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राम शराबी थे, हजारों महिलाओं के साथ रहते थे… कर ली थी आत्महत्या: मुख्यमंत्री स्टालिन की करीबी उमा इलक्किया की हिंदू घृणा, वीडियो वायरल

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की करीबी कही जाने वाली एंकर और एक द्रविड़ संगठन की महासचिव उमा इलैक्किया ने भगवान राम पर आपतिजनक टिप्पणियाँ की हैं। उन्होंने भगवान राम के चरित्र को लेकर अभद्र बातें कहीं और साथ ही राम मंदिर के विषय में भी आपत्तिजनक बातें बोली।

तमिल संगठन द्रविड़ कझगम तमिजार पेरिवाई की महासचिव उमा इलैक्किया ने एक सभा के दौरान 13 जनवरी 2024 को यह अपमानजनक बातें कही। उनका यह तमिल भाषा में दिया गया बयान अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है और हिन्दू इस पर गुस्सा जता रहे हैं।

द कम्यून मैग के अनुसार, उमा ने कहा, “वाल्मिकी रामायण के अनुसार, राम महल में हजारों महिलाओं के साथ रहते थे और शराब भी पीते थे। क्या आप उन्हें अपने बच्चों के लिए एक उदाहरण के रूप में पेश करेंगे? उनमें जीने का साहस नहीं था, इसलिए उन्होंने सरयू में छलाँग लगा कर आत्महत्या कर ली। क्या आप अपने बच्चों को उनके उदाहरण के साथ पालेंगे-पोसेंगे? ये कैसी मूर्खता है? राम ने अपनी ही पत्नी पर शक किया और उन्हें जंगल भेज दिया, क्या आप लोग इसे उदाहरण की तरह दिखाएँगे?”

उमा इलैक्किया यहीं नहीं रुकी। उन्होंने आगे भी करोड़ों लोगों के आराध्य प्रभु राम पर हमले जारी रखे। उन्होंने कहा, “राम एक हत्यारा था। उन्होंने खुद को छिपाकर बाली को मार डाला और जब शम्बूक ध्यान कर रहा था तो उसने बिना कारण पूछे उसका सिर काट दिया। क्या इस तरह का व्यक्ति आपके बच्चों के लिए आदर्श है?”

उमा इलैक्किया ने राम मंदिर पर भी अपने भाषण के जरिए हमले किए। उन्होंने कहा, “राम मंदिर राम के बाल रूप के लिए बना है। ये मंदिर बिलकुल कोरे झूठ पर बना है कि यह मंदिर उनके जन्मस्थान पर बना है। उन्होंने इसके लिए कोर्ट से आदेश भी जारी करवा दिया। इस मंदिर का पता क्या होगा? राम मंदिर या राम जन्मभूमि जो कि बाबरी मस्जिद पर बना हुआ है। आपने मंदिर वहाँ बनाया है, जहाँ कभी मस्जिद हुआ करती थी।”

उमा इलैक्किया ने यह सारे बयान आरएसएस और भाजपा के विरोध करने की आड़ में दिए। उनके इन बयानों पर लोग कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

उमा इलैक्किया स्टालिन परिवार द्वारा चलाए जाने वाले कलैनार सेथिगल में एंकर हैं। उनकी कई फोटो तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और उनके बेटे उदयानिधि स्टालिन के साथ भी सामने आई हैं। गौरतलब है कि उदयानिधि भी सनातन धर्म को डेंगू मलेरिया बता चुके हैं। उन पर भी कोई कार्रवाई तमिलनाडु सरकार ने नहीं की थी।

जिससे उठवाया गोबर, उसी नौकर को रेलवे जॉब के बदले जमीन… फिर वही जमीन लालू की बेटी को ट्रांसफर: ED ने समझाया कैसे खेला गया यह खेल

राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू प्रसाद यादव के रेल मंत्री रहने के दौरान हुए ‘जॉब फॉर लैंड स्कैम’ की जाँच में ईडी ने एक नया खुलासा किया है। जाँच एजेंसी ने बताया है कि इस जॉब स्कैम में लालू की पत्नी राबड़ी देवी की गौशाला का एक कर्मचारी भी शामिल था। ईडी के मुताबिक, उस कर्मचारी ने एक अभ्यर्थी से रेलवे में नौकरी का वादा कर उसकी जमीन अपने नाम कराई और बाद में वो जमीन लालू प्रसाद यादव की बेटी हेमा यादव को स्थानांतरित कर दी गई। इस कर्मचारी का नाम हृदयानंद चौधरी था।

ईडी ने बताया कि उन्होंने इस मामले में 8 जनवरी 2024 को अपनी शिकायत स्पेशल कोर्ट में दायर की थी। शिकायत में अमित कात्याल, राबड़ी देवी, मीसा भारती, हीमा यादव, हृदयानंद चौधरी का नाम है। इसके अलावा दो फर्जी कंपनियों को भी इस शिकायत में नामजद किया गया है। इनके नाम एके इंफोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड और एबी एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड हैं। इन्हें लालू प्रसाद यादव के परिवार के सदस्यों के लिए अपराध के लिए प्राप्त धन प्राप्त होता था।

केंद्रीय जाँच एजेंसी ने ये भी बताया कि इन फर्जी कंपनियों में प्रमुख लोगों द्वारा अचल संपत्तियाँ अर्जित की गईं और फिर नाममात्र राशि लेकर इसके शेयर लालू प्रसाद यादव के परिवार के सदस्यों को ट्रांसफर कर दिए गए। बताया जा रहा है कि अमित कात्याल नाम का शख्स लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के लिए इन फर्जी कंपनियों का मैनेजमेंट देखता था।

ईडी द्वारा जारी प्रेस रिलीज (तस्वीर साभार: ED)

ये चार्जशीट दाखिल होने के बाद दिल्ली की कोर्ट ने इस मामले में पिछले हफ्ते संज्ञान लिया और आरोपितों को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मुकदमा शुरू करने के लिए 9 फरवरी 2024 को उनके सामने पेश होने के लिए नोटिस जारी किया। इनमें से कात्याल पहले से ही ईडी की हिरासत में है। उसे पिछले वर्ष नवंबर में गिरफ्तार करके जेल में डाला गया था। 11 नवंबर 2023 को उसकी गिरफ्तारी हुई थी

