चलती रहेंगी मोबाइल रिचार्ज भी किया जा सकेगा। अम्बाला के शंभू बॉर्डर पर किसान डेरा डाल सकते हैं, इसीलिए इससे जुड़े इलाकों में पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई है। वहाँ सीमेंट के बैरिकेड्स और कंक्रीट की दीवारें लगा दी गई हैं। किसान ट्रैक्टर लेकर इसे हटा न पाएँ, इसीलिए ये बंदोबस्त किया गया है।

शंभू बॉर्डर को पूरी तरह सील कर दिया गया है। दिल्ली-जम्मू नेशनल हाइवे पर घग्गर नदी पर एक पुल है, जहाँ दिल्ली-पंजाब वाली ट्रैफिक रहती है। पिछली बार यहीं से किसान दिल्ली में घुसे थे। इस बार इसके आसपास के इलाकों में खुदाई कर दी गई है। पूरी कोशिश की जा रही है कि किसान हरियाणा में न घुस पाएँ, क्योंकि फिर वो दिल्ली में घुस जाएँगे। किसान MSP सहित कई मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार पर हमलवार हैं। अब देखना है कि इस बार उनका दिल्ली कूच सफल हो पाता है या नहीं।

महाराष्ट्र: ट्वीट ने ‘अपराजित भारत’ को पहुँचाया सलाखों के पीछे, एससी/एसटी एक्ट में मामला दर्ज, 3 दिन की पुलिस हिरासत

महाराष्ट्र के मुलुंड में सोशल मीडिया पोस्ट की वजह से एक एक्स यूजर अमेय प्रधान को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने @AParaBharat नाम के एक्स हैंडल पर कुछ पोस्ट किए थे। बताया जा रहा है कि शुक्रवार (9 फरवरी 2024) की रात बिना किसी नोटिस के गिरफ्तार कर लिया गया।

ऑपइंडिया के पास मौजूद एफआईआर की कॉपी के मुताबिक, एक्स यूजर अमेय प्रधान ने भारत रत्न डॉ भीमराव आंबेडकर के खिलाफ कुछ ट्वीट पोस्ट किए थे, जिसकी वजह से उनके अनुयायियों की “धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची।” इस मामले में नासिक साइबर पुलिस स्टेशन ने उन पर एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नासिक पुलिस ने अमेय प्रधान को कोर्ट में पेश किया था, जहाँ उन्हें 3 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।

इन ट्वीट्स की वजह से जेल पहुँचे अमेय प्रधान..

ट्वीट-1: “मुझे खुशी है कि आपने स्वीकार किया कि डॉ. बीआर आंबेडकर की विचारधारा इस देश में फेल हो गई है। उन्होंने भारत को कभी नहीं देखा, उन्हें बस यही पता था कि भारत के बारे में अंग्रेजों ने इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है।”

ट्वीट-2: “उन्हें एहसास हो गया है कि 21वीं सदी में धीरे-धीरे आंबेडकर बेनकाब हो जाएँगे। इसलिए वे फर्जी कहानी को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।”

ट्वीट-3: “आंबेडकर का उल्लेख स्वतंत्रता सेनानी के रूप में क्यों किया जाता है…?”

नासिक पुलिस स्टेशन में हेमंत तायडे नाम के एक अन्य एक्स यूजर ने शिकायत दर्ज कराई थी।

एफआईआर के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने प्रधान द्वारा अपने एक्स हैंडल पर किए गए तीन पोस्ट के स्क्रीनशॉट सौंपे। शिकायतकर्ता ने कहा कि उसकी आरोपित के साथ कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है और वह किसी राजनीतिक दल से जुड़ा नहीं है।

एफआईआर में इन तीन ट्वीट्स का जिक्र किया गया है।

शिकायत में कहा गया है, “7/2/2024 को सुबह 11.30 बजे अपनी प्रोफ़ाइल @hemanttayade2 पर जाते समय, मुझे प्रकाश आंबेडकर की एक पोस्ट मिली, जिस पर अपराजित भारत नाम के एक्स यूजर ने डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के अपमान के साथ जवाब दिया था।” शिकायत में आगे कहा गया है कि प्रधान के पोस्ट संभावित रूप से दो समुदायों के बीच तनाव पैदा कर सकते हैं। शिकायत में उल्लेख किया गया है कि आरोपित “उच्च जाति” से है।

शिकायत में कहा गया है कि, “हमारा समुदाय डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर की पूजा करता है, उनका सम्मान करता है। हम उन्हें अपना भगवान मानते हैं और उनकी पूजा करते हैं। एक्स उपयोगकर्ता @Aparभारत ने दो समुदायों के बीच विभाजन पैदा करने और सामाजिक एकता को खतरे में डालने और अपने पोस्ट के माध्यम से शांति को बाधित करने का प्रयास करके मेरी और मेरे समुदाय की धार्मिक और सामाजिक भावनाओं को ठेस पहुँचाई है।”

कॉन्ग्रेस को ठेंगा: ममता-नीतीश के बाद अब अरविंद केजरीवाल ने इंडी गठबंधन को दिया झटका, पंजाब-चंडीगढ़ की सभी 14 लोकसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान

आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कॉन्ग्रेस और इंडी गठबंधन को ठेंगा दिखा दिया है। उन्होंने आम आदमी पार्टी द्वारा पंजाब-चंडीगढ़ की सभी 14 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। अरविंद केजरीवाल ने शनिवार (10 फरवरी 2024) को पंजाब में इस बात का खुला ऐलान कर दिया है कि उनकी पार्टी पंजाब और चंडीगढ़ की सभी 14 (13+1) लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

इंडी गठबंधन से जुड़े होने की कसमें बार-बार खाने के बावजूद आखिरकार अरविंद केजरीवाल को इसका ऐलान करना पड़ा, क्योंकि इंडी गठबंधन की बैठकों और कॉन्ग्रेस हाई-कमान के साथ बैठकों के बावजूद कोई ठीक-ठाक जवाब नहीं मिला। दोनों ही पार्टियाँ सीटों पर बंटवारे पर सहमति नहीं बना पाई। इसके बाद अरविंद केजरीवाल ने इस बात का ऐलान कर दिया।

अरविंद केजरीवाल ने पंजाब के खन्ना में आयोजित कार्यक्रम में पंजाब की जनता से पहले की तरह प्यार माँगा और लोगों से आम आदमी पार्टी को वोट देने की अपील भी की। उन्होंने कहा, “आज से 2 साल पहले आपने हमें बहुत बड़ा ‘आशीर्वाद’ दिया था और पंजाब में 117 में से 92 सीट जिताई थी। आज आपसे हाथ जोड़कर एक और आशीर्वाद माँगने आया हूँ। 2 महीने बाद लोकसभा के चुनाव हैं। लोकसभा चुनाव के लिए पंजाब में 13 सीट हैं और एक सीट चंडीगढ़ में है। आने वाले 15 दिनों में आम आदमी पार्टी इन 14 सीटों पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर देगी।”

बता दें कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान कई बार बिना कॉन्ग्रेस के गठबंधन के चुनाव लड़ने की बात कह चुके हैं। दिल्ली में जब कॉन्ग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं के बीच सीट शेयरिंग को लेकर बैठकें हुई उससे भगवंत मान ने दूरी बनाए रखी। अब केजरीवाल ने जिस तरह पंजाब में सभी सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ने का ऐलान किया है, वो ये साफ करता है कि आम आदमी पार्टी की पंजाब इकाई का दबाव काम कर गया।

बैठक के लिए बुलाया, फिर तेजस्वी यादव के घर में नजरबंद कर दिए गए RJD के सभी MLA: रिपोर्टों में दावा, बिहार में कुनबा बचाने में जुटा विपक्ष

बिहार की राजनीति में हलचल अब भी जारी है। सोमवार (12 फरवरी, 2024) को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को विधानसभा में बहुमत साबित करना है। भाजपा और जदयू को मिला कर बहुमत का आँकड़ा पार हो जाता है, लेकिन साथ में जीतन राम माँझी की HAM और मुकेश साहनी की VIP भी है। इधर अब खबर आ रही है कि राजद नेता तेजस्वी यादव ने अपने आवास पर ही राजद के विधायकों एवं विधान पार्षदों को नज़रबंद कर के रख लिया है।

‘न्यूज़ 18’ ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया है कि पटना के 5, देशरत्न मार्ग स्थित अपने आवास में पूर्व उप-मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने अपने विधायकों और विधान पार्षदों को कैद कर के रखा हुआ है। फ्लोर टेस्ट संपन्न होने से पहले इनमें से किसी को भी बाहर जाने की अनुमति नहीं मिलेगी। खबर के अनुसार, तेजस्वी यादव ने सभी विधायकों और विधान पार्षदों को कह दिया है कि वो अपने-अपने घर से पहनने वाले अतिरिक्त कपड़े मँगा लें।

फ्लोर टेस्ट में शामिल होने के लिए इन सभी विधायकों को तेजस्वी यादव के आवास से ही विधानसभा से लेकर जाया जाएगा। तेजस्वी यादव ने बैठक में कॉन्ग्रेस और लेफ्ट के भी सभी विधायकों और विधान पार्षदों को एकजुट रहने के लिए कहा है। इस दौरान विधायकों ने हाथ उठा कर तेजस्वी यादव का समर्थन किया। तेजस्वी यादव के आवास पर फ़िलहाल सुरक्षा भी कड़ी कर के रखी गई है। साथ ही मीडियाकर्मियों के प्रवेश करने पर भी रोक लगा दी गई है।

पुरुष एवं महिला विधायकों-विधान पार्षदों के रुकने के लिए आवास के भीतर ही अलग-अलग व्यवस्था की गई है। साथ ही मुख्य दरवाजे पर बैरिकेडिंग कर दी गई है। उनके खाने-पीने से लेकर आराम करने तक के सारे इंतज़ाम कर दिए गए हैं। इस दौरान कुछ लोगों को सामान लेकर तेजस्वी यादव के आवास के भीतर जाते हुए भी देखा गया। बता दें कि बिहार में नीतीश कुमार ने राजद का साथ छोड़ कर भाजपा का दामन थामा है। 9वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अब उन्हें विधानसभा में बहुमत साबित करना है।

