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हिंदू महिला को फेसबुक पर फँसाया, फिर नशीला पदार्थ खिलाकर रेप किया: लखनऊ का अब्दुल वीडियो वायरल करने की धमकी देकर इस्लाम अपनाने का बनाने लगा दबाव

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक हिन्दू महिला के साथ सैयद अब्दुल आलिम जाफरी ने नशीला पदार्थ खिलाकर बलात्कार किया है। इतना ही नहीं, अब्दुल महिला के ऊपर इस्लाम में धर्मान्तरित होने और उसके साथ निकाह करने का भी दबाव बनाता था। पीड़िता ने जब विरोध किया तो उसका अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी देने लगा। आरोपित इंजीनियर को गिरफ्तार कर लिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, लखनऊ की रहने वाली एक हिन्दू महिला से अब्दुल आलिम जाफरी ने साल 2020 में फेसबुक के माध्यम से जान पहचान बढ़ाई थी। अब्दुल ने अपना नाम निहाल बताया था। एक दिन अब्दुल ने महिला को मिलने के लिए बुलाया और नशीला पदार्थ खिलाकर उसके साथ बलात्कार किया। इस दौरान अब्दुल ने महिला का अश्लील वीडियो भी बना लिया। इसके बाद उसका लगातार शोषण करता रहा।

इसके कुछ दिनों के बाद अब्दुल इस हिन्दू महिला को इस्लाम कबूल कर निकाह करने का दबाव बनाने लगा। पीड़िता के अनुसार, अब्दुल गिफ्ट्स का लालच देकर इस्लाम अपनाने के लिए कहता था। हालाँकि, पीड़िता इसके लिए तैयार नहीं हुई। जब पीड़िता नहीं मानी तो अब्दुल धमकाने लगा। वह महिला को जान से मारने की धमकी भी देता था।

अब्दुल ने इस्लाम कबूल करके उसके साथ निकाह नहीं करने पर हिंदू को उसका निजी वीडियो वायरल करने की धमकी देने लगा। पीड़िता का कहना है कि अब्दुल जब भी लखनऊ आता था तो वह उसको मस्जिद और मदरसा ले जाने और नमाज पढ़वाने की कोशिश करता था। हिन्दू महिला ने उसकी प्रताड़ना से तंग आकर अपने रहने की जगह बदल दी, लेकिन अब्दुल ने उसका पीछा नहीं छोड़ा।

अब्दुल ने महिला के गाजीपुर स्थित नए घर का पता लगा लिया और वहाँ पर भी जाकर महिला को परेशान करता रहा। अब्दुल के डर से हिंदू महिला ने अपने घर से निकलना बंद कर दिया। इसके बावजूद भी अब्दुल ने उसका पीछा नहीं छोड़ा और उसे धमकाता रहा। आखिरकार तंग आकर महिला ने अब्दुल के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने उसे नोएडा से गिरफ्तार कर लिया है।

आरोपित अब्दुल लखनऊ के मडियाँव थाना क्षेत्र के शिवानी नगर का रहने वाला है और नोएडा में रहकर एक निजी सॉफ्टवेयर कम्पनी में काम करता है। वहीं, हिंदू महिला लखनऊ के गुडंबा थाना क्षेत्र की में रहती है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, महिला का पति गुजरात में रहकर नौकरी करता है। इस मामले में पुलिस आगे की जाँच कर रही है।

‘राबड़ी मॉडल’ पर झारखंड में झगड़ा: पत्नी को CM बनाने चले हेमंत सोरेन पर भड़कीं सीता भाभी, कहा- पति ने JMM के लिए किया संघर्ष, अब नहीं करूँगी त्याग

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर गिरफ्तार की तलवार लटक रही है। जमीन घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग में फँसे हेमंत सोरेन को ED (प्रवर्तन निदेशालय) 10 बार समन भेज चुकी है। 2 दिनों तक वो गायब भी रहे, दिल्ली से निकले तो राँची में प्रकट हुए। इसके बाद उन्होंने विधायकों संग बैठक बुलाई। चर्चा है कि वो अपनी पत्नी कल्पना सोरेन को CM बना सकते हैं। हालाँकि, JMM (झारखंड मुक्ति मोर्चा) के संस्थापक शिबू सोरेन के घर में ही अब बगावत हो गया है, सीता सोरेन ने मुख्यमंत्री पद पर दावा ठोक दिया है।

हेमंत सोरेन के राँची लौटने के बाद सत्ताधारी गठबंधन में शामिल झामुमो, कॉन्ग्रेस और राजद विधायकों के साथ कई दौर की बैठकें हुईं। ऐसे में चर्चा है कि हेमंत सोरेन सत्ता की बागडोर अपने हाथ में बनाए रखने के लिए ये सब कर रहे हैं। उनकी पत्नी कल्पना सोरेन विधायक दल की नेता बन सकती हैं और राजभवन जाकर राज्यपाल के समक्ष सरकार बनाने का दावा पेश कर सकती हैं। कॉन्ग्रेस और राजद नेतृत्व ने हेमंत सोरेन के फैसले के समर्थन की बात कही है।