गौरतलब है कि लैंड फॉर जॉब केस में चल रही ईडी की जाँच का आधार वही आरोप हैं जिनमें कहा गया है कि लालू प्रसाद ने रेल मंत्री रहते हुए ग्रुप-डी वाले पदों पर नियुक्तियों में भ्रष्टाचार किया। ईडी का दावा है कि सीबीआई की प्राथमिकी और आरोप पत्र के अनुसार, अभ्यर्थियों को रेलवे में नौकरी के बदले रिश्वत के रूप में अपनी जमीन ट्रांसफर करने के लिए कहा गया था।

बता दें कल (29 जनवरी 2024) लालू प्रसाद यादव से इस केस को लेकर ईडी ने 10 घंटे पूछताछ की थी। इस दौरान उनसे 70 सवाल किए गए। उन्हें हर जवाब देने में डेढ़ से 2 मिनट लगे। इस दौरान उनके कितने लोगों के नौकरी के बदले जमीन लेने की बात पूछी गई और साथ ही जमीन को कम दर पर खरीदने के भी सवाल किए गए। रात के 9 बजे राजद प्रमुख ईडी दफ्तर से निकले। मीडिया के आगे उन्होंने खुद को निर्दोष बताया। वहीं जाँच अधिकारी ने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत लालू प्रसाद यादव का बयान दर्दज कर लिया।

झारखंड CM हेमंत सोरेन गायब: सड़क से लेकर एयरपोर्ट तक अलर्ट, दिल्ली पुलिस और आसपास के राज्यों की पुलिस एक्शन मोड में

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन प्रवर्तन निदेशालय से बचने के लिए फरार हो गए हैं। उनसे जमीन घोटाला मामले में ED, दिल्ली पुलिस के साथ कल (29 जनवरी, 2024) को पूछताछ करने पहुँची थी। यह पूछताछ उनके दिल्ली स्थित आवास पर होनी थी। पूछताछ टीम के पहुँचने पर वह यहाँ से नदारद मिले। उनका पता लगाने के लिए ED एयरपोर्ट से लेकर सड़क तक, सब जगह खोज अभियान चला रही है। दिल्ली की सीमाओं पर भी गाड़ियों की आवाजाही पर नजर रखी जा रही है।

आसपास की राज्यों की पुलिस को भी ED ने कहा है कि वह हेमंत सोरेन के विषय में जानकारी होने पर तुरंत बताएँ। हेमंत सोरेन कल दिल्ली स्थित आवास से राँची जाने वाले थे। राँची के लिए एक स्पेशल चार्टर्ड फ्लाइट भी बुक थी। यह फ्लाइट शाम 6 बजे रवाना होनी थी। ED ने जब इस बारे में जानकारी ली तो पता चला कि यह फ्लाइट भी रद्द कर दी गई है। हेमंत सोरेन के सभी फ़ोन नम्बर भी बंद आ रहे हैं। ED दिल्ली अलावा राँची में भी उनकी तलाश में लगी हुई है।

पूरे दिन ED ने ली तलाशी, हेमंत सोरेन का कोई सुराग नहीं

29 जनवरी को दिल्ली में हेमंत सोरेन के आवास पर पहुँची ED ने लगभग 13 घंटे तक जाँच की। यहाँ ED की टीम सुबह 9 बजे पहुँची थी और जाँच करने के बाद रात 11 बजे निकली। ED टीम अपने साथ हेमंत सोरेन की गाड़ी और उनके ड्राईवर को भी ले गई। यह गाड़ी BMW कम्पनी की है और हरियाणा में रजिस्टर्ड है।

बताया जा रहा है कि ED टीम के पहुँचने से कुछ ही देर पहले हेमंत सोरेन यहाँ से निकल गए थे। ED ने अब दिल्ली पुलिस से कहा है कि वह दिल्ली की सीमाओं पर नजर रखे और हाइवे पर लगी पुलिस को सचेत करके हेमंत सोरेन की जानकारी मिलने पर सूचित करें। ED ने प्रमुख एयरपोर्ट को भी अलर्ट भेजकर हेमंत सोरेन के विषय में जानकारी मिलने पर बताने को कहा है।

ED को मेल भेजा, कहा- 31 जनवरी को आना

हेमंत सोरेन ने दिल्ली से निकलने के बाद 29 जनवरी की शाम ED को एक इमेल भेजा है। उन्होंने कहा है कि ED उनसे पूछताछ के लिए 31 जनवरी को दोपहर 1 बजे उनके राँची स्थित आवास पर आ सकती है। उन्होंने इस इमेल में ED की जाँच को राजनीतिक तौर पर प्रेरित बताया है। उन्होंने यह भी कहा है ED को 20 जनवरी को हुई पूछताछ की वीडियो भी सम्भाल कर रखनी चाहिए। यह पूछताछ सात घंटे चली थी। ED का कहना था 20 जनवरी की जाँच को और आगे बढ़ाने के लिए हेमंत सोरेन से उन्हें फिर पूछताछ करनी है।

इसी को लेकर हेमंत सोरेन को समन भी भेजा गया था। इस मामले में अब तक हेमंत सोरेन को 10 समन भेजे जा चुके हैं। हेमंत सोरेन लगातार ED के समन का जवाब देने से बचते आए हैं। उनके परिवार के एक व्यक्ति ने मीडिया से कहा है कि सोरेन दिल्ली स्थित आवास पर नहीं मिले, इसका मतलब यह नहीं है कि वह फरार हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि ED उनके दिल्ली स्थित आवास पर पहुँच कर उनकी छवि धूमिल करना चाहती है। उनकी पार्टी के नेताओं ने कहा है कि वह व्यक्तिगत कार्य से दिल्ली गए थे।