राजद के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा है कि हमारे लिए 12 फरवरी कोई सामान्य तारीख़ नहीं है। उन्होंने इसकी पुष्टि की कि विधायकों ने निर्णय लिया है कि वो अगले 48 घंटे तक एक साथ रहेंगे और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि विधायक अंदर अंतराक्षरी खेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमने इस खेल को शुरू नहीं किया, लेकिन तेजस्वी यादव इसे खत्म करेंगे। उन्होंने दावा किया कि नीतीश कुमार खुद ही गठबंधन करने आए थे।

‘घर में से महिलाओं को उठा ले जाते हैं TMC के गुंडे, ‘संतुष्ट’ होने के बाद छोड़ते हैं’: जिसने ED पर करवाया हमला, उस शेख के खिलाफ बंगाल में महिलाओं ने खोला मोर्चा

पश्चिम बंगाल में उत्तर 24 परगना जिला है। यहाँ संदेशखाली नाम की जगह है। इस साल की शुरुआत में इसी जगह के टीएमसी नेता शेख शाहजहाँ पर रेड करने की गई ईडी की टीम पर जानलेवा हमले हुए थे। अब यहाँ गुरुवार (8 फरवरी 2024) से एक बार फिर मामला गरमा गया। सड़कों पर उतरी महिलाओं ने टीएमसी नेता शाहजहाँ शेख, शिबा हाजरा समेत उसके सहयोगियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। ये प्रदर्शन शनिवार को भी जारी है। बता दें कि गुरुवार को टीएमसी कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों के बीच हुई मारपीट में 13 नेता और कार्यकर्ता घायल हो गए। इस पर पुलिस ने इलाके में धारा 144 लागू करने के साथ ही इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी थी।

क्यों हो रहा है प्रदर्शन?

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार द्वारा पश्चिम बंगाल को फंड न देने को लेकर टीएमसी नेताओं ने संदेशखाली के त्रिमोहानी बाजार में लोगों के साथ मिलकर रैली निकाली थी। इस रैली में शाहजहाँ शेख के नारे लगाने पर बवाल मच गया। संदेशखाली की महिलाओं और पुरुषों ने लाठी-डंडे लेकर टीएमसी के गुंडों को दौड़ा लिया। इस दौरान दोनों ओर से मारपीट शुरू हो गई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि टीएमसी नेता बाहरी लोगों के साथ मिलकर रैली निकालकर इलाके में अशांति फैला रहे हैं।

वहीं, महिलाओं की माँग है कि टीएमसी नेता शाहजहाँ शेख को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाए, क्योंकि शाहजहाँ शेख टीएमसी के नाम पर अत्याचार करता है। उनका कहना है कि शेख और उसके आदमी ईडी की टीम पर हमले से बहुत पहले से लोगों पर गंभीर अत्याचार कर रहे हैं।

बता दें कि ममता बनर्जी का बेहद करीबी शेख शाहजहाँ 5 जनवरी 2024 कोईडी और सीएपीएफ कर्मियों पर हमले के पीछे का मास्टरमाइंड है और तभी से वो फरार है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये मामला शुक्रवार (09 फरवरी 2024) को तब गरमा गया, जब संदेशखाली और उसके आसपास के इलाकों में महिलाओं ने मोर्चा निकाला और गुस्साए लोगों ने शेख शाहजहाँ के करीबी विश्वासपात्र शिबू हाजरा के पोल्ट्री फार्म को आग लगा दिया और टीएमसी नेताओं की संपत्तियों पर हमले लिए। लोगों ने कहा कि जिस पॉल्टी फार्म को बर्बाद किया गया, उस जगह पर शिबू हाजरा ने जबरन कब्जाया था। उस जगह से कई गैर-कानूनी गतिविधियों को अंजाम दिया जाता रहा है। शेख शाहजहाँ और उसके साथियों ने गरीबों की काफी जमीनों पर जबरन कब्जा किया है।

संदेशखाली में टीएमसी के गुंडे महिलाओं को उठाते, रात भर भोगते फिर छोड़ते

हिंदुस्तान टाइम्स ने संदेशखाली की रहने वाली महिला के हवाले से हताया है कि शाहजहाँ के करीबी उत्तम सरकार और शिबा हाजरा ने सैकड़ों एकड़ जमीनों पर कब्जा कर लिया है और वहाँ मछलीपालन करके पैसे बना रहे हैं। कई सालों में उन्होंने प्रधान मंत्री आवास योजना के तहत बने घरों तक को उजाड़ दिया और ग्रामीणों को मनरेगा जैसी योजनाओं से मिले मेहनत के पैसों को भी मार लिया। महिला ने बताया, “जमीनों पर कब्जे करने वाले गुंडे स्थानीय लोगों से बेगारी कराते थे और पैसे बनाते थे। दिन ढलने के बाद महिलाएँ घर से नहीं निकल पाती, क्योंकि शाहजहाँ के साथी उनके साथ बदतमीजी करते।”