हालाँकि, चम्पई सोरेन और झाबा माँझी का नाम भी सामने आया है। सोरेन परिवार में आपसी विरोध बढ़ने की स्थिति में इन दोनों में से किसी एक पर भरोसा जताया जा सकता है। खबर है कि कल्पना सोरेन के नाम पर हेमंत सोरेन के भाई बसंत सोरेन और भाभी सीता सोरेन ने भी विरोध किया है। सीता सोरेन, शिबू सोरेन के बड़े बेटे दुर्गा सोरेन की पत्नी हैं। दुर्गा सोरेन की संदिग्ध मौत हो गई थी। अगर सोरेन परिवार आपस में लड़ा तो पार्टी में टूट का भी खतरा है।

सीता सोरेन ने स्पष्ट कह दिया है कि कल्पना सोरेन उन्हें सीएम के रूप में स्वीकार नहीं है। वो दुमका के जमा से लगातार तीसरी बार विधायक हैं। यहीं से 1985 में उनके ससुर शिबू सोरेन और उनके दिवंगत पारी दुर्गा सोरेन भी 1995 व 2000 में विधायक चुने जा चुके हैं। नाराज़ सीता सोरेन अब विधायक दल की बैठक में भी नहीं पहुँची हैं। सीता सोरेन ने कहा कि उनके पति ने झामुमो की स्थापना के लिए काफी संघर्ष किया है, ऐसे में वो उपेक्षा होने पर चुप नहीं बैठेंगी।

दुर्गा सोरेन ने ये भी कहा कि उन्होंने अपनी 2 बच्चियों को काफी तकलीफ से पाला है। उन्होंने कहा कि वो घर की बड़ी बहू हैं और इस हिसाब से उनका हक़ बनता है। बकौल सीता सोरेन, उनकी बच्चियाँ अब बड़ी हो गई हैं और हेमंत सोरेन को उनसे स्नेह है तो उन्हें आशीर्वाद दें। इधर हेमंत सोरेन ने 43 विधायकों से समर्थन पत्र भी लिया है। सीता सोरेन का कहना है कि वो पार्टी को एकजुट रखना चाहती हैं, लेकिन वो अब और त्याग नहीं करेंगी। विधायकों की बैठक में कल्पना सोरेन भी मौजूद रहीं।

‘मजहब के लिए किया बलात्कार, उसे इस्लाम ना मानने की सजा देनी थी’: हावेरी में होटल से उठा कर किया था मुस्लिम महिला का बलात्कार, अब कोई अफ़सोस नहीं

कर्नाटक के होटल से हिंदू साथी के साथ ठहरी एक मुस्लिम महिला को उठाकर ले जाने वाले मुस्लिम लड़कों को उसका सामूहिक बलात्कार करने का कोई अफ़सोस नहीं है। आरोपितों ने पुलिस को बताया है कि यह बलात्कार उन्होंने अपने मजहब के लिए किया था, क्योंकि पीड़िता इस्लाम के रास्ते से भटक रही थी। पुलिस जाँच में और भी कई तथ्य सामने आए हैं।

पुलिस ने बताया, “पूछताछ के दौरान जिन सात आरोपितों ने पीड़िता से बलात्कार किया था, उन्होंने कोई अफ़सोस जाहिर नहीं किया। उन्होंने कहा कि यह सब उन्होंने मजहब के लिए किया है। उन्होंने बताया कि महिला को पहले भी मुस्लिम छोड़कर अन्य धर्म के लोगों से मिलने-जुलने पर चेतावनी दी गई थी, लेकिन वह नहीं मानी। इसलिए उसका बलात्कार करके उसे सजा दी।”

घटना 7 जनवरी 2024 की है। कुछ मुस्लिम युवकों ने हावेरी के हनागल के एक होटल में हिन्दू व्यक्ति के साथ रुकी मुस्लिम महिला का यहाँ से अपहरण करके जंगल में लेकर गए थे और वहाँ अलग-अलग जगहों पर उससे सामूहिक बलात्कार किया था। उन्होंने हिन्दू पुरुष से भी मारपीट की थी। इसका वीडियो भी वायरल हुआ था। बाद में महिला ने मामला दर्ज करवाया था। इस मामले में अब तक 18 मुस्लिमों युवकों को गिरफ्तार किया गया है।

हावेरी में बन गए हैं मुस्लिम गैंग

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट बताती है कि हावेरी में मुस्लिम युवकों ने दूसरे धर्म के लोगों के साथ सम्बन्ध रखने वाली मुस्लिम महिलाओं को परेशान करने के लिए कई ग्रुप बना लिए हैं। ये लोग व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए आपस में जुड़े हैं और कोडवर्ड में बात करते हैं। ये ग्रुप आसपास के होटल, बस स्टैंडों और भीड़भाड़ वाली जगहों पर सक्रिय रहते हैं। ईगल, X, Y और Z आदि नाम के ऐसे ग्रुप सक्रिय हैं।

यह जब भी कोई अलग-अलग धर्मों के महिला पुरुष को साथ में देखते हैं तो उनको निशाना बनाते हैं। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपितों के फ़ोन को जब्त करके फोरेंसिक जाँच के लिए भेजे गए हैं। उनसे डाटा रिकवर किया जा रहा है। एक आरोपित ने इस मामले में जमानत याचिका भी दायर की है। हालाँकि, पुलिस का कहना है वह पूरी कोशिश करेगी कि किसी भी आरोपित को जमानत ना मिले।

क्या थी घटना?