यह जानकारी सामने आई है कि हेमंत सोरेन 27 जनवरी को राँची से दिल्ली आए थे। वह दिल्ली एक स्पेशल चार्टर्ड फ्लाइट से आए थे। यहाँ उन्हें इस मामले में कानूनी सलाह लेनी थी और साथ ही कुछ राजनीतिक मुलाक़ात भी करनी थी। ED ने उन्हें पूछताछ के लिए पहले ही समन भेज दिया था। वह उनसे दिल्ली में इसलिए पूछताछ करना चाहती थी क्योंकि 20 जनवरी को राँची में हुई पूछताछ के दौरान उनकी पार्टी झामुमो के कार्यकर्ताओं ने खूब हंगामा काटा था।

राँची में सुरक्षा इंतजाम बढ़ाए गए, विपक्ष ने किया हमला

हेमंत सोरेन से पूछताछ और उनकी गिरफ्तारी की कयासों के बीच राँची में सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है। राँची में मुख्यमंत्री आवास समेत भाजपा कार्यालय और अन्य महत्वपूर्ण जगहों पर सुरक्षा बढ़ाई गई है। झारखंड सरकार ने 29 जनवरी को एक आदेश जारी करके 14 अतिरिक्त पुलिस अधिकारियों की तैनाती राँची में कर दी है। इन अधिकारियों को अगले आदेश तक राँची में मौजूद रहने को कहा गया है। भाजपा नेताओं ने हेमंत सोरेन के गायब होने को लेकर हमला बोला है।

झारखंड के भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने उन पर तंज कसा है। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “ED के डर के मारे झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पिछले अठारह घंटे से दिल्ली वाले मुख्यमंत्री आवास से फ़रार हो कर भूमिगत हो गए हैं। मीडिया सूत्रों के मुताबिक़ देर रात हेमंत जी हवाई चप्पल पहने हुए चादर से मुँह ढँककर चोर की तरह आवास से पैदल निकल कर भागे हैं। उनके साथ दिल्ली गया स्पेशल ब्रांच का सुरक्षाकर्मी अजय सिंह भी ग़ायब है। इन दोनों का मोबाइल भी बंद, तब से उन्हें ईडी और दिल्ली पुलिस ढूँढ रही है।”

वहीं भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा है कि हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन को मुख्यमंत्री बनाए जाने का प्लान चला रहा है। उन्होंने लिखा, “हेमंत सोरेन जी ने अपने यानि झामुमो व कॉन्ग्रेस तथा सहयोगी विधायकों को राँची सामान तथा बैग के साथ बुलाया है।”

उन्होंने आगे लिखा, “सूचना के अनुसार कल्पना सोरेन जी को मुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव है। मुख्यमंत्री ने सूचना दी है कि ED के पूछताछ के डर से वे सड़क मार्ग से राँची पहुँचकर अपने अवतरित होने की घोषणा करेंगे।”

सरकारी स्कूल में हेडमास्टर ने बच्चों को दिलाई कसम – ‘हिन्दू धर्म मत मानो, ब्रह्मा-विष्णु-महेश में विश्वास ना करो’: छत्तीसगढ़ में गिरफ्तार, सस्पेंड भी हुआ

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में अपने छात्रों को ब्रह्मा-विष्णु-महेश में विश्वास ना करने और हिन्दू धर्म ना मानने की कसम दिलाने वाला हेडमास्टर गिरफ्तार कर लिया गया है। नाबालिगों का धर्मांतरण कराने वाले इस हेडमास्टर को शिक्षा विभाग द्वारा निलंबित भी कर दिया गया है। उसके इस कृत्य का वीडियो भी वायरल हुआ है।

जानकारी के अनुसार, बिलासपुर के रतनपुर थाना क्षेत्र में एक शासकीय विद्यालय (मतलब सरकारी स्कूल) में हेडमास्टर रतनलाल सरोवर ने यहाँ पढ़ने वाले बच्चों को हिन्दू धर्म के खिलाफ कसम दिलवाई। यह कसम राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन दिलवाई गई। हिन्दू धर्म के खिलाफ कसम दिलवा कर उन्हें बौद्ध मत में धर्मान्तरित किया गया।

इस दौरान हेडमास्टर रतनलाल सरोवर ने बच्चों को ब्रह्मा-विष्णु-महेश को भगवान ना मानने की कसम दिलाई और प्राण प्रतिष्ठा के खिलाफ भी बातें कहीं। सरोवर ने भगवान राम और कृष्ण समेत हिन्दू धर्म के किसी भी देवता में विश्वास ना रखने को लेकर इन्हें कसम दिलवाई और यह भी कहा कि वह लोग यह ना मानें कि कोई भी देवता अवतार थे।

वीडियो में दिखता है कि सरोवर ने हिन्दू धर्म के रीति रिवाजों के खिलाफ लोगों को भड़काया और बौद्ध धर्म की आलोचना ना करने को लेकर उन्हें शपथ दिलवाई। रतनलाल सरोवर जिन बच्चों को शपथ दिलवा रहे हैं, वह सभी नाबालिग हैं। शपथ लेने वालों में कुछ वयस्क भी दिखते हैं। यह जानकारी सामने आई है कि यह पूरा कार्यक्रम तब आयोजित किया गया, जब 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हो रही थी।

यह पूरा कार्यक्रम सरकारी स्कूल में ही आयोजित किया गया। रतनलाल सरोवर का हिन्दू धर्म के खिलाफ शपथ दिलाने और बौद्ध धर्म में धर्मान्तरित करने का यह वीडियो वायरल होने के बाद हिन्दू संगठन भड़क गए और उसके खिलाफ कार्रवाई की माँग की। उन्होंने रतनलाल सरोवर का पुतला भी फूँका।

लोगों के गुस्से के देखते हुए सरकारी शिक्षक रतनलाल सरोवर को शिक्षा विभाग ने निलंबित कर दिया है। उसके खिलाफ वीडियो वायरल होने के बाद मामला भी दर्ज कर लिया गया है और उसे छत्तीसगढ़ पुलिस ने गिरफ्तार भी कर लिया है। पुलिस ने उसके खिलाफ धार्मिक भावनाएँ आहत करने का मामला दर्ज किया है।

‘देशद्रोही… इस्लाम के खिलाफ गया’: प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होने पर इमाम के खिलाफ जारी हुआ फतवा, फोन पर मिल रही धमकी

अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा समारोह (22 जनवरी, 2024) में दिल्ली के एक प्रमुख इमाम उमर अहमद इलियासी ने भाग लिया। इस समारोह में शामिल होने के लिए इलियासी को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट ने आमंत्रित किया था। इलियासी ने इस समारोह में भाग लेकर हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच सद्भाव और भाईचारे की मिसाल पेश की थी।

हालाँकि, इलियासी के इस कदम को कुछ मुस्लिम संगठनों ने पसंद नहीं किया। इन संगठनों ने इलियासी के खिलाफ फतवा जारी कर दिया। वे मानते हैं कि एक मुस्लिम को किसी अन्य धर्म के मंदिर में नहीं जाना चाहिए। इलियासी के राम मंदिर में जाने से इन संगठनों को लगा कि इलियासी ने इस्लाम के सिद्धांतों का उल्लंघन किया है। इन संगठनों का कहना है कि इलियासी का अयोध्या जाना इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होने वाले दिल्ली के प्रमुख इमाम उमर अहमद इलियासी के खिलाफ एक फतवा भी जारी किया गया है। फतवा में इलियासी को ‘देशद्रोही’ बताया गया है और कहा गया है कि उन्होंने इस्लाम के खिलाफ काम किया है।

फतवा में इलियासी को चेतावनी दी गई है कि अगर उन्होंने भविष्य में ऐसा कोई कार्य किया तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इलियासी ने फतवा जारी होने के बाद कहा, “जो लोग मुझसे नफरत करते हैं, उन्हें पाकिस्तान जाना चाहिए। मैं एक भारतीय नागरिक हूँ और मैं अपने देश की संस्कृति और धर्मों का सम्मान करता हूँ।”

अपने खिलाफ जारी फतवा को लेकर उमेर अहमद ने कहा, “मुख्य इमाम के रूप में मुझे श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट से निमंत्रण मिला था। दो दिन तक विचार करने के बाद मैंने अयोध्या जाने का फैसला किया था। फतवा भले ही अब जारी किया गया हो, लेकिन मुझे 22 जनवरी की शाम से धमकी भरे कॉल आ रहे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “मैंने कुछ कॉल रिकॉर्ड किए हैं, जिनमें कॉल करने वालों ने मुझे जान से मारने की धमकियाँ दी हैं। जो लोग मुझे और देश से प्यार करते हैं, वो मेरा समर्थन करेंगे। जो लोग समारोह में शामिल होने की वजह से मुझसे नफरत करते हैं, वो पाकिस्तान चले जाएँ। मैंने प्यार का पैगाम दिया है। कोई गुनाह नहीं किया। मैं माफी नहीं माँगूँगा और न ही इस्तीफा दूँगा। धमकी देने वाले जो चाहें कर सकते हैं।”

वीएचपी ने की फतवे की आलोचना

इस मामले में वीएचपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने इलयासी के खिलाफ फतवा जारी करने को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि उनका राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में शामिल होना कुछ जिहादी कट्टरपंथी मुफ्तियों को रास नहीं आया। उन्होंने कहा कि मुफ्तियों के एक ग्रुप द्वारा उनके विरुद्ध फतवा जारी किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण व निंदनीय दुष्कृत्य है।

कॉन्ग्रेस दफ्तर में चले लात-जूते, दिग्विजय सिंह को गाली: MP में कमलनाथ और दिग्गी राजा के समर्थकों में मारपीट, वीडियो हो गया वायरल

मध्य प्रदेश के भोपाल में कॉन्ग्रेस कार्यालय में दो गुटों के बीच झड़प हो गई। एक गुट दिग्विजय सिंह का समर्थन करता है, जबकि दूसरा गुट कमलनाथ का समर्थन करता है। दोनों गुटों के नेता और कार्यकर्ता एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे थे। झड़प के दौरान दोनों गुटों के नेताओं ने एक-दूसरे को धक्का-मुक्की की और गालियाँ दीं। कुछ नेताओं ने एक-दूसरे पर कुर्सियाँ भी फेंक दीं। इस झड़प का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है।

घटना के अनुसार, राज्य कॉन्ग्रेस के दो वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के समर्थकों के बीच झगड़ा हुआ। झगड़ा इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के नेता एक-दूसरे पर गाली-गलौज करने लगे। झगड़े के दौरान एक नेता ने दूसरे नेता पर कुर्सियाँ फेंकी। जानकारी के मुताबिक, यह घटना सोमवार (29 जनवरी, 2024) को हुई। भोपाल के कॉन्ग्रेस कार्यालय में कॉन्ग्रेस प्रदेश प्रवक्ता शहरयार खान और अनुसूचित जाति विभाग के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार के बीच झड़प हो गई। दोनों नेताओं ने एक दूसरे के साथ धक्का-मुक्की की और जमकर गलियाँ बकी। इस दौरान वहाँ मौजूद लोगों ने इसका वीडियो भी बना लिया।

इस दौरान मौके पर मौजूद दूसरे नेताओं ने दोनों नेताओं को अलग किया। बताया जा रहा है कि पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह को लेकर विवाद हुआ था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनुसूचित जाति विभाग अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार को कमलनाथ समर्थक बताया जाता है वहीं कॉन्ग्रेस प्रवक्ता शहरयार खान को दिग्विजय समर्थक माना जाता है। दोनों के बीच दिग्विजय सिंह को गाली देने को लेकर हुआ। विवाद इतना बढ़ा कि मामला मारपीट तक पहुँच गया।

बीजेपी नेता नरेंद्र सलूजा ने इस घटना का वीडियो एक्स पर शेयर किया है। उन्होंने लिखा, “कमलनाथ जी समर्थक द्वारा दिग्विजय सिंह जी को गाली बकने को लेकर PCC में जमकर चले लात-ठूँसे कुर्सियाँ चली , जमकर एक दूसरे को गालियाँ बकी गईं। बीच-बचाव करने आए कमलनाथ समर्थक एक नेता को भी लात-घूसे पड़े।”