इस बीच, बीजेपी नेता अमित मालवीय ने एक्स पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें पश्चिम बंगाल के संदेशखाली की रहने वाली एक स्थानीय महिला टीएमसी के गुंडों के हाथों स्थानीय महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों के बारे में बताती हुई सुनाई दे रही है। वह इस बात पर अफसोस जताती हैं कि कैसे तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता बाइक पर 20-30 के ग्रुप में आते हैं और वे इलाके की हर महिला की जाँच करते हैं। वे सबसे कम उम्र की और सबसे अच्छी दिखने वाली महिला को चुनते हैं और उसे अपने साथ ले जाते हैं। वह कहती हैं, वे रात-रात भर उसके साथ संबंध बनाते हैं, और उसे तभी छोड़ते हैं जब वे “संतुष्ट” हो जाते हैं।

महिला शेख शाहजहाँ और उसके आदमियों की ओर से फैलाए गए आतंक और डर को बयान करती है। महिला ने कहा कि “जिस भी महिला पर इन गुंडों की नजर पड़ गई, भले ही वो कुँवारी हो या शादीशुदा, वो उसे उठा ले जाते हैं। यही नहीं, शादीशुदा महिलाओं के पति को भी उसपर कोई हक नहीं होता। बस उन्हें महिला पसंद आनी चाहिए, इसके बाद सबकुछ उनकी मर्जी।” वो महिला ममता बनर्जी के शासन पर अफसोस जताते हुए महिलाओं की बेबसी बयान करती दिख रही है।

इस बीच, शेख शाहजहाँ के समर्थक भी सड़कों पर उतर आए और टीएमसी नेता और उनके सहयोगियों की गिरफ्तारी की माँग को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर ही हमले करने लगे।

हिंदूपोस्ट ने शेख शाहजहाँ के गुंडों द्वारा स्थानीय लोगों और महिलाओं पर हमले का एक छोटा सा वीडियो शेयर किया है। घायलों में एससी, ओबीसी जैसे तबकों के लोग हैं। हिंदू पोस्ट ने लिखा, “पश्चिम बंगाल के संदेशखाली में टीएमसी नेता शेख शाहजहाँ के गुंडों ने हिंदू ग्रामीणों पर हमला किया। दलित भारतीय धर्मनिरपेक्षता उर्फ इस्लामवाद के सबसे ज्यादा शिकार हैं, लेकिन कोई भी भीम आर्मी, बामसेफ, एपीपीएससी इन लोगों के लिए कभी नहीं बोलेगा।”

इस मामले में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष अरुण हलदार ने शाहजहाँ पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि महिलाओं ने शाहजहाँ और उनके गंडों पर घटिया आरोप लगाए हैं। वो राक्षस है। उसके खिलाफ एनआईए जाँच कर रही है। वो देशद्रोही और गद्दार है।

बीजेपी ने बोला टीएमसी पर हमला

पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने टीएमसी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह से भी हस्तक्षेप की माँग की है। सुकाँत ने कहा, “संदेशखाली में हालात अभी बहुत खराब हैं, ग्रामीणों ने जमीन पर कब्जा…लड़कियों के अपहरण जैसे अत्याचारों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया, जो सालों से चल रहे हैं…पुलिस स्थिति को नियंत्रित नहीं कर सकी। वो टीएमसी के गुंडों का साथ दे रही है और ग्रामीणों को गिरफ्तार कर रही है। टीएमसी के गुंडों ने ग्रामीणों पर भी हमला किया, उनके घरों में आग लगा दी और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया…मैंने केंद्रीय गृह मंत्री को पत्र लिखकर इस बारे में कुछ करने का अनुरोध किया, वहाँ के लोग गंभीर खतरे में हैं।”

हालाँकि, स्थानीय पुलिस ने टीएमसी गुंडों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय कुछ स्थानीय ग्रामीणों को गिरफ्तार कर लिया है। इस बीच, स्थानीय लोगों ने संदेशखाली पुलिस स्टेशन के बाहर धरना शुरू कर दिया है और कहा है कि यह तब तक जारी रहेगा जब तक शाहजहाँ और उसके सहयोगियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता।

पुलिस अधीक्षक हुसैन मेहेदी रहमान ने कहा कि स्थिति से निपटने के लिए क्षेत्र में ज्यादा जवान भेजे गए हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों ने गुरुवार को शाहजहाँ और उसके सहयोगियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, जिसकी जाँच की जा रही है। उन्होंने कहा कि शेख शाहजहाँ की तलाश की जा रही है।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अतिरिक्त महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) मनोज वर्मा ने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और लोगों से कानून को अपने हाथ में नहीं लेने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, “दर्ज की गई सभी शिकायतों की जांच चल रही है और कार्रवाई की जाएगी। वहीं, अगर कोई कानून अपने हाथ में लेगा तो कानून अपना काम करेगा। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।”

कौन है शेख शाहजहाँ?

बता दें कि शुक्रवार (05 जनवरी 2024) को ईडी की एक टीम टीएमसी नेता शेख शाहजहाँ के संदेशखली के सरबेरिया स्थित घर पर रेड मारने गई थी। ये जगह बांग्लादेश की सीमा से सटी है। अधिकारियों ने देखा उसके घर ताला लगा है। जब उन्होंने लॉक तोड़ने की कोशिश की तो टीएमसी समर्थकों की भीड़ ने उनपर हमला किया। जानकारी के मुताबिक, संदेशखली इलाके में 53 वर्षीय टीएमसी नेता शेख शाहजहाँ का रसूख है उसे लोग संदेशखली का बेताज बादशाह बताते हैं। शेख का कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं है लेकिन फिर भी वह राजनीति में बड़ी तेजी से आगे बढ़ा। वह जन्मा गरीब घर में ही था, जिसके कारण शुरुआत में उसने ट्रक ड्राइवर का काम किया, तो कभी कंडक्टर का। कभी सब्जी बेची तो कभी कुछ और किया। लेकिन इन सबके साथ वो संदेशखली में बड़े नेताओं से संपर्क भी बनाता रहा।

धीरे-धीरे समय आया कि वो खुद एक रसूखदार आदमी बन गया। 2006 में वामपंथी सरकार के वक्त उसने मोस्लेम शेख के सबसे करीबी सहयोगी के रूप में पैसे उगाही जैसे काम करने की शुरूआत की। धीरे-धीरे वो रियल स्टेट में घुसा और फिर मछली पालन जैसे कामों में लग गया।

सत्ता परिवर्तन के साथ उसका पाला भी बदल गया। 2011 में वामपंथी सरकार गई तो 2013 में वो टीएमसी में आ गया। यहाँ वह खाद्य मंत्री ज्योतिप्रियो मल्लिक का खास बन गया। बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ टीएमसी कार्यकर्ताओं की झड़पों में भी शेख का नाम आता रहा। 2020 में उसके ऊपर दो भाजपा नेताओं की हत्या का इल्जाम लगा, लेकिन वह उससे भी बच गया। उसकी नीति यही रही कि वो हमेशा से बड़े लोगों के ग्रुप में उठता-बैठता, जिससे जब उस पर कोई दोष लगे तो वह बच सके। यही वजह है कि उसपर कार्रवाई नहीं हुई। उसपर अपने चुनाव क्षेत्र में चुनाव के दौरान धांधली करने का आरोप भी लगता रहा है।

उसकी टीएमसी में कितनी पैठ है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश सीएम के खास लोगों ने शाहजहाँ शेख को सपोर्ट किया था। वहीं 1 जनवरी 2024 को तो शाहजहाँ ने खुले में धमकी ही दी थी। ये जानकारी बीजेपी नेता अमित मालवीय के ट्वीट से मिली। इसमें शाहजहाँ ने कहा था कि सीबीआई और ईडी उसके बाल तक नहीं छू सकतीं। उसने सबसे ये दुआ करने को भी कहा था कि सब दुआ करें उसे गुस्सा न आए वरना वो बीजेपी कार्यकर्ताओं और नेताओं के दाँत तोड़ देगा और उनकी खाल उतार देगा।

‘हेलिकाॅप्टर से आश्रम जाते थे काॅन्ग्रेसी CM, सरकारी खजाने से भरा जाता था पैसा’: असम के मंत्री ने तरुण गोगोई के ‘Joy Ride’ का किया खुलासा

कॉन्ग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने शनिवार (10 फरवरी, 2024) को लोकसभा में एक स्थगन प्रस्ताव देते हुए असम सरकार द्वारा मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की हवाई यात्राओं के खर्चों पर बहस की माँग की। कलियाबोर से लोकसभा सांसद गौरव गोगोई ने दावा किया कि सीएम सरमा व अन्य VIP लोगों के सर ट्रेवल पर 58.23 करोड़ रुपए सरकारी खजाने से खर्च किए गए हैं, जिसमें कई गैर-सरकारी यात्राएँ भी शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य से बाहर शादियों एवं राजनीतिक कार्यक्रमों को अटेंड करने के लिए इन फ्लाइट्स का इस्तेमाल किया गया।

अब असम सरकार ने इस मामले पर गौरव गोगोई और कॉन्ग्रेस को करारा जवाब दिया है। असम सरकार में संसदीय मामलों, जल संसाधन और सूचना एवं PR जैसे विभाग सँभाल रहे पीजूष हजारिका ने इसका जवाब देते हुए लिखा, “मुझे याद है कैसे दिवंगत तरुण गोगोई डंगोरिया कई बार हेलीकॉप्टर से 50 किलोमीटर का मजेदार सफर करते थे, गुवाहाटी से नलबारी स्थित जागीरोड अपने ज्योतिष से मिलने जाते थे। कॉन्ग्रेस पार्टी ने कभी इन खर्चों का बिल नहीं भरा।”

उन्होंने इस मुद्दे पर गौरव गोगोई को बात करने की चुनौती दी। बता दें कि असमिया भाषा में ‘डंगोरिया’ का अर्थ ‘सम्मानित’ होता है। बता दें कि पीजूष हजारिका जागीरोड से ही विधायक हैं। उन्होंने बताया है कि तरुण गोगोई उस क्षेत्र में स्थित आश्रम में हेलीकॉप्टर से सरकारी खर्चे पर आते थे। बता दें कि तरुण गोगोई 15 वर्षों तक लगातार असम के मुख्यमंत्री रहे हैं। उससे पहले वो सांसद और मंत्री भी रहे हैं। गौरव गोगोई उनके ही बेटे हैं।

वहीं असम मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी इस पर सफाई देते हुए कहा है कि CM हिमंता बिस्वा सरमा के चुनावी खर्चों का भुगतान असम सरकार नहीं करती है। CMO ने कहा कि ऐसे सभी खर्च उनसे जुड़ी राजनीतिक पार्टी द्वारा चेक-ऑनलाइन ट्रांसफर के माध्यम से पे किए जाते हैं। हालाँकि, जब वो राज्य में कहीं किसी सरकारी कार्यक्रम में जाते हैं और वहाँ कोई श्रद्धांजलि या सामाजिक कार्यक्रम होते हैं तो वो अटेंड कर लेते हैं। इस पूरे मुद्दे को 2 मीडिया संस्थानों ने RTI के हवाले से इन्वेस्टीगेशन का दावा किया था।

‘अगले 25 साल में विकसित बन जाएगा भारत’: PM मोदी ने 17वीं लोकसभा के समापन पर गिनाए 5 साल में हुए ऐतिहासिक कार्य, कहा – खत्म हुआ पीढ़ियों का इंतज़ार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट सत्र में संसद की लोकसभा में चर्चा में हिस्सा लेते हुए कहा कि इस कार्यकाल में कई पीढ़ियों का इंतज़ार खत्म हुआ है। पीएम मोदी ने शनिवार (10 फरवरी, 2024) को कहा कि आज का ये दिवस लोकतंत्र की एक महान परंपरा का महत्वपूर्ण दिवस है। उन्होंने कहा कि 17वीं लोकसभा ने 5 वर्ष देश सेवा में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय किए गए और अनेक चुनौतियों का सामना करते हुए भी सबने अपने सामर्थ्य से देश को उचित दिशा देने का प्रयास किया। उन्होंने अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने और तीन तलाक को गैर-कानूनी बनाने के फैसले का भी जिक्र किया।

पीएम मोदी ने कहा कि एक प्रकार से आज का ये दिवस हम सबकी उन 5 वर्ष की वैचारिक यात्रा का, राष्ट्र को समर्पित समय का और देश को एक बार फिर से अपने संकल्पों को राष्ट्र के चरणों में समर्पित करने का अवसर है। बकौल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, ये 5 वर्ष देश में रिफॉर्म, परफॉर्म एवं ट्रांसफॉर्म के रहे हैं। उन्होंने सांसदों का भी इस बात के लिए आभार व्यक्त किया कि संकट काल में देश की आवश्यकताओं को देखते हुए सांसद निधि छोड़ने का प्रस्ताव जब उन्होंने सांसदों के सामने रखा, तो एक पल के विलंब के बिना सभी सांसदों ने इस प्रस्ताव को मान लिया।

पीएम मोदी ने कहा कि आने वाले 25 वर्ष हमारे देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं, राजनीति की गहमा-गहमी अपनी जगह है, लेकिन देश का संकल्प बन चुका है कि देश अब इच्छित परिणाम प्राप्त कर के रहेगा। उन्होंने कहा कि 1930 में जब महात्मा गाँधी ने नमक सत्याग्रह किया था, दांडी यात्रा की थी, उस समय ये घटनाएँ छोटी लगती थीं लेकिन 1947 में उस 25 साल के कालखंड ने देश के हर व्यक्ति के दिल में आज़ादी का जज्बा पैदा कर दिया था।

’25 साल में हम विकसित भारत रहेंगे’ – पीएम मोदी ने इसे ध्येय बताया। उन्होंने कहा कि पिछले 5 वर्ष में युवाओं के लिए कई ऐतिहासिक कानून बने, व्यवस्था में पारदर्शिता लाकर युवाओं को नए मौके दिए गए। इस दौरान पेपर लीक को लेकर बने कठोर कानून का भी उन्होंने जिक्र किया। उन्होंने ‘नेशनल रिसर्च फाउंडेशन’ का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने अनुसन्धान को महत्व दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी में हमारी मूलभूत ज़रूरतें बदल रही हैं, जिसका कल कोई मोल नहीं था वो आज मूल्यवान हो जाता है।

उन्होंने कहा कि इसी में से एक है – डेटा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि डिजिटल सुरक्षा की व्यवस्था करते हुए उनकी सरकार ने कानून बनाया। पीएम मोदी ने कहा कि जल, थल, नभ जैसे क्षेत्रों की चर्चा सदियों से चली है, लेकिन अब साइबर और अंतरिक्ष क्षेत्र में मुकाबले का भी समय है। पीएम मोदी ने इस दौरान अंग्रेजों के ज़माने के कानूनों से मुक्ति दिलाए जाने के फैसले की भी बात की। पीएम मोदी ने कहा कि ‘जन विश्वास एक्ट’ के तहत 180 से अधिक प्रावधानों को अपराधीकरण से हटाया गया, छोटी-छोटी बातों पर जेल न हो ऐसी व्यवस्था लाई गई, नागरिकों पर भरोसा बढ़ा।

इसी तरह उन्होंने मध्यस्थता कानून की बात करते हुए कहा कि इससे छोटी-छोटी चीजों के लिए कोर्ट में दौड़ने से मुक्ति मिली। ट्रांसजेंडर समुदाय की ज़िंदगी बेहतर बनाने के लिए बने कानून को लेकर कहा कि दुनिया भर में इसकी चर्चा है। उन्होंने जानकारी दी कि 16-17 हजार ट्रांसजेंडर लोगों को आईकार्ड मिला है, उन्हें कारोबार के लिए मुद्रा लोन मिल रहे हैं, पद्म अवॉर्ड मिले हैं। पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना जैसी विकट परिस्थिति में भी देश की संसद ने अच्छे काम किए।

इस्लामी देश मलेशिया में ‘रद्द’ हुए शरिया के 16 कानून, कट्टरपंथी भड़के: बोले- हमारी आँखों के सामने क्या-क्या हो रहा है

मलेशिया की सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला लेते हुए केलंतन राज्य में शरिया आधारित आपराधिक कानूनों को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह संघीय सरकार का अधिकार है और इस तरह के कानून उस पर अतिक्रमण करते हैं। इस फैसले के बाद मलेशिया में इस्लामी कट्टरपंथी नाराज हो रखे हैं।

जानकारी के मुताबिक, कोर्ट में यह केस 2022 में दो मुस्लिम महिलाओं की ओर से दायर किया गया था जिसपर सुनवाई करते हुए 9 फरवरी 2024 को नौ सदस्यीय संघीय न्यायालय ने 8-1 के बहुमत से फैसला सुनाया। फैसले में 16 कानूनों को अमान्य करार दिया गया।

इन कानूनों में कुकर्म, यौन उत्पीड़न, अनाचार और ‘क्रॉस ड्रेसिंग’ (विपरीत लिंग से संबंधित कपड़े पहनना) से लेकर झूठे सबूत देने तक के अपराधों के लिए दंड का प्रावधान किया गया था। कोर्ट ने इन कानूनों को रद्द करते हुए कहा कि इन (उक्त) विषयों के लिए इस्लामी कानून नहीं बना सकते, क्योंकि ये विषय मलेशियाई संघीय कानून के अंतर्गत आते हैं।

इस फैसले को सुनाते वक्त कोर्ट के बाहर सिक्योरिटी टाइट थी क्योंकि इस्लामी कट्टरपंथी इस केस के विरोध में पहले से थे। द स्ट्रेट टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि निर्णय आने के वक्त 1000 से अधिक कट्टरपंथी लोग पुतराज्य में कोर्ट के बाहर प्रदर्शन करने के लिए कोर्ट के बाहर थे। निर्णय आने के बाद वह सब नाराज हो गए।

उन्होंने कहा, “इस तरह का निर्णय इस्लामी मुल्क में नहीं लिया जाना चाहिए। ये हमारी आँखों के आगे हो रहा है। हम मुस्लिमों को लग रहा है कि हमें चुनौती दी जा रही है। अगर हमारे मुल्क में कानून नहीं होगा तो मुश्किल हो सकती है। देश मुश्किल में पड़ जाएगा।”

कुछ प्रदर्शनकारियों ने इस फैसले के लिए नेताओं को दोषी बताया। वहीं कुछ ने माँग की कि शरिया को वापस से वैसे ही राज्य में लागू किया जाए जैसे वो पहले था। उसमें कोई बदलाव न हो।

गौरतलब है कि मलेशिया में 1990 से कट्टरपंथी पैन मलेशियाई इस्लामिक पार्टी या PAS का राज है। वहाँ दो स्तरीय कानून प्रणाली चलती है। इसके तहत शरिया के तहत मुस्लिमों के व्यक्तिगत और पारिवारिक मामले आते हैं और साथ ही यहाँ सिविल कानून भी चलता है। जिस राज्य की अदालत ने इस फैसले को सुनाया है वहाँ की 97 फीसद आबादी मुस्लिमों की है।

‘पानी की बोतलों में पेट्रोल भरकर किए हमले, महिला पुलिसकर्मियों के फाड़े कपड़े’: हल्द्वानी में घायलों की सेवा के लिए आगे आया ‘बजरंग दल’

हल्द्वानी में अवैध मदरसा-मस्जिद को कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन बुलडोजर लेकर ध्वस्त करने पहुँचा तो भीड़ उग्र हो गई। पत्थरबाजी की गई, गोलीबारी की गई, बनभूलपुरा थाना व पेट्रोल पंप फूँक दिया गया, गाड़ियाँ क्षतिग्रस्त कर दी गईं और बुलडोजर का शीशा भी फोड़ दिया गया। पुलिसकर्मियों को ज़िंदा जलाने का प्रयास भी किया गया। हिन्दू कार्यकर्ताओं ने इस दौरान पीड़ितों की सहायता की, पुलिस की मदद की। कई महिला पुलिसकर्मियों को भी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

इस घटना के चश्मदीद रहे ‘बजरंग दल’ के एक कार्यकर्ता ने ऑपइंडिया से बातचीत कर के आँखों देखा हाल बताया। हल्द्वानी के रहने वाले जोगिन्दर सिंह राणा ने इसे एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना करार दिया। उन्होंने बताया कि जब से उन्होंने होश सँभाला है, तब से ऐसी घटना नहीं देखी। उन्होंने बताया कि 1992 में बाबरी ढाँचे के विध्वंस के समय दंगे भड़के थे, लेकिन तब भी ऐसी हिंसा नहीं हुई थी। उन्होंने बताया कि पुलिस पर पथराव किया गया, महिला सिपाहियों के कपड़े तक फाड़ डाले गए।

उन्होंने बताया कि कैसे बनभूलपुरा थाने और पेट्रोल पंप को आग के हवाले कर दिया। उन्होंने इसे भय पैदा करने वाली घटना करार दिया। जोगिन्दर सिंह राणा ने बताया कि गुरुवार (8 फरवरी, 2024) को रात के 10 बजे पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों से उनकी बातचीत हुई थी, तब उनका कहना था कि हल्द्वानी के 4 अस्पतालों में 100-150 गया पुलिसकर्मी भर्ती थे। हिन्दू कार्यकर्ताओं से पुलिस-प्रशासन ने निवेदन किया कि वो घायल पुलिसकर्मियों की देखरेख करें।

‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ता ने बताया कि पुलिस से मुठभेड़ उस समय चल ही रही थी और उनलोगों का अस्पतालों में जाना खतरे से खाली नहीं था, लेकिन रात डेढ़ बजे तक वो लोग सेवाएँ देते रहे। उन्होंने कहा कि वो इस कारण चिंतित थे क्योंकि कुछ ही महीनों पहले नूँह में हिंसा हुई थी और जिहादियों ने अस्पताल में घुस कर भी पुलिस वालों को मारने का प्रयास किया था। इसीलिए, अस्पताल में हिन्दू कार्यकर्ता न सिर्फ सेवा कर रहे थे बल्कि सुरक्षा भी कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि ऐसी कोई विकट परिस्थिति आती तो हर हिन्दू कार्यकर्ता इससे निपटने में सक्षम था। उन्होंने कहा कि अगर आप पीड़ित हैं तो आप प्रशासन से शिकायत कर सकते हैं, लेकिन इन्होंने पुलिस पर हमले का रास्ता चुना जो लोकतंत्र पर हमला है। उन्होंने बताया कि कैसे महिला सिपाही रो रही थीं, कह रही थीं कि कैसे वो जान बचा कर भागीं। कइयों ने कुछ घरों में घुस कर जान बचाई। जोगिन्दर सिंह राणा ने इस दौरान वाल्मीकि समाज के लोगों की तारीफ़ करते हुए कहा कि स्थानीय वाल्मीकि लोगों ने पुलिस के साथ मिल कर काम किया।

हालाँकि, इस दौरान उन्होंने बाहर से यहाँ आकर बसने वालों के सत्यापन की माँग भी उठाई। उन्होंने बताया कि कैसे प्लास्टिक व काँच की बोतलों में पेट्रोल डाल कर बम बनाया गया। पुलिस वालों से मैगजीन भी छीन ली गई। कूड़े में पड़े बोतलों से पेट्रोल बम बनाया गया। उन्होंने बताया कि कूड़े के कारोबार करने वाले वही लोग हैं। ‘सभी मुस्लिम एक जैसे नहीं होते’ वाले नैरेटिव पर उन्होंने कहा कि उन्होंने पुलिस पर हमला करने वालों में इन सभी को शामिल देखा।

उन्होंने बताया कि कैसे बनभूलपुरा थाने में तैनात एक घायल मुस्लिम अधिकारी की सेवा ‘बजरंग दल’ वालों ने की, साथ ही उन्हें घर भी छोड़ा। जोगिन्दर सिंह राणा कहा, “अगर पुलिस वाले या वाल्मीकि समाज के लोग इन्हें नहीं रोकते तो स्थिति और ख़राब होती। 5-6 हजार लोगों की भीड़ थी। इतनी कम समय में इतनी मात्रा में पेट्रोल या पत्थर इकट्ठा कैसे हुआ, इसकी जाँच होनी चाहिए।” साफ़ है, हिन्दू कार्यकर्ताओं ने अपनी जान पर खेल कर पुलिस वालों का इलाज कराया, उनकी सुरक्षा भी की।

एक अन्य चश्मदीद दीपांशु ने ऑपइंडिया से बताया कि महिला कॉन्स्टेबल रो रही थीं, बता रही थीं कि उन्हें चोट लगी है। उन्होंने कहा, “सोचिए, किसी व्यक्ति के ऊपर ईंट पड़ेगी तो वो कितना रोएगा। बहुत दर्दनाक मंजर था। हमलावर छत से पत्थर फेंक रहे थे, टंकी में पानी की जगह पत्थर भरे थे। वीडियो सर्वे में कोई पत्थर नहीं मिला था, वो छिपा कर रखे गए थे। VHP और ‘बजरंग दल’ के कार्यकर्ताओं ने ब्लड डोनेट किया। इसमें प्रशासन की कोई गलती नहीं है। सरकारी आदेश पर वो ड्यूटी करने आए थे।”