मामला कर्नाटक के हावेरी जिले का है और 7 जनवरी 2024 की है। उत्तर कन्नड़ जिले के रहने वाले एक हिन्दू युवक और एक मुस्लिम महिला होटल के एक कमरे में ठहरे थे। इसकी जानकारी मिलने पर अक्कीलुर के कुछ मुस्लिम युवक होटल पहुँच गए। वहाँ वीडियो बनाते हुए कमरे का नम्बर रिकॉर्ड किया। इसके बाद ये लोग कमरा खोलने को कहते हुए धमकियाँ दीं।

जब कपल ने होटल स्थित अपने कमरे को खोला तो आरोपितों ने कमरे में घुसकर उनके साथ मारपीट की। इनलोगों को हिंदू पुरुष की बुरी तरह पिटाई की। इसके साथ ही मुस्लिम महिला के साथ भी जमकर मारपीट की। इसके बाद ये मुस्लिम युवक महिला को उठाकर अपने ले गए थे और जंगल में तीन बार उसके साथ गैंगरेप किया था।

घटना की जानकारी सामने आने के बाद यहाँ काफी बवाल मचा था। इस मामले में भाजपा ने कॉन्ग्रेस सरकार से SIT जाँच की माँग की थी। पुलिस ने इस मामले में सबसे पहले तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया था लेकिन बाद में जाँच आगे बढ़ने पर पूरे गैंग का खुलासा हुआ और अब गिरफ्तार आरोपितों की संख्या बढ़कर 18 हो चुकी है।

‘बंगाल में कॉन्ग्रेस और CPIM को हराना है’ – ममता बनर्जी ने INDI गठबंधन के साथ किया ‘खेला’, UP में अखिलेश यादव ने दिखाई औकात

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को हराने के लिए बनाया गया INDI गठबंधन दिन प्रतिदिन तार-तार हो रहा है। अब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनके भांजे अभिषेक बनर्जी ने कॉन्ग्रेस नेताओं के खिलाफ यलगार का ऐलान कर दिया है। उधर अखिलेश यादव ने भी लोकसभा चुनाव के लिए पहली सूची जारी करके साफ़ कर दिया है कि वह उत्तर प्रदेश में कोई बड़ा समझौता कॉन्ग्रेस नेतृत्व के सामने नहीं करना चाहेंगे। 

ममता बनर्जी ने लोकसभा चुनाव के मद्देनजर कॉन्ग्रेस से बिना कोई समझौता किए हुए ही बंगाल के उत्तर हिस्से में एक पदयात्रा चालू कर दी है। यह पदयात्रा भी उन जिलों में हो रही है, जहाँ से कुछ ही समय पहले राहुल गाँधी गुजरे हैं। यहाँ वह यात्रा करने के साथ ही कॉन्ग्रेस पर हमला भी कर रही हैं। वह यहाँ कूचबिहार क्षेत्र में पदयात्राएँ कर रही हैं। 

बंगाल में बनर्जी & कम्पनी vs अधीर रंजन चौधरी

ममता बनर्जी ने बंगाल के इस्लामपुर में इस यात्रा के दौरान कहा, “तृणमूल कॉन्ग्रेस ही वह पार्टी है, जो आपके अधिकारों के लिए लड़ती है। हमें बंगाल में कॉन्ग्रेस और सीपीआईएम को हराने के लिए साथ आना होगा और एकजुट होना होगा।”

ममता बनर्जी ही नहीं बल्कि उनके भांजे सांसद अभिषेक बनर्जी भी कॉन्ग्रेस पर हमलावर हैं। वह बंगाल कॉन्ग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा में कॉन्ग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी पर हमला बोल रहे हैं। 

उन्होंने अधीर रंजन के रवैये पर कहा, “अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि वह बंगाल में राष्ट्रपति शासन चाहते हैं। वह कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं और इंडिया ब्लॉक के सदस्य होने के नाते, वह ममता बनर्जी को कैसे चुनौती दे सकते हैं? हमने कॉन्ग्रेस पर हमला नहीं किया। मैंने इस विषय में कभी कुछ नहीं कहा, लेकिन वह कॉन्ग्रेस के भीतर एक ट्रोजन हॉर्स हैं।” 

अभिषेक बनर्जी यहाँ ही नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा, “पिछले 7 महीनों में, आपने देखा है कि अधीर रंजन ने क्या-क्या कहा है। वह ममता बनर्जी को चुनौती दे रहे हैं, जिन्हें कॉन्ग्रेस INDI गठबंधन के सबसे मजबूत सहयोगी बनाने का दावा कर रही है। आखिर, आप किसकी मदद कर रहे हैं? क्या आप कॉन्ग्रेस को मजबूत कर रहे हैं या बीजेपी को ?” 