ये घटना मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती है। दिग्विजय सिंह और कमलनाथ दोनों कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और उनके समर्थकों की संख्या भी बड़ी है। ऐसे में इन दोनों नेताओं के बीच मतभेद कॉन्ग्रेस के लिए घातक साबित हो सकते हैं। इस घटना के बाद कॉन्ग्रेस को अपने नेताओं के बीच मतभेदों को दूर करने के लिए कदम उठाने की जरूरत है। अगर कॉन्ग्रेस इस घटना को गंभीरता से नहीं लेती है, तो इससे पार्टी को चुनावों में नुकसान हो सकता है।

रानियों के काट डाले शीश, शिवलिंग पर निशान, कुएँ से निकले नरमुंड… जब राम जन्मभूमि को बचाने के लिए बाबर के बाद औरंगज़ेब से भिड़ा था भीटी राजपरिवार

अयोध्या में सोमवार (22 जनवरी, 2024) को रामलला अपने भव्य मंदिर में स्थापित किए जा चुके हैं। इस अवसर पर जहाँ देश और दुनिया भर के हिन्दू दीवाली जैसा पर्व मना रहे हैं तो वहीं उन बलिदानियों को भी याद किया जा रहा है जिन्होंने 500 साल चले संघर्ष में राम के नाम पर अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। इन बलिदानियों में सबसे पहला नाम भीटी के तत्कालीन राजा महताब सिंह का लिया जाता है। 1526-27 में उन्होंने मंदिर तोड़ने आए मीर बाकी के कई फौजियों को मार कर वीरगति पाई थी।

हालाँकि, इस रामभक्ति का गुस्सा मुगल बादशाहों ने उनकी प्रजा और भीटी के मंदिरों पर उतारा था। मुगल क्रूरता के चिह्न आज भी अम्बेडकरनगर जिले के भीटी तहसील क्षेत्र में जा कर देखे जा सकते हैं।

अपना पूरा जीवन क्रूर और मतांध मुगल बादशाहों के गुणगान में बिताने वाले वामपंथी इतिहासकारों में सम्भवतः अधिकतर भीटी गए भी नहीं होंगे। यहाँ न सिर्फ मंदिरों में घुस कर मूर्तियाँ तोड़ी गईं बल्कि महिलाओं व राजमहल के सेवकों का भी नरसंहार हुआ था। बहुत कम लोगों को यह पता होगा कि बाबर की मौत के सैकड़ों साल बाद औरंगज़ेब ने भीटी को रामभक्तों का गढ़ मान कर हमला किया था। ऑपइंडिया की टीम ने उन इलाकों का दौरा कर के तमाम साक्ष्यों को संकलित किया।

औरंगज़ेब को याद थे अपने पुरखों के दुश्मन

ऑपइंडिया ने सबसे पहले राजा महताब सिंह के महल का दौरा किया। महल में कई स्थानों पर टूट-फूट दिखी। महल के बाहर खड़े कुछ बुजुर्गों ने बताया कि वो मूलतः भीटी के रहने वाले हैं। उन्होंने हमें बताया कि महल के कई हिस्सों में हुई तोड़फोड़ मुगलों के समय की है। राजा महताब सिंह ने बाबर के कई फौजियों को रामजन्मभूमि की रक्षा करते हुए मार गिराया था। जन्मभूमि के लिए 1527 में हुए संघर्ष के लगभग 130 साल बाद बाबर का वंशज औरंगज़ेब गद्दी पर बैठा। उसने मंदिरों को ध्वस्त करना शुरू किया जिसमें पवित्र काशी विश्वनाथ भी शामिल था।

राजकुमार जयदत्त के महल में आज भी मौजूद हैं हमले के निशान

आसपास खड़े बुजुर्गों ने हमें बताया कि उसने उन हिन्दू राजाओं की भी लिस्ट बनाई थी जो उसके पूर्वजों से किसी भी समय काल में लड़े थे। इन नामों में भीटी नरेश महताब सिंह का नाम उसकी हिस्टलिस्ट में टॉप पर था। साल 1669 में जब औरंगज़ेब की फौजें काशी विश्वनाथ मंदिर ध्वस्त करने निकलीं थी तब रास्ते के बनाए नक़्शे में उसने भीटी को भी शामिल किया था। दिल्ली से निकली फौजों ने रास्ते में पड़ने वाले तमाम गाँव लूटे, हिन्दू महिलाओं से बलात्कार किए और मंदिरों को ध्वस्त किया।

झारखंडी महादेव मंदिर भीटी

शिवलिंग पर अभी भी मौजूद हैं चले आरे के निशान

स्थानीय निवासियों ने हमें भीटी महल से लगभग 2 किलोमीटर दूर उमराँवा रोड स्थित झारखंडी महादेव मंदिर के बारे में बताया। हम महादेव मंदिर पहुँचे तो वहाँ कुछ श्रद्धालु और मंदिर के पुजारी मौजूद मिले। मंदिर के पुजारी मुन्ना मिश्रा ने हमें बताया कि लगभग 250 साल पहले वह मंदिर औरंगज़ेब की क्रूरता का शिकार हो चुका है। हमें गर्भगृह ले जाया गया। गर्भगृह में एक अति प्राचीन शिवलिंग है जिसकी उम्र 1000 वर्ष से अधिक बताई जा रही है। शिवलिंग पर कई खरोंच के साथ तमाम जगहों पर काटे जाने के निशान मौजूद हैं। आज भी यह मंदिर स्थानीय हिन्दुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है। महाशिवरात्रि को यहाँ बड़ा मेला लगता है।

इसी शिवलिंग को तोड़ने पहुँचा था औरंगज़ेब

मंदिर के पुजारी ने हमें आगे बताया कि तमाम कोशिशों के बावजूद भी मुगल फ़ौज शिवलिंग को काट नहीं पाई थी। इस से नाराज हो कर औरंगज़ेब के फरमान पर उसके फौजियों ने पूरे मंदिर को अपवित्र किया, दीवारों को गिराया और मूर्तियों को तोड़ डाला। बकौल पुजारी, महज कुछ वर्षों पहले तक औरंगज़ेब के हमले में तोड़ी गई मूर्तियाँ क्षत-विक्षत हालात में मंदिर के एक कोने में पड़ी थीं। पशु-पक्षियों द्वारा उन मूर्तियों पर गंदगी फैलाने से दुखी कुछ ग्रामीणों ने उसका विसर्जन अयोध्या ले जा कर सरयू नदी में कर दिया। इनमें लक्ष्मी, पार्वती और भगवान गणेश की मूर्तियाँ शामिल थीं।

आरे से काटा गया शिवलिंग

डीह पर कत्ल हुआ रानियों का, मार डाले गए सेवक

मंदिर के पुजारी ने दावा किया कि धर्मस्थल को तोड़ कर मुगल फ़ौज पास ही मौजूद गाँव (लगभग 1 किलोमीटर दूर) सोनारपुरवा की तरफ मुड़ी। यहाँ भीटी राजपरिवार के लिए सोने-चाँदी का काम करने वाले स्वर्णकार रहते थे। बताया गया कि तब रानियाँ मुगल फ़ौज से बचने के लिए इसी इलाके में छिपी हुई थीं। यहाँ पहुँच कर औरंगज़ेब के हमराहों ने पहले सोनारपुरवा को लूटा और फिर रानियों का उनके सेवकों सहित सिर काट डाला। बकौल पुजारी, कुछ समय पहले तक डीह की खुदाई में एक कुएँ के अंदर से नरमुंड मिले थे जो उसी औरंगज़ेब के हमले के समय के है।

ऑपइंडिया से बात करते झारखंडी शिव मंदिर के पुजारी और स्थानीय ग्रामीण

चंदापुर डीह पर तोड़ी गईं मूर्तियाँ

झारखंडी मंदिर के पुजारी ने हमसे बातचीत में आगे दावा किया कि वहाँ से लगभग 3 किलोमीटर दूर कभी चंदापुर डीह पर भी हिन्दू देवी-देवता पूजे जाते थे। पहले से ही सारी जानकारी ले कर आई मुगल फ़ौज भीटी महल, झारखंडी मंदिर, सोनारपुरवा के बाद चंदापुर डीह की तरफ मुड़ी। यहाँ मौजूद धर्मस्थलों को तोड़ डाला गया। अभी कुछ ही दिन पहले खेती करने गए कुछ किसानों को मिट्टी में दबी भगवान विष्णु की एक मूर्ति मिली थी। हजारों वर्ष पुरानी यह मूर्ति एक निषाद परिवार में मौजूद बताई जा रही है। इस ऐतिहासिक जगह को अब किसानों को पट्टे पर दे दिया गया है। हालाँकि, दावा किया गया कि अगर उस जगह की विधिवत खुदाई तो तो और भी ऐतिहासिक चीजें मिल सकती हैं।

हमारे पुरखे लड़े और बलिदान हुए

मंदिर पर मौजूद स्थानीय ग्रामीण अजीत कुमार दुबे ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने दावा किया कि उनके बड़े-बुजुर्ग औरंगज़ेब के इस हमले के बारे में बताते हैं। तब न सिर्फ भीटी राजपरिवार के सैनिक बल्कि आसपास के ग्रामीणों ने भी मुगल फ़ौज से मुकाबला किया था। इस मुकाबले में कई ग्रामीण बलिदान हुए थे। तब औरंगज़ेब के भी कई हमलावर फौजी भी मारे गए थे। जिस झारखंडी मंदिर पर हमला हुआ था वहाँ भीटी राजपरिवार अक्सर पूजा-पाठ करने आया करता था। भीटी राजपरिवार ने बिसुही नदी के किनारे भी एक मंदिर बनवाया था।

अजीत ने दावा किया कि औरंगज़ेब के हमले की मुख्य वजह भीटी निवासियों द्वारा सवा सौ साल पहले राम के लिए दिखाया गया प्रेम और अपने राजा के साथ अयोध्या में किया किया गया बलिदान ही था। झारखंडी महादेव मंदिर के पास मौजूद भीटी बाजार, गाँव उमराँवा, दुखी दुबे का पुरवा और दुबाने का पुरवा गाँव के कई श्रद्धालु हमारे इंटरवियु के दौरान मंदिर परिस्सर में आए। उन सभी ने बताया कि मंदिर पर औरंगजेब द्वारा दिखाई गई क्रूरता से आज भी उनके मन में पीड़ा होती है। इस मंदिर के लिए स्थानीय भाजपा नेता ने टिन शेड और श्रद्धालुओं के बैठने आदि की भी व्यवस्था करवाई है।

औरंगजेब की क्रूरता के शिकार झारखंडी मंदिर के नंदी

हालाँकि, औरंगज़ेब के द्वारा दिखाई गई यह क्रूरता भीटी राजपरिवार को विचलित नहीं कर पाई। औरंगज़ेब के हमले के लगभग 200 साल बाद भीटी के राजकुमार जयदत्त सिंह रामजन्मभूमि पर हमला करने निकले जिहादी मौलवी अमीर अली से संघर्ष करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे। इस युद्ध में अमीर अली भी अपने तमाम साथियों सहित ढेर हो गया था।

‘सुक्खे का बदला ले लिया’: लॉरेन्सी बिश्नोई के खास शूटर को गोलियों से भूना फिर जला डाला, बंबीहा गैंग ने दिया वारदात को अंजाम

हरियाणा के सोनीपत जिले में बंबीहा गैंग ने लॉरेंस बिश्नोई के खास शूटर राजन को गोलियों से भूनकर मार डाला। राजन कुरुक्षेत्र का रहने वाला था। उसे लॉरेंस बिश्नोई का खास शूटर माना जाता था। बंबीहा गैंग के शूटर्स ने हरियाणा के यमुना नगर में पहले उसे गोलियाँ मारी, फिर शव को आग के हवाले कर दिया। कहा जा रहा है कि आतंकी गैंगस्टर अर्श डल्ला के इशारे पर इस वारदात को अंजाम दिया गया है।

जानकारी के मुताबिक, यमुनानगर में गुलाबगढ़ नहर के पास जला हुआ शव मिला। युवक के हाथ-पाँव पूरी तरह से बँधे हुए थे। शव पूरी तरह से जला हुआ था, आधा हिस्सा शरीर का गायब था। युवक की पहचान लाडवा के रहने वाले राजन के रूप में हुई है, जो मेहरा गाँव का रहने वाला है। हत्या की सूचना मिलते ही यमुनानगर सदर थाने की पुलिस और फॉरेंसिक टीम समेत सीआईए की टीम मौके पर पहुँची।

बंबीहा गैंग ने कहा है कि यह हत्या लॉरेंस बिश्नोई के गैंग के खिलाफ बदला लेने के लिए की गई है। बंबीहा गैंग ने लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी को चैलेंज करते हुए पोस्ट में लिखा है – सिद्धू मूसेवाला को बिना कसूर के मारा। कनाडा में सुक्खा दुनुके को भरोसे में लेकर उसकी हत्या करवाई। हमने सुक्खा के मर्डर का बदला ले लिया। जल्द सबका हिसाब होगा।

कहा जा रहा है कि विदेश में बैठकर बंबीहा गैंग की कमान संभाल रहे गैंगस्टर लकी पटियाल और कनाडा में बैठे गैंगस्टर और खालिस्तानी आतंकी अर्श डल्ला ने बिश्नोई गैंग के शूटर राजन की हत्या करवाई है। इस गैंग ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कर हत्या करने की जिम्मेदारी भी ली है। राजन को लॉरेंस बिश्नोई का खास शूटर माना जाता था। बंबीहा गैंग के शूटर्स ने हरियाणा के यमुना नगर में पहले उसे गोलियाँ मारी, फिर शव को आग के हवाले कर दिया। कहा जा रहा है कि आतंकी गैंगस्टर अर्श डल्ला के इशारे पर इस वारदात को अंजाम दिया गया है। राजन पर कई हत्याओं और अपहरण के आरोप थे। इस हत्या से दोनों गैंगों के बीच गैंगवार तेज होने की संभावना है।

जालंधर में पकड़े गए थे लॉरेंस बिश्नोई गैंग के दो बदमाश

बता दें कि 20 जनवरी 2024 को जालंधर में लॉरेंस बिश्नोई गैंग के दो बदमाश मुठभेड़ के बाद पकड़े गए थे। ये बदमाश हत्या, सुपारी किलिंग और ड्रग तस्करी की कई घटनाओं में शामिल थे। पकड़े गए बदमाशों मेम पहला नितिन जालंधर का रहने वाला है और दूसरा अश्वनी गांव बुलोवाल का रहने वाला है। ये दोनों बदमाश दो वारदातों को अंजाम देने के लिए अपनी योजना के मुताबिक 2 लोगों की रेकी कर रहे थे और पुलिस ने इसकी जानकारी प्राप्त होने के बाद से अपना जाल बिछा रखा था।

जानकारी के मुताबिक, जालंधर में नाखा वाले बाग नजदीक वडाला चौक पर दो गैंगस्टर और सीआईए स्टाफ के बीच गोलियाँ चली थी। इस दौरान दोनों बदमाश गंभीर रूप से घायल हो गए। काबू किए गए आरोपी हत्या, सुपारी किलिंग और ड्रग तस्करी के मामलों में शामिल थे। वहीं इस मुठभेड़ के दौरान एक पुलिसकर्मी की बाल-बाल जान बच गई। बताया जा रहा है कि गोली उनकी पगड़ी में फँस गई, जिसके चलते वह बच गए और उन्हें कोई चोट नहीं आई।

पुलिस अधिकारी ने बताया था कि ये दोनों अमेरिका में बैठे जसमीत उर्फ लकी के साथ लॉरेंस बिश्नोई के संपर्क में थे। लकी ने ही इन दोनों बदमाशों को जालंधर में किसी व्यक्ति की रेकी करने के लिए भेजा था। बताया जा रहा है कि देर रात से सीआईए स्टाफ की टीम इन आरोपियों की तलाश कर रही थी। आरोपियों से पिस्टल और कार भी पुलिस ने जब्त की थी।

अरब सागर में भारतीय नौसेना का जलवा, ‘INS सुमित्रा’ ने ईरान के जहाज और 17 बंधकों को को बचाया, भाग खड़े हुए समुद्री लुटेरे

भारतीय नौसेना ने अरब सागर में एक और सफल अभियान चलाया है। भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस सुमित्रा ने सोमाली समुद्री लुटेरों से ईरानी जहाज एमवी इमाम को बचाया है। घटना 28 जनवरी, 2024 को हुई थी। ईरानी जहाज एमवी इमाम अरब सागर में सोमालिया के तट के पास से गुजर रहा था। उस समय सोमाली समुद्री लुटेरों ने जहाज पर हमला कर दिया और उसे अपने कब्जे में ले लिया।

सूचना मिलने पर भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस सुमित्रा ने घटनास्थल पर पहुँचकर समुद्री लुटेरों को खदेड़ दिया। जहाज पर सवार सभी 17 नाविक सुरक्षित हैं। यह भारतीय नौसेना का सोमाली समुद्री लुटेरों के खिलाफ लगातार दूसरा सफल अभियान है। इससे पहले, भारतीय नौसेना ने 25 जनवरी, 2024 को भी एक सोमाली समुद्री लुटेरों के जहाज को नष्ट किया था। भारतीय नौसेना अरब सागर में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। भारतीय नौसेना के अभियानों से सोमाली समुद्री लुटेरों के हौसले बुझ रहे हैं।

नौसेना के प्रवक्ता कमांडर विवेक मधवाल ने बताया, “आईएनएस सुमित्रा, सोमालिया के पूर्वी तट और अदन की खाड़ी में समुद्री डकैती विरोधी अभियानों पर थी, तभी एक ईरानी झंडे वाले मछली पकड़ने वाले जहाज की हाईजैकिंग की सूचना मिली। इस आपात सूचना को पाते ही आईएनएस सुमित्रा ने बचाव अभियान शुरू किया। इस जहाज पर 17 नाविक सवार थे, उन्हें बंधक बना लिया गया था। आईएनएस सुमित्रा ने तुरंत कार्रवाई की और अपने हेलीकॉप्टर भेजकर डाकुओं को भागने पर मजबूर कर दिया।’

7 अक्टूबर, 2023 को शुरू हुए इस्राइल-हमास युद्ध के बाद लाल सागर में ईरान समर्थित यमन के हौथी मिलिशिया द्वारा कई व्यापारिक जहाजों को मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया गया है। हौथी विद्रोहियों के लगातार हमलों ने कई शिपिंग कंपनियों को या तो निलंबित करने या निलंबित करने के लिए मजबूर किया है। व्यापारिक जहाजों पर हाल के हमलों के मद्देनजर भारतीय नौसेना ने फ्रंटलाइन विध्वंसक और फ्रिगेट तैनात करके अरब सागर और अदन की खाड़ी में अपने निगरानी तंत्र को काफी बढ़ा दिया है।

यह घटना एक बार फिर से भारतीय नौसेना की समुद्री सुरक्षा में सक्रिय भूमिका को दर्शाती है। भारतीय नौसेना लगातार अरब सागर और हिंद महासागर में गश्त कर रही है ताकि समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और समुद्री लुटेरों से व्यापार जहाजों की रक्षा की जा सके। इस घटना से यह स्पष्ट है कि भारतीय नौसेना समुद्री सुरक्षा में अपनी भूमिका को गंभीरता से ले रही है और समुद्री लुटेरों से व्यापार जहाजों की रक्षा के लिए कटिबद्ध है।

‘अब तक खेल-कूद रहा था, मटन बना रहा था’: लालू की बेटी ने कहा ‘पापा बिना सहारे के चल भी नहीं सकते’ तो लोगों ने दिखा दी तस्वीरें, पूछा – राजनीति करते समय कहाँ गई थी बीमारी?

लालू प्रसाद यादव से पटना में ED की टीम ने पूछताछ की। इस दौरान उन्हें जाँच एजेंसी के दफ्तर में जाना पड़ा। प्रवर्तन निदेशालय ने उनकी बेटी मीसा भारती को पूछताछ के दौरान अंदर आने की इजाजत नहीं दी थी। इस बात से रोहिणी आचार्य काफी खफा दिखीं। उन्होंने बाकायदा धमकी भी दी कि अगर उनके पापा को कुछ हुआ, तो वो किसी को भी नहीं छोड़ेंगी। रोहिणी आचार्य लालू प्रसाद यादव की बेटी हैं और सिंगापुर में रहती हैं। उन्होंने ही लालू प्रसाद यादव को अपनी किडनी दी थी।

सोमवार (29 जनवरी, 2024) को RJD सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को पूछताछ के लिए ईडी ऑफिस बुलाया गया। इस दौरान मीसा भारती को अंदर एंट्री नहीं दी गई, वो लालू यादव के साथ रहना चाहती थी। इस बात पर रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर खूब धमकी बाजी की। रोहिणी ने लिखा, “मेरे पापा को आज कुछ हुआ तो इसका ज़िम्मेदार गिरगिट के साथ साथ CBI, ED और इनके मालिक होंगे। सबको मालूम है पापा की क्या हालात है बिना मदद के चल नहीं सकते फिर भी कितना गिरोगे गीदड़ो, ये गुदड़ी का लाल लालू है। शेर अकेला है कमजोर नहीं। अगर मेरे पापा को खरोंच आई तो मेरे से बुरा कोई नहीं होगा – मेरे शब्दों को नोट कर लो।’

इसके अलावा उन्होंने एक पोस्ट और किया। इसमें उन्होंने लिखा, “सब को मालूम है पापा की क्या हालात है। बिना मदद के चल नहीं सकते, फिर भी कितना गिरोगे गीदड़ो, ये गुदड़ी का लाल लालू है शेर अकेला है कमजोर नहीं।”

उनके इस ट्वीट के बाद लोगों ने लालू यादव को लेकर रोहिणी और उनके पूरे परिवार को एक्सपोज करना शुरू कर दिया। मोनू कुमार लिखते हैं, “बैडमिंटन खेलने में तो कोई दिक्कत नहीं। यादाश्त चली गई है बोल सकती हो लेकिन, अकेले चल नहीं सकते वाला बहाना तो सीबीआई वाले नहीं मानेंगेl”

विक्रांत ने लिखा, “कुछ दिन पहले तो बैडमिंटन खेल रहे थे और खड़ा होकर चंपारण मटन बनाना सीखा रहे थे। आज बिना सहारे नही चल सकते।”

मनीष बघेल नाम के एक्स यूजर ने रोहिणी को जवाब दिया, “जैसे ही सत्ता गई, जेल जाने का समय आया है तो अभी लालू कमजोर और बीमार हो गया? अभी तक तो खूब खेल-कूद रहा था, खूब राजनीति कर रहा था? बड़ी-बड़ी बातें कर रहा था? अब कोर्ट के सामने बीमारी और किडनी का बहाना बनाओगे? खूब बड़े मक्कार और चालबाज़ हो सारा परिवार।”

अभिषेक श्रीवास्तव ने लिखा, “मोहतरमा, जिसको आप शेर कह रही हैं वो सज़ायाफ्ता मुजरिम हैं, चारा घोटाले में सुप्रीम कोर्ट से सजा पाए हुए हैं। आपके हीरो हो सकते हैं लेकिन पूरे बिहार के नहीं, जहाँ तक बात रही बीमार होने की, तो अभी पूरी दुनिया के सामने राहुल गाँधी को मटन बनाना सिखा रहे थे, बैडमिंटन खेल रहे थे।”

बता दें कि सीबीआई ने नौकरी के बदले जमीन घोटाले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, उनकी बेटी मीसा भारती और 13 अन्य के खिलाफ पिछले साल अक्टूबर में आरोप पत्र दायर किया था। सीबीआई के अनुसार, लोगों को पहले रेलवे में ग्रुप डी पदों पर स्थानापन्न के रूप में भर्ती किया गया था और जब उनके परिवारों ने जमीन का सौदा किया तो उन्हें नियमित कर दिया गया। रेलवे में नौकरी के बदले रिश्वत लेकर जमीन लेने के आरोप की जाँच सीबीआई कर रही है। वहीं, ईडी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले की जाँच कर रही है। इस मामले में सीबीआई ने आरोप पत्र भी दाखिल किया था। इसी मामले में ईडी लालू प्रसाद यादव से पूछताछ कर रही है।