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साइफर केस में इमरान खान को 10 साल की सजा: संसदीय चुनाव में पीटीआई को मिलेगी जनता की सहानुभूति? या ‘कैप्टन’ का खेल खत्म!

लाहौर की एक विशेष अदालत ने 30 जनवरी 2024 को साइफर केस में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को 10 साल की जेल की सजा सुनाई है। इस मामले में इमरान खान के सहयोगी एवं पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी को भी 10 साल की जेल की सजा मिली है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि इमरान खान और शाह महमूद कुरैशी ने पाकिस्तान की सुरक्षा को खतरे में डाला।

पाकिस्तान की मीडिया संस्थान एआरवाई न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, साइफर मामले की सुनवाई के दौरान विशेष अदालत के जज अबुल हसनात जुल्करनैन ने धारा 342 के तहत दोनों आरोपितों के बयान दर्ज किए। इसके बाद उनकी सजा का ऐलान कर दिया। जज ने कहा कि इमरान खान और शाह महमूद कुरैशी के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं।

क्या है साइफर मामला?

इमरान खान ने सत्ता से हटने के बाद एक रैली की थी, जिसमें उन्होंने भीड़ के सामने एक पत्र को लहराते हुए दावा किया था कि विदेशी ताकतों ने उन्हें सत्ता से हटाने के लिए साजिश रची थी। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों ने साजिश के तहत पीटीआई सरकार को उखाड़ फेंका है। इसे साइफर मामला कहते हैं। मामला पाकिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा और डिप्लोमेटिक डॉक्यूमेंट से जुड़ा है।

पाकिस्तान में चल रही चुनावी तैयारियों के बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा बना दिया था। साइफर का मतलब होता है सीक्रेट कीवर्ड में लिखा गया कोई संदेश। डिप्लोमेटिक मामलों से संबधित कम्युनिकेशन के लिए इसका इस्तेमाल होता है, ताकि ये लीक न हो। वहीं, इमरान खान ने दावा किया था कि उन्होंने केबल के हिस्से को लोगों के सामने दिखाया था।

इस मामले में पिछले साल 15 अगस्त को पहली एफआईआर ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट के तहत दर्ज की गई थी। ये रिपोर्ट गृह सचिव की शिकायत के आधार दर्ज की दर्ज की गई थी। रिपोर्ट में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और पूर्व विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी पर गंभीर आरोप लगाए गए थे। कहा गया है कि इमरान खान ने राजनीतिक फायदे के लिए झूठे गुप्त संदेश जारी किए और कई गुप्त बातों को सार्वजनिक किया

वहीं, पूर्व प्रमुख सचिव आजम खान और पूर्व योजना मंत्री असद उमर के नामों का भी जिक्र किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों को लगा कि आजम खान और असद उमर भी गोपनीय दस्तावेजों के दुरुपयोग में शामिल थे तो इन दोनों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। यह विवाद तब सामने आया था जब इमरान ने एक अमेरिकी राजनयिक पर पाकिस्तानी राजनयिक को धमकी देने का आरोप लगाया था, जिसकी सूचना एक साइफर के जरिए दी गई थी।

पीटीआई ने कार्यकर्ताओं से की शांति की अपील

इस बीच, इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के सेक्रेटरी जनरल उमर अयूब खान ने कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाया है। इसके साथ ही उन्होंने पीटीआई के कार्यकर्ताओं से शांति बनाए रखने की अपील भी की है। उमर अयूब कहा कि पीटीआई के सभी सदस्य और कार्यकर्ता 8 फरवरी को होने वाले आम चुनाव पर ध्यान दें। उन्होंने पीटीआई के उम्मीदवारों के लिए वोट की अपील की।

जनता की सहानुभूति मिलेगी या ये आखिरी उम्मीद भी टूटेगी?

इस सजा के पाकिस्तान की राजनीति पर व्यापक प्रभाव पड़ सकते हैं। इमरान खान अभी भी पाकिस्तान की एक बड़ी राजनीतिक ताकत हैं। उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) अभी भी पाकिस्तान के सबसे लोकप्रिय राजनीतिक दलों में से एक है। इस सजा से पीटीआई के समर्थकों में आक्रोश बढ़ सकता है। यह आक्रोश पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता को बढ़ा सकता है।

वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि इस सजा से संसदीय चुनाव में पीटीआई को जनता की सहानुभूति मिल सकती है। इमरान खान अभी भी पाकिस्तान के सबसे लोकप्रिय नेताओं में से एक हैं। यह आक्रोश संसदीय चुनाव में पीटीआई के लिए फायदेमंद हो सकता है। हालाँकि पीटीआई ने कहा है कि इमरान खान इस सजा के खिलाफ इस्लामाबाद हाई कोर्ट में अपील करेंगे। इमरान खान अभी जेल में हैं।

सिर फटने के बाद गमछा बाँधकर युद्ध लड़ने वाले देवीदीन पांडेय, 700 मुग़ल फौजियों को कर दिया था ढेर: राम मंदिर तोड़ने वालों पर कहर बन बरपी थी जो तलवार, वो आज भी मौजूद

अयोध्या में 22 जनवरी 2024 को रामजन्मभूमि पर रामलला की विग्रह पूरे विधि-विधान से स्थापित हो गई। इस अवसर पर दुनिया भर के हिन्दू उन तमाम ज्ञात-अज्ञात रामभक्तों के प्रति श्रद्धा सुमन अर्पित कर रहे हैं, जिन्होंने बाबर से लेकर मुलायम सिंह यादव तक काल के बीच हुए संघर्षों में अपने प्राणों का बलिदान कर दिया। मुगल काल में संघर्ष करने वाले उन तमाम योद्धाओं में एक नाम देवीदीन पांडेय का भी है। रामजन्मभूमि के लिए वीरगति पाने वाले भीटी नरेश महताब सिंह के बाद देवीदीन पांडेय दूसरे योद्धा थे। ऑपइंडिया की टीम ने उनके घर जाकर इतिहास और वर्तमान की जानकारी जुटाई।

देवीदीन पांडेय मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अयोध्या जिले में ही पड़ने वाले गाँव रहीमपुर दुगवा के रहने वाले थे। उनका मूल काम धर्म का प्रचार था। उनकी यजमानी सरायरसी, राजेपुर और सनेथू गाँवों में थी। यहाँ वो लोगों के घर भागवत कथा आदि का पाठ करते थे। थोड़े समय बाद वो अपने पैतृक गाँव दुगवा रहीमपुर से लगभग 8 किलोमीटर दूर सनेथू के पास बस गए। उनके ही नाम पर अब उस जगह को पंडित का पुरवा कहा जाता है। इस पुरवा में घुसते ही गाँव के बाहर एक देवस्थान बना हुआ है। इस जगह हिन्दू अपने घर में पड़ने वाले शुभकर्म में मत्था टेकते हैं।

देवीदीन पांडेय का वर्तमान घर

घर में आज भी चारों तरफ धार्मिकता

जब ऑपइंडिया की टीम देवीदीन पांडेय के वंशजों के घर पहुँची, तब उनमें से कई दरवाजे पर ही मौजूद मिले। घर के गेट पर स्वस्तिक चिह्न, दोनों तरफ महादेव शिव और बजरंग बली के चित्र बने हुए हैं। घर के अंदर घुसते ही एक बड़ा मंदिर बना हुआ है। परिवार वालों ने बताया कि उस जगह पर मंदिर देवीदीन पांडेय के समय से ही बना हुआ था। बीच में जर्जर होने के चलते वर्तमान पीढ़ी ने नए रूप में उसका जीर्णोद्धार करवाया है। मंदिर के ऊपर कई भगवा ध्वज लगे हुए हैं। अंदर तमाम देवताओं की मूर्तियों के साथ राम दरबार बना हुआ है।

आज भी उस मंदिर में विधि-विधान से पूजा होती है, जिसे कभी देवीदीन पांडेय ने बनवाया था। उनका पुराना पारम्परिक पूजा-पाठ का काम आज भी देवीदीन की 7वीं पीढ़ी करती है। इस परिवार के यजमान भी वही हैं जिनके पूर्वज कभी देवीदीन के साथ रामजन्मभूमि की रक्षा करते हुए बलिदान हो गए थे।

घर में स्थपित इसी मंदिर में कभी पूजा करते थे देवीदीन पांडेय

राममंदिर पर हमले से दुखी होकर उठा लिया था शस्त्र

घर पर मौजूद राजेंद्र प्रसाद पांडेय ने खुद को देवीदीन पांडेय की 7वीं पीढ़ी बताया। इतिहास का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उनके पूर्वज मूल रूप से शास्त्रों की शिक्षा आसपास के गाँवों में देते थे। हालाँकि वो शस्त्र चलाने में भी पारंगत थे। सन 1526-27 में जब पंडित देवीदीन को पता चला कि बाबर के सेनापति मीर बाकी ने राम मंदिर को तोड़ दिया तो वो बेहद दुखी हो गए। इसी बीच उन्हें मंदिर के लिए लड़कर बलिदान हुए राजा महताब सिंह के बारे में भी पता चला। तब उन्होंने शास्त्र त्याग कर शस्त्र उठा लिया और अयोध्या के लिए निकल पड़े। अयोध्या उनके घर से लगभग 15 किलोमीटर दूर है।

ऑपइंडिया को जानकारी देते देवीदीन पांडेय के वंशज राजेंद्र प्रसाद

आसपास के ग्रामीणों को जमाकर के बनाई सेना

स्वर्गीय रामगोपाल शारद द्वारा कई दशक पहले लिखी गई और अब लगभग विलुप्त हो चुकी पुस्तक ‘श्रीरामजन्मभूमि का रोमांचकारी इतिहास’ में पंडित देवीदीन का उल्लेख मिलता है। इस पुस्तक के मुताबिक, पंडित देवीदीन ने अपने साथ लगभग 10 हजार हिंदुओं की सेना तैयार की थी। इस सेना में पंडित का पुरवा के आसपास के गाँव सरायरसी, राजेपुर और सनेथू आदि के निवासी थे। इनमें से अधिकतर पंडित देवीदीन के यजमान थे। सभी सैनिक रामजन्मभूमि पर मीर बाक़ी के हमले से आक्रोशित थे। जैसे ही ये लोग रामजन्मभूमि के पास पहुँचे, वहाँ मौजूद मुगल फौजों से इनका युद्ध शुरू हो गया।

बाबर के समय से ही पत्थरबाजी करते थे मुगल

स्थानीय इतिहासकार बलराम मिश्रा ने ऑपइंडिया को बताया कि लाखों की तादाद में मौजूद मुगल फ़ौज से महज 10 हजार सैनिकों के साथ भिड़ने वाले देवीदीन पांडेय शुरू में भारी पड़ रहे थे। इसी बीच मुगल फ़ौज ने बाबरी बनवाने के लिए जमा की गईं ईंटों और आसपास से रोड़े उठाकर पत्थरबाजी शुरू कर दी। अचानक हुए इस पथराव से देवीदीन पांडेय कुछ समय के लिए रणनीति नहीं बदल पाए। इसी बीच एक पत्थर उनके सिर पर लगा और खून बहने लगा। देवीदीन पांडेय ने अपनी पगड़ी से बहते खून को रोका और लड़ाई जारी रखी।

मार डाला था मीर बाकी के हाथी और माहवत को

इतिहासकार रामगोपाल शारद अपनी पुस्तक ‘श्रीरामजन्मभूमि का रोमांचकारी इतिहास’ में लिखते हैं कि सिर फट जाने के बाद देवीदीन पांडेय मुगल फ़ौज पर और अधिक आक्रामक हो गए थे। वो अपने घोड़े पर सवार होकर सीधे हाथी पर बैठे मुगल सेनापति मीर बाक़ी के सामने आ गए। उनके ताबड़तोड़ हमलों से मीर बाक़ी का हाथी घायल होकर गिर पड़ा। इसे नियंत्रित करता महावत भी नीचे गिरकर मर गया। हाथी की पीठ पर बंधे हौदे की वजह से मीर बाकी घायल तो हुआ पर वो बच गया। उसने हौदे से ही छिपकर बंदूक से देवीदीन पांडेय पर गोली चला दी।

बलिदान से पहले मारे 700 मुगल फौजी

देवीदीन पांडेय के परिजनों ने हमें बताया कि उनके पूर्वज को वीरगति मीर बाक़ी द्वारा छिपकर चलाई गई गोली से हुई थी। हिन्दू पक्ष की हार का कारण उन्होंने मुगल फ़ौज जैसे उन्नत हथियार न होना और विपक्षी द्वारा युद्ध में नीति का नहीं अपनाना बताया। वंशजों का दावा है कि वीरगति से पहले कई दिनों तक युद्ध चला था। इस युद्ध में अकेले देवीदीन के हाथों सात सौ (700) मुगल फौजियों का वध हुआ था। इतिहासकार स्वर्गीय रामगोपाल शारद भी अपनी किताब में इस आँकड़े की पुष्टि करते हैं। उन्होंने दावा किया है कि यही आँकड़ा बाबर के समकालीन पुस्तक ‘तुजुक बाबरी’ में भी लिखा हुआ है।

स्वर्गीय रामगोपाल शारद द्वारा लिखित पुस्तक ‘रामजन्मभूमि का रोमांचकारी इतिहास’ के अंश

देवीदीन पांडेय के साथ गए कुछ को छोड़कर लगभग 10 हजार हिन्दू इस युद्ध में वीरगति को प्राप्त हो गए। परिजन बताते हैं कि देवीदीन का पार्थिव शव उसी जगह पड़ा था, जहाँ आज राम मंदिर का गर्भगृह है। बलिदानी सैनिकों के शवों के साथ भी क्रूरता हुई थी। इस बलिदान से आसपास के क्षत्रिय राजाओं में आक्रोश फैल गया था। देवीदीन पांडेय के बलिदान के बाद रामजन्मभूमि की मुक्ति के लिए क्षत्रिय नरेशों ने लगातार हमले किए। तभी से सरायरसी, राजेपुर और सनेथू आदि क्षेत्रों के तमाम क्षत्रियों ने पगड़ी का त्याग कर दिया था और हर पीढ़ी में रामजन्मभूमि की मुक्ति के लिए संघर्ष का संकल्प लिया था।

आज भी घर पर रखी है देवीदीन की तलवार

देवीदीन के परिजनों ने हमें काफी सहेजकर रखी गई एक तलवार दिखाई। यह तलवार काफी पुरानी है और इस पर जंग लग गया है। इसे एक बेहद पुरानी लकड़ी के खोल में रखा गया है। ऊपर से भगवा कपड़ा लपेटा गया है। इस तलवार पर जगह-जगह खरोंच के निशान बने हैं। नीचे मूँठ बनी हुई है, जो अब हिलती है। युद्ध में बचे गिने-चुने हिन्दू सैनिक इस तलवार को बचाकर गाँव लाए थे। इस परिवार का दावा है कि हनुमानगढ़ी के अंदर अभी भी एक जगह युद्ध में प्रयोग हुआ देवीदीन पांडेय का भाला गड़ा हुआ है। यह जगह हनुमानगढ़ी के मुख्य द्वार पर है, जहाँ आज भी लोग श्रद्धा से शीश झुकाते हैं।

आज तक सहेज कर रखी गई है देवीदीन पांडेय की तलवार

अयोध्या जिले के अधिकतर मुगल बाबर के जमाने के

देवीदीन के परिजन सुनील पांडेय ऑपइंडिया से बात करते हुए दावा करते हैं कि अयोध्या जनपद और आसपास की सीमाओं के अंदर मौजूद तमाम मुस्लिम बाबर के समय में जबरन धर्मांतरित किए गए हिन्दू हैं। उदाहरण के लिए उन्होंने अपने गाँव के बगल सिरसिंडा में एक धर्मांतरित क्षत्रिय परिवार का जिक्र किया। यह क्षत्रिय परिवार खुद को 7 पीढ़ी पहले हिन्दू बताता है। यह वही समय था, जब बाबर का सेनापति मीर बाकी अयोध्या में घुस पर मंदिरों को तोड़ रहा था।

ऑपइंडिया को अपने पूर्वज देवीदीन का इतिहास बताते सुनील पांडेय (सफेद शर्ट में)

सुनील का दावा है कि बाबर के हमले के समय में अयोध्या सोने की नगरी हुआ करती थी। मुगल फौजों ने पहले मंदिरों को तोड़ा, फिर ग्रामीण इलाकों में घुसकर लूटपाट की। दावा है कि इसी दौरान मुगल फ़ौज ने कई हिंदुओं को तलवार के जोर पर इस्लाम कबूल करवाया। सुनील पांडेय ने अयोध्या के पास मौजूद टांडा जैसे इलाकों का जिक्र किया, जहाँ अब मुस्लिम आबादी बहुलता में है। देवीदीन पांडेय का परिवार ऐसे मुस्लिमों से अपने मूल धर्म में भी लौटने की अपील करता मिला, जिन्हें यह पता है कि उनके पूर्वजों को अत्याचार करके मतांतरित किया गया था।

आज भी तैयार हैं राम के नाम पर बलिदान के लिए

देवीदीन के वंशज सुनील पांडेय ने ऑपइंडिया को बताया कि उनके पूर्वज की शिक्षा आज भी दिलो-दिमाग में मौजूद है। यह परिवार आज भी राम के नाम पर बलिदान होने के लिए तैयार है। इस परिवार के सदस्यों ने मुलायम सिंह यादव द्वारा साल 1990 में कराए गए गोलीकांड को एक आक्रांता के कुकृत्य की संज्ञा दी। नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ को ईश्वर द्वारा भेजे गए दूत बताते हुए इस परिवार ने राम मंदिर बनने पर बेहद ख़ुशी जताई है। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में इस परिवार को निमंत्रण भी दिया गया था। देवीदीन पांडेय का एक वंशज इस प्राण प्रतिष्ठा में शामिल भी हुआ था।

जहाज छोड़ दो वरना… भारतीय नौसेना ने सोमाली लुटेरों से बचाए 19 पाकिस्तानी, 11 डकैतों को पकड़ा; 1 दिन पहले ईरानियों को किया था रेस्क्यू

भारतीय नौसेना ने सोमाली समुद्री लुटेरों के खिलाफ एक और सफल अभियान चलाया। इस अभियान में नौसेना ने सोमाली समुद्री लुटेरों द्वारा अपहरण किए गए एक मछली पकड़ने वाले पाकिस्तानी जहाज को बचाया और 19 लोगों को मुक्त कराया।

दरअसल, हुआ ये कि भारतीय नौसेना का युद्धपोत आईएनएस सुमित्रा सोमालिया के पूर्वी तट के पास तैनात था। उस समय उसे एक पाकिस्तानी मछली पकड़ने वाले जहाज अल नईमी की इमरजेंसी कॉल मिली। बताया गया कि जहाज का सोमाली समुद्री लुटेरों ने अपहरण कर लिया है। इस सूचना के बाद भारतीय नौसेना ने FV (फिशिंग वेसेल) अल नईमी नाम के पाकिस्तानी जहाज को बचाया

पूरा मामला 29 जनवरी 2024 का है। जिस मछली पकड़ने वाले जहाज का अपहरण लुटेरों ने किया था उस पर 19 पाकिस्तानी नाविक सवार थे। कॉल मिलने के बाद नौसेना के आईएनएस सुमित्रा ने अरब सागर में सोमालिया के पूर्वी तट के पास से इस जहाज को बचाया।

इस मामले में पहले तो आईएनएस सुमित्रा ने समुद्री लुटेरों को चेतावनी दी और उन्हें जहाज छोड़ने के लिए कहा, लेकिन लुटेरे जब नहीं मानें तो भारतीय नौसेना के जवानों ने उनपर हमला बोल दिया। इस पूरी कार्रवाई में 11 समुद्री डकैत शामिल थे, जिन्हें गिरफ्तार भी कर लिया और जहाज को सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया।

भारतीय नौसेना के प्रवक्ता ने इस ऑपरेशन के बारे में एक्स पर जानकारी दी। इसमें बताया गया, “आईएनएस सुमित्रा ने दूसरा सफल एंटी पाइरेसी अभियान चलाकर 19 क्रू सदस्यों और जहाज को सोमाली समुद्री डाकुओं से बचाया। ईरानी जहाज एफवी इमान को बचाने के बाद आईएनएस सुमित्रा ने सोमालिया के पूर्वी तट पर एक और सफल समुद्री डकैती रोधी अभियान चलाया है, जिसमें मछली पकड़ने वाले जहाज अल नईमी और उसके चालक दल (19 पाकिस्तानी नागरिकों) को 11 सोमाली समुद्री डाकुओं से बचाया गया है।”

24 घंटों में दो जहाजों को बचाया

भारतीय नौसेना ने 28 जनवरी, 2024 को भी सोमाली लुटेरों से एक ईरानी जहाज को बचाया था। इस जहाज का नाम एफवी इमान था और इसमें 17 ईरानी नागरिक सवार थे। भारतीय नौसेना ने दोनों ऑपरेशन कोच्चि के पश्चिम से 850 नॉटिकल मील, यानी 1574 किलोमीटर दूर अंजाम दिए।

आईएनएस सुमित्रा ने जब एफवी इमान को बचाया था, उसके बाद ही पाकिस्तानी जहाज पर कब्जे की कॉल उसके पास आई थी और तभी आईएनएस सुमित्रा इस मिशन को अंजाम देने के लिए निकल पड़ी थी। इन दोनों घटनाओं से पता चलता है कि भारतीय नौसेना सोमाली समुद्री लुटेरों से निपटने के लिए प्रतिबद्ध है। भारतीय नौसेना की सक्रियता से सोमाली समुद्री डकैती में कमी आई है।

सोमाली समुद्री डकैती

सोमाली समुद्री डकैती एक गंभीर समस्या है। सोमालिया के तट पर समुद्री डकैती के कई मामले सामने आते हैं। इन डकैतियों में अक्सर जहाजों को लूट लिया जाता है और नाविकों को बंधक बना लिया जाता है। भारतीय नौसेना सोमाली समुद्री डकैती से निपटने के लिए कई उपाय कर रही है। भारतीय नौसेना सोमालिया के तट पर गश्त लगाती है और समुद्री डकैती के मामलों की जाँच करती है। भारतीय नौसेना सोमाली सरकार के साथ भी सहयोग कर रही है ताकि समुद्री डकैती को रोका जा सके।

यथा पिता तथा पुत्र… जब 30 साल बाद खुली नरसंहार वाली फ़ाइल और फरार हो गए थे केंद्रीय मंत्री शिबू सोरेन: फैक्स से भेजा था इस्तीफा, अब बेटा आजमा रहा वही पैंतरे

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन फरार हो गए थे। कारण – जमीन घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग में ED (प्रवर्तन निदेशालय) उनसे पूछताछ के लिए 10 बार समन जारी कर चुकी है लेकिन वो हाजिर नहीं हुए। उनके दिल्ली स्थित ठिकानों पर छापेमारी हुई, जहाँ से ED ने एक BMW समेत 2 गाड़ियाँ, 36 लाख रुपए कैश और कुछ कागजात मिले हैं। क्या आपको पता है कि हेमंत सोरेन की तरह ही कभी उनके पिता शिबू सोरेन भी पद पर रहते हुए फरार हो गए थे? हेमंत सोरेन अभी CM है, पिता शिबू तब केंद्रीय मंत्री हुआ करते थे।

हम इस घटना के बारे में जानेंगे, लेकिन उससे पहले समझिए कि झारखंड में चल क्या है। इस घोटाले की जाँच तेज़ होने के बाद झारखंड की राजनीति में अस्थिरता आ गई है। सत्ताधारी दल के विधायकों को राँची में रहने के आदेश दिए गए हैं। राज्यपाल CP राधाकृष्णन ने पुलिस महानिदेशक (DGP), मुख्य सचिव और गृह सचिव को तलब कर कानून-व्यवस्था की स्थिति पर बैठक की है। राजभवन, हेमंत सोरेन के आवास और ED दफ्तर के 100 मीटर के दायरे में धारा-144 लागू कर दी गई है।

जहाँ पार्टी के संस्थापक शिबू सोरेन अब भी JMM के अध्यक्ष हैं, उनके बेटे हेमंत पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। जमीन खरीद में गड़बड़ी, अवैध खनन और मनी लॉन्ड्रिंग – इन आरोपों के तहत ED उनकी जाँच कर रही है। बताया गया है कि भारतीय सेना के नियंत्रण वाली जमीन की खरीद-बिक्री की गई। राँची नगर निगम ने इस संबंध में FIR दर्ज करवाई थी। इसी आधार पर ECIR (सूचना रिपोर्ट) दर्ज की गई थी। आरोप है कि जमीन की खरीद-बिक्री के लिए दस्तावेजों में हेराफेरी की गई थी।

ये भी आरोप है कि जनजातीय समाज के नियंत्रण वाली जमीनों में भी गड़बड़ी कर के खरीद-बिक्री की गई। इस मामले में एक IAS अधिकारी और एक व्यापारी समेत 14 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। 2011 बैसण के अधिकारी छवि रंजन को ED ने मई 2023 में ही गिरफ्तार किया गया था। जुलाई 2020 से लेकर 2 वर्षों तक वो राँची के डिप्टी कमिश्नर थे। गिरफ़्तारी के समय वो ‘डायरेक्टर ऑफ सोशल वेलफेयर’ के पद पर थे। जून 2023 में दर्ज FIR के आधार पर उनकी गिरफ़्तारी हुई थी।

क्या है जमीन घोटाला और अवैध खनन वाला मामला

उस समय ‘राँची म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन’ में टैक्स कलक्टर रहे दिलीप शर्मा ने प्रदीप बागची नामक एक शख्स के खिलाफ FIR दर्ज करवाई थी। उस पर आरोप था कि उसने उस जमीन को खरीद कर उस पर कब्ज़ा कर लिया, जो भारतीय सेना के नियंत्रण में थी। शुरू में मामला 455 डेसिमल (4.50 एकड़) जमीन का था, जो BM लक्ष्मण राव के नाम पर हुआ करता था और देश की स्वतंत्रता के बाद उन्होंने इसे भारतीय सेना को सौंप दिया था। जमीन माफिया, अधिकारियों एवं दलालों ने मिल कर फर्जीवाड़ा किया और प्रदीप बागची को उसका मालिक दिखा दिया।

इस जमीन को फिर पश्चिम बंगाल के ‘जगतबंधु टी एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड’ को बेच दिया गया। इसका दाम 20.75 करोड़ रुपए होना चाहिए था, लेकिन इसे 7 करोड़ रुपए ही दिखाया गया। बागची को 25 लाख रुपए दिए गए, बाकी की धनराशि चेक द्वारा भुगतान किए जाने का फर्जी दावा कर दिया गया। बाद में पता चला कि छवि रंजन ऐसी दर्जन भर से ज्यादा जमीन की खरीद-फरोख्त में शामिल है। ED अवैध खनन से हुई 100 करोड़ रुपए की अवैध आय के मामले की भी जाँच कर रही है, अवैध खनन का ये मामला हजार करोड़ रुपए का है।

अब ये पूरा मामला सैकड़ों एकड़ जमीन तक पहुँच चुका है और जो जाँच CO स्तर से होते हुए कोलकाता के ‘रजिस्ट्रार ऑफ एस्युरेंस’ और फिर CM तक पहुँच गई, उसमें कई खिलाड़ी शामिल हैं। जिस व्यापारी को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है, वो विष्णु अग्रवाल हैं। हेमंत सोरेन के एक अन्य करीबी प्रेम प्रकाश को भी इसमें गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में भी बरहेट के विधायक हेमंत सोरेन के प्रतिनिधि पंकज मिश्रा को भी गिरफ्तार किया गया है। साहिबगंज के नींबू पहाड़ पर चल रहे अवैध खनन से ग्रामीणों के घर में दरार पड़ने लगी थी, एक मामूली सही शिकायत इतने बड़े स्तर तक पहुँच गई।

जब फरार हो गए थे शिबू सोरेन, देना पड़ा इस्तीफा

2004 के लोकसभा चुनाव में JMM कॉन्ग्रेस के नेतृत्व वाले UPA गठबंधन का हिस्सा थी। जब यूपीए की जीत हुई तब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने। उन्होंने शिबू सोरेन को मई 2004 में कोयला मंत्री के रूप में केंद्रीय कैबिनेट में शामिल किया। हालाँकि, वो अधिक दिनों तक इस पर पर नहीं रह सके। इसी बीच चिरूडीह नरसंहार का 30 साल पुराना मामला सामने आ गया। सदन में इस पर हंगामा हुआ। शिबू सोरेन भूमिगत हो गए, उनका कहीं से कोई पता नहीं चल रहा था।

इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने शिबू सोरेन से इस्तीफा माँग लिया। मंत्री बनने के मात्र ढाई महीने बाद उन्होंने फैक्स के माध्यम से अपना इस्तीफा प्रधानमंत्री को भेज दिया। नवंबर 2004 में उन्हें जमानत मिल गई। फिर उन्हें फिर से केंद्रीय कैबिनेट में शामिल किया गया। उसके बाद वो झारखंड के मुख्यमंत्री बने। उन्हें जमानत मिलने के बाद केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के राँची में परिवर्तन रैली का आयोजन किया गया था। मजे की बात ये है कि उस रैली से ठीक एक दिन पहले शिबू सोरेन को सोनिया गाँधी के दखल वाली सरकार में शामिल किया गया था।

उस समय प्रकाश चंद्र पारख केंद्रीय कोयला मंत्रालय में सचिव हुआ करते थे। उन्होंने अपनी पुस्तक ‘शिखर तक संघर्ष‘ में शिबू सोरेन को व्यक्तिगत एजेंडे वाला मंत्री करार दिया है। कई मुद्दों को लेकर शिबू सोरेन उनसे सहमत नहीं थे और उनके स्थानांतरण के लिए प्रधानमंत्री को उन्होंने पत्र तक लिखा। पारख यूपीए काल में हुए कोयला घोटाले के व्हिस्लब्लोवर भी थे। नियुक्ति-भर्तियों से लेकर कोयला आवंटन तक के मुद्दों पर शिबू सोरेन और उनमें एकमत नहीं हुआ करता था।

अब आप सोच रहे होंगे कि ये चिरूडीह नरसंहार वाला क्या मामला है, जिसमें शिबू सोरेन के खिलाफ गैर-जमानती वॉरंट जारी हुआ, वो फरार हुए और उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। चिरूडीह उस समय दुमका जिले में हुआ करता था, अब ये बोकारो में है। चिरूडीह में 1975 में नरसंहार हुआ था। उस समय शिबू सोरेन महाजनों के खिलाफ उग्र आंदोलन चला रहे थे। संथाल परगना का वो इलाका उस समय भागलपुर कमिश्नरेट से जुड़ा हुआ था। जब ये मामला 30 वर्षों बाद खुला, तब चिरूडीह जामताड़ा में चला गया था।

जामताड़ा आज फ्रॉड कॉल्स एवं ठगी के लिए कुख्यात है। शिबू सोरेन जब मंत्री बने थे, तब इससे जुड़ी खबरें अख़बारों में छिटपुट आने लगी थीं। निचली अदालत में ये मामला चल रहा था। शिबू सोरेन के झारखंड आंदोलन के दौरान हिंसा की एक नहीं बल्कि कई घटनाएँ हुई थीं। उनका दावा था कि वो गरीबों की जमीन वापस दिलाने के लिए अभियान चला रहे हैं। चिरूडीह में 13 लोग मारे गए। शुरुआती रिपोर्ट में शिबू सोरेन का नाम नहीं था, लेकिन चार्जशीट में उनका नाम भी आया।

फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट ने बाद में शिबू सोरेन को निर्दोष साबित कर दिया, जिसके बाद उनके समर्थकों ने जश्न मनाया। शिबू सोरेन के समर्थकों ने 23 जनवरी, 1975 को चिरूडीह में ‘दिकू’ लोगों के साथ हिंसा की। ‘दिकू’ वो कथित रूप से बाहरी लोगों को कहते थे और उन्हें पलायन करने को मजबूर करते थे। समर्थकों द्वारा ‘गुरूजी’ नाम से पुकारे जाने वाले शिबू सोरेन ने इस मामले में कुछ दिन अंडरग्राउंड रहने के बाद जामताड़ा की अदालत में आत्मसमर्पण किया था।

ये भी जाने वाली बात है कि मृतकों में 9 मुस्लिम थे। एक तरफ शिबू सोरेन के लोग थे तो दूसरी तरफ CPI के कम्युनिस्ट। इस मामले के एक अन्य आरोपित आरोपित लखींद्र सोरेन ने मरने से पहले 7 फरवरी, 1975 को जामताड़ा सदर अस्पताल में दिए गए बयान में कहा था कि शिबू सोरेन ने उनलोगों को आदेश दिया था कि मुस्लिम लोग जनजातीय समाज के घर जला रहे हैं, इसीलिए पहले उन्हें मार डाला जाना चाहिए। 1980 में शिबू सोरेन सांसद बने और मामला खिंचता रहा।

उनके केंद्रीय मंत्री बनने का बाद फिर ये जिन्न 2004 में सामने आया, लेकिन तब तक 69 में से 25 आरोपित और 40 में से 20 गवाह मर चुके थे। 2002 में झारखंड हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश VK गुप्ता ने इस मामले में फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का आदेश दिया था। जून 2004 में शिबू सोरेन को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस अधिकारियों को दिल्ली भेजा गया। हालाँकि, संसद चल रही थी इस कारण लोकसभा अध्यक्ष की अनुमति की आवश्यकता थी। तब तक शिबू सोरेन अंडरग्राउंड हो गए।

जिसे I.N.D.I. गठबंधन ने बताया अपना पहला चुनाव, उसे ही बुरी तरह हार बैठा: चंडीगढ़ में बन गया BJP का मेयर, कॉन्ग्रेस-AAP की फजीहत

चंडीगढ़ शहर के लिए मेयर पद का चुनाव भाजपा के प्रत्याशी मनोज सोनकर ने जीत लिया है। उन्होंने I.N.D.I गठबंधन में शामिल कॉन्ग्रेस और आप के संयुक्त उम्मीदवार कुलदीप ढलोर को हरा दिया। इस चुनाव को AAP और कॉन्ग्रेस ने विपक्षी I.N.D.I गठबंधन और भाजपा की पहली लड़ाई बताया था।

इस चुनाव में भाजपा के उम्मीदवार मनोज सोनकर को जहाँ 16 वोट मिले तो वहीं INDI गठबंधन के उम्मीदवार को 12 वोट ही मिल सके।

गौरतलब है कि चंडीगढ़ में मेयर का कार्यकाल एक वर्ष का ही होता है। इसलिए यहाँ हर साल चुनाव होते हैं। 2023-24 के एकवर्षीय कार्यकाल के लिए हुए चुनावों में भी भाजपा के अनूप गुप्ता ने जीत दर्ज की थी। इस बार भी चुनाव परिणाम भाजपा के पक्ष में रहे। इसे देख AAP और कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने खूब हंगामा काटा।

दरअसल, INDI गठबंधन के उम्मीदवार को यहाँ 12 ही वोट मिले लेकिन विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि उन्हें 20 वोट मिले थे जिनमें से 8 वोट को जानबूझकर अवैध करार दे दिया गया। उन्होंने चुनाव अधिकारी अनिल मसीह पर वोटों के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया है।

चंडीगढ़ नगर निगम में पार्षद की कुल 45 सीट है। इनमें से 9 सदस्य नामित किए जाते हैं और बाकी 35 के लिए चुनाव होते हैं। इसमें एक सदस्य चंडीगढ़ का सांसद भी होता है। यही 36 सदस्य मिलकर ही मेयर चुनते हैं। वर्तमान में चंडीगढ़ में 16 सीट भाजपा के पास जबकि 13 सीट AAP के पास हैं। कॉन्ग्रेस के पास 7 सीट हैं। 1 सीट शिरोमणी अकाली दल के पास है।

चंडीगढ़ मेयर चुनाव को पहला मैच बता रहा था INDI गठबंधन

गौरतलब है कि इन चुनावों को विपक्ष ने भाजपा और INDI गठबंधन के बीच का पहला मैच करार दिया था। AAP नेता राघव चड्ढा ने इस चुनाव को देश की दशा और दिशा बदलने वाला चुनाव बताया था।

उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, “यह चुनाव आगामी 2024 लोकसभा चुनाव की नींव रखेगा। INDI गठबंधन बतौर गठबंधन, पहली बार भाजपा का सामना करने जा रहा है। यह चुनाव INDI गठबंधन बनाम भाजपा के पहले मैच के रूप में जाना जाएगा।” उन्होंने इसमें INDI गठबंधन की जीत पक्की बताई थी।

चंडीगढ़ चुनाव में इस जीत पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी बधाई दी है। उन्होंने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “भाजपा चंडीगढ़ को मेयर का चुनाव जीतने के लिए बधाई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्रशासित प्रदेशों का रिकॉर्ड विकास हुआ है। INDI गठबंधन ने पहला चुनाव भाजपा से लड़ा और हार गए, यह दिखाता है कि ना ही उनकी गणित सही काम करती है और ना ही केमिस्ट्री।”

उत्तराखंड में UCC की आहट: CM धामी की सरकार ने बुलाया विशेष सत्र, कैबिनेट के सामने भी रखी जाएगी समान नागरिक संहिता की रिपोर्ट

उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी की सरकार 6 फरवरी 2024 को समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक विधानसभा में पेश कर सकती है। मुख्यमंत्री धामी ने 5 फरवरी से 8 फरवरी 2024 तक उत्तराखंड विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी कहा है कि उत्तराखंड UCC लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनेगा।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि उत्तराखंड विधानसभा में इस विशेष सत्र के दूसरे दिन यानी 6 फरवरी को UCC विधेयक पेश किया जाएगा। इसके बाद इस पर चर्चा होगी। विधेयक पेश होने से पहले इसे उत्तराखंड की कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। उत्तराखंड सरकार में मंत्री प्रेमचन्द अग्रवाल ने भी 6 फरवरी को UCC लाए जाने की पुष्टि की है।

मुख्यमंत्री धामी ने मीडिया से बात करते हुए बताया था कि राज्य में UCC कानून का ड्राफ्ट तैयार करने वाली कमेटी 2 फरवरी 2024 को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप देगी। यह कमेटी सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में बनाई गई है। पाँच सदस्यों वाली इस कमेटी का गठन मई 2022 में गठित गया था।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने सोमवार (29 जनवरी 2024) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा, “समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए गठित कमेटी 2 फरवरी को ड्राफ्ट प्रदेश सरकार को सौंपेगी। हम देवभूमि उत्तराखण्ड के मूल स्वरूप को बनाए रखने के लिए संकल्पित हैं।”

गौरतलब है कि उत्तराखंड में लम्बे समय से UCC लागू की बात चल रही है। भाजपा ने उत्तराखंड के विधानसभा चुनावों में भी UCC को अपने मैनिफेस्टो में शामिल किया था। राज्य में सरकार बनने के तुरंत बाद मई 2022 में कमेटी बनाई थी। इस कमेटी को नवम्बर 2022 में अपनी रिपोर्ट देना था, लेकिन इसकी तारीख आगे बढ़ती रही।

उत्तराखंड में UCC लागू करने से लोकसभा चुनावों में भाजपा को इसका लाभ मिल सकता है। UCC को लागू करने के लिए उत्तराखंड जैसे छोटे राज्य को पहले चुना गया है। उत्तराखंड के बाद भाजपा इसे अन्य राज्यों में भी लागू करने पर विचार कर सकती है। केन्द्रीय स्तर पर भी इसको लेकर चर्चा चलती आई है।

क्या समान नागरिक संहिता (UCC)

समान नागरिक संहिता के अंतर्गत पर्सनल कानून अर्थात विवाह, तलाक, सम्पत्ति का बँटवारा और विरासत जैसे मुद्दे आते हैं। अलग-अलग धर्मों में इन मुद्दों को सुलझाने के लिए अलग-अलग कानून हैं। जहाँ देश की हिन्दू आबादी पर हिन्दू कोड बिल (हिन्दुओं के यह मुद्दे सुलझाने के लिए लाए गए कानून) लागू होते हैं तो वहीं मुस्लिमों में उनका निर्धारण शरियत कानून से होता है। ऐसे में कई बार विवादपूर्ण स्थिति पैदा होती है।

1 दिन में 6 बच्चियों का यौन शोषण संदेहास्पद: केरल HC ने हिमायतुल इस्लाम स्कूल के टीचर को दी बेल, छात्राओं ने लगाया था गुप्तांग छूने का आरोप

केरल हाई कोर्ट ने कोझिकोड के एक शिक्षक को जमानत दे दी है। उस पर 6 नाबालिग छात्राओं का यौन शोषण करने का आरोप है। केरल हाई कोर्ट ने आरोपित शिक्षक को बेल देते हुए कहा है कि 1 दिन के भीतर 6 बच्चियों का यौन शोषण संदेहास्पद बात लगती है।

केरल हाई कोर्ट ने हिमायतुल इस्लाम स्कूल में कला विषय पढ़ाने वाले एक शिक्षक की जमानत याचिका पर यह निर्णय दिया है। हाई कोर्ट में शिक्षक की याचिका सुनते हुए जज सोफी थॉमस ने कहा,

“यह सच है कि पीड़ित बालिकाओं द्वारा शिकायत दर्ज करने में 6 दिन की देरी की गई है। इसके अलावा, यह बात भी संदेहास्पद लगती है कि आरोपित ने एक ही दिन में एक ही कक्षा की 6 लड़कियों के साथ यौन शोषण किया होगा। आरोपित दिसम्बर, 2023 से पुलिस हिरासत में है और जाँच आगे बढ़ चुकी है। ऐसे में यह कोर्ट शिक्षक को जमानत देने का निर्णय ले रहा है।”

जमानत पाने वाले शिक्षक पर आरोप है कि उसने 12 दिसम्बर, 2023 को सुबह 11:20 बजे से 12 बजे के बीच अपनी छात्राओं का यौन शोषण किया। बालिकाओं ने आरोप लगाया था कि शिक्षक ने उनके गुप्तांग छुए। यह सभी पीड़िताएँ कक्षा पाँच की छात्रा हैं। इसी को लेकर उसके खिलाफ POCSO समेत अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। उसके खिलाफ कोझिकोड के टाउन पुलिस थाने में मामला दर्ज करवाया गया था जिसके बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।

हिमायतुल इस्लाम स्कूल के इस शिक्षक के इस मामले की सुनवाई केरल हाई कोर्ट ने 11 जनवरी को सबसे पहले की थी। शिक्षक के वकील ने कोर्ट के सामने दावा किया कि बच्चियों की तरफ से शिकायत करने में देरी की गई है और साथ ही शिक्षक को पुलिस हिरासत में लम्बा समय हो गया है ऐसे में उसे जमानत दी जानी चाहिए।

बता दें कि पुलिस ने शिक्षक की जमानत का विरोध किया था। हालाँकि, फिर भी कोर्ट ने शिक्षक को जमानत दे दी। लेकिन साथ में कई पाबंदियाँ भी लगाईं।

कोर्ट ने कहा कि बेल के दौरान हर दूसरे शनिवार को शिक्षक को अपने नजदीकी थाने में हाजिरी देनी होगी और साथ ही वह किसी भी प्रकार से पीड़िताओं के परिवार से सम्पर्क करने की कोशिश नहीं करेगा। कोर्ट ने उसके हिमायातुल इस्लाम स्कूल के आसपास ना जाने और केरल ना छोड़ने का आदेश भी दिया है।

गौरतलब है कि केरल हाई कोर्ट ने हाल ही में एक सैनिक की याचिका ठुकरा दी थी जिस पर आरोप था कि उसने एक बच्चे को सेक्स के लिए पैसे की पेशकश की। सैनिक का नाम अनवर आलम था और वह लक्षद्वीप का रहने वाला था।

भाजपा नेता रंजीत के 15 हत्यारों को मौत की सजा, आतंक फैलाने के लिए PFI के इन आतंकियों ने परिजनों के सामने हथोड़े से कर दी हत्या

केरल की एक स्थानीय अदालत ने भाजपा नेता रंजीत श्रीनिवास की हत्या के मामले में आतंकी संगठन PFI के 15 दोषियों को मौत की सजा दी है। इसके पहले अदालत ने 21 जनवरी 2024 को इन्हें हत्या एवं अन्य आरोपों में दोषी ठहराया था। इन दोषियों ने साल 2021 में भाजपा के पिछड़ा वर्ग के नेता श्रीनिवास की बेरहमी से हत्या उनकी पत्नी और बेटी के सामने कर दी थी।

मवेलिकारा के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय-I की न्यायाधीश वीजी श्रीदेवी ने 30 जनवरी 2024 (मंगलवार) को सजा सुनाई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिले में सुरक्षा के कड़े उपाय किए गए हैं। आरोपितों को भारी सुरक्षा के बीच कोर्ट लाया गया। कोर्ट के बाहर भी बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया। विरोधी पक्ष ने मामले की गंभीरता पर जोर देते हुए अदालत से अधिकतम सजा देने का आग्रह किया था।

रंजीत श्रीनिवास को उनके घर में घुसकर 19 दिसम्बर 2021 को उनके परिजनों के सामने ही हत्या कर दी गई थी। इस मामले में केरल के अलप्पुझा जिले की मवेलिकारा कोर्ट ने नईम, मोहम्मद असलम, अनूप, अजमल, अब्दुल कलाम उर्फ़ सलाम, अब्दुल कलाम, सफरुद्दीन, मनषद, जसीब राजा, नवास, समीर, नज़ीर, जाकिर हुसैन, शाजी और शेरनस अशरफ को हत्या का दोषी पाया था।

ये सभी अलप्पुझा के ही रहने वाले हैं और प्रतिबंधित इस्लामिक संगठन PFI और इसकी राजनीतिक शाखा SDPI से जुड़े हुए हैं। इन दोषियों में शुरुआती 8 को रंजीत की हत्या में सीधे तौर पर दोषी माना गया है। इन पर कोर्ट ने धारा 302 समेत चार और धाराएँ लगाई हैं।

दोषी नम्बर 9 से 12 को लेकर यह तथ्य सामने आया है कि बाकी जब 8 आरोपित रंजीत की हत्या कर रहे थे, तब ये दोषी उनके घर के बाहर खतरनाक हथियारों के साथ पहरा दे रहे थे। इसके अलावा 13वें, 14वें और 15वें दोषी को इस हत्या की साजिश रचने और हत्या के मामले में दोषी करार दिया गया है।

कोर्ट के सामने इस मामले में पुलिस ने आरोपित अनूप के फ़ोन से बरामद एक हिटलिस्ट रखी थी। इस केस में यह बहुत बड़ा सबूत बना। इस हिटलिस्ट में रंजीत श्रीनिवास समेत 150 से अधिक लोगों के नाम थे। इनमें भाजपा और हिंदू संगठनों के कई नेताओं के नाम भी शामिल थे। कोर्ट के इस फैसले पर भाजपा ने खुशी जताई है।

रंजीत को हथौड़े से मारा, पैर अलग कर दिए, चेहरा बिगाड़ा कर की हत्या

भाजपा नेता के भाई अभिजीत ने बताया था, “भाई को कोच्चि में ओबीसी मोर्चा की समिति की पहली बैठक में शामिल होना था। हमारे परिवार के लिए यह दिन पवित्र था। दोनों भाई रविवार सुबह बेटी भाग्या को ट्यूशन छोड़कर घर लौटे, तब तक सब ठीक था। रंजीत के पास कोई वजह नहीं थी कि वो तंग हों। मगर SDPI नेता शान की कथित हत्या के बाद गैंग ने बदला लेने के लिए नेता की तलाश शुरू की।” 

अभिजीत ने बताया था कि उनके भाई के सिर में हथौड़े से वार हुआ और बीवी, माँ और छोटी बेटी के सामने उनका चेहरा कूच दिया गया। छोटी बेटी जब भागकर बचाने आगे आई तो गैंग ने उसके सामने तलवार निकाल ली। माँ को जमीन में गिराकर उन्हें कुर्सी से दबा दिया गया। न्होंने बताया कि गुंडों ने उनके भाई रंजीत के पहले पैर काट दिए, ताकि वो भाग न सकें। इसके बाद उनकी बाइक तोड़ी गई। उनसे उनकी धोती ले ली गई।

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक, घटना के कुछ देर पहले ही रंजीत की 71 वर्षीय माँ विनोदिनी अपने बेटे के लिए पूजा करके मंदिर से घर लौटी थीं। विनोदिनी ने बताया था, “घर की सीढ़ियाँ चढ़ते समय मुझे कुछ आवाज सुनाई दी। मुझे लगा कि कोई जबरदस्ती घर का दरवाजा खोलकर अंदर आ रहा है। उनके पास तलवारें थीं, हथौड़े थे। उन्होंने धक्का देकर दरवाजा खोला और घर में रखे टेबल का शीशा हथौड़े से तोड़ दिया। रंजीत आवाज सुनकर जैसे ही बाहर आया। उन्होंने उसके सिर पर हथौड़ा मार दिया।”

रंजीत की माँ के ऊपर भी हमला हुआ। उन्होंने बताया, “उपद्रवियों ने उसकी धोती उतारकर उसे मारा और जब मैं उनके पास रोते-रोते गई तो उन्होंने मुझे भी धक्का देकर नीचे गिरा दिया। उसकी बीवी लीशा आई तो उसे भी नीचे गिरा दिया। जब हृदया (रंजीत की छोटी बेटी) रोते आई तो उन लोगों ने तलवार निकाल ली। उन लोगों ने मेरी गर्दन पर भी तलवार रखकर मुझे डराया। इतनी सी देर में इन लोगों ने मेरे बेटे को बहुत बर्बरता से मार दिया।”

दरअसल, केरल में भाजपा नेता की हत्या से पूर्व अलाप्पुझा जिले में सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया के प्रदेश सचिव केएस शान की मृत्यु हो गई थी। बताया गया था कि 18 दिसंबर 2021 की शाम सात बजे के करीब शान बाइक से अपने घर जा रहा था, तभी मन्नानचेरी के पास एक तेज रफ्तार कार ने उसे टक्कर मार दी थी। इससे शान गंभीर रूप से घायल हो गया था और बाद में अस्पताल में दम तोड़ दिया था।

कर्नाटक में जिस कर्मचारी के रहते फहराया गया हनुमान ध्वज, उसे ऑफिसर शेख तनवीर ने किया सस्पेंड: कहा- सिर्फ तिरंगा लगाने की इजाजत दी थी

कर्नाटक के मांड्या में 108 फीट ऊँचे हनुमान ध्वज को हटाने के मामले में जहाँ हिंदूवादी संगठन सड़क पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं इस बीच खबर है कि केरागोडु ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (PDO) को निलंबित कर दिया गया। मांड्या जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शेख तनवीर आसिफ ने यह आदेश सोमवार (30 जनवरी 2024) को जारी किया।

तनवीर आसिफ ने इस आदेश में कहा कि उनकी ओर से अनुमति सिर्फ केरागोडु गाँव में भारतीय तिरंगा फहराने की दी गई थी। लेकिन पीडीओ ने लोगों को हनुमान ध्वज फहराने का मौका दिया और जब उन्होंने इसे लगा लिया तो उन्होंने उसे हटाने के लिए भी कोई कदम नहीं उठाया।

जिला पंचायत के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के मुताबिक तो हनुमान ध्वज को उतारने के कारण जो समस्या पैदा हुई उसके पीछे पीडीओ जिम्मेदार है। न वह हनुमान ध्वज खंभे पर लगने देता और न ही उसे उतारे जाने पर इतना बवाल होता। इसलिए उन्होंने पीडिओ को ही निलंबित कर दिया है।

बता दें कि 28 नवंबर 2024 को 108 फीट ऊँचे खंभे से हनुमान ध्वज उतारने के मामले के कारण बहुत विवाद हुआ था। हनुमान ध्वज को हटाने के खिलाफ भाजपा और हिंदूवादी संगठनों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया था। उनका कहना था कि जिस राज्य में टीपू सुल्तान के पोस्टर लगे दिखते हैं वहाँ अगर हनुमान ध्वज फहराया जाए तो क्या दिक्कत है। भाजपा ने कॉन्ग्रेस सरकार की धर्मनिरपेक्षता पर भी सवाल खड़ा किया था।

इसके अलावा जिस गाँव में ध्वज हटाया गया वहाँ भी भीड़ इकट्ठा हो गई थी और उन्हें हटाने के लिए पुलिस ने लाठी चार्ज भी किया था और बाद में प्रशासन के अधिकारियों की मौजूदगी में हनुमान ध्वज हटाकर वहाँ राष्ट्रीय ध्वज फहरा दिया गया। इस दौरान वहाँ भीड़ भगवा ध्वज लेकर जयश्रीराम का नारा लगाती रही। हनुमान ध्वज हटाने के विरोध में भीड़ ने केरागोडु से मांड्या के जिला मुख्यालय में उपायुक्त कार्यालय तक लगभग 14 किमी की दूरी तय करते हुए मार्च किया। इसमें सीटी रवि और प्रीतम गौड़ा और जद (एस) नेता सुरेश गौड़ा और के अन्नदानी प्रदर्शनकारी भी शामिल हुए।

‘कानून से ऊपर कोई नहीं’: फरार हुए CM हेमंत सोरेन तो राज्यपाल ने DGP और मुख्य सचिव को तलब किया, राँची में कई जगहों पर धारा-144 लागू

जमीन घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग में फँसे झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 2 दिनों से गायब हैं। राँची से लेकर दिल्ली तक ED उनकी खोजबीन कर रही है। झारखंड की सत्ताधारी पार्टी झामुमो एक बड़े विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रही है। वहीं राँची में कई जगहों पर इसे देखते हुए धारा-144 लागू कर दी गई है। धरना-प्रदर्शन और जुलूस निकालने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। राज्यपाल CP राधाकृष्णन ने राज्य के मुख्य सचिव, DGP और गृह सचिव को राजभवन तलब कर उनके साथ बैठक की है।

झामुमो कह रही है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन लापता नहीं हैं, वो जहाँ भी हैं सही-सलामत हैं। वहीं कॉन्ग्रेस के एक विधायक का कहना है कि सीएम मंगलवार (30 जनवरी, 2024) को सबके सामने आएँगे। हालाँकि, अब तक उनका कोई अता-पता नहीं है। दिल्ली में हेमंत सोरेन के पिता शिबू सोरेन के आवास पर भी ED ने दबिश दी थी। देर रात तक ED की टीम वहाँ रही। उसके बाद उनकी BMW कार और कुछ कागजात भी लेकर गई। मंगलवार को दोपहर 2 बजे सत्ता पक्ष गठबंधन के विधायकों की बैठक भी बुलाई गई है।

उधर झारखंड में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने ऐलान किया है कि जो भी ‘होनहार’ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को खोज निकालेगा, उसे 11,000 रुपए इनाम के रूप में दिया जाएगा। झारखंड के लोगों से उन्होंने ये ‘मार्मिक अपील’ की। उन्होंने कहा कि हमारे राज्य के मुख्यमंत्री केन्द्रीय एजेंसियों के डर के मारे पिछले क़रीब चालीस घंटे से लोकलाज त्याग कर लापता हैं और चेहरा छिपाकर भागे-भागे फिर रहे हैं। बकौल बाबूलाल मरांडी, यह न सिर्फ़ मुख्यमंत्री की निजी सुरक्षा के लिए ख़तरा है बल्कि झारखंड की साढ़े तीन करोड़ जनता की सुरक्षा, इज़्ज़त, मान-सम्मान भी ख़तरे में है।

ख़बरों में बताया गया है कि 2 गाड़ियों और 36 लाख रुपए के अलावा ED ने हेमंत सोरेन के ठिकानों से जब्त की है। जब्त किए गए कागजातों में क्या है, ये अभी खुलासा नहीं किया गया है। राँची में हेमंत सोरेन के आवास, राजभवन और ED दफ्तर के 100 मीटर के आसपास धारा-144 लागू की गई है। झारखंड के राज्यपाल ने कहा कि मीडिया की तरह वो भी मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कानून से ऊपर कोई नहीं है, हम संविधान के हिसाब से काम करते हैं और कानून-व्यवस्था बनाए रखनी होगी।