गौरतलब है कि हाल ही में तृणमूल कॉन्ग्रेस ने ऐलान किया था कि बंगाल में वह अकेले चुनाव लड़ने वाली है। उधर अधीर रंजन चौधरी ने भी ममता बनर्जी पर हमले जारी रखे हैं। उन्होंने कल (30 जनवरी, 2024) को बंगाल की ममता सरकार पर आरोप लगाया कि वह राहुल गाँधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा को इजाजत नहीं दे रही है। गौरतलब है कि यात्रा आज (31 जनवरी) को बिहार से बंगाल में प्रवेश करेगी। उन्होंने आरोप लगाया है कि यहाँ कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली को भी इजाजत नहीं दी जा रही।

अधीर रंजन चौधरी बंगाल की कानून व्यवस्था को लेकर लगातार ममता बनर्जी की सरकार पर सवाल उठाते आए हैं। उन्होंने हाल ही में जब ED की टीम पर TMC नेता के घर पहुँचने पर हमला हुआ था तो भी बंगाल में राष्ट्रपति शासन की माँग की थी। उन्होंने पंचायत चुनावों के दौरान हुई हिंसा का मुद्दा भी जोरशोर से उठाया था।

यूपी में भी INDI गठबंधन को तगड़ा झटका

ऐसा नहीं है कि INDI गठबंधन की राह बंगाल में ही मुश्किल हो रही है। उत्तर प्रदेश में भी उनके सामने समस्याओं का अम्बार है। हाल ही में सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने ऐलान किया था कि वह कॉन्ग्रेस को राज्य में 11 सीट देंगे। इस पर कॉन्ग्रेस ने आपत्ति जताई थी।

अब सपा ने एक कदम और आगे बढ़कर लोकसभा चुनावों के लिए 16 प्रत्याशियों की एक सूची भी जारी कर दी।  सपा ने इस सूची में फर्रुखाबाद का टिकट भी घोषित किया है। गौरतलब है कि यहाँ से पूर्व में विदेश मंत्री रहे सलमान खुर्शीद सांसद रहे हैं।

वहीं इसके अलावा खीरी लोकसभा सीट पर भी पेंच फँसेगा। दरअसल, यहाँ से सपा ने उत्कर्ष वर्मा को प्रत्याशी घोषित किया है। उत्कर्ष वर्मा यहाँ खीरी की सदर विधानसभा सीट से दो बार विधायक रहे हैं। वह कौशल किशोर वर्मा के पोते हैं, जो कि इस सीट से तीन बार विधायक रहे।

दूसरी तरफ से कॉन्ग्रेस से इस सीट से रवि प्रकाश वर्मा अपनी बेटी पूर्वी वर्मा के लिए दावा ठोंक रहे हैं। उन्होंने हाल ही में सपा छोड़कर कॉन्ग्रेस का दामन थामा है। वह यहाँ से खुद तीन बार सांसद रहे हैं। यह उनके परिवार की परम्परागत सीट है। उनका परिवार इस लोकसभा सीट को 10 बार जीत चुका है।

पंजाब-केरल में कैसे राह निकालेगा INDI गठबंधन

कॉन्ग्रेस के सामने पंजाब की भी चुनौती है। यहाँ आम आदमी पार्टी उससे समझौता करने के मूड में नहीं है। कॉन्ग्रेस का भी लोकल नेतृत्व यहाँ आप के साथ कोई डील नहीं करना चाहता है। दोनों पार्टियाँ कह रही हैं कि वह अपने दम पर 12 लोकसभा सीटों पर लड़ेंगे। उधर केरल में वामपंथी सरकार पर कॉन्ग्रेस का स्थानीय नेतृत्व रोज नए हमले कर रहा। यहाँ भी आपस में समझौता होगा, इसकी समभावना कम नजर आ रही है।

‘गैर-हिन्दुओं को घुसने की अनुमति नहीं – मंदिर के गेट पर लगाओ बोर्ड’: स्टालिन सरकार को हाईकोर्ट का आदेश, कहा- ये पिकनिक मनाने की जगह नहीं

हिंदू मंदिर सिर्फ हिंदुओं का है। हिंदुओं के मंदिर में गैर-हिंदुओं का क्या काम? कुछ इसी अर्थ वाली टिप्पणी के साथ मद्रास हाई कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार को निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि पलानी मंदिर के एंट्री गेट पर ऐसे बोर्ड लगाए जाएँ, जिसमें लिखा हो कि इस मंदिर में गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है। किसी को अगर मंदिर में एंट्री चाहिए तो उसे मंदिर के निर्धारित ड्रेस कोड और आस्था की जानकारी देनी होगी।

मद्रास हाई कोर्ट ने कहा कि मंदिर संविधान के अनुच्छेद 15 के अंतर्गत नहीं आते। इसलिए किसी मंदिर में गैर-हिंदुओं के प्रवेश को रोकने को गलत नहीं कहा जा सकता। यही नहीं, कोर्ट ने अधिकारियों को रीति-रिवाजों और प्रथाओं के अनुसार मंदिर का रखरखाव करने का भी निर्देश दिया। जस्टिस एस श्रीमती ने याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा है कि मंदिर पर्यटक स्थल का पिकनिक स्पॉट नहीं है। अगर कोई मंदिर की बिल्डिंग को देखना चाहता है तो वो मंदिर के एंट्री गेट से ही देख सकता है या फिर इन लोगों की पहुँच ध्वज स्तंभ यानी ‘कोडिमारन’ तक ही सीमित रखना चाहिए।

मद्रास हाई कोर्ट में पलानी हिल टेंपल डिवोटीज ऑर्गनाइजेशन के संयोजक डी सेंथिलकुमार ने याचिका दाखिल कर मंदिरों में गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक लगाने की माँग की थी। इस याचिका में मंदिरों में गैर-हिंदुओं के कई अनुचित कामों की जानकारी दी गई थी, जिसमें बताया गया कि कुछ समय पहले तंजावुर के बृहदेश्वर मंदिर में मुस्लिमों के एक गुट ने माँस खाया था। वहीं, हंपी के मशहूर मंदिर में भी एक ग्रुप माँस करता पकड़ा गया था। यही नहीं, उत्तर प्रदेश के एक मंदिर में एक मुस्लिम युवक ने नमाज पढ़ी थी, जिसके बाद वो गिरफ्तार हुआ था।

ऑपइंडिया के पास हाई कोर्ट के फैसले की कॉपी मौजूद है। इस याचिका में सेंथिलकुमार ने एक घटना का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि पलानी मंदिर में बुर्काधारी महिलाओं और मुस्लिम युवक ने टिकट खरीदा। जब कर्मचारियों ने मना किया तो वह बदतमीजी करते हुए कहा कि पहाड़ एक पर्यटन स्थल है और वहाँ कोई भी घुमने जा सकता है। चूँकि ऐसे मामले पहले सामने आ चुके हैं, इसलिए कोर्ट को इस पर दिशा-निर्देश जारी करते हुए गैर-हिंदुओं को हिंदू मंदिरों में घुसने से रोका जाना चाहिए।

डी सेंथिलकुमार ने याचिका में हिल मंदिर परिसर और उसके उप-मंदिरों में केवल हिंदुओं को प्रवेश की अनुमति देने और मंदिर में डिस्प्ले बोर्ड सुनिश्चित करने का निर्देश देने की भी माँग की थी। हालाँकि अदालत ने पहले इस पर स्टे ऑर्डर दिया था और गैर-हिंदुओं की एंट्री को रोकने से जुड़ा बोर्ड लगाने के लिए कहा था। वहीं, अधिकारियों ने सेंथिलकुमार की याचिका का यह कहते हुए विरोध किया कि भगवान मुरुगन के तीसरे निवास की पहचान रखने वाले पलानी मंदिर में न सिर्फ हिंदू पूजा करते थे, बल्कि उन्हें मानने वाले गैर-हिंदू भी पूजा करते थे।

इस मामले में सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद जस्टिस श्रीमती ने अपने फैसले में कहा, “मंदिर प्रदेश अधिनियम 1947 को हिंदू समुदाय के अंदर व्याप्त भेदभाव को खत्म करने के लिए बनाया गया था। इसका गैर-हिंदुओं के मंदिर में प्रवेश से कोई लेना देना नहीं था।” कोर्ट ने संविधान सभा की बहसों पर गौर करने के बाद पाया कि मंदिरों को जानबूझकर अनुच्छेद 15 के दायरे में शामिल नहीं किया गया था। ऐसे में गैर-हिंदुओं को इस मामले से दूर रखा गया।

हालाँकि अधिकारियों ने जब सुझाव दिया कि देवता में विश्वास रखने वाले और हिंदू धर्म में पालन किए जाने वाले रीति-रिवाजों और प्रथाओं को स्वीकार करने वाले गैर-हिंदुओं को प्रवेश की अनुमति दी जाए। इसके बाद अदालत ने मीनाक्षी सुंदरेश्वर मंदिर में अपनाई जाने वाली प्रथा पर ध्यान देते हुए निर्देश दिया कि अधिकारी ऐसा कर सकते हैं। ऐसे व्यक्तियों से एक शपथ पत्र लें और ऐसे लोगों को मंदिर में एंट्री देने से पहले उनकी एंट्री रजिस्टर में दर्ज करें।

लाइव लॉ की खबर के मुताबिक, अदालत ने यह भी कहा कि संविधान प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म का पालन करने और उसे मानने का अधिकार देता है, लेकिन उनसे जुड़े धार्मिक रीति-रिवाजों और प्रथाओं में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता है। अदालत ने इस बात पर भी जोर दिया कि हिंदू, मुस्लिम, ईसाई और अन्य धर्मों के बीच धार्मिक सद्भाव तभी कायम रहेगा जब विभिन्न धर्मों के लोग एक-दूसरे की आस्था और भावनाओं का सम्मान करेंगे।

अपहरण, बलात्कार, जबरन निकाह, मुस्लिम बना कर नाम रख दिया ‘शबनम’: हिन्दू किशोरी के साथ दरिंदगी करने वाले को ‘बजरंग दल’ ने दबोचा, पुलिस को सौंपा

उत्तर प्रदेश के अमरोहा से एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार, उसके इस्लामी धर्मांतरण और जबरन निकाह का मामला का सामने आया है। गैर-मुस्लिम लड़की को न सिर्फ घर से बहला-फुसला कर ले जाया गया, बल्कि उसे मुस्लिम बना कर उसका नया नाम ‘शबनम’ भी रख दिया गया। आरोपित ने बिना सहमति लिए किशोरी से निकाह भी कर लिया। ‘नारी उत्थान केंद्र’ की सदस्य उषा शर्मा ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके आधार पर युवक और उसके साथी के विरुद्ध FIR दर्ज कर ली गई है।

FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने इस मामले की जाँच शुरू कर दी है। आरोपित का चालान भी कर दिया गया है। आरोपित का नाम चाँद है, जो हसनपुर कोतवाली क्षेत्र के शाहपुर कलाँ गाँव का रहने वाला है। वहीं पीड़िता का परिवार संभल जिले के रजपुरा थाना क्षेत्र की रहने वाली है। शनिवार (27 जनवरी, 2024) को दोपहर में किशोरी को भगा कर अमरोहा ले गया। उसका इरादा था कि वो एक वकील को माध्यम बना कर उक्त किशोरी के साथ कचहरी में निकाह कर ले।

हालाँकि, हिन्दू कार्यकर्ताओं को इसकी भनक लग गई। ‘बजरंग दल’ के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने जोया रोड पर ही उक्त युवक को धर-दबोचा। संगठन के जिला संयोजक कुशल चौधरी और सह-संयोजक वीरेंद्र कुमार ने इसके बाद इस पूरे प्रकरण की जानकारी पुलिस अधिकारियों को दी। मौके पर भीड़ लग गई तो इसका फायदा उठा कर युवक भागने लगा था, लेकिन उसे पकड़ कर पुलिस को सौंप दिया गया। इसके बाद पुलिस ने पीड़िता को ‘बाल कल्याण समिति’ के समक्ष पेश किया।

इसके बाद किशोरी का मेडिकल कराया गया। युवक के विरुद्ध बलात्कार, पॉक्सो एक्ट और धर्म संपरिवर्तन की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। किशोरी को फ़िलहाल सेफ हाउस में रखा गया है। कोर्ट में उसका बयान दर्ज कराए जाने के बाद उसे उसके परिजनों को सौंप दिया जाएगा। युवक के साथी की तलाश की जा रही है। उत्तर प्रदेश में जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ योगी सरकार ने सख्त कानून बना रखा है। धर्मांतरण के लिए वहाँ बड़ी विदेशी फंडिंग की बात भी सामने आई थी।

पत्नी और 2 भाइयों को टिकट, हिन्दू विरोधी शफीकुर्रहमान पर भी भरोसा: लोकसभा चुनाव 2024 के लिए सपा ने जारी की प्रत्याशियों की पहली लिस्ट

समाजवादी पार्टी (सपा) ने मंगलवार (30 जनवरी 2024) को लोकसभा चुनाव 2024 के लिए अपने प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी है। पहली सूची में 16 उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया गया है। जिन उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया गया है उनमें सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव, भाई धर्मेंद्र यादव, भाई अक्षय यादव जैसे मुलायम यादव के परिवार के सदस्यों के नाम हैं।

समाजपार्टी पार्टी ने जिन 16 लोगों को टिकट दिया है, उनमें संभल से शफीकुर्रहमान बर्क, फिरोजाबाद से अक्षय यादव, मैनपुरी से डिंपल यादव, एटा से देवेश शाक्य, बदायूँ से धर्मेंद्र यादव, खीरी से उत्कर्ष वर्मा, धौरहरा से आनंद भदौरिया, उन्नाव से अनु टंडन, लखनऊ से रविदास मेहरोत्रा, फर्रुखाबाद से नवल किशोर शाक्य, अकबरपुर से राजाराम पाल, बांदा से शिवशंकर सिंह पटेल, फैजाबाद से अवधेश प्रसाद, अंबेडकरनगर से लालजी वर्मा, बस्ती से राम प्रसाद चौधरी और गोरखपुर से काजल निषाद के नाम शामिल हैं।

सपा की इस सूची को लेकर कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि इस सूची में परिवारवाद और जातिवाद पूरी तरह हावी है। वहीं, इस सूची में शामिल शफीकुर्रहमान बर्क को हिंदू विरोधी बयानों के लिए जाना जाता है। वो अखिलेश यादव से भी बगावत कर चुके हैं। इसके बावजूद उन्हें टिकट दिया गया है। इस बीच, सोशल मीडिया पर लोग समाजवादी पार्टी पर निशाना साध रहे हैं।

सोशल मीडिया यूजर सचिन पाण्डेय ने इस लिस्ट को लेकर समाजवादी पार्टी की आलोचना की है। उन्होंने X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “समाजवादी पार्टी में सवर्णों- ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, श्रीवास्तव सहित व्यापारी जातियों व अन्य सामान्य जाति का कोई स्थान नहीं है। सपा का नारा यादव मुस्लिम दलित (PDA) है। दलित और पिछड़ा केवल सपा के लिए वोटबैंक।”

प्रशांत किशोर नाम के यूजर ने लिखा, “तीन नाम अभी से परिवार के हैं। काहे के समाजवादी?”

नीरज दुबे ने लिखा, “समाजवादी पार्टी ने एक बार फिर ‘परिवार प्रथम’ के सिद्धांत को सर्वोपरि रखा है। सूची में शामिल कई नाम अखिलेश यादव के परिवारजनों के ही हैं। कार्यकर्ताओं को सिर्फ नारे लगाने के लिए पार्टी में रखा गया है।”

बता दें कि इंडी गठबंधन में अखिलेश यादव कॉन्ग्रेस के सहयोगी है। ये अलग बात है कि अभी तक कॉन्ग्रेस और सपा में सीटों की पहचान को लेकर कोई समझौता सार्वजनिक तौर पर नहीं हुआ है, सिवाय इसके कि 11 सीटों पर कॉन्ग्रेस चुनाव लड़ेगी। ऐसे में इनमें से कुछ सीटें ऐसी भी हो सकती हैं, जिन पर कॉन्ग्रेस की भी दावेदारी हो।

‘ये भारत है, पाकिस्तान नहीं’: कर्नाटक में BJP की आपत्ति के बाद हटाया गया हरा झंडा, हनुमान ध्वज उतारे जाने के बाद JDS कार्यकर्ताओं ने भी पहनना शुरू किया भगवा

कर्नाटक के मंड्या में कॉन्ग्रेस सरकार की पुलिस द्वारा हनुमान जी के ध्वज को हटाने वाला मामला अभी थमा भी नहीं था कि राजधानी बेंगलुरु में हरा झंडा लगाने का मामला सामने आ गया है। 108 फ़ीट आंजनेय ध्वज को हटाने के बाद भड़की भाजपा ने हरा झंडा हटाने की माँग की है। भाजपा का कहना है कि ये हरा झंडा बेंगलुरु के शिवाजीनगर में फहराया गया है। भाजपा नेता व विजयपुरा से विधायक बसनगौड़ा R पाटिल यत्नाल ने सोशल मीडिया पकटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर इस मुद्दे को उठाया है।

उन्होंने अपने ट्वीट में बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर और DCP (ईस्ट) को टैग करते हुए पूछा कि क्या किसी सार्वजनिक क्षेत्र में दुश्मन मुल्क के रंग से मिलता-जुलता झंडा फहराना हमारी ध्वज संहिता के खिलाफ नहीं है? उन्होंने माँग की कि उस झंडे को तुरंत हटाया जाए और वहाँ राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया जाए। उन्होंने कहा कि शिवाजीनगर भारत में है, पाकिस्तान में नहीं। इन तस्वीरों के वायरल होने के बाद पुलिस और बृहद बेंगलुरु महानगरपालिका (BBMP) हरकरत में आ गई।

प्रशासन ने कहा है कि BBMP कमचारियों की मदद से उक्त झंडे को वहाँ से हटा दिया गया है। स्थानीय मस्जिद के कर्मचारियों और मुस्लिम नेताओं को भी इस संबंध में सूचित कर दिया गया है। हालाँकि, कुछ मुस्लिमों ने इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई और कहा कि पिछले 30 वर्षों से ये झंडा वहाँ पर वैसे ही फहर रहा था। लेकिन, पुलिस-प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई नियमानुसार ही की गई है। भाजपा-JDS गठबंधन राज्य में हिन्दू हित के मुद्दों को लेकर आक्रामक है।

उधर मंड्या के करगोदु में अब भी प्रदर्शन जारी है। JDS नेताओं ने भी अब अपने पारंपरिक हरे रंग की शॉल की जगह भगवा गमछा पहनना शुरू कर दिया है। भाजपा-JDS ने कहा है कि मंड्या में हर घर के ऊपर भगवा झड़ना फहराया जाएगा, अगर कर्नाटक सरकार में हिम्मत है तो वो रामभक्तों को रोक कर दिखा दे। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष HD कुमारस्वामी ने भी सन्देश दिया है कि राज्य में उनके समर्थक भाजपा के साथ मिल कर काम करें। लोकसभा चुनाव भी दोनों दल मिल कर लड़ेंगे।

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के हमले में 3 जवान बलिदान, 14 घायल: एयरलिफ्ट कर रायपुर भेजा गया

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के टेकलगुड़ेम पुलिस कैंप पर नक्सलियों ने बड़ा हमला किया है। इस हमले में 3 जवान बलिदान हो गए हैं, जबकि लगभग 14 जवान घायल हैं। घायलों को जगदलपुर रायपुर ले जाया गया है। इनमें 4 जवानों की हालत गंभीर है, जबकि अन्य खतरे से बाहर हैं। बता दें कि साल 2021 में टेकलगुड़ेम में ही नक्सलियों ने हमला किया था, जिसमें 23 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे।

रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार (30 जनवरी 2024) को जोनागुड़ा-अलीगुड़ा क्षेत्र में सुरक्षाबलों की टीम सर्च ऑपरेशन चला रही थी। इस टीम में सीआरपीएफ की कोबरा, एसटीएफ और डीआरजी के जवान शामिल थे। दोपहर 3 बजे के करीब घात लगाए नक्सलियों ने सुरक्षाबलों की टीम पर फायरिंग शुरू कर दी। इसके बाद सुरक्षाबलों ने भी अपनी पोजिशन सँभाल ली और दोनों तरफ से फायरिंग हो ने लगी।

दरअसल, पुलिस और नक्सलियों के बीच यह मुठभेड़ जगरगुंडा थाना क्षेत्र के टेकलगुड़ेम गाँव में हुई है। टेकलगुड़ेम गाँव में एक नया पुलिस कैंप खोला गया है। इसी कैंप से सुरक्षाबल सर्च ऑपरेशन के लिए निकले थे। इसके बाद टीम पर माओवादियों ने हमला कर दिया। चार घंटों तक चली मुठभेड़ में सुरक्षाबलों को भारी पड़ता देख नक्सली जंगल की आड़ लेकर भागने में कामयाब हो गए हैं।

गौरतलब है कि टेकलगुड़ा में ही 3 अप्रैल 2021 में सुरक्षाबलों और नक्सली की मुठभेड़ में 23 जवान बलिदान हो गए थे, जबकि 35 से ज्यादा घायल हो गए थे। इस मुठभेड़ में करीब 350 से 400 नक्सली शामिल थे। इनमें माओवादियों के बड़े लीडर भी मौजूद थे। जवानों पर BGL (बैरल ग्रेनेड लॉन्चर) दागा गया था।

इतना ही नहीं, इस दौरान नकस्लियों ने DRG, CRPF और कोबरा बटालियन के जवानों से हथियार भी लूट कर ले गए थे। नक्सलियों ने कोबरा बटालियन के एक जवान राकेश्वर सिंह मन्हास का अपहरण भी कर लिया था। हालाँकि, छह दिन तक कब्जे में रखने के बाद नक्सलियों ने बस्तर के गाँधी कहलाने वाले स्वतंत्रता सेनानी धर्मपाल सैनी की मध्यस्थता के बाद राकेश्वर सिंह को छोड़ दिया था।

बताते चलें कि तीन दिन पहले चिंतागुफा क्षेत्र में सक्रिय रहे दो महिलाओं और एक पुरुष नक्सली ने सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण किया था। इनमें से एक महिला नक्सली पर एक लाख रुपए का इनाम रखा गया था। शनिवार (27 जनवरी 2024) की शाम को सीआरपीएफ के 50वीं बटालियन के अधिकारियों के समक्ष नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया।

सीआरपीएफ के द्वितीय कमान के अधिकारी दुर्गाराम ने बताया कि पुलिस के पूना नर्कोम अभियान से प्रभावित होकर दूधी सुकड़ी (53), दूधी देवे (38) और माड़वी हड़मा (26) ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें से दूधी देवे पर एक लाख रुपए का इनाम था। तीनों को प्रोत्साहन राशि दी गई। इसके अलावा, इन्हें राज्य सरकार की पुनर्वास नीति योजना का लाभ दिया जाएगा।

बंगाल में पुलिया के पास मिला BJP के बूथ प्रभारी का शव, अपने ही घर में नहीं घुसने दिया जा रहा था: TMC के गुंडों पर हत्या का आरोप

पश्चिम बंगाल में भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या का दौर अब भी थमता हुआ नहीं दिख रहा है। पार्टी के सूचना एवं तकनीक विभाग के इंचार्ज एवं बंगाल भाजपा के प्रभारी अमित मालवीय ने एक वीडियो ट्वीट किया है, जिसमें भाजपा कार्यकर्ता मिथुन खामरुई का शव जमीन पर पड़ा हुआ दिख रहा है। साथ ही आसपास कई लोग भी जमा हुए दिख रहे हैं। उन्होंने TMC के दोहरे रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि ये पार्टी हिंसा को लेकर हंगामा कर रही थी, जिस पर राज्य में इसी का पेटेंट है।

मामला पश्चिमी मेदिनीपुर जिले का है। मिथुन खामरुई सालबोनी प्रखंड के करनगर क्षेत्र स्थित मोहनपुर गाँव में बूथ संख्या 28 पर पार्टी के प्रभारी थे। अमित मालवीय ने बताया है कि पिछले कुछ महीनों से सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडे उन्हें धमकी दे रहे थे। उन्हें उनके घर में भी नहीं घुसने दिया जा रहा था। 2018 में मिथुन खामरुई की माँ ने भाजपा के टिकट पर पंचायत चुनाव लड़ा था। सिर्फ अभी ही नहीं, बल्कि 2021 में विधानसभा चुनाव के बाद भी हिंसा हुई थी जिसमें उनके घर पर भी कई बार हमले किए गए थे।

अमित मालवीय ने कहा, “मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की TMC गुंडों से भरी हुई है। ये गुंडे फलते-फूलते हैं, क्योंकि राज्य की गृह मंत्री के रूप में ममता बनर्जी वो उन्हें संरक्षण देती है। मिथुन खामरुई जैसे सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ताओं के खून से उनके हाथ रंगे हुए हैं। मिथुन खामरुई का पोस्टमॉर्टम मेदिनीपुर अस्पताल में हुआ है और उनके पिता ने FIR भी दर्ज करा दी है। भाजपा परिवार की पूरी मदद कर रही है।” मिथुन का शव एक खेत के पास पड़ा हुआ मिला, जहाँ कई ग्रामीण जमा हो गए।

भाजपा की बंगाल यूनिट ने कहा कि ये सब तृणमूल कॉन्ग्रेस के क्रूर हथकंडे को उजागर करता है। पार्टी ने TMC के स्थानीय मंडल अध्यक्ष बाबुल घोष पर मिथुन खामरुई की हत्या का षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया है। उनका शव उनके घर से कुछ ही किलोमीटर दूर एक पुलिया के पास बरामद किया गया। उनकी उम्र मात्र 35 वर्ष थी। पहले वो TMC के सक्रिय कार्यकर्ता हुआ करते थे, लेकिन फिर भाजपा में आ गए थे। सोमवार (29 जनवरी, 2024) को उनके न मिलने से परिवार वाले उनकी तलाश कर रहे थे। पुलिस इसे शराब पीने से हुई मौत बता रही